ब्रेकिंग न्यूज़

वंदे मातरम् के पूर्ण गायन में कोई झिझक या आपत्ति नहीं होनी चाहिए: मोहन भागवत

 नागपुर.  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को इस बात पर बल दिया कि वंदे मातरम् राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है और इसके पूर्ण गायन में कोई झिझक या आपत्ति नहीं होनी चाहिए। भागवत ने यहां संघ के वार्षिक विजयादशमी समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि वंदे मातरम् ने बंगाल विभाजन की साजिश को विफल कर दिया था और आज भी यह राष्ट्रीय एकता के लिए एक शक्तिशाली प्रेरणास्रोत बना हुआ है। उन्होंने कहा, ''यह हमारा राष्ट्रीय गीत है, और इसे पूरे गर्व तथा बुलंद आवाज में पूरा गाने में कोई झिझक या आपत्ति नहीं होनी चाहिए।'' भागवत ने सामाजिक एकता की आवश्यकता पर बल देते हुए याद दिलाया कि जब लॉर्ड कर्जन ने हिंदुओं और मुसलमानों को बांटने के लिए सांप्रदायिक आधार पर बंगाल के विभाजन का प्रयास किया था, तब समाज ने इस कदम का दृढ़ता से विरोध किया था जिससे ब्रिटिश सरकार को यह प्रस्ताव वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था। उन्होंने कहा, ''यह वही दौर था जब वंदे मातरम् एकता और देशभक्ति के प्रतीक के रूप में उभरा था। तब विभाजन को विफल कर दिया गया था। फिर, 1947 में वही परिणाम क्यों नहीं हासिल किया जा सका? क्योंकि जो लोग हमें बांटना चाहते थे, उन्होंने हमारे दिमाग में यह बात बैठा दी कि चूंकि हम अलग दिखते हैं, इसलिए हमें वास्तव में अलग ही होना चाहिए।'' भागवत ने आरोप लगाया कि तुष्टीकरण की मानसिकता ने इस विभाजनकारी सोच को बढ़ावा दिया, जिसके परिणामस्वरूप अंततः देश का विभाजन हुआ। उन्होंने कहा, ''इसके बावजूद, इस विभाजनकारी और विनाशकारी खेल के वादे के रूप में जो एक अलग, स्वायत्त अस्तित्व की शांति और खुशी दिखाई गई थी, वह कभी साकार नहीं हुई। इसके बजाय, हमने सीमाओं पर और देश के भीतर स्थायी अशांति, आपसी अविश्वास, असुरक्षा और छोटी से छोटी बातों पर लगातार कलह को ही न्योता दिया।'' संघ प्रमुख ने कहा कि मातृभूमि के रूप में भारत की भक्ति, साझा पूर्वजों पर गर्व और शाश्वत भारतीय संस्कृति के सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों के अनुसार जीना ही राष्ट्र को हमेशा एकजुट रखता है। उन्होंने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार का भी जिक्र किया। मच्छार ने पिछले माह दुबई से तेल अवीव जा रही 'फ्लाईदुबई' की उड़ान में हुए हमले के दौरान 174 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की जान बचाई थी। भागवत ने कहा कि आरएसएस हिंदू चेतना को जगाने और एक सुसंगठित व मजबूत समाज के निर्माण के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज का दृष्टिकोण और स्वभाव समावेशी है, और ऐसे प्रयासों से हम सभी के बीच भावनात्मक एकता, सद्भावना और अच्छे आचरण को ही मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा, ''यह वही स्वभाव और मूल्य हैं जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे हैं, जो कैप्टन स्मित मच्छार को अपनी जान जोखिम में डालने और मानव जीवन की रक्षा के लिए समर्पित होने के लिए प्रेरित करते हैं।''

Related Post

Leave A Comment

Don’t worry ! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).

Chhattisgarh Aaj

Chhattisgarh Aaj News

Today News

Today News Hindi

Latest News India

Today Breaking News Headlines News
the news in hindi
Latest News, Breaking News Today
breaking news in india today live, latest news today, india news, breaking news in india today in english