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- -हितग्राहियों को घर बैठे मिल रही बैंकिंग सुविधाएं, योजनाओं की राशि प्राप्त करना हुआ आसानजगदलपुर । ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को सशक्त बनाने में बैंक सखियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनकी सक्रिय सेवाओं से अब ग्रामीणों को बैंकिंग कार्यों के लिए दूरस्थ बैंक शाखाओं तक जाने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो गई है। गांव में ही विभिन्न बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध होने से समय और धन दोनों की बचत हो रही है तथा ग्रामीणों को त्वरित और सहज सेवाएं मिल रही हैं।बैंक सखियां माइक्रो एटीएम एवं आधार आधारित बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से नकद निकासी, जमा, बैलेंस जांच, धन अंतरण सहित अन्य बैंकिंग सेवाएं ग्रामीणों तक पहुंचा रही हैं। इसके साथ ही वे ग्रामीणों को डिजिटल लेन-देन, सुरक्षित बैंकिंग और वित्तीय साक्षरता के प्रति भी जागरूक कर रही हैं।बैंक सखियों के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा पेंशन, विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, दिव्यांग पेंशन, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की मजदूरी, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं की राशि हितग्राहियों तक समय पर पहुंच रही है। इससे ग्रामीणों को लंबी दूरी तय कर बैंक जाने की परेशानी से राहत मिली है।विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगजनों एवं दूरस्थ अंचलों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए बैंक सखियां एक भरोसेमंद सहायक के रूप में कार्य कर रही हैं। घर के समीप ही बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध होने से लाभार्थियों को सम्मानपूर्वक और सुविधाजनक तरीके से अपनी राशि प्राप्त हो रही है।इसके साथ ही बैंक सखियां स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं, छोटे व्यापारियों और ग्रामीण परिवारों को नियमित बचत, बैंक खाते के उपयोग तथा डिजिटल भुगतान के लिए प्रेरित कर रही हैं। इससे गांवों में वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ हो रही है।बस्तर जिले में 141 बैंक सखी कार्य कर रही हैं जिन्होंने जून माह में पेंशन से संबंधित 3166 हितग्राहियों को ट्रांजेक्शन में 28 लाख 67 हजार 565 रुपए की राशि, एमविवाय के तहत 4097 हितग्राहियों को ट्रांजेक्शन में 38 लाख 82 हजार 470 रुपए की राशि, स्व सहायता समूहों के 22367 हितग्राहियों को 2 करोड़ 31 लाख 87 हजार से अधिक राशि, विबी जी राम जी (मनरेगा) में 2103 हितग्राहियों को 15 लाख 46 हजार 179 रुपए और अन्य 12026 वित्तीय हस्तांतरण में 01 करोड़ 44 लाख 78 हजार से अधिक राशि का वित्तीय गतिविधि की गई है ।बैंक सखियों की सक्रिय भागीदारी से शासन की वित्तीय समावेशन की अवधारणा को नई गति मिली है। वे गांव और बैंक के बीच एक मजबूत सेतु बनकर न केवल बैंकिंग सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा रही हैं, बल्कि ग्रामीणों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
- -100 से 125 दिन रोजगार, 261 से 300 रुपये मजदूरी, राजेश्वरी यादव ने जताई खुशीकांकेर। विकसित भारत ‘जी राम जी’ योजना ग्रामीण गरीबों, श्रमिकों और मेहनतकश मजदूर वर्ग के जीवन में भरोसे का सहारा बनी है। यह योजना मनरेगा का उन्नत और आधुनिक रूप है, जो ग्रामीण श्रमिकों के लिए 125 दिन के रोजगार की गारंटी देता है।कांकेर विकासखंड के ग्राम बेवरती निवासी श्रीमती राजेश्वरी यादव ने विकसित भारत जी राम-जी योजना के प्रति खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि पहले उन्हें मनरेगा के तहत 261 रूपए प्रतिदिन मजदूरी मिलती थी, जबकि अब योजना के तहत मजदूरी बढ़ाकर 300 रूपए प्रतिदिन कर दी गई है। इसके साथ ही अब ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों का रोजगार मिलने से उनकी आजीविका को और मजबूती मिलेगी।श्रीमती यादव ने कहा कि बढ़ी हुई मजदूरी और अतिरिक्त रोजगार के दिनों से परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा तथा घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने में सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की यह योजना ग्रामीण श्रमिकों के लिए बेहद लाभकारी है और इससे गांव के अनेक परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने विकसित भारत जी राम-जी योजना के माध्यम से ग्रामीणों को अधिक रोजगार और बेहतर मजदूरी उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
- एमसीबी/ कहते हैं कि खेती में समय सबसे बड़ा धन होता है। यदि किसान को सही समय पर खाद, बीज और उर्वरक उपलब्ध हो जाएं तो उसकी आधी चिंता स्वतः ही समाप्त हो जाती है। मनेन्द्रगढ़ विकासखंड के ग्राम चैनपुर निवासी सीमांत किसान नरेन्द्र सिंह, पिता सुदन सिंह, के लिए भी इस खरीफ सीजन में यही अनुभव नई उम्मीद लेकर आया है।नरेन्द्र सिंह के पास कुल 1.780 हेक्टेयर कृषि भूमि है, जिसमें संपूर्ण 1.780 हेक्टेयर असिंचित भूमि शामिल है। सीमित संसाधनों के कारण समय पर कृषि आदान की व्यवस्था करना उनके लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। लेकिन इस वर्ष आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, चैनपुर शाखा मनेन्द्रगढ़ ने उनकी इस चिंता को दूर कर दिया। समिति से उन्हें खरीफ फसल के लिए आवश्यक कृषि सामग्री ऋण के माध्यम से उपलब्ध कराई गई, जिससे वे बिना किसी आर्थिक दबाव के समय पर अपनी खेती की तैयारी कर सके।समिति द्वारा उन्हें 50 किलोग्राम की एक बोरी आई.पी.एल. पोटाश (एमओपी), 500 मिलीलीटर की एक बोतल इफको नैनो डीएपी, 45 किलोग्राम की चार बोरी एन.एफ.एल. नीम लेपित यूरिया तथा छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम का लोहारी कोरिया धान (एमटीयू-1156) की 30-30 किलोग्राम की दो बोरियां उपलब्ध कराई गईं। इन कृषि आदानों ने उनकी खरीफ खेती को समय पर शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बेहतर उत्पादन की उम्मीद को मजबूत किया।नरेन्द्र सिंह का कहना है कि यदि खाद और बीज समय पर उपलब्ध नहीं होते तो बुवाई में देरी होने से उत्पादन प्रभावित हो सकता था। सहकारी समिति के माध्यम से आसानी से कृषि सामग्री मिलने से उन्हें न केवल राहत मिली, बल्कि गुणवत्तापूर्ण बीज और उर्वरक मिलने से अच्छी फसल की उम्मीद भी बढ़ी है। उनका विश्वास है कि आधुनिक कृषि तकनीकों और संतुलित उर्वरक उपयोग से इस वर्ष उत्पादन बेहतर होगा और परिवार की आय में भी वृद्धि होगी।यह सफलता की कहानी दर्शाती है कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद, बीज एवं उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहकारी समितियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। शासन की किसान हितैषी व्यवस्था का लाभ सीधे खेत तक पहुंच रहा है, जिससे सीमांत और छोटे किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है तथा वे अधिक उत्साह के साथ खेती कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
