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- -बिना लाइसेंस उर्वरक-कीटनाशक का भंडारण और निर्माण कर रहे दो गोदाम सील, भारी मात्रा में सामग्री जब्त-खरीफ सीजन में किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वाले दोषियों पर होगी एफआईआर और वैधानिक कार्रवाईरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के किसानों को गुणवत्तायुक्त कृषि आदान समय पर उपलब्ध कराने तथा नकली एवं अमानक उर्वरक-कीटनाशकों के कारोबार पर सख्त कार्रवाई के निर्देशों के तहत प्रदेशभर में कृषि विभाग द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में दुर्ग जिले में कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल ने ग्राम चिंगरी (अंडा) में बड़ी कार्रवाई करते हुए बिना वैध अनुज्ञप्ति के उर्वरक एवं कीटनाशक का निर्माण, भंडारण और विक्रय किए जाने के मामले में दो गोदामों को सील कर भारी मात्रा में सामग्री जब्त की है।उड़नदस्ता दल को ग्राम चिंगरी स्थित चन्द्राकर किराना स्टोर्स परिसर में अवैध रूप से जैव उत्प्रेरक एवं कीटनाशकों के निर्माण एवं भंडारण की सूचना प्राप्त हुई थी। निरीक्षण के दौरान गोदाम बंद मिला। गोदाम के किरायेदार श्री वरुण त्रिपाठी को मौके पर बुलाकर निरीक्षण में सहयोग करने के लिए कहा गया, लेकिन उनके असहयोगात्मक रवैये के कारण मकान मालिक, पंचों एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में पंचनामा तैयार कर गोदाम का ताला खुलवाया गया।निरीक्षण के दौरान गोदाम में बिना लाइसेंस जैव उत्प्रेरक एवं कीटनाशकों के निर्माण के लिए कच्चा माल, तैयार उत्पाद, पैकिंग मशीनें तथा बड़ी मात्रा में रॉ मटेरियल मिला। जांच में उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 तथा कीटनाशक अधिनियम एवं नियमों के अनेक प्रावधानों का गंभीर उल्लंघन पाया गया। बिना वैध अनुज्ञप्ति के व्यवसाय, बिना मानक के उर्वरक निर्माण, निर्धारित अभिलेखों का संधारण नहीं करना, निरीक्षण में सहयोग नहीं करना तथा बिना स्रोत के कीटनाशकों का भंडारण जैसे गंभीर मामले सामने आए।कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में जैव उत्प्रेरक, कीटनाशक, उर्वरक, रॉ मटेरियल, रसायनों से भरे ड्रम, पैकिंग एवं सीलिंग मशीनें तथा अन्य उपकरण जब्त किए गए। संपूर्ण सामग्री को उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 तथा कीटनाशक अधिनियम, 1968 के प्रावधानों के तहत जब्त कर गोदामों को सील किया गया है।कृषि विभाग ने संबंधित संचालक के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955, उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 तथा कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। मामले में नियमानुसार आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।उप संचालक कृषि श्री संदीप भाई ने स्पष्ट कहा कि किसानों को खाद एवं कीटनाशकों की कृत्रिम कमी पैदा करने, कालाबाजारी करने, नकली अथवा अमानक कृषि आदानों का निर्माण एवं विक्रय करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं एवं निर्माताओं के लाइसेंस निलंबित अथवा निरस्त किए जाएंगे तथा उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।उन्होंने सभी उर्वरक विक्रेताओं एवं सहकारी समितियों को निर्देशित किया है कि किसानों को निर्धारित दर पर ही उर्वरक उपलब्ध कराएं। अधिक मूल्य वसूली, कालाबाजारी अथवा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध तत्काल कठोर कार्रवाई की जाएगी।कृषि विभाग द्वारा खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों एवं कीटनाशकों की उपलब्धता, गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। किसानों से भी अपील की गई है कि यदि कहीं नकली, अमानक अथवा निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर उर्वरक या कीटनाशकों की बिक्री की जानकारी मिले तो इसकी शिकायत तत्काल निकटतम कृषि विभाग कार्यालय में करें।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। नकली कृषि आदानों, कालाबाजारी और अवैध कारोबार में लिप्त लोगों के विरुद्ध पूरे प्रदेश में इसी तरह की सख्त और निरंतर कार्रवाई जारी रहेगी।
- -शुद्ध जैविक उत्पादों की लगातार बढ़ रही मांगरायपुर.। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत महिला स्वसहायता समूहों द्वारा तैयार ‘कांकेयर’ ब्रांड तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। यह ब्रांड कांकेर की हजारों महिलाओं की मेहनत, आत्मनिर्भरता और गुणवत्तापूर्ण प्राकृतिक उत्पादों का प्रतीक बन चुका है।‘कांकेयर’ ब्रांड के तहत सरसों तेल, अरहर दाल, छिंद गुड़, शहद, रागी, कोदो, मक्का, आम का अचार सहित विभिन्न जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। दण्डकारण्य क्षेत्र की प्राकृतिक परिस्थितियों में उगाए गए ये उत्पाद पूरी तरह शुद्ध, प्राकृतिक और उच्च गुणवत्ता वाले होते हैं। ये उत्पाद स्वसहायता समूहों द्वारा पारंपरिक एवं जैविक पद्धति से तैयार किए जाते हैं, जिनमें रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं होता है। एफएसएसएआई (FSSAI) से पंजीकृत होने के कारण उत्पादों की गुणवत्ता और शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाता है।वर्तमान में ‘कांकेयर’ उत्पादों का सी-मार्ट और कांकेश्वरी एफपीसी के माध्यम से स्थानीय बाजारों में वितरण और बिक्री सुनिश्चित की जा रही है। जिला पंचायत परिसर में स्थापित पैकेजिंग इकाई से इनकी थोक खरीदी की जा सकती है। वेबसाइट Kancare.Shop के माध्यम से इन्हें ऑनलाइन ऑर्डर कर घर बैठे शुद्ध एवं प्राकृतिक उत्पाद प्राप्त कर सकते हैं। कांकेर जिला पंचायत के अधिकारियों ने बताया कि अब तक 'कांकेयर’ ब्रांड के 92 किलोग्राम अरहर दाल , 5.5 किलोग्राम शहद, 5 किलोग्राम छिंद गुड़, 9 किलोग्राम रागी आटा तथा 6 किलोग्राम मक्का आटा की बिक्री हो चुकी है। ‘कांकेयर’ ब्रांड आज केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि कांकेर जिले की ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता और गुणवत्तापूर्ण जैविक उत्पादन की नई पहचान बनकर उभर रहा है।
- -रैली के दौरान ड्यूटी निभाते हुए 16 पुलिस जवान हुए घायल, चिकित्सकों से चर्चा कर कमिश्नर ने उपचार की जानकारी लीरायपुर / रायपुर में आज एक रैली के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और रैली को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल द्वारा बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था संभाली जा रही थी। इसी दौरान कुछ लोगों द्वारा अचानक पत्थर एवं बोतलें फेंके जाने से अव्यवस्था की स्थिति निर्मित हो गई, जिसमें ड्यूटी पर तैनात पुलिस के 16 जवान घायल हो गए। घायलों में एक महिला आरक्षक शामिल थी, दो पुलिस जवानों को गंभीर चोटें आई हैं। घटना की जानकारी मिलते ही रायपुर के पुलिस कमिश्नर श्री संजीव शुक्ला में अस्पताल पहुंच भर्ती पुलिस जवानों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने चिकित्सकों से घायल जवानों के स्वास्थ्य एवं उपचार की विस्तृत जानकारी ली तथा सभी घायलों के समुचित उपचार के निर्देश दिए। उन्होंने जवानों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।घायल जवान कलेश्वर वर्मा ने बताया कि बैरिकेटिंग के दौरान भीड़ के बीच फंस जाने से उन्हें सांस लेने में परेशानी हुई, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल लाया गया। वहीं, प्रशिक्षु उप निरीक्षक (पीएसआई) श्री देवराज सिंह के सिर पर बोतल लगने से गंभीर चोट आई है, जिनका उपचार चिकित्सकों की निगरानी में जारी है।अन्य घायल आरक्षकों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। इस दौरान पुलिस उपायुक्त (मध्य) श्री तारकेश्वर पटेल, एसीपी श्री नीलेश द्विवेदी, टीआई श्री राजेश मरई सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।
