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- मुंबई । मुंबई के रिहायशी इलाके में खड़ी एक कार कंक्रीट के फर्श में गड्ढा होने से पानी में डूब गई, जिसका वीडियो रविवार सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए बृह्नमुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने कहा कि जिस जगह यह कार डूबी वह कुआं हुआ करता था, लेकिन आवासीय सोसाइटी ने सीमेंट कंक्रीट से कहीं-कहीं उसे ढक दिया। पुलिस ने कहा कि घटना रविवार सुबह घाटकोपर पश्चिम की कामा लेन में एक राम निवास आवासीय सोसाइटी में हुई। इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। अधिकारी ने कहा, ''आवासीय सोसाइटी ने एक कुएं को कंक्रीट सीमेंट से बंद कर रखा था और स्थानीय निवासी अपनी कारें खड़ी करने के लिये इस इलाके का इस्तेमाल करते हैं। स्थानीय पुलिस की एक टीम और ट्रैफिक पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तथा कार को बाहर निकाला। निवासियों की सुरक्षा के लिये घटनास्थल की घेराबंदी की गई है।'' उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले आवासीय सोसाइटी ने आरसीसी का काम कर कुएं के आधे हिस्से को बंद कर दिया था और इसका इस्तेमाल वाहनों को खड़ा करने के लिये किया जाने लगा। बारिश के कारण एक हिस्सा गिर गया और वाहन डूब गया। बीएमसी ने शहर में भारी बारिश के बाद हुई घटना की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया। शिवसेना शासित नगर निगम ने एक बयान में कहा कि उसका इस घटना से कोई लेना-देना नहीं है। नगर निगम ने कहा, ''इस सोसायटी के परिसर में एक कुआं है। आधे हिस्से को आरसीसी द्वारा कवर किया गया था। सोसायटी के निवासी अपनी कारों को उस क्षेत्र में पार्क करते थे। प्रारंभिक जानकारी से पता चलता है कि एक कार पानी में डूब गई।
- भोपाल। कोविड-19 महामारी के कारण अनाथ हुए बच्चों के लिए गरिमापूर्ण जीवन निर्वाह करने के मद्देनजर ‘‘ मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना'' शुरू करने के 14 दिन बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को कहा कि प्रदेश सरकार समाज के साथ मिलकर राज्य में अन्य कारणों से भी अनाथ हुए बच्चों की शिक्षा, आश्रय, आहार एवं जीवनयापन की सम्पूर्ण व्यवस्था करेगी। चौहान ने ट्वीट किया, ‘‘कोविड-19 के अलावा अन्य कारणों से भी अनाथ हुए बच्चों को हम भटकने के लिए नहीं छोड़ सकते हैं। समाज के साथ मिलकर सरकार ऐसे बच्चों की शिक्षा, आश्रय, आहार और जीवनयापन की सम्पूर्ण व्यवस्था करेगी। इसके लिए हम एक योजना बना रहे हैं।'' उल्लेखनीय है कि कोरोना के कारण जिन बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया है, उन्हें तत्काल सहायता उपलब्ध कराने और उनके गरिमापूर्ण जीवन निर्वाह के लिए प्रदेश सरकार ने ‘मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना' 30 मई को शुरू की है। इस योजना में बच्चों को 5,000 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता, नि:शुल्क राशन और बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी।
- खंडवा। मध्यप्रदेश के खंडवा में 19 वर्षीय किशोर ने कथित रूप से मोबाइल फोन नहीं बदलने पर 52 वर्षीय एक दुकानदार की गले पर कटर से वार कर दिनदहाड़े हत्या कर दी। यह घटना शनिवार को मोबाइल दुकान पर हुई और इसका वीडियो सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया, जिसके बाद आरोपी को वारदात के करीब आठ घंटे के अंदर गिरफ्तार कर लिया गया। खंडवा के पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह ने रविवार को बताया कि मोबाइल दुकानदार गुलाब पंजाबी (52) की हत्या के मामले में आरोपी कौशल शाह को यहां शनिवार रात को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि आरोपी के खिलाफ यहां कोतवाली थाने में पहले से ही कई मामले दर्ज हैं।सिंह ने बताया कि आरोपी ने गुलाब पंजाबी की दुकान से 1,000 रूपये में मोबाइल फोन खरीदा था, जो खराब हो गया था। आरोपी बार-बार दुकानदार से मोबाइल फोन को बदलने का कह रहा था। दुकानदार ने बदलने से मना किया तो आरोपी ने दुकान में रखी कटर से गुलाब पंजाबी की हत्या कर दी और मौके से फरार हो गया। उन्होंने कहा कि इस अंधे कत्ल का पता लगाने के लिए पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे की फुटेज को देखा जिसमें आरोपी हत्या कर फरार होता नजर आया, जिसके बाद आरोपी को दबोचा गया।
- एटा। उत्तर प्रदेश में एटा जिले के नगला परम गांव में शनिवार रात हल्की बारिश में एक मकान की छत गिरने से मां-बेटी की मौत हो गयी तथा बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। जैथरा थाने के प्रभारी निरीक्षक सुधीर कुमार ने बताया कि शनिवार रात को नगला परम गांव में एक मकान की छत अचानक गिर जाने से घर के बरामदे में सो रही 45 वर्षीय श्यामा देवी और उसकी 14 वर्षीय बेटी खुशबू की मौत हो गई तथा उनका 18 वर्षीय बेटा मुलायम सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय, एटा में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने मृतकों का पोस्टमार्टम कराया है।
