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नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गुरुवार को कहा कि इस सप्ताह की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से लौटे ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की हालत स्थिर है। इसरो ने कहा कि एजेंसी पुनर्वास अभ्यास में एक्सिओम स्पेस के साथ साझेदारी कर रही है और शुक्ला के ‘शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की निगरानी’ कर रही है।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच में कोई तत्काल चिंता नहीं दिखाई देती है। शुभांशु शुक्ला 26 जून को, परिक्रमा प्रयोगशाला में पहुंचने वाले भारत के पहले व्यक्ति बने। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन, स्पेसएक्स के ड्रैगन अंतरिक्ष यान ग्रेस से अमेरिका, पोलैंड और हंगरी के साथी अंतरिक्ष यात्रियों के साथ 15 जुलाई को पृथ्वी पर लौटे। इसरो ने बताया कि ‘रिकवरी शिप’ पर अंतरिक्ष यात्रियों की प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच की गई।इसरो ने कहा, “प्रारंभिक स्वास्थ्य आकलन से पता चला है कि शुक्ला की हालत स्थिर है और तत्काल कोई चिंता की बात नहीं है। जांच के बाद, शुक्ला को आगे की चिकित्सा जांच और डीब्रीफिंग सत्रों के लिए हेलीकॉप्टर द्वारा रिकवरी जहाज से मुख्य भूमि पर ले जाया गया। बाद में, शुक्ला को सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण के किसी भी प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए एक सप्ताह के पुनर्वास कार्यक्रम के लिए ह्यूस्टन ले जाया गया।इसरो ने कहा कि “अंतरिक्ष यात्री की पुनर्वास गतिविधियां शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की निगरानी, सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण के किसी भी प्रभाव को दूर करने और उसे सामान्य गतिविधियों में वापस लौटने के लिए तैयार करने पर केंद्रित हैं। इसमें कई तरह की चिकित्सीय जांच, विशेष रूप से हृदय संबंधी जांच, मांसपेशियों, अस्थियों का परीक्षण और मनोवैज्ञानिक जांच शामिल है। राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि इसका संचालन एक्सिओम के फ्लाइट सर्जन द्वारा किया जा रहा है और इसरो के फ्लाइट सर्जन भी इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।”इस बीच, शुभांशु शुक्ला बुधवार को ISS पर 18 दिन के मिशन के बाद अपनी पत्नी कामना शुक्ला और 6 साल के बेटे से भी मिले। अंतरिक्ष यात्री ने कहा कि पृथ्वी पर वापस आकर और अपने परिवार को अपनी बाहों में लेकर, मुझे घर जैसा महसूस हुआ। आज ही किसी प्रियजन को खोजें और उन्हें बताएं कि आप उनसे प्यार करते हैं। हम अक्सर ज़िंदगी में व्यस्त हो जाते हैं और भूल जाते हैं कि हमारे जीवन में लोग कितने महत्वपूर्ण हैं। मानव अंतरिक्ष यान मिशन जादुई होते हैं लेकिन उन्हें इंसानों द्वारा ही जादुई बनाया जाता है।उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष की उड़ान अद्भुत है, लेकिन लम्बे समय के बाद अपने प्रियजनों को देखना भी उतना ही अद्भुत है।शुभांशु शुक्ला बताया कि मुझे क्वारंटाइन में गए दो महीने हो गए हैं। क्वारंटाइन के दौरान, परिवार से मिलने के लिए, हमें 8 मीटर की दूरी पर रहना पड़ता था। मेरे छोटे बच्चे को बताया गया कि उसके हाथों में कीटाणु हैं और इसलिए वह अपने पिता को नहीं छू सकता। शुक्ला ने कहा कि यह बहुत चुनौतीपूर्ण था, हर बार जब वह मिलने आता था, तो अपनी मां से पूछता था, ‘क्या मैं अपने हाथ धो सकता हूं ? -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 जुलाई को बिहार के मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) में एक बड़ी जनसभा के दौरान पीएम किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN) की 20वीं किस्त जारी कर सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मौके पर देशभर के 9.8 करोड़ से ज्यादा किसानों को 2,000 रुपए की अगली किस्त उनके बैंक अकाउंट में सीधे ट्रांसफर की जाएगी।
पीएम किसान योजना के तहत किसानों को हर साल तीन किस्तों में ₹6,000 की आर्थिक मदद दी जाती है। पिछली यानी 19वीं किस्त फरवरी 2025 में जारी की गई थी, जिसमें 2.41 करोड़ महिला किसानों समेत 9.8 करोड़ से ज्यादा किसानों को 22,000 रुपए करोड़ से अधिक की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए ट्रांसफर की गई थी। हालांकि, इस तिमाही में किस्त मिलने में कुछ देरी हुई है।पीएम किसान योजना से लाभ लेने के लिए जरूरी बातें:-अपने बैंक खाते को आधार कार्ड से लिंक करें।-यह सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता आधार से जुड़ा हुआ है।-DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) सुविधा आपके खाते में सक्रिय होनी चाहिए।-e-KYC पूरा करें।-‘Know Your Status’ विकल्प के जरिए पोर्टल पर अपना स्टेटस चेक करें।-लाभार्थियों की सूची में नाम कैसे चेक करें? चेक करें स्टेप्स-पीएम किसान योजना की आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan.gov.in पर जाएं।-होमपेज पर ‘Payment Success’ सेक्शन के पास भारत के नक्शे के नीचे ‘Dashboard’ (पीले रंग की टैब) पर क्लिक करें।-‘Village Dashboard’ में राज्य, जिला, उप-जिला और पंचायत जैसी जानकारी भरें।-फिर ‘Get Report’ बटन पर क्लिक करें।-सूची में अपना नाम चेक करें।जमीन का पता कैसे अपडेट करें?-https://pmkisan.gov.in वेबसाइट पर जाएं।-होमपेज पर ‘Farmers Corner’ सेक्शन में जाकर ‘State Transfer Request’ पर क्लिक करें।-रजिस्ट्रेशन नंबर या आधार नंबर डालें।-स्क्रीन पर दिख रहा कैप्चा कोड भरें और ‘Get OTP’ पर क्लिक करें।-रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आया OTP भरें।-अपनी भूमि का प्रमाण (जैसे खसरा, खतौनी आदि) अपलोड करें।-फॉर्म को चेक करके सबमिट करें।ये हैं हेल्पलाइन नंबरसरकार ने पीएम किसान योजना से जुड़ी मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। किसान टोल-फ्री नंबर 155261 या 1800-115-526 पर संपर्क कर सकते हैं। साथ ही, कोई सवाल या समस्या हो तो [email protected] पर ईमेल भी भेज सकते हैं।इस योजना की जानकारी ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचाने के लिए सरकार गांव-गांव में जागरूकता अभियान चला रही है, ताकि कोई भी योग्य किसान इस लाभ से वंचित न रह जाए। - -रेलवे द्वारा लेवल क्रॉसिंग के स्थान पर अंडरपास निर्माण हेतु स्वीकृत किए जाने के बावजूद जिला अधिकारी द्वारा पिछले एक वर्ष से अनुमोदन लंबित रहने के कारण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ है-रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष के साथ-साथ मुख्य सचिव और तमिलनाडु के पुलिस महीनिदेशक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के अंदर रिपोर्ट मांगी गई हैनई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया है। 8 जुलाई , 2025 को तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले में एक लेवल क्रॉसिंग पर एक यात्री ट्रेन स्कूल वैन से टकरा गई, जिसमें तीन बच्चों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। लेवल क्रॉसिंग पर गेट खुला था, और घटना के समय ट्रेन गुजर रही थी।आयोग ने पाया है कि मीडिया रिपोर्ट यदि सत्य है, तो मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मुद्दा बनता है। इसलिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष, तमिलनाडु के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के अंदर मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें घटना में घायल हुए बच्चों की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति भी शामिल हो। 9 जुलाई, 2025 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस लेवल क्रॉसिंग के स्थान पर दक्षिण रेलवे द्वारा अंडरपास निर्माण हेतु स्वीकृत किया गया है, लेकिन जिला अधिकारी द्वारा पिछले एक वर्ष से इसके लिए अनुमति नहीं दी गई है।
