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- - जगत कल्याण विकास संस्थान के बैनर तले सम्मान समारोह आयोजितटी सहदेवभिलाई नगर। जगत कल्याण विकास संस्थान (जेके फाउंडेशन) के बैनर तले मंगलवार को आयोजित एवार्ड फंक्शन में महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनी सौ महिलाओं को नारी शक्ति एवार्ड से सम्मानित किया गया। ओए बिल्डिंग में हुए इस सम्मान समारोह में समाज सेवा, सौंदर्य, उद्यमिता, चिकित्सा, कला, संगीत, ज्योतिष, साहित्य, खेल, तकनीक, योग और महिला एवं बाल विकास जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट और असाधारण योगदान देने वाली हस्तियों को जेके फाउंडेशन की संस्थापक टी जयारेड्डी की अगुवाई में सम्मान पत्र एवं रिटर्न गिफ्ट दिया गया। समारोह में राजयोगिनी आशा दीदी, सांसद पत्नी रजनी बघेल तथा समाजसेवी इंद्रजीत सिंह छोटू विशेष रूप से उपस्थित थे। समारोह का संचालन रेखा कृपा शंकर यादव ने किया।भरतनाट्यम की मनमोहक प्रस्तुतिसमारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। इसके बाद वेदश्री कला संघम की शास्त्रीय नृत्यांगनाओं सुमन महतो, स्नेहा सोनी, दिव्यांशी बोस, अक्षिता जैन, गिरीशा जैन तथा डिंपल राव ने भरतनाट्यम के माध्यम से गणेश वंदना तथा शिव स्तुति प्रस्तुत की। इस मौके पर आशा दीदी ने नारी शक्ति का अभिनंदन करते हुए कहा कि वैसे तो पुरुष के पास भी शक्ति होती है, फिर भी नारी शक्ति क्यों कहते हैं, इसके जवाब में वह स्वयं कहती हैं कि महिलाओं के पास वह शक्ति है, जिससे वे विश्व का नवनिर्माण कर सकती हैं। इसलिए मैं हमेशा कहती हूं कि हम महिलाएं विश्व की निर्माता हैं। समाजसेवी इंद्रजीत सिंह ने नारी शक्तियों को जोड़कर रखने के लिए संस्थापक जयारेड्डी की सराहना करते हुए कहा कि नारी शक्ति किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं है, बल्कि उनसे आगे ही है।सौ महिलाओं को नारी शक्ति एवार्डसम्मान समारोह में सीनियर नर्सिंग ऑफिसर मंजू कुर्रे, मेकअप आर्टिस्ट आयशा फातिमा, सैनिक स्कूल की उप निदेशक अंकिता भारद्वाज, प्रदेश डिफेंस एकेडमी की एमडी हर्षा साहू, समाजसेविका डॉ परी, पंजाबी फोक डान्स की नृत्य निर्देशिका रूबी नागरा, पारस इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन की सीईओ डॉ कविता कुंभज तथा हाउस गार्डन विनर शीला हर्वे ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की। नारी शक्ति एवार्ड पाने वाली महिलाओं में रीता परिहार, निकिता शर्मा, प्रियंका गुप्ता, डॉ नीना महतो, हिना, डॉ उत्तरा रामटेके, ज्योति शांडिल्य, सुषमा मिंज, पूजा महेश, नीतू मंडल, ललिता चोपड़ा, भारती साहू, अर्चना वर्मा, बिंदु सोनी, नंदिनी भुजेल, यशोदा सोनकर, रमा गोर्ती, द्रौपदी रेड्डी, विजय लक्ष्मी, मायादास, वंदना सिंह, पूनम साहू, रानी परवीन, रुचि जैन, एस दिव्या सहित लगभग सौ हस्तियां शामिल हैं।
- - सेवा भवन में प्रबंध निदेशकों ने किया सम्मानितरायपुर ।छ्त्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़ से कार्यपालक निदेशक (वित्त) श्री आलोक सिंह एवं अतिरिक्त महाप्रबंधक (जनसंपर्क) श्री उमेश कुमार मिश्रा सहित कुल 8 अधिकारी-कर्मचारियों को अधिवार्षिकी पूर्ण होने पर सम्मानपूर्वक विदाई दी गई।पॉवर कंपनीज़ के मुख्यालय सेवा भवन में आयेजित समारोह में प्रबंध निदेशक (जनरेशन) श्री एस. के. कटियार, प्रबंध निदेशक (ट्रांसमिशन) श्री राजेश कुमार शुक्ला, प्रबंध निदेशक (डिस्ट्रीब्यूशन) श्री भीम सिंह कंवर तथा निदेशक श्री आरए पाठक ने सेवानिवृत्त ईडी श्री सिंह एवं एजीएम श्री मिश्र को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इन अधिकारियों के समर्पण, उत्कृष्ट कार्यशैली एवं अनुभव ने पॉवर कंपनी के विकास कार्यों को नई दिशा और गति प्रदान की है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि दोनों अधिकारियों ने तीनों कंपनियों में सेवाएं देते हुए महत्वपूर्ण योगदान दिया है।श्री आलोक सिंह अपने सेवाकाल के अनुभव साझा करते हुए कहा कि पावर कंपनी निरंतर प्रगति कर रही है। पिछले कुछ वर्षों से कंपनी में किये गए नवाचार और उपायों से काफी सुधार हुआ है। भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय की 14 वीं रिपोर्ट में डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को ए ग्रेड मिला है।श्री मिश्र ने कहा कि पत्रकारिता से लेकर अविभाजित मध्यप्रदेश विद्युत मंडल से लेकर छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनीज और मुख्यमंत्री सचिवालय में 24 वर्षों तक की यात्रा चुनौतियों से भरी रही, किन्तु सबके सहयोग से सभी कार्य सफलतापूर्वक एवं समयबद्ध रूप से पूर्ण किए जा सके। दोनों अधिकारियों ने प्रबंधन, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।सेवा भवन में आयोजित कार्यक्रम में कार्यपालक निदेशकगण सर्वश्री वी.के. साय, सी.एल. नेताम, एम.एस. चौहान, आर.पी. नामदेव, संदीप मोदी, एम.आर. बागड़े, मनीष गुप्ता उपस्थित रहे।साथ ही मुख्य अभियंता श्री ए.एम. परियल, श्री गिरीश गुप्ता, श्री के.बी. पात्रे, श्रीमती शारदा सोनवानी, श्रीमती चंद्रकला गिडवानी, श्रीमती नंदनी भट्टाचार्य, श्री अब्राहम वर्गीस, श्री संजीव सिंह, श्री संजय शुक्ला, श्री सुभाष शर्मा, श्री डी. नाथ , श्री पी गोसावी तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एच.एल. पंचारी सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।इसके अलावा छत्तीसगढ़ स्टेट पावर में ट्रांसमिशन कंपनी में आयोजित समारोह में अतिरिक्त महाप्रबंधक (जनसंपर्क) श्री उमेश कुमार मिश्रा, लेखा अधिकारी श्री ऋषि कुमार ठाकुर, श्री इम्मानुएल दास, सहायक प्रबंधक श्री राधेश्याम केशरवानी, वरिष्ठ पर्यवेक्षक श्री बिशेश्वर प्रसाद कांत, कनिष्ठ पर्यवेक्षक श्री रामचरण वर्मा तथा लाइन सहायक श्रेणी-1 श्री महेश कुमार वर्मा को भी सम्मानित कर भावभीनी विदाई दी गई। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ प्रकाशन अधिकारी श्री गोविंद पटेल एवं आभार प्रदर्शन अधीक्षण अभियंता श्री पंकज चौधरी ने किया।साथ ही ट्रांसमिशन कंपनी के मान संसाधन विभाग ने एजीएम (पीआर) श्री उमेश कुमार मिश्र एवं सहायक प्रबंधक श्री राधेश्याम केसरवानी को सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्य अभियंता श्री एएम परियल, उप महाप्रबंधक श्रीमती अल्पना शरत तिवारी, श्री पंकज सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन सहायक प्रकाशन अधिकारी श्रीमती अनामिका मंडावी ने किया।सभी सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारियों के स्वस्थ, सुखमय एवं मंगलमय जीवन की कामना की।
- रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने हाटकेश्वर जयंती के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संदेश में कहा है कि हाटकेश्वर जयंती आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक पर्व है, जो हमें धर्म, संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ता है। यह दिवस समाज में सद्भाव, समरसता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। उन्होंने भगवान हाटकेश्वर से प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि यह पर्व सभी के जीवन में शांति और प्रगति लेकर आए।
- रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला परंपरा के संवाहक और ‘नाचा’ के जनक माने जाने वाले स्वर्गीय दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दाऊ मंदराजी ने ‘नाचा’ जैसी लोकविधा को न केवल पुनर्जीवित किया, बल्कि उसे जन-जन तक पहुँचाकर सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम बनाया। उन्होंने गांवों के लोक कलाकारों को संगठित कर ‘नाचा’ को नई पहचान और गरिमा प्रदान की। उनके प्रयासों से यह लोककला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का प्रभावी मंच बनी।उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी ने अपने समर्पण और साधना से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को जीवंत बनाए रखा और उसके संरक्षण के लिए जीवनपर्यंत कार्य किया। उनका योगदान प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लोक कला और शिल्प के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को ‘दाऊ दुलार सिंह मंदराजी सम्मान’ प्रदान किया जाता है, जो उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी का व्यक्तित्व और कृतित्व आज भी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने और लोकसंस्कृति को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।
- -लक्षद्वीप के अब्दुल फताह 7 मीटर की दूरी पार कर स्वर्ण जीतने वाले पहले लंबी कूद खिलाड़ी बने-छत्तीसगढ़ के तिलक बारसेट ने पुरुष 100 मीटर में रजत जीता, महिला फुटबॉल टीम फाइनल में पहुंची-कर्नाटक 19 स्वर्ण, 7 रजत और 7 कांस्य के साथ पदक तालिका में शीर्ष पर बरकराररायपुर /झारखंड के शिव कुमार सोरेन और पृथ्वी उरांव ने मंगलवार को जगदलपुर के क्रीड़ा परिसर मैदान में आयोजित किए जा रहे पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में क्रमशः पुरुष और महिला वर्ग में सबसे तेज धावक बनने का गौरव हासिल किया। वहीं, मेजबान छत्तीसगढ़ के सिद्धार्थ नागेश ने शॉट पुट में स्वर्ण और डिस्कस थ्रो में रजत पदक जीता, जबकि तिलक बारसेट ने पुरुष 100 मीटर में रजत पदक अपने नाम किया।शिव कुमार और पृथ्वी ने अपनी-अपनी 100 मीटर दौड़ की शुरुआत से अंत तक बढ़त बनाए रखते हुए अपने राज्य के लिए स्वर्ण पदक जीते। शिव कुमार ने 10.58 सेकंड का समय लिया, जबकि बारसेट ने 10.87 सेकंड के साथ रजत पदक हासिल किया। ओडिशा के अतिश किंडो (10.91 सेकंड) ने कांस्य पदक जीता।महिला 100 मीटर फाइनल में 16 वर्षीय पृथ्वी ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 12.73 सेकंड में दौड़ पूरी कर स्वर्ण पदक जीता। नागालैंड की रुडुओल्हौनुओ बेल्हो (12.90 सेकंड) और झारखंड की पुतुल बक्शी (13.03 सेकंड) ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक हासिल किए।पृथ्वी ने दौड़ के बाद कहा, मैं पदक जीतने को लेकर आश्वस्त थी क्योंकि मैंने चयन ट्रायल्स में अच्छा प्रदर्शन किया था। आज मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ देने पर ध्यान दिया और खुशी है कि मैंने अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय बनाया।मेजबान छत्तीसगढ़ के लिए सिद्धार्थ नागेश ने दिन की शुरुआत पुरुष डिस्कस थ्रो में 35.56 मीटर के साथ रजत पदक जीतकर की। गुजरात के दानिश मकवाना (44.83 मीटर) ने स्वर्ण, जबकि ओडिशा के चंद्राय मुर्मू (33.97 मीटर) ने कांस्य पदक जीता।शाम के सत्र में सिद्धार्थ ने एक कदम आगे बढ़ते हुए 13.52 मीटर के थ्रो के साथ शॉट पुट में स्वर्ण पदक हासिल किया। दानिश मकवाना (13.04 मीटर) को रजत मिला।मेजबान छत्तीसगढ़ ने महिला फुटबॉल के सेमीफाइनल में अरुणाचल प्रदेश को पेनल्टी शूटआउट में हराकर फाइनल में जगह बनाई। फाइनल में उसका सामना झारखंड से होगा जिसने गुजरात को 9-0 हराया। छत्तीसगढ़ अब पदक तालिका में 2 स्वर्ण, 7 रजत और 4 कांस्य के साथ 10वें स्थान पर है।कर्नाटक 19 स्वर्ण, 7 रजत और 7 कांस्य के साथ पदक तालिका में शीर्ष पर बना हुआ है, जबकि ओडिशा 13 स्वर्ण, 8 रजत और 15 कांस्य के साथ दूसरे स्थान पर है। झारखंड ने महिला 4x100 मीटर और पुरुष 77 किग्रा ग्रीको रोमन में स्वर्ण जोड़कर 7 स्वर्ण, 2 रजत और 5 कांस्य के साथ तीसरे स्थान पर छलांग लगाई। अंबिकापुर में अभिषेक मुंडा ने हिमाचल प्रदेश के अरफान को हराकर स्वर्ण जीता।पिछली शाम जगदलपुर में असामयिक बारिश के कारण एथलेटिक्स सत्र रद्द होने के बाद सुबह का सत्र बेहद व्यस्त रहा, जिसमें सात फाइनल हुए और लंबी कूद का फाइनल दर्शकों के लिए रोमांचक साबित हुआ।लक्षद्वीप के 26 वर्षीय अब्दुल फताह ने अंतिम प्रयास में 7.03 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता और 7 मीटर पार करने वाले अपने क्षेत्र के पहले खिलाड़ी बने। ओडिशा के भीमा सरदार (6.96 मीटर) ने रजत और जीवन बिलुंग (6.95 मीटर) ने कांस्य पदक हासिल किया।पुरुष 400 मीटर फाइनल में कांटे की टक्कर देखने को मिली, जहां ओडिशा के नोबल कुमार किसन की आखिरी क्षणों की डाइव भी उन्हें जीत नहीं दिला सकी। गुजरात के संतोषभाई गणवित ने 49.332 सेकंड में स्वर्ण जीता, जबकि नोबल 49.335 सेकंड के साथ रजत पर रहे। कर्नाटक के रामू (49.60 सेकंड) ने कांस्य पदक जीता।गोवा की मानसी कुंकलका ने 9.72 मीटर के थ्रो के साथ महिला शॉट पुट में स्वर्ण जीतकर अपने राज्य का खाता खोला। बिहार की अनामिका गोंड (9.50 मीटर) और मेघालय की मेलिबाडक्रो (9.43 मीटर) ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक जीते।100 मीटर: स्वर्ण – पृथ्वी उरांव (झारखंड) 12.73 सेकंड; रजत – रुडुओल्हौनुओ बेल्हो (नागालैंड) 12.90 सेकंड; कांस्य – पुतुल बक्शी (झारखंड) 13.03 सेकंड100 मीटर दौड़: स्वर्ण – बसंती माझी (ओडिशा) 16.20 सेकंड; रजत – कविता टाडिंगी (ओडिशा) 16.81 सेकंड; कांस्य – राठवा सोमसिंह (गुजरात) 16.94 सेकंड400 मीटर: स्वर्ण – रीथुश्री (कर्नाटक) 58.63 सेकंड; रजत – आदित्य केएम (केरल) 1:00.07; कांस्य – चिंतामणि टुटी (झारखंड) 1:00.764x100 मीटर: स्वर्ण – झारखंड 50.31 सेकंड; रजत – ओडिशा 51.11 सेकंड; कांस्य – 54.00 सेकंडडिस्कस थ्रो: स्वर्ण – मुस्कान लोबी (गुजरात) 32.29 मीटर; रजत – अपिक्षा गामित (गुजरात) 31.52 मीटर; कांस्य – कृष्णामोनी पेगु (असम) 29.95 मीटरशॉट पुट: स्वर्ण – मानसी कुंकलका (गोवा) 9.72 मीटर; रजत – अनामिका गोंड (बिहार) 9.50 मीटर; कांस्य – मेलिबाडक्रो (मेघालय) 9.43 मीटरपुरुष100 मीटर: स्वर्ण – शिव कुमार सोरेन (झारखंड) 10.58 सेकंड; रजत – तिलक बारसेट (छत्तीसगढ़) 10.87 सेकंड; कांस्य – अतिश किंडो (ओडिशा) 10.91 सेकंड110 मीटर बाधा दौड़: स्वर्ण – ट्रोइलुक्या मोसरोन्ग (असम) 15.85 सेकंड; रजत – सापावत दत्तू (तेलंगाना) 16.65 सेकंड; कांस्य – हरि मोहन त्रिपुरा (त्रिपुरा) 16.82 सेकंड400 मीटर: स्वर्ण – संतोषभाई गणवित (गुजरात) 49.332 सेकंड; रजत – नोबल कुमार किसन (ओडिशा) 49.335 सेकंड; कांस्य – रामू (कर्नाटक) 49.60 सेकंड4x100 मीटर: स्वर्ण – ओडिशा 41.97 सेकंड; रजत – झारखंड 42.29 सेकंड; कांस्य – गुजरात 43.44 सेकंडलंबी कूद: स्वर्ण – अब्दुल फताह (लक्षद्वीप) 7.03 मीटर; रजत – भीमा सरदार (ओडिशा) 6.96 मीटर; कांस्य – जीवन बिलुंग (ओडिशा) 6.95 मीटरहाई जंप: स्वर्ण – सागर एक्का (ओडिशा) 1.94 मीटर; रजत – वैभव गांवकर (गोवा) 1.91 मीटर; कांस्य – हेमंत खड़िया (ओडिशा) 1.80 मीटरडिस्कस थ्रो: स्वर्ण – दानिश मकवाना (गुजरात) 44.83 मीटर; रजत – सिद्धार्थ नागेश (छत्तीसगढ़) 35.56 मीटर; कांस्य – चंद्राय मुर्मू (ओडिशा) 33.97 मीटरशॉट पुट: स्वर्ण – सिद्धार्थ नागेश (छत्तीसगढ़) 13.52 मीटर; रजत – दानिश मकवाना (गुजरात) 13.04 मीटर; कांस्य – मानस प्रतिम राभा (असम) 12.20 मीटरफुटबॉल (सेमीफाइनल)महिला: छत्तीसगढ़ ने अरुणाचल प्रदेश को 2-2 (पेनल्टी में 4-3) से हराया; झारखंड ने गुजरात को 9-0 से हरायाकुश्ती महिला57 किग्रा: स्वर्ण – नागालक्ष्मी (तेलंगाना); रजत – शालिना सिद्धी (कर्नाटक); कांस्य – अमूल्या कुंडार्गी (कर्नाटक)68 किग्रा: स्वर्ण – प्रिंसिता सिद्धी (कर्नाटक); रजत – एलिजाबेथ रोहलुपुई (मिजोरम); कांस्य – लीलाबेन चावड़ा (गुजरात), बलकेश कुमारी मीणा (राजस्थान)पुरुष57 किग्रा फ्रीस्टाइल: स्वर्ण – अजीत भुयान (ओडिशा); रजत – परस बिडकर (महाराष्ट्र); कांस्य – विक्की उइके (महाराष्ट्र), अब्दुल खान (हिमाचल प्रदेश)86 किग्रा फ्रीस्टाइल: स्वर्ण – सुमित ठाकुर (हिमाचल प्रदेश); रजत – बहादुर खान (जम्मू-कश्मीर); कांस्य – शब्बीर खान (हिमाचल प्रदेश)77 किग्रा ग्रीको रोमन: स्वर्ण – अभिषेक मुंडा (झारखंड); रजत – अरफान (हिमाचल प्रदेश); कांस्य – चरण जाधव (तेलंगाना), इनजामाम (जम्मू-कश्मीर)130 किग्रा ग्रीको रोमन: स्वर्ण – शिवा भालावी (मध्य प्रदेश); रजत – दिलेर खान (जम्मू-कश्मीर); कांस्य – तारा राजू (तेलंगाना)
