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- नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर गुरुवार को ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल), पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) और परमिट जैसे मोटर वाहन दस्तावेजों की वैधता को 30 सितंबर 2021 तक बढ़ा दिया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इससे पहले 30 मार्च 2020, नौ जून 2020 और 24 अगस्त 2020, 27 दिसंबर,2020 और 26 मार्च,2021 को मोटर वाहन कानून, 1988 और केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 से संबंधित दस्तावेजों की वैधता के संबंध में परामर्श जारी किया था।केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने कोविड-19 के प्रकोप के मद्देनजर डीएल, आरसी, परमिट आदि वाहनों के दस्तावेजों की वैधता को 30 सितंबर, 2021 तक बढ़ा दिया है। इस संबंध में मंत्रालय ने आज राज्यों और संघ शासित प्रदेशों को एक परामर्श जारी किया। इससे पहले विभिन्न अधिसूचनाओं के माध्यम से यह सलाह दी गई थी कि फिटनेस की वैधता, परमिट (सभी प्रकार), लाइसेंस, पंजीकरण या किसी अन्य संबंधित दस्तावेजों को 31 मार्च, 2021 तक वैध माना जा सकता है।ताजा परामर्श के मुताबिक इन दस्तावेजों की वैधता को 30 सितंबर 2021 तक वैध माना जा सकता है। इस तरह वे सभी दस्तावेज जिनकी वैधता एक फरवरी 2020 को या इसके बाद खत्म हो गई है, उन्हें 30 सितंबर 2021 तक वैध माना जाएगा। बयान में कहा गया है कि इससे नागरिकों को सामाजिक दूरी का पालन करते हुए ट्रांसपोर्ट संबंधी सेवाओं को हासिल करते रहने में मदद मिलेगी।मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आग्रह किया है कि वह इस परामर्श को लागू करने में तत्परता दिखाएं ताकि नागरिकों, ट्रांसपोटर्स और अन्?य संगठनों, जो इस मुश्किल समय में परिचालन कर रहे हैं, को कोई परेशानी न हो।
- चाकू से किए ताबड़तोड़ 23 वारलखनऊ। यूपी में लखनऊ के सरोजनीनगर के पिपरसंड रेलवे स्टेशन रोड पर नवोदय विद्यालय के पास गहरू जंगल में बीएससी छात्रा की हत्या नृशंस तरीके से प्रेमी ने दोस्तों के साथ मिलकर की थी। उसके शरीर पर हत्यारों ने चाकू से ताबड़तोड़ 23 वार किए थे। पुलिस ने अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर छोटे-बड़े 25 घाव मिले हैं जिनमें से दो आर-पार हो गए। छात्रा का गला दुपट्टे से घोंटा गया था। अधिक खून बहने और गला कसने से उसकी मौत हुई थी। पुलिस ने वारदात के 24 घंटे में छात्रा के आरोपी प्रेमी सहित तीनों हत्या आरोपियों को दबोच लिया है। आरोपियों ने पुलिस के सामने जुर्म कुबूल किया है। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त चाकू भी बरामद कर लिया है।डीसीपी मध्य सोमेन वर्मा के मुताबिक सरोजनीनगर के पिपरसंड स्थित गहरू जंगल में रविवार सुबह बीएससी की छात्रा व खैराबाद निवासी निजी सुरक्षाकर्मी की बेटी का खून से लथपथ शव मिला था। कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस ने युवती के दोस्त सरोजनीनगर के आजादनगर निवासी आरोपी मो. कैफ को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के अनुसार आरोपी मो. कैफ ने बताया कि किशोरी की मां गांव गई थी और उसके पिता ड्यूटी पर गए थे। इसका फायदा उठाकर उसने किशोरी को घर से बाहर बुलाया था। पकड़े गए आरोपियों में मो. कैफ के अलावा आरोपी आकाश यादव और काशीराम कॉलोनी का आरोपी विशाल कश्यप शामिल हैं।