- -पारंपरिक जीवनशैली से सीखकर आधुनिक चक्रीय प्रणालियों को मजबूत किया जा सकता है: राष्ट्रपति मुर्मुनई दिल्ली। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (17 जुलाई) नई दिल्ली में आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित एक समारोह में स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति महोदया ने कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण हमारे शहरों द्वारा स्वच्छता के प्रयासों का आकलन और प्रोत्साहन करने में एक सफल प्रयोग साबित हुआ है। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा वर्ष 2024 के लिए दुनिया का सबसे बड़ा स्वच्छता सर्वेक्षण आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न हितधारकों, राज्य सरकारों, शहरी निकायों और लगभग 14 करोड़ नागरिकों ने भाग लिया।श्रीमती मुर्मु ने कहा कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना ने प्राचीन काल से ही स्वच्छता पर जोर दिया है। अपने घरों, पूजा स्थलों और आस-पास को साफ रखने की परंपरा हमारी जीवनशैली का अभिन्न अंग थी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहा करते थे, "स्वच्छता ईश्वर भक्ति के बाद आती है।" वे स्वच्छता को धर्म, आध्यात्मिकता और नागरिक जीवन की आधारशिला मानते थे। राष्ट्रपति महोदया ने कहा कि उन्होंने जनसेवा की अपनी यात्रा स्वच्छता से जुड़े कार्यों से शुरू की थी। अधिसूचित क्षेत्र परिषद की उपाध्यक्ष के रूप में श्रीमति मुर्मु प्रतिदिन वार्डों का दौरा करती थीं और स्वच्छता कार्य की निगरानी करती थीं।राष्ट्रपति महोदया ने कहा कि न्यूनतम संसाधनों का उपयोग करके और उन्हें उसी उद्देश्य या अन्य उद्देश्य के लिए पुनः उपयोग करके अपशिष्ट को कम करना हमेशा हमारी जीवनशैली का हिस्सा रहा है। चक्रीय अर्थव्यवस्था के मूल सिद्धांत और ‘कम उपयोग करें- पुनः उपयोग करें’ पुनर्चक्रण की प्रणालियां हमारी प्राचीन जीवनशैली के आधुनिक और व्यापक रूप हैं। उदाहरण के लिए, आदिवासी समुदायों की पारंपरिक जीवनशैली सरल है। वे कम संसाधनों का उपयोग करते हैं और मौसम तथा पर्यावरण के साथ तालमेल बिठाते हैं और अन्य समुदाय के सदस्यों के साथ साझेदारी में रहते हैं। वे प्राकृतिक संसाधनों को बर्बाद नहीं करते हैं। इस तरह के व्यवहार और परंपराओं को अपनाकर चक्रीयता की आधुनिक प्रणालियों को मज़बूत किया जा सकता है।राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि अपशिष्ट प्रबंधन मूल्य श्रृंखला में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम स्रोत पृथक्करण है। सभी हितधारकों और प्रत्येक परिवार को इस पर सबसे ध्यान देना चाहिए। शून्य-अपशिष्ट कालोनियां अच्छे उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं।श्रीमती मुर्मु ने स्कूल स्तर पर आकलन पहल की सराहना की, जिसका उद्देश्य है कि विद्यार्थी स्वच्छता को एक जीवन-मूल्य के रूप में अपनाएं। उन्होंने कहा कि इससे बहुत लाभकारी और दूरगामी परिणाम होंगे।राष्ट्रपति महोदया ने कहा कि प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक कचरे को नियंत्रित करना और उनसे उत्पन्न प्रदूषण को रोकना एक बड़ी चुनौती है। उचित प्रयासों से हम देश के प्लास्टिक उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी ला सकते हैं। केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 में एकल-उपयोग प्लास्टिक युक्त कुछ वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाया। उसी वर्ष, सरकार ने प्लास्टिक पैकेजिंग के लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व हेतु दिशा-निर्देश जारी किए। सभी हितधारकों - उत्पादकों, ब्रांड मालिकों और आयातकों - की यह ज़िम्मेदारी है कि वे इन दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन करें।राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि स्वच्छता से जुड़े प्रयासों के आर्थिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक पहलू हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी नागरिक स्वच्छ भारत मिशन में पूरी लगन से हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि ठोस और सुविचारित संकल्पों के साथ वर्ष 2047 तक विकसित भारत दुनिया के सबसे स्वच्छ देशों में से एक होगा।
- - तकनीक के शिकंजे में फरार अपराधी: 20 साल बाद इंदौर से गिरफ्तारनई दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने ₹8 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले में लंबे समय से फरार घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) रही श्रीमती मणि एम. शेखर को सफलतापूर्वक पकड़ लिया है।यह मामला सीबीआई बीएसएफबी, बेंगलुरु द्वारा 01 अगस्त 2006 को दर्ज किया गया था, जिसमें श्री रामानुजम मुथुरमलिंगम शेखर उर्फ आर.एम. शेखर, प्रबंध निदेशक, एम/एस इंडो मार्क्स प्राइवेट लिमिटेड और श्रीमती मणि एम. शेखर, निदेशक, एम/एस इंडो मार्क्स एवं बीटीसी होम प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड समेत अन्य के खिलाफ आरोप लगाए गए थे। आरोपियों पर 2002 से 2005 के बीच षड्यंत्र रचकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, ओवरसीज ब्रांच, बेंगलुरु को ₹800 लाख की राशि का ग़बन करने का आरोप था, जिसमें गैर-निधि आधारित लिमिट्स का दुरुपयोग किया गया।जांच पूरी होने के बाद 10 दिसंबर 2007 को आरोप पत्र दाखिल किया गया। दोनों आरोपी पति-पत्नी ने न तो मुकदमे में पेशी दी और न ही समन/वारंट का पालन किया। इसके चलते उन्हें 27 फरवरी 2009 को अदालत द्वारा फरार घोषित किया गया।वर्षों तक लगातार प्रयासों के बावजूद आरोपी पकड़ में नहीं आए, जिसके बाद सीबीआई ने उनकी गिरफ्तारी के लिए ₹50,000-₹50,000 का इनाम घोषित किया। इस बीच अन्य सह-आरोपियों पर मुकदमा चला और उन्हें दोषी/निर्दोष ठहराया गया, लेकिन इन दोनों के खिलाफ मुकदमा लंबित रहा।आरोपियों ने अपनी पहचान बदल ली थी और पुराने केवाईसी विवरणों का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने अपने नाम क्रमशः कृष्ण कुमार गुप्ता (पति) और गीता कृष्ण कुमार गुप्ता (पत्नी) रख लिए और मोबाइल नंबर, ईमेल, पैन आदि सब कुछ बदल लिया।सीबीआई ने उन्नत इमेज सर्च और तुलना उपकरणों का उपयोग करते हुए उनकी डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण किया। इमेज विश्लेषण के जरिए यह पता चला कि आरोपी इंदौर, मध्य प्रदेश में नई पहचान के साथ रह रहे हैं। ज़मीन पर हुई पुष्टि के बाद सीबीआई की टीम ने उन्हें इंदौर में ढूंढ निकाला।तलाशी के दौरान यह भी सामने आया कि श्री रामानुजम मुथुरमलिंगम शेखर उर्फ आर.एम. शेखर की 2008 में (नई पहचान के साथ) मृत्यु हो चुकी थी। उनकी पत्नी श्रीमती मणि एम. शेखर को 12 जुलाई 2025 को गिरफ्तार कर बेंगलुरु की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अब वह लगभग दो दशक बाद मुकदमे का सामना कर रही हैं।90 प्रतिशत से अधिक सटीकता के साथ फोटो मिलान ने नई पहचान के बावजूद उनकी पहचान सुनिश्चित करने में मदद की। यह मामला इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि किस तरह तकनीक आधारित उपकरण और ज़मीनी स्तर पर अधिकारियों की प्रतिबद्धता मिलकर लंबे समय से फरार अपराधियों को पकड़ने में क़ानून लागू करने वाली एजेंसियों की क्षमता को कई गुना बढ़ा सकते हैं।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 जुलाई, शुक्रवार को बिहार और पश्चिम बंगाल का दौरा करेंगे। वे बिहार के मोतिहारी में सुबह 11:30 बजे 7,200 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन और राष्ट्र को समर्पण करेंगे। इसके बाद, पीएम मोदी दोपहर 3 बजे पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे। दोनों स्थानों पर वे जनसभाओं को भी संबोधित करेंगे।
