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नयी दिल्ली. भारत चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में एक पसंदीदा साझेदार के तौर पर उभर रहा है, जो सहयोगी देशों के साथ अपनी प्रौद्योगिकी, संस्थागत अनुभव और शानदार पद्धतियां साझा कर रहा है। आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को यह बात कही। सूत्रों ने बताया कि भारत और इंडोनेशिया चुनाव प्रबंधन और विशिष्ट रूप से निर्मित इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के निर्यात को लेकर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने वाले हैं। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े लोकतंत्र इंडोनेशिया की आबादी लगभग 28.8 करोड़ है। उसने अपनी चुनाव प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए चुनाव प्रौद्योगिकी, प्रबंधन विशेषज्ञता और संस्थागत सहयोग के वास्ते भारत से संपर्क किया है। एक अधिकारी ने कहा कि जब दुनियाभर के लोकतांत्रिक देश चुनाव से जुड़ी भरोसेमंद विशेषज्ञता की तलाश कर रहे हैं, तो भारत उनकी पहली पसंद बनकर उभरा है। उन्होंने इसके उदाहरण के तौर पर भारत से ईवीएम हासिल करने की इंडोनेशिया की इच्छा का जिक्र किया। अधिकारी के मुताबिक, भारत का चुनाव मॉडल भूटान, नेपाल और नामीबिया से लेकर इंडोनेशिया तक एक वैश्विक मानक बन गया है। उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चिली, फिजी, मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका समेत 28 देशों की चुनाव प्रबंधन संस्थाओं और तीन अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग समझौते किए हैं। अधिकारी के अनुसार, भारत और इंडोनेशिया के बीच होने वाला समझौता चुनाव प्रौद्योगिकी, मानव संसाधन विकास, क्षमता निर्माण और शानदार पद्धतियों के आदान-प्रदान में सहयोग को बढ़ावा देगा। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के अधिकारियों ने भारतीय ईवीएम की डिजाइन, चुनाव निगरानी प्रणाली, मतदाता जागरूकता पहलों और लोकतांत्रिक शासन संबंधी डिजिटल टूल के अध्ययन के लिए पहले ही एक-दूसरे के देश का दौरा किया है। अधिकारियों ने कहा कि आज भारत की विशेषज्ञता केवल चुनाव कराने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह दुनियाभर में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में भी मदद कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय ईवीएम ने अपनी विश्वसनीयता, सुरक्षा और इतने बड़े पैमाने पर चुनावों को कुशलतापूर्वक आयोजित करने की क्षमता के लिए वैश्विक स्तर पर पहचान हासिल की है। अधिकारियों के मुताबिक, भूटान, भारत की तकनीकी मदद से अपनी विशिष्ट जरूरतों को पूरी करने के लिए निर्मित भारतीय ईवीएम को अपनाने वाला पहला देश था। उन्होंने बताया कि नेपाल को भी प्रायोगिक तौर पर इस्तेमाल के लिए विशिष्ट रूप से निर्मित ईवीएम और संस्थागत सहयोग प्रदान किया गया। अधिकारियों के अनुसार, नामीबिया में नयी दिल्ली ने पहली व्यावसायिक सफलता हासिल की, जहां आम चुनावों में भारत में बनी ईवीएम का इस्तेमाल किया गया और बाद में भारतीय वीवीपैट प्रणाली को भी अपनाया गया। अधिकारी ने बताया कि भारत का योगदान सिर्फ ईवीएम तक सीमित नहीं है, क्योंकि ईसीआई ने मेडागास्कर, म्यांमा, कंबोडिया, फिजी, भूटान, सिएरा लियोन और मंगोलिया जैसे देशों में चुनावों के लिए अमिट स्याही उपलब्ध कराई है, जिससे चुनावों की निष्पक्षता बनाए रखने में एक भरोसेमंद साथी के तौर पर देश की साख और मजबूत हुई है।
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नयी दिल्ली. रेल मंत्रालय ने देश भर के विभिन्न रेलवे जोन में संरक्षा को मजबूत करने और कार्य कुशलता को बेहतर बनाने के लिए 4,098 तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती को मंजूरी दी है। अधिकारियों ने बताया कि मंत्रालय ने 35 तकनीकी श्रेणियों में रिक्तियों को भरने का फैसला किया है। इनमें से कई पद संचालन संरक्षा के लिए बहुत जरूरी हैं, जैसे कनिष्ठ अभियंता, डिपो सामग्री अधीक्षक और रसायन व धातुकर्म सहायक। हाल ही में मंत्रालय ने सभी रेलवे जोन के महाप्रबंधकों को एक परिपत्र भेजा। इसमें कहा गया कि जोन की ओर से आतंरिक मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) के जरिए इंगित की गई रिक्तियों का आकलन किया गया है और इसी आकलन के आधार पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है। जोन की ओर से पहचानी गई सबसे अधिक रिक्तियां 'परमानेंट वे'(पटरी के रखरखाव) श्रेणी में 845 हैं, इसके बाद कार्यशाला में 470 और 'कैरेज एंड वैगन' में 450 रिक्तियां हैं। मंत्रालय ने रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी), बेंगलुरु के अध्यक्ष के साथ सलाह-मशविरा करके एक समय-सीमा तय की है, जिसके अनुसार नोडल आरआरबी 21 जुलाई, 2026 से केंद्रीयकृत रोजगार अधिसूचना (सीईएन) जारी करेंगे। इससे पहले, मंत्रालय की मंजूरी के बाद 6,565 तकनीकी पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की जा चुकी थी। इसमें सिग्नल तकनीशियन ग्रेड-1 के लिए 323 पद और तकनीशियन ग्रेड-3I के लिए 6,242 पद शामिल थे। रेलवे के कई कर्मचारी संघों ने संरक्षा से जुड़ी अहम श्रेणी में रिक्तियों को भरने के मंत्रालय के निर्णय पर खुशी जताई है। उनका कहना है कि इससे कार्य कुशलता बेहतर होगी और मौजूदा कर्मचारियों पर काम का बोझ कम होगा।
- मुंबई/पुणे. महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे सहित कई हिस्सों में सोमवार को हुई मूसलाधार बारिश से जनजीवन और यातायात व्यवस्था पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई। पुणे जिले में सोमवार को हुई भारी बारिश के कारण भूस्खलन और दीवार गिरने से एक ही परिवार के तीन सदस्यों सहित चार लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग बारिश से संबंधित अलग-अलग घटनाओं में बह गए। वहीं, 500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। मुंबई-पुणे क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण दोनों शहरों के बीच 94 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे सहित रेल और सड़क यातायात ठप हो गया। महानगर और उसके आसपास के इलाकों में हुई इस भारी बारिश के कारण सड़कें जलमग्न हो गईं और भारी संख्या में पेड़ उखड़ गए। इसके साथ ही, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर हाल ही में शुरू हुए 'मिसिंग लिंक' खंड पर भी वाहनों की रफ्तार थम गई।भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन के बाद मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के 'मिसिंग लिंक' बाइपास खंड के मुंबई की ओर जाने वाले मार्ग को 18 घंटे से अधिक समय तक बंद रहने के बाद सोमवार रात यातायात के लिए फिर से खोल दिया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। महाराष्ट्र राज्य पथ विकास निगम (एमएसआरडीसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का सुरक्षा निरीक्षण पूरा होने के बाद रात 10 बजकर 10 मिनट पर यातायात बहाल कर दिया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा जारी 'रेड अलर्ट' के बाद एहतियात के तौर पर सोमवार को मुंबई के सभी स्कूल और कॉलेज बंद रहे। महाराष्ट्र सरकार ने निजी प्रतिष्ठानों को भी सलाह दी है कि वे जहां तक संभव हो कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दें। इसके साथ ही, गैर-आवश्यक सरकारी और अर्ध-सरकारी कार्यालयों के कर्मचारियों के लिए आधे दिन के अवकाश की घोषणा की गई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की रिपोर्ट के अनुसार, सुबह आठ बजे से शाम छह बजे के बीच शहर में औसतन 28.2 मिलीमीटर (मिमी) बारिश हुई, जबकि पूर्वी और पश्चिमी उपनगरों में क्रमशः 61.75 मिमी और 65.45 मिमी बारिश दर्ज की गई। भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन की वजह से अधिकारियों को मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे को बंद करना पड़ा और कुछ खंडों पर रेलवे परिचालन को निलंबित करना पड़ा। सड़क और रेल यातायात बाधित होने के बाद जिला प्रशासन ने अभियान चलाकर जलभराव वाले इलाकों से 30 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला और 270 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया।पुणे जिला प्रशासन के अनुसार, जिले के 27 राजस्व क्षेत्रों में 65 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई, जिसमें मावल में सबसे अधिक 237.3 मिमी बारिश हुई। अधिकारियों ने बताया कि मावल के तलेगांव इलाके में दमकल विभाग ने एक कंपनी की बस में फंसे 30 कर्मचारियों को बचाया, जबकि एहतियात के तौर पर ताजे गांव के 250 निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। इसके अलावा, हवेली तहसील के भवादी गांव से पांच परिवारों के करीब दो दर्जन लोगों को निकाला गया।अधिकारियों ने बताया कि पुणे जिले की मावल तहसील के पाटन गांव में भूस्खलन के कारण एक घर के मलबे में दब जाने से दो लोगों की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि पुणे की खेड़ तहसील में बाढ़ की चपेट में आने से एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई। महाराष्ट्र के आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि पिछले तीन से चार दिनों में बारिश से जुड़ी घटनाओं में 13 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि अगले दो दिनों के लिए भारी बारिश का 'रेड' अलर्ट जारी किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि ठाणे शहर में उखड़े हुए एक विशाल पेड़ को हटाने के दौरान एक दमकलकर्मी घायल हो गया, जबकि अलग-अलग घटनाओं में एक बड़ा होर्डिंग और दो दीवारें गिर गईं।