- -खरीफ सीजन 2026 में डीएपी की सीमित राष्ट्रीय उपलब्धता के बीच छत्तीसगढ़ सरकार की प्रभावी व्यवस्था-किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए सतत निगरानीरायपुर /खरीफ 2026 के दौरान डीएपी की राष्ट्रीय स्तर पर सीमित उपलब्धता के बावजूद मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रदेश के प्रत्येक किसान को समय पर खाद-बीज उपलब्ध हो, किसी भी किसान को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े और उर्वरकों की कालाबाजारी अथवा निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसी के अनुरूप कृषि विभाग द्वारा पूरे प्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण एवं मूल्य नियंत्रण पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि खरीफ सीजन 2026 के लिए डीएपी का लक्ष्य 3 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है। जबकि 21 जुलाई 2026 की स्थिति में प्रदेश में एक लाख 84 हजार 413 मीट्रिक टन डीएपी का भंडारण किया गया है। वहीं भंडारण के विरूद्ध किसानों को एक लाख 26 हजार 360 मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है। इसके बाद भी समितियों एवं गोदामों में अभी 58 हजार 054 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। उल्लेखनीय है कि खरीफ 2025 की इसी अवधि में 37 हजार 535 मीट्रिक टन डीएपी शेष था।कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसा के अनुरूप किसानों को डीएपी के साथ-साथ एनपीके एवं अन्य संतुलित उर्वरकों के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे फसलों की पोषण आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके तथा डीएपी पर अत्यधिक निर्भरता कम हो।देश में डीएपी का लगभग 70 से 80 प्रतिशत तथा एनपीके का 30 से 40 प्रतिशत आयात विदेशों से किया जाता है। वैश्विक परिस्थितियों एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति प्रभावित होने के कारण डीएपी और एनपीके की उपलब्धता तथा कीमतों पर प्रभाव पड़ा है। इसी कारण उर्वरक आपूर्तिकर्ता कंपनियों द्वारा भारत सरकार की प्रचलित नीति एवं बाजार परिस्थितियों के अनुरूप एनपीके के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में वृद्धि की गई है।कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि उर्वरकों के मूल्य निर्धारित करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है, फिर भी किसानों से निर्धारित एमआरपी से अधिक मूल्य वसूला न जाए, इसके लिए कृषि विभाग लगातार निरीक्षण कर रहा है। अधिक मूल्य वसूली, कालाबाजारी तथा कृत्रिम अभाव उत्पन्न करने वालों के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है।अधिकारियों ने बताया कि अब तक प्रदेश में 4,878 उर्वरक विक्रय केन्द्रों का निरीक्षण किया गया है। कार्रवाई के दौरान 625 नोटिस जारी किए गए, 183 केन्द्रों पर विक्रय प्रतिबंध लगाए गए तथा 98 केन्द्रों से उर्वरक जब्त किए गए। वहीं 97 केन्द्रों का लाइसेंस निलंबित और 11 विक्रय केन्द्रों का लाइसेंस निरस्त किया गया। साथ ही 56 प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किए गए तथा 7 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज की गई हैं।इधर, भारी वर्षा से जिन क्षेत्रों में बोनी प्रभावित हुई है अथवा किसानों को पुनः बुआई (डबल बोनी) करनी पड़ रही है, वहां जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रभावित किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, बीज एवं उर्वरक उपलब्ध कराने तथा शासन के प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा रही है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है। विभाग द्वारा उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था, मूल्य नियंत्रण एवं कालाबाजारी पर प्रभावी निगरानी रखी जा रही है, ताकि प्रत्येक पात्र किसान को समय पर आवश्यक कृषि आदान उपलब्ध हो सके।राज्य शासन ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं एवं सहकारी समितियों से ही निर्धारित मूल्य पर उर्वरक खरीदें। यदि कहीं भी अधिक मूल्य वसूली, कालाबाजारी अथवा किसी अन्य प्रकार की अनियमितता की जानकारी मिले तो तत्काल कृषि विभाग अथवा जिला प्रशासन को सूचित करें, ताकि दोषियों के विरुद्ध शीघ्र एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
- बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार आधुनिक वीडियो असिस्टेड थोरा स्कोपिक सर्जरी (VATS) के माध्यम से टीबी जनित प्लूरल इफ्यूजन (फेफड़े के आसपास पानी भरने) से पीड़ित 57 वर्षीय पुरुष मरीज का सफल उपचार किया है। इस सफलता के साथ अब ऐसे जटिल वक्ष एवं फेफड़ों से संबंधित रोगों का उपचार सिम्स में ही संभव हो गया है। इससे मरीजों को महानगरों अथवा निजी अस्पतालों में रेफर होने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी तथा उन्हें स्थानीय स्तर पर ही उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी।मरीज पिछले लगभग तीन माह से लगातार बुखार से पीड़ित था। प्रारंभ में उसने निजी चिकित्सकों से उपचार कराया तथा टाइफाइड की दवाइयाँ भी लीं, जिससे कुछ समय के लिए राहत मिली, लेकिन बुखार दोबारा शुरू हो गया। बाद में सोनोग्राफी एवं अन्य जांचों में दाहिनी ओर फेफड़े के आसपास अधिक मात्रा में पानी (राइट प्लूरल इफ्यूजन) पाया गया।इसके बाद मरीज को सिम्स के क्षय रोग (टीबी) विभाग में भर्ती किया गया, जहाँ विस्तृत जांच के बाद ट्यूबरक्लोसिस प्लूरल इफ्यूजन का निदान हुआ और एंटी- ट्यूबरक्लोसिस ट्रीटमेंट (ATT) प्रारंभ किया गया। उपचार के दौरान बार-बार प्लूरल टैपिंग करने के बावजूद फेफड़े के आसपास पानी पुनः भरने लगा। मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जनरल सर्जरी विभाग में रेफर किया गया।जनरल सर्जरी विभाग द्वारा मरीज का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। इसके बाद टीबी विभाग, जनरल सर्जरी विभाग एवं एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों के समन्वय से आधुनिक वीडियो असिस्टेड थोरा स्कोपिक सर्जरी (VATS) करने का निर्णय लिया गया। ऑपरेशन के दौरान फेफड़े के आसपास जमा द्रव को सफलतापूर्वक निकाला गया तथा आवश्यक डिकॉर्टिकेशन एवं बायोप्सी की गई। ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। वर्तमान में मरीज स्वस्थ है तथा नियमित फॉलो-अप पर है।यह जटिल शल्य चिकित्सा जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. कोमल प्रसाद देवांगन, डॉ. विनोद तमकनंद एवं डॉ. सुशील पात्रे द्वारा संपन्न की गई। ऑपरेशन में जूनियर रेजिडेंट डॉ. ऋतेश तथा द्वितीय वर्ष की जूनियर रेजिडेंट डॉ. गरिमा शर्मा व टी. बी.चेस्ट विभाग से डॉ. अनिल डरसेना एवं उनकी टीम ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। सुरक्षित एनेस्थीसिया प्रबंधन की जिम्मेदारी एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति एवं उनकी टीम ने निभाई। वहीं ऑपरेशन थिएटर स्टाफ श्री अश्विनी का भी पूरी प्रक्रिया में सराहनीय योगदान रहा।सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि संस्थान में आधुनिक वीडियो असिस्टेड थोरा स्कोपिक सर्जरी (VATS) मशीन की उपलब्धता उनके एवं चिकित्सा अधीक्षक के अथक प्रयासों का परिणाम है। मशीन उपलब्ध होने के पश्चात जनरल सर्जरी, टीबी एवं एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों के समन्वित प्रयासों से यह जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया। उन्होंने बताया कि पूर्व में इस प्रकार की बीमारी से संबंधित लगभग 10 से 12 मरीज प्रतिमाह सिम्स में आते थे, जिन्हें मशीन उपलब्ध नहीं होने के कारण उच्च संस्थानों के लिए रेफर करना पड़ता था। अब यह अत्याधुनिक सुविधा सिम्स में उपलब्ध होने से प्रदेशवासियों को महानगरों के समान उन्नत उपचार स्थानीय स्तर पर ही मिल सकेगा।चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि सिम्स में विशेषज्ञ चिकित्सकों की समन्वित कार्यप्रणाली, आधुनिक तकनीक एवं बेहतर संसाधनों के कारण जटिल शल्य चिकित्सा भी सफलतापूर्वक की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि निजी अस्पतालों में इस प्रकार की वीडियो असिस्टेड थोरास्कोपिक सर्जरी (VATS) पर सामान्यतः एक से दो लाख रुपये तक का खर्च आता है, जबकि सिम्स में यह उपचार निर्धारित शासकीय शुल्क एवं आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पात्र मरीजों के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे मरीजों एवं उनके परिजनों को अन्य शहरों में जाकर उपचार कराने की आर्थिक एवं मानसिक परेशानियों से राहत मिलेगी।विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बताया कि लगातार बुखार, सीने में दर्द, सांस फूलना अथवा फेफड़ों में पानी भरने जैसे लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच, सही निदान एवं आधुनिक वीडियो असिस्टेड थोरा स्कोपिक सर्जरी (VATS) जैसी न्यूनतम इनवेसिव तकनीक के माध्यम से ऐसे जटिल मामलों का भी सुरक्षित एवं सफल उपचार संभव है। सिम्स में इस सुविधा की शुरुआत प्रदेश के मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिससे उन्हें गुणवत्तापूर्ण, किफायती एवं अत्याधुनिक उपचार अपने ही क्षेत्र में उपलब्ध हो सकेगा।
- -होटल गोल्डन स्टे के प्रथम तल से 14 हजार लीटर/किलोग्राम कृषि आदान जब्त, नमूने जांच के लिए भेजे गएबिलासपुर / कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल एवं संचालक कृषि, रायपुर के निर्देशन में कृषि विभाग के जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल ने सिरगिट्टी स्थित होटल गोल्डन स्टे के प्रथम तल पर अवैध रूप से भंडारित कृषि आदानों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की। पुष्ट सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में भारी मात्रा में कीटनाशक एवं जैव उत्प्रेरक खाद जब्त कर विक्रय पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया गया।कार्रवाई के दौरान लगभग 4,610 लीटर पौध संरक्षण (कीटनाशक) दवाइयां तथा 9,611 किलोग्राम जैव उत्प्रेरक खाद बरामद किया गया। इस प्रकार कुल लगभग 14 हजार लीटर/किलोग्राम कृषि आदान जब्त किए गए। प्रारंभिक जांच में सामग्री के अवैध भंडारण का मामला सामने आने पर संदेहास्पद कृषि आदानों के नमूने लेकर परीक्षण हेतु अधिकृत प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पूरे दिन चली कार्रवाई के दौरान जब्तसी सामग्री के विक्रय पर प्रतिबंध लगाते हुए उसे गोदाम संचालक श्री मनीष सिंह की सुपुर्दगी में सुरक्षित रखा गया।कार्रवाई में उप संचालक कृषि श्री पी.डी. हथेश्वर, सहायक संचालक कृषि श्री अनिल शुक्ला, कृषि निरीक्षक श्री आर.एस. गौतम सहित श्री उमेश कश्यप, श्री खेमराज शर्मा, श्री विजय एवं श्री धीरज उपस्थित रहे। उप संचालक कृषि ने साफ कहा है कि किसानों के हितों की सुरक्षा तथा गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अवैध भंडारण, नकली एवं अमानक कृषि आदानों के विरुद्ध जिले में सघन जांच एवं कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।
- रायपुर / समाजसेवी, रामायण के प्रख्यात टीकाकार, चिंतक एवं देहदान संकल्पी श्री गणेश दास मानिकपुरी (80 वर्ष) का बुधवार प्रातः निवास स्थान ग्राम दोन्दे खुर्द (रायपुर) में आकस्मिक निधन हो गया। वे प्रख्यात समाजसेविका रहीं स्वर्गीय श्रीमती अम्बा देवी के पति तथा जनसंपर्क अधिकारी विजय मानिकपुरी के पूज्य पिता थे। उनके निधन से परिवार, शुभचिंतकों तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने शोक व्यक्त की है।श्री मानिकपुरी छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल से सेवानिवृत्त थे। अविभाजित मध्यप्रदेश में वे इंटक के महामंत्री के रूप में भी सक्रिय रहे ।स्पष्टवादिता, निर्भीक व्यक्तित्व और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के कारण उन्हें व्यापक सम्मान प्राप्त था।वे रामायण के प्रख्यात टीकाकार, गहन अध्येता और चिंतक थे। धार्मिक ग्रंथों, साहित्य तथा समाचार-पत्रों के नियमित अध्ययन के साथ-साथ ग्रामीण विकास, सामाजिक जागरूकता और जनकल्याण उनके चिंतन के प्रमुख विषय रहे। उन्होंने आजीवन सादा एवं शाकाहारी जीवन अपनाया और सभी प्रकार के नशे का दृढ़ता से विरोध किया। समाज में नशामुक्ति, सामाजिक समरसता, वैज्ञानिक सोच तथा अंधविश्वास और जातिवाद के विरुद्ध जनजागरण के लिए वे निरंतर सक्रिय रहे।मानव सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता जीवन के अंतिम क्षण तक बनी रही। उन्होंने अपने पार्थिव शरीर का देहदान मेडिकल कॉलेज, रायपुर को करने का संकल्प लिया था तथा इसके लिए विधिवत सहमति-पत्र भी भर रखा था। उनका यह निर्णय समाज में सेवा, विज्ञान और मानवता के प्रति प्रेरणा का संदेश छोड़ गया है।श्री गणेश दास मानिकपुरी अपने पीछे भरा-पूरा परिवार, अनेक शुभचिंतक तथा समृद्ध सामाजिक और वैचारिक विरासत छोड़ गए हैं। उनके निधन से समाज ने एक विद्वान, सिद्धांतनिष्ठ, कर्मठ और स्पष्टवादी व्यक्तित्व को खो दिया है। उनकी सादगी, सामाजिक प्रतिबद्धता और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।
- रायपुर। शंकर नगर, रायपुर निवासी वरिष्ठ पत्रकार नंदकुमार कंसारी की धर्मपत्नी श्रीमती सरोज कंसारी का 22 जुलाई को आकस्मिक निधन हो गया। वे 56 वर्ष की थीं। उनका अंतिम संस्कार आज गृह ग्राम नवापारा राजिम में किया गया। वे प्रियांश व कनुप्रिया की माता थीं।श्रीमती सरोज कंसारी के निधन पर वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत शर्मा, मंजूषा शर्मा, रविन्द्र ठेंगड़ी, शंकर चंद्राकर, गॉस मोहम्मद, रायपुर प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी, महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, संयुक्त सचिव निवेदिता साहू, भूपेश जांगड़े एवं कार्यकारिणी सदस्यो ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।
- -किसान संघर्ष समिति के संयोजक भूपेंद्र शर्मा के अनुसार फिलहाल किसानों को डी ए पी व पोटाश की सामयिक आवश्यकतारायपुर । किसानों की मांग के अनुरूप अभी भी खाद सोसायटियों तक नहीं पहुंच रहा और खेती के इस व्यस्ततम मौसम में किसान खाद लेने सोसायटियों का चक्कर काट रहे । सोसायटियों में डी ए पी खाद की प्रभावी भंडारण तो हो ही नहीं पा रहा वहीं विपणन संघ के छतौना ( मंदिर हसौद ) डबल लाक गोदाम में बीते लगभग 15-20 दिनों से भंडारित पोटाश भी विभागीय लापरवाही के चलते किसानों तक नहीं पहुंच रहा ।किसान संघर्ष समिति के संयोजक भूपेंद्र शर्मा ने जानकारी दी है कि फिलहाल किसानों को डी ए पी व पोटाश की सामयिक आवश्यकता है । मंदिर हसौद सहकारी बैंक शाखा के अधीन आने वाले 8 सोसायटियों के अंतर्गत पड़ने वाले ग्रामों के किसान इन खादों के लिये सोसायटियों का चक्कर काट रहे पर खाद नहीं मिल रहा । जहां डी ए पी खाद की मांग के अनुरूप पूर्ति नहीं हो पा रहा वहीं छतौना गोदाम में लगभग 30 टन पोटाश खाद बीते 15-20 दिनों से भंडारित रखा हुआ है पर विभागीय लापरवाही के चलते इसे आन लाइन न किये जाने की वजह से सोसायटियों तक नहीं पहुंच पा रहा है और किसान इसके लिये संबंधित सोसायटियों का चक्कर काट रहे । उन्होंने जानकारी दी है कि इस शाखा के अधीन आने वाले 8 सोसायटी गोढ़ी , तोड़गांव , गनौद , मंदिर हसौद , पलौद , बरौदा , टेकारी व खुटेरी के किसानों को लगभग 800 बोरी पोटाश की सामयिक आवश्यकता है लेकिन गोदाम में पोटाश होने के बाद भी समय पर किसानों को खाद उपलब्ध नहीं कराया जा रहा । कमोबेश यही स्थिति चंदखुरी शाखा के अधीन आने वाले 07 सोसायटियों के भी होने की जानकारी उन्होंने दी है । भंडारित पोटाश को किसानों तक अविलंब पहुंचवाने व मांग के अनुरूप डी ए पी सोसायटियों को उपलब्ध कराने का आग्रह उन्होंने शासन - प्रशासन के नुमाइंदों से किया है ।
- रायपुर । विकास खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय आरंग के अंतर्गत आने वाले ग्राम टेकारी ( कुंडा ) स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला में मंगलवार को गठित छात्रसंघ पदाधिकारियों के शपथग्रहण व विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण के साथ - साथ 23 छात्राओं को सरस्वती सायकल योजना के अंतर्गत नि : शुल्क सायकल वितरित किया गया ।विद्या की देवी सरस्वती की पूजा - अर्चना व दीप प्रज्वलन के बाद प्राचार्य एस के वर्मा ने नवगठित छात्रसंघ के अध्यक्ष हर्ष शर्मा , संयोजक कु. रेशमी वर्मा , उपाध्यक्ष अरविंद साहू , सांस्कृतिक सचिव करन धीवर , क्रीड़ा सचिव दुष्यंत वर्मा , अनुशासन सचिव नमन भारती , स्वच्छता सचिव नामदेव निषाद व छात्रा प्रतिनिधि कु.ऋतु वर्मा को शपथ दिलायी । इसके साथ ही गुरुजनों , अतिथियों व छात्र - छात्राओं ने विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण कर एक पेड़ मां के नाम अभियान में इनकी सुरक्षा की शपथ ली । इस अवसर पर शाला विकास समिति के अध्यक्ष शंकर वर्मा व सांसद प्रतिनिधि मिथिलेश साहू , पूर्व अध्यक्ष हुलास राम वर्मा , क्षेत्रीय जिला पंचायत सदस्य कविता हेमंत कश्यप व जनपद सदस्य राजू मनहरे , सरपंच श्रीमती हेमा राजू यादव व उपसरपंच संतोष वर्मा , ग्रामीण सभा के कोषाध्यक्ष अशोक नायक व पूर्व उपाध्यक्ष छेदन वर्मा व सी एस सी नरेंद्र ठाकुर आदि सहित प्राथमिक , पूर्व व उच्च तथा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के गुरूजनों सहित विद्यालयीन कर्मी मौजूद रहे । आमंत्रित अतिथियों ने विद्यार्थियों से अनुशासित रहने व गुरुजनों से हर कीमत पर अनुशासन बनाये रखने का आग्रह किया । कार्यक्रम का संचालन संयुक्त रुप से सोहित वर्मा व प्रभात साहू ने किया ।
- -1-68 लाख प्रतिभागियों के बीच शानदार सफलता, कलेक्टर ने किया सम्मानितरायपुर ।मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड के छात्र कुलदीप पुरले ने तृतीय चरण राज्य स्तरीय गौ विज्ञान परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए बी श्रेणी में प्रदेशभर में द्वितीय स्थान प्राप्त कर जिले का गौरव बढ़ाया है। इस उपलब्धि पर उन्हें 31 हजार रुपये की पुरस्कार राशि एवं सम्मान प्रदान किया गया। रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित गौ सेवा संगम, गौ सेवकों के अभिनंदन एवं गौ विज्ञान परीक्षा-2025 के पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कुलदीप पुरले को सम्मानित किया।कुलदीप की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार ने जिला कलेक्टोरेट में सम्मानित किया और उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी। इस दौरान जिला शिक्षा अधिकारी श्री एल.पी. डाहिरे, गौ विज्ञान परीक्षा के जिला संयोजक श्री गौकरण डिंडोले, श्री लेखराम साहू सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष आयोजित गौ विज्ञान परीक्षा में प्रदेशभर के एक लाख 68 हजार विद्यार्थियों ने भाग लिया। विभिन्न जिलों से चयनित 510 प्रतिभागियों ने राज्य स्तरीय परीक्षा में हिस्सा लिया, जिनमें मुंगेली जिले के 12 विद्यार्थियों को प्रतिनिधित्व का अवसर मिला। इनमें से शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल मनोहरपुर के छात्र कुलदीप पुरले ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में द्वितीय स्थान हासिल किया। गौ विज्ञान परीक्षा के माध्यम से गौ संरक्षण, संवर्धन, गौ आधारित कृषि, जैविक खेती, पर्यावरण संरक्षण तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
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राजनांदगांव । कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव की उपस्थिति में जिला पंचायत सभाकक्ष में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत स्वसहायता समूह की सदस्यों को सूर्य सखी के रूप में प्रशिक्षित करने एक दिवसीय उन्मुखीकरण प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इस दौरान पद्मश्री फूलबासन यादव, सीईओ जिला पंचायत श्री दुर्गा प्रसाद अधिकारी उपस्थित थे। कार्यशाला में बताया गया कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत हितग्राहियों के आवास में सोलर इकाई स्थापित किए जाने संबंधी कार्य के लिए छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान (एनआरएलएम) अंतर्गत गठित संकुल स्तरीय संगठन को वेंडर बनाने के लिए स्वसहायता समूह सदस्यों को सूर्य सखी के रूप में प्रशिक्षित एवं विकसित किया जा रहा है। इस दौरान छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान (एनआरएलएम) अंतर्गत गठित संकुल स्तरीय संगठन एवं समूह सदस्यों को प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की विस्तृत जानकारी एवं आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया।
अग्रणी बैंक प्रबंधक श्री मुनीष शर्मा ने बताया कि शासन द्वारा योजना अंतर्गत आवेदक को मात्र 5.75 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना अंतर्गत वेण्डर के रूप में चयनित संकुलों द्वारा हितग्राहियों के आवास में सोलर इकाई की स्थापना कर आजीविका में वृद्धि की जा सकती है। साथ ही चयनित सूर्य सखी ग्रामीण क्षेत्रों में योजना का प्रचार-प्रसार एवं हितग्राही चयन का कार्य कर सकेगी। विद्युत विभाग के सहायक अभियंता श्री प्रकाश वर्मा ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना अंतर्गत ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया, केन्द्र शासन एवं राज्य शासन से प्राप्त होने वाली अनुदान राशि सहित अन्य जानकारी दी। इस अवसर पर एनआरएलएम के अधिकारी-कर्मचारी, 16 संकुलों से चयनित कुल 80 सूर्य सखी (समूह सदस्य) उपस्थित थे। -
- कलेक्टर जनदर्शन में प्राप्त आवेदन पर की गई त्वरित कार्रवाई
- आवेदक के आवागमन एवं कृषि कार्य का मार्ग हुआ सुगम
राजनांदगांव । कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव के निर्देशानुसार जिले में शासकीय भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण के विरूद्ध अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में आज घुमका तहसील अंतर्गत ग्राम पटेवा में राजस्व विभाग की टीम ने शासकीय भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। ग्राम पटेवा निवासी श्री ऐमन कुमार ने कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन प्रस्तुत कर शासकीय भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण के कारण अपने खेत तक आवागमन एवं कृषि कार्य में हो रही परेशानी से अवगत कराया था। कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने आवेदन पर तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार अतिक्रमण हटाने तथा आवेदक की समस्या का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर के निर्देशानुसार अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) श्री गौतम कुमार पाटिल के नेतृत्व में तहसीलदार श्री मुकेश ठाकुर, राजस्व निरीक्षक, हल्का पटवारी एवं पुलिस बल की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर शासकीय भूमि पर अतिक्रमणकर्ता जगदीश साहू द्वारा किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की। जिला प्रशासन ने कहा कि शासकीय भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने तथा आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए नियमानुसार कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी। - -राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दी शुभकामनाएंरायपुर। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस के अवसर पर समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा देश की एकता, अखंडता, स्वतंत्रता और गौरव का प्रतीक है। यह प्रत्येक भारतीय के लिए सम्मान, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा का स्रोत है।मंत्री श्री चौधरी ने देशवासियों से आह्वान करते हुए कहा कि आइये, राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस के अवसर पर हम सभी राष्ट्रध्वज के सम्मान की रक्षा के लिए सदैव समर्पित रहने का संकल्प लें।
- रायपुर ।राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज वनवासी विकास समिति, छत्तीसगढ़ द्वारा जनजातीय बालिकाओं में अध्ययन, ज्ञानार्जन एवं पठन-पाठन की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्थापित शबरी वाचनालय का उद्घाटन किया। वाचनालय की स्थापना के लिए राज्यपाल द्वारा अपने स्वेच्छानुदान मद से आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि शबरी वाचनालय एक दूरदर्शी पहल है, जो जनजातीय बालिकाओं के लिए अध्ययन, चिंतन, आत्मविकास एवं व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त केंद्र बनेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यहां अध्ययन करने वाली बालिकाएं ज्ञान एवं शिक्षा के बल पर प्रतियोगी परीक्षाओं सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त करेंगी। उनकी उपलब्धियां न केवल उनके परिवार, बल्कि समाज और राष्ट्र का गौरव भी बढ़ाएंगी।उन्होंने कहा कि शबरी कन्या आश्रम वर्षों से जनजातीय बालिकाओं को केवल आश्रय और शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कार, आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता तथा राष्ट्रसेवा की भावना भी प्रदान कर रहा है। इसी का परिणाम है कि यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाली अनेक बालिकाएं आज शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन तथा समाज सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संपदा एवं समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिपूर्ण राज्य है। यहां की संस्कृति का संबंध रामायण काल की परंपराओं से है। उन्होंने कहा कि असम और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपराओं में अनेक समानताएं हैं तथा दोनों राज्यों की सांस्कृतिक धारा भगवान श्रीराम से जुड़ी हुई है। ऐसे गौरवशाली सांस्कृतिक परिवेश का हिस्सा होना हम सभी के लिए गर्व की बात है।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय इंटरनेट और तकनीक का युग है। तेजी से बदलती जीवनशैली के बीच जीवन मूल्यों को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। परिवार और समाज के प्रति संवेदनशीलता, संतोष और सकारात्मक सोच ही जीवन को सार्थक बनाती है। संतुष्ट व्यक्ति ही वास्तविक रूप से प्रसन्न रह सकता है। जीवन ईश्वर का अमूल्य उपहार है, इसलिए इसके प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करते हुए समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम से संबद्ध वनवासी विकास समिति, छत्तीसगढ़ प्रांत विगत कई दशकों से जनजातीय समाज के उत्थान के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार, स्वावलंबन एवं सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुंचाने का यह प्रयास वास्तव में प्रेरणादायी है। उन्होंने संस्था के संस्थापकों, पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं सहयोगियों के समर्पण भाव की सराहना करते हुए उनके सेवा कार्यों की प्रशंसा की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ वनवासी विकास समिति के अध्यक्ष श्री उमेश कच्छप, सचिव श्री अनुराग जैन, संस्था के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, सहयोगी तथा शबरी कन्या आश्रम की छात्राएं उपस्थित थीं।
- -गुरूर के आशुतोष पंचागम का बिजली बिल 10 हजार रुपए से घटकर हुआ 12 सौ रुपए-सौर ऊर्जा से बढ़ी बचत और आत्मनिर्भरता, 3 किलोवाट के सोलर प्लांट पर 1.08 लाख रुपए की मिली सहायतारायपुर। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में इसके प्रभावी क्रियान्वयन से छत्तीसगढ़ के हजारों परिवारों को आर्थिक राहत मिल रही है। बालोद जिले में भी यह योजना आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। जिले के गुरूर निवासी श्री आशुतोष पंचागम इसका प्रेरणादायी उदाहरण हैं, जिन्होंने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित कर बिजली खर्च में उल्लेखनीय कमी हासिल की है।पिछले सात महीनों से संचालित इस सोलर प्लांट का लाभ अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। आशुतोष पंचागम बताते हैं कि सोलर प्लांट लगने से शुरुआती महीनों में उनका बिजली बिल पूरी तरह शून्य रहा। वहीं भीषण गर्मी के मौसम में, जब घर में एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों का अधिक उपयोग हुआ, तब भी उनका बिजली बिल, जो पहले 8 से 10 हजार रुपये तक पहुंच जाता था, घटकर लगभग 1200 से 1500 रुपये रह गया।आशुतोष पंचागम ने बताया कि योजना के तहत आवेदन की पूरी प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और नागरिकों के लिए सुविधाजनक है। आवेदन के बाद अधिकृत वेंडर द्वारा घर का निरीक्षण किया गया तथा ऋण और सब्सिडी से संबंधित सभी जानकारियां उपलब्ध कराई गईं। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद कम समय में ही उनके घर पर सोलर प्लांट स्थापित कर दिया गया। उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत उन्हें केंद्र एवं राज्य सरकार से कुल 1 लाख 8 हजार रुपए की सब्सिडी प्राप्त हुई, जिससे सोलर प्लांट लगाने का आर्थिक बोझ काफी कम हो गया।आशुतोष का कहना है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना केवल बिजली बिल कम करने की योजना नहीं है, बल्कि यह स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने का प्रभावी माध्यम भी है। सौर ऊर्जा अपनाने से पर्यावरण संरक्षण के साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिल रही है। उन्होंने जिले के नागरिकों से अपील की कि वे भी इस योजना का लाभ उठाकर अपने घरों में रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित करें और बिजली खर्च में बचत के साथ स्वच्छ ऊर्जा अभियान का हिस्सा बनें।प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आज छत्तीसगढ़ में ऊर्जा आत्मनिर्भरता, आर्थिक बचत और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम बन रही है। यह योजना न केवल परिवारों का मासिक बिजली खर्च कम कर रही है, बल्कि प्रदेश में अक्षय ऊर्जा के उपयोग को भी नई गति प्रदान कर रही है।
- -प्रशासन की संवेदनशील पहल से ग्रामीण को मिली डिजिटल सेवा का लाभरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन एवं जनसेवा की प्रतिबद्धता को साकार करती मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी मंच बनकर उभर रही है। मुंगेली जिले में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि नागरिकों को शासन की सेवाओं का लाभ बिना किसी विलंब के प्राप्त हो सके। इसी कड़ी में मुंगेली विकासखंड के ग्राम सिपाही निवासी सुखीराम की मांग पर त्वरित कार्यवाही करते हुए उसे लर्निंग लाइसेंस उपलब्ध कराया गया। सुखीराम ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के संबंध में अपनी समस्या दर्ज कराई थी। शिकायत प्राप्त होते ही संबंधित विभाग ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण की और उनका लर्निंग लाइसेंस तैयार कर प्रदान कर दिया।लर्निंग लाइसेंस प्राप्त होने के बाद सुखीराम ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पहले ऐसी सेवाओं के लिए कई बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से उनकी समस्या का समय पर समाधान हुआ और उन्हें बिना अनावश्यक परेशानी के सेवा का लाभ मिल गया। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, जिला प्रशासन तथा संबंधित विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। बता दें कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में प्राप्त प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि पात्र नागरिकों को शासन की जनहितकारी सेवाओं का लाभ शीघ्र मिल सके। शासन की डिजिटल एवं जन-केंद्रित पहलें ग्रामीण क्षेत्रों तक प्रभावी रूप से पहुंच रही हैं और आम नागरिकों का प्रशासन के प्रति विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।
- -महिलाओं को मिल रहा योजनाओं का सीधा लाभ-महिला सशक्तिकरण, रोजगार, पर्यटन, उद्योग और सुशासन के विजन को मुख्यमंत्री ने किया साझा-बस्तर में शांति, विकास और रोजगार का नया अध्याय शुरू-इमर्जिंग छत्तीसगढ़–सशक्त नारी, समृद्ध प्रदेश कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय हुए शामिलरायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर में आयोजित 'इमर्जिंग छत्तीसगढ़–सशक्त नारी, समृद्ध प्रदेश' कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने महिला सशक्तिकरण, बस्तर के विकास, रोजगार, उद्योग, पर्यटन, सुशासन और सामाजिक सुधारों पर राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को विस्तार से रखा।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल एक राज्य नहीं, बल्कि हम सभी के लिए छत्तीसगढ़ महतारी है। यह माता कौशल्या की पावन जन्मभूमि और भगवान श्रीराम का ननिहाल है। भारतीय संस्कृति में नारी को सर्वोच्च सम्मान देने की परंपरा रही है। उन्होंने वेदों का उल्लेख करते हुए कहा कि "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता" अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश की लगभग 68 लाख 50 हजार विवाहित महिलाओं को महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह एक हजार रुपये सीधे उनके बैंक खातों में दिए जा रहे हैं। अब तक 29 किश्तों के माध्यम से लगभग 18 हजार 800 करोड़ रुपये महिलाओं के खातों में अंतरित किए जा चुके हैं।उन्होंने कहा कि जब वे गांवों का दौरा करते हैं तो माताओं और बहनों के चेहरों पर इस योजना से आया आत्मविश्वास और संतोष स्पष्ट दिखाई देता है। बातचीत के दौरान माताएं और बहनें बताती हैं कि किसी ने अपनी बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश किया है, किसी ने सिलाई मशीन खरीदकर रोजगार शुरू किया है तो किसी ने किराना या सब्जी की दुकान खोलकर आय बढ़ाई है। इससे माताएं और बहनें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और परिवार की निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी भी बढ़ी है।मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के दानसरा गांव की माताओं और बहनों ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को एकत्र कर भगवान श्रीराम के मंदिर के निर्माण का कार्य प्रारंभ किया है। उन्होंने कहा कि यह इस योजना का सबसे प्रेरक उदाहरण है कि महिलाएं इस राशि का उपयोग समाज और संस्कृति के संरक्षण के लिए भी कर रही हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 2 लाख 86 हजार महिला स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे लगभग 30 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन्हें रेडी-टू-ईट कार्यक्रम से जोड़ा जा रहा है तथा ऋण एवं अन्य आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि चार-पांच दशकों तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा बस्तर अब तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और स्थानीय जनता के सहयोग से बस्तर में शांति स्थापित हुई है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कैंप स्थापित करने के साथ-साथ विकास की योजनाओं को भी समानांतर रूप से आगे बढ़ाया गया। पहले सुरक्षा शिविरों के पांच किलोमीटर दायरे तक योजनाओं का लाभ पहुंचता था, जिसे अब बढ़ाकर दस किलोमीटर तक किया गया है।