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- महासमुन्द, / जिले के पिथौरा विकासखंड के ग्राम बरतुंगा के कृषक दम्पति श्रीमती कौशिल्या बाई यदु और उनके पति कभी पारंपरिक धान की खेती करते थे, उन्होंने समय के साथ अपनी सोच बदली और उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में करेला की आधुनिक खेती अपनाया। साथ ही ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी नई तकनीकों का उपयोग कर उन्होंने अपनी आय में इजाफा किया।कृषक श्रीमती कौशिल्या बाई यदु बताती है कि पूर्व में वे अपने 0.40 हेक्टेयर सिंचित भूमि में मुख्य रूप से धान की खेती करती थीं। धान की खेती से उन्हें अपेक्षाकृत कम आय प्राप्त होती थी, जिससे परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करना चुनौतीपूर्ण था। बेहतर आय की तलाश में उन्होंने उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन अंतर्गत सब्जी क्षेत्र विस्तार योजना के तहत करेला की खेती शुरू करने का निर्णय लिया।उ द्यानिकी विभाग की तकनीकी सलाह के अनुसार उन्होंने ड्रिप सिंचाई एवं मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया। इन तकनीकों से सिंचाई जल की बचत हुई, खरपतवार नियंत्रण में सुविधा मिली, पौधों की बेहतर वृद्धि हुई तथा उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार आया। विभाग द्वारा करेला फसल एवं सपोर्ट सिस्टम के लिए 13,600 रुपये की अनुदान राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से उनके बैंक खाते में प्रदान की गई, जिससे खेती की प्रारंभिक लागत में भी सहायता मिली।श्रीमती यदु बताती है कि करेला की खेती से उन्हें अपेक्षा से अधिक उत्पादन प्राप्त हुआ। स्थानीय बाजार एवं पिथौरा मंडी में करेला की अच्छी मांग और उचित मूल्य मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। खेती में लगभग 40 हजार रुपए की लागत के मुकाबले उन्हें लगभग 1 लाख 45 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। श्रीमती यदु की उपलब्धि ने ग्राम बरतुगा सहित आसपास के क्षेत्रों के किसानों को भी प्रेरित किया है। इससे क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिल रहा है।
- -दो दिव्यांग हितग्राहियों को मिली बैटरी चालित ट्राइसायकल, आवागमन हुआ आसान और आत्मनिर्भरता को मिला बलरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन और संवेदनशील प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बनकर सामने आई है। हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए समाज कल्याण विभाग ने दो दिव्यांग हितग्राहियों को बैटरी चालित ट्राइसायकल उपलब्ध कराई, जिससे उनके जीवन में नई सहजता और आत्मनिर्भरता आई है। रायपुर जिला के विकासखंड आरंग के ग्राम निवारी निवासी श्री नंद किशोर टंडन तथा ग्राम सेजा निवासी श्री खिलेन्द्र कुमार साहू (वर्मा) दोनों 80 प्रतिशत दिव्यांग हैं। आवागमन में होने वाली गंभीर कठिनाइयों के कारण उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत प्राप्त होने के बाद समाज कल्याण विभाग ने दोनों प्रकरणों का त्वरित परीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उन्हें बैटरी चालित ट्राइसायकल प्रदान की। बैटरी चालित ट्राइसायकल मिलने से अब दोनों हितग्राहियों के लिए दैनिक आवागमन, शासकीय कार्यालयों तक पहुंच, आवश्यक कार्यों का निष्पादन तथा सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी पहले की अपेक्षा कहीं अधिक आसान हो गई है। इससे उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ी है और जीवन की गुणवत्ता में भी सकारात्मक सुधार आया है।दोनों हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से उनकी समस्या का त्वरित समाधान हुआ। इस सहायता से अब वे बिना किसी पर निर्भर हुए अपने आवश्यक कार्य आसानी से कर सकेंगे। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से प्रदेशभर में पात्र हितग्राहियों की शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है। यह व्यवस्था नागरिकों को त्वरित राहत प्रदान करने के साथ-साथ शासन की जनहितैषी और जवाबदेह कार्यप्रणाली को भी सशक्त बना रही है।
- एमसीबी/ बदलते कृषि परिदृश्य में जिले के किसान अब आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। विकासखंड भरतपुर के ग्राम खमरौध निवासी प्रगतिशील किसान जगबंधन सिंह इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरे हैं। उन्होंने खरीफ सीजन में आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, कोटाडोल शाखा जनकपुर से इफको नैनो डीएपी प्राप्त कर वैज्ञानिक खेती की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।जगबंधन सिंह वर्षों से खेती-किसानी से जुड़े हुए हैं। बढ़ती खेती की लागत और संतुलित पोषण की आवश्यकता को देखते हुए उन्होंने इस वर्ष पारंपरिक उर्वरकों के साथ नैनो डीएपी का उपयोग करने का निर्णय लिया। उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक अपनाकर ही खेती को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है। किसान ने बताया कि कृषि विभाग एवं इफको के विशेषज्ञों द्वारा नैनो डीएपी के संबंध में दी गई जानकारी से प्रेरित होकर उन्होंने इसे अपनाया है। उन्हें विश्वास है कि इसके उपयोग से फसल को आवश्यक फॉस्फोरस अधिक प्रभावी ढंग से मिलेगा, पौधों की शुरुआती बढ़वार बेहतर होगी, जड़ें मजबूत बनेंगी तथा फसल का समुचित विकास होगा। इससे खेती की लागत में कमी आने के साथ उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार की उम्मीद है।जगबंधन सिंह का कहना है कि समय के साथ खेती में नई तकनीकों को अपनाना आवश्यक हो गया है। यदि किसान वैज्ञानिक सलाह के अनुसार आधुनिक उर्वरकों का उपयोग करें तो कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने अन्य किसानों से भी अपील की कि वे पारंपरिक खेती के साथ-साथ नई कृषि तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने का प्रयास करें।कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार इफको नैनो डीएपी आधुनिक नैनो तकनीक पर आधारित उर्वरक है, जो पौधों तक पोषक तत्वों की उपलब्धता को अधिक प्रभावी बनाता है। इसके संतुलित उपयोग से उर्वरकों की दक्षता बढ़ती है, अनावश्यक बर्बादी कम होती है तथा पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