मुंबई में सोमवार को हवा की रफ्तार करीब 90 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई, जो मंगलवार के अनुमानित 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे से काफी अधिक थी। तेज हवाओं और बारिश के कारण शहर में पेड़ और उनकी शाखाएं गिरने की 291 घटनाएं दर्ज की गईं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मुंबई और पड़ोसी ठाणे तथा रायगढ़ जिलों के लिए 'रेड' अलर्ट जारी किया है, जिसमें तेज हवाओं के साथ भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान किया गया है और लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने को कहा गया है। अधिकारियों ने बताया कि कर्जत-लोनावला भोर घाट खंड में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन के बाद सोमवार तड़के व्यस्त मुंबई-पुणे मार्ग पर ट्रेन सेवाएं स्थगित कर दी गईं। उन्होंने बताया कि मध्य रेलवे ने रायगढ़ जिले में कर्जत और खोपोली के बीच भी लोकल ट्रेन सेवाओं को परिचालन निलंबित कर दिया, क्योंकि भारी बारिश के कारण लौजी और दोलावली स्टेशनों के बीच पटरियों के नीचे की गिट्टी बह गई थी। पालघर जिले के कुछ हिस्सों में सुबह नौ बजे तक महज दो घंटे में करीब 300 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिससे स्थिति और खराब हो गई। अधिकारियों के अनुसार, भारी बारिश और गंभीर जलभराव ने पश्चिम रेलवे (डब्ल्यूआर) के परिचालन को भी ठप कर दिया, जिससे मुंबई और दक्षिण गुजरात के विभिन्न स्टेशनों पर 20 से अधिक लंबी दूरी की ट्रेनें फंसी रहीं। पश्चिम रेलवे के एक प्रवक्ता ने बताया कि भारी बारिश, जलभराव और भूस्खलन के कारण 40 से अधिक सेवाएं प्रभावित हुईं, जिनमें से कम से कम आठ ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया, 10 को रद्द कर दिया गया और कई अन्य के मार्ग बदल दिए गए या उनकी यात्रा गंतव्य से पहले ही समाप्त कर दी गई। अधिकारियों ने बताया कि महानगर में खराब मौसम के चलते सोमवार को दोपहर 3:30 बजे तक मुंबई हवाई अड्डे पर आने वाली पांच उड़ानों का मार्ग परिवर्तित कर उन्हें अन्य हवाई अड्डों पर भेजा गया। देश की वित्तीय राजधानी और उसके आस-पास के क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी है, जिससे सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।भारी बारिश के मद्देनजर राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित कर दी गई, जबकि मुंबई उच्च न्यायालय ने आश्वासन दिया कि यदि वकील अदालत पहुंचने में असमर्थ रहते हैं, तो कोई प्रतिकूल आदेश पारित नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा करने के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया और विधानसभा में भी बयान दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि भारी बारिश का यह संकट आठ जुलाई तक जारी रह सकता है, जिसके कारण पूरे सरकारी तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा गया है। उन्होंने मंगलवार को नासिक के कुछ हिस्सों में बादल फटने जैसी स्थिति बनने की आशंका भी जताई। फडणवीस ने कहा कि अत्यधिक बारिश एक 'प्राकृतिक आपदा' जैसी स्थिति है, जो मानवीय नियंत्रण से बाहर है, लेकिन जनता के सहयोग से ऐसी आपातकालीन स्थितियों से अधिक प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है। उन्होंने कहा, "पूरा आपदा प्रबंधन तंत्र, नगर निगम, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमें पूरी तरह मुस्तैद (हाई अलर्ट पर) हैं।" मुख्यमंत्री ने बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर चिंता जताते हुए कहा कि मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर इस तरह का भीषण भूस्खलन पहले कभी नहीं हुआ था; वहां करीब 100 टन मलबा सड़क पर आ गिरा।उन्होंने कहा कि इसमें से 70 टन मलबा हटाकर पुणे की ओर जाने वाली तीन लेन खोल दी गई हैं और मुंबई की ओर का रास्ता साफ किया जा रहा है। इस बीच, विपक्षी विधायकों ने मुंबई में विधान भवन की सीढ़ियों पर विरोध प्रदर्शन किया और "इन्फ्रा-मैन लापता हैं" के नारे लगाते हुए सरकार पर बुनियादी ढांचे की नाकामी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश ने मुंबई और राज्य के अन्य हिस्सों में बुनियादी ढांचे की खस्ताहाल व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कनेक्टिंग लिंक पर कोई संरचनात्मक विफलता नहीं हुई है, बल्कि मलबा आसपास की पहाड़ियों के खिसकने से गिरा है। इस बीच, कांग्रेस प्रवक्ता अनंत गाडगिल ने भी मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे 'मिसिंग लिंक' परियोजना की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने परियोजना के निर्माण कार्य की गुणवत्ता और खर्च की किसी स्वतंत्र एजेंसी से ऑडिट कराने की मांग की।--
- भुवनेश्वर. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स)-भुवनेश्वर ने सोमवार को कहा कि एक हालिया सर्वेक्षण में उसे देश के शीर्ष 10 चिकित्सा महाविद्यालयों में स्थान मिला है। संस्थान ने यह भी कहा कि देश के "सर्वाधिक सुधार करने वाले पांच चिकित्सा महाविद्यालयों" की श्रेणी में उसे दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। एम्स भुवनेश्वर ने एक बयान में कहा, ''यह उपलब्धि शैक्षणिक उत्कृष्टता, अत्याधुनिक अनुसंधान और मरीजों की संवेदनशील देखभाल के प्रति संस्थान की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।'' बयान के अनुसार, सर्वेक्षण में संस्थानों का मूल्यांकन प्रवेश गुणवत्ता एवं प्रशासन, शैक्षणिक उत्कृष्टता, बुनियादी ढांचा एवं परिसर जीवन, व्यक्तित्व एवं नेतृत्व विकास तथा प्लेसमेंट एवं करियर प्रगति सहित पांच प्रमुख मानकों पर किया गया। राज्य के इस प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान ने बताया कि उसे 'इंडिया टुडे-एमडीआरए बेस्ट मेडिकल कॉलेज सर्वे 2026' में देश के शीर्ष 10 चिकित्सा महाविद्यालयों में स्थान मिला है।एम्स-भुवनेश्वर के कार्यकारी निदेशक डॉ. आशुतोष विश्वास ने कहा, ''यह सम्मान उत्कृष्टता की दिशा में हमारे निरंतर प्रयासों का परिणाम है। एम्स-भुवनेश्वर स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा में विश्वास, नवाचार और ईमानदारी का प्रतीक बनकर उभरा है। राष्ट्रीय रैंकिंग में हमारी लगातार प्रगति भावी चिकित्सकों को तैयार करने और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के प्रति हमारी समग्र सोच को दर्शाती है।'' उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में 25वें स्थान पर रहा संस्थान वर्ष 2026 में देश के 10 सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा महाविद्यालयों में शामिल हो गया है।
- नागपुर. भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) नागपुर अगले पांच साल में अपनी विस्तार योजना पर काम कर रहा है और दुनिया के शीर्ष 100 बिजनेस स्कूलों में स्थान बनाने का लक्ष्य रखता है। संस्थान के निदेशक भीमराय मेट्री ने सोमवार को यह जानकारी दी। डॉ मेट्री ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने आईआईएम नागपुर के पूर्ण विकसित परिसर की स्थापना के लिए पुणे जिले के मोशी क्षेत्र में 70 एकड़ भूमि आवंटित कर दी है। यह जमीन नाममात्र के एक रुपये के पट्टे पर दी गई है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित पुणे परिसर संस्थान के विस्तार का पहला चरण है और आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर इसकी मौजूदगी बढ़ाने की योजना है। उन्होंने बताया कि यह परिसर विकसित होने के बाद आईआईएम नागपुर देश का ऐसा संस्थान होगा जिसके पास दो पूर्ण विकसित परिसर होंगे। संस्थान गोवा में विस्तार की संभावना भी देख रहा है और वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करने पर काम कर रहा है। आईआईएम नागपुर वर्तमान में फ्रांस के यूनिवर्सिटी ऑफ लिले के साथ शैक्षणिक सहयोग कर रहा है और अगले पांच वर्षों में 20 अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी का लक्ष्य है।
- नयी दिल्ली. भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के पाठ की कानूनी समीक्षा अगले 15-20 दिन में पूरा होने की उम्मीद है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं। कानूनी समीक्षा के बाद समझौते पर इस वर्ष के अंत तक हस्ताक्षर होने और अगले वर्ष इसके लागू होने की संभावना है। गोयल ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि वह 14-15 जुलाई को ब्रसेल्स जाएंगे, जहां व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) की बैठक में भाग लेंगे और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष तथा विभिन्न क्षेत्रों के अपने समकक्षों से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत पहले ही अपने उत्पादों, वस्तुओं और सेवाओं के प्रचार के लिए यूरोप में कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भेजना शुरू कर चुका है, ताकि समझौते का अधिकतम लाभ उठाया जा सके। वाणिज्य मंत्री ने कहा कि इस एफटीए को 2027 की पहली तिमाही तक लागू करने का प्रयास है ताकि 27 विकसित देशों के बाजार भारतीय कारोबार के लिए खुलें और निर्यात को बढ़ावा मिले। गोयल ने बताया कि भारत का चमड़ा और उससे जुड़े उत्पादों का निर्यात 4-4.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है और एफटीए से विकसित देशों में इस क्षेत्र के लिए बड़े अवसर पैदा होंगे। उन्होंने उद्योग से अगले 5-6 साल में 15 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखने को कहा।
