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नयी दिल्ली. केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र को बड़ा झटका लगने के बाद भी केन्द्र शासित प्रदेश की अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने का काम चल रहा है। वित्त मंत्री ने 2019 से अब तक देश की आर्थिक यात्रा के बारे में कहा कि इस दौरान एक के बाद एक वैश्विक और घरेलू चुनौतियां आईं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में चल रहे खास प्रयासों का जिक्र भी किया। पाकिस्तान का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि हमें ''अपनी सीमाओं पर हमेशा परेशानी का सामना करना पड़ा।'' सीतारमण ने 'हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट' में कहा, ''इस बार आपने देखा कि जब जम्मू-कश्मीर संभल रहा था, केन्द्र शासन में अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ रही थी, तब क्या हुआ।'' उन्होंने कहा कि केन्द्र ने जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को तेजी से वृद्धि दर्ज करने के लिए तैयार किया। उन्होंने आगे बताया, ''जम्मू-कश्मीर बैंक का पुनरुद्धार ऐसा काम है जिस पर देश को गर्व हो सकता है। जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था फिर से खड़ी हो रही थी... लेकिन बाहरी कारणों से उसे बड़ा झटका लगा और महत्वपूर्ण पर्यटन उद्योग ठप हो गया।'' सीतारमण ने कहा, ''मुझे जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री की सराहना करनी होगी, जिन्होंने मुझसे दो बार मुलाकात की और पर्यटन क्षेत्र के ठप पड़ने के बाद अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने पर बात की।'' वित्त मंत्री का इशारा अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले की ओर था, जिसमें पाकिस्तानी आतंकवादियों ने 26 लोगों को मार डाला था। जवाब में उमर ने शुक्रिया कहा और हँसते हुए बोले, ''अब अगला काम मैम – कृपया मुझे धन दीजिए, क्योंकि पैसा बहुत कम है!'' उन्होंने माना कि केन्द्र सरकार उनके प्रशासन के लिए बहुत सहयोगी रही है, भले ही इससे कुछ लोग नाराज हो जाएं। उन्होंने कहा, ''मैं अपनी हर बात की जिम्मेदारी लेता हूं। अगर मैंने अपनी सरकार और राजनीति को भारत सरकार से अच्छे कामकाजी रिश्ते की तरफ मोड़ा है, तो मैं उसकी जिम्मेदारी लेता हूं और उसके नतीजे भी स्वीकार करूंगा।'' उन्होंने साफ किया कि केन्द्र से अच्छा रिश्ता होने का मतलब भाजपा से गठबंधन नहीं है। ''मैं भाजपा की राजनीति से सहमत नहीं हूं, उसका विरोध करता रहूंगा। लेकिन भारत सरकार के साथ जितना अच्छा काम हो सकेगा, करूंगा।'' जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा से रिश्ते पर उमर ने कहा, ''ये रिश्ता अभी बन रहा है, बस इतना ही कहूंगा।''
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नयी दिल्ली. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को कहा कि भारत-रूस साझेदारी पिछले 70-80 वर्षों में ‘‘सबसे स्थिर और अहम संबंधों'' में से एक रही है और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नयी दिल्ली यात्रा का उद्देश्य आर्थिक सहयोग पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए इन संबंधों को ‘‘फिर से परिभाषित'' करना था। जयशंकर ने इस विचार से असहमति जताई कि पुतिन की यात्रा भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर जारी वार्ताओं को जटिल बना सकती है। जयशंकर ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट' में कहा, ‘‘नहीं, मैं आपसे असहमत हूं। मुझे लगता है कि हर कोई जानता है कि भारत के दुनिया के सभी प्रमुख देशों के साथ बेहतर संबंध हैं।'' जयशंकर से पूछा गया था कि क्या पुतिन की नयी दिल्ली की दो दिवसीय यात्रा का प्रस्तावित व्यापार समझौते के लिए अमेरिका के साथ वार्ता पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि किसी भी देश की ऐसी अपेक्षा उचित नहीं है कि उसे यह कहने या दखल देने का हक है कि हमारे दूसरे देशों के साथ रिश्ते कैसे हों।'' उन्होंने कहा, ‘‘क्योंकि याद रखिए, दूसरे देश भी वही अपेक्षा कर सकते हैं। मेरा मानना है कि हमने हमेशा स्पष्ट किया है कि हमारे अनेक देशों के साथ संबंध हैं। हमारे पास अपनी पसंद की आजादी है।” जयशंकर ने कहा, ‘‘हम जिसे रणनीतिक स्वायत्तता कहते हैं, उसके बारे में लगातार बात करते रहे हैं और वह जारी भी है। मुझे समझ नहीं आता कि किसी के पास इसके विपरीत अपेक्षा करने का कोई कारण क्यों होना चाहिए।'' विदेश मंत्री ने स्वीकार किया कि ट्रंप प्रशासन का ध्यान व्यापार पर रहा है और कहा कि इस दिशा में भारत का दृष्टिकोण पूरी तरह से राष्ट्रीय हितों से प्रेरित है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि इस समय व्यापार सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। यह स्पष्ट रूप से वाशिंगटन की सोच का केन्द्र बिन्दु है, यह पहले की सरकारों की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण है, जिसे हमने पहचाना है और हम इसका सामना करने के लिए तैयार हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हम उचित शर्तों पर इसका सामना करने के लिए तैयार हैं। मेरा मतलब है, आपमें से जो लोग सोचते हैं कि कूटनीति का मतलब किसी और को खुश करना है, तो माफ कीजिए, मेरी कूटनीति की यह धारणा नहीं है। मेरे लिए, कूटनीति का मतलब हमारे राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।'' अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत का भारी-भरकम शुल्क (टैरिफ) लगा दिया है, जिसमें नयी दिल्ली द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत शुल्क भी शामिल है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष वर्तमान में प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि हमारे अपने-अपने व्यापारिक हितों के लिए एक समाधान बिंदु हो सकता है जिसपर दोनों पक्ष समहमत हों। जाहिर है, इस पर कठिन बातचीत होगी क्योंकि इसका इस देश में आजीविका पर असर पड़ेगा।'' जयशंकर ने कहा, ‘‘आखिरकार, हमारे लिए मजदूरों, किसानों, छोटे व्यवसायों और मध्यम वर्ग के हित ही मायने रखते हैं। जब हम अमेरिका जैसे देश के साथ व्यापार समझौते पर विचार करते हैं, तो आपको अपनी स्थिति और प्रस्ताव पर रखी जाने वाली बातों को लेकर बेहद विवेकपूर्ण होना चाहिए।'' राष्ट्रपति पुतिन की दो दिवसीय भारत यात्रा पर जयशंकर ने कहा कि भारत जैसे ‘‘बड़े'' और ‘‘उभरते'' देश के लिए अपनी पसंद की स्वतंत्रता के अनुरूप दुनिया में अधिक से अधिक देशों के साथ बेहतर सहयोग को बनाए रखना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि अगर आप भारत-रूस संबंधों को देखें, तो दुनिया ने पिछले 70-80 सालों में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। मैंने पहले भी कहा है और मैं इसे फिर से कहूंगा कि भारत और रूस के बीच संबंध दुनिया के सबसे स्थिर और मजबूत संबंधों में से एक रहे हैं।'' जयशंकर ने कहा, ‘‘यहां तक कि रूस के भी चीन, अमेरिका या यूरोप के साथ संबंधों में उतार-चढ़ाव आते रहे हैं। इनमें से कई देशों के साथ हमारे संबंधों में भी उतार-चढ़ाव आए हैं।'' उन्होंने कहा कि किसी भी रिश्ते में यह स्वाभाविक है कि उसके कुछ पहलू विकसित होते हैं और कुछ नहीं। उन्होंने कहा, ‘‘रूस के मामले में, विभिन्न कारणों से जो हुआ, मुझे लगता है कि उन्होंने पश्चिम और चीन को अपने प्राथमिक आर्थिक साझेदार के रूप में देखा। हमने भी शायद यही सोचा था।'' जयशंकर ने कहा, ‘‘तो इस संबंध का आर्थिक पक्ष किसी न किसी तरह गति नहीं पकड़ पाया। आप इसे आंकड़ों में देख सकते हैं।” उन्होंने कहा कि पुतिन की यात्रा कई मायनों में संबंधों को पुनः परिभाषित करने के लिए थी। उन्होंने कहा कि उर्वरकों पर संयुक्त उद्यम पर सहमति एक अन्य प्रमुख उपलब्धि थी। उन्होंने कहा, ‘‘ब्राजील के बाद हम दुनिया के दूसरे सबसे