- -सूडा और नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों की परिचयात्मक बैठक लेकर विभागीय कार्यों एवं योजनाओं की जानकारी लीरायपुर । राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के नए सीईओ भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2021 बैच के अधिकारी श्री सुमीत अग्रवाल ने आज अपना कार्यभार ग्रहण किया। उन्होंने नवा रायपुर में इंद्रावती भवन स्थित सूडा मुख्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के बाद सूडा और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अधिकारियों की परिचयात्मक बैठक लेकर विभागीय कार्यों एवं योजनाओं की जानकारी ली। श्री अग्रवाल इससे पहले दुर्ग नगर निगम के आयुक्त के रूप में कार्यरत थे। सूडा के नए सीईओ श्री सुमीत अग्रवाल ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद अधिकारियों से कहा कि राज्य के शहरी क्षेत्रों का समग्र विकास और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुँचाना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता होगी। हम सभी विभागीय अधिकारियों और तकनीकी टीम के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों को और अधिक सशक्त, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाने के लिए काम करेंगे। उनके कार्यभार ग्रहण करने के दौरान सूडा के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री दुष्यंत कुमार रायस्त, नगरीय प्रशासन विभाग के अपर संचालक श्री पुलक भट्टाचार्य, उप संचालक श्रीमती अर्पिता पाठक, अधीक्षण अभियंता श्री रमेश सिंह, सूडा के उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील अग्रहरि और श्री सचित कुमार साहू सहित अनेक विभागीय अधिकारी मौजूद थे।
- -प्रधानमंत्री की कूटनीतिक सौगात में शामिल हुई बस्तर की जनजातीय कला, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को मिली वैश्विक प्रतिष्ठारायपुर। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि उस समय दर्ज हुई, जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री श्री क्रिस्टोफर लक्सन को छत्तीसगढ़ के बस्तर की विश्वविख्यात ढोकरा ट्री ऑफ लाइफ (जीवन वृक्ष) धातु शिल्पकृति भेंट की। प्रधानमंत्री की इस विशिष्ट कूटनीतिक सौगात ने न केवल बस्तर की हजारों वर्ष पुरानी जनजातीय कला को वैश्विक पहचान दिलाई है, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक समृद्धि, पारंपरिक शिल्प कौशल और आदिवासी विरासत को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा प्रदान की है।यह अवसर पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। राज्य की जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराएं और पारंपरिक हस्तशिल्प आज वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक पहचान का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को भेंट के लिए बस्तर की ढोकरा शिल्पकृति का चयन इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ की लोककला आज विश्व स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुकी है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, लोककलाओं और पारंपरिक शिल्पों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने के लिए विभिन्न योजनाओं और पहलों के माध्यम से कलाकारों तथा शिल्पकारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका सकारात्मक परिणाम है कि आज बस्तर की ढोकरा कला जैसी पारंपरिक विरासत वैश्विक कूटनीतिक उपहार का हिस्सा बनकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ा रही है।संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ भी राज्य की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण, प्रदर्शन और प्रचार-प्रसार के लिए लगातार प्रयासरत है। संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में विभाग लोककला, जनजातीय परंपराओं और पारंपरिक शिल्प को नई पीढ़ी से जोड़ने तथा उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में अनेक पहल कर रहा है। ढोकरा शिल्पकृति का वैश्विक स्तर पर सम्मानित होना इन प्रयासों की सार्थकता को भी रेखांकित करता है।बस्तर की ढोकरा कला विश्व की सबसे प्राचीन धातु शिल्प परंपराओं में से एक मानी जाती है। इसका निर्माण लॉस्ट वैक्स कास्टिंग अर्थात मोम सांचा ढलाई तकनीक से किया जाता है, जिसे विश्व की सबसे पुरानी धातु ढलाई विधियों में शामिल किया जाता है। कुशल जनजातीय शिल्पकार प्रत्येक कलाकृति को पूरी तरह हाथ से तैयार करते हैं, इसलिए हर शिल्पकृति अपनी बनावट, सौंदर्य और कलात्मक अभिव्यक्ति में अद्वितीय होती है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित यह शिल्प परंपरा बस्तर की सांस्कृतिक आत्मा और जनजातीय जीवन-दर्शन का जीवंत स्वरूप है।प्रधानमंत्री द्वारा भेंट की गई ट्री ऑफ लाइफ (जीवन वृक्ष) शिल्पकृति केवल एक कलात्मक वस्तु नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की भावना का सशक्त प्रतीक है। यह परस्पर जुड़ाव, नवजीवन, समृद्धि और मानव तथा प्रकृति के बीच संतुलन का संदेश देती है। भारतीय परंपरा में यह कल्पवृक्ष की अवधारणा का प्रतिनिधित्व करती है, वहीं न्यूजीलैंड के माओरी समुदाय की व्हाकापापा की अवधारणा से भी सामंजस्य स्थापित करती है, जो जीवन, प्रकृति और वंश परंपरा के गहरे संबंध को व्यक्त करती है। इस प्रकार यह शिल्पकृति सांस्कृतिक संवाद और वैश्विक मानवीय मूल्यों का भी प्रतीक बन गई है।बस्तर की ढोकरा कला केवल हस्तशिल्प नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, लोकविश्वास, प्रकृति के प्रति सम्मान और सतत जीवनशैली की अभिव्यक्ति है। यह कला स्थानीय शिल्पकारों की आजीविका को सशक्त बनाते हुए पर्यावरण-अनुकूल हस्तनिर्मित उत्पादों की परंपरा को भी आगे बढ़ाती है। प्रत्येक कलाकृति में जनजातीय समाज की सृजनात्मकता, प्रकृति से आत्मीय संबंध और सांस्कृतिक निरंतरता की झलक दिखाई देती है।प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस शिल्पकृति को अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक उपहार के रूप में चयनित किया जाना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक शक्ति की वैश्विक स्वीकार्यता का महत्वपूर्ण प्रमाण है। इससे राज्य के जनजातीय कलाकारों और शिल्पकारों का उत्साह बढ़ेगा, स्थानीय हस्तशिल्प को नए बाजार मिलेंगे तथा छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति और जनजातीय विरासत को विश्वभर में नई पहचान प्राप्त होगी।बस्तर की ढोकरा ट्री ऑफ लाइफ शिल्पकृति आज केवल एक उपहार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता, जनजातीय गौरव, पारंपरिक शिल्प कौशल और भारत की अमूल्य विरासत का ऐसा वैश्विक दूत बन गई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ का नाम और अधिक गौरवपूर्ण ढंग से स्थापित कर दिया है।
