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- -अबूझमाड़ एफपीओ की बैठक में कस्टम हायरिंग सेंटर शुरू करने का निर्णयरायपुर। छत्तीसगढ़ के आकांक्षी जिला नारायणपुर के अंतर्गत ग्राम गुरिया में 'अबूझमाड़ प्रोडक्शन समृद्धि महिला प्रोड्यूसर कंपनी' (एफपीओ) की समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में नारायणपुर की ग्रामीण महिलाओं ने आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए क्षेत्र में कृषि एवं आजीविका गतिविधियों को नए आयाम देने की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है।बैठक में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान/एनआरएलएम), नीति आयोग तथा पीपीआईए फेलो की संयुक्त टीम ने हिस्सा लिया। इस दौरान एफपीओ की वर्तमान गतिविधियों, उपलब्धियों और भविष्य की चुनौतियों पर गहन मंथन किया गया। संगठन निदेशक के नेतृत्व में महिलाओं ने कृषि विज्ञान केंद्र नारायणपुर के तकनीकी सहयोग से क्षेत्र में जल्द ही कस्टम हायरिंग सेंटर संचालित करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया। इस केंद्र के माध्यम से स्थानीय किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र आसानी से किराए पर उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे खेती की लागत में कमी आएगी। आगामी दिनों में एफपीओ के माध्यम से फसल उत्पादन वृद्धि, वैज्ञानिक उर्वरक प्रबंधन और *मिलेट (श्रीअन्न) प्रोसेसिंग जैसे उन्नत कार्यों को भी धरातल पर उतारा जाएगा।* एनआरएलएम (बिहान) की टीम ने महिला एफपीओ को वनोपज एवं कृषि उत्पादों के संग्रहण, विपणन (मार्केटिंग) और नए किसानों को संगठन से जोड़ने में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया हैl अधिक से अधिक किसानों की क्षमता विकास के लिए कृषि विज्ञान केंद्र में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।इससे क्षेत्र के किसानों को न केवल आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी मिलेगी, बल्कि उन्हें सीधे बाजार से जोड़कर उपज का सही मूल्य भी दिलाया जाएगा।बैठक में जानकारी दी गई कि छत्तीसगढ़ के वनमंत्री श्री केदार कश्यप के विशेष प्रयासों से भारतीय मिलेट अनुसंधान संस्थान (आईआईएमआर), हैदराबाद के सहयोग से इस महिला एफपीओ को हाल ही में ट्रैक्टर, ट्रॉली, कल्टीवेटर और हैरो समेत कई महत्वपूर्ण कृषि उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इन आधुनिक संसाधनों के आने से क्षेत्र में सामूहिक व्यावसायिक गतिविधियों, परिवहन व्यवस्था और कृषि कार्यों को एक नई गति मिलेगी, जो सीधे तौर पर महिलाओं की आय में वृद्धि करने और संगठन को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध होगी।
- -ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग और वैज्ञानिक खेती ने बढ़ाई आय-स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहीं ग्रामीण महिलाएंरायपुर। छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन की दिशा में स्व-सहायता समूहों की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। राज्य शासन की विभिन्न आजीविका उन्मुख पहलों और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं, बल्कि अपने परिवार और समाज के लिए प्रेरणास्रोत भी बन रही हैं। ऐसी ही प्रेरक कहानी बलरामपुर जिले के राधाकृष्णनगर की श्रीमती लतिका सिदार की है, जिन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर अपनी पहचान एक सफल कृषक और लखपति दीदी के रूप में स्थापित की है।राधाकृष्ण स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद श्रीमती लतिका के जीवन में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हुई। समूह के माध्यम से उन्हें सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (सीआरपी) के रूप में कार्य करने का अवसर मिला, जिससे उनके ज्ञान और कौशल का विस्तार हुआ। विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर उन्होंने आधुनिक खेती, उद्यमिता विकास और आजीविका संवर्धन से जुड़ी नई तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।प्रशिक्षण के दौरान श्रीमती लतिका ने ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग और बागवानी आधारित खेती की उन्नत विधियों को सीखा और उन्हें अपनी एक एकड़ कृषि भूमि पर लागू किया। स्व-सहायता समूह से प्राप्त ऋण की सहायता से उन्होंने खेत में ड्रिप इरिगेशन सिस्टम स्थापित किया तथा मल्चिंग तकनीक का उपयोग शुरू किया। इसके परिणामस्वरूप मिर्च, बरबट्टी सहित अन्य बागवानी फसलों का उत्पादन बढ़ा, सिंचाई जल की बचत हुई और खेती की लागत में भी उल्लेखनीय कमी आई।आधुनिक कृषि तकनीकों के सफल उपयोग से श्रीमती लतिका की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। पहले की तुलना में उनकी आय दोगुनी हो गई और कृषि तथा अन्य आजीविका गतिविधियों से उनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक पहुंच गई। आज वे अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा और भविष्य के लिए भी निवेश कर रही हैं।श्रीमती लतिका का कहना है कि स्व-सहायता समूह ने उन्हें आत्मविश्वास और आगे बढ़ने का अवसर दिया। उनका सपना अपनी खेती को पूरी तरह जैविक स्वरूप देना है, ताकि गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दिया जा सके। श्रीमती लतिका सिदार की सफलता यह दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे सकती हैं। आज छत्तीसगढ़ की हजारों महिलाएं स्व-सहायता समूहों के माध्यम से स्वरोजगार, कृषि, पशुपालन और लघु उद्यमों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। लतिका की यह उपलब्धि महिला सशक्तिकरण, आधुनिक कृषि और सामुदायिक विकास के समन्वय का एक प्रेरक उदाहरण है।
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-80 से अधिक प्रजातियों की पहचान, वैद्यों और छात्रों ने ली भागीदारी
रायपुर ।बलौदाबाजार- भाटापारा जिले के वनमंडल बलौदाबाजार के देवपुर परिक्षेत्र में शुक्रवार को औषधीय वनस्पतियों की पहचान और महत्व पर केंद्रित एक दिवसीय बॉटनाइजेशन कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पांडेय के मार्गदर्शन में आयोजित की गई।कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वन क्षेत्र में उपलब्ध औषधीय पौधों की पहचान कराना, छाल, पत्ती, तना, जड़, फल एवं फूल के आधार पर वर्गीकरण सिखाना तथा उनके औषधीय महत्व की जानकारी देना था।कार्यक्रम में अर्जुन, आंवला, बहेड़ा, बेल, काली मुसली, हाथीपांव, दूधी, भुईनीम, सतावर, खरहर, ठेलका, नरनारी, गरुड़ सहित लगभग 80 औषधीय वनस्पति प्रजातियों की पहचान कराई गई। विशेषज्ञों ने इन प्रजातियों के पर्यावरणीय व्यवहार, संरक्षण की आवश्यकता और फल, फूल, पत्ती, जड़ आदि के माध्यम से विभिन्न रोगों के उपचार में उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। स्वस्थ, निरोग और दीर्घायु जीवनशैली के लिए प्रकृति आधारित ज्ञान के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।