बड़े उर्वरक आयातक हैं। यह हमारे सामने बार-बार आने वाली समस्या है। और इसलिए भी क्योंकि उर्वरक के स्रोत बहुत अस्थिर रहे हैं। इसलिए हमने उर्वरकों पर एक महत्वपूर्ण और ठोस संयुक्त उद्यम बनाने पर सहमति जताई है।'' चीन के साथ भारत के संबंधों पर जयशंकर ने कहा कि नयी दिल्ली ने जो मुख्य बात कही वह यह थी कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द अच्छे संबंधों के लिए पूर्व शर्त है और इसे बनाए रखा जा रहा है तथा इसे और मजबूत बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन ऐसा नहीं है कि संबंधों में यही एकमात्र मुद्दा था। कई अन्य मुद्दे भी थे, जिनमें से कुछ गलवान से पहले के थे। इसलिए व्यापार के मुद्दे हैं, निवेश के मुद्दे हैं, प्रतिस्पर्धा के मुद्दे हैं, सब्सिडी के मुद्दे हैं, निष्पक्षता के मुद्दे हैं, पारदर्शिता के मुद्दे हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘ये भी वास्तविक मुद्दे हैं। हम इनमें से कुछ को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं। इनमें से कुछ सरल हैं, कुछ कठिन।'' पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा कि भारत की ज्यादातर समस्याएं उस देश की सेना से उत्पन्न होती हैं और उन्होंने आतंकवादी समूहों को उसके समर्थन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जैसे अच्छे आतंकवादी और बुरे आतंकवादी होते हैं, वैसे ही अच्छे सैन्य नेता भी होते हैं और कुछ इतने अच्छे नहीं भी होते। उनकी टिप्पणी को मुनीर के संदर्भ में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हमारे लिए पाकिस्तानी सेना की वास्तविकता हमेशा से यही रही है और हमारी अधिकांश समस्याएं वास्तव में उन्हीं से उत्पन्न होती हैं। जब आप आतंकवाद को देखते हैं, जब आप प्रशिक्षण शिविरों को देखते हैं, जब आप भारत के प्रति लगभग वैचारिक शत्रुता की नीति को देखते हैं, तो यह कहां से आती है? यह उस देश की सेना से आती है।'' जयशंकर ने कहा कि भारत और पाकिस्तान को बिल्कुल भी जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान की स्थिति पर गौर कीजिए। दोनों पक्षों की क्षमता, छवि और स्थिति में कितना अंतर है और साफ-साफ कहें तो उनकी प्रतिष्ठा देखिए। हमें जरूरत से ज्यादा जुनूनी होकर खुद को उनसे जोड़कर नहीं देखना चाहिए। यह एक चुनौती है, कुछ मुद्दे हैं जिनसे हमें निपटना होगा।'' बांग्लादेश के बारे में विदेश मंत्री ने कहा कि भारत उस देश का शुभचिंतक है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम एक लोकतांत्रिक देश के रूप में सोचते हैं, कोई भी लोकतांत्रिक देश लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से लोगों की इच्छा को सुनिश्चित होते देखना पसंद करता है।'' उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पूरा विश्वास है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जो भी निकलेगा, उसमें संबंधों के बारे में संतुलित और परिपक्व दृष्टिकोण होगा और उम्मीद है कि चीजें बेहतर होंगी।'' यह पूछे जाने पर कि क्या बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में ही रहेंगी, उन्होंने कहा, ‘‘वह एक खास परिस्थिति में यहां आई थीं और मुझे लगता है कि उनके साथ जो कुछ भी हुआ, उसमें यही परिस्थिति एक कारक है। लेकिन फिर भी, इस संबंध में निर्णय उन्हें खुद ही करना होगा।''
- नयी दिल्ली. पान मसाला और गुटके को बढ़ावा देने के लिए इनका विज्ञापन कर रहे फिल्म अभिनेताओं को उनके बेहतर अभिनय के लिए मिले पुरस्कार वापस लिए जाने की मांग शुक्रवार को लोकसभा में उठी। निचले सदन में गुजरात में शराबबंदी खत्म करने का मुद्दा भी उठाया गया।पान मसाला पर उपकर लगाने संबंधी ‘स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक 2025' पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) के हनुमान बेनीवाल ने कहा कि किसी मामले में कानून बनाने से ज्यादा महत्वपूर्ण उस पर अमल करना होता है। उन्होंने कहा कि देश में तमाम ऐसे कानून हैं, जिसका खुलेआम उल्लंघन होता है और ऐसे में अनुपालन के अभाव में कानून बनाने का उद्देश्य विफल हो जाता है। बेनीवाल ने शाहरूख खान, अजय देवगन और सलमान खान जैसे मशहूर अभिनेताओं के नाम का सीधा उल्लेख करते हुए कहा कि ‘‘ऐसे अदाकार विज्ञापन के जरिये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पान मसाला और गुटकों के सेवन को बढ़ावा देते हैं।'' उन्होंने कहा कि ऐसे में इन अभिनेताओं को उनके बेहतर अभिनय के लिए दिये गये विभिन्न पुरस्कारों को वापस ले लेना चाहिए। निर्दलीय सदस्य उमेशभाई बाबूभाई पटेल ने गुजरात में शराबबंदी के बावजूद खुलेआम शराब उपलब्ध होने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि केवल कानून बनाना ही समस्या का समाधान नहीं, बल्कि इसका अनुपालन भी बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि गुजरात में भले ही शराब पर प्रतिबंध है, लेकिन हर गली-नुक्कड़ पर यह आसानी से उपलब्ध है, ऐसे में पाबंदी लगाने का क्या फायदा। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध कभी-कभी भ्रष्टाचार का दरवाजा खोलता है। भाजपा सदस्य धवल लक्ष्मणभाई पटेल तथा कांग्रेस के किशोरी लाल एवं शशिकांत सेंथिल ने भी चर्चा में हिस्सा लिया।
- नयी दिल्ली. सरकार ने शुक्रवार को संसद को बताया कि भारत में सड़क दुर्घटना में मरने वालों की संख्या 2024 में 2.3 प्रतिशत बढ़कर 1.77 लाख से अधिक हो गई, जिसका अर्थ है कि हर दिन 485 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि फरवरी 2020 में सड़क सुरक्षा पर तीसरे वैश्विक मंत्री स्तरीय सम्मेलन में अपनाए गए ‘सड़क सुरक्षा पर स्टॉकहोम घोषणापत्र' में 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और चोटों को 50 प्रतिशत तक कम करने का एक नया वैश्विक लक्ष्य रखा गया है। गडकरी ने कहा, ‘‘राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से मिली जानकारी के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2024 के दौरान देश में सभी श्रेणी की सड़कों पर दुर्घटना में मरने वालों की कुल संख्या 1,77,177 थी, जिसमें ईडीएआर पोर्टल से लिया गया पश्चिम बंगाल का डेटा भी शामिल है।'' उन्होंने कहा कि कैलेंडर वर्ष 2023 के दौरान देश में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस विभाग ने कुल 4,80,583 सड़क हादसों की रिपोर्ट दी है, जिनमें 1,72,890 लोगों की जान गई और 4,62,825 लोग घायल हुए। मंत्री ने कहा कि ‘वर्ल्ड रोड स्टेटिस्टिक्स 2024' के अनुसार, चीन में प्रति लाख आबादी पर सड़क दुर्घटनाओं में मौत की दर 4.3 और अमेरिका में 12.76 है, जबकि भारत में यह आंकड़ा 11.89 है। गडकरी ने कहा कि सरकार ने सड़क सुरक्षा के मुद्दे को हल करने के लिए 4-‘ई' यानी एजुकेशन (शिक्षा), इंजीनियरिंग (सड़क और वाहन दोनों की), एनफोर्समेंट (प्रवर्तन) और इमरजेंसी केयर (आपातकालीन उपचार) पर आधारित एक बहुआयामी रणनीति बनाई है। उन्होंने कहा कि इसके अनुसार, देश में सड़क सुरक्षा के लिए कई पहल की गई हैं।
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बिलासपुर/विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आज कृषि विज्ञान केंद्र बिलासपुर में ‘‘स्वस्थ मृदा स्वस्थ शहर’’ थीम पर आधारित जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कृषि विज्ञान केन्द्र प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, डॉ. शिल्पा कौशिक ने कार्यक्रम में मृदा स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डाला। रासायनिक खादों से मृदा पर होने वाले दुष्प्रभाव की जानकारी दी। साथ ही प्राकृतिक खेती के महत्व के बारे में बताया। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. अमित शुक्ला द्वारा मिट्टी की महत्ता के बारे में व उसके स्वास्थ्य को किस प्रकार सुधारा जाए इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी। श्री जयंत साहू ने मिट्टी की जांच कराने की सलाह दी तथा जांच के उपरांत मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार उर्वरकों के प्रयोग की सलाह दी।
