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सुलतानपुर. उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले के गोसाईगंज थाना क्षेत्र में मंगलवार को एक ट्रक के चपेट में आने से बाइक सवार दो युवकों की मौत हो गयी। पुलिस ने यह जानकारी दी। गोसाईगंज के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) राघवेन्द्र रावत ने बताया कि आज थाना क्षेत्र के इनायतपुर पेट्रोल पंप के पास एक ट्रक ने बाइक सवार दो युवकों को रौंद दिया, जिससे दोनों की मौत हो गयी। एसएचओ ने बताया कि दोनों मृतकों की पहचान हो गयी है और उनकी उम्र 20 तथा 24 वर्ष है । उन्होंने बताया कि पुलिस ने मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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जयपुर. राजस्थान में एक व्यक्ति ने अपनी दो युवा बेटियों की कथित तौर पर कुल्हाड़ी मारकर हत्या कर दी। इस हमले में उसकी पत्नी और नातिन घायल हो गयी है। पुलिस ने इसकी जानकारी दी। नागौर के पुलिस अधीक्षक राममूर्ति जोशी ने बताया कि आरोपी मनाराम (57) ने अपनी दो बेटियों मीरा (26) और रेखा (20) की कथित तौर पर कुल्हाड़ी से हमला कर हत्या कर दी, और पत्नी तथा नाती को घायल कर दिया। उन्होंने बताया कि दोनों को उपचार के लिये अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।
उन्होंने बताया कि आरोपी के पुत्र की ओर से इस संबंध में उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। मकराना के वृत्ताधिकारी रविराज सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चला कि आरोपी मनाराम की मानसिक स्थिति खराब होने के कारण संभवतया यह कदम उठाया है। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद दोनों बेटियों के शव परिजनों को सौंप दिये गये हैं और पुलिस मामले की जांच कर रही है। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय भाषाओं में शिक्षा प्रदान करने के महत्व को रेखांकित करते हुए सोमवार को कहा कि भारत की भाषाओं को प्रोत्साहित करके विश्व स्तरीय नये ज्ञान एवं विज्ञान का सृजन संभव है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के 36वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा हासिल की गई प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों ने डिग्रियां, सर्टिफिकेट और डिप्लोमा प्राप्त किये हैं, उनमें से 55 प्रतिशत महिलाएं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे इस बात की खुशी है कि विश्वविद्यालय में डिग्रियां, सर्टिफिकेट और डिप्लोमा प्राप्त करने वालों में 55 प्रतिशत लड़कियां हैं। आज स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले छात्रों में आधे से अधिक लड़कियां हैं।'' मुर्मू ने कहा, ‘‘ उच्च शिक्षा तक पहुंच' को बढ़ावा देने में इग्नू की सराहनीय भूमिका रही है। मुझे यह जानकर विशेष प्रसन्नता हुई है कि कुल विद्यार्थियों में से करीब 50 प्रतिशत विद्यार्थी ग्रामीण परिवेश से हैं, तथा 50 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं।'' राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की प्रगति को देखकर उन्हें काफी प्रसन्नता हो रही है। सोमवार को इग्नू के 2,79,918 छात्रों ने डिग्रियां, सर्टिफिकेट और डिप्लोमा प्राप्त किए।
मुर्मू ने कहा कि नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति में वर्ष 2035 तक उच्च शिक्षा में सकल नामांकन दर 50 प्रतिशत हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही भारतीय भाषाओं में शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस शिक्षा नीति में अन्य महत्वपूर्ण सुझावों के साथ साथ भारतीय परंपराओं के प्रति गौरव का अनुभव करने तथा भारतीय भाषाओं को अध्ययन का माध्यम बनाने पर जोर दिया गया है। राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ भारतीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा देने से बड़े पैमाने पर विश्व स्तरीय नवीन ज्ञान-विज्ञान का सृजन संभव हो सकेगा।'' उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे यह जानकर प्रसन्नता है कि इग्नू के शिक्षक ‘स्वयंप्रभा' चैनलों और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से हिन्दी और अंग्रेजी के अतिरिक्त अनेक भारतीय भाषाओं में शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।'' मुर्मू ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि वर्तमान में 35 लाख से अधिक छात्र इस विश्वविद्यालय से शिक्षा प्रापत कर रहे हैं, इसमें 40 अन्य देशों के विद्यार्थी भी शामिल हैं। राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ शिक्षा की ज्योति से, अंधकार में प्रकाश फैलता है। मुझे यह जानकर विशेष प्रसन्नता हो रही है कि हजारों कैदी भी इग्नू से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। यह शिक्षा, कैदियों के पुनर्वास तथा कारावास से निकलने के बाद, एक बेहतर जिंदगी शुरू करने में उनके लिए सहायक होगी।'' उन्होंने कहा कि बहुत से विद्यार्थियों को, अपनी जिम्मेदारियों' और परिस्थितियों' की वजह से उच्च शिक्षा जारी रखने में कठिनाई होती है। राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने में इग्नू जैसे संस्थान मदद कर रहे हैं और इस प्रकार, दूरस्थ शिक्षा की व्यापक सामाजिक-आर्थिक उपयोगिता है। -