- नयी दिल्ली। उत्तर दिल्ली में बुराड़ी इलाके के एक घर में 65 वर्षीय एक महिला का शव मिला है, जिसके गले पर धारदार हथियार से हमला किए जाने और बायां पैर जलाए जाने के निशान हैं। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि महिला की पहचान बुराड़ी के कमलपुर की रहने वाली राजवारी के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि एक ढाबा चलाने वाले प्रमोद (38) के अनुसार, वह और उसकी पत्नी शनिवार को खजूरी गए थे, लेकिन जब वे रात करीब 10 बजे घर लौटे, तो उसे उसकी मां मृत मिली। उसकी मां का गला कटा हुआ था और उसके बाएं पैर पर जले होने के निशान थे। पुलिस ने बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी बुजुर्ग महिला को पहले से जानता था। उन्होंने बताया कि शव को सब्जी मंडी मुर्दाघर में रखा गया है और रविवार को उसका पोस्टमार्टम किया जाएगा। इस संबंध में हत्या का मामला दर्ज किया गया है और आरोपी को पकड़ने के लिए तीन टीम गठित की गई हैं। पुलिस ने बताया कि वह चोरी की आशंका समेत सभी पहलुओं की जांच कर रही है। आरोपी का पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज देखी जा रही हैं।-file photo
- नोएडा। नोएडा में यमुना एक्सप्रेस-वे पर रविवार तड़के एक सड़क हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गयी और दो अन्य घायल हो गए। घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है। मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस आयुक्त आलोक सिंह के मीडिया प्रभारी ने बताया कि रविवार सुबह पांच बजे के करीब सोनू, उसके पिता प्रताप सिंह, मां ऊषा देवी, उसके मामा संतोष कुमार और सतपाल सिंह एक कार में जनपद औरैया के बिधूना से यमुना एक्सप्रेस- वे के रास्ते दिल्ली जा रहे थे। उन्होंने बताया कि बीटा-2 थाना क्षेत्र के यमुना एक्सप्रेस-वे पर सड़क किनारे खराब खड़े एक ट्रक से उनकी कार जा टकराई। इस घटना में पांचों गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें उपचार के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पर डॉक्टरों ने संतोष, उषा देवी तथा सतपाल को मृत घोषित कर दिया। उन्होंने बताया कि पिता-पुत्र सोनू तथा प्रताप की हालत नाजुक बनी हुई है। मीडिया प्रभारी ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। उन्होंने बताया कि सभी लोग दिल्ली के मोहन गार्डन, उत्तम नगर के रहने वाले हैं।
- पटना। बिहार के सहरसा में बड़ा हादसा हो गया। बस्ती मोहल्ला में चिमनी के पास पानी भरे गड्ढ़े में नहाने के दौरान डूबने से पांच बच्चों की मौत हो गई।पुलिस के अनुसार घटना शनिवार दोपहर की है। मृतकों में गोलू(14), आरिफ(8 ), इशराफिल (10), गुलाब (8 ) और अबु बकर (8 ) शामिल हैं। शहर के वार्ड 31 में रहने वाले छह बच्चे शनिवार की दोपहर सहरसा बस्ती स्थित चिमनी समीप बने गड्ढे में नहाने गए थे। इसी दौरान कुछ बच्चे डूबने लगे। बच्चों को डूबता देख मृतक आरिफ के भाई तारिक ने इसकी सूचना परिजनों को दी। जब तक परिजन पहुंचे तब तक देर हो चुकी थी। सभी बच्चों को गड्ढे से निकाला गया। जिसमें तीन की मौत हो चुकी थी। दो बच्चों को अस्पताल भी ले जाया गया जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। दो बच्चे एक ही परिवार के भांजा और भतीजे थे। जबकि बाकी तीन बच्चे अलग-अलग परिवार के थे। घटना की जानकारी मिलने पर सदर एसडीओ शंभूनाथ झा, सदर एसडीपीओ संतोष कुमार सहित अन्य घटनास्थल पहुंचकर छानबीन किया। सदर एसडीओ ने कहा कि शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद सभी बच्चों के परिजनों को आपदा विभाग से राशि दी जाएगी।-file photo
- सिंगरौली, (मप्र) । मध्यप्रदेश में सिंगरौली जिला मुख्यालय बैढऩ से लगभग 90 किलोमीटर दूर कल्टीवेटर लगा ट्रैक्टर पलटने से चार लोगों की मौत हो गई और एक व्यक्ति गंभीर रुप से घायल हो गया। यह जानकारी पुलिस ने शनिवार को दी।चितरंगी पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक डी एन राज ने बताया कि यह दुर्घटना शनिवार सुबह हुई। उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान उजाकर सिंह गोंड (18), हीरालाल पनिका (32) संत कुमार पनिका (64) और महिला हिरमतिया (65) के तौर पर हुई है। उन्होंने बताया सुदा गांव में खेत की जुताई करके उजागर सिंह व अन्य लोग ट्रैक्टर पर सवार होकर जा रहे थे और ट्रैक्टर रामराज चला रहा था। उन्होंने बताया कि इसी दौरान अचानक ट्रैक्टर के सामने आयी महिला हिरमतिया को बचाने के प्रयास में ट्रैक्टर कल्टीवेटर सहित पलट कर पहाड़ी की सड़क से नीचे चला गया। राज ने बताया कि हादसे में उजागर सिंह और हीरालाल की घटनास्थल पर ही मौत हो गई जबकि गंभीर रूप से घायल संत कुमार और हिरमतिया की उपचार के दौरान अस्पताल में मौत हुई। उन्होंने बताया कि हादसे में गंभीर रुप से घायल सुरेश गोंड का उपचार बैढऩ के जिला अस्पताल में किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रत्यदर्शियों ने बताया कि ट्रैक्टर चालक रामराज के नशे में धुत होने व लापरवाही से तेज रफ्तार से ट्रैक्टर चलाने की वजह से यह हादसा हुआ। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद ट्रैक्टर चालक फरार हो गया और पुलिस मामला दर्ज करके जांच कर रही है।
