लिपुलेख , नाथुला के रास्ते होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए 1000 तीर्थयात्रियों का चयन
नयी दिल्ली. लिपुलेख और नाथू ला दर्रों के रास्ते होने वाली आगामी कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए बृहस्पतिवार को एक हजार तीर्थयात्रियों का चयन किया गया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इन तीर्थयात्रियों का चयन कंप्यूटरीकृत ड्रा के माध्यम से किया।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि मानसरोवर यात्रा लिपुलेख और नाथू ला दर्रों के रास्ते होगी।
इस महीने के आरंभ में नेपाल ने भारत और चीन द्वारा काठमांडू से परामर्श किए बिना लिपुलेख दर्रे से वार्षिक तीर्थयात्रा की तैयारियां करने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। नेपाल का दावा है कि यह क्षेत्र उसका है। भारत ने इस क्षेत्र पर नेपाल के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया था।
चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की यात्रा हिंदुओं के साथ-साथ जैन और बौद्ध धर्मावंलिबयों के लिए भी धार्मिक महत्व रखती है। भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों के तहत पिछले वर्ष लगभग पांच साल बाद यह यात्रा फिर शुरू की गयी थी। कोविड-19 महामारी के कारण इसे पहले 2020 में स्थगित कर दिया गया था और बाद में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर दोनों पक्षों के बीच सैन्य गतिरोध के कारण भी इसे स्थगित किया गया। वर्ष 2026 की कैलाश मानसरोवर यात्रा जून में शुरू होगी और अगस्त में समाप्त होगी।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि निष्पक्ष, कंप्यूटर-जनित, यादृच्छिक और लैंगिकता-संतुलित चयन प्रक्रिया के माध्यम से कुल 1,000 तीर्थयात्रियों का चयन किया गया है। चयनित तीर्थयात्री 50-50 यात्रियों के 20 समूहों में लिपुलेख और नाथू ला दर्रों से होकर यात्रा करेंगे।
मंत्रालय ने कहा, ''दोनों ही मार्ग अब वाहन के चलने लायक हैं। उन पर थोड़ी ट्रैकिंग भी करनी होगी।''





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