- अयोध्या. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन की जांच जारी रहने के बीच सोमवार को यहां एक बैठक के दौरान अपने महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिये। ट्रस्टी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नामित किया गया है। ट्रस्ट के एक पदाधिकारी ने यह जानकारी दी। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बताया कि तीन घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में अंतरिम व्यवस्था के तौर पर सदस्य कृष्ण मोहन को महासचिव की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपने का भी निर्णय लिया गया। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के लिए उपयुक्त उम्मीदवारों का चयन करने के लिए तीन सदस्यीय समिति की घोषणा की। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने संवाददाताओं से बातचीत में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, ''हमने न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) प्रदीप कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हवारे (श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष) की तीन सदस्यीय समिति नियुक्त की। यह समिति उम्मीदवारों का साक्षात्कार लेगी और हमें चुनने के लिए तीन नाम देगी।''गिरि ने मंदिर की दान पेटियों से कथित चोरी को ट्रस्ट के लिए ''गहरे दर्द और शर्मिंदगी'' का विषय बताते हुए कहा कि इस विवाद ने सदियों के लंबे संघर्ष और अनगिनत बलिदानों के बाद बने मंदिर पर ग्रहण लगा दिया है। गिरि ने कहा कि चंपत राय ने स्वेच्छा से पद छोड़ दिया है क्योंकि उनका मानना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में नहीं लाया जाता तब तक महासचिव पद पर बने रहना उचित नहीं है। कोषाध्यक्ष ने कहा कि ट्रस्ट के पास इस मामले में कोई विवेकाधिकार नहीं है क्योंकि वरिष्ठ ट्रस्टी के. परासरन ने बताया कि ट्रस्ट के संविधान के तहत एक बार इस्तीफा देने के बाद यह प्रभावी हो जाता है, जिससे ट्रस्ट के पास इसे स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है। के. परासरन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये इस बैठक में शामिल हुए।गिरि ने इन आरोपों को खारिज किया कि नकदी के अलावा अन्य चढ़ावा भी गायब हो गया है।उन्होंने कहा कि ट्रस्ट मंदिर को दान की गई सभी वस्तुओं की जानकारी वाला एक रजिस्टर रखता है। उन्होंने दावा किया कि ऐसी प्रत्येक वस्तु सुरक्षित है। कोषाध्यक्ष ने कहा कि ट्रस्ट सत्यापन चाहने वाले किसी भी व्यक्ति को रिकॉर्ड और दान की गई वस्तुएं दिखाने के लिए तैयार है। गिरि ने कहा कि ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार करने के बावजूद राम मंदिर आंदोलन और निर्माण में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि अंतरिम महासचिव बनाये गये कृष्ण मोहन अपनी सहायता के लिए एक टीम चुनने के लिए स्वतंत्र होंगे जो पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रणालियों को मजबूत करने के उद्देश्य से उपायों की निगरानी करेगी। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट 22 जुलाई को फिर से बैठक करेगा, तब तक उसे उम्मीद है कि कथित गबन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप देगी। उन्होंने कहा कि बैठक में अतिरिक्त ट्रस्टियों की नियुक्ति के साथ रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी।बैठक के बाद जारी एक बयान में ट्रस्ट ने कहा कि वह न केवल विशेष जांच दल (एसआईटी) की सिफारिशों को लागू करेगा, बल्कि मंदिर के प्रबंधन और संचालन प्रणालियों में कमजोरियों को दूर करने के लिए विशेषज्ञों से स्वतंत्र सलाह भी लेगा। इसमें कहा गया है कि इसका उद्देश्य एक अधिक मजबूत, कुशल और पारदर्शी प्रशासनिक ढांचा स्थापित करना था जो मंदिर प्रबंधन के लिए एक मॉडल के रूप में काम कर सके। ट्रस्ट ने कहा कि उसने कथित अनियमितताओं की प्रारंभिक जांच के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश सरकार से उच्च स्तरीय एसआईटी जांच की मांग की थी। इसमें कहा गया है कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में आठ लोगों की पहचान की गई, जिनके खिलाफ प्रथम दृष्टया सबूत पाए गए, जिसके कारण पुलिस मामले दर्ज किए गए और गिरफ्तारियां की गईं। ट्रस्ट ने राय और मिश्रा के इस्तीफे के बाद विशेष रूप से आमंत्रित सदस्यों की सूची से गोपाल नागरकट्टे को हटाने की भी घोषणा की, जबकि यह भी कहा कि जांच पूरी होने तक किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना अनुचित होगा। ट्रस्ट ने कहा कि भक्तों द्वारा दान की गई चांदी की वस्तुओं को भारत सरकार के टकसाल में पिघलाया गया था, जिसमें रिकॉर्ड, तस्वीरें, वजन विवरण और शुद्धता प्रमाण पत्र संरक्षित किए गए थे। इसने व्यक्तियों, संगठनों और पत्रकारों से अपील की कि जिनके पास मंदिर से जुड़े किसी भी अनियमितता के सबूत हैं, वे इसे एसआईटी या उचित जांच एजेंसी को सौंपें। ट्रस्टियों ने यह भी कहा कि विवाद के बावजूद राम मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है और उन्होंने इसे कथित गबन के बारे में गलत सूचना बताया है।नवनियुक्त अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने कहा कि उनकी प्राथमिकता मंदिर की प्रबंधन प्रणाली में खामियों को दूर करना और इसकी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को मजबूत करना होगा। उन्होंने मीडिया से केवल सत्यापित तथ्यों को रिपोर्ट करने की अपील करते हुए कहा कि जब जांच चल रही हो तो जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए सटीक जानकारी आवश्यक है। गिरि ने कहा कि ट्रस्ट चाहता है कि बड़े साजिशकर्ताओं समेत कथित चोरी में शामिल सभी लोगों की पहचान की जाए और उन्हें दंडित किया जाए। उन्होंने इस विवाद का इस्तेमाल मंदिर ट्रस्ट को बदनाम करने और भक्तों के बीच विभाजन पैदा करने के प्रयासों के प्रति आगाह किया। उन्होंने भक्तों से "झूठे प्रचार" से गुमराह न होने की अपील करते हुए कहा कि अगर किसी को दान की गई वस्तुओं के बारे में संदेह है तो वह सत्यापन के लिए ट्रस्ट कार्यालय से संपर्क कर सकता है। आज की बैठक शाम में समाप्त हुई, जिसके बाद ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास कार्यक्रम स्थल से चले गए। उन्होंने कहा कि कृष्ण मोहन, जिन्हें अंतरिम महासचिव के रूप में अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, अपनी सहायता के लिए एक टीम चुनने के लिए स्वतंत्र होंगे और पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रणालियों को मजबूत करने के उद्देश्य से उपायों की निगरानी करेंगे। गिरि ने कहा कि ट्रस्ट 22 जुलाई को फिर से बैठक करेगा, तब तक उसे उम्मीद है कि गबन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप देगी। उन्होंने कहा कि बैठक में अतिरिक्त ट्रस्टियों की नियुक्ति के साथ रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी। अंतरिम महासचिव मोहन ने बैठक के बाद कहा कि जो भी दोषी पाया जाएगा उसे उचित सजा मिलेगी।उन्होंने कहा कि सभी ट्रस्टी लोगों के विश्वास को बहाल करने और राम मंदिर ट्रस्ट के उद्देश्यों के अनुसार भक्तों द्वारा किए जाने वाले चढ़ावे का प्रबंधन करने के लिए काम करेंगे। यह बैठक राम जन्मभूमि मंदिर परिसर के अंदर अपराह्न करीब सवा तीन बजे शुरू हुई जिसमें ट्रस्ट के नौ स्थायी सदस्यों में से सात ने भाग लिया। यह बैठक शाम करीब साढ़े छह बजे खत्म हुई। मंदिर के चढ़ावे के गबन के आरोपों के बाद राय और मिश्रा द्वारा दिए गए इस्तीफे पर विचार-विमर्श करने, मामले की एसआईटी जांच की प्रगति की समीक्षा करने और इस्तीफे स्वीकार किए जाने पर ट्रस्ट में प्रमुख पदों पर नियुक्तियों पर चर्चा करने के लिए यह बैठक बुलाई गई थी। बैठक से पहले, ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास ने कहा था कि वह रामलला मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से ''बहुत दुखी'' हैं। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के लिए कड़ी सजा की मांग की है। उन्होंने यह विश्वास भी जताया कि कथित अपराध से जुड़े सभी लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।राम मंदिर परिसर के आसपास व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, संपर्क मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था। मीडियाकर्मियों एवं अन्य लोगों के निजी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया था। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बैठक स्थल को मणिराम दास छावनी से मंदिर परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया था। मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एक एसआईटी ने पिछले महीने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके बाद एक प्राथमिकी दर्ज की गई और आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांचकर्ताओं ने हटाए गए सीसीटीवी फुटेज भी बरामद किए हैं, जिसमें कुछ आरोपी मंदिर परिसर से बाहर जाते समय कथित तौर पर नोटों को छिपाते हुए नजर आ रहे हैं।
- महराजगंज. उत्तर प्रदेश के महराजगंज की एक अदालत ने नेपाल से अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के मामले में सोमवार को 62 वर्षीय एक चीनी नागरिक को 11 महीने के कारावास की सजा सुनाई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला 10 अगस्त, 2025 का है, जब भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोनौली में पुलिस ने नेपाल से भारत में प्रवेश कर रहे एक संदिग्ध विदेशी नागरिक को पकड़ा था।पूछताछ के दौरान उसने अपना नाम झांग यंग बताया और पुलिस को कहा कि वह नेपाल गया था तथा वहां से बिना वैध वीजा के भारत में प्रवेश कर गया। पुलिस ने उसके खिलाफ विदेशी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने चीन के निंग्शिया प्रांत के शानशिया निवासी झांग यंग को दोषी करार दिया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा ने सोमवार को दोषी को 11 महीने के कारावास की सजा सुनाई और उस पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ ने बताया कि जुर्माना अदा नहीं करने पर दोषी को एक महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
- जम्मू. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को कहा कि ''कश्मीर घाटी में भी कमल खिलेगा'' और वह दिन दूर नहीं जब जम्मू कश्मीर में भाजपा अपने दम पर सरकार बनाएगी। दो दिवसीय दौरे पर जम्मू पहुंचे नवीन ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उन्होंने कार्यकर्ताओं से सरकारी योजनाओं का लाभ हर घर तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ''वह दिन दूर नहीं जब भारतीय जनता पार्टी जम्मू कश्मीर में अपनी सरकार बनाएगी।''नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू कश्मीर में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए को हटाए जाने से क्षेत्र के लोगों को वास्तविक आज़ादी मिली, जिससे श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना साकार हुआ। उन्होंने कांग्रेस पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा, ''लोग अक्सर पूछते हैं कि जम्मू कश्मीर में क्या बदला है। मेरा जवाब है कि बहुत कुछ बदला है। केवल वही लोग आज के भारत में आए इस परिवर्तन को नहीं देख पा रहे हैं, जिन्होंने खुले मन से देखने की क्षमता खो दी है।'' इस बीच, कांग्रेस की जम्मू कश्मीर इकाई ने नितिन नवीन से सवाल किया कि वह लोगों को यह बताएं कि मोदी सरकार की नाक के नीचे राम मंदिर में कथित ''लूट'' कैसे हो गई। कांग्रेस ने भाजपा अध्यक्ष से जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने में भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा की गई ''देरी और विश्वासघात'' का स्पष्टीकरण देने को भी कहा।
