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नयी दिल्ली. रक्षा मंत्रालय ने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए चालू वित्तवर्ष 2025-26 में दिसंबर के अंत तक 1.82 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। सरकार ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। सरकार के मुताबिक रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने जनवरी 2025 से देश की रक्षा तैयारियों को बढ़ाने के लिए 3.84 लाख करोड़ रुपये से अधिक के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिसमें स्वदेशीकरण के माध्यम से आधुनिकीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 की समीक्षा और संशोधन, रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को प्रोत्साहन, मित्र देशों के साथ बेहतर जुड़ाव, भारत मैत्री शक्ति सहित रक्षा ऋण और रक्षा प्रतिष्ठानों के निकट प्रतिबंधित दूरी मानदंडों का युक्तिकरण प्रगति पर हैं।'' बयान में कहा गया कि इसके अलावा, निर्यात प्रोत्साहन निकाय का गठन, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) में गुणवत्ता आश्वासन 4.0 और उद्योग 4.0 का कार्यान्वयन और रक्षा उपकरणों के लिए एक राष्ट्रीय एकीकृत परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना ‘‘प्रगति पर है''। रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2025 को ‘‘सुधारों का वर्ष'' घोषित किया था।
बयान में कहा गया कि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में,मंत्रालय ने तीन सेनाओं के समन्वय को मजबूत करने, रक्षा तैयारियों को बढ़ाने, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और कल्याणकारी वितरण तंत्र में सुधार लाने के उद्देश्य से व्यापक सुधारों को लागू करने में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। बयान के मुताबिक मंत्रालय में किए गए ये सुधार, एक आधुनिक, एकीकृत और भविष्य के लिए तैयार रक्षा प्रणाली के निर्माण की दिशा में ‘‘संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण'' को दर्शाते हैं। इसमें कहा गया, ‘‘रक्षा अधिग्रहण परिषद ने जनवरी 2025 से देश की रक्षा तैयारियों को बढ़ाने के लिए कुल 3.84 लाख करोड़ रुपये से अधिक के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिसमें स्वदेशीकरण के माध्यम से आधुनिकीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है।'' बयान के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 में, दिसंबर 2025 के अंत तक, मंत्रालय ने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए 1.82 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। मंत्रालय ने बताया कि उसने दिसंबर 2025 के अंत तक पूंजी अधिग्रहण बजट के तहत 80 प्रतिशत (लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये) व्यय कर लिया है। इस आवंटन का उपयोग सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण पर किया जा रहा है। बयान के मुताबिक, ‘‘रक्षा मंत्रालय का कुल पूंजीगत व्यय भी 76 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिसमें पूंजी अधिग्रहण के अलावा बुनियादी ढांचे, भूमि, अनुसंधान और विकास आदि पर किया गया व्यय शामिल है।'' सरकार ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने और आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई गई है। इसमें रक्षा विनिर्माण लाइसेंसों को सुव्यवस्थित करना, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की क्षमताओं का आकलन करना और रक्षा खरीद में मांग-आपूर्ति विश्लेषण को बढ़ाने के लिए बाजार खुफिया रिपोर्ट तैयार करना शामिल है। मंत्रालय ने कहा कि संयुक्त संचालन नियंत्रण केंद्र की स्थापना, सशस्त्र बलों के लिए दृष्टिकोण 2047 का प्रकाशन, भविष्य संचालन विश्लेषण समूह का गठन, संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और एकीकृत क्षमता विकास योजना को अंतिम रूप देना ‘‘कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं''। इसमें कहा गया है कि इस दिशा में उठाए गए कदम ऑपरेशन सिंदूर की योजना और क्रियान्वयन के दौरान फलदायी साबित हुए। मंत्रालय ने कहा कि युद्ध और नेतृत्व पदों में महिलाओं की भूमिकाओं का विस्तार, सैन्य पर्यटन को बढ़ावा देना और परिचालन बुनियादी ढांचे और आवास के लिए एक दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने का काम पूरा हो चुका है। -
शिमला. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में बृहस्पतिवार को एक खड़े ट्रक से एक गाड़ी के टकरा जाने के कारण तीन महिलाओं समेत चार लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, बृहस्पतिवार तड़के तीन बजे चारों दोस्त कुल्लू लौट रहे थे, तभी उनकी गाड़ी सड़क किनारे एक चबूतरे से टकराकर एक खड़े ट्रक से जा भिड़ी। पुलिस ने कहा कि वे नव वर्ष की पूर्व संध्या और स्थानीय टैटू कलाकार सतपाल का जन्मदिन मनाने के लिए कसोल आए थे। अधिकारियों ने बताया कि टक्कर इतनी भीषण थी कि वाहन पूरी तरह से क्षत-विक्षत हो गया, जिससे कुल्लू जिले के सतपाल (25) , कशीश तथा लाहौल एवं स्पीति की अंकिता की मौके पर ही मौत हो गई। अधिकारियों के अनुसार चौथी रतिंजलि को मंडी के मेडिकल कॉलेज नेरचौक रेफर किया गया था, लेकिन इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। रतिंजलि भी कुल्लू की रहने वाली थी। पुलिस के मुताबिक, इस दुर्घटना के सिलसिले में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच चल रही है। उसने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव मृतक के परिजनों को सौंप दिये जाएंगे।
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राजकोट. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 11 जनवरी को राजकोट शहर में वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन (वीजीआरसी) का उद्घाटन करेंगे। एक मंत्री ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। राज्य के कृषि मंत्री एवं सरकार के प्रवक्ता जीतू वाघाणी ने बताया कि कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र पर केंद्रित यह दो दिवसीय सम्मेलन 11 और 12 जनवरी को राजकोट स्थित मारवाड़ी विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य क्षेत्र में उभरते आर्थिक, औद्योगिक और सांस्कृतिक अवसरों को प्रदर्शित करना और उन पर प्रकाश डालना है। वाघाणी ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी 11 जनवरी को राजकोट में कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र के लिए दूसरे वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इस आयोजन के लिए 6,000 से अधिक लोगों ने पंजीकरण करा लिया है और 21 देशों के प्रतिनिधियों एवं व्यापारिक हस्तियों के भाग लेने की उम्मीद है।''
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नयी दिल्ली. इस साल जनवरी से मार्च तक की अवधि में दक्षिण और मध्य भारत में अच्छी बारिश होने की संभावना है, जबकि पंजाब और हरियाणा सहित उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने बृहस्पतिवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी। महापात्रा ने हालांकि बताया कि देश के कुछ हिस्सों में औसत से कम बारिश के पूर्वानुमान का रबी की फसल पर असर पड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में सिंचाई की अच्छी व्यवस्था है और मानसून की अच्छी बारिश के कारण जलाशय भरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर, बिहार और विदर्भ के कुछ हिस्सों में एक से तीन दिन अतिरिक्त ठंड पड़ने की संभावना है, जबकि राजस्थान में कम ठंड पड़ने का अनुमान है। महापात्रा ने कहा कि देश के अधिकांश क्षेत्रों में जनवरी में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम रहने का अनुमान है। हालांकि, उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों के साथ-साथ प्रायद्वीपीय भारत में भी सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने दिसंबर महीने में लगभग सूखे मौसम का कारण पश्चिमी विक्षोभों की अनुपस्थिति को बताया, जो आमतौर पर देश के उत्तर-पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में बारिश और गरज के साथ बौछारें लाते हैं। महापात्रा ने कहा, ‘‘पश्चिमी विक्षोभ या तो उत्तर की ओर बढ़ रहे हैं या बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसका कारण जलवायु परिवर्तन है।'' उन्होंने कहा कि दिसंबर से मार्च के दौरान कम बर्फबारी दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम में अच्छी बारिश के संकेतकों में से एक है। महापात्रा ने कहा कि वर्तमान में ला नीना की स्थिति बनी हुई है - यानी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह ठंडी हो रही है - और वैश्विक पूर्वानुमान ने मार्च तक ईएनएसओ तटस्थ स्थितियों का अनुमान जताया है। उन्होंने कहा, ‘‘ जून-जुलाई तक ईएनएसओ की तटस्थ परिस्थितियां हावी रहने की संभावना है। इससे यह संकेत मिलता है कि यह अच्छी मानसूनी बारिश का सूचक है।'' महापात्रा ने कहा कि 2025, 1901 के बाद से आठवां सबसे गर्म वर्ष था, जिसमें अखिल भारतीय वार्षिक औसत भूमि सतह वायु तापमान 1991-2020 के दीर्घकालिक औसत से 0.28 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। अब तक का सबसे गर्म वर्ष 2024 था, जब पूरे भारत में तापमान दीर्घकालिक औसत से 0.65 डिग्री सेल्सियस अधिक था। आईएमडी के महानिदेशक ने कहा कि शीतकालीन (जनवरी-फरवरी) और मानसून-पूर्व (मार्च-मई) ऋतुओं के दौरान अखिल भारतीय मौसमी औसत तापमान दीर्घकालिक औसत से अधिक रहा, जिसमें क्रमशः 1.17 डिग्री सेल्सियस और 0.29 डिग्री सेल्सियस की विसंगति देखी गई।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 70 वर्ष की आयु में बेंगलुरु से कन्याकुमारी तक 702 किलोमीटर की दूरी साइकिल से तय करने वाले कर्नाटक के विधायक एस. सुरेश कुमार से फोन पर बातचीत की और उनके साहस व जज्बे की जमकर तारीफ की।