- -लोक-आस्था, परंपरा और विकास का संगम बना कुँवरगढ़ महोत्सवरायपुर /छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विकास के संगम का सशक्त प्रतीक ‘कुँवरगढ़ महोत्सव’ का आज धरसींवा में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा भव्य शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने 136 करोड़ रुपये से अधिक लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करते हुए क्षेत्र को बड़ी सौगात दी। उन्होंने ग्राम कूंरा का नाम उसके ऐतिहासिक गौरव के अनुरूप ‘कुँवरगढ़’ करने की महत्वपूर्ण घोषणा की, जिससे क्षेत्रवासियों में उत्साह का वातावरण देखने को मिला।मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि कुँवरगढ़ महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक-आस्था, परंपरा और गौरवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और उसे नई पहचान देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है और बस्तर, सरगुजा, कोरिया तथा सिरपुर महोत्सव की श्रृंखला में अब कुँवरगढ़ महोत्सव भी एक विशिष्ट पहचान बनाएगा। इस दौरान उन्होंने नवनिर्मित तहसील कार्यालय का लोकार्पण करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र के नागरिकों को राजस्व संबंधी कार्यों में त्वरित और बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी।मुख्यमंत्री श्री साय ने क्षेत्र के विकास को नई गति देने के उद्देश्य से गौरवपथ निर्माण, रानीसागर तालाब के सौंदर्यीकरण, पुलिस चौकी की स्थापना, खारून नदी में एनीकट निर्माण, खेल मैदान के उन्नयन तथा रायपुर के टेकारी-नयापारा से बड़े नाला मार्ग के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा, आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा और आमजन के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आएगा।उल्लेखनीय है कि धरसींवा क्षेत्र का प्राचीन ग्राम कूंरा, जिसे अब ‘कुँवरगढ़’ के रूप में पुनर्स्थापित किया जा रहा है, अपने भीतर गौरवशाली इतिहास समेटे हुए है। यह क्षेत्र आदिवासी शासक राजा कुँवर सिंह गोंड के साम्राज्य का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, जिनकी वीरता और विरासत आज भी यहां के जनजीवन में जीवंत है। उत्तर में माता कंकालिन, दक्षिण में माता चंडी, पश्चिम में माता महामाया और पूर्व में भगवान चतुर्भुजी की उपस्थिति इस क्षेत्र को धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। लगभग 12 हजार की आबादी वाला यह क्षेत्र अपनी परंपरा और विकास के संतुलन के साथ आगे बढ़ रहा है।महोत्सव में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए गए हैं तथा स्थानीय लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बनी हुई हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं। उन्होंने जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि अनेक क्रांतियों और परंपराओं की साक्षी रही है। उन्होंने लोगों को नवा रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह जनजातीय संग्रहालय के अवलोकन के लिए भी प्रेरित किया।मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की पावन धरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रभु श्री राम का ननिहाल है और वनवास काल का अधिकांश समय उन्होंने यहीं व्यतीत किया।दंडकारण्य, माता शबरी का आश्रम, माता कौशल्या की नगरी तथा गुरु घासीदास जी और गहिरा गुरु जैसे संतों की तपोभूमि होने के कारण यह प्रदेश आध्यात्मिक रूप से अत्यंत समृद्ध है। उन्होंने आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास का स्मरण करते हुए कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ अनेक क्रांतियां इस धरती पर हुई हैं।मुख्यमंत्री ने धरसींवा विधायक श्री अनुज शर्मा की इस पहल की सराहना करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने दो वर्षों के कार्यकाल में किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है और विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।कार्यक्रम में धरसींवा विधायक श्री अनुज शर्मा, विधायक श्री मोतीलाल साहू, सुश्री मोना सेन, श्री देवजीभाई पटेल, श्री अंजय शुक्ला, संभागायुक्त श्री महादेव कावरे, कलेक्टर श्री गौरव सिंह सहित जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे।
- - मुख्यमंत्री भगवान महावीर जनकल्याणक महोत्सव 2026 में हुए शामिलरायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर के एमजी रोड स्थित दादाबाड़ी तीर्थ में आयोजित भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव 2026 में शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री साय ने दादाबाड़ी परिसर स्थित जिनमंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। उन्होंने समाज सेवा, पत्रकारिता, शिक्षा और उच्च शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को “जैन रत्न अलंकरण” से सम्मानित किया और कहा कि ऐसे सम्मान समाज में सकारात्मक परिवर्तन और प्रेरणा का स्रोत बनते हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान महावीर स्वामी का सत्य और अहिंसा का संदेश समस्त मानवता के लिए पथ प्रदर्शक है, जो हमें त्याग, तपस्या, करुणा और आत्मसंयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि आज एक सुखद संयोग है कि भगवान महावीर जयंती के पावन अवसर पर देश नक्सलवाद के अंत की दिशा में निर्णायक उपलब्धि की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास में नक्सलवाद सबसे बड़ी बाधा रहा है और बस्तर जैसे प्राकृतिक संपदा से समृद्ध क्षेत्र को लंबे समय तक विकास से वंचित रहना पड़ा।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प और प्रभावी रणनीति के कारण आज नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता प्राप्त हुई है। उन्होंने भगवान महावीर से प्रार्थना की कि छत्तीसगढ़ में शांति और विकास का यह वातावरण निरंतर बना रहे और भविष्य में कभी भी हिंसा का यह दौर वापस न आए।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने सुशासन के संकल्प के साथ तेज गति से कार्य करते हुए विकास के अनेक आयाम स्थापित किए हैं। प्रधानमंत्री की गारंटियों को पूरा करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से जरूरतमंदों को पक्के आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं, किसानों के हित में किए गए वादों को निभाया जा रहा है, महतारी वंदन योजना के तहत लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ा गया है तथा रामलला दर्शन योजना के माध्यम से श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम के दर्शन का अवसर प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को विकसित और समृद्ध राज्य के रूप में स्थापित करना है।