डॉ. एकता ताम्रकार ने बताया कि स्वस्थ मृदा स्वस्थ शहर के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है क्योंकि कीटनाशकों व रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से हमारी मिट्टी लगातार दूषित हो रही है, अतः इसकी शुरूआत हर घर से होनी चाहिए, उसके बाद मोहल्ला एवं शहर स्तर पर होना चाहिए। श्रीमती हेमकांति बंजारे ने धान फसल में रोपा की तुलना में कतार बोनी करने की सलाह दी। डा. निवेदिता पाठक ने पोषण वाटिका में रासायनिक खाद की बजाय जैविक खाद के प्रयोग की सलाह दी। डा. स्वाति शर्मा ने रासायनिक कीटनाशकों की बजाए जैविक कीटनाशकों के प्रयोग के लिए प्रोत्साहित किया।
इस कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के अधिकारी एवं कर्मचारीगण डा. शिल्पा कौशिक, डॉ. अमित शुक्ला, श्री जयंत साहू, डॉ. निवेदिता पाठक, श्रीमती सुशीला ओहदार, डॉ. स्वाति शर्मा, श्री इंद्रराम पटेल एवं राजू कश्यप तथा कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर के छात्र-छात्राओं एवं बड़ी संख्या में कृषकों ने अपनी सहभागिता दी। -
हापुड़ (उप्र). मिजोरम के पूर्व राज्यपाल और वरिष्ठ अधिवक्ता स्वराज कौशल के अंतिम संस्कार के एक दिन बाद उनकी बेटी और भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने शुक्रवार सुबह बृजघाट पर परिवार के सदस्यों और शुभचिंतकों के साथ उनकी अस्थियां गंगा में विसर्जित कीं। बांसुरी स्वराज हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार अस्थि विसर्जन करने के लिए करीबी रिश्तेदारों के साथ बृजघाट पहुंचीं। नम आंखों से उन्होंने अपने पिता की अस्थियों के विसर्जन के लिए विभिन्न रस्में पूरी कीं जबकि पंडितों ने पारंपरिक पूजा-पाठ किया। स्थानीय जन प्रतिनिधि, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ घाट पर पहुंचे और कौशल को श्रद्धांजलि दी। एक प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि अस्थि विसर्जन पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ।
73 वर्षीय स्वराज कौशल, भाजपा की दिवंगत वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पति थे। उनकी बृहस्पतिवार को सीने में दर्द की शिकायत के बाद दिल का दौरा पड़ने से दिल्ली के अखिल भारतीय आयुविर्ज्ञान संस्थान में मौत हो गई थी। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के नवीनतम प्रयासों का शुक्रवार को पुरजोर समर्थन किया और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यह संदेश दिया कि भारत इस संघर्ष का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने के लिए सभी शांति प्रयासों में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा। यूक्रेन मुद्दा दोनों नेताओं के वार्षिक शिखर वार्ता में केंद्रीय रूप से उभरा है। इस शिखर वार्ता का उद्देश्य लगभग आठ दशक से जारी द्विपक्षीय साझेदारी को और मजबूत बनाना है, जो जटिल भू-राजनीतिक माहौल और तनावों के बावजूद स्थिर बनी रही है। मोदी ने शिखर वार्ता के दौरान अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि भारत यूक्रेन संघर्ष को लेकर तटस्थ नहीं है, बल्कि इसे करने के लिए शांति का पक्षधर है। मोदी ने कहा, “यूक्रेन संघर्ष के शुरू होने के बाद से हम चर्चा करते रहे हैं। एक करीबी मित्र के रूप में, आप हमें स्थिति के बारे में नियमित रूप से सूचित करते आए हैं। मुझे लगता है कि विश्वास एक बड़ी ताकत है।” उन्होंने कहा, “हम सभी को शांति का मार्ग तलाशना चाहिए। मैं नवीनतम प्रयासों से अवगत हूं और मुझे विश्वास है कि दुनिया शांति की ओर रुख करेगी।” उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा कहा है कि भारत तटस्थ नहीं है; भारत का एक पक्ष है और वह है शांति। हम सभी शांति प्रयासों का समर्थन करते हैं और इन कोशिशों के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।” रूसी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि मॉस्को संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में काम कर रहा है। पुतिन का बृहस्पतिवार शाम को लाल कालीन पर स्वागत किया गया, यह चार साल बाद उनकी पहली भारत यात्रा है। फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद भी यह उनका पहला भारत दौरा है।
- नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ट्रेनों की समयबद्धता सुधारने के लिए लगातार कदम उठा रहा है। चालू वित्त वर्ष (अप्रैल–अक्टूबर 2025-26) में 80 प्रतिशत मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें समय पर रही हैं, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 77.12 प्रतिशत था। लोकसभा में एक लिखित जवाब में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “वित्त वर्ष 2024-25 में 77.12 प्रतिशत मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें समय पर थीं। वहीं, चालू वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल–अक्टूबर अवधि में यह आंकड़ा बढ़कर 80% हो गया है।”केंद्रीय मंत्री के अनुसार, रेलवे ट्रेनों को समय पर चलाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने देरी के कई प्रमुख कारण भी बताए, जिनमें कोहरा, मार्ग में रुकावट, एसेट मेंटेनेंस, अलार्म चेन पुलिंग, आंदोलन, पटरियों पर जानवरों का आ जाना और अन्य आकस्मिक परिस्थितियां शामिल हैं।एक अन्य प्रश्न के जवाब में मंत्री ने बताया कि कैलेंडर वर्ष 2024 और 2025 में भारतीय रेलवे ने कुल 1,20,579 रिक्तियों के लिए भर्ती अधिसूचनाएं जारी की हैं। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, जनवरी-दिसंबर 2024 के दौरान सहायक लोको पायलट (एएलपी), तकनीशियन, उप-निरीक्षक, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) में कांस्टेबल, जूनियर इंजीनियर (जेई)/डिपो सामग्री अधीक्षक (डीएमएस)/रासायनिक एवं धातुकर्म सहायक (सीएमए), पैरामेडिकल कैटेगरी, गैर-तकनीकी लोकप्रिय श्रेणियां (स्नातक), मंत्रिस्तरीय और पृथक श्रेणियां तथा लेवल-1 पदों के लिए 92,116 रिक्तियों हेतु दस केंद्रीकृत रोजगार अधिसूचनाएं (सीईएन) जारी की गईं।इसके अलावा, वर्ष 2025 के वार्षिक कैलेंडर के अनुसार 28,463 रिक्तियों के लिए सात और केंद्रीकृत रोजगार अधिसूचनाएं जारी की गई हैं। मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2014-15 से 2024-25 के बीच रेलवे ने 5.08 लाख लोगों को विभिन्न पदों पर नियुक्त किया है, जबकि 2004-05 से 2013-14 के बीच यह संख्या 4.11 लाख थी। इससे स्पष्ट होता है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में रेलवे में अधिक रोजगार अवसर प्रदान किए गए हैं। (
