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कोविड महामारी के कारण नागर विमानन क्षेत्र में 10 प्रतिशत नौकरियों में कमी आई : सरकार

नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद में बताया कि कोविड-19 महामारी के  कारण हवाई यातायात में पिछले वर्ष की तुलना में 2020-2021 के दौरान 66 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी और महामारी के दौरान नागर विमानन क्षेत्र के विभिन्न सेक्टरों की कुल नौकरियों में 10 प्रतिशत यानी करीब 1.9 लाख नौकरियों की कमी आई है। राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यह जानकारी दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि 27 मार्च, 2022 से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को शुरू किए जाने, नए हवाई अड्डे की स्थापना, मौजूदा हवाई अड्डों और एयरलाइनों आदि के विस्तार के परिणामस्वरूप भारतीय विमानन सेक्टर में नौकरियों में वृद्धि होगी। कांग्रेस के सदस्य रिपुन बोरा द्वारा पिछले तीन वर्षों के दौरान कैरियर सेवाओं, विमान पत्तनों के प्रचालन और अनुरक्षण के काम में लगी निजी क्षेत्र की कंपनियों में कार्यरत लोगों की नौकरियां छूट जाने के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते सिंधिया ने कहा, ‘‘एयरलाइन, हवाई अड्डा, ग्राउंड हैंडलिंग और हवाई कार्गो सेक्टर में कुल नौकरियों में लगभग 19,200 की कमी आई है।'' उन्होंने कहा, ‘‘इन सेक्टरों में कुल नौकरियों में लगभग 10 प्रतिशत (करीब 1.9 लाख) की कमी आई है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 31 मार्च, 2020 की स्थिति के अनुसार भारत में एयरलाइन कर्मचारियों की कुल संख्या लगभग 74,800 थी, जो 31 दिसंबर, 2021 को घटकर लगभग 65,600 हो गई है। उन्होंने बताया कि हवाईअड्डा सेक्टर में कर्मचारियों की कुल संख्या 31 मार्च 2020 की स्थिति के अनुसार लगभग 73,400 थी, जो घटकर 31 दिसंबर, 2021 को घटकर लगभग 65,700 हो गई है। उन्होंने कहा कि ग्राउंड हैंडलिंग के क्षेत्र में 31 मार्च, 2020 को कर्मचारियों की कुल संख्या लगभग 30,800 थी, जो 31 दिसंबर, 2021 को घटकर लगभग 27,600 हो गई है। उनके मुताबिक हवाई कार्गो सेक्टर ही एक ऐसा क्षेत्र रहा जहां कर्मचारियों की कुल संख्या में वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि हवाई कार्गो सेक्टर में कर्मचारियों की संख्या 31 मार्च, 2020 को लगभग 9,600 थी जो बढ़कर 31 दिसंबर, 2021 को लगभग 10,500 हो गई है। सिंधिया ने कहा कि उद्योग जगत के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए सरकार ने उद्योग सहभागियों और हितधारकों के साथ चर्चा की है। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के कारण हवाई यातायात में पिछले वर्ष की तुलना में 2020-2021 के दौरान 66 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई है। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले दो वर्षों के दौरान कोविड महामारी ने विमानन क्षेत्र सहित सभी व्यवसायों के राजस्व स्रोत पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।'' उन्होंने कहा कि सामान्य स्थितियों में सरकार द्वारा हवाई किराए ना तो निर्धारित किए जाते हैं और ना ही विनियमित किए जाते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अभूतपूर्व परिस्थितियों की वजह से सरकार द्वारा एक विशेष उपाय के रूप में ऊपरी और निचली सीमा वाले किराया बैंड शुरू किए गए थे। किराया बैंड की व्यवस्था से यात्रियों के साथ साथ एयरलाइनों के हित संरक्षण की रक्षा के दोहरे उद्देश्यों की पूर्ति होती है।'' उन्होंने बताया कि महामारी के प्रसार के परिणामस्वरूप देश में मार्च, 2020 से एयरलाइन परिचालन बंद कर दिए गए थे लेकिन कोविड की स्थिति में सुधार के आधार पर सुरक्षित हवाई यात्रा के लिए विभिन्न प्रोटोकॉल के साथ मई, 2020 में घरेलू प्रचालन को फिर से चरणबद्ध तरीके से आरंभ करने की अनुमति दी गई। उन्होंने कहा कि समय-समय पर हालात और हवाई यात्रा के लिए यात्रियों की मांग का आकलन करने के बाद क्षमता संबंधी प्रतिबंध 18 अक्टूबर, 2021 से हटा लिए गए।'' सिंधिया ने कहा, ‘‘सरकार द्वारा चलाए गए राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान, वर्ष 2021-2022 में हवाई यातायत के पुनरुत्थान, 27 मार्च 2022 से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को शुरू किए जाने, नए हवाई अड्डे की स्थापना, मौजूदा हवाई अड्डों और एयरलाइनों आदि के विस्तार के परिणामस्वरूप भारतीय विमानन सेक्टर में नौकरियों में वृद्धि की संभावना है।

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