मुख्यमंत्री ने जैन समाज की सराहना करते हुए कहा कि समाज सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य और परमार्थ के क्षेत्र में जैन समाज का योगदान अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने, प्रेरित करने और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।कार्यक्रम में विधायक श्री राजेश मूणत, श्री लोकेश कावड़िया, भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव समिति के अध्यक्ष श्री चंद्रेश शाह, श्री विकास सेठिया, श्री आनंद जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के सदस्य एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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तालाबों को भरने गंगरेल का पट खोलने ज्ञापन
रायपुर। गर्मी बढ़ने के साथ - साथ ग्रामीण इलाकों में निस्तारी पानी का संकट गहराने लगा है । तालाब सूख चले हैं और भूगर्भीय जल स्त्रोत गिरने से ट्यूबवेलों /हेडपंपो ने पेयजल की भी समस्या खड़ी करना शुरू कर दिया है । इसके परिपेक्ष्य में महानदी मुख्य नहर पर चल रहे रेलवे क्रासिंग निर्माण कार्य को रूकवा गंगरेल का पट खोल प्राथमिकता के आधार पर तालाबों को भरने पानी देने की मांग मुख्यमंत्री विष्णु देव साय व मुख्य सचिव विकासशील को मेल से ज्ञापन भेज की गयी है । साथ ही क्षेत्रीय सांसद बृजमोहन अग्रवाल को भी ज्ञापन की प्रति भेज संसदीय क्षेत्र के ग्रामों में निस्तारी पानी की समस्या के मद्देनजर इस संबंध में अविलंब आवश्यक पहल का आग्रह किया गया है ।
रायपुर जिला जल उपभोक्ता संस्था संघ के अध्यक्ष रहे भूपेन्द्र शर्मा ने प्रेषित ज्ञापन में जानकारी दी है कि बैशाख व जेठ मास में भीषण गर्मी पड़ती है और बैशाख माह शुरू होने में महज 02 दिन बाकी है । गहराते निस्तारी पानी व भूगर्भीय जल स्त्रोत के नीचे चले जाने की वजह से बढ़ रहे पेयजल की संकट के मद्देनजर अविलंब गंगरेल का पट खुलवा तालाबों को भरवाने का आग्रह किया गया है ताकि निस्तारी पानी की समस्या दूर होने के साथ - साथ भूगर्भीय जल स्त्रोत बढ़ने से पेयजल की समस्या भी कमतर हो सके । ज्ञापन में महानदी मुख्य नहर पर चल रहे रेलवे क्रासिंग निर्माण कार्य को फिलहाल रूकवा प्राथमिकता के आधार पर निस्तारी पानी दिलवाने का आग्रह किया गया है । बंगोली सिंचाई उपसंभाग के अधीन आने वाले सिंचाई पंचायतों के अध्यक्ष रहे थानसिंह साहू , गोविंद चंद्राकर , चिंताराम वर्मा , प्रहलाद चंद्राकर , मनमोहन गुप्ता , भारतेन्दु साहू , धनीराम साहू , हिरेश चंद्राकर , तुलाराम चन्द्राकार आदि ने भी तालाबों को भरने अविलंब गंगरेल से पानी देने की मांग की है । - -प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्के घरों के सपनों के साथ आजीविका, सम्मान और आत्मनिर्भरता भी हो रहे सुनिश्चितरायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत चालू वित्तीय वर्ष में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल करते हुए पूरे देश में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। राज्य ने न केवल सर्वाधिक आवास निर्माण पूर्ण कर राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान प्राप्त किया है, बल्कि मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है। इस उपलब्धि पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने हर्ष जताते हुए प्रदेशवासियों एवं हितग्राहियों को शुभकामनाएँ दी।उन्होंने बताया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत छत्तीसगढ़ ने 'एसएनए स्पर्श' के माध्यम से देश में सर्वाधिक व्यय कर उत्कृष्ट वित्तीय प्रबंधन का भी उदाहरण प्रस्तुत किया है। वर्ष 2016 में योजना के प्रारंभ से अब तक एक ही वित्तीय वर्ष में सर्वाधिक आवास निर्माण का रिकॉर्ड भी इसी वर्ष दर्ज किया गया है, जो राज्य की कार्यकुशलता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बताया कि आवास से आजीविका’ के अभिनव प्रयास के अंतर्गत निर्माण सामग्री की आपूर्ति से हजारों महिलाओं को रोजगार मिला है। जिसमें रोजगार पाकर 9000 से अधिक बिहान दीदियाँ “लखपति दीदी” बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। इसके साथ ही इस वर्ष 6000 से अधिक राजमिस्त्रियों को आरसेटी के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जो देश में सर्वाधिक है।उल्लेखनीय है कि इन प्रशिक्षित राजमिस्त्रियों में 1400 महिलाएँ एवं 400 से अधिक आत्मसमर्पित नक्सली भी शामिल हैं, जो मुख्यधारा में जुड़कर विकास की नई कहानी लिख रहे हैं। पीएम आवास ग्रामीण के हितग्राहियों को स्थायी आजीविका से जोड़ने हेतु महात्मा गांधी नरेगा के माध्यम से बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत कार्य भी कराए गए हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ग्रामीण विकास और गरीबों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए सतत प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से न केवल पक्के घरों का सपना साकार हो रहा है, बल्कि लोगों की आजीविका, सम्मान और आत्मनिर्भरता भी सुनिश्चित हो रही है। राज्य आगे भी इसी गति और प्रतिबद्धता के साथ विकास की नई ऊँचाइयों को छुएगा।
- -कप्तान किरण ने छत्तीसगढ़ को फुटबॉल फाइनल में पहुंचाया-मेजबान महिलाएँ हॉकी में कांस्य के लिए भिड़ेंगींरायपुर । कप्तान किरण पिस्दा की शानदार दोहरी भूमिका से प्रेरित होकर छत्तीसगढ़ की महिला फुटबॉल टीम ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के पहले संस्करण के फाइनल में जगह बना ली है, जबकि राज्य की महिला हॉकी टीम ने भी कांस्य पदक मुकाबले में पहुंचकर अपनी उम्मीदें बरकरार रखी हैं। भारतीय अन्तर्राष्ट्रीय खिलाड़ी किरण ने मंगलवार को स्वामी विवेकानंद कोटा स्टेडियम में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ खेले गए सेमीफाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए मैच की स्टार रहीं। उनके हरफनमौला खेल की बदौलत छत्तीसगढ़ ने निर्धारित समय के बाद 2-2 की बराबरी रहने पर पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से रोमांचक जीत दर्ज की। टूर्नामेंट में अब तक करीब 20 गोल कर चुकीं किरण ने एक बार फिर आक्रामक भूमिका निभाते हुए 18वें मिनट में गोल कर मेजबान टीम को 2-0 की बढ़त दिलाई।हालांकि अरुणाचल प्रदेश ने 41वें और 86वें मिनट में गोल कर स्कोर 2-2 से बराबर कर दिया और मैच को शूटआउट में पहुंचा दिया। इसके बाद किरण ने साहसिक फैसला लेते हुए नियमित गोलकीपर योगिता की जगह खुद दस्ताने पहनकर गोलपोस्ट संभालने का निर्णय लिया। उनका यह निर्णय कप्तानी की मिसाल बन गया, जब उन्होंने दो शानदार बचाव किए और खुद एक पेनल्टी भी सफलतापूर्वक गोल में बदली, जिससे टीम को फाइनल का टिकट मिला। अंतिम पेनल्टी के गोल के साथ ही मेजबान टीम ने मैदान पर जश्न मनाना शुरू कर दिया।अपने प्रदर्शन पर किरण ने साई मीडिया से कहा, “मैं अपनी टीम को हर हाल में फाइनल में पहुंचाना चाहती थी। मुझे गोलकीपर के रूप में अच्छा करने का भरोसा था। मैंने पहले भी अपनी राज्य टीम के लिए यह भूमिका निभाई है। मेरी मेहनत सफल रही और हम फाइनल में हैं। यह हम सभी के लिए गर्व का क्षण है।” अब फाइनल में छत्तीसगढ़ का सामना झारखंड और गुजरात के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से होगा। उल्लेखनीय है कि ग्रुप चरण में मेजबान टीम गुजरात को 2-1 से हरा चुकी है, जिसमें किरण ने भी एक गोल किया था।वहीं, इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम में चल रही प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ की महिला हॉकी टीम 1 अप्रैल को पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के खिलाफ कांस्य पदक के मुकाबले में उतरेगी। सेमीफाइनल में मेजबान टीम को ओडिशा से 1-5 से हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन अब कप्तान कुजूर अश्विन के मार्गदर्शन में टीम पदक जीतने के लिए तैयार है। हॉकी का फाइनल भी 1 अप्रैल को झारखंड और ओडिशा के बीच खेला जाएगा।