- -29 किस्तों में महिलाओं के खातों में पहुँचे 18,805 करोड़ रुपये से अधिक, आत्मनिर्भरता और सम्मान का बढ़ा विश्वासरायपुर । छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की दिशा में महतारी वंदन योजना एक ऐतिहासिक पहल के रूप में स्थापित हो चुकी है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित यह योजना महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दे रही, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और सम्मानजनक जीवन जीने की नई शक्ति भी प्रदान कर रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम आज प्रदेश के हर जिले में दिखाई दे रहे हैं।11 जुलाई 2026 को योजना की 29वीं किस्त जारी होने के साथ ही प्रदेश की लाखों पात्र महिलाओं के बैंक खातों में एक-एक हजार रुपये की सहायता राशि सीधे अंतरित की गई।योजना के प्रारंभ से अब तक 29 किस्तों के माध्यम से 18 हजार 805 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं को सीधे उनके खातों में उपलब्ध कराई जा चुकी है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा है कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उनके आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाई प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल मिलने से वे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में प्रभावी भागीदारी निभा रही हैं और अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण पर अधिक ध्यान दे पा रही हैं।प्रदेशभर से मिल रही प्रतिक्रियाएं इस योजना की सफलता की सशक्त कहानी कह रही हैं। बालोद जिले की ग्राम बघमरा निवासी श्रीमती देवकी विश्वकर्मा योजना से प्राप्त राशि का उपयोग घरेलू खर्च, बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों की खरीद तथा सिलाई-कढ़ाई के कार्यों में करती हैं।श्रीमती जामवंती विश्वकर्मा बताती हैं कि यह राशि उनके परिवार के लिए हर महीने एक मजबूत आर्थिक सहारा बन गई है। वहीं श्रीमती राधिका सोनवानी कहती हैं कि योजना की सहायता से वे अपने बच्चों की स्कूल फीस समय पर जमा कर पा रही हैं, जिससे परिवार पर आर्थिक बोझ कम हुआ है।जशपुर जिले की श्रीमती ज्योति पांडेय के अनुसार अब उन्हें छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। श्रीमती रेहाना खातून ने योजना से मिली राशि के सहारे अपना छोटा घरेलू व्यवसाय शुरू किया और आज वे स्वयं आय अर्जित कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। श्रीमती कविता शर्मा और श्रीमती अंजू शर्मा का कहना है कि नियमित सहायता राशि ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास दिया है तथा सम्मानपूर्वक जीवन जीने का नया आधार प्रदान किया है।इसी प्रकार गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम डुमरिया की श्रीमती बसंती धुर्वे बताती हैं कि महतारी वंदन योजना की 29वीं किस्त मिलने से घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति में काफी सहायता मिली है। उनका मानना है कि यह योजना महिलाओं को केवल आर्थिक सहयोग नहीं देती, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी देती है।योजना का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि महिलाओं को प्रतिमाह मिलने वाली सहायता राशि उनके हाथों में आर्थिक निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत कर रही है। इससे परिवारों में महिलाओं की सहभागिता बढ़ी है, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है तथा छोटे-छोटे स्वरोजगार और बचत की संस्कृति को भी प्रोत्साहन मिला है।प्रदेश की लाखों लाभार्थी महिलाओं ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि महतारी वंदन योजना उनके जीवन में सम्मान, आत्मविश्वास और आर्थिक सुरक्षा का नया आधार बनी है।
- -सहकारी समिति की सुचारू व्यवस्था से खेती की तैयारियां हुईं आसानरायपुर ।किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने के जिला प्रशासन के प्रयासों का लाभ अब सीधे खेतों तक पहुंच रहा है। खैरागढ़ जिले के ग्राम अवेली के किसान श्री गेंद लाल भी उन किसानों में शामिल हैं, जिन्हें खरीफ सीजन के दौरान आवश्यक उर्वरक समय पर प्राप्त हुआ। इससे उनकी खेती की तैयारियां बिना किसी बाधा के पूरी हो सकीं।श्री गेंद लाल ने बताया कि उन्हें समिति सलोनी से उनकी पात्रता अनुसार 6 बोरी यूरिया, 3 बोरी डीएपी, 2 बोरी सुपर फॉस्फेट तथा 1 बोरी पोटाश प्राप्त हुआ। आवश्यक उर्वरक आसानी से उपलब्ध होने के कारण उन्होंने समय पर बुवाई और फसल प्रबंधन का कार्य शुरू कर दिया है।उन्होंने कहा कि पहले किसानों को खाद की उपलब्धता को लेकर चिंता बनी रहती थी, लेकिन इस वर्ष समिति में पर्याप्त भंडारण और सुव्यवस्थित वितरण व्यवस्था के कारण उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। समय पर खाद मिलने से खेती के प्रति उनका उत्साह बढ़ा है और वे बेहतर उत्पादन की उम्मीद कर रहे हैं। जिले में कलेक्टर श्री इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल के मार्गदर्शन में उर्वरकों के भंडारण एवं वितरण की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। इसी का परिणाम है कि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप समय पर खाद उपलब्ध हो रही है। इससे न केवल कृषि कार्यों को गति मिली है, बल्कि किसानों का सहकारी व्यवस्था और प्रशासन पर विश्वास भी मजबूत हुआ है।
- -18 जुलाई तक 14 वर्ष की बेटियों को लगेगा निःशुल्क जीवनरक्षक टीकारायपुर । धमतरी जिले में बेटियों को सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ी पहल की गई है। जिले में आज से 18 जुलाई 2026 तक विशेष एचपीवी (HPV) टीकाकरण सप्ताह का आगाज हो गया है। इस महाअभियान के तहत 14 वर्ष की आयु की सभी पात्र बालिकाओं को स्वास्थ्य विभाग द्वारा निःशुल्क जीवनरक्षक HPV टीका लगाया जा रहा है।स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए स्कूलों से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों तक व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने अभियान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण ही सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि समय पर लगाया गया HPV टीका इस गंभीर कैंसर से बचाव का सबसे सुरक्षित, प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित माध्यम है। यह टीका भविष्य में कैंसर के जोखिम को लगभग समाप्त कर देता है, इसलिए सभी पात्र बालिकाओं का टीकाकरण बेहद जरूरी है। अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा शिक्षा विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। जिला अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC),प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) एवं स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (HWC),जिले के चिन्हित विद्यालय (स्कूल्स) और निर्धारित विशेष टीकाकरण सत्र स्थल पर निःशुल्क उपलब्ध होगा।धमतरी कलेक्टर ने जिले के सभी माता-पिता और अभिभावकों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है।कलेक्टर ने अपने संदेश में कहा कि बेटियों का स्वस्थ भविष्य हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। HPV टीका पूरी तरह सुरक्षित है। सभी अभिभावकों से आग्रह करता हूँ कि किसी भी प्रकार की भ्रांति या अफवाह पर ध्यान न दें और स्वास्थ्य विशेषज्ञों पर भरोसा रखकर अपनी 14 वर्ष की बेटियों को यह टीका अवश्य लगवाएं। आपका यह एक छोटा सा निर्णय आपकी बेटी को जीवनभर की सुरक्षा दे सकता है। उन्होंने जिले के सभी जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों, स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं से अपील की है कि वे इसे एक जन-आंदोलन का रूप दें। उन्होंने संकल्प दोहराया कि जिले की एक भी पात्र बालिका इस जीवनरक्षक टीके से वंचित नहीं रहनी चाहिए।
