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  पीएम मोदी-लक्सन वार्ता: आतंकवाद के खिलाफ जॉइंट वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति

ऑकलैंड ।भारत और न्यूज़ीलैंड ने आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और अन्य उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच ऑकलैंड में हुई वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने तथा वैश्विक शांति, सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की। संयुक्त बयान में दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों, विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और 10 नवंबर, 2025 को नई दिल्ली के लाल किले के पास हुई आतंकी घटना की निंदा करते हुए दोषियों को जल्द न्याय के कटघरे में लाने की आवश्यकता पर जोर दिया।भारत और न्यूज़ीलैंड ने आतंकवाद के वित्तपोषण नेटवर्क, सुरक्षित ठिकानों और ऑनलाइन आतंकी ढांचे को समाप्त करने के लिए सहयोग बढ़ाने का संकल्प दोहराया। दोनों देशों ने काउंटर-टेररिज्म पर जॉइंट वर्किंग ग्रुप (JWG) के गठन के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। यह तंत्र दोनों देशों के बीच सूचना और विशेषज्ञता साझा करने के लिए संस्थागत ढांचा उपलब्ध कराएगा।दोनों देशों ने गैर-कानूनी मादक पदार्थों की तस्करी, वित्तीय अपराध, साइबर अपराध, आतंकवाद से जुड़े अपराध और मानव तस्करी जैसे ट्रांसनेशनल एवं संगठित अपराधों से निपटने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। साथ ही काउंटर-नारकोटिक्स सहयोग और कानून प्रवर्तन संबंधी व्यवस्थाओं को जल्द औपचारिक रूप देने की दिशा में काम करने का भी फैसला किया गया।प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री लक्सन ने स्वतंत्र, खुला, शांतिपूर्ण और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान के साथ नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के अनुरूप नौवहन और ओवरफ्लाइट की स्वतंत्रता तथा समुद्री विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता को भी दोहराया।संयुक्त बयान में दोनों देशों ने ईस्ट एशिया समिट, आसियान रीजनल फोरम और आसियान डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग प्लस जैसे मंचों पर सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए आसियान की केंद्रीय भूमिका और उसके दृष्टिकोण के महत्व को भी दोहराया।

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