126 तालाबों को भरने वाली सदियों पुरानी जल प्रणाली को करीब से समझा
-धमधा में पुरखौती विरासत यात्रा का आयोजन
-बूढ़ा नरवा से लेकर प्राचीन तालाबों, मंदिरों और ऐतिहासिक धरोहरों तक पहुंचे प्रतिभागी
धमधा, । धमधा की पहचान से जुड़े “छै आगर छै कोरी तरिया” यानी 126 तालाबों को भरने वाली पारंपरिक जल संरचना बूढ़ा नरवा को समझने के उद्देश्य से धर्मधाम गौरवगाथा समिति, धमधा ने पुरखौती विरासत यात्रा का आयोजन किया। इस यात्रा में प्रतिभागियों ने तालाबों की श्रृंखला, बूढ़ा नरवा और खेतों से तालाबों तक पानी पहुंचाने वाली प्राचीन जल व्यवस्था को मौके पर जाकर देखा और समझा।
यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण एक क्षेत्र में मौजूद लगभग 50 लबालब भरे तालाबों का एक साथ दिखाई देना रहा। प्रतिभागियों को बताया गया कि बूढ़ा नरवा खेतों से आने वाले वर्षाजल को एकत्रित कर उसे आगे तालाबों तक पहुंचाने वाली महत्वपूर्ण जल संरचना है और इसकी व्यवस्था से लगभग 20 तालाबों तक पानी पहुंचता है। इस दौरान तालाबों के आपसी जुड़ाव, जल के प्रवाह और इस पूरी व्यवस्था के पीछे विकसित पारंपरिक जल प्रबंधन की समझ को स्थल पर देखा गया। अतिथियों ने कहा कि आज जब जल संरक्षण को लेकर नए उपाय तलाशे जा रहे हैं, तब धमधा की यह पुरानी व्यवस्था अपने आप में अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय है।गायत्री मंदिर, बस स्टैंड में पंजीयन के बाद पंडितवा तालाब से यात्रा प्रारंभ हुई। यहां से प्रतिभागियों ने बिरझापुर स्थित शनिदेव तालाब के जीर्णोद्धार एवं वृक्षारोपण कार्य का अवलोकन किया। बरहापुर रोड स्थित बूढ़ा नरवा देखते हुए गोपाल तालाब पहुंचे। इसके बाद आत्मानंद विद्यालय के पास दानी तालाब और नइया तालाब का भ्रमण किया गया। भानपुर रोड स्थित टार तालाब के बाद यात्रा महामाया मंदिर और बूढ़ादेव मंदिर पहुंची।यात्रा में धमधा की पुरानी सामाजिक एवं सांस्कृतिक बसाहट को भी शामिल किया गया। तमेरपारा में श्री विष्णु प्रसाद ताम्रकार की अनूठी मूर्तिकला तथा श्री विमल चंद्र ताम्रकार के सौ वर्ष पुराने घर को देखकर प्रतिभागियों ने धमधा की स्थापत्य, कला और पारंपरिक जीवन शैली की झलक देखी। इस दौरान स्थानीय इतिहास से जुड़े शोधार्थियों ने विभिन्न स्थलों के संबंध में उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारियां भी साझा कीं।पुरखौती विरासत यात्रा में पूर्व प्राचार्य, भिलाई महाविद्यालय आचार्य महेशचंद्र शर्मा, साहित्यकार दुर्ग श्रीमती विद्या गुप्ता, पूर्व प्राचार्य एवं सामाजिक संस्था अथक के अध्यक्ष श्री पी.आर. साहू, अभिनव जीवन कल्याण समिति दुर्ग के संयोजक श्री जगमोहन सिन्हा तथा नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती श्वेता प्रशांत अग्रवाल अतिथि के रूप में शामिल हुए।
यात्रा में वीरेंद्र देवांगन, ईश्वरी निर्मलकर, मनोज सोनी, संतोष उमरे, सामर्थ्य ताम्रकार, भुवनेश्वर धीवर, सेवानिवृत्त शिक्षक डी.पी. शर्मा, मुखराज किशोर यादव, विश्राम सिंह चोपड़े, विवेकानंद ताम्रकार, सुनील साहू मड़ियापार, पत्रकार मोहम्मद फारूखी, अजय चौधरी भिलाई, रामदेव शर्मा सहित अनेक लोग शामिल हुए। चंदूलाल चंद्राकर शासकीय महाविद्यालय, धमधा के शोधार्थी रोशन साहू, प्रीति साहू, देवकी कश्यप, विकास वैष्णव, गौरी निषाद, पायल रजक और तोषी यादव सहित अन्य प्रतिभागियों ने भी सहभागिता की।
धर्मधाम गौरवगाथा समिति के अनुसार, धमधागढ़ हेरिटेज वॉक का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराना नहीं, बल्कि उनके पीछे छिपे इतिहास, तकनीक, लोकस्मृति और सामाजिक जीवन को समझना है। समिति के शोधार्थियों द्वारा अंग्रेजी अभिलेखों और ऐतिहासिक दस्तावेजों से जुटाई गई जानकारियों को स्थानीय स्थलों से जोड़कर देखने का प्रयास किया जा रहा है। धमधा की 126 तालाबों की श्रृंखला और बूढ़ा नरवा जैसी जल विरासत यह बताती है कि पूर्वजों ने वर्षाजल के संरक्षण और उपयोग के लिए कितनी सुविचारित व्यवस्था विकसित की थी।


.jpg)

.jpg)








Leave A Comment