- -पुनर्वास केंद्र पहुंचकर खाद्य विभाग ने किया राशन कार्डों का ई-केवाईसीरायपुर। पुनर्वासित (विस्थापित या स्थानांतरित) परिवारों को खाद्य सुरक्षा का निर्बाध लाभ सुनिश्चित करने के लिए, उन्हें आधार-सीडेड राशन कार्ड (आधार और ई-केवाईसी अपडेटेड) के माध्यम से राष्ट्रीय और राज्य खाद्य सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाता है। इसके तहत उन्हें हर महीने पात्र श्रेणी के अनुसार 5 किलो से 35 किलो तक मुफ्त खाद्यान्न का अधिकार प्राप्त है।बीजापुर जिले में पुनर्वासित परिवारों को खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ बिना किसी परेशानी के मिले, इसके लिए जिला प्रशासन ने मैदानी स्तर पर पहल की है। कलेक्टर श्री विश्वदीप के निर्देशन और जिला खाद्य अधिकारी के मार्गदर्शन में खाद्य विभाग की टीम ने पुनर्वास केंद्र पहुंचकर सभी पात्र हितग्राहियों के राशन कार्डों का ई-केवाईसी पूरा किया।अभियान के दौरान विभागीय अधिकारियों ने हितग्राहियों के जरूरी दस्तावेजों का मौके पर ही सत्यापन किया और ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी कराई। इससे पुनर्वासित परिवारों को ई-केवाईसी के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़े। यह अभियान राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पात्र परिवारों को नियमित राशन उपलब्ध कराने और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया गया। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ई-केवाईसी पूरा होने से राशन कार्ड अद्यतन रहेंगे। इससे हितग्राहियों को उचित मूल्य की दुकानों से समय पर खाद्यान्न लेने में कोई दिक्कत नहीं होगी। विभाग लोगों को समय पर ई-केवाईसी कराने के लिए लगातार जागरूकता कार्यक्रम संचालित कर रहा है। विभाग ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप हर पात्र परिवार तक खाद्य सुरक्षा का लाभ पहुंचाना सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसी कड़ी में आगे भी जिले के दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष शिविर लगाकर पात्र हितग्राहियों को सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
- -सेवा सेतु आम नागरिकों के लिए वरदान, धमतरी के सागर को मिला सीधा लाभ-“सेवा सेतु - जनता के द्वार, डिजिटल सरकार” पहल से सरकारी दफ्तरों के चक्करों से मुक्ति, समय और पैसे दोनों की हो रही बचतरायपुर। सेवा सेतु छत्तीसगढ़ के नागरिकों तक डिजिटल सेवाएँ लाने का एक खास पहल है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य हर एक नागरिक, विशेषतरू दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों में रहने वालों, तक सरकार की योजनाएँ और सुविधाएँ पहुंचाना हैं। सेवा सेतु सरकार की डिजिटल परिवर्तन यात्रा में एक महत्वपूर्ण अध्याय हैं। छत्तीसगढ़ शासन की सुशासन और डिजिटल गवर्नेंस की महत्वाकांक्षी पहल “सेवा सेतु - जनता के द्वार, डिजिटल सरकार” आम नागरिकों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म ने न केवल सरकारी सेवाओं को पारदर्शी और त्वरित बनाया है, बल्कि नागरिकों का सिस्टम पर भरोसा भी मजबूत किया है। अब विभिन्न शासकीय प्रमाण पत्रों के लिए लोगों को दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ रही है। घर बैठे ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल सत्यापन और समयबद्ध डिलीवरी से प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। डिजिटल सेवा के सुगम क्रियान्वयन का ताजा उदाहरण धमतरी जिले के कुरूद तहसील में देखने को मिला। यहाँ के निवासी श्री सागर को अपने एक जरूरी शासकीय कार्य के लिए तत्काल निवास प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी। पारंपरिक प्रक्रिया को याद करते हुए वे बताते हैं कि पहले प्रमाण पत्र बनवाने का मतलब था,कई दिनों की भागदौड़, लंबी लाइनें, दैनिक काम का नुकसान और मानसिक परेशानी। लेकिन सेवा सेतु ने इस पूरी तस्वीर को बदल दिया है।जब सागर को सेवा सेतु पोर्टल की जानकारी मिली, तो उन्होंने घर बैठे ही ऑनलाइन आवेदन किया और जरूरी दस्तावेज अपलोड कर दिए। विभाग द्वारा त्वरित डिजिटल सत्यापन के बाद उनका आवेदन स्वीकृत हुआ और डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त निवास प्रमाण पत्र ऑनलाइन जारी कर दिया गया, जिसे उन्होंने आसानी से डाउनलोड कर प्रिंट निकाल लिया। सेवा सेतु के तीन मुख्य स्तंभ जिससे जनता को राहत मिली।आवेदन से लेकर प्रमाण पत्र जारी होने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों के लिए यह योजना अत्यंत हितकारी साबित हो रही है, क्योंकि अब उन्हें जिला या तहसील मुख्यालय आने-जाने का किराया और समय नहीं गंवाना पड़ता। डिजिटल सत्यापन प्रणाली लागू होने से शासकीय कार्यालयों में अनावश्यक भीड़ कम हुई है, जिससे प्रशासनिक कार्यक्षमता में भी सुधार आया है। सेवा सेतु पोर्टल केवल एक तकनीकी माध्यम नहीं है, बल्कि यह नागरिक-केंद्रित शासन (Citizen-Centric Governance) की दिशा में राज्य सरकार का एक बड़ा कदम है। सुशासन और पारदर्शिता की इस प्रतिबद्धता ने यह साबित कर दिया है कि यदि तकनीक का सही इस्तेमाल किया जाए, तो सरकार सचमुच जनता के द्वार तक पहुँच सकती है। धमतरी के सागर जैसे लाखों नागरिक आज इस व्यवस्था की सराहना कर रहे हैं।
- -उप मुख्यमंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद सभी निकायों को राशि आबंटन के आदेश जारी-लंबित भुगतानों के साथ ही मरम्मत व संधारण कार्यों तथा अतिवृष्टि जैसी परिस्थितियों से निपटने में मिलेगी सहायतारायपुर ।नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश के सभी 194 नगरीय निकायों में विभिन्न मदों में कुल 58 करोड़ 43 लाख 14 हजार रुपए आबंटित किए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद आज विभाग ने सभी निकायों को राशि आबंटन के आदेश जारी कर दिए हैं।नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रदेश के 14 नगर निगमों को कुल 27 करोड़ 82 लाख 45 हजार रुपए आबंटित किए हैं। वहीं 56 नगर पालिकाओं को कुल 18 करोड़ 71 लाख 39 हजार रुपए तथा 124 नगर पंचायतों को कुल 11 करोड़ 89 लाख 30 हजार रुपए आबंटित किए गए हैं। विभाग द्वारा निकायों को अनिवार्य निधि, चुंगी क्षतिपूर्ति, उत्पाद कर, यात्री कर, बार तथा मुद्रांक मद के अंतर्गत यह राशि आबंटित की गई है। विभाग द्वारा जारी इस राशि से नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर लंबित भुगतानों के साथ ही मरम्मत व संधारण कार्यों तथा अतिवृष्टि जैसी परिस्थितियों से निपटने में भी सहायता मिलेगी।