पीएम मोदी ने कहा कि बेंगलुरु से कन्याकुमारी तक साइकिल से यात्रा करना न केवल तारीफ के काबिल है, बल्कि यह समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा भी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से उबरने के बाद यह उपलब्धि हासिल करना उनकी हिम्मत और कभी हार न मानने वाले जज्बे को दर्शाता है। साथ ही, यह फिटनेस को लेकर एक मजबूत संदेश भी देता है।प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने स्वयं सुरेश कुमार से फोन पर बात कर उनके इस प्रयास के लिए बधाई दी। वहीं, एस. सुरेश कुमार ने ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन आना मेरे लिए बेहद खुशी की बात है। उन्होंने कन्याकुमारी तक 702 किलोमीटर साइकिल चलाने के लिए मुझे बधाई दी। उन्हें यह जानकर भी खुशी हुई कि 51 वर्षों बाद यह मेरी कन्याकुमारी तक दूसरी साइकिल यात्रा थी, वह भी एक गंभीर बीमारी से उबरने के बाद।”बेंगलुरु के राजाजीनगर से विधायक सुरेश कुमार एक दुर्लभ बीमारी चिकनगुनिया एन्सेफेलोपैथी (सीई) से पीड़ित हो गए थे। बीमारी के कारण वह महीनों तक बिस्तर पर रहने को मजबूर थे और अपनी उंगलियां तक हिलाने में असमर्थ थे। स्वस्थ होने के बाद उन्होंने 12 लोगों के एक समूह के साथ ‘राजाजीनगर पेडल पावर’ के बैनर तले बेंगलुरु से कन्याकुमारी तक 702 किलोमीटर की साइकिल यात्रा शुरू की, जिसे उन्होंने पांच दिनों में सफलतापूर्वक पूरा किया। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से महाभारत के एक श्लोक से प्रेरणा लेते हुए दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कामना की है कि हर प्रयास में सफलता मिले। नए साल में संकल्प की सिद्धि हो।पीएम मोदी ने कहा- ‘दृढ़संकल्प और इच्छाशक्ति से नए साल में आपके संकल्प की सिद्धि हो’
उन्होंने ने आज शुक्रवार सुबह एक्स पर लिखा, ”मेरी कामना है कि आने वाले समय में आपको अपने हर प्रयास में सफलता मिले। दृढ़संकल्प और इच्छाशक्ति से नए साल में आपके संकल्प की सिद्धि हो।”प्रधानमंत्री मोदी ने यह श्लोक को भी किया उद्धृतप्रधानमंत्री मोदी ने इस पोस्ट के साथ ”उत्थातव्यं जागृतव्यं योक्तव्यं भूतिकर्मसु। भविष्यतीत्येव मनः कृत्वा सततमव्यथैः।।” श्लोक को भी उद्धृत किया है।यह श्लोक महाभारत के उद्योगपर्व (135/29) कायह श्लोक महाभारत के उद्योगपर्व (135/29) का है। इसका अर्थ है, “उठना चाहिए, जागते रहना चाहिए, और ऐश्वर्य (कल्याणकारी) कार्यों में लग जाना चाहिए। ‘मेरा कार्य अवश्य सिद्ध होगा’ ऐसा मन में दृढ़ निश्चय करके, लगातार विषाद (चिंता) रहित होकर कर्म करते रहना चाहिए।” (इनपुट-एजेंसी) - नई दिल्ली। सार्वजनिक सुविधा बढ़ाने और राजमार्गों का उपयोग करने वाले लोगों को सक्रिय किए जाने के बाद होने वाली परेशानियों से बचाने हेतु, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने 1 फरवरी 2026 से सभी नए जारी किए गए फास्टैग वाली कारों (कार/जीप/वैन श्रेणी फास्टैग) के लिए ‘नो योर व्हीकल (Know Your Vehicle (KYV) की प्रक्रिया को बंद करने का फैसला किया है।आधिकारिक बयान के अनुसार, यह सुधार सड़क का उपयोग करने वाले उन लाखों आम लोगों को बड़ी राहत देगा, जिन्हें वाहनों के मान्य दस्तावेज होने के बावजूद फास्टैग के सक्रिय होने के बाद जारी होने के उपरांत केवाईवी संबंधी जरूरतों के कारण असुविधा और देरी का सामना करना पड़ रहा था।कारों के लिए पहले से जारी मौजूदा फास्टैग के लिए, अब केवाईवी रूटीन जरूरत के तौर पर अनिवार्य नहीं होगा। केवाईवी केवल वैसे खास मामलों में जरूरी होगा जहां ढीले फास्टैग, गलत जारी होने, या गलत इस्तेमाल से जुड़ी समस्याएं जैसी शिकायतें मिलती हैं। किसी भी शिकायत के न होने पर, मौजूदा कार फास्टैग के लिए किसी केवाईवी की जरूरत नहीं होगी।वहीं, सटीकता, अनुपालन और प्रणाली की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के साथ-साथ उपयोग करने वाले लोगों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाने हेतु, एनएचएआई ने साथ ही जारीकर्ता बैंकों के लिए सक्रिय होने से पहले सत्यापन के नियमों को भी मजबूत किया है:-• अनिवार्य वाहन-आधारित सत्यापन: फास्टैग को सक्रिय करने की अनुमति केवल वाहन डेटाबेस से वाहन के विवरण के सत्यापन के बाद ही दी जाएगी।• सक्रिय होने के बाद कोई सत्यापन नहीं: सक्रिय होने के बाद सत्यापन की अनुमति देने वाला पहले का प्रावधान बंद कर दिया गया है।• केवल असाधारण मामलों में आरसी-आधारित सत्यापन: जहां वाहन का विवरण वाहन पर उपलब्ध नहीं है, वहां जारीकर्ता बैंकों को पूरी जवाबदेही के साथ सक्रिय किए जाने से पहले पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) का उपयोग करके विवरण को सत्यापित करना होगा।• ऑनलाइन फास्टैग शामिल: ऑनलाइन चैनलों के माध्यम से बेचे जाने वाले फास्टैग भी बैंकों द्वारा पूर्ण सत्यापन के बाद ही सक्रिय किए जायेंगे।इन उपायों से सभी गाड़ियों का सत्यापन पहले ही पूरा हो जाना सुनिश्चित होगा, जिससे फास्टैग के सक्रिय होने के बाद ग्राहकों से बार-बार फॉलो-अप करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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भोपाल. देश में वर्ष 2025 के दौरान विभिन्न कारणों से कुल 166 बाघों की मौत हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 40 अधिक है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के ताजा आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई। आंकड़ों के अनुसार, देश का ‘टाइगर स्टेट' कहा जाने वाला मध्यप्रदेश बाघों की मौत के मामलों में शीर्ष पर रहा, जहां वर्ष 2025 में 55 बाघ मृत पाए गए। इसके बाद महाराष्ट्र में 38, केरल में 13 और असम में 12 बाघों की मौत दर्ज की गई।
इन 166 मृत बाघों में 31 शावक शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों के बीच क्षेत्रीय संघर्ष मौत का प्रमुख कारण रहा है, जिसका मुख्य कारण जंगलों में स्थान की कमी है। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में देश में 126 बाघों की मौत हुई थी जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 166 हो गई। महाराष्ट्र के ब्रह्मपुरी वन मंडल में वर्ष 2025 में बाघ की पहली मौत दो जनवरी को दर्ज की गई, जहां एक वयस्क नर बाघ मृत पाया गया। इसके तीन दिन बाद मध्यप्रदेश के पेंच बाघ अभयारण्य में एक मादा बाघ की मौत हुई। हालिया मामला 28 दिसंबर को मध्यप्रदेश के सागर के उत्तर क्षेत्र से सामने आया, जहां एक वयस्क नर बाघ मृत पाया गया। बाघों पर लंबे समय से शोध कर रहे वन्यजीव विशेषज्ञ जयराम शुक्ला ने कहा कि देश में बाघों की आबादी संतृप्ति स्तर पर पहुंच रही है। उन्होंने कहा, “बाघों के लिए क्षेत्र तय करने की जगह सीमित होती जा रही है। इसी वजह से वे आपस में संघर्ष कर रहे हैं और इसकी कीमत जान देकर चुका रहे हैं।” मध्यप्रदेश के संदर्भ में शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2014 के बाद से राज्य में बाघों की संख्या में लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया, “यह वृद्धि अभूतपूर्व है। सवाल यह है कि इतने बाघों के लिए क्षेत्र कहां है? मध्यप्रदेश में आबादी तेजी से बढ़ने के कारण संघर्ष और मौतें भी बढ़ी हैं।” अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस 2023 पर जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश में बाघों की संख्या 2018 में 2,967 थी, जो 2022 में बढ़कर 3,682 हो गई। इसमें सालाना करीब छह प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
अधिकारियों के अनुसार, दुनिया की लगभग 75 प्रतिशत बाघ आबादी भारत में पाई जाती है।
