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- -अनामिका महिला स्व-सहायता समूह की सफलता की मिसाल, फूलकली ने स्वरोजगार से लिखी समृद्धि की नई कहानीएमसीबी/ सेंट्रिंग प्लेट व्यवसाय से चमकी फूलकली की किस्मत, बिहान ने बनाया आत्मनिर्भरता का प्रतीकजिले के विकासखंड भरतपुर के ग्राम डोंगरीटोला की रहने वाली श्रीमती फूलकली की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि आत्मविश्वास, मेहनत और सही मार्गदर्शन का साथ मिल जाए तो सीमित संसाधनों के बीच भी सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) बिहान से जुड़कर उन्होंने न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया, बल्कि गांव की अनेक महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गईं।बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों के माध्यम से संगठित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। इस मिशन के तहत महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और व्यावसायिक रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। यही प्रयास आज हजारों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है और उनमें से एक नाम है अनामिका महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती फूलकली का।ग्राम डोंगरीटोला में 4 अक्टूबर 2019 को गठित अनामिका महिला स्व-सहायता समूह में 10 महिलाएं शामिल हैं। बिहान मिशन की विकासखंड मिशन प्रबंधन इकाई के मार्गदर्शन और सतत क्षमता विकास कार्यक्रमों ने समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का नया रास्ता दिखाया। फूलकली भी प्रारंभ से ही इस समूह से जुड़ीं। एक साधारण गृहिणी के रूप में जीवन व्यतीत करने वाली फूलकली के मन में अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना था। उन्होंने समूह की बैठकों में नियमित भाग लिया, समूह के सभी नियमों का पालन किया और आजीविका के नए अवसरों को अपनाने का संकल्प लिया।समूह को प्राप्त रिवॉल्विंग फंड से उन्होंने 15 हजार रुपये का ऋण लेकर सबसे पहले अपने परिवार की आवश्यक जरूरतों को पूरा किया। इसके बाद समूह को प्राप्त सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से 60 हजार रुपये की सहायता मिली। इस राशि ने उनके सपनों को नई दिशा दी। उन्होंने लगभग एक लाख रुपये का निवेश कर सेंट्रिंग प्लेट का व्यवसाय प्रारंभ किया। शुरुआती दौर में उन्होंने कठिन परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन अपने परिश्रम, ईमानदारी और लगन के बल पर धीरे-धीरे व्यवसाय को आगे बढ़ाया।आज फूलकली दीदी का सेंट्रिंग प्लेट व्यवसाय सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। इस कार्य से उन्हें प्रतिमाह लगभग 10 हजार रुपये की नियमित आय प्राप्त हो रही है और एक वर्ष में लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये का लाभ अर्जित कर रही हैं। इस आय से उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया, घरेलू आवश्यकताओं को सहजता से पूरा किया और भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित की है। कभी जो महिला केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, वही आज अपने परिवार की आर्थिक आधारशिला बन चुकी हैं।फूलकली की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन गई है। उनकी मेहनत और उपलब्धियों को देखकर अन्य महिलाएं भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित हो रही हैं। आज वे गांव की महिलाओं को यह संदेश दे रही हैं कि आत्मनिर्भर बनने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि मजबूत इरादों और सही दिशा में किए गए प्रयासों की आवश्यकता होती है।अनामिका महिला स्व-सहायता समूह आज ग्रामीण महिलाओं की सामूहिक शक्ति का प्रतीक बन चुका है। बिहान मिशन के सहयोग, वित्तीय सहायता और निरंतर मार्गदर्शन ने समूह की महिलाओं को आत्मविश्वास दिया है, जिससे वे अपने सपनों को साकार कर रही हैं। फूलकली ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि अवसर मिले और उसका सही उपयोग किया जाए तो ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती हैं।फूलकली की यह प्रेरणादायक यात्रा बिहान मिशन के उस उद्देश्य को साकार करती है, जिसमें प्रत्येक ग्रामीण महिला को आत्मनिर्भर, सम्मानजनक और समृद्ध जीवन जीने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। आज वे न केवल अपने परिवार की खुशहाली की आधारशिला हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए उम्मीद, आत्मविश्वास और सशक्तिकरण की सशक्त पहचान बन चुकी हैं। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन से हर सपना साकार किया जा सकता है।
- -खाद-बीज की समय पर उपलब्धता से बढ़ा उत्पादन, शासन के प्रति जताया आभारअम्बिकापुर । किसानों को खेती-किसानी के लिए समय पर ऋण उपलब्ध कराने तथा कृषि कार्यों को सुगम बनाने के उद्देश्य से संचालित किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रही है। योजना के माध्यम से किसानों को कृषि आदानों की समय पर उपलब्धता मिल रही है, जिससे वे खेती के कार्य निर्धारित समय पर कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। जिले के ग्राम पंचायत कंचनपुर निवासी किसान एवं किसान मित्र ललन राजवाड़े भी ऐसे ही लाभान्वित किसानों में शामिल हैं, जिन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ लेकर अपनी खेती को नई दिशा दी है।ललन राजवाड़े बताते हैं कि कुछ समय पहले तक खेती-किसानी करना उनके लिए आसान नहीं था। सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण कृषि कार्यों के लिए आवश्यक खाद, बीज एवं अन्य कृषि सामग्री समय पर उपलब्ध नहीं हो पाती थी। इसका सीधा प्रभाव खेती और उत्पादन पर पड़ता था। इसी दौरान वे किसान मित्र से जुड़े और उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड योजना की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने अपने नजदीकी सहकारी समिति के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड बनवाया।केसीसी बनने के बाद उन्हें खेती-किसानी के लिए आवश्यक ऋण उपलब्ध हुआ। इस राशि से उन्होंने समय पर खाद-बीज एवं अन्य कृषि सामग्री की व्यवस्था की, जिससे खेती के सभी कार्य समय पर संपादित हो सके। उनका कहना है कि अब खेती पहले की अपेक्षा अधिक व्यवस्थित ढंग से हो रही है और कृषि उत्पादन में भी सुधार देखने को मिला है।उन्होंने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड योजना के कारण खेती के लिए बार-बार आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ता। आवश्यकता के समय ऋण की सुविधा मिलने से कृषि कार्य बिना बाधा के पूरे हो जाते हैं, जिससे खेती करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गया है। इससे उन्हें आत्मविश्वास के साथ खेती करने की प्रेरणा मिली है और वे बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। किसान ललन राजवाड़े ने किसान हित में संचालित योजनाओं के लिए शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड योजना किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी है। उन्होंने कहा कि समय पर वित्तीय सहायता मिलने से किसानों को खेती में सुविधा मिलती है, जिससे उनकी आय बढ़ाने और कृषि को सुदृढ़ बनाने में मदद मिल रही है।
- -सीड बॉल के जरिए पहाड़ियों और बंजर भूमि में बढ़ेगी हरियाली, ग्रामीणों और महिलाओं की भागीदारी से बना जन-अभियानरायपुर। सीड बॉल निर्माण महाअभियान पर्यावरण संरक्षण और वनीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक जन-सहभागी पहल है। इसमें स्थानीय बीजों को मिट्टी और जैविक खाद के मिश्रण में लपेटकर छोटी-छोटी गेंदें (सीड बाल) बनाई जाती हैं, जिन्हें बारिश में खाली या बंजर जमीन पर बिखेर दिया जाता है।दंतेवाड़ा जिले को हरा-भरा बनाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने मिलकर एक दिवसीय सीड बॉल निर्माण महाअभियान आयोजित किया। अभियान में ग्रामीणों, महिला स्व-सहायता समूहों, युवाओं, विद्यार्थियों, किसानों और सामाजिक संगठनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान एक ही दिन में 1 लाख से अधिक सीड बॉल तैयार किए गए।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव के मार्गदर्शन में अभियान की कार्ययोजना तैयार की गई। कृषि विभाग ने सीड बॉल निर्माण के लिए स्थानीय जलवायु के अनुकूल मिट्टी, जैविक खाद और महुआ, इमली, हर्रा, बहेड़ा, जामुन, करंज, नीम, चार और खमार जैसी स्थानीय प्रजातियों के बीजों का चयन किया। ग्रामीणों और महिला स्व-सहायता समूहों को सीड बॉल तैयार करने का प्रशिक्षण भी दिया गया।सीड बॉल मिट्टी, जैविक खाद और बीजों से तैयार किए जाते हैं। इन्हें बारिश के मौसम में पहाड़ी, दुर्गम और बंजर क्षेत्रों में फैलाया जाता है। बारिश के पानी से बीजों को नमी मिलती है और वे प्राकृतिक रूप से अंकुरित होकर पौधों का रूप लेते हैं। इस तकनीक में गड्ढे खोदने, नियमित सिंचाई और ट्री-गार्ड की आवश्यकता नहीं होती। इससे कम लागत में बड़े क्षेत्र में हरियाली विकसित की जा सकती है।जिला प्रशासन द्वारा तैयार किए गए सीड बॉल को वन विभाग और स्थानीय समितियों के सहयोग से वन क्षेत्रों, पहाड़ियों और अनुपजाऊ भूमि में फैलाया जाएगा, इससे जिले में हरित आवरण बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी संरक्षण, भूजल संवर्धन और जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलेगा। भविष्य में इन पेड़ों से मिलने वाले लघु वनोपज से ग्रामीणों की आजीविका को भी मजबूती मिलेगी।अभियान में महिला स्व-सहायता समूहों की विशेष भूमिका रही। विद्यार्थियों, किसानों, युवाओं, जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संगठनों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। एक ही दिन में 1 लाख से अधिक सीड बॉल तैयार कर दंतेवाड़ा ने यह संदेश दिया है कि प्रशासनिक संकल्प, वैज्ञानिक तकनीक और जनभागीदारी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के बड़े लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। यह पहल आने वाले वर्षों में दंतेवाड़ा की पहाड़ियों और वन क्षेत्रों को और अधिक हरा-भरा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
