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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर द्वारा आयोजित रात्रिभोज के दौरान अयोध्या के राम मंदिर की प्रतिकृति, सरयू और प्रयागराज के महाकुंभ का पवित्र जल भेंट किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत और कैरिबियाई राष्ट्र के बीच गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रिश्तों को उजागर किया।
इस संबंध में पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर द्वारा आयोजित रात्रिभोज में मैंने राम मंदिर की प्रतिकृति, सरयू नदी का पवित्र जल और महाकुंभ का जल भेंट किया। ये भारत और त्रिनिदाद एंड टोबैगो के बीच गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक हैं।”उन्होंने एक अन्य पोस्ट में बताया, “रात्रिभोज में भोजन सोहारी के पत्ते पर परोसा गया, जो त्रिनिदाद और टोबैगो, खासकर भारतीय मूल के लोगों के लिए बहुत सांस्कृतिक महत्व रखता है। यहां त्योहारों और विशेष अवसरों पर इस पत्ते पर भोजन परोसने की परंपरा है।”पोर्ट ऑफ स्पेन में रात्रिभोज के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राणा मोहिप से मुलाकात की, जिन्होंने कुछ साल पहले महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर भारत में ‘वैष्णव जन तो’ गाया था। उन्होंने भारतीय संगीत और संस्कृति के प्रति उनके जुनून की सराहना की।इससे पहले, गुरुवार को अपनी दो दिवसीय ऐतिहासिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिनिदाद एंड टोबैगो तथा भारत के बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को साझा किया।उन्होंने एक्स पर एक अन्य पोस्ट में लिखा, “पोर्ट ऑफ स्पेन में भोजपुरी चौताल प्रदर्शन देखकर बहुत खुशी हुई। त्रिनिदाद एंड टोबैगो और भारत, खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों के बीच का संबंध अद्भुत है। प्रधानमंत्री मोदी के आगमन पर लोगों में उत्साह दिखाई दिया और वे ढोल की थाप पर थिरकते नजर आए। इस दौरान पारंपरिक संगीत व प्रदर्शन के साथ स्थानीय और भारतीय संस्कृति का मिश्रण देखने को मिला।यह प्रधानमंत्री मोदी की 8 महीनों में कैरिबियाई क्षेत्र की दूसरी यात्रा है। इससे पहले नवंबर 2024 में उन्होंने गुयाना का दौरा किया था। यह दर्शाता है कि भारत कैरिबियाई देशों को कितना महत्व देता है और कैरिबियाई समुदाय के साथ भारत की बढ़ती साझेदारी को दर्शाता है। -
नई दिल्ली। स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें नमन किया है। पीएम मोदी ने उनके विचारों को मार्गदर्शन करने वाला बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स हैंडल पर स्वामी विवेकानंद की 123वीं पुण्यतिथि पर भावनाएं व्यक्त कीं। लिखा, “मैं स्वामी विवेकानंद जी को उनकी पुण्यतिथि पर नमन करता हूं। उनके विचार और समाज के लिए उनकी दृष्टि हमारे लिए मार्गदर्शक प्रकाश बनी हुई है। उन्होंने हमारे इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर में गर्व और आत्मविश्वास की भावना जगाई। उन्होंने सेवा और करुणा के मार्ग पर चलने पर भी जोर दिया।”
बता दें, पीएम मोदी ने यह पोस्ट शुक्रवार सुबह किया। स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में नरेंद्र नाथ दत्त के रूप में हुआ था। श्री रामकृष्ण परमहंस के शिष्य बनने के बाद, उन्होंने आध्यात्मिकता और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया।स्वामी विवेकानंद ने हमें सिखाया कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर हमारी ताकत है, और इसे गर्व के साथ अपनाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने मानवता की सेवा को जीवन का परम लक्ष्य बताया। उनकी शिक्षाएं आज भी हमें एकजुटता, करुणा और आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाती हैं।स्वामी जी ने 1893 में शिकागो के विश्व धर्म संसद में उनके ऐतिहासिक भाषण ने विश्व मंच पर भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म की गौरवगाथा को प्रस्तुत किया। उनके इस भाषण ने न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया में लोगों को प्रभावित किया। स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, जो आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और मानव सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।उन्होंने भारतीय युवाओं को आत्मविश्वास और सांस्कृतिक गर्व का संदेश दिया। उनका कथन, “उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो,” आज भी लोगों को प्रेरित करता है। उन्होंने धर्म को केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं माना, बल्कि इसे जीवन के हर क्षेत्र में लागू करने की वकालत की। उनके लिए सेवा और करुणा सच्चे धर्म के आधार थे।उनके विचारों ने भारतीय समाज में राष्ट्रवाद की भावना को बल दिया और युवाओं को देश के पुनर्निर्माण के लिए प्रेरित किया। उनकी जयंती, 12 जनवरी, भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाई जाती है, जो उनकी युवा शक्ति के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाता है। - नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घाना का सर्वोच्च सम्मान दिए जाने की परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के महाराज चिदानंद मुनि ने सराहना की। सरकार की विदेश नीति की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि जैसे भगवान राम सभी को लेकर आगे बढ़े थे, वैसे ही पीएम मोदी भी सबको साथ लेकर आगे बढ़ रहे हैं। पीएम मोदी चाहते हैं कि देश की पहचान बने, उनकी खुद की नहीं। मुझे लगता है कि भारत भाग्यशाली है कि हमारे पास ऐसा प्रधानमंत्री है। जहां भी जाते हैं, पूरे भारत का सम्मान होता है। पीएम मोदी 140 करोड़ लोगों को साथ लेकर चलते हैं। वहीं, भारतीय जहां भी गए देश के झंडे गाड़े। विदेश में मौजूद भारतीयों ने अपने देश का सम्मान बढ़ाया।चिदानंद मुनि ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैंने कई प्रधानमंत्री देखे, लेकिन नरेंद्र मोदी जैसा कोई नहीं देखा। पीएम मोदी ने भारत को सम्मान दिलाया, नई ऊंचाई प्रदान की, भारत के नाम को पूरे विश्व में ऊंचा स्थान दिलाया है। यही कारण है कि आज पूरा विश्व पीएम मोदी का सम्मान करता है। बात सिर्फ इसकी नहीं कि दुनिया के 24 देशों ने उन्हें अपने राष्ट्र का सर्वोच्च सम्मान दिया, बल्कि ऐसा समय आ रहा है कि हर देश भारत का सम्मान करेगा। पीएम मोदी खुद कहते हैं कि यह उनका नहीं देश की 140 करोड़ जनता का सम्मान है।”भारत सरकार की विदेश नीति की तारीफ करते हुए चिदानंद मुनि ने कहा, “घाना में आज तक भारत के कितने प्रधानमंत्री गए? पिछले 20 साल में जाने वाले नरेंद्र मोदी पहले प्रधानमंत्री हैं। पीएम मोदी छोटे-छोटे देशों को भी महत्व दे रहे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि अगर भविष्य में भारत के महत्व को बढ़ाना है तो इन सभी देशों से अच्छा संबंध रखना होगा। जैसे भगवान राम ने शबरी और केवट को गले लगाया और जहां भी गए सबको साथ लिया, ठीक इसी तरह पीएम मोदी भी सबको साथ लेकर आगे बढ़ रहे हैं।”उन्होंने कहा, “करीब 20 साल पहले जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं थे, उस समय उन्होंने विश्व हिंदू सम्मेलन में भारतीय प्रवासी पर एक घंटे का अद्भुत भाषण दिया था, जिसको सुनने के बाद भारत का जनमानस झूम उठा था। नरेंद्र मोदी की मर्यादा, अनुशासन और राष्ट्र प्रेम का दर्शन हमने उस समय ही कर लिया था, जब वह प्रधानमंत्री नहीं थे। पीएम मोदी राष्ट्रप्रेमी हैं, जिसके कारण उन्हें सप्ताह में सातों दिन चौबीसों घंटे काम करने की ऊर्जा मिलती है, जो अद्भुत और अलौकिक है। साधारण व्यक्ति ऐसा नहीं कर सकता।”चिदानंद मुनि ने कहा, “पीएम मोदी के दौरे पर त्रिनिदाद में पूरे स्कूल, कॉलेज और ऑफिस बंद कर दिए गए हैं, ताकि लोग उन्हें देख, सुन सकें। पूरा देश उनके आने का उत्सव मना रहा है। जब वह घाना में थे, तो सभी ने देखा कि किस तरह से पीएम मोदी का सम्मान हुआ। केवल घाना ही नहीं बल्कि हर देश उन्हें सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित कर रहा है।
- नई दिल्ली। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने टेलीविजन रेटिंग एजेंसियों के लिए 2014 में जारी नीति दिशा-निर्देशों में संशोधन का प्रस्ताव किया है। प्रस्तावित मसौदे में मीडिया घरानों के लिए कुछ प्रतिबंधात्मक प्रावधानों को हटा दिया गया है, ताकि देश में टेलीविजन दर्शकों की माप प्रणाली को लोकतांत्रिक और आधुनिक बनाया जा सके। वर्तमान में टीवी रेटिंग प्रदान करने वाली एक मात्र एजेंसी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल – बार्क है। प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य टीवी रेटिंग के क्षेत्र में कई एजेंसियों के माध्यम से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने, नई तकनीक लाने और विशेष रूप से कनेक्टेड टीवी प्लेटफ़ॉर्म के लिए अधिक विश्वसनीय और प्रतिनिधि डेटा प्रदान करने की अनुमति देना है।मंत्रालय ने ड्राफ्ट जारी होने के 30 दिन के भीतर हितधारकों और आम जनता से सुझाव मांगे हैं।मौजूदा नियम 2014 के हैं, जो अब पुराने हो चुके हैं। भारत में लगभग 23 करोड़ घरों में टेलीवीजन हैं, लेकिन केवल 58 हज़ार घरों से डाटा लिया जाता है, जो कुल टीवी घरों का केवल दशमलव शून्य दो-पांच प्रतिशत है। यह डाटा स्मार्ट टीवी, स्ट्रीमिंग डिवाइस और मोबाइल एप्लिकेशन जैसे आधुनिक प्लेटफार्मों पर दर्शकों की संख्या को पूरी तरह से नहीं दर्शाता है।मंत्रालय ने उल्लेख किया कि यह सीमित पैमाना विभिन्न क्षेत्रों और जनसांख्यिकी में विविधता देखने की प्राथमिकताओं का पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता है। इन बदलावों को पहचानते हुए, मीडिया जगत में मनोरंजन की वर्तमान सामग्री उपभोग की आदतों को सही ढंग से दर्शाने के लिए टेलीविजन रेटिंग प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता है।
- नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अमेरिका की ट्रेडिंग फर्म जेन स्ट्रीट को भारतीय शेयर बाजार में ट्रेडिंग से प्रतिबंधित कर दिया है। सेबी का आरोप है कि यह फर्म बाजार में हेराफेरी कर रही थी और गैरकानूनी तरीके से भारी मुनाफा कमा रही थी। सेबी ने एक अंतरिम आदेश में Jane Street को 4,844 करोड़ रुपये की अवैध कमाई लौटाने का भी निर्देश दिया है।सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अनंत नारायण ने 105 पेज के आदेश में लिखा है कि, “इस मामले के तथ्यों को देखते हुए तत्काल रोक (cease and desist) के आदेश जरूरी हैं। जब तक जांच पूरी नहीं होती और उससे जुड़े मामले निपट नहीं जाते, सभी एक्सचेंजों को JS Group की सभी गतिविधियों पर लगातार नजर रखनी होगी, ताकि यह फर्म भविष्य में किसी भी तरह की हेराफेरी न कर सके। यह निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी है।”सेबी के मुताबिक जेन स्ट्रीट का तरीका कुछ इस तरह था—कंपनी पहले ऑप्शंस सेगमेंट में आक्रामक पोजिशन बनाती थी और फिर शेयर बाजार (cash और futures segment) में बड़ी खरीदारी करके दाम को प्रभावित करती थी। खासकर साप्ताहिक इंडेक्स ऑप्शन की एक्सपायरी वाले दिनों में, जब कैश और फ्यूचर्स सेगमेंट में ट्रेडिंग कम होती है, उस वक्त यह कंपनी भारी ट्रेडिंग करके इंडेक्स को अपनी दिशा में मोड़ देती थी और ऑप्शंस में मोटा मुनाफा कमाती थी। जांच में पाया गया कि जेन स्ट्रीट ने Bank Nifty के 12 स्टॉक्स और उनके फ्यूचर्स में भारी खरीदारी की, जिससे इन शेयरों के दाम ऊपर गए और कंपनी ने ऑप्शंस में बड़ी पोजिशन बनाकर मोटा फायदा उठाया। सेबी के अनुसार,जेन स्ट्रीटने बैंक निफ्टी से जुड़े शेयरों में (कैश और फ्यूचर्स दोनों सेगमेंट में) असामान्य रूप से अधिक संख्या में बाय ऑर्डर दिए, जो आखिरी सौदे की कीमत के बराबर या उससे ऊपर थे। इससे इन शेयरों की कीमतें बढ़ाने या उन्हें ऊंचा बनाए रखने की कोशिश की गई।सेबी का कहना है कि जेन स्ट्रीट ने एक्सपायरी वाले दिन जानबूझकर बाजार को ऐसे बंद करने की रणनीति अपनाई, जिससे उसे उसके बड़े इंडेक्स ऑप्शन पोजिशन में फायदा मिल सके। सेबी के मुताबिक, यह PFUTP (Prohibition of Fraudulent and Unfair Trade Practices) रेगुलेशन का प्राथमिक रूप से उल्लंघन माना जा सकता है।सेबी के ऑर्डर के अनुसार, जनवरी 2023 से मार्च 2025 के बीच जेन स्ट्रीट ने ऑप्शंस ट्रेडिंग से 44,358 करोड़ का मुनाफा कमाया। हालांकि, इसी दौरान कंपनी को स्टॉक फ्यूचर्स में ₹7,208 करोड़, इंडेक्स फ्यूचर्स में ₹191 करोड़ और कैश सेगमेंट में ₹288 करोड़ का नुकसान हुआ। कुल मिलाकर, इस अवधि मेंजेन स्ट्रीट को ₹36,671 करोड़ का शुद्ध लाभ हुआ।--
- नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को कहा कि शहरी निकाय लोकतंत्र की बुनियाद हैं और जनता से सीधे जुड़े होते हैं। उन्हें संवाद और आदर्श प्रथाओं के जरिए अधिक उत्तरदायी और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। सदन नियमित चले, मुद्दों पर चर्चा हो, जवाबदेही सुनिश्चित हो, यही लोकतंत्र की सच्ची परंपरा है, जिसे हमें विकसित करना होगा।ओम बिरला गुरुग्राम के मानेसर में शहरी निकायों के राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने लोकतंत्र की मजबूती और जवाबदेह शासन के लिए शहरी स्थानीय निकायों को संवाद और आदर्श आचरण के जरिए सशक्त बनाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि निकाय प्रतिनिधि जनता से सीधा संवाद करते हैं और समस्या व संकट की सबसे पहली जानकारी इन्हें मिलती है। ऐसे में संवाद से इनका समाधान निकल सकता है। इसी सोच से संसद की संरक्षक की भूमिका को समझते हुए श्रेष्ठ प्रथाओं को साझा करने की यह पहल की गई है।उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को उच्च स्तर पर ले जाना सभी की जिम्मेदारी है। शहरी क्षेत्रों में एक उत्तरदायी और पारदर्शी निकाय प्रणाली विकसित होनी चाहिए। सदन में प्रश्नोत्तर हों, मुद्दों पर चर्चा हो, बैठकें नियमित चलें—यह परंपरा विकसित की जानी चाहिए। साथ ही इन निकायों में जनहितधारकों जैसे बुद्धिजीवी वर्ग, पर्यावरणविद को नीतिगत प्रक्रिया और बजट निर्माण में शामिल किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि निकायों में समितियां बनें और संसद की तरह कार्य करें। उन्होंने उल्लेख किया कि 18वीं लोकसभा में सकारात्मक परिवर्तन आया है और सभी दलों ने सदन को चलाने की दिशा में सहयोग दिखाया है। अब रुकावट डालने वाले स्वयं समाज के प्रति उत्तरदायी होंगे। हमें यह सोचकर भी कार्य करना चाहिए कि भविष्य में राजनीतिक नेतृत्व शहरी निकायों से ही निकलेगा।हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि शहरी निकायों की जड़ें जितनी मजबूत होंगी, राष्ट्र उतना ही मजबूत बनेगा। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम निकाय एक विकास मॉडल है जिसे वर्ष 2050 तक 75 लाख की आबादी के लिए तैयार किया जा रहा है। निकायों को पारदर्शी और आधुनिक बनाना ज़रूरी है। स्मार्ट सिटी, स्वच्छता और पर्यावरण को प्राथमिकता दी जा रही है और प्रधानमंत्री का विजन है कि शहर स्लम मुक्त हों।सम्मेलन की जानकारी देते हुए लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह ने बताया कि इस आयोजन की प्रेरणा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिली। उनका मानना है कि संसद को अन्य निकायों का संरक्षक बनना चाहिए। यह पहली बार है जब शहरी निकायों के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य यह समझाना है कि शहरी निकाय राष्ट्र निर्माण में कैसे भूमिका निभा सकते हैं। यह अवसर है कि निकाय अपनी जिम्मेदारी को समझें और जनता की जरूरत के अनुसार काम करें। इस सम्मेलन के दूरगामी परिणाम होंगे और हरियाणा में इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।उल्लेखनीय है कि यह दो दिवसीय सम्मेलन 3 से 4 जुलाई तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें देशभर से नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं के सभापति भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में शहरीकरण, महिला सशक्तीकरण, विकसित भारत 2047 में योगदान, पारदर्शिता और निकाय शासन के पांच उप विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी।
- नई दिल्ली।‘ भारत का इस्पात उद्योग ग्रीन स्टील की दिशा में बढ़ने के लिए कमर कस रहा है। लेकिन इस उद्योग के दिग्गजों और विशेषज्ञों ने गुरुवार को कहा कि पूरी तरह बदलाव लाने में दशकों का समय लगेगा। इस बीच, उन्होंने मददगार सरकारी नीतियों और उत्सर्जन कम करने के लिए कदम उठाने की अपील की। नई दिल्ली में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) की 14वें इंडिया मिनरल्स एंड मेटल्स फोरम में जिंदल स्टेनलेस के प्रबंध निदेशक अभ्युदय जिंदल ने कहा कि बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। उन्होंने कहा, ‘ग्रीन स्टील की दिशा में बदलाव हो रहा है और उत्पादन में कम उत्सर्जन वाली प्रक्रियाओं को अपनाना एक सही शुरुआत है।’उन्होंने कहा कि अन्य देशों में सफल बदलाव काफी हद तक सरकार की सहायक नीतियों के कारण संभव हुआ। ग्रीन हाइड्रोजन मिशन जैसी नीतियों पर जोर देते हुए जिंदल ने कहा कि ये नि:संदेह इस दिशा में उद्योग के कदम का समर्थन करती हैं।उद्योग के विश्लेषकों का भी मानना है कि ग्रीन स्टील की ओर बदलाव के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाना महत्वपूर्ण है। जिंदल स्टील ऐंड पावर के वाइस चेयरमैन वी आर शर्मा ने कहा, ‘हालांकि पूर्ण परिवर्तन में दशकों लगेंगे, लेकिन भारतीय इस्पात निर्माताओं को व्यावहारिक कदम उठाने होंगे। इस्पात निर्माताओं को उत्सर्जन को कम करने और ऊर्जा संरक्षण के साथ यह सुनिश्चित करना होगा कि कम से कम 10 प्रतिशत नई क्षमता ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ बिजली पर आधारित हो।’उद्योग के आंकड़ों के अनुसार वैश्विक इस्पात उद्योग वैश्विक कार्बन डी ऑक्साइड उत्सर्जन के लगभग 7-9 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार है। चूंकि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक है, इसलिए उसके लिए पर्यावरणीय लक्ष्यों को पूरा करने और टिकाऊ विकास सुनिश्चित करने, दोनों के लिए अपनी उत्पादन प्रक्रियाओं से कार्बन हटाना जरूरी है।गुरुवार का कार्यक्रम उन्नत ग्रीन स्टील निर्माण और देश के इस्पात उद्योग में मजबूत सर्कुलर इकॉनमी की तत्काल आवश्यकता पर केंद्रित था। सम्मेलन में कार्बन उत्सर्जन कम करने और पारंपरिक इस्पात उत्पादन प्रणालियों से हटने के लिए खाके की संभावना के लिए उद्योग के विशेषज्ञ एक साथ आए। इंडियन स्टील एसोसिएशन के महासचिव आलोक सहाय ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का इस्पात क्षेत्र मजबूत घरेलू मांग और महत्वाकांक्षी इन्फ्रास्ट्रक्चर लक्ष्यों से रफ्तार ले रहा है जिसमें निर्यात एक सह-उत्पाद है।
- नई दिल्ली। रसायन के क्षेत्र में भारत की आयात पर बहुत अधिक निर्भरता पर लगाम लगाने के लिए नीति आयोग ने गुरुवार को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (जीवीसी) में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए 8 प्रमुख बंदरगाह आधारित क्लस्टर बनाने, रसायन क्षेत्र में सहायता के लिए एक केमिकल फंड बनाने और विभिन्न सब्सिडी देने का सुझाव दिया है।भारत रसायनों का प्रमुख निर्यातक है, लेकिन भारी आयात पर भी निर्भर है। केंद्र के नीति से जुड़े थिंक टैंक के मुताबिक इसकी वजह से 2023 में इस सेक्टर में 31 अरब डॉलर का व्यापार घाटा हुआ है।इसमें यह भी कहा गया है कि भारत की केमिकल जीवीसी में मौजूदा हिस्सेदारी अभी 3.5 प्रतिशत है।भारत के करीब 34 प्रतिशत रसायनों का आयात चीन से होता है, जिसका कुल व्यापार घाटा 29 अरब डॉलर है। नीति आयोग ने कहा कि राजकोषीय और गैर-राजकोषीय हस्तक्षेपों की एक व्यापक श्रृंखला वाले लक्षित सुधारों से भारत को 1 लाख करोड़ डॉलर का रासायनिक क्षेत्र बनाने और 2040 तक जीवीसी में 12 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने में मदद मिलेगी, जिससे वह एक वैश्विक रासायनिक महाशक्ति बन जाएगा। इसमें उम्मीद जताई गई है कि 2030 तक भारत का रसायन के क्षेत्र व्यापार घाटा शून्य हो जाएगा।नीति आयोग के मुख्य कार्याधिकारी और पूर्व वाणिज्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा, ‘दुनिया की आर्थिक और भू-राजनीतिक स्थिति को देखते हुए भारत इस समय आदर्श स्थिति में है। भारत अच्छी स्थिति में है। हम बिल्कुल सही जगह पर हैं।’नीति आयोग ने ‘रसायन उद्योग : वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी को सशक्त बनाना’ नाम से पेश रिपोर्ट में कहा, ‘रासायनिक केंद्र के भीतर बुनियादी ढांचे के विकास और अन्य प्रमुख पहलों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए एक जीवीसी केमिकल फंड की स्थापना की जा सकती है। यह फंड सुनिश्चित कर सकता है कि महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की जरूरतें पूरी करने के लिए आवश्यक निवेश किया जाए और पार्कों की दीर्घकालिक स्थिरता का समर्थन करने वाली परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा सकती है। राज्य सरकारें स्थानीय स्तर पर भूमि खरीद और विवाद समाधान में सहायता करें।’इसके अलावा नीति आयोग ने परिचालन व्यय के लिए सब्सिडी देने, पर्यावरण संबंधी मंजूरी में तेजी लाने के लिए समिति बनाने तथा कौशल विकास और अनुसंधान एवं विकास सहायता जैसे अन्य हस्तक्षेपों की भी सिफारिश की है।
- नई दिल्ली। आधार संख्या धारकों ने जून माह में लगभग 230 करोड़ आधार प्रमाणित लेन-देन किए। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में सात दशमलव आठ प्रतिशत अधिक है। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि यह वृद्धि आधार के व्यापक उपयोग और देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास को दर्शाती है। इस वर्ष जून में रिकॉर्ड 15 करोड़ से अधिक चेहरा प्रमाणीकरण लेन-देन दर्ज किए गए, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने में 4 करोड 61 लाख लेन-देन किए गये थे।
- नई दिल्ली। किम मिन-सोक को गुरुवार को आधिकारिक तौर पर दक्षिण कोरिया का प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने देश की नई सरकार के तहत इस पद के लिए सत्तारूढ़ पार्टी के चार बार के सांसद के नाम का चयन किया था, जिसके समर्थन में नेशनल असेंबली ने मतदान किया। इससे पहले दिन में नेशनल असेंबली ने पूर्ण सत्र के दौरान तीन अमान्य मतपत्रों के साथ 173-3 मतों से किम के समर्थन में प्रस्ताव पारित किया।मुख्य विपक्षी दल पीपुल्स पावर पार्टी (पीपीपी) ने उनकी संपत्ति और परिवार से जुड़े आरोपों के विरोध में इस प्रस्ताव का बहिष्कार किया।किम ने पत्रकारों से बात करते हुए “लोगों की इच्छा को बनाए रखने” का संकल्प लिया और इस बात पर जोर दिया कि “अत्याचारी ताकतों” के कारण उत्पन्न “आर्थिक संकट पर काबू पाना” उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।राष्ट्रपति के प्रवक्ता कांग यू-जंग के अनुसार, ली ने संसदीय मतदान के बाद आधिकारिक तौर पर किम को प्रधानमंत्री नियुक्त किया। किम की रिपोर्ट की गई संपत्ति और खर्च के बीच बड़े अंतर के बीच उनकी आय के स्रोत के साथ-साथ उनके बेटे के कॉलेज प्रवेश और चीन के त्सिंगुआ विश्वविद्यालय में उनकी खुद की पढ़ाई के बारे में आरोपों को मुद्दा बनाते हुए पीपीपी ने किम को अयोग्य उम्मीदवार कहा है।डेमोक्रेटिक पार्टी ने पहले कहा था कि वह पुष्टिकरण को एकतरफा आगे बढ़ाएगी, भले ही पीपीपी असहमत हो। दक्षिण कोरिया में प्रधानमंत्री ही एकमात्र कैबिनेट पद है जिसके लिए संसदीय अनुमोदन की आवश्यकता होती है।सत्र के दौरान नेशनल असेंबली ने वाणिज्यिक अधिनियम में संशोधन भी पारित किया, जो कॉर्पोरेट बोर्ड के सदस्यों के प्रत्ययी कर्तव्य को सभी शेयरधारकों तक विस्तारित करेगा। प्रतिद्वंद्वी दलों में उस नियम को लेकर टकराव हुआ था, जो ऑडिटर का चयन करते समय किसी कंपनी में सबसे बड़े शेयरधारक के मतदान अधिकार को तीन प्रतिशत तक सीमित कर देगा। लेकिन बुधवार को नियम में संशोधन करने के बाद विधेयक को मतदान के लिए रखने पर सहमति हुई।उपस्थित 272 सांसदों में से 220 ने संशोधन को मंजूरी दी। 29 सदस्यों ने इसके विरोध में मत डाला, जबकि 23 ने मतदान में भाग नहीं लिया।वहीं, असेंबली ने मार्च में भी इसी तरह का विधेयक पारित किया था, लेकिन तत्कालीन राष्ट्रपति यूं सुक योल ने इसे वीटो के जरिए रद्द कर दिया था। मार्शल लॉ अधिनियम में संशोधन भी गुरुवार के सत्र में पारित किया गया, जो मार्शल लॉ घोषित होने पर नेशनल असेंबली में सेना और पुलिस के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाता है।--
- नई दिल्ली। पीएम मोदी ने घाना के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और स्पीकर को दिए भारतीय कला और विरासत से जुड़े खास उपहारभारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पांच देशों के दौरे की शुरुआत घाना की ऐतिहासिक यात्रा के साथ की। पीएम मोदी ने घाना के राष्ट्रपति, उनकी पत्नी, उपराष्ट्रपति और स्पीकर को खास गिफ्ट भेंट किए। खास बात यह है कि भेंट किए गए गिफ्ट का भारतीय कला-संस्कृति से कनेक्शन है। इतना ही नहीं इन गिफ्ट के जरिए भारत की कला, कारीगरी और विरासत को वहां के लोगों तक पहुंचाने का मैसेज दिया गया है।उन्होंने घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा को फूलदान और उनकी पत्नी को चांदी का पर्स गिफ्ट में दिया। इसके अलावा, पीएम मोदी ने घाना के उपराष्ट्रपति प्रोफेसर नाना जेन ओपोकु-अग्येमांग को कश्मीरी पश्मीना शॉल, स्पीकर को लघु हाथी अंबावरी तोहफे में दिया।पीएम मोदी ने घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा को बिदरी कलाकृति से सजाए गए फूलदान दिए। इनका निर्माण कर्नाटक के बीदर के कारीगर करते हैं। यह भारत के प्रसिद्ध धातु शिल्प को दर्शाती है, जो अपनी आकर्षक काली फिनिश और बेहतरीन चांदी की जड़ाई के लिए जानी जाती है। यह सदियों पुरानी तकनीक का उपयोग करके कुशल कारीगरों द्वारा हस्तनिर्मित है। फूलदान जिंक-कॉपर मिश्र धातु से बने हैं, इन पर सुंदरता और समृद्धि के प्रतीक पुष्प आकृतियों को उकेरा गया है।इसके साथ ही पीएम मोदी ने राष्ट्रपति की पत्नी लॉर्डिना महामा को चांदी का बना पर्स उपहार में दिया। ओडिशा के कटक का यह खूबसूरत सिल्वर फिलिग्री वर्क पर्स, इस क्षेत्र के प्रसिद्ध तारकासी शिल्प का एक शानदार उदाहरण है। यह 500 वर्षों से अधिक समय से परिष्कृत जटिल सिल्वर फिलिग्री है। जिसे कुशल कारीगरों द्वारा हाथों से तैयार किया गया है। इसमें महीन चांदी के तारों से पुष्प और बेल की आकृति हैं, जो इसे बेहद आकर्षक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाती है।वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने घाना के उपराष्ट्रपति प्रोफेसर नाना जेन ओपोकु-अग्येमांग को कश्मीरी पश्मीना शॉल उपहार में दी। पश्मीना शॉल कश्मीर में चंगथांगी बकरी के बेहतरीन अंडरकोट से तैयार की जाती है। यह शानदार पश्मीना शॉल, कालातीत कलात्मकता और शान का प्रतिनिधित्व करता है। यह अपनी असाधारण कोमलता, गर्माहट और हल्केपन के लिए प्रसिद्ध है।प्रधानमंत्री मोदी ने घाना के स्पीकर अल्बन बैगबिन को पश्चिम बंगाल में तैयार किया गया हाथी अंबावरी उपहार में दिया। यह हाथी अंबावरी शाही परंपरा और भारत की समृद्ध कलात्मक विरासत का प्रतीक है। यह कृति पॉलिश किए गए सिंथेटिक हाथीदांत से बनाई गई है, जो कि प्राकृतिक हाथीदांत का एक नैतिक और टिकाऊ विकल्प है। हाथी अंबावरी सिंथेटिक आइवरी यानी पर्यावरण के अनुकूल विकल्प से बनाई गई है। इसमें बारीकी से नक्काशी की गई है, जो भारत की उत्कृष्ट कारीगरी और सांस्कृतिक गौरव को दर्शाती है।----
- लखनऊ. एक्सिओम मिशन-4 के तहत अंतरिक्ष यात्रा पर गये लखनऊ निवासी शुभांशु शुक्ला ने विभिन्न स्कूलों के बच्चों से अपने इस अविस्मरणीय सफर के अनुभव साझा किये। बच्चों ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर मौजूद अंतरिक्ष यात्री शुक्ला से बात करने के मौके का भरपूर फायदा उठाया। इस दुर्लभ बातचीत में बच्चों के अंदर यह जानने की खासी ललक दिखी कि अंतरिक्ष यात्री क्या खाते हैं? वे अंतरिक्ष में कैसे सोते हैं? अगर कोई बीमार पड़ जाए तो क्या होता है? शरीर अंतरिक्ष में कैसे ढलता है और पृथ्वी पर लौटने के बाद माहौल में फिर से ढलने में कितना समय लगेगा? आईएसएस पर मौजूद शुक्ला ने यहां सिटी मॉन्टेसरी स्कूल में एकत्र हुए छात्रों द्वारा पूछे गए इन सवालों के विस्तृत जवाब दिये। छात्रों ने अंतरिक्ष कार्यक्रम के लाभों के बारे में भी जानना चाहा।साथ ही यह भी जानने की ख्वाहिश जतायी कि अंतरिक्ष यात्रा का कौन सा हिस्सा सबसे ज्यादा मजेदार होता है। आईएसएस पर पहुंचने वाले पहले भारतीय बने शुक्ला ने 25 जून को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से एक्सिओम मिशन-4 के शुरू होने के अपने अनुभव को 'अद्भुत' बताया। अंतरिक्ष यात्री कैसे सोते हैं, इस बारे में पूछे गये सवाल पर उन्होंने कहा, ''यह वास्तव में मजेदार है... इसलिए अगर आप स्टेशन (आईएसएस) पर आते हैं, तो आप पाएंगे कि कोई दीवारों पर सो रहा है, कोई छत पर।'' शुक्ला ने कहा, ''ऊपर तैरना और खुद को छत से बांधना बहुत आसान है। चुनौती यह है कि जागने पर आप उसी स्थान पर मिलें, जहां आप रात में सोए थे। यह बहुत जरूरी है कि हम अपने ‘स्लीपिंग बैग' बांध लें ताकि हम बहकर कहीं और न पहुंचे जाएं।'' एक छात्र ने पूछा कि अगर कोई यात्री अंतरिक्ष में बीमार पड़ जाए तो क्या होगा, शुक्ला ने जवाब दिया कि ऐसी स्थिति से निपटने के लिये पर्याप्त दवाएं साथ रखी जाती हैं। बातचीत के दौरान भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन गगनयान का हिस्सा रहे ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप अंतरिक्ष कार्यक्रमों के बारे में युवाओं में जागरूकता पैदा करने के लिए लखनऊ में मौजूद थे। छात्रों के साथ यह बातचीत इसरो के विद्यार्थी संवाद कार्यक्रम का हिस्सा थी। आईएसएस पर पहुंचने वाले पहले भारतीय शुक्ला गगनयान के लिए नामित चार अंतरिक्ष यात्रियों में से एक हैं।एक छात्र के मुताबिक, शुक्ला ने उन्हें बताया कि अंतरिक्ष यात्रियों को शायद ही कोई खाली समय मिलता है। हालांकि, एक चीज जिसका अंतरिक्ष यात्री बेसब्री से इंतजार करते हैं वह है बाहर जाकर अंतरिक्ष और पृथ्वी का खूबसूरत नजारा देखना। अंतरिक्ष के माहौल में खुद को ढालने से जुड़ी चुनौतियों के बारे में शुक्ला ने उपस्थित बच्चों को बताया कि सबसे बड़ी चुनौती गुरुत्वाकर्षण की अनुपस्थिति है। उन्होंने कहा, ''अंतरिक्ष शरीर के लिए एक नई स्थिति है। हालांकि मैं पहले दिन की तुलना में अब बहुत बेहतर महसूस कर रहा हूं।'' शुक्ला ने कहा, ''मेरा शरीर अब ‘माइक्रोग्रैविटी' के अनुकूल हो गया है, लेकिन जब मैं धरती पर वापस लौटूंगा तो मेरे शरीर को गुरुत्वाकर्षण के अनुकूल फिर से ढलना होगा। यह एक चुनौती होगी और धरती पर दोबारा प्रवेश करने पर इस अनुकूलन की जरूरत होगी। इसके लिये बहुत सारी तैयारियां और प्रक्रियाएं जरूरी हैं क्योंकि अंतरिक्ष बहुत ही गतिशील जगह है।'' अंतरिक्ष यात्री क्या खाते हैं, इस सवाल पर शुक्ला ने कहा कि अधिकांश भोजन पहले से पैक किया हुआ होता है और पर्याप्त पोषण सुनिश्चित करने के लिए उसकी पर्याप्त देखभाल की जाती है। दरअसल, अंतरिक्ष में भोजन प्रेरणा या आनंद के मुख्य स्रोतों में शुमार हो जाता है।शुक्ला ने कहा, ''कई तरह के खाद्य पदार्थ रखे जाते हैं और अंतरिक्ष यात्री उन सभी का स्वाद लेते हैं।'' उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बातचीत के दौरान उन्हें बताया था कि वह अंतरिक्ष में अपने साथ गाजर का हलवा, मूंग दाल का हलवा और आम रस जैसी मिठाइयां ले गए हैं। एक छात्र ने जानना चाहा कि अंतरिक्ष का मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है, इस पर शुक्ला ने कहा कि आधुनिक तकनीक ने यह सुनिश्चित किया है कि अंतरिक्ष यात्री परिवार और दोस्तों से जुड़ सकें और इससे बहुत मदद मिलती है। भारत के पहले अंतरिक्ष यान गगनयान के लिए नामित चार अंतरिक्ष यात्रियों में से एक विंग कमांडर अंगद प्रताप ने बृहस्पतिवार को लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल में छात्रों से कहा कि उन्हें अगले कुछ दशकों तक प्रेरित रहना होगा क्योंकि तब भारत में मानव अंतरिक्ष यान के लिए अपार संभावनाएं सामने आएंगी। उनकी बातचीत विंग कमांडर शुक्ला से भी हुई। प्रताप ने एयरोस्पेस विज्ञान के क्षेत्र में रोमांचक और चुनौतीपूर्ण करियर के बारे में बात की।
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नयी दिल्ली. जून में भारतीय सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 10 माह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जिसमें सकारात्मक मांग के रुझान और बिक्री में जारी सुधार के बीच अंतरराष्ट्रीय बिक्री और रोजगार सृजन में मजबूत विस्तार शामिल है। बृहस्पतिवार को जारी एक मासिक सर्वेक्षण में यह जानकारी दी गई। मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स मई में 58.8 से बढ़कर जून में 60.4 हो गया, जो नए व्यावसायिक ऑर्डरों में तेज उछाल के कारण हुआ। क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) की भाषा में, 50 से ऊपर का अंक विस्तार को दर्शाता है, जबकि 50 से नीचे का अंक संकुचन को दर्शाता है। एचएसबीसी के भारत में मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, “सेवा पीएमआई व्यवसाय गतिविधि सूचकांक 10 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जिसका कारण नए घरेलू ऑर्डरों में तीव्र वृद्धि थी। नए निर्यात ऑर्डरों में भी वृद्धि हुई, यद्यपि धीमी गति से। मार्जिन में सुधार हुआ, क्योंकि कच्चे माल की लागत में वृद्धि आउटपुट शुल्क के मुकाबले कम थी।” अगस्त, 2024 के बाद से नए ऑर्डर सबसे तेज गति से बढ़े। सेवा कंपनियों को घरेलू बाज़ार की निरंतर मज़बूती से सबसे ज़्यादा फ़ायदा हुआ, साथ ही नए निर्यात कारोबार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। पैनल के सदस्यों के अनुसार, एशियाई, पश्चिम एशियाई और अमेरिकी बाज़ारों से विदेशी मांग में ख़ास तौर पर सुधार हुआ।
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हापुड़ (उप्र) .हापुड़ जिले में एक तेज रफ्तार कैंटर की टक्कर से मोटरसाइकिल पर सवार चार बच्चों समेत पांच लोगों की मौत हो गई। पुलिस के एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) विनीत भटनागर ने बताया कि हाफिजपुर क्षेत्र के रफीकनगर मोहल्ले के निवासी दानिश (40) बुधवार देर रात अपने दो बच्चों मायरा (11) और समायरा (10) तथा भाई सरताज के बच्चों समर (आठ) और मिहिम (10) के साथ मोटरसाइकिल से अपने परिचित के फार्म हाउस पर स्विमिंग पूल में नहाने गए थे। उन्होंने बताया कि लौटते समय बुलंदशहर मार्ग पर ‘मिनीलैंड स्कूल' के बाहर एक तेज रफ्तार कैंटर ने उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी जिससे पांचों की मौके पर ही मौत हो गई। भटनागर ने बताया कि घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया। पुलिस ने कैंटर को कब्जे में ले लिया है और उसके चालक की तलाश की जा रही है।
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल सरकार ने भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के वापसी उत्सव के दौरान दीघा में एक ‘एयर एम्बुलेंस' तैनात रखने का फैसला किया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बैठक में भगवान जगन्नाथ की ‘उल्टो रथ यात्रा' के दौरान दीघा में ‘एयर एम्बुलेंस' तैनात रखने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा, ‘‘पांच जुलाई को ‘उल्टो रथ' के दिन एक हेलीकॉप्टर तैनात रखने को कहा गया है। हेलीकॉप्टर संचालन एजेंसी को पहले ही सूचित कर दिया गया है। ‘एयर एंबुलेंस' चार जुलाई को दोपहर से तैयार रखी जाएगी। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने की स्थिति में उसे बिना देर किए कोलकाता के किसी अस्पताल ले जाया जा सके।'' अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार को पांच जुलाई को दीघा में भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा की वापसी के उत्सव के दौरान लोगों की भारी भीड़ के उमड़ने का अनुमान है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 27 जून को दीघा के समुद्र तटीय नगर में नवनिर्मित जगन्नाथ मंदिर से पहली रथ यात्रा की शुरूआत की।
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नई दिल्ली। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को कहा कि केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र से पहले 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाएगी। यह सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चलेगा। स्वतंत्रता दिवस समारोह के कारण 13 और 14 अगस्त को संसद की बैठकें नहीं होंगी।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर किया पोस्टइस संबंध में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “भारत के राष्ट्रपति ने 21 जुलाई से 21 अगस्त 2025 तक संसद का मानसून सत्र बुलाने के सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।”यह सत्र जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 7 मई को हुए आतंकवादी हमले के बाद शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहला संसद सत्र होगा। विपक्षी नेताओं ने इस हमले और अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए विशेष सत्र की मांग की थी।इससे पहले 2025 के बजट सत्र में हुई थीं 26 बैठकेंइससे पहले, 2025 के बजट सत्र में वक्फ संशोधन विधेयक सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। सत्र के दौरान लोकसभा और राज्यसभा में कुल 26 बैठकें हुईं। बजट सत्र की समाप्ति के बाद केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसमें बताया था कि बजट सत्र के पहले भाग में लोकसभा और राज्यसभा की कुल 9 बैठकें हुईं। सत्र के दूसरे भाग में दोनों सदनों की 17 बैठकें हुईं।सत्र के दूसरे भाग के दौरान, रेलवे, जल शक्ति और कृषि और किसान कल्याण मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर लोकसभा में चर्चा की गई और मतदान किया गया। अंत में शेष मंत्रालयों/विभागों की अनुदान मांगों को शुक्रवार, 21 मार्च, 2025 को सदन के मतदान के लिए रखा गया। संबंधित विनियोग विधेयक भी 21.03.2025 को ही लोकसभा में पेश, विचार और पारित किया गया।वर्ष 2024-25 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगों के दूसरे और अंतिम बैच से संबंधित विनियोग विधेयक; वर्ष 2021-22 के लिए अतिरिक्त अनुदान मांगें और वर्ष 2024-25 के लिए मणिपुर की अनुपूरक अनुदान मांगें तथा वर्ष 2025-26 के लिए मणिपुर राज्य के संबंध में लेखानुदान मांगें भी 11.03.2025 को लोकसभा में पारित की गईं। वित्त विधेयक, 2025 को 25 मार्च को लोकसभा द्वारा पारित किया गया। राज्य सभा में शिक्षा, रेलवे, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा गृह मंत्रालयों के कामकाज पर चर्चा की गई। -
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती साख और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक कुशलता ने देश को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। इसका ताजा उदाहरण जुलाई में घाना की राजधानी अक्रा में देखने को मिला, जहां पीएम मोदी को घाना के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना’ से नवाजा गया।
पीएम मोदी को अब तक मिल चुके 24 देशों से सर्वोच्च सम्मानबताना चाहेंगे पीएम मोदी को अब तक 24 देशों से सर्वोच्च सम्मान मिल चुके हैं, जो किसी भी भारतीय नेता के लिए रिकॉर्ड है। इनमें रूस का ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रू’, यूएई का ‘जायद मेडल’, फ्रांस का ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर’, मालदीव का ‘रूल ऑफ इज्जुद्दीन’ और नाइजीरिया, साइप्रस, फिजी जैसे देशों के प्रतिष्ठित पुरस्कार शामिल हैं।संयुक्त राष्ट्र ने भी उन्हें पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘चैंपियन ऑफ द अर्थ’ पुरस्कार से सम्मानित कियासंयुक्त राष्ट्र ने भी उन्हें पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘चैंपियन ऑफ द अर्थ’ पुरस्कार से सम्मानित किया था। ये सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और प्रभाव का परिचायक हैं।पीएम मोदी की अगुवाई में भारत ने ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को अपनाते हुए वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत किया है। उनकी विदेश यात्राएं नए व्यापारिक अवसर, निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का माध्यम बनी हैं।घाना का यह सम्मान भारत के वैश्विक नेतृत्व की भूमिका को करता है रेखांकितघाना का यह सम्मान भारत के वैश्विक नेतृत्व की भूमिका को रेखांकित करता है। पीएम मोदी ने न केवल भारत को एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित किया, बल्कि वे विकासशील देशों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। उनकी कूटनीति ने भारत को वैश्विक मंच पर एक भरोसेमंद और प्रभावशाली साझेदार बनाया है। यह सम्मान भारत के उभरते कद और विश्वास की गवाही है, जो आने वाले समय में और सशक्त होगा।यह सम्मान विदेशी नेताओं को बहुत कम दिया जाता है और यह भारत-घाना के मजबूत रिश्तों का प्रतीक है। 30 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की घाना यात्रा ने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को और गहरा किया।इस मौके पर घाना की संसद को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “भारत और घाना का रिश्ता सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी विश्वास और साझा मूल्यों की नींव पर टिका है। यह सम्मान भारत की जनता के लिए गर्व का क्षण है।” उन्होंने भारत-अफ्रीका सहयोग, सांस्कृतिक जुड़ाव और विकास की साझा यात्रा पर जोर दिया। -
नई दिल्ली। 36 दिनों तक चलने वाली अमरनाथ यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों का एक और जत्था गुरुवार को जम्मू से घाटी के लिए रवाना हुआ। दूसरे जत्थे में 5246 तीर्थयात्री शामिल हैं, जिन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच जम्मू के कैनाल रोड स्थित भगवती नगर से घाटी के लिए भेजा गया। अधिकारियों ने बताया कि इन तीर्थयात्रियों में से 1993 यात्री बालटाल बेस कैंप जा रहे हैं, जबकि 3253 पहलगाम बेस कैंप जा रहे हैं।
तीर्थयात्री ‘बम बम भोले’ और ‘हर हर महादेव’ के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ेतीर्थयात्री ‘बम बम भोले’ और ‘हर हर महादेव’ के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े। बाबा बर्फानी के दर्शन करने के लिए तीर्थयात्रियों में उत्साह दिखा। उन्होंने सरकार की ओर से मुहैया कराई गई सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्थाओं की तारीफ की। तीर्थयात्रियों ने भारतीय सेना पर पूरा भरोसा जताया।श्रद्धालुओं ने कहा कि सेना के जवानों ने हमें बहुत अच्छे से भगवती नगर तक पहुंचायाश्रद्धालुओं ने कहा कि सेना के जवानों ने हमें बहुत अच्छे से भगवती नगर तक पहुंचाया। केंद्र सरकार और जम्मू कश्मीर सरकार की ओर से जो सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, वो बहुत अच्छी हैं। दूसरे जत्थे में कुछ ऐसे भी तीर्थयात्री हैं, जो पहली बार अमरनाथ यात्रा पर जा रहे हैं। उन्होंने भी सुरक्षा के साथ यहां की सुविधाओं की तारीफ की।श्रद्धालुओं ने बातचीत में बताया कि वो बहुत खुश हैं, सरकार ने अच्छी व्यवस्थाएं की हैंश्रद्धालुओं ने बातचीत में बताया कि वो बहुत खुश हैं, सरकार ने अच्छी व्यवस्थाएं की हैं। एक श्रद्धालु ने कहा कि वो 2019 से लगातार अमरनाथ यात्रा के लिए यहां आते हैं। इस बार बहुत अच्छा लग रहा है। सरकार ने अच्छी व्यवस्था की है। एक महिला ने सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि यहां की व्यवस्थाओं को देखकर बहुत खुशी हुई।एक श्रद्धालु ने कहा, जब संवेदनशील समय था, जब आतंकवादी हमले होते थे, उस समय भी भक्त इस यात्रा के लिए आते थेएक श्रद्धालु ने कहा, “जब संवेदनशील समय था, जब आतंकवादी हमले होते थे, उस समय भी भक्त इस यात्रा के लिए आते थे। अब बिल्कुल निर्भय होकर यहां श्रद्धालु आ रहे हैं।” एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, “पहले और अब की यात्रा में जमीन-आसमान का फर्क है। यहां दो-तीन गुना अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती है। पहले के मुकाबले चार गुना सुख-सुविधाएं यहां देखने को मिल रही हैं।”अमरनाथ यात्रा 36 दिनों तक चलेगी और इस बार इसका समापन 9 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के दिन होगाश्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वो सिर्फ सुरक्षा काफिले के साथ ही जम्मू से घाटी की ओर यात्रा करें और अकेले न निकलें। अमरनाथ यात्रा 36 दिनों तक चलेगी और इस बार इसका समापन 9 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के दिन होगा। -
नई दिल्ली। उत्तराखंड में भारी बारिश के चलते बड़े पैमाने पर मलबा और पत्थर गिरने से केदारनाथ यात्रा एक बार फिर बाधित हो गई है। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम यात्रा को फिलहाल अस्थाई रूप से रोक दिया है।
रुद्रप्रयाग के मुनकटिया स्लाइडिंग जोन में भूस्खलन के बाद पहाड़ से मलबा और पत्थर पूरी सड़क पर आ गयारुद्रप्रयाग के मुनकटिया स्लाइडिंग जोन में भूस्खलन के बाद पहाड़ से मलबा और पत्थर पूरी सड़क पर आ गया। एहतियातन प्रशासन ने यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया। तीर्थयात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर ठहराया गया, जो रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं।केदारनाथ धाम से लौट रहे लगभग 40 श्रद्धालुओं को एसडीआरएफ ने सोनप्रयाग भूस्खलन क्षेत्र के पास से सुरक्षित रेस्क्यू कियाइसी बीच केदारनाथ धाम से लौट रहे लगभग 40 श्रद्धालुओं को एसडीआरएफ ने सोनप्रयाग भूस्खलन क्षेत्र के पास से सुरक्षित रेस्क्यू किया। ये श्रद्धालु रात में अचानक हुए भूस्खलन के कारण रास्ते में फंस गए थे। भूस्खलन सोनप्रयाग के पास हुआ, जो केदारनाथ यात्रा मार्ग का एक अहम पड़ाव है।एसडीआरएफ की टीमों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अंधेरे में ही जोखिम भरा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कियाएसडीआरएफ की टीमों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अंधेरे में ही जोखिम भरा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। वीडियो फुटेज में एसडीआरएफ टीम को खतरनाक परिस्थितियों में मलबे के बीच से रास्ता बनाकर श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालते हुए देखा गया। बाद में इन यात्रियों को सुरक्षित रूप से सोनप्रयाग ले जाया गया।उत्तराखंड के दूसरे इलाकों में भी बारिश के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावितउत्तराखंड के दूसरे इलाकों में भी बारिश के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। चमोली पुलिस के अनुसार, बदरीनाथ हाईकोर्ट उमट्टा में बद्रीश होटल के पास भूस्खलन के चलते बंद हो गया। इसी तरह यमुनोत्री हाईवे भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है, जहां सड़क का हिस्सा भारी बारिश के कारण बह गया।खराब हालातों में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, स्थानीय पुलिस और वन विभाग की टीमें मिलकर राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैंइस मौसम में बिजली और जल आपूर्ति जैसी जरूरी सुविधाएं भी प्रभावित हुई हैं। खराब हालातों में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, स्थानीय पुलिस और वन विभाग की टीमें मिलकर राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं। परिवहन सुविधाओं को जारी रखने के लिए अस्थायी रास्ते बनाए जा रहे हैं। सुरक्षित और वैकल्पिक रास्तों से लोगों को निकाला जा रहा है। - मुरैना . मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में एक परिवार के सदस्यों को हथियार का भय दिखा कर अपराधियों ने बंधक बना लिया और 50 लाख रुपये नकदी सहित करीब एक करोड़ रुपये के गहने तथा 12 बोर की एक लाइसेंसी बंदूक लूट ली। पुलिस के एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह घटना जौरा तहसील के आलापुर गांव में मंगलवार रात डेढ़ बजे के करीब हुई और इस दौरान राजकुमार यादव उनकी पत्नी मंजू यादव और दो बच्चे घर पर ही थे। मंजू गांव की सरपंच हैं जबकि उनके पति राजकुमार एक राजनीतिक दल से जुड़े हुए हैं।जौरा थाना प्रभारी उदयभान सिंह ने बताया कि पीड़ित परिवार की शिकायत पर लूट-पाट और डकैती सहित भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि आरोपियों में से एक को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि दो अब भी फरार हैं। उन्होंने कहा, "उनके रिश्तेदारों के यहां दबिश दी जा रही है।" राजकुमार ने बताया कि रात डेढ़ बजे के करीब चार लोग हथियार लेकर घर में घुस आए जबकि कुछ बाहर खड़े थे। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पुलिस को कॉल करने की कोशिश की तो लुटेरों ने उनपर कट्टा तान दिया तथा परिवार के सभी सदस्यों के हाथ-पैर बांधकर तिजोरी की चाबी ले ली और जेवरात तथा एक बंदूक लूटकर फरार हो गए। उन्होंने दावा किया कि जमीन की रजिस्ट्री के लिए घर में रखे 50 लाख रुपये भी वे लूट कर ले गए।मुरैना के पुलिस अधीक्षक समीर सौरभ ने बुधवार को घटना स्थल का निरीक्षण किया और कहा कि यह गंभीर मामला है। उन्होंने कहा, "बहुत जल्द हम इस मामले का खुलासा करेंगे।"
- नयी दिल्ली. संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होगा और 21 अगस्त को समाप्त होगा। सत्र पहले निर्धारित कार्यक्रम की तुलना में एक सप्ताह अधिक समय तक चलेगा, जिसका मतलब है कि इस दौरान काफी कामकाज होगा। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 21 जुलाई से 21 अगस्त तक सत्र आहूत करने के सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। उन्होंने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, “स्वतंत्रता दिवस समारोहों के मद्देनजर 13 और 14 अगस्त को कोई बैठक नहीं होगी।" पहले यह सत्र 12 अगस्त को समाप्त होना था, लेकिन अब इसे एक सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया है। सत्र की अवधि लंबी होने का निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब सरकार परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी क्षेत्र के प्रवेश को सुगम बनाने समेत कई महत्वपूर्ण विधेयक लाने की योजना बना रही है। सरकार, परमाणु क्षेत्र को निजी कम्पनियों के लिए खोलने की केन्द्रीय बजट में की गई घोषणा को क्रियान्वित करने के लिए परमाणुवीय नुकसान के लिए सिविल दायित्व अधिनियम, 2010 और परमाणु ऊर्जा अधिनियम में संशोधन करने की योजना बना रही है। विपक्ष ऑपरेशन सिंदूर पर बहस की मांग कर रहा है, जिसके तहत 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान में आतंकवादियों के ठिकानों पर हमला किया था। विपक्षी दल भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान परमाणु युद्ध को टालने के लिए मध्यस्थता के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावों पर भी सरकार से जवाब मांग रहे हैं। सरकार ने ट्रंप के दावों को खारिज कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले महीने फोन पर ट्रंप से कहा था कि भारत ने कभी भी मध्यस्थता स्वीकार नहीं की है और भविष्य में भी कभी स्वीकार नहीं करेगा। मोदी ने ट्रंप से यह भी कहा कि सैन्य कार्रवाई रोकने का निर्णय पाकिस्तान के अनुरोध के बाद लिया गया था।
- नोएडा. उत्त्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले में साइबर अपराधियों ने अलग-अलग मामलों में एक महिला वकील समेत दो बुजुर्गों को ‘डिजिटल अरेस्ट' कर उनसे करीब चार करोड़ रुपये की कथित तौर पर ठगी कर ली। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने दोनों मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर ली है।पहले मामले में, अधिकारियों ने बताया कि 72 वर्षीय महिला वकील ने थाना साइबर अपराध में यह रिपोर्ट दर्ज कराई है कि अज्ञात साइबर अपराधियों ने उन्हें कई दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट' कर उनसे तीन करोड़ 29 लाख 70 हजार रुपये की ठगी की। थाना साइबर अपराध के एक अधिकारी के मुताबिक, पीड़िता हेमंतिका वाही ने मंगलवार को थाने में दी अपनी शिकायत में कहा कि 10 जून को उन्हें एक फोन आया और कॉल करने वाले व्यक्ति ने कहा कि उनके आधार कार्ड का उपयोग कर चार बैंक खाते खोले गए हैं और इस संबंध एक मुकदमा दर्ज हुआ है। पीड़िता की शिकायत के अनुसार, इन खातों में मिले पैसों का इस्तेमाल जुआ, ब्लैकमेलिंग, हथियारों की अवैध खरीद आदि में किया गया है, इसलिए वह एक फोन नंबर पर संपर्क करें। अधिकारी ने बताया कि उपलब्ध कराये गए नंबर पर जब पीड़िता ने संपर्क किया तो उनसे कहा गया कि वह गंभीर अपराध में शामिल हैं। महिला के अनुसार, इसके बाद उन्हें फर्जी थाने से कॉल आने लगे और उनसे बैंकों में जमा राशि का विवरण पूछा गया तथा तीन करोड़ 29 लाख 70 हजार रुपये की ठगी कर ली गई। वहीं, दूसरे मामले में निजी कंपनी से सेवानिवृत्त हुए 75 वर्षीय बुजुर्ग को 12 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट' रख कर साइबर अपराधियों ने 49.5 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस उपायुक्त (साइबर अपराध) प्रीति यादव ने बताया कि नोएडा के सेक्टर 29 में रहने वाले राजीव कुमार ने मंगलवार रात थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 18 जून को उनके लैंडलाइन पर एक कॉल आया और फोन करने वाले व्यक्ति ने कहा कि उनके फोन नंबर और आधार कार्ड का उपयोग कर चार बैंक खाते खोले गए हैं, जिनका इस्तेमाल मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, आतंकी गतिविधियों के लिए धन शोधन के वास्ते किया जा रहा है और उनका फोन नंबर दो घंटे में बंद कर दिया जाएगा। उनके मुताबिक, बुजुर्ग व्यक्ति ने ठगों से इस मामले से बाहर निकालने का अनुरोध किया, तो आरोपियों ने गोपनीय समझौते की बात कही तथा यह कहा कि वह कोई भी जानकारी किसी से साझा नहीं करें, अपनी पत्नी को साथ रखें और अपने बच्चों को भी इस बारे में कुछ नहीं बताएं। पीड़ित ने बताया कि उन्हें 18 जून से 30 जून तक ‘डिजिटल अरेस्ट' करके रखा गया और इस बीच आरोपियों ने मदद करने के बहाने उनसे अपने विभिन्न खातों में तीन बार में 49 लाख 50 हजार रुपये डलवा लिए। यादव ने बताया कि पीड़ित ने मंगलवार साइबर अपराध थाने में मामले की शिकायत की।
- पहले ही दिन चलने लगानयी दिल्ली. पिछले आठ वर्षों से घुटने के गंभीर दर्द से जूझ रहे झारखंड के 54 वर्षीय एक व्यक्ति ने यहां रोबोट की सहायता से सीमेंटरहित ‘मीडियल पिवट टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी (घटना प्रतिरोपण संबंधी ऑपरेशन) करवाई है और उसी दिन उसने चलना भी शुरू किया। झारखंड के धनबाद के 54 वर्षीय बृज किशोर आठ साल से अधिक समय से घुटने के दर्द और अन्य संबंधित परेशानियां से जूझ रहे थे। किशोर ने बताया कि इस दौरान, उन्होंने स्थानीय डॉक्टरों से इलाज करवाया, होम्योपैथिक दवाइयां भी लीं और यहां तक कि चिकित्सा परामर्श के लिए कोलकाता भी गए तथा आखिरकार, वह दिल्ली आ गए। यहां उनकी 23 जून को साकेत के मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में सर्जरी हुई।अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उनके दोनों घुटनों में गंभीर ‘ऑस्टियोआर्थराइटिस' के साथ-साथ ‘वारस (धनुष-पैर)' और ‘फ्लेक्सन (घुटने मुड़े हुए)' संकुचन जैसी जटिल विकृतियां सामने आयीं। वह बिना सहारे के चलने में असमर्थ थे। इस सर्जरी का नेतृत्व ‘मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट' के अध्यक्षन डॉ. सुजॉय भट्टाचार्जी ने किया, जिन्होंने मरीज की गतिशीलता बहाल करने के लिए सीमेंटरहित ‘मीडियल पिवट क्रूसिएट-रिटेनिंग (सीआर) इम्प्लांट' के साथ-साथ उन्नत रोबोटिक तकनीक (सीयूवीआईएस रोबोटिक सिस्टम) का इस्तेमाल किया। भट्टाचार्जी ने कहा कि यह ‘इम्प्लांट (प्रतिरोपित कृत्रिम अंग)' का डिजाइन इसके चारों ओर प्राकृतिक हड्डी के विकास की अनुमति देता है, जिससे पारंपरिक सीमेंट की आवश्यकता समाप्त हो जाती है और बेहतर दीर्घकालिक परिणाम मिलते हैं। उन्होंने दावा किया, ‘‘दुनिया में रोबोटिक संयुक्त प्रतिस्थापन में यह पहली बार हुआ है। रोबोट द्वारा सक्षम सटीकता और सीमेंटरहित ‘इम्प्लांट' के उपयोग से मरीज तेजी से स्वस्थ हुआ ..।'' डॉ. भट्टाचार्जी ने कहा,‘‘सर्जरी से पहले वह मुश्किल से चल पा रहा था। लेकिन ऑपरेशन के दिन ही, वह सहायता के साथ चलने में कामयाब हो गया। कुछ ही दिनों में, वह नए आत्मविश्वास के साथ स्वतंत्र रूप से चलने लगा।'
- नयी दिल्ली. केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने बुधवार को वेब आधारित बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली सी-फ्लड की शुरुआत की, जिसके जरिये ग्राम स्तर पर दो दिन पहले ही बाढ़ की चेतावनी जारी की जा सकेगी। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी), सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डीएसी) और राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी) ने यह प्रणाली तैयार की है। प्रणाली को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा संयुक्त रूप से संचालित राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (एनएसएम) के तहत चालू किया गया है। पाटिल ने कहा, "यह बाढ़ से निपटने में एक परिवर्तनकारी कदम है।"मंत्री ने सीडब्ल्यूसी और संबद्ध संस्थाओं को बाढ़ संबंधी अध्ययन के लिए एक राष्ट्रीय योजना तैयार करने और सभी प्रमुख नदी घाटियों को इसमें शामिल करने का निर्देश दिया। फिलहाल यह प्रणाली 2-डी हाइड्रोडायनामिक मॉडल का उपयोग करके महानदी, गोदावरी और तापी नदी घाटियों के लिए बाढ़ संबंधी मानचित्र और जल स्तर के संबंध में पूर्वानुमान व्यक्त करती है। वहीं, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने बुधवार को कहा कि उन्होंने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ जल क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस बात पर विचार किया कि किस प्रकार उभरती प्रौद्योगिकियों को जल प्रशासन में एकीकृत किया जा सकता है ताकि प्रबंधन प्रणालियों को अधिक सटीक, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके। पाटिल ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, हम सुशासन के एक अनिवार्य भाग के रूप में प्रौद्योगिकी को एकीकृत करके जल प्रबंधन को अधिक सटीक, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
- पटना. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार आतंकवादियों का सफाया करने में संकोच नहीं करेगी, चाहे वे कहीं भी हों, तथा सरगना और उन्हें प्रायोजित करने वाली सरकारों के बीच कोई अंतर नहीं किया जाएगा। सिंह ने बिहार में भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) की राज्य कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करते हुए, पड़ोसी देश का नाम लिए बिना पाकिस्तान को यह कड़ा संदेश दिया। राज्य में आगामी महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं।रक्षा मंत्री ने कहा कि मोदी के नेतृत्व में, ‘सर्जिकल स्ट्राइक' और बालाकोट हवाई हमले जैसे कदमों के साथ देश की सुरक्षा नीति में नया बदलाव आया है। रक्षा मंत्री ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद चलाए गए सैन्य अभियान का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर के तहत पहली बार हमने अपनी सीमा से 100 किलोमीटर दूर स्थित आतंकी ठिकानों पर हमला किया। बेशक, हमने केवल उन लोगों पर हमला किया, जिन्होंने हम पर हमला किया था। यही कारण है कि किसी भी नागरिक या सैन्य प्रतिष्ठान को निशाना नहीं बनाया गया।'' उन्होंने कहा, ‘‘मोदी के नेतृत्व में, हमारी नीति आतंकवादियों को खत्म करने में संकोच न करने की रही है, चाहे वे कहीं भी हों। और हम यह आतंकवादी हमलों के सरगना और उन्हें प्रायोजित करने वाली सरकारों के बीच कोई भेद किए बिना करेंगे।'' सिंह ने कहा कि मोदी के ‘‘स्वदेशीकरण'' और ‘‘आत्मनिर्भर भारत'' पर जोर देने के कारण देश के रक्षा निर्यात में तेज वृद्धि देखी गई है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘मोदी सरकार दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ काम करती है, जो पूर्ववर्ती कांग्रेस नीत सरकारों से बिल्कुल अलग है, जिनमें दिशाहीनता थी और जो वोट बैंक की चिंता से प्रेरित थीं।'' सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की टिप्पणी पर उठे विवाद का भी परोक्ष संदर्भ दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि संविधान की प्रस्तावना से ‘पंथनिरपेक्ष' और ‘समाजवादी' शब्दों को हटा दिया जाना चाहिए, क्योंकि इन्हें आपातकाल के दौरान जोड़ा गया था। उन्होंने कहा, ‘‘मैं फर्जी धर्मनिरपेक्षतावादियों से पूछना चाहता हूं कि देश के संविधान में पंथनिरपेक्ष शब्द जुड़ने के बाद जम्मू कश्मीर के अलग संविधान में इसे क्यों नहीं जोड़ा गया? क्या उस राज्य को पंथनिरपेक्ष नहीं होना चाहिए था, जहां अल्पसंख्यक हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे थे? जम्मू कश्मीर तभी पंथनिरपेक्ष बना, जब अनुच्छेद 370 हटाया गया।'' भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ने दावा किया कि पार्टी (भाजपा) पूरी दुनिया में एकमात्र राजनीतिक संगठन है जिसने पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई और सत्ता में आने पर नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के रूप में एक ठोस कदम उठाया। उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने हमेशा सभी धर्मों से सम्मान के साथ व्यवहार करने में विश्वास किया है। पारसियों को खुले दिल से स्वीकार किया गया। केरल में, दुनिया के सबसे पुराने गिरजाघरों में शामिल गिरजाघर भी है। हमारा एकमात्र ऐसा देश है जहां इस्लाम के सभी 72 फिरकों (पंथों) को मान्यता दी गई है।'' सिंह ने कहा कि इसके विपरीत, पाकिस्तान में अहमदिया मुसलमानों को भी उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘बांग्लादेश में भी स्थिति भयावह है। वहां हिंदुओं के साथ जो व्यवहार किया जा रहा है, वह मानवता पर कलंक है।



