बिहार में कार्यक्रमप्रधानमंत्री मोदी रेल, सड़क, ग्रामीण विकास, मत्स्य पालन, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों से जुड़ी विकास परियोजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन और राष्ट्र को समर्पित करेंगे।रेल और सड़क अवसंरचना: पीएम मोदी समस्तीपुर-बछवारा रेल लाइन पर स्वचालित सिग्नलिंग और दरभंगा-समस्तीपुर दोहरीकरण परियोजना (580 करोड़ रुपये) का हिस्सा दरभंगा-थलवारा और समस्तीपुर-रामभद्रपुर रेल लाइन के दोहरीकरण को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। ये परियोजनाएं ट्रेन संचालन की क्षमता बढ़ाएंगी और देरी को कम करेंगी। साथ ही, पाटलिपुत्र में वंदे भारत ट्रेनों की रखरखाव सुविधा, भटनी-छपरा ग्रामीण रेल लाइन (114 किमी) पर स्वचालित सिग्नलिंग, ट्रैक्शन सिस्टम उन्नयन और दरभंगा-नरकटियागंज रेल लाइन दोहरीकरण (4,080 करोड़ रुपये) का शिलान्यास करेंगे, जो उत्तरी बिहार और देश के अन्य हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा।सड़क परियोजनाएं: पीएम मोदी एनएच-319 के आरा बाइपास के चार-लेन निर्माण और आरा-मोहनिया से पटना-बक्सर को जोड़ने वाली एनएच-319 की पररिया-मोहनिया खंड (820 करोड़ रुपये) का उद्घाटन करेंगे। साथ ही, एनएच-333सी के सरवन-चकाई खंड (2-लेन) का उद्घाटन बिहार और झारखंड के बीच माल और लोगों की आवाजाही को सुगम बनाएगा।आईटी क्षेत्र: प्रधानमंत्री दरभंगा में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) सुविधा और पटना में अत्याधुनिक एसटीपीआई इनक्यूबेशन सुविधा का उद्घाटन करेंगे, जो आईटी/आईटीईएस/ईएसडीएम उद्योग और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देगी, नवाचार और बौद्धिक संपदा विकास को प्रोत्साहित करेगी।मत्स्य पालन: प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत बिहार में आधुनिक मत्स्य पालन अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, जिसमें नए मछली हैचरी, बायोफ्लॉक इकाइयां, सजावटी मछली पालन, एकीकृत जलीय कृषि इकाइयां और मछली चारा मिल शामिल हैं। ये परियोजनाएं रोजगार सृजन, मछली उत्पादन और ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देंगी।अमृत भारत ट्रेनें: पीएम मोदी चार नई अमृत भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाएंगे, जो राजेंद्र नगर टर्मिनल (पटना)-नई दिल्ली, बापूधाम मोतिहारी-दिल्ली (आनंद विहार टर्मिनल), दरभंगा-लखनऊ (गोमती नगर) और मालदा टाउन-लखनऊ (गोमती नगर) के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएंगी।ग्रामीण विकास: प्रधानमंत्री दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत बिहार में लगभग 61,500 स्वयं सहायता समूहों के लिए 400 करोड़ रुपये जारी करेंगे। साथ ही, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत 12,000 लाभार्थियों का गृह प्रवेश होगा और 40,000 लाभार्थियों के लिए 160 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की जाएगी।पश्चिम बंगाल में कार्यक्रमप्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल में तेल एवं गैस, बिजली, सड़क और रेल क्षेत्रों से जुड़ी कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन करेंगे और उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे।तेल और गैस: प्रधानमंत्री बांकुड़ा और पुरुलिया में करीब 1,950 करोड़ रुपये की भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) की सिटी गैस वितरण परियोजना का शिलान्यास करेंगे, जो घरों, वाणिज्यिक और औद्योगिक ग्राहकों को PNG और सीएनजी प्रदान करेगी। साथ ही, दुर्गापुर-हल्दिया प्राकृतिक गैस पाइपलाइन के दुर्गापुर-कोलकाता खंड (132 किमी) की प्राकृतिक गैस पाइपलाइन (1,190 करोड़ रुपये), जो प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा परियोजना का हिस्सा है, को राष्ट्र को समर्पित करेंगे।स्वच्छ ऊर्जा: पीएम मोदी दुर्गापुर स्टील थर्मल पावर स्टेशन और रघुनाथपुर थर्मल पावर स्टेशन में 1,457 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली-फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन (FGD) को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।रेल और सड़क: पीएम मोदी 390 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से पुरुलिया-कोटशिला रेल लाइन (36 किमी) के दोहरीकरण और पश्चिम बर्द्धमान में तोपसी व पांडबेश्वर में 380 करोड़ रुपये की लागत से बने सेतु भारतम कार्यक्रम के तहत दो रेलवे ओवर ब्रिज का उद्घाटन करेंगे, जो कनेक्टिविटी और सुरक्षा को बेहतर बनाएंगे।उल्लेखनीय है कि ये परियोजनाएं बिहार और पश्चिम बंगाल में बुनियादी ढांचे, स्वच्छ ऊर्जा, और सामाजिक-आर्थिक विकास को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगी। -
नई दिल्ली। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारत में शुरू हो रहे हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन के नए दौर में गुयाना के आकार के कई बड़े तेल क्षेत्र मिलेंगे।केंद्रीय मंत्री ने ‘ऊर्जा वार्ता 2025’ कार्यक्रम के दौरान कहा, “हम ओएएलपी (ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी) राउंड-10 के तहत 2,00,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में अधिक हाइड्रोकार्बन की खुदाई और एक्सप्लोर करेंगे। हमारा लक्ष्य 2025 तक एक्सप्लोरेशन सेक्टर को 5 लाख वर्ग किलोमीटर और 2030 तक 10 लाख वर्ग किलोमीटर तक बढ़ाना है। मुझे पूरा विश्वास है कि हमें गुयाना के आकार के कई क्षेत्र खासकर अंडमान सागर में मिलेंगे।”हरदीप पुरी ने कहा, “हम एक्सप्लोरर्स के लिए उच्च-गुणवत्ता वाले डेटा की उपलब्धता, वित्तीय प्रोत्साहन, स्थिर नियामक ढांचे, निवेश को जोखिम-मुक्त बनाने और ईज-ऑफ डूइंग बिजनेस जैसे क्षेत्रों पर काम कर रहे हैं ताकि भारत को ऑयल एंड गैस एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन (ईएंडपी) के लिए अगला वैश्विक अग्रणी बनाया जा सके।”केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि ‘ऊर्जा वार्ता 2025’ में आयोजित ‘मंच मंत्री का’ कार्यक्रम में उनकी उत्साहवर्धक बातचीत हुई। यह भारत के ऊर्जा क्षेत्र के प्रमुखों, पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों, ऊर्जा पेशेवरों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक और गतिशील नेतृत्व में ऊर्जा सुरक्षा और हरित ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में भारत की यात्रा के हितधारकों का एक अनूठा सम्मेलन था।उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद, भारत ने ऊर्जा को लेकर तीन बड़ी चुनौतियों उपलब्धता, सामर्थ्य और स्थिरता का सफलतापूर्वक सामना किया है।केंद्रीय मंत्री पुरी ने बताया कि देश के नागरिकों की ऊर्जा जरूरतें सरकार की प्राथमिकता बनी हुई हैं और जिन देशों से तेल और गैस का आयात किया जाता है, उनका दायरा भी विस्तृत हो गया है।उन्होंने उपस्थित लोगों को बताया, “एचईएलपी जैसे दूरदर्शी सुधारों के साथ, लगभग दस लाख वर्ग किलोमीटर के अब तक के ‘नो ओपन’ एरिया को ओपन किया जा रहा है और ऑयलफिल्ड्स रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट (ओआरडी) अधिनियम में संशोधन किए जा रहे हैं। भारत नए क्षेत्रों की खोज करक घरेलू हाइड्रोकार्बन उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयासों के दौर से गुजर रहा है।”इस आयोजन में विभिन्न राज्यों के ऊर्जा मंत्री, शीर्ष सरकारी अधिकारी और ऑयल एंड गैस सेक्टर के उद्योग जगत के दिग्गज शामिल हुए। ‘ऊर्जा वार्ता 2025’ का उद्देश्य भारत के ऊर्जा परिदृश्य के भविष्य को आकार देने और ऊर्जा क्षेत्र में सस्टेनेबिलिटी और इनोवेशन के प्रति देश की प्रतिबद्धता को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनना है।
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नई दिल्ली। भारतीय सेना ने बुधवार शाम को जम्मू-कश्मीर के ऊंचे इलाकों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन से फंसे सैकड़ों अमरनाथ यात्रियों को बचाया। जानकारी के अनुसार, शाम करीब 7:15 बजे, रायलपथरी और ब्रारीमार्ग के बीच जेड मोड़ पर एक बड़ा भूस्खलन हुआ, जिससे यात्रा अचानक रुक गई। इस कारण सैकड़ों यात्री मुश्किल इलाके में फंस गए। हालांकि, भारतीय सेना की ब्रारीमार्ग टुकड़ी को कुछ ही मिनटों में तैनात कर दिया गया।