- नई दिल्ली। भारत की यात्रा पर आए रूस के राष्ट्रपति की राजकीय यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच अनेक महत्वपूर्ण समझौते और घोषणाएँ की गईं। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी सूची में बताया गया कि प्रवासन, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, समुद्री सहयोग, ध्रुवीय क्षेत्रों में प्रशिक्षण, उर्वरक आपूर्ति, सीमा शुल्क, शिक्षा और मीडिया क्षेत्रों में कई MoU और समझौते हस्ताक्षरित हुए।प्रवासन और गतिशीलता के क्षेत्र में भारत और रूस ने दो महत्त्वपूर्ण समझौते किए, पहला अस्थायी श्रम गतिविधि को सुगम बनाने से जुड़ा है, जबकि दूसरा अनियमित प्रवासन का मुकाबला करने में सहयोग पर केंद्रित है। स्वास्थ्य तथा खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय और रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और विज्ञान में सहयोग पर एक समझौता हुआ। इसके साथ ही भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और रूस के उपभोक्ता अधिकार व कल्याण निगरानी प्राधिकरण के बीच खाद्य सुरक्षा पर सहयोग समझौता भी हस्ताक्षरित किया गया।समुद्री सहयोग और ध्रुवीय जल क्षेत्रों में विशेषज्ञों के प्रशिक्षण के लिए भारत के पोत, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय तथा रूस के परिवहन मंत्रालय के बीच एक समझौता किया गया। इसी क्षेत्र में एक अन्य MoU रूस के मेरीटाइम बोर्ड के साथ भी हस्ताक्षरित हुआ। वहीं उर्वरक क्षेत्र में यूरालकेम (UralChem) और भारत की RCF, NFL तथा Indian Potash Limited के बीच एक महत्त्वपूर्ण समझौता हुआ, जिसका उद्देश्य उर्वरकों की स्थिर और दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करना है।वहीं सीमा शुल्क और वाणिज्य के क्षेत्र में भी एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत के केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड और रूस के फेडरल कस्टम्स सर्विस के बीच प्री-अराइवल डेटा साझा करने पर एक प्रोटोकॉल हस्ताक्षरित किया गया। इसके अलावा भारतीय डाक विभाग और रसियन पोस्ट के बीच द्विपक्षीय समझौता भी किया गया।शैक्षणिक और वैज्ञानिक सहयोग के अंतर्गत DIAT पुणे और रूस के नेशनल टॉम्स्क स्टेट यूनिवर्सिटी के बीच एक MoU हस्ताक्षरित हुआ। मुंबई विश्वविद्यालय, मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी और Russian Direct Investment Fund (RDIF) के बीच भी सहयोग समझौता किया गया। इसके अलावा मीडिया क्षेत्र में भारत के प्रसार भारती और रूस की कई प्रमुख मीडिया संस्थाओं जैसे Gazprom-media Holding, National Media Group, BIG ASIA, TV-Novosti और TV BRICS के साथ कई MoU किए गए, जिनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच प्रसारण सहयोग को बढ़ाना है।घोषणाओं में बताया गया कि भारत-रूस आर्थिक सहयोग के रणनीतिक क्षेत्रों के विकास के लिए 2030 तक का एक व्यापक कार्यक्रम आगे बढ़ाया जाएगा। रूस ने International Big Cat Alliance (IBCA) में शामिल होने के लिए Framework Agreement को अपनाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा “India -Fabric of Time” प्रदर्शनी आयोजित करने पर भी एक समझौता किया गया, जिसे नई दिल्ली के नेशनल क्राफ्ट्स म्यूजियम और मॉस्को के Tsaritsyno म्यूजियम के बीच आयोजित किया जाएगा। यात्रा के दौरान रूस के नागरिकों के लिए 30 दिनों का मुफ्त e-Tourist Visa और Group Tourist Visa देने की घोषणा भी की गई, जो परस्परता के आधार पर प्रदान किए जाएंगे।
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नयी दिल्ली. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और रूस का सहयोग किसी भी देश के खिलाफ नहीं है और इसका उद्देश्य सिर्फ दोनों देशों द्वारा अपने-अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है। पुतिन ने यह टिप्पणी भारत और रूस के प्रति अमेरिका के आक्रामक रुख की पृष्ठभूमि में की है।
रूस के साथ भारत के ऊर्जा संबंधों के संदर्भ में पुतिन ने कहा कि कुछ ‘‘तत्व'' रूस के साथ भारत के घनिष्ठ संबंधों के मद्देनजर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की बढ़ती भूमिका को नापसंद करते हैं और ये तत्व राजनीतिक कारणों से भारत के प्रभाव को सीमित करने के लिए ‘‘कृत्रिम बाधाएं'' खड़ी करने का प्रयास कर रहे हैं। रूसी राष्ट्रपति ने बृहस्पतिवार शाम को एक निजी समाचार चैनल को दिए गए साक्षात्कार में रूस के खिलाफ पश्चिमी प्रतिबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके देश का भारत के साथ ऊर्जा सहयोग काफी हद तक ‘‘अप्रभावित'' है। पुतिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ शिखर वार्ता करने के लिए दो दिवसीय यात्रा पर बृहस्पतिवार की शाम नयी दिल्ली पहुंचे। रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत-अमेरिका संबंध पिछले दो दशकों में संभवतः सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं और अमेरिका ने भारतीय सामान पर भारी 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है, जिसमें रूस से कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत कर भी शामिल है। रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिका के आक्रामक रुख पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘कुछ बाहरी दबावों के बावजूद, न तो मैंने और न ही प्रधानमंत्री मोदी ने कभी भी, किसी के खिलाफ काम करने के लिए हमारी साझेदारी का इस्तेमाल नहीं किया।'' उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अपना एजेंडा है, अपने लक्ष्य हैं, जबकि हमारा ध्यान अपने ऊपर है - किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि हमारा लक्ष्य अपने-अपने हितों, भारत और रूस के हितों की रक्षा करना है।'' रूस से भारत द्वारा कच्चा तेल खरीदने पर अमेरिका की आपत्ति को खारिज करते हुए पुतिन ने कहा कि अगर अमेरिका को रूसी ईंधन खरीदने का अधिकार है, तो भारत को भी यह विशेषाधिकार क्यों नहीं मिलना चाहिए। पुतिन ने कहा, ‘‘जहां तक भारत द्वारा रूस से ऊर्जा संसाधनों की खरीद का सवाल है, मैं यह बताना चाहूंगा और एक बार पहले भी इसका उल्लेख कर चुका हूं कि अमेरिका स्वयं भी अपने परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए हमसे परमाणु ईंधन खरीदता है।'' रूसी राष्ट्रपति ने रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के मद्देनजर भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद कम करने के बारे में पूछे गए प्रश्न के जवाब में कहा, ‘‘इस वर्ष के पहले नौ महीनों के दौरान कुल व्यापार कारोबार में कुछ गिरावट आई है। यह बस एक मामूली समायोजन है। कुल मिलाकर, हमारा व्यापार कारोबार लगभग पहले के स्तर पर ही बना हुआ है।'' पुतिन ने यह भी कहा कि भारत के साथ अब वैसा व्यवहार नहीं किया जा सकता, जैसा कई दशक पहले किया जाता था। उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी आसानी से दबाव में आने वाले व्यक्ति नहीं हैं। भारतीय लोग निश्चित रूप से अपने नेता पर गर्व कर सकते हैं। यह बिल्कुल स्पष्ट है।'' उन्होंने कहा, ‘‘बिना किसी टकरावपूर्ण स्थिति के उनका रुख दृढ़ और स्पष्ट है। हमारा लक्ष्य संघर्ष भड़काना नहीं है; बल्कि, हमारा लक्ष्य अपने कानूनी अधिकारों की रक्षा करना है। भारत भी यही चाहता है।'' यूक्रेन संघर्ष पर पुतिन ने कहा कि उनका मानना है कि अमेरिका इस समस्या का सक्रिय रूप से समाधान ढूंढ रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पूरा यकीन है और इसमें कोई संदेह नहीं कि वह (ट्रंप) पूरी ईमानदारी से शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं।'' पुतिन ने कहा कि ट्रंप वास्तव में शत्रुता को समाप्त कराना चाहते हैं और जान-माल की और हानि को रोकना चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच टकराव को समाप्त करने के पीछे राजनीतिक हित या आर्थिक उद्देश्य भी हो सकते हैं।'' द्विपक्षीय व्यापार पर पुतिन ने कहा कि ‘‘हमारे 90 प्रतिशत से अधिक लेन-देन पहले से ही राष्ट्रीय मुद्राओं में होते हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि कई बिचौलियों की मौजूदगी के कारण कुछ जटिलताएं पैदा होती हैं, लेकिन उनके समाधान भी हैं।'' रूसी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना भी की।उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी के साथ हमारे सहयोगात्मक प्रयास महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे हमारे आपसी संबंधों से भी आगे हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘दोनों देशों के लिए इसकी प्रत्यक्ष प्रासंगिकता को देखते हुए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्थिरता सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे हमारे उद्देश्यों की पूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण कार्य निर्धारित किए हैं - सबसे पहले अपने लिए, फिर प्रशासन के लिए और अंत में राष्ट्र के लिए।'' -