- -उप मुख्यमंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राशि स्वीकृति का परिपत्र जारीरायपुर ।राज्य शासन ने जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ से लाहौद मार्ग के डोंगाकोहरौद बस्ती में सड़क निर्माण के लिए 6 करोड़ 5 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। इस राशि से 4.34 किमी सड़क का निर्माण किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राज्य शासन ने मंत्रालय से राशि स्वीकृति के संबंध में प्रमुख अभियंता को परिपत्र जारी कर दिया है।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्य में प्रयुक्त की जाने वाली सामग्रियों एवं संपूर्ण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता में कमी पाये जाने पर उत्तरदायित्व का निर्धारण करते हुए नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।लोक निर्माण विभाग ने प्रमुख अभियंता को कार्य की निविदा समय-सीमा में करने, निर्माण कार्य प्राक्कलन व कार्य संपादित करने में मितव्ययिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने निर्माण एजेंसी से अनुबंधित समय-सीमा में काम पूर्ण किया जाना सुनिश्चित कराने को कहा है। कार्य पूर्ण किये जाने के लिए अनावश्यक समय-सीमा वृद्धि नहीं किए जाने के भी निर्देश विभाग ने दिए हैं। अपरिहार्य एवं नियंत्रण से बाहर मान्य कारणों के आधार पर ही सक्षम अधिकारी द्वारा समय-सीमा में वृद्धि की जा सकेगी।
- गौरेला पेंड्रा मरवाही । ग्राम पंचायत डुमरिया विकासखंड गौरेला की श्रीमती बसंती धुर्वे के जीवन में महतारी वंदन योजना सकारात्मक बदलाव लेकर आई है। उन्होंने बताया कि उन्हें महतारी वंदन योजना की 29वीं किस्त की राशि उनके बैंक खाते में प्राप्त हो गई है, जिससे उन्हें अपनी दैनिक आवश्यकताओं और घरेलू खर्चों को पूरा करने में सहायता मिल रही है। श्रीमती बसंती धुर्वे का कहना है कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान कर रही है। नियमित रूप से मिलने वाली सहायता राशि से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे पा रही हैं। उन्होंने इस जनकल्याणकारी योजना के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे महिलाओं को आगे बढ़ने, आत्मनिर्भर बनने और सम्मानपूर्वक जीवन जीने की प्रेरणा मिल रही है।
- - लिटिया सेमरिया 220/132 केवी उपकेंद्र में 320 एमवीए ट्रांसफॉर्मेशन कैपेसिटी के दो पावर ट्रांसफार्मरों का सफल ऊर्जीकरण- औद्योगिक विकास के लिये पारेषण व्यवस्था होगी और अधिक सुदृढ़,- सेमीकंडक्टर पार्क एवं नए औद्योगिक क्षेत्र को मिलेगी गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्तिरायपुर । छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने प्रदेश की पारेषण अधोसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रबंध निदेशक श्री राजेश कुमार शुक्ला के करकमलों द्वारा 220/132 केवी लिटिया सेमरिया उपकेंद्र में स्थापित 160-160 एमवीए क्षमता के दो 220/132 केवी पावर ट्रांसफार्मरों का सफलतापूर्वक ऊर्जीकरण किया गया। प्रथम ट्रांसफार्मर का ऊर्जीकरण सायं 5:22 बजे तथा द्वितीय ट्रांसफार्मर का ऊर्जीकरण सायं 5:27 बजे किया गया। दोनों ट्रांसफार्मरों के सफल ऊर्जीकरण से उपकेंद्र में 320 एमवीए की अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मेशन कैपेसिटी (Transformation Capacity) उपलब्ध हो गई है।इस परियोजना से राजनांदगांव एवं दुर्ग क्षेत्र की पारेषण व्यवस्था को उल्लेखनीय मजबूती मिलेगी। बढ़ती विद्युत मांग के अनुरूप विद्युत भार का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा तथा क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित होगी। साथ ही भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पारेषण तंत्र भी अधिक सक्षम बनेगा।प्रबंध निदेशक श्री राजेश कुमार शुक्ला ने इस उपलब्धि पर परियोजना से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि राज्य में औद्योगिक विकास एवं उपभोक्ताओं को विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए पारेषण नेटवर्क का निरंतर विस्तार और आधुनिकीकरण किया जा रहा है। लिटिया सेमरिया उपकेंद्र में उपलब्ध हुई अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मेशन कैपेसिटी से न केवल वर्तमान विद्युत मांग को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सकेगा, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप भी पर्याप्त क्षमता उपलब्ध रहेगी।उन्होंने बताया कि 220/132 केवी लिटिया सेमरिया उपकेंद्र से 132 केवी वोल्टेज स्तर पर राजनांदगांव जिले के पटेवा में प्रस्तावित इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (ईएमसी-2.0/सेमीकंडक्टर पार्क) तथा राजनांदगांव जिले के बिजेभाट में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र को विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त होगा। इसके साथ ही इस परियोजना का लाभ दुर्ग जिले से लेकर राजनांदगांव तक प्राप्त होगा। इससे क्षेत्र में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ घरेलू, कृषि एवं अन्य उपभोक्ताओं को भी अधिक विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक (लाइन) श्री संजय पटेल, कार्यपालक निदेशक (पीसी एंड आरए) श्री के. एस. मिनोठिया, कार्यपालक निदेशक (ट्रांसमिशन) श्री वी. के. दीक्षित, डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के कार्यपालक निदेशक (ओ एंड एम) श्री संजय आर. बी. खंडेलवाल, कार्यपालक निदेशक, दुर्ग क्षेत्र श्री शिरीष सालेट, ट्रांसमिशन कंपनी के मुख्य अभियंता (सब-स्टेशन) श्री अब्राहम वर्गीज, मुख्य अभियंता (परियोजना) श्री प्रसन्ना गोसावी,अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री पी. पी. सिंह, श्री आर. के. तिवारी एवं श्री आर. के. मिश्रा, अधीक्षण अभियंता श्री करुणेश यादव एवं श्री सुनील भुआर्य सहित कार्यपालन अभियंता, सहायक अभियंता तथा परियोजना से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
- रायपुर - रायपुर नगर पालिक निगम जोन क्रमांक 4 क्षेत्र के अंतर्गत राजधानी शहर रायपुर शहर में जयस्तम्भ चौक के समीप नाले के खुले चेम्बर के सम्बन्ध में जनशिकायत मिलते ही उसे तत्काल संज्ञान में लेते हुए नगर पालिक निगम जोन क्रमांक 4 की टीम ने नाले के चेम्बर को तत्काल आवश्यक सुधार एवं मरम्मत कार्य करवाते हुए ढक्कन लगाकर कव्हर किया एवं प्राप्त जनशिकायत का जोन के स्तर पर त्वरित निदान किया.
- रायपुर -रायपुर नगर पालिक निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे एवं आयुक्त श्री संबित मिश्रा के निर्देश पर आज रायपुर नगर पालिक निगम जोन क्रमांक 9 स्वास्थ्य विभाग द्वारा जोन क्षेत्र के अंतर्गत महात्मा गाँधी वार्ड क्रमांक 8 क्षेत्र में जलभराव क्षेत्र में डेकथलान के समीप मार्ग में नाले पर कब्जा जमाकर निर्मित अवैध पाटा जेसीबी मशीन की सहायता से तोड़ने एवं सफाई में आ रही बाधा को हटाने की कार्रवाई जोन 9 जोन कमिश्नर श्री राकेश शर्मा के मार्गनिर्देशन एवं कार्यपालन अभियंता श्री शरद ध्रुव, जोन स्वास्थ्य अधिकारी श्री बारोन बंजारे, श्री उमेश नामदेव, स्वच्छता निरीक्षक श्री भोला तिवारी की उपस्थिति में की गयी.नाले पर निर्मित अवैध पाटे को हटाने से गंदे पानी की निकासी का प्रबंधन सुगम बनेगा एवं बारिश में क्षेत्र में जलभराव की समस्या नहीं आएगी.नगर निगम जोन 9 स्वास्थ्य विभाग द्वारा नाले पर निर्मित अवैध पाटा तोड़ने के पश्चात नाले की सफाई करवाई एवं जलनिकास सुगम बनाया.
