दो भारतीय एलपीजी जहाज शिवालिक और नंदा देवी की 16-17 मार्च को मुंद्रा और कांदला पोर्ट पहुंचने की संभावना
नई दिल्ली। फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी वाहक जहाज – शिवालिक और नंदा देवी – लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर गए। यह जहाज 16 और 17 मार्च को मुंद्रा बंदरगाह और कांदला बंदरगाह पर पहुँचेगा। शिवालिक और नंदा देवी के अलावा, भारत आने वाले कई अन्य जहाज खाड़ी क्षेत्र में स्टैंडबाय पर हैं और सुरक्षित तथा निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं।
कल शनिवार को नई दिल्ली में चौथे अंतर-मंत्रालय संवाददाता सम्मेलन में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूदा समुद्री परिस्थितियों और इस क्षेत्र में कार्यरत भारतीय नाविकों तथा जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में मीडिया को जानकारी दी। इस दौरान, बताया गया कि पिछले 24 घंटों में भारतीय नाविकों से जुड़ी कोई नई समुद्री दुर्घटना की सूचना नहीं मिली है। क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं।
वर्तमान में फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले 22 जहाज हैं जिनमें 611 नाविक सवार हैं। पोत परिवहन महानिदेशालय जहाज मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है। पिछले 24 घंटों में, पोत परिवहन महानिदेशालय के नियंत्रण कक्ष ने नाविकों, उनके परिवारों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े हितधारकों से लगभग 312 कॉल और 460 ईमेल का जवाब दिया। पिछले 15 दिनों में, इसने 2,737 कॉल और 4,900 से अधिक ईमेल का जवाब दिया है।
पोत परिवहन महानिदेशालय की त्वरित प्रतिक्रिया टीम चौबीसों घंटे सातों दिन कार्यरत है और पोत परिवहन कंपनियों, दूतावासों, विदेश मंत्रालय और पी एंड आई क्लब के बीमाकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित कर रही है। लगभग 1,300 नाविकों और उनके परिवारों की चिंताओं का समाधान किया जा चुका है। वहीं, पिछले 24 घंटों में, खाड़ी क्षेत्र के हवाई अड्डों और क्षेत्रीय स्थानों से 30 नाविकों को स्वदेश वापस लाया गया है, जिससे स्वदेश वापसी करने वालों की कुल संख्या 253 हो गई है।
सरकार समुद्री व्यापार पर परिचालन संबंधी प्रभाव को कम करने के लिए बंदरगाहों, पोत परिवहन लाइनों और लॉजिस्टिक्स से जुड़े हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रही है। बंदरगाहों को लंगरगाह, बर्थ किराया और भंडारण शुल्क में छूट जैसे राहत उपाय प्रदान करने का परामर्श दिया गया है। कुछ मामलों में पट्टे की अवधि भी बढ़ाई गई है, जिसमें कामराज बंदरगाह पर 25,000 मीट्रिक टन बैराइट्स कार्गो का पट्टा भी शामिल है।
वहीं, ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख बंदरगाह एलपीजी जहाजों को प्राथमिकता दे रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में छह एलपीजी जहाजों को प्रमुख बंदरगाहों पर जगह मिली है। बंदरगाह उन मालवाहक जहाजों के लिए सुरक्षित लंगरगाह क्षेत्र भी उपलब्ध करा रहे हैं जो खाड़ी की ओर जा रहे हैं और वर्तमान में वहां से गुजरने में असमर्थ हैं।
मंत्रालय भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों, पोत परिवहन कंपनियों और अन्य समुद्री हितधारकों के समन्वय से स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। मंत्रालय ने कहा- संघर्ष शुरू होने के बाद से, भारत लगातार तनाव कम करने और संवाद के माध्यम से मुद्दों के समाधान का आह्वान करता रहा है। भारत ने माल और ईंधन के निर्बाध परिवहन को सुनिश्चित करने और ऊर्जा सुविधाओं सहित नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों से बचने के महत्व पर जोर दिया है।
भारत ने खाडी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों, ईरान, अमेरिका और इज़राइल सहित प्रमुख हितधारकों के साथ राजनीतिक और राजनयिक स्तर पर घनिष्ठ संपर्क बनाए रखा है। प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और भारतीय मिशन ऊर्जा सुरक्षा और सुरक्षित समुद्री आवागमन सहित भारत की प्राथमिकताओं को रेखांकित करने के लिए अपने समकक्षों के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं।
इसके साथ ही, संघर्ष के कारण उड़ानों में व्यवधान के मद्देनज़र, ईरानी अधिकारियों ने फंसे हुए ईरानी नागरिकों को वापस लाने के लिए कल रात कोच्चि से एक चार्टर्ड उड़ान की व्यवस्था की। इस उड़ान में 107 चालक दल के सदस्य, 35 ईरानी पर्यटक, 3 राजनयिक और जहाज आईरिस लावन के गैर-आवश्यक चालक दल के सदस्य सवार थे।










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