- -सूरज नासिक में रहते हैं और ट्रेनिंग का खर्च हर महीने 2-3 दौड़ों में भाग लेकर मिलने वाली इनामी राशि से निकालते हैं-खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में भाग लेने के लिए उन्हें एक साथी धावक से स्पाइक्स उधार लेने पड़ेरायपुर । नासिक के एथलेटिक्स ट्रैक पर सूरज माशी और उनके कुछ साथी अक्सर अपने सीनियर खिलाड़ियों को ट्रेनिंग करते हुए बड़े ध्यान से देखते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि वे सिर्फ देख नहीं रहे होते, बल्कि हर छोटी-बड़ी चीज को समझकर उसे अपनी ट्रेनिंग में लागू करने की कोशिश करते हैं। सूरज उन आदिवासी खिलाड़ियों के समूह का हिस्सा हैं, जो हर महीने कोच की फीस नहीं दे सकते और अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए जो भी मदद मिलती है, उसी पर निर्भर रहते हैं। दौड़ना ही उनका सबसे बड़ा हुनर है, जिसने उन्हें यहां तक पहुंचाया है और जो एक दिन उनकी जिंदगी बदल सकता है।सूरज नासिक में रहते हैं और ट्रेनिंग का खर्च हर महीने 2-3 दौड़ों में भाग लेकर मिलने वाली इनामी राशि से निकालते हैंसूरज ने कहा, “कोचिंग फीस 4000 रुपये प्रति माह है, जिसे मैं वहन नहीं कर सकता। मैं नासिक में किराये पर रहकर पढ़ाई करता हूं और किराया मुझे महाराष्ट्र और गुजरात में दौड़ों में भाग लेकर मिलने वाली इनामी राशि से ही देना पड़ता है। इसलिए मैं खुद ही ट्रेनिंग करता हूं और जब कहीं अटकता हूं तो सीनियर्स या ट्राइबल विभाग के कोच से सलाह लेता हूं।” यही सूरज खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में पुरुष 5000 मीटर दौड़ में रजत पदक जीतने में सफल रहे।सूरज हर महीने सिर्फ 300 रुपये देकर ट्रेनिंग सुविधा का उपयोग करते हैं और सेकेंड हैंड जूते और स्पाइक्स में अभ्यास करते हैं। उनके स्पाइक्स काफी घिस चुके थे, इसलिए उन्हें इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए एक साथी धावक से स्पाइक्स उधार लेने पड़े। पालघर जिले के मोखाडा तालुका के एक छोटे से गांव से आने वाले सूरज की जिंदगी संघर्ष और आत्मनिर्भरता की कहानी है। वारली जनजाति से ताल्लुक रखने वाले सूरज, जो एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे हैं और चार बहनों के बाद पैदा हुए पहले बेटे हैं, बचपन से ही आत्मनिर्भर रहे हैं। सरकारी आश्रम शाला में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने दौड़ना शुरू किया।स्कूल के एक खेल आयोजन के दौरान उन्हें दौड़ने का शौक लगा और तब से यह उनके जीवन का सहारा बन गया। जब सूरज 10वीं कक्षा में थे, उनकी मां घर में गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गईं और अब चल-फिर नहीं पातीं। पिछले साल उनकी एक बड़ी बहन का निधन हो गया और उनके तीन छोटे भाई उनसे मार्गदर्शन और सहारे की उम्मीद रखते हैं। स्कूल पूरा करने के बाद सूरज पढ़ाई और खेल को आगे बढ़ाने के लिए नासिक चले गए, लेकिन शहर में रहना और परिवार का सहारा बनना उनके लिए लगातार चुनौती बना हुआ है। उन्होंने कहा, “मैं स्थानीय प्रतियोगिताओं और क्रॉस-कंट्री दौड़ों में भाग लेकर हर महीने करीब 3000 से 5000 रुपये कमा लेता हूं। उसी में से कुछ पैसे बचाकर मैं अपने पिता को भेजता हूं और अपनी पढ़ाई, ट्रेनिंग और बाकी जरूरतें पूरी करता हूं।”इस साल जून में 19 साल के होने वाले सूरज ने 18 साल की उम्र के बाद पुलिस विभाग में नौकरी पाने की भी कोशिश की। उन्होंने ज्यादातर शारीरिक परीक्षण पास कर लिए, लेकिन शॉट पुट में निर्धारित दूरी पूरी नहीं कर पाने के कारण चयन से चूक गए। हालांकि नौकरी पाना अभी भी उनकी प्राथमिकता है, लेकिन सूरज को भरोसा है कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में उनके प्रदर्शन से उनकी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आएगा। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार खेलो इंडिया गेम्स के पदक विजेताओं को नकद पुरस्कार भी देती है।
- रायपुर। बस्तर जिले धरमपुरा जगदलपुर स्थित क्रीड़ा परिसर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 के अंतर्गत मंगलवार को एथलेटिक्स की स्पर्धाओं ने दर्शकों में भारी उत्साह भर दिया। जनजातीय युवाओं के कौशल और शारीरिक दक्षता को समर्पित इस आयोजन के दूसरे दिन प्रातः कालीन विभिन्न स्पर्धाओं में रोमांच का माहौल रहा। पुरुष वर्ग की बाधा दौड़ में असम के खिलाड़ी त्रैलोक्य मसरोंग ने अपनी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए मात्र 15.85 सेकंड में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। स्पर्धा में तेलंगाना के सपावत दत्तू ने 16.65 सेकंड के साथ रजत और त्रिपुरा के हरि मोहन त्रिपुरा ने 16.82 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक अपने नाम किया।इसके अलावा पुरुषों की 100 और 400 मीटर दौड़ में काँटे की टक्कर देखने को मिली। 400 मीटर दौड़ में गुजरात के एथलीट संतोषभाई उत्तमभाई गनवित ने 49.332 सेकंड में दौड़ पूरी कर शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि ओडिशा के नोबल कुमार किसान महज 49.335 सेकंड के मामूली अंतर से पिछड़कर दूसरे स्थान पर रहे, तीसरे स्थान पर कर्नाटक राज्य के रामू रहे। 100 मीटर दौड़ में झारखंड के शिव कुमार सोरेन 10.58 मीटर में स्वर्ण, छत्तीसगढ़ राज्य के तिलक बर्सेल 10.87 के साथ दूसरे (रजत) और ओड़िसा के अतीश किंडो ने 10.91 के साथ तीसरा स्थान हासिल किया ।इसी तरह पुरुषों की लंबी कूद में लक्षद्वीप के अब्दुल फतह एनएम ने 7.03 मीटर की शानदार छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता, तो वहीं ओडिशा के भीमा सरदार और जीवन मुक्ति बिलुंग ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक पर कब्जा जमाया।मैदानी स्पर्धाओं में शक्ति प्रदर्शन का दौर जारी रहा, जहाँ पुरुष वर्ग की तवा फेंक (डिस्कस थ्रो) स्पर्धा में गुजरात के मकवाना दानिश दिलीपभाई ने 44.83 मीटर की दूरी तय कर स्वर्ण पदक जीता। छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण तब आया जब स्थानीय खिलाड़ी सिद्धार्थ नागेश ने 35.56 के स्कोर के साथ रजत पदक जीतकर घरेलू दर्शकों का उत्साह बढ़ा दिया। तीसरे स्थान पर ओड़िसा के चंद्रय मुर्मू रहे ।महिला वर्ग में भी देश की बेटियों ने अदम्य साहस का परिचय दिया। 100 मीटर दौड़ में झारखंड की पृथ्वी ओरव ने 12.73 सेकंड और नागालैंड की रुदुओलहौनुओं बेहो ने 16.81 सेकंड का समय निकालकरदूसरे स्थान हासिल किए, जबकि झारखंड की पुतुल बास्की ने कांस्य पदक जीता।