कार्यशाला में वनमंडल बलौदाबाजार, वनमंडल कवर्धा और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही पारंपरिक वनौषधीय ज्ञान रखने वाले वैद्यगण, वन प्रबंधन समिति के सदस्य, बारनवापारा के गाइड्स और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। वन मंडल अधिकारी बलौदाबाजार धम्मशील गणवीर ने कहा कि कार्यशाला का मकसद केवल औषधीय ज्ञान का प्रसार नहीं था, इसका उद्देश्य इस ज्ञान को समाज के अधिक लोगों तक पहुंचाकर वृक्षों एवं वनस्पतियों के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण में जनसहभागिता को प्रोत्साहित करना भी है। - -नारायणपुर के 39 पहुंचविहीन केंद्रों में 3 महीने का खाद्यान्न एडवांस स्टोर-कलेक्टर का बड़ा फैसला: जिला अधिकारियों को सौंपी मॉनिटरिंग की कमान, दुर्गम गांवों में खुद पहुंच रहे अफसररायपुर । छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में मानसून के दौरान सुदूर और दुर्गम इलाकों का संपर्क जिला मुख्यालयों से कट जाता है। भारी बारिश और उफनते नदी-नालों के बीच दूरस्थ ग्रामीणों को राशन की किल्लत न हो, इसके लिए नारायणपुर जिला प्रशासन ने एक बेहद संवेदनशील और मुस्तैद कदम उठाया है। जिले की सभी 39 पहुंचविहीन शासकीय उचित मूल्य दुकानों (Ration Shops) में आगामी तीन महीनों जुलाई से सितंबर के लिए राशन का शत-प्रतिशत अग्रिम भंडारण पूरा कर लिया है। इस व्यवस्था से बारिश के दिनों में परिवहन बाधित होने पर भी अंदरूनी और पहुंचविहीन गांवों के हितग्राहियों को एकमुश्त 'बरसाती कोटा' मिल सकेगा।कलेक्टर ने इस पूरी मुहिम को केवल कागजों तक सीमित न रखकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने भंडारित खाद्यान्न के भौतिक सत्यापन और नियमित मॉनिटरिंग के लिए दुकानवार जिला स्तरीय अधिकारियों की ड्यूटी लगाई है। ये अधिकारी खुद घने जंगलों और दुर्गम रास्तों को पार कर इन राशन दुकानों तक पहुंच रहे हैं।इसी कड़ी में एक जमीनी उदाहरण तब देखने को मिला जब उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं ने ओरछा विकासखंड के धुर अंदरूनी और पहुंचविहीन ग्राम झारावाही स्थित राशन दुकान का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने वहां तीन महीने के लिए भंडारित किए गए अनाज के बोरों का भौतिक सत्यापन किया और वितरण रजिस्टर व सुरक्षा व्यवस्थाओं का अवलोकन किया।जिला खाद्य अधिकारी ने बताया कि जिले की सभी 39 चिन्हित पहुंचविहीन उचित मूल्य दुकानों में 100 प्रतिशत खाद्यान्न का अग्रिम भंडारण सुरक्षित रूप से कर लिया गया है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घोर वर्षाकाल में भी अंतिम छोर पर बैठे हर पात्र हितग्राही को समय पर उसका अधिकार (अनाज) मिले और उन्हें किसी भी प्रकार की मानसिक या शारीरिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
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रायपुर ।जांजगीर-चांपा जिले के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, नवागढ़ में पदस्थ संविदा व्यायाम शिक्षक श्री नलसाय दिवाकर की सेवा समाप्त कर दी गई है। यह कार्रवाई समाचार पत्रों एवं सोशल मीडिया में प्रसारित वायरल ऑडियो से जुड़े प्रकरण की जांच एवं स्पष्टीकरण के उपरांत की गई है।जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि वायरल ऑडियो के संबंध में श्री दिवाकर को कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर उनका स्पष्टीकरण प्राप्त किया गया था। मामले की जांच अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), जांजगीर द्वारा की गई। जांच प्रतिवेदन एवं प्रस्तुत स्पष्टीकरण का परीक्षण करने पर उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।
जांच में पाए गए तथ्यों के आधार पर श्री दिवाकर का आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-03 के विपरीत पाया गया। इसके फलस्वरूप छत्तीसगढ़ संविदा नियुक्ति नियम, 2012 के नियम 09(7) के तहत कार्रवाई करते हुए उनकी संविदा सेवा समाप्त कर दी गई है।जिला शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि शासकीय सेवकों के लिए निर्धारित आचरण नियमों के उल्लंघन के मामलों में नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - -जल संरक्षण से मिली सालभर सिंचाई की सुविधा, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा परिवाररायपुर। जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम खपरीडीह की श्रीमती अम्बिका कंवर ने मनरेगा के माध्यम से निर्मित डबरी का उपयोग कर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव की नई कहानी लिखी है। जल संरक्षण की इस संरचना ने न केवल उनकी खेती को नई दिशा दी है, बल्कि परिवार की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने का मजबूत आधार भी तैयार किया है।कुछ वर्ष पहले तक उनका परिवार वर्षा आधारित कृषि पर निर्भर था। सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण खेती सीमित दायरे में ही सिमट जाती थी और उत्पादन भी अपेक्षित नहीं मिल पाता था। किसानों की ऐसी ही समस्याओं को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2024-25 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत उनके खेत में लगभग 2.39 लाख रुपये की लागत से डबरी का निर्माण कराया गया।डबरी निर्माण से खेत में वर्षा जल का संचयन संभव हुआ और सिंचाई के लिए नियमित जल उपलब्ध होने लगा। इस कार्य से 836 मानव दिवस का रोजगार भी सृजित हुआ, जिससे स्थानीय श्रमिकों को रोजगार मिला। जल उपलब्धता बढ़ने के बाद अम्बिका कंवर ने पारंपरिक फसलों के साथ सब्जी उत्पादन शुरू किया। वर्तमान में वे टमाटर, बैंगन, भिंडी, पत्तागोभी, लौकी, मिर्च, बरबट्टी, करेला और खीरा जैसी विविध सब्जियों की खेती कर रही हैं। विशेष रूप से लौकी और ढोंड़का की फसल से उन्हें अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है।श्रीमती अम्बिका कंवर बताती हैं कि डबरी निर्माण उनके परिवार के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुआ है। अब वे वर्षभर खेती कर पा रही हैं, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। भविष्य में वे डबरी में मत्स्य पालन शुरू कर आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने की योजना भी बना रही हैं।ग्राम खपरीडीह की यह सफलता कहानी दर्शाती है कि मनरेगा के तहत निर्मित जल संरक्षण संरचनाएं केवल खेती को ही नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर और आजीविका को भी सशक्त बना रही हैं। अम्बिका कंवर की डबरी आज सतत कृषि, जल संरक्षण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।
- -एक दिन में निर्मित हुए 2000 जल संरक्षण मॉडल, ग्रामीणों ने श्रमदान से रचा नया उदाहरण-वर्षा जल संचयन, भूजल संवर्धन और जल सुरक्षा की दिशा में राज्य शासन की अभिनव पहलरायपुर। राज्य शासन द्वारा जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने और आगामी मानसून में अधिकाधिक वर्षा जल संचयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संचालित “मोर गाँव, मोर पानी” महाअभियान को प्रदेशभर में व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जनसहभागिता के माध्यम से जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कर जल सुरक्षा की मजबूत नींव रखी जा रही है।इसी क्रम में बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर विकासखंड में जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की गई, जहां ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं और पंचायत स्तरीय अमले के सामूहिक प्रयास से एक ही दिन में 2000 नग 5 प्रतिशत मॉडल जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया। यह पहल जल संरक्षण के प्रति समाज की बढ़ती जागरूकता और सहभागिता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है।अभियान में ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, आवास मित्र, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने श्रमदान कर सक्रिय भूमिका निभाई। सामूहिक प्रयासों से निर्मित इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का अधिकतम संचयन संभव होगा, जिससे भूजल स्तर में सुधार आने के साथ-साथ किसानों और ग्रामीणों को दीर्घकालिक जल सुरक्षा का लाभ मिलेगा।