नयी दिल्ली. संसद की एक समिति ने सरकार से विदेशों में रहने वाले प्रत्येक भारतीय को पंजीकृत करने के लिए मौजूदा बाधाओं का अध्ययन कर नई पहल करने को कहा है ताकि भारतीय समुदाय को उनकी जड़ों के करीब लाया जा सके। लोकसभा में सोमवार को पेश भारतीय जनता पार्टी सांसद पी पी चौधरी की अध्यक्षता वाली स्थायी समिति की ‘‘ भारतीय समुदाय का कल्याण : नीतियां/योजनाएं विषय पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई रिपोर्ट में कहा गया है कि, प्रवासी कामगारों और छात्रों सहित भारतीय समुदाय का एक बड़ा हिस्सा विदेश में भारतीय मिशनों/पोस्ट में स्वयं को पंजीकृत नहीं कराता है। इसके अनुसार, समिति ने यह इच्छा व्यक्त की थी कि उन्हें इस तरह के पंजीकरण के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सभी प्रयास किये जाएं और मूल्यांकन के आधार पर नई पहल की जाए ताकि हमारे दूतावासों को भारतीय समुदाय के लिए ‘‘घर से दूर एक घर'' बनाया जा सके। समिति इस तथ्य से सहमत है कि चूंकि पंजीकरण स्वैच्छिक है, इसलिए 100 प्रतिशत भारतीय समुदाय को मिशनों के साथ पंजीकृत नहीं किया जा सकता है और संकट के समय उन तक पहुंचने के लिए पर्याप्त तंत्र बनाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, फिर भी समिति का विचार है कि पूर्ण डाटाबेस के लिए विदेशों में भारतीय मिशन/ पोस्ट उस देश में प्रत्येक भारतीय तक पहुंचने में अधिक सक्रियता से कार्य करे। समिति ने इस बात को दोहराया कि विदेशों में प्रत्येक भारतीय को पंजीकृत करने के लिए मौजूदा बाधाओं का अध्ययन कर नई पहल की जाए ताकि भारतीय समुदाय को उनकी जड़ों के करीब लाया जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन और चीन में मेडिकल और अन्य पाठ्यक्रमों का अध्ययन करने वाले हजारों भारतीय छात्रों की दुर्दशा के बारे में चिंतित समिति ने विदेश मंत्रालय को इन देशों से लौटने वाले मेडिकल छात्रों को एक बार छूट के आधार पर भारतीय निजी चिकित्सा संस्थानों में दाखिला लेने की अनुमति देने का प्रस्ताव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सामने रखने की इच्छा व्यक्त की थी। समिति ने यह इच्छा व्यक्त की थी कि विदेश मंत्रालय भारतीय छात्रों की चीन से वापसी की सुविधा के लिए मिशन के साथ समन्वित प्रयास करे। समिति ने यह नोट किया कि राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने एक योजना तैयार की थी जिसके तहत ऐसे भारतीय छात्र, जिनका असाधारण परिस्थितियों के कारण वास्तविक प्रशिक्षण नहीं हो पाया था और जिनको 30 जून 2022 को या उससे पहले विदेश में संबंधित संस्थानों द्वारा डिग्री के पूरा होने का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया था....उन्हें विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा (एफएमजीई) में उपस्थित होने और एफएमजीई अर्हता प्राप्त करने एवं भारत में पंजीकरण के पात्र होने के लिए दो वर्ष की अवधि का अनिवार्य रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप (सीआरएमआई) करना आवश्यक है। इसमें कहा गया है कि समिति आशा करती है कि राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग द्वारा तैयार किया गया यह विकल्प उन मेडिकल छात्रों को राहत प्रदान करेगा जो यूक्रेन, चीन में आपातकालीन स्थितियों के कारण स्वदेश लौट आए थे। -
नयी दिल्ली. देश के 11.1 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में बिजली का कनेक्शन तथा 27.4 प्रतिशत में खेल का मैदान नहीं है। सरकार द्वारा लोकसभा में पेश आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। लोकसभा में गजानन कीर्तिकर और कलाबेन मोहनभाई देलकर के प्रश्न के लिखित उत्तर में शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने शिक्षा पर एकीकृत जिला सूचना प्रणाली के वर्ष 2021-22 के आंकड़े पेश किए। इनमें कहा गया है कि देश में कुल 10,22,386 सरकारी स्कूलों में 7,42,087 में खेल के मैदान थे जबकि 9,08,774 में बिजली कनेक्शन उपलब्ध था। इस प्रकार से 72.6 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में खेल का मैदान और 88.9 प्रतिशत स्कूलों में बिजली कनेक्शन उपलब्ध है। प्रधान ने बताया कि हाल ही में स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने समग्र शिक्षा योजना के तहत 4,590 करोड़ रुपये के कुल बजट अनुमान के साथ देश भर के लगभग 1.20 लाख सरकारी स्कूलों में बुनियादी आधारभूत ढांचा के पुनरूद्धार पर एक परियोजना को मंजूरी दी है।
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छतरपुर. मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में सोमवार को दो कारों की आमने-सामने की भिडंत में मां-बेटी समेत तीन लोगों की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गये। यह जानकारी एक पुलिस अधिकारी ने दी। गढ़ीमलहरा पुलिस थाना प्रभारी टेक राम कुर्मी ने बताया कि यह घटना छतरपुर जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर सागर-कानपुर राजमार्ग पर सुबह साढ़े नौ बजे के आसपास हुई। उन्होंने कहा कि इस हादसे में कार में सवार तीन लोगों की मौत हो गई, जिनकी पहचान कार चालक देवेंद्र सोनी (26), गुड्डो सेन (45) और उसकी बेटी पूजा सेन (23) के रूप में की गयी है। उन्होंने बताया कि ये सभी महोबा के रहने वाले थे और हादसे के वक्त महोबा से छतरपुर आ रहे थे। कुर्मी ने बताया कि इस हादसे में दोनों कारों में सवार चार लोग घायल भी हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है।
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चंडीगढ़. हरियाणा के कुछ हिस्सों में कोरोना वायरस के मामलों में वृद्धि के मद्देनजर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने सोमवार को कहा कि सभी स्वास्थ्य कर्मियों के लिए और उन जगहों पर मास्क पहनना अनिवार्य होगा, जहां 100 से अधिक लोगों के जमा होने की उम्मीद है। चंडीगढ़ प्रशासन ने अलग से एक परामर्श जारी कर निवासियों को सार्वजनिक स्थानों पर कोविड से संबंधित “क्या करें और क्या न करें” का सख्ती से पालन करने के लिए कहा, जिसमें भीड़-भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनना और सामाजिक दूरी भी शामिल हैं। विज स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कोविड के प्रसार को रोकने के लिए की जाने वाली व्यवस्थाओं और तैयारियों पर एक बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। विज ने कहा कि अस्पतालों में खांसी-जुकाम के लक्षण वाले मरीजों की कोविड जांच अनिवार्य होगी।