- -उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने दी ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाईरायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में मिली ऐतिहासिक सफलता के बीच आज मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से उनके नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर श्री शर्मा ने मुख्यमंत्री को नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में मिली इस बड़ी उपलब्धि पर बधाई देते हुए पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ अब विकास, विश्वास और समृद्धि के नए युग की ओर अग्रसर होगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद वर्षों तक प्रदेश की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बना रहा और विशेष रूप से बस्तर अंचल लंबे समय तक लाल आतंक के साये में रहा।मुख्यमंत्री ने कहा कि अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और नक्सल प्रभावित सभी क्षेत्रों में विकास की मुख्यधारा मजबूत हो रही है। बस्तर सहित पूरे प्रदेश में शांति, सुरक्षा और विकास का नया वातावरण तैयार हो रहा है, जिससे आमजन के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, स्पष्ट नीति और प्रभावी रणनीति को दिया। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में भयमुक्त और सुरक्षित छत्तीसगढ़ का सपना आज साकार हो रहा है।मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी शहादत ने इस सफलता की नींव रखी है। उन्होंने सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके अथक प्रयासों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि नक्सलमुक्त वातावरण में अब छत्तीसगढ़ तेज गति से विकास के नए सोपान गढ़ेगा और देश के अग्रणी राज्यों में अपनी सशक्त पहचान स्थापित करेगा।
- रायपुर । भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष राज्यपाल रमेन डेका की उपस्थिति में आज लोक भवन, में एनएमडीसी लिमिटेड और छत्तीसगढ़ रेड क्रॉस सोसाइटी के बीच ‘लैब ऑन व्हील्स’ एम्बुलेंस उपलब्ध कराने के लिए मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) पर हस्ताक्षर किए गए। यह पहल कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के अंतर्गत जशपुर जिले के दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से की गई है।इस परियोजना के तहत एक अत्याधुनिक मोबाइल लैब एम्बुलेंस जशपुर जिले के लिए उपलब्ध कराई जाएगी, जिसकी अनुमानित लागत 1 करोड़ 16 लाख 82 हजार रुपये है। इस मोबाइल प्रयोगशाला के माध्यम से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में लोगों को विभिन्न जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे समय पर निदान और उपचार सुनिश्चित हो सकेगा।मेमोरेंडम आफ एग्रीमेंट एनएमडीसी लिमिटेड, छत्तीसगढ़ रेड क्रॉस सोसाइटी और रेड क्रॉस जशपुर शाखा के बीच किया गया। इस पहल का उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना और जरूरतमंद लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है।राज्यपाल रमेन डेका ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ‘लैब ऑन व्हील्स’ जैसी सुविधाएं विशेष रूप से आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल से जरूरतमंद लोगों को समय पर जांच और उपचार उपलब्ध होगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा। इस अवसर पर संबंधित अधिकारियों एवं रेड क्रॉस सोसाइटी के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
- रायपुर। राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज लोक भवन में रेडियो संगवारी की टीम ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान टीम ने रेडियो संगवारी की परिकल्पना, उद्देश्यों तथा आगामी योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।टीम के संस्थापक श्री राहुल शर्मा ने बताया कि रेडियो संगवारी टीम द्वारा प्रदेश की समृद्ध लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है।राज्यपाल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध है और ऐसे प्रयास इसे संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने रेडियो संगवारी टीम को शुभकामनाएं देते हुए भविष्य के लिए मार्गदर्शन भी प्रदान किया। इस अवसर पर रेडियो संगवारी टीम के डॉ. हेमंत सिरमौर, सुश्री श्रीया सिरमौर, श्री शिवनंदन सरोज, तिलका साहू सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
- रायपुर । छत्तीसगढ़ के इतिहास में 31 मार्च 2026 का दिन एक अहम मोड़ के रूप में दर्ज हो गया है. वर्षों से हिंसा, डर और बंदूक के साये में जी रहे दण्डकारण्य क्षेत्र ने अब शांति और भरोसे की ओर कदम बढ़ाया है. नक्सल उन्मूलन की दिशा में बड़ी सफलता तब सामने आई, जब 25 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए मुख्यधारा में वापसी की. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे न केवल आत्मसमर्पण, बल्कि “विश्वास की जीत” बताया है.25 माओवादी कैडरों की मुख्यधारा में वापसीदण्डकारण्य क्षेत्र में चल रहे “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के तहत 25 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है. इनमें 12 महिलाएं भी शामिल हैं. ये सभी माओवादी लंबे समय से जंगलों में सक्रिय थे और अलग‑अलग हिंसक गतिविधियों में शामिल रहे हैं. आत्मसमर्पण के साथ ही इन कैडरों ने बंदूक छोड़कर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा जताया है.सीएम विष्णुदेव साय ने बताया ऐतिहासिक दिनमुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज का दिन दण्डकारण्य और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक है. उन्होंने कहा कि वर्षों से चली आ रही हिंसा और डर की विचारधारा का आज अंत होता दिख रहा है. यह लोकतंत्र, जन‑विश्वास और सरकार की नीति की जीत है. मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश के लिए नई शुरुआत बताया.1.47 करोड़ के इनामी नक्सलियों ने किया सरेंडरमुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि आत्मसमर्पण करने वाले 25 माओवादी कैडरों पर कुल 1 करोड़ 47 लाख रुपये का इनाम घोषित था. इनका मुख्यधारा में लौटना इस बात का संकेत है कि अब भटके हुए लोगों का भरोसा सरकार की पुनर्वास नीति और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर बढ़ रहा है.93 हथियार और 14 करोड़ से ज्यादा की बरामदगीसुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई और सरकार की समन्वित रणनीति के चलते माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है. इस कार्रवाई के दौरान 93 घातक हथियारों के साथ कुल ₹14.06 करोड़ की बरामदगी हुई है. यह बरामदगी साफ तौर पर दिखाती है कि नक्सली तंत्र अब कमजोर पड़ चुका है.दण्डकारण्य में लौट रहा शांति का भरोसामुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह घटना केवल आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भरोसे और शांति की वापसी है. दण्डकारण्य क्षेत्र अब धीरे‑धीरे सामान्य जीवन, स्थिरता और विकास की ओर बढ़ रहा है. यहां के लोग हिंसा नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की चाह रख रहे हैं.इतिहास में याद रखा जाएगा 31 मार्च 2026मुख्यमंत्री ने कहा कि 31 मार्च 2026 का दिन छत्तीसगढ़ के इतिहास में उस तारीख के रूप में याद रखा जाएगा, जब नक्सलवाद के अंत की दिशा में निर्णायक परिणाम सामने आए. यह वह दिन है, जब प्रदेश ने हिंसा के अंधेरे से निकलकर एक नए और शांतिपूर्ण युग की ओर कदम बढ़ाया.