राज्य शासन के मार्गदर्शन में अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ग्राम पंचायतों का क्लस्टर बनाकर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। साथ ही निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति की सतत समीक्षा की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है, जिससे अभियान के उद्देश्यों की प्रभावी पूर्ति हो सके।“मोर गाँव, मोर पानी” महाअभियान केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण समुदायों में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, सामुदायिक जिम्मेदारी और सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी सशक्त माध्यम बन रहा है। राज्य शासन और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से यह अभियान प्रदेश में जल संरक्षण की नई संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आगामी मानसून को देखते हुए प्रदेशभर में जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण, वर्षा जल संचयन और भूजल संवर्धन संबंधी गतिविधियों को गति दी जा रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
- -जन्म प्रमाण पत्र के लिए भटक रहे पिता को मिली राहत, समयबद्ध निराकरण से बढ़ा विश्वास-"इतनी जल्दी समाधान होगा, सोचा नहीं था" — हितग्राहीरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी एवं समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संचालित सीएम हेल्पलाइन 1076 प्रदेशभर में लोगों के लिए भरोसे का सशक्त माध्यम बनती जा रही है। शासन की इस जनोन्मुखी पहल से नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी मंच उपलब्ध हो रहा है और प्रशासनिक सेवाओं के प्रति उनका विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ग्राम खजुरी निवासी श्री राम सौरथ इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण हैं। उन्होंने अपने बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र के संबंध में सीएम हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कराई थी। उनके अनुसार बच्चे का जन्म 11 जून 2025 को हुआ था और जन्म के बाद आवश्यक दस्तावेज संबंधित स्वास्थ्य केंद्र में जमा कर दिए गए थे, लेकिन कई माह बीत जाने के बाद भी जन्म प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पाया था। इससे उन्हें विभिन्न आवश्यक कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।शिकायत प्राप्त होने के बाद संबंधित विभाग द्वारा मामले का परीक्षण किया गया और आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण कर जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की कार्रवाई सुनिश्चित की गई। समयबद्ध निराकरण से हितग्राही को राहत मिली और उनकी समस्या का समाधान हो सका।श्री राम सौरथ ने बताया कि सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराने के बाद उनकी समस्या पर शीघ्रता से ध्यान दिया गया। उन्होंने शासन, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह व्यवस्था आम नागरिकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने कहा, "इतनी जल्दी समाधान होगा, मैंने सोचा नहीं था।"राज्य शासन द्वारा संचालित सीएम हेल्पलाइन 1076 नागरिकों और प्रशासन के बीच संवाद का प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है। इसके माध्यम से प्राप्त शिकायतों का संबंधित विभागों द्वारा परीक्षण कर निर्धारित समय-सीमा में निराकरण किया जाता है, जिससे लोगों को त्वरित राहत मिल रही है।प्रदेश के नागरिक शासकीय योजनाओं, सेवाओं अथवा अन्य विभागीय समस्याओं से संबंधित शिकायतें *टोल फ्री नंबर 1076* पर चौबीसों घंटे दर्ज करा सकते हैं। शिकायत दर्ज होने के बाद आवेदक को एक पंजीयन क्रमांक प्रदान किया जाता है, जिसके माध्यम से वह अपनी शिकायत की प्रगति की जानकारी प्राप्त कर सकता है। मुख्यमंत्री की जनकेंद्रित सोच के अनुरूप सीएम हेल्पलाइन 1076 प्रदेश में सुशासन, जवाबदेही और नागरिक संतुष्टि को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है तथा आमजन को उनकी समस्याओं के त्वरित समाधान का भरोसा दे रही है।
- महासमुंद / छत्तीसगढ़ शासन के सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग, आयुक्त समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़, संचालक,लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ के द्वारा संयुक्त विडियो कांफ्रेंस 12 जून 2026 को दिए निर्देशानुसार महासमुंद जिले में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत आगामी 16 जून से होने जा रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप बच्चों को स्वच्छ, सुंदर और गुणवत्तापूर्ण माहौल देने के लिए जिले के समस्त शासकीय प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में व्यापक स्तर पर शाला प्रवेश उत्सव 2026 का गरिमामय आयोजन किया जाएगा।जिला प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य शासन द्वारा जारी कड़े दिशा-निर्देशों के तहत तैयारियां पूरी कर ली हैं। जिला कलेक्टर , मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत और जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी विकासखंड और संकुल प्रभारियों को निर्धारित समय-सीमा में सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद करने के निर्देश दिए हैं। 15 जून तक विद्यालय में साफ सफाई पोताई का कार्य पूर्ण कर लिए जाएंगे ।16 जून को प्रवेश उत्सव के प्रथम दिन स्कूलों में त्योहार जैसा माहौल बनाने के निर्देश दिया गया है। पहली बार स्कूल कदम रखने वाले (कक्षा पहली) और छठवीं में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं का तिलक लगाकर और माला पहनाकर स्वागत किया जाएगा। प्रवेश के साथ बच्चों को राज्य शासन की योजना के तहत निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, अभ्यास पुस्तिका, गणवेश (यूनिफॉर्म), निःशुल्क सरस्वती सायकल, छात्रवृत्ति, मध्यान्ह भोजन वितरित की जाएंगी। पालकों और शिक्षा में रुचि रखने वाले जनप्रतिनिधियों के सहयोग से इस दिन न्योता भोज कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं।राज्य शासन के मंशा अनुरूप नए शैक्षणिक सत्र से जिले के प्रत्येक ब्लॉक में एक एक स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय खोले जाने की अनुमति प्राप्त हुई है। इससे जिले में सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की संख्या बढ़ेगी जिसका सीधा लाभ पालकों को होगा और न्यूनतम फीस में अंग्रेजी माध्यम के शालाओं में पढ़ाई करा सकेंगे। इन स्कूलों का विकास पीएम श्री स्कूलों की तर्ज पर किए जाना है।राज्य शासन के निर्देशानुसार इस बार सभी स्कूलों में सुबह 10 बजे और दोपहर 3.50 को दो बार प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी। सुबह के प्रार्थना सभा में राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान के साथ ही सरस्वती वंदन, दीपमंत्र और गुरुमंत्र का वाचन होगा। साथ ही राज्य एवं राष्ट्र के महापुरुषों के योगदान को याद करते हुए छात्रों द्वारा वाचन किया जाएगा। छुट्टी के समय होने वाले प्रथम सभा में राजकीय गीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र के साथ प्रत्येक दिन के शाला संचालन का समापन होगा।