- नयी दिल्ली। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के चिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ नवीन राम की शनिवार को कोविड के बाद की जटिलताओं के कारण मृत्यु हो गई। वह 63 वर्ष के थे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महानिरीक्षक रैंक के अधिकारी कोविड के बाद स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के चलते एक महीने से अधिक समय तक मध्य दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। उन्होंने बताया कि राम ने कोविड टीके की दोनों खुराक ली हुई थी। राम सीमा सुरक्षा बल के निदेशक (चिकित्सा) थे। बीएसएफ के पास लगभग 2.65 लाख कर्मी हैं और इसे मुख्य रूप से पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ भारत की सीमाओं की रक्षा करने का काम सौंपा गया है। बीएसएफ ने एक संदेश में राम के निधन पर शोक व्यक्त किया। इसमें कहा गया है, ‘‘डीजी (महानिदेशक) और सभी रैंक के अधिकारियों ने 12 जून, 2021 को बीएसएफ के आईजी / निदेशक डॉ नवीन राम के असामयिक और दुखद निधन पर शोक व्यक्त किया।'' बीएसएफ ने ट्वीट किया, ‘‘प्रहरी परिवार (बीएसएफ परिवार) इस मुश्किल घड़ी में उनके परिवार के साथ खड़ा है।
- तिनसुकिया, (असम)। असम के तिनसुकिया जिले के एक गांव में शनिवार को उग्र भीड़ ने 28 साल के एक व्यक्ति की गाय चोर होने के संदेह में कथित रूप से पीट- पीट कर हत्या कर दी । हालांकि, पीडि़त का साथी मौके से भाग निकला ।तिनसुकिया के पुलिस अधीक्षक देबोजीत देउरी ने बताया कि जिले के बागजान पुलिस थाने के अंतर्गत कोरजोंगा बोरपाथर गांव में शनिवार को यह घटना उस वक्त हुई, जब दोनों को एक घर में गाय को रखने के लिये बनाए गए शेड के पास पाया गया । अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल का गठन किया है, जो मामले की जांच करेगा। विशेष जांच दल ने इस मामले में गांव के 12 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। देउरी ने बताया कि पीडि़त की पहचान सरत मोरान(28) के रूप में की गयी है, जो नंबर 1 कोरदोईगुड़ी गांव का रहने वाला था । घटनास्थल से फरार व्यक्ति की अब तक पहचान नहीं हो सकी है ।ग्रामीणों के अनुसार घर के मालिक ने दो लोगों को उसके गाय को रखने के लिये बनाए गए शेड के निकट तड़के करीब डेढ़ बजे देखा और शोर मचाया । उन्होंने बताया कि इसके बाद लोग मौके पर जमा हो गये और उन्हें पीटना शुरू कर दिया । पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पुलिस को इस घटना की सूचना सुबह करीब साढ़े चार बजे मिली । पुलिस इसके बाद उस व्यक्ति को डूमडूमा सरकारी अस्पताल ले गई, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया । उन्होंने बताया, ''जब हमने पोस्टमॉर्टम के बाद शव उसके परिजनों को सौंपा तो उसके गांव के कुछ लोगों ने कानून व्यवस्था की समस्या उत्पन्न करने की कोशिश की। हालांकि, जब उन्हें पता चला कि हमने कार्रवाई की है और 12 लोगों को हिरासत में लिया है तो शांतिपूर्वक शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।'' देउरी ने बताया कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है, चाहे कोई चोर ही क्यों न हो, और पुलिस इस भीड़ हत्या में शामिल किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शेगी ।
- प्रयागराज। गंगापार सरायइनायत थाना क्षेत्र के अमरसापुर गांव में शुक्रवार को एक बारात में आतिशबाजी और रोशनी की चकाचौंध से बारात में आया हाथी भड़क गया और उसने भारी उत्पात मचाते हुए दो कारों को क्षतिग्रस्त कर दिया। सरायइनायत थाना के एसएचओ राकेश चौरसिया ने बताया कि अमरसापुर गांव में शुक्रवार को बारात की शोभा बढ़ाने एक हाथी को भी लाया गया था। बारात के शादी समारोह स्थल के निकट पहुंचते ही हाथी पटाखे की आवाज से भड़क गया और उसने उत्पात मचाना शुरू कर दिया। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें हाथी उत्पात मचाता दिख रहा है और हाथी के उत्पात को देखकर दूल्हा बग्घी से उतरकर वहां से भागता दिख रहा है। चौरसिया ने बताया कि महावत ने काफी प्रयास के बाद हाथी को काबू में कर लिया और इसके बाद वह घटनास्थल से चला गया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कार्रवाई के लिए फारेस्ट रेंजर अशोक कुमार को शुक्रवार की रात ही सूचना दे दी गई थी। उन्होंने बताया कि हाथी ने सिर्फ कार को नुकसान पहुंचाया और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। इस घटना के संबंध में महावत और बारात के लिए हाथी की बुकिंग कराने वाले व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