- -गीदम (दंतेवाड़ा), कुनकुरी (जशपुर), मनेन्द्रगढ़, जांजगीर-चांपा एवं कबीरधाम में 50-50 एमबीबीएस सीटों सहित कुल 250 सीटों को मिली स्वीकृति-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा का जताया आभाररायपुर / राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) से गीदम (दंतेवाड़ा), कुनकुरी (जशपुर), मनेन्द्रगढ़, जांजगीर-चांपा एवं कबीरधाम में 50-50 एमबीबीएस सीटों वाले 5 नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसके साथ ही प्रदेश में एक साथ कुल 250 नई एमबीबीएस सीटों का विस्तार होगा।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास का ऐतिहासिक पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में स्वास्थ्य और शिक्षा सबसे बड़ी पूंजी हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसा सुदृढ़, समावेशी और आधुनिक स्वास्थ्य तंत्र विकसित करना है, जहाँ प्रदेश का कोई भी युवा डॉक्टर बनने के अपने सपने से वंचित न रहे और किसी भी नागरिक को बेहतर उपचार के लिए दूर-दराज़ के शहरों का रुख न करना पड़े।मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे गीदम (दंतेवाड़ा) से लेकर उत्तर छत्तीसगढ़ के आदिवासी वनांचल कुनकुरी (जशपुर) तक नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना इस बात का प्रमाण है कि डबल इंजन सरकार विकास के अवसरों को प्रदेश के अंतिम छोर तक पहुँचा रही है। यह केवल नए संस्थानों की स्थापना नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने और दूरस्थ अंचलों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत नींव रखने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन ला रही है। प्रदेश के दूरस्थ, आदिवासी और आकांक्षी क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से स्थानीय युवाओं को अपने ही राज्य में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी और क्षेत्रीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी व्यापक सुधार आएगा।मुख्यमंत्री ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा के प्रति समस्त छत्तीसगढ़वासियों की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन से प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नए मेडिकल कॉलेज केवल शैक्षणिक संस्थान नहीं होंगे, बल्कि चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय मानव संसाधन विकास के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित होंगे। इससे न केवल डॉक्टरों की नई पीढ़ी तैयार होगी, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर उपचार की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी, प्रदेश के युवाओं के सपनों को नई दिशा देगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाएगी।
- -उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राशि स्वीकृति का परिपत्र जारी*बिलासपुर/ राज्य शासन ने जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ से लाहौद मार्ग के डोंगाकोहरौद बस्ती में सड़क निर्माण के लिए 6 करोड़ 5 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। इस राशि से 4.34 किमी सड़क का निर्माण किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राज्य शासन ने मंत्रालय से राशि स्वीकृति के संबंध में प्रमुख अभियंता को परिपत्र जारी कर दिया है।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्य में प्रयुक्त की जाने वाली सामग्रियों एवं संपूर्ण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता में कमी पाये जाने पर उत्तरदायित्व का निर्धारण करते हुए नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।लोक निर्माण विभाग ने प्रमुख अभियंता को कार्य की निविदा समय-सीमा में करने, निर्माण कार्य प्राक्कलन व कार्य संपादित करने में मितव्ययिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने निर्माण एजेंसी से अनुबंधित समय-सीमा में काम पूर्ण किया जाना सुनिश्चित कराने को कहा है।कार्य पूर्ण किये जाने के लिए अनावश्यक समय-सीमा वृद्धि नहीं किए जाने के भी निर्देश विभाग ने दिए हैं। अपरिहार्य एवं नियंत्रण से बाहर मान्य कारणों के आधार पर ही सक्षम अधिकारी द्वारा समय-सीमा में वृद्धि की जा सकेगी।
- भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई के आयुक्त राजीव कुमार पांडेय का स्थानांतरण अपर आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग, नवा रायपुर के पद पर होने पर निगम परिवार द्वारा एक भव्य एवं भावपूर्ण विदाई समारोह का आयोजन किया गया। होटल अमित पार्क इंटरनेशनल, भिलाई में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में अधिकारियों और कर्मचारियों ने नम आंखों से अपने लोकप्रिय आयुक्त को विदाई दी।अधिकारियों के विशेष आग्रह और स्नेहपूर्ण निवेदन पर निगम आयुक्त अपने सपरिवार एवं बच्चों के साथ कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। विदाई समारोह के दौरान पूरा माहौल काफी भावुक नजर आया। उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने निगम आयुक्त के कार्यकाल के दौरान किए गए विकास कार्यों, उनके कुशल मार्गदर्शन और सौम्य व्यवहार को याद किया। कार्यक्रम के दौरान सभी वक्ताओं ने उनके उच्च व्यक्तित्व, कुशल प्रशासन, कार्य के प्रति समर्पण, बेहतर कार्यशैली एवं तत्काल निर्णय लेने की क्षमता सहित कई खूबियों को याद किये ।निगम आयुक्त सभी अधिकारियों के विशेष कार्यों को याद करते हुए कहा कि सभी बेहतर कार्य करते हैं। जो भी बड़ी परियोजना संचालित है उसे ज़िम्मेदारी से निर्वहन करते हुए पूर्ण करने की जिम्मेदारी दिये हैं जिससे संपूर्ण शहर वासियों को आने वाले समय में लाभ मिले । निगम आयुक्त प्रधानमंत्री आवास योजना, निर्माणाधीन स्विमिंग पूल, नालंदा परिसर, हॉर्स राइडिंग, स्केटिंग ट्रैक, रेलवे किनारे बायपास रोड जैसे अन्य बड़ी परियोजना को याद किये । उन्होंने कार्य के दौरान जनप्रतिनिधियों, शहरवासियों एवं अधिकारी व कर्मचारियों के साथ अनजाने में गलती के लिए खेद प्रकट किये।इस अवसर पर भिलाई निगम के तमाम वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य अभियंता अजीत कुमार तिग्गा, उपायुक्त डी के कोसरिया, जोन आयुक्त अमरनाथ दुबे, येशा लहरे, कुलदीप गुप्ता, कार्यपालन अभियंता संजय अग्रवाल, संजय वर्मा, अनिल सिंह, नितेश मेश्राम, लेखाधिकारी चन्द्रभूषण साहू, स्वास्थ्य अधिकारी जावेद अली, उद्यान सह जनसंपर्क अधिकारी तिलेश्वर साहू, राजस्व अधिकारी जे पी तिवारी, सहायक अभियंता श्वेता वर्मा, श्वेता माहेश्वर, चंद्रकांत साहू, बसंत साहू, वरिष्ठ स्वच्छता निरीक्षक के के सिंह, अनिल मेश्राम, दौलत चंद्राकार, शंकर सुवन मरकाम, पुरुषोत्तम सिन्हा एवं अशोक देवांगन सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी शामिल रहे। सभी ने निगम आयुक्त को स्मृति चिन्ह भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य और नवीन दायित्वों के लिए शुभकामनाएं दीं।
- भिलाईनगर। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की अधिकारी सुश्री सुरूचि सिंह ने सोमवार को नगर पालिक निगम भिलाई के आयुक्त के रूप में विधिवत पदभार ग्रहण कर लिया। राज्य शासन द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश के तहत उन्हें नगर पालिक निगम भिलाई का नया आयुक्त नियुक्त किया गया है। इससे पूर्व वे जिला पंचायत राजनांदगांव की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के रूप में अपनी सेवाएं दे रही थीं।नगर निगम मुख्यालय पहुंचने पर निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सुश्री सिंह का आत्मीय स्वागत किया। आयुक्त सुश्री सुरूचि सिंह का शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र नागरिक तक पारदर्शिता एवं गुणवत्ता के साथ पहुंचाना उनकी प्राथमिकता होगी। पदभार ग्रहण के दौरान निगम के सभी विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने नवपदस्थ आयुक्त का स्वागत करते हुए उन्हें निगम की वर्तमान परियोजनाओं एवं विभिन्न विभागों की प्रगति से अवगत कराया। राज्य शासन द्वारा हाल ही में किए गए प्रशासनिक फेरबदल के अंतर्गत आईएएस अधिकारी सुश्री सुरूचि सिंह को नगर पालिक निगम भिलाई का आयुक्त नियुक्त किया गया है। उनके प्रशासनिक अनुभव एवं कार्यकुशलता से भिलाई नगर निगम में विकास कार्यों को नई दिशा एवं गति मिलेगी।