इस संबंध में मध्यप्रदेश के प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सुभारंजन सेन ने बताया कि राज्य में बाघों की संख्या सबसे अधिक होने के कारण यहां मौतों की संख्या भी अपेक्षाकृत ज्यादा है। उन्होंने बताया, “हम मरने वाले हर बाघ की निगरानी करते हैं और प्रत्येक मामले की गहन जांच की जाती है। शिकार से जुड़े मामलों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाती।” सेन ने बताया कि विभाग के पास मजबूत ‘फील्ड पेट्रोलिंग सिस्टम' है और एनटीसीए द्वारा निर्धारित सभी मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। उन्होंने बताया, “हर बाघ की मौत को तब तक शिकार का मामला माना जाता है, जब तक इसके विपरीत ठोस साक्ष्य न मिल जाएं।” अधिकारी ने बताया कि राज्य में प्रभावी ‘स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स' (एसटीएसएफ) भी कार्यरत है, जो इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस से जुड़े मामलों सहित संगठित वन्यजीव अपराध के खिलाफ सफलतापूर्वक काम कर रही है। सेन के अनुसार, मध्यप्रदेश में वर्ष 2014 में बाघों की संख्या 308 थी, जो 2018 में बढ़कर 526 और 2022 में 785 हो गई। उन्होंने बताया कि हर चार वर्ष में होने वाली देशव्यापी बाघ गणना इस वर्ष शुरू हो चुकी है और मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है। सेन ने बताया कि अब तक शिकार के 10 मामलों में 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और कानूनी कार्रवाई जारी है।-file photo
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नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को सकारात्मक बदलाव लाने का एक ‘‘बड़ा अवसर'' बताते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इसके लाभ समाज के सभी वर्गों, विशेष रूप से वंचितों तक पहुंचें। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि एआई भारत की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका के रूप में उभर रहा है और आने वाले दशकों में इसका देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), रोजगार और उत्पादकता में महत्वपूर्ण योगदान होगा। उन्होंने कहा कि सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी बाधाओं को कम करने के लिए एआई का उपयोग किया जाना चाहिए।
मुर्मू ने कहा, ‘‘एआई भारत की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका के रूप में उभर रहा है। भारत तेजी से विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।'' उन्होंने कहा कि सरकार उद्योग जगत के साझेदारों और शिक्षाविदों के सहयोग से यह सुनिश्चित कर रही है कि भारत न केवल प्रौद्योगिकी को अपनाए बल्कि इसके माध्यम से एक जिम्मेदार भविष्य का निर्माण भी करे। राष्ट्रपति ने नागरिकों से नयी शिक्षा नीति के माध्यम से विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में काम करने और भारत को ज्ञान की महाशक्ति तथा प्रौद्योगिकी-आधारित समावेशी और समृद्ध राष्ट्र में बदलने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार स्कूलों में एआई के उपयोग को बढ़ावा दे रही है और बच्चों को तकनीकी नेतृत्व के लिए तैयार कर रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि ‘एआई लैब्स' और ‘एआई मॉडल' के माध्यम से बच्चों में नवोन्मेषी सोच और भविष्य को ध्यान में रखते हुए कौशल विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शुरू की गई ‘स्किल द नेशन चैलेंज' का उद्देश्य बड़े पैमाने पर एआई सीखने और नवाचार को बढ़ावा देना है। -
नयी दिल्ली. तीन दशक से अधिक समय से जारी सिलसिले को बरकरार रखते हुए भारत और पाकिस्तान ने एक द्विपक्षीय समझौते के तहत अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का बृहस्पतिवार को आदान-प्रदान किया। सूची का आदान-प्रदान ऐसे समय किया गया है जब पिछले साल मई में चार दिनों तक चले सैन्य संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि सूची का आदान-प्रदान परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले को रोकने वाले एक समझौते के प्रावधानों के तहत हुआ। इसने कहा कि नयी दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच राजनयिक माध्यम से सूची का आदान-प्रदान एक साथ किया गया।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत और पाकिस्तान ने आज राजनयिक माध्यम से नयी दिल्ली और इस्लामाबाद में एक साथ परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का आदान-प्रदान किया।'' समझौते पर 31 दिसंबर, 1988 को हस्ताक्षर किए गए थे और 27 जनवरी, 1991 को यह लागू हुआ। समझौते के तहत दोनों देशों के बीच, हर वर्ष की पहली जनवरी को अपने-अपने परमाणु प्रतिष्ठानों के बारे में एक-दूसरे को सूचित करने का प्रावधान है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘यह दोनों देशों के बीच ऐसी सूचियों का लगातार 35वां आदान-प्रदान है। इस सूची का पहला आदान-प्रदान एक जनवरी, 1992 को हुआ था।''भारत और पाकिस्तान ने परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का आदान-प्रदान किया
नयी दिल्ली. तीन दशक से अधिक समय से जारी सिलसिले को बरकरार रखते हुए भारत और पाकिस्तान ने एक द्विपक्षीय समझौते के तहत अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का बृहस्पतिवार को आदान-प्रदान किया। सूची का आदान-प्रदान ऐसे समय किया गया है जब पिछले साल मई में चार दिनों तक चले सैन्य संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि सूची का आदान-प्रदान परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले को रोकने वाले एक समझौते के प्रावधानों के तहत हुआ। इसने कहा कि नयी दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच राजनयिक माध्यम से सूची का आदान-प्रदान एक साथ किया गया।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत और पाकिस्तान ने आज राजनयिक माध्यम से नयी दिल्ली और इस्लामाबाद में एक साथ परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का आदान-प्रदान किया।'' समझौते पर 31 दिसंबर, 1988 को हस्ताक्षर किए गए थे और 27 जनवरी, 1991 को यह लागू हुआ। समझौते के तहत दोनों देशों के बीच, हर वर्ष की पहली जनवरी को अपने-अपने परमाणु प्रतिष्ठानों के बारे में एक-दूसरे को सूचित करने का प्रावधान है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘यह दोनों देशों के बीच ऐसी सूचियों का लगातार 35वां आदान-प्रदान है। इस सूची का पहला आदान-प्रदान एक जनवरी, 1992 को हुआ था।'' -
नयी दिल्ली. एयर मार्शल नागेश कपूर ने बृहस्पतिवार को भारतीय वायु सेना के उप प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला। इस नियुक्ति से पहले, उन्होंने दक्षिण पश्चिमी वायु कमान (एसडब्ल्यूएसी) के वायु अधिकारी कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्य किया था। वह एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी का स्थान लेंगे, जो चार दशकों तक राष्ट्र की सेवा करने के बाद बुधवार को सेवानिवृत्त हुए। भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, एयर मार्शल नागेश कपूर ने एक जनवरी 2026 को भारतीय वायु सेना के उप प्रमुख का पदभार ग्रहण किया। दिसंबर 1986 में भारतीय वायु सेना की फ्लाइंग ब्रांच में कमीशन प्राप्त करने वाले एयर मार्शल कपूर के पास भारतीय वायु सेना के विभिन्न लड़ाकू और प्रशिक्षण विमानों को उड़ाने का व्यापक अनुभव है।'' एयर मार्शल कपूर ने वायु भवन में वायु सेना के उप प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला। उन्होंने सलामी गारद का निरीक्षण किया। वायुसेना अधिकारी ने यहां राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
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चेन्नई/बेंगलुरु/अमरावती/ देश भर में नव वर्ष की धूम है और अनेक राज्यों में लोग बुधवार शाम से ही गीत संगीत के बीच अपने प्रियजनों के साथ मिलकर जश्न मनाते नजर आए। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में जहां लोगों ने पार्टियों और पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ नव वर्ष का स्वागत किया, वहीं तमिलनाडु में भारी बारिश और घने बादलों के बीच उत्सव मनाया गया। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में 31 दिसंबर की रात से ही संगीत और रोशनी के बीच भारी संख्या में लोगों ने जश्न मनाकर 2026 का स्वागत किया। शाम से ही शहर के व्यावसायिक क्षेत्रों, आईटी गलियारों और आवासीय इलाकों में उत्सव का माहौल रहा। एमजी रोड, चर्च स्ट्रीट, इंदिरानगर और ब्रिगेड रोड जैसे प्रमुख केंद्र सजावटी रोशनी और लाइव संगीत से गुलजार रहे, जहां रेस्तरां और पब में विशेष आयोजन हुए। रात 12 बजते ही आतिशबाजी के बीच लोगों ने केक काटकर और मिठाइयां बांटकर एक दूसरे को शुभकामनाएं दीं।