इस बार प्रवेश उत्सव में शत-प्रतिशत नामांकन और 'शून्य ड्रॉप-आउट' (एक भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे) का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कक्षा पहली के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चों की सूची लेकर सीधे प्रवेश दिया जा रहा है। कक्षा पांचवीं उत्तीर्ण कर चुके बच्चों की सूची और टीसी के आधार पर उन्हें सीधे कक्षा छठवीं में प्रवेश दिलाया जा रहा है। कक्षा नवमी में प्रवेश हेतु कैचमेंट एरिया के मिडिल स्कूलों के प्रधान पाठकों से सीधे टीसी लेकर बोर्ड और शासन के नियमानुसार प्रवेश दिया जाएगा। समग्र और समावेशी शिक्षा के लक्ष्य प्राप्ति के लिए सभी शालाओं को दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष पहल करते हुए एक एक मेंटर शिक्षक नियुक्त करते हुए उनके शाला प्रवेश की जिम्मेदारी दी गई है।महासमुंद जिला शिक्षा विभाग ने सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों बीआरसीसी और समस्त प्राचार्य संकुल प्रभारी , संकुल समन्वयकों को सतत शैक्षणिक मॉनिटरिंग के निर्देश देते हुए स्पष्ट किया है कि नए शैक्षणिक सत्र से शिक्षकों और विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन अटेंडेंस प्रणाली वी इस के को अनिवार्य किया गया है ।साथ ही सभी विषय शिक्षकों को आगामी तीन महीने का शैक्षणिक रोडमैप तैयार करने को कहा गया है। सभी विषय के पाठ्यक्रम राज्य शासन द्वारा निर्धारित शैक्षणिक कैलेंडर के अधार पर समय सीमा में पूर्ण करने के निर्देश जारी किए हैं। 16 जून से ही विद्यालय में अध्यापन कार्य प्रारंभ तथा नई शिक्षा नीति 2020 के अनुसार से ही कक्षाओं में प्रयोगशालाओं , पुस्तकालयों, अटल टिंकरिंग लैब के समुचित उपयोग के निर्देश दिया गया है। उक्त बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा, सहायक संचालक शिक्षा, एडीपीओ समस्त एपीसी प्रोग्रामर उपस्थित रहे।
- -टीबी मुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में बड़ा कदम, 90 शिविरों में 7 हजार से अधिक लोगों की जांचरायपुर। छत्तीसगढ़ में टीबी मुक्त भारत अभियान को गति देने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा अत्याधुनिक हैंड हेल्ड एक्स-रे मशीनों के माध्यम से संभावित टीबी मरीजों की पहचान का कार्य तेज़ी से किया जा रहा है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में पहुंचकर स्वास्थ्य टीमें उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों की जांच कर रही हैं, जिससे समय रहते रोग की पहचान और उपचार सुनिश्चित हो सके।भारत सरकार के टीबी मुक्त भारत 100 दिवसीय विशेष अभियान के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के तहत संभावित मरीजों की स्क्रीनिंग, डिजिटल एक्स-रे जांच तथा आवश्यकतानुसार ट्रू-नॉट तकनीक से पुष्टि की जा रही है। इससे टीबी रोगियों की शीघ्र पहचान कर उपचार प्रारंभ करने में मदद मिल रही है।बलरामपुर जिले में संचालित विशेष अभियान के दौरान अब तक 90 स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया गया है। इन शिविरों में 7,679 उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों की जांच की गई। स्क्रीनिंग के दौरान 2,442 व्यक्तियों के एक्स-रे में असामान्यताएं पाई गईं, जिनके स्यूटम नमूनों की ट्रू-नॉट मशीन के माध्यम से जांच की जा रही है। जांच में टीबी की पुष्टि होने पर मरीजों को तत्काल उपचार से जोड़ा जा रहा है।स्वास्थ्य विभाग के अनुसार टीबी मुक्त ग्राम पंचायतों के निर्माण के लक्ष्य के साथ गांव-गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों में लोगों को टीबी के लक्षण, बचाव और उपचार के संबंध में भी जागरूक किया जा रहा है। विभाग का मानना है कि आधुनिक तकनीक और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को तेजी से हासिल किया जा सकता है।लक्षण दिखने पर तुरंत कराएं जांचस्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी, बलगम या खून के साथ खांसी, सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, वजन में कमी, भूख न लगना, रात में बुखार या लगातार कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में जाकर तुरंत जांच कराएं। समय पर पहचान और नियमित उपचार से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है तथा इसके संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है।राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का नहीं बल्कि जनभागीदारी का अभियान है। नागरिकों की जागरूकता, समय पर जांच और उपचार के प्रति प्रतिबद्धता से ही टीबी मुक्त छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को साकार किया जा सकेगा।
- रायपुर। ग्रीष्मकालीन उड़द एवं मूंग की खेती किसानों के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल रही है। कृषि विभाग के मार्गदर्शन, उन्नत बीजों की उपलब्धता तथा वैज्ञानिक खेती की तकनीकों के कारण बेमेतरा जिले में इस वर्ष ग्रीष्मकालीन दलहन खेती का रकबा उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। जहां पिछले वर्ष केवल 285 हेक्टेयर क्षेत्र में उड़द-मूंग की खेती की गई थी, वहीं इस वर्ष यह बढ़कर 1191 हेक्टेयर तक पहुंच गई है। इसमें लगभग 1000 हेक्टेयर क्षेत्र में 1280 किसानों द्वारा ग्रीष्मकालीन उड़द का प्रदर्शन किया गया, जिससे किसानों को नई तकनीकों को सीखने और अपनाने का अवसर मिला।इस सकारात्मक परिवर्तन की कहानी ग्राम गाड़ाभाठा के कृषक श्री अमर सिंह साहू तथा ग्राम बिजागोंड के कृषक श्री चंद्रकुमार कुंभकार जैसे प्रगतिशील किसानों से जुड़ी हुई है, जिन्होंने पहली बार ग्रीष्मकालीन उड़द की खेती कर उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त किए हैं।बेमेतरा के विकासखंड साजा के ग्राम गाड़ाभाठा निवासी कृषक श्री अमर सिंह साहू ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन में लगभग 1.5 एकड़ भूमि में ग्रीष्मकालीन उड़द की खेती की। उन्हें विभाग द्वारा उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराए गए तथा कतार पद्धति से बुवाई, समय पर सिंचाई और समुचित पोषण प्रबंधन की जानकारी दी गई। 21 अप्रैल 2026 को की गई बुवाई के बाद फसल की बढ़वार अत्यंत संतोषजनक रही। वर्तमान में उनकी फसल अच्छी स्थिति में है तथा लगभग 7 से 8 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त होने की संभावना है।श्री अमर सिंह साहू बताते हैं कि पहले वे केवल परंपरागत फसलों पर निर्भर रहते थे, लेकिन कृषि विभाग की सलाह और प्रदर्शन कार्यक्रम को देखकर उन्होंने ग्रीष्मकालीन उड़द की खेती अपनाई। फसल की वर्तमान स्थिति देखकर उन्हें बेहतर आय की उम्मीद है और भविष्य में वे अधिक क्षेत्र में दलहन फसलों का उत्पादन करने की योजना बना रहे हैं।इसी प्रकार ग्राम बिजागोंड के कृषक श्री चंद्रकुमार कुंभकार ने भी उड़द का प्रदर्शन लगाया। उन्होंने 12 अप्रैल 2026 को कतार पद्धति से बुवाई की। वैज्ञानिक तरीके से खेती करने और कृषि विभाग के नियमित तकनीकी मार्गदर्शन का लाभ उन्हें मिला। उनकी फसल वर्तमान में स्वस्थ एवं घनी अवस्था में है तथा 8 से 9 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन मिलने का अनुमान है। श्री चंद्रकुमार का कहना है कि ग्रीष्मकालीन मौसम में उड़द की खेती को लेकर प्रारंभ में कुछ संदेह था, लेकिन विभागीय अधिकारियों के सहयोग और सफल प्रदर्शन को देखकर उनका आत्मविश्वास बढ़ा। अब वे अपने गांव के अन्य किसानों को भी दलहन फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।