भारतीय सेना ने वहां फंसे यात्रियों को बचाया और लगभग 500 यात्रियों को सेना के टेंटों में सुरक्षित ठहराया गया है। साथ ही उन्हें चाय और पीने का पानी भी दिया गया है। इसके अलावा, करीब 3,000 अन्य यात्रियों ने ब्रारीमार्ग और जेड मोड़ के बीच लंगरों में शरण ली है, जहां उन्हें आश्रय और भोजन समेत आवश्यक सहायता प्रदान की गई है।एक गंभीर रूप से बीमार यात्री रायलपथरी में दो भूस्खलन स्थलों के बीच फंस गया था। सेना की क्विक रिएक्शन टीम (क्यूआरटी) ने जोखिम भरे रास्तों और खराब मौसम में मैनुअल स्ट्रेचर से उसे सुरक्षित निकाला और रायलपथरी लाया, जहां से उसे इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है।ब्रारीमार्ग के कैंप डायरेक्टर और सेना के कंपनी कमांडर सहित वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद थे।भारतीय सेना ने पुष्टि की है कि स्थिति अब स्थिर और नियंत्रण में है। क्षेत्र में हल्की बारिश जारी रहने के कारण सेना के जवान हाई अलर्ट पर हैं। यह बचाव और राहत अभियान उच्च-ऊंचाई वाले और आपदा क्षेत्रों में नागरिकों की रक्षा के लिए भारतीय सेना के अटूट संकल्प और तत्परता को दर्शाता है। अमरनाथ यात्रा के दौरान सेना न केवल सुरक्षा प्रदान कर रही है, बल्कि जीवन रक्षक सहायता और करुणा के साथ दृढ़ता से खड़ी है।भारतीय सेना ने एक बार फिर साबित किया है कि वह केवल एक सैन्य बल नहीं, बल्कि राष्ट्र का एक मजबूत स्तंभ है, जो हर चुनौती में यात्रियों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। - सिवनी / मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में एक दिन पहले लापता हुए दो नाबालिग भाई (नौ एवं छह साल) बुधवार को एक जंगल में मृत पाए गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि बच्चों की गला रेतकर हत्या की गई और फिर शवों को जंगल में फेंक दिया गया। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि कोतवाली पुलिस थाने के अंतर्गत सिवनी शहर के सुभाष वार्ड इलाके से बच्चे मंगलवार शाम से लापता थे। अधिकारी ने बताया कि एक दिन बाद उनके शव जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर सिवनी-कटंगी (बालाघाट जिला) मार्ग पर अंबामई जंगल में तीन किलोमीटर अंदर मिले। उन्होंने बताया कि दोनों बच्चों की गला रेत कर हत्या किए जाने के बाद उनके शवों को पत्थरों से ढंक दिया गया था।पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार मेहता ने बताया कि पीड़ित बच्चों की मां ने कोतवाली पुलिस थाने में अपने बेटों की गुमशुदगी के साथ-साथ अपहरण का मामला दर्ज कराया था। मेहता ने बताया कि तलाशी के दौरान संदिग्ध से पूछताछ के बाद कोतवाली और डुंडास्वनी पुलिस की संयुक्त टीम ने शवों को बरामद किया तथा उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। उन्होंने कहा कि एक श्वान दस्ते और फोरेंसिक टीम ने उस स्थान का निरीक्षण किया जहां शव पाए गए थे और हत्या से संबंधित सबूत एकत्र किए गए हैं।
- पटना. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को बिहार दौरे के दौरान 7,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास एवं उद्घाटन करेंगे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने यह जानकारी दी। भाजपा की बिहार इकाई के अध्यक्ष दिलीप जायसवाल के अनुसार, मोदी पूर्वी चंपारण जिला मुख्यालय मोतिहारी शहर के गांधी मैदान में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री के एजेंडे में बिहार शीर्ष पर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सत्ता संभालने के बाद से वह 53वीं बार राज्य का दौरा करेंगे।राज्य में 7,196 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे।'' जायसवाल ने कहा कि ये परियोजनाएं रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग और सड़क, ग्रामीण विकास, पशुपालन और डेरी तथा सूचना प्रौद्योगिकी सहित विविध क्षेत्रों से संबंधित हैं। उन्होंने कहा, ‘‘रेलवे से संबंधित परियोजनाओं की लागत 5,398 करोड़ रुपये है, जबकि राष्ट्रीय राजमार्गों और सड़कों पर 1,173 करोड़ रुपये खर्च होंगे। डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से आईटी परियोजनाओं पर 63 करोड़ रुपये की लागत आएगी।'' भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान मोदी ‘प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना' के 40,000 लाभार्थियों को प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण के माध्यम से 162 करोड़ रुपये की राशि वितरित करेंगे, जबकि अन्य 12,000 लोगों को उनके नए घरों की चाबियां सौंपी जाएंगी। जायसवाल ने कहा, ‘‘इसके अलावा, समारोह के दौरान 61,500 स्वयं सहायता समूहों को 400 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। मोदी को परिवार का सदस्य मानने वाला बिहार, प्रधानमंत्री का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।''--
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जम्मू. दक्षिण कश्मीर हिमालय में अमरनाथ गुफा मंदिर के दर्शन के लिए बुधवार को 6,064 तीर्थयात्रियों का एक और जत्था रवाना हुआ। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दो अलग-अलग काफिलों में 1,511 महिलाओं सहित तीर्थयात्री अनंतनाग में नुनवान-पहलगाम और गांदरबल में बालटाल आधार शिविरों के लिए रवाना हुए। पहलगाम आधार शिविर के लिए 139 वाहनों के काफिले में 3,593 तीर्थयात्री जा रहे हैं, जबकि 95 वाहनों में सवार 2471 तीर्थयात्रियों ने अपनी यात्रा के लिए बालटाल मार्ग को प्राथमिकता दी है। अमरनाथ गुफा मंदिर के लिए 38 दिवसीय वार्षिक यात्रा तीन जुलाई को दोनों मार्गों से शुरू हुई थी और नौ अगस्त को रक्षाबंधन के त्यौहार के साथ समाप्त होगी। अब तक 2.35 लाख से अधिक तीर्थयात्री प्राकृतिक रूप से निर्मित शिवलिंग के दर्शन कर चुके हैं।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 100 जिलों में कृषि क्षेत्र के प्रोत्साहन के लिए सालाना 24,000 करोड़ रुपये के आवंटन वाली ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना' को बुधवार को मंजूरी दी। छह साल तक चलने वाली इस योजना से करीब 1.7 करोड़ किसान लाभान्वित होंगे। यह योजना 2025-26 के बजट में कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए 100 जिलों के विकास की घोषणा के अनुरूप है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए इस निर्णय की जानकारी दी। वैष्णव ने संवाददाताओं से कहा कि 'प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना' 11 विभागों की 36 मौजूदा योजनाओं, अन्य राज्य योजनाओं और निजी क्षेत्र के साथ स्थानीय भागीदारी को समाहित कर कार्यान्वित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस योजना से लगभग 1.7 करोड़ किसान लाभान्वित होंगे।
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना, पंचायत एवं ब्लॉक स्तर पर फसलों की कटाई के बाद अनाज भंडारण बढ़ाना, सिंचाई सुविधाओं में सुधार और किसानों के लिए दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक ऋण की उपलब्धता को सुगम बनाना है। योजना के लिए 100 जिलों की पहचान कम उत्पादकता, कम फसल सघनता और कम ऋण वितरण के तीन प्रमुख मानदंडों के आधार पर की जाएगी। प्रत्येक राज्य/केंद्रशासित प्रदेश में जिलों की संख्या शुद्ध फसल क्षेत्र और परिचालन जोत के हिस्से पर आधारित होगी। हालांकि, प्रत्येक राज्य से कम-से-कम एक जिला इस योजना के लिए चुना जाएगा। बयान के मुताबिक, योजना के प्रभावी नियोजन, कार्यान्वयन और निगरानी के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समितियां गठित की जाएंगी। जिला धन-धान्य समिति द्वारा एक जिला कृषि एवं संबद्ध कार्यकलाप योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिसमें प्रगतिशील किसान भी शामिल होंगे। जिला योजनाओं को फसल विविधीकरण, जल एवं मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और प्राकृतिक एवं जैविक खेती के विस्तार जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप बनाया जाएगा। प्रत्येक धन-धान्य जिले में योजना की प्रगति की निगरानी मासिक आधार पर एक डैशबोर्ड के माध्यम से 117 प्रमुख संकेतकों पर की जाएगी। नीति आयोग इन जिला योजनाओं की समीक्षा और मार्गदर्शन करेगा। इसके अलावा प्रत्येक जिले के लिए नियुक्त केंद्रीय नोडल अधिकारी भी नियमित आधार पर इसकी समीक्षा करेंगे। आधिकारिक बयान के मुताबिक, ‘‘इन 100 जिलों में लक्षित परिणामों में सुधार होने के साथ ही देश के लिए प्रमुख निष्पादन संकेतकों के संदर्भ में समग्र औसत में वृद्धि होगी।'' इसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र में उत्पादकता में वृद्धि, मूल्य संवर्धन और स्थानीय आजीविका का सृजन होगा। इस तरह से घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और आत्मनिर्भरता हासिल होगी। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने बुधवार को कहा कि भारतीय पाकशास्त्र और व्यंजनों की विरासत 'सांस्कृतिक स्मृति' और भोजन बनाने के क्षेत्रीय तरीकों से प्रेरित है, इसलिए इन परंपराओं को मजबूत करने और वैश्विक स्तर पर इसे बढ़ावा देने की जरूरत है। पर्यटन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और महानिदेशक सुमन बिल्ला ने यहां एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि भारत की लुप्त होती पाकशास्त्र परंपराओं को संरक्षित करने की भी आवश्यकता है। पर्यटन मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में यह जानकारी दी गयी।