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने सोमवार को मेडिकल छात्रों की पेशेवर जिम्मेदारियों के बारे में दिशा-निर्देश जारी कर उन्हें सोशल मीडिया पर मरीजों और उनसे जुड़ी जानकारी को बेवजह पोस्ट नहीं करने को कहा। एनएमसी ने मेडिकल शिक्षकों के लिए दिशा-निर्देश में कहा है कि उन्हें छात्रों को डॉक्टर-मरीज संबंध के बारे में सही चीजों के बारे में बताना चाहिए तथा रोगियों की गरिमा और अधिकारों के लिए सम्मान बनाए रखना चाहिए। एनएमसी ने छात्रों के लिए स्थानीय भाषा सीखने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया ताकि रोगियों के साथ प्रभावी ढंग से संवाद किया जा सके और सामुदायिक कार्यक्रमों में भाग लिया जा सके। दिशा-निर्देश में कहा गया है कि मेडिकल छात्रों से उम्मीद की जाती है कि वे अपने सभी पेशेवर कार्यों के दौरान शालीन और उचित कपड़े पहनें। दिशा-निर्देशों के अनुसार, अपने क्लीनिकल प्रशिक्षण के दौरान मेडिकल छात्रों को रोगियों के समक्ष नम्रता से पेश आना चाहिए। दिशा-निर्देश में मेडिकल छात्रों को अपना ख्याल रखने और स्वस्थ जीवन शैली अपनाने, खासकर शराब, तंबाकू जैसे अन्य पदार्थों से परहेज करने की सलाह दी गई है। इसमें कहा गया है कि मादक द्रव्यों के सेवन के मामले में छात्रों से उपचार और परामर्श लेने की अपेक्षा की जाती है। ‘व्यक्तिगत विकास से संबंधित जिम्मेदारियों' के तहत, दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि छात्रों को मरीजों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और चिकित्सा जानकारी की गोपनीयता बनाए रखनी चाहिए। एनएमसी के एथिक्स एंड मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड (ईएमआरबी) के सदस्य डॉ योगेंद्र मलिक द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, ‘‘मेडिकल छात्रों को अपनी हद के बारे में पता होना चाहिए और उपचार के बारे में सलाह देने या अपने शिक्षकों से उचित निर्देश के बिना परामर्श देने से बचना चाहिए।'' दिशा-निर्देशों में छात्रों से अपने एमबीबीएस पाठ्यक्रम के दौरान शिक्षकों के मार्गदर्शन में शोध में शामिल होने का आग्रह किया गया है। साथ ही कहा गया है कि छात्रों को अनुसंधान के संबंध में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के दिशा-निर्देशों से परिचित होना चाहिए। दिशा-निर्देशों में मेडिकल छात्रों से आग्रह किया गया है कि वे मरीजों और मरीज से सबंधित जानकारी को सोशल मीडिया पर बेवजह पोस्ट न करें। इसमें रेखांकित किया गया है कि छात्रों को सोशल मीडिया की उपयोगिता के साथ-साथ इसके अंधाधुंध उपयोग से जुड़े संभावित व्यावसायिक खतरों के बारे में पता होना चाहिए। दिशा-निर्देश के मुताबिक छात्रों को परीक्षाओं के दौरान नकल से भी दूर रहने को कहा गया है। दिशा-निर्देशों में इस बात का उल्लेख किया गया है कि जब भी संभव हो, छात्रों को स्वास्थ्य शिविरों/स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों में भाग लेना चाहिए क्योंकि समुदायों के स्तर पर सीखना भी चिकित्सा शिक्षा का एक अनिवार्य घटक है। ‘‘समाज और राष्ट्रीय लक्ष्यों के प्रति जिम्मेदारियों'' के तहत दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि चिकित्सा एक सामाजिक और नैतिक प्रयास है, इसलिए मेडिकल छात्रों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने सभी पेशेवर प्रयासों में शालीन और उचित कपड़े पहनें। दिशा-निर्देश में कहा गया है कि समाज सेवा और राष्ट्रवाद की भावना चिकित्सा शिक्षा का अभिन्न अंग होनी चाहिए। मेडिकल शिक्षकों के लिए जारी दिशा-निर्देश में कहा गया है कि शिक्षकों को लगातार छात्रों को डॉक्टर-मरीज संबंध में सही चीजों के बारे में बताना चाहिए तथा रोगियों की गरिमा और अधिकारों के लिए सम्मान बनाए रखना चाहिए। दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि शिक्षकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि छात्र शारीरिक परीक्षण के दौरान रोगियों की पीड़ा के प्रति संवेदनशील हों। छात्रों को नैतिकता के बारे में भी बताने को कहा गया है। दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि शिक्षकों को छात्रों के साथ अपने संवाद में निष्पक्ष होना चाहिए और क्षेत्र, धर्म, जाति, लिंग, यौन अभिरूचि, भाषा, सामाजिक-आर्थिक वर्ग या किसी अन्य कारक के आधार पर भेदभाव नहीं करना चाहिए। दिशा-निर्देशों में यह भी रेखांकित किया गया है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रत्येक मामले के आधार पर की जानी चाहिए और शिक्षक को अपने सहयोगियों या लोगों के सामने छात्रों को अपमानित करने से बचना चाहिए।
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की संशोधित किताबों को अपने स्कूलों में चालू सत्र से ही पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला किया है, जिसमें 12वीं कक्षा की इतिहास की किताबों से मुगल बादशाह और दरबारों के अंश हटा दिये गए हैं। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा, ‘‘हम अपने छात्रों को एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाते हैं, जो भी संशोधित संस्करण में है उसका पालन किया जाएगा।'' अपर मुख्य सचिव (बेसिक और माध्यमिक शिक्षा) दीपक कुमार ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त किए।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने मुगल साम्राज्य से संबंधित अध्यायों को हटाकर कक्षा 12वीं के इतिहास के पाठ्यक्रम में संशोधन किया है। इतिहास की पाठ्यपुस्तक में मुगल दरबारों के अध्यायों को एनसीईआरटी द्वारा संशोधित संस्करण में हटा दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप सीबीएसई, उत्तर प्रदेश और एनसीईआरटी पाठ्यक्रम का पालन करने वाले अन्य राज्य बोर्डों सहित सभी बोर्डों के पाठ्यक्रम में बदलाव होंगे। संशोधित पाठ्यक्रम 2023-24 शैक्षणिक वर्ष के लिए लागू किया जाएगा। दीपक कुमार ने कहा, ''हम एनसीईआरटी की किताबों का पालन करते हैं और संशोधित संस्करण में जो कुछ भी उपलब्ध है, हम उसका पालन राज्य के स्कूलों में करेंगे। -
