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दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की बैठक : केंद्र-राज्यों के बीच मजबूत संबंधों पर जोर

तिरुपति।  तिरुपति में रविवार को दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की 29वीं बैठक में देश के विकास को गति देने के लिए संघवाद की सच्ची भावना के साथ मजबूत केंद्र-राज्य और अंतर-राज्यीय संबंधों की आवश्यकता पर जोर दिया गया। बैठक की अध्यक्षता करने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण भी देश में सर्वांगीण विकास हासिल करने के लिए सहयोगात्मक और प्रतिस्पर्धी संघवाद का है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय परिषद केवल सलाहकार प्रकृति की हैं लेकिन वे राज्यों के बीच कई विवादास्पद मुद्दों का सफलतापूर्वक समाधान करने में सफल रही हैं। शाह ने बाद में एक ट्वीट में कहा, ‘‘आज की बैठक के संदर्भ में 51 लंबित मुद्दों में से 40 का समाधान किया गया।'' शाह ने कहा, ‘‘दक्षिणी राज्यों की संस्कृति, परंपराएं एवं भाषाएं भारत की संस्कृति एवं प्राचीन धरोहर को समृद्ध करती हैं। भारत के विकास की कल्पना इन राज्यों के योगदान के बगैर नहीं की जा सकती है।'' उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय परिषदों ने विवादास्पाद मुद्दों के समाधान के लिए सदस्यों के बीच उच्चतम स्तर पर संवाद का मौका प्रदान किया है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और पुडुचरी के मुख्यमंत्री एन रंगासामी ने इस बैठक में हिस्सा लिया जबकि तमिलनाडु, तेलंगाना एवं केरल के मुख्यमंत्री नहीं पहुंचे। तेलंगाना की राज्यपाल एवं पुडुचेरी की उपराज्यपाल तमिलिसाई सौंदरराजन, अंडमान एवं निकोबार के उपराज्यपाल डी के जोशी तथा लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल खोडा पटेल ने भी बैठक में हिस्सा लिया। तेलंगाना के गृह मंत्री महमूद अली, केरल के वित्त मंत्री के एन बालागोपाल और तमिलनाडु के उच्च शिक्षा मंत्री के पोनमुडी ने अपने-अपने राज्यों का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने अपने अपने राज्यों से जुड़े-मुद्दे उठाये तथा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने राज्य को विशेष दर्जा देने की जोरदार पैरवी की। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने संघीय लोकतंत्र के विकास के लिए मजबूत केंद्र-राज्य संबंधों और अच्छे अंतर-राज्यीय संबंधों पर जोर दिया। पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन रंगासामी ने कहा कि केंद्र अगले साल के बजट में प्रदेश सरकार के लिए कम से कम 1,500 करोड़ रुपये अतिरिक्त केंद्रीय सहायता के रूप में रखे ताकि जीएसटी से राजस्व में हुए नुकसान की भरपाई की जा सके। तेलंगाना सरकार ने कहा कि वह आंध्र प्रदेश सरकार के साथ कुछ लंबित मुद्दों को बातचीत के माध्यम से सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए तैयार है। 

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