सुशासन की सबसे खूबसूरत तस्वीर, दिव्यांग अंजू को मिली हौसलों की नई उड़ान
0- रेंगाडबरी शिविर में पूरी हुई एक माँ की उम्मीद, व्हीलचेयर से आसान होगा बेटी के स्कूल का सफर
बालोद. बालोद जिले के डौण्डीलोहारा विकासखण्ड के वनांचल में बसे ग्राम भीमपुरी की रहने वाली सगनी बाई का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। खेती-किसानी की कड़ी मेहनत के बीच उनके दिल में हमेशा अपनी बेटी अंजू के भविष्य को लेकर एक चिंता बनी रहती थी। अंजू जन्म से ही दिव्यांग है। जैसे-जैसे अंजू बड़ी हो रही थी, उसे कहीं ले जाने, उठाकर बैठाने और दैनिक कार्यों में उसकी मदद करने में सगनी बाई को काफी शारीरिक और मानसिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। सबसे बड़ी चुनौती थी अंजू की पढ़ाई। दिव्यांगता के कारण अंजू को स्कूल आने-जाने में भारी परेशानी होती थी। सगनी बाई, लम्बे समय से अपनी लाडली बेटी अंजू के लिए एक व्हीलचेयर का सपना देख रही थीं, लेकिन सही मार्गदर्शन और संपर्क के अभाव में समय बीतता जा रहा था और उम्मीदें धुंधली हो रही थीं।
सगनी बाई को जब जानकारी मिली कि सुशासन तिहार के अंतर्गत ग्राम रेंगाडबरी में जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया जा रहा है, तो उनकी आँखों में एक बार फिर चमक आ गई। वे बिना देर किए अपनी बेटी की समस्या लेकर शिविर में पहुँची। सगनी बाई ने रेंगाडबरी शिविर में पहुँचकर अपनी बेटी अंजू के लिए व्हीलचेयर हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। उनके आवेदन पर प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाई। समाज कल्याण विभाग द्वारा आवेदन पर त्वरित कार्यवाही करते हुए मौके पर ही सारी प्रक्रिया पूरी की गई और अंजू को एक नई व्हीलचेयर प्रदान कर दी गई। लम्बा इंतजार जब चंद मिनटों में पूरा हुआ, तो माँ सगनी बाई की आँखों से खुशी के आँसू छलक पड़े। व्हीलचेयर पाकर अपनी खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि हम दूरदराज के रहने वाले लोग हैं, दफ्तरों के चक्कर काटना हमारे लिए मुश्किल था। लेकिन सुशासन तिहार ने हमारी सुध ली और आज मेरी बेटी के लिए व्हीलचेयर की मांग पूरी हो गई। अब इसे स्कूल ले जाने-लाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। वहीं, नई व्हीलचेयर पर बैठते ही अंजू का चेहरा खिल उठा। उसने मुस्कुराते हुए अपनी मासूम आवाज में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताते हुए कहा ’’थैंक्यू सीएम सर’’। अब अंजू के कदमों को पहिए और उसके हौसलों को एक नई उड़ान मिल चुकी है।











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