भुवनेश्वर. भुनेश्वर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने अस्पताल में भर्ती मरीजों और अपने छात्रों के आहार में पोषक अनाज (ज्वार, बाजरा, रागी, मक्का आदि) को शामिल किया है ताकि उन्हें स्वास्थ्यवर्धक और पोषणयुक्त भोजन मुहैया कराया जा सके। संस्थान के कार्यकारी निदेशक आशुतोष बिस्वास ने कहा कि इस पहल की शुरुआत ‘उत्कल दिवस' यानी ओडिशा दिवस और जी-20 ‘जन भागीदारी अभियान' के अवसर पर की गई। बिस्वास ने कहा, ‘‘अपने मरीजों और छात्रों के आहार में पोषक अनाज को शामिल कर हम वाकई बहुत रोमांचित हैं। हमें विश्वास है कि यह मरीजों को आवश्यक फाइबर प्रदान करेगा जिसकी तेजी से ठीक होने के लिए उन्हें जरूरत है।'' उन्होंने कहा, ‘‘छात्रों को पोषक अनाज से अच्छा पोषण मिलने के साथ खनिज भी मिलेगा। इससे हम उनकी वजन की समस्या और प्रतिरक्षा क्षमता का ध्यान भी रख सकते हैं।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज आपदा के प्रभाव से निपटने के लिए विश्व से एकीकृत रवैया अपनाने का आह्वान किया है। पांचवें आपदा अनुकूल बुनियादी ढांचे पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन - आई सी डी आर आई-2023 में श्री मोदी ने कहा कि निकटता से जुडे विश्व में आपदाओं के प्रभाव से निपटने की गतिविधि स्थानीय और अलग-थलग न होकर एकीकृत होनी चाहिए।
श्री मोदी ने कहा कि प्रत्येक देश विभिन्न तरह की आपदाओं का सामना करते हैं और समाज आपदाओं को झेल सकने वाले बुनियादी ढांचे से संबंधित स्थानीय जानकारी विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचों को आधुनिक बनाते समय इस प्रकार की जानकारी का इस्तेमाल सूझबूझ से किये जाने की आवश्यकता है। स्थानीय जानकारी से परिपूर्ण आधुनिक प्रौद्योगिकी आपदाओं से निपटने में मददगार हो सकती है। श्री मोदी ने कहा कि अगर इनका दस्तावेज अच्छी तरह से तैयार किया जाए तो स्थानीय जानकारी विश्व स्तर की श्रेष्ठ जानकारी हो सकती है।श्री मोदी ने कहा कि कुछ ही वर्षों में 40 से अधिक देश आपदा अनुकूल बुनियादी ढांचे के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं तथा बडे और छोटे देशों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन रहा है। ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ के देश इस मंच पर एकसाथ आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि न सिर्फ सरकारें बल्कि वैश्विक संस्थान, डोमेन विशेषज्ञ और निजी क्षेत्र भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।इस वर्ष आपदा अनुकूल बुनियादी ढांचे के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का विषय लचीले और समेकित बुनियादी ढांचा प्रदान करने से संबंधित है। आपदा अनुकूल बुनियादी ढांचे के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की पहल को लेकर श्री मोदी ने कहा लचीले द्वीप राष्ट्रों के बुनियादी ढांचों की पहल से कई द्वीप राष्ट्र लाभान्वित होते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष बुनियादी ढांचा अनुकूल गतिवर्धक कोष की घोषणा की गई थी। इस पचास मिलियन डॉलर के कोष ने विकासशील राष्ट्रों के उत्साह को बढाया है। उन्होंने कहा कि वित्तीय संसाधनों की वचनबद्धता इन पहलों की सफलता की कुंजी है।जी-20 की अध्यक्षता को लेकर श्री मोदी ने कहा कि भारत अपनी जी-20 की अध्यक्षता के जरिये विश्व को एक साथ भी ला रहा है। भारत कई कार्यसमूहों में आपदा अनुकूल बुनियादी ढांचे के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को पहले ही शामिल कर चुका है। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन से निकलने वाले समाधान को उच्च स्तर के वैश्विक नीति निर्धारण में स्थान मिलेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बुनियादी ढांचे की अनुकूलता विशेषकर जलवायु जोखिम और आपदाओं में योगदान करने के लिए आपदा अनुकूल बुनियादी ढांचे के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए एक अवसर है। -
जम्मू. जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले की विश्व प्रसिद्ध बसोहली चित्रकारी को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग मिला है। राष्ट्रीय कृषि एव ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की ओर से मंजूरी दिये जाने के बाद यह जीआई टैग दिया गया। एक आधिकारिक प्रवक्ता ने सोमवार को यह जानकारी दी। किसी उत्पाद, सामान या विशेषता के लिए जीआई टैग मूल उत्पादकों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है और तीसरे पक्ष द्वारा उनके अनधिकृत उपयोग को रोकता है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात को भी बढ़ावा देता है और इसके उत्पादकों और पक्षकारों को आर्थिक समृद्धि प्रदान करता है। प्रवक्ता ने कहा, ‘‘दिसंबर 2020 में हस्तशिल्प और हथकरघा विभाग (जम्मू-कश्मीर) के परामर्श से नाबार्ड द्वारा नौ उत्पादों की जीआई-टैगिंग प्रक्रिया शुरू की गई थी। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार इन उत्पादों को जीआई टैग प्रदान कर दिया गया है।'' बसोहली चित्रकारी के अलावा बसोहली पश्मीना ऊनी उत्पाद (कठुआ), चिकरी काष्ठ शिल्प (राजौरी), भद्रवाह राजमा (डोडा), मुश्कबुदजी चावल (अनंतनाग), कलादी (उधमपुर), सुलाई शहद (रामबन), अनारदाना (रामबन) और लद्दाख लकड़ी नक्काशी (लद्दाख) के लिए भी जीआई-टैगिंग हासिल करने की वकालत की जा रही है।
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पुणे. महाराष्ट्र में कोविड-19 और इन्फ्लुएंजा के मामलों में वृद्धि के मद्देनजर सतारा जिला प्रशासन ने सरकारी और अर्ध-सरकारी कार्यालयों, कॉलेजों और बैंकों में कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है। जिला कलेक्टर रुचेश जयवंशी द्वारा सोमवार को जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे साप्ताहिक बाजार, बस स्टैंड, मेले, मण्डली, और शादियों जैसे भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर मास्क का उपयोग करें और सामाजिक दूरी और स्वच्छता बनाए रखें। जिला प्रशासन द्वारा जारी एक नोट के अनुसार, कोविड-19 और इन्फ्लुएंजा के मामलों में तेजी के मद्देनजर, महाराष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग को एहतियाती उपाय करने का निर्देश दिया गया है। निर्देश के अनुसार, सरकारी और अर्ध-सरकारी कार्यालयों, कॉलेजों और बैंकों के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए मास्क अनिवार्य करने का आदेश जारी किया है। प्रशासन ने कहा, ‘‘नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे साप्ताहिक बाजारों, बस स्टैंडों, मेलों, सभाओं और शादियों जैसे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क का उपयोग करें, सामाजिक दूरी और स्वच्छता बनाए रखें।'' स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, महाराष्ट्र में सोमवार को कोविड़-19 के 248 नए मामले सामने आने के बाद अब तक कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 81,45,590 हो गई है। वहीं, राज्य में उपचाराधिन मरीजों की संख्या 3,532 है। विभाग के मुताबिक, सोमवार को कोरोना वायरस से एक व्यक्ति की मौत के बाद अब तक राज्य में महामारी से जान गंवाने वालों की कुल संख्या 1,48,445 हो गई है। महाराष्ट्र में रविवार को कोविड-19 के 562 नए मामले दर्ज किए गए थे। -