दोस्तों के साथ नशा करते समय किया था कॉलएडीसीपी मध्य चिरंजीव नाथ सिन्हा के मुताबिक पूछताछ में सामने आया कि आरोपी कैफ अपने दोस्त आरोपी आकाश यादव व आरोपी विशाल कश्यप के साथ बैठकर पिपरसंड इलाके में नशा कर रहा था। इसी दौरान उसने छात्रा को कॉल किया। उससे बातचीत के दौरान पता चला कि घर पर कोई नहीं है। इसके बाद आरोपी मो. कैफ उसे बाइक से लेने गया। दोनों दोस्तों ने लड़की से बातचीत सुन ली। दोनों ने नशे में छात्रा से संबंध बनाने के लिए आरोपी कैफ को दोस्ती का वास्ता दिया, जिस पर वह तैयार हो गया। तीनों ने पिपरसंड इलाके के गहरू जंगल में लेकर आने की बात कही।एडीसीपी मध्य चिरंजीव नाथ सिन्हा के मुताबिक आरोपी कैफ उसे गहरू जंगल के सुनसान इलाके में तालाब किनारे लेकर गया। वहां आरोपी कैफ ने छात्रा के साथ संबंध बनाए। इसी बीच झाडिय़ों में छिपे दोनों दोस्त आरोपी विशाल व आरोपी आकाश भी आ गए। दोनों ने छात्रा पर संबंध बनाने का दबाव बनाया। छात्रा ने विरोध किया और वहां से नाराज होकर जाने लगी। इस पर आरोपी आकाश व आरोपी विशाल ने उसे दबोच लिया। आरोपी आकाश ने उसका हाथ पकड़ा और आरोपी विशाल ने पैर। छात्रा ने चीखना शुरू किया तो विशाल ने चाकू से उसकी पीठ पर वार कर दिया। छात्रा चाकू लगने के बाद बबूल की झाडिय़ों से होकर भागने लगी। तभी आरोपी विशाल व आरोपी आकाश ने कहा कि इसे मार दो नहीं तो हम लोग फंस जाएंगे। तीनों ने उसे कच्चे रास्ते के पास खाली मैदान पर घेर लिया। ताबड़तोड़ कई बार चाकू से वार किया। छात्रा की मौत के बाद तीनों वहां से भाग गए।हत्यारों ने पार कीं क्रूरता की हदडीसीपी मध्य सोमेन वर्मा के मुताबिक तीनों आरोपियों ने बताया कि छात्रा की हत्या रात करीब 8 से 9 बजे के बीच की थी। सोमवार शाम को पैनल ने छात्रा केशव का पोस्टमार्टम किया जिसमें सामने आया कि उसके शरीर पर छोटे-बड़े 25 घाव मिले। छह इंच के चाकू से किए गए 15 घाव काफी गहरे थे। वहीं दो घाव आर-पार थे। सभी घाव पीठ, पेट, सीने और पैर पर लगे हैं। इसके अलावा गला कसा गया था। चाकू का वार इतनी बेरहमी से किया गया था कि छात्रा के यूरिनल का थैला भी फट गया था। चाकू का एक टुकड़ा छात्रा के रीढ़ की हड्डी में फंसा मिला।चप्पल फैक्टरी में साथ काम करती थी छात्रापुलिस के मुताबिक, छात्रा गौरी स्थित शिवाय ज्वेलर्स के पहले नादरगंज इलाके के एक चप्पल फैक्टरी में काम करती थी जहां उसकी दोस्ती आरोपी कैफ से हुई थी। कुछ महीने पहले छात्रा ने गौरी के शिवाय ज्वेलर्स पर काम करना शुरू किया। इस दौरान भी दोनों मिलते रहे।
- संभल। उत्तर प्रदेश का एक शख्स साली के प्यार में इस कदर पागल हो जाता है कि भूल बैठता है कि किसी की हत्या कर इसमें कामयाबी नहीं मिल सकती है। जंगल में पत्नी की अर्धनग्न लाश मिलती है तो वह थाने में जाकर किसी अज्ञात शख्स के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर देता है।पुलिस ने बताया कि मामला उत्तर प्रदेश के संभल के असमोली थाना क्षेत्र के मदाला गांव का है, किसी धारदार हत्यार से महिला की निर्मम हत्या की गई थी। खून से लथपथ लाश के बारे में जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस के अनुसार सबसे पहले आरोपी पति पर शक की सुई घूमी जो बाद में सही साबित हुई।