- -447 लोगों का निःशुल्क उपचार, आयुष्मान और वय वंदन कार्ड का भी मिला लाभरायपुर । ग्रामीण और सुदूर इलाकों में आयोजित होने वाले निःशुल्क मेगा मेडिकल कैंप (Mega Medical Camps) आर्थिक रूप से कमजोर और दूरदराज के मरीजों के लिए एक वरदान साबित होते हैं l ये शिविर गाँव के दरवाजे तक उच्च-स्तरीय चिकित्सा, विशेषज्ञ परामर्श, मुफ्त दवाइयाँ और गंभीर बीमारियों की प्रारंभिक जाँच सीधे पहुँचाकर ग्रामीणों को बड़ी राहत देते हैं lसुदूर वनांचल के सुकमा जिले के दूरस्थ ग्राम पंचायत गादीरास में जिला प्रशासन की पहल से आयोजित निःशुल्क मेगा मेडिकल कैंप ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत साबित हुआ। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में कलेक्टर श्री अमित कुमार की विशेष पहल पर आयोजित इस शिविर में 447 ग्रामीणों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं और निःशुल्क स्वास्थ्य जांच का लाभ मिला। शिविर में आंध्र प्रदेश के ग्रेट ईस्टर्न मेडिकल स्कूल एंड हॉस्पिटल, रागोलू-श्रीकाकुलम के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने जिला स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर मरीजों की जांच और उपचार किया। मेडिसिन, जनरल सर्जरी, बाल रोग और हड्डी रोग विशेषज्ञों ने प्रत्येक मरीज का परीक्षण कर आवश्यक सलाह दी। मेडिकल कैंप में सभी मरीजों को निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। साथ ही ब्लड प्रेशर, शुगर, ईसीजी और 2डी-ईको जैसी महत्वपूर्ण जांचें भी बिना किसी शुल्क के की गईं। इससे दूरस्थ क्षेत्र के लोगों को बेहतर इलाज के साथ आर्थिक राहत भी मिली।जांच के दौरान गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को आगे के उपचार के लिए उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया गया। इनमें 12 अस्थि रोग, 10 शिशु रोग और 27 जनरल सर्जरी के मरीज शामिल हैं। जिला प्रशासन ने इन मरीजों के आवागमन के लिए निःशुल्क बस सुविधा भी उपलब्ध कराई, ताकि इलाज में किसी प्रकार की परेशानी न हो। शिविर के दौरान पात्र हितग्राहियों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी दिया गया। कुल 62 आयुष्मान कार्ड और 10 वय वंदन कार्ड वितरित किए गए, जिससे जरूरतमंद परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिलेगा।गादीरास में आयोजित यह निःशुल्क मेगा मेडिकल कैंप इस बात का उदाहरण है कि जिला प्रशासन स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं, निःशुल्क जांच, दवाइयां, रेफरल सुविधा और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर मिलने से ग्रामीणों में खुशी और विश्वास दोनों बढ़े हैं। यह पहल दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में एक सफल और प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।
- -प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से साकार हुआ श्री श्यामसिंह चंद्रवंशी का वर्षों पुराना सपनारायपुर । बरसों तक दूसरों के लिए ईंट-पत्थरों से सपनों का घर खड़ा करने वाले श्री श्यामसिंह चंद्रवंशी के मन में भी एक छोटा-सा सपना पलता था। एक ऐसा पक्का घर, जिसमें उनका परिवार सुरक्षित और सम्मान के साथ रह सके। मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के विकासखंड मोहला के ग्राम गुहाटोला निवासी श्री श्यामसिंह खेती के साथ राजमिस्त्री का काम कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सीमित आय के कारण उनका परिवार वर्षों तक कच्चे मकान में रहने को विवश था। बरसात के दिनों में टपकती छत, तेज हवाओं का डर और हर मौसम में परिवार की सुरक्षा की चिंता उनके जीवन का हिस्सा बन चुकी थी। ऐसे कठिन समय में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) उनके जीवन में उम्मीद की नई किरण बनकर आई। योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता ने उस सपने को आकार देना शुरू किया, जिसे वे वर्षों से अपने मन में संजोए हुए थे। सबसे अच्छी बात यह रही कि एक मिस्त्री होने के नाते उन्होंने अपना घर किसी और से नहीं, बल्कि अपने ही हाथों से तैयार किया।उन्होंने बताया कि मैं वर्षों से दूसरों के लिए पक्के मकान बनाता आया हूँ। जब भी किसी का घर तैयार करता था, तब मन में यही इच्छा होती थी कि एक दिन मेरा भी अपना पक्का घर हो। प्रधानमंत्री आवास योजना ने मेरा यह सपना सच कर दिया। आज मैंने अपने हाथों से अपने परिवार के लिए सुरक्षित और मजबूत घर बनाया है। उनके लिए यह एक मकान नहीं था, बल्कि वर्षों के संघर्ष, मेहनत और उम्मीदों का साकार रूप था। अब उनका परिवार नए पक्के मकान में सम्मान और सुरक्षा के साथ रह रहा है। बारिश की रातों में छत टपकने का डर नहीं है, और तेज हवाओं के साथ घर टूटने की चिंता भी खत्म हो गई है। बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिला है, जहाँ वे निश्चिंत होकर पढ़ाई कर सकते हैं। परिवार के चेहरों पर जो सुकून दिखाई देता है, वह शासकीय योजना की वास्तविक सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है। श्री चंद्रवंशी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि यह योजना गरीब परिवारों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही है।
- -पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से किसानों को मिली बड़ी राहतरायपुर। पैडी ट्रांसप्लांटर (धान रोपने वाली मशीन) का उपयोग खेतों में धान की रोपाई के लिए किया जाता है स यह मशीन पौधों को सही दूरी और समान गहराई पर मिट्टी में लगाती है, जिससे मजदूरों की भारी बचत होती है और पैदावार में 10-20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की जाती है।बालोद जिले में आधुनिक कृषि तकनीकों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। पारंपरिक खेती के तरीकों में बदलाव की यह तस्वीर गुण्डरदेही विकासखंड के ग्राम पंचायत भरदाकला में साफ दिख रही है। यहां के सरपंच श्री क्रांति भूषण साहू ने अपने खेतों में पैडी ट्रांसप्लांटर यानी धान रोपने वाली मशीन का उपयोग शुरू कर क्षेत्र के किसानों के लिए नई राह दिखाई है।लगभग 35 से 40 एकड़ भूमि पर खेती करने वाले श्री साहू ने इस वर्ष 10 से 12 एकड़ रकबे में पैडी ट्रांसप्लांटर के माध्यम से धान की रोपाई की। उनका कहना है कि पहले मजदूरों से रोपाई कराने में 20 से 25 दिन लग जाते थे। मशीन से यह काम बेहद कम समय में और ज्यादा सटीकता से हो गया। मशीन से पौधे एक निश्चित दूरी और सीधी कतारों में रोपे जाते हैं। इससे फसल की बढ़वार बेहतर होती है और बाद में निंदाई-गुड़ाई में भी आसानी होती है। कृषि सीजन में मजदूरों की किल्लत एक बड़ी समस्या है। ऐसे में यह तकनीक किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है।श्री साहू के अनुसार नर्सरी के लिए ट्रे और अन्य संसाधनों पर शुरुआत में थोड़ा अतिरिक्त खर्च आता है, लेकिन बड़े पैमाने पर खेती के लिए यह तकनीक लंबे समय में काफी किफायती है। उन्होंने कहा, आने वाले समय में मजदूरों की समस्या और समय की कमी को देखते हुए खेती में मशीनीकरण ही एकमात्र विकल्प है। धान रोपाई के लिए पैडी ट्रांसप्लांटर सबसे बेहतरीन और लाभकारी तरीका है।इस आधुनिक बदलाव से न सिर्फ किसानों की मेहनत कम हुई है, बल्कि समय पर रोपाई होने से पैदावार बढ़ने की भी उम्मीद है। कृषि विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में क्षेत्र के अन्य किसान भी अब इस तकनीक को समझकर अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
