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- पुणे। गगनयात्री' ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने रविवार को कहा कि भारत में ‘अंतरिक्ष यात्री' अब एक मान्यताप्राप्त पेशा है, जो युवा प्रतिभाओं के लिए अनगिनत अवसर प्रदान करता है। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के पुणे पुस्तक महोत्सव के अवसर पर आयोजित पुणे साहित्य महोत्सव में शुक्ला ने विद्यार्थियों से चंद्रमा पर उतरने का लक्ष्य रखने का आह्वान किया और कहा कि ‘‘जब आप आएंगे, तो मैं आपसे प्रतिस्पर्धा करने के लिए वहां मौजूद रहूंगा।'' अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में देश द्वारा की जा रही व्यापक प्रगति की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘बहुत से लोग शायद यह सोच रहे होंगे कि भारत अंतरिक्ष अन्वेषण में इतना निवेश क्यों कर रहा है। भारत अपने स्वयं के मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन, गगनयान पर काम कर रहा है, जिसका हम हिस्सा हैं। इस मिशन का उद्देश्य एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेजना और उसे सुरक्षित वापस लाना है।'' शुक्ला ने कहा, ‘‘इसके अलावा, हम अपना खुद का भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की भी योजना बना रहे हैं। भारत का लक्ष्य 2040 तक चंद्रमा पर उतरना है। हो सकता है कि आज यहां बैठा कोई व्यक्ति, चाहे वह लड़की हो या लड़का, एक दिन चंद्रमा की सतह पर कदम रखे। जब आप आएंगे, तो मैं आपके साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए वहां मौजूद रहूंगा।''अपनी अंतरिक्ष यात्रा का वर्णन करते हुए शुक्ला ने बताया कि जब विंग कमांडर राकेश शर्मा ने 1984 में अंतरिक्ष यात्रा की थी, तब उनका जन्म भी नहीं हुआ था। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा जन्म 1985 में हुआ था। मैं बचपन से ही ये कहानियां सुनता आया हूं। लेकिन अंतरिक्ष यात्री बनने का ख्याल मेरे मन में कभी नहीं आया क्योंकि उस समय भारत में ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं था। परंतु आज जब मैं विद्यार्थियों से बात करता हूं, तो लगभग हर बातचीत में कोई न कोई मुझसे पूछता है कि अंतरिक्ष यात्री कैसे बना जा सकता है।'' शुक्ला ने सभा में उपस्थित लोगों को प्रोत्साहित करते हुए कहा, “अब अंतरिक्ष यात्री बनना एक पेशा है। यह संभव है। यह अब कोई सपना नहीं रहा। कोई भी सचमुच अंतरिक्ष यात्री बन सकता है, और यह आप सभी के लिए खुला है। कड़ी मेहनत करें। अगर मैं यह कर सकता हूं तो आप भी कर सकते हैं।” उन्होंने कहा कि जब कोई इस ग्रह को छोड़ता है, तो उसकी पहचान उसी ग्रह से जुड़ी होती है जहां से वह आया होता है। ग्रुप कैप्टन शुक्ला इस साल 25 जून को प्रक्षेपित मिशन के जरिए अंतरिक्ष स्टेशन पर जाने वाले पहले भारतीय बने। अठारह दिन के प्रवास के बाद वह 15 जुलाई को पृथ्वी पर लौट आए।
- नयी दिल्ली। आयुष मार्क की शुरुआत पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। होम्योपैथी में आयुष प्रीमियम प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाली पहली कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ने रविवार को यह बात कही। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को यहां पारंपरिक चिकित्सा पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के वैश्विक शिखर सम्मेलन के समापन दिवस पर इस पहल की शुरुआत की। यह आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों को एक विश्वसनीय, विज्ञान-आधारित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य सेवा समाधान के रूप में स्थापित करने के भारत के संकल्प को मजबूत करता है। ‘एडवेन बायोटेक' के सीईओ आदेश शर्मा ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने बताया, “पहली बार, आयुष उत्पादों के लिए एक एकीकृत, पारदर्शी और वैश्विक स्तर पर मानकीकृत गुणवत्ता ढांचा विश्व के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। यह पहल न केवल उद्योग मानकों को ऊंचा उठाएगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियामकों, स्वास्थ्य पेशेवरों और उपभोक्ताओं के बीच गहरा विश्वास भी जगाएगी।” शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि आयुष प्रीमियम मार्क भारतीय होम्योपैथी के निर्यात और वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने में एक शक्तिशाली उत्प्रेरक का काम करेगा। file photo
- ठाणे । साध्वी ऋतंभरा ने रविवार को कहा कि सोशल मीडिया या आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी नहीं होने के बावजूद अयोध्या राम मंदिर आंदोलन सफल हुआ, क्योंकि उसका संदेश हर दिल में सच्चे और स्वाभाविक रूप से गूंजा। साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि राम जन्मभूमि मुद्दे को लेकर चला संघर्ष ‘‘ऐसे संकल्प की परिणति थी जिसका कोई विकल्प नहीं था।'' उन्होंने कहा, “हमारा काम राम जी के कार्य के लिए है।”उन्होंने कहा कि मंदिर का निर्माण इस बात का प्रमाण है कि एक दृढ़ संकल्पित और एकजुट समाज क्या हासिल कर सकता है। उन्होंने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि राष्ट्र की सच्ची मजबूती केवल भौतिक शक्ति में नहीं, बल्कि “चरित्र की प्रमाणिकता” और आंतरिक विभाजनों को दूर करने में निहित है। उन्होंने कहा कि मानवीय संकल्प में “पर्वतों को उखाड़ फेंकने” और “पत्थर को पानी में बदल देने” की शक्ति होती है, लेकिन यह शक्ति तभी सार्थक है जब वह आत्मसंयम पर आधारित हो। उन्होंने दमितों की रक्षा के लिए प्रयास करने का आह्वान भी किया।
- कोलकाता। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि अशांति और बांग्लादेश से घुसपैठ का पश्चिम बंगाल पर असर पड़ रहा है और उन्होंने जोर देकर कहा कि इन मुद्दों को केंद्र सरकार को ही उठाना चाहिए। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के राज्य में ‘बढ़ते इस्लामी कट्टरवाद' से संबंधित प्रश्न के उत्तर में मोहन भागवत ने कहा, ‘‘यह सरकार को तय करना है कि बांग्लादेश से भारत में किसे आने दिया जाए। इस पर नियंत्रण होना चाहिए कि किसे आने की अनुमति दी जाएगी।'' वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। पड़ोसी देश में हिंदुओं को अल्पसंख्यक बताते हुए उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें खुद की अधिकतम सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एकजुट रहना होगा।'' आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘‘हम लोगों समेत दुनिया भर के सभी हिंदुओं को उनकी मदद करनी होगी।''उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर भारत सरकार को कुछ करना होगा। भागवत ने कहा, ‘‘हो सकता है कि वे पहले से ही कुछ कर रहे हों, लेकिन उनका खुलासा नहीं किया जा सकता।'' पश्चिम बंगाल के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘अगर सभी हिंदू एकजुट हो जाएं, तो राज्य की स्थिति बदलने में समय नहीं लगेगा।'' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आरएसएस का ध्यान सामाजिक परिवर्तन पर है, न कि राजनीतिक परिवर्तन पर। धार्मिक विवादों पर टिप्पणी करते हुए भागवत ने अयोध्या मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘अदालतों ने लंबी सुनवाई के बाद राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद का फैसला सुना दिया है, जिससे मामला समाप्त हो गया है। अब बाबरी मस्जिद का दोबारा निर्माण करने की कोशिश वोटों के लिए संघर्ष को फिर से शुरू करने की एक राजनीतिक साजिश है।'' वे मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में मस्जिद बनाने की टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर की घोषणा पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। मोहन भागवत ने कहा, ‘‘यह न तो मुसलमानों के हित में है और न ही हिंदुओं के हित में। ऐसा नहीं होना चाहिए।'' उन्होंने कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन धर्म कायम रहता है। इसलिए किसी भी सरकार को किसी भी धार्मिक इमारत के निर्माण में शामिल नहीं होना चाहिए।
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नई दिल्ली। ट्रेनों से सफर करने वाले यात्रियों को 26 दिसंबर से एक निश्चित दूरी के बाद बढ़ा हुआ किराया देना होगा। भारतीय रेलवे ने किराया संरचना में बदलाव करने का फैसला किया है। इस बदलाव का उद्देश्य यात्रियों पर न्यूनतम बोझ डालते हुए बढ़ती परिचालन लागत को संतुलित करना है।