मुख्यमंत्री ने बताया कि नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत अब 500 से अधिक गांवों को जोड़ा जा चुका है। लगभग 17 विभागों की 40 से अधिक योजनाओं का लाभ इन गांवों तक पहुंचाया जा रहा है। यहां लोगों को राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत लगभग 36 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया तथा गंभीर रोगियों को बेहतर उपचार के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। वहीं बस्तर मुन्ने योजना के माध्यम से अधिकारी स्वयं दूरस्थ गांवों में पहुंचकर लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान कर रहे हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में इंद्रावती नदी पर देउरगांव एवं मटनार सिंचाई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनसे लगभग 80 हजार एकड़ भूमि सिंचित होगी।उन्होंने कहा कि चित्रकोट जलप्रपात, कुटुमसर गुफाएं, अबूझमाड़ के विशाल वन तथा धुड़मारास जैसे गांव बस्तर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित कर रहे हैं। नई औद्योगिक नीति में होम-स्टे को भी शामिल किया गया है, जिसके तहत पांच कमरों तक के होम-स्टे निर्माण के लिए ऋण और सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि इमली, महुआ, हर्रा, बहेड़ा, सीताफल और औषधीय वनोपजों का मूल्य संवर्धन कर स्थानीय लोगों की आय बढ़ाई जा रही है। नेतानार जैसे गांवों में सेवा डेरा के माध्यम से महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई, पैकेजिंग तथा अन्य आजीविका आधारित प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। आईआईटी की टीम भी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास का कार्य कर रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्मांतरण समाज के लिए गंभीर चुनौती है। विभिन्न राज्यों के कानूनों का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2026 लागू किया गया है। इसके तहत धर्म परिवर्तन करने और करवाने वाले दोनों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। प्रलोभन, दबाव अथवा छलपूर्वक धर्मांतरण करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने बताया कि समान नागरिक संहिता के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है तथा राज्य सरकार का प्रयास है कि आगामी शीतकालीन विधानसभा सत्र तक इस दिशा में ठोस प्रगति हो।मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में हुए पीएससी घोटाले की सीबीआई जांच जारी है तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार ने विभिन्न विभागों में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया है तथा शीघ्र ही 5 हजार शिक्षकों की भर्ती भी की जाएगी।उन्होंने कहा कि सभी युवाओं को सरकारी नौकरी देना संभव नहीं है, इसलिए नई औद्योगिक नीति के माध्यम से निजी निवेश और उद्योगों को बढ़ावा देकर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित किया जा रहा है। पिछले डेढ़ वर्षों में राज्य को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे लाखों युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है।कार्यक्रम में बलौदाबाजार जिले की श्रीमती मीना देवांगन ने महतारी वंदन योजना के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि योजना से प्राप्त राशि से उन्होंने चूड़ी का व्यवसाय शुरू किया है। वहीं श्रीमती सरोज ने कहा कि वे इस राशि से अपने बच्चे की स्कूल फीस का भुगतान कर रही हैं। दोनों महिलाओं ने कहा कि इस योजना ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है
- -सेवा भाव, संवेदनशीलता और तार्किक निर्णय से निभाएं दायित्व -श्री डेकारायपुर । राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि प्रशासनिक सेवा केवल एक पद नहीं, बल्कि आम जनता की सेवा का महत्वपूर्ण अवसर है। इस अवसर का पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और ईमानदारी से निर्वहन करना प्रत्येक अधिकारी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि जहां चुनौतियां होती हैं, वहीं नए अवसर भी मौजूद होते हैं। इसलिए प्रत्येक परिस्थिति का सकारात्मक दृष्टिकोण से सामना करते हुए जनता के हित में निर्णय लिए जाने चाहिए।राज्यपाल आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के वर्ष 2025 बैच के प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों से चर्चा कर रहे थे। ये अधिकारी वर्तमान में छत्तीसगढ़ प्रशासनिक अकादमी, निमोरा में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। प्रशिक्षणार्थी अधिकारियों ने अकादमी के महानिदेशक श्री टी.सी. महावर के नेतृत्व में राज्यपाल से सौजन्य भेंट की।राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक निर्णय में मानवीय संवेदनाओं का भी समावेश होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक कार्य में ह्यूमन टच होना आवश्यक है, ताकि शासन की योजनाओं और निर्णयों का लाभ वास्तविक रूप से आम नागरिकों तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को जनता से नियमित संवाद करना चाहिए, क्षेत्र का सतत भ्रमण करना चाहिए और लोगों की समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो कार्य संभव हो, उसे प्राथमिकता के साथ पूरा करें और यदि किसी कारणवश कोई कार्य संभव नहीं है तो उसकी स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी संबंधित व्यक्ति को अवश्य दें। इससे प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत होता है।राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के लिए तार्किक सोच और विवेकपूर्ण निष्कर्ष अत्यंत आवश्यक हैं। तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लेना ही एक सक्षम अधिकारी की पहचान है। उन्होंने कहा कि जनता को न्याय दिलाना लोक सेवक का प्रथम कर्तव्य है और प्रत्येक अधिकारी को इस भावना के साथ कार्य करना चाहिए।उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि वे युवा हैं और उनके कंधों पर भविष्य के प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्हें अपने कार्यों के माध्यम से सुशासन, पारदर्शिता और जनविश्वास को मजबूत करना होगा। राज्यपाल ने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि आपको छत्तीसगढ़ जैसे शांत, समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य में सेवा करने का अवसर मिला है। यहां के लोगों में सेवा, सहयोग और आत्मीयता की भावना अत्यंत प्रबल है। इस विश्वास और अपनत्व को बनाए रखते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही एक सफल प्रशासनिक अधिकारी की पहचान होगी।इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासनिक अकादमी की प्रशिक्षण निदेशक श्रीमती मेनका प्रधान एवं प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।
- -यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से सभी संबंधित विभाग मिलकर तैयार करेंगे प्रभावी कार्ययोजना-स्वस्थ माताएं और स्वस्थ बच्चे ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव - मुख्यमंत्री श्री सायरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में भारत में यूनिसेफ की प्रतिनिधि सुश्री सिंथिया मैककैफ्रे ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण उन्मूलन तथा बच्चों के समग्र विकास को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा बच्चों के पोषण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और इन क्षेत्रों में स्थायी सुधार के लिए सभी विभागों के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वस्थ माताएं और स्वस्थ बच्चे ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा आदिम जाति विकास विभाग सहित सभी संबंधित विभाग यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से एक समन्वित और परिणामोन्मुख कार्ययोजना तैयार करें, जिससे शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर और कुपोषण में कमी लाई जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं का प्रभाव तभी बढ़ेगा, जब विभिन्न विभाग साझा लक्ष्य और समन्वित कार्यप्रणाली के साथ काम करेंगे। उन्होंने अधिकारियों से ऐसी मल्टी-सेक्टोरल रणनीति तैयार करने को कहा, जिससे स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचे और बच्चों के पोषण स्तर में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित हो।इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सुश्री सिंथिया मैककैफ्रे का शॉल एवं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक 'नंदी' भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। वहीं सुश्री मैककैफ्रे ने भारत में यूनिसेफ के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी विशेष स्मारक डाक टिकट मुख्यमंत्री को भेंट किया।यूनिसेफ की भारत प्रतिनिधि सुश्री सिंथिया मैककैफ्रे ने मुख्यमंत्री का "जय जोहार" कहकर अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध संस्कृति और सरल-सहज लोगों का प्रदेश है। उन्होंने बताया कि यूनिसेफ लंबे समय से राज्य सरकार के साथ मिलकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और बाल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार और यूनिसेफ के संयुक्त प्रयासों से प्रदेश के बच्चों का भविष्य अधिक सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध बनेगा।बैठक में मंत्रिमंडल के सदस्य, मुख्य सचिव श्री विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, छत्तीसगढ़ में यूनिसेफ की प्रमुख सुश्री सीमा कुमार, श्री अनिल गुलाटी तथा डॉ. बाल पारितोष दास उपस्थित थे।
- -बीएससी एग्रीकल्चर ग्रेजुएट युवती ने सरकारी सहायता से स्वरोजगार को बनाया सफलता की मिसाल-नेशनल लाइव स्टॉक मिशन से मिली 30 लाख रुपये की सब्सिडी, आधुनिक फार्म में 400 से अधिक सूकररायपुर / सूकर पालन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में एक तेजी से उभरता हुआ और अत्यधिक लाभदायक स्वरोजगार है। कम लागत, उच्च प्रजनन क्षमता और मांस की लगातार बढ़ती मांग के कारण, यह लाखों युवाओं और किसानों के लिए स्थायी आय का एक प्रमुख साधन बन गया है। सूअर अन्य पशुओं की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ते हैं। मादा सूअर एक बार में 8 से 12 बच्चों (पिगलेट्स) को जन्म देती है, जो 45 से 60 दिनों में बेचने लायक हो जाते हैं। छत्तीसगढ़ में कई युवा अपनी पारंपरिक या सामान्य नौकरियां छोड़कर आधुनिक तरीके से सूकर पालन कर सालाना लाखों-करोड़ों रुपये कमा रहे हैं।बस्तर के युवाओं में अब पारंपरिक रोजगार से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि एवं पशुपालन आधारित उद्यमों की नई सोच विकसित हो रही है। इसी सोच को साकार करते हुए बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के किंजोली गांव की रहने वाली बीएससी एग्रीकल्चर स्नातक ग्रेसी दुग्गा ने पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग से एक करोड़ रुपये से अधिक लागत की आधुनिक सूकरपालन परियोजना स्थापित कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। आज उनका फार्म न केवल सफल व्यावसायिक मॉडल बन चुका है, बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र भी बन गया है।ग्रेसी दुग्गा ने वर्ष 2023 में उत्तराखंड के देहरादून से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ने के बजाय उन्होंने व्यावहारिक ज्ञान का उपयोग करते हुए कृषि एवं पशुपालन के क्षेत्र में उद्यम स्थापित करने का निर्णय लिया। उन्होंने पारंपरिक व्यवसायों के बजाय सूकरपालन को चुना, क्योंकि बस्तर क्षेत्र में इसकी मांग लगातार बढ़ रही थी, जबकि व्यावसायिक स्तर पर इस क्षेत्र में बहुत कम लोग कार्य कर रहे थे। भारत सरकार सूकर पालन को बढ़ावा देने के लिए नेशनल लाइवस्टॉक मिशन जैसी योजनाएं चला रही है। इसके तहत, फार्म खोलने के लिए 15 लाख से 30 लाख तक की परियोजना पर 50% तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है।बड़े स्तर पर आधुनिक सूकरपालन इकाई स्थापित करने के लिए ग्रेसी को तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता की आवश्यकता थी। पशु चिकित्सा सेवाओं के संयुक्त संचालक कार्यालय ने उन्हें परियोजना तैयार करने से लेकर विभिन्न तकनीकी पहलुओं तक हर स्तर पर सहयोग प्रदान किया। विभाग के मार्गदर्शन में 1 करोड़ 12 लाख 10 हजार रूपए की आधुनिक परियोजना तैयार की गई, जिसे केंद्र सरकार की नेशनल लाइव स्टॉक मिशन योजना के अंतर्गत स्वीकृति मिली।अनुसूचित जनजाति वर्ग से पहली बार आवेदन करने पर ग्रेसी को योजना के तहत 30 लाख रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई। ग्रेसी का कहना है कि यदि यह सरकारी अनुदान नहीं मिलता तो वे केवल 20 से 25 सूकरों के साथ छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू कर पातीं, लेकिन शासन की सहायता ने उन्हें आधुनिक अधोसंरचना के साथ बड़े स्तर पर फार्म स्थापित करने का अवसर दिया।पशुपालन विभाग के चिकित्सकों और कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में फार्म में तमिलनाडु से उन्नत नस्ल के सूकर लाए गए। सभी पशुओं के टीकाकरण, पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया। मई 2025 में फार्म की शुरुआत 110 प्रजनन योग्य सूकरों से हुई थी, जिनमें 100 मादा और 10 नर शामिल थे। शुरुआती चरण में छोटे बच्चों को तैयार करने और प्रजनन योग्य बनाने में लगभग एक वर्ष का समय लगा। वैज्ञानिक प्रबंधन और बेहतर देखभाल के परिणामस्वरूप जून 2026 तक फार्म में 202 वयस्क प्रजनन योग्य सूकर तथा लगभग 206 पिगलेट तैयार हो चुके हैं। वर्तमान में फार्म में कुल 400 से अधिक सूकर मौजूद हैं, जो इस परियोजना की उल्लेखनीय सफलता को दर्शाते हैं।ग्रेसी दुग्गा के आधुनिक फार्म से अब उन्नत नस्ल के पिगलेट्स की व्यावसायिक बिक्री भी शुरू हो चुकी है। उनके फार्म से रायपुर सहित स्थानीय बाजारों में सूकरों की नियमित आपूर्ति की जा रही है। हाल ही में उन्होंने 65 पिगलेट्स को 6 हजार रूपए प्रति पिगलेट की दर से बेचकर 3 लाख 90 हजार रुपए की आय अर्जित की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर सूकरपालन लाभकारी व्यवसाय के रूप में तेजी से उभर रहा है।ग्रेसी दुग्गा की सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि युवाओं को सही मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और समय पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिले तो वे ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर सफल उद्यम स्थापित कर सकते हैं। पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग, शासन की वित्तीय सहायता और अपनी मेहनत के बल पर ग्रेसी ने न केवल स्वयं को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि बस्तर के शिक्षित युवाओं को कृषि एवं पशुपालन आधारित स्टार्टअप शुरू करने के लिए भी नई प्रेरणा दी है।
- -राज्य में 33.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लक्ष्य का 69 प्रतिशत बोनी पूर्णरायपुर / प्रदेश में मानसून के दस्तक के साथ ही खेती किसानी का कार्य जोरों पर हैं। राज्य में 22 जुलाई की स्थिति में राज्य के 33.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्रों में लक्ष्य का 69 प्रतिशत बोनी हो चुकी है। इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किसानों को खेती-किसानी में सहुलियतें प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक सहयोग करने संबंधित अधिकारियों निर्देशित किए गए हैं। उन्होंने किसानों को उनकी मांग के अनुसार सुगमता के साथ प्रमाणित खाद-बीज का वितरण करने को कहा हैं। खाद-बीज वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही सोसायटियों में पर्याप्त खाद-बीज का भण्डारण कर सतत निगरानी करने को कहा गया है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा इन पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है।कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के किसानों को अब तक 9.22 लाख मीट्रिक टन खाद और 4.12 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में मानसून की बौछारों के साथ शुरू हुए खेती-किसानी में बोनी का रकबा भी निरंतर बढ़ते जा रहा है। राज्य में अब तक 33.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों जैसे धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली, रामतिल आदि की बोनी हो चुकी है, जो लक्ष्य का 69 प्रतिशत है। इस खरीफ सीजन में राज्य सरकार ने 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा है।