गंभीर तीव्र कुपोषण से सामान्य पोषण श्रेणी में पहुंची याक्षी
- सामुदायिक प्रयासों, नियमित निगरानी और परिवार की सहभागिता से मिली सफलता
राजनांदगांव । सामुदायिक स्तर पर कुपोषण प्रबंधन के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों से बच्चों के पोषण स्तर में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। जिले के ग्राम बोईरडीह निवासी नन्हीं याक्षी पाल भी ऐसे ही प्रयासों से कुपोषण से बाहर निकलकर सामान्य पोषण श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। याक्षी, माता श्रीमती लक्ष्मी पाल एवं पिता श्री सूर्य प्रकाश पाल की पुत्री हैं। प्रारंभिक पोषण मूल्यांकन के दौरान याक्षी को गंभीर तीव्र कुपोषण की श्रेणी में चिन्हांकित किया गया था। उस समय उसका वजन 4.9 किलोग्राम एवं लंबाई 65 सेंटीमीटर दर्ज की गई थी। परिवार की आर्थिक परिस्थितियों और माता-पिता के दैनिक कार्य में व्यस्त रहने के कारण याक्षी की देखभाल मुख्य रूप से उसके दादा-दादी श्री उमाशंकर एवं श्रीमती गीता द्वारा की जा रही थी। याक्षी के पोषण स्तर में सुधार के लिए उसे सामुदायिक स्तर पर तीव्र कुपोषण प्रबंधन कार्यक्रम से जोड़ा गया। इसके तहत नियमित रूप से वजन एवं लंबाई का मापन, फॉलोअप, अतिरिक्त टेक-होम राशन तथा पोषण संबंधी परामर्श दिया गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा परिवार को बच्चे की आयु के अनुरूप पर्याप्त एवं विविध आहार, भोजन की उचित मात्रा और आवृत्ति तथा बेहतर देखभाल के संबंध में लगातार मार्गदर्शन दिया गया। परिवार ने भी पोषण संबंधी सलाह को अपनाते हुए याक्षी के आहार एवं देखभाल पर विशेष ध्यान दिया। नियमित निगरानी और परिवार की सक्रिय सहभागिता से याक्षी के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में लगातार सुधार हुआ।
आज याक्षी का वजन 7 किलोग्राम एवं लंबाई 70 सेंटीमीटर दर्ज की गई है। वह कुपोषण से बाहर निकलकर सामान्य पोषण श्रेणी में पहुंच चुकी है। याक्षी की यह सफलता समय पर कुपोषण की पहचान, नियमित निगरानी, उचित पोषण परामर्श, पूरक आहार और परिवार की सक्रिय सहभागिता के कारण संभव हो सका।













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