ग्रीष्मकालीन उड़द की खेती केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और मृदा स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी सिद्ध हो रही है। दलहन फसलें वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती हैं। इससे आगामी फसलों के लिए भूमि अधिक उपजाऊ बनती है तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। यदि समय पर वर्षा हो जाए तो इन फसलों का उपयोग हरी खाद के रूप में भी किया जा सकता है, जिससे भूमि की गुणवत्ता और बेहतर होती है।श्री अमर सिंह साहू और श्री चंद्रकुमार कुंभकार की सफलता यह साबित करती है कि यदि किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त बीज, वैज्ञानिक तकनीक और सही मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए तो वे नई फसलों को अपनाकर बेहतर उत्पादन और आय अर्जित कर सकते हैं। इन दोनों किसानों ने यह दिखाया है कि ग्रीष्मकालीन मौसम में भी दलहन फसलों की सफल खेती संभव है और यह खेती किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।बेमेतरा जिले में ग्रीष्मकालीन उड़द की बढ़ती खेती आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में एक सशक्त कदम है। यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, मृदा स्वास्थ्य सुधारने तथा टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। श्री अमर सिंह साहू और श्री चंद्रकुमार कुंभकार जैसे किसानों की सफलता अन्य कृषकों के लिए प्रेरणा बन रही है और जिले में दलहन उत्पादन के नए आयाम स्थापित कर रही है।
- रायपुर । बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड अंतर्गत एल-051 टी-05 से एंचोडा तक निर्मित 8.50 किलोमीटर सड़क ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आई है। वर्ष 2018-19 में स्वीकृत इस परियोजना के तहत 8.50 किलोमीटर मिट्टीकरण एवं मुरूमीकरण सड़क तथा 4 पुलियों का निर्माण किया गया है। कार्य अंतिम चरण में है और इसके जून माह में पूर्ण होने की संभावना है। सड़क निर्माण से पहले एंचोडा और आसपास के गांवों के लोगों को आवागमन के लिए पगडंडियों, जंगल के रास्तों और कच्चे मार्गों पर निर्भर रहना पड़ता था। बरसात के मौसम में कीचड़ और जलभराव के कारण स्थिति और अधिक कठिन हो जाती थी।स्कूली बच्चों को विद्यालय पहुंचने में परेशानी होती थी। मरीजों को स्वास्थ्य केंद्र तक ले जाना चुनौतीपूर्ण था। किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने और आवश्यक सामग्री लाने में अतिरिक्त समय और खर्च करना पड़ता था। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को भी गांव तक पहुंचने में कठिनाई होती थी। नई सड़क बनने के बाद एंचोडा का संपर्क मुख्य मार्ग, बाजार, स्वास्थ्य केंद्र और विकासखंड मुख्यालय से सीधे जुड़ गया है। अब ग्रामीण कम समय में अपनी आवश्यकताओं के लिए मुख्यालय तक पहुंच पा रहे हैं। विद्यार्थियों के लिए स्कूल जाना आसान हुआ है, किसानों को अपनी कृषि उपज बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिल रही है और जरूरत पड़ने पर मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो पा रही हैं।सड़क निर्माण का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिला है। अब वे अपनी फसल और अन्य कृषि उत्पाद आसानी से बाजार तक पहुंचा पा रहे हैं। परिवहन लागत कम हुई है और समय की बचत भी हो रही है। राशन, दैनिक उपयोग की वस्तुएं और अन्य आवश्यक सेवाएं भी अब पहले की तुलना में अधिक सुलभ हो गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने से गांव के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई दिशा मिली है। शासन-प्रशासन की पहुंच बढ़ने से विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी समय पर ग्रामीणों तक पहुंच रहा है। एंचोडा तक पहुंची यह सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं है, बल्कि यह गांव के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक समृद्धि की नई राह बन गई है। यह परियोजना ग्रामीण अधोसंरचना विकास के माध्यम से लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
- -साहस, समर्पण और राष्ट्रसेवा की मिसाल बने जवानों को दी बधाई एवं शुभकामनाएंरायपुर। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के हाथों “शौर्य चक्र” से सम्मानित वीर पुलिस एवं सुरक्षा बल के जवानों से उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने शनिवार को अपने नवा रायपुर अटल नगर स्थित निवास कार्यालय में आत्मीय मुलाकात कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर डीजीपी श्री अरुण देव गौतम सहित जवानों के परिजन एवं परिवार के सदस्य भी उपस्थित रहे।उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ और देश को ऐसे वीर सपूतों पर गर्व है, जिन्होंने अपने अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति का परिचय देते हुए असाधारण परिस्थितियों में भी वीरता का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि इन जवानों की बहादुरी आने वाली पीढि़यों के लिए प्रेरणास्रोत है। मुलाकात के दौरान श्री शर्मा ने शौर्य चक्र से सम्मानित इंस्पेक्टर लक्ष्मण केवट, इंस्पेक्टर रामेश्वर प्रसाद देशमुख तथा राइफलमैन भोज राम साहू के साहसिक कार्यों की सराहना की और उनके परिजनों से भी मुलाकात की और सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश सेवा के इस गौरवपूर्ण योगदान में परिवारों का त्याग और समर्थन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने जवानों के अदम्य साहस भरी घटनाओं के बारे में भी उनसे जानकारी ली। ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ पुलिस के इंस्पेक्टर लक्ष्मण केवट एवं इंस्पेक्टर रामेश्वर प्रसाद देशमुख को 16 अप्रैल 2024 को कांकेर क्षेत्र में नक्सलियों के विरुद्ध संचालित एक बड़े अभियान में अद्वितीय नेतृत्व, साहस और रणनीतिक कौशल का परिचय देने के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है। उनके नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने कठिन परिस्थितियों में नक्सलियों का मुकाबला करते हुए महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की थी। इसी प्रकार 3 असम राइफल्स के राइफलमैन भोज राम साहू को भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र में घुसपैठ विरोधी अभियान के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अदम्य साहस के साथ मोर्चा संभालते हुए दुश्मनों को पीछे हटने के लिए मजबूर करने और अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार सुरक्षा बलों के जवानों के सम्मान, कल्याण और उनके परिवारों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने सम्मानित जवानों एवं उनके परिजनों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनका साहस और बलिदान राष्ट्र सेवा का सर्वाेच्च उदाहरण है।