सुरक्षा के लिए बेंगलुरु पुलिस ने संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बल तैनात किया था और मार्गों में परिवर्तन किया गया था। सीसीटीवी और रात्रि गश्त के जरिए भीड़ को नियंत्रित किया गया और लोगों से जिम्मेदारी से जश्न मनाने की अपील की गई। बेंगलुरु की आधुनिक पार्टी संस्कृति और पारंपरिक अनुष्ठानों ने शहर की मिली-जुली संस्कृति को प्रदर्शित किया। बृहस्पतिवार सुबह होते ही श्रद्धालु आशीर्वाद लेने मंदिरों में उमड़े। लोग नारियल, अगरबत्ती और फूलों के साथ लंबी कतारों में खड़े दिखे। बेंगलुरु के 'दोड्डा गणपति', 'दोड्डा बसवन्ना', वसंत वल्लभराय और बनशंकरी देवी मंदिर में भारी भीड़ रही, जहां पुजारियों ने 'होम' सहित विभिन्न अनुष्ठान किए। मैसूरु, मंगलुरु, श्रृंगेरी और उडुपी के प्रमुख मंदिरों में भी सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। तमिलनाडु में 1.10 लाख पुलिसकर्मियों की कड़ी सुरक्षा के बीच समुद्र तटों और सार्वजनिक स्थानों पर 2026 का स्वागत किया गया। साल के पहले दिन राज्य के कई हिस्सों में जोरदार बारिश हुई, जिसे मौसम विशेषज्ञों ने लंबे समय बाद हुई सबसे भारी वर्षा बताया। राज्यपाल आर एन रवि और मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने लोगों को नव वर्ष की बधाई दी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि राज्य पिछले संघर्षों से मिली सीख और साहस के साथ 2026 में सफलता की नयी ऊंचाइयों की ओर बढ़ेगा। ग्रेटर चेन्नई पुलिस ने 19,000 कर्मियों और 1,500 होम गार्ड को तैनात कर 425 स्थानों पर जांच की। पुलिस ने गिंडी, अडयार और थोराईपक्कम पर ‘बाइक रेसिंग' रोकने के लिए 30 विशेष टीम तैनात कीं। मरीना बीच और अन्य तटों पर समुद्र में नहाने और आतिशबाजी पर प्रतिबंध के साथ जश्न केवल रात एक बजे तक ही मान्य था। अधिकारियों के अनुसार, ईस्ट कोस्ट रोड पर पनैयूर से कोवलम तक ड्रोन और समुद्र तटों पर घुड़सवार पुलिस से निगरानी की गई। हजारों लोगों ने मरीना बीच, एलियट बीच और बेसेंट नगर जैसे चेन्नई के प्रमुख समुद्र तटों पर आतिशबाजी और संगीत का आनंद लिया। बारिश के बावजूद प्रशंसक सुपरस्टार रजनीकांत के घर के बाहर सुबह से ही जमा होने लगे, जहां पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित किया। राज्यभर के प्रसिद्ध मंदिरों जैसे कपलेश्वर, मदुरै मीनाक्षी और रामेश्वरम में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगीं। कन्याकुमारी में बादल छाए रहने के कारण हजारों लोग साल का पहला सूर्योदय नहीं देख पाए, जिससे उनमें निराशा रही, लोग साल का अंतिम सूर्यास्त भी नहीं देख सके थे। आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम, तिरुपति और अन्य शहरों में लोगों ने जोश के साथ नये साल का स्वागत किया। विशाखापत्तनम के बीच रोड पर पुलिस की निगरानी में होटलों और क्लब में लाइव संगीत और डीजे पार्टियों का आयोजन हुआ। पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने तट पर रंगीन रोशनी और जीवंत माहौल का आनंद लिया। तिरुपति में नये साल के साथ 'वैकुंठ एकादशी' का संयोग होने से आध्यात्मिक उत्साह दिखा और मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया। महिलाओं ने घरों में सफाई कर प्रवेश द्वारों पर 'मुग्गू' (रंगोली) बनाई और आम के पत्तों के तोरण लगाए। सुबह तेल के दीये जलाकर सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं ने परिवारों के साथ मंदिरों में पूजा-अर्चना कर अच्छे स्वास्थ्य और सफलता की कामना की। इसके बाद पारंपरिक भोजन का आनंद लिया गया, जिसमें पुलिहोरा, बोब्बातलु और पायसम जैसे व्यंजन शामिल हैं। राज्यपाल एस अब्दुल नजीर, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने राज्यवासियों को शुभकामनाएं दीं।
- - नयी दिल्ली. दिल्ली और बिहार के विधानसभा चुनाव में जबरदस्त जीत के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने वर्ष 2025 में अपने चुनावी दबदबे और मजबूत किया। इस दौरान पार्टी ने सहयोगी दलों को साथ लेकर चलने और राजनीतिक विमर्श को नियंत्रित करने की अपनी क्षमता का भी प्रदर्शन किया। हालांकि, वर्ष 2026 में प्रवेश करते समय भाजपा के सामने कई चुनौतियां होंगी, क्योंकि पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। फरवरी में हुए विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी (आप) को करारी शिकस्त देकर भाजपा ने 26 वर्षों से अधिक के अंतराल के बाद दिल्ली में सत्ता में वापसी की। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्रिमंडल सहयोगियों से जुड़े कथित शराब घोटाले समेत भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर भाजपा का जोरदार प्रचार अभियान, विकास के वादों और उसकी सूक्ष्म चुनावी रणनीति ने पार्टी को दिल्ली में दोबारा सत्ता दिलाने में अहम भूमिका निभाई। वर्ष 2025 में भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने जाति गणना कराने की घोषणा कर विपक्ष के इस आरोप को भी धराशायी कर दिया कि पार्टी ओबीसी और दलित विरोधी है। साल 2027 में होने वाली जनगणना में जाति जगणना को शामिल करने के कुछ महीनों बाद ही भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल (यूनाइटेड) समेत उसके सहयोगी दलों ने बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेतृत्व वाले महागठबंधन को करारी शिकस्त दी। बिहार में जातीय समीकरण चुनावी नतीजों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राजग ने 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में 202 सीट जीतकर भारी बहुमत हासिल किया, जबकि भाजपा 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। विपक्षी महागठबंधन को कुल मिलाकर केवल 34 सीट पर जीत मिली, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को 25, कांग्रेस को छह, भाकपा (माले) लिबरेशन को दो और माकपा को एक सीट पर विजयी रही। बिहार चुनाव नतीजों ने विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों और निर्वाचन आयोग द्वारा किए गए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर लगाए गए आरोपों को भी कमजोर कर दिया, क्योंकि न तो कांग्रेस और न ही उसके सहयोगियों ने परिणामों को चुनौती देते हुए कोई चुनावी याचिका दायर की। इन नतीजों से यह संकेत भी मिला कि वक्फ संशोधन अधिनियम को लेकर राजग सरकार के खिलाफ महागठबंधन के आक्रामक प्रचार के दम पर उसे अल्पसंख्यक समुदाय का पर्याप्त समर्थन नहीं मिला, जबकि राज्य में मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी आबादी है। राजग का चुनाव प्रचार राजद शासन के दौरान कथित “जंगल राज” की याद दिलाने, ‘घुसपैठियों' से उत्पन्न जनसांख्यिकीय बदलाव के खतरे और विकास के मुद्दों पर केंद्रित था, जो मतदाताओं को प्रभावित करता दिखा। हालांकि विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले एक योजना के तहत लाखों महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये डाले जाने से सत्तारूढ़ गठबंधन के पक्ष में माहौल बना। महाराष्ट्र में हाल ही में हुए नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में भी भाजपा सबसे प्रभावशाली शक्ति बनकर उभरी। पार्टी ने राज्य के छह प्रशासनिक मंडलों में से पांच में सबसे अधिक सीटें जीतीं और अधिकांश क्षेत्रों में 30 से 50 प्रतिशत सीटों पर कब्जा किया। वर्ष 2026 में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जीतने की होगी। 30 दिसंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया कि भाजपा आगामी चुनावों में दो-तिहाई बहुमत हाासिल कर ममता बनर्जी की सरकार को हटा देगी। चुनावी माहौल बनाते हुए भाजपा के प्रमुख रणनीतिकारों ने भ्रष्टाचार, कुप्रशासन और घुसपैठ के मुद्दों को उठाकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर निशाना साधा। शाह ने टीएमसी सरकार पर चुनावी लाभ के लिए बांग्लादेशी घुसपैठ को बढ़ावा देकर राज्य की जनसांख्यिकी को “खतरनाक रूप से बदलने” का आरोप लगाया और वादा किया कि यदि भाजपा सत्ता में आई तो वह एक मजबूत “राष्ट्रीय सुरक्षा ग्रिड” बनाएगी, जिससे पश्चिम बंगाल के रास्ते होने वाली घुसपैठ पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी। हालांकि पिछली विधानसभा चुनाव में भाजपा पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी थी और उसने वाम दलों तथा कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया था, लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि सत्तारूढ़ टीएमसी अब भी राज्य की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक ताकत बनी हुई है। केरल में नगर निकाय चुनावों में सफलता के साथ भाजपा ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है और पार्टी को उम्मीद है कि वह आगामी विधानसभा चुनावों में इसे और मजबूत कर पाएगी। वहीं, तमिलनाडु में भाजपा पैठ बनाने के लिए किसी उपयुक्त सहयोगी की तलाश में है। राज्य में फिलहाल द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) की सरकार है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु और केरल दोनों राज्य भाजपा के लिए अब भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं। वर्ष 2025 के अंत में बिहार के विधायक नितिन नवीन को भाजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया जाना पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत माना जा रहा है। माना जा रहा है कि वह शीघ्र ही भाजपा अध्यक्ष जे. पी. नड्डा का स्थान ले सकते हैं।
