अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की चेतावनी: साइबर हमले वित्तीय सिस्टम का भरोसा हिला सकते हैं
नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में गंभीर चेतावनी दी है कि महत्वपूर्ण वित्तीय संस्थानों और बाजार के बुनियादी ढांचे पर साइबर हमले जरूरी सेवाओं को बाधित कर सकते हैं तथा बाजार का भरोसा डगमगा सकते हैं। IMF ने साइबर खतरों को बढ़ता हुआ सिस्टमिक रिस्क करार दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय सेवाओं के तेजी से डिजिटल और एक-दूसरे से जुड़ने के कारण साइबर हमलों का असर पहले से कहीं अधिक गंभीर हो सकता है। बड़े बैंकों, भुगतान प्रणालियों या अन्य महत्वपूर्ण ढांचे पर सफल हमला तुरंत नुकसान पहुंचा सकता है और पूरे वित्तीय सिस्टम में अविश्वास पैदा कर सकता है।
IMF ने फ्रंटियर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल की बढ़ती भूमिका पर विशेष ध्यान दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये मॉडल साइबर हमलों को और शक्तिशाली बनाने के साथ-साथ बचाव की क्षमताओं को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। सरकारी समर्थन वाले समूहों, रैनसमवेयर गिरोहों और अंदरूनी लोगों के पास अब पहले से कहीं अधिक उन्नत उपकरण मौजूद हैं।
तेजी से हो रहे डिजिटलीकरण ने वित्तीय संस्थानों के हमले के दायरे को बढ़ा दिया है। क्लाउड सेवाओं, बाहरी सेवा प्रदाताओं और रियल-टाइम भुगतान प्रणालियों पर निर्भरता के कारण ‘कॉमन पॉइंट ऑफ फेलियर’ का खतरा बढ़ गया है। चुनिंदा टेक्नोलॉजी प्रदाताओं पर अत्यधिक निर्भरता पूरे सिस्टम को कमजोर बना सकती है।
IMF ने साइबर सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने, घटनाओं की बेहतर रिपोर्टिंग, थर्ड-पार्टी जोखिमों की कड़ी निगरानी और परिचालन संबंधी लचीलापन बढ़ाने का आह्वान किया है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ये जोखिम अकेले वित्तीय स्थिरता के लिए खतरा न हों, लेकिन मौजूदा कमजोरियों के साथ मिलकर गंभीर आर्थिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। IMF ने साइबर जोखिमों को उन तीन प्रमुख खतरों में शामिल किया है जो वित्तीय स्थितियों को सख्त बना सकते हैं और बाजार में उथल-पुथल पैदा कर सकते हैं।







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