- रायपुर। कृषि केवल खेतों में बीज बोकर फसल काटने का नाम नहीं है, बल्कि यह माटी के साथ सामंजस्य बिठाकर जीवन को एक नया आकार देने की साधना है। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के वनांचल में आज बदलाव की एक ऐसी ही खूबसूरत बयार बह रही है, जो पारंपरिक ढर्रे को छोड़कर आधुनिक सोच को अपनाने से मुमकिन हुई है। इस बदलाव के सूत्रधार बने हैं चिहरीपारा गांव के प्रगतिशील किसान भूपेन्द्र कुमार पुजारी, जिन्होंने अपनी लगन और सरकारी योजनाओं के सही तालमेल से आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिख दी है।*चुनौतियों का दौर और बदलाव की छटपटाहट*एक समय था जब भूपेन्द्र अपने 2.80 हेक्टेयर के खेत में केवल पारंपरिक तरीके से धान उगाते थे। साल में सिर्फ एक बार फसल लेने के कारण आमदनी इतनी सीमित थी कि परिवार का गुजारा चलाना, बच्चों की पढ़ाई और अन्य सामाजिक जरूरतें पूरी करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था। वे बदलाव की राह तलाश रहे थे, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण राह आसान नहीं थी। तभी जिला प्रशासन और कृषि विभाग की साझा कोशिशों ने उनके जीवन में प्रवेश किया। कलेक्टर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में जब कृषि, उद्यानिकी, पशुधन और मत्स्य पालन विभागों ने मिलकर काम शुरू किया, तो भूपेन्द्र को भी अपनी किस्मत बदलने का एक जरिया दिखाई दिया।*सौर सुजला और जल संरक्षण से मिली नई दिशा*भूपेन्द्र के खेत में सबसे बड़ी समस्या पानी की थी, जिसका स्थायी समाधान क्रेडा विभाग की 'सौर सुजला योजना' से हुआ। खेत में जैसे ही सोलर पंप स्थापित हुआ, सिंचाई की चिंता हमेशा के लिए दूर हो गई। सिंचाई की व्यवस्था होते ही उन्होंने मनरेगा के तहत अपने खेत में एक डबरी (छोटा तालाब) का निर्माण कराया। यह डबरी सिर्फ पानी रोकने का साधन नहीं बनी, बल्कि इसने जल संरक्षण के साथ-साथ उनके लिए मत्स्य पालन का एक बिल्कुल नया और मुनाफेदार रास्ता भी खोल दिया।*एकीकृत कृषि प्रणाली: खुशहाली का नया मंत्र*कृषि वैज्ञानिकों के तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण से सीख लेकर भूपेन्द्र ने समझ लिया कि केवल एक फसल पर निर्भर रहना घाटे का सौदा हो सकता है। उन्होंने 'समन्वित कृषि प्रणाली' (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) को अपना मूलमंत्र बनाया। उन्होंने उन्नत तरीके से धान की पैदावार शुरू करने के साथ साथ उड़द की खेती, साग-सब्जी का उत्पादन, बैकयार्ड मुर्गीपालन और डबरी में मत्स्य पालन को भी अपनी दैनिक आजीविका का हिस्सा बना लिया।इस बहुआयामी दृष्टिकोण का असर उनकी आमदनी पर जादुई ढंग से दिखाई देने लगा। आज उन्हें जहां उन्नत धान की खेती से सालाना लगभग 80 हजार रुपये की कमाई हो रही है, वहीं मत्स्य पालन से लगभग 60 हजार रुपये सीधे उनके खाते में आ रहे हैं। इसके साथ ही साग-सब्जी से 24 हजार, मुर्गीपालन से 21 हजार और उड़द की फसल से मिलने वाली 17 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि ने उनकी आर्थिक स्थिति को बेहद मजबूत कर दिया है।*एक प्रेरणा, जो पूरे अंचल को रोशन कर रही है*भूपेन्द्र कुमार पुजारी का मानना है कि विविधता ही कृषि का असली भविष्य है। जब एक किसान अपने खेत में कई तरह के उपक्रम चलाता है, तो मौसम या बाजार के जोखिम बेहद कम हो जाते हैं और आय का जरिया साल भर बना रहता है। अपनी इस शानदार सफलता और आर्थिक आजादी के लिए वे मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं।आज भूपेन्द्र की यह कहानी नारायणपुर जिले के बाकी किसानों के लिए उम्मीद का एक चमकता हुआ दीया बन चुकी है। 'आत्मा' योजना और कृषि विभाग के सहयोग से अब अंचल के अन्य किसान भी उनके खेत का भ्रमण कर रहे हैं और इस मॉडल को सीखकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। भूपेन्द्र की यह यात्रा इस बात का जीवंत प्रमाण है कि अगर किसान के पास सही दृष्टिकोण, वैज्ञानिक सोच और शासन की कल्याणकारी योजनाओं का संबल हो, तो वनांचल के खेतों में भी समृद्धि की सुनहरी फसल उगाई जा सकती है।
- रायपुर - रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त श्री संबित मिश्रा के निर्देशानुसार नगर निगम जोन 3 जोन कमिश्नर श्रीमती प्रीति सिंह के मार्गदर्शन एवं कार्यपालन अभियंता श्री ईश्वर लाल टावरे, सहायक अभियंता श्री नरेश कुमार साहू, उपअभियंता श्री अक्षय भारद्वाज, सुश्री श्रुति चतुर्वेदी की उपस्थिति में नगर निगम जोन 3 नगर निवेश विभाग की टीम द्वारा जोन 3 क्षेत्र अंतर्गत गुरू घासीदास वार्ड वार्ड क्रमांक 48 अंतर्गत काशीराम नगर गली नम्बर 1 में विगत कई वर्षों पूर्व पुराने नाली परके प्रवाह को रोकने किये गए लगभग 23 अवैध कब्जोँ को गन्दे पानी के सुगम निकास प्रबंधन एवं बारिश में जलभराव की समस्या की आशंका को दूर करने श्रमिकों की सहायता से तोड़ने एवं सफाई की बाधा दूर करने की कार्रवाई की गयी. उक्त स्थल पर नगर निगम द्वारा नाली की सफाई करवाकर सड़क एवं नाली का निर्माण जनहित में जनसुविधा की दृष्टि से शीघ्र किया जाना प्रस्तावित है.
- -परीक्षा की सभी तैयारियां समय पर पूर्ण करें : कलेक्टर डॉ. गौरव सिंहरायपुर । संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), नई दिल्ली द्वारा आयोजित सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स में सहायक कमांडेंट भर्ती परीक्षा-2026 का आयोजन 19 जुलाई 2026 को जिले के 4 परीक्षा केंद्रों में किया जाएगा। परीक्षा प्रथम पाली में प्रातः 10 बजे से 12 बजे तक तथा द्वितीय पाली में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित होगी। परीक्षा में कुल 1704 अभ्यर्थी शामिल होंगे।कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने परीक्षा की तैयारियों की समीक्षा करते हुए सभी पर्यवेक्षकों एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर पेयजल, विद्युत, बैठक व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाएं पहले से सुनिश्चित कर ली जाएं। उन्होंने सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि प्रत्येक परीक्षार्थी की प्रवेश से पूर्व फ्रिस्किंग एवं फेस ऑथेंटिकेशन की प्रक्रिया अनिवार्य रूप से पूरी की जाए।परीक्षा से संबंधित गोपनीय सामग्री का वितरण 19 जुलाई को जिला कोषालय, रायपुर से किया जाएगा। परीक्षा के संचालन हेतु डिप्टी कलेक्टर श्री नवीन ठाकुर को को - ऑर्डिनेटिंग सुपरवाइजर, डिप्टी कलेक्टर श्री उत्तम प्रसाद रजक को सहायक को - ऑर्डिनेटिंग सुपरवाइजर एवं रोजगार अधिकारी विशेष रोजगार कार्यालय श्री केदारनाथ पटेल को कंट्रोल रूम प्रभारी नियुक्त किया गया है। सभी अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे परीक्षा केंद्र पर प्रथम पाली में 9:30 बजे एवं द्वितीय पाली में 1:30 बजे तक पहुंचें, ताकि फ्रिस्किंग, फेस ऑथेंटिकेशन एवं अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं समय पर पूरी की जा सकें और उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
- बालोद। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण अंतर्गत आवास प्लस 2.0 सर्वेक्षण का कार्य जिले में सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी ने बताया कि सर्वेक्षण से प्राप्त सिस्टम जनरेटेड प्रतीक्षा सूची का जिले के सभी ग्रामों में आयोजित ग्राम सभाओं में सार्वजनिक वाचन एवं 12 मापदंडों के आधार पर सत्यापन किया गया है। वर्तमान में उक्त सूची को पात्र, अपात्र श्रेणी के साथ ग्राम पंचायत एवं जनपद पंचायत के सूचना पटल पर प्रदर्शित कर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। योजना की मार्गदर्शिका के अनुसार, यदि किसी परिवार को त्रुटिवश सूची से हटाया गया है या वरीयता क्रम में कोई विसंगति है, तो वे निर्धारित तिथि 07 अगस्त 2026 तक दावा-आपत्ति प्रस्तुत कर सकते हैं। इस तिथि के पश्चात प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। प्राप्त आपत्तियों का निराकरण जिला स्तरीय अपीलीय समिति द्वारा किया जाएगा, जिनका निर्णय अंतिम एवं सर्वमान्य होगा। अपीलीय समिति की अनुशंसा के बाद सूची में किसी भी प्रकार का बदलाव संभव नहीं होगा।
- बालोद। राज्य के शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं में प्रवेश हेतु रिक्त सीटों के लिए ऑनलाइन आवेदन 24 जुलाई 2026 आमंत्रित किए जा रहे हैं। इच्छुक अभ्यर्थी वेबसाइट cgiti.admissions.nic.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके साथ ही किसी भी प्रकार की सहायता या जानकारी के लिए अभ्यर्थी निकटतम शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था से अथवा वेबसाइट पर प्रदर्शित हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा समय-सीमा के पूर्व आवेदक अपने आवेदन पत्र में किसी भी तरह की त्रुटि एवं संस्था, व्यवसाय प्राथमिकता क्रम में सुधार कर सकते हैं।