फर्रुखाबाद (उप्र). फर्रुखाबाद जिले के कायमगंज क्षेत्र में सोमवार को सुबह भंडारे का प्रसाद बनाने के दौरान गैस सिलिंडर में लगी आग से झुलस कर एक बुजुर्ग महिला और उसके पौत्र की मृत्यु हो गई तथा 12 अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। पुलिस सूत्रों ने यहां बताया कि कायमगंज कोतवाली क्षेत्र के भटासा गांव निवासी बृजभान सिंह जाटव के घर देवी के जागरण कार्यक्रम का प्रसाद सुबह करीब पांच बजे बनाया जा रहा था। इसी दौरान अचानक गैस सिलिंडर में आग लग गई। इस घटना में बृजभान की पत्नी शांति देवी (65) और उनके तीन वर्षीय पौत्र आर्यन की झुलस कर मौके पर ही मौत हो गयी। उन्होंने बताया कि इस हादसे में करीब 12 अन्य लोग भी गंभीर रूप से घायल हो गये। उन्हें विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
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अधिकारियों को हिचकने की जरुरत नहीं: मोदी
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए आज राजनीतिक इच्छाशक्ति की कोई कमी नहीं है और अधिकारियों को बगैर हिचकिचाहट के भ्रष्ट लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, भले ही वह कितना भी ताकतवर हो। उन्होंने भ्रष्टाचार को लोकतंत्र और न्याय की राह में सबसे बड़ा रोड़ा करार देते हुए यह भी कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की प्रमुख जिम्मेदारी भारत को इससे मुक्त कराना है। सीबीआई के हीरक जयंती समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि देश और इसके नागरिकों की इच्छा है कि किसी भी भ्रष्ट व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को दशकों तक भ्रष्टाचार से लाभ हुआ, उन्होंने एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाया है, जो जांच एजेंसियों पर हमला करता है, लेकिन एजेंसियों को भ्रष्टों की शक्ति और उन्हें कलंकित करने के लिए उनके बारे में फैलाई गई कहानियों से विचलित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘ये लोग आपका ध्यान भटकाते रहेंगे, लेकिन आपको अपने काम पर ध्यान देना होगा। किसी भी भ्रष्ट व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए। हमारे प्रयासों में कोई कोताही नहीं होनी चाहिए। यह देश की इच्छा है, यह देश के लोगों की इच्छा है। देश, कानून और संविधान आपके साथ है।'' मोदी ने कहा, ‘‘आज देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति में कोई कमी नहीं है। आपको (सीबीआई) कहीं भी हिचकने, कहीं रुकने की जरूरत नहीं है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे भारत की आर्थिक शक्ति बढ़ रही है, अड़चनें पैदा करने वाले भी बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘देश के सामाजिक ताने-बाने, एकता और भाईचारे के साथ ही उसके आर्थिक हितों व संस्थानों पर भी नित्य प्रहार बढ़ते चले जा रहे है... और इसमें जाहिर तौर पर भ्रष्टाचार का पैसा लगता है। इसलिए हमें अपराध और भ्रष्टाचार की प्रकृति को समझना होगा और इसके कारणों का पता लगाने के लिए जड़ तक पहुंचना होगा।'' मोदी ने कहा कि भारत को आजादी के समय भ्रष्टाचार की विरासत मिली। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि इसे दूर करने के बजाय कुछ लोग इस बीमारी को पोषित करते रहे। उन्होंने कहा कि ‘ट्रिलियन डॉलर' पर चर्चा इन दिनों मजबूत अर्थव्यवस्था को संदर्भित करती है, लेकिन एक दशक पहले जब सीबीआई ने अपनी स्वर्ण जयंती मनाई थी, तो ऐसे आंकड़ों का उपयोग देश में घोटालों का वर्णन करने के लिए किया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘एक प्रतियोगिता चल रही थी कि कौन भ्रष्टाचार का नया रिकॉर्ड स्थापित करेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि घोटालों और दंडमुक्ति की मौजूदा भावना के कारण व्यवस्था ध्वस्त हो गई और नीतिगत पंगुता के माहौल ने विकास को एक ठहराव में ला दिया था। उन्होंने कहा कि इंटरनेट बैंकिंग और यूपीआई, पहले की ‘फोन बैंकिंग' की समस्या के बिल्कुल विपरीत है, जहां प्रभावशाली लोगों के फोन कॉल के आधार पर हजारों करोड़ रुपये के ऋण मंजूर किए जाते थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि लाभार्थी जनता का पैसा लेकर भाग गए। उन्होंने कहा कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम की वजह से अब तक भगोड़े अपराधियों की 20,000 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। उन्होंने सीबीआई से कहा कि वह भ्रष्टाचारियों के खिलाफ अपनी जांच में तेजी लाने के तरीके अपनाए, क्योंकि लंबित जांच भ्रष्टाचारियों को सुरक्षा प्रदान करती है, जबकि निर्दोष पीड़ित रहते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘भ्रष्टाचार कोई सामान्य अपराध नहीं होता। भ्रष्टाचार, गरीब से उसका हक छीनता है, अनेक अपराधों को जन्म देता है। भ्रष्टाचार, लोकतंत्र और न्याय के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा होता है।'' उन्होंने कहा कि सरकार ने मिशन मोड पर काले धन और बेनामी संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। उन्होंने कहा, भ्रष्टाचारियों के अलावा हम भ्रष्टाचार के कारणों से भी लड़ रहे हैं।''