- आइजोल। मिजोरम के आइजोल में भूस्खलन से एक इमारत के गिरने से चार बच्चों की मौत हो गयी और दो अन्य घायल हो गए हैं। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि यह घटना शहर के उत्तर-पूर्व हिस्सू में बॉन्गकॉन पुलिस थाने के तहत आने वाले थुआम्पुई इलाके में शुक्रवार रात करीब साढ़े नौ बजे घटी। पुलिस ने बताया कि बारिश के कारण हुए भूस्खलन में असम-शैली की वास्तुकला वाली एक इमारत गिर गयी जिसमें एक परिवार के सात सदस्य रहते थे। घटना के वक्त परिवार के सात में से छह सदस्य घर में ही मौजूद थे। उन्होंने बताया कि तीन से 16 साल की बीच की उम्र के चार बच्चों की मौके पर ही मौत हो गयी। परिवार के मुखिया लालबियाकजुआला (75) को मलबे में से सुरक्षित निकाला गया और एक अन्य सदस्य को भी बचा लिया गया। घटना के तुरंत बाद पुलिस और स्थानीय स्वयंसेवकों ने बचाव अभियान चलाया और मलबे में से शवों को निकाला। भूस्खलन की तेज आवाज सुनने के बाद एक अन्य इमारत में रह रहे तीन लोग किसी तरह बचकर भागे।
- हैदराबाद। यहां तीन साल के एक बच्चे को ‘जीन' से संबंधित एक दुर्लभ और जानलेवा बीमारी होने पर लगभग 65,000 लोगों ने जीन उपचार मुहैया कराने के लिए उसकी सहायता की। शहर के एक निजी अस्पताल में अयांश गुप्ता को बुधवार को दुनिया की सबसे महंगी दवा ‘जोलगेंसमा' दी गई जिसे दान के पैसों से अमेरिका से मंगवाया गया था। बच्चा जब एक साल का था तब उसे ‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी' नामक बीमारी होने का पता चला। अयांश के पिता योगेश गुप्ता यहां एक निजी कंपनी में काम करते हैं। उन्होंने कहा, “यह एक अत्यंत दुर्लभ बीमारी है जिससे मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है। इससे बच्चा अपने हाथ पैर नहीं हिला सकता, बैठ नहीं सकता, खड़ा नहीं हो सकता और चल भी नहीं सकता। खाना खाने में भी दिक्कत होती है।” गुप्ता ने कहा कि यह बीमारी जानलेवा भी है और डॉक्टरों ने कहा था कि उनका बच्चा तीन से चार साल से अधिक समय तक जीवित नहीं रहेगा इसलिए उसे समय पर इलाज की जरूरत है। दवा की एक खुराक के लिए 16 करोड़ रुपये एकत्र करना पहले तो असंभव प्रतीत हुआ लेकिन बाद में बच्चे के माता पिता ने सोशल मीडिया पर अपील करने का निर्णय लिया। इस साल फरवरी में उन्होंने अपने बच्चे का जीवन बचाने के लिए चंदा एकत्र करने का अभियान चलाया जिसमें उनके दोस्तों और परिवार वालों ने भी सहायता की। उपचार के लिए उन्होंने तीन महीने में पर्याप्त धन जुटा लिया। विराट कोहली, अनुष्का शर्मा, अनिल कपूर, अजय देवगन और टीवी उद्योग की कई हस्तियों ने आगे आकर दान दिया। गुप्ता ने कहा, “लगभग 65,000 लोगों ने दान दिया। यह 22 मई को संभव हुआ।” परिवार के एक दोस्त ने एक सांसद से संपर्क किया जिन्होंने संसद में उक्त दवा की कीमत के मुद्दे को उठाया जिसके बाद केंद्र सरकार ने छह करोड़ रुपये का कर माफ किया। बच्चे को दवा दिए जाने के बाद गुप्ता ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में उसकी हालत में और सुधार होगा। उन्होंने बताया कि अयांश को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और आगे उपचार चलता रहेगा। बच्चे के पता ने सभी 65,000 दानकर्ताओं को धन्यवाद दिया।
- शिमला। हिमाचल प्रदेश के बद्दी स्थित इंडिया एजुकेशन सेंटर (आईईसी) विश्वविद्यालय ने कोविड-19 महामारी में कमाउ माता-पिता खोने वाले छात्रों को नि:शुल्क शिक्षा देने और उन्हें रोजगार के अवसर तलाश करने में मदद करने की घोषणा शनिवार की है। विश्वविद्यालय ने एक बयान जारी करके कहा है कि वह मौजूदा पारिवारिक स्थिति, वित्तीय स्थिति और शैक्षिक योग्यता के आधार पर छात्रों के एक समूह को नि:शुल्क अपने कैम्पस में पढ़ने की अनुमति देगा। बयान के अनुसार, छात्र के पात्र और योग्य होने पर विश्वविद्यालय शिक्षा पूरी करने और अपना जीवन संवारने के लिए 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता देगा। उसमें कहा गया है कि विश्वविद्यालय ऐसे छात्रों को पढ़ाई पूरी होने पर करियर चुनने में भी मदद करेगा।
- नयी दिल्ली। चिकित्सा विज्ञान क्षेत्र की प्रतिष्ठित पत्रिका लैनसेट की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस बात के अब तक कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं, जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि कोविड-19 महामारी की तीसरी संभावित लहर में बच्चों के गंभीर रूप से संक्रमित होने की आशंका है। ‘लैंसेट कोविड-19 कमीशन इंडिया टास्क फोर्स' ने भारत में 'बाल रोग कोविड-19' के विषय के अध्ययन के लिए देश के प्रमुख बाल रोग विशेषज्ञों के एक विशेषज्ञ समूह के साथ चर्चा करने के बाद यह रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित बच्चों में उसी प्रकार के लक्षण पाए गए हैं, जैसा कि दुनिया के अन्य देशों में देखने को मिले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कोविड-19 से संक्रमित होने वाले अधिकतर बच्चों में इस बीमारी के कोई लक्षण नहीं होते। कई बच्चों में संक्रमण के हल्के लक्षण देखने को भी मिले हैं। वायरस से संक्रमित होने के बाद अधिकतर बच्चों में बुखार और श्वास संबंधी परेशानियां जैसे लक्षण भी देखने को मिले हैं। वयस्कों की तुलना में बच्चों में हैजा, उल्टी और पेट में दर्द संबंधी अन्य जठरांत्र संबंधी लक्षण देखने को मिले हैं। किशोरावस्था