पुलिस ने बताया कि धारदार हथियार से महिला का सर कटा था, पहले दृश्या में ही क़त्ल के पीछे किसी नफरत का कारण नजर आ रहा था। मृतक महिला के पति का नाम आरोपी अतर सिंह बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार कड़ी पूछताछ के बाद उसने सब कुछ उगल डाला, साली के साथ आरोपी अतर के नाजायज संबंध थे। हत्या में जब पुलिस ने कड़ी पूछताछ की तो अतर सिंह ने जुर्म कबूल किया, आरोपी ने बताया कि पत्नी जोगेंद्री को उसने इसलिए मौत के घाट के उतार क्योंकि वह साली के साथ संबंधों में आड़े आ रही थी। अक्सर दोनों के बीच इसपर विवाद होने लगा था।पुलिस के अनुसार शख्स ने खुलासा किया कि वह अपनी साली से शादी करना चाह रहा था लेकिन पत्नी रास्ते में आ रही थी, आखिरकार प्यार में सनकी बना आरोपी अतर पत्नी को खेत में किसी बहाने से पत्नी को ले जाता है और फिर खुखरी से गर्दन पर वॉर कर डालता है, गांव वालों के नजर में लाश आती है तो वह थाने जाकर अज्ञात शख्स के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करा आता है।--
- मुरादाबाद। प्यार में पागल एक महिला हद से गुजर गई। पति ने जब उसे प्रेमी के साथ रंगे हाथ पकड़ लिया तो उसने और उसके प्रेमी ने युवक को छत से नीचे फेंक दिया। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।थाना प्रभारी गजेंद्र सिंह ने बताया कि प्रेमी के प्यार में अंधी पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर पति को जान से मारने की साजिश रच डाली। पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर छत से पति को नीचे फेंक दिया। घायल अवस्था में पति को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं इस मामले में पीडि़त के स्वजन की तहरीर पर पुलिस ने दोनों आरोपितों पर मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने आरोपित पत्नी को गिरफ्तार कर जेल भेजने की कार्रवाई की।थाना प्रभारी गजेंद्र सिंह ने बताया कि भोजपुर थाना क्षेत्र निवासी व्यक्ति ने कटघर थाने में तहरीर देकर महिला के खिलाफ हत्या की साजिश रचने व जानलेवा हमले का आरोप लगाया। शिकायतकर्ता ने कहा कि महिला अपने पति के साथ कटघर क्षेत्र में रहती है। महिला का किसी दूसरे युवक के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा है। जब इस बात की जानकारी पति को हुई तो उसने विरोध करना शुरू कर दिया। जिस कारण आए दिन घर में झगड़े होने लगे। पति को शर्मिंदा करने के लिए महिला आए दिन अपने प्रेमी को चोरी-छिपे घर पर बुला लिया करती थी। पति ने जब पत्नी को रंगे हाथ प्रेमी के साथ पकड़ लिया तो पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर पति को छत से नींचे फेंक दिया। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गया, सूचना पर पहुंचे स्वजन ने उसे अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया। थाना प्रभारी गजेंद्र सिंह ने बताया कि इस मामले में आरोपित महिला व उसके आरोपी प्रेमी के साथ मुकदमा दर्ज करने के साथ ही महिला को जेल भेजने की कार्रवाई की गई है।
- नई दिल्ली। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने आयुध निर्माणी बोर्ड और इससे संबद्ध 41 फैक्ट्रियों को सार्वजनिक क्षेत्र रक्षा उपक्रम की तर्ज पर सात कॉरपोरेट कंपनियों में पुनर्गठित करने की भी मंजूरी दे दी है।इस कदम का उद्देश्य इन सात कंपनियों को अधिक स्वायत्तता देना और उनकी विश्वसनीयता बढ़ाना है। आयुध निर्माणी बोर्ड का वार्षिक कारोबार लगभग 19 हजार करोड़ रुपए है। शत-प्रतिशत सरकारी स्वामित्व वाली ये कंपनियां युद्ध सामग्री और गोला-बारूद, वाहन-टैंक, अन्य हथियारों और उपकरण तथा पैराशूट का निर्माण कार्य करेंगी। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस पुनर्गठन के बाद बोर्ड से संबंधित लगभग 70 हजार कर्मचारियों सेवाशर्तो, वेतन, अवकाश प्राप्ति और अन्य लाभों में कोई बदलाव नहीं होगा।