- -राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना हमारी प्राथमिकता : मंत्री श्रीमती राजवाड़ेरायपुर /महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने शनिवार को सूरजपुर जिले के भटगांव विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कमलपुर, पहाड़गांव एवं पण्डोनगर का दौरा कर ग्रामीणों से सीधे संवाद स्थापित किया। डोर-टू-डोर जनसंपर्क कार्यक्रम के दौरान उन्होंने घर-घर पहुंचकर ग्रामीणों से मुलाकात की, उनकी समस्याएं सुनीं तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी।मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में केंद्र एवं राज्य सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के उत्थान और समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और कोई भी पात्र हितग्राही वंचित न रहे।जनसंपर्क अभियान के दौरान मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने ग्रामीणों से विभिन्न विषयों पर चर्चा की और उनकी समस्याओं एवं शिकायतों की जानकारी ली। ग्रामीणों द्वारा सड़क, पेयजल, बिजली, आवास तथा अन्य स्थानीय आवश्यकताओं से संबंधित मुद्दे उठाए गए, जिन पर मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने गंभीरता से संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई एवं त्वरित निराकरण के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि शासन जनता की समस्याओं के समाधान के लिए संवेदनशील है और प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को जनसरोकारों से जुड़े विषयों पर सतत निगरानी रखते हुए लोगों को राहत पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए।इस अवसर पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, स्थानीय प्रशासन के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। जनसंपर्क कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों ने शासन की योजनाओं और विकास कार्यों के प्रति विश्वास व्यक्त करते हुए मंत्री श्रीमती राजवाड़े का स्वागत किया।
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- 01 जुलाई से प्रारंभ होने संबंधी सूचना भ्रामक एवं फर्जी
रायपुर /संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी पत्र दिनांक 12 जून 2026 के अनुसार राज्य की समस्त शासकीय एवं अशासकीय शालाओं में शैक्षणिक सत्र 2026-27 का विधिवत संचालन 16 जून 2026 (मंगलवार) से प्रारंभ किया जाएगा। इस संबंध में सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों पर प्रसारित की जा रही यह सूचना कि शैक्षणिक सत्र 01 जुलाई 2026 से प्रारंभ होगा, पूर्णतः असत्य, भ्रामक तथ्यों से परे एवं फर्जी है।लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा स्पष्ट किया गया है कि विद्यालयों के संचालन की अधिकृत तिथि 16 जून 2026 ही है। अतः विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं आम नागरिकों से अपील की जाती है कि वे केवल विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें तथा सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट एवं भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें। - -केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से की सौजन्य भेंटरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से शनिवार को राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में केंद्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह का शाल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय एवं निरंतर संवाद की भावना ने विकास कार्यों को नई गति प्रदान की है। इसी सहयोगात्मक दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच मजबूत साझेदारी से अधोसंरचना विकास, उद्योग, रोजगार, कौशल विकास तथा जनसेवा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर निर्मित हो रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आपसी सहयोग और समन्वय से छत्तीसगढ़ के विकास को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में सहायता प्राप्त होगी। इस अवसर पर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल उपस्थित थे।
- -केंद्र सरकार ने परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में किया अधिसूचित-जशपुर को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने का मार्ग हुआ प्रशस्तरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना को केंद्र सरकार द्वारा विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किए जाने पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय जशपुर सहित पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ के विकास के लिए ऐतिहासिक साबित होगा।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से जशपुर के विकास में एक नया अध्याय जुड़ रहा है। लंबे समय से रेल संपर्क की प्रतीक्षा कर रहे जशपुर जिले को इस परियोजना के माध्यम से पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इससे क्षेत्र की जनता को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलने के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई गति मिलेगी।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों, पर्यटन संभावनाओं और सांस्कृतिक वैभव से समृद्ध जशपुर इस रेल परियोजना के माध्यम से देश के प्रमुख आर्थिक एवं औद्योगिक केंद्रों से बेहतर रूप से जुड़ सकेगा। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, व्यापार, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में नए अवसर सृजित होंगे तथा वनांचल क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के विकास को निरंतर प्राथमिकता दी जा रही है। रेल, सड़क, ऊर्जा और अन्य आधारभूत अधोसंरचना परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना इसी संकल्प का सशक्त उदाहरण है।मुख्यमंत्री श्री साय ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव का समस्त प्रदेशवासियों की ओर से हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना जशपुर और आसपास के क्षेत्रों की प्रगति, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला सिद्ध होगी।
- -धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना को केंद्र सरकार की अधिसूचना, विकास के नए युग में प्रवेश करेगा क्षेत्र-मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सतत प्रयासों से साकार हुआ दशकों पुराना सपनारायपुर ।जशपुर जिले के विकास इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। भारत सरकार के रेल मंत्रालय द्वारा धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किए जाने के साथ ही जशपुर को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह केवल एक रेल परियोजना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास की नई आधारशिला है।लगभग 291.881 किलोमीटर लंबी यह महत्वाकांक्षी रेल लाइन रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ से प्रारंभ होकर जशपुर जिले के पत्थलगांव होते हुए झारखंड के लोहरदगा तक पहुंचेगी। परियोजना के क्रियान्वयन से जशपुर जिला सीधे राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा और क्षेत्र के विकास को अभूतपूर्व गति मिलेगी।यह ऐतिहासिक उपलब्धि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विकसित की जा रही आधुनिक आधारभूत संरचना तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विशेष प्रयासों का परिणाम है। वर्षों से क्षेत्रवासियों द्वारा उठाई जा रही रेल संपर्क की मांग अब साकार होने की दिशा में निर्णायक चरण में पहुंच गई है।रेल मंत्रालय द्वारा भारत के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार रेल अधिनियम, 1989 के प्रावधानों के तहत सार्वजनिक हित और राष्ट्रीय अवसंरचना विकास को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को अधिसूचित किया गया है। अधिसूचना के प्रकाशन के साथ ही परियोजना औपचारिक रूप से प्रभावशील हो गई है।