- -लॉर्ड्स सिटी सोसाइटी में लगा रूफटॉप सोलर, एक साझा प्लांट से 27 घरों को मिलेगा लाभरायपुर । छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड सीएसपीडीसीएल के सिटी साउथ डिवीजन ने स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देते हुए रायपुर के लॉर्ड्स सिटी में वर्चुअल नेट मीटरिंग परियोजना का सफल क्रियान्वयन किया है। इस व्यवस्था के माध्यम से एक साझा रूफटॉप सोलर संयंत्र से अनेक परिवारों को सौर ऊर्जा का लाभ मिल रहा है।परियोजना के अंतर्गत 49.2 किलोवाट एवं 58.2 किलोवाट क्षमता के दो रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए गए हैं। इनसे कुल 27 उपभोक्ताओं को वर्चुअल नेट मीटरिंग सुविधा दी जा रही है। इस परियोजना का कार्य इलेक्ट्रोमैक डिवाइसेस के श्री मारूफ द्वारा पूरा किया गया।भारत सरकार की प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत रूफटॉप सोलर संयंत्रों पर आकर्षक सब्सिडी उपलब्ध है। वर्चुअल नेट मीटरिंग व्यवस्था हाउसिंग सोसायटी एवं अपार्टमेंट्स के लिए उपयोगी है क्योंकि इसमें प्रत्येक मकान पर अलग सोलर प्लांट लगाने की जरूरत नहीं होती। एक साझा सोलर संयंत्र से उत्पन्न बिजली का लाभ सभी पंजीकृत उपभोक्ताओं को मिलता है, जिससे बिजली बिल में बचत होती है और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है।सीएसपीडीसीएल के अधिकारीयों ने बताया कि लॉर्ड्स सिटी में वर्चुअल नेट मीटरिंग का सफल क्रियान्वयन रायपुर की आवासीय सोसायटियों के लिए एक उदाहरण है। जिन सोसायटियों में प्रत्येक घर पर अलग सोलर संयंत्र लगाना संभव नहीं है, उनके लिए यह व्यवस्था लाभकारी है। केंद्र सरकार की सब्सिडी से यह परियोजना और किफायती बन गई है। उन्होंने सभी आवासीय सोसायटियों से अपील की कि वे इस योजना का लाभ उठाकर बिजली बिल में बचत करें तथा हरित ऊर्जा अभियान में सहभागी बनें।लॉर्ड्स सिटी के निवासी श्री हसमुख भाई पटेल एवं श्री नारायण भाई पटेल ने कहा कि वर्चुअल नेट मीटरिंग व्यवस्था लाभदायक साबित हो रही है। साझा सोलर प्लांट से स्वच्छ ऊर्जा का लाभ मिल रहा है जिससे बिजली बिल में बचत हो रही है। सरकारी सब्सिडी के कारण यह परियोजना आर्थिक रूप से भी फायदेमंद रही। इस योजना के लिए हम मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी का आभार व्यक्त करते हैं।
- -NQAS मूल्यांकन में उत्कृष्ट प्रदर्शन, मरीजों को मिलेंगी और बेहतर सुविधाएंरायपुर । बीजापुर जिले का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) चेरपाल अब गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहचान बन गया है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) के तहत हुए बाह्य मूल्यांकन में स्वास्थ्य केंद्र ने सफलतापूर्वक सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा कर जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह सफलता स्वास्थ्य विभाग की बेहतर कार्यप्रणाली, टीमवर्क और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देने की प्रतिबद्धता का परिणाम है।03 और 04 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (NHSRC), नई दिल्ली की विशेषज्ञ टीम ने PHC चेरपाल का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान सामान्य प्रशासन, ओपीडी, आईपीडी, प्रयोगशाला, लेबर रूम, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन, संक्रमण नियंत्रण, दवा प्रबंधन, स्वच्छता, मरीजों को उपलब्ध सुविधाओं तथा अभिलेखों का गहन परीक्षण किया गया।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के मार्गदर्शन तथा खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) के नेतृत्व में पूरी स्वास्थ्य टीम ने मूल्यांकन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिला एवं विकासखंड स्तर के अधिकारियों, चिकित्सा अधिकारियों, स्टाफ नर्सों, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO), ग्रामीण स्वास्थ्य अधिकारियों, मितानिनों तथा अन्य कर्मचारियों ने समन्वित रूप से कार्य करते हुए मूल्यांकन दल को सभी आवश्यक जानकारी और अभिलेख उपलब्ध कराए।स्वास्थ्य विभाग ने मूल्यांकन दल द्वारा दिए गए सुझावों को भी गंभीरता से लिया है। इन सुझावों के अनुरूप आवश्यक सुधार किए जाएंगे, ताकि स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को और अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।PHC चेरपाल की यह उपलब्धि केवल एक मूल्यांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा लाभ क्षेत्र के हजारों लोगों को मिलेगा। बेहतर व्यवस्थाओं, प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के कारण मरीजों का उपचार अधिक प्रभावी और सुविधाजनक होगा। इससे लोगों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर विश्वास भी और मजबूत होगा।PHC चेरपाल की सफलता यह साबित करती है कि समर्पित टीमवर्क, बेहतर प्रबंधन और निरंतर प्रयासों से दूरस्थ क्षेत्रों में भी उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। यह उपलब्धि बीजापुर जिले में गुणवत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और भविष्य में अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।
- -नारायणपुर की अनिता वड्डे ने 'बिहान' और उन्नत मुर्गीपालन से बदली अपने परिवार की तकदीर, ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं मिसालरायपुर। मन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो और सही मार्गदर्शन यदि मिल जाए, तो परिस्थितियां बदलते देर नहीं लगती। इसे सच कर दिखाया है नारायणपुर जिले के विकासखंड नारायणपुर अंतर्गत ग्राम भाटपाल की रहने वाली अनिता वड्डे ने। कभी आर्थिक तंगहाली और अनिश्चित भविष्य से जूझने वाली अनिता आज समाज में 'लखपति दीदी' के रूप में अपनी एक नई और सम्मानजनक पहचान बना चुकी हैं।कुछ समय पहले तक अनिता वड्डे के परिवार की आजीविका का मुख्य साधन बेहद सीमित खेती और अस्थायी मजदूरी थी। आमदनी इतनी कम थी कि घर की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भी एक बड़ी चुनौती थी। भविष्य को लेकर हमेशा एक चिंता बनी रहती थी, लेकिन अनिता ने अपनी इस नियति को स्वीकार करने के बजाय आत्मनिर्भर बनने की ठानी।अनिता के जीवन में निर्णायक मोड़ तब आया, जब वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत 'जीवन स्व-सहायता समूह' से जुड़ीं। समूह में होने वाली नियमित बैठकों, बचत की आदतों और वित्तीय प्रबंधन के तौर-तरीकों ने उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास फूंका। इसी दौरान उन्हें बिहान के तहत संचालित एकीकृत कृषि क्लस्टर (आईएफसी) परियोजना के बारे में पता चला। पारंपरिक ढर्रे से हटकर कुछ नया करने की चाह में उन्होंने आधुनिक और वैज्ञानिक आजीविका पद्धतियों को अपनाने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि बिहान योजना और एकीकृत कृषि क्लस्टर ने मुझे केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर ही नहीं बनाया, बल्कि समाज में सम्मान के साथ जीने का गौरव भी दिया है।आईएफसी क्लस्टर के माध्यम से मिले तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग ने अनिता के प्रयासों को पंख लगा दिए। उन्होंने 1500 चूजों की ब्रूडिंग (Brooding) की कमान संभाली और स्थानीय किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले चूजों की आपूर्ति शुरू की। इससे न केवल उनकी बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों की आय में भी बढ़ोतरी हुई। संतुलित आहार, नियमित टीकाकरण और बेहतर प्रबंधन जैसी वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर उन्होंने मुर्गीपालन व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। वैज्ञानिक प्रबंधन का ही नतीजा था कि शुरुआती चरण में ही उन्हें 16 हजार रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई।इस शुरुआती सफलता ने अनिता के हौसलों को एक नई उड़ान दी है। आज वे अपने इस व्यवसाय का लगातार विस्तार कर रही हैं। अब उनका अगला लक्ष्य इस आजीविका के माध्यम से हर महीने 30 हजार रुपये तक की नियमित और स्थिर आय अर्जित करना है।आज उनका परिवार एक सुरक्षित और समृद्ध जीवन जी रहा है। अनिता अब सिर्फ अपने परिवार का सहारा नहीं हैं, बल्कि वे अपने पूरे गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणापुंज बन चुकी हैं। वे चाहती हैं कि गांव की हर महिला आर्थिक रूप से सक्षम होकर अपने पैरों पर खड़ी हो। अनिता वड्डे की यह कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सही अवसर और दृढ़ संकल्प के बल पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक सशक्तिकरण की नई इबारत लिख सकती हैं।