- नयी दिल्ली. सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों सहित उन्नत हथियारों तथा अत्याधुनिक सेंसर प्रणाली से लैस स्वदेशी स्टील्थ युद्धपोत 'महेंद्रगिरि' को 11 जुलाई को भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। नौसेना के एक प्रवक्ता ने बताया कि नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो (डब्ल्यूडीबी) द्वारा डिजाइन किए गए और मुंबई की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) में निर्मित 'महेंद्रगिरि' में वायु रोधी, सतह रोधी और पनडुब्बी रोधी अभियानों को अंजाम देने की क्षमता है। उन्होंने बताया कि यह समुद्री सुरक्षा, शक्ति प्रदर्शन, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर), खोज एवं बचाव तथा समुद्र में लंबे समय तक तैनाती जैसे अभियानों के लिए भी उपयुक्त है।अधिकारी ने कहा, ''यह युद्धपोत स्वदेशी और अत्याधुनिक हथियारों एवं सेंसरों से लैस है। इसमें सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियां, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमता, व्यापक पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली तथा एकीकृत युद्ध प्रबंधन प्रणाली शामिल है।'' उन्होंने बताया कि अत्याधुनिक स्टील्थ विशेषताओं, बेहतर मजबूती, कम रडार पहचान क्षमता और उच्च स्तर की स्वचालन तकनीक से युक्त इस युद्धपोत में आधुनिक 'कम्बाइंड डीजल ऑर गैस' (सीओडीओजी) प्रणोदन प्रणाली लगी है, जिससे यह समुद्री अभियानों की पूरी श्रृंखला में उच्च गति और लंबी परिचालन क्षमता प्रदान करता है। नौसेना ने कहा कि 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित 'महेंद्रगिरि' केंद्र सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल का उत्कृष्ट उदाहरण है।
- देहरादून. उत्तराखंड में दक्षिण-पश्चिम मानसून के सक्रिय होने का असर चारधाम यात्रा पर भी साफ दिखाई देने लगा है जहां लगातार हो रही बारिश और खराब मौसम के कारण चारधाम एवं हेमकुंड साहिब पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में पिछले पांच दिनों के दौरान करीब 30 प्रतिशत की गिरावट आयी है। सबसे अधिक असर केदारनाथ धाम में देखने को मिला, जहां बारिश शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या 65 प्रतिशत तक घट गई। राज्य के सभी हिस्सों में एक जुलाई को मानसून सक्रिय हुआ था । सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एक जुलाई को चारधाम और हेमकुंड साहिब में कुल 27,232 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। यह संख्या पांच जुलाई को घटकर 19,202 रह गई।एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि मानसून की सक्रियता बढ़ने के साथ ही यात्रियों की आमद में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। उनके अनुसार सबसे अधिक गिरावट केदारनाथ धाम में दर्ज की गई, एक जुलाई को जहां 6,553 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए थे, वहीं पांच जुलाई को यह संख्या घटकर मात्र 2,297 रह गई, यानी पांच दिनों में करीब 65 प्रतिशत की कमी आई। अधिकारी के अनुसार, कठिन पैदल मार्ग और मानसून के दौरान भूस्खलन एवं खराब मौसम की आशंका के चलते केदारनाथ यात्रा पर सर्वाधिक असर पड़ना स्वाभाविक माना जाता है । बदरीनाथ धाम में भी यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। एक जुलाई को 13,192 श्रद्धालुओं ने भगवान बदरीविशाल के दर्शन किए थे, जबकि पांच जुलाई को यह संख्या घटकर 9484 रह गई, जो लगभग 28 प्रतिशत की गिरावट दर्शाती है।मौसम विभाग द्वारा अगले कुछ दिनों तक राज्य के कई पर्वतीय जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किए जाने के बाद यात्रा पर इसका असर और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, मानसून के कारण आई इस गिरावट के बावजूद इस वर्ष की चारधाम यात्रा अब तक नया रिकॉर्ड बना चुकी है। उन्नीस अप्रैल को यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक केवल ढाई माह में ही बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में कुल 41.56 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इसके अलावा, हेमकुंड साहिब के कपाट 23 मई को खुले थे जहां अब तक 1.76 लाख श्रद्धालु आ चुके हैं । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, यह उपलब्धि राज्य सरकार द्वारा विकसित आधारभूत संरचना, बेहतर सड़क संपर्क, सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था और यात्रियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का परिणाम है ।
- अयोध्या.। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन की जांच जारी रहने के बीच सोमवार को यहां एक बैठक के दौरान अपने महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिये। ट्रस्टी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नामित किया गया है। ट्रस्ट के एक पदाधिकारी ने यह जानकारी दी। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बताया कि तीन घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में अंतरिम व्यवस्था के तौर पर सदस्य कृष्ण मोहन को महासचिव की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपने का भी निर्णय लिया गया। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के लिए उपयुक्त उम्मीदवारों का चयन करने के लिए तीन सदस्यीय समिति की घोषणा की। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने संवाददाताओं से बातचीत में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, ''हमने न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) प्रदीप कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हवारे (श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष) की तीन सदस्यीय समिति नियुक्त की। यह समिति उम्मीदवारों का साक्षात्कार लेगी और हमें चुनने के लिए तीन नाम देगी।'' गिरि ने मंदिर की दान पेटियों से कथित चोरी को ट्रस्ट के लिए ''गहरे दर्द और शर्मिंदगी'' का विषय बताते हुए कहा कि इस विवाद ने सदियों के लंबे संघर्ष और अनगिनत बलिदानों के बाद बने मंदिर पर ग्रहण लगा दिया है। गिरि ने कहा कि चंपत राय ने स्वेच्छा से पद छोड़ दिया है क्योंकि उनका मानना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में नहीं लाया जाता तब तक महासचिव पद पर बने रहना उचित नहीं है। कोषाध्यक्ष ने कहा कि ट्रस्ट के पास इस मामले में कोई विवेकाधिकार नहीं है क्योंकि वरिष्ठ ट्रस्टी के. परासरन ने बताया कि ट्रस्ट के संविधान के तहत एक बार इस्तीफा देने के बाद यह प्रभावी हो जाता है, जिससे ट्रस्ट के पास इसे स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है। के. परासरन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये इस बैठक में शामिल हुए।गिरि ने इन आरोपों को खारिज किया कि नकदी के अलावा अन्य चढ़ावा भी गायब हो गया है।उन्होंने कहा कि ट्रस्ट मंदिर को दान की गई सभी वस्तुओं की जानकारी वाला एक रजिस्टर रखता है। उन्होंने दावा किया कि ऐसी प्रत्येक वस्तु सुरक्षित है। कोषाध्यक्ष ने कहा कि ट्रस्ट सत्यापन चाहने वाले किसी भी व्यक्ति को रिकॉर्ड और दान की गई वस्तुएं दिखाने के लिए तैयार है। गिरि ने कहा कि ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार करने के बावजूद राम मंदिर आंदोलन और निर्माण में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि अंतरिम महासचिव बनाये गये कृष्ण मोहन अपनी सहायता के लिए एक टीम चुनने के लिए स्वतंत्र होंगे जो पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रणालियों को मजबूत करने के उद्देश्य से उपायों की निगरानी करेगी। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट 22 जुलाई को फिर से बैठक करेगा, तब तक उसे उम्मीद है कि कथित गबन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप देगी। उन्होंने कहा कि बैठक में अतिरिक्त ट्रस्टियों की नियुक्ति के साथ रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी।बैठक के बाद जारी एक बयान में ट्रस्ट ने कहा कि वह न केवल विशेष जांच दल (एसआईटी) की सिफारिशों को लागू करेगा, बल्कि मंदिर के प्रबंधन और संचालन प्रणालियों में कमजोरियों को दूर करने के लिए विशेषज्ञों से स्वतंत्र सलाह भी लेगा। इसमें कहा गया है कि इसका उद्देश्य एक अधिक मजबूत, कुशल और पारदर्शी प्रशासनिक ढांचा स्थापित करना था जो मंदिर प्रबंधन के लिए एक मॉडल के रूप में काम कर सके। ट्रस्ट ने कहा कि उसने कथित अनियमितताओं की प्रारंभिक जांच के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश सरकार से उच्च स्तरीय एसआईटी जांच की मांग की थी। इसमें कहा गया है कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में आठ लोगों की पहचान की गई, जिनके खिलाफ प्रथम दृष्टया सबूत पाए गए, जिसके कारण पुलिस मामले दर्ज किए गए और गिरफ्तारियां की गईं। ट्रस्ट ने राय और मिश्रा के इस्तीफे के बाद विशेष रूप से आमंत्रित सदस्यों की सूची से गोपाल नागरकट्टे को हटाने की भी घोषणा की, जबकि यह भी कहा कि जांच पूरी होने तक किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना अनुचित होगा। ट्रस्ट ने कहा कि भक्तों द्वारा दान की गई चांदी की वस्तुओं को भारत सरकार के टकसाल में पिघलाया गया था, जिसमें रिकॉर्ड, तस्वीरें, वजन विवरण और शुद्धता प्रमाण पत्र संरक्षित किए गए थे। इसने व्यक्तियों, संगठनों और पत्रकारों से अपील की कि जिनके पास मंदिर से जुड़े किसी भी अनियमितता के सबूत हैं, वे इसे एसआईटी या उचित जांच एजेंसी को सौंपें। ट्रस्टियों ने यह भी कहा कि विवाद के बावजूद राम मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है और उन्होंने इसे कथित गबन के बारे में गलत सूचना बताया है। नवनियुक्त अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने कहा कि उनकी प्राथमिकता मंदिर की प्रबंधन प्रणाली में खामियों को दूर करना और इसकी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को मजबूत करना होगा। उन्होंने मीडिया से केवल सत्यापित तथ्यों को रिपोर्ट करने की अपील करते हुए कहा कि जब जांच चल रही हो तो जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए सटीक जानकारी आवश्यक है। गिरि ने कहा कि ट्रस्ट चाहता है कि बड़े साजिशकर्ताओं समेत कथित चोरी में शामिल सभी लोगों की पहचान की जाए और उन्हें दंडित किया जाए। उन्होंने इस विवाद का इस्तेमाल मंदिर ट्रस्ट को बदनाम करने और भक्तों के बीच विभाजन पैदा करने के प्रयासों के प्रति आगाह किया। उन्होंने भक्तों से "झूठे प्रचार" से गुमराह न होने की अपील करते हुए कहा कि अगर किसी को दान की गई वस्तुओं के बारे में संदेह है तो वह सत्यापन के लिए ट्रस्ट कार्यालय से संपर्क कर सकता है। आज की बैठक शाम में समाप्त हुई, जिसके बाद ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास कार्यक्रम स्थल से चले गए। उन्होंने कहा कि कृष्ण मोहन, जिन्हें अंतरिम महासचिव के रूप में अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, अपनी सहायता के लिए एक टीम चुनने के लिए स्वतंत्र होंगे और पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रणालियों को मजबूत करने के उद्देश्य से उपायों की निगरानी करेंगे। गिरि ने कहा कि ट्रस्ट 22 जुलाई को फिर से बैठक करेगा, तब तक उसे उम्मीद है कि गबन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप देगी। उन्होंने कहा कि बैठक में अतिरिक्त ट्रस्टियों की नियुक्ति के साथ रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी। अंतरिम महासचिव मोहन ने बैठक के बाद कहा कि जो भी दोषी पाया जाएगा उसे उचित सजा मिलेगी।उन्होंने कहा कि सभी ट्रस्टी लोगों के विश्वास को बहाल करने और राम मंदिर ट्रस्ट के उद्देश्यों के अनुसार भक्तों द्वारा किए जाने वाले चढ़ावे का प्रबंधन करने के लिए काम करेंगे। यह बैठक राम जन्मभूमि मंदिर परिसर के अंदर अपराह्न करीब सवा तीन बजे शुरू हुई जिसमें ट्रस्ट के नौ स्थायी सदस्यों में से सात ने भाग लिया। यह बैठक शाम करीब साढ़े छह बजे खत्म हुई। मंदिर के चढ़ावे के गबन के आरोपों के बाद राय और मिश्रा द्वारा दिए गए इस्तीफे पर विचार-विमर्श करने, मामले की एसआईटी जांच की प्रगति की समीक्षा करने और इस्तीफे स्वीकार किए जाने पर ट्रस्ट में प्रमुख पदों पर नियुक्तियों पर चर्चा करने के लिए यह बैठक बुलाई गई थी। बैठक से पहले, ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास ने कहा था कि वह रामलला मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से ''बहुत दुखी'' हैं। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के लिए कड़ी सजा की मांग की है। उन्होंने यह विश्वास भी जताया कि कथित अपराध से जुड़े सभी लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।राम मंदिर परिसर के आसपास व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, संपर्क मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था। मीडियाकर्मियों एवं अन्य लोगों के निजी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया था। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बैठक स्थल को मणिराम दास छावनी से मंदिर परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया था। मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एक एसआईटी ने पिछले महीने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके बाद एक प्राथमिकी दर्ज की गई और आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांचकर्ताओं ने हटाए गए सीसीटीवी फुटेज भी बरामद किए हैं, जिसमें कुछ आरोपी मंदिर परिसर से बाहर जाते समय कथित तौर पर नोटों को छिपाते हुए नजर आ रहे हैं।
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नयी दिल्ली. विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने सोमवार को कहा कि वह श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और न्यासी अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर ट्रस्ट जो भी निर्णय लेगा, उसका सम्मान करेगी। विहिप ने यह भी कहा कि केवल आरोप लग जाने भर से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध विहिप ने यह भी कहा कि राम मंदिर में चढावे की चोरी की जांच को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने दिया जाना चाहिए। ट्रस्ट सोमवार को एक महत्वपूर्ण बैठक करने वाला है।
विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि संगठन बैठक के नतीजों के बारे में कोई अनुमान नहीं लगाएगा और उसे ट्रस्ट की समझदारी पर पूरा भरोसा है। उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, ''सिर्फ ट्रस्ट ही निर्णय करेगा और घोषणा करेगा। वह जो भी निर्णय लेगा, हम उसका सम्मान करेंगे। हमें ट्रस्ट से जुड़े संतों की समझदारी पर पूरा भरोसा है।'' जैन ने राय और मिश्रा का बचाव करते हुए कहा कि मात्र आरोप लगने से कोई व्यक्ति दोषी नहीं हो जाता। उन्होंने कहा, ''जब तक दोष साबित न हो जाए, किसी को अपराधी न मानें। जांच एजेंसी को अपना काम करने दें और जांच के परिणाम की प्रतीक्षा करें।'' उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने जांच पूरी होने से पहले ही राय को दोषी ठहराने की कोशिश की है।
राय पर लगाए गए कई आरोप जांच की कसौटी पर खरे नहीं उतरने का दावा करते हुए जैन ने कहा कि विहिप नेता ने जांच से बचने की कोई कोशिश नहीं की है। इसके विपरीत, उन्होंने विशेष जांच टीम (एसआईटी) के गठन का समर्थन किया है और जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। जैन ने यह भी कहा कि प्रारंभिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद मंदिर ट्रस्ट ने तुरंत प्राथमिकी दर्ज कराकर कार्रवाई की और किसी को बचाने का प्रयास नहीं किया। जैन ने कहा कि राय और मिश्रा ने नैतिक आधार पर अपने पदों से इस्तीफा दिया है तथा उनके इस्तीफों को ''उच्च नैतिक मानदंड स्थापित करने वाला कदम'' बताया। जैन ने कहा कि विहिप ट्रस्ट की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किए जाने के पक्ष में है तथा उसके कामकाज को अधिक पारदर्शी बनाने वाले सुझावों का स्वागत करती है। मंदिरों पर सरकार के नियंत्रण के विरोध में विहिप के रुख को दोहराते हुए जैन ने कहा कि हिंदू धार्मिक संस्थानों का संचालन सरकार के बजाय समुदाय द्वारा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''हम हिंदू मंदिरों पर सरकार का कब्जा नहीं होने देंगे। देश के संतों और समाज को ही इन मंदिरों का प्रबंधन और संचालन करना चाहिए।'' उन्होंने विपक्षी नेताओं पर राम मंदिर में जनता का विश्वास कम करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया और कहा कि उनकी आलोचना भ्रष्टाचार की चिंता से प्रेरित होने के बजाय राजनीतिक कारणों से है। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को घोषणा की कि सहकारी संस्थाओं के कारोबार का दायरा बढ़ाने के लिए एक सहकारी जीवन बीमा कंपनी स्थापित की जाएगी। उन्होंने साथ ही कहा कि 'भारत टैक्सी' की सेवाओं का विस्तार अगले दो साल में 500 शहरों तक किया जाएगा
राष्ट्रीय राजधानी में सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने भारत के सहकारी तंत्र की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए पेशेवरों की नियुक्तियों में भ्रष्टाचार समाप्त करने पर जोर दिया। शाह ने कहा कि मंत्रालय की स्थापना से भारत के सहकारी आंदोलन को नई ऊर्जा मिली है, जिसे कांग्रेस शासन के दौरान ''उपेक्षित आंदोलन'' बनाया गया था। भारत में लगभग 8.5 लाख सहकारी संस्थाएं हैं, जिनके 30 करोड़ से अधिक सदस्य हैं।
मंत्री ने मंत्रालय की ओर से उठाए गए कदमों का उल्लेख किया, जिनमें सहकारी तंत्र में पारदर्शिता और पेशेवर व्यवस्था लाने के प्रयास शामिल हैं। मंत्री ने कहा कि सहकारी मॉडल के तहत शुरू की गई कैब सेवा से जुड़े मंच 'भारत टैक्सी' का प्रदर्शन अच्छा रहा है और अगले दो वर्षों में इसका विस्तार 500 शहरों तक किया जाएगा। सहकारिता मंत्री ने कहा, '' 'भारत टैक्सी' की तर्ज पर हम सहकारी क्षेत्र में एक जीवन बीमा कंपनी स्थापित करेंगे। इससे बीमा क्षेत्र में सहकारी संस्थाओं के विकास में मदद मिलेगी।'' उन्होंने कहा कि उर्वरक क्षेत्र की सहकारी संस्था इफको का संयुक्त उद्यम इफको-टोकियो पहले से ही बीमा कारोबार में है। भारत में वर्तमान में 26 जीवन बीमा कंपनियां हैं।
'भारत टैक्सी' सहकारिता मॉडल पर आधारित चालक-केंद्रित परिवहन मंच सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड की एक पहल है। वर्तमान में भारत टैक्सी के साथ 6.37 लाख पंजीकृत चालक और 35.77 लाख पंजीकृत ग्राहक जुड़े हुए हैं। आधिकारिक बयान के अनुसार, यह सेवा फिलहाल दिल्ली-एनसीआर, गुजरात, लखनऊ, चंडीगढ़, मुंबई, जयपुर और कानपुर में संचालित हो रही है। अगले कुछ महीनों में इसे रांची, पटना, गुवाहाटी, भोपाल, कोलकाता, इंदौर और नागपुर में भी शुरू किया जाएगा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि विशेष रूप से बीज उत्पादन के लिए एक राष्ट्रीय सहकारी संस्था का गठन किया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह अगले तीन वर्षों में देश की सबसे बड़ी गैर-सरकारी बीज उत्पादन संस्था बनकर उभरेगी। मंत्री ने कहा कि सहकारी संस्थाओं ने डेयरी, चीनी, उर्वरक और बैंकिंग जैसे पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़ते हुए कई नए क्षेत्रों में भी प्रवेश किया है। कुल 394 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) ने खुदरा ईंधन बिक्री केंद्र के लिए आवेदन किया है, जिनमें से तीन चालू हो चुके हैं। 54,000 से अधिक पैक्स साझा सेवा केंद्र (सीएससी) के रूप में कार्य कर रहे हैं, जबकि 4,248 पैक्स को जन औषधि केंद्र खोलने की मंजूरी मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने सहकारी क्षेत्र का एक 'डेटाबेस' तैयार किया है, जिससे देश में सहकारी संस्थाओं के विस्तार में मदद मिलेगी। शाह ने कहा कि गुजरात के आणंद में क्षमता निर्माण के लिए त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है, जो मानव संसाधन की समस्या से निपटेगा। मंत्री ने विश्वास जताया कि सहकारी क्षेत्र वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। केंद्रीय मंत्रालय पर राज्यों के कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप करने की आशंका जताए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में कांग्रेस शासित राज्यों ने भी यह शिकायत नहीं की कि केंद्रीय मंत्रालय ने उनके अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप किया है। शाह ने कहा, '' केंद्रीय मंत्रालय का उद्देश्य राज्यों के विषयों में हस्तक्षेप करना नहीं है। इसका उद्देश्य नीतियां बनाना है।'' उन्होंने विश्वास जताया कि देश को 2047 तक 'विकसित भारत' बनाने में सहकारी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकारों ने हमेशा गरीबों के हित में सर्वांगीण विकास के लिए काम किया है। कार्यक्रम के दौरान शाह ने कई प्रमुख परियोजनाओं और पहल का शिलान्यास तथा उद्घाटन किया।