बयान के मुताबिक इस अवसर पर राष्ट्रीय युवा शेफ प्रतियोगिता (एनवाईसीसी) की शुरुआत की घोषणा की गई। इसका उद्देश्य देश भर के अंतिम वर्ष के छात्रों के बीच बेहतरीन पाकशास्त्र प्रतिभा की खोज करना, उनका मार्गदर्शन करना और उनका प्रदर्शन करना है। यह प्रतियोगिता पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) द्वारा पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से आयोजित की जा रही है। पर्यटन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव बिल्ला ने कहा, ‘‘हमारी पाकशास्त्र की विरासत सांस्कृतिक स्मृति और क्षेत्रीय तकनीकों पर आधारित है। हमें इन परंपराओं को सुदृढ़ करना होगा और वैश्विक स्तर पर भारतीय व्यंजनों को बढ़ावा देना होगा।'' उन्होंने युवा शेफ से रचनात्मक ढंग से सोचने और अंतरराष्ट्रीय पाकशास्त्र मंच पर आत्मविश्वास के साथ भारत का प्रतिनिधित्व करने का आग्रह किया। - नई दिल्ली। युवा (15-29 आयु समूह) में बेरोजगारी दर जून में लगातार दूसरे महीने बढ़ी। यह मई के 15 प्रतिशत से बढ़कर जून में 15.3 प्रतिशत हो गई। हालांकि जून में युवाओं में काम करने के प्रति कम उत्साह था। यह जानकारी राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) के मंगलवार को जारी नवीन मासिक आवधिक श्रम बल सर्वे (पीएलएफएस) के आंकड़ो़ं में दी गई।शहरी क्षेत्र के युवाओं में बेरोजगारी दर जून में तेजी से बढ़ी (मई के 17.9 प्रतिशत से बढ़कर 18.8 प्रतिशत) जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कम (मई के 13.7 प्रतिशत से बढ़कर 13.8 प्रतिशत) बढ़ी। एनएसओ हालिया सप्ताहिक स्थिति (सीडब्ल्यूएस) के आधार पर बेरोजगारी दर को मापता है। इसके तहत सर्वेक्षण की तारीख के सात दिनों की अवधि पर गतिविधि की स्थिति निर्धारित की जाती है। इसके तहत किसी व्यक्ति को एक हफ्ते में तब बेरोजगार माना जाता है जब वह कम से कम एक घंटे या किसी एक दिन काम करना चाहता हो लेकिन उसे सप्ताह में एक घंटे या किसी भी दिन कोई कार्य नहीं मिला हो। युवाओं में श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) काम करने के इच्छुक लोगों या काम की तलाश कर रहे युवाओं की संख्या का आकलन करती है। एलएफपीआर दर जून में गिरकर 41 प्रतिशत हो गई जबकि यह मई में 42.1 प्रतिशत थी। एलएफपीआर दर ग्रामीण क्षेत्रों में 42.7 प्रतिशत से गिरकर 41.1 प्रतिश हो गई जबकि यह दर शहरी क्षेत्रों में 40.8 प्रतिशत पर यथावत रही।सर्वेक्षण के अनुसार जून में ’15 वर्ष और उससे अधिक’ आयु वर्ग में बेरोजगारी दर यथावत रही। हालांकि इस अवधि में ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर मई के 5.1 प्रतिशत से गिरकर 4.9 प्रतिशत हो गई जबकि यह शहरी क्षेत्र में मई के 6.9 प्रतिशत से बढ़कर 7.1 प्रतिशत हो गई।महिलाओं की बेरोजगारी दर मई के 5.8 प्रतिशत से मामूली रूप से गिरकर 5.6 प्रतिशत हो गई। हालांकि पुरुषों की बेरोजगारी दर 5.6 प्रतिशत पर यथावत रही। श्रम मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘ मई 2025 की तुलना में जून 2025 में ग्रामीण क्षेत्रों के पुरुषों और महिलाओं में बेरोजगारी दर घटने का कारण उनकी अपने कार्य में बढ़ती भागीदारी है। इसके अलावा बेरोजगार युवकों की संख्या में भी गिरावट हुई है।’ एलएफपीआर में ’15 वर्ष और उससे अधिक’ की श्रेणी की हिस्सेदारी जून में 54.2 प्रतिशत थी जबकि यह मई में 54.8 प्रतिशत थी।
- नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने मंगलवार भारतीय नौसेना को छह स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किए गए रणनीतिक प्रोडक्ट सौंपे हैं। ये स्वदेशी प्रणालियां न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल और रेडियोलॉजिकल खतरों के विरुद्ध नौसेना की क्षमताओं को सशक्त बनाएंगे। इसके साथ यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को गति भी प्रदान करेंगी।डीआरडीओ द्वारा सौंपे गए उत्पादों में गामा रेडिएशन एरियल सर्विलांस सिस्टम, एनवायरनमेंटल सर्विलांस व्हीकल, व्हीकल रेडियोलॉजिकल कंटैमिनेशन मॉनिटरिंग सिस्टम, अंडरवॉटर गामा रेडिएशन मॉनिटरिंग सिस्टम, डर्ट एक्सट्रैक्टर एंड क्रॉस कंटैमिनेशन मॉनिटर व ऑर्गन रेडियोएक्टिविटी डिटेक्शन सिस्टम शामिल हैं।इन अत्याधुनिक उपकरणों को डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने नौसेना मुख्यालय में रियर एडमिरल श्रीराम अमूर को औपचारिक रूप से सौंपा। डीआरडीओ के मुताबिक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ये सभी रक्षा उपकरण नौसेना की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किए गए हैं। नौसेना को इन उपकरणों का हस्तांतरण जोधपुर स्थित रक्षा प्रयोगशाला में आयोजित एक विशेष समारोह में किया गया।
- नई दिल्ली। भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) इस वर्ष अगस्त से छात्रों के अपने पहले बैच के लिए प्रवेश की शुरूआत करने जा रहा है। इस शुरूआत के साथ ही, संस्थान भारत की बढ़ती डिजिटल और रचनात्मक अर्थव्यवस्था में एक परिवर्तनकारी उपलब्धि हासिल करने के लिए भी तैयार है। संस्थान एवीजीसी-एक्सआर (एनीमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और विस्तारित वास्तविकता) क्षेत्र में उद्योग-संचालित पाठ्यक्रमों का एक मजबूत पोर्टफोलियो प्रदान करेगा।केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव की मई, 2025 में विश्व ऑडियो विजुअल एंटरटेनमेंट समिट (वेव्स) में की गई घोषणा को आगे बढ़ाने की दिशा में संस्थान को प्रतिष्ठित वैश्विक साझेदारियों और उद्योग प्रमुखों का समर्थन प्राप्त है। इस शैक्षणिक पाठ्यक्रम में गेमिंग में छह विशेष पाठ्यक्रम, पोस्ट प्रोडक्शन में चार पाठ्यक्रम और एनीमेशन, कॉमिक्स और एक्सआर में आठ पाठ्यक्रम शामिल हैं।भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान के हाल ही में यूनाइटेड किंगडम के यॉर्क विश्वविद्यालय के साथ एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हुए हस्ताक्षर से सहयोगात्मक अनुसंधान, संकाय विनिमय और वैश्विक प्रमाणन मार्गों का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इसकी मजबूत आधारशिला में वृद्धि करते हुए गूगल, यूट्यूब, बडोब, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीआईडीआईए और जियोस्टार जैसी प्रमुख वैश्विक कंपनियों ने भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान के साथ दीर्घकालिक सहयोग की प्रतिबद्धता जताई है। उनके समर्थन में पाठ्यक्रम विकास, छात्रवृत्ति, इंटर्नशिप, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और प्लेसमेंट के अवसर शामिल हैं।भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, डॉ. विश्वास देउस्कर ने कहा कि उनका विज़न विश्वस्तरीय प्रतिभाओं को पोषित करके एवीजीसी-एक्सआर क्षेत्र में भारत को एक वैश्विक महाशक्ति बनाना है। पाठ्यक्रम भारत की गतिशील रचनात्मक क्षमता पर आधारित होते हुए भी वैश्विक मानकों को पूरा करने के लिए तैयार किए गए हैं। विस्तृत पाठ्यक्रम की घोषणा इस महीने के अंत में होने की आशा है।भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान के शासी बोर्ड में श्री संजय जाजू, श्री विकास खड़गे, श्रीमती स्वाति म्हसे, श्री चंद्रजीत बनर्जी, श्री आशीष कुलकर्णी, श्री मानवेंद्र शुकुल और श्री राजन नवानी शामिल हैं। शासी परिषद के सदस्यों में श्री मुंजाल श्रॉफ, श्री चैतन्य चिचलीकर, श्री बीरेन घोष, श्री भूपेंद्र कैंथोला और श्री गौरव बनर्जी शामिल हैं।वैश्विक एवीजीसी-एक्सआर उद्योग के तेज़ी से बढ़ने के अनुमान के साथ, भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान के व्यापक पाठ्यक्रम भविष्य के लिए तैयार प्रतिभाओं का एक ऐसा समूह तैयार करने का लक्ष्य रखते हैं जो भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देगा और देश को उभरती हुई और डिजिटल विषय सामाग्री प्रौद्योगिकियों में अग्रणी स्थान दिलाएगा।
- नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 17 जुलाई को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रतिष्ठित स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 पुरस्कार प्रदान करेंगी। इस वर्ष 4 श्रेणियों में कुल 78 पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में 10 सुपरिभाषित मापदंडों का उपयोग करते हुए शहरी स्वच्छता और सेवा वितरण का आकलन करने के लिए एक स्मार्ट, संरचित दृष्टिकोण अपनाया गया। आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) द्वारा इस समारोह का आयोजन किया जा रहा है। समारोह में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू उपस्थिति रहेंगे।आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 विश्व के सबसे बड़े शहरी स्वच्छता सर्वेक्षण का 9वां संस्करण है। यह ऐतिहासिक आयोजन स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (एसबीएम-यू) को आगे बढ़ाने वाले शहरों के अथक प्रयासों को मान्यता देते हुए शहरी भारत के सबसे स्वच्छ शहरों को पुरस्कृत करेगा।इस वर्ष सुपर स्वच्छ लीग शहर, 5 जनसंख्या श्रेणियों में शीर्ष, स्वच्छ शहर, विशेष श्रेणी: गंगा शहर, छावनी बोर्ड, सफाई मित्र सुरक्षा, महाकुंभ, राज्य स्तरीय पुरस्कार – राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का होनहार स्वच्छ शहर आदि चार श्रेणियों में कुल 78 पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।स्वच्छ सर्वेक्षण (एसएस), स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के अंतर्गत एक ऐतिहासिक पहल है जो पिछले नौ वर्षों से शहरी भारत की स्वच्छता की यात्रा में एक निर्णायक शक्ति बन गई है और जन समर्थन से साथ लोगों की सोच को आकार देकर स्वच्छता के लिए प्रेरित कर रही है। वर्ष 2016 में 73 शहरी स्थानीय निकायों से शुरू होकर, इसका नवीनतम संस्करण अब 4,500 से अधिक शहरों तक पहुंच गया है। इस वर्ष के पुरस्कार न केवल सर्वश्रेष्ठ स्वच्छ शहरों को सम्मानित करते हैं, बल्कि प्रगति की मजबूत संभावनाओं वाले छोटे शहरों को भी मान्यता और प्रोत्साहन देते हैं।स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 पुरस्कार “रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकल” की थीम पर केंद्रित हैं। 3,000 से ज़्यादा मूल्यांकनकर्ताओं ने 45 दिनों की अवधि में देश भर के हर वार्ड में गहन निरीक्षण किया। समावेशिता और पारदर्शिता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के साथ, इस पहल में 11 लाख से ज़्यादा घरों का मूल्यांकन शामिल था – जो राष्ट्रीय स्तर पर शहरी जीवन और स्वच्छता को समझने के लिए एक व्यापक और दूरगामी दृष्टिकोण को दर्शाता है।आपको बता दें, स्वच्छ सर्वेक्षण में पहली बार, शहरों को जनसंख्या के आधार पर पांच श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है जिनमें (1) बहुत छोटे शहर: 20,000 जनसंख्या (2) छोटे शहर: 20,000 – 50,000 जनसंख्या (3) मध्यम शहर : 50,000 – 3 लाख जनसंख्या (4) बड़े शहर: 3 – 10 लाख जनसंख्या और (5) दस लाख से अधिक आबादी वाले शहर (10 लाख जनसंख्या) शामिल हैं ।मंत्रालय ने बताया कि प्रत्येक श्रेणी का मूल्यांकन उसके आकार और विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप मानकों के आधार पर किया गया है। सबसे स्वच्छ शहरों को प्रत्येक श्रेणी में पुरस्कृत किया जाएगा। यह दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि छोटे शहरों को भी आगे बढ़ने का अवसर मिले और वे हमेशा की तरह आगे रहने वाले शहरों के साथ समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।
- नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित 12वीं कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) समिट में कहा कि हरित ईंधन को लेकर उनके प्रयास वर्ष 2004 से मिशन के रूप में जारी हैं और आज वे खुद देश के पहले ऐसे मंत्री हैं जिनकी गाड़ी 100 प्रतिशत बायोफ्यूल पर चलती है।केंद्रीय मंत्री गडकरी ने यह भी कहा कि इस वैकल्पिक ईंधन का निर्माण मक्का, टूटे चावल और गन्ने जैसे उत्पादों से होता है, जिसे किसान तैयार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब मक्का की कीमत 1200 रुपये प्रति क्विंटल थी, तब इसके उत्पादन को प्रोत्साहन दिया गया और अब उसकी बाजार कीमत 2400 रुपये तक पहुंच गई है। इसका लाभ किसानों को सीधे मिल रहा है। भारत का फॉसिल फ्यूल आयात 40 लाख करोड़ रुपये तक का है, जिसे घटाने के लिए वैकल्पिक ईंधन का उपयोग और आवश्यक हो गया है।उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने एक प्लेटफार्म की भी शुरुआत की है जिसमें रेडीमेड गारमेंट से बची हुई कतरनों से कारपेट बनाए जाते हैं। ये कारपेट कम लागत में तैयार होते हैं और इनमें 1500 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है। यदि सामाजिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ छोटे-छोटे प्रयास किए जाएं तो लोगों के जीवन को बदला जा सकता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में आज भी बड़ी मदद की आवश्यकता है और सीएसआर के माध्यम से जो कार्य हो रहे हैं, वे बेहद सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों को वैसी प्रसिद्धि नहीं मिलती जैसी राजनैतिक गतिविधियों को मिलती है, जबकि इन कार्यों से कई लोगों का जीवन बदला है। उन्होंने बताया कि वे 80 प्रतिशत कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में करते हैं और इसीलिए उन्हें सामाजिक कार्यों में सबसे अधिक संतोष मिलता है।उन्होंने बताया कि रोड निर्माण के लिए जरूरी सामग्री जैसे मिट्टी और एग्रीगेट की पूर्ति हेतु नदियों, नालों और तालाबों का गहरीकरण किया गया। वहां से निकाली गई मिट्टी का उपयोग सड़कों के निर्माण में किया गया। यह सारा कार्य मुफ्त में कराया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि संबंधित क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक बदलाव आया। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उनके मंत्रालय ने अकोला स्थित कृषि विश्वविद्यालय में उन्होंने 36 तालाब बनवाए, जिससे जल संकट दूर हुआ और ग्रामीणों का शहरों की ओर पलायन भी रुका।उन्होंने कहा कि स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में भी सार्थक बदलाव आ रहा है। उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि सीएसआर प्रोजेक्ट्स का सोशल और इकोनॉमिक ऑडिट किया जाना चाहिए, जिससे यह पता लगाया जा सके कि कम खर्च में कौन-कौन से अच्छे परिणाम सामने आए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कार्यरत संस्थाओं की ग्रेडिंग का भी सुझाव दिया ताकि जो लोग अच्छा कार्य कर रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता मिल सके और देशभर में इन कार्यों का प्रभाव और अधिक बढ़े। उन्होंने कहा कि यदि हम गुणवत्ता के आधार पर संस्थाओं को बढ़ावा देंगे तो यह सेक्टर और अधिक विश्वसनीय बन सकेगा।उन्होंने कहा कि खासकर ग्रामीण, आदिवासी और कृषि आधारित क्षेत्रों में सीएसआर के अंतर्गत जल, जमीन, जंगल और जानवर पर केंद्रित कार्यों की अत्यधिक आवश्यकता है। इन क्षेत्रों में शिक्षा का घोर अभाव है, जिसके समाधान के लिए उन्होंने कई प्रयास किए हैं। एक स्कूल का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जहां तीस हजार बच्चे पढ़ते हैं, वहां की माताओं को साथ लेकर एक महिला महाविद्यालय के हॉस्टल में प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया। वहां से 80 आदिवासी लड़कियां आईं, जिन्होंने वर्चुअल इंटरव्यू से चयन होकर राष्ट्रीय स्तर के खेलों में भाग लिया और उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