- मुजफ्फरनगर (उप्र). मुजफ्फरनगर जिले में 1997 से लापता और अरसे पहले मृत मान लिये गये 79 वर्षीय शरीफ अहमद लगभग 29 साल बाद मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के कारण दस्तावेज ढूंढने के वास्ते अपने पैतृक शहर खतौली लौट आये। शरीफ अहमद के भतीजे वसीम अहमद ने बुधवार को बताया कि उनके चाचा अपनी पहली पत्नी की मौत के बाद पश्चिम बंगाल की रहने वाली एक महिला से शादी करने के बाद 1997 में वहीं चले गए थे और वह 29 दिसंबर को खतौली पहुंचे। वसीम ने कहा, "इन सालों में, हमने उन्हें ढूंढने की बहुत कोशिश की। यहां तक कि पश्चिम बंगाल भी गए और उनकी दूसरी पत्नी द्वारा बताए गए पते पर भी उनके बारे में जानकारी ली, लेकिन उनका कुछ भी पता नहीं चला। दशकों तक कोई संपर्क न होने के कारण उनकी चार बेटियों और परिवार ने मान लिया था कि वह अब जीवित नहीं रहे।" शरीफ अहमद ने कहा कि वह एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज इकट्ठा करने की कवायद में खतौली लौटे। उनके अचानक घर पहुंचने पर परिजन बेहद खुश हुए। यहां लौटने पर उन्हें पता चला कि उनके पिता, एक भाई और कई अन्य रिश्तेदारों की मृत्यु चुकी है।वसीम ने कहा कि इस पुनर्मिलन से परिवार में खुशी का माहौल है। उन्होंने कहा, "इतने सालों बाद उन्हें देखना हम सभी के लिए एक भावुक पल था।" बहरहाल, कुछ दिन रुकने के बाद शरीफ अहमद जिला-स्तरीय कार्यालय में औपचारिकताएं पूरी करने के लिए पश्चिम बंगाल लौट गए। वहां वह अपने परिवार के साथ मेदिनीपुर जिले में बस गए हैं।
- बोकारो. झारखंड के बोकारो में किराए के मकान में एक ही परिवार के तीन सदस्य मृत पाए गए, जिनमें एक दो साल का बच्चा भी शामिल है। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह मामला हरला पुलिस थाना क्षेत्र के सेक्टर-9 (ए) का है और घटना बुधवार सुबह प्रकाश में आई। बोकारो नगर के पुलिस उपाधीक्षक आलोक रंजन ने बताया, ‘‘बच्चे का शव बिस्तर पर पड़ा मिला जबकि दंपति एस्बेस्टस शीट की छत को सहारा देने के लिए लगाई गई पाइप से लटके मिले।'' उन्होंने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।रंजन ने बताया, ‘‘शुरुआती जांच में सामने आया है कि दंपति ने बेटे की सोते समय तकिया से मुंह दबाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उन्होंने खुद फांसी लगा ली।'' उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण का पता चल सकेगा।अधिकारी ने बताया कि मृतकों की पहचान कुंदन कुमार तिवारी (36), रेखा कुमारी (32) और बेटे श्रेयांश कुमार के रूप में हुई है। उन्होंने बताया, ‘‘मकान मालिक और स्थानीय लोगों ने बताया कि कुंदन ने कई लोगों से रुपये उधार लिए थे। मकान मालिक का दावा है कि कुंदन ने करीब दो लाख रुपये कर्ज लिये थे और चुकाने में असमर्थ था।
- नयी दिल्ली. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा एवं सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियों पर जारी चार नई श्रम संहिताओं के लिए बुधवार को मसौदा नियम जारी कर दिए। इन पर आम लोगों और हितधारकों से राय मांगी गई है। इन नियमों के लागू होने के बाद ही नए श्रम कानून पूरी तरह से प्रभावी हो पाएंगे।चार श्रम कानून- वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020, और सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियों की संहिता 2020 की अधिसूचना 21 नवंबर को ही जारी हो चुकी है। सरकार का लक्ष्य है कि एक अप्रैल 2026 से ये सभी संहिताएं पूरे देश में एक साथ पूरी तरह लागू हो जाएं। श्रम मामलों के संविधान की समवर्ती सूची में शामिल होने से यह जरूरी है कि राज्यों के स्तर पर भी इनके लिए नियम बनाए जाएं। इसलिए राज्य सरकारें भी इन नियमों को आधिकारिक रूप से प्रकाशित करने की प्रक्रिया में हैं। केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने औद्योगिक संबंध संहिता पर 30 दिन और बाकी तीन श्रम संहिताओं पर 45 दिन का समय हितधारकों को सुझाव देने के लिए दिया है। इससे उद्योग और अन्य पक्ष स्पष्ट एवं व्यावहारिक मार्गदर्शन प्राप्त कर सकेंगे। मसौदा नियमों के लागू होने के बाद श्रमिकों के लिए अनिवार्य नियुक्ति पत्र, 40 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के श्रमिकों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य जांच, समान कार्य के लिए समान वेतन और महिलाओं के लिए विभिन्न पालियों में समान अवसर जैसी सुविधाएं सुनिश्चित होंगी। सरकार का उद्देश्य इन चार संहिताओं के लागू होने के साथ श्रम संरक्षण का दायरा बढ़ाना, व्यापार संचालन को सुगम बनाना और श्रमिक-केंद्रित श्रम परिवेश को बढ़ावा देना है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, “चार श्रम संहिताओं के लिए मसौदा नियमों का प्रकाशन श्रम सुधारों को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ये नियम उद्योग को भरोसे के साथ तैयार होने, नियमों का पालन सरल बनाने और टिकाऊ वृद्धि के साथ श्रमिकों के हितों की रक्षा करने में मदद करेंगे।” केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने इस महीने कहा था कि नई श्रम संहिताओं के लिए मसौदा नियम जल्द ही प्रकाशित किए जाएंगे। उन्होंने कहा था कि केंद्र और राज्यों ने पहले मसौदा नियम प्रकाशित किए थे लेकिन अब इन्हें वर्तमान समय एवं जरूरतों के हिसाब से अद्यतन करने की जरूरत है। मांडविया ने कहा था कि सरकार मार्च, 2026 तक 100 करोड़ श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने का लक्ष्य हासिल करना चाहती है जो संख्या फिलहाल 94 करोड़ है। सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़कर 2025 में 64 प्रतिशत से अधिक हो गया है जबकि वर्ष 2015 में यह 19 प्रतिशत था।
- नयी दिल्ली. लोकसभा और राज्यसभा ने वर्ष 2025 में अपने निर्धारित समय का 30 प्रतिशत से भी कम हिस्सा विधायी कार्यों में लगाया, जिसमें विधेयकों पर चर्चा और उन्हें पारित करना शामिल है। विधायी थिंक टैंक ‘पीआरएस लेजिस्लेटिव' के विश्लेषण के अनुसार, प्रश्नकाल निर्धारित समय से कम अवधि तक चला। लोकसभा में प्रश्नकाल सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक होता है, जबकि उच्च सदन यानी राज्यसभा में यह दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक आयोजित किया जाता है। विश्लेषण में कहा गया है, ‘‘कुल समय का 30 प्रतिशत से भी कम हिस्सा विधायी कार्यों पर खर्च किया गया। इसमें विधेयकों पर चर्चा और उन्हें पारित करने में लगा समय शामिल है।” वर्ष 2025 में संसद द्वारा 31 विधेयक पारित किए गए। इनमें भारत में वक्फ संपत्तियों से संबंधित नियमों में संशोधन करने वाला एक विधेयक और आयकर कानूनों को सरल बनाने वाला एक विधेयक शामिल है। ऑनलाइन मनी गेम और उनसे संबंधित सेवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया। परमाणु ऊर्जा और बीमा क्षेत्रों को खोलने वाला विधेयक पारित हुआ। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), 2005 में संशोधन किया गया। इस अधिनियम के स्थान पर ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक' पारित किया गया जो अब कानून का रूप ले चुका है। जी राम जी अधिनियम के तहत रोजगार की गारंटी बढ़ाकर सालाना 125 दिन कर दी गई है। इस 18वीं लोकसभा के कार्यकाल के दौरान संसद में कुल 42 विधेयक पेश किए गए। इनमें से 26 प्रतिशत यानी 11 विधेयकों को विस्तृत विचार-विमर्श के लिए संसदीय समितियों के पास भेजा गया। केवल एक विधेयक को विभाग संबंधित स्थायी समिति को भेजा गया। इनमें एक साथ चुनाव से संबंधित दो विधेयक शामिल हैं। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों तथा मंत्रियों की गिरफ्तारी के बाद लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहने पर उन्हें पद से हटाने के प्रावधान वाले तीन विधेयक भी संयुक्त समिति के पास भेजे गए।
