नवरात्रि व्रत में डायबिटिक मरीज इन 5 बातों का रखें ध्यान
अगर आप भी डायबिटिक मरीज हैं और इस बार नवरात्रि व्रत रखने का सोच रहे हैं, तो सबसे बड़ी चिंता होगी कि व्रत के दौरान ब्लड शुगर लेवल को कैसे मैनेज करें? डायबिटीज में निर्जला उपवास या लंबे समय तक खाली पेट रहने से बचना चाहिए। इसके अलावा कुछ लोग व्रत में साबूदाना, आलू, कुट्टी के आटा का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं, इससे भी बचें। समय-समय पर शुगर लेवल को चेक करें और व्रत में मीठे फलाहार और मीठी चीजों को खाने से बचें। इसके साथ ही, लो ब्लड शुगर लेवल के लक्षणों की पहचान करें और इस स्थिति से बचें। अगर आप डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए इंसुलिन लेते हैं, या डायबिटीज में आंखों, किडनी या हाथ-पैरों की नसों से संबंधित समस्या है, तो भी व्रत करने से बचें। इसके अलावा डायबिटीज पीड़ित बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को भी व्रत करने से बचना चाहिए।
1. लंबे समय तक खाली पेट रहने से बचें
डायबिटीज के मरीजों के लिए लंबे समय तक भूखे रहना ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव का कारण बन सकता है। खासकर इंसुलिन या कुछ ऐसी दवाएं लेने वाले मरीजों को मील स्किप करने या देर तक खाली पेट रहने से बचना चाहिए। व्रत के दौरान डॉक्टर की सलाह के अनुसार भोजन का समय तय करें। एक बार में बहुत ज्यादा खाने के बजाय उचित अंतराल पर संतुलित मात्रा में भोजन करें।
2. साबूदाना, आलू और कुट्टू का आटा सीमित मात्रा में खाएं
व्रत के दौरान साबूदाना खिचड़ी, आलू की टिक्की, कुट्टू की पूड़ी और सिंघाड़े के आटे से बने पकवान खूब शौक से खाए जाते हैं, लेकिन इन खाद्य पदार्थों में कार्ब्स की मात्रा ज्यादा हो सकती है। इन फूड्स को ज्यादा मात्रा में खाने से भोजन के बाद ब्लड शुगर बढ़ सकता है।
3. मीठे फलाहार और मिठाइयों से बचें
व्रत में मिठाइयां, मीठी लस्सी, शरबत, मीठा दही और चीनी वाली खीर जैसे फलाहार का सेवन बढ़ सकता है। इनसे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकती है इसलिए बिना अचीनी वाले विकल्प चुनें। शहद, गुड़ और मिश्री को भी डायबिटीज के मरीजों के लिए शुगर फ्री विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। साथ ही, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और थोड़ी-थोड़ी देर में फलाहार करने से बचें।
4. ब्लड शुगर की नियमित जांच करें
व्रत के दौरान खाने का समय और भोजन की मात्रा बदलने से ब्लड शुगर पर असर पड़ सकता है इसलिए डायबिटीज के मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से शुगर की जांच करानी चाहिए।
शुगर की जांच से पता चल सकता है कि खाली पेट रहने, फल खाने या व्रत का भोजन करने के बाद ब्लड शुगर में किस तरह के बदलाव हो रहे हैं? अगर शुगर लेवल बहुत कम या ज्यादा हो रहा है, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
5. लो ब्लड शुगर के लक्षणों को नजरअंदाज न करें
अगर व्रत के दौरान-
पसीना आना
हाथ कांपना
तेज भूख लगना
चक्कर आना
दिल की धड़कन तेज होना या भ्रम जैसी समस्या हो, तो यह लो ब्लड शुगर का संकेत हो सकता है।
अगर ब्लड शुगर 70 mg/dL से कम है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
हाइपोग्लाइसीमिया या बहुत ज्यादा ब्लड शुगर होने पर व्रत जारी रखने के बजाय स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। डायबिटीज में व्रत रखना है या नहीं, इसका फैसला डॉक्टर की सलाह के अनुसार करें।
क्या डायबिटीज में व्रत रखना सुरक्षित है?
नहीं यह सुरक्षित नहीं है। डायबिटीज में व्रत रखने से मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसलिए भोजन और तरल पदार्थों के सेवन में अचानक या बड़े बदलाव होने पर डायबिटीज के मरीजों में स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। जैसे-
-ब्लड शुगर लेवल कम होना (हाइपोग्लाइसीमिया)
-ब्लड शुगर लेवल बढ़ना (हाइपरग्लाइसीमिया)
-शरीर में पानी की कमी होना
-डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA)





.jpg)



Leave A Comment