मुंबई. मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सीमा शुल्क अधिकारियों ने अलग-अलग मामलों में 25 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का ‘हाइड्रोपोनिक गांजा', करीब 92 लाख रुपये मूल्य का सोना और विदेशी मुद्रा जब्त किया। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। यह कार्रवाई मुंबई सीमा शुल्क के हवाई अड्डा आयुक्तालय द्वारा 25 नवंबर से तीन दिसंबर के बीच की गई।
हाइड्रोपोनिक्स ऐसी तकनीक है जिसमें पौधों को मिट्टी की बजाय तरल पोषक घोल में उगाया जाता है। -
नयी दिल्ली. भारत और रूस के सीमा-शुल्क अधिकारियों ने दोनों देशों के बीच माल एवं वाहनों का आवाजाही के संबंध में आगमन-पूर्व सूचना के आदान-प्रदान पर सहयोग के लिए बृहस्पतिवार को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा-शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी और रूस की संघीय सीमा-शुल्क सेवा (एफसीएस) की उप प्रमुख तातियाना मर्कुशोवा ने 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के पहले इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। आगमन-पूर्व सूचना के आदान-प्रदान से सीमा शुल्क को जोखिमों का आकलन करने एवं अग्रिम रूप से माल की प्रक्रिया करने में सहायता मिलती है। इससे सीमा पर तीव्र और अधिक सुरक्षित निकासी सुनिश्चित होती है। सीबीआईसी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर लिखा, ‘‘इससे व्यापार सुविधा मजबूत होगी और सीमापार आवागमन में सुरक्षा, पारदर्शिता एवं समग्र दक्षता बढ़ेगी। '' इसके अलावा भारत और रूस ने कृषि क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की ताकि कृषि व्यापार को मजबूत किया जा सके एवं आधुनिक कृषि अवसरों का दोहन किया जा सके। भारत के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय राजधानी में रूसी समकक्ष ओक्साना लुट से मुलाकात की। चौहान ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘रूस की कृषि मंत्री ओक्साना लुट से मिलकर खुशी हुई। हमने कृषि में भारत-रूस सहयोग को मजबूत करने के तरीकों और आधुनिक खेती, नवाचार, अनुसंधान आदान-प्रदान एवं सतत विकास के अवसरों पर चर्चा की।'' भारत के मत्स्यपालन, पशुपालन एवं दुग्ध मंत्री राजीव रंजन सिंह ने भी रूस की कृषि मंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक की। आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘ बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने मत्स्य पालन, पशु एवं दुग्ध उत्पादों में आपसी व्यापार बढ़ाने, बाजार पहुंच संबंधी मुद्दों को सुलझाने एवं निर्यात में तेजी लाने पर चर्चा की।'' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच मुलाकात की पृष्ठभूमि में दोनों देशों के नेताओं के बीच ये बैठकें हुईं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निमंत्रण पर 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए पुतिन बृहस्पतिवार को नयी दिल्ली पहुंचे। चार वर्षों में यह उनकी पहली भारत यात्रा है।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को हटाने संबंधी विधेयकों पर विचार कर रही संसदीय समिति ने बृहस्पतिवार को उन राजनीतिक दलों को आमंत्रित करने का निर्णय लिया जिन्होंने समिति का बहिष्कार किया है। संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार (संशोधन) विधेयक पर विचार के लिए गठित संयुक्त समिति की पहली बैठक में संवैधानिक विशेषज्ञों और बार एसोसिएशन के सदस्यों से परामर्श करने का भी निर्णय लिया गया। भाजपा सदस्य अपराजिता सारंगी ने बैठक की अध्यक्षता की। कई विपक्षी दलों ने समिति से दूरी बनाए रखी है और उनका तर्क है कि ये विधेयक कानून के उस मूल सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं जिसके अनुसार किसी व्यक्ति को तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक कि वह दोषी साबित न हो जाए। भाजपा और उसके गठबंधन सहयोगियों के प्रभुत्व वाली 31 सदस्यीय समिति में राकांपा -शरद पवार नेता सुप्रिया सुले, अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल, एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी और वाईएसआरसीपी सदस्य एस निरंजन रेड्डी ही विपक्षी सदस्य हैं। सारंगी ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘सभी सदस्य इस बात पर सहमत थे कि राजनीति का अपराधीकरण नहीं होना चाहिए। यह भी निर्णय लिया गया कि हमें राज्यों में जाकर समाज के सभी वर्गों - संवैधानिक विशेषज्ञों, बार एसोसिएशन के सदस्यों, विभिन्न स्तरों पर राज्य के अधिकारियों - को आमंत्रित करना चाहिए। हमने राज्यों में विपक्ष के नेताओं को भी आमंत्रित करने का निर्णय किया है।'' समिति के एक सदस्य ने बताया कि संसदीय समिति का बहिष्कार करने वाले राजनीतिक दलों को आमंत्रित करने का सुझाव दिया गया था, जिसे भारी समर्थन मिला। समिति की अगली बैठक 17 दिसंबर को होगी, जब गृह और विधि एवं न्याय मंत्रालयों के प्रतिनिधि उन्हें विचाराधीन विधेयकों के बारे में जानकारी देंगे।
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अहमदाबाद. गुजरात में मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पता चला है कि राज्य भर में 17 लाख से अधिक मृत मतदाताओं के नाम अब भी मौजूदा मतदाता सूची में शामिल है। यह जानकारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय द्वारा बृहस्पतिवार को जारी एक विज्ञप्ति में दी गयी। विज्ञप्ति में कहा गया है कि एसआईआर प्रक्रिया चार नवंबर को गुजरात में बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा अपने निर्दिष्ट क्षेत्रों में गणना फॉर्म वितरित करने के साथ शुरू हुआ और यह 11 दिसंबर तक जारी रहेगा। इसमें कहा गया है, ‘‘पिछले एक महीने के दौरान, 2025 मतदाता सूची में पंजीकृत पांच करोड़ से अधिक मतदाताओं को गणना फॉर्म वितरित किए गए हैं। अधिकांश 33 जिलों में, 100 प्रतिशत फॉर्म वितरण पूरा हो चुका है। लौटाए गए फॉर्म का डिजिटलीकरण कार्य वर्तमान में चल रहा है। अब तक, 182 विधानसभा क्षेत्रों में से 12 में डिजिटलीकरण का काम पूरा हो चुका है।" विज्ञप्ति में कहा गया है, "इस दौरान, यह पता चला कि राज्य भर में 17 लाख मृत मतदाता अब भी मतदाता सूची में शामिल थे। जबकि 6.14 लाख से अधिक मतदाता अपने पते से अनुपस्थित पाए गए। यह देखा गया है कि 30 लाख से अधिक मतदाता स्थायी रूप से पलायन कर गए हैं।" इसमें कहा गया है कि बीएलओ ने 3.25 लाख से अधिक मतदाताओं को "दोहराई गई" श्रेणी में पाया, जिसका अर्थ है कि उनके नाम एक से अधिक स्थानों पर पाए गए।
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नयी दिल्ली. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि अमेरिका ने वर्ष 2009 से अब तक कुल 18,822 भारतीय नागरिकों को निर्वासित किया है, जिनमें जनवरी 2025 से अब तक निर्वासित किए गए 3,258 भारतीय शामिल हैं। उच्च सदन में पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए जयशंकर ने कहा कि मानव तस्करी के मामलों की जांच राज्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने भी की है, जिनमें पंजाब में सर्वाधिक मामले दर्ज हुए हैं। उन्होंने एक लिखित उत्तर में बताया, ‘‘2009 से अब तक कुल 18,822 भारतीय नागरिकों को भारत वापस भेजा गया है।'' मंत्री ने बताया कि वर्ष 2023 में 617 भारतीयों को और 2024 में 1,368 भारतीयों को अमेरिका से निर्वासित किया गया। उन्होंने कहा ‘‘जनवरी 2025 से अब तक कुल 3,258 भारतीय नागरिकों को अमेरिका ने भारत निर्वासित किया है। इनमें से 2,032 भारतीय (लगभग 62.3 प्रतिशत) नियमित वाणिज्यिक उड़ानों से और शेष 1,226 भारतीय (37.6 प्रतिशत) अमेरिकी आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) या सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा (सीबीपी) द्वारा संचालित चार्टर