मोदी ने कहा कि पेशेवर और कुशल संस्थानों के बिना विकसित भारत का निर्माण संभव नहीं है और इसलिए सीबीआई की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, ‘‘सीबीआई ने अपने काम से, अपने कौशल से सामान्यजन को एक भरोसा दिया है। आज भी जब किसी को लगता है कि किसी मामले की गुत्थी सुलझ नहीं रही है, तो आवाज उठती है कि मामला सीबीआई को दे देना चाहिए।'' उन्होंने कहा कि जहां भी भ्रष्टाचार होता है, युवाओं को समान अवसर नहीं मिलते हैं और केवल एक विशेष पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा मिलता है। भ्रष्टाचार को प्रतिभा का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए मोदी ने कहा कि यह भाई-भतीजावाद और परिवारवाद को प्रोत्साहित करता है। उन्होंने कहा कि जब ये दोनों बढ़ते हैं,तो देश की ताकत प्रभावित होती है और जब ताकत कमजोर होती है, तो इसका असर विकास पर भी पड़ता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचारियों ने देश का खजाना लूटने का एक और तरीका बना रखा था, जो दशकों से चला आ रहा था और ये था, सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से लूट। उन्होंने कहा, ‘‘आज जनधन, आधार, मोबाइल की तिकड़ी से हर लाभार्थी को उसका पूरा हक मिल रहा है।''
कार्यक्रम के दौरान, विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति का पुलिस पदक और सीबीआई के सर्वश्रेष्ठ जांच अधिकारियों के लिए स्वर्ण पदक प्राप्त करने वालों के लिए एक अलंकरण समारोह आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री ने पुरस्कार विजेताओं को पदक प्रदान किए। उन्होंने शिलांग, पुणे और नागपुर स्थित सीबीआई के नवनिर्मित कार्यालय परिसरों का उद्घाटन भी किया। सीबीआई के हीरक जयंती समारोह वर्ष पर प्रधानमंत्री ने एक डाक टिकट और विशेष सिक्का भी जारी किया तथा सीबीआई के ट्विटर हैंडल की भी शुरुआत की। इससे पहले, इस अवसर पर सीबीआई निदेशक सुबोध कुमार जायसवाल ने कहा कि ब्यूरो भ्रष्टाचार का मुकाबला करने वाली एजेंसी से एक बहु-विषयक जांच और अंतरराष्ट्रीय ख्याति के अभियोजन संगठन के रूप में विकसित हुआ है। उन्होंने कहा कि ब्यूरो ने मूल्यवान सिफारिशें करके देश में वित्तीय प्रणालियों को साफ करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जो जांच और संचालन के दौरान इसकी दंडात्मक और निवारक भूमिका से उभरा। इस अवसर पर कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल भी उपस्थित थे। सीबीआई की स्थापना भारत सरकार के गृह मंत्रालय की ओर से 01 अप्रैल, 1963 को जारी एक संकल्प के जरिये की गई थी।
- - अयोध्या। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर के एक संत ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मंदिर में निवास करने की पेशकश की है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी को संसद सदस्य के तौर पर आवंटित घर खाली करने का नोटिस मिलने के बाद हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत ज्ञान दास की प्रतिष्ठित गद्दी के उत्तराधिकारी संजय दास ने उनसे मंदिर परिसर में रहने की पेशकश की। दास ने राहुल गांधी को अपना खुला समर्थन देते हुए कहा कि अगर राहुल गांधी हनुमानगढ़ी परिसर में आकर रहना चाहते हैं तो उनका स्वागत है। संजय दास ने कहा, ‘‘राहुल गांधी का पवित्र नगरी में अयोध्या के संत स्वागत करते हैं, हम उन्हें अपना निवास स्थान प्रदान करते हैं।'' दास संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।
- सूरत (गुजरात)। लोकसभा की सदस्यता गंवाने वाले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ‘ मोदी उपनाम’ टिप्पणी को लेकर आपराधिक मानहानि मामले में अपनी दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देते हुए यहां सोमवार को सत्र अदालत में एक अपील दायर की और उन्हें जमानत दे दी गई। गांधी को ‘मोदी उपनाम’ के संदर्भ में उनकी 2019 की टिप्पणी के लिए निचली अदालत ने दो साल की जेल की सजा सुनाई थी।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आर पी मोगेरा की अदालत ने कहा कि वह मामले में शिकायतकर्ता-भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक और गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी को नोटिस जारी करने के बाद 13 अप्रैल को दोषसिद्धि के निलंबन के लिए गांधी की याचिका पर सुनवाई करेगी। सत्र अदालत ने प्रतिवादी (पूर्णेश मोदी) को 10 अप्रैल तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा।राहुल की कानूनी टीम के एक सदस्य ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के खिलाफ राहुल गांधी की अपील के साथ-साथ उनकी जमानत और सजा के निलंबन के लिए एक अर्जी दायर की है। (सत्र) अदालत ने इस मामले की सुनवाई की और उन्हें जमानत दे दी। अदालत उनकी दोषसिद्धि पर रोक के संबंध में 13 अप्रैल को सुनवाई करेगी।’’उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में पेश होने की जरूरत नहीं होगी।अपराह्न करीब तीन बजे मामले की सुनवाई के समय कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और पार्टी के अन्य नेता अदालत कक्ष में मौजूद थे।राहुल गांधी और प्रियंका अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ एक लग्जरी बस में सत्र अदालत परिसर पहुंचे। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी के कई अन्य नेता सूरत में मौजूद थे।
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नयी दिल्ली. भोपाल-नयी दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस ने शनिवार को अपनी शुरुआती यात्रा के दौरान अधिकतम 161 किलोमीटर प्रति घंटे की गति हासिल की, जबकि इसकी अपेक्षित गति सीमा 160 किलोमीटर प्रति घंटा है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि भोपाल और नयी दिल्ली के बीच यात्रा के समय को एक घंटे कम करने वाली ट्रेन ने आगरा और मथुरा में राजा की मंडी के बीच 161 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार को छुआ। आगरा छावनी और निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों के बीच पटरी के एक छोटे से हिस्से को गति सीमा के अनुरूप डिजाइन किया गया है। इससे पहले रेल मंत्रालय ने एक आदेश में कहा था कि रानी कमलापति-नयी दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन आगरा छावनी-तुगलकाबाद खंड पर अधिकतम 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को 11वीं वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई।