- 0- भारत-जापान साझेदारी के तहत अगली पीढ़ी की ई10 शिंकानसेन ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन में इस्तेमाल होगी0- भारत और जापान में एक साथ ई10 शिंकानसेन आरंभ होगीनई दिल्ली। बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलेक्स (बीकेसी) और ठाणे के बीच 21 किलोमीटर लंबी समुद्री सुरंग का पहला खंड खोले जाने का महत्वपूर्ण काम पूरा हो गया है। इस परियोजना के अंतर्गत हाल ही में 310 किलोमीटर लंबे विशेष पुल वायडक्ट का निर्माण कार्य भी पूरा किया गया है। ट्रैक बिछाने, ओवरहेड बिजली के तारों, स्टेशनों और पुलों का निर्माण कार्य तेज़ी से चल रहा है। महाराष्ट्र में संबंधित निर्माण कार्य में तेज़ी आई है। साथ ही संचालन और नियंत्रण प्रणालियों की खरीद का काम भी भलीभांति चल रहा है।रोलिंग स्टॉक: जापान में तेज़ गति वाली रेलवे लाइनों के नेटवर्क शिंकानसेन में अभी में ई5 ट्रेनें चलाई जा रही हैं। इसकी अगली पीढ़ी की उन्नत ट्रेन ई10 हैं। जापान और भारत के बीच महत्वपूर्ण साझेदारी के तहत जापान की सरकार ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में ई10 शिंकानसेन ट्रेन चलाने पर सहमति व्यक्त की है। उल्लेखनीय बात यह है कि ई10 ट्रेनें भारत और जापान में एक साथ आरंभ की जाएंगी।जापानी तकनीक: बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत समूचे 508 किलोमीटर लंबे गलियारे को जापानी शिंकानसेन तकनीक से विकसित किया जा रहा है। यह गति, सुरक्षा और विश्वसनीयता के नए मानक स्थापित करेगा। साथ ही यह भारत और जापान के बीच प्रगाढ़ रणनीतिक और तकनीकी सहयोग को भी दर्शाता है।तेज गति से निर्माण कार्य: बुलेट ट्रेन के सम्पूर्ण मार्ग पर सिविल कार्य तेजी से चल रहा है। इसमें 310 किलोमीटर लंबे विशिष्ट पुल वायडक्ट का निर्माण हो चुका है। 15 नदी पुल पूर्ण हो चुके हैं और 4 का निर्माण अंतिम चरण में है। इसके 12 स्टेशनों में 5 बन चुके हैं और 3 का काम पूरा होने वाला है। बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलेक्स स्थित स्टेशन इंजीनियरिंग का नायाब नमूना है। यह स्टेशन भूमि से 32 दशमलव 5 मीटर नीचे स्थित होगा। इसकी नींव ऐसी तैयार की गई है कि इसके ऊपर 95 मीटर ऊंची इमारत बनाई जा सके।भविष्य की तीव्र गति ट्रेन योजनाओं पर सक्रियता से विचार: मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (एमएएचएसआर) परियोजना की सफलता भारत में भविष्य के बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का आधार तैयार कर रही है। भविष्य की इस तरह की हाई स्पीड रेल कॉरिडोर पर सक्रियता से विचार किया जा रहा है।इस योजना के विकास में उल्लेखनीय तेज गति अत्याधुनिक वैश्विक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा स्थापित करने की भारत की क्षमता को दर्शाती है, जिसमें जापान परिवर्तनकारी यात्रा में विश्वसनीय भागीदार की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
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मुंबई. कम आय वर्ग के लोगों में क्रेडिट कार्ड पर निर्भरता बढ़ रही है। ‘थिंक 360 डॉट एआई' के एक अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है। अध्ययन में कहा गया है कि 50,000 रुपये मासिक से कम कमाने वाले लगभग 93 प्रतिशत वेतनभोगी इस ‘प्लास्टिक मनी' पर निर्भर हैं। इस अध्ययन के तहत 12 महीने के दौरान भारत में 20,000 से अधिक वेतनभोगी और स्वरोजगार वाले व्यक्तियों के वित्तीय व्यवहार का विश्लेषण किया गया। इसके मुताबिक, 85 प्रतिशत स्वरोजगार वाले व्यक्ति क्रेडिट कार्ड पर निर्भर हैं।
मंगलवार को जारी अध्ययन में कहा गया कि ‘अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें' (बीएनपीएल) सेवाओं का इस्तेमाल 18 प्रतिशत स्वरोजगार व्यक्ति और 15 प्रतिशत वेतनभोगी व्यक्ति करते हैं। ‘थिंक 360 डॉट एआई' के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमित दास ने कहा, ‘‘भारत के विकसित होते कर्ज परिदृश्य में, क्रेडिट कार्ड और बीएनपीएल अब वेतनभोगी पेशेवरों से लेकर अस्थायी कर्मियों तक, सभी के लिए जरूरत बन गए हैं।'' रिपोर्ट में वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों (फिनटेक) के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख भी किया गया है, जो भारत की डिजिटल ऋण क्रांति का नेतृत्व कर रही हैं। अध्ययन में कहा गया कि फिनटेक कंपनियों ने 2022-23 में 92,000 करोड़ रुपये से अधिक के व्यक्तिगत ऋण वितरित किए, जो मात्रा के हिसाब से सभी नए कर्ज का 76 प्रतिशत है। -
नयी दिल्ली/ मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए अब वास्तविक और स्पैम एसएमएस के बीच अंतर कर पाना आसान होगा। इसकी वजह यह है कि दूरसंचार सेवा प्रदाताओं ने एसएमएस भेजने वाली संस्थाओं के नाम के साथ कुछ प्रतीकात्मक प्रत्यय लगाने शुरू कर दिए हैं। दूरसंचार कंपनियों के निकाय सीओएआई ने मंगलवार को यह जानकारी दी। सेल्युलर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के सदस्यों में रिलायंस जियो, एयरटेल और वोडाफोन आइडिया शामिल हैं। सीओएआई ने एक बयान में कहा कि स्पैम संदेश भेजने वाले अब ओवर-द-टॉप यानी इंटरनेट मैसेजिंग ऐप का रास्ता अपनाने लगे हैं जिससे स्पैम और धोखाधड़ी वाले संदेशों की जांच के लिए सख्त उपाय लागू करने का उद्देश्य ही विफल हो जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए उपयोगकर्ताओं की सुविधा के लिए एसएमएस के शीर्षक पर ऐसे सांकेतिक अक्षर लगाए गए हैं जिन्हें देखकर यह समझा जा सकता है कि वह किस तरह का संदेश है। सीओएआई के महानिदेशक एस पी कोचर ने कहा, "सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं ने एसएमएस हेडर पर प्रचारात्मक ('पी'), सेवा-संबंधी ('एस'), लेनदेन संबंधी ('टी') और सरकारी ('जी') संचार प्रत्यय प्रणाली लागू कर दी है। दूरसंचार वाणिज्यिक संचार ग्राहक वरीयता विनियम (टीसीसीसीपीआर) ने 12 फरवरी, 2025 को टीसीसीसीपी विनियमन में संशोधन के जरिये इसे अनिवार्य कर दिया था।" कोचर ने कहा कि इस प्रत्यय प्रणाली के लागू होने से पारदर्शिता और उपभोक्ता संरक्षण में वृद्धि हुई है क्योंकि इस तरह के वर्गीकरण से ग्राहकों को आने वाले संदेशों की प्रकृति को आसानी से पहचानने, स्पैम को कम करने, अनुपालन को मजबूत करने और समग्र विश्वास एवं सुविधा में सुधार करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा, "उपयोगकर्ता एक नजर में ही प्रचार वाले, सेवा-संबंधी, लेनदेन संबंधी और सरकारी संदेशों को आसानी से पहचान और उनके बीच फर्क कर सकते हैं। प्रचार वाले संदेशों ('पी') को स्पष्ट रूप से चिह्नित करने से ग्राहकों को अवांछित विपणन संदेशों से बचने में मदद मिलती है, जिससे स्पैम को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है।" इसी तरह, ग्राहक वास्तविक लेनदेन संबंधी ('टी') और सेवा-संबंधी ('एस') संदेशों को भी आसानी से पहचान सकते हैं। ऐसा होने पर उनके धोखाधड़ी या घोटाले के शिकार होने की आशंका कम हो जाती है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि स्पैमर और घोटालेबाज लगातार गैर-विनियमित मैसेजिंग ऐप का सहारा ले रहे हैं। कोचर ने कहा, "ओटीटी संचार सेवाओं के इस्तेमाल से स्पैम और धोखाधड़ी वाले संदेशों में वृद्धि को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। अगर संचार परिवेश का बड़ा हिस्सा गैर-विनियमित रहता है तो किसी भी सहमति ढांचे या स्पैम पर काबू पाने वाले उपाय की सफलता अधूरी है।" उन्होंने कहा कि ओटीटी ऐप का विनियमन न होना दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और ओटीटी संचार सेवाओं के बीच एक असमान प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाता है, जिससे गोपनीयता, पता लगाने की क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं।
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मुंबई. मनोज कुमार की फिल्म ‘रोटी कपड़ा और मकान' में अभिनय करने और हिट टेलीविजन शो ‘ओम नमः शिवाय' और ‘अदालत' के निर्माण के लिए पहचाने जाने वाले दिग्गज अभिनेता-निर्माता धीरज कुमार का यहां एक अस्पताल में निधन हो गया। उनके एक पारिवारिक मित्र ने मंगलवार को यह जानकारी दी। वह 79 वर्ष के थे।
कुमार निमोनिया से गंभीर रूप से पीड़ित थे और उन्हें कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल की गहन चिकित्सा यूनिट में भर्ती कराया गया था। कुमार के करीबी सहयोगी और पारिवारिक मित्र अजय शुक्ला ने बताया, "आज सुबह 11 बजे कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में निमोनिया के कारण उनका निधन हो गया। वह कुछ समय से अस्वस्थ थे और शनिवार को बुखार, सर्दी और खांसी की शिकायत के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उम्र संबंधी जटिलताओं के कारण उन्हें आईसीयू में रखा गया था।" शुक्ला ने बताया कि कुमार का अंतिम संस्कार बुधवार को पवन हंस श्मशान घाट पर किया जाएगा। कुमार के परिवार ने एक बयान में उनके निधन की पुष्टि की।