इन पहल में 75,000 टन क्षमता वाले 135 गोदामों का हस्तांतरण, 85 गोदामों का उद्घाटन तथा 47 अनाज भंडारण गोदामों का वर्चुअल शिलान्यास शामिल था। इसके अलावा, अमूल और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ) द्वारा 'सहकार वन' का भूमिपूजन तथा भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड की ऊतक संवर्धन (टिश्यू कल्चर) सुविधाओं का उत्तर प्रदेश के बाराबंकी तथा महाराष्ट्र के जलगांव में भूमिपूजन भी किया गया। कार्यक्रम की एक अन्य प्रमुख उपलब्धि 50,000 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को ई-पैक्स में बदलना रही, जो जमीनी स्तर की सहकारी संस्थाओं के डिजिटल सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम के दौरान भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के बीच बीज प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए गए। शाह ने पिछले पांच वर्षों में सहकारिता मंत्रालय की उपलब्धियों पर आधारित एक पुस्तक का भी विमोचन किया। मंत्रालय ने 'सहकार से समृद्धि' तथा विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के साथ किसानों, महिलाओं, युवाओं, लघु उत्पादकों, डेयरी किसानों, शहरी सहकारी संस्थाओं और ग्रामीण संस्थानों को जोड़ने वाला सहकारी तंत्र विकसित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। -
नागपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े मामले में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने जो कहा है, वह उससे सहमत हैं। भागवत ने नागपुर में संवाददाताओं से कहा, ''होसबाले द्वारा जारी बयान देखिए... मेरी प्रतिक्रिया भी वही है।'' आरएसएस प्रमुख ने एक कार्यक्रम से इतर राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर यह बात कही। होसबाले ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा था कि अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की घटना ने राम भक्तों और पूरे समाज की आस्था को ''गहरी ठेस'' पहुंचाई है। उन्होंने कहा था कि जांच में दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
होसबाले ने दावा किया था कि ''हिंदू विरोधी और राष्ट्रविरोधी ताकतें'' इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का फायदा उठाकर हिंदू धर्म को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने पूरे हिंदू समाज से अपील की कि वह ''इस कठिन समय'' में धैर्य और संयम बनाए रखे ताकि इस तरह की सभी ''साजिशों'' को विफल किया जा सके। -
उडुपी/नयी दिल्ली. तेजस के माता-पिता ने जब उसके देर से बोलने, ठीक से आंख न मिला पाने और लोगों के बीच कम घुलने-मिलने सरीखी जैसी बातों पर गौर किया किया और उसे चिकित्सक के पास ले गए तो पता चला कि उनका तीन वर्षीय बच्चा 'ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर' (एएसडी) नामक रोग से पीड़ित है। इसके बाद बेंगलुरु निवासी तेजस के माता-पिता ने उसके लिए 'वाक् एवं कर्मोपचार' (स्पीच और ऑक्यूपेशनल थेरेपी) शुरू की। लेकिन तेजस के माता-पिता ने सोचा कि जारी इलाज के साथ आयुर्वेद चिकित्सा भी उनके बच्चे के लिए लाभकारी साबित हो सकती है और इसी उम्मीद में वे उडुपी के एसडीएम आयुर्वेद महाविद्यालय पहुंचे। इसके बाद अगले ढाई सालों में तेजस धीरे-धीरे अपने तरीके से अपनी बात कहने लगा और संस्थान में 'बालपंचकर्म' चिकित्सा के दौरान श्लोक भी पढ़ने लगा। माता-पिता के लिए तेजस की हर छोटी-मोटी कामयाबी उनके लिए जश्न का वजह बन गई। तेजस के परिवार की तरह ही, पूरे भारत में ऐसे माता-पिता की संख्या बढ़ रही है जो अपने बच्चों की जिंदगी को बेहतर बनाने की उम्मीद में वैज्ञानिक रूप से साबित चिकित्सा पद्धित के साथ-साथ आयुर्वेद का भी सहारा ले रहे हैं। समुद्र के किनारे बसी मंदिर की नगरी उडुपी में स्थित एसडीएम आयुर्वेद महाविद्यालय, ऑटिज्म और तंत्रिका-विकास संबंधी व्याधि से पीड़ित बच्चों के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा का सहारा लेने वाले परिवारों के लिए एक पसंदीदा केंद्र बन गया है। एसडीएम आयुर्वेद महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. ममता के.वी. ने कहा कि मरीजों की बढ़ती संख्या इस बात को दिखाती है कि लोगों में यह जागरूकता बढ़ रही है कि आयुर्वेद पारंपरिक चिकित्सा की जगह लेने के बजाय उसके साथ मिलकर काम कर सकता है। एएसडी एक तंत्रिका-विकास संबंधी विकार है, जिसका बच्चों की बातचीत, सामाजिक मेलजोल और उनके व्यवहार पर असर पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया भर में हर 100 में से लगभग एक बच्चे को ऑटिज्म होने का अनुमान है, हालांकि अलग-अलग देशों में इसकी दर अलग-अलग हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑटिज्म वाले हर बच्चे की अपनी खूबियां और चुनौतियां होती हैं, इसलिए शुरुआती पहचान और हर बच्चे के हिसाब से इलाज करना सबसे प्रमुख चीज है। एसडीएम आयुर्वेद महाविद्यालय के बालरोग विभाग (आयुर्वेद पीडियाट्रिक्स) के प्रोफ़ेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. पृथ्वीराज पुराणिक ने कहा कि आयुर्वेद में 'ऑटिज्म' को केवल एक बीमारी नहीं माना जाता है। पुराणिक ने बताया, ''इसके बजाय, इलाज की योजना बनाने से पहले डॉक्टर शारीरिक बनावट, पाचन, सोने के तरीके, व्यवहार और विकास के क्रम को ध्यान में रखते हुए हर बच्चे की अलग-अलग जांच करते हैं।'' बालरोग विभाग (आयुर्वेद पीडियाट्रिक्स) की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. चित्रलेखा ने कहा कि बीमारी को पूरी तरह ठीक करने का दावा करने के बजाय बच्चे की समग्र कार्यक्षमता को बेहतर बनाने पर ज़ोर दिया जाता है। उन्होंने कहा, ''हमारा मकसद बच्चे की विकास की क्षमता को बढ़ावा देना है। हर बच्चे की अलग-अलग ज़रूरतों के आधार पर, इलाज में खान-पान में बदलाव, दवाएं, ज़रूरत पड़ने पर पंचकर्म प्रक्रियाएं, जीवनशैली में बदलाव और माता-पिता की काउंसलिंग शामिल हो सकती है।'' उन्होंने कहा, ''हमारा लक्ष्य बच्चे की नींद, पाचन, ध्यान लगाने की क्षमता, भावनाओं पर नियंत्रण और जीवन की समग्र गुणवत्ता को बेहतर बनाना है, जबकि बच्चे का पारंपरिक इलाज भी जारी रहता है।'' आयुर्वेद से जुड़ी जन्म से पहले की पारंपरिक प्रक्रिया 'गर्भ संस्कार' का जिक्र करते हुए डॉ. ममता ने कहा कि गर्भधारण से पहले, अगर दंपति अच्छी तरह से योजना बनाएं और 'गर्भाधान संस्कार' की रस्म निभाएं, तो वे इस तरह की बीमारियों की आशंका को दूर कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ''गर्भ संस्कार के जरिए जन्म लेने वाले बच्चे अधिक सक्रिय होते हैं, उनकी प्रतिरक्षा क्षमता अच्छी होती है और उनका तंत्रिकातंत्र संबंधी विकास भी बेहतर होता है। आयुर्वेद मां और बच्चे, दोनों के समग्र आरोग्य को बढ़ावा देने के मकसद से, गर्भावस्था से पहले और उसके दौरान मां की सेहत, संतुलित पोषण और स्वस्थ जीवनशैली पर भी काफी जोर देता है।''
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नयी दिल्ली. देश के अधिकांश हिस्सों में रविवार को मानसूनी गतिविधियां और तेज हो गईं। मुंबई में भारी बारिश के कारण विमान परिचालन बाधित हुआ जबकि केरल, ओडिशा और झारखंड में मौसम को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी व्यापक बारिश हुई है। इस मानसून में मुंबई पर सबसे तगड़ी मार पड़ी है जहां रातभर हुई भारी बारिश के कारण छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर करीब एक घंटे तक विमानों का परिचालन रोकना पड़ा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने रविवार को मुंबई के लिए 'रेड अलर्ट' बरकरार रखा है और आगे भी लगातार बारिश तथा कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी वर्षा होने का अनुमान जताया है। विमान परिचालन बाधित होने से कई उड़ानें प्रभावित हुईं, जिससे यात्रियों को विमानों के प्रस्थान में औसतन 75 मिनट और आगमन में कम से कम 28 मिनट की देरी का सामना करना पड़ा। मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने एक बयान में कहा, "सुबह करीब 10.17 बजे खराब मौसम, जिसमें 42 नॉट तक की तेज हवाएं और भारी बारिश के कारण कम दृश्यता शामिल थी, की वजह से रनवे का संचालन प्रभावित हुआ।" हालांकि, मौसम में सुधार के बाद एक घंटे के भीतर हवाई पट्टी पर परिचालन सामान्य कर दिया गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मुंबई के कई इलाकों में पिछले 24 घंटों में 200 मिमी से अधिक और कुछ जगहों पर 300 मिमी तक बारिश दर्ज की गई है। ओडिशा में बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र गहरे अवदाब में बदल गया है, जिसके बाद राज्य प्रशासन ने सभी जिलों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, यह प्रणाली अगले एक दिन में चांदबली और दीघा के बीच उत्तरी ओडिशा तट को पार कर सकती है, जिससे ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भारी बारिश होने की संभावना है। केरल के भी अधिकांश हिस्सों में रविवार को व्यापक वर्षा हुई जिसके बाद कई क्षेत्रों में 'ऑरेंज' और 'येलो' अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने छह जुलाई को कन्नूर और कासरगोड तथा सात जुलाई को कोझिकोड, कन्नूर और कासरगोड के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भूस्खलन, मिट्टी धंसने और अचानक आने वाली बाढ़ के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को प्रशासन के निर्देशानुसार सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। दिल्ली के कई हिस्सों में रविवार को हुई मध्यम बारिश ने लोगों को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत दी। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, दोपहर 2.30 बजे तक छतरपुर में सबसे अधिक 49 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके बाद गुरुग्राम में 35 मिमी, महरौली में 18 मिमी, ग्रेटर नोएडा में 17 मिमी, नजफगढ़ में 8 मिमी और जनकपुरी में 7 मिमी बारिश हुई। मौसम विभाग ने दिन के समय आमतौर पर बादल छाए रहने और मध्यम बारिश होने का अनुमान जताया है जबकि अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। उधर झारखंड में, आईएमडी ने छह से नौ जुलाई तक सभी 24 जिलों में गरज-चमक, आकाशीय बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने को लेकर 'येलो अलर्ट' जारी किया है। मौसम केंद्र ने कहा, ''राज्य में बादल छाए रहने और अधिकांश हिस्सों में हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश होने की संभावना है, जबकि कुछ सुदूर स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है। इस दौरान अधिकतम तापमान में तीन से चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है।'' सोमवार को गढ़वा, पलामू, चतरा, हजारीबाग, लातेहार, लोहरदगा, गुमला और रांची में भारी बारिश होने का अनुमान है।