- -कृषि यंत्रीकरण योजना से आधुनिक और लाभकारी खेती की ओर बढ़े किसान के कदमरायपुर ।आधुनिक दौर में खेती-किसानी को उन्नत और मुनाफे का सौदा बनाने में कृषि यंत्रों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो चुकी है। राज्य शासन की कृषि यंत्रीकरण योजना आज छोटे और मझोले किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इसका एक जीवंत उदाहरण विकासखण्ड बिलाईगढ़ के ग्राम गधाभाटा में देखने को मिला है, जहाँ के प्रगतिशील कृषक तिहारूराम चंद्रा पिता जगनथिया का खुद का ट्रैक्टर खरीदने का सपना साकार हुआ है।ग्राम झुमका में आयोजित भव्य सुशासन शिविर में प्रभारी मंत्री श्री टंकराम वर्मा के करकमलों से तिहारूराम को उनके नए ट्रैक्टर की चाबी सौंपी गई। ट्रैक्टर का 9.40 लाख रूपए की कुल लागत पर तिहारूराम को राज्य शासन की ओर से 4 लाख रूपए का भारी शासकीय अनुदान प्राप्त हुआ है। इस पर तिहारूराम ने कहा कि कम जमीन और सीमित साधनों के कारण पहले समय पर खेती का काम पूरा करना एक बड़ी चुनौती थी। भारी-भरकम किराए पर ट्रैक्टर लेना पड़ता था। लेकिन सरकार की इस योजना और 4 लाख रुपए की बड़ी छूट ने मेरी राह आसान कर दी। अब मैं न सिर्फ समय पर अपनी खेती कर सकूंगा, बल्कि खेती को अधिक आधुनिक और लाभकारी भी बना पाऊंगा। सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित इन शिविरों में कृषि विभाग द्वारा श्वन स्टॉप सेंटरश् के रूप में स्टाल लगाए गए थे। यहाँ आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण के साथ-साथ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुँचाया गया।शिविर के दौरान विभाग को कुल 575 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें 545 मांग संबंधी और 30 शिकायत संबंधी मामले थे। विभाग ने संवेदनशीलता और मुस्तैदी दिखाते हुए रिकॉर्ड समय में 572 आवेदनों (544 मांग व 28 शिकायत) का सफलतापूर्वक निराकरण कर सुशासन की मिसाल पेश की।ट्रैक्टर वितरण के साथ ही विभाग द्वारा शिविर में उपस्थित किसानों को उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती से जोड़ने के लिए नीम आधारित कीटनाशक, हरित खाद, प्रमाणित बीज और विभिन्न लघु कृषि यंत्रों का वितरण भी किया गया।उप संचालक कृषि, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों और ग्रामीण कृषि विकास अधिकारियों की टीम ने किसानों को चौपाल लगाकर केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। इनमें मुख्य रूप से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना,सॉइल हेल्थ कार्ड योजना और एग्री स्टैक पंजीयन,प्राकृतिक व जैविक खेती मिशन तथा परंपरागत कृषि विकास योजना,दलहन-तिलहन प्रोत्साहन कार्यक्रम और हरित खाद का उपयोग शामिल है।जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ में कृषि विभाग का यह महाअभियान न केवल किसानों की समस्याओं के प्रभावी समाधान का जरिया बना, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीकों से जोड़कर आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। यह पूरी मुहिम सुशासन, जनभागीदारी और किसान कल्याण का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है।
- -"मोर गांव मोर पानी" अभियान की बड़ी सफलता, बरदर में करोड़ों लीटर वर्षा जल संरक्षण और महिलाओं के लिए स्थायी आजीविका का नया अध्यायरायपुर। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के खड़गवां विकासखंड अंतर्गत ग्राम बरदर प्रकृति संरक्षण, जल संवर्धन और ग्रामीण आजीविका का एक उत्कृष्ट एवं प्रेरणादायी मॉडल बनकर उभर रहा है। राज्य शासन के महत्वाकांक्षी "मोर गांव मोर पानी" महा अभियान के तहत यहां 52 एकड़ क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण, जल सुरक्षा और आजीविका संवर्धन को एक साथ जोड़ते हुए ऐसा समग्र विकास मॉडल तैयार किया जा रहा है, जो आने वाले समय में जिले ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिए अनुकरणीय उदाहरण बनेगा। इस पहल के अंतर्गत 30 एकड़ क्षेत्र में विभिन्न वैज्ञानिक जल संरक्षण एवं भूजल संवर्धन संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिससे प्रत्येक वर्ष करोड़ों लीटर वर्षा जल का संचयन और भूजल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित होगी। वहीं शेष 22 एकड़ क्षेत्र में दो हजार से अधिक उन्नत फलदार एवं औषधीय पौधों का रोपण कर फलोद्यान विकसित किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने के साथ दर्जनों महिला स्व-सहायता समूहों को स्थायी रोजगार एवं नियमित आय का अवसर प्राप्त होगा।ग्राम बरदर में जल संरक्षण को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विकसित किया गया है। सात एकड़ क्षेत्र में 30×40 मॉडल के तहत 240 संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिनके माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 40 लाख लीटर वर्षा जल का संग्रहण एवं भूजल रिचार्ज संभव होगा। इसके साथ ही 1800 मीटर लंबाई में जल अवशोषण ट्रेंच एवं सीपीटी संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिनसे प्रतिवर्ष लगभग 60 लाख लीटर जल भूमि में समाहित होगा। पांच एकड़ क्षेत्र में 5000 कंटूर ट्रेंच तैयार किए गए हैं, जिनकी क्षमता लगभग 70 लाख लीटर वर्षा जल के संरक्षण एवं भूजल पुनर्भरण की है। इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का बहाव नियंत्रित होगा, मिट्टी का कटाव रुकेगा, भूजल स्तर में सुधार होगा तथा भविष्य में सिंचाई एवं पेयजल की उपलब्धता भी बेहतर होगी।गांव में जल संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लगभग पांच लाख रुपये की लागत से 40 बोल्डर चेक डेम बनाए गए हैं। इसके अलावा 1.80 लाख रुपये की लागत से दो गेबियन संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जो बरसाती जलधाराओं को नियंत्रित कर जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। क्षेत्र में 19 लाख रुपये की लागत से एक पक्का चेक डेम भी निर्मित किया गया है, जिससे लगभग 15 एकड़ कृषि भूमि को वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी तथा 12 कृषक परिवारों के साथ उद्यान विभाग की नर्सरी को भी पर्याप्त जल मिलेगा। इसी प्रकार 16 लाख रुपये की लागत से एक अर्दन चेक डेम का निर्माण किया गया है, जिससे लगभग 10 एकड़ भूमि सिंचित होगी और पांच कृषक परिवार सीधे लाभान्वित होंगे। इन सभी संरचनाओं के कारण वर्षा जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा तथा क्षेत्र में कृषि उत्पादन और हरित आवरण दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी ग्राम बरदर तेजी से आगे बढ़ रहा है। विगत वर्ष यहां तीन एकड़ क्षेत्र में 500 पौधों का सफल वृक्षारोपण कर उनका संरक्षण किया गया था। इस वर्ष इस अभियान को और व्यापक रूप देते हुए उद्यान विभाग द्वारा 22 एकड़ क्षेत्र में दो हजार से अधिक फलदार एवं औषधीय पौधों का रोपण किया जा रहा है। इसके साथ ही नर्सरी विकास का कार्य भी किया जा रहा है, जिससे भविष्य में पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित होने के साथ स्थानीय लोगों को बागवानी के नए अवसर प्राप्त होंगे। विकसित हो रहा यह फलोद्यान केवल हरित क्षेत्र बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके माध्यम से दर्जनों महिलाओं को स्थायी रोजगार, नियमित आय और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा। फल उत्पादन, पौधों के रखरखाव, नर्सरी प्रबंधन और प्रसंस्करण जैसी गतिविधियों से महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और ग्रामीण परिवारों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।ग्राम बरदर में विकसित हो रहा यह समेकित मॉडल जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, भूजल संवर्धन, कृषि विकास और महिला सशक्तिकरण का अद्भुत संगम है। कलेक्टर सुश्री संतन देवी जांगड़े के मार्गदर्शन में तैयार किया जा रहा यह प्रयास प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ ग्रामीण विकास की नई दिशा तय कर रहा है। आने वाले वर्षों में यह मॉडल न केवल जल संकट से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, बल्कि हरित विकास, टिकाऊ कृषि, महिला आजीविका और ग्रामीण समृद्धि का सशक्त उदाहरण बनकर एमसीबी जिले की नई पहचान स्थापित करेगा।

















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