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नयी दिल्ली. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के प्रशासन ने एक समिति गठित की है, जो चिकित्सा उपकरणों की खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने में मदद करने और कर्मचारियों को खरीद संबंधी गतिविधियों से मुक्त करने के लिए किसी सरकारी एजेंसी या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) की सेवा लेगी। हाल ही में जारी एक कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, 10 सदस्यीय समिति खरीद सहायता एजेंसी के तौर पर किसी सरकारी एजेंसी या पीएसयू की सेवा लेने के फायदों और तौर-तरीकों की पड़ताल करेगी। एम्स के निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास ने कहा कि आमतौर पर भंडारण और खरीद का काम एक जैसे कर्मचारी ही संभालते हैं, जो सुशासन के अनुसार नहीं है। ज्ञापन में डॉ. श्रीनिवास के हवाले से कहा गया है कि आमतौर पर बाहर से भर्ती किए गए कर्मचारी खरीद प्रक्रिया को संभालते हैं, जो उचित नहीं है। भंडार कर्मियों की संख्या सीमित है। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में अंतरिम व्यवस्था के तौर पर खरीद का काम प्रशासनिक कैडर के कर्मी संभालते हैं, जो खरीद के मामलों में औपचारिक रूप से प्रशिक्षित नहीं होते हैं। एम्स प्रशासन ने बताया कि कुछ मामलों में कुछ विभागों और भंडार गृहों में खरीद संसाधनों की कमी के कारण खरीद प्रक्रिया दो साल से लंबित है।
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नयी दिल्ली. देश में बिजली की खपत मार्च, 2023 में 0.74 प्रतिशत घटकर 127.52 अरब यूनिट (बीयू) रह गई। यह 31 माह में पहली मौका है जबकि बिजली की खपत घटी है। सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। बिजली की खपत में कमी का प्रमुख कारण देश में पश्चिमी विक्षोभ से भारी बारिश और मार्च में तापमान कम रहना है। इससे पहले अगस्त, 2020 में बिजली की खपत में गिरावट आई थी। उस समय बिजली की खपत अगस्त, 2019 के 111.52 अरब यूनिट से दो प्रतिशत से अधिक घटकर 109.21 अरब यूनिट रह गई थी। इस दौरान कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन प्रतिबंधों के कारण बिजली की खपत में कमी आई थी। विशेषज्ञों ने अनुमान जताया है कि आर्थिक गतिविधियों में और सुधार के साथ-साथ तापमान चढ़ने से अप्रैल में बिजली की मांग और खपत बढ़ेगी। आंकड़ों के अनुसार, बिजली की खपत मार्च, 2022 में 128.47 अरब यूनिट (बीयू) थी। यह मार्च, 2021 में 120.63 अरब यूनिट थी। वहीं मार्च, 2020 में यह 98.95 अरब यूनिट रही थी। आंकड़ों से पता चलता है कि मार्च, 2023 में अधिकतम बिजली की मांग यानी एक दिन में सबसे अधिक आपूर्ति बढ़कर 209.01 गीगावॉट हो गई। मार्च, 2022 में अधिकतम बिजली की मांग 199.43 गीगावॉट और मार्च, 2021 में 185.89 गीगावॉट थी। वहीं महामारी से पहले मार्च, 2020 में बिजली की अधिकतम मांग 170.16 गीगावॉट थी।
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मुजफ्फरनगर (उप्र). मुजफ्फरनगर जिले के खतौली थाना क्षेत्र में दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर टैंकर और कार की टक्कर में एक महिला समेत तीन लोगों की मौत हो गयी और दो अन्य लोग घायल हो गये। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी। खतौली थाने के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) संजीव कुमार ने बताया कि दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर खतौली बाईपास के पास शनिवार शाम एक कार के एक टैंकर से टकरा जाने से एक महिला सहित तीन लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान राजेश देवी (55), सोहनवीर (30) और अंकुर (25) के रूप में की गई है। उन्होंने बताया कि यह घटना उस समय हुई, जब ये लोग कार से मेरठ से मुजफ्फरनगर आ रहे थे। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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नयी दिल्ली. डॉ. (श्रीमती) सुदेश धनखड़ को आज वनस्थली विद्यापीठ में आयोजित एक दीक्षांत समारोह में भूजल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए अर्थशास्त्र में पीएचडी की उपाधि प्रदान की गयी। उनकी पीएचडी का विषय था - "राजस्थान के झुंझुनूं जिले में भूजल संसाधन और सिंचित कृषि की संवहनीयता का आकलन" और डॉक्टरेट की यह उपाधि महामहिम राज्यपाल कलराज मिश्र द्वारा उन्हें प्रदान की गयी। सुदेश धनखड़ उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की धर्मपत्नी हैं। उन्होंने सितंबर, 2013 में वनस्थली विद्यापीठ में पीएचडी के लिए अपना नामांकन कराया था और 14 मार्च, 2022 को अपनी पीएचडी पूरी कर ली। इस गंभीर शोध के लिए उन्होंने झुंझुनूं जिले से रियल टाइम आंकड़े एकत्रित और समेकित किये जोकि एक लंबी और समय लेने वाली प्रक्रिया थी। राजस्थान में जन्मी श्रीमती धनखड़ जल संरक्षण के मुद्दे पर लगातार कार्य करती रही हैं। इसके साथ ही महिला-सशक्तिकरण और भोजन की बर्बादी रोकने जैसे विषयों पर भी वे काम कर रही हैं। इस संबंध में जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, डॉ. धनखड़ ने पीयूसी से लेकर पीएचडी तक अपनी पूरी पढ़ाई वनस्थली विद्यापीठ से ही की है। उन्होंने वनस्थली विद्यापीठ में 1973 में प्री यूनिवर्सिटी कोर्स (पीयूसी) में प्रवेश लिया था और उसके बाद 1979 में विश्वविद्यालय से स्नातक और स्नातकोत्तर किया। उनके पीएचडी शोध की थीम थी: ‘सतत विकास'।
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नई दिल्ली। पूर्व क्रिकेटर सलीम दुर्रानी का निधन 2 अप्रैल को जामनगर में हो गया। वह 88 साल के थे। वह काफी समय से बीमार थे। हर कोई क्रिकेट में उनके योगदान को याद कर रहा है। उन्होंने करीब 13 साल तक भारतीय क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व किया। वह दर्शकों की मांग पर छक्का मारने के लिए मशहूर थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व क्रिकेटर सलीम दुर्रानी के निधन पर गहरा दुख प्रकट किया है। पीएम मोदी ने पूर्व क्रिकेटर को अपने आप में एक संस्था बताया। प्रधानमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि उन्होंने क्रिकेट की दुनिया में भारत के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भारत को दिलाई यादगार जीत