उड़ानों से लौटे हैं।'' पूरक प्रश्नों के उत्तर में जयशंकर ने बताया कि एनआईए ने कुछ वर्ष पहले मानव तस्करी विरोधी प्रकोष्ठ की स्थापना की थी, जिसे मानव तस्करी के मामलों की जांच का प्राधिकार प्राप्त है। राज्यों ने भी इस प्रकार के मामलों में जांच शुरू की है। उन्होंने बताया ‘‘एनआईए ने मानव तस्करी के 27 मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर जांच की है, जिनमें 169 गिरफ्तारियां हुई हैं और 132 व्यक्तियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किए गए हैं। एनआईए ने हरियाणा और पंजाब में सात अगस्त को दो प्रमुख तस्करों को और हिमाचल प्रदेश में दो अक्टूबर को दो अन्य लोगों को गिरफ्तार किया।'' विदेश मंत्री ने कहा कि राज्यों में पंजाब में मानव तस्करी के सर्वाधिक मामले हैं। ‘‘पंजाब सरकार ने एसआईटी और तथ्य-अन्वेषण समिति गठित की है। उनकी ओर से मिली जानकारी के अनुसार, 58 अवैध ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ 25 प्राथमिकी दर्ज हुई हैं और 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।'' जयशंकर ने कहा, ‘‘हरियाणा राज्य में 2,325 मामले और 44 प्राथमिकी दर्ज हुई हैं । इन मामलों में 27 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गुजरात राज्य ने भी एक महत्वपूर्ण तस्कर को गिरफ्तार किया है।'' उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय, अमेरिकी आईसीई/सीबीपी की निर्वासन प्रक्रिया के दौरान भारतीय नागरिकों के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने हेतु अमेरिकी पक्ष के साथ निरंतर बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने विशेषकर महिलाओं और बच्चों के लिए हथकड़ी-बेड़ियों के उपयोग को लेकर अपनी कड़ी आपत्ति अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष दर्ज कराई है। जयशंकर ने कहा ‘‘पांच फरवरी की निर्वासन उड़ान के बाद से महिलाओं और बच्चों को बेड़ियां पहनाने की कोई घटना मंत्रालय के संज्ञान में नहीं आई है।'' उन्होंने बताया कि अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, 19 नवम्बर 2012 से आईसीई की मानक संचालन प्रक्रिया के तहत ‘नियंत्रण नीति' लागू है। विदेश मंत्री ने बताया ‘‘उनका कहना है कि उड़ान में सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसी नीति अपनाई गई है। अतीत में कुछ घटनाएं हुई हैं, जब निर्वासितों ने अन्य निर्वासितों और चालक दल के सदस्यों पर हमला किया था। महिलाओं और नाबालिगों को सामान्यतः बेड़ियां नहीं पहनाई जाती हैं, लेकिन उड़ान प्रभारी अधिकारी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लेते हैं।'' उन्होंने कहा कि इन उड़ानों से ही आतंकवाद, हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी आदि के आरोपी अपराधियों को भी वापस भेजा जाता है। उन्होंने कहा ‘‘भारत के मामले में लखविंदर सिंह और अनमोल बिश्नोई जैसे फरार अपराधियों को भी ऐसे निर्वासन अभियानों के तहत वापस लाया गया है।'' उन्होंने बताया कि लौटने वाले निर्वासितों के बयान और विवरणों के आधार पर केंद्र और राज्य सरकारों ने कई मामलों में प्राथमिकी दर्ज की हैं और अवैध आव्रजन एजेंटों, आपराधिक गिरोहों और मानव तस्करी गिरोहों के खिलाफ जांच और कार्रवाई जारी है। एक विशेष मामले का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि हरजीत कौर (73) को अमेरिका ने 25 फरवरी को निर्वासित किया था। उन्होंने बताया ‘‘उन्हें हथकड़ी नहीं लगाई गई थी, लेकिन हिरासत के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ।'' विदेश मंत्री ने कहा कि भारत आने वाली हर निर्वासन उड़ान के यात्रियों से सरकार के अधिकारी अनिवार्य रूप से बातचीत करते हैं। उन्होंने कहा ‘‘हरजीत कौर के मामले में हमारे आव्रजन अधिकारियों ने पुष्टि की है कि उन्हें हथकड़ी नहीं लगाई गई थी, लेकिन हिरासत में उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। 26 सितम्बर को हमने इस मामले को अमेरिकी दूतावास के समक्ष औपचारिक रूप से उठाया और उनके साथ हुए व्यवहार पर अपनी कड़ी चिंता प्रकट की है।'' जयशंकर ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस मामले पर अमेरिकी पक्ष के साथ निरंतर बातचीत कर रही है।
- नयी दिल्ली. उपभोक्ता मामलों के विभाग ने यह ज़रूरी कर दिया है कि सभी पान मसाला पैकेट, चाहे उनका आकार या वज़न कुछ भी हो, पर विधिक मापविज्ञान अधिनियम (पैकबंद जिंस) कानून, 2011 के तहत खुदरा बिक्री मूल्य (आरएसपी) और दूसरी ज़रूरी घोषणाएं प्रदर्शित करनी होंगी। एक सरकारी बयान में कहा गया है कि जीएसआर 881(ई) के ज़रिये अधिसूचित किया गया यह बदलाव एक फरवरी, 2026 से लागू होगा। उस तारीख से, पान मसाला के सभी उत्पादकों, पैकर और आयातकों को इसका पूरा अनुपालन करना होगा।इस बदलाव से पहले की छूट खत्म हो गई है, जिसके तहत 10 ग्राम या उससे कम के छोटे पैक को कुछ घोषणाओं से बचने की इजाजत थी। अब, इन छोटे पैक पर भी अपने लेबल पर खुदरा बिक्री मूल्य छापना होगा और वर्ष 2011 के नियमों के तहत ज़रूरी सभी घोषणाएं दिखानी होंगी। नियम 26(ए) के तहत पिछली शर्त को वापस ले लिया गया है और उसकी जगह पान मसाला के लिए एक नई शर्त रखी गई है। विभाग ने कहा कि यह कदम सभी पैक आकार में पारदर्शी कीमत की जानकारी पक्का करके उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करता है। उम्मीद है कि इससे छोटे पैक पर गुमराह करने वाला या धोखा देने वाला मूल्य निर्धारण रुकेगा और उपभोक्ता बेहतर जानकारी के साथ खरीद पर फैसले ले पाएंगे। सभी पैक पर खुदरा बिक्री मूल्य को ज़रूरी बनाकर, यह बदलाव पान मसाला पर खुदरा बिक्री मूल्य - आधारित जीएसटी लेवी को लागू करने में भी मदद करता है। इससे जीएसटी परिषद के फैसलों को आसानी से लागू करने और सबसे छोटी यूनिट सहित सभी पैक आकार पर सही कर आकलन और राजस्व संग्रह पक्का करने की उम्मीद है।
- नयी दिल्ली. संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोच के मुताबिक, देश में जल्द ही सभी क्षेत्रों में 4जी कनेक्टिविटी पहुंचाने का लक्ष्य है और जम्मू कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों समेत कई जगहों पर अगले साल तक 12 हजार 4जी टॉवर लगाए जाएंगे। सिंधिया ने लोकसभा में जम्मू कश्मीर से निर्दलीय सदस्य अब्दुल रशीद शेख के पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोच के मुताबिक, देश में जल्द ही 4जी कनेक्टिविटी सभी क्षेत्रों में पहुंचाना है। ‘‘इस लिहाज से पिछले एक वर्ष में करीब 25 हजार टॉवर लग चुके हैं।'' सिंधिया ने कहा कि बाकी 12 हजार टॉवर लगाने का कार्य प्रगति पर है और इन्हें अगले साल तक लगा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ये टॉवर जम्मू कश्मीर के ऐसे क्षेत्रों में भी लगाए जाने हैं जहां नेटवर्क की समस्या है। सिंधिया ने मोबाइल टॉवर लगने में देरी के लिए राज्य सरकार से अनुमति की जरूरत और सर्वे आदि कारक गिनाए।उन्होंने कहा कि गत अप्रैल में एक-एक टॉवर के बारे में विश्लेषण किया गया और इन्हें लगाने में देरी के कुल 2,415 कारण देशभर में सामने आए। सिंधिया ने कहा, ‘‘हमने एक-एक कारण को रेखांकित किया। राज्य सरकार से पत्राचार के अलावा मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों से बात की।'' उन्होंने कहा कि इन 2,415 कारणों में से पिछले सोमवार तक 1,990 पर पूरी तरह समाधान निकाला जा चुका है।
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नयी दिल्ली. विधि आयोग ने मसौदा विधेयक पर विचार कर रही संयुक्त संसदीय समिति से कहा है कि एक साथ चुनाव कराने की खातिर कानूनी ढांचा तैयार करने वाले संविधान संशोधन विधेयक को लागू करने के लिए कम से कम 50 प्रतिशत राज्य विधानसभाओं के अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है। विधि आयोग ने 28 नवंबर को संयुक्त समिति को दी गई संक्षिप्त राय में कहा कि यह विधेयक कानून बनाने के संसद के अधिकार के अंतर्गत आता है, जिसके लिए राज्यों के अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है। इससे पहले अक्टूबर में विधि आयोग ने संसदीय समिति को विस्तृत राय दी थी।