- -आईएफसी नर्सरी बनी किसानों की उम्मीद, गुणवत्तापूर्ण पौधों से बढ़ रही आय और आत्मनिर्भरताधमतरी । छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” के अंतर्गत जनपद पंचायत धमतरी द्वारा संचालित आईएफसी (IFC) परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन का प्रभावी मॉडल बनकर उभर रही है। सद्भावना महिला संकुल स्तरीय संगठन, दोनर के सहयोग से संचालित आजीविका सेवा केंद्र (नर्सरी इकाई) आज किसानों और महिला स्व-सहायता समूहों के लिए गुणवत्तापूर्ण पौधों का विश्वसनीय स्रोत बन चुकी है। इस पहल ने न केवल किसानों को समय पर स्वस्थ पौधे उपलब्ध कराए हैं, बल्कि वैज्ञानिक खेती, जैविक उत्पादन और महिला सशक्तिकरण को भी नई दिशा दी है।पहले किसानों को सब्जी एवं फलदार पौधों के लिए दूर-दराज के बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता था। कई बार समय पर पौधे उपलब्ध नहीं होने या निम्न गुणवत्ता के कारण उत्पादन प्रभावित होता था। आईएफसी नर्सरी की स्थापना के बाद यह स्थिति बदली है। अब स्थानीय स्तर पर ही प्रमाणित एवं गुणवत्तापूर्ण पौधे तैयार कर किसानों तक समय पर पहुंचाए जा रहे हैं, जिससे खेती की लागत कम हुई है और उत्पादन की संभावनाएं बढ़ी हैं।नर्सरी इकाई में टमाटर, मिर्च, बैंगन, फूलगोभी, करेला, मूनगा (सहजन), पपीता, कटहल, नारियल सहित विभिन्न सब्जी एवं फलदार पौधों की उन्नत पौध तैयार की जा रही है। इन पौधों का वितरण उत्पादक समूहों एवं क्लस्टरों के माध्यम से विभिन्न ग्रामों के किसानों तक किया जाता है। इससे क्लस्टर आधारित सब्जी उत्पादन को बढ़ावा मिला है और किसानों ने वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाना शुरू किया है।इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि नर्सरी का संचालन महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किया जा रहा है। इससे महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार, नियमित आय और उद्यमिता का अवसर प्राप्त हुआ है। समूह की महिलाएं पौध उत्पादन, देखरेख, विपणन और प्रबंधन जैसे कार्यों का सफलतापूर्वक संचालन कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।वर्तमान चरण में नर्सरी इकाई द्वारा 38,100 गुणवत्तापूर्ण पौधों का उत्पादन एवं वितरण किया गया है, जिससे ₹1,15,150 की आय अर्जित हुई। यह उपलब्धि महिला स्व-सहायता समूहों, ग्राम संगठन (VO), उत्पादक समूहों, आईएफसी एंकर तथा क्लस्टर टीम के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।इस पहल से किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित होने के साथ-साथ जैविक खेती, पोषण वाटिका, फसल विविधीकरण तथा वैज्ञानिक खेती की अनुशंसित तकनीकों (POP) को भी बढ़ावा मिल रहा है। बेहतर गुणवत्ता के पौधों के कारण फसलों की वृद्धि, उत्पादन एवं आय में सकारात्मक सुधार देखने को मिल रहा है।यह उल्लेखनीय पहल कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री गजेंद्र सिंह ठाकुर, जिला परियोजना प्रबंधक (आजीविका) श्री अनुराग मिश्रा, जनपद पंचायत धमतरी की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री वर्षा रानी चिकन्जूरी तथा ब्लॉक परियोजना प्रबंधक श्री प्रेमचंद सिन्हा के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है।आईएफसी नर्सरी इकाई यह सिद्ध कर रही है कि यदि महिलाओं की सहभागिता, आधुनिक कृषि तकनीक और संस्थागत सहयोग का प्रभावी समन्वय हो, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी जा सकती है। धमतरी की यह पहल आज अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है और ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण तथा किसानों की आय वृद्धि की दिशा में एक सफल शासकीय मॉडल के रूप में स्थापित हो रही है।
- -शिक्षा मंत्री ने दी पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलिरायपुर /स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने आज विश्वविख्यात पंडवानी गायिका, पद्मविभूषण से सम्मानित एवं छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की अप्रतिम धरोहर डॉ. तीजन बाई के गृहग्राम गनियारी स्थित निवास पहुंचकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके उपरांत वे उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए तथा दाह संस्कार कार्यक्रम तक उपस्थित रहकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने घोषणा किया कि उनके गृहग्राम गनियारी स्थित शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का नामकरण "डॉ. तीजन बाई शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी विद्यालय, गनियारी" के नाम से किया जाएगा।शिक्षा मंत्री श्री यादव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला-साधना, ओजस्वी वाणी और आजीवन समर्पण के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना के एक स्वर्णिम अध्याय का अवसान है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करने तथा शोकाकुल परिजनों एवं असंख्य प्रशंसकों को इस दुःख की घड़ी में संबल देने की प्रार्थना की।मंत्री श्री यादव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का संपूर्ण जीवन लोकपरंपराओं, संस्कृति और कला के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित रहा। उनकी कला साधना, संघर्ष और उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्व पटल पर स्थापित करने में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने डॉ. तीजन बाई के सम्मान में उनके गृहग्राम गनियारी स्थित शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का नामकरण "डॉ. तीजन बाई शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी विद्यालय, गनियारी" के नाम से किया जाएगा। राज्य सरकार का यह निर्णय महान लोककलाकार के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगा तथा इससे भावी पीढ़ियों को उनके प्रेरणादायी व्यक्तित्व, जीवन-संघर्ष और सांस्कृतिक योगदान से निरंतर प्रेरणा प्राप्त होती रहेगी।
- रायपुर।. मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 6 जुलाई को रायपुर जिले के समोदा में 112 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे। इनमें 21 करोड़ 67 लाख रुपए के 67 कार्यों का लोकार्पण और 90 करोड़ 34 लाख रुपए लागत के 29 निर्माण कार्यों के भूमिपूजन शामिल हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन व लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। वन एवं पर्यावरण तथा रायपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब और सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आरंग क्षेत्र के ग्रामीण एवं शहरी इलाकों में लोक निर्माण विभाग के 9 करोड़ 43 लाख रुपए के तीन कार्यों, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के 79 लाख रुपए के पांच कार्यों, नगर पंचायत समोदा के 6 करोड़ 67 लाख रुपए के 20 कार्यों तथा आरंग नगर पालिका में 4 करोड़ 78 लाख रुपए के 39 कार्यों का लोकार्पण करेंगे।श्री साय लोक निर्माण विभाग द्वारा किए जाने वाले 61 करोड़ 11 लाख रुपए लागत के 8 कार्यों, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के दो करोड़ 54 लाख रुपए के 11 कार्यों एवं समोदा नगर पंचायत के 8 करोड़ 70 लाख रुपए के 9 कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। वे स्वास्थ्य विभाग द्वारा नवा रायपुर के सेक्टर-17, कोटरा भाठा में 18 करोड़ रुपए की लागत से बनाए जा रहे 100 बिस्तर अस्पताल का भी भूमिपूजन करेंगे।
- -राजकीय सम्मान के साथ हुई अंत्येष्टि- पुलिस के जवानों ने दिया गॉड ऑफ ऑनरदुर्ग / देश की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का पार्थिव शरीर आज पंचतत्व में विलीन हो गया। निवास ग्राम गनियारी के मुक्तिधाम में उनके पुत्र श्री दिलहरण पारधी ने मुखाग्नि दी। इससे पूर्व पुलिस के जवानों ने सम्मान में गॉड ऑफ ऑनर दिया। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव, सांसद श्री विजय बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल, विधायक श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, श्री ललित चंद्राकर, श्री रिकेश सेन एवं श्री अनूप शर्मा तथा संभाग आयुक्त श्री एस.एन. राठौर, आईजी श्री अभिषेक शांडिल्य, कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह, एसएसपी श्री विजय अग्रवाल ने पार्थिव देह पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दिये। अंत्येष्ठी में विशाल जनसमूह और लोक कलाकार बड़ी संख्या में उपस्थित थे।ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ की लोक कला को विश्व पटल पर गौरवपूर्ण स्थान दिलाने वाली महान पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का आज रविवार तड़के निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं और राजधानी रायपुर स्थित एम्स में उनका इलाज चल रहा था। डॉ. तीजन बाई ने आज सुबह करीब 3.15 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का नाम जब भी दुनिया में सम्मान के साथ लिया जाता है, तो सबसे पहले जिन हस्तियों का नाम सामने आता है उनमें पद्म विभूषण डॉ. तीजनबाई प्रमुख हैं। अपनी ओजस्वी आवाज, अद्भुत अभिनय और रंग-बिरंगे तानपुरे के साथ महाभारत की कथाओं को जीवंत करने वाली तीजनबाई ने पंडवानी जैसी लोककला को वैश्विक मंच तक पहुंचाया। बिना औपचारिक शिक्षा प्राप्त किए उन्होंने अपनी प्रतिभा और अथक संघर्ष के दम पर देश-विदेश में छत्तीसगढ़ की संस्कृति का परचम लहराया।डॉ. तीजनबाई का जन्म वर्ष 1956 में दुर्ग जिले (वर्तमान छत्तीसगढ़) के गनियारी गांव में पारधी समुदाय के एक साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम चुनुकलाल (या हुनुकलाल) पारधी और माता का नाम सुखवती देवी था। बचपन में उन्होंने अपने नाना ब्रजलाल से महाभारत की कथाएं सुनीं और वहीं से पंडवानी के प्रति उनका लगाव शुरू हुआ। उस दौर में महिलाओं के लिए पंडवानी की कापालिक शैली में प्रस्तुति देना सामाजिक रूप से स्वीकार्य नहीं था। जब तीजनबाई ने परंपरा को तोड़ते हुए मंच पर खड़े होकर अभिनय के साथ पंडवानी गाना शुरू किया, तो समाज ने उनका बहिष्कार तक कर दिया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी कला को ही जीवन का उद्देश्य बना लिया।पंडवानी छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोकगायन शैली है, जिसमें महाभारत की कथाओं का गायन और अभिनय किया जाता है। पहले महिलाएं केवल बैठकर श्वेदमती शैलीश् में पंडवानी प्रस्तुत करती थीं, जबकि कापालिक शैली में मंच पर अभिनय के साथ प्रस्तुति पुरुष कलाकार देते थे।तीजनबाई इस परंपरा को बदलने वाली पहली महिला बनीं। उन्होंने कापालिक शैली में मंच पर अभिनय, संवाद, भाव-भंगिमा और स्वर के अद्भुत समन्वय से पंडवानी को नई पहचान दी। उनका तानपुरा कभी भीम की गदा, कभी अर्जुन का धनुष तो कभी दुर्याेधन की तलवार बन जाता है, जिससे दर्शक पूरी तरह महाभारत के दृश्य में खो जाते हैं।तीजनबाई ने अपनी कला का प्रदर्शन भारत ही नहीं बल्कि ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, तुर्की सहित अनेक देशों में किया। उनकी प्रस्तुतियों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय लोककला की नई पहचान बनाई। उन्होंने साबित किया कि लोककला किसी भाषा या सीमा की मोहताज नहीं होती। डॉ. तीजनबाई को कला जगत में उनके असाधारण योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है। पद्म भूषण से अलंकृत पद्मश्री (1988), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995), पद्म भूषण (2003) और पद्म विभूषण (2019) शामिल है। इसके अलावा देश-विदेश की अनेक संस्थाओं ने उन्हें सम्मानित किया है और कई विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद उपाधियों से भी अलंकृत किया है।तीजनबाई केवल एक लोकगायिका नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक विरासत की सशक्त प्रतीक हैं। उन्होंने यह साबित किया कि प्रतिभा और मेहनत के सामने सामाजिक बंधन और कठिन परिस्थितियां टिक नहीं सकतीं। आज भी वे युवा कलाकारों को पंडवानी की शिक्षा देकर इस लोककला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। उनकी जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि यदि संकल्प मजबूत हो, तो एक छोटे से गांव की बेटी भी पूरी दुनिया में अपनी संस्कृति का परचम लहरा सकती है। डॉ. तीजनबाई छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान ही नहीं, बल्कि भारतीय लोककला की ऐसी अमूल्य धरोहर हैं, जिनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
- दुर्ग / राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली द्वारा जारी "Community Mediation Towards a Litigation-Free Rural India" स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP), 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा ग्राम कुथरेल में सामुदायिक मध्यस्थता विषयक जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में न्यायालयीन वादों की संख्या में कमी लाते हुए स्थानीय स्तर पर आपसी संवाद एवं सहमति के माध्यम से विवादों का शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित करना है।कार्यक्रम में स्थायी एवं निरंतर लोक अदालत (जनोपयोगी सेवाएं), दुर्ग की अध्यक्ष सुषमा लकड़ा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर तथा वरिष्ठ न्यायालय प्रबंधक ने ग्राम पंचायत भवन में आयोजित बैठक में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, महिला समूहों, पैरालीगल वालंटियर्स (PLVs), युवाओं एवं गणमान्य नागरिकों से संवाद किया।अपने संबोधन में स्थायी एवं निरंतर लोक अदालत (जनोपयोगी सेवाएं), दुर्ग की अध्यक्ष सुषमा लकड़ा ने कहा कि सामुदायिक मध्यस्थता न्यायालयीन प्रक्रिया का विकल्प नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने वाला एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि अधिकांश स्थानीय विवाद संवाद, समझदारी एवं निष्पक्ष मध्यस्थता के माध्यम से प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त किए जा सकते हैं, जिससे समय, धन एवं श्रम की बचत होने के साथ-साथ पारिवारिक एवं सामाजिक संबंध भी सुरक्षित रहते हैं।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर ने ग्रामीणों को निःशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत, विधिक साक्षरता कार्यक्रमों तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि सामुदायिक मध्यस्थता कार्यक्रम का उद्देश्य ग्राम स्तर पर संवाद आधारित विवाद समाधान की संस्कृति विकसित करना तथा प्रत्येक नागरिक के लिए न्याय तक सरल एवं त्वरित पहुंच सुनिश्चित करना है।बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा सामुदायिक मध्यस्थता कार्यक्रम के लिए जिले के चयनित ग्रामों में चरणबद्ध रूप से जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण कार्यक्रम, मध्यस्थता उन्मुख कार्यशालाएं एवं जनसंवाद आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण स्वयं अपने छोटे-छोटे विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान करने के लिए प्रेरित हों। कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों ने सामुदायिक मध्यस्थता की अवधारणा का स्वागत करते हुए इसे ग्राम स्तर पर शांति, सद्भाव एवं सामाजिक एकता को सुदृढ़ करने वाली प्रभावी पहल बताया। ग्रामीणों ने भविष्य में आयोजित होने वाले प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता का आश्वासन भी दिया। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी, पैरालीगल वालंटियर्स, आंगनबाड़ी एवं मितानिन कार्यकर्ता, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्याएं, युवा तथा बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा आगामी दिनों में चयनित अन्य ग्रामों में भी इस प्रकार के संवाद एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि "वाद-मुक्त ग्रामीण भारत" की परिकल्पना को व्यवहारिक रूप से साकार करते हुए न्याय तक सरल पहुंच, सामाजिक समरसता एवं विवादों के वैकल्पिक समाधान की संस्कृति को व्यापक स्तर पर विकसित किया जा सके।
- दुर्ग / छत्तीसगढ शासन द्वारा कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कृषकों का प्रोत्साहित करने एवं सम्मानित करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष डॉ. खूबचंद बघेल, कृषक रत्न पुरस्कार प्रदान किया जाता है। इस वर्ष 2026 का पुरस्कार वितरण राज्य स्थापना दिवस, 01 नवम्बर 2026 को आयोजित होने वाले मुख्य समारोह में किया जाएगा। इस संबंध में कृषकों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं, जिसकी अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।संयुक्त संचालक कृषि से प्राप्त जानकारी अनुसार इच्छुक कृषक जो खेती में नवाचार, जैविक कृषि, उत्पादन में वृद्धि, कृषि यात्रिकीकरण या जल संरक्षण जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं, वे इस पुरस्कार के लिए आवेदन कर सकते हैं। समस्त पात्र कृषक वे निर्धारित तिथि तक आवश्यक दस्तावेजों सहित आवेदन जिला कार्यालय में प्रस्तुत कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया, आवश्यक अर्हताएँ एवं अन्य जानकारी संबंधित विकासखंड / जिला कृषि कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है।कृषकों से प्राप्त आवेदनों का सत्यापन संयुक्त संचालक कृषि द्वारा गठित विकासखंड स्तरीय छानबीन समिति द्वारा किया जाएगा। विकासखंड स्तरीय समिति कृषकों के प्रक्षेत्रों में जाकर आवेदन में उल्लेखित अधोसंरचना, कृषि आदान, सिंचाई संसाधन व अन्य जानकारी का प्रत्यक्ष निरीक्षण व अवलोकन सत्यापन उपरांत प्रतिवेदन जिला स्तरीय समिति को प्रस्तुत करेगी। जिला स्तरीय समिति द्वारा सूक्ष्म जांच उपरांत जिला से अधिकतम 03 उत्कृष्ट कृषकों का चयन कर जिला कलेक्टर के माध्यम से नामांकन संचालनालय कृषि को उपलब्ध कराया जाएगा।कृषक रत्न पुरस्कार छत्तीसगढ़ राज्य के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं प्रखर कृषक नेता डॉ. खूबचंद बघेल के नाम पर दिया जाता है, जिनके योगदान को याद करते हुए यह सम्मान उन कृषकों को दिया जाता है जिन्होंने कृषि के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य कर अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का कार्य किया है।
- दुर्ग / छत्तीसगढ़ सरकार की डिजिटल सुशासन पहल ‘सेवा सेतु’ प्रदेश के नागरिकों तक सीधे सरकारी सुविधाएँ पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण जरिया बन चुकी है, जिससे आमजन को अब छोटे-छोटे कार्यों के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इसी तारतम्य में, डिजिटल सशक्तिकरण की एक प्रभावी झलक दुर्ग जिले के ग्राम बोरई में देखने को मिली, जहाँ विगत 3 जुलाई 2026 को आवेदित दो हितग्राहियों, जय ठाकुर और यमुना ठाकुर का सामाजिक प्रास्थिति (अनुसूचित जनजाति-गोड़) प्रमाण-पत्र अनुविभागीय अधिकारी श्री हरवंश सिंह मिरी द्वारा त्वरित रूप से स्वीकृत कर ऑनलाइन जारी किया गया। बिना किसी दफ्तर जाए, घर बैठे आईटी नियमों के तहत प्राप्त हुए ये डिजिटल दस्तावेज़ यह पुख्ता प्रमाण हैं कि ’सेवा सेतु’ व्यवस्था दूर-दराज के इलाकों में भी बेहद पारदर्शी, त्वरित और जन-अनुकूल तरीके से काम कर रही है। उल्लेखनीय है कि ‘सेवा सेतु’ छत्तीसगढ़ के नागरिकों तक डिजिटल सेवाएँ लाने की एक ऐसी खास पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से दूर-दराज विशेषकर ग्रामीण इलाकों में रहने वालों तक सरकार की योजनाएँ और सुविधाएँ पहुँचाना है। राज्य सरकार की इस डिजिटल पहल के तहत लगभग 36 विभागों की 528 सेवाएँ एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस नई डिजिटल व्यवस्था के शुरू होने से अब हितग्राहियों का समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है, साथ ही उन्हें अपनी पढ़ाई और नौकरी से जुड़े जरूरी प्रमाण-पत्र पाने के लिए दलालों और बिचौलियों से भी पूरी तरह मुक्ति मिल गई है।
- रायपुर । मंदिर हसौद तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम संकरी ( जावा ) के पंचायत ने ग्राम के कतिपय शासकीय भूमियों के खसरा नंबर व आबादी की भूमि पर कच्चे व पक्के चारदीवारी बना किये गये अवैध कब्जों को हटाने संकल्पित हो सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर मंदिर हसौद तहसील में पदस्थ संबंधित नायब तहसीलदार नीलम ठाकुर व थाना प्रशासन को ज्ञापन सौंप अवैध कब्जों को हटवाने की मांग की है ।सरपंच लीना विक्की वर्मा व उपसरपंच सरिता शिवा साहू के साथ पंचगण सुनीता साहू , गोपी साहू , चंद्रकला यादव , डा खेमन साहू , कुबेर दास मानिकपुरी , कमलेश राव , राजकुमारी जांगड़े ने यह ज्ञापन सौंपा । उनके साथ सरपंच प्रतिनिधि विक्की वर्मा व पूर्व उपसरपंच शिवा साहू भी थे । पंच भूपेंद्र कुर्रे व मंगतीन वर्मा व्यक्तिगत कारणों के चलते शामिल नहीं हो पाये ।
- रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की घोषणा के अनुरूप छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना-2026 की अवधि 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाने के आदेश जारी कर दिए हैं। मुख्य अभियंता (मानव संसाधन) कार्यालय द्वारा जारी संशोधित आदेश के अनुसार योजना की अवधि, जो पूर्व में 30 जून 2026 तक निर्धारित थी, अब 30 सितंबर 2026 तक प्रभावशील रहेगी।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना को उपभोक्ताओं से मिल रहे अच्छे प्रतिसाद को देखते हुए इसकी अवधि 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाने की घोषणा की थीउल्लेखनीय है कि कोरोना काल के दौरान आर्थिक कठिनाइयों के कारण बड़ी संख्या में घरेलू, बीपीएल एवं कृषि उपभोक्ता समय पर बिजली बिल जमा नहीं कर सके थे। ऐसे उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य शासन ने मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना प्रारंभ की। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 28 लाख 42 हजार पात्र उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल में लगभग 757 करोड़ रुपये की राहत प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के तहत निम्नदाब घरेलू, बीपीएल एवं कृषि श्रेणी के अशासकीय उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल की मूल राशि एवं अधिभार में नियमानुसार छूट का लाभ प्रदान किया जा रहा है। योजना की अवधि बढ़ने से ऐसे पात्र उपभोक्ताओं को तीन माह का अतिरिक्त अवसर मिलेगा, जो अब तक किसी कारणवश इसका लाभ नहीं ले सके हैं।पावर कंपनी ने सभी पात्र उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे 30 सितंबर 2026 तक अपने निकटतम विद्युत कार्यालय से संपर्क कर योजना का लाभ उठाएं तथा बकाया बिजली बिलों का निराकरण कर छूट का लाभ प्राप्त करें। योजना की अन्य सभी शर्तें पूर्ववत लागू रहेंगी।
- -साय सरकार के जनकल्याणकारी योजनाओं का धरातल पर असर; पीएम जनमन आवास और महतारी वंदन योजना से आदिवासी परिवार को मिला सुरक्षित घर, आर्थिक संबल और सम्मानपूर्ण जीवनरायपुर । शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जब अंतिम व्यक्ति तक पहुँचता है, तब वह केवल एक योजना नहीं बल्कि किसी परिवार के जीवन में परिवर्तन की नई कहानी बन जाती है। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंडरीपानी की श्रीमती सरिता बैगा का जीवन इसका प्रेरक उदाहरण है। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना और महतारी वंदन योजना के समन्वित लाभ से उनका परिवार आज सुरक्षित आवास, आर्थिक संबल और सम्मानजनक जीवन की नई राह पर आगे बढ़ रहा है।पहले सरिता बैगा का परिवार एक कच्चे मकान में रहता था। बरसात शुरू होते ही पूरे परिवार की चिंता बढ़ जाती थी। खपरैल की छत से पानी टपकता था, दीवारों में नमी भर जाती थी और हर वर्ष छत की मरम्मत तथा खपरैल बदलने पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता था। छोटे बच्चों के साथ बारिश के दिनों में सुरक्षित रहना भी एक बड़ी चुनौती थी।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप सरिता बैगा के परिवार को पीएम जनमन आवास योजना के तहत पक्का आवास स्वीकृत हुआ। ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत तथा ग्रामीण विकास विभाग के समन्वित प्रयासों से योजना का लाभ समय पर मिला और आज उनका परिवार एक मजबूत, सुरक्षित एवं सुविधायुक्त पक्के घर में रह रहा है।नए आवास ने केवल उनके रहने की व्यवस्था नहीं बदली, बल्कि पूरे परिवार के जीवन में आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना भी बढ़ाई है। अब बारिश का मौसम उनके लिए चिंता नहीं, बल्कि राहत और सुकून लेकर आता है। बच्चे सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई कर रहे हैं और परिवार सम्मानपूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर रहा है।सरिता बैगा को राज्य शासन की महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह मिलने वाली आर्थिक सहायता भी नियमित रूप से प्राप्त हो रही है। इस राशि से परिवार के दैनिक खर्चों, बच्चों की आवश्यकताओं और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी सकारात्मक बदलाव आया है।सरिता बैगा बताती हैं कि पहले उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका परिवार भी पक्के घर में रहेगा। आज शासन की योजनाओं ने उनके सपनों को साकार कर दिया है। वे मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि सरकार की जनहितैषी योजनाओं ने उनके परिवार को सुरक्षित आवास, आर्थिक सहयोग और बेहतर भविष्य का विश्वास दिया है।ग्राम पंडरीपानी में पीएम जनमन आवास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में ग्रामीण विकास विभाग, जनपद पंचायत गौरेला, ग्राम पंचायत तथा संबंधित मैदानी अमले की सक्रिय भूमिका रही। योजनाओं के पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन से पात्र हितग्राहियों को लाभ मिल रहा है, जिससे विशेष पिछड़ी जनजातियों सहित ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है। सरिता बैगा की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन केवल आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध नहीं कराता, बल्कि गरीब और वंचित परिवारों के जीवन में स्थायी परिवर्तन लाकर उन्हें सम्मान, सुरक्षा और विकास की नई दिशा भी प्रदान करता है।
- -3 किलोवाट रूफटॉप सोलर संयंत्र से बिजली बिल हुआ शून्य, डबल सब्सिडी से मिली बड़ी राहतरायपुर । प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ आम नागरिकों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना रही है। केंद्र एवं राज्य सरकार की संयुक्त पहल से संचालित इस योजना का लाभ लेकर सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत कंठी की निवासी श्रीमती अनीता चौधरी अब केवल बिजली की उपभोक्ता नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा का उत्पादन कर ऊर्जादाता बन गई हैं।श्रीमती अनीता चौधरी ने बताया कि पहले हर माह बढ़ते बिजली बिल का भुगतान उनके परिवार के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता था। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत उन्होंने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कराया। इसके बाद उनके घर की बिजली आवश्यकता सौर ऊर्जा से पूरी होने लगी और उनका बिजली बिल पूरी तरह शून्य हो गया।उन्होंने बताया कि घरेलू उपयोग के बाद बची अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजी जा रही है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है। इस योजना से उनके परिवार का मासिक खर्च कम हुआ है और बिजली बिल की चिंता पूरी तरह समाप्त हो गई है।श्रीमती चौधरी ने बताया कि सोलर संयंत्र स्थापना के लिए उन्हें केंद्र एवं राज्य सरकार से संयुक्त रूप से लगभग 1 लाख 8 हजार रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई। इस डबल सब्सिडी के कारण सोलर संयंत्र लगाना आसान और किफायती हो गया है। उन्होंने कहा कि अब सामान्य परिवार भी बिना अधिक आर्थिक बोझ के स्वच्छ एवं अक्षय ऊर्जा को अपना सकते हैं।उन्होंने जिले के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि अधिक से अधिक लोग प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ लेकर अपने घरों की छत पर सोलर संयंत्र स्थापित करें। इससे न केवल बिजली बिल में स्थायी बचत होगी, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। श्रीमती अनीता चौधरी ने योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल आम नागरिकों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे परिवारों को आर्थिक राहत मिलने के साथ-साथ हरित एवं सतत भविष्य की मजबूत नींव भी तैयार हो रही है।
- रायपुर। वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अमर गाथाकार, पद्मश्री, पद्मभूषण एवं पद्मविभूषण से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय पंडवानी डॉ. गायिका तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।श्री चौधरी ने कहा कि तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और भारतीय कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपनी अद्वितीय प्रस्तुति शैली से पंडवानी को देश ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई। लोककला के संरक्षण और संवर्धन में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा तथा आने वाली पीढि़यों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि इस दुःखद घड़ी में उनकी गहरी संवेदनाएँ शोकाकुल परिजनों एवं उनके असंख्य प्रशंसकों के साथ हैं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिजनों और प्रशंसकों को इस कठिन समय में दुःख सहने की शक्ति एवं संबल प्रदान करें।
- -आधार कार्ड बनने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन का जताया आभाररायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी समाधान का भरोसेमंद माध्यम बन रही है। जशपुर जिले के ग्राम जोकबहला (ग्राम पंचायत नारायणपुर) निवासी 85 वर्षीय जॉन क्रूज़ मिंज की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान इसका प्रेरक उदाहरण है।जॉन क्रूज़ मिंज लंबे समय से आधार कार्ड बनवाने का प्रयास कर रहे थे। कई बार आधार नामांकन केंद्र जाने के बावजूद फिंगरप्रिंट का मिलान नहीं होने तथा अन्य तकनीकी कारणों से उनका आवेदन निरस्त हो जाता था। आधार कार्ड नहीं होने के कारण उन्हें बैंकिंग सेवाओं, पेंशन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, आयुष्मान भारत सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।आखिरकार उन्होंने 19 जून को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होते ही संबंधित विभाग ने मामले को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक समन्वय किया और तकनीकी बाधाओं को दूर करने के लिए त्वरित कार्रवाई शुरू की।विभाग की सक्रिय पहल का परिणाम यह रहा कि मात्र तीन दिनों के भीतर, 22 जून को जॉन क्रूज़ मिंज का आधार कार्ड सफलतापूर्वक बन गया। वर्षों से चली आ रही उनकी समस्या का समाधान होने पर उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, जिला प्रशासन तथा संबंधित अधिकारियों के प्रति हार्दिक आभार जताया।जॉन क्रूज़ मिंज ने कहा कि आधार कार्ड नहीं होने के कारण उन्हें कई आवश्यक सेवाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी होती थी। अब आधार कार्ड मिलने के बाद वे बैंकिंग सेवाओं, पेंशन, राशन तथा आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।यह सफलता मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जनसमस्याओं के त्वरित, संवेदनशील और समयबद्ध निराकरण के प्रति शासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से वर्षों पुरानी समस्या का शीघ्र समाधान यह साबित करता है कि शासन और प्रशासन की सक्रिय कार्यप्रणाली से आम नागरिकों की समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सकता है।
- -पंडवानी की विश्वविख्यात साधिका का पैतृक गांव गनियारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार; हजारों लोगों ने दी अंतिम श्रद्धांजलिरायपुर। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाने वाली विश्वविख्यात पंडवानी गायिका एवं पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई को रविवार को उनके पैतृक गांव गनियारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। राज्य शासन के निर्णय के अनुरूप पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों, साहित्यकारों तथा हजारों श्रद्धालुओं ने नम आंखों से लोककला की इस महान विभूति को अंतिम प्रणाम किया।डॉ. तीजन बाई के निधन से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के कला एवं सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उन्होंने अपने अद्वितीय गायन, प्रभावशाली अभिनय और ओजपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से पंडवानी जैसी लोककला को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को जीवंत शैली में प्रस्तुत करने की उनकी विलक्षण कला ने देश-विदेश के असंख्य दर्शकों को भारतीय लोकसंस्कृति से जोड़ने का कार्य किया।ग्रामीण परिवेश से निकलकर विश्व मंच तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष, साधना और समर्पण का अनुपम उदाहरण है। अनेक सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए उन्होंने अपनी प्रतिभा के बल पर ऐसी पहचान बनाई, जिसने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढि़यों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी।भारतीय लोककला में उनके अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और देश के दूसरे सर्वाेच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण सहित अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया गया। वे भारतीय लोक परंपरा की ऐसी प्रतिनिधि थीं, जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से देश की सांस्कृतिक अस्मिता को विश्वभर में गौरवान्वित किया।राज्य शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप उनके अंतिम संस्कार के अवसर पर राजकीय सम्मान की सभी औपचारिकताएं पूर्ण की गईं। गनियारी गांव में आयोजित अंतिम संस्कार में उपस्थित जनसमूह ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी अमूल्य सांस्कृतिक विरासत को सदैव जीवित रखने का संकल्प व्यक्त किया। डॉ. तीजन बाई का निधन भारतीय लोककला के एक स्वर्णिम युग का अवसान है, किंतु उनकी स्वर-साधना, पंडवानी की समृद्ध परंपरा और लोकसंस्कृति के संरक्षण के लिए उनका आजीवन समर्पण सदैव अमर रहेगा। उनकी अनुपम कला, ओजस्वी व्यक्तित्व और सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढि़यों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।
- -प्रख्यात पंडवानी गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के निधन पर उप मुख्यमंत्री ने शोक व्यक्त कियारायपुर। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इस दुखद खबर से हम सभी को गहरा आघात लगा है। उन्होंने प्रदेश की समृद्ध कला और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि पंडवानी की पहचान डॉ. तीजन बाई से थी।श्री साव ने कहा कि उनका जाना देश के लिए और छत्तीसगढ़ के लिए अपूरणीय क्षति है, जिसकी कभी भरपाई नहीं हो सकेगी। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। करोड़ों दिलों पर तंबूरे की तान एवं बुलंद आवाज गूंजती रहेगी। श्री साव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई की पंडवानी प्रस्तुति अद्भुत थी। अपनी बुलंद आवाज, अभिनय, लयबद्धता और सहयोगियों के संगीत से वे ऐसी प्रस्तुति देती थी जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने पंडवानी के जरिए छत्तीसगढ़ की संस्कृति को देश और विदेश में प्रसारित किया। गांवों में आज भी उनकी पंडवानी कथा अमर है। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि मैं परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें। उनके सभी परिजनों और चाहने वालों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।
- -पंडवानी को विश्व मंच तक पहुंचाने वाली महान लोकगायिका के निधन पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने जताया गहरा शोक, कहा— छत्तीसगढ़ ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर का अनमोल रत्न खो दियारायपुर । छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण सम्मानित प्रख्यात पंडवानी गायिका श्रीमती तीजन बाई का रविवार तड़के रायपुर स्थित एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थीं। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश और विश्व की लोक कला जगत में शोक की लहर है। उनके निधन पर प्रदेश के संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने अपने शोक संदेश में कहा कि तीजन बाई केवल एक लोक कलाकार नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान की जीवंत प्रतीक थीं। उन्होंने अपनी अद्भुत कला, दमदार प्रस्तुति और समर्पण से पंडवानी जैसी लोकविधा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित किया। उनका निधन प्रदेश और देश की सांस्कृतिक दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिजनों और असंख्य प्रशंसकों को इस कठिन समय में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।गरीब परिवार से निकलकर विश्व मंच तक का प्रेरणादायी सफर24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मी तीजन बाई का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। उनके पिता का नाम हुकुमचंद परधा तथा माता का नाम सुखवती बाई था। बचपन से ही उन्हें महाभारत की कथाओं और पंडवानी गायन में गहरी रुचि थी। उनके नाना ब्रजलाल परधा से उन्हें इस लोककला की प्रारंभिक शिक्षा मिली।महज 13 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना पहला सार्वजनिक मंच प्रदर्शन किया। उस समय महिलाओं द्वारा पंडवानी की वेदमती शैली में बैठकर प्रस्तुति देने की परंपरा थी, लेकिन तीजन बाई ने इस परंपरा को चुनौती देते हुए पुरुष कलाकारों की कापालिक शैली में खड़े होकर अभिनय, संवाद, गायन और भाव-भंगिमाओं के साथ प्रस्तुति देना शुरू किया। उनकी यही शैली आगे चलकर उनकी विशिष्ट पहचान बन गई।हबीब तनवीर ने पहचानी प्रतिभा, बदल गई जिंदगीप्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी असाधारण प्रतिभा को पहचाना और उन्हें बड़े मंचों तक पहुंचाया। इसके बाद तीजन बाई ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के समक्ष अपनी प्रस्तुतियां दीं।उन्होंने इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की, मॉरीशस, जापान सहित 17 से अधिक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति का विश्वभर में परचम लहराया। उनकी प्रभावशाली आवाज, अभिनय और कथावाचन शैली ने विदेशी दर्शकों को भी भारतीय लोक परंपरा से परिचित कराया।देश-विदेश में मिले अनेक प्रतिष्ठित सम्मानलोककला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया। वर्ष 1988 में पद्मश्री, 1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2003 में पद्म भूषण, 2018 में जापान का प्रतिष्ठित फुकुओका पुरस्कार तथा 2019 में भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त बिलासपुर विश्वविद्यालय ने उन्हें डी.लिट. (मानद उपाधि) प्रदान कर सम्मानित किया।नई पीढ़ी के लिए बनीं प्रेरणातीजन बाई ने न केवल पंडवानी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, बल्कि इस लोकविधा से नई पीढ़ी के अनेक कलाकारों को भी जोड़ा। उनकी प्रेरणा से अनेक महिला कलाकारों ने पंडवानी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने यह साबित किया कि प्रतिभा, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर लोककला को वैश्विक मंच तक पहुंचाया जा सकता है।देशभर से उमड़ा श्रद्धांजलियों का सैलाबतीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, विभिन्न जनप्रतिनिधियों, कलाकारों, साहित्यकारों तथा सांस्कृतिक संस्थाओं ने गहरा शोक व्यक्त किया। सभी ने उन्हें भारतीय लोकसंस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए उनके योगदान को सदैव अविस्मरणीय बताया।छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान रहेंगी अमरतीजन बाई का जीवन संघर्ष, साधना और समर्पण की अनुपम मिसाल है। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से महाभारत की कथाओं को जन-जन तक पहुंचाया और पंडवानी को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। उनके निधन से भले ही लोककला जगत ने अपनी बुलंद आवाज खो दी हो, लेकिन उनकी कला, उनकी शैली और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उनकी अमिट सांस्कृतिक विरासत भारतीय लोककला के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगी।