अधिकारियों ने बताया कि 22 जुलाई सुबह तक की स्थिति में प्रदेश में अब तक 389.7 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिमी है। गौरतलब है कि औसत दर्ज वर्षा जिलों की आज तक की औसत वर्षा पिछले 10 वर्षाे के आधार पर 421.5 मिमी. है। वहीं प्रतिवेदित समय तक आज हुई वर्षा 33.5 मिमी. है।अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष खरीफ 2026 के लिए बीज निगम द्वारा प्रदेश में 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरूद्ध 4.70 लाख क्विंटल बीज का भंडारण कर अब तक 4.12 लाख क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो मांग का 83 प्रतिशत है। गत वर्ष इसी अवधि में 4.11 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया गया था।इसी प्रकार प्रदेश में इस खरीफ सीजन में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उक्त लक्ष्य के विरूद्ध 14.57 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में भंडारण किया गया है। उक्त भंडारण के विरूद्ध 9.22 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 59 प्रतिशत है।अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार किसानों को खेती-किसानी में सहूलियते हो इस उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अल्प कालीन कृषि ऋण उपलब्ध करा रहे है। चालू खरीफ सीजन 2026 के लिए 21 जुलाई की स्थिति में 6633.71 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया है, जबकि गत वर्ष इसी अवधि में 5560.34 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया गया था। इस वर्ष किसानों को 8800 करोड़ रूपए ऋण वितरण किये जाने का लक्ष्य रखा गया है।
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-परिजनों से दूरभाष पर की चर्चा, बेहतर उपचार सुनिश्चित करने जिला प्रशासन को दिए निर्देश
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज सुबह अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोक कलाकार एवं प्रख्यात बांस वादक श्री विक्रम यादव के परिजनों से दूरभाष पर चर्चा कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने परिजनों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उनके समुचित उपचार और आवश्यक सहयोग के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके साथ खड़ी है तथा इलाज में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।मुख्यमंत्री श्री साय ने राजनांदगांव कलेक्टर से भी दूरभाष पर चर्चा कर श्री विक्रम यादव के उपचार की अद्यतन जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि वरिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में उनका बेहतर उपचार सुनिश्चित किया जाए तथा आवश्यकता के अनुसार सभी आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि श्री विक्रम यादव केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक धरोहर हैं। उन्होंने अपनी विशिष्ट बांस वादन शैली के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और भारत की समृद्ध परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहचान दिलाई है।मुख्यमंत्री ने श्री विक्रम यादव के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार लोक कलाकारों के सम्मान, संरक्षण और कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट बांस वादन शैली के लिए प्रसिद्ध श्री विक्रम यादव वर्तमान में अस्वस्थ हैं और उनका उपचार राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। -
-14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर की तैयारियों पर हुई चर्चा
-एमएसएमई क्षेत्र को मिलेगा नया संबल, निवेश और रोजगार को मिलेगी गति - मुख्यमंत्री श्री सायरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने आगामी 18, 19 एवं 20 सितंबर को रायपुर में आयोजित होने वाले 14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर (आईआईएफ) की तैयारियों, उद्देश्यों एवं आयोजन की विस्तृत रूपरेखा से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मुख्यमंत्री श्री साय ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे राष्ट्रीय स्तर के औद्योगिक आयोजन प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को नई दिशा देने के साथ-साथ निवेश, नवाचार और रोजगार सृजन को भी गति प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उद्योग-अनुकूल वातावरण तैयार करने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा उद्यमियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। रायपुर में पहली बार इतने व्यापक स्तर पर राष्ट्रीय औद्योगिक समागम का आयोजन छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास की नई संभावनाओं का द्वार खोलेगा।प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि लघु उद्योग भारती लघु उद्यमियों का देश का सबसे बड़ा संगठन है, जो सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को सशक्त बनाने तथा उद्योगों के बीच व्यवसायिक सहयोग (बी2बी) को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। रायपुर में आयोजित होने वाला 14वां इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर देशभर के उद्यमियों, निवेशकों, उद्योग विशेषज्ञों एवं तकनीकी संस्थानों को एक साझा मंच उपलब्ध कराएगा, जहां आधुनिक तकनीक, निवेश, विपणन, उद्योग-व्यापार सहयोग और व्यापार विस्तार के नए अवसर विकसित होंगे। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ के एमएसएमई क्षेत्र को नई ऊर्जा देने के साथ प्रदेश को राष्ट्रीय औद्योगिक मानचित्र पर और अधिक सशक्त पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस आयोजन से स्थानीय उद्यमियों को राष्ट्रीय बाजार से जुड़ने, नई तकनीकों को अपनाने और व्यापार विस्तार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। इस अवसर पर लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री प्रकाश चंद्र गुप्त, संयुक्त महासचिव श्री नरेश पारख, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री समीर, प्रांत अध्यक्ष श्रीमती सी. पी. दुबे, श्री पुरुषोत्तम पटेल, श्री अनिल बाकलीवाल, श्रीमती तूलिका पांडे एवं श्री प्रांजल सिंह ठाकुर उपस्थित थे। - 0-अब बच्चों को सुरक्षित भवन में मिलेगी बेहतर शिक्षा, वर्षों की प्रतीक्षा हुई समाप्तबीजापुर। जिले के विकासखंड भैरमगढ़ के सुदूर ग्राम बेलनार में बच्चों के लिए पहला पक्का प्राथमिक विद्यालय भवन तैयार हो गया है। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग, बीजापुर द्वारा निर्मित इस नए विद्यालय भवन से अब बच्चों को सुरक्षित, व्यवस्थित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण में पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा। इंद्रावती नदी के किनारे स्थित बेलनार गांव ग्राम पंचायत मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर है। लंबे समय तक यहां विद्यालय भवन नहीं होने के कारण बच्चों को कच्ची पाठशाला और अस्थायी शेड के नीचे पढ़ाई करनी पड़ती थी। बरसात और गर्मी के मौसम में इससे पढ़ाई प्रभावित होती थी और विद्यार्थियों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। शिक्षा विभाग (डी.पी.आई.) की स्वीकृति से बेलनार में नवीन प्राथमिक शाला भवन का निर्माण कराया गया है। भवन निर्माण पूरा होने के बाद अब बच्चे पक्के और सुरक्षित विद्यालय में पढ़ाई कर सकेंगे। इससे उनकी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और उन्हें बेहतर सीखने का माहौल मिलेगा।बेलनार क्षेत्र के इस पहले स्थायी विद्यालय भवन से बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास को नई दिशा मिलेगी। साथ ही बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलने से विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति बढ़ेगी और उनकी सीखने की क्षमता में भी सकारात्मक सुधार होगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा संबंधी आधारभूत सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। बेलनार में बने इस नए विद्यालय भवन से यह स्पष्ट होता है कि सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत है। यह विद्यालय क्षेत्र के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव साबित होगा।



























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