विकास की मुख्यधारा से जुड़ेगा वनांचल क्षेत्रप्राकृतिक संसाधनों और संभावनाओं से समृद्ध जशपुर जिला अब तक रेल संपर्क से वंचित था। परिवहन के लिए मुख्यतः सड़क मार्ग पर निर्भरता के कारण आम नागरिकों, विद्यार्थियों, किसानों, व्यापारियों और रोजगार की तलाश में बाहर जाने वाले युवाओं को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नई रेल लाइन के निर्माण से जिले की कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक बदलाव आएगा और लोगों को सुरक्षित, सुलभ तथा किफायती परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।किसानों और उद्यमियों के लिए खुलेगी नई संभावनाएंरेल संपर्क स्थापित होने से जशपुर के कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों को देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा। जैविक खेती, सुगंधित धान, मक्का, दलहन, सब्जियां और बागवानी उत्पादों के लिए पहचान रखने वाले इस क्षेत्र के किसानों को बेहतर बाजार और बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। परिवहन लागत कम होने से स्थानीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी। साथ ही व्यापार और लघु उद्योगों को विस्तार का नया अवसर मिलेगा।पर्यटन को मिलेगी नई उड़ानजशपुर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने वन क्षेत्रों, जलप्रपातों, धार्मिक स्थलों और पर्यटन स्थलों के लिए विशेष पहचान रखता है। रेल संपर्क स्थापित होने के बाद पर्यटकों की पहुंच अधिक आसान होगी, जिससे पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होगी। इससे होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और अन्य सेवा क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक बढ़ेगी पहुंचनई रेल लाइन विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों तक पहुंच को सुगम बनाएगी। वहीं गंभीर मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों तक शीघ्र पहुंचाने में भी सहायता मिलेगी। इससे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के साथ उनकी उपलब्धता और पहुंच में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा।रोजगार और निवेश का नया केंद्र बनेगा क्षेत्ररेल परियोजना के निर्माण और संचालन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार अवसर सृजित होंगे। बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध होने से क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।क्षेत्रवासियों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धिपरियोजना की अधिसूचना जारी होने के बाद जशपुर सहित पूरे क्षेत्र में उत्साह और खुशी का माहौल है। लोगों का मानना है कि यह रेल लाइन केवल यातायात सुविधा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए विकास, समृद्धि और नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी। दशकों की प्रतीक्षा के बाद जशपुर का रेल मानचित्र पर स्थान सुनिश्चित होना जिले के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना जशपुर के विकास को नई दिशा देने वाली आधारभूत संरचना साबित होगी, जो आने वाले वर्षों में जिले की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने का सामर्थ्य रखती है।
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रायपुर । राजधानी रायपुर के विमतारा हॉल में आयोजित देवर्षि नारद जयंती पत्रकार सम्मान समारोह 2026 में वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत शर्मा को आद्य पत्रकार देवर्षि नारद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम विश्व संवाद केंद्र द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें उत्कृष्ट पत्रकारों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया।
समारोह में दिए गए प्रमुख पुरस्कार इस प्रकार हैं:
-आद्य पत्रकार देवर्षि नारद पुरस्कार: वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत शर्मा
-वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय बबन प्रसाद मिश्रा स्मृति पुरस्कार: आकांक्षा तिवारी (महिला पत्रकार)
-वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय रमेश नैयर स्मृति पुरस्कार: रूपेश यादव (फोटो जर्नलिस्ट)।
शनिवार को आयोजित इस गरिमामयी आयोजन में आईआईआईटी नवा रायपुर (IIIT Naya Raipur) के कुलपति प्रो. डॉ. ओमप्रकाश व्यास मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं, डीडी न्यूज़ दिल्ली के वरिष्ठ सलाहकार संपादक प्रखर श्रीवास्तव ने मुख्य वक्ता के तौर पर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के संयोजक मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सलाहकार और वरिष्ठ पत्रकार आर. कृष्ण दास थे।
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-श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम की उपकप्तान बनीं महक नरवासे : मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित
रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से शनिवार को राजनांदगांव जिले की प्रतिभाशाली युवा क्रिकेटर सुश्री महक नरवासे ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह तथा सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल उपस्थित थे।मुख्यमंत्री श्री साय ने भारतीय महिला अंडर-19 क्रिकेट टीम के आगामी श्रीलंका दौरे के लिए टी-20 एवं वनडे दोनों टीमों का उपकप्तान नियुक्त किए जाने पर सुश्री महक नरवासे को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर महक का सम्मान किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महक नरवासे की यह उपलब्धि केवल उनके परिवार या राजनांदगांव जिले की नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की बेटियां आज खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं और राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना रही हैं। महक ने अपनी मेहनत, अनुशासन और समर्पण के बल पर यह मुकाम हासिल किया है, जो प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणादायी है।मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि महक आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ और देश का नाम गौरवान्वित करेंगी। उन्होंने महक को प्रोत्साहित करते हुए कहा, "खूब खेलो, आगे बढ़ो और नई ऊंचाइयों को छुओ। आपकी सफलता प्रदेश के हजारों युवा खिलाड़ियों के सपनों को नई उड़ान देगी।"मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। महक नरवासे का भारतीय अंडर-19 महिला टीम की उपकप्तान के रूप में चयन प्रदेश में विकसित हो रहे खेल वातावरण और खिलाड़ियों को मिल रहे अवसरों का उत्कृष्ट उदाहरण है।सुश्री महक नरवासे ने सम्मान एवं शुभकामनाओं के लिए मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उनके पिता श्री राधेश्याम नरवासे, महापौर श्री मधुसूदन यादव, कोच श्री मनोज तिवारी तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे। - -एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रदेश स्तरीय महासम्मेलन में शामिल हुए मुख्यमंत्री-प्रदेश के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में एनएचएम कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण-मुख्यमंत्री ने एनएचएम कर्मचारियों को दी बड़ी सौगात, 33 दिनों की हड़ताल अवधि का वेतन देने की घोषणारायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शनिवार को राजधानी रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित छत्तीसगढ़ प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारी संघ के प्रदेश स्तरीय महासम्मेलन में शामिल होकर एनएचएम कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी। मुख्यमंत्री ने इस दौरान एनएचएम कर्मियों के 33 दिनों की हड़ताल अवधि का वेतन दिए जाने की घोषणा की। उन्होंने एनएचएम कर्मचारियों को स्वास्थ्य सेवाओं की “रीढ़ की हड्डी” बताते हुए कहा कि प्रदेश के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। श्री साय ने कहा कि स्वस्थ छत्तीसगढ़ के निर्माण में एनएचएम कर्मियों का योगदान अतुलनीय है और सरकार उनके कार्यों का सम्मान करती है।