- पुरी। पुरी का प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर 25 जुलाई को जनता के लिए खुलेगा। यह जानकारी प्राधिकारियों ने बुधवार को दी। मुख्य प्रशासक कृष्ण कुमार ने कहा कि यह निर्णय श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) की बैठक में लिया गया। उन्होंने कहा कि मंदिर 15 जून तक भक्तों के लिए बंद था, जिसे 25 जुलाई तक बढ़ा दिया गया।रथ यात्रा उत्सव पूरा होने के दो दिन बाद मंदिर जनता के लिए खुलेगा। भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ 23 जुलाई को नौ दिवसीय रथयात्रा उत्सव के बाद मंदिर लौटेंगे। उन्होंने कहा, ''भक्तों को दो दिन बाद मंदिर में प्रवेश करने का अवसर मिलेगा। कुमार ने कहा कि हालांकि, एसजेटीए 24 या 25 जुलाई को फिर से बैठक करेगा और मौजूदा स्थिति के आधार पर जनता को अनुमति देने पर फैसला करेगा।24 जून को स्नान यात्रा (स्नान उत्सव) और 12 जुलाई को रथ यात्रा राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार भक्तों के बिना, कोविड-19 दिशानिर्देशों के पालन के साथ आयोजित की जाएगी। कुमार ने कहा कि रथ यात्रा सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी में सेवादारों की भागीदारी से होगी। उन्होंने कहा कि उत्सव में भाग लेने वाले सेवकों को टीकाकरण की दोनों खुराकों का प्रमाण पत्र या कोविड निगेटिव रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। जिलाधिकारी समर्थ वर्मा ने कहा कि त्योहार के दौरान पुरी में निषेधाज्ञा लागू की जाएगी। एसजेटीए ने एक अलग बैठक में जगन्नाथ मंदिर में आठ दरवाजों पर चांदी की परत चढ़ाने के लिए दो समितियों का गठन करने का भी निर्णय लिया। उनमें से एक तकनीकी समिति होगी और दूसरी सेवादारों का प्रतिनिधित्व करेगी।
- नोएडा। उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा के बादलपुर थाना क्षेत्र में एक महिला ने खुद को और अपनी छह वर्षीय बेटी को आग लगाकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने यह जानकारी दी।अपर पुलिस उपायुक्त (जोन द्वितीय) अंकुर अग्रवाल ने बताया कि बादलपुर थाना क्षेत्र के सादोपुर गांव में रहने वाली ज्योति (30) ने खुद पर तथा अपनी बेटी पर तेल डालकर आग लगा ली जिससे वे दोनों गंभीर रूप से झुलस गईं। उन्होंने बताया कि बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई जबकि ज्योति को गंभीर हालत में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां बुधवार शाम को उपचार के दौरान ज्याोति की भी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान पुलिस को पता चला है कि ज्योति के पति की डेढ़ माह पूर्व बीमारी के कारण मौत हो गई थी और तब से वह काफी अवसाद में थी। अग्रवाल ने बताया कि पुलिस ने बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। उन्होंने बताया कि पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है। (प्रतीकात्मक फोटो)
- न्यूयॉर्क। मॉडर्ना का कोविड-19 टीका और प्रोटीन आधारित एक अन्य प्रायोगिक टीका बंदर की एक प्रजाति रीसस मैकाक के बच्चों पर किए गए शुरुआती परीक्षण में सुरक्षित और सार्स-कोव-2 वायरस से लड़ने में कारगर एंटीबॉडी उत्पन्न करने वाले साबित हुए हैं। जर्नल ‘‘साइंस इम्यूनोलॉजी'' में मंगलवार को प्रकाशित अनुसंधान संकेत करता है कि बच्चों के लिए टीका महामारी की विभीषिका को कम करने में कारगