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नई दिल्ली। दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल भविष्य के लिए अपने 4जी टावरों को 5जी की क्षमताओं से लैस करने के लक्ष्य का निरंतर पीछा कर रही है। वह मोबाइल उपकरण विनिर्माताओं और ऐप डेवलपरों के साथ मिलकर 5जी के परीक्षण की अवधारणा भी तैयार कर रही है। कंपनी ने अपनी 2019-20 की वार्षिक रपट में 5जी क्षमताओं के निर्माण की बात की है। कंपनी का कहना है कि मौजूदा नेटवर्क में प्रस्तावित निवेश से ग्राहकों को तेज गति की कनेक्टिविटी मिलेगी। साथ ही यह निकट भविष्य में 5जी सेवाओं की मजबूत आधारशिला भी रखेगा। रपट में कहा गया है, मूल उपकरण निर्माताओं और ऐप्लिकेशन डेवलपरों के साथ मिलकर कंपनी 5जी के परीक्षण की अवधारणा तैयार कर रही है। यह परीक्षण विभिन्न मोबाइल ब्रॉडबैंड और औद्योगिक उपयोग के माध्यम से हमारी 5जी क्षमता को प्रदर्शित करने में मदद करेंगे। तेज गति के इंटरनेट की तेजी से बढ़ती मांग ने दुनिया के सबसे बड़े दूरसंचार बाजारों में से एक भारत में 5जी सेवाओं की जरूरत को बढ़ाया है। कंपनी ने कहा कि भविष्य के लिए तैयार होने की दिशा में हम अपने मौजूदा 4जी टावरों को 5जी की क्षमता से लैस करने के लक्ष्य पर निरंतर काम कर रहे हैं। इसके परीक्षण की तैयारियां पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रही हैं और जब एक बार स्पेक्ट्रम हासिल हो जाएगा तो हम इसका प्रभावी और सुगम परीक्षण करेंगे।
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नई दिल्ली। थिएरी बोलोर टाटा मोटर्स के स्वामित्व वाली जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) होंगे। कंपनी ने मंगलवार को बताया कि उनका कार्यकाल 10 सितंबर से प्रभावी होगा। कंपनी के बयान के मुताबिक बोलोर राल्फ स्पेथ का स्थान लेंगे। स्पेथ को जेएलआर का गैर-कार्यकारी उप-चेयरमैन बनाए जाने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखर ने बोलोर के बारे में कहा कि वह कंपनी में अनुभव की संपदा साथ लाएंगे। बोलोर इससे पहले रेनॉ के समूह सीईओ थे।
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नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव से जूझ रही अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिये बुनियादी ढांचा विकसित करने की परियोजनाओं में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक कार्यक्रम में उद्योगपतियों को संबोधित करते हुये दास ने सोमवार को कहा कि बुनियादी ढांचा क्षेत्र में बड़े निवेश की आवश्यकता है। इसमें निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे पर काम तेज होने से अर्थव्यवस्था को काफी फायदा होगा और कुछ तय लक्ष्य वाली बड़ी परियोजनाओं पर तेजी से काम बढ़ने पर आर्थिक वृद्धि पटरी पर लौट सकती है। गवर्नर ने कहा कि कृषि क्षेत्र में हाल में किये गये सुधारों से नये अवसर पैदा हुये हैं। यह क्षेत्र आज एक आकर्षक बिंदु के रूप में उभर रहा है और हमारी अर्थव्यवस्था में संयोग कृषि क्षेत्र के पक्ष में बनता दिख रहा है।
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नई दिल्ली। वाहन कलपुर्जे बनाने वाली कंपनी स्टील स्ट्रिप्स व्हील्स लिमिटेड ने सोमवार को कहा कि उसे यूरोपीय संघ (ईयू) के ट्रेलर वाहन बाजार से 70,000 पहियों के लिये 4,29,000 यूरो (करीब 3.75 करोड़ रुपये) का आर्डर प्राप्त हुआ है। शेयर बाजारों को भेजी गई नियामकीय सूचना में कंपनी ने कहा है कि उसे यूरोप से 4,29,000 यूरो का नया आर्डर प्राप्त हुआ है। कंपनी ने कहा है कि उसे यूरोपीय संघ के ट्रेलर वाहन बाजार से 70 हजार पहियों का निर्यात आर्डर प्राप्त हुआ है। यह आर्डर कंपनी को सितंबर और अक्टूबर में पूरा करना है। यह उत्पादन कंपनी के चेन्नई संयंत्र में होगा।
- नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ( ईपीएफओ) ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर महत्वपूर्ण हो चुकी ऑनलाइन सेवाओं की उपलब्धता और उस तक लोगों की पहुंच बढ़ाने के लिए अप्रैल से जून 2020 के दौरान अपने 73.58 लाख ग्राहक सदस्यों के अपने ग्राहक को जानो (केवाईसी) आंकड़े का नवीनीकरण किया है।इनमें 52.12 लाख ग्राहकों की आधार संख्या, 17.48 लाख ग्राहकों के मोबाइल नंबर (यूएएन एक्टिवेशन) और 17.87 लाख ग्राहकों के बैंक खाता दर्ज किए गए हैं। केवाईसी एक बार की प्रक्रिया है जो केवाईसी विवरण के साथ यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) को जोडऩे के माध्यम से ग्राहकों की पहचान के सत्यापन में मदद करती है।इसके अलावा, इतने बड़े पैमाने पर केवाईसी प्रक्रिया पूरी करने के लिए ईपीएफओ ने लॉकडाउन लागू रहने के दौरान भी ग्राहकों के जनसांख्यिकीय विवरण को सुधारने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है। इससे अप्रैल-जून 2020 के दौरान 9.73 लाख ग्राहकों के नाम सुधार, 4.18 लाख ग्राहकों की जन्म-तिथि में सुधार और 7.16 लाख ग्राहकों की आधार संख्या में सुधार हुए।कोविड-19 महामारी के दौरान कार्यालय में एक दूसरे से सुरक्षित दूरी (सामाजिक दूरी) सुनिश्चित करने के लिए ईपीएफओ ने केवाईसी खातों के समयबद्ध नवीनीकरण के लिए घर से काम करने (वर्क फ्रॉम होम) की रणनीति अपनाई। घर से काम करने वाले कर्मचारियों को केवाईसी के नवीनीकरण करने और विवरणों को सुधारने का काम सौंपा गया, जिससे प्रतिदिन के आधार पर लंबित काम घटता गया।इसके अलावा, आधार संख्या दर्ज कराने के लिए नियोक्ताओं पर निर्भरता को हटाने और आधार को जन्म-तिथि में तीन साल तक के अंतर के बावजूद जन्म की तारीख के प्रमाण के रूप में स्वीकार करने जैसी प्रक्रियाओं में प्रमुख सरलीकरण ने पूरी केवाईसी प्रक्रिया को तेज कर दिया है।केवाईसी नवीनीकरण से कोई भी ग्राहक ईपीएफओ के सदस्य पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उठाने में सक्षम होगा। ग्राहक प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) के तहत हाल ही में शुरू की गई कोविड -19 अग्रिमों सहित अंतिम निकासी और अग्रिम के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इससे नौकरी बदलने पर पीएफ खाते को बिना किसी झंझट के ऑनलाइन हस्तांतरण की सुविधा मिलती है। केवाईसी करा चुका कोई भी ग्राहक (सदस्य) डेस्कटॉप या उमंग ऐप के माध्यम से सभी ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उठा सकता है।
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नयी दिल्ली। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने सीमा शुल्क में मौजूदा छूटों और कानूनों की समीक्षा की शुरुआत करते हुए सभी हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। समीक्षा का मकसद इस चुनौतीपूर्ण समय की जरूरतों के अनुसार नियमों को आसान बनाना है। सीबीआईसी ने 21 अगस्त तक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं और इस संबंध में सितंबर तक एक व्यापक समीक्षा की जाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020-21 के बजट में घोषणा की थी कि मौजूदा सीमा शुल्क छूट अधिसूचनाओं की समीक्षा की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनकी उपयोगिता है या वे पुरानी हो गई हैं। सीबीआईसी ने कहा, इस संदर्भ में, दिए गए निर्धारित प्रारूप में मौजूदा सीमा शुल्क छूट सूचनाओं की समीक्षा के संबंध में सुझाव आमंत्रित किए जाते हैं। -
भुवनेश्वर। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम सेल की इकाई राउरकेला इस्पात संयंत्र ने रविवार को कहा कि उसने धातु की खपत को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन की पेशकश की है। इस्पात संयंत्र के एक अधिकारी ने बताया कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को वितरण शुल्क पर 100 रुपए और स्थानीय गोदाम से आपूर्ति पर 300 रुपए की छूट दी जा रही है। उन्होंने बताया कि नई इकाइयों को पांच साल के लिए 250 रुपए की छूट दी जाएगी। इसके अलावा प्लेट, चादरों और कॉइल्स के लिए 600 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। उन्होंने बताया कि आरएसपी और सेल के विपणन संगठन इस योजना के लिए संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं। -
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में डीजल के दाम 82 रुपये प्रति लीटर के पास पहुंच गए हैं। रविवार को लगातार दूसरे दिन डीजल कीमतों में बढ़ोतरी हुई। पेट्रोलियम विपणन कंपनियों की मूल्य अधिसूचना के अनुसार डीजल के दाम 15 पैसे प्रति लीटर बढ़ाए गए हैं। इससे दिल्ली में डीजल 81.94 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। स्थानीय बिक्रीकर या मूल्यवर्धित कर (वैट) की वजह से विभिन्न राज्यों में ईंधन कीमतों में अंतर होता है। डीजल कीमतों में रविवार को लगातार दूसरे दिन बढ़ोतरी हुई। शनिवार को भी इस वाहन ईंधन की कीमतों में 15 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। रविवार को पेट्रोल कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। दिल्ली में पेट्रोल अब डीजल से सस्ता यानी 80.43 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। पेट्रोल कीमतों में आखिरी बार 29 जून को बदलाव हुआ था। -
नई दिल्ली। सॉफ्टबैंक के समर्थन वाले ऑनलाइन किराना स्टोर ग्रोफर्स ने अगले साल के अंत तक आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की योजना बनाई है। इससे पहले कंपनी की योजना 2022 में आईपीओ लाने की थी, लेकिन कोरोना वायरस महामारी के दौरान उसके कारोबार में तेजी और मुनाफे में बढ़ोतरी के कारण इसे पहले लाने का फैसला लिया गया है। ग्रोफर्स के सह-संस्थापक और सीईओ अलबिंदर ढींडसा ने बताया कि कंपनी ने जनवरी में परिचालन लाभ हासिल किया और उम्मीद है कि इस साल के अंत तक नकदी की स्थिति सकारात्मक हो जाएगी। उन्होंने कहा कि जनवरी में परिचालन लाभ हासिल करने के बाद लॉकडाउन के दौरान हम मुनाफा कमाने की दिशा में तेजी से बढ़े हैं, हम इस साल के अंत तक ब्याज, कर, मूल्यह्रास, रिणपरिशोधन (ईबीआईटीडीए) से पहले कंपनी की कमाई और नकदी के मामले में सकारात्मक स्थिति में आने की रास्ते पर बढ़ रहे हैं। हम बाजार की भावनाओं को देख रहे हैं और 2021 के अंत तक पूंजी बाजार में आने का लक्ष्य है। इससे पहले कंपनी की योजना 2022 में सार्वजनिक निर्गम लाने की थी। कंपनी ने बीते वित्त वर्ष के दौरान 2,500 करोड़ रुपये की आय हासिल की और एक अनुमान के मुताबिक ग्रोफर्स का मूल्यांकन 6,000 करोड़ रुपये के करीब आंका गया है। - नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने श्रीलंका के केन्द्रीय बैंक के साथ 40 करोड़ अमरीकी डॉलर की मुद्रा अदला-बदली के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह सुविधा नवम्बर 2022 तक रहेगी।यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने के उपायों के तहत किया गया है। कोलम्बो स्थित भारतीय उच्चायोग दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग और साझा हितों से जुडे सभी मुद्दों पर सक्रियता से काम कर रहा है।श्रीलंका की ओर से कर्ज के भुगतान का समय बदले जाने के अनुरोध पर दोनों देशों के बीच इस सप्ताह श्रीलंका में बैठक हुई थी।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्रीलंका को कोविड महामारी के संकट से निपटने के लिए भारत की ओर से हरसंभव मदद जारी रखने का आश्वासन दिया है। श्रीलंका के राष्ट्रपति गोताबाय राजपक्षे और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच 23 मई और 27 मई को फोन पर चर्चा हुई थी।श्रीलंका ने कोविड महामारी के कारण उत्पन्न आर्थिक संकट का हवाला देते हुए भारत से कर्ज चुकाने के लिए कुछ और समय मांगा है।
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जियो बाजार हिस्सेदारी में पहले स्थान पर
नई दिल्ली। देश में कुल फोन ग्राहकों की संख्या एक माह की अवधि में 0.72 प्रतिशत घट गई है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2020 के अंत तक कुल फोन ग्राहकों की संख्या घटकर 116.94 करोड़ रह गई, जबकि मार्च अंत तक यह आंकड़ा 117.79 करोड़ पर था। शहरी क्षेत्रों में फोन कनेक्शनों की संख्या 1.41 प्रतिशत घटकर 64.71 करोड़ पर आ गई। वहीं ग्रामीण इलाकों में फोन ग्राहकों की संख्या एक माह की अवधि में 0.14 प्रतिशत बढ़कर 52.15 करोड़ से 52.22 करोड़ पर पहुंच गई। मार्च 2020 के मुकाबले अप्रैल 2020 में यदि मोबाइल फोन की बात की जाये तो इस एक माह की अवधि में देश में मोबाइल फोन कनेक्शनों की संख्या 0.71 प्रतिशत घटकर 114.95 करोड़ रह गई। वहीं मार्च अंत में मोबाइल ग्राहकों की संख्या 115.77 करोड़ पर थी। शहरी इलाकों में मोबाइल ग्राहकों की संख्या 1.42 प्रतिशत घटकर 63.84 करोड़ से घटकर 62.94 करोड़ रह गई। वहीं ग्रामीण इलाकों में मोबाइल कनेक्शनों की संख्या 0.16 प्रतिशत बढ़कर 51.92 करोड़ से 52 करोड़ से कुछ अधिक रही। फोन घनत्व की बात की जाए, तो अप्रैल में कुल फोन घनत्व घटकर 86.66 प्रतिशत पर आ गया। वहीं 20 मार्च को यह 87.37 प्रतिशत था। इस दौरान शहरी क्षेत्र में फोन घनत्व 142.31 से घटकर 140.06 रह गया। ग्रामीण इलाकों में कुल फोन घनत्व 58.79 से बढ़कर 58.85 हो गया। मोबाइल फोन के मामले में शहरी क्षेत्र में फोन घनत्व 85.87 से घटकर 85.18 प्रतिशत रह गया। शहरी क्षेत्रों में यह 138.41 से घटकर 136.22 प्रतिशत रह गया। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में वायरलेस फोन घनत्व 58.54 से बढ़कर 58.61 प्रतिशत पर पहुंच गया। ट्राई के आंकड़ों के अनुसार, 30 अप्रैल, 2020 तक मोबाइल या वायरलेस फोन बाजार में रिलायंस जियो 33.85 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे थी। भारती एयरटेल 28.06 प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी के साथ दूसरे और आइडिया-वोडा 27.37 प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर रही। सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनियों बीएसएनएल और एमटीएनएल की कुल बाजार हिस्सेदारी मात्र 10.72 प्रतिशत थी। इसमें बीएसएनएल का हिस्सा 10.43 प्रतिशत तथा एमटीएनएल का एक प्रतिशत से भी कम यानी 0.29 प्रतिशत था।
- जम्मू। कश्मीर में पैदा होने वाले केसर को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) प्रमाण पत्र मिल गया है। उपराज्यपाल जी सी मुर्मू ने कहा कि यह कश्मीर के इस उत्पाद को दुनियाभर में पहचान दिलाने के लिहाज से प्रमुख ऐतिहासिक कदम है।एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि केन्द्र सरकार ने कश्मीर में पैदा होने वाले केसर के जीआई पंजीकरण के लिये प्रमाण पत्र जारी कर दिया है। उन्होंने कहा कि मूर्मु उपराज्यपाल का पद संभालने के बाद से ही कश्मीरी केसर को जीआई प्रमाण पत्र दिलाने में खुद दिलचस्पी ले रहे थे। एक अधिकारी ने कहा, जीआई प्रमाण पत्र मिलने से कश्मीरी केसर में मिलावट के रास्ते बंद हो जाएंगे। इसके बाद अच्छी केसर के लिये अच्छे दाम मिल सकेंगे।----
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नई दिल्ली। खुदरा व्यापारियों के संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने शनिवार को चीन और पाकिस्तान से लगती सीमाओं पर तैनात भारतीय सैनिकों के लिये महिला उद्यमियों द्वारा डिजाइन की गयी 10 हजार से अधिक राखियां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भेंट कीं। सिंह को सौंपी गयी राखियों में दिल्ली में बनी मोदी राखी भी शामिल है।
कैट ने एक बयान में कहा, जवानों के लिये सिंह को सौंपी गयी राखियों में दिल्ली में बनी मोदी राखी, नागपुर की जूट राखी, जयपुर की पेंट राखी, पुणे की बीज राखी, सतना में बनी ऊन राखी, जमशेदपुर में आदिवासी वस्तुओं से बनी राखी, असम में तिनसुकिया में बनी चाय की पत्तियों वाली राखी, कोलकाता की चाय की पत्तियों से बनी राखी, कोलकाता में बनायी जाने वाली रेशम की राखी, मुंबई में बनायी जाने वाली फैशनेबल राखी आदि शामिल हैं। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि महिला उद्यमियों ने विभिन्न राज्यों की गरीब महिलाओं के सहयोग से भारतीय सामान का उपयोग करके लाखों राखी बनायी हैं। कैट ने कहा, ये राखियां देश भर में फैले व्यापार संघों के माध्यम से व्यापारियों और उनके कर्मचारियों को वितरित की जाएंगी। -
मुंबई। इंडियन बैंक ने किसानों को सोने के एवज में कर्ज देने की अपनी योजना में ब्याज दर को घटाकर सात फीसद कर दिया है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ने अपनी अल्पकालिक स्वर्ण ऋण योजना - बंपर एग्री ज्वेल पर ब्याज दर को घटाया है। इससे पहले इस उत्पाद पर ब्याज दर 7.5 फीसदी थी। बैंक द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक यह कमी वर्तमान महामारी की स्थिति को देखते हुए और जरूरतमंद किसानों को सस्ती दर पर आसान ऋण मुहैया कराने के लिए की गई है। बैंक ने कहा, 22 जुलाई, 2020 से कृषि आभूषण ऋण की ब्याज दर को सात फीसदी तय किया है। इसका मतलब है कि प्रति लाख रुपये पर हर महीने महज 583 रुपये का ब्याज। इस योजना के तहत आभूषण की कीमत का 85 प्रतिशत तक ऋण छह महीने की अवधि के लिए दिया जाता है।
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नई दिल्ली। इस साल मई में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से करीब 4.63 लाख नए सदस्य जुड़े हैं। अप्रैल में यह संख्या 2.55 लाख थी। इन आंकड़ों के जरिए रोजगार सृजन का पता चलता है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक ईएसआईसी की योजना में मार्च में 8.21 लाख नए सदस्य जुड़े थे. फरवरी में यह संख्या 11.83 लाख थी। आपको बता दें कि कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिये देश में 25 मार्च से लॉकडाउन लगाया गया । एक जून से धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था को खोला जा रहा है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की रिपोर्ट के अनुसार ईएसआईसी के पास 2019-20 में रजिस्टर्ड नए अंशधारकों की संख्या 1.51 करोड़ रही जबकि इससे पूर्व वित्त वर्ष में यह 1.49 करोड़ था. सितंबर 2017 से मार्च 2018 के दौरान 83.35 लाख नए अंशधारक ईएसआईसी योजना से जुड़े. रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2017 से मई 2020 के दौरान ईएसआईसी के पास रजिस्टर्ड नए अंशधारकों की संख्या 3.91 करोड़ रही। ये रिपोर्ट ईएसआईसी, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) और पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा संचालित विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े नये अंशधारकों के आंकड़े पर आधारित है. इन संगठनों के आंकड़े अप्रैल 2018 से जारी किया जा रहा है. इसमें सितंबर 2017 की अवधि को लिया गया है।
- जम्मू। केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना के लिए चुने हुए 37 स्थानों पर 9654 कनाल और एक मरला भूमि उद्योग और वाणिज्य विभाग को हस्तांतरित की गई है। यह फैसला आज श्रीनगर में उपराज्यपाल जी सी गुर्गु की अध्यक्षता में हुई प्रशासनिक परिषद की बैठक में किया गया।इस निर्णय से प्रस्तावित नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना होगी और केन्द्र शासित प्रदेश में स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। इससे रोजगार के अवसर बढेंग़े और क्षेत्र का समग्र विकास होगा।
- नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बैंकों से कहा है कि वे कोविड-19 महामारी के दौरान अत्यधिक जोखिम से बचें। द्विवार्षिक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट की भूमिका में डॉ. शक्तिकांत दास ने कहा है कि बैंकों और वित्तीय कंपनियों की सर्वोच्च प्राथमिकता अब पूंजी का स्तर सुधारने और उत्थान शक्ति में सुधार लाने की होनी चाहिए।श्री शक्तिकांत दास ने कहा कि देश की वित्तीय प्रणाली सुदृढ है लेकिन अत्यधिक सावधानी से काम करना वक्त की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकारों, केंद्रीय बैंकों और अन्य सरकारी एजेंसियों ने विश्वभर में व्यापारियों, निवेशकों और उपभोक्ताओं के बीच वित्तीय दवाब दूर करने के लिए समन्वित प्रयास किए हैं।
- नई दिल्ली। सिल्पा जल्द ही फैवीपिराविर लांच करने जा रही है। इसका इस्तेमाल कोरोना के मरीजों के इलाज में होगा। काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) ने कम लागत में यह दवा तैयार की है।आर्थिक खबरों की वेबसाइट मिंट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सिप्ला इस दवा को सिप्लेंजा ब्रांड नाम से लांच करेगी। यह अगस्त के पहले हफ्ते में बाजार में आ जाएगी। इस दवा की एक टैबलेट की कीमत 68 रुपए है। सिप्ला ने कहा कि उसे डीसीजीआई से यह दवा लांच करने की इजाजत मिल गई है। मूल रूप से जापान की कंपनी फुजी फार्मा ने यह दवा तैयार की है। क्लिनिकल ट्रायल में फैवीपिराविर के अच्छे नतीजे आए हैं। कम और मध्यम स्तर के संक्रमण के इलाज में यह दवा कारगर साबित हुई है। सीएसआईआर ने देश में उपलब्ध केमिकल्स का इस्तेमाल करके इस दवा के लिए ऐक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट (एपीआई) तैयार किया है। फिर इसमें इसे दवा के उत्पादन के लिए सिप्ला को दिया। कंपनी ने कहा कि सिप्ला ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में दवा बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। .
- नई दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) शुक्रवार को कारोबार के दौरान 14 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े के पार निकल गया। कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर चार प्रतिशत की बढ़त के साथ अपने सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंच गया।कंपनी के अलग से सूचीबद्ध आंशिक चुकता शेयरों का बाजार पूंजीकरण 53,821 करोड़ रुपये है। इस तरह कंपनी का कुल बाजार पूंजीकरण अब 14,07,854.41 करोड़ रुपये हो गया है।बीएसई में देश की सबसे मूल्यवान कंपनी का शेयर 4.32 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,149.70 रुपये पर पहुंच गया। यह इसका सर्वकालिक उच्चस्तर है। इससे बीएसई में कंपनी का बाजार पूंजीकरण 13,54,033.41 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में कंपनी का शेयर 4.47 प्रतिशत की बढ़त के साथ अपने सर्वकालिक उच्चस्तर 2,149.90 रुपये पर पहुंच गया।---
- हैदराबाद। विविध क्षेत्रों में कार्यरत महिंद्रा समूह ने यहां वर्चुअल तरीके से अपने महिंद्रा विश्वविद्यालय का शुभारंभ किया। समूह ने कहा है कि हमारा मकसद देश में विश्वस्तरीय, भविष्य के अनुकूल शिक्षा प्रदान करना है।समूह के चेयरमैन और महिंद्रा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आनंद महिंद्रा ने बयान में कहा कि उच्च गुणवत्ता की शिक्षा में लोगों के साथ-साथ राष्ट्र में भी बदलाव लाने की ताकत होती है। बयान में कहा गया है कि महिंद्रा विश्वविद्यालय का प्रयास संतुलित शिक्षा प्रदान करने का होगा। इसमें नई प्रौद्योगिकी के साथ लिबरल आट्र्स का समावेश रहेगा, जिससे हम समग्र सोच वाली अगली पीढ़ी तैयार कर सकेंगे।तेलंगाना के सूचना प्रौद्योगिकी एवं उद्योग मंत्री के.टी. रामाराव ने कहा, आज हम जिस प्रौद्योगिकी का अनुभव ले रहे हैं उसमें किसी कारोबार या सामाजिक जटिलता को हल करने की क्षमता है। प्रौद्योगिकी और मानविकी को मुख्यधारा के उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम से जोडऩे से सिर्फ युवा लोगों ही नहीं पूरे देश को लाभ होगा। बयान में कहा गया है कि यह एक स्वायत्त विश्वविद्यालय के रूप में काम करेगा। इसमें डाटा साइंस, ब्लॉकचेन और डाटाएनालिटिक्स जैसी सभी उभरती प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल किया जाएगा। महिंद्रा विश्वविद्यालय टेक महिंद्रा की गैर लाभकारी अनुषंगी महिंद्रा एजुकेशनल इंस्टिट्यूशंस का हिस्सा है। 130 एकड़ क्षेत्र में फैला यह विश्वविद्यालय स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी पाठ्यक्रम उपलब्ध कराएगा।--
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नई दिल्ली। मोबाइल वॉलेट कंपनी पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा ने बृहस्पतिवार को कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान उसके मंच पर लेनदेन में 3.5 गुना वृद्धि देखने को मिली है। लॉकडाउन की वजह से भी सुरक्षित लेनदेन के लिए लोगों का डिजिटल भुगतान करना बढ़ा है। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2020 को संबोधित करते हुए शर्मा ने कहा कि कंपनी के मंच पर हर सप्ताह किए जाने वाले लेनदेन की औसत संख्या में भी बढ़ोत्तरी हई है। उन्होंने कहा कि पहले कोई ग्राहक जितना लेनदेन हमारे मंच से करता था, अब उसमें ढाई से साढ़े तीन गुना की वृद्धि हुई है, जो ग्राहक पहले से कंपनी के मंच का इस्तेमाल कर रहे हैं उनका लेनदेन बढ़ा है। वहीं नए ग्राहक भी बढ़े हैं। मंच पर हर सक्रिय उपयोक्ता सप्ताह में औसतन दो लेनदेन कर रहा है। शर्मा ने कहा कि अपने मंच पर कैशबैक सुविधा को बंद करने के बावजूद पेटीएम अपने उपयोक्ताओं की संख्या बढ़ाने में सफल रही है। -
नई दिल्ली। इस साल जून महीने में 4जी डाउनलोड स्पीड के मामले में रिलायंस जियो 16.5 मेगाबिट्स प्रति सेकंड (एमबीपीएस) की औसत स्पीड के साथ शीर्ष स्थान पर रही। हालांकि अपलोड स्पीड के मामले में वोडाफोन और आइडिया पहले पायदान पर रहीं। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के आंकड़ों से यह पता चला। ट्राई के मायस्पीड पोर्टल पर प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, जून महीने के दौरान डाउनलोड स्पीड के मामले में जियो के बाद आठ एमबीपीएस के साथ आइडिया का स्थान रहा। इसके बाद 7.5 एमबीपीएस और 7.2 एमबीपीएस के साथ क्रमश: वोडाफोन और एयरटेल का स्थान रहा। अपलोड स्पीड के मामले में वोडाफोन और आइडिया दोनों 6.2 एमबीपीएस के साथ संयुक्त रूप से शीर्ष पर रहीं। जियो और एयरटेल दोनों की अपलोड स्पीड 3.4 एमबीपीएस रही। डाउनलोड स्पीड दूसरों द्वारा भेजे गये संदेशों, चित्रों, वीडियो आदि को देखने में मदद करती है, जबकि अपलोड गति संदेशों, चित्रों आदि को भेजने में काम आती है। वोडाफोन और आइडिया ने अपने मोबाइल कारोबार का विलय कर दिया है, लेकिन कारोबार का पूरी तरह से एकीकरण नहीं हो पाने के कारण दोनों 4जी स्पीड का विवरण अलग-अलग देती हैं। दूरसंचार कंपनियों की डेटा स्पीड मार्च-अप्रैल में निचले स्तर पर आ जाने के बाद जून में बेहतर हुई हैं। लॉकडाउन की अवधि के दौरान, जियो की डाउनलोड स्पीड कम होकर 13.3 एमबीपीएस पर आ गयी थी। इसी तरह वोडाफोन की स्पीड 5.6 एमबीपीएस, एयरटेल की 5.5 एमबीपीएस और आइडिया की 5.1 एमबीपीएस पर आ गयी थी।
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फिक्की छत्तीसगढ़ प्रदेश परिषद के संयोजन में सीएसआईडीसी, छत्तीसगढ़ सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में बायो-इथेनॉल एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश के अवसर पर वेबीनार आयोजित
छत्तीसगढ़ बायो-इथेनॉल और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए निवेश की पसंदीदा जगह है जहां आने वाले समय में 200 फूड पार्क स्थापित होंगे- पी. अरुण प्रसाद- आईएफएस, एमडी-सीएसआईडीसी, छत्तीसगढ़ सरकार
छत्तीसगढ़ सरकार का लघु वन उपज पर बहुत ज़ोर है और इसे आगामी औद्योगिक नीति में सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने की योजना है- संजय शुक्ला-आईएफएस, एमडी- छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उपज सहकारी समिति
रायपुर। फिक्की छत्तीसगढ़ राज्य परिषद और सीएसआईडीसी, छत्तीसगढ़ सरकार ने संयुक्त रूप से जैव-इथेनॉल और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश के अवसर पर बुधवार को एक वेबीनार का आयोजन किया। प्रदीप टंडन, अध्यक्ष फिक्की - छत्तीसगढ़ राज्य परिषद, पी. अरुण प्रसाद, एमडी, सीएसआईडीसी, संजय शुक्ला, एमडी छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ और गुलरेज़ आलम, सदस्य फिक्की -छत्तीसगढ़ राज्य परिषद इस वेबीनार के पैनलिस्ट थे। फिक्की छत्तीसगढ़ राज्य परिषद द्वारा आयोजित इस ऑनलाइन (आभासी) सत्र में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के घरेलू और राष्ट्रीय स्तर के बड़े उद्यमियों के साथ-साथ व्यक्तिगत और संस्था गत निवेशकों की भी अच्छी-खासी भागीदारी रही।
इस अवसर पर सीएसआईडीसी के प्रबंध निदेशक पी. अरुण प्रसाद ने अपने संबोधन में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की प्रदेश में संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्व बैंक के मुताबिक कारोबार की सुगमता के लिहाज से छत्तीसगढ़ सर्वोच्च उपलब्धियां हासिल करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है। सरकार की योजना प्रदेश में जिला व प्रखंड स्तर पर 200 फूड पार्क स्थापित करने की है। प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर छत्तीसगढ़ देश में तेजी से तरक्की करने वाले मजबूत राज्य के रूप में उभर रहा है। प्रदेश में 80 फीसदी लोग कृषि और कृषि आधारित व्यवसाय पर आश्रित हैं। हमारे यहां 88 प्रजातियों के औषधीय पौधे उगाए जाते हैं और सरकार इथेनॉमेडिसीन इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने में सदैव आगे रही है। इस कार्य में सदियों से अनुसूचित जाति के लोग लगे हैं। छत्तीसगढ़ की सीमाएं 7 राज्यों से मिलती हैं। हमारा प्रदेश रेल, सड़क और हवाई यातायात की दृष्टि से समृध्द है और देश का लॉजिस्टिक्स हब बनने की पूरी क्षमता रखता है।
यहां यह उल्लेख करना आवश्यक होगा कि छत्तीसगढ़ अपनी जरूरत से अधिक (अधिशेष) धान उत्पादन करने वाले राज्यों में शामिल है। ताजा आंकड़ों के हिसाब से राज्य में 80 लाख टन धान की खरीद की गई है जो भविष्य में और बढ़ेगी। हाल ही में, केंद्र सरकार ने अधिशेष चावल को इथेनॉल में बदलने की अनुमति दी है। इस इथेनॉल का उपयोग अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजऱ बनाने और पेट्रोल सम्मिश्रण में किया जाएगा। वाणिज्य और उद्योग विभाग ने छत्तीसगढ़ राज्य में इथेनॉल संयंत्र की स्थापना के लिए प्रस्ताव (ईओआई) मांगे हैं। इस सिलसिले में 21 जुलाई 2020 को हुई प्री-बिड मीटिंग के दौरान प्रतिभागियों ने कोविड19 महामारी की वजह से अंतिम तिथि 10 अगस्त 2020 तक बढ़ाए जाने का अनुरोध किया। पी. अरुण प्रसाद ने इच्छुक बोलीकर्ताओं से अनुरोध किया है कि वे अपने प्रस्ताव निर्धारित आवेदन प्रारूप (ईओआई) के अनुसार ही प्रस्तुत करें।
छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उपज सहकारी समिति के एमडी संजय शुक्ला ने कहा कि लघु वन उपज के संग्रह और प्राथमिक प्रसंस्करण को सुगम बनाने के साथ-साथ लघु वन उपज प्रसंस्करण उद्योग की स्थापना से ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और इसका वास्तविक लाभ सीधे इस कारोबार से जुड़ी ग्रामीण आबादी को होगा। उन्होंने आह्वान किया कि लघु वन उपज खरीदें, उनका प्रसंस्करण करें और 31 मार्च 2022 तक अत्याधुनिक प्रसंस्करण उद्योग की स्थापना कर यह कारोबार 500 करोड़ रुपये से ऊपर ले जाएं तभी ग्रामीण पृष्ठभूमि के 50 हजार से अधिक लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य प्राप्त हो सकेगा। इससे पूर्व प्रदीप टंडन, अध्यक्ष, फिक्की छत्तीसगढ़ ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि आज प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की आवश्यकता है क्योंकि यह ग्रामीण क्षेत्रों के शहरीकरण में मदद करेगा, कच्चे कृषि उत्पादों का मूल्यवर्धन कर बेहतर कीमत दिलाएगा, ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार पैदा करेगा और साथ ही अर्थव्यवस्था के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा। इस अवसर पर गुलरेज़ आलम, सदस्य-फिक्की छत्तीसगढ़ राज्य परिषद व निदेशक, एबीआईएस एक्सपोट्र्स आई प्राइवेट लिमिटेड ने अपने धन्यवाद अभिभाषण में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए प्रदेश सरकार की पहल की सराहना करते हुए निवेशकों का आह्वान किया कि वे पूरे इत्मीनान से उद्योग लगाएं और कारोबार करें। सरकार खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के विकास के लिए प्रयत्नशील है। यहां न सिर्फ कृषि उत्पादन पर्याप्त है बल्कि उद्योग लगाने के लिए भूमि व स्थानीय बाजार के साथ-साथ निर्यात की भी भरपूर संभावनाएं हैं। सरकार खाद्य प्रसंस्करण उद्योग लगाने के लिए पर्याप्त अनुदान और आर्थिक सहयोग (सब्सिडी) प्रदान कर रही है।
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मुंबई। अर्थव्यवस्था में नकदी के इस्तेमाल को कम करने के लिये सरकार को ग्राहकों के बीच क्यूआर (क्विक रिस्पांस) कोड के जरिये लेनदेन को बढ़ावा देने के लिये प्रोत्साहन देने चाहिये। रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट में बुधवार को यह कहा गया है। क्यूआर कोड के जरिये विभिन्न बिक्री केन्द्रों और दुकानों पर मोबाइल से आसानी से भुगतान किया जा सकता है। क्यूआर कोड पर्याप्त सूचनाओं को अपने में संग्रहित रख सकता हे। यह एक तरह का बारकोड होता है जिसे मशीन के जरिये पढ़ लिया जाता है। एक जापानी कंपनी डेंसो वेव ने1990 में क्यूआर कोड का अविष्कार किया था। भारत में क्यूआर कोड भुगतान प्रणाली व्यापक तौर पर तीन तरह से भारत क्यूआर, यूपीआई क्यूआर और प्राप्रिएटरी क्यूआर-- के जरिये काम करती है। आईआईटी बंबई के प्रोफेसर एमरिटस डी बी पाठक की अध्यक्षता वाली रिजर्व बैंक की इस समिति ने और भी कई सुझाव इस संबंध में दिये हैं। उसने कहा है कि जो व्यापारी अलेक्ट्रानिक तरीके से भुगतान स्वीकार करते हैं उन्हें कर प्रोत्साहन भी दिया जाना चाहिये। क्यूआर कोड के विश्लेषण के लिये गठित इस समिति ने कहा है कि देश में क्यूआर कोड के जरिये लेनदेन को बढ़ावा देने के लिये और इसे लोगों के बीच आकर्षक बनाने के लिये सरकार को प्रोत्साहन योजनाओं को भी शुरू करना चाहिये। क्यूआर कोर्ड के जरिये कोई भी बिजली, पानी, पेट्रोल, डीजल, किराना सामान, यात्रा और अन्य कई तरह के भुगतान कर सकता है। रिजर्व बैंक को सौंपी गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कागज आधारित क्यूआर कोड काफी सस्ता और लागत प्रभावी है। इसमें रखरखाव की भी जरूरत नहीं पड़ती है। रिजर्व बैंक ने इस रिपोर्ट पर लोगों तथा अन्य संबंध पक्षों से 10 अगस्त तक अपने सुझाव और टिप्पणियां भेजने को कहा है। -
नई दिल्ली। देश में यूरिया का उत्पदन वर्ष 2019-20 में बढ़कर 244.55 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया जबकि इसकी बिक्री पांच प्रतिशत बढ़कर 336.97 लाख टन हो गई। सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। यूरिया के घरेलू उत्पादन और मांग के बीच की अंतर को आयात के माध्यम से पूरा किया जाता है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि देश भर में उर्वरकों का उत्पादन और उसकी आवाजाही सहज बनी हुई है। वर्ष 2019-20 के दौरान 244.55 लाख टन का रिकॉर्ड यूरिया उत्पादन हुआ जो वर्ष 2018-19 में 240 लाख टन था। बयान में कहा गया है, जबकि यूरिया की बिक्री या खपत 336.97 लाख टन हो गई, जबकि पिछले वर्ष यानी वर्ष 2018-19 में 320.20 लाख टन थी। केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री डी वी सदानंद गौड़ा ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बावजूद देश भर में उर्वरकों का उत्पादन और उसे किसी स्थान पर पहुंचाने में कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने कहा कि इस साल भी उर्वरकों की कोई कमी नहीं होगी।





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