यह नया दस्तावेज़ संसदीय समिति को बृहस्पतिवार को होने वाली बैठक से पहले दिया गया, जिसमें विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी (सेवानिवृत्त), सदस्य सचिव अंजू राठी राणा और संयुक्त सचिव वर्षा सिन्हा सदस्यों को बारीक कानूनी बिंदुओं पर जानकारी देंगे। संसद की संयुक्त समिति लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने संबंधी विधेयकों पर विचार कर रही है। विधि आयोग ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन किसी भी तरह से संविधान के मूल ढांचे को प्रभावित नहीं करता है। संघवाद के मुद्दे पर आयोग ने कहा कि भारतीय संविधान में जिस संघवाद की परिकल्पना की गई है, वह विभिन्न इकाइयों का विभाजन नहीं है; बल्कि यह विभिन्न इकाइयों को एक साथ पिरोने का तरीका है, जिसमें मजबूत केंद्र की बात की गयी है। -
नयी दिल्ली. सरकार ने स्मार्टफोन में साइबर सुरक्षा ऐप ‘संचार साथी' को पहले से अनिवार्य रूप से लगाने के आदेश को वापस ले लिया है। दूरसंचार विभाग ने बुधवार को कहा कि वह संचार साथी ऐप को ‘इंस्टॉल' करने के अनिवार्य आदेश को हटा रहा है। इसका कारण सिर्फ एक दिन में स्वैच्छिक रूप से ऐप डाउनलोड में 10 गुना वृद्धि हुई है। विभाग ने एक बयान में कहा, ‘‘उपयोगकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है और ऐप इंस्टॉल करने का आदेश इस प्रक्रिया को तेज करने और कम जागरूक नागरिकों तक ऐप को आसानी से पहुंचाने के लिए दिया गया था।'' बयान के अनुसार, ‘‘सिर्फ पिछले एक दिन में, छह लाख नागरिकों ने ऐप डाउनलोड करने के लिए पंजीकरण कराया है। यह इसके उपयोग में 10 गुना वृद्धि है। संचार साथी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए, सरकार ने मोबाइल विनिर्माताओं के लिए इसे पहले से ‘इंस्टॉल' करना अनिवार्य नहीं करने का फैसला किया है।'' दूरसंचार विभाग ने 28 नवंबर के आदेश में, स्मार्टफोन विनिर्माताओं को सभी नए मोबाइल फोन में ऐप को पहले से लगाने और पुराने मोबाइल फोन में इसे अद्यतन करने का निर्देश दिया था। इस आदेश को लेकर विवाद खड़ा हो गया। विपक्षी नेताओं ने इससे जासूसी की चिंता जताई। उनका कहना है कि यह ऐप कॉल सुन सकता है और संदेशों की निगरानी कर सकता है।
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नयी दिल्ली. रेलवे आरक्षण काउंटर से ‘तत्काल' ट्रेन टिकट बुक करने के लिए यात्रियों को अब अपने मोबाइल फोन पर प्राप्त होने वाला वन-टाइम पासवर्ड बताना होगा। इस कदम का उद्देश्य अंतिम समय में टिकट बुकिंग सुविधा के दुरुपयोग को रोकना है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। रेल मंत्रालय ने 17 नवंबर को परीक्षण आधार पर आरक्षण काउंटर से बुक टिकट के लिए ओटीपी-आधारित तत्काल टिकट प्रणाली शुरू की। इसकी शुरुआत कुछ ट्रेन से हुई और जल्द ही इसकी संख्या बढ़ाकर 52 कर दी गई। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि अगले कुछ दिनों में काउंटर से टिकट के लिए यह आरक्षण प्रणाली शेष सभी ट्रेन के लिए लागू कर दी जाएगी। इसके अनुसार, ओटीपी-आधारित तत्काल आरक्षण प्रणाली का प्रस्ताव आम उपयोगकर्ताओं के लिए अंतिम समय में टिकट बुकिंग सुविधा को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए किया गया है। मंत्रालय ने कहा, "इस प्रणाली के तहत आरक्षण काउंटर पर तत्काल टिकट बुक करते समय यात्री को आरक्षण फॉर्म में दिए गए मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी प्राप्त होता है। ओटीपी सत्यापन सफल होने के बाद ही टिकट की पुष्टि की जाती है।" अधिकारियों ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य तत्काल सुविधा के दुरुपयोग को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि वास्तविक यात्रियों को यह टिकट मिले। उन्होंने कहा कि यह रेलवे टिकट व्यवस्था में पारदर्शिता, यात्री सुविधा और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पिछले कुछ महीनों में रेल मंत्रालय ने यात्रियों को टिकट आरक्षण तक उचित पहुंच प्रदान करने तथा बुकिंग एजेंटों को अपने लाभ के लिए प्रणाली का दुरुपयोग करने से हतोत्साहित करने के लिए कुछ उपाय शुरू किए हैं। जुलाई में, रेल मंत्रालय ने देश भर में तत्काल प्रणाली के तहत ऑनलाइन टिकट बुकिंग के लिए ओटीपी के ज़रिए आधार सत्यापन अनिवार्य कर दिया था। एक अक्टूबर से, किसी भी ट्रेन के लिए बुकिंग खुलने के बाद पहले 15 मिनट के दौरान, केवल आधार-प्रमाणित उपयोगकर्ताओं को ही आईआरसीटीसी वेबसाइट या ऐप के जरिए आरक्षित सामान्य टिकट बुक करने की अनुमति दी गई।
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हरिद्वार (उत्तराखंड). बॉलीवुड के ‘ही मैन' धर्मेंद्र की अस्थियां बुधवार को यहां गंगा में विसर्जित की गयीं। उनके पारिवारिक पुरोहित ने यह जानकारी दी। पुरोहित ने बताया कि अस्थि विसर्जन कर्म से मीडिया और आम लोगों को पूरी तरह से दूर रखा गया था। धर्मेंद्र (89) का पिछले माह 24 नवंबर को निधन हो गया था और मुंबई में उनका अंतिम संस्कार किया गया था। अभिनेता के पारिवारिक पुरोहित पंडित संदीप पाराशर श्रोत्रिय ने बताया कि हरकी पौड़ी पर धर्मेंद्र की अस्थियां विसर्जित की गयीं। उन्होंने बताया कि अस्थि विसर्जन के पूर्व की कर्मकांड विधि निजी होटल में संपन्न करायी गयी। क्षोत्रिय ने बताया कि इसके बाद सन्नी देओल के बेटे करण देओल और परिजन उनके साथ एक दोपहिया वाहन से हरकी पौड़ी पहुंचे और वहां अस्थि विसर्जन किया गया। पुरोहित ने बताया कि अस्थि विसर्जन संबंधी विधियां सन्नी देओल ही करना चाहते थे मगर उनके जाने पर भीड़ एकत्र होने की आशंका से धर्मेंद्र के पौत्र करण ने इन्हें पूरा किया। पुरोहित के मुताबिक अभिनेता सन्नी देओल और बॉबी देओल परिजनों के साथ मंगलवार को ही हरिद्वार पहुंच गए थे और इसी दिन अस्थि विसर्जन किया जाना था, लेकिन एक परिजन के समय से नहीं पहुंच पाने के कारण यह नहीं हो पाया। पुरोहित ने बताया कि यहां अस्थि विसर्जन कर्म के वक्त धर्मेंद्र की पत्नी हेमामलिनी और उनकी तरफ से कोई भी मौजूद नहीं था।
- -टी सहदेवभिलाई नगर। तालपुरी बी ब्लॉक के क्लब हाउस प्रांगण में पतंजलि योगपीठ के प्रशिक्षित साधकों द्वारा निःशुल्क योग एवं चिकित्सा शिविर लगाया गया है। यह शिविर शनिवार तक चलेगा। जिसमें प्रशिक्षित साधक योगासनों के साथ-साथ लोगों को एक्यूप्रेशर के माध्यम से शरीर के विभिन्न बिंदुओं पर उंगलियों और हथेलियों से दबाव डालकर दर्द, तनाव और अन्य लक्षणों से राहत दिलाने के साथ ही डायबिटीज, माइग्रेन, कमर दर्द, नसों में खिंचाव को दूर करने जैसे उपायों की भी जानकारी भी दे रहे हैं। इसके अलावा एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति से पेट साफ करने, गैस से मुक्ति दिलाने तथा अच्छी नींद लेने के तरीके भी सिखाए जा रहे हैं।पांच दिनों तक चलने वाले इस शिविर में लोगों से ग्रीवा चालन, स्कंध खिंचाव, स्कंध चक्र, कटिशक्ति संचालन, घुटना संचालन, ताड़ासन, वृक्षासन, पाद हस्तासन, अर्द्धचक्रासन, त्रिकोणासन, दंडासन, भद्रासन, वज्रासन, अर्द्ध उष्ट्रासन, उष्ट्रासन, शशकासन, उत्तानमंडूकासन, वक्रासन, मकरासन, भुजंगासन, शलभासन, सेतु बंधासन, उत्तान पादासन, अर्द्ध हलासन, पवन मुक्तासन, शवासन, कपालभाति, अनुलोम विलोम, शीतली प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम और ध्यानासन कराया जाएगा। शिविर में योग प्रशिक्षक टीआर सोनी, एन एस पटेल, मुख्य योग प्रशिक्षक आर पी शर्मा तथा न्यूरोथैरेपिस्ट श्रीनिवास राव की विशेष सेवाएं ली जा रही हैं। शिविर आयोजन समिति में एसोसिएशन के अध्यक्ष कुबेर देशमुख, पार्षद सविता ढवस, रवींद्र देवांगन, बी तुलसी, हंसमणि राय, निर्मला चंद्राकर, गीता सिंह और गौरी देवांगन शामिल हैं।