साधारण श्रेणी में 215 किलोमीटर से अधिक दूरी की यात्रा पर प्रति किलोमीटर 1 पैसे की मामूली बढ़ोतरी की गई है। मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की नॉन-एसी श्रेणी में प्रति किलोमीटर 2 पैसे की बढ़ोतरी होगी। वहीं, एसी श्रेणी में भी किराया प्रति किलोमीटर 2 पैसे बढ़ाया गया है। रेलवे ने बताया कि 500 किलोमीटर की नॉन-एसी यात्रा करने वाले यात्रियों को केवल 10 रुपए अतिरिक्त चुकाने होंगे।रेलवे ने स्पष्ट किया है कि उपनगरीय सेवाओं और मासिक सीजन टिकट (एमएसटी) के किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इसके अलावा, साधारण श्रेणी में 215 किलोमीटर तक की यात्रा करने वाले यात्रियों को कोई अतिरिक्त राशि नहीं देनी होगी।रेलवे के इस किराया युक्तिकरण से चालू वित्त वर्ष में लगभग 600 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, पिछले एक दशक में रेलवे नेटवर्क और परिचालन में बड़ा विस्तार हुआ है। बढ़ते संचालन और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने के लिए रेलवे ने अपने मानव संसाधन में भी वृद्धि की है। इस कारण रेलवे की मैनपावर लागत बढ़कर 1 लाख 15 हजार करोड़ रुपए हो गई है, जबकि पेंशन पर होने वाला खर्च 60 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। वर्ष 2024-25 में रेलवे की कुल परिचालन लागत 2 लाख 63 हजार करोड़ रुपए हो गई है।इन बढ़ती लागतों को पूरा करने के लिए रेलवे अधिक माल ढुलाई और यात्री किराए में सीमित युक्तिकरण पर ध्यान दे रहा है। रेलवे का कहना है कि सुरक्षा और बेहतर परिचालन के लिए किए गए प्रयासों के चलते भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा माल ढुलाई करने वाला रेलवे बन चुका है। हाल ही में त्योहारों के मौसम में 12 हजार से अधिक स्पेशल ट्रेनों का सफल संचालन किया गया। -
नई दिल्ली। केरल भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा है कि तिरुवनंतपुरम में इतिहास रचा गया है, जहां राज्य के लगभग 600 स्थानीय निकायों में भाजपा के पार्षदों ने शपथ ग्रहण की है। राजीव चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के माध्यम से लिखा कि यह जीत जनता की ताकत और लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है।
केरल भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भाजपा को कमजोर करने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन जनता की इच्छा के सामने सभी प्रयास विफल साबित हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के वार्डों को तोड़ने के लिए कथित तौर पर धोखाधड़ीपूर्ण परिसीमन किया गया। इसके साथ ही कांग्रेस उम्मीदवारों को मैदान में उतारकर भाजपा के वोट बांटने की रणनीति भी अपनाई गई।राजीव चंद्रशेखर ने ‘एक्स’ पोस्ट के जरिए कहा कि ऐसी ही रणनीति 2024 के लोकसभा चुनाव में तिरुवनंतपुरम सीट पर भी अपनाई गई थी, लेकिन इस बार भी जनता ने सच्चाई को पहचान लिया और इन सभी प्रयासों को नकार दिया। चंद्रशेखर के अनुसार, यह परिणाम स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि जनता अब विकास, पारदर्शिता और जवाबदेही की राजनीति चाहती है। उन्होंने कहा कि तमाम राजनीतिक हथकंडों के बावजूद स्थानीय स्तर पर भाजपा को मिला समर्थन केरल में बदलते राजनीतिक माहौल का संकेत है।राजीव ने ‘विकसित केरल’ की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि केरल विकास, सुशासन और जनकल्याण के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़े। भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि स्थानीय निकायों में पार्टी की मजबूत मौजूदगी आने वाले समय में केरल की राजनीति की दिशा बदल सकती है। -
नई दिल्ली नई दिल्ली ।केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने ‘विकसित भारत- जी राम जी’ बिल को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने ‘विकसित भारत- जी राम जी’ बिल को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस और कुछ अन्य लोग यह गलत प्रचार कर रहे हैं कि यह बिल प्रगतिशील नहीं है और इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर कम हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह दावा सरासर झूठ है।
प्रह्लाद जोशी ने कहा कि ‘विकसित भारत जी राम जी’ बिल का मूल उद्देश्य ग्रामीण भारत को सशक्त बनाना है। यह योजना न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे को भी सुदृढ़ करेगी। इस विधेयक के तहत रोजगार के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है, जिससे गांवों में रहने वाले लोगों को अधिक काम और आय प्राप्त होगी।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध होने से गांवों से शहरों की ओर होने वाला पलायन भी कम होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रत्येक कार्य पर संबंधित अधिकारी निगरानी रखेंगे, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी और योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचेगा।प्रह्लाद जोशी ने पूर्ववर्ती योजनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब तक मनरेगा के तहत दो लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया गया, लेकिन इसके बावजूद ठोस बुनियादी ढांचा विकसित नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की मंशा स्पष्ट है- ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाए और लोगों को उनके गांवों में ही रोजगार उपलब्ध कराया जाए, ताकि उन्हें पलायन न करना पड़े।विकसित भारत- जी राम जी’ बिल के तहत हर ग्रामीण परिवार को न्यूनतम 125 दिनों का रोजगार दिया जाएगा। यह रोजगार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। मजदूरी पर होने वाले खर्च में केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 60:40 के अनुपात में होगी। वहीं, पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 निर्धारित किया गया है। बिना विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों में पूरी लागत केंद्र सरकार वहन करेगी। इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति काम मांगने के 15 दिनों के भीतर रोजगार प्राप्त नहीं कर पाता है, तो उसे भत्ता दिया जाएगा, जिसका पूरा खर्च सरकार उठाएगी। योजना में 60 दिनों की ‘नो वर्क’ विंडो का भी प्रावधान रखा गया है। -
नई दिल्ली। महाराष्ट्र नगर पंचायत और नगर परिषद चुनावों में महायुति को मिले प्रचंड समर्थन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और सांसद अनिल बलूनी ने खुशी जताई है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत एनडीए के सभी नेताओं को बधाई और शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि महाराष्ट्र विकास के साथ मजबूती से खड़ा है। नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में भाजपा और महायुति को आशीर्वाद देने के लिए महाराष्ट्र की जनता का आभारी हूं। यह जन-केंद्रित विकास के हमारे दृष्टिकोण पर जनता के विश्वास को दर्शाता है। हम राज्यभर के प्रत्येक नागरिक की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए नई ऊर्जा के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मैं भाजपा और महायुति कार्यकर्ताओं द्वारा जमीनी स्तर पर की गई कड़ी मेहनत की सराहना करता हूं।भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ‘एक्स’ पर लिखा कि महाराष्ट्र में नगर पंचायत और नगर परिषद चुनावों में महायुति की ऐतिहासिक विजय के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, एनडीए के सभी सदस्यों और प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण के नेतृत्व में भाजपा व एनडीए के सभी कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।उन्होंने कहा कि महायुति की यह प्रचंड जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों को जनता का अटूट समर्थन दर्शाती है।भाजपा सांसद अनिल बलूनी ने ‘एक्स’ पर लिखा कि महाराष्ट्र नगर पंचायत एवं नगर परिषद चुनावों में महायुति को मिले अभूतपूर्व जनसमर्थन के लिए प्रदेश की जागरूक जनता का हृदय से आभार। यह ऐतिहासिक जनादेश यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में एनडीए सरकारों द्वारा समाज के हर वर्ग के उत्थान और समावेशी विकास के लिए किए जा रहे कार्यों पर जनता की गहरी आस्था और विश्वास को दर्शाता है।उन्होंने इस शानदार विजय पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार सहित एनडीए परिवार के सभी समर्पित कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को 246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों में भारतीय जनता पार्टी के प्रदर्शन को ऐतिहासिक जनादेश बताया। चुनाव परिणाम आने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के 20 से 25 वर्षों के इतिहास में यह जीत अभूतपूर्व है। -
शबरिमला (केरल). केरल स्थित शबरिमला भगवान अयप्पा मंदिर में 27 दिसंबर को सुबह 10 बजकर 10 मिनट से पूर्वाह्न 11.30 बजे के बीच मंडला पूजा का आयोजन किया जाएगा। मंदिर के मुख्य पुजारी कंडारारू महेश मोहनारू ने यहां यह जानकारी दी। पुजारी ने बताया कि पूजा से जुड़ी दीपाराधना (आरती) पूर्वाह्न 11:30 बजे संपन्न होगी।