सलीम दुर्रानी ने भारत को टेस्ट में कई यादगार जीत दिलाईं। साल 1961-62 में इंग्लैंड के खिलाफ कोलकाता और मद्रास टेस्ट में टीम इंडिया को जिताने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। तब उन्होंने कोलकाता टेस्ट में 8 और मद्रास (चेन्नई) टेस्ट में 10 विकेट लिए थे। करीब 10 साल बाद उन्होंने एक ऐसी ही यादगार जीत भारत को वेस्टइंडीज के खिलाफ पोर्ट ऑफ स्पेन टेस्ट में दिलाई थी। उस मुकाबले में उन्होंने क्लाइव लॉयड और गैरी सोबर्स के विकेट झटके थे।
सलीम दुर्रानी का क्रिकेट करियर
सलीम दुर्रानी ने जनवरी 1960 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया। वह करीब 13 साल तक भारत के लिए खेले। इस दौरान उन्होंने 29 टेस्ट मैचों में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। टेस्ट में उनके नाम 1202 रन दर्ज हैं। क्रिकेट के सबसे बड़े प्रारूप में उनके नाम एक शतक और 7 अर्धशतक हैं। टेस्ट में उनका हाईएस्ट स्कोर 104 रन रहा। इसके अलावा फस्र्ट क्लास क्रिकेट में उन्होंने 8545 रन बनाए। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सलीम दुर्रानी के 14 शतक और 45 अर्धशतक लगाए। फस्र्ट क्लास क्रिकेट में उनका हाईएस्ट स्कोर 137 रन नॉट आउट रहा। - जयपुर। राजस्थान सरकार ने प्रसिद्ध लक्खी मेलों में जाने वाले श्रद्धालुओं को रोडवेज बसों के किराए में 50 प्रतिशत छूट देने का फैसला किया है। यह छूट एक अप्रैल से प्रभावी हो गई। एक सरकारी बयान के अनुसार अब राज्य के 14 जिलों के मेलों में राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की बसों में यात्रा करने पर आधा किराया ही लगेगा। यह रियायती सुविधा एक अप्रैल, 2023 से लागू कर दी गई है। इसके अनुसार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किराया राशि में 50 प्रतिशत छूट के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। राजस्थान रोडवेज की साधारण एवं एक्सप्रेस बसों में मेला अवधि के दौरान किराये में छूट मिलेगी। इसके तहत अजमेर में पुष्कर मेला और दरगाह उर्स, करौली में कैलादेवी मेला, भरतपुर में झील का बाडा, जैसलमेर में श्रीरामदेवरा मेला, सीकर में खाटूश्याम जी, चूरू में सालासर बालाजी, हनुमानगढ़ में गोगामेड़ी, डूंगरपुर में बेणेश्वर धाम, सवाईमाधोपुर में रणथम्भौर गणेश जी, टोंक में डिग्गी कल्याण जी, अलवर में भर्तृहरि/पाण्डूपोल, श्रीगंगानगर में बुडढ़ा जोहड़ गुरूद्वारा, बीकानेर में फाल्गुन (मुकाम) एवं चित्तौड़गढ़ में सांवलिया सेठ-जलझूलनी एकादशी मेलों के लिए छूट का प्रावधान किया गया है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री द्वारा बजट 2023-24 में छूट के संबंध में घोषणा की गई थी। इस स्वीकृति से राज्य सरकार पर लगभग 12 करोड़ रुपए का वार्षिक वित्तीय भार पड़ने का अनुमान है।
- सतना (मप्र) । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को आदिवासी रानी दुर्गावती की वीरता का महिमामंडन करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्र की रक्षा एवं सम्मान को सर्वोपरि रखा और कितने ही बार विदेशी आक्रांताओं को नाकों चने चबा दिए। उन्होंने कहा,‘‘ हमें रानी दुर्गावती के जीवन से सीख लेनी चाहिए और व्यक्तिगत छोटे स्वार्थों के लिए देश को आहत करने के बारे में कभी नहीं सोचना चाहिए।'' भागवत ने सतना जिले के जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र मझगवां स्थित दीनदयाल शोध संस्थान के महर्षि वाल्मीकि परिसर में वीरांगना रानी दुर्गावती की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा, ‘‘रानी दुर्गावती का शौर्य एवं पराक्रम प्रसिद्ध है। कितने ही बार विदेशी आक्रांताओं को उन्होंने नाकों चने चबा दिए। घर के अंदर भेदिया नहीं होता तो वह कभी हारती नहीं। उनका स्मरण करते समय हम सबको यह सबक सीखनी चाहिए कि अपने छोटे स्वार्थों के कारण देश हित को धक्का लगाने की प्रवृत्ति हम लोगों में कभी न पनपे। इसकी हमको चिंता करनी पड़ेगी।'' भागवत ने आगे कहा, ‘‘रानी दुर्गावती कभी भी दूसरों की वीरता के कारण नहीं हारी। उनके साथ विश्वासघात हुआ। किसके द्वारा हुआ? अपने लोगों द्वारा ही हुआ।'' उन्होंने कहा कि जो लोग 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा थे, उन्होंने रानी दुर्गावती के साहस और सर्वोच्च बलिदान से प्रेरणा ली। रानी दुर्गावती 1550 से 1564 तक तत्कालीन गोंडवाना साम्राज्य की शासक रही। उन्हें मुगलों के खिलाफ अपने राज्य की रक्षा करने के लिए याद किया जाता है। अपनी सेना का नेतृत्व करते हुए उन्हें युद्ध के मैदान में मुगलों से लड़ते हुए चोटें आईं। उसे युद्ध के मैदान को छोड़ने की सलाह दी गई थी, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया और एक खंजर निकाला और 24 जून, 1564 को मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में खुद को मार डाला। रानी दुर्गावती के जीवन प्रसंगों से जुड़ी अनेक हृदयस्पर्शी बातों को उल्लेख करते हुए भागवत ने कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती के विषय में उनकी शौर्य गाथा और उनके पराक्रम से सभी परिचित हैं। दीनदयाल शोध संस्थान के इस परिसर में उनकी प्रतिमा लगाने से उनकी छवि जनमानस में निरंतर उभरती रहेगी और लोग उनकी सद्प्रेरणा से सदैव प्रेरित होते रहेंगे। उन्होंने रानी दुर्गावती के कौशल को बताते हुए कहा कि वह प्रजाप्रिय एवं प्रजा की हितैषी तथा न्याय पालक थीं। उन्होंने अपनी प्रजा के कल्याण एवं प्रजा के हित में अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। इस अवसर पर भागवत ने महर्षि वाल्मीकि परिसर में जनजातीय गौरव एवं पोषक अनाजों पर लगाई गई आकर्षक प्रदर्शनी को भी देखा।
















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