साइबर और डेटा सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलू : राष्ट्रपति मुर्मू
गांधीनगर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि आधुनिक युग में साइबर सुरक्षा, औद्योगिक सुरक्षा, डेटा सुरक्षा, तटीय सुरक्षा और कूटनीति राष्ट्रीय सुरक्षा के समान रूप से महत्वपूर्ण घटक बन गए हैं। मुर्मू गांधीनगर में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) के पांचवें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा, ''पहले सुरक्षा का संबंध केवल सैनिकों और पारंपरिक हथियारों से था। हालांकि, आज औद्योगिक सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, डेटा सुरक्षा, तटीय सुरक्षा और कूटनीति भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।'' राष्ट्रपति ने कहा कि डिजिटल खतरों में वृद्धि के साथ सुरक्षा परिदृश्य तेजी से जटिल होता जा रहा है।
उन्होंने कहा, ''कुछ साल पहले, डिजिटल अरेस्ट, साइबर अपराध और फिशिंग हमलों जैसे शब्द व्यापक रूप से ज्ञात नहीं थे, लेकिन आज वे महत्वपूर्ण खतरों के रूप में उभरे हैं।'' उन्होंने कहा, ''राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों का महत्व और जिम्मेदारी बहुत बढ़ गई है। देश को ऐसे पुलिस अधिकारियों की आवश्यकता है, जो साइबर धोखाधड़ी के अपराधियों को पकड़ने और उन्हें सजा दिलाने में तकनीकी रूप से सक्षम और कुशल हों, ऐसे फॉरेंसिक विशेषज्ञों की आवश्यकता है, जो अदालतों की जांच में खरे उतर सकें, और साथ ही ऐसे सक्षम पेशेवरों की आवश्यकता है जो भू-राजनीति की बारीकियों को समझ सकें तथा वैश्विक मंच पर भारत के दृष्टिकोण को आत्मविश्वास और स्पष्टता के साथ व्यक्त कर सकें।'' मुर्मू ने न्यायिक मानकों को पूरा करने वाले विश्वसनीय डिजिटल साक्ष्य प्रदान करने में सक्षम फॉरेंसिक विशेषज्ञों के बढ़ते महत्व पर भी प्रकाश डाला। राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय शक्ति न केवल सैन्य कर्मियों और सुरक्षा बलों के साहस और शौर्य पर निर्भर करती है, बल्कि सुरक्षा के लिए आवश्यक हथियारों और गोला-बारूद के संबंध में गुणवत्ता, उत्पादन, प्रशिक्षण और तकनीकी आत्मनिर्भरता पर भी निर्भर करती है, और सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, ''स्वदेशी क्षमताओं और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देकर रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम की जा रही है।'' उन्होंने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के कार्यों की भी सराहना की और कहा कि इन पहल ने साइबर खतरों के प्रति देश की प्रतिक्रिया को मजबूत किया है और नागरिकों के लिए रिपोर्टिंग तंत्र में सुधार किया है। राष्ट्रपति ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे उभरते क्षेत्र देशों की दिशा तय करने में तेजी से अहम भूमिका निभा रहे हैं, जिससे दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए तकनीकी रूप से तैयार रहना आवश्यक हो गया है।




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