उन्होंने कहा कि भगवान अयप्पा को पहनाई जाने वाली ‘स्वर्ण अंकी' (पवित्र सोने की पोशाक) शोभायात्रा के दौरान शबरिमला में लाई जाएगी। पुजारी ने बताया कि यह शोभायात्रा 23 दिसंबर को सुबह सात बजे अरनमुला पार्थसारथी मंदिर से शुरू होगी और 26 दिसंबर की शाम को दीपाराधना से पहले स्वर्ण अंकी के श्बरिमला सन्निधानम पहुंचने की उम्मीद है। भगवान की मूर्ति को स्वर्ण अंकी पहनाने के बाद शाम 6:30 बजे दीपाराधना (आरती) की जाएगी।
मुख्य पुजारी ने बताया कि 27 दिसंबर को दोपहर के समय मूर्ति को ‘स्वर्ण अंकी' पहनाने के बाद मंडला पूजा की जाएगी और उसी रात 11 बजे भगवान अयप्पा की लोरी ‘हरिवरासनम' के पाठ के साथ मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद, मकर विलक्कु उत्सव के लिए मंदिर दोबारा 30 दिसंबर को शाम पांच बजे खोला जाएगा। जानकारी के मुताबिक, यह ‘स्वर्ण अंकी' त्रावणकोर के महाराज ने मंडला पूजा के लिए भेंट की थी। श्रद्धालु 23 दिसंबर को सुबह पांच से सात बजे के बीच अरनमुला मंदिर के प्रांगण में इसके दर्शन कर सकेंगे। -
गुवाहाटी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को गुवाहाटी स्थित ‘शहीद स्मारक क्षेत्र' में असम आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि दी और राज्य की प्रगति, समृद्धि तथा सांस्कृतिक गौरव सुनिश्चित करने के अपने संकल्प को दोहराया। असम आंदोलन अवैध प्रवासियों के खिलाफ था। प्रधानमंत्री मोदी ने स्मारक क्षेत्र में एक दीप के सामने पुष्पांजलि अर्पित की। यह दीप छह साल चले एवं 1985 में समाप्त हुए आंदोलन में शहीद हुए 860 लोगों की स्मृति में सदैव प्रज्वलित रहता है।
मोदी ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘शहीद स्मारक क्षेत्र में श्रद्धांजलि अर्पित की और शहीद प्रणाम ज्योति पर पुष्पांजलि अर्पित की। शहीद दीर्घा से गुजरना एक अत्यंत भावपूर्ण अनुभव था, जहां असम आंदोलन के दौरान प्राण न्योछावर करने वाले वीर शहीदों के साहस और बलिदान की याद ताजा हुई।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि आंदोलन के दौरान किए गए बलिदान राज्य की पहचान और सामूहिक स्मृति का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम असम की प्रगति, समृद्धि और सांस्कृतिक गौरव के लिए अथक परिश्रम करने की अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग हैं।'' करीब 20 मिनट के अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने स्मारक परिसर का भ्रमण किया और शहीदों की याद में निर्मित दीर्घा को भी देखा, जहां शहीदों की आवक्ष प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। प्रधानमंत्री ने असम आंदोलन के पहले शहीद खड़गेश्वर तालुकदार की प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया। खड़गेश्वर तालुकदार का निधन 10 दिसंबर 1979 को हुआ था और इस महीने की शुरुआत में उनकी पुण्यतिथि पर इस स्मारक का उद्घाटन किया गया। इस दौरान मोदी के साथ वहां पहुंचे मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने राज्य की संस्कृति की रक्षा के लिए लोगों द्वारा किए गए बलिदानों को याद किया। शर्मा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘आज जब आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी ने ‘शहीद स्मारक क्षेत्र' में श्रद्धांजलि अर्पित की और शहीद खड़गेश्वर तालुकदार की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया, तो मुझे असम के इतिहास के वे काले दिन याद आ गए जब कांग्रेस पार्टी ने अवैध घुसपैठ को बढ़ावा देकर, धरतीपुत्रों का नरसंहार किया और राज्य को आर्थिक गर्त में धकेलकर असम को कई तरह से लूटा।'' मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘इसके विपरीत आज लोग विकास का उत्सव मना रहे हैं और प्रधानमंत्री स्वयं संस्कृति की रक्षा में लोगों के बलिदान को याद कर रहे हैं तथा असम के विकास में पिछले सभी प्रधानमंत्रियों की तुलना में कहीं अधिक गहराई से जुड़े हुए हैं।'' इस अवसर पर राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, मुख्यमंत्री शर्मा, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और असम समझौता क्रियान्वयन मंत्री अतुल बोरा प्रधानमंत्री के साथ मौजूद थे। शर्मा ने कहा कि मोदी ‘‘असम के पुनर्जागरण'' का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘डबल इंजन सरकार के व्यापक प्रयासों के तहत असम को तेज विकास के मार्ग पर वापस लाने के इस सफर का एक छोटा सा हिस्सा बनकर मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता हूं, जहां शांति, समृद्धि और स्थिरता का राज हो।'' मोदी के दौरे के बाद बोरा ने संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री ने शहीदों के बारे में जानकारी ली और मुख्यमंत्री ने उन्हें इस संबंध में संक्षेप में बताया। उन्होंने कहा, ‘‘यह असम के लिए एक यादगार दिन है। प्रधानमंत्री ने उन शहीदों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने कांग्रेस शासन के दौरान चले छह वर्षीय आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति दी थी।'' बोरा राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी पार्टी और ऑल असम गण संग्राम परिषद (एएजीएसपी) की राजनीतिक शाखा असम गण परिषद (एजीपी) के अध्यक्ष भी हैं। एएजीएसपी असम आंदोलन का नेतृत्व करने वाले प्रमुख संगठनों में शामिल था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के इस दौरे के बाद पूरी दुनिया असम आंदोलन के बारे में और अधिक जानना चाहेगी। उन्होंने कहा, ‘‘जब प्रधानमंत्री दीर्घा का दौरा कर रहे थे, तो वह शहीदों के बारे में विस्तार से जानना चाहते थे। इस तरह से अब तक किसी भी प्रधानमंत्री ने असम आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि नहीं दी थी। इसके लिए हम मोदी जी के आभारी हैं।'' करीब 170 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस स्मारक में जलाशय, सभागार, एक प्रार्थना कक्ष, एक साइकिल ट्रैक और ध्वनि एवं प्रकाश शो की व्यवस्था जैसी सुविधाएं हैं। ध्वनि एवं प्रकाश शो के माध्यम से असम आंदोलन के विभिन्न पहलुओं और राज्य के इतिहास को प्रदर्शित किया जाएगा। यह आंदोलन 15 अगस्त 1985 को असम समझौते पर हस्ताक्षर के साथ समाप्त हुआ था। अवैध प्रवासियों का पता लगाना और उन्हें निर्वासित करना ही वह मुख्य मुद्दा था जिसके चलते छह साल तक यह हिंसक आंदोलन चला। घुसपैठ का मुद्दा आज भी असम के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में सबसे विवादास्पद विषयों में से एक बना हुआ है तथा अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के मुद्दे पर राज्य में कई चुनाव लड़े गए हैं।
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के साथ मिलकर आयुष सेवाओं के लिए एक ऐप विकसित कर रही है। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक, इस ऐप के माध्यम से मरीज अपने मोबाइल फोन की मदद से घर बैठे न सिर्फ डॉक्टर से मिलने का वक्त ले सकेंगे बल्कि उन्हें आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी आयुष चिकित्सा पद्धतियों से जुड़ी जानकारी भी मिल सकेगी। आयुष विभाग के प्रमुख सचिव रंजन कुमार ने बताया कि आयुष ऐप विकसित करने के लिए आईआईटी कानपुर से बातचीत की जा रही रही है। उन्होंने बताया कि ऐप के जारी होने के बाद मरीजों को अस्पताल और आयुष केंद्रों में ओपीडी पंजीकरण के लिए लंबी कतरों में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ेगी और मरीज अपने मोबाइल के माध्यम से घर बैठे ही डॉक्टर से मिलने का समय ले सकेंगे। कुमार के मुताबिक, इससे समय की बचत होगी और अस्पतालों में भीड़ भी कम होगी।
उन्होंने कहा कि इस सुविधा से विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं और दूर-दराज के इलाकों से आने वाले मरीजों को काफी राहत मिलेगी। बयान के मुताबिक, ऐप के जरिए मरीजों को आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी आयुष चिकित्सा पद्धतियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी मिलेगी। -
कोलकाता. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि ‘‘भ्रामक दुष्प्रचार'' के कारण समाज के एक वर्ग में आरएसएस को लेकर कुछ गलतफहमियां हैं। भागवत ने ‘साइंस सिटी' सभागार में आरएसएस के शताब्दी समारोह के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि संघ का कोई शत्रु नहीं है, लेकिन कुछ ऐसे लोग हैं जिनकी ‘‘संकीर्ण स्वार्थ की दुकानें'' संगठन के बढ़ने से बंद हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को आरएसएस के बारे में कोई भी राय बनाने का अधिकार है लेकिन वह राय वास्तविकता पर आधारित होनी चाहिए, न कि ‘‘विमर्शों और द्वितीयक स्रोतों से प्राप्त जानकारी'' पर। भागवत ने कहा, ‘‘लोगों के सामने वास्तविकता लाने के लिए देश के चार शहरों में व्याख्यान और संवाद सत्र आयोजित किए गए हैं।'' उन्होंने कहा कि आरएसएस का कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है और संघ हिंदू समाज के कल्याण एवं संरक्षण के लिए कार्य करता है। भागवत ने जोर देकर कहा कि देश एक बार फिर ‘विश्वगुरु' बनेगा और ‘‘समाज को इसके लिए तैयार करना संघ का कर्तव्य है।'' शताब्दी समारोह के तहत आरएसएस कोलकाता, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में ऐसे सत्र आयोजित कर रहा है।
