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- -17 अगस्त को होगा मॉप-अप दिवस, छूटे हुए बच्चों को भी खिलाई जाएगी दवारायपुर ।राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस भारत सरकार द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य सुधार के लिए वर्ष में दो बार आमतौर पर 10 फरवरी और 10 अगस्त को मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अभियान है। इसके तहत 1 से 19 वर्ष तक के सभी बच्चों को एल्बेंडाजोल की निःशुल्क गोली खिलाई जाती है। यह अभियान सरकारी स्कूलों, सहायता प्राप्त स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से चलाया जाता है। इससे बच्चों के पेट के कीड़े (कृमि) खत्म होते हैं, पोषण में सुधार होता है, और उनकी सीखने की क्षमता व रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है।राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के तहत 10 अगस्त 2026 को जिलेभर में व्यापक -मिनाशन अभियान चलाया जाएगा। अभियान के अंतर्गत 1 से 19 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों एवं किशोर-किशोरियों को शासकीय एवं निजी विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, महाविद्यालयों तथा विद्यालय नहीं जाने वाले बच्चों तक पहुंचकर एल्बेंडाजोल की निःशुल्क दवा खिलाई जाएगी।स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बच्चों की आयु के आधार पर दवा का सेवन कराया जाएगा। 1 से 2 वर्ष तक के बच्चों को आधी गोली (200 मि.ग्रा.) चूरा बनाकर, 2 से 3 वर्ष तक के बच्चों को एक पूरी गोली (400 मि.ग्रा.) चूरा बनाकर तथा 3 से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों एवं किशोर-किशोरियों को एक पूरी गोली (400 मि.ग्रा.) चबाकर पानी के साथ दी जाएगी। दवा का वितरण प्रशिक्षित शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की निगरानी में किया जाएगा। मुख्य अभियान के दौरान यदि कोई पात्र बच्चा दवा नहीं ले पाता है, तो उसे 17 अगस्त 2026 को आयोजित मॉप-अप दिवस पर एल्बेंडाजोल की दवा उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि कोई भी पात्र बच्चा कृमिनाशन से वंचित न रहे। जशपुर कलेक्टर ने जिले के सभी अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों एवं नागरिकों से अभियान में सक्रिय सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि 1 से 19 वर्ष आयु वर्ग का प्रत्येक बच्चा एवं किशोर-किशोरी इस अभियान का लाभ अवश्य प्राप्त करे।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी. एस. जात्रा ने बताया कि पेट में कृमि होने से बच्चों में एनीमिया, कुपोषण, कमजोरी, भूख कम लगना, पेट दर्द, पढ़ाई में एकाग्रता की कमी तथा शारीरिक एवं मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि एल्बेंडाजोल एक सुरक्षित एवं प्रभावी कृमिनाशक दवा है, जिसे प्रशिक्षित कर्मियों की देखरेख में आयु के अनुसार दिया जाता है। नियमित कृमिनाशन से बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार होने के साथ उनके समुचित शारीरिक एवं मानसिक विकास को भी बढ़ावा मिलता है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी विभागों, शिक्षण संस्थानों, आंगनबाड़ी केंद्रों, पालकों एवं आम नागरिकों से अपील की है कि वे राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस अभियान को सफल बनाने में सहयोग करें तथा सभी पात्र बच्चों को 10 अगस्त को एल्बेंडाजोल की दवा अवश्य दिलाएं। जो बच्चे मुख्य दिवस पर दवा नहीं ले सकें, उन्हें 17 अगस्त को आयोजित मॉप-अप दिवस पर दवा अवश्य दिलाई जाए।
- -वैज्ञानिक सोच, नवाचार और तकनीकी कौशल को बढ़ावा देने की दिशा में अभिनव पहलरायपुर । एयरोमॉडलिंग प्रशिक्षण छोटे आकार के विमानों, ग्लाइडर्स और रेडियो-कंट्रोल्डएयरक्राफ्ट को डिजाइन करने, बनाने और उड़ाने की कला व विज्ञान सिखाता है। यह एनसीसी, तकनीकी संस्थानों और विशेष निजी कार्यशालाओं के माध्यम से प्रदान किया जाता है। प्रदेश के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक सोच एवं नवाचार आधारित सीखने की संस्कृति विकसित करने के उद्देश्य से जशपुर स्थित संकल्प शिक्षण संस्थान में आयोजित पाँच दिवसीय आवासीय एयरोमॉडलिंग प्रशिक्षण का सफलतापूर्वक समापन हुआ। प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को विमानन विज्ञान, एयरोडायनामिक्स तथा एयरोमॉडलिंग के सिद्धांतों को व्यवहारिक गतिविधियों के साथ समझने और सीखने का अवसर मिला।इस प्रशिक्षण में जशपुर जिले के कक्षा 9वीं से 12वीं तक के 40 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रति रुचि बढ़ाना तथा उन्हें आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना था।पाँच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने विमान उड़ान के वैज्ञानिक सिद्धांत, विमान की संरचना, उड़ान नियंत्रण प्रणाली, एयरफॉइल, लिफ्ट, ड्रैग, थ्रस्ट, सेंटर ऑफ ग्रैविटी तथा आधुनिक विमानन तकनीकों का अध्ययन किया। साथ ही 3डी वर्चुअल रियलिटी तकनीक के माध्यम से उन्हें कॉकपिट एवं विमान संचालन का आभासी अनुभव भी कराया गया, जिससे उनकी सीखने की प्रक्रिया अधिक रोचक एवं प्रभावी बनी।प्रशिक्षक श्री सुभाष देवांगन एवं श्री राजेश राजपूत ने विद्यार्थियों को वायुगतिकी एवं एयरोमॉडलिंग का व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। प्रायोगिक सत्रों में विद्यार्थियों ने पेपर प्लेन, बूमरैंग, एयरक्राफ्ट पज़ल्स तथा एयरोमॉडल निर्माण जैसी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की। प्रशिक्षण के अंतिम चरण में विद्यार्थियों ने एयरोमॉडल के संतुलन, नियंत्रण एवं उड़ान परीक्षण की प्रक्रिया को प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में व्यवहारिक रूप से समझा। जशपुर के नोडल अधिकारी श्री विनोद कुमार गुप्ता ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण विद्यार्थियों को विज्ञान की सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ व्यावहारिक प्रयोग, समस्या समाधान, टीमवर्क और नवाचार आधारित सोच विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को भविष्य की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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राजनांदगांव । दाऊ श्री वासुदेव चन्द्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय दुर्ग अंतर्गत जगदलपुर, महासमुंद, राजनांदगांव एवं सूरजपुर जिले में संचालित वेटनरी पॉलीटेक्निक में डिप्लोमा इन एनिमल हसबेन्ड्री पाठ्यक्रम तथा राजपुर धमधा में संचालित मात्स्यिकी पॉलीटेक्निक में डिप्लोमा इन फिशरिस सांइस पाठ्यक्रम संचालित है। व्यापम द्वारा आयोजित पीएटी व पीवीपीटी 2026 परीक्षा परिणाम की प्रावीण्य सूची के आधार पर शैक्षणिक सत्र 2026-27 में इन संस्थानों में राज्य के मूल निवासी छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया जाएगा। पॉलीटेक्निक में प्रवेश के लिए काउंसलिंग हेतु ऑनलाईन पंजीयन 6 सितम्बर 2026 तक आमंत्रित की गई है। तृतीय चरण में पीएटी व पीवीपीटी 2026 की परीक्षा परिणाम की प्रावीण्य सूची के आधार पर प्रवेश पश्चात सीट रिक्त होने की स्थिति में कक्षा 12वीं में बायोलॉजी ग्रुप से उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को मेरिट के आधार पर ऑफलाईन काउंसलिंग एवं प्रवेश 26 अक्टूबर 2026 को पशु चिकित्सा एवं पशु पालन महाविद्यालय अंजोरा दुर्ग में आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में अन्य जानकारी एवं सूचना प्राप्त करने के लिए समय-समय पर विश्वविद्यालय की वेबसाईट का अवलोकन कर सकते है।
- -स्वाति आदित्य को समयबद्ध तरीके से मिला आय, जाति और निवास प्रमाण पत्ररायपुर ।छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी पहल सेवा सेतु आम नागरिकों को विभिन्न शासकीय सेवाएं सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने में एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है। इस जनहितैषी पहल की बदौलत सक्ती जिले के जैजैपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम कोटेतरा की निवासी स्वाति आदित्य को निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनके आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त हो गए हैं।आवश्यक दस्तावेज न होने के कारण स्वाति को कई शासकीय कार्यों और महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। सही जानकारी और उचित मार्गदर्शन के अभाव में बार-बार कार्यालयों के चक्कर काटने के बाद भी उनका काम पूरा नहीं हो पा रहा था। इसी दौरान उन्हें श्सेवा सेतु केंद्रश् के बारे में जानकारी मिली, जिसके बाद वे अपने पिता श्री लक्ष्मण प्रसाद के साथ केंद्र पहुंचीं और आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन दिया।सेवा सेतु केंद्र द्वारा स्वाति के आवेदन का तुरंत ऑनलाइन पंजीयन कर उसे संबंधित विभाग को प्रेषित किया गया। केंद्र के कर्मचारियों ने आवश्यक दस्तावेजों का परीक्षण करते हुए पूरी प्रक्रिया में उचित मार्गदर्शन और समन्वय सुनिश्चित किया। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद जैजैपुर तहसीलदार द्वारा स्वाति आदित्य का स्थायी जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। समयबद्ध प्रक्रिया के तहत सभी दस्तावेज मिल जाने से अब स्वाति को भविष्य में शासकीय योजनाओं और सुविधाओं का लाभ लेने में कोई बाधा नहीं आएगी।समय पर पारदर्शी तरीके से काम पूरा होने पर स्वाति आदित्य और उनके पिता श्री लक्ष्मण प्रसाद ने सेवा सेतु की त्वरित और सुगम कार्यप्रणाली की सराहना की। उन्होंने इस राहत के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया है।
- -पालक कनेक्ट अभियान से संवर रहा बच्चों का भविष्यरायपुर । छत्तीसगढ़ में पालक कनेक्ट (पालक-शिक्षक संवाद) अभियान के माध्यम से सरकारी स्कूलों के बच्चों का भविष्य संवर रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अनूठी पहल पर शुरू किए गए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पालकों (अभिभावकों) और शिक्षकों के बीच बेहतर तालमेल बनाना है, जिससे बच्चों के शैक्षणिक स्तर और उनके सर्वांगीण विकास में सुधार लाया जा सके।कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाला छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला अब शिक्षा के क्षेत्र में एक नई और प्रेरक मिसाल पेश कर रहा है। जिला प्रशासन की विशेष पहल और कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे ‘पालक कनेक्ट’ अभियान के जरिए दूरस्थ वनांचल के ड्रॉपआउट बच्चों को पुनरू स्कूल की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।इस अभियान की मुख्य रीढ़ जिले के समर्पित शिक्षक, प्राचार्य और संकुल समन्वयक हैं। ये शिक्षक केवल कक्षाओं तक सीमित न रहकर जंगल, पहाड़ियों और कठिन रास्तों को पार करते हुए सीधे बच्चों के घर-आंगन तक पहुंच रहे हैं। वे अभिभावकों से व्यक्तिगत संवाद कर उन्हें शिक्षा के महत्व से अवगत करा रहे हैं और बच्चों को नियमित स्कूल भेजने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।पोटाकेबिन चिंतागुफा की पहलरू शासकीय बालक आवासीय हाई स्कूल (पोटाकेबिन) चिंतागुफा के शिक्षकों ने सुदूर गांव बोदीगुड़ा और टेटरई पहुंचकर परिजनों से संवाद किया। एक छात्र को शिक्षक स्वयं अपने साथ पोटाकेबिन लेकर आए, ताकि उसकी पढ़ाई तुरंत शुरू हो सके। खेतों तक पहुंचे शिक्षक कक्षा 7वीं की एक छात्रा के लंबे समय से अनुपस्थित रहने पर शिक्षक उसे खोजते हुए खेत तक जा पहुंचे और परिजनों से बेटी की पढ़ाई जारी रखने का आग्रह किया। डिजिटल संपर्क के माध्यम से जिन सुदूर क्षेत्रों तक सीधे पहुंचना संभव नहीं हो सका, वहां शिक्षकों ने मोबाइल के माध्यम से अभिभावकों से संपर्क साधकर बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित कराई। पालक कनेक्ट अभियान के तहत जिले भर से उत्साहजनक परिणाम सामने आ रहे हैं। हाई स्कूल पाकेला के शिक्षकों ने पेदापारा पहुंचकर छात्र कृष्णा नाग, गणेश, सुमन और मोहित के परिजनों को नियमित पढ़ाई के लिए सहमत किया। वहीं आदगुड़ा की शाला त्यागी बालिका ज्योति सोड़ी का निकटतम स्कूल में पुनरू दाखिला कराया गया। भेज्जी क्षेत्र के माड़वी हिड़मा (कक्षा 8वीं), माड़वी जोगा (कक्षा 7वीं) और माड़वी संदीप (कक्षा 9वीं) की स्कूल वापसी कराई गई। रेगडगट्टा, गेडापाड़, इंजरम, मैलासुर और पालाचलमा क्षेत्रों में व्यापक मोबाइल संपर्क अभियान चलाकर बच्चों को नियमित स्कूल भेजने का आश्वासन प्राप्त किया गया। जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वनांचल का कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे। संवेदनशील प्रशासन, समर्पित शिक्षकों और जागरूक अभिभावकों के त्रिकोणीय प्रयास ने सुकमा की तस्वीर बदल दी है। जिस क्षेत्र में कभी भय और अनिश्चितता का माहौल हुआ करता था, वहां अब बच्चों के हाथों में किताबें, कॉपियां और उज्ज्वल भविष्य के नए सपने दिखाई दे रहे हैं।
- -स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ ऐप से आसान हुआ बिजली प्रबंधन-रियल टाइम बिजली खपत की जानकारी से बढ़ी पारदर्शिता, ऊर्जा बचत की आदत भी हुई विकसितरायपुर । आधुनिक तकनीक के उपयोग से अब बिजली उपभोक्ताओं के लिए बिजली की खपत पर नजर रखना और खर्च का प्रबंधन करना पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है। स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ मोबाइल ऐप उपभोक्ताओं को वास्तविक समय में बिजली उपयोग की जानकारी उपलब्ध कराकर न केवल पारदर्शिता बढ़ा रहे हैं, बल्कि ऊर्जा संरक्षण और आर्थिक बचत के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं। दुर्ग शहर के वार्ड क्रमांक 9, गिरधारी नगर निवासी श्री रितेश कुमार सोनी इसका सफल उदाहरण हैं, जिनके घर में स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल को लेकर होने वाली चिंता लगभग समाप्त हो गई है।श्री रितेश कुमार सोनी बताते हैं कि पहले उन्हें पूरे महीने बिजली उपयोग का सही अनुमान नहीं लग पाता था। बिजली बिल आने के बाद ही वास्तविक खपत का पता चलता था और कई बार अपेक्षा से अधिक बिल आने पर परेशानी होती थी। लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई है। अब वे ‘मोर बिजली’ मोबाइल ऐप के माध्यम से प्रतिदिन और प्रति घंटे अपने घर की बिजली खपत की जानकारी आसानी से देख सकते हैं। ऐप पर यह भी स्पष्ट दिखाई देता है कि किस समय बिजली की खपत अधिक हुई और किस समय कम, जिससे वे अनावश्यक बिजली उपयोग की पहचान कर उसे तुरंत नियंत्रित कर लेते हैं।रितेश कुमार सोनी का कहना है कि स्मार्ट मीटर का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब बिजली बिल को लेकर अनिश्चितता नहीं रहती। मोबाइल ऐप पर प्रतिदिन बिजली की खपत दिखाई देने से उन्हें पहले ही यह अनुमान हो जाता है कि महीने का बिजली बिल कितना आ सकता है। इससे वे अपनी आवश्यकता के अनुसार बिजली उपयोग को नियंत्रित कर आर्थिक बचत भी कर रहे हैं।‘मोर बिजली’ ऐप की एक विशेष सुविधा यह भी है कि इसमें पिछले वर्ष की समान अवधि की बिजली खपत की जानकारी उपलब्ध रहती है। इससे उपभोक्ता आसानी से तुलना कर सकते हैं कि उनकी बिजली खपत बढ़ी है या कम हुई है। रितेश कुमार सोनी इस सुविधा का उपयोग कर ऊर्जा संरक्षण के उपाय अपनाते हैं। वे अनावश्यक लाइट और पंखे बंद रखते हैं, ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग करते हैं तथा बिजली का सोच-समझकर उपयोग करते हैं।रितेश बताते हैं कि स्मार्ट मीटर और मोबाइल ऐप के उपयोग से उनके पूरे परिवार में बिजली बचाने की आदत विकसित हुई है। परिवार के सदस्य अब ऊर्जा संरक्षण के प्रति अधिक जागरूक हो गए हैं। बच्चे भी समझने लगे हैं कि छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर बिजली की बचत की जा सकती है और इससे मासिक खर्च भी कम होता है।श्री रितेश कुमार सोनी का मानना है कि स्मार्ट मीटर केवल बिजली मापने का उपकरण नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को जागरूक बनाने वाला प्रभावी माध्यम है। वास्तविक समय में उपलब्ध जानकारी से उपभोक्ता अपनी बिजली खपत पर नियंत्रण रख सकता है, अनावश्यक उपयोग कम कर सकता है और ऊर्जा संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
- -तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता एवं प्रवेश क्षमता बढ़ाने वाले संस्थानों के प्राचार्यों को संचालक श्री हेमंत रमेश नंदनवार ने किया सम्मानितरायपुर । तकनीकी शिक्षा विभाग के संचालक श्री हेमंत रमेश नंदनवार ने 05 अगस्त 2026 को शासकीय पॉलिटेक्निक संस्थाओं एवं छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (सीजीआईटी) के शैक्षणिक स्तर, छात्र प्रवेश, अधोसंरचना विकास तथा विभिन्न विकासात्मक गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। समीक्षा बैठक के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले संस्थानों के प्राचार्यों को छात्र प्रवेश क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि एवं संस्थागत विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।संचालक श्री हेमंत रमेश नंदनवार ने इस अवसर पर कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद नवाचार, प्रभावी जनसंपर्क एवं सतत प्रयासों के माध्यम से छात्र प्रवेश क्षमता बढ़ाने वाले संस्थान अन्य तकनीकी शिक्षण संस्थाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण, रोजगारोन्मुख एवं उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराना विभाग की सर्वाेच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सभी संस्थानों को निरंतर नवाचार एवं उत्कृष्टता की दिशा में कार्य करना होगा।संचालक श्री नंदनवार ने प्राचार्यों से संस्थानों में शैक्षणिक गुणवत्ता, कौशल विकास, उद्योगों के साथ बेहतर समन्वय, आधुनिक प्रयोगशालाओं के प्रभावी उपयोग तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले संस्थानों को सम्मानित करने से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का वातावरण बनेगा तथा तकनीकी शिक्षा के स्तर में और अधिक सुधार होगा।सम्मानित प्राचार्यों ने इस सम्मान के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग एवं संचालक श्री हेमंत रमेश नंदनवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अपने-अपने संस्थानों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने, गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने तथा छात्र हित में और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने का संकल्प दोहराया।
- -दो आबकारी उपनिरीक्षक निलंबित-सहायक जिला आबकारी अधिकारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसारायपुर / छत्तीसगढ़ में शराब दुकानों में अधिक कीमत पर बिक्री और अन्य गंभीर अनियमितताओं के मामलों में आबकारी विभाग ने एक ही दिन तीन बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने बलौदाबाजार-भाटापारा और बालोद के दो आबकारी उपनिरीक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जबकि 53 पेटी अवैध शराब प्रकरण में बालोद की सहायक जिला आबकारी अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा शासन को भेजी गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों की अनदेखी करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।आबकारी आयुक्त द्वारा जारी आदेश के अनुसार, बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की रोहासी देशी कम्पोजिट शराब दुकान में अधिक कीमत पर शराब बिक्री की शिकायत पर मूल शिकायत के अनुरूप कार्रवाई नहीं करने तथा दुकान के सीसीटीवी सिस्टम को अद्यतन नहीं रखने के कारण आबकारी उपनिरीक्षक पी. माधव राव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।वहीं, धमतरी जिले के अर्जुनी थाना क्षेत्र में 25 जुलाई को जब्त 53 पेटी अवैध देशी एवं विदेशी शराब की जांच में होलोग्राम के आधार पर शराब का स्रोत बालोद जिले की अरकार देशी कम्पोजिट शराब दुकान पाया गया। जांच में निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में थोक बिक्री सामने आने पर संबंधित वृत्त प्रभारी आबकारी उपनिरीक्षक आशा राम शाक्य को भी निलंबित कर दिया गया है।इसी प्रकरण में अरकार शराब दुकान की प्रभारी एवं सहायक जिला आबकारी अधिकारी निलोफर जैन के शिथिल नियंत्रण और कर्तव्य के प्रति लापरवाही को गंभीर मानते हुए आबकारी आयुक्त ने उनके विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग को भेज दी है। आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि शराब दुकानों के संचालन में किसी भी प्रकार की अनियमितता, अधिक मूल्य पर बिक्री अथवा नियमों के उल्लंघन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा भविष्य में भी ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
- -बस्तर एवं सरगुजा में पोषण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण पर रहेगा विशेष फोकसरायपुर / विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में पोषण एवं बाल कल्याण को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग में आज उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा की अध्यक्षता में यूनिसेफ (UNICEF) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में पोषण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य एवं बाल कल्याण से जुड़े प्रयासों को प्रभावी बनाने तथा नवाचारों को बढ़ावा देने पर विस्तार से चर्चा हुई।बैठक को संबोधित करते हुए राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि पोषण और बाल कल्याण किसी भी विकसित एवं सशक्त समाज की आधारशिला हैं। उन्होंने विशेष रूप से बस्तर एवं सरगुजा जैसे क्षेत्रों में पोषण संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए प्रभावी, व्यावहारिक एवं नवाचारी उपायों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यूनिसेफ के विशेषज्ञों से आग्रह किया कि ऐसे समाधान विकसित किए जाएं, जिनका लाभ प्रत्येक बच्चे, गर्भवती महिला एवं परिवार तक प्रभावी रूप से पहुंच सके।बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न नवाचारों पर भी सार्थक चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि गर्भवती महिलाओं के लिए पहले जहां पांच इंजेक्शन (खुराक) की आवश्यकता होती थी, वहीं अब एक ही इंजेक्शन से समतुल्य लाभ संभव है। इसे माताओं के लिए अधिक सुविधाजनक तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण नवाचार बताया गया। इसके साथ ही बच्चों एवं महिलाओं में एनीमिया (रक्ताल्पता) तथा कुपोषण की समस्या के प्रभावी समाधान पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि राज्य नीति आयोग नीति-परामर्श, प्रभावी मॉनिटरिंग तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभा रहा है। आयोग, यूनिसेफ जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के सहयोग से बस्तर सहित पूरे राज्य में पोषण एवं बाल कल्याण संबंधी कार्यक्रमों के लिए साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, अंतर-विभागीय समन्वय और निगरानी तंत्र को और मजबूत करेगा।यूनिसेफ की चीफ ऑफ फील्ड ऑफिस सुश्री सीमा कुमार ने कहा कि छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर संभाग के बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में राज्य शासन के साथ मिलकर कार्य करना यूनिसेफ की प्राथमिकता है। यूनिसेफ के सामाजिक नीति विशेषज्ञ डॉ. बाल परितोष दाश ने कहा कि पोषण एवं बाल कल्याण के क्षेत्र में स्थायी परिणाम तभी प्राप्त किए जा सकते हैं, जब विभिन्न विभाग समन्वित रूप से कार्य करें और नीतियां साक्ष्य आधारित हों।बैठक में इस बात पर सहमति व्यक्त की गई कि एक स्वस्थ, सुरक्षित एवं सुपोषित बचपन ही विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत की मजबूत नींव है। बस्तर सहित पूरे राज्य में बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं संरक्षण को सुनिश्चित कर भविष्य की पीढ़ी को सशक्त बनाया जा सकता है, जो समावेशी एवं सतत विकास का आधार बनेगा।बैठक के समापन पर पोषण, बाल कल्याण एवं सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में ठोस, नवाचारी एवं परिणाम-आधारित रणनीति पत्र तैयार करने पर सहमति बनी, ताकि "हर बच्चा स्वस्थ, हर भविष्य उज्ज्वल" के संकल्प को साकार करते हुए छत्तीसगढ़ विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में अग्रणी भूमिका निभा सके।बैठक में राज्य नीति आयोग एवं यूनिसेफ के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
- -रामलला दर्शन योजना से बुजुर्गों, महिलाओं एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों का वर्षों पुराना सपना हो रहा है साकाररायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार जनआस्था, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक पर्यटन को जनकल्याण से जोड़ते हुए प्रदेशवासियों के वर्षों पुराने सपनों को साकार कर रही है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में पर्यटन विभाग द्वारा संचालित रामलला दर्शन योजना प्रदेश के हजारों श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा, सेवा और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन चुकी है। इसी कड़ी में अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन से सरगुजा संभाग के 850 श्रद्धालुओं को लेकर भारत गौरव ट्रेन श्री अयोध्या धाम में प्रभु श्री रामलला तथा श्री काशी विश्वनाथ धाम के दर्शन के लिए श्रद्धा और उत्साह के वातावरण में रवाना हुई।रेलवे स्टेशन पर सुबह से ही भक्ति और उल्लास का अनूठा वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालु भगवान श्रीराम के जयघोष के साथ स्टेशन पहुंचे। पूरा परिसर जय श्रीराम, हर-हर महादेव और जय सियाराम के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर अपने आराध्य के दर्शन का उत्साह और भावनात्मक खुशी स्पष्ट दिखाई दे रही थी। अनेक परिवार पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे, जहां परिजनों ने तिलक लगाकर और पुष्पवर्षा कर यात्रियों को शुभ यात्रा की मंगलकामनाओं के साथ विदा किया।भारत गौरव ट्रेन को जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर श्रीमती मंजूषा भगत (महापौर), श्री हरविंदर सिंह टिनी (सभापति), श्रीमती नीरूपा सिंह (जिला पंचायत अध्यक्ष) सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल, जिला प्रशासन तथा भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत करते हुए यात्रा की शुभकामनाएं दीं।रामलला दर्शन योजना के अंतर्गत श्रद्धालुओं को श्री अयोध्या धाम में प्रभु श्री रामलला के दिव्य दर्शन तथा श्री काशी विश्वनाथ धाम में बाबा विश्वनाथ के दर्शन एवं पूजन का सौभाग्य प्राप्त होगा। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सम्मान का विशेष ध्यान रखा गया है। पूरी यात्रा का संचालन पर्यटन विभाग एवं आईआरसीटीसी के समन्वय से सुव्यवस्थित रूप से किया जा रहा है।यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को आरामदायक रेल यात्रा, स्वच्छ एवं सुरक्षित आवास, पौष्टिक शुद्ध शाकाहारी भोजन, पेयजल, स्थानीय परिवहन, चिकित्सा सहायता, सुरक्षा व्यवस्था तथा अनुभवी एस्कॉर्ट दल की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं तथा दिव्यांग यात्रियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विशेष सहायता की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है, ताकि प्रत्येक श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के अपनी आध्यात्मिक यात्रा पूर्ण कर सके।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सोच है कि आर्थिक स्थिति किसी भी श्रद्धालु की आस्था के मार्ग में बाधा नहीं बननी चाहिए। इसी भावना के अनुरूप रामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के हजारों श्रद्धालुओं को निःशुल्क धार्मिक यात्रा का अवसर प्रदान किया जा रहा है। यह योजना केवल दर्शन कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेशवासियों को उनकी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन गई है।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने श्रद्धालुओं के लिए संदेश देते हुए कहा कि रामलला दर्शन योजना मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के संवेदनशील नेतृत्व की ऐसी जनकल्याणकारी पहल है, जिसके माध्यम से प्रदेश के श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम और बाबा विश्वनाथ के पावन दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। यह यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक समरसता को सशक्त बनाने का अभियान है। मैं सभी श्रद्धालुओं से प्रार्थना करता हूं कि वे प्रभु श्रीराम और बाबा विश्वनाथ से छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि, खुशहाली और सभी नागरिकों के कल्याण की कामना करें तथा यात्रा से लौटकर अपने अनुभव समाज के साथ साझा करें, ताकि अधिक से अधिक लोग इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित हों।यात्रा पर रवाना होने वाले श्रद्धालुओं ने भी भावुक होकर राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। अनेक बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने कहा कि जीवनभर इच्छा होने के बावजूद आर्थिक परिस्थितियों के कारण अयोध्या और काशी की यात्रा संभव नहीं हो पाई थी, लेकिन मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की इस योजना ने उनका वर्षों पुराना सपना पूरा कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें सम्मानपूर्वक भगवान श्रीराम और बाबा विश्वनाथ के दर्शन का अवसर देकर उनके जीवन की सबसे बड़ी मनोकामना पूर्ण कर दी है।एक महिला श्रद्धालु ने कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि इतनी अच्छी व्यवस्था के साथ अयोध्या और काशी की यात्रा करने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने हम जैसे सामान्य परिवारों की भावनाओं का सम्मान किया है। हम सभी उनके प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।एक वरिष्ठ श्रद्धालु ने कहा कि सरकार ने हमारी पूरी यात्रा की चिंता अपने ऊपर ले ली है। भोजन, आवास, सुरक्षा और चिकित्सा जैसी सभी व्यवस्थाएं होने से हम पूरी निश्चिंतता और श्रद्धा के साथ यात्रा कर रहे हैं। यह योजना वास्तव में गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व तथा पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के सतत प्रयासों से संचालित रामलला दर्शन योजना आज प्रदेशवासियों की आस्था को सम्मान देने वाली एक ऐतिहासिक पहल के रूप में स्थापित हो चुकी है। यह योजना श्रद्धालुओं को केवल धार्मिक स्थलों के दर्शन ही नहीं करा रही, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक एकात्मता से भी जोड़ रही है। सरगुजा संभाग से रवाना हुई भारत गौरव ट्रेन इसी जनसेवा, सुशासन और जनआस्था के सशक्त समन्वय का प्रेरक उदाहरण है।
- -आयुष्मान आरोग्य मंदिर बना ग्रामीणों के लिए भरोसे का केंद्र, तीन महीने में 23 सुरक्षित संस्थागत प्रसवरायपुर । दूरस्थ गांवों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगा है। दंतेवाडा कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थापना, नए स्वास्थ्य भवनों का निर्माण, जिला अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार और मेडिकल कॉलेज की स्थापना जैसे कदमों से जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से अधिक सशक्त हुई है। आयुष्मान आरोग्य मंदिर में तीन महीने में 23 सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराया गयाकटेकल्याण विकासखंड के अंतर्गत स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर जंगमपाल इसका प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है। यह जिला मुख्यालय से लगभग 110 किलोमीटर दूर स्थित जिले के अंतिम उप स्वास्थ्य केंद्रों में से एक है। पहले यहां के लोगों को इलाज के लिए जिला अस्पताल या सुकमा जाना पड़ता था, लेकिन अब गांव में ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।आयुष्मान आरोग्य मंदिर में निःशुल्क लैब जांच, गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता, टीकाकरण और प्राथमिक उपचार सहित 12 प्रकार की जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। सबसे बड़ा बदलाव मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में आया है। अब गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। गांव के स्वास्थ्य केंद्र में ही उनकी नियमित जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान, लगातार निगरानी और सुरक्षित संस्थागत प्रसव की सुविधा उपलब्ध है। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि पिछले तीन महीनों में जंगमपाल आयुष्मान आरोग्य मंदिर में 23 गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराया गया है। यह उपलब्धि ग्रामीणों के बढ़ते विश्वास और स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर गुणवत्ता को दर्शाती है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अजय रामटेके ने बताया कि जंगमपाल आयुष्मान आरोग्य मंदिर में ग्रामीणों को नियमित रूप से प्राथमिक उपचार, गर्भवती महिलाओं की जांच, टीकाकरण, स्वास्थ्य परामर्श और अन्य आवश्यक सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और जंगमपाल की सफलता जिले की मजबूत होती स्वास्थ्य व्यवस्था की एक प्रेरणादायक मिसाल है। सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं और स्थानीय प्रशासन के प्रयासों से जंगमपाल जैसे दूरस्थ गांवों में भी अब सुरक्षित मातृत्व और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का नया भरोसा बना है।
- -केवल छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करेंरायपुर । छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) द्वारा गृह (पुलिस) विभाग के अंतर्गत आयोजित सूबेदार, उप-निरीक्षक (SI) संवर्ग और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा-2024 के प्रारंभिक लिखित परीक्षा परिणाम 04 अगस्त 2026 को घोषित किए गए। परिणाम जारी होने के बाद से ही सोशल मीडिया पर अभ्यर्थियों के नामों को लेकर भ्रामक व तथ्यहीन जानकारियां प्रसारित की जा रही हैं।सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स (रील्स और शॉर्ट्स वीडियो) पर कुछ अभ्यर्थियों के नामों को लेकर उनका उपहास उड़ाया जा रहा है और परीक्षा परिणाम की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने सोशल मीडिया पर चल रही इन रील्स और वीडियो में प्रदर्शित दावों का सख्ती से खंडन किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा परिणाम में अभ्यर्थियों के वही नाम प्रदर्शित किए गए हैं, जो उन्होंने स्वयं अपने ऑनलाइन आवेदन पत्र में दर्ज कर अंतिम रूप से सबमिट किए थे। इन्हीं नामों के आधार पर अभ्यर्थियों का दस्तावेज़ सत्यापन, शारीरिक परीक्षण (PST) और प्रारंभिक लिखित परीक्षा संपन्न हुई थी। अभ्यर्थियों के प्रवेश-पत्र (Admit Card) में भी यही नाम अंकित थे। इन्हीं नामों के आधार पर अभ्यर्थियों का दस्तावेज़ सत्यापन किया गया। अवर सचिव छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने सभी अभ्यर्थियों और जनसामान्य से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही ऐसी किसी भी असत्य, भ्रामक और तथ्यहीन जानकारी या अफ़वाहों पर विश्वास न करें। परीक्षा से जुड़ी किसी भी अधिकृत जानकारी के लिए केवल छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें।
- -बुनकरों को मिलेगी करोड़ों की सौगातरायपुर। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर बुनकर समुदाय को प्रोत्साहित करने, पारंपरिक कला को बढ़ावा देने और उत्कृष्ट कार्य करने वाले बुनकरों व विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए राज्य स्तरीय समारोह आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों में छात्र प्रोत्साहन पुरस्कार, शिल्पियों का सम्मान और हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनियां मुख्य आकर्षण होंगी।हाथकरघा उद्योग के संवर्धन, स्वदेशी की भावना को बढ़ावा देने और बुनकरों के योगदान को सम्मानित करने के उद्देश्य से 7 अगस्त को राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर रायपुर के दीनदयाल ऑडिटोरियम में राज्य स्तरीय भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह करेंगे। विशिष्ट अतिथि के रूप में ग्रामोद्योग एवं स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव उपस्थित रहेंगे।समारोह के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा संघ की कई नई पहलों की शुरुआत की जाएगी। हाथकरघा संघ के नए प्रीमियम ब्रांड ‘कोशल फेब’ का भव्य शुभारंभ किया जाएगा और ‘बिलासा’ लोगो का अनावरण किया जाएगा। इन्वेंटरी मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का प्रस्तुतीकरण व शुभारंभ के साथ पुरस्कृत बुनकरों की डायरेक्टरी तथा टाई-डाई व बांधनी रंगाई पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया जाएगा।कार्यक्रम में ग्रामोद्योग विभाग के विभिन्न घटकों द्वारा हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं के तहत राशि एवं सामग्री वितरित की जाएगी। कक्षा 10वीं व 12वीं के 935 मेधावी विद्यार्थियों को 81.83 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा 17 वरिष्ठ बुनकरों को 1.87 लाख रुपये की सम्मान राशि दी जाएगी। स्व. बिसाहूदास महंत सर्वश्रेष्ठ बुनकर पुरस्कार और राजराजेश्वरी करुणा माता बुनकर पुरस्कार के तहत चयनित 8 बुनकरों को 1-1 लाख रुपये की पुरस्कार राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे। 49 बुनकरों को आवास निर्माण के लिए 122.50 लाख रुपये, 5 बुनकर समितियों को भवन निर्माण हेतु 75 लाख रुपये और 85 बुनकरों को उन्नत उपकरण उपलब्ध कराने के लिए 14.92 लाख रुपये की स्वीकृति दी जाएगी। रेशम कृषकों को 15 लाख रुपये की किश्त, माटीशिल्पियों को विद्युत चाक, हस्तशिल्पियों को टूल-किट और जशपुर के ग्राम गोरिया में ग्लेजिंग यूनिट हेतु 2.86 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की जाएगी। साथ ही बुनकर नेत्र परीक्षण अभियान के तहत पात्र बुनकरों को चश्मे बांटे जाएंगे।समारोह का मुख्य आकर्षण छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक विरासत को समर्पित एक विशेष फैशन शो होगा। इसमें कोसा सिल्क और हैंडवुवन कॉटन के परिधानों को प्रदर्शित किया जाएगा। इस फैशन शो की खासियत बस्तर की युवा प्रतिभागियों की सहभागिता होगी, जो पेशेवर मॉडलों और मिस इंडिया अर्थ 2026 अनुष्का सोने के साथ रैंप पर अपनी चमक बिखेरेंगी। इस राज्य स्तरीय आयोजन में प्रदेश भर से बुनकर, हस्तशिल्पी, रेशम कृषक, माटीशिल्पी और जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में हिस्सा लेंगे।
- रायपुर ।प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ा रही है। इसी कड़ी में राजनांदगांव जिले के छुरिया विकासखंड की ग्राम पंचायत धरमूटोला के सचिव मोहन साहू ने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित कर हरित ऊर्जा अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाई है। अब उन्हें बिजली बिल में उल्लेखनीय बचत होने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देने का अवसर मिलेगा।मोहन साहू का कहना है कि योजना के तहत सोलर संयंत्र लगाने की पूरी प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक रही। उनका मानना है कि सौर ऊर्जा न केवल स्वच्छ, सुरक्षित और अक्षय ऊर्जा का विश्वसनीय स्रोत है, बल्कि यह बढ़ती बिजली लागत से राहत दिलाने का प्रभावी माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि यदि अधिक से अधिक लोग अपनी क्षमता के अनुसार सोलर रूफटॉप अपनाएं, तो बिजली की बचत के साथ कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उन्होंने जिले के नागरिकों से प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि यह योजना आर्थिक बचत के साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी मजबूती दे रही है। राजनांदगांव जिले में योजना के विस्तार से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है और हरित, टिकाऊ तथा पर्यावरण-अनुकूल भविष्य की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार हो रहा है।
- -एक सप्ताह में मिला जाति प्रमाण पत्ररायपुर ।सरकारी सेवाओं को आम नागरिक तक सरल, त्वरित और पारदर्शी तरीके से पहुंचाने की दिशा में सेवा सेतु प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम मोहड़ निवासी यादव राम चंद्राकर इसके उदाहरण हैं। उन्होंने सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से जाति प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन किया और महज एक सप्ताह के भीतर उनका प्रमाण पत्र जारी हो गया। इससे न केवल उनका समय बचा, बल्कि कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने और अनावश्यक खर्च से भी राहत मिली।यादव राम चंद्राकर बताते हैं कि पहले छोटे-छोटे प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कई दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। आवेदन की स्थिति जानने में भी काफी समय और मेहनत लगती थी। लेकिन सेवा सेतु ने पूरी प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बना दिया है। अब घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर निर्धारित समय-सीमा में प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने इस जनहितकारी पहल के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह व्यवस्था ग्रामीण नागरिकों के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित हो रही है।उल्लेखनीय है कि पहले प्रदेश में ई-डिस्ट्रिक्ट प्लेटफॉर्म के माध्यम से केवल 86 शासकीय सेवाएं उपलब्ध थीं। बदलती जरूरतों को देखते हुए इसका उन्नत संस्करण सेवा सेतु विकसित किया गया, जिसमें अब 441 से अधिक शासकीय सेवाएं एक ही ऑनलाइन मंच पर उपलब्ध हैं। इससे शासन की सेवाएं अधिक सुलभ, पारदर्शी और समयबद्ध हुई हैं। सेवा सेतु डिजिटल सुशासन को मजबूत करने के साथ-साथ नागरिकों के समय, श्रम और धन की बचत कर शासन और जनता के बीच विश्वास का नया सेतु भी बन रहा है।
- -बलौदाबाजार के ऐतिहासिक विकास और युवाओं के स्वर्णिम भविष्य के लिए प्रतिबद्ध-42 लाख रुपए के विभिन्न विकास कार्यों की हुई घोषणारायपुर। रायपुर जिला के तिल्दा विकासखंड के ग्राम बहेसर और तुलसी मार्ग के बीच की दूरी को कम करने वाली नई सड़क के भूमिपूजन अवसर पर राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि जीवन में संघर्ष से मिली सफलता ही इतिहास रचती है। एक साधारण परिवार या मजदूर का बच्चा जब मेहनत के बल पर आईएएस या आईपीएस बनता है, तो वह पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है। उन्होंने युवाओं से महापुरुषों के विचारों से सीख लेते हुए बिना किसी नकारात्मक प्रतिस्पर्धा के एक-दूसरे के सहयोग से आगे बढ़ने का आह्वान किया।मंत्री श्री वर्मा ने क्षेत्रीय जनभावनाओं और बुनियादी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की सौगात दी। जिसमें बहेसर में साइकिल स्टैंड निर्माण के लिए 5 लाख रुपये, रंगमंच के समीप ज्योति कलश हेतु 5 लाख रुपये और रघुनंदन वर्मा के घर से मुख्य मार्ग तक सीसी रोड निर्माण के लिए 5 लाख रुपये की घोषणा शामिल है। इसके साथ ही शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बहेसर के प्राथमिक शाला में दो नए कमरों के निर्माण के लिए 10 लाख रुपये तथा जर्जर हो चुके पूर्व माध्यमिक शाला भवन के पुनर्निर्माण हेतु 10 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की। उन्होंने विश्वास जताया कि ये सभी कार्य क्षेत्र के विकास को एक नई दिशा देंगे। मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों से पूरे प्रदेश का कायाकल्प हो रहा है। छत्तीसगढ़ निरंतर विकास की ओर अग्रसर हो रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन के सफर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने एक प्राथमिक शाला के शिक्षक के रूप में अपनी सेवा की शुरुआत की थी। उनका उद्देश्य सत्ता, पैसा या रुतबा हासिल करना कभी नहीं रहा, बल्कि बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र में ऐसे ऐतिहासिक कार्य करना है जिन्हें हमेशा याद रखा जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मूल मंत्र पर काम कर रही है। किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख महिलाओं को आर्थिक संबल देने का कार्य कर रही है।
- -राष्ट्रीय टीम में चुनी गईं कांसाबेल की मधु सिदार और बोड़ला की गीता यादव खेलो इंडिया एक्सीलेंस सेंटर, बिलासपुर में ले रहीं प्रशिक्षण-उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने दोनों खिलाड़ियों को दी बधाई, वीडियो-कॉल पर बात कर तैयारियों की भी ली जानकारीरायपुर। छत्तीसगढ़ के लिए खेल जगत से आज एक और बड़ी खुशखबरी आई है। बिलासपुर के खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की दो खिलाड़ियों गीता यादव और मधु सिदार का चयन भारत की जूनियर महिला हॉकी टीम में हुआ है। ये दोनों चीन के मोकी में आगामी 30 अगस्त से 13 सितम्बर तक होने वाले जूनियर एशिया कप में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी प्रतिभा और दम दिखाएंगी।उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने गीता यादव और मधु सिदार से वीडियो-कॉल पर बात कर भारतीय टीम में चयन पर बधाई दी। उन्होंने दोनों खिलाड़ियों को जूनियर एशिया कप हॉकी में अच्छे प्रदर्शन के लिए शुभकामना देते हुए उनकी तैयारियों की भी जानकारी ली। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार और संचालक श्रीमती तनुजा सलाम ने भी दोनों खिलाड़ियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।भारतीय जूनियर हॉकी टीम में चयनित ये दोनों ही खिलाड़ी प्रदेश की पहली आवासीय खेल अकादमी में वरिष्ठ प्रशिक्षक श्री राकेश टोप्पो एवं मुख्य प्रशिक्षक श्री अजीत लकड़ा से हॉकी का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।ऐसा रहा है टीम इंडिया तक दोनों खिलाड़ियों का सफरमधु सिदारमधु सिदार हॉकी की नर्सरी कहे जाने वाले जशपुर जिले के कांसाबेल के छोटे से गांव पोंगरो की रहने वाली है। उनके माता-पिता कृषक हैं। वह सब-जूनियर नेशनल चैम्पियनशिप 2024-25, स्कूल नेशनल 2024-25 तथा हरियाणा में सब-जूनियर इंटर जोन चैम्पियनशिप-2025 में भागीदारी कर चुकी हैं। उनकी टीम ने आंध्रप्रदेश में 1 अगस्त से 12 अगस्त 2025 तक आयोजित हॉकी इंडिया नेशनल चैम्पियनशिप में चतुर्थ स्थान हासिल किया था। मधु इस साल मार्च-अप्रैल में छत्तीसगढ़ में आयोजित देश के पहले खेलो इंडिया ट्रायबल गेम्स में भी खेल चुकी है। वह अप्रैल-2026 से बेंग्लुरू में भारतीय टीम के साथ प्रशिक्षण ले रही हैं।गीता यादवकबीरधाम जिले के बोड़ला की गीता यादव ने हॉकी का प्रारंभिक प्रशिक्षण कोच श्री शिवा चौहान से प्राप्त किया है। गीता के अंतरराष्ट्रीय करियर का सफर वर्ष-2024 में प्रारंभ हुआ, जब उन्होंने 12 नवम्बर से 21 नवम्बर 2024 तक नीदरलैण्ड और बेल्जियम टूर में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। उसके बाद 15 मई से 2 जून 2025 तक अर्जेंटीना टूर और 5 जुलाई से 14 जुलाई 2026 तक इंग्लैण्ड और स्कॉटलैण्ड टूर में भी वह भारतीय टीम का हिस्सा थीं।
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-छत्तीसगढ़ के प्रथम "मातृ दूध कोष (Mother Milk Bank)" की घोषणा
रायपुर । विश्व स्तनपान सप्ताह (01–07 अगस्त 2026) के अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) तथा राज्य स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केन्द्र (SHSRC), छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में आज रायपुर स्थित नया सभागृह, अटल बिहारी वाजपेयी सभागार, पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय परिसर में राज्य स्तरीय कार्यक्रम काआयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में स्तनपान के महत्व के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, शिशुओं के समुचित पोषण एवं स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करना तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाना था।कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण "माता यशोदा सम्मान" रहा, जिसके अंतर्गत राज्य के विभिन्न जिलों से चयनित 10 माताओं को सम्मानित किया गया। इन माताओं ने अपने मातृ दुग्ध का दान कर ऐसे नवजात शिशुओं को जीवनदायी सहयोग प्रदान किया, जिन्हें अपनी माताओं का दूध उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। सम्मान समारोह के माध्यम से मातृ दुग्ध दान को एक सामाजिक आंदोलन का स्वरूप देने का संदेश दिया गया तथा मातृत्व, संवेदनशीलता और मानवता की इस अनूठी मिसाल को समाज के समक्ष प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि माननीय श्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि श्री अमित कटारिया, सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, श्री संजीव झा, आयुक्त सह संचालक स्वास्थ्य सेवाएं एवं मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, डॉ. प्रदीप कुमार पात्रा, कुलपति आयुष विश्वविद्यालय, डा. विवेक चौधरी डीन पंडित जवाहर लाल मेडिकल कॉलेज ने भाग लिए |कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा ह्यूमन मिल्क बैंक स्टॉल के अवलोकन से हुआ। इसके पश्चात अतिथियों के मंचासीन होने के बाद दीप प्रज्ज्वलन एवं वंदे मातरम् के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया।मुख्य अतिथि माननीय श्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि माँ का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम, सुरक्षित एवं संपूर्ण आहार है तथा स्वस्थ एवं सशक्त समाज की आधारशिला है। उन्होंने मितानिन कार्यक्रम के 25 वर्षों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि मितानिन बहनों ने दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुँचाने में अतुलनीय भूमिका निभाई है। उन्होंने माता शबरी के सेवा, समर्पण और निस्वार्थ भाव का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार माता शबरी ने बिना किसी स्वार्थ के दीन दुखियों, जरूरतमंदों व प्रभु श्रीराम की सेवा की, उसी प्रकार प्रदेश की 72 हजार मितानिन बहनें समाज के गरीब, जरूरतमंद, गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं की निस्वार्थ भाव से सेवा कर रही हैं और वे आज की वास्तविक 'शबरी' हैं। उन्होंने प्रदेश के प्रथम 'मातृ दूध कोष (Human Milk Bank)' की स्थापना को नवजात शिशुओं के लिए एक ऐतिहासिक एवं जीवनदायी पहल बताते हुए कहा कि इससे अनेक शिशुओं को सुरक्षित मातृ दुग्ध उपलब्ध हो सकेगा। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने एक प्रभावशाली उदाहरण देते हुए कहा कि हमारी संस्कृति में साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक भी "माँ का दूध" ही माना जाता है और अक्सर चुनौती देते समय लोग कहते हैं, "माँ का दूध पिया है तो आ जा"। उन्होंने कहा कि यह केवल एक कहावत नहीं, बल्कि माँ के दूध की शक्ति, संस्कार और जीवनदायी महत्व का प्रतीक है। अंत में उन्होंने सभी से संकल्प लेने का आह्वान किया कि प्रदेश का कोई भी नवजात माँ के अमूल्य दूध से वंचित न रहे तथा स्तनपान को जन-आंदोलन बनाया जाए।अपने संबोधन में श्री अमित कटारिया, आईएएस, सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने कहा कि छत्तीसगढ़ का मितानिन कार्यक्रम पिछले25 वर्षों से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि जन्म के प्रथम घंटे में स्तनपान, छह माह तक केवल माँ का दूध तथा माताओं को संतुलित पोषण उपलब्ध कराना स्वस्थ एवं कुपोषण-मुक्त समाज की आधारशिला है। उन्होंने स्तनपान संबंधी भ्रांतियों को दूर करने, प्रत्येक माँ को उचित सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान करने तथा स्तनपान को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया। - -धमतरी की बेटी ने कौशल विकास के दम पर रची सफलता की नई इबारत, स्वतंत्रता दिवस समारोह में होंगी शामिलरायपुर । धमतरी जिले के ग्राम नवागांव की बेटी रेणुका गोस्वामी को आगामी 15 अगस्त के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए आमंत्रण मिलने पर उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान न केवल रेणुका गोस्वामी की मेहनत और प्रतिभा का गौरव है, बल्कि छत्तीसगढ़ की बेटियों, ग्रामीण युवाओं और कौशल विकास की सफलता का भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि रेणुका गोस्वामी ने दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने जीवन को नई दिशा दी और आज वे अपने परिश्रम एवं प्रतिभा के बल पर सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही हैं। उनका राष्ट्रपति भवन तक पहुंचना प्रदेश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का विषय है।रेणुका गोस्वामी धमतरी जिले के ग्राम नवागांव की निवासी हैं। उन्होंने वर्ष 2018 में दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त किया और कॉर्पोरेट क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की। निरंतर मेहनत, कौशल और लगन के बल पर उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य करते हुए अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वे रायपुर के एक प्राइवेट फर्म में एचआर मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं तथा लगभग 40 हजार रुपए प्रतिमाह का वेतन प्राप्त कर रही हैं। उनकी सफलता से परिवार की आर्थिक स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार आया है।उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार युवाओं को कौशल विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। रेणुका गोस्वामी जैसी सफल युवतियां इस बात का प्रमाण हैं कि सही मार्गदर्शन, कौशल प्रशिक्षण और दृढ़ संकल्प के बल पर ग्रामीण अंचल के युवा भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना सकते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति भवन में रेणुका गोस्वामी की उपस्थिति प्रदेश की बेटियों और युवाओं का उत्साह बढ़ाएगी तथा अन्य युवाओं को भी अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करेगी।
- -एक किलो का ट्यूमर निकाल महिला को दिया नया जीवनरायपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एक अत्यंत जटिल और उच्च जोखिम वाली सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। सिम्स के डॉक्टरों ने दर्रीघाट (बिलासपुर) निवासी 78 वर्षीय बुजुर्ग महिला के बाएं अंडाशय से लगभग 1 किलोग्राम वजन का कैंसरयुक्त ट्यूमर सुरक्षित बाहर निकालकर उन्हें नया जीवन प्रदान किया है।निजी अस्पताल ने बताया था 3 लाख का खर्च, आयुष्मान योजना से मुफ्त हुआ इलाज, मरीज पिछले 5-6 महीनों से पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द और तेजी से बढ़ रही गांठ से पीड़ित थीं। परिजन पहले उन्हें एक निजी अस्पताल ले गए थे, जहां जांच के बाद ऑपरेशन व इलाज के लिए 2 से 3 लाख रुपये का खर्च बताया गया। आर्थिक तंगी के कारण परिवार चिंतित था। इसके बाद मरीज को सिम्स, बिलासपुर में भर्ती कराया गया, जहां आयुष्मान भारत योजना के तहत उनका पूरा इलाज और जटिल ऑपरेशन बिल्कुल मुफ्त किया गया।सोनोग्राफी जांच में रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने पाया कि मरीज के बाएं अंडाशय में 15×12×10 सेंटीमीटर आकार का विशाल ट्यूमर था, जो आसपास के अंगों पर भारी दबाव डाल रहा था। इसके बाद बहुविषयक विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने 3 अगस्त 2026 को कैंसर की चरण निर्धारण शल्य चिकित्सा, ट्यूमर भार कम करने, गर्भाशय एवं दोनों अंडाशयों को निकालने, बाईं मूत्रवाहिनी की मरम्मत और उसमें श्डबल-जे स्टेंटश् प्रत्यारोपण जैसी बेहद जटिल प्रक्रियाओं को सफलता पूर्वक पूरा किया।इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में विभिन्न विभागों की टीमों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। गायनेकोलॉजिकल सर्जरी टीम के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. संगीता रमन जोगी, डॉ. दीपिका, डॉ. सौम्या और डॉ. वर्षा, जनरल सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. रघुराज सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. बी. डी. तिवारी और डॉ. गरिमा और एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. बी. रायजादा, डॉ. एस. कुजूर और डॉ. एम. देववर्मा का इस सफल आपरेशन में का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बताया कि रजोनिवृत्ति के बाद इस आकार का कैंसर ट्यूमर होना बेहद दुर्लभ और जोखिम भरा होता है। ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव और आंत व मूत्राशय जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। हालांकि, डॉक्टरों के सटीक संज्ञाहरण प्रबंधन और उच्च स्तरीय कौशल से मरीज का सुरक्षित ऑपरेशन संपन्न हुआ। मरीज की हालत संतोषजनक है और वे डॉक्टरों की निगरानी में स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं। मरीज के परिजनों ने जीवनरक्षक मुफ्त इलाज के लिए सिम्स प्रबंधन और डॉक्टरों का आभार जताया है।
- -SASCI 2026-27 के तहत प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने वाला देश का पहला राज्य बना छत्तीसगढ़-सीबीजी इकोसिस्टम के विकास के लिए भारत सरकार ने स्वीकृत किए 50 करोड़ रुपये-स्वच्छ ऊर्जा, किसानों की आय में वृद्धि और हरित अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बलरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में स्वच्छ ऊर्जा, हरित विकास और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में छत्तीसगढ़ को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उपलब्धि प्राप्त हुई है। राज्य में कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) इकोसिस्टम के विकास के लिए किए जा रहे नवाचारों और प्रभावी प्रयासों की सराहना करते हुए भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पूंजीगत निवेश विशेष सहायता योजना (SASCI) 2026-27 के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को 50 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की है। इस योजना के तहत यह प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि जैव ईंधन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ तेजी से राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहा है और यह उपलब्धि उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग तथा छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को इस सफलता के लिए बधाई दी।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति राज्य के कृषि, ऊर्जा और पर्यावरण क्षेत्र में परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगी। इससे कृषि अवशेषों का वैज्ञानिक उपयोग सुनिश्चित होगा, किसानों को अतिरिक्त आय का नया स्रोत मिलेगा तथा पराली और अन्य जैव अवशेषों के बेहतर प्रबंधन से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए हरित अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को जैव ईंधन एवं स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना है। सीबीजी नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में निवेश, रोजगार, किसानों की आय, जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण को नई गति मिलेगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को और अधिक मजबूती प्राप्त होगी।राज्य सरकार ने कम्प्रेस्ड बायोगैस परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति-2026 को 8 जून 2026 को अधिसूचित किया है। इस नीति के माध्यम से राज्य में उपलब्ध कृषि अपशिष्ट, पैडी स्ट्रॉ तथा अन्य बायोमास का वैज्ञानिक रूपांतरण कर औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपयोग के लिए स्वच्छ गैसीय ईंधन का उत्पादन किया जाएगा। इससे किसानों को बायोमास की आपूर्ति से अतिरिक्त आय प्राप्त होगी, वहीं संयंत्रों से प्राप्त जैविक खाद जैविक खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।मुख्यमंत्री श्री साय के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने सीबीजी क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने, उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वित कार्यप्रणाली विकसित करने पर विशेष जोर दिया है। इसी क्रम में 3 अगस्त 2026 को मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर में प्रमुख सचिव, ऊर्जा विभाग श्री सुबोध कुमार सिंह की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।बैठक में राज्य में सीबीजी परियोजनाओं के त्वरित विकास के लिए बायोमास संग्रहण व्यवस्था, सिंगल विंडो क्लीयरेंस, जैव उर्वरक के उपयोग, विभागीय समन्वय तथा निवेश प्रोत्साहन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रमुख सचिव ने सभी विभागों को समयबद्ध एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।बैठक में छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमित सरकार ने राज्य में सीबीजी संयंत्रों की स्थापना, निवेश संभावनाओं, नीति के क्रियान्वयन तथा भावी कार्ययोजना पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इस अवसर पर वाणिज्य एवं उद्योग, कृषि, नगरीय प्रशासन एवं विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, पशुधन विकास, परिवहन तथा पर्यावरण संरक्षण मंडल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
- -कार्टून कला बच्चों में रचनात्मकता, संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच विकसित करने का सशक्त माध्यम : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय-कार्टून वॉच पत्रिका के संपादक श्री त्र्यंबक शर्मा ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से की सौजन्य मुलाकात-'मुस्कुराता बस्तर' प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण कार्यशाला की स्मारिका की भेंटरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में कार्टून वॉच के संपादक श्री त्र्यंबक शर्मा ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री श्री साय को बस्तर में आयोजित 'मुस्कुराता बस्तर' अभियान के अंतर्गत कार्टून प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण कार्यशाला की विस्तृत जानकारी दी तथा इस अभिनव पहल पर आधारित स्मारिका भी भेंट की।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस अनूठी पहल की सराहना करते हुए कहा कि कला समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी के व्यक्तित्व निर्माण का प्रभावी माध्यम है। कार्टून केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों को सरल, सहज और प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करने की सशक्त विधा है। उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रारंभिक अवस्था से ही रचनात्मक अभिव्यक्ति के अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो उनमें आत्मविश्वास, संवेदनशीलता, तार्किक सोच और सकारात्मक दृष्टिकोण का विकास होता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ कला, साहित्य, खेल और संस्कृति जैसी गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए समान रूप से आवश्यक हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर आयोजित किए जाएंगे, जिससे अधिकाधिक विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिल सके। उल्लेखनीय है कि जनसंपर्क विभाग और कार्टून वॉच के द्वारा 'मुस्कुराता बस्तर' अभियान के तहत जगदलपुर सहित बस्तर अंचल के विभिन्न शासकीय विद्यालयों के लगभग 100 विद्यार्थियों के लिए विशेष कार्टून प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित कार्टूनिस्टों ने बच्चों को कार्टून कला की बारीकियों, रेखांकन, व्यंग्य की अभिव्यक्ति, दृश्य संप्रेषण और रचनात्मक सोच के विविध आयामों से परिचित कराया। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को अपनी कल्पनाशीलता को चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त करने तथा सामाजिक विषयों पर सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया।
- -पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से परिवारों को आर्थिक राहत, हरित ऊर्जा से साकार हो रहा विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्परायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर रही है। इसी का परिणाम है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना प्रदेश के हजारों परिवारों के जीवन में आर्थिक समृद्धि, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण का नया अध्याय लिख रही है। यह योजना केवल बिजली बिल में राहत देने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ एवं अक्षय ऊर्जा को जन-जन तक पहुंचाकर हरित भविष्य के निर्माण की मजबूत आधारशिला भी बन रही है।गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा निवासी श्री लखन लाल कश्यप इस परिवर्तन की सशक्त मिसाल बनकर उभरे हैं। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ लेकर उन्होंने अपने घर की छत पर 5 किलोवॉट क्षमता का सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित कराया है। इस संयंत्र के स्थापित होने के बाद उनका मासिक बिजली बिल पूरी तरह शून्य हो गया है। इससे जहां परिवार की नियमित मासिक बचत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, वहीं वे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में भी सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।श्री लखन लाल कश्यप ने बताया कि योजना की जानकारी मिलते ही उन्होंने आवेदन किया। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके घर पर सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित किया गया। इस कार्य में केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अनुदान प्राप्त होने से संयंत्र की स्थापना पर आने वाला आर्थिक व्यय काफी कम हो गया। सरकार की इस सहायता ने सौर ऊर्जा अपनाने का उनका सपना सहज और किफायती बना दिया।उन्होंने बताया कि पहले प्रत्येक माह बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता था, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त भार पड़ता था। अब सौर ऊर्जा के उपयोग से बिजली बिल पूरी तरह समाप्त हो गया है। इससे होने वाली बचत का उपयोग परिवार की अन्य आवश्यकताओं में किया जा रहा है। साथ ही उन्हें यह संतोष भी है कि वे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग के माध्यम से प्रदूषण कम करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में अपना योगदान दे रहे हैं।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश में अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने, ऊर्जा आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने तथा आम नागरिकों तक स्वच्छ ऊर्जा के लाभ पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश के अधिकाधिक परिवार सौर ऊर्जा से जुड़ रहे हैं और बिजली पर होने वाले मासिक खर्च में उल्लेखनीय कमी ला रहे हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी मजबूती मिल रही है।श्री लखन लाल कश्यप का कहना है कि सौर ऊर्जा भविष्य की सबसे भरोसेमंद, किफायती और पर्यावरण हितैषी ऊर्जा है। इससे न केवल आर्थिक बचत होती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण भी सुनिश्चित होता है। उन्होंने प्रदेश के सभी पात्र परिवारों से प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ उठाकर अपने घरों में सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित कराने की अपील की।उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस जनहितकारी योजना ने सौर ऊर्जा को आम नागरिकों की पहुंच में ला दिया है। सरकार से प्राप्त अनुदान के कारण आर्थिक बोझ काफी कम हुआ और आज वे बिना बिजली बिल की चिंता के स्वच्छ एवं अक्षय ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार यह योजना आर्थिक बचत, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण तीनों उद्देश्यों को एक साथ पूरा करने वाली दूरदर्शी पहल है।प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ में ऊर्जा आत्मनिर्भरता का दायरा लगातार बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक परिवार इस योजना से जुड़ें, अपने बिजली व्यय में बचत करें, स्वच्छ ऊर्जा को अपनाएं और विकसित एवं हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागी बनें।
- -जशपुर में विशेष पिछड़ी जनजाति (पीवीटीजी) के 19 मरीजों सहित 60 टीबी रोगियों को गोद लेकर पोषण सहायता प्रदान कर रहे हैं निरंजनरायपुर /टीबी केवल एक बीमारी नहीं है। यह गरीबी, कुपोषण और सामाजिक उपेक्षा से जुड़ी ऐसी चुनौती है, जो हर साल हजारों परिवारों को आर्थिक और मानसिक संकट में धकेल देती है। जब कोई व्यक्ति टीबी से ग्रसित होता है, तब उसके सामने केवल दवा लेने की चुनौती नहीं होती, बल्कि पौष्टिक भोजन जुटाने, नियमित उपचार जारी रखने और सामाजिक भेदभाव से लड़ने जैसी अनेक कठिनाइयाँ भी खड़ी हो जाती हैं। यही कारण है कि देशव्यापी प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान में "निक्षय मित्र" की अवधारणा को विशेष महत्व दिया गया है।विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी के उपचार में दवा जितनी आवश्यक है, उतना ही आवश्यक है पर्याप्त पोषण। लेकिन दूरस्थ और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। कई मरीज केवल इसलिए उपचार बीच में छोड़ देते हैं क्योंकि उनके पास पोषणयुक्त भोजन की व्यवस्था नहीं होती। ऐसे समय में निक्षय मित्र न केवल पोषण सहायता प्रदान करते हैं, बल्कि मरीजों के मनोबल को भी मजबूत बनाते हैं।छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। जिले के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTG) के बीच स्वास्थ्य एवं सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में कार्य करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यरत जिला डाटा प्रबंधक निरंजन प्रसाद गुप्ता ने अक्टूबर 2024 से निक्षय मित्र के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने न केवल पीवीटीजी समुदाय के 19 टीबी मरीजों को गोद लिया, बल्कि जिले के कुल 60 टीबी मरीजों को नियमित रूप से पोषण आहार एवं आवश्यक सहयोग प्रदान कर उपचार की राह में उनका साथ निभाया।जशपुर के पहाड़ी कोरवा और बिरहोर जैसे विशेष पिछड़ी जनजातीय समुदायों में टीबी की रोकथाम, समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित होने के कारण मरीज अक्सर उपचार में देरी कर देते हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए मरीजों को पोषण सहायता, स्वास्थ्य परामर्श और निरंतर मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया, जिससे उपचार की निरंतरता बनी रही।निरंजन गुप्ता की पहल केवल पोषण किट तक सीमित नहीं रही। उन्होंने घर-घर पहुंचकर मरीजों और उनके परिजनों को टीबी के लक्षणों, नियमित दवा सेवन, संक्रमण से बचाव तथा उपचार पूरा करने के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस सतत संवाद का सकारात्मक प्रभाव यह हुआ कि समुदाय में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास बढ़ा और लोग स्वयं स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचने लगे।टीबी के खिलाफ लड़ाई में दवा और निदान जितने महत्वपूर्ण हैं, उतना ही महत्वपूर्ण है पोषण और सामाजिक सहयोग। कुपोषण और टीबी का संबंध एक दुष्चक्र की तरह है कुपोषण से बीमारी बढ़ती है और बीमारी से कुपोषण। ऐसे में निक्षय मित्र द्वारा दिया गया पोषण सहयोग मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और उपचार को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन उल्लेखनीय प्रयासों के लिए निरंजन गुप्ता को दिसंबर 2024 में राज्य स्तरीय निक्षय मित्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया।टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य केवल स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य नहीं है। यह समाज के हर उस व्यक्ति का दायित्व है जो किसी जरूरतमंद के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। जशपुर की यह पहल बताती है कि एक व्यक्ति भी यदि संवेदनशीलता के साथ आगे आए, तो वह दर्जनों परिवारों के जीवन में नई उम्मीद जगा सकता है। आज आवश्यकता है कि अधिक से अधिक नागरिक, संस्थाएं और सामाजिक संगठन निक्षय मित्र बनकर इस राष्ट्रीय अभियान से जुड़ें, ताकि कोई भी टीबी मरीज केवल संसाधनों के अभाव में उपचार से वंचित न रहे।
- -बायोफैच इंडिया-2026 में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के विष्णुभोग चावल और केवची के प्राकृतिक शहद ने बटोरी सराहना-स्वसहायता समूहों की मेहनत को मिला राष्ट्रीय सम्मान, जैविक उत्पादों के लिए खुले देश-विदेश के नए बाजाररायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, महिला स्वसहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने तथा जैविक कृषि को प्रोत्साहन देने के प्रयास लगातार नई सफलताएं प्राप्त कर रहे हैं। इसी कड़ी में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान के अंतर्गत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के महिला स्वसहायता समूहों एवं किसान उत्पादक संगठन द्वारा तैयार किए जा रहे जैविक उत्पादों ने देश के सबसे बड़े एवं प्रतिष्ठित जैविक उद्योग व्यापार मेला एवं सम्मेलन ’बायोफैच इंडिया-2026’ में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है।नई दिल्ली में आयोजित इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला एवं सम्मेलन में जिले के प्रसिद्ध ’अरपा बिहान विष्णुभोग राइस’ तथा ’केवची के जंगलों से संग्रहित प्राकृतिक शहद’ का राष्ट्रीय स्टॉल में आकर्षक प्रदर्शन किया गया। इन उत्पादों ने देश-विदेश से पहुंचे खरीदारों, निर्यातकों, उद्योग विशेषज्ञों एवं जैविक उत्पादों से जुड़े प्रतिनिधियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। यह उपलब्धि न केवल गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के जैविक उत्पादों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई संभावनाओं का द्वार खोलने वाली साबित हुई है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, स्थानीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन तथा महिला स्वसहायता समूहों की आर्थिक मजबूती को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी सोच का परिणाम है कि बिहान से जुड़ी महिलाएं आज केवल उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के व्यापारिक आयोजनों में अपने उत्पादों का सफल प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ा रही हैं। इससे स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि तथा उन्हें स्थायी बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है।बायोफैच इंडिया-2026 प्राकृतिक एवं जैविक उत्पादों तथा मोटे अनाज आधारित कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने वाला विश्वस्तरीय मंच है, जहां देश-विदेश के आयातक, निर्यातक, विपणन विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि और व्यापारिक संस्थाएं एकत्रित होकर जैविक उत्पादों के व्यापार एवं निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करते हैं। ऐसे प्रतिष्ठित मंच पर छत्तीसगढ़ के उत्पादों की प्रभावी उपस्थिति राज्य के किसानों, महिला स्वसहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों के लिए नए व्यापारिक अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी।जिला मिशन प्रबंधक श्री दुर्गाशंकर सोनी ने बताया कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में जैविक विष्णुभोग धान एवं प्राकृतिक शहद के साथ-साथ सूरन, कटहल तथा अन्य जैविक सब्जियों के उत्पादन को भी लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। इन उत्पादों की गुणवत्ता, प्राकृतिक उत्पादन पद्धति तथा विशिष्ट स्वाद के कारण राष्ट्रीय बाजार में इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिला स्वसहायता समूह आर्थिक रूप से सशक्त होकर आत्मनिर्भर बनने के साथ लखपति दीदी अभियान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उत्पादों की भागीदारी से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है और उनके लिए बेहतर विपणन के अवसर भी उपलब्ध हो रहे हैं।छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा है कि राज्य के प्रत्येक जिले की विशिष्ट कृषि एवं वन आधारित उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार से जोड़ा जाए, जिससे किसानों, महिला स्वसहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों की आय में सतत वृद्धि हो तथा स्थानीय उत्पादों को उनकी गुणवत्ता के अनुरूप उचित पहचान और मूल्य प्राप्त हो। बायोफैच इंडिया-2026 में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के जैविक उत्पादों की प्रभावशाली उपस्थिति इसी दूरदर्शी सोच और ग्रामीण विकास के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।सम्मेलन में राज्य स्तर से राज्य कार्यक्रम प्रबंधक श्री राजन सोनी, जिले से जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री अभिषेक जायसवाल तथा तिपान किसान उत्पादक संगठन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जितेन्द्र खैरवार ने सहभागिता कर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के जैविक उत्पादों का प्रभावी प्रदर्शन एवं प्रचार-प्रसार किया। उनके प्रयासों से जिले के उत्पादों को खरीदारों एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के बीच व्यापक सराहना प्राप्त हुई।


























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