चिनफिंग, पुतिन और पेजेश्कियान के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे मोदी; व्यापार, भू-राजनीति पर होगा जोर
नयी दिल्ली. चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं। यह बीते सात साल में उनकी पहली भारत यात्रा होगी। इसे व्यापार और निवेश को बढ़ावा देकर दोनों देशों के रिश्तों को और बेहतर बनाने के एक अहम मौके के तौर पर देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। यह बातचीत ऐसे समय में होगी, जब दुनिया भू-राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। चिनफिंग की भारत की दो दिवसीय यात्रा दोनों देशों के बीच हाल में हुई कई उच्च-स्तरीय बातचीत के बाद हो रही है। इनमें बीजिंग में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत भी शामिल है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब अरुणाचल प्रदेश सेक्टर में चीन की आक्रामक सैन्य गतिविधियों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। मोदी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और कई अन्य वैश्विक नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। पुतिन के साथ बातचीत शुक्रवार को दोपहर 3:30 बजे, जबकि पेजेश्कियान के साथ शाम 6:15 बजे होनी है। चिनफिंग के साथ सरकारी अधिकारियों और उद्योग जगत के दिग्गजों का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आ रहा है। पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक जारी सैन्य गतिरोध के कारण बिगड़े रिश्तों को सुधारने के लिए दोनों पक्षों ने पिछले एक साल में विश्वास बहाली के कई कदम उठाए हैं। शनिवार से शुरू होने वाले दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली पहुंचने वाले अन्य प्रमुख नेताओं में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, अबू धाबी के युवराज मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान और इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली शामिल हैं। हालांकि, शनिवार को मोदी और चिनफिंग के बीच होने वाली मुलाकात पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन पश्चिमी एशिया में जारी संकट और यूक्रेन को लेकर पश्चिमी देशों के साथ मॉस्को के तनाव को देखते हुए शुक्रवार को पुतिन और पेजेश्कियान के साथ प्रस्तावित प्रधानमंत्री की बैठकें भी उतनी ही अहम मानी जा रही हैं। मामले से वाकिफ अधिकारियों ने बताया कि बैठक में मोदी और चिनफिंग के वास्तवित नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर मौजूदा हालात की समीक्षा करने की संभावना है। उन्होंने बताया कि दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों के तहत व्यापार और निवेश बढ़ाने समेत सहयोग के और रास्ते तलाशने पर भी चर्चा कर सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, चिनफिंग शनिवार को दिल्ली पहुंचेंगे और मोदी के साथ उनकी बैठक उसी दिन शाम छह बजे होनी है। मोदी और चिनफिंग ने पिछले साल 31 अगस्त को चीन के तियानजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान कई मुद्दों पर व्यापक बातचीत की थी। अधिकारियों के अनुसार, मोदी-पुतिन की बैठक में रक्षा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल और लोगों के आदान-प्रदान जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है। क्रेमलिन (रूस के राष्ट्रपति का आधिकारित आवास और कार्यालय) के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को कहा था कि दोनों पक्ष ब्रह्मोस मिसाइल को उन्नत करने पर भी विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि मॉस्को एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की बाकी इकाइयों की आपूर्ति पूरी करने और सु-57 लड़ाकू विमान की प्रस्तावित आपूर्ति पर बातचीत करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। पेस्कोव ने कहा था कि भारत और रूस के बीच ऊर्जा संबंध मजबूत बने हुए हैं तथा दोनों पक्ष नये असैन्य परमाणु संयंत्र लगाने की भारत की योजना पर बातचीत करने पर भी विचार कर रहे हैं। इससे पहले, पिछले हफ्ते बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और पुतिन की मुलाकात हुई थी, जिसमें प्रधानमंत्री ने यूक्रेन संघर्ष को तुरंत खत्म करने की अपील की और रूसी नेता से कहा कि वह "कभी न खत्म होने वाली जंग" से हटकर "जंग को खत्म करने" की दिशा में आगे बढ़ें। अधिकारियों ने कहा कि उम्मीद है कि मोदी और पुतिन की बातचीत में यूक्रेन संघर्ष और शांति की राह पर मुख्य रूप से चर्चा होगी। पिछले कुछ दिनों में इस संघर्ष को सुलझाने का रास्ता खोजने के लिए फिर से कोशिशें की गई हैं, जिनमें अमेरिका के ट्रंप प्रशासन के प्रयास भी शामिल हैं। मोदी और पेजेश्कियान के बीच बैठक इसलिए अहम मानी जा रही है, क्योंकि यह ऐसे समय में हो रही है, जब कुछ समय की शांति के बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष फिर से बढ़ गया है। मोदी ने 31 अगस्त को बिश्केक में ईरानी नेता से मुलाकात की थी और कहा था कि भारत संघर्ष को खत्म करने की सभी कोशिशों का समर्थन करता है। पेजेश्कियान ने मोदी से आग्रह किया था कि वह अलग-अलग पक्षों के साथ भारत के व्यापक संपर्कों का इस्तेमाल करके उन्हें युद्ध और खून-खराबे के रास्ते से हटकर बातचीत और समझौते के रास्ते पर लौटने में मदद करें। अधिकारियों ने कहा कि मोदी और पेजेश्कियान की बैठक में भारत की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की आजादी और नागरिकों तथा असैन्य बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के महत्व पर फिर से जोर दिए जाने की उम्मीद है। होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की नाकेबंदी के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति में भारी व्यवधान उत्पन्न हुआ है। इस रास्ते से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। मोदी के दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति रामाफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अल-सीसी, इंडोनेशिया के सुबियांतो, मलेशिया के प्रधानमंत्री इब्राहिम, अबू धाबी के युवराज अल नाह्यान और इथियोपिया के प्रधानमंत्री अहमद अली के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करने की भी संभावना है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस, विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की महानिदेशक न्गोजी ओकोंजो-इवियाना, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस, न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) की अध्यक्ष दिल्मा रूसेफ और एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक के प्रमुख झोउ जियाई भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी की इनमें से किसी के साथ अलग से द्विपक्षीय बैठक होगी या नहीं। भारत ब्रिक्स के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।

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