भारत के उत्थान को निश्चित बताते हुए भागवत ने कहा कि हिंदू धर्म का उत्थान भी निकट है और इसलिए बुरे लोग चिंतित हैं। आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘‘यही कारण है कि भारत और संघ जैसे संगठनों के खिलाफ दुष्प्रचार और भी जोर-शोर से किया जा रहा है।'' उन्होंने कहा कि आरएसएस लोगों तक सच्चाई पहुंचाने के तरीकों पर विचार करेगा ताकि वे ऐसे दुष्प्रचार से प्रभावित ना हों। उन्होंने कहा, ‘‘अगर हमारे पड़ोसी देशों में, जो पहले भारत का हिस्सा थे, सब कुछ ठीक रहता है तो हमारी स्थिति भी ठीक रहेगी।'' भागवत ने कहा कि सरकार ऐसे मामलों पर अपनी नीतियां तय करेगी, लेकिन समाज के स्तर पर एक-दूसरे की भलाई की कामना करना एक ऐसा विषय है ‘‘जिस पर हम चर्चा करना चाहेंगे।'' पड़ोसी देश बांग्लादेश में 2024 के मध्य में तत्कालीन शेख हसीना सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से उथल-पुथल मची हुई है, जहां से अल्पसंख्यक हिंदुओं पर अत्याचार की खबरें आई हैं। प्रमुख युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में हमले और तोड़फोड़ की घटनाएं हुई हैं, जिसमें बृहस्पतिवार को चटगांव में सहायक भारतीय उच्चायुक्त के आवास पर पथराव भी शामिल है। आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘‘हमें वे चीजें नहीं खरीदनी चाहिए जो घर पर बनाई जा सकती हैं और केवल वही वस्तुएं खरीदनी चाहिए जिनसे स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि हो सके। हमें विदेशी भाषा के बजाय मातृभाषा का प्रयोग करना चाहिए।'' उन्होंने कहा कि यदि कोई बांग्ला भाषी है तो उसे अपने घर के प्रवेश द्वार पर ‘वेलकम' की जगह ‘स्वागतम्' लिखना चाहिए। उन्होंने लोगों को देश के भीतर यात्रा करने और इसके सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करने के लिए भी प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा, ‘‘भारत में ऐसे कई स्थान हैं जो देखने योग्य हैं। चाहे कोई दुनिया के अन्य हिस्सों को देखे या न देखे, उसे अपने देश को अवश्य देखना चाहिए।'' आरएसएस प्रमुख ने कहा कि लोगों को प्रस्तावना और नागरिकों के मौलिक कर्तव्य समेत संविधान के मूल सिद्धांतों को पढ़ना चाहिए।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को असम के नामरूप में उर्वरक (फर्टिलाइजर) इकाई का उद्घाटन करने के बाद कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा। एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा असम और पूर्वोत्तर भारत के विकास का विरोध किया है।
नरेंद्र मोदी ने कहा, “जब भाजपा सरकार ने संगीतकार भूपेन हजारिका को भारत रत्न से सम्मानित किया, तब कांग्रेस ने असम के इस महान व्यक्तित्व का अपमान किया। कांग्रेस पार्टी ने असम के नगांव जिले में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने के हमारे फैसले का भी विरोध किया।” प्रधानमंत्री ने दावा किया कि कांग्रेस को असम के लोगों से कोई प्रेम और सम्मान नहीं है, बल्कि वह घुसपैठियों के प्रति पक्षपाती रही है।उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने उन घुसपैठियों का समर्थन किया, जिन्होंने असम की जनसंख्या संरचना को नुकसान पहुंचाया, क्योंकि वे घुसपैठिए विपक्षी पार्टी के वोट बैंक हैं। इसके विपरीत, भाजपा ने हमेशा असम के लोगों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम किया है।” प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि मौजूदा सरकार राज्य के मूल निवासियों की सुरक्षा के लिए लगातार प्रयासरत है।इससे पहले, पीएम मोदी ने गुवाहाटी स्थित शहीद स्मारक स्थल पर ऐतिहासिक असम आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह क्षण राज्य के लोगों के लिए अत्यंत भावुक था। प्रधानमंत्री ने पुष्प अर्पित किए और वर्ष 1979 में शुरू हुए छह वर्षों तक चले विदेशी विरोधी आंदोलन के पहले शहीद खर्गेश्वर तालुकदार की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। साथ ही असम की पहचान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए किए गए बलिदानों को स्मरण किया।शहीद स्मारक स्थल उन 860 लोगों को समर्पित है, जिन्होंने असम आंदोलन के दौरान अपने प्राण न्योछावर किए। अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने शहीदों की गैलरी का भी भ्रमण किया, जहां सभी शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित हैं और उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।प्रधानमंत्री ने ब्रह्मपुत्र नदी पर क्रूज जहाज ‘चराइदेव’ पर असम के विभिन्न हिस्सों से चयनित 25 छात्रों के साथ एक विशेष और प्रेरणादायक संवाद भी किया। यह बातचीत राज्य की दो दिवसीय यात्रा के दौरान एक अनूठा अनुभव रही। - नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को विपक्षी नेताओं की आलोचना की। उन्होंने कहा कि वे सरकार की प्रमुख ग्रामीण रोजगार योजना को लेकर देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किए गए एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, “मनरेगा के नाम पर गलत जानकारी फैलाकर देश को गुमराह किया जा रहा है।” केंद्रीय मंत्री ने कहा, “सच्चाई यह है कि विकसित भारत ग्राम योजना, मनरेगा से एक कदम आगे है। अब मजदूरों को केवल 100 दिन नहीं, बल्कि 125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। बेरोजगारी भत्ते के प्रावधानों को और मजबूत किया गया है और यदि मजदूरी में देरी होती है, तो अतिरिक्त मुआवजा भी दिया जाएगा।”उन्होंने बताया कि सरकार ने ग्रामीण रोजगार योजना के लिए कुल आवंटन बढ़ाया है और विकसित गांवों के माध्यम से विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। चौहान ने कहा कि यह बिल गरीबों और विकास के पक्ष में है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को हाल ही में पारित विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 का जोरदार समर्थन किया, जो महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेगा।अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने शिवराज सिंह चौहान द्वारा लिखे गए एक लेख को साझा किया और उसका समर्थन किया, जो एक प्रमुख अखबार में प्रकाशित हुआ था। लेख का शीर्षक था- ‘नया रोजगार कानून सामाजिक सुरक्षा से पीछे हटना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सुधार करना है’।नागरिकों से इस लेख को पढ़ने की अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “इस जरूर पढ़े जाने वाले लेख में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान बताते हैं कि यह बिल रोजगार गारंटी को बढ़ाकर, स्थानीय योजना को शामिल करके, मजदूरों की सुरक्षा और कृषि उत्पादकता के बीच संतुलन बनाकर, योजनाओं के एकीकरण, फ्रंटलाइन क्षमता को मजबूत करने और गवर्नेंस को आधुनिक बनाकर ग्रामीण आजीविका को कैसे रूपांतरित करने का लक्ष्य रखता है। वे इस बात पर जोर देते हैं कि यह बिल सामाजिक सुरक्षा से पीछे हटना नहीं है, बल्कि उसका नया स्वरूप है।”संसद में इस सप्ताह हुई गरमागरम बहस और विपक्ष के विरोध के बीच पारित इस विधेयक के तहत हर ग्रामीण परिवार को सालाना मजदूरी आधारित रोजगार की कानूनी गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। अपने लेख में कृषि मंत्री ने विधेयक से जुड़ी प्रमुख आलोचनाओं का जवाब दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि योजना के मांग-आधारित स्वरूप को कमजोर करने की आशंकाएं निराधार हैं, क्योंकि यह कानून सरकार को न्यूनतम 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराने का स्पष्ट निर्देश देता है।अप्रैल 2026 से लागू होने की तैयारी कर रही इस योजना को सरकार ‘विकसित भारत जी राम जी’ के रूप में विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप एक आधुनिक सुधार मानती है, जिसका उद्देश्य लागू करने योग्य अधिकार, जवाबदेही और सतत विकास सुनिश्चित करना है।