- -5 अगस्त तक जमा किए जा सकते हैं आवेदन-विभागीय वेबसाइट http//sportsyw.cg.gov.in पर आवेदन प्रारूप उपलब्धबिलासपुर । राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए शहीद राजीव पाण्डे पुरस्कार, शहीद कौशल यादव पुरस्कार, वीर हनुमान सिंह पुरस्कार, शहीद पंकज विक्रम सम्मान, शहीद विनोद चौबे सम्मान, मुख्यमंत्री ट्रॉफी, नगद राशि, प्रेरणा निधि और डाइट मनी के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। पात्र खिलाड़ी, प्रशिक्षक एवं निर्णायक आगामी 5 अगस्त तक निर्धारित प्रारूप में अपने आवेदन जमा कर सकते हैं। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की वेबसाइट http//sportsyw.cg.gov.in पर आवेदन के प्रारूप उपलब्ध हैं।खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा प्रतिवर्ष खिलाडियों, प्रशिक्षकों एवं निर्णायकों को खेल पुरस्कार प्रदान कर राज्य खेल अलंकरण से सम्मानित किया जाता है। राज्य के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और निर्णायकों को ये पुरस्कार दिए जाते हैं। राज्य खेल अलंकरण के अंतर्गत सीनियर वर्ग के ऐसे खिलाड़ियों को शहीद राजीव पाण्डे पुरस्कार से अलंकृत किया जाता है, जिन्होंने राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में या राष्ट्रीय खेलों में पदक प्राप्त किया हो या अधिकृत अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व किया हो।इसी प्रकार जूनियर वर्ग के उन खिलाड़ियों को शहीद कौशल यादव पुरस्कार से अलंकृत किया जाता है, जिन्होंने जूनियर वर्ग के राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में पदक प्राप्त किया हो। विगत 5 वर्षों में चार बार सीनियर वर्ग में राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने वाले महिला व पुरूष खिलाड़ियों को शहीद पंकज विक्रम सम्मान से सम्मानित किया जाता है। प्रशिक्षकों एवं निर्णायकों को वीर हनुमान सिंह पुरस्कार से अलंकृत किया जाता है।खेल से जुड़े 55 वर्ष या अधिक उम्र के ऐसे व्यक्ति जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में भाग लिया हो, या राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक प्राप्त किया हो, या खेल के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवा दी हो, उन्हें शहीद विनोद चौबे सम्मान से अलंकृत किया जाता है। इसी प्रकार सीनियर व जूनियर वर्ग में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक प्राप्त दल को मुख्यमंत्री ट्रॉफी प्रदान की जाती है। इन सभी पुरस्कारों के नियम छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित किए गए हैं। नियमों के अंतर्गत पात्रता रखने वाले आवेदकों का प्रावीण्यता के आधार पर पुरस्कार के लिए चयन किया जाएगा।शहीद राजीव पाण्डे पुरस्कार हेतु 3 लाख रुपए, शहीद कौशल यादव पुरस्कार हेतु 1 लाख 50 हजार रुपए, वीर हनुमान सिंह पुरस्कार हेतु 1 लाख 50 हजार रुपए, शहीद विनोद चौबे सम्मान एवं पंकज विक्रम सम्मान हेतु 25-25 हजार रुपए के नगद पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। सीनियर एवं जूनियर वर्ग के दलीय खेलों के लिए मुख्यमंत्री ट्रॉफी प्रदान की जाएगी। इसके अंतर्गत ऐसे दलीय खेल जिनमें सदस्यों की संख्या 4 है, उन्हें सीनियर वर्ग में 2 लाख रुपए एवं जूनियर वर्ग में 1 लाख रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा। ऐसे दलीय खेल जिनमें सदस्यों की संख्या 4 से अधिक है, उनमें सीनियर वर्ग में 5 लाख रुपए तथा जूनियर वर्ग में 3 लाख रुपए का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार राशि के साथ ही मानपत्र, अलंकरण फलक, ब्लेजर एवं टाई भी प्रदान की जाएगी।खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक प्राप्त विजेताओं को प्रोत्साहनस्वरूप नगद राशि पुरस्कार अलंकरण प्रदान किया जाता है। इसके लिए वर्ष 2025-26 में (1 अप्रैल से 31 मार्च तक के 1 वर्ष) जिन खिलाड़ियों ने सब-जूनियर, जूनियर एवं सीनियर वर्ग की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक प्राप्त किया है, वे जिला कार्यालय एवं अपने खेल संघों से आवेदन फॉर्म प्राप्त कर निर्धारित तिथि तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।जिन खिलाड़ियों ने अधिकृत राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में पदक प्राप्त किया हो, या राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिनिधित्व किया हो, वे खेलवृत्ति (डाइट मनी) के लिए आवेदन कर सकते हैं। खेलवृत्ति हेतु अधिकतम आयु 19 वर्ष से अधिक नहीं होना चाहिए। खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए खेल संघों द्वारा वर्ष 2025-26 में (1 अप्रैल से 31 मार्च तक के 1 वर्ष) अर्जित की गई उपलब्धि हेतु प्रेरणा निधि के आवेदन जिला कार्यालय या खेल संचालनालय में निर्धारित तिथि तक जमा किए जा सकते हैं। खेल पुरस्कारों, नगद राशि, खेलवृत्ति एवं प्रेरणा निधि हेतु आवेदन फॉर्म संचालनालय, खेल एवं युवा कल्याण या विभाग के सभी जिला कार्यालयों एवं राज्य खेल संघों से प्राप्त किए जा सकते हैं। शहीद पंकज विक्रम सम्मान के आवेदन संघों के माध्यम से नियमानुसार निर्धारित प्रक्रिया के तहत राज्य खेल संघों की अनुसंशा सहित प्राप्त किए जाएंगे। पंकज विक्रम सम्मान के आवेदन संचालनालय एवं जिला कार्यालय में खिलाड़ियों से सीधे स्वीकार नहीं किए जाएंगे।जिला कार्यालयों या संचालनालय में राज्य खेल संघों से अनुशंसा सहित आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 5 अगस्त 2026 तक कार्यालयीन समय तक निर्धारित की गई है। आवेदन पत्रों के प्रारूप मयसूचना विभाग की वेबसाईट http//sportsyw.cg.gov.in पर उपलब्ध है। पुरस्कार संबंधी आवेदन केवल ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे। विभागीय वेबसाइट http//sportsyw.cg.gov.in पर अपलोड किए गए आवेदन ही मान्य होंगे।पुरस्कार नियमों के प्रावधानों के अनुरूप जिन खिलाड़ियों की मान्यता प्राप्त संघ द्वारा पुरस्कार के लिए अनुशंसा नहीं की गई है, पर तुलनात्मक रूप से उनकी उपलब्धि अधिक है, वे तत्संबंधी विवरण प्रस्तुत कर निर्धारित प्रारूप में अपने व्यक्तिगत विवरण की जानकारी 5 अगस्त 2026 तक कार्यालयीन समय में सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम, जी.ई. रोड, रायपुर स्थित खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संचालनालय या विभाग के जिला कार्यालयों में अपना आवेदन सीधे जमा कर सकते हैं।
- -सीएमएचओ ने आकस्मिक बैठक लेकर की हालात की समीक्षा-45 कॉम्बेट टीमों को 24×7 अलर्ट रहने के निर्देशबिलासपुर /जिले में पिछले 24 घंटे में हुई भारी बारिश के बाद कई क्षेत्रों में जलभराव और जनजीवन प्रभावित होने की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। मौसमी एवं संक्रामक बीमारियों की संभावित स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शुभा गरेवाल ने आज शाम आकस्मिक बैठक लेकर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और आपातकालीन तैयारियों की समीक्षा की।वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में सभी खंड चिकित्सा अधिकारी, शहरी स्वास्थ्य अधिकारी तथा कॉम्बेट टीम के सदस्य शामिल हुए। सीएमएचओ ने निर्देश दिए कि भारी बारिश के बाद जलभराव वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य कार्यकर्ता विशेष निगरानी रखें और जरूरतमंद लोगों को तत्काल आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराएं।बैठक में बताया गया कि जिले में दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता है। जिला एवं विकासखंड स्तर पर कुल 45 कॉम्बेट टीमें गठित की गई हैं। सभी पीएचसी प्रभारी और टीम के सदस्यों को मोबाइल फोन चालू रखते हुए किसी भी आपातकालीन स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा गया है।नगर निगम क्षेत्र में भारी बारिश से प्रभावित जोरापारा, चिंगराजपारा, चचुहिया पारा, बंधवापारा, बसंत विहार और तिफरा सहित अन्य क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें इन क्षेत्रों में सतत निगरानी रखेंगी और आवश्यकता के अनुसार स्वास्थ्य सेवाएं एवं दवाइयां उपलब्ध कराएंगी।सीएमएचओ ने सभी पेयजल स्रोतों में क्लोरीनेशन एवं ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही लोगों को संक्रमण से बचाव के उपायों के संबंध में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में सड़ी-गली सब्जी, फल, मांस और मछली का सेवन न करने के लिए लोगों को जागरूक किया जाए। ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई और नष्ट कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। दुकानदारों को खाद्य सामग्री ढंककर बेचने के निर्देश भी दिए गए हैं।सीएमएचओ ने मैदानी अमले को सतत निगरानी रखते हुए किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल नोडल अधिकारी, आईडीएसपी अथवा संबंधित टीम को मोबाइल के माध्यम से देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिलासपुर शहर के जलभराव वाले क्षेत्रों पर विशेष नजर रखी जाए और 24×7 निगरानी के साथ तत्काल कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तैयार रहे।स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे बारिश के बाद साफ पानी का उपयोग करें, भोजन एवं पेयजल की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें और बुखार, उल्टी-दस्त अथवा अन्य स्वास्थ्य समस्या होने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
- -रायपुर संभाग के चार कृषि विज्ञान केन्द्रों की वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक संपन्नरायपुर । इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर के आर्या सभागार कक्ष में चार जिलों रायपुर, गरियाबंद, धमतरी एवं महासमुंद के कृषि विज्ञान केन्द्रों की वैज्ञानिक सलाहकार समिति की 10वी बर्षिक बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. गिरिश चंदेल अपने उदबोधन में वैज्ञानिकों विभागीय अधिकारियों एवं प्रगतिशील किसानों से क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी सुझाव देने का आव्हान किया। उन्होनें कहा कि किसान वैज्ञानिक सलाह, उन्नत तकनीक तथा वैल्यु एडिशन तकनीक को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं । उन्होनें कृषि विज्ञान केन्द्रों को विश्वविद्यालय का चेहरा बताते हुए दलहन एवं तिलहन फसल का रकबा बढ़ाने पर भी निर्देश दिये।इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के निदेशक विस्तार सेवायें डॉ. एस.एस. टुटेजा ने प्राकृतिक खेती एवं फसल विविधिकरण पर अपने विचार रखें साथ ही किसान उत्पादक संगठनों और स्व सहायता समूह के सदस्यों को नवाचार एवं बाजार के अनुरूप प्रोडक्ट तैयार कर आम लोगों के बीच मार्केट लिंकेज को बढ़ावा देने की बात की जिससे किसानों को अधिक से अधिक लाभ हो सके। इस कार्यक्रम में चारों कृषि विज्ञान केन्द्रों के प्रमुखों ने अपने-अपने कार्यों का प्रस्तुतिकरण दिया एवं सुझाव मांगे। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र रायपुर की त्रैमासिक पत्रिका इंदिरा किसान मितान एवं कृषि विज्ञान केन्द्र गरियाबंद के विस्तार प्रकाशनों का भी विमोचन सम्मानीय अतिथियों के द्वारा किया गया।महासमुंद और धमतरी के कृषि महाविद्यालयों के डीन डॉ. संदीप भंडारकर और डॉ. नवनीत राणा, कृषि विभाग के संयुक्त संचालक श्री गयाराम, पशु चिकित्सा सेवाओं के संयुक्त संचालक डॉ. एस.एल. उइके, चारों जिलों के कृषि विज्ञान केन्द्रों के वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रमुख और उनकी टीम 20 से अधिक प्रगतिशील किसान और साथ ही कृषि विभाग, दूरदर्शन, ऑल इंडिया रेडियो और लीड बैंक के अधिकारी वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में शामिल हुए। उन्होंने वैज्ञानिकों के साथ अपने सुझाव साझा किए, जिसके बाद जरूरी बदलावों के साथ साल 2026-27 के लिए सभी चार कृषि विज्ञान केन्द्रों की कार्य योजनाओं को मंजूरी दी गई।
- -33 जिलों के जिला समन्वयकों एवं रिसोर्स शिक्षकों का राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण सम्पन्न-'साइंस एंड इनोवेशन फॉर सस्टेनेबिलिटी' विषय पर स्थानीय समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान विकसित करने पर जोररायपुर / विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीकॉस्ट) द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित 32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 के अंतर्गत जिला समन्वयकों एवं रिसोर्स शिक्षकों के लिए एक दिवसीय राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन शुक्रवार को रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर में किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेशभर के शिक्षकों एवं जिला समन्वयकों को राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की नई थीम, परियोजना निर्माण प्रक्रिया, वैज्ञानिक अनुसंधान पद्धति तथा मूल्यांकन प्रणाली से अवगत कराना था, ताकि अधिकाधिक विद्यार्थी स्थानीय समस्याओं पर आधारित वैज्ञानिक परियोजनाएं तैयार कर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। कार्यशाला का आयोजन प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग श्री सोनमणी बोरा तथा महानिदेशक, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद एवं रीजनल साइंस सेंटर श्री प्रशांत कविश्वर के मार्गदर्शन में किया गया।राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस देश का एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक कार्यक्रम है, जो 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों को विज्ञान एवं अनुसंधान से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थी वैज्ञानिक पद्धति अपनाते हुए स्थानीय समस्याओं की पहचान करते हैं, आंकड़ों का संग्रह एवं विश्लेषण करते हैं तथा नवाचार आधारित समाधान प्रस्तुत करते हैं। ब्लॉक, जिला एवं राज्य स्तर पर चयनित बाल वैज्ञानिक राष्ट्रीय स्तर पर अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के वैज्ञानिक 'ई' एवं राज्य समन्वयक डॉ. जे. के. राय, वैज्ञानिक 'डी' डॉ. ए. के. पाठक, वैज्ञानिक 'डी' डॉ. अमित दुबे, राज्य अकादमिक समन्वयक प्रो. (डॉ.) केशव कांत साहू तथा वनस्पति विज्ञान के वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. वी. के. कानूनगो कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी वक्ताओं ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 की थीम "साइंस एंड इनोवेशन फॉर सस्टेनेबिलिटी" की प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि आज की सबसे बड़ी आवश्यकता विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान क्षमता और नवाचार आधारित सोच विकसित करना है। उन्होंने शिक्षकों एवं जिला समन्वयकों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों को अपने आसपास की समस्याओं की वैज्ञानिक पहचान कर व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करें।कार्यशाला में राज्य समन्वयक डॉ. जे. के. राय ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 की संपूर्ण रूपरेखा, पात्रता, परियोजना निर्माण की प्रक्रिया, अनुसंधान पद्धति, दस्तावेजीकरण, प्रस्तुतीकरण एवं मूल्यांकन प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक परियोजनाएं केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहकर स्थानीय आवश्यकताओं एवं समाजोपयोगी विषयों पर आधारित होनी चाहिए, जिससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व भी विकसित हो।तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने इस वर्ष की थीम के विभिन्न उपविषयों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दीं। इनमें R5 तकनीक (Reduce, Reuse, Recover, Redesign एवं Recycle) के माध्यम से कचरा प्रबंधन, E4 मॉडल (Explore, Experiment, Enhance एवं Evolve) के जरिए ऊर्जा संरक्षण एवं नवाचार, जल संचयन, पुनर्चक्रण एवं संरक्षण, तथा खाद्य, कृषि एवं स्वास्थ्य की स्थिरता के लिए भारतीय ज्ञान प्रणालियों के उपयोग जैसे विषय शामिल रहे। विशेषज्ञों ने बताया कि इन विषयों पर विद्यार्थियों द्वारा स्थानीय समस्याओं के समाधान आधारित उत्कृष्ट वैज्ञानिक परियोजनाएं विकसित की जा सकती हैं।राज्य अकादमिक समन्वयक प्रो. (डॉ.) केशव कांत साहू ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की थीम और उसके विभिन्न उपविषयों का विस्तार से परिचय देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को केवल वैज्ञानिक जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अनुसंधान, डेटा संग्रहण, विश्लेषण एवं समाधान आधारित सोच के लिए प्रेरित करना भी आवश्यक है। उन्होंने मार्गदर्शकों को वैज्ञानिक लेखन, परियोजना प्रस्तुतीकरण तथा मूल्यांकन के मानकों से अवगत कराते हुए Mission LiFE की भावना के अनुरूप अधिकाधिक विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया।डॉ. वी. के. कानूनगो ने अपने व्याख्यान में R5 सिद्धांतों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, अपशिष्ट में कमी, पुनः उपयोग, पुनः डिज़ाइन तथा पुनर्चक्रण की अवधारणा को अपनाकर प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए दैनिक जीवन में इन सिद्धांतों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के सहायक प्राध्यापक डॉ. आयुष खरे ने ऊर्जा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एआई आधारित तकनीकों के माध्यम से ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन तथा स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों के विकास को नई दिशा मिल रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार आधारित अनुसंधान करने का आह्वान किया।वहीं, प्रो. नमिता ब्राह्मे ने ऊर्जा संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों तथा ऊर्जा दक्ष तकनीकों को सतत विकास की आधारशिला बताते हुए शिक्षकों से विद्यालय स्तर पर ऊर्जा ऑडिट, एलईडी अध्ययन, सौर कुकर एवं अन्य वैज्ञानिक परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को "एनर्जी एम्बेसडर" बनकर समाज में ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलानी चाहिए।कार्यशाला में प्रदेश के सभी 33 जिलों से जिला समन्वयकों एवं रिसोर्स शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 के सफल आयोजन तथा अधिक से अधिक बाल वैज्ञानिकों को शोध एवं नवाचार आधारित परियोजनाओं से जोड़ने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया। आगामी राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस में प्रदेशभर से चयनित बाल वैज्ञानिक अपनी शोध परियोजनाओं का प्रदर्शन करेंगे, जिनमें उत्कृष्ट प्रतिभागी राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगे। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद एवं रीजनल साइंस सेंटर के वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों की भी सक्रिय सहभागिता रही।
- -छिरहिट्टी में विशेष स्वास्थ्य शिविर से 164 ग्रामीणों को मिला निःशुल्क उपचार, विशेषज्ञ चिकित्सकों ने गांव पहुंचकर दी स्वास्थ्य सेवाएं-स्वास्थ्य विभाग की संवेदनशील पहल से बैगा आदिवासी परिवारों को घर के नजदीक मिला गुणवत्तापूर्ण उपचाररायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की प्रतिबद्धता लगातार धरातल पर दिखाई दे रही है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातीय बैगा समुदाय तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकासखंड गौरेला के दुर्गम बैगा आदिवासी बाहुल्य ग्राम छिरहिट्टी (साल्हेघोरी) में विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया तथा निःशुल्क उपचार, परामर्श एवं दवाइयां उपलब्ध कराईं। इससे दूरस्थ क्षेत्र के लोगों को अपने गांव में ही विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में कुल 164 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया गया। मौसमी बीमारियों की रोकथाम, समय पर रोगों की पहचान तथा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाए गए इस शिविर में ग्रामीणों की विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं की जांच कर आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क दवाइयों का वितरण भी किया गया, जिससे उन्हें तत्काल राहत मिली।विशेष स्वास्थ्य शिविर में हड्डी रोग विशेषज्ञ, महिला रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, मेडिसिन विशेषज्ञ सहित विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने सेवाएं प्रदान कीं। इसके साथ ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, खंड चिकित्सा अधिकारी गौरेला तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी पूरे समय उपस्थित रहकर शिविर के सफल संचालन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे।राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश का कोई भी नागरिक, चाहे वह कितने ही दूरस्थ या दुर्गम क्षेत्र में क्यों न रहता हो, स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहे। विशेष पिछड़ी जनजातियों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद लोगों तक स्वयं पहुंचकर उपचार उपलब्ध कराना ही सुशासन की वास्तविक पहचान है।स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दूरस्थ एवं विशेष पिछड़ी जनजातीय क्षेत्रों में नियमित रूप से ऐसे विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि बीमारियों की समय पर पहचान हो सके, उपचार उपलब्ध कराया जा सके तथा गंभीर मरीजों को आवश्यकतानुसार उच्च चिकित्सा संस्थानों तक रेफर किया जा सके। साथ ही ग्रामीणों को स्वच्छता, पोषण, मौसमी बीमारियों से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली के संबंध में भी जागरूक किया जा रहा है।दुर्गम बैगा अंचलों तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की पहुंच यह दर्शाती है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, समावेशी और प्रभावी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। ऐसे विशेष स्वास्थ्य शिविर न केवल लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध करा रहे हैं, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य के प्रति विश्वास और जागरूकता को भी मजबूत कर रहे हैं।