मुख्यमंत्री ने कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा निभाई गई भूमिका को याद करते हुए कहा कि जब पूरी दुनिया संकट में थी, तब एनएचएम के अधिकारी और कर्मचारी अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की सेवा में जुटे रहे। उन्होंने कहा कि उस कठिन समय में स्वास्थ्य कर्मियों ने मानवता की मिसाल पेश की, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि आज भी प्रदेश के ऐसे क्षेत्रों में, जहां सड़कें और परिवहन सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, स्वास्थ्य कर्मी पैदल चलकर, नदी-नाले पार कर लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र में संचालित “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” का उल्लेख करते हुए बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-गांव पहुंचकर लोगों की स्वास्थ्य जांच कर रही है और अब तक लगभग 90 प्रतिशत आबादी की स्क्रीनिंग पूरी की जा चुकी है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन तथा सुरक्षा बलों के साहसिक प्रयासों से बस्तर में नक्सलवाद का उन्मूलन हुआ है। अब वहां विकास और जनकल्याण की नई संभावनाएं खुल रही हैं, जिनमें स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार सबसे महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश के स्वास्थ्य सेवाओं में हुए व्यापक विस्तार के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेज खोलने से लेकर डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती से स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मजबूती से खड़ी है और सभी के सहयोग से विकसित एवं स्वस्थ छत्तीसगढ़ का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों से इसी समर्पण और सेवा भावना के साथ कार्य करते रहने का आह्वान किया।इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि जशपुर से लेकर सुकमा तक प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में एनएचएम कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि “स्वस्थ बस्तर अभियान” का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने कर्मचारियों के लिए की गई विभिन्न घोषणाओं और सुविधाओं की जानकारी देते हुए बताया कि एनएचएम कर्मचारियों की कई मांगें पूरी की जा चुकी हैं तथा स्थानांतरण नीति भी जारी कर दी गई है।उन्होंने कहा कि अब एनएचएम कर्मचारी भी कैशलेस उपचार योजना के दायरे में शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि एनएचएम कर्मियों के लिए जीवन बीमा सुविधा लागू की गई है, जिसके तहत सामान्य मृत्यु की स्थिति में 6 लाख रुपये, दुर्घटना में मृत्यु होने पर 1 करोड़ 40 लाख रुपये तथा स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 1 करोड़ 40 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। श्री जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में लगातार कमी आई है और नर्सों की भर्ती प्रक्रिया जारी है। शिशु और मातृ मृत्यु दर में कमी के लिए विशेषीकृत 116 नए स्वास्थ्य केंद्रों के लिए स्थानों का चयन किया जा चुका है।सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा हड़ताल अवधि का वेतन देने की घोषणा के बाद एनएचएम कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने गजमाला पहनाकर उनका भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. धीरेंद्र तिवारी तथा एनएचएम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरी सहित बड़ी संख्या में स्वास्थ्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
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रायपुर । लाखेनगर , रायपुर निवासी सेवानिवृत्त जिला आयुर्वेद अधिकारी 88 वर्षीय डा. शिवकुमार ( दीवान ) शर्मा ( जरौद - उमरिया वाले ) का आज अपराह्न आकस्मिक निधन हो गया । वे संतोष शर्मा के पिता थे । अंतिम संस्कार संध्या समय महादेव घाट मुक्तिधाम में किया गया।
- 10 अवैध पाटों को तोड़कर नाला सफाई की बाधा हटाईरायपुर/नगर पालिक निगम रायपुर के जोन क्रमांक 10 अंतर्गत रविंद्रनाथ टैगोर वार्ड क्रमांक 55 अंतर्गत लालपुर में एमएमआई हॉस्पिटल के सामने नाले पर निर्मित बड़े आकार के लगभग 10 अवैध पाटों को थ्री डी मशीन की सहायता से तोड़कर नाला सफाई की बाधा दूर करने की कार्यवाही नगर निगम जोन 10 जोन कमिश्नर श्री मोनेश्वर शर्मा के निर्देश पर जोन स्वास्थ्य अधिकारी श्री अमित बेहरा की उपस्थिति में नगर निगम जोन 10 स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गयी.
- 15 जुलाई 2026 तक राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल पर करें ऑनलाइन आवेदनरायपुर/ भारत सरकार द्वारा गणतंत्र दिवस वर्ष 2027 के अवसर पर घोषित किए जाने वाले पद्म पुरस्कारों (पद्म विभूषण, पद्म भूषण एवं पद्म श्री) के लिए नामांकन प्रक्रिया 15 मार्च 2026 से शुरू हो चुकी है।भारत सरकार द्वारा इन पुरस्कारों के माध्यम से उन व्यक्तियों को सम्मानित किया जाता है, जो राज्य के सुदूर वनांचल, ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में समाज सेवा, कला, शिक्षा, खेल, चिकित्सा, विज्ञान, इंजीनियरिंग एवं अन्य विभिन्न क्षेत्रों में निस्वार्थ भाव से उत्कृष्ट योगदान दे रहे है। वर्ष 2027 के पद्म विभूषण, पद्म भूषण एवं पद्म श्री पुरस्कारों हेतु नामांकन प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं।व्यक्तिगत रूप से भेजे जाने वाले नामांकन 15 जुलाई 2026 तक भारत सरकार के राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल https://awards.gov.in पर ऑनलाइन प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
- रायपुर/ जिले में बाढ़ और अन्य नैसर्गिक विपत्तियों से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देशानुसार जिला, अनुविभाग एवं तहसील स्तर पर बाढ़ नियंत्रण हेतु नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।मुख्य सचिव श्री विकास शील की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय बाढ़ नियंत्रण समीति की बैठक में दिए गए निर्देशानुसार रायपुर ज़िले के नोडल अधिकारियों में जिला स्तर पर अपर कलेक्टर श्री कीर्तिमान सिंह राठौर, रायपुर अनुभाग में एसडीएम श्री नंदकुमार चौबे, आरंग अनुभाग में एसडीएम श्रीमती अभिलाषा पैकरा, अभनपुर अनुभाग में एसडीएम श्री रवि सिंह एवं तिल्दा अनुभाग में एसडीएम श्री आशुतोष देवांगन नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। रायपुर तहसील में तहसीलदार श्री राममूर्ति दिवान, धरसींवा तहसील में श्री बाबूलाल कुर्रे, आरंग तहसील में श्रीमती ज्योति मसियारे, मंदिर हसौद तहसील में श्री विनोद साहू, अभनपुर तहसील में श्रीमती सीता शुक्ला, गोबरा नवापारा तहसील में श्री विक्रांत सिंह राठौर, तिल्दा तहसील में श्री रामप्रसाद बघेल एवं खरोरा तहसील में श्री शेखर मंडई को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।साथ ही शहरी स्तर पर सभी जोन कमिश्नर, जोन क्रमांक 1 से 10 तक, अपने जोन के नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।



