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लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने रविवार को राम मंदिर के मुद्दे को लेकर निशाना साधते हुए विपक्ष पर हिंदू आस्था का अपमान और मंदिर आंदोलन का विरोध करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसी को भी भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। नवीन ने दावा किया कि कांग्रेस पार्टी अप्रासंगिक हो गई है और 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी की ''साइकिल कबाड़खाने में भेज दी जाएगी''। उन्होंने जोर देकर कहा कि 'विकसित भारत' का लक्ष्य हासिल करने के लिए भाजपा को 2047 तक चुनाव जीतते रहना होगा। विपक्षी दलों के नेताओं को अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे में वित्तीय अनियमितता मामले में चुनौती देते हुए नवीन ने कहा कि हिंदू धर्म को इतना कमजोर मत समझिए कि आपके झांसे में आ जाएंगे। नितिन नवीन ने यहां राष्ट्र प्रेरणा स्थल में अवध क्षेत्र के शक्ति केन्द्र संयोजकों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा, ''राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल जी हिंदू धर्म को इतना कमजोर मत समझिए कि आपके झांसे में आएंगे, आपके भरमाने में आयेंगे।''
उन्होंने आरोप लगाया, ''हमने देखा है कि जब हिंदू देवी देवताओं का अपमान होता है तो आप मौन रहते हैं।''भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि देखा गया है कि जब राम चरित मानस का अपमान हुआ तो कांग्रेस के लोग मौन बैठे थे। नवीन ने कहा, ''आज कुछ लोग अयोध्या के श्रीराम मंदिर की चर्चा कर रहे हैं, ये वही लोग हैं जिन्होंने प्रभु श्रीराम के होने के अस्तित्व पर सवाल उठाया था। इन लोगों ने उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दायर किया कि प्रभु श्रीराम एक काल्पनिक चीज हैं, ये वही लोग हैं जिन्होंने कार सेवकों पर गोलियां चलाई थीं और अयोध्या की पवित्र नगरी पर खून की नदियां बहीं थीं।'' भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि आज वे लोग आस्था की बात करते हैं, ये घड़ियाली आंसू बहाने वाले लोग कभी हिंदू धर्म की आस्था की बात उठा ही नहीं सकते। उन्होंने कहा कि भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विहिप का संघर्ष और 500 वर्षों का आस्था का जो संघर्ष है, वह कहीं न कहीं अयोध्या के भव्य श्रीराम मंदिर के रूप में सामने दिखता है। नवीन ने कहा, ''मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं कि हमारा खून भी बह जाएगा तो हम इस बात की चिंता करेंगे कि प्रभु श्रीराम की आस्था से कोई खेल नहीं सकता, चाहे कितनी भी कुर्बानी देनी पड़े।'' नवीन ने कहा कि भाजपा सरकार ने स्पष्ट किया है कि हर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
विपक्ष पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, ''आपने तो खून की नदियां बहाई हैं, आपकी विरासत हिंदुओं पर गोली चलाने की रही है और हमारी विरासत देवी देवताओं की आस्था के लिए कुर्बान होने की रही है।'' नवीन ने कहा, ''हमने विरासत को संजोया है, उसको संभालेंगे भी और उस पर गर्व करने के लिए लोगों को प्रेरित करेंगे।'' नितिन नवीन ने कहा कि शक्ति केन्द्र के संयोजकों के बल पर 2027 में फिर से भाजपा का कमल खिलने को तैयार है। उन्होंने कहा, ''उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में भारत की आत्मा बसती है और उस उप्र में जहां पर प्रभु श्रीराम का जन्म का हुआ हो, वहां मर्यादा पुरुषोत्तम हमारे आदर्श ही नहीं हम सबको दिशा देते हैं। इस भूमि ने ऐसे महापुरुषों को जन्म दिया जिसने देश ही नहीं दुनिया को रास्ता दिया है।'' नवीन ने कहा, ''जब मैं यहां राष्ट्र प्रेरणा स्थल का भ्रमण कर रहा था तो गर्व की भावना आई, इस राष्ट्र प्रेरणा स्थल का श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में निर्माण किया गया है। यह आने वाले वर्षों तक युवा पीढ़ी को प्रेरणा देगा कि भाजपा का नेतृत्व किस प्रकार विरासत और विकास को लेकर कार्य करता है।'' भाजपा अध्यक्ष ने पूर्ववर्ती विपक्ष की सरकारों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, ''2017 के पहले के उत्तर प्रदेश की चर्चा करना चाहूंगा कि जिस प्रदेश ने केवल भ्रष्टाचार देखा, तुष्टिकरण की राजनीति देखी, परिवारवाद के जहर को देखा है।'' उन्होंने आरोप लगाया, ''उप्र में क्षत्रपों का राज रहता था, हर क्षेत्र का एक क्षत्रप होता था, वही सत्ता चलाता था, लखनऊ में बैठा मुख्यमंत्री एक अलग सरकार चलाता था और क्षत्रप एक अलग सरकार चलाता था।'' नवीन ने पिछले 12 वर्षों में देश और नौ वर्षों से उप्र में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की 'डबल इंजन' सरकार की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कहा, ''अब उप्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विजन है 'एक जिला-एक उत्पाद' और उस समय 'एक जिला-एक गुंडा' होता था।'' उन्होंने कहा कि अब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने हर जिले से ही नहीं हर कस्बे से गुंडा और माफिया को समाप्त करने का कार्य किया है। सम्मेलन को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, उप मुख्यमंत्रियों - केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक ने भी संबोधित किया। - कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को कहा कि अदाणी समूह न्यू टाउन में 2,000 बिस्तरों वाला एक अस्पताल बनाएगा, जिसमें से 1,000 बिस्तर गरीबों के मुफ़्त इलाज के लिए आरक्षित होंगे। मुख्यमंत्री ने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में नागरिक समाज संगठन के सदस्यों के साथ बातचीत के दौरान यह घोषणा की। इस दौरान उन्होंने राज्य में पिछले दो महीनों में अपनी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा, ''अदाणी समूह ने न्यू टाउन में 2,000 बिस्तरों वाला आधुनिक अस्पताल बनाने का लिखित वादा किया है। इनमें से 1,000 बिस्तर गरीबों के लिए होंगे...।'' हालांकि, प्रस्तावित निवेश, परियोजना की लागत या समय-सीमा के बारे में कोई और जानकारी नहीं दी गई।
- मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा में सरकारी स्तर पर आयोजित होने वाला 'श्रीकृष्ण जन्मोत्सव-2026' कार्यक्रम इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से एक सप्ताह पहले शुरू होगा। इस दौरान मथुरा-वृंदावन के प्रमुख चौराहों और मार्गों को सजाया जाएगा तथा विभिन्न स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जिलाधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह ने शनिवार को बताया कि श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को दिव्य और भव्य स्वरूप देने के लिए गीता शोध संस्थान परिसर स्थित यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के क्षेत्रीय कार्यालय में मंडलायुक्त नरेंद्र प्रताप की अध्यक्षता में तैयारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में महापर्व को पहले से अधिक भव्य बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। उन्होंने बताया कि परंपरा के अनुसार इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, चार सितंबर को मनाया जाएगा। हालांकि, राज्य के पर्यटन विभाग, संस्कृति विभाग, ब्रज तीर्थ विकास परिषद और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'श्रीकृष्ण जन्मोत्सव-2026' का शुभारंभ भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव से सात दिन पहले ही कर दिया जाएगा। जिलाधिकारी ने बताया कि इसके तहत प्रमुख चौराहों और श्रद्धालुओं के आवागमन वाले मार्गों पर मंच बनाकर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। ओपन एयर थिएटर और ऑडिटोरियम में देश, प्रदेश और ब्रज क्षेत्र के स्थानीय कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। प्रमुख स्थलों पर 'सेल्फी प्वाइंट' बनाए जाएंगे तथा एलईडी वैन और बड़ी स्क्रीन के माध्यम से श्रद्धालुओं के लिए मंदिरों के सजीव दर्शन की व्यवस्था की जाएगी। बैठक में मंडलायुक्त ने श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, सरल, सुगम और सुरक्षित दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा प्रमुख चौराहों, मार्गों और स्थलों को आकर्षक ढंग से सजाने के निर्देश दिए। उन्होंने बिजली के खंभों पर तिरंगा रोशनी करने लगाने और मुख्य प्रवेश मार्गों पर स्वागत द्वार बनाने को भी कहा। उन्होंने यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए रूट डायवर्जन योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने, पर्याप्त पार्किंग स्थलों की पहचान करने, दिशा-सूचक संकेतक लगाने तथा सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और भंडारों के लिए समय पर अनुमति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंडलायुक्त ने अग्निशमन वाहनों, एंबुलेंस और संकरी गलियों में बाइक एंबुलेंस की तैनाती के साथ पर्याप्त चिकित्सकों और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को भी कहा। उन्होंने सरकारी और निजी अस्पतालों की मैपिंग कराने के निर्देश दिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। बैठक में जिलाधिकारी के अलावा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) डॉ. पंकज कुमार वर्मा, ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी (डिप्टी सीईओ) सतीश चंद्र तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