की उम्र के आस-पास के बच्चों में बीमारी के लक्षण आने की आशंका भी प्रबल हो जाती है। देश में कोविड-19 की पहली और दूसरी लहर के दौरान कितनी संख्या में बच्चे संक्रमित हुए और अस्पताल में भर्ती हुए, इस संबंध में राष्ट्रीय स्तर पर आंकड़े तैयार नहीं किए गए हैं। इसलिए तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के 10 अस्पतालों में इस दौरान भर्ती हुए 10 साल से कम उम्र के करीब 2600 बच्चों के क्लीनिकल आंकड़ों को एकत्र कर उसका विश्लेषण करने के बाद ही यह रिपोर्ट तैयार की गयी है। आंकड़ों के मुताबिक 10 साल से कम उम्र के बच्चों में कोविड-19 के कारण मृत्यु दर 2.4 प्रतिशत दर्ज की गयी। संक्रमण के कारण जान गंवाने वाले करीब 40 प्रतिशत बच्चे किसी न किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित भी थे।लैनसेट की रिपोर्ट के अनुसार कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए 10 साल से कम उम्र के नौ प्रतिशत बच्चों में बीमारी के गंभीर लक्षण देखे गए। महामारी की दोनों लहरों के दौरान ऐसा देखा गया। देश के शीर्ष अस्पताल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में बाल रोग विशेषज्ञ शेफाली गुलाटी, सुशील के काबरा और राकेश लोढ़ा जैसे चिकित्सकों ने लैनसेट की ओर से किए गए इस अध्ययन में हिस्सा लिया।काबरा ने महामारी की तीसरी संभावित लहर को लेकर कहा कि कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले पांच प्रतिशत से भी कम बच्चों को अस्पताल में भर्ती होने की जरुरत पड़ेगी, जिनमें मृत्यु दर दो प्रतिशत तक हो सकती है। काबरा ने कहा, हम कह सकते हैं कि एक लाख संक्रमित बच्चों में से केवल 500 बच्चों को अस्पताल में भर्ती होने की जरुरत पड़ी और उसमें से दो प्रतिशत बच्चों की मृत्यु हुई है। बच्चों में बीमारी के गंभीर लक्षण होने की आशंका बेहद कम है। संक्रमित होने वाले कुछ बच्चों को ही अस्पताल में भर्ती होने की जरुरत पड़ती है। संक्रमित होने वाले केवल उन्ही बच्चों की मृत्यु हुई जो पहले से ही मधुमेह, कैंसर और कुपोषण जैसी अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। सामान्य बच्चों में इसके कारण मृत्यु होने की आशंका बहुत ही कम है।' लैनसेट की यह रिपोर्ट मार्च 2020 से दिसंबर 2020 के बीच तथा जनवरी 2021 से अप्रैल 2021 के बीच दोनों लहरों के आंकड़ों के आधार पर तैयार की गयी है।
- नयी दिल्ली । केंद्र ने ग्रामीण भारत में कोविड-19 के प्रभावी प्रबंधन को लेकर कार्य जारी रखने का उल्लेख करते हुए शनिवार को कहा कि कुल 1,50,000 उप स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दिसंबर 2022 तक आयुष्मान भारत-स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (एबी-एचडब्ल्यूसी) में बदले जाएंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों का व्यापक नेटवर्क है। देश में 31 मार्च 2020 तक 155,404 उप स्वास्थ्य केंद्र (एसएचसी) और 24,918 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और 5895 शहरी पीएचसी हैं। बयान में कहा गया, ‘‘ग्रामीण और शहरी इलाकों में कुल 1,50,000 उप स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दिसंबर 2022 तक आयुष्मान भारत-स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र में बदले जाएंगे। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समुदायों को पास में और निशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।'' मंत्रालय ने कहा कि जरूरी जांच की सुविधाएं निशुल्क मुहैया करायी जाती है। उप स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर 14 जांच और प्राथमिकी स्वास्थ्य केंद्र पर 63 जांच की सुविधा दी जा रही है। एसएचसी स्तर पर 105 दवाएं और पीएचसी स्तर पर 172 दवाएं निशुल्क मुहैया करायी जाती है। मंत्रालय ने कहा कि अब तक आयुष्मान भारत-स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र से करीब 50.29 करोड़ लोगों ने स्वास्थ्य सुविधाएं ली हैं और इनमें से करीब 54 प्रतिशत महिलाएं थीं। मंत्रालय ने रेखांकित किया कि ई-संजीवनी प्लेटफॉर्म के जरिए टेलीमेडिसिन सेवा से साठ लाख से अधिक परामर्श दिए गए हैं और इनमें से 26.42 लाख परामर्श स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र पर दिए गए।
- कोरापुट ।ओडिशा के कोरापुट जिले में ऑक्सीजन सिलेंडर ले जा रहे एक ट्रक से कम से कम 1,277 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया। पुलिस ने बताया कि ट्रक ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर दिल्ली जा रहा था। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि पंजाब के लुधियाना के निवासी दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया और वाहन से 1.1 करोड़ रुपये मूल्य का गांजा बरामद किया गया। जेपुर सदर पुलिस थाना प्रभारी आदित्य महाकुर ने कहा, “आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम बंदरगाह पर ऑक्सीजन सिलेंडर लादे गए। कोरापुट जिले में वाहन में गांजा लादा गया जिसे लखनऊ में डिलीवरी देना था। ट्रक दिल्ली जा रहा था।” उन्होंने बताया कि ट्रक जेपुर घाट रोड पर रोका गया और प्रतिबंधित पदार्थ जब्त किया गया। महाकुर ने कहा कि स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं और गिरोह में शामिल अन्य का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।
- गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि चार लड़कियों को शनिवार को कामरूप जिले से छुड़ाया गया जिनके संदिग्ध मानव तस्करी की पीड़ित होने का संदेह है और इस सिलसिले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। सरमा ने कहा कि उदलगुरी जिले के पनेरी की चार लड़कियों को बैहाटा चरियालिन इलाके से छुड़ाया गया।सरमा ने ट्विटर पर कहा कि इस सिलसिले में 32 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।उन्होंने कहा कि असम पुलिस ने मामले में शामिल अन्य लोगों के लिए तलाशी अभियान शुरू किया है।पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) भास्कर ज्योति महंत ने बताया कि एक अन्य मामले में शुक्रवार को मोरीगांव जिले के मयोंन्ग इलाके से लापता हुए तीन बच्चों को कामरूप मेट्रोपॉलिटन से बचाया गया। उन्होंने माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर लिखा, ‘‘कल मयोन्ग से लापता हुए तीन बच्चों को पानीखैती के पास से छुड़ाया गया। इस अभियान पर माननीय मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा नजर रखे हुए थे और मैं भी लापता बच्चों की तलाश की निगरानी के लिए मायोन्ग में था।
- भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पुराने शहर में तेज हवा से एक पुराना पेड़ गिर जाने से दो लोगों की दबकर मौत हो गई जबकि दो अन्य लोग घायल हो गये। शाहजहांनाबाद पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक जहीर खान ने बताया कि शाम को लगभग छह बजे तेज हवा और आंधी चलने से पुराने भोपाल शहर के भोपाल टॉकीज चौराहे के पास एक पुराना इमली का पेड़ कब्रिस्तान दीवार से लगी छह कच्ची दुकानों पर गिर गया। उन्होंने बताया कि पेड़ के कच्ची दुकानों पर गिरने से इसके मलबे में चार लोग दब गए। घटना के बाद राहत अभियान चला कर मलबे में दबे चार लोगों को निकाला गया। इनमें से दो युवकों अस्सू (21) और वाहिद (22) की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई जबकि दो गंभीर घायलों का उपचार अस्पताल में किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राहत दल द्वारा पेड़ को काट कर और मलबे को सड़क से हटाया जा रहा है हालांकि अब मलबे में कोई व्यक्ति दबा नहीं है। खान ने बताया कि पेड़ गिरने से हताहत होने वाले चारों लोग दुकानों पर आए ग्राहक थे।
- रांची। कोविड-19 के टीकाकरण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है और शुरू में टीकाकरण का विरोध करने वाले दूरवर्ती नक्सल प्रभावित गांवों में भी 85 प्रतिशत तक लोगों ने टीकाकरण करवा लिया है जबकि कुछ अन्य दूरदराज के गांवों में सौ प्रतिशत तक टीकाकरण कराये जाने की पुष्टि हुई है। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि झारखंड के पिछड़े और नक्सलवाद प्रभावित इलाके में भी सरकार के जागरूकता अभियान का असर नजर आने लगा है, उदाहरण के तौर पर दुमका के मसलिया प्रखंड स्थित रांगा पंचायत के गांवों में 85 प्रतिशत से अधिक टीकाकरण हो चुका है। वहीं शिकारीपाड़ा, दुमका और काठीकुंड प्रखंड के कई गांवों में 70 प्रतिशत से अधिक टीकाकरण हो चुका है। लातेहार जिले के उग्रवाद प्रभावित प्रखंड गारू में भी तेजी से टीकाकरण कार्य जारी है। लगभग 36 हजार आबादी वाले इस प्रखंड में निवास करने वाले ग्रामीण भी टीकाकरण के प्रति गंभीर हो रहे हैं और यहां 18 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 40 प्रतिशत लोगों का टीकाकरण कार्य हो चुका है। प्रवक्ता ने बताया कि गांव में जाकर उनकी ही भाषा, बोली में टीकाकरण के महत्व को समझाने से भ्रम और अफवाहों का असर खत्म होने लगा है। उन्होंने बताया कि लोग खुद टीकाकरण अभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाने लगे हैं, यही कारण है कि कुछ गांवों को शत-प्रतिशत टीकाकरण का तमगा मिल चुका है। ऐसा ही एक गांव है, बनमारा। यह झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित सिमडेगा जिले के कुल्लू केरा पंचायत में है। यहां निवास करने वाले शत-प्रतिशत लोगों ने आगे आकर कोरोना से बचाव हेतु टीका ले लिया है। उन्होंने बताया कि यही जागरूकता सिमडेगा के ओडिशा बॉर्डर से सटे कुरडेग प्रखंड के चडरी मुंडा पंचायत स्थित जींस जरा कानी गांव के लोगों ने भी दिखाई है । सुदूरवर्ती गांव होने के बावजूद यहां के ग्रामीणों ने खुद के और अपने परिवार के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए शत-प्रतिशत टीकाकरण करा लिया है। यहां के ग्रामीण इतने जागरूक हैं कि वे अपने गांवों में दूसरे राज्यों और जिला से गांव वापस आ रहे लोगों एवं उनके परिजनों को सामुदायिक भवन में 14 दिनों तक का पृथकवास भी कराते हैं।-FILE PHOTO