- नयी दिल्ली. ‘ऑपरेशन सिंदूर' पिछली आधी सदी में भारतीय सेना का सबसे व्यापक और बहु-आयामी सैन्य अभियान रहा जिसका उद्देश्य सीमा-पार आतंकवाद को लगातार समर्थन देने के लिए पाकिस्तान को सबक सिखाना था। इसने 2025 में भारत के समग्र सुरक्षा और रणनीतिक लक्ष्यों को नये सिरे से परिभाषित किया, जिससे यह रक्षा प्रतिष्ठान के लिए एक महत्वपूर्ण साल बन गया। भारत ने सात मई की तड़के पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में स्थित नौ आतंकवादी शिविरों पर सटीक मिसाइल हमले किये, जिसमें कम से कम 100 आतंकवादी मारे गये। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले के जवाब में की गई थी। पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोग मारे गये थे। नयी दिल्ली की इस कार्रवाई को व्यापक रूप से आतंकवाद को समर्थन देने वाले पाकिस्तान को करारा जवाब देने के लिए उसकी ‘‘राजनीतिक इच्छाशक्ति'' के प्रदर्शन के रूप में देखा गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत इस्लामाबाद द्वारा किसी भी प्रकार की परमाणु धमकी को बर्दाश्त नहीं करेगा। भारतीय सेना ने जिन आतंकी शिविरों को निशाना बनाया, उनमें बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) का मुख्यालय, मुरीदके स्थित लश्कर-ए-तैयबा का अड्डा और सियालकोट के महमूना जोया, मुजफ्फरबाद के सवाई नाला और सैयद ना बिलाल, कोटली के गुलपुर और अब्बास, भीमबर के बरनाला और सरजल में स्थित आतंकी ढांचे शामिल थे। आतंकी ढांचे पर हमले के बाद, भारत ने पाकिस्तान को सूचित किया कि वह संघर्ष की स्थिति को बढ़ाना नहीं चाहता और उसका अभियान आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर चलाया गया था। लेकिन जैसे ही पाकिस्तान ने सैन्य जवाबी कार्रवाई शुरू की, भारत ने एकीकृत मानवरहित हवाई प्रणाली (यूएएस) ग्रिड, एस-400 ट्रायम्फ मिसाइल प्रणाली, बराक-8 मिसाइल, आकाश सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों समेत कई हथियारों और सैन्य प्लेटफार्म का इस्तेमाल करके इसका बहुत मजबूती से जवाब दिया। भारतीय सेना ने कम से कम चार स्थानों पर स्थित रडारों, दो स्थानों पर स्थित कमान एवं नियंत्रण केंद्रों और दो हवाई अड्डों पर स्थित रनवे समेत कई महत्वपूर्ण पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचाया। इस सैन्य अभियान ने व्यापक रूप से तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल को उजागर किया और ड्रोन तथा ड्रोन रोधी प्रणालियों से युक्त नये युग के युद्ध की शुरुआत को प्रदर्शित किया। दोनों पक्षों के सैन्य अधिकारियों के बीच ‘हॉटलाइन' पर हुई बातचीत के बाद 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनने के साथ संघर्ष समाप्त हो गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 12 मई को कहा था, ‘‘हमने पाकिस्तान के आतंकी और सैन्य शिविरों के खिलाफ अपनी जवाबी कार्रवाई को फिलहाल स्थगित कर दिया है। आने वाले दिनों में हम पाकिस्तान के हर कदम को इस मानदंड पर परखेंगे कि पाकिस्तान आगे किस तरह का रवैया अपनायेगा।'' आतंकवाद से निपटने के लिए भारत के नये दृष्टिकोण को विस्तार से बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि भारत किसी भी प्रकार की परमाणु धमकी को बर्दाश्त नहीं करेगा और नया दृष्टिकोण आतंकवाद को प्रायोजित करने वाली सरकार और आतंकवाद के साजिशकर्ताओं के बीच कोई भेद नहीं करेगा। मोदी ने कहा था, ‘‘यदि पाकिस्तान को अपना अस्तित्व बनाए रखना है, तो उसे अपने आतंकी ढांचे को नष्ट करना होगा। शांति का कोई और रास्ता नहीं है। भारत का रुख बिल्कुल स्पष्ट है।'' ‘ऑपरेशन सिंदूर' को महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि इसने भारत की सैन्य और रणनीतिक शक्ति का प्रदर्शन किया। रक्षा मंत्रालय के एक विश्लेषण के अनुसार, इस बहु-आयामी अभियान के जरिये आतंकवादी खतरों को प्रभावी ढंग से बेअसर कर दिया गया, पाकिस्तानी आक्रामकता को रोका गया और आतंकवाद के प्रति भारत की कतई सहन नहीं करने की नीति को दृढ़ता से लागू किया। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने तीन अक्टूबर को कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय हमलों में एफ-16 जेट सहित कम से कम 12 पाकिस्तानी सैन्य विमान नष्ट हो गए या क्षतिग्रस्त हुए। प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने पाकिस्तान के साथ सैन्य संघर्ष में विमान के नुकसान की बात 31 मई को स्वीकार की थी, लेकिन छह भारतीय लड़ाकू विमानों को मार गिराने के इस्लामाबाद के दावे को ‘‘बिल्कुल गलत'' बताया था। वर्ष 2025 के दौरान, लगभग 3,500 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की रक्षा कर रही भारतीय सेना ने आक्रामक रुख अपनाया और सीमा के चीनी हिस्से पर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के लिए अपने समग्र निगरानी तंत्र को मजबूत किया। इस वर्ष भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर में और उसके आसपास अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए रखते हुए महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र में अपनी रणनीतिक ताकत का विस्तार किया। एक महत्वपूर्ण घोषणा में, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने हाल में कहा था कि तीसरी स्वदेशी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी ‘अरिदमन' जल्द ही सेवा में शामिल की जाएगी क्योंकि यह परीक्षणों के अंतिम चरण में है। एक अन्य महत्वपूर्ण कदम के तहत भारत और फ्रांस ने अप्रैल में एक अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोत ‘आईएनएस विक्रांत' पर तैनाती के लिए 64,000 करोड़ रुपये (7 अरब यूरो) की लागत से 26 राफेल समुद्री जेट खरीदने का एक बड़ा सौदा हुआ। इस वर्ष रक्षा मंत्रालय ‘प्रोजेक्ट 75 इंडिया' के तहत लगभग 70,000 करोड़ रुपये की लागत से छह स्टील्थ पनडुब्बियों की खरीद की प्रक्रिया में तेजी लाया। दो महीने पहले, भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय रणनीतिक संबंधों को विस्तार देने के लिए 10 साल के रक्षा ढांचागत समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें दोनों पक्षों ने एक स्वतंत्र और मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र को सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया था। इस वर्ष के दौरान, भारत ने ‘अग्नि' मिसाइलों समेत रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हथियारों का सफलतापूर्वक परीक्षण भी किया। भारत ने अगस्त में 5,000 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाली ‘अग्नि-5' मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। अग्नि-5 मिसाइल चीन के उत्तरी भाग समेत लगभग पूरे एशिया के साथ-साथ यूरोप के कुछ क्षेत्रों को भी अपनी मारक क्षमता के दायरे में ला सकती है।
- नई दिल्ली। डाक विभाग ने कुछ अंतरराष्ट्रीय पत्र डाक सेवाओं में बदलाव करने की घोषणा की है। इसके तहत खासकर उन सेवाओं में बदलाव किया गया है, जिनमें ट्रैकिंग की सुविधा नहीं है या बहुत कम है। इसके साथ ही ज्यादा बेहतर, भरोसेमंद और ग्राहक-केंद्रित सेवाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।दुनिया भर में अपनाई जा रही अच्छी प्रक्रियाओं और यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (यूपीयू) के फैसलों के अनुसार, डाक विभाग ने अंतरराष्ट्रीय पत्र डाक सेवाओं को आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए यह कदम उठाया है। इसी के तहत 1 जनवरी, 2026 से विदेश भेजी जाने वाली कुछ अंतरराष्ट्रीय पत्र डाक सेवाओं को बंद किया जाएगा।इसमें रजिस्टर्ड स्मॉल पैकेट सेवा शामिल है।इसके तहत आउटवर्ड स्मॉल पैकेट सेवा आती है, जिसमें समुद्र, एसएएल या हवाई मार्ग से भेजे जाने वाले सामान वाले पत्र को शामिल किया जाता है। वहीं, सरफेस लेटर मेल सेवा तथा सरफेस एयर लिफ्टेड (एसएएल) लेटर मेल सेवा को भी बंद किया गया है, जो बाहर भेजे जाने वाले पत्रों के लिए थीं। संचार मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि स्मॉल पैकेट सेवाओं में ट्रैकिंग की सुविधा बहुत कम या बिल्कुल नहीं होती, डिलीवरी में ज्यादा समय लगता है, दूसरे देशों में कस्टम और सुरक्षा नियम सख्त हो गए हैं और कई विदेशी डाक विभाग ऐसे पैकेट स्वीकार नहीं कर रहे हैं।मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह बदलाव सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए किया गया है और इससे निर्यातकों या ग्राहकों के विकल्पों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इन बदलावों के बाद केवल दस्तावेजों के लिए रजिस्ट्रेशन सुविधा जारी रहेगी, जो हवाई मार्ग से भेजे जाएंगे। इनमें पत्र, पोस्टकार्ड, प्रिंटेड पेपर, एरोग्राम, ब्लाइंड लिटरेचर और एम-बैग शामिल हैं।डाक विभाग ने बताया कि ब्लाइंड लिटरेचर और एम-बैग से जुड़े यूपीयू के नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे। नेत्रहीन व्यक्ति या उनके संगठनों को भेजी जाने वाली ब्लाइंड लिटरेचर पर डाक शुल्क नहीं लगेगा, केवल हवाई शुल्क लग सकता है, और वह भी गंतव्य देश के नियमों के अनुसार। एम-बैग पर भी यूपीयू के नियम लागू रहेंगे, जिनमें वजन सीमा और देश के अनुसार स्वीकार करने की शर्तें शामिल हैं।निर्यातकों, एमएसएमई और आम ग्राहकों की मदद के लिए डाक विभाग पहले से ही विदेश में सामान भेजने के लिए भरोसेमंद विकल्प उपलब्ध करा रहा है। ग्राहकों को इंटरनेशनल ट्रैक्ड पैकेट सर्विस (आईआईपीएस) और अन्य अंतरराष्ट्रीय पार्सल सेवाओं का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