उनके परिवार ने कहा, "गहरी संवेदना और शोक के साथ हम यह सूचित करते हैं कि अनुभवी अभिनेता, निर्माता, निर्देशक और एक अच्छे इंसान धीरज कुमार ने मंगलवार, 15 जुलाई 2025 को दोपहर लगभग 12 बजे अपने परिजनों की मौजूदगी में अंतिम सांस ली।" उनके परिजनों ने बताया "वे हमेशा हंसते रहते थे, हमेशा दूसरों की मदद को तैयार और हमेशा अपने परिवार, दोस्तों और पूरी इंडस्ट्री के लिए मौजूद रहते थे। एक सच्चे सज्जन पुरूष धीरज कुमार कई लोगों के लिए पिता समान, मित्र और मार्गदर्शक थे। उन्हें न केवल एक अभिनेता के रूप में बल्कि एक मार्गदर्शक बल्कि एक निर्मल आत्मा के रूप में भी याद किया जाएगा। हम इस कठिन समय में सभी की प्रार्थनाओं और समर्थन के लिए सभी का धन्यवाद करते हैं।" धीरज कुमार का करियर सिनेमा और टेलीविजन दोनों में पांच दशकों से ज़्यादा समय तक चला।
उन्होंने मनोरंजन इंडस्ट्री में अपना सफ़र 1965 में एक प्रतिभा प्रतियोगिता के ‘फाइनलिस्ट' के रूप में शुरू किया था। सुपरस्टार राजेश खन्ना और फिल्म निर्माता सुभाष घई भी इसका हिस्सा थे। उन्होंने 1970 की फिल्म ‘रातों का राजा' से शुरुआत करते हुए कई हिंदी और पंजाबी फिल्मों में अभिनय किया और मुख्य भूमिकाएं निभाईं। इसके बाद उन्होंने ‘रोटी कपड़ा और मकान' (1974), ‘सरगम' (1979) और ‘क्रांति' (1981) जैसी फिल्मों में सहायक भूमिकाएं निभाईं। पंजाबी सिनेमा में कुमार एक प्रमुख हस्ती थे और उन्होंने 1970 से 1984 के बीच 20 से ज़्यादा फिल्मों में अभिनय किया। 1986 में उन्होंने ‘क्रिएटिव आई लिमिटेड' नामक एक प्रोडक्शन हाउस की स्थापना की जिसने भारतीय टेलीविजन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में कंपनी ने ‘ओम नमः शिवाय' जैसे लोकप्रिय पौराणिक और पारिवारिक धारावाहिकों का निर्माण किया जो 1997 से 2001 तक दूरदर्शन नेशनल पर प्रसारित हुए। साथ ही उन्होंने ‘श्री गणेश', ‘रिश्तों के भंवर में उलझी नियति', ‘अदालत' और ‘घर की लक्ष्मी बेटियां' का भी निर्माण किया था। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन एस महेंद्र देव ने मंगलवार को कहा कि भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार नीति से जुड़ी अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के चालू वित्त वर्ष (2025-26) में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है। देव ने कहा कि अच्छे मानसून और नीतिगत ब्याज दर में लगातार तीन कटौतियों की वजह से मुद्रास्फीति कम रहने से घरेलू वृद्धि को समर्थन मिलेगा। प्रख्यात अर्थशास्त्री ने कहा, ‘‘भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार नीति से जुड़ी अनिश्चितताओं के दोहरे झटके जैसी कई वैश्विक चुनौतियां हैं। हालांकि, भारत की अर्थव्यवस्था जुझारू है और यह बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश बना हुआ है।'' देव ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के पहले दो महीनों के प्रमुख संकेतक घरेलू अर्थव्यवस्था के जुझारू प्रदर्शन का संकेत देते हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ पाना संभव है। उन्होंने कहा, ‘‘मजबूत राजकोषीय प्रबंधन के साथ भारत की मध्यम अवधि की वृद्धि संभावनाएं मजबूत प्रतीत होती हैं।'' ईएसी-पीएम के प्रमुख ने कहा कि बढ़ते सरकारी पूंजीगत व्यय का निजी उपभोग में स्वस्थ वृद्धि के साथ वृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक ने अनिश्चित वैश्विक परिवेश और व्यापार तनाव को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में भारत के वृद्धि दर अनुमान को घटाकर क्रमशः 6.2 प्रतिशत और 6.3 प्रतिशत कर दिया है। देव ने कहा कि घरेलू स्तर पर मौजूद कई अनुकूल परिस्थितियां निवेश, उपभोग और निर्यात को बढ़ावा देकर ग्रामीण और शहरी दोनों मांग को बढ़ा सकती हैं। उन्होंने कहा कि आपूर्ति पक्ष पर कृषि और सेवाएं अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं और आने वाले वर्षों में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि में भी सुधार होगा। मुद्रास्फीति से जुड़े एक सवाल पर देव ने कहा कि अच्छे मानसून के साथ इस साल खाद्य मुद्रास्फीति नियंत्रण में रहनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘अनुमान कच्चे तेल सहित कई वस्तुओं की कीमतों में निरंतर नरमी को दर्शा रहे हैं।''
इसके साथ ही देव ने कहा कि सरकारी पूंजीगत व्यय में वृद्धि का निजी क्षेत्र के निवेश पर भी असर पड़ेगा क्योंकि अध्ययनों से पता चला है कि राष्ट्रीय राजमार्गों और ग्रामीण सड़कों के निर्माण से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कारोबार बढ़ा है। उन्होंने कहा, ‘‘सरकारी पूंजीगत व्यय का कई गुना प्रभाव पड़ेगा। निजी पूंजीगत व्यय में कुछ सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे हैं। - नई दिल्ली। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) 16 जुलाई को सी. सुब्रमण्यम हॉल, एनएएससी कॉम्प्लेक्स, नई दिल्ली में अपने 97वां स्थापना दिवस के अवसर पर पुरस्कार समारोह और विकसित कृषि प्रदर्शनी का आयोजन करेगा। इस कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान जारी कर दी।आईसीएआर स्थापना दिवस भारत के कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा के प्रमुख संस्थान की स्थापना का प्रतीक है, जो भारतीय कृषि को सुदृढ़ बनाने और खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में इसकी परिवर्तनकारी भूमिका को मान्यता देता है।दशकों से आईसीएआर ने फसल सुधार, पशुधन एवं मत्स्य विकास, कृषि-जैव प्रौद्योगिकी, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और डिजिटल कृषि के क्षेत्र में नवाचारों का नेतृत्व किया है। इस अवसर पर आईसीएआर राष्ट्रीय कृषि विज्ञान पुरस्कार की प्रस्तुति तथा नए उत्पादों, प्रौद्योगिकियों, प्रकाशनों एवं समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का विमोचन किया जाएगा। आईसीएआर स्थापना दिवस न केवल उपलब्धियों का उत्सव है, बल्कि अत्याधुनिक अनुसंधान, नवाचारों और क्षमता निर्माण के माध्यम से कृषक समुदाय की सेवा करने की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि भी है।
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नई दिल्ली। सरकार ने मॉनसून सत्र के लिए जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन), कराधान कानून (संशोधन) और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक सहित आठ नए विधेयकों को पेश करने के लिए सूचीबद्ध किया है। संसद का मॉनसून सत्र 21 जुलाई से शुरू हो रहा है। सत्र के हंगामेदार रहने की संभावना है, क्योंकि विपक्षी इंडिया गठबंधन दल ऑपरेशन सिंदूर, विदेश विशेष रूप से चीन के साथ संबंधों, प्रस्तावित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बार-बार किए गए दावों पर सरकार से संसद को जानकारी देने की मांग कर सकते हैं।
राज्य सभा में विपक्ष के नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को राज्य सभा सभापति जगदीप धनखड़ से मुलाकात की। उन्होंने इस बैठक के बाद एक्सपर पोस्ट में कहा, ‘विपक्ष 21 जुलाई से एक उत्पादक राज्य सभा सत्र चाहता है। सत्र में कई रणनीतिक, राजनीतिक, विदेश नीति और सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर बहस और चर्चा करने की आवश्यकता है। ये सभी सार्वजनिक चिंता के विषय हैं।’लोक सभा और राज्य सभा सचिवालयों द्वारा सोमवार देर शाम जारी मॉनसून सत्र के लिए सरकार की अनंतिम कार्य सूची में 2016 के दिवाला और दिवालियापन संहिता में संशोधन करने वाले विधेयक का उल्लेख नहीं है। वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति वर्तमान में आईबीसी को और अधिक मजबूत बनाने के तरीकों की सिफारिश करने के लिए इसका अध्ययन कर रही है।‘आईबीसी के कामकाज और उभरते मुद्दों की समीक्षा’ विषय पर अपनी तीन बैठकों में पैनल ने बैंकों के दृष्टिकोण को समझने की कोशिश की है। पैनल 29 जुलाई को होने वाली अपनी बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक के प्रतिनिधियों से मिलेगा। सरकार इसी सत्र में भू-विरासत स्थल और भू-अवशेष (संरक्षण और रखरखाव), राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक व राष्ट्रीय डोपिंग रोधी (संशोधन) विधेयक भी पेश करने वाली है।


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