- मुंबई। मुंबई और आसपास के इलाकों में गत कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश की वजह से पूर्वी उपनगर स्थित पवई झील शनिवार दोपहर को भर गई और पानी बाहर बहने लगा। बृह्नमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अधिकारी ने यह जानकारी दी। पवई झील की क्षमता 545 करोड़ लीटर है और इसका पानी औद्योगिक इकाइयों में इस्तेमाल होता है और इसका पानी मीठी नदी में बहता है।बीएमसी के मुताबिक पिछले साल पांच जुलाई को पवई झील पूरी तरह से मानसूनी बारिश के भरी थी। नगर निकाय ने बताया कि जब झील भरती है तो पानी करीब 2.23 वर्ग किलोमीटर इलाके में होता है लेकिन इसका जलग्रहण क्षेत्र 6.61 वर्ग किलोमीटर है।मुंबई में पिछले कई दिनों से भारी बारिश हो रही है और भारत के मौसम विभाग (आईएमडी) ने रविवार तक के लिए मुंबई में 'रेड अलर्टÓ और सोमवार (14 जून) के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। आईएमडी के पूर्वानुमान के बाद बीएमसी ने भी अगले दो दिनों तक भारी बारिश की संभावना के चलते सभी एजेंसियों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है।गौरतलब है कि मुंबई को सात जलाशयों भात्सा, ऊपरी वैतरणा, मध्य वैतरणा, तन्सा, मोदक सागर, विहार और तुलसी से 385 करोड़ लीटर पानी की आपूर्ति होती है।
- नयी दिल्ली। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि केन्द्र एवं राज्य सीधी खरीद श्रेणी के तहत अब तक राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए टीके की 25.87 करोड़ से अधिक खुराकें दी गईं। मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार (सुबह आठ बजे तक के आंकड़े के मुताबिक) कुल 25,87,41,810 खुराकों में से 24,76,58,855 खुराकें इस्तेमाल में आईं ,जिनमें बर्बाद हुई खुराकें शामिल हैं। इसमें कहा गया,‘‘ कोविड टीके की 1.12 करोड़ से अधिक खुराकें (1,12,41,187) अब भी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के पास हैं।'' मंत्रालय ने कहा कि टीके की 10,81,300 से अधिक खुराकें आनी बाकी हैं और अगले तीन दिन में ये राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को मिल जाएंगी।
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एक ही परिवार के चार लोग बह गए
एक लापता, झाडिय़ों में फंसने से 6 साल की बच्ची बची
सिंगरौली। मध्यप्रदेश के सिंगरौली में 11 जून की देर शाम नाले में बाढ़ का पानी आने से एक ही परिवार के चार लोग बह गए। इनमें से दो की मौत हो गई जबकि एक लापता है। उसकी तलाश की जा रही है। इनके अलावा चौथी एक बच्ची झाडिय़ों में फंसने से बच गई। 11 जून की रात में ही रेस्क्यू शुरू हो गया। 12 जून दोपहर तक दो सगी बहनों के शव बरामद हो गए जबकि लापता नौ साल की बच्ची का पता नहीं चल सका।
सिंगरौली एएसपी अनिल सोनकर ने बताया कि कोनी गांव के 7 ग्रामीण शुक्रवार की दोपहर जंगल लकड़ी लेने गए थे। जो शाम करीब 7 बजे के आसपास पहाड़ उतर कर गांव की ओर मुड़े। जहां 3 ग्रामीण पहले नाला क्रास कर आगे निकल गए। वहीं जायसवाल परिवार के एक ही घर के 4 सदस्य चोनाईया नदी के बरसाती नाले को क्रॉस करते समय हादसे का शिकार हो गए।
पुलिस ने बताया कि कोनी निवासी 6 साल की सुप्रिया जायसवाल पिता- श्रीकृष्ण जायसवाल बच गई, जबकि 31 साल की अन्नू जायसवाल पति- बाबूराम जायसवाल और 30 साल की उर्मिला जायसवाल पति- श्रीकृष्ण जायसवाल का शव शनिवार को रेस्क्यू ऑपरेशन कर एसडीआरएफ ने एक साथ बरामद कर लिया। ग्रामीणों का दावा है कि दोनों बहनों की एक ही गांव में एक साथ शादी हुई थी। जबकि एक ही दिन एक समय में दोनों की मौत हुई और एक ही जगह पर डेड बॉडी बरामद की गई। वहीं, 9 साल की प्रियंका जायसवाल पिता- रमेश जायसवाल का पता नहीं चला है। मृतक उर्मिला जायसवाल की बेटी सुप्रिया जायसवाल बच गई।
- -भोपाल के होम्योपैथी कॉलेज के प्रोफेसर ने विकसित की तकनीकनई दिल्ली। भोपाल के होम्योपैथी कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. निशांत नाम्बीसन ने सिकल सेल एनीमिया के रक्त परीक्षण के लिए एक ऐसा उपकरण विकसित किया है, जो वर्तमान में उपयोग किए जा रहे परीक्षण तकनीक की लागत से दस गुणा सस्ता और दस गुणा कम समय लेता है।इस पद्धति के प्रमुख शोधकर्ता और आविष्कारक डॉ. निशांत नाम्बीसन शासकीय होम्योपैथी कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। उनका कहना है कि यह उपकरण पांच मिनट से भी कम समय में परीक्षण के परिणाम बता देता है। इस उपकरण को बनाने में डॉ. निशांत नाम्बीसन एवं उनके साथियों, इंस्टीट्यूट ऑफ इंस्ट्रूमेंटेशन एंड एप्लाइड फिजिक्स और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बैंगलोर के शोधकर्ताओं का हाथ है।क्या है सिकल सेल एनीमियासिकल सेल एनीमिया लाल रक्त कोशिकाओं का जन्मतजात रक्त विकार है इसमें रोगी को विभिन्न अंगों में असहनीय दर्द की शिकायत रहती है। रोगी बार-बार बीमार होता है और अस्पताल में भर्ती होता रहता है। इस बीमारी में असामान्य हीमोग्लोबिन के वजह से लाल रक्त कोशिकाएं सिकल यानि हंसुए के आकार की हो जाती हैं। यह उनकी ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता को कम और रक्त प्रवाह को धीमा करता है। इससे खून की कमी हो जाती है, जिससे एनीमिया हो जाता है।