- -पूना मारगेम से बदली जिंदगीरायपुर । बस्तर अंचल में शांति और विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी से जुड़े 5 माओवादियों ने मंगलवार को समाज की मुख्यधारा में वापसी कर ली। इनमें 4 महिला माओवादी शामिल हैं। सभी पर कुल 9 लाख रुपये का इनाम घोषित था।पुलिस लाइन कारली में आयोजित आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास कार्यक्रम के दौरान इन कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने का संकल्प लिया। यह पहल जिले में संचालित पूना मारगेम - पुनर्वास से पुनर्जीवन अभियान के तहत की गई, जो अब नक्सल प्रभावित युवाओं के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही है। आत्मसमर्पण करने वालों में पश्चिम बस्तर डिवीजन के एसीएम सोमे कड़ती सहित पार्टी सदस्य लखमा ओयाम, सरिता पोडियाम, जोगी कलमू और मोटी ओयाम शामिल हैं। ये सभी भैरमगढ़ और गंगालूर एरिया कमेटियों से जुड़े हुए थे।आत्मसमर्पण के बाद कैडरों से मिली अहम सूचनाओं के आधार पर सुरक्षा बलों ने विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए हैं। इनमें 8 एसएलआर रायफल, 3 इंसास रायफल, 1 कार्बाइन, 1 .303 रायफल और 5 बीजीएल लॉन्चर सहित कुल 40 घातक हथियार शामिल हैं। इसे नक्सल विरोधी अभियानों में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे माओवादी संगठन की सैन्य क्षमता को गंभीर आघात पहुंचा है।पूना मारगेम से बदल रही तस्वीरदंतेवाड़ा जिले में वर्ष 2024 से अब तक 607 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। यह आंकड़ा बताता है कि पुनर्वास नीति और भरोसेमंद माहौल के चलते नक्सल प्रभावित युवा अब हिंसा छोड़कर विकास की राह अपना रहे हैं। वहीं संयुक्त नक्सल उन्मूलन अभियानों में अब तक 92 माओवादियों की गिरफ्तारी और 54 माओवादियों के मुठभेड़ में न्यूट्रलाइज किए जाने की कार्रवाई भी की गई है। दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जैसे सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयासों से लगातार दबाव बनाया जा रहा है।बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक ने कहा कि पूना मारगेम पहल का उद्देश्य हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले युवाओं को पुनर्वास, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है। यह अभियान न केवल आत्मसमर्पण को प्रोत्साहित कर रहा है, बल्कि बस्तर में स्थायी शांति, विकास और विश्वास का वातावरण भी मजबूत कर रहा है। कार्यक्रम में जिला प्रशासन, पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं का स्वागत करते हुए उन्हें समाज में पुनर्स्थापित करने का भरोसा दिलाया।
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खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026
रायपुर/ खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के तहत आज सरगुजा जिला मुख्यालय अम्बिकापुर के गांधी स्टेडियम में पिछले चार दिनों से जारी कुश्ती स्पर्धा का शानदार समापन आज हुआ। प्रथम ऐतिहासिक संस्करण में कर्नाटक की बेटी मनीषा जोंस सिद्दी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए कुश्ती के 76 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया है। अभावों के बीच पली-बढ़ी मनीषा की यह जीत केवल एक पदक नहीं, बल्कि उनके वर्षों के कठिन परिश्रम और अटूट संकल्प की विजय है।
पिता के निधन के बाद माँ बनीं संबल
मनीषा का खेल जीवन चुनौतियों से भरा रहा है। उन्होंने बताया कि जब वह पाँचवीं कक्षा में थीं, तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। इसके बावजूद, उनकी माँ ने हार नहीं मानी और अकेले दिन-रात मेहनत करके मनीषा के सपनों को पंख दिए। पूर्व में कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सिल्वर और ब्रोंज मेडल जीत चुकीं मनीषा के करियर का यह पहला गोल्ड मेडल है।
स्पोर्ट्स हॉस्टल और परिवार का मिला साथ
अपनी सफलता को साझा करते हुए मनीषा ने कर्नाटक के डिवाइस स्पोर्ट्स हॉस्टल की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, हॉस्टल के कोच और साथी खिलाड़ियों ने मुझे हमेशा प्रेरित किया। मेरा बड़ा भाई मेरा मार्गदर्शक रहा है, वहीं छोटा भाई, जो खुद एक राज्य स्तरीय एथलीट है, वह मेरी सबसे बड़ी हिम्मत है।
ट्राइबल गेम्स- एक नई पहचान का मंच
मनीषा ने केंद्र सरकार और आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे मंच से जनजातीय समुदाय के बच्चों को अपनी विशेष पहचान के साथ आगे बढ़ने का मौका मिला है। उन्होंने यहाँ की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा मैच के दौरान सुरक्षा, भोजन और यातायात की व्यवस्था बेहतरीन थी। छत्तीसगढ़ के लोगों का व्यवहार और यहाँ का माहौल खिलाड़ियों के लिए अत्यंत सुखद है।
लक्ष्य-अंतर्राष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराना
स्वर्ण पदक की चमक के साथ मनीषा की निगाहें अब भविष्य की बड़ी चुनौतियों पर हैं। छत्तीसगढ़ की धरती पर मिली इस सफलता से उत्साहित मनीषा अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी में जुटी हैं। उनका अंतिम लक्ष्य विश्व पटल पर स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाना है। -
बस्तर में विश्वास की जीत : दण्डकारण्य में 25 माओवादी कैडरों की मुख्यधारा में वापसी
रायपुर/छत्तीसगढ़ में आज 31 मार्च 2026 का दिन वामपंथी उग्रवाद के अंत के ऐतिहासिक और निर्णायक दिन के रूप में दर्ज हो रहा है। दण्डकारण्य क्षेत्र में “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के अंतर्गत 25 माओवादी कैडरों (12 महिला सहित) ने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है। यह घटना नक्सल आतंक के समापन की दिशा में एक स्पष्ट और ठोस उपलब्धि के रूप में सामने आई है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज का दिन दण्डकारण्य और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है, जब वर्षों से चली आ रही हिंसा और भय की विचारधारा ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने कहा कि यह विश्वास, लोकतंत्र और जनशक्ति की जीत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले इन 25 माओवादी कैडरों पर कुल ₹1.47 करोड़ का इनाम घोषित था। इनका मुख्यधारा में लौटना इस बात का प्रमाण है कि अब भटके हुए लोगों का भरोसा लोकतांत्रिक व्यवस्था और सरकार की पुनर्वास नीति पर मजबूत हुआ है।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई और सरकार की समन्वित रणनीति के परिणामस्वरूप माओवादी तंत्र निर्णायक रूप से कमजोर हुआ है। इसी क्रम में 93 घातक हथियारों के साथ ₹14.06 करोड़ की बड़ी बरामदगी भी हुई है, जो नक्सली नेटवर्क की कमजोर होती स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि विश्वास की वापसी है। दण्डकारण्य क्षेत्र आज शांति, स्थिरता और सामान्य जीवन की ओर लौटने के इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बन रहा है।
उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 का यह दिन छत्तीसगढ़ के इतिहास में उस तिथि के रूप में याद किया जाएगा, जब नक्सलवाद के अंत की दिशा में निर्णायक परिणाम सामने आया और प्रदेश ने एक नए युग की दहलीज पर कदम रखा है। -
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने हाटकेश्वर जयंती के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संदेश में कहा है कि हाटकेश्वर जयंती आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक पर्व है, जो हमें धर्म, संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ता है। यह दिवस समाज में सद्भाव, समरसता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
उन्होंने भगवान हाटकेश्वर से प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि यह पर्व सभी के जीवन में शांति और प्रगति लेकर आए। -
रायपुर/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला परंपरा के संवाहक और ‘नाचा’ के जनक माने जाने वाले स्वर्गीय दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दाऊ मंदराजी ने ‘नाचा’ जैसी लोकविधा को न केवल पुनर्जीवित किया, बल्कि उसे जन-जन तक पहुँचाकर सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम बनाया। उन्होंने गांवों के लोक कलाकारों को संगठित कर ‘नाचा’ को नई पहचान और गरिमा प्रदान की। उनके प्रयासों से यह लोककला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का प्रभावी मंच बनी।
उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी ने अपने समर्पण और साधना से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को जीवंत बनाए रखा और उसके संरक्षण के लिए जीवनपर्यंत कार्य किया। उनका योगदान प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लोक कला और शिल्प के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को ‘दाऊ दुलार सिंह मंदराजी सम्मान’ प्रदान किया जाता है, जो उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी का व्यक्तित्व और कृतित्व आज भी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने और लोकसंस्कृति को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है। -
धरसींवा में आधुनिक तहसील कार्यालय का लोकार्पण
66.20 लाख की लागत से बना सर्वसुविधायुक्त भवन, राजस्व सेवाओं में आएगी तेजी और पारदर्शिता
रायपुर/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रायपुर जिले के धरसींवा में नवनिर्मित तहसील कार्यालय का लोकार्पण किया। यह पहल प्रशासनिक सेवाओं को आमजन के और अधिक निकट, सुलभ और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सुशासन का मूल उद्देश्य यही है कि नागरिकों को उनकी जरूरत की सेवाएं समय पर, सरल और पारदर्शी तरीके से मिलें। धरसींवा का यह नया तहसील कार्यालय इसी संकल्प को साकार करता है। उन्होंने कहा कि इस भवन के शुरू होने से क्षेत्र के नागरिकों को राजस्व संबंधी कार्यों में अब अधिक सुविधा और तेजी मिलेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करते हुए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि हर नागरिक को बिना किसी अनावश्यक परेशानी के बेहतर प्रशासनिक सुविधा उपलब्ध हो।
नवनिर्मित तहसील कार्यालय में नायब नाजिर कक्ष, रिकॉर्ड रूम, माल जमार, नकल शाखा, कानूनगो कक्ष, भुइयां एवं भू-अभिलेख शाखा जैसी आवश्यक इकाइयों के साथ-साथ लोक सेवा केंद्र और आधार केंद्र की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्वच्छ पेयजल सहित अन्य बुनियादी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
उल्लेखनीय है कि इस आधुनिक तहसील कार्यालय का निर्माण 66.20 लाख रुपये की लागत से किया गया है, जो क्षेत्र के प्रशासनिक ढांचे को मजबूती प्रदान करेगा और सेवाओं के बेहतर क्रियान्वयन में सहायक सिद्ध होगा।
इस अवसर पर विधायक श्री अनुज शर्मा, संभागायुक्त श्री महादेव कावरे, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, नगर निगम आयुक्त श्री विश्वदीप, जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिश्वरंजन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे। -
बिलासपुर/मल्हार महोत्सव 2026 के दूसरे अंतिम दिन नितिन दुबे सुपरस्टार नाइट में छत्तीसगढ़ के मेलोडी किंग और सीजी रत्न नितिन दुबे ने अपनी अद्भुत लाइव प्रस्तुति से पूरे स्टेज को मंत्रमुग्ध कर दिया l मल्हार के ऐतिहासिक मेला मैदान में हजारों की संख्या में महिला एवं पुरुष दर्शक रात 12 बजे तक नितिन दुबे को सुनने के लिए इन्तेज़ार करते रहे। जैसे ही नितिन दुबे ने माइक संभाले, पूरा माहौल जसगीत और छत्तीसगढ़ी धुनों से गूंज उठा। उनके सुपरहिट गीत — रायगढ़ वाले राजा, गोंदा तोला रे, चंदा रे, नील परी एवं अन्य लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी नगमों पर दर्शक पूरी तरह मंत्रमुग्ध होकर थिरकने लगे।
स्टेज पर उनकी आवाज की मिठास और परफॉर्मेंस की ऊर्जा देखकर लोग अंतिम तक और एक बार की मांग करते रहे। नितिन दुबे की इस शानदार प्रस्तुति को देखकर सभी कह रहे हैं ये तो असली सुपरस्टार नाइट थी l यह मल्हार महोत्सव 2026 का सबसे यादगार और मंत्रमुग्ध करने वाला पल बन गया। इस अवसर पर मल्हार महोत्सव के मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री एवं सांसदश्री तोखन साहू ने श्री दुबे को शानदार प्रस्तुति देने के लिए बधाई दी और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया l नितिन दुबे ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति को आधुनिक टच के साथ खूबसूरती से पेश किया। उनकी मीठी आवाज ने हर किसी के दिल को छू लिया। पूरा कार्यक्रम यू ट्यूब पर नितिन दुबे सुपर स्टार नाइट एवं मल्हार महोत्सव 2026 चैनल पर लाइव प्रसारित हुआ -
भिलाई/नगर पालिक निगम भिलाई क्षेत्र अंतर्गत पूर्व अपोलो वर्तमान हाई टेक अस्पताल का पार्ट पेमेंट राशि 612751 रु का चेक प्राप्त कर जमा कराया गया।
सूर्या मॉल से सम्पत्ति कर राशि 44,05,315 रु का चेक प्राप्त कर जमा कराया गया। -
बिलासपुर/छत्तीसगढ़ शासन वित्त विभाग और संचालक, कोष एवं लेखा के निर्देशानुसार एवं कलेक्टर संजय अग्रवाल के मार्गदर्शन में बिलासपुर जिले में ई कोष पोर्टल के अंतर्गत ओटीसी ई चालान प्रणाली कल 01 अप्रैल 2026 से लागू की जा रही है।
वरिष्ठ कोषालय अधिकारी, बिलासपुर बसंत गुलेरी ने जानकारी देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ शासन वित्त विभाग द्वारा राजस्व प्राप्तियों की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी एवं पूर्णतः डिजिटल बनाने के उद्देश्य से भौतिक चालान प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है। अब सभी प्रकार के चालान ई कोष के ई चालान पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन जनरेट किए जाएंगे। इसके अंतर्गत जमाकर्ता ऑनलाइन चालान तैयार कर संबंधित बैंक में जाकर राशि जमा कर सकेंगे, जिससे चालान की जानकारी स्वतः ऑनलाइन कोषालय प्रणाली में उपलब्ध हो जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक चालान पर रेफरेंस नंबर (TRN) जनरेट होगा, जिससे चालान की ट्रैकिंग एवं सत्यापन सरल हो जाएगा। चालान जनरेट होने के पश्चात 7 दिवस के भीतर राशि जमा करना अनिवार्य होगा, अन्यथा चालान स्वतः निरस्त हो जाएगा। एक चालान में अधिकतम 5 हेड तक राशि दर्शाई जा सकती है। जमाकर्ताओं को ई चालान पोर्टल पर पंजीयन कर आवश्यक विवरण जैसे हेड ऑफ अकाउंट, राशि आदि भरकर ओटीसी विकल्प का चयन करना होगा एवं चालान जनरेट करना होगा। चालान का प्रिंट लेकर संबंधित बैंक शाखा में राशि जमा की जा सकेगी। इस संबंध में जिला कोषालय कार्यालय एवं बैंकों में विस्तृत प्रक्रिया से संबंधित बैनर/सूचनाएं प्रदर्शित की गई हैं, जिससे आम नागरिकों एवं जमाकर्ताओं को प्रक्रिया की जानकारी आसानी से प्राप्त हो सके। साथ ही, यदि किसी भी प्रकार की समस्या या तकनीकी कठिनाई आती है, तो संबंधित व्यक्ति जिला कोषालय कार्यालय, बिलासपुर से कार्यालयीन समय में संपर्क कर सकते हैं। इस नई व्यवस्था के लागू होने से राजस्व संग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, समय की बचत होगी, मैन्युअल त्रुटियों में कमी आएगी तथा कोषालय को रियल-टाइम डेटा उपलब्ध हो सकेगा। जिला प्रशासन द्वारा सभी विभागों, डीडीओ तथा आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे इस नई डिजिटल व्यवस्था का अधिकतम उपयोग करें एवं निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करें।
















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