- -पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम को भेंट किया गया जीपीएम की विशिष्ट पहचान ‘विष्णु भोग’ चावल, महिलाओं के आत्मनिर्भरता मॉडल और स्थानीय उत्पाद की सराहनारायपुर । गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के प्रवास पर पहुंचे पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम का स्वागत स्थानीय पहचान और कृषि समृद्धि के प्रतीक ‘विष्णु भोग’ चावल से किया गया। कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने उन्हें जिले की विशिष्ट पहचान माने जाने वाले ‘विष्णु भोग’ चावल का पैकेट भेंट कर सम्मानित किया। यह चावल जिले में बिहान योजना के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किया जा रहा है, जो ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन का सफल उदाहरण बनकर उभरा है।इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने पुलिस महानिदेशक को ‘विष्णु भोग’ चावल की विशेषताओं, उसकी गुणवत्ता तथा इसके उत्पादन और विपणन में महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पहल न केवल स्थानीय कृषि उत्पादों को नई पहचान दिला रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी आय में भी वृद्धि कर रही है।पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम ने महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे इस सराहनीय प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि ‘विष्णु भोग’ चावल केवल एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि महिलाओं की मेहनत, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से जिले की विशिष्ट पहचान राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित होती है तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलती है।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महिला समूहों द्वारा गुणवत्ता और परंपरा के साथ तैयार किए जा रहे ऐसे उत्पाद भविष्य में प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में अपनी अलग पहचान बनाएंगे। स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन मिलने से किसानों और महिला समूहों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा, जिससे ग्रामीण विकास को भी गति मिलेगी।इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री मनोज कुमार खिलारी तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकेश रावटे सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
- -विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में सहकारिता की भूमिका पर हुई पैनल चर्चारायपुर / अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर राजधानी स्थित कृषि मंडपम, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, लाभांडी में सहकारिता क्षेत्र की चुनौतियों, उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं पर केंद्रित एक विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में सहकारिता की भूमिका पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी श्री केदारनाथ गुप्ता, मार्कफेड के प्राधिकृत अधिकारी श्री शशिकांत द्विवेदी तथा जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अंबिकापुर के अध्यक्ष श्री रामकिशुन सिंह ने किया।उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के गठन के पाँच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रदेशभर में 29 जून से 6 जुलाई तक सहकारी सप्ताह मनाया जा रहा है। इसी श्रृंखला में विगत 4 जून को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर यह विशेष आयोजन किया गया।पैनल चर्चा में विकसित भारत-2047 के लिए सहकारिता क्षेत्र से अपेक्षाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने वनांचल क्षेत्रों में लघु वनोपज सहकारी समितियों की भूमिका, दुग्ध सहकारिता के विस्तार, महिला सशक्तिकरण में दुग्ध सहकारी संस्थाओं के योगदान, ग्रामीण रोजगार सृजन में मत्स्य सहकारी समितियों की भूमिका तथा नाबार्ड, अपेक्स बैंक और जिला सहकारी बैंकों की जिम्मेदारियों पर अपने विचार रखे।कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सहकारिता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने का प्रभावी माध्यम है। सहकारिता के माध्यम से विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को गति देने के लिए सभी संस्थाओं के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।कार्यक्रम में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर के उपाध्यक्ष श्री अभिनेष कश्यप, राज्य सहकारी संघ के अध्यक्ष श्री सौरभ शर्मा, अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक एवं अपर आयुक्त श्री के.एन. कांडे, मत्स्य विभाग के संचालक श्री नाग, अपर आयुक्त श्रीमती सावित्री भगत, उपायुक्त श्रीमती किरण गुप्ता, संयुक्त आयुक्त श्री बसंत कुमार, श्री मुकेश ध्रुव, श्री तिग्गा, श्री बुनकर, श्री गौरीशंकर शर्मा, उपायुक्त श्री युगल किशोर तथा अपेक्स बैंक के डीजीएम श्री भूपेश चंद्रवंशी सहित सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।इसके अलावा अपेक्स बैंक, जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों, लघु वनोपज संघ, दुग्ध महासंघ, सहकारी शक्कर कारखानों, एनसीडीसी तथा विभिन्न सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) के प्रतिनिधि और किसान उपस्थित रहे।
- -दासन और एमडी श्री विवेक आचार्य ने एयरपोर्ट पर किया स्वागत*-मंत्रिमंडल चिंतन शिविर में सतत पर्यटन, जनजातीय संस्कृति और स्थानीय रोजगार पर साझा दृष्टि; छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास को लेकर हुई विस्तृत चर्चारायपुर । भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं महानिदेशक पर्यटन श्री सुमन बिल्ला के रायपुर आगमन पर छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारती दासन तथा छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य ने रायपुर विमानतल पर उनका आत्मीय स्वागत किया। श्री बिल्ला भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर में सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा आईआईएम रायपुर द्वारा आयोजित दो दिवसीय मंत्रिमंडल चिंतन शिविर में पर्यटन विषय के प्रमुख वक्ता के रूप में शामिल हुए।इस अवसर पर श्री सुमन बिल्ला, डॉ. एस. भारती दासन एवं श्री विवेक आचार्य के बीच छत्तीसगढ़ के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में राज्य की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और जनजातीय विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रभावी ढंग से स्थापित करने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि छत्तीसगढ़ में पारिस्थितिकी पर्यटन, धार्मिक पर्यटन, पुरातात्विक पर्यटन, वन्यजीव पर्यटन, जनजातीय पर्यटन तथा ग्रामीण पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं का योजनाबद्ध विकास कर राज्य में रोजगार सृजन, स्थानीय उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान की जा सकती है। स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए पर्यटन विकास का ऐसा मॉडल विकसित करने पर भी सहमति बनी, जिससे आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।बैठक में पर्यटन अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, पर्यटक सुविधाओं के विस्तार, डिजिटल प्रचार-प्रसार, गृह-आवास (होम-स्टे) व्यवस्था को बढ़ावा देने, स्थानीय हस्तशिल्प एवं पारंपरिक व्यंजनों को पर्यटन से जोड़ने तथा जनजातीय संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इसके साथ ही देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए प्रभावी प्रचार-प्रसार और राज्य की सशक्त पहचान स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।पर्यटन मंत्रालय और छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का अधिकतम लाभ राज्य को दिलाने, पर्यटन स्थलों के समग्र विकास तथा निवेश को प्रोत्साहित करने के उपायों पर भी सकारात्मक विचार-विमर्श हुआ।उल्लेखनीय है कि दो दिवसीय मंत्रिमंडल चिंतन शिविर में श्री सुमन बिल्ला ने "सतत समृद्धि के आधार के रूप में पर्यटन : छत्तीसगढ़ में आजीविका सृजन, संस्कृति का संरक्षण और प्रकृति की सुरक्षा" विषय पर विशेष व्याख्यान दिया। इसके पश्चात उन्होंने "आगे की राह – विचार मंथन" विषय पर आयोजित संवादात्मक सत्र का संचालन भी किया। इन सत्रों में पर्यटन को सुशासन, सतत विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और स्थानीय आजीविका से जोड़ने के व्यावहारिक मॉडल पर विस्तार से चर्चा की गई। श्री सुमन बिल्ला के सुझावों तथा केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ का पर्यटन क्षेत्र नई दिशा प्राप्त करेगा। इससे राज्य की जैव विविधता, ऐतिहासिक धरोहर, जनजातीय संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य को वैश्विक पहचान मिलने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसरों में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।





















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