- गोरखपुर. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक अस्पताल में पति के विश्वासघात से नाराज एक महिला ने अपने नवजात बेटे को अपनाने से इनकार कर दिया और उसे स्तनपान कराने से भी मना कर दिया, जिससे अस्पताल के कर्मचारी असमंजस में पड़ गए। अधिकारियों ने बताया कि काफी समझाने के बाद महिला बच्चे को रखने के लिए राजी हुई। महिला ने कहा कि वह बच्चे को खुद पालेगी और उसे उसके पिता का नाम नहीं देगी।दिल्ली में घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली महिला ने बताया कि ट्रेन में सफर के दौरान उसे करीब चार घंटे तक प्रसव पीड़ा सहनी पड़ी, जिसके बाद राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) की मदद से उसे जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। महिला ने आरोप लगाया कि उसके पति ने गर्भावस्था के दौरान उसे छोड़ दिया और बाद में दूसरी महिला के साथ भाग गया। महिला ने कहा, “जब मुझे उसकी (पति की) सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब उसने मुझे छोड़ दिया। मैं अकेली थी, दर्द में थी और अजनबियों की मदद से ही जिंदा रह पाई।” गुस्से व धोखे की भावना से व्याकुल होकर महिला ने शुरू में अपने नवजात शिशु को लेने से इनकार कर दिया और उसे स्तनपान कराने से भी मना कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि हालांकि, अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा समझाने-बुझाने के बाद महिला बच्चे को अपने पास रखने के लिए राजी हो गई। जिला अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक जय कुमार ने बताया, “शुरू में महिला को समझाना बहुत मुश्किल था। अब वह बच्चे को अपने पास रखने के लिए राजी हो गई है। बच्चे की सेहत में सुधार होते ही मां और बच्चे दोनों को छुट्टी दे दी जाएगी।” उन्होंने बताया कि तब तक, अस्पताल के कर्मचारी उनकी पूरी देखभाल कर रहे हैं और हर संभव मदद मुहैया कराई जा रही है। अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि मां और बच्चा दोनों फिलहाल निगरानी में हैं।
- गुवाहाटी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को यहां लोकप्रिय गोपीनाथ बारदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर नये टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। यह ‘‘देश का पहला नेचर-थीम वाला हवाई अड्डा” है, जहां से हर साल करीब एक करोड़ 31 लाख यात्री आते-जाते हैं। इस परियोजना में रखरखाव, मरम्मत और नवीनीकरण (एमआरओ) सुविधाओं के लिए विशेष रूप से 1,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसकी लागत 5,000 करोड़ रुपये है। इसका उद्देश्य हवाई अड्डे को पूर्वोत्तर के लिए एक प्रमुख विमानन केंद्र एवं दक्षिण पूर्व एशिया के लिए एक प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करना है। पुराने टर्मिनल से नए टर्मिनल में स्थानांतरण की प्रक्रिया फरवरी में शुरू होने वाली है, शुरुआत में घरेलू उड़ानें नए टर्मिनल से संचालित होंगी। अधिकारियों ने बताया कि यह प्रक्रिया मार्च के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है, जिसके बाद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानें नए टर्मिनल में स्थानांतरित की जाएंगी, जबकि मौजूदा टर्मिनल को ‘कार्गो हब' (माल और वस्तुओं का केंद्र) में परिवर्तित कर दिया जाएगा। उद्घाटन से पहले हवाई अड्डे के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा, ‘‘स्थानीय संस्कृति पर आधारित और एक आधुनिक संरचना के रूप में परिकल्पित नया टर्मिनल 1.4 लाख वर्ग मीटर के क्षेत्र में विस्तृत है और सहज तथा यात्री-केंद्रित अनुभव प्रदान करने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी, स्थिरता और क्षेत्रीय पहचान का मिश्रण करता है।'' भारतीय वास्तुकारों द्वारा डिज़ाइन किया गया यह टर्मिनल असम की समृद्ध जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित है और इसे ‘देश का पहला हवाई अड्डा' कहा जा सकता है, जिसका निर्माण की विषयवस्तु प्रकृति पर आधारित है। ‘द बैम्बू ऑर्किड्स' नाम के इस टर्मिनल का डिजाइन असम के प्रतिष्ठित ‘कोपो फूल' (फॉक्सटेल ऑर्किड) और स्थानीय बांस की किस्मों (असम के भोलुका बांस और अरुणाचल प्रदेश के अपातानी बांस) से प्रेरित है, जो पूर्वोत्तर की पारिस्थितिक और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है। अधिकारियों ने बताया कि टर्मिनल की वास्तुकला क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है, साथ ही आधुनिक तकनीक, स्थिरता और यात्रियों के आराम को भी एकीकृत करती है, जो भारत के समावेशी, भविष्योन्मुखी बुनियादी ढांचे के दृष्टिकोण के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि बांस से प्रेरित आंतरिक सज्जा में लगभग 140 मीट्रिक टन स्थानीय रूप से प्राप्त पूर्वोत्तर बांस का उपयोग किया गया है, जो भारतीय हवाई अड्डों में टिकाऊ निर्माण के लिए एक नया मानक स्थापित करता है। टर्मिनल में काजीरंगा से प्रेरित प्राकृतिक दृश्य हैं, जिनमें असम के जंगलों की तरह हरे-भरे और पर्यावरण के अनुकूल स्थान दर्शाये गए हैं। पारंपरिक असमिया पगड़ी ‘जापी' को विभिन्न डिजाइन वाले तत्वों में शामिल किया गया है, जबकि शक्ति और शांति के प्रतीक गैंडे का रूपांकन टर्मिनल में प्रमुखता से दिखाई देता है। आगमन और प्रस्थान क्षेत्रों में ‘फॉक्सटेल ऑर्किड' के गुलदस्ते जैसे दिखने वाले 57 विशिष्ट स्तंभ लगे हैं। आगमन करने वाले यात्री ‘आकाश वन' का अनुभव भी करेंगे, जहां वे स्थानीय वनस्पतियों की 100 प्रजातियों के लगभग एक लाख पौधों से युक्त हरे-भरे क्षेत्र से गुजरेंगे, जो एक जीवंत वनमय वातावरण का निर्माण करता है। इस परियोजना को गुवाहाटी इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (जीआईएलएल) द्वारा विकसित किया गया है और इसका संचालन ‘अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड' (एएएचएल) द्वारा किया जा रहा है। एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘‘भारत में पहली बार, यात्रियों को पार्किंग क्षेत्र और आगमन प्रांगण में चेक-इन की सुविधा मिलेगी, जिससे टर्मिनल के भीतर सामान ले जाने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।'' उन्होंने बताया कि टर्मिनल में स्वचालित ‘ट्रे रीट्राइवल सिस्टम' (एटीआरएस) के साथ समेकित घरेलू सुरक्षा लेन, संपर्क आधारित फाटकों पर स्विंग व्यवस्था और कुशल स्थानांतरण सुविधाएं हैं, जो गुवाहाटी को एक क्षेत्रीय केंद्र के रूप में अपनी भूमिका निभाने में सहयोग प्रदान करती हैं। हवाई अड्डे पर त्वरित और पुख्ता सुरक्षा जांच के लिए फुल-बॉडी स्कैनर और भारतीय नागरिकों और ओसीआई कार्डधारकों की शीघ्र निकासी के लिए ‘फास्ट ट्रैक इमिग्रेशन' (एफटीआई-टीटीपी) सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। नया टर्मिनल खुदरा, खाद्य और पेय पदार्थों के आउटलेट और ‘एयरपोर्ट विलेज' में स्थानीय ब्रांडों को प्रमुख स्थान प्रदान करके असम की क्षेत्रीय विरासत को उजागर करता है। इसमें स्थानीय रेस्तरां भी होंगे। अधिकारियों ने कहा, “ये प्रतिष्ठान क्षेत्र की लोककथाओं, व्यंजनों, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित हैं, जो यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक यात्री राज्य की मूल भावना का अनुभव करे।
- गुवाहाटी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अगले साल होने वाले असम विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी के करीब 280 नेताओं के साथ एक रणनीतिक बैठक की अध्यक्षता के लिए शनिवार शाम को यहां प्रदेश भाजपा मुख्यालय पहुंचे । मोदी सरुसजाई से 3.8 किलोमीटर तक विशाल रोड शो का नेतृत्व करने के बाद यहां बशिष्ठ इलाके में प्रदेश भाजपा मुख्यालय वाजपेयी भवन पहुंचे। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने कहा था कि इस यात्रा के दौरान मोदी का पार्टी नेताओं के साथ एक बैठक करने का कार्यक्रम है। वाजपेयी भवन का उद्घाटन भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अक्टूबर 2022 में किया था। मोदी की वाजपेयी भवन की यह पहली यात्रा है। प्रदेश भाजपा प्रवक्ता दीवान ध्रुब ज्योति मारल ने पहले कहा था कि बैठक में 280 नेता उपस्थित रहेंगे। मारल के अनुसार आमंत्रित नेताओं में पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व और वर्तमान सांसद, मंत्री और विधायक शामिल हैं। प्रधानमंत्री दोपहर में राज्य के दो दिवसीय दौरे पर गुवाहाटी पहुंचे। असम पहुंचने पर उन्होंने राज्य के पहले मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोरदोलोई की प्रतिमा का अनावरण किया और हवाई अड्डे के नए टर्मिनल का भी उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने एक जनसभा को भी संबोधित किया।
