टीबी के खिलाफ टीकाकरण कार्यक्रम के लिए भारत ने अफगानिस्तान भेजी 13 टन बीसीजी वैक्सीन
नई दिल्ली। भारत ने मंगलवार को अफगानिस्तान के तपेदिक (टीबी) से लड़ने वाले बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम में सहायता के लिए 13 टन बीसीजी (बैसिलस कैलमेट-गुएरिन) टीके और इससे जुड़े सामानों की खेप भेजी।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “भारत ने अफगानिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय को 13 टन बीसीजी वैक्सीन और उससे जुड़े सूखा सामान भेजा है, ताकि अफगानिस्तान में तपेदिक (टीबी) के खिलाफ टीकाकरण कार्यक्रम को बल मिले।”
आपको बता दें, बीसीजी वैक्सीन एक फ्रीज-ड्राइड (लायोफिलाइज्ड) सफेद पाउडर के रूप में आती है, जो उपयोग से पहले तरल (डिलुएंट) के साथ मिलाई जाती है। यह 10-20 खुराक वाली शीशियों (वायल्स) में पैक की जाती है। ट्यूबरकुलिन सिरिंज/26जी सुई की आवश्यकता होती है। इसे 2 डिग्री सेल्सियस से 8 डिग्री सेल्सियस पर संग्रहित किया जाता है।
यह पहली बार नहीं है, जब भारत ने अफगानिस्तान की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। हाल ही में आए बाढ़ और भूकंप के अफगान लोगों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। उस दौरान भी भारत आगे आया और 5 अप्रैल को मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री (एचएडीआर) भेजी।
जायसवाल ने अफगानिस्तान के लोगों के साथ भारत की एकजुटता और इस मुश्किल समय में मानवीय सहायता देने की अपनी प्रतिबद्धता तब भी जताई थी। उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, “बाढ़ और भूकंप के कारण अफगानिस्तान के लोग जिस मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं, ऐसे समय में भारत ने एचएडीआर सामग्री भेजी है। इसमें किचन सेट, हाइजीन किट, प्लास्टिक शीट, तिरपाल, स्लीपिंग बैग और भी बहुत कुछ शामिल है। भारत अफगानिस्तान के लोगों के साथ पूरी तरह से खड़ा है और इस मुश्किल समय में मानवीय सहायता और समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है।”
इससे पहले मार्च में, भारत सरकार ने अफगानिस्तान को 2.5 टन आपातकालीन दवाएं, मेडिकल डिस्पोजेबल, किट और उपकरण भेजे थे। यह मदद काबुल के एक अस्पताल पर पाकिस्तानी हमले में घायल हुए लोगों की सहायता के लिए दी गई थी।




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