कैबिनेट ने 10,783 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन रेल परियोजनाओं को दी मंजूरी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने आज रेल मंत्रालय की कुल 10,783 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी। इन परियोजनाओं में शामिल हैं:
खड़गपुर – झारसुगुड़ा (बागडेही) चौथी लाइन
कटनी – पेंड्रा रोड चौथी लाइन
बिलासपुर (उस्लापुर) – पेंड्रा रोड तीसरी लाइन
लाइन क्षमता में वृद्धि से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता बेहतर होगी। ये मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘न्यू इंडिया’ के विजन के अनुरूप हैं, जिसके तहत क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से लोगों को “आत्मनिर्भर” बनाया जाएगा और रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।
इन परियोजनाओं की योजना पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनाई गई है, जिसमें एकीकृत योजना और हितधारकों के साथ परामर्श के माध्यम से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। ये परियोजनाएं लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएंगी।
पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों को कवर करने वाली ये तीन परियोजनाएं भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 656 किलोमीटर की वृद्धि करेंगी। प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 4,790 गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिनकी कुल आबादी करीब 56 लाख है।
प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इनमें तारातारिणी मंदिर, श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर (झारसुगुड़ा के निकट प्राचीन मंदिर), बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, विराटेश्वर मंदिर, अमरकंटक मंदिर, ज्वालेश्वर धाम, अचानकमार टाइगर रिजर्व, खुटाघाट बांध, मल्हार पुरातात्विक स्थल, रतनपुर महामाया मंदिर आदि शामिल हैं।
प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, सीमेंट, लौह एवं इस्पात आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण मार्ग हैं। क्षमता विस्तार के इन कार्यों से अतिरिक्त माल ढुलाई यातायात में 27 एमटीपीए (मिलियन टन प्रति वर्ष) की वृद्धि होने की संभावना है।रेलवे परिवहन का पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल साधन है। इन परियोजनाओं से देश के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, लगभग 12 करोड़ लीटर तेल आयात में कमी आएगी और लगभग 62 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन कम होगा, जो 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।

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