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के लिए बन रहे नए परिसर को ‘सेवा तीर्थ’ के नाम से जाना जाएगा। एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत बन रहा यह परिसर अब अंतिम चरण में है। इससे पहले इसे ‘एक्जीक्यूटिव इनक्लेव’ के नाम से जाना जाता था।‘सेवा तीर्थ’ में और क्या-क्या होगा?नया परिसर न सिर्फ प्रधानमंत्री कार्यालय का मुख्य केंद्र होगा, बल्कि इसमें मंत्रिमंडल सचिवालय (Cabinet Secretariat), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (National Security Council Secretariat) और इंडिया हाउस (India House) भी शामिल होंगे। ‘इंडिया हाउस’ में टॉप-लेबल की कूटनीतिक मुलाकातें और वार्ताएं आयोजित की जाएंगी।अधिकारियों ने बताया कि ‘सेवा तीर्थ’ एक ऐसा कार्यस्थल होगा, जिसे सेवा की भावना को प्रतिबिंबित करने के लिए डिजाइन किया गया है और जहां राष्ट्रीय प्राथमिकताएं मूर्त रूप लेंगी। उन्होंने कहा कि भारत के सार्वजनिक संस्थान एक शांत लेकिन गहन बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं।‘सत्ता’ से ‘सेवा’ की ओर बढ़ रहा शासन का विचारअधिकारियों के मुताबिक शासन का विचार ‘सत्ता’ से ‘सेवा’ और अधिकार से उत्तरदायित्व की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक भी है। राज्यों के राज्यपालों के आधिकारिक आवास ‘राजभवन’ का भी नाम भी बदलकर ‘लोक भवन’ रखा जा रहा है।अधिकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शासन के क्षेत्रों को ‘कर्तव्य’ और पारदर्शिता को प्रतिबिंबित करने के लिए नया रूप दिया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘हर नाम, हर इमारत और हर प्रतीक अब एक सरल विचार की ओर इशारा करते हैं- सरकार सेवा के लिए है।’’कल्याण का बोध कराता है नया नामसरकार ने हाल ही में राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक वृक्षों से घिरे मार्ग के पूर्ववर्ती नाम ‘राजपथ’ को बदलकर ‘कर्त्तव्य पथ’ किया था। प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास का नाम 2016 में बदलकर लोक कल्याण मार्ग कर दिया गया था। अधिकारियों के मुताबिक यह नाम कल्याण का बोध कराता है, न कि विशिष्टता का, तथा यह प्रत्येक निर्वाचित सरकार के भविष्य के कार्यों की याद दिलाता है।केन्द्रीय सचिवालय का नाम कर्तव्य भवन है, जो एक विशाल प्रशासनिक केंद्र है, जिसका निर्माण इस विचार के इर्द-गिर्द किया गया है कि सार्वजनिक सेवा एक प्रतिबद्धता है। अधिकारियों ने कहा, ‘‘ये बदलाव एक गहरे वैचारिक परिवर्तन का प्रतीक हैं। भारतीय लोकतंत्र सत्ता की बजाय जिम्मेदारी और पद की बजाय सेवा को चुन रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘नामों में बदलाव मानसिकता में भी बदलाव है। आज, वे सेवा, कर्तव्य और नागरिक-प्रथम शासन की भाषा बोलते हैं।’’
- -केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय देश में मौसमी इन्फ्लूएंजा सहित श्वसन संबंधी बीमारियों की स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है-भारत श्वसन संबंधी बीमारियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है, निगरानी में कोई असामान्य वृद्धि नहीं दिखीनई दिल्ली। सर्दियों में फैलने वाले इन्फ्लूएंजा को रोकने के लिए की गई तैयारियों का जायज़ा लेने के लिए , केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) डॉ. सुनीता शर्मा, संयुक्त सचिव (लोक स्वास्थ्य) श्रीमती वंदना जैन, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के निदेशक प्रो. (डॉ.) रंजन दास और आपदा प्रबंधन (डीएम) प्रकोष्ठ तथा एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के विशेषज्ञों ने भाग लिया।कर्तव्य भवन 1 में बैठक के दौरान, सचिव (स्वास्थ्य) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को बताया कि भारत में आमतौर पर इन्फ्लूएंजा के दो मौसमी चरम अनुभव होते हैं - अगस्त-अक्टूबर (मानसून चरम) और जनवरी-मार्च (शीतकालीन चरम)।वर्ष 2014-15 के दौरान मौसमी इन्फ्लूएंजा के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि को याद करते हुए, श्री नड्डा ने वर्तमान स्थिति पर अद्यतन जानकारी मांगी तथा पूछा कि क्या वर्तमान में प्रचलित वायरस के प्रकारों में ऐतिहासिक रुझानों से कोई भिन्नता है।राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) और एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के अधिकारियों ने मंत्री को बताया कि विश्व स्तर पर और भारत में भी इन्फ्लूएंजा की गतिविधि कम बनी हुई है। निगरानी से संकेत मिलता है कि परिसंचारी स्ट्रेन सामान्य मौसमी रूप- H3N2 और इन्फ्लूएंजा बी (विक्टोरिया) ही बने हुए हैं, जिनमें H1N1 का एक छोटा सा अनुपात है। मंत्री को लगभग वास्तविक समय निगरानी तंत्रों से भी अवगत कराया गया, जिनमें शामिल हैं: आईडीएसपी का इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी (आईएलआई) और गंभीर तीव्र श्वसन रोग (एसएआरआई) निगरानी नेटवर्क, मीडिया स्कैनिंग के माध्यम से एआई-संचालित घटना-आधारित निगरानी और श्वसन रोगजनकों के लिए आईसीएमआर की प्रहरी निगरानी। सभी प्रणालियाँ वर्तमान में इन्फ्लूएंजा के मामलों में असामान्य वृद्धि के कोई संकेत नहीं दिखाती हैं।एनसीडीसी के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) रंजन दास ने यह भी बताया कि एनसीडीसी इस महीने के अंत में इन्फ्लूएंजा पर दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर आयोजित करेगा, जिसमें प्रमुख मंत्रालय, विभाग और राज्य सरकारें शामिल होंगी, ताकि इन्फ्लूएंजा की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की जा सके और आगे की योजना बनाई जा सके।श्री नड्डा ने चल रही तैयारियों की सराहना की और सभी राज्य नोडल अधिकारियों के साथ इन्फ्लूएंजा की तैयारियों की समीक्षा करने और सभी केंद्र सरकार के अस्पतालों की तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में तैयारियों की समीक्षा अगले एक पखवाड़े के भीतर पूरी कर ली जाए। मंत्री ने इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक परामर्श जारी करने की भी सलाह दी और स्वास्थ्य सुविधाओं पर नियमित रूप से मॉक-ड्रिल आयोजित करने को कहा।
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मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक ने सोमवार को बताया कि व्यापार घाटे में कमी, सेवा निर्यात में वृद्धि और प्रवासी भारतीयों द्वारा धन प्रेषण के कारण सितंबर तिमाही में भारत का चालू खाते का घाटा (कैड) कम होकर 12.3 अरब डॉलर या जीडीपी का 1.3 प्रतिशत रह गया। देश की बाहरी स्थिति का महत्वपूर्ण संकेतक चालू खाते का घाटा (सीएडी) पिछले साल की इसी तिमाही में 20.8 अरब डॉलर या जीडीपी का 2.2 प्रतिशत था। इससे पहले जून तिमाही में यह सिर्फ 2.4 अरब डॉलर या जीडीपी का 0.2 प्रतिशत था।
वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में चालू खाते का घाटा कम होकर 15 अरब डॉलर या जीडीपी का 0.8 प्रतिशत रह गया, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह 25.3 अरब डॉलर या जीडीपी का 1.3 प्रतिशत था। जुलाई-सितंबर तिमाही में माल व्यापार घाटा सालाना आधार पर कम होकर 87.4 अरब डॉलर रह गया, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही में यह 88.5 अरब डॉलर था। भुगतान संतुलन के आंकड़ों के अनुसार सेवा क्षेत्र से शुद्ध प्राप्तियां पिछले साल के 44.5 अरब डॉलर से बढ़कर 50.9 अरब डॉलर हो गईं। विशेष रूप से कंप्यूटर सेवाओं के निर्यात में वृद्धि हुई है। आरबीआई ने बताया कि द्वितीयक आय खाते के तहत व्यक्तिगत हस्तांतरण सालाना आधार पर 34.4 अरब डॉलर से बढ़कर इस तिमाही में 38.2 अरब डॉलर हो गईं। इन प्राप्तियों में मुख्य रूप से विदेश में काम करने वाले भारतीयों द्वारा धन प्रेषण शामिल है।











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