- नई दिल्ली। अयोध्या राम मंदिर स्थित रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ पर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये वर्षगांठ हमारी आस्था और संस्कारों का एक दिव्य उत्सव है। भगवान श्री राम की असीम कृपा और आशीर्वाद से असंख्य रामभक्तों का पांच सदियों का संकल्प साकार हुआ है।पीएम मोदी ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर कहा कि आज रामलला अपने भव्य धाम में पुन: विराजित हैं और इस वर्ष अयोध्या की धर्म ध्वजा, रामलला की प्रतिष्ठा द्वादशी की साक्षी बन रही है। ये मेरा सौभाग्य है कि पिछले महीने मुझे इस ध्वजा की पुण्य स्थापना का मौका मिला।इसके साथ ही उन्होंने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से जुड़ी कई तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर शेयर की। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”अयोध्या जी की पावन धरा पर आज रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ मनाई जा रही है। ये वर्षगांठ हमारी आस्था और संस्कारों का एक दिव्य उत्सव है। इस पावन-पुनीत अवसर पर देश-विदेश के सभी रामभक्तों की ओर से प्रभु श्री राम के चरणों में मेरा कोटि-कोटि नमन और वंदन। समस्त देशवासियों को मेरी अनंत शुभकामनाएं।”दूसरे पोस्ट में उन्होंने लिखा, ”भगवान श्री राम की असीम कृपा और आशीर्वाद से असंख्य रामभक्तों का पांच सदियों का संकल्प साकार हुआ है। आज रामलला अपने भव्य धाम में पुन: विराजित हैं और इस वर्ष अयोध्या की धर्म ध्वजा, रामलला की प्रतिष्ठा द्वादशी की साक्षी बन रही है। ये मेरा सौभाग्य है कि पिछले महीने मुझे इस ध्वजा की पुण्य स्थापना का सुअवसर मिला।”पीएम मोदी ने आगे लिखा, ”मेरी कामना है कि मर्यादा पुरुषोत्तम की प्रेरणा हर देशवासी के हृदय में सेवा, समर्पण और करुणा की भावना को और प्रगाढ़ करे, जो समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का सशक्त आधार भी बने। जय सियाराम।”वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”जय श्री राम। आज ही की शुभ तिथि पर दो वर्ष पूर्व 500 वर्षों की प्रतीक्षा समाप्त हुई और मोदी जी ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की। प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।”उन्होंने आगे लिखा, ”प्रभु श्रीराम के आदर्शों और जीवन मूल्यों की पुनर्स्थापना का प्रतीक यह मंदिर धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष, सांस्कृतिक स्वाभिमान के लिए त्याग व विरासतों के संरक्षण के लिए बलिदान की अप्रतिम प्रेरणा बना रहेगा। इस पवित्र अवसर पर श्री राम जन्मभूमि आंदोलन के सभी बलिदानियों को नमन करता हूं।” (
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को प्रगति की 50वीं बैठक की अध्यक्षता की। प्रगति सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) आधारित बहुआयामी मंच है। यह बैठक प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सहयोगात्मक और परिणामोन्मुखी शासन के एक दशक लंबे सफर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
यह उपलब्धि दर्शाती है कि प्रौद्योगिकी-आधारित नेतृत्व, वास्तविक समय की निगरानी, और केंद्र-राज्य के निरंतर सहयोग ने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को जमीनी स्तर पर ठोस परिणामों में बदल दिया है। बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री ने सड़क, रेलवे, बिजली, जल संसाधन और कोयला सहित विभिन्न क्षेत्रों की पांच महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा की। ये परियोजनाएं 5 राज्यों में फैली हुई हैं, जिनकी कुल लागत 40,000 करोड़ रुपए से अधिक है।पीएम श्री योजना की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पीएम श्री योजना को समग्र और भविष्य के लिए तैयार स्कूली शिक्षा का राष्ट्रीय मानक बनना चाहिए और कहा कि इसका कार्यान्वयन बुनियादी ढांचे पर केंद्रित होने के बजाय परिणामोन्मुखी होना चाहिए। उन्होंने सभी मुख्य सचिवों को पीएम श्री योजना की बारीकी से निगरानी करने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि पीएम श्री विद्यालयों को राज्य सरकार के अन्य विद्यालयों के लिए मानक बनाने के प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को पीएम श्री विद्यालयों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए जमीनी स्तर पर दौरा करना चाहिए।प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने अनुशासन, पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई के साथ जनता की शिकायतों को समझने और उनका समाधान करने के लिए प्रौद्योगिकी-सक्षम स्वागत प्लेटफॉर्म (प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग द्वारा शिकायतों पर राज्यव्यापी ध्यान) की शुरुआत की थी।उस अनुभव के आधार पर केंद्र में पदभार ग्रहण करने के बाद, उन्होंने प्रगति के माध्यम से उसी भावना को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित किया, जिसमें बड़ी परियोजनाओं, प्रमुख कार्यक्रमों और शिकायत निवारण को समीक्षा, समाधान और अनुवर्ती कार्रवाई के लिए एक एकीकृत मंच पर लाया गया।प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्षों से प्रगति के नेतृत्व वाले इकोसिस्टम ने 85 लाख करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं को गति देने में मदद की है और बड़े पैमाने पर प्रमुख कल्याणकारी कार्यक्रमों के जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन में सहयोग दिया है।2014 से प्रगति के तहत 377 परियोजनाओं की समीक्षा की गई है और इन परियोजनाओं में पहचाने गए 3,162 मुद्दों में से 2,958 – यानी लगभग 94 प्रतिशत का समाधान किया गया है, जिससे देरी, लागत में वृद्धि और समन्वय विफलताओं में काफी कमी आई है।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की प्रगति की गति तेज होने के साथ ही प्रगति की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि सुधारों की गति को बनाए रखने और कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए प्रगति आवश्यक है।उन्होंने कहा कि 2014 से सरकार ने क्रियान्वयन और जवाबदेही को संस्थागत रूप देने के लिए काम किया है, जिससे एक ऐसी प्रणाली बनी है जिसमें काम को निरंतर निगरानी के साथ आगे बढ़ाया जाता है और समय-सीमा और बजट के भीतर पूरा किया जाता है। उन्होंने कहा कि पहले शुरू की गई लेकिन अधूरी या भुला दी गई परियोजनाओं को राष्ट्रीय हित में पुनर्जीवित करके पूरा किया गया है।प्रगति मंच के अंतर्गत शुरू की गई कई परियोजनाएं, जो दशकों से रुकी हुई थीं, पूरी हो गईं या निर्णायक रूप से आगे बढ़ने के लिए तैयार हो गईं। प्रधानमंत्री ने बताया कि परियोजनाएं केवल इरादे की कमी के कारण ही विफल नहीं होतीं। कई परियोजनाएं समन्वय की कमी और अलग-थलग कार्यप्रणाली के कारण विफल होती हैं। उन्होंने कहा कि प्रगति ने सभी हितधारकों को एक मंच पर लाकर और एक साझा लक्ष्य की ओर अग्रसर करके इस समस्या को दूर करने में मदद की है।प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के लिए पर्याप्त संसाधन सुनिश्चित किए हैं और सभी क्षेत्रों में निरंतर निवेश किया है। उन्होंने प्रत्येक मंत्रालय और राज्य से योजना से लेकर कार्यान्वयन तक की पूरी प्रक्रिया को मजबूत करने और निविदा प्रक्रिया से लेकर जमीनी स्तर पर परियोजना वितरण तक की देरी को कम करने का आह्वान किया।प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत 2047 एक राष्ट्रीय संकल्प और समयबद्ध लक्ष्य दोनों है, और प्रगति इसे हासिल करने का एक शक्तिशाली माध्यम है। उन्होंने राज्यों को विशेष रूप से सामाजिक क्षेत्र के लिए मुख्य सचिव स्तर पर प्रगति जैसी समान व्यवस्थाओं को संस्थागत रूप देने के लिए प्रोत्साहित किया।प्रगति को अगले स्तर पर ले जाने के लिए, पीएम ने परियोजना जीवन चक्र के प्रत्येक चरण में प्रौद्योगिकी के उपयोग पर जोर दिया। - नई दिल्ली। साल 2025 के आखिरी दिन और नए साल 2026 के स्वागत की तैयारियों के बीच पर्यटन स्थलों पर भारी भीड़ उमड़ रही है। गुजरात के केवड़िया में स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और आसपास के आकर्षण नए साल के जश्न के लिए सबसे पसंदीदा स्पॉट बन गए हैं। 31 दिसंबर को साल के आखिरी दिन यहां 60,000 से अधिक पर्यटकों ने ऑनलाइन बुकिंग कराई। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने बसों, पार्किंग और अन्य सुविधाओं को बढ़ा दिया है।नए साल को देखते हुए स्लॉट में पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा किया गया है। पहले जहां 500 पर्यटकों की एंट्री होती थी, लेकिन अब रोजाना 5,500 तक पहुंच गई है। अब कुल 7,000 पर्यटकों को एंट्री मिल रही है। पर्यटकों का कहना है कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, जंगल सफारी, गार्डन और अन्य आकर्षणों के साथ यहां स्वच्छता और व्यवस्था का खास ध्यान रखा जाता है।कई पर्यटकों ने इसे पीएम मोदी के नेतृत्व में सरदार वल्लभभाई पटेल की मेहनत और समर्पण का सम्मान करने का बेहतरीन तरीका बताया है। वडोदरा से आई पर्यटक हार्वी ने कहा कि मुझे यहां बहुत अच्छा लगा। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के अलावा जंगल सफारी जैसी कई दिलचस्प चीजें हैं।युकिता ने बताया कि हमने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देखी। यहां स्वच्छता का काफी ध्यान रखा जाता है। परिवार के साथ सभी को यहां जरूर आना चाहिए।एक अन्य पर्यटक ने कहा कि इस जगह की तारीफ का एक ही कारण है, हमारे देश के लिए की गई कड़ी मेहनत का सम्मान। हम यहां साल का आखिरी दिन मनाने और यहां के सुंदर कार्य, समर्पण को देखने आए हैं।राजस्थान से आए पर्यटकों ने भी जगह की सराहना की और कहा कि सभी देशवासियों को जब भी समय मिले, एक बार जरूर आना चाहिए। क्रिसमस के बाद से ही यहां पर्यटकों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी अथॉरिटी और टेंट सिटी होटलों ने नए साल के जश्न के लिए गाला डिनर, क्रूज, डांस पार्टी और अन्य आयोजन तैयार किए हैं। अब तक स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर कुल 2.85 करोड़ से अधिक पर्यटक रजिस्टर हो चुके हैं।
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नई दिल्ली। डीआरडीओ ने एक ही लॉन्चर से दो ‘प्रलय’ मिसाइलों का सल्वो प्रक्षेपण सफलतापूर्वक किया। एक ही लॉन्चर से तेजी से एक के बाद एक प्रलय मिसाइल के दो प्रक्षेपण अंजाम दिए गए हैं। प्रलय मिसाइल ठोस ईंधन आधारित स्वदेशी क्वाजी-बैलिस्टिक मिसाइल है। इसमें अत्याधुनिक गाइडेंस एवं नेविगेशन प्रणाली लगी है, जो इसकी उच्च सटीकता सुनिश्चित करती है। यह मिसाइल विभिन्न प्रकार के वारहेड ले जाने और अलग-अलग लक्ष्यों पर प्रहार करने में सक्षम है। यह प्रक्षेपण 31 दिसंबर की सुबह ओडिशा तट के पास प्रातः लगभग साढ़े 10 बजे संपन्न हुआ।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दोनों मिसाइलों ने एक निर्धारित मार्ग का सटीक पालन किया। इस दौरान मिसाइलों ने सभी उड़ान उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया। मिसाइल उड़ान और टर्मिनल घटनाओं की पुष्टि इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज, चांदिपुर में तैनात ट्रैकिंग सेंसर से हुई। वहीं लक्षित क्षेत्र के निकट तैनात नौसैनिक जहाजों पर मौजूद टेलीमेट्री प्रणालियों के माध्यम से भी मिसाइल उड़ान की सटीकता की पुष्टि की गई।इस मिसाइल का विकास रिसर्च सेंटर इमारत, हैदराबाद द्वारा डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं द्वारा किया गया है। इनमें डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेट्री, एडवांस्ड सिस्टम्स लेबोरेट्री, आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, हाई एनर्जी मैटीरियल्स रिसर्च लेबोरेट्री, डिफेन्स मेटालर्जिकल रिसर्च लेबोरेट्री, टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेट्री, आर एंड डी एस्टैब्लिशमेंट (इंजीनियर्स), और इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज का सहयोग शामिल है।परीक्षण के लिए प्रणालियों का एकीकरण भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा किया गया। परीक्षणों को डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, भारतीय वायुसेना एवं भारतीय थलसेना के प्रतिनिधियों, साथ ही रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने प्रत्यक्ष रूप से देखा।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, भारतीय वायुसेना, भारतीय थलसेना, डिफेंस पीएसयूज तथा उद्योग को तेजी से संपन्न इस दोहरे प्रक्षेपण की सफलता पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि सल्वो लॉन्च की सफलता ने ‘प्रलय’ मिसाइल प्रणाली की विश्वसनीयता को सुदृढ़ रूप से सिद्ध कर दिया है।वहीं, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने परीक्षण में शामिल वैज्ञानिकों व टीमों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि इस प्रणाली के शीघ्र ही उपयोगकर्ताओं के साथ इंडक्शन के लिए तैयार होने का संकेत देती है। बता दें कि यह सफलता भारत की स्वदेशी मिसाइल प्रौद्योगिकी और त्वरित प्रहार क्षमता को और अधिक मजबूत करती है। -
नई दिल्ली। 2026 शुरू होने में कुछ ही घंटों का समय बचा हुआ है। हर साल ही शुरुआत में कुछ नए नियम लागू होते हैं, जिनका असर सीधे तौर पर आम आदमी की जिंदगी पर पड़ता है। ऐसे ही कुछ नियम एक जनवरी से लागू होने वाले हैं।
–8वां वेतन आयोग एक जनवरी, 2026 से लागू हो जाएगा। केंद्र सरकार इसे पहले ही मंजूरी दे चुकी है। इससे प्रत्यक्ष तौर पर करीब 50 लाख कर्मचारियों और लगभग 69 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा। नए वेतन आयोग से सरकारी कर्मचारियों के वेतन में 20 से 35 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है।–नए साल पर क्रेडिट स्कोर में भी बड़ा बदलाव होने जा रहा है। फिलहाल क्रेडिट स्कोर महीने में एक बाद अपडेट होता है, लेकिन 2026 से यह हर हफ्ते यानी हर 7 दिनों में अपडेट होगा। इससे ईएमआई समय से भरने का फायदा जल्द ही मिलेगा।–केंद्र सरकार ने पीएम किसान योजना का फायदा लेने वालों के लिए नया सिस्टम किसान आईडी पेश किया है। एक जनवरी 2026 से यूपी, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे कई राज्यों में यह सिस्टम लागू हो रहा है। इस डिजिटल आईडी में किसानों की भूमि, फसल, आधार और बैंक आदि की जानकारी होगी। अगर यह आईडी नहीं है तो पीएम किसान योजना के तहत आने वाली 6,000 रुपए की सालाना मदद रुक सकती है।–नए साल में वाहनों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी और घरों में खाना बनाने के लिए उपयोग होने वाली पीएनजी की कीमतों में 2-3 रुपए प्रति यूनिट की कमी आ सकती है। इसकी वजह पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) की ओर से घोषित टैरिफ एडजस्टमेंट है जो कि एक जनवरी 2026 से लागू होने जा रहा है।–इसके अलावा नए साल के अवसर पर एलपीजी गैस और एविएशन फ्यूल की कीमतों में बदलाव हो सकता है।–पैन को आधार से लिंक करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर, 2025 है। अगर आपने अभी तक पैन को आधार लिंक नहीं किया है तो आपका पैन कार्ड एक जनवरी से निष्क्रिय हो जाएगा। ऐसे में आपको इनकम टैक्स भरने से लेकर बैंकों में बड़े लेनदेन करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 की अनटाइड अनुदान की प्रथम किस्त के रूप में ₹224.5762 करोड़ की राशि 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में पंचायती राज संस्थाओं/ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए जारी की है। यह अनुदान राज्य की 11279 पात्र ग्राम पंचायतों, 138 पात्र ब्लॉक पंचायतों और 26 पात्र जिला पंचायतों के लिए है।
भारत सरकार पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) के माध्यम से पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई)/ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) के लिए राज्यों को पंद्रहवें वित्त वर्ष के अनुदान जारी करने की सिफारिश करती है, जिसे वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है। आवंटित अनुदान एक वित्तीय वर्ष में दो किस्तों में जारी किए जाते हैं। अनटाइड अनुदानों का उपयोग पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई)/ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) द्वारा संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में निहित उनतीस विषयों के अंतर्गत, वेतन और अन्य स्थापना व्ययों को छोड़कर, स्थान-विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए किया जाएगा। टाइड अनुदानों का उपयोग (क) स्वच्छता और खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) स्थिति के रखरखाव के लिए किया जा सकता है, जिसमें घरेलू अपशिष्ट प्रबंधन और उपचार, विशेष रूप से मानव मल और मल कीचड़ प्रबंधन शामिल होना चाहिए, और (ख) पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण जैसी बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है।

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