डॉ. निशांत नाम्बीसन के अनुसार वर्तमान में भारत में दस लाख से अधिक लोगों को सिकल सेल की बीमारी है। हर साल लगभग दो लाख बच्चे इस बीमारी के साथ पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि सिकल सेल एनीमिया के एक जन्मजात और पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाली आनुवंशिक बीमारी होने के कारण, भारत में इसके मरीजों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। भारत में पूरी दुनिया के 50 प्रतिशत से अधिक सिकल सेल एनीमिया के रोगी मौजूद हैं। दक्षिण-पूर्वी गुजरात से दक्षिण-पश्चिमी ओडिशा तक फैली सिकल सेल बेल्ट के कारण यह बीमारी मध्य भारत में सबसे अधिक है। भारत में मध्य प्रदेश में इसके सबसे ज्यादा मरीज हैं।यह एक नई जैव-रासायनिक परीक्षण तकनीक है, जो स्वदेशी रूप से विकसित पोर्टेबल पामटॉप रिचार्जेबल डिवाइस के साथ काम करती है। इसमें रक्त की एक बूंद (पांच माइक्रोलिटर) का उपयोग होता है और इसे परीक्षण के लिए दूर-दराज के गांवों में भी आसानी से ले जाया जा सकता है। इससे जांच की प्रक्रिया और निदान तक पहुंचने में कम समय तो लगता ही है साथ ही, परिवहन में होने वाले खर्च में भी कमी आती है। अब तक अमेरिका से आयात किए गए भारी भरकम एचपीएलसी मशीनों के कारण इस बीमारी की जांच प्रक्रिया बहुत जटिल थी लेकिन मेक-इन-इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के तहत बनाए गए इस उपकरण से भारत ही नहीं पूरी दुनिया के मरीजों के लिए सिकल सेल एनीमिया की जांच प्रक्रिया आसान हो जाएगी। सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी सहायता से रोगी के घर पर ही परीक्षण किया जा सकता है और इसका संचालन बहुत ही आसान है।---
- नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, जो प्रतिष्ठित आरएसएसडीआई (रिसर्च सोसायटी फॉर स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया) के जीवन संरक्षक होने के साथ-साथ डायबिटीज और चिकित्सा के पूर्व प्रोफेसर भी रहे हैं, ने कहा है कि मधुमेह और कोविड के बीच परस्पर-संबंध के बारे में ज्यादा जन जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है, क्योंकि दोनों के कारण और प्रभावी संबंधों के बारे में कुछ आशंकाएं व्याप्त हैं।शुक्रवार को 'डायबिटीज इंडिया' वल्र्ड कांग्रेस- 2021 के मुख्य अतिथि के रूप में अपना उद्घाटन भाषण देते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कई अन्य क्षेत्रों की तरह, यहां तक कि अकादमी में भी, कोविड ने हमें विपरीत परिस्थितियों में नए मानदंडों की खोज करने के लिए प्रेरित किया है, जिसे इतने बड़े पैमाने पर इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की सफलता में स्पष्ट से देखा जा सकता है।डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले दो दशकों में भारत में टाइप 2 डायबिटीज मेलिटस में वृद्धि देखने को मिल रही है, जिसने अब अखिल भारतीय स्तर पर एक अनुपात को प्राप्त कर लिया है। टाइप 2 डायबिटीज, जो कि दो दशक पहले तक मुख्य रूप से दक्षिण भारत में ही प्रचलित हुआ करता था, आज उत्तर भारत में भी समान रूप से फैला हुआ है और साथ ही, यह महानगरों, शहरों और शहरी इलाकों से ग्रामीण इलाकों में भी स्थानांतरित हो चुका है। उन्होंने जागरूकता फैलाने के लिए कोविड - मधुमेह अकादमिक बैठकों की एक श्रृंखला की आवश्यकता पर भी बल दिया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा की कोरोना ने हमें नए मानदंडों के साथ जीना सिखाया है साथ ही उन्होंने चिकित्सकों को औषधीय और गैर-औषधीय प्रबंधन के विभिन्न तरीकों पर जोर देने को कहा जो बीते कुछ वर्षों के दौरान महत्व खो चुके थे। उन्होंने यहां तक कहा कि कोविड महामारी खत्म होने के बाद भी सोशल डिस्टेंसिंग का अनुशासन और ड्रॉपलेट इनफेक्शन से बचाव कई अन्य प्रकार के संक्रमणों के खिलाफ सुरक्षात्मक उपाय के रूप में कार्य करेगा, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो डायबिटीज के शिकार हैं।डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात को जोर देकर कहा कि यहां पर यह समझना महत्वपूर्ण है कि यह आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक डायबिटीज के रोगी को कोविड से संक्रमण हो और यह भी कि प्रत्येक कोविड संक्रमण से पीडि़त डायबिटीज के रोगी में जटिलताएं उत्पन्न हो।डॉ. जितेंद्र सिंह ने डायबिटीज के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए देश के सभी हिस्सों के कई डॉक्टरों को पुरस्कृत किया। उन्होंने मुंबई के प्रसिद्ध एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, डॉ. शशांक जोशी, अहमदाबाद के डॉ. बंशी साबू, डायबिटीज इंडिया के ट्रस्टी, डॉ. अनूप मिश्रा, डायबिटीज इंडिया के अध्यक्ष, डॉ. एसआर अरविंद और आयोजकों की पूरी टीम की सराहना करते हुए कहा कि वे दुनिया के चार महाद्वीपों से सर्वश्रेष्ठ संकाय को एक साथ लेकर आए हैं।






















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