- नयी दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गुजरात के साणंद में 'सीजी सेमी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट' इकाई के उद्घाटन का स्वागत करते हुए कहा कि यह भारत के प्रौद्योगिकी महाशक्ति बनने की दिशा में एक और उपलब्धि है। शाह ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि यह नयी इकाई ''प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक नयी छलांग'' का प्रतीक है। उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गुजरात के साणंद में नयी सीजी सेमी ओसैट इकाई का उद्घाटन, भारत के प्रौद्योगिकी महाशक्ति बनने की यात्रा में एक और उपलब्धि है।'' केंद्रीय मंत्री ने कहा, ''यह नयी इकाई भारत के विकास इंजन के रूप में गुजरात को और अधिक गति प्रदान करेगी तथा युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित करेगी।''
- कोलकाता। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को कहा कि नारेबाजी, व्यवधान और विधायी गतिरोध से कोई नेता नहीं बनता बल्कि तथ्य, तर्क और रचनात्मक विचार ही प्रभावी नेतृत्व की पहचान हैं। बिरला ने यहां लोकसभा सचिवालय के 'पार्लियामेंटरी रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसीज' (प्राइड) और पश्चिम बंगाल विधानसभा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 18वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा के सदस्यों के लिए दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि विधानमंडल चर्चा, विचार-विमर्श और समाधान का मंच है तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की वास्तविक शक्ति सार्थक संवाद, परस्पर सम्मान और जनकल्याण के प्रति साझा प्रतिबद्धता में निहित है। उन्होंने विधायकों से संवाद की गुणवत्ता को समृद्ध करने और सदन की चर्चाओं को जनहित तथा राज्य के विकास से जोड़ने का आह्वान किया। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को समाज के अंतिम कतार में खड़े व्यक्ति की आवाज बनना चाहिए और जनता की आकांक्षाओं, अपेक्षाओं तथा सपनों को पूरा करने के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास ही निर्वाचित प्रतिनिधियों की सबसे बड़ी शक्ति है और उनका दायित्व है कि वे लोगों की समस्याओं, चुनौतियों और अपेक्षाओं को प्रभावी ढंग से सदन में उठाएं। बिरला ने कहा कि विधानसभा सदस्य केवल अपने निर्वाचन क्षेत्रों के प्रतिनिधि नहीं, बल्कि पूरे राज्य के विकास और भविष्य के सहभागी भी हैं। उन्होंने उनसे व्यापक और समावेशी दृष्टिकोण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने और पश्चिम बंगाल को नयी दिशा देने वाली नीतियों तथा विकासोन्मुखी पहल में योगदान देने का आह्वान किया। इस बीच यहां कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से बातचीत में बिरला ने कहा कि दल-बदल विरोधी कानून में संशोधन किया जाए या नहीं, इस पर चर्चा कर निर्णय लेना राजनीतिक दलों का अधिकार है। बिरला ने यह टिप्पणी उस प्रश्न के जवाब में की, जिसमें उनसे दल-बदल विरोधी कानून के तहत विधायकों और सांसदों की अयोग्यता से संबंधित संवैधानिक एवं प्रक्रियात्मक व्यवस्था की समीक्षा के लिए उनके द्वारा गठित पीठासीन अधिकारियों की समिति के बारे में पूछा गया था। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि दल-बदल विरोधी कानून पर चर्चा करना और उसके संबंध में निर्णय लेना राजनीतिक दलों पर निर्भर करता है। उन्होंने यह भी बताया कि अतीत में विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के पीठासीन अधिकारियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में भी इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है। उनकी यह टिप्पणी तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में हाल के दिनों में हुए दल-बदल के घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि देते हुए बिरला ने कहा कि उनके विचार आज भी युवाओं और नेतृत्व दोनों के लिए प्रेरणास्रोत हैं और यह संदेश देते हैं कि समर्पण, चरित्र और समाज के प्रति प्रतिबद्धता से परिवर्तनकारी बदलाव संभव है। उन्होंने कहा कि बंगाल की समृद्ध आध्यात्मिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत ने सदैव देश का मार्गदर्शन किया है। कार्यक्रम के समापन सत्र में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर. एन. रवि ने समापन उद्बोधन दिया।बिरला ने पत्रकारों से यह भी कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा से संबंधित रिपोर्ट मानसून सत्र में लोकसभा में पेश की जायेगी। वर्मा को पद से हटाने के आधार की जांच के लिए तीन-सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। यह मामला पिछले साल वर्मा के राष्ट्रीय राजधानी स्थित आवास से नोटों की अधजली गड्डियां मिलने से संबंधित है। इस घटना के समय वह दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे और बाद में उनका तबादला इलाहाबाद उच्च न्यायालय कर दिया गया था। लोकसभा अध्यक्ष ने पिछले वर्ष 12 अगस्त को वर्मा को पद से हटाने के लिए एक बहुदलीय नोटिस स्वीकार करने के बाद इस समिति का गठन किया था। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा और 13 अगस्त तक चलेगा।
- नयी दिल्ली। एयरलाइन कंपनी अकासा एयर ने अपने बेड़े में 40वां विमान शामिल कर लिया है। अकासा एयर अपने नेटवर्क का लगातार विस्तार कर रही है।कंपनी ने शनिवार को जारी एक बयान में बताया कि उसे 40वें विमान के रूप में बोइंग 737 मैक्स 8-200 की डिलीवरी मिल गई है, जिसका पंजीकरण नंबर वीटी-वाईबीक्यू है। बयान के मुताबिक, "इस विमान की डिलीवरी उड़ान का पहला चरण अमेरिका के सिएटल से आइसलैंड के रेकजाविक तक था, जबकि अंतिम चरण मिस्र के काहिरा से बेंगलुरु तक की उड़ान के साथ संपन्न हुआ।" अकासा एयर के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विनय दुबे ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि 40वां विमान कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इसे लेकर काफी उत्साह है। एयरलाइन ने इस वर्ष अब तक बोइंग 737 मैक्स के नौ नए विमान अपने बेड़े में शामिल किए हैं। अगस्त, 2022 में वाणिज्यिक परिचालन शुरू करने वाली अकासा एयर फिलहाल देश के 28 घरेलू और सात अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए उड़ानें संचालित करती है। कंपनी ने बोइंग 737 मैक्स के 226 विमानों का ऑर्डर दिया हुआ है।
- सतना.। मध्यप्रदेश के सतना जिले में एक कुएं में गिरे बैल को बचाने के प्रयास में उसमें उतरे तीन लोगों की दम घुटने से मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति की हालत गंभीर है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। अमरपाटन थाना प्रभारी विजय सिंह परस्ते ने बताया कि यह घटना थाना क्षेत्र के खरमसेड़ा गांव के अहिरान टोला में शुक्रवार रात करीब साढ़े आठ बजे हुई। उन्होंने कहा कि रामनिवास कुशवाहा के लगभग 40 फुट गहरे कुएं में एक बैल गिर गया, जिसे निकालने के लिए रस्सी के सहारे एक-एक कर चार ग्रामीण कुएं में उतरे, लेकिन नीचे पहुंचते ही वे अचेत हो गए। परस्ते ने बताया कि बाहर मौजूद ग्रामीणों ने चारों को बाहर निकाला और उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमरपाटन पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने राहुल यादव (36), वीरेन्द्र यादव (40) और कृष्णदत्त यादव (26) को मृत घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि गंभीर स्थिति में रामचंद्र यादव (50) को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल सतना रेफर किया गया है। थाना प्रभारी ने कहा कि प्रारंभिक जांच में कुएं के भीतर ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैस की मौजूदगी के कारण चारों के अचेत होने की आशंका है। उन्होंने बताया कि कुएं में कम पानी होने के साथ काफी मात्रा में कचरा भी जमा था। परस्ते ने बताया कि तीनों मृतक एक ही परिवार के सदस्य थे। उन्होंने कहा कि शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दिया गया है और मामले की जांच की जा रही है।
- शिमला। मानसून के दौरान शिमला में रिमझिम बारिश, धुंध, सुहावना मौसम और बादलों से घिरी पहाड़ियों के आर्कषण से पर्यटकों का आगमन जारी है। पर्यटन उद्योग के अनुसार, इस मौसम में होटल में नियमित बुकिंग जारी है और अभी तक इसे रद्द करने संबंधी कोई बड़े मामले सामने नहीं आए हैं। पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों ने बताया कि इस पहाड़ी शहर में सप्ताहांत होटलों में कमरों की बुकिंग 40 से 50 प्रतिशत के बीच बनी हुई है, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 10 प्रतिशत से अधिक है। 'शिमला होटल्स एंड रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन' के उपाध्यक्ष प्रिंस कुकरेजा ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि बुकिंग रद्द होने का कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यदि बारिश से जुड़ी कोई बड़ी अप्रिय घटना नहीं होती है, तो उद्योग को इस पर्यटन सत्र के सुचारू रूप से चलने की पूरी उम्मीद है। यात्रा संबंधी उद्योग से जुड़े विजय कुमार ने बताया कि पर्यटक अब मानसून का अनुभव लेने के लिए बड़ी संख्या में हिमाचल प्रदेश आ रहे हैं, जबकि पहले के समय में कई लोग बरसात के मौसम में पहाड़ों की यात्रा करने से बचते थे। कानपुर से अपने परिवार के साथ आए बदरुद्दीन ने बताया कि यहां का मौसम बहुत सुहावना है और नजारा बेहद खूबसूरत है। वहीं, लुधियाना के अरविंद सिंह ने कहा कि मैदानी इलाकों में जारी भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए शिमला सबसे बेहतरीन जगह है।












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