- -विशेष टीकाकरण दिवस पर राज्य में सर्वाधिक बालिकाओं को लगी एचपीवी वैक्सीन, सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम की दिशा में बड़ी उपलब्धि-स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ की प्रभावी रणनीति और जनजागरूकता अभियान से 74 विद्यालयों में चला व्यापक टीकाकरण अभियान, हजारों बालिकाओं के सुरक्षित भविष्य की रखी मजबूत नींवरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा बालिकाओं के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संचालित जनकल्याणकारी स्वास्थ्य अभियानों का सकारात्मक परिणाम अब प्रदेशभर में दिखाई देने लगा है। स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा संचालित विशेष एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण सप्ताह के अंतर्गत 17 जुलाई को आयोजित विशेष टीकाकरण दिवस पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले ने पूरे प्रदेश में सर्वाधिक एचपीवी टीकाकरण कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की। यह उपलब्धि राज्य सरकार की दूरदर्शी स्वास्थ्य नीति, प्रभावी कार्ययोजना तथा स्वास्थ्य विभाग की सुदृढ़ कार्यप्रणाली का सशक्त उदाहरण है।राज्य सरकार बेटियों के स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त भविष्य के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। एचपीवी टीकाकरण जैसी पहल भविष्य में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रत्येक पात्र बालिका तक यह सुरक्षा कवच पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है और स्वास्थ्य विभाग इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहा है।13 से 18 जुलाई तक आयोजित विशेष एचपीवी टीकाकरण सप्ताह के अंतर्गत 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की पात्र बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन लगाकर सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित करने का अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. के मार्गदर्शन में अभियान की शुरुआत विकासखंड गौरेला के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नेवसा एवं शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चुकतीपानी से की गई।राज्य स्तर से जिले को 3,893 बालिकाओं के टीकाकरण का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। विशेष टीकाकरण दिवस पर जिले के 74 विद्यालयों में चिकित्सा अधिकारियों एवं स्वास्थ्य अमले की उपस्थिति में व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान संचालित किया गया। अभियान के दौरान लगभग 809 बालिकाओं का ऑनलाइन तथा 1,100 बालिकाओं का ऑफलाइन पंजीकरण एवं टीकाकरण किया गया। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले ने राज्य में सर्वाधिक एचपीवी टीकाकरण कर नई उपलब्धि दर्ज की।अभियान की सफलता में जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के बेहतर समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अभियान के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकेश रावटे, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास श्री गोपेश मनहर सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, चिकित्सा अधिकारी, शिक्षकों तथा विद्यालय प्रबंधन का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ।स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा विद्यालय आधारित टीकाकरण अभियान के माध्यम से बालिकाओं और उनके अभिभावकों को एचपीवी संक्रमण, सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम तथा टीकाकरण के महत्व के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है। यह अभियान केवल टीकाकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि किशोरियों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और भविष्य में गंभीर बीमारियों से सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रभावी प्रयास भी है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, मातृ एवं बाल स्वास्थ्य को प्राथमिकता तथा निवारक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयासों का यह परिणाम है कि प्रदेश में स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रभावी ढंग से सफल हो रहे हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की यह उपलब्धि न केवल जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है और यह दर्शाती है कि स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ जनस्वास्थ्य की सुरक्षा एवं स्वस्थ भविष्य के निर्माण के लिए पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
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भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई की आयुक्त सुश्री सुरूचि सिंह ने शुक्रवार को निगम सभागार में शहर के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया प्रतिनिधियों के साथ परिचय एवं सीधा संवाद स्थापित करते हुए निगम की कार्यप्रणाली, विकास योजनाओं और आगामी प्राथमिकताओं पर जानकारी साझा की। इस अवसर पर आयोजित संवाद में 50 से अधिक मीडिया प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा शहर के विकास, मूलभूत सुविधाओं एवं नागरिक समस्याओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने प्रश्न रखे। आयुक्त ने सभी प्रश्नों का सरल, स्पष्ट और तथ्यपरक उत्तर देते हुए निगम की भावी कार्ययोजना से मीडिया को अवगत कराया।
आयुक्त ने कहा कि नगर निगम का उद्देश्य नागरिकों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए पेयजल, स्वच्छता, सड़क, जलनिकासी एवं जनसुविधाओं से जुड़े कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु के दौरान जहां-जहां जलभराव की स्थिति बन रही है, वहां तत्काल प्रभाव से सुधारात्मक कार्य किए जाएंगे ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने बताया कि भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) से जुड़े विभिन्न विषयों पर समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्यों को गति दी जाएगी। विशेष रूप से बीएसपी क्षेत्र की सफाई व्यवस्था, औद्योगिक क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति में सुधार तथा अन्य नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए बीएसपी प्रबंधन से नियमित चर्चा की जाएगी।आयुक्त ने कहा कि निगम कार्यालय में प्रत्येक सोमवार को प्रातः 10 से 12 जनसुनवाई के माध्यम से नागरिकों की समस्याएं सुनी जाएंगी और उनके त्वरित निराकरण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि लंबित फाइलों की समीक्षा कर विलंब के कारणों का पता लगाया जाएगा तथा सभी प्रकरणों का शीघ्र निराकरण किया जाएगा। साथ ही निगम की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए ई-ऑफिस प्रणाली को 100 प्रतिशत लागू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राजस्व वृद्धि के संबंध में उन्होंने कहा कि निगम की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए करों की समयबद्ध वसूली पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही निगम की दुकानों की पारदर्शी नीलामी कर आय में वृद्धि के प्रयास किए जाएंगे। स्वच्छता के विषय में उन्होंने बताया कि मिशन क्लीन सिटी में भिलाई को शामिल कराने के लिए आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे शासन से स्वच्छता कार्यों के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त हो सके। शहर की सफाई व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्ययोजना तैयार की जा रही है। पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से नवीन पानी टंकियों के निर्माण की योजना पर भी कार्य किया जाएगा, ताकि शहरवासियों को पर्याप्त एवं नियमित पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। इसके अलावा शहीद पार्क सेक्टर-5 के बेहतर संचालन, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) के अंतर्गत संचालित योजनाओं को गति देने तथा संजय नगर तालाब के सौंदर्यीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को भी प्राथमिकता में रखा गया है।आयुक्त ने यह भी बताया कि शहर के प्रमुख मॉलों में पार्किंग शुल्क से संबंधित विषय पर आवश्यक चर्चा कर व्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था विकसित करने की दिशा में पहल की जाएगी। संवाद के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों ने शहर के विकास, जलभराव, स्वच्छता, पेयजल, कर वसूली, पार्किंग, बीएसपी क्षेत्र की समस्याओं सहित विभिन्न जनहित के विषयों पर प्रश्न पूछे। आयुक्त ने सभी प्रश्नों का विस्तारपूर्वक उत्तर देते हुए भरोसा दिलाया कि नगर निगम पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसहभागिता के साथ शहर के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। संवाद के माध्यम से निगम और मीडिया के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा नागरिकों तक विकास कार्यों की सही जानकारी पहुंचाने पर भी विशेष जोर दिया गया। -
भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई द्वारा नागरिक सुविधाओं के विस्तार के तहत जोन-2 वैशाली नगर अंतर्गत कुरूद स्थित एसएलआरएम सेंटर के पास एप्रोच रोड पर स्ट्रीट लाइट स्थापित की गई है। इस कार्य से क्षेत्र में रात्रिकालीन आवागमन पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित एवं सुगम हो गया है।
एसएलआरएम सेंटर तक आने-जाने वाले कर्मचारियों, स्थानीय नागरिकों एवं वाहनों को अब अंधेरे की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। सड़क पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था होने से दुर्घटनाओं की संभावना भी कम होगी तथा आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा का वातावरण मजबूत होगा। नगर निगम द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आवश्यकता वाले स्थानों पर स्ट्रीट लाइट लगाने का कार्य प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है, ताकि नागरिकों को बेहतर शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। - -कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी के निर्देश पर प्रवर्तन कार्रवाई को मिली गति-किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए कठोर और रिकॉर्ड कार्रवाईरायपुर /कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ कृषि विभाग गुणवत्तापूर्ण उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, किसानों के हितों की रक्षा करने तथा कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही स्थापित करने की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रहा है।कृषि विभाग द्वारा किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने तथा नकली एवं अमानक उर्वरकों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए व्यापक अभियान चलाया जा है। उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत चालू खरीफ सीजन के दौरान विभाग द्वारा की गई प्रवर्तन कार्रवाई छत्तीसगढ़ देश के लिए मिसाल बना है। वर्ष 2025 की तुलना में कुल कार्रवाई में 10.25 गुना वृद्धि दर्ज करते हुए विभाग ने 44 से बढ़ाकर 451 मामलों में कार्रवाई की है। बता दें कि कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम के नेतृत्व में कृषि विभाग द्वारा किसानों के हितों की रक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए उर्वरकों की गुणवत्ता, भंडारण, विक्रय एवं वितरण पर राज्यभर में सघन निरीक्षण अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप अमानक उर्वरकों के विक्रय पर प्रभावी अंकुश लगा है तथा कृषि आदानों की पारदर्शी आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित हुई हैं।कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2026 में प्रवर्तन कार्रवाई के प्रत्येक क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। वहीं गड़बड़ी सख्त कार्रवाई से किसानों का भरोसा विभागों के प्रति बढ़ा है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष कि तुलना में इस खरीफ सीजन में न्यायालय में प्रस्तुत प्रकरणों की संख्या 4 से बढ़कर 56 हो गई, जबकि जब्ती की कार्रवाई 2 से बढ़कर 98 तक पहुंच गई। इसी प्रकार लाइसेंस निलंबन के मामलों में 3 से बढ़कर 97, लाइसेंस निरस्तीकरण 2 से बढ़कर 10 तथा विक्रय प्रतिबंध की कार्रवाई 33 से बढ़कर 183 हो गई। इसके अतिरिक्त पहली बार 7 एफआईआर भी दर्ज कराई गईं, जो विभाग की कड़ी निगरानी एवं शून्य सहिष्णुता की नीति को दर्शाती हैं।कृषि मंत्री श्री नेताम के नेतृत्व में विभाग ने यह सुनिश्चित किया गया है कि किसानों को केवल प्रमाणित एवं गुणवत्तापूर्ण उर्वरक ही उपलब्ध हों। विभाग द्वारा राज्यभर में नियमित निरीक्षण, नमूना परीक्षण, शिकायतों का त्वरित निराकरण तथा दोषी विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई से किसानों का विश्वास और मजबूत हुआ है।कृषि विभाग का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि कृषि आदानों की गुणवत्ता सुनिश्चित कर किसानों की आय एवं उत्पादकता बढ़ाना भी है। विभाग द्वारा नियमों का कड़ाई से पालन, सतत निगरानी तथा पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से प्रदेश में सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण कृषि वातावरण विकसित किया जा रहा है।
- -'गरीबों का आवास रोका, घोटालों को संरक्षण दिया, चर्चा से भागना विपक्ष की आदत'-आवास, कानून व्यवस्था, नक्सलवाद, धर्मांतरण, महिला सशक्तिकरण और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर सरकार का पक्ष रखारायपुर / छत्तीसगढ़ विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर हुई चर्चा के दौरान उप मुख्यमंत्री एवं गृह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह प्रदेश का पहला ऐसा विपक्ष है जो महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय सदन से पलायन करता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बहस से भागना विपक्ष की कमजोरी को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने गरीबों, किसानों, महिलाओं, युवाओं और आदिवासियों के हितों की लगातार उपेक्षा की, जबकि वर्तमान सरकार ने ढाई वर्षों में सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण को प्राथमिकता देते हुए हर क्षेत्र में ठोस परिणाम दिए हैं।गरीबों का आवास रोकने वाली थी पिछली सरकार-उप मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर पिछली कांग्रेस सरकार पर सबसे बड़ा हमला करते हुए कहा कि तत्कालीन पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव ने स्वयं कई बार मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गरीबों को आवास नहीं दिला पाने की विवशता व्यक्त की थी और इसी कारण उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा भी दिया था। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने गरीबों का आवास रोकने और उनका अधिकार छीनने का काम किया।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान मे हमारी सरकार ने सत्ता में आते ही पहली कैबिनेट की पहली बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। पिछले ढाई वर्षों में 26 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान कर आवास निर्माण को गति दी गई। पिछली सरकार द्वारा केवल पहली किस्त जारी कर अधूरे छोड़ दिए गए लगभग 8 लाख आवासों को भी पूरा कराया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि को मुख्यमंत्री आवास योजना में बदलकर 47 हजार आवास तो स्वीकृत कर दिए, लेकिन उनके लिए बजट तक नहीं रखा। वर्तमान सरकार ने उन आवासों को भी पूरा कराया। उन्होंने बताया कि ढाई वर्षों में 11 लाख प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए जा चुके हैं और शेष आवासों का निर्माण तेजी से जारी है।शराब, कोयला और पीएससी घोटालों का किया जिक्रश्री शर्मा ने कहा कि पिछली सरकार की शराब नीति स्वयं एक नीतिगत घोटाला थी, जिसके कारण कई प्रभावशाली लोगों को जेल जाना पड़ा। हमारी सरकार आते ही मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने उस पूरी भ्रष्ट व्यवस्था को चिमटे से उठाकर उखाड़ फेंकने का कार्य किया और पारदर्शी व्यवस्था लागू की।श्री शर्मा ने कहा कि कोयला घोटाले में भी ऑनलाइन व्यवस्था समाप्त कर ऑफलाइन प्रणाली लागू की गई ताकि कमीशनखोरी हो सके। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (पीएससी) भर्ती घोटाला युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय भ्रष्टाचार नीति का हिस्सा बन चुका था।सीबीआई को रोका, अब हर मामले में जांच की मांग कर रहे हैंउप मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी तब सीबीआई को छत्तीसगढ़ में प्रवेश तक नहीं दिया गया, क्योंकि बड़े-बड़े घोटालों की जांच से बचना था। आज वही लोग हर मुद्दे पर सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान आठ आईएएस और आईपीएस अधिकारी जेल गए, जबकि वर्तमान सरकार में पारदर्शी व्यवस्था के कारण ऐसी स्थिति नहीं बनी।अवैध घुसपैठियों और धर्मांतरण पर सरकार की सख्तीमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि हमारी सरकार ने अवैध घुसपैठियों के खिलाफ पहली बार ऑनलाइन शिकायत प्रणाली और टोल फ्री नंबर शुरू किया। शिकायतों के आधार पर कार्रवाई कर अवैध घुसपैठियों को चिन्हित कर डिपोर्ट भी किया गया।धर्मांतरण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि बस्तर के तत्कालीन संभागायुक्त और सुकमा के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने कांग्रेस सरकार को पत्र लिखकर बताया था कि धर्मांतरण के कारण सामाजिक सौहार्द बिगड़ रहा है और वर्ग संघर्ष जैसी स्थिति बन रही है, लेकिन उस समय सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। श्री विष्णु देव साय की सरकार कानून लेकर आई तो विपक्ष चर्चा से ही भाग गया। आज धर्मांतरण पर मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में कड़ा कानून लाकर आदिम संस्कृति को संरक्षित करने का कार्य कर रही है।विकास में कोई भेदभाव नहीं, हर विधायक के क्षेत्र में कामश्री शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कभी राजनीतिक भेदभाव नहीं किया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी विधायकों के क्षेत्रों में समान रूप से विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। उदाहरण के रूप में उन्होंने अपने विभाग की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सहित विभिन्न योजनाओं का उदाहरण देते हुए कार्य के पूरे प्रदेश में समान रूप से दिए जाने के बारे में बताया।जनकल्याणकारी योजनाएं कांग्रेस ने बंद की थींउप मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए संचालित चरण पादुका योजना जैसी आदिवासी हितैषी योजनाएं बंद कर दी थी। वहीं महिलाओं को सम्मान राशि देने का वादा कर सत्ता में आई कांग्रेस ने एक रुपया भी नहीं दिया, जबकि वर्तमान सरकार हर महीने 68 लाख महिलाओं के खाते में महतारी वंदन योजना के तहत सम्मान राशि पहुंचा रही है।पत्रकारों को भी जेल भेजा गयाउप मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने केवल अधिकारियों को ही नहीं, बल्कि जनता की आवाज उठाने वाले पत्रकारों को भी झूठे मामलों में जेल भेजा। यह उनकी तानाशाही मानसिकता का प्रमाण था।बलौदाबाजार हिंसा पर विपक्ष को घेराश्री शर्मा ने कहा कि गिरौदपुरी के निकट जैतखाम को क्षति पहुंचाने का काम बाहरी तत्वों ने किया। इसके बाद विपक्ष के विधायक श्री देवेंद्र यादव ने भिलाई में बैठक कर लोगों को आंदोलन में लेकर आये और पूरी घटना में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि सतनामी समाज शांतिप्रिय है, सतनाम को मानने वाला ऐसा कार्य कर ही नहीं सकता, किसी अपराध को पूरे समाज से जोड़ना उचित नहीं है। अपराधी केवल अपराधी होता है।पेसा कानून को हमनें जमीन पर उताराउप मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार केवल पेसा कानून बनाकर बैठ गई थी। वर्तमान सरकार ने उसके नियम बनाए, उसे सशक्त बनाया, राज्य से लेकर ग्राम स्तर तक समन्वयक नियुक्त किए और प्रशिक्षण की प्रक्रिया शुरू की, जिससे कानून का वास्तविक क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।बस्तर का विकास बस्तर के लोगों के श्रम से होगाश्री शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का स्पष्ट विजन है कि बस्तर का विकास स्थानीय संसाधनों, लघु वनोपज और वहां के युवाओं के श्रम से होगा। लोग में भ्रम फैलाकर युवाओं को भड़काने का कार्य कर रहे हैं जो गलत है और रोका जाना चाहिए।कानून व्यवस्था पर कांग्रेस को घेराउप मुख्यमंत्री ने अमलेश्वर, बठेना, ककसेदा और कुम्हारी जैसी सामूहिक हत्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस शासन में कानून व्यवस्था चरमरा गई थी। उन्होंने भिलाई में भारत माता की जय बोलने पर मलकीत सिंह की हत्या और कवर्धा में भगवा ध्वज लगाने के विवाद में हुई हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय एफआईआर तक दर्ज नहीं की जा रही थी। जनप्रतिनिधियों पर झूठे प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तारियां की गईं और उनके खिलाफ झूठे मुकदमे लगाए गए। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार हर व्यक्ति की बात सुनती है। सूरजपुर की हालिया घटना में जनता की मांग पर तुरंत सीबीआई जांच के निर्देश दिए गए।नक्सलवाद पर निर्णायक कार्रवाईश्री शर्मा ने कहा कि जिस दिन सदन में नक्सलवाद पर चर्चा हुई थी, उस दिन भी विपक्ष सदन छोड़कर चला गया। उन्होंने कहा कि झीरम घाटी जैसी घटना के दोषियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई वर्तमान सरकार ने की है। उन्होंने बताया कि बस्तर के सभी जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर नक्सल मामलों में जेलों में बंद लोगों की समीक्षा की जा रही है तथा लगभग 1300 लोगों को राहत देने की प्रक्रिया चल रही है।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2018 से 2023 के बीच राज्य को 16 नई बटालियन दी थीं। संसाधन और तकनीक सब उपलब्ध थे, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव था। यदि प्रयास किए जाते तो नक्सलवाद पहले ही समाप्त हो सकता था। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन और राज्य सरकार के दृढ़ संकल्प से नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिली है। अब सुरक्षा शिविरों को 'शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा' के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां स्कूल, आंगनबाड़ी, अस्पताल और अन्य जनसुविधाएं विकसित होंगी।समर्पण की नीति बनी बड़ी सफलताउप मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने कभी फोन पर बातचीत कर नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के प्रयासों का मजाक उड़ाया था, आज उसी नीति के तहत फोन पर बात करके सीसी मेम्बर से लेकर एसीएम स्तर के नक्सलियों का पुनर्वास कराया गया है, मैंने स्वयं कई नक्सलियों से बात की और मुख्यधारा में लेकर आये। हमारी नीति की सफलता इसी से साबित होती है कि जितने नक्सली मारे गए हैं, उससे चार गुना अधिक लोगों ने हथियार छोड़कर पुनर्वास का रास्ता अपनाया है।एनडीपीएस मामलों में पहली बार संपत्ति कुर्कश्री शर्मा ने कहा कि सरकार ने नशे के खिलाफ भी अभूतपूर्व अभियान चलाया है। एनडीपीएस मामलों में पहली बार सफेमा कानून के तहत आरोपियों की संपत्तियां अटैच कर आर्थिक रूप से भी कार्रवाई की जा रही है।हम समस्याओं की राजनीति नहीं, समाधान की राजनीति करते हैंअपने संबोधन के समापन में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि वर्तमान सरकार केवल आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति नहीं करती, बल्कि हर समस्या का समाधान खोजने में विश्वास रखती है। गरीबों को आवास, महिलाओं को सम्मान राशि, आदिवासियों का विकास, पारदर्शी प्रशासन, मजबूत कानून व्यवस्था और नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई इन्हीं उपलब्धियों के कारण प्रदेश की जनता का विश्वास सरकार के साथ लगातार मजबूत हो रहा है। file photo
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- कलेक्टर ने जिला स्वास्थ्य समिति की ली बैठक
- हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की नियमित मॉनिटरिंग एवं समय पर उपचार सुनिश्चित करने के दिए निर्देश
- ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग के पश्चात चिन्हांकित 16 मरीजों का चल रहा नि:शुल्क उपचार
- चिरायु योजना के तहत 15 बच्चों का हृदय रोग संबंधी बीमारियों का हुआ नि:शुल्क सफलतापूर्वक ऑपरेशन, 33 बच्चों का लिया जा रहा नियमित फॉलोअप
राजनांदगांव । कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक लेकर स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिले में बाल एवं मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए समर्पित एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें। स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए सक्रियता एवं ईमानदारी से कार्य करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि जिले में किसी भी गर्भवती महिला एवं नवजात शिशु की मृत्यु न हो, इसके लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं। कलेक्टर ने उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण एवं सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग अनिवार्य रूप से की जाए तथा इस कार्य में तेजी लाई जाए। उन्होंने गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी, आवश्यक दवाइयों एवं अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। साथ ही मोबाइल के माध्यम से प्रतिदिन उनके स्वास्थ्य की मॉनिटरिंग कर समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि जिले में चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। पिछले वर्ष इसी समय मातृ मृत्यु 5 हुई थी जबकि इस वर्ष 2 मातृ मृत्यु है। इसी तरह पिछले वर्ष 53 शिशु मृत्यु हुई थी जो इस वर्ष घटकर 44 हुई है। इस विशेष अभियान से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आई है।
कलेक्टर ने एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान की समीक्षा करते हुए इसे तेज गति से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक 4 हजार 887 किशोरी बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण किया जा चुका है। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग से समन्वय स्थापित कर स्कूलवार रोस्टर तैयार करने तथा इस माह के भीतर निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत टीकाकरण पूर्ण करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने जिले में चिन्हांकित ब्रेस्ट कैंसर मरीजों के उपचार एवं स्क्रीनिंग की जानकारी लेते हुए मरीजों के परिजनों से नियमित फॉलोअप करने तथा स्वास्थ्य में सुधार की सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए। 1826 ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग के पश्चात लक्षण की पहचान होने पर 16 मरीजों को तत्काल ईलाज के लिए रेफर किया गया। वर्तमान में बालको कैंसर हॉस्पिटल में नि:शुल्क उपचार चल रहा है और मरीजों के परिजनों से नियमित फालोअप लिया जा रहा है।
कलेक्टर ने चिरायु योजना के अंतर्गत चिन्हांकित बच्चों के उपचार की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने बच्चों का नियमित फॉलोअप सुनिश्चित करने को कहा, ताकि बच्चों को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध हो सके। चिरायु योजना के तहत 48 बच्चों का चिन्हांकन किया गया। जिसमें से 15 बच्चों का हृदय रोग संबंधी बीमारियों का नि:शुल्क सफलतापूर्वक ऑपरेशन हो गया है तथा 33 बच्चों का चिरायु टीम द्वारा नियमित फॉलोअप लिया जा रहा है। उन्होंने जिले के सभी चिकित्सालयों में साफ-सफाई एवं स्वच्छता व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में बेहतर हाइजीन बनाए रखना आवश्यक है, जिससे मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सके।
कलेक्टर ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत संयुक्त संविदा भर्ती प्रक्रिया के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ एक माह के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यक मानव संसाधन की उपलब्धता से स्वास्थ्य सेवाओं का प्रभावी विस्तार होगा तथा इसका लाभ जिले के नागरिकों को मिलेगा। कलेक्टर ने टीबी एवं कुष्ठ रोग की स्क्रीनिंग बढ़ाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोगों की जांच कर मरीजों की समय पर पहचान सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें शीघ्र उपचार उपलब्ध कराया जा सके और इन बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो। उन्होंने सभी राष्ट्रीय कार्यक्रम की समीक्षा की एवं आवश्यक निर्देश दिए। इस अवसर पर सीईओ जिला पंचायत श्री दुर्गा प्रसाद अधिकारी, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती शीतल बंसल, संयुक्त संचालक मेडिकल कालेज डॉ. अतुल देशकर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरत्न, सिविल सर्जन डॉ. महेन्द्र प्रसाद एवं स्वास्थ्य विभाग के समस्त बीएमओ, बीपीएम, सलाहकार उपस्थित थे। -
बिलासपुर /शासकीय आईटीआई नेवरा में व्यवसाय कोपा तथा शासकीय आईटीआई कोटा में व्यवसाय कोपा, स्टेनोग्राफर हिन्दी, फिटर एवं इलेक्ट्रिशयन के रिक्त सीटों पर प्रवेश के लिए पुनः 24 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन पंजीयन कर आवेदन कर सकते हैं। अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट https://cgiti.admissions.nic.