- भोपाल. केंद्रीय आवास एवं शहरी मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शनिवार को कहा कि मेट्रो रेल नेटवर्क की कुल लंबाई के मामले में भारत जल्द ही अमेरिका को पीछे छोड़ देगा। उन्होंने कहा कि देश में मेट्रो सेवाओं से प्रतिदिन 1.20 करोड़ लोग सफर कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री खट्टर ने भोपाल मेट्रो रेल परियोजना के पहले चरण में सात किलोमीटर लंबे खंड के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में मेट्रो कॉरिडोर की कुल लंबाई के मामले में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है। खट्टर ने कहा, “भोपाल देश का 26वां शहर बन गया है, जहां मेट्रो सेवा शुरू हुई है। मेट्रो नेटवर्क की कुल लंबाई के मामले में भारत 1,083 किलोमीटर के साथ दुनिया में तीसरे स्थान पर है। आज (शनिवार) जोड़े गए सात किलोमीटर के साथ यह आंकड़ा 1,090 किलोमीटर हो गया है।” उन्होंने बताया कि चीन इस सूची में पहले स्थान पर है, जबकि अमेरिका 1,400 किलोमीटर के मेट्रो नेटवर्क के साथ दूसरे स्थान पर है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “देश में लगभग 900 किलोमीटर लंबी मेट्रो परियोजनाओं का काम जारी हैं। इनमें से 300 किलोमीटर के जुड़ने के साथ ही भारत अमेरिका को पीछे छोड़ देगा।” इससे पहले खट्टर और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मेट्रो नेटवर्क के ‘ प्रायोरिटी कॉरिडोर' पर सुभाष नगर स्टेशन से ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। दोनों नेताओं ने सुभाष नगर से एम्स स्टेशन तक मेट्रो ट्रेन में सफर भी किया। खट्टर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मध्यप्रदेश के प्रति विशेष लगाव है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस वर्ष 17 सितंबर को अपना जन्मदिन मध्यप्रदेश में बनाया था।खट्टर ने कहा कि देश का पांचवां सबसे अधिक आबादी वाला राज्य मध्यप्रदेश उद्योग, कृषि सहित कई क्षेत्रों में तेजी से विकास कर रहा है। उन्होंने कहा, “देश में जैसे-जैसे शहरीकरण बढ़ रहा है, वैसे-वैसे राज्य में भी शहरीकरण बढ़ रहा है। आवास, पानी, परिवहन और स्वास्थ्य को बुनियादी जरूरतें माना जाता है। परिवहन की बात आते ही लोग मेट्रो की बात करते हैं।” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देशभर में मेट्रो सेवाओं से प्रतिदिन 1.20 करोड़ यात्री सफर कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अकेले दिल्ली में करीब 400 किलोमीटर का मेट्रो नेटवर्क है, जहां प्रतिदिन लगभग 70 लाख यात्री यात्रा करते हैं। खट्टर ने कहा कि भोपाल और इंदौर में मेट्रो परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि इंदौर में एक खंड को एलिवेटेड या भूमिगत बनाए जाने को लेकर विवाद था, जिसे अब सुलझा लिया गया है और संबंधित खंड भूमिगत बनाया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भोपाल मेट्रो कॉरिडोर से शहर की व्यस्त सड़कों पर यातायात सुचारु होगा और प्रदूषण में कमी आएगी, जो जन परिवहन प्रणाली नागरिकों की यात्रा को भी आसान बनाएगी। भोपाल मेट्रो परियोजना की अनुमानित लागत 10,033 करोड़ रुपये है, जबकि प्राथमिक कॉरिडोर पर 2,225 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। एक अधिकारी ने बताया कि सात किलोमीटर लंबे इस खंड से प्रतिदिन करीब 3,000 यात्रियों के सफर करने की उम्मीद है। खट्टर ने इस अवसर पर भोपाल महानगरीय क्षेत्र में 5,800 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का भी लोकार्पण और शुभारंभ किया।
- बेंगलुरु। इसरो के गगनयान चालक दल मॉड्यूल के वास्ते गति-मंदन प्रणाली विकसित करने के लिए ड्रोग पैराशूट का श्रृंखलाबद्ध मानक परीक्षण सफल रहा है। यह जानकारी अंतरिक्ष एजेंसी ने शनिवार को दी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बताया कि ये परीक्षण 18 और 19 दिसंबर को चंडीगढ़ में टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (टीबीआरएल) की रेल ट्रैक रॉकेट स्लेड (आरटीआरएस) इकाई में पूरे किए गए। एजेंसी ने एक बयान में कहा कि गगनयान क्रू मॉड्यूल के गति-मंदन प्रणाली में चार तरह के कुल 10 पैराशूट शामिल हैं। इसरो के अनुसार, अवरोहण क्रम की शुरुआत दो एपेक्स कवर सेपरेशन पैराशूट्स के अलग होने से होती है, जो पैराशूट कक्ष से सुरक्षात्मक आवरण को हटाते हैं। इसके बाद दो ड्रोग पैराशूट खुलते हैं, जो मॉड्यूल को स्थिर करने और उसकी गति को कम करने का कार्य करते हैं। इसरो ने कहा, ‘‘ड्रोग पैराशूट खुलने के बाद तीन पायलट पैराशूट्स खुलते हैं, जो तीन मुख्य पैराशूट को बाहर निकालते हैं। ये मुख्य पैराशूट क्रू मॉड्यूल की गति को और कम करते हैं, जिससे सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित होती है।
- गुवाहाटी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कांग्रेस पर उसके शासनकाल के दौरान असम और पूर्वोत्तर की ‘‘उपेक्षा'' करने का आरोप लगाया तथा जोर देकर कहा कि भाजपा सरकार उन ‘‘गलतियों'' को सुधार रही है जो कांग्रेस दशकों से इस क्षेत्र में करती आ रही थी। गुवाहाटी हवाई अड्डे के नए टर्मिनल का उद्घाटन करने के बाद एक रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि असम और पूर्वोत्तर का विकास कभी भी कांग्रेस के एजेंडे का हिस्सा नहीं था। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, “कांग्रेस ने उन घुसपैठियों को संरक्षण दिया जिन्होंने जंगलों और जमीनों पर कब्जा कर लिया, जिससे असम की सुरक्षा और पहचान को खतरा पैदा हो गया... भाजपा सरकार पूर्वोत्तर में दशकों तक कांग्रेस द्वारा की गई गलतियों को सुधार रही है।” मोदी ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) इसलिए शुरू किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि घुसपैठियों को चुनाव प्रक्रिया से बाहर रखा जा सके, ‘‘लेकिन ‘देशद्रोही' उन्हें बचाने की कोशिश कर रहे हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र सरकार घुसपैठ रोकने के लिए सख्त कदम उठा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा की ‘‘डबल इंजन'' वाली सरकार के तहत असम में विकास उसी तरह ‘‘लगातार जारी है'', जैसे शक्तिशाली ब्रह्मपुत्र नदी का प्रवाह। मोदी ने कहा, “असम की धरती से मेरा लगाव मुझे प्रेरित करता है, इस क्षेत्र के विकास के लिए मुझे शक्ति प्रदान करता है। असम और पूरा पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत के विकास का द्वार बन रहा है। देश के प्रत्येक राज्य, प्रत्येक क्षेत्र की विकसित भारत के मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका है।
- पुणे. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कहा कि वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य ''गठबंधन की राजनीति'' की तरह है, जहां निष्ठाएं लगातार बदलती रहती हैं। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे परिदृश्य में लचीला रुख अपनाते हुए अपने हितों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। जयशंकर पुणे साहित्य महोत्सव में राष्ट्रीय पुस्तक ट्रस्ट के निदेशक युवराज मलिक के साथ 'कूटनीति से विमर्श' विषय पर बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे देश में एक दौर गठबंधन की राजनीति का था। आज की दुनिया भी गठबंधन की राजनीति जैसी ही है।किसी के पास बहुमत नहीं है। किसी गठबंधन को बहुमत हासिल नहीं है। इसलिए लगातार समीकरण बदलते रहते हैं, सौदे होते रहते हैं, कोई ऊपर जाता है तो कोई नीचे। यह पूरी तरह से बहुध्रुवीय दुनिया है, जहां कई साझेदार हैं।" जयशंकर ने कहा कि इस अस्थिर स्थिति से निपटने के लिए उनका मंत्र भारत के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेना था। उन्होंने कहा, "हमें बहुत लचीला रुख अपनाना होगा। कभी-कभार आप किसी एक मुद्दे पर किसी के साथ होते हैं और किसी दूसरे मुद्दे पर किसी दूसरे के साथ। इन सबके बावजूद मेरा एक ही सिद्धांत है - जो मेरे देश के हित में हो। जो भी मेरे देश के हित में हो, वही मेरा फैसला होगा।" इस साहित्य महोत्सव का आयोजन पुणे पुस्तक महोत्सव के साथ किया जा रहा है।अपनी एक पुस्तक के उस अंश के बारे में पूछे जाने पर, जिसमें उन्होंने प्रमुख शक्तियों के साथ भारत के संबंधों पर चर्चा की है, जयशंकर ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में देश की विदेश नीति का प्रबंधन कहीं अधिक जटिल हो गया है। उन्होंने कहा, ‘‘किताब लिखते समय मैं इस बात पर विचार कर रहा था कि भारत की समग्र विदेश नीति का एक वाक्य में वर्णन करने के लिए किन शब्दों का चुनाव करूं।'' उन्होंने कहा कि वर्तमान परिवेश में अमेरिका से संबंध बनाना, चीन का प्रबंधन करना और रूस को आश्वस्त करना, ये सभी चीजें अधिक जटिल हो गई हैं। उन्होंने बताया कि यूक्रेन युद्ध और भारत पर मॉस्को से दूरी बनाए रखने के दबाव के कारण ‘रूस को आश्वस्त करना' विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा, ‘‘जापान को शामिल करना भी अधिक जटिल हो गया है। वे अपनी गति से चलते हैं और हम उन्हें तेज गति से चलने के लिए प्रेरित करने का प्रयास कर रहे हैं।'' उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप भारत के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में उभरा है और उसके साथ अधिक जुड़ाव की आवश्यकता है।भारत के पड़ोस के बारे में उन्होंने कहा कि नयी दिल्ली के अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंध उन देशों की विषमता और अस्थिर घरेलू राजनीति से प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पड़ोसी देश हमसे छोटे हैं और भारत से घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं। उनकी आंतरिक राजनीति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। कभी वे हमारी प्रशंसा करते हैं, कभी हमारी आलोचना करते हैं। ऐसे में चुनौती यह है कि इन संबंधों को यथासंभव स्थिर कैसे रखा जाए।'' उदाहरण देते हुए जयशंकर ने कहा कि हाल ही में श्रीलंका में आए चक्रवात पर भारत ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और सबसे पहले मदद के लिए पहुंचा। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पड़ोसियों से पूछिए कि कोविड के दौरान उन्हें टीके कहां से मिले - भारत से। यूक्रेन युद्ध के दौरान जब पेट्रोल और उर्वरकों की आपूर्ति बाधित हुई, तो भारत ने मदद की।'' विदेश मंत्री ने कहा कि भारत को परिवार के मुखिया की तरह व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘एक-दो सदस्य भले ही नाराज हो जाएं, लेकिन पड़ोस की देखभाल करना हमारी ज़िम्मेदारी है।'' प्रश्न-उत्तर सत्र के दौरान जब उनसे पूछा गया कि वैश्विक स्तर पर विभिन्न स्थितियों में भारत कैसे प्रतिक्रिया देता है, तो जयशंकर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वे इस प्रश्न को इस तरह से पूछेंगे कि, ‘‘आप कब चुप रहते हैं और कब बोलते हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘यह वास्तव में परिस्थिति पर निर्भर करता है।आज के बहुध्रुवीय विश्व में यदि आप चुप रहेंगे, तो दुनिया आपको दबा देगी। उन्हें लगता है कि आपको दबाया जाए तो आप रक्षात्मक हो जाएंगे और हाशिए पर चले जाएंगे, इसलिए अपनी आवाज उठाना जरूरी है।'' शिक्षा पूरी करने के बाद युवा भारतीय पेशेवरों के काम के लिए विदेश जाने के कारण कथित ‘प्रतिभा पलायन' के बारे में पूछे जाने पर जयशंकर ने कहा कि उन्होंने ऐसे लोगों को भी देखा है ‘‘जो दो साल, तीन साल या पांच साल के लिए विदेश जाते हैं, लेकिन वापस आकर यहां व्यवसाय स्थापित कर लेते हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘विश्व की सबसे बड़ी जहाजरानी कंपनी में अधिकांश कर्मचारी भारत से हैं।'' उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय प्रतिभा की मांग है। उन्होंने कहा, ‘‘रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान समझौते के समय, वे भारतीयों को रूस में आकर काम करने के लिए प्रोत्साहित करने के प्रति इच्छुक थे।'' जयशंकर ने कहा, ‘‘भले ही यूरोप में प्रवासन को लेकर बहस चल रही हो, लेकिन भारतीयों को अच्छी नजर से देखा जाता है। भारतीयों को पारिवारिक और मेहनती माना जाता है। वे तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवर के रूप में जाने जाते हैं। आज भारत का एक वैश्विक ब्रांड है। युवाओं को दुनिया को एक वैश्विक कार्यस्थल के रूप में देखना चाहिए।''--
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नादिया जिले के राणाघाट उपमंडल के ताहेरपुर में एक वर्चुअल जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह गंगा नदी बिहार से होकर पश्चिम बंगाल में बहती है, उसी प्रकार इस साल बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत अगले वर्ष पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भी दोहराई जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खराब मौसम के कारण खुद रैली में उपस्थित नहीं हो सके। कम दृश्यता के कारण उनका हेलीकॉप्टर ताहेरपुर के पास स्थित हेलीपैड पर उतर नहीं सका और कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लौट आया, जहां से उन्होंने ताहेरपुर की रैली को वर्चुअल रूप से संबोधित किया।रैली को संबोधित करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि कुछ और मुद्दे भी हैं जिन्हें मैं राणाघाट में उठाना चाहता था, लेकिन खराब मौसम के कारण मैं स्वयं रैली में शामिल नहीं हो सका। उन्होंने एक्स पर लिखा कि मैं हर मतुआ और नामशूद्र परिवार को आश्वस्त करता हूं कि हम हमेशा उनकी सेवा करेंगे। वे टीएमसी की दया पर निर्भर नहीं हैं। उन्हें भारत में गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार है; यह हमारी सरकार द्वारा लाए गए सीएए के कारण संभव हुआ है। पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण के बाद हम मतुआ और नामाशूद्र समुदायों के लिए और भी अधिक काम करेंगे।पीएम मोदी ने पश्चिम बंगाल की जनता को आश्वासन दिया है कि राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने हाल के वर्षों में बहुत कुछ सहा है। पश्चिम बंगाल की नारी शक्ति की स्थिति अत्यंत दयनीय है। पश्चिम बंगाल जैसा फुटबॉल प्रेमी राज्य टीएमसी की वजह से शर्मसार हुआ है। हाल की घटना ने कई फुटबॉल प्रेमी युवाओं के दिलों को तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि अगर टीएमसी मोदी का विरोध करना चाहती है, तो वह सौ बार कर सकती है। अगर टीएमसी भाजपा का विरोध करना चाहती है, तो वह बार-बार कर सकती है। लेकिन टीएमसी पश्चिम बंगाल के विकास को क्यों रोक रही है? उनकी राजनीति स्वार्थ से भरी है।प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा गति और व्यापकता में विश्वास रखती है। भाजपा सुशासन में विश्वास रखती है। लेकिन टीएमसी को सिर्फ कटौती और कमीशन की चिंता है। टीएमसी के असहयोगी रवैये के कारण आवास, स्वास्थ्य सेवा, खाद्य सुरक्षा, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में हजारों करोड़ रुपए की विकास परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ने बार-बार दिखाया है कि वे जंगल राज की वापसी में रुचि नहीं रखते। अब समय आ गया है कि हम पश्चिम बंगाल में टीएमसी के कारण व्याप्त महा जंगल राज से खुद को मुक्त करें। पश्चिम बंगाल के लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली और सस्ती स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए 13,000 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाए गए हैं। 750 से अधिक पीएम-भाजपा केंद्र हैं जो सस्ती दरों पर दवाएं उपलब्ध कराते हैं।पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सरकार पश्चिम बंगाल के लोगों को सशक्त बनाने के लिए दिन-रात काम कर रही है। 52 लाख घरों को मंजूरी दी जा चुकी है, जो इस बात का प्रमाण है कि हम हर व्यक्ति के लिए एक छत सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। राज्य के एक करोड़ से अधिक परिवार जल जीवन मिशन से लाभान्वित हुए हैं। पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने पर काम और भी तेजी से होगा ताकि लाभार्थियों की संख्या बढ़ाई जा सके।उन्होंने कहा कि हम सभी जो भारतीय संस्कृति की महानता में विश्वास रखते हैं, उनके लिए नादिया का विशेष महत्व है। यह भूमि श्री चैतन्य महाप्रभु से जुड़ी है। इस भूमि का इतिहास सेवाभाव से समृद्ध है, एक ऐसा भाव जो मेरे मतुआ बहनों और भाइयों में झलकता है। इसलिए, नादिया और पश्चिम बंगाल के विकास के लिए काम करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।
- पुणे. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कहा कि आज दुनिया भारत को पहले की तुलना में कहीं अधिक सकारात्मक रूप में देखती है और देश की छवि में आया यह बदलाव एक निर्विवाद सच्चाई है। जयशंकर ने पुणे में सिम्बायोसिस इंटरनेशनल (डीम्ड विश्वविद्यालय) के 22वें दीक्षांत समारोह में कहा कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा, ‘‘शक्ति और प्रभाव के कई केंद्र उभर चुके हैं और अब कोई भी देश, चाहे वह कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, सभी मुद्दों पर अपनी मर्जी नहीं थोप सकता।'' जयशंकर ने कहा, ‘‘आज दुनिया हमें किस तरह से देखती है? इसका संक्षिप्त उत्तर यह है- पहले की तुलना में कहीं अधिक सकारात्मक और कहीं अधिक गंभीरता से। इसका कारण हमारा राष्ट्रीय ब्रांड और हमारी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा दोनों हैं, जिनमें उल्लेखनीय सुधार हुआ है।''विदेश मंत्री ने कहा कि आज दुनिया भारतीयों को मजबूत कार्य-नैतिकता वाले, प्रौद्योगिकी में दक्ष और परिवार-केंद्रित संस्कृति को अपनाने वाले लोगों के रूप में देखती है। उन्होंने कहा, ‘‘विदेश में संवाद के दौरान मैं हमारे प्रवासी भारतीयों के बारे में अक्सर प्रशंसा के शब्द सुनता हूं। भारत में कारोबार करना आसान हो रहा है और जीवन-यापन में सहूलियत बढ़ रही है। इसी के साथ एक व्यक्ति, राष्ट्र और समाज के रूप में भारत के बारे में पुरानी रूढ़िवादी धारणाएं धीरे-धीरे पीछे छूट रही हैं।'' जयशंकर ने कहा, ‘‘प्रगति और आधुनिकीकरण की अपनी यात्रा में बेशक हमें अभी बहुत कुछ करना है, लेकिन हमारी छवि में यह बदलाव ऐसी वास्तविकता है, जिससे इनकार नहीं किया जा सकता।'' उन्होंने कहा, ‘‘हमारे आंकड़े इस परिवर्तन की पुष्टि करते हैं।''मंत्री ने कहा कि शायद अन्य किसी चीज से अधिक, आज भारत को उसकी प्रतिभा और कौशल से परिभाषित किया जाता है। उन्होंने कहा कि इन सभी ने हमारे राष्ट्रीय ब्रांड को आकार देने में मदद की है। जयशंकर ने कहा, ‘‘हम भारतीय दुनिया से किस तरह संपर्क करते हैं? मैं फिर से स्पष्ट रूप से कहूंगा- पहले से कहीं अधिक आत्मविश्वास और क्षमता के साथ।'' उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन एक अंतर पर ध्यान देना जरूरी है। अधिकतर देशों ने व्यापार, निवेश या सेवाओं जैसे आर्थिक संपर्कों के माध्यम से दुनिया में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।'' जयशंकर ने कहा, ‘‘स्वाभाविक रूप से यही हमारा मार्ग भी रहा है और इन सभी पैमानों पर निरंतर विकास हुआ है, लेकिन जो बात हमें अलग बनाती है, वह मानव संसाधनों की प्रासंगिकता है।'' उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था को प्रौद्योगिकी के साथ कदम मिलाकर चलना है और औद्योगिक कार्य-संस्कृति को आत्मसात एवं विकसित करना है, तो हमें पर्याप्त और आधुनिक विनिर्माण क्षमता विकसित करनी ही होगी। केवल तभी हम सेवा क्षेत्र में भी अपनी क्षमताओं को निखार सकते हैं।''विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘जैसे-जैसे आय बढ़ती है और मांग में इजाफा होता है, सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं की एक व्यापक शृंखला को अधिक प्रभावी ढंग से पूरा करना होगा। इसके लिए हमें केवल अधिक इंजीनियर, चिकित्सकों और प्रबंधकों या वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों तथा वकीलों की ही नहीं, बल्कि शिक्षकों, शोधकर्ताओं, इतिहासकारों, कलाकारों और खिलाड़ियों की भी समान रूप से आवश्यकता होगी।'' जयशंकर ने कहा, ‘‘ध्यान रखें कि पिछले एक दशक में हमारे उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या पहले की तुलना में मोटे तौर पर दोगुनी हो गई है तथा आगे और वृद्धि तथा सुधार की गुंजाइश है।'' मंत्री ने कहा कि वैश्वीकरण ने हमारे सोचने और काम करने के तरीके को मूल रूप से बदल दिया है।उन्होंने कहा, ‘‘औपनिवेशिक शासन से मुक्ति के बाद कई देश इसलिए आगे बढ़े और समृद्ध हुए, क्योंकि उनके भविष्य का नियंत्रण अब उनके पास है। विकल्पों की गुणवत्ता और बेहतर नीतियों ने इसमें निर्णायक भूमिका निभाई।'' जयशंकर ने कहा, ‘‘भारत के मामले में हमने देखा है कि नेतृत्व और शासन व्यवस्था हमारे आर्थिक विकास और सामाजिक परिवर्तन के विभिन्न चरणों में किस प्रकार उतार-चढ़ाव लेकर आई है। इस दौर में सबसे अधिक लाभ चीन को हुआ है, लेकिन हमने भी अच्छा प्रदर्शन किया है..।'' उन्होंने कहा, ‘‘इसके विपरीत पश्चिमी दुनिया का एक बड़ा हिस्सा अब यह महसूस करता है कि वह ठहराव का शिकार हो गया है और यह भावना धीरे-धीरे राजनीतिक अर्थ ग्रहण करती जा रही है।''
- इंदौर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार की टिकाऊ नीतियों और बड़े संस्थागत सुधारों की तारीफ करते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शनिवार को भरोसा जताया कि भारत वर्ष 2027 के अंत तक जर्मनी को पीछे छोड़कर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। सिंधिया, ‘यंग आंतरप्रेन्योर्स फोरम भारत' की इंदौर में आयोजित ‘वाईईएफ भारत समिट 2025' को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा,‘‘भारत कभी सोने की चिड़िया के रूप में जाना जाता था। 2,000 साल पहले विश्व के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में भारत की हिस्सेदारी 20 फीसदी थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत इसी दृष्टिकोण से आगे बढ़ेगा और विश्व पटल पर नक्षत्र के रूप में उभरेगा।'' सिंधिया ने कहा,‘‘भारत 12 साल पहले विश्व की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। भारत जापान को पीछे छोड़कर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर चुका है। 2027 के अंत तक हम जर्मनी को भी पीछे छोड़कर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएंगे।"केंद्रीय मंत्री ने ब्रिटेन का नाम लिए बगैर कहा कि जिस देश ने भारत पर 200 साल तक राज किया, उस देश को भारत आर्थिक विकास की दौड़ में पहले ही पीछे छोड़ चुका है। सिंधिया ने जोर देकर कहा कि भारत की अडिगता देश को परिभाषित करती है। उन्होंने कहा,‘‘इस अडिगता ने भारत को 2.3 हजार अरब डॉलर की जीडीपी वाले देश से 4.5 हजार अरब डॉलर की जीडीपी वाले देश में बदल दिया है।'' उन्होंने कहा कि मोदी की अगुवाई वाली सरकार की टिकाऊ नीतियों और बड़े संस्थागत सुधारों की बदौलत देश विनिर्माण का बड़ा वैश्विक केंद्र की दिशा में अग्रसर है। सिंधिया ने कहा,‘‘हर कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री हम मंत्रियों को निर्देश देते हैं कि औपनिवेशिक कानूनों को कचरे के डिब्बे में डाल दिया जाए। वह हमें कहते हैं कि कारोबारी सुगमता बढ़ाने के लिए सभी हितधारकों से चर्चा की जाए और उनकी कठिनाइयों का निवारण किया जाए।'' मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी सम्मेलन को संबोधित किया।उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश, देश का सबसे तेज गति से बढ़ने वाला राज्य बनकर उभरा है। यादव ने सम्मेलन में बड़ी तादाद में मौजूद नव उद्यमियों से आह्वान किया कि वे नवाचार, स्पष्ट सोच और सामाजिक दायित्व के साथ आगे बढ़ें तथा सूबे में अधिकाधिक निवेश करें। मुख्यमंत्री ने कहा,‘‘प्रदेश में औद्योगिक निवेश के लिए अनुकूल वातावरण, संसाधन और सुविधाएं हैं। राज्य सरकार निवेशकों को हरसंभव सहयोग देगी।" उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए पहली बार उद्योग विभाग को सीधे मुख्यमंत्री स्तर पर प्राथमिकता दी है ताकि निर्णय तेजी से हों और निवेशकों का विश्वास मजबूत हो। यादव ने कहा कि उद्योगों से जीवन संवारने की स्पष्ट नीति के साथ राज्य में नया संकल्प लिया गया है।उन्होंने कहा,‘‘यह नीति न केवल आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित करेगी।'' यादव ने यह भी बताया कि भोपाल में फरवरी के दौरान आयोजित वैश्विक निवेशक सम्मेलन में 32 लाख करोड़ रुपये के करार हुए थे जिनमें से छह लाख करोड़ रुपये के निवेश की परियोजनाओं की नींव रखी जा चुकी है।
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नई दिल्ली। भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) के वार्षिक पुरस्कार समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने भारत के परिधान निर्यात क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी।
सभा को संबोधित करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि परिधान एवं वस्त्र क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है, जो 4.5 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है। इसके अलावा यह क्षेत्र एक करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका को अप्रत्यक्ष रूप से सहारा देता है। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 2% का योगदान देता है तथा विनिर्माण क्षेत्र के सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में लगभग 11% की हिस्सेदारी रखता है।उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने पीएम मित्र पार्क और समर्थ कौशल विकास कार्यक्रम जैसी प्रगतिशील नीतियों और योजनाओं के माध्यम से वस्त्र एवं परिधान उद्योग को मजबूत और बहुआयामी समर्थन प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र को वैश्विक शक्ति के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से एक व्यापक ‘विजन 2030’ प्रस्तुत किया है।राधाकृष्णन इस बात पर जोर दिया कि सरकारी पहलें तभी अपने वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त करती हैं, जब उद्योग जगत के भागीदार नवाचार और दृढ़ संकल्प के साथ प्रतिक्रिया देते हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि सरकार इस क्षेत्र के समक्ष आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए सक्रिय रूप से संवाद और पहलों में जुटी हुई है, जिनमें चल रही मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) वार्ताएं भी शामिल हैं।सी.पी. राधाकृष्णन कहा कि वस्त्र उद्योग श्रम प्रधान है और कृषि के बाद देश में रोजगार का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। उन्होंने उद्योग में कार्यरत श्रमिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उपराष्ट्रपति कहा कि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र के निर्यात में दोगुनी वृद्धि होने की संभावना है, जिससे रोजगार के महत्वपूर्ण अतिरिक्त अवसर सृजित होंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि परिधान क्षेत्र विकसित और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में अग्रणी भूमिका निभाएगा।उपराष्ट्रपति सरकार और उद्योग के बीच एक सेतु के रूप में एईपीसी की भूमिका की सराहना की और ‘थ्रेड्स ऑफ टाइम: स्टोरी ऑफ इंडियाज़ टेक्सटाइल्स’ नामक इसकी कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। इस अवसर पर दिल्ली सरकार के उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, एईपीसी के अध्यक्ष सुधीर सेखरी, एईपीसी के उपाध्यक्ष डॉ. ए. शक्तिवेल तथा वस्त्र एवं परिधान उद्योग से जुड़े अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

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