in पर जाकर निर्धारित अवधि में पंजीयन कर सकते हैं। जो अभ्यर्थी पूर्व से पंजीकृत हैं और अगले चरण (राउंड) में भाग लेना चाहते हैं, वे अपनी लोगिन आईडी एवं पासवर्ड के माध्यम से लॉगिन कर कोनसेंट प्रदान करते हुए निर्धारित शुल्क का भुगतान कर सकते हैं। आवश्यकता होने पर अभ्यर्थी च्वाईस फिलिंग में संशोधन अथवा परिवर्तन भी कर सकेंगे। अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी संबंधित आईटीआई संस्थान अथवा वेबसाइट पर उपलब्ध हेल्पलाइन के माध्यम से संपर्क कर मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। -
- जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश
बिलासपुर /जिले में लगातार हो रही बारिश और कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने आज की सभी बैठकें निरस्त कर दी । उन्होंने सभी अधिकारियों को फील्ड में रहकर स्थिति की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर ने कहा कि कई स्थानों से 3 से 4 फीट तक पानी भरने की सूचना प्राप्त हो रही है। ऐसे क्षेत्रों में लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। नगर निगम और जनपद पंचायत के अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार भ्रमण कर स्थिति का जायजा लें। उन्होंने संबंधित वर्क्स विभाग के अधिकारियों को सड़क, नदी और नालों की स्थिति का निरीक्षण करने तथा पानी के बहाव का आकलन करने के निर्देश दिए। जहां बैरिकेडिंग अथवा अन्य स्थानीय व्यवस्थाओं की आवश्यकता हो, वहां तत्काल आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। कलेक्टर ने कहा कि लगातार बारिश की संभावना को देखते हुए सभी अधिकारी जरूरतमंद लोगों के संपर्क में रहें और उन्हें हरसंभव सहयोग प्रदान करें। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से भी लगातार संपर्क और समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। -
-कच्चे मकान क्षतिग्रस्त होने पर आरबीसी 6(4) के तहत तत्काल प्रकरण बनाकर राहत दिलाने कहा
बिलासपुर /जिले में लगातार हो रही भारी बारिश को देखते हुए कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को पूरी सतर्कता और तत्परता के साथ राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। भारी बारिश के कारण जिले में कई नदी-नाले उफान पर हैं और निचली बस्तियों में जलभराव की स्थिति निर्मित हुई है। कुछ स्थानों पर कच्चे मकानों के क्षतिग्रस्त होने की भी जानकारी मिली है।
कलेक्टर श्री अग्रवाल ने राजस्व और निगम अमले को निर्देशित किया है कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल पहुंचकर स्थिति का सर्वे करें। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनके आरबीसी 6(4) के तहत तत्काल प्रकरण तैयार किए जाएं, ताकि नियमानुसार पात्र प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सर्वे और राहत संबंधी कार्रवाई में किसी भी प्रकार की देरी न हो।
कलेक्टर ने सभी राजस्व अधिकारियों और मैदानी अमले को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि नदी-नालों के जलस्तर, जलभराव वाले क्षेत्रों और निचली बस्तियों की स्थिति पर विशेष नजर रखी जाए। आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई तत्काल की जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल जिला प्रशासन को दी जाए और राहत एवं बचाव कार्य में सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें।
जिला प्रशासन की आम नागरिकों से अपील
जिला कलेक्टर संजय अग्रवाल ने आम नागरिकों से अपील की है कि भारी बारिश के दौरान नदी, नाले, रपटों और जलभराव वाले स्थानों के पास जाने से बचें। उफनते नदी-नालों को पार करने का प्रयास न करें। बच्चों को विशेष रूप से ऐसे स्थानों से दूर रखें। पुल-पुलियों अथवा रपटों पर पानी बहने की स्थिति में किसी भी प्रकार का जोखिम न लें। जर्जर अथवा क्षतिग्रस्त मकानों में निवास न करें। यदि किसी परिवार का मकान क्षतिग्रस्त हुआ है अथवा किसी क्षेत्र में जलभराव की स्थिति है, तो तत्काल स्थानीय प्रशासन अथवा राजस्व अमले को सूचना दें। जिला प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे कर नियमानुसार राहत की कार्रवाई की जा रही है। कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने कहा है कि भारी बारिश के दौरान आमजन की सुरक्षा जिला प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और आवश्यकता के अनुसार राहत एवं बचाव के सभी आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं। -
-जल भराव से निपटने बनेगा स्थायी एक्शन प्लान
-बाढ़ पीड़ित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने के निर्देश
बिलासपुर /लगातार हो रही बारिश के मद्देनजर कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल एवं एसएसपी श्री रजनेश सिंह ने पुलिस, प्रशासनिक एवं नगर निगम के अधिकारियों के साथ शहर के जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान नगर निगम आयुक्त श्री प्रकाश कुमार सर्वे तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संदीप अग्रवाल भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने विजयापुरम, बंधवापारा, तोरवा, रेलवे कॉलोनी सहित अन्य क्षेत्रों का जायजा लेकर जल निकासी व्यवस्था की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने पीड़ित परिवारों से चर्चा कर उन्हें दिलासा दिया कि प्रशासन इस मुश्किल घड़ी में उनके साथ है। उन्हें हर संभव सुरक्षा और सहायता दी जाएगी।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शहर के सभी नालों और नालियों की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि वर्षा का पानी बिना किसी बाधा के निकल सके। उन्होंने कहा कि जहां आवश्यकता हो, वहां नालों का चौड़ीकरण कराया जाए तथा नालों के मोड़ों पर जल निकासी में बाधा बन रहे अतिक्रमणों को प्राथमिकता के आधार पर हटाने की कार्रवाई की जाए। कलेक्टर श्री अग्रवाल ने जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल निकासी तंत्र का वैज्ञानिक अध्ययन कर ऐसे उपाय किए जाएं, जिससे भविष्य में शहर में जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो और नागरिकों को राहत मिल सके। निरीक्षण के दौरान बंधवापारा क्षेत्र में जलभराव की गंभीर स्थिति को देखते हुए कलेक्टर ने वहां निवासरत लगभग 55 परिवारों को एहतियातन सेंट्रल लाइब्रेरी के समीप स्थित सामुदायिक भवन में आज रात सुरक्षित रूप से शिफ्ट करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रभावित परिवारों के लिए भोजन, पेयजल, बिजली, शौचालय सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भारी बारिश की संभावना को देखते हुए राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी रखें। नगर निगम, राजस्व, पुलिस तथा अन्य संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखें। उन्होंने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक और पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। - जिला एवं विकासखंड स्तर पर कॉम्बेट टीम से तत्काल संपर्क की सुविधाबिलासपुर / भारी बारिश के मद्देनजर मौसमी बीमारियों की रोकथाम और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने स्वास्थ्य विभाग ने आपातकालीन संपर्क नंबर जारी किए हैं। जिले में किसी भी विशेष आपातकालीन स्थिति अथवा स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकता पर नागरिक जिला एवं विकासखंड स्तर की कॉम्बेट टीम से संपर्क कर सकते हैं।जिला सर्विलेंस अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार तिवारी से 8770664365 पर संपर्क किया जा सकता है। बिलासपुर शहर के लिए खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. रक्षित जोगी का मोबाइल नंबर 9009727934 जारी किया गया है। इसी प्रकार बिल्हा विकासखंड के खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्रीकेश गुप्ता (9009731426), कोटा के डॉ. निखिलेश गुप्ता (9770146540), मस्तूरी के डॉ. अनिल कुमार (9827505957) तथा तखतपुर के डॉ. उमेश साहू (9407728300) से संपर्क किया जा सकता है।शहरी स्तर पर शहरी कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. टार्ज़न आदिले का मोबाइल नंबर 7241133198 तथा जिला स्तर पर डिस्ट्रिक्ट एपिडेमियोलॉजिस्ट श्री पंकज सिंह का मोबाइल नंबर 7587038622 जारी किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि भारी बारिश के दौरान बुखार, उल्टी-दस्त अथवा अन्य मौसमी बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करें और समय पर उपचार लें।
- -अध्यक्ष अनुराग सिंह देव एवं आयुक्त श्री अवनीश कुमार शरण ने निर्माण ठेकेदारों के साथ की समीक्षा बैठकरायपुर। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, समयबद्ध क्रियान्वयन तथा ठेकेदारों की समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव एवं आयुक्त श्री अवनीश कुमार शरण की अध्यक्षता में निर्माण ठेकेदारों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों से 50 से अधिक निर्माण ठेकेदारों ने भाग लिया।बैठक को संबोधित करते हुए अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने कहा कि पिछले डेढ़ वर्षों से मंडल द्वारा सभी निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा कर गुणवत्ता एवं प्रगति सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के नेतृत्व में मंडल के कार्यक्षेत्र का विस्तार करते हुए आवास निर्माण के साथ-साथ नगर विकास, रि-डेवलपमेंट, सड़क, पुल-पुलिया सहित अधोसंरचना विकास की महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी भी मंडल को सौंपी है।उन्होंने कहा कि निर्माण एजेंसियों एवं ठेकेदारों की भागीदारी इन योजनाओं की सफलता का महत्वपूर्ण आधार है। मंडल इन-हाउस, पीपीपी मॉडल तथा बीओटी के माध्यम से विभिन्न परियोजनाओं का प्रभावी संचालन कर रहा है और ठेकेदार मंडल की विकास यात्रा के अभिन्न सहयोगी हैं।अध्यक्ष श्री सिंह देव ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि हितग्राहियों के लिए बनाए जाने वाले प्रत्येक घर का निर्माण उसी गुणवत्ता और संवेदनशीलता के साथ होना चाहिए, जैसी गुणवत्ता कोई व्यक्ति अपने स्वयं के घर के निर्माण में सुनिश्चित करता है।बैठक में आयुक्त श्री अवनीश कुमार शरण ने कहा कि समीक्षा बैठक का मुख्य उद्देश्य तीन महत्वपूर्ण विषयोंकृनिर्माण कार्यों की गुणवत्ता, समय-सीमा में कार्य पूर्ण करना तथा ठेकेदारों के देयकों का समयबद्ध भुगतानकृपर प्रभावी कार्ययोजना तैयार करना है। उन्होंने कहा कि सभी अभियंताओं एवं ठेकेदारों की सामूहिक जिम्मेदारी है कि आबंटित कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तथा तय समय-सीमा में पूरे किए जाएं। कार्यस्थलों पर आने वाली वास्तविक समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर मुख्यालय से भी तत्काल मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।आयुक्त श्री शरण ने बताया कि बैठक के दौरान ठेकेदारों द्वारा भूमि चयन, ले-आउट प्लान, प्राक्कलन तैयार करने एवं निविदा प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। इन सुझावों के परीक्षण एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए सभी अपर आयुक्तों, उपायुक्तों एवं कार्यपालन अभियंताओं को निर्देश जारी किए गए हैं।उन्होंने लेखा एवं तकनीकी शाखा के अधिकारियों को ठेकेदारों के सभी प्रकार के देयकों के त्वरित भुगतान हेतु चेकलिस्ट आधारित प्रणाली अपनाने तथा भुगतान प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने के निर्देश भी दिए। बैठक में मंडल की आगामी अधोसंरचना परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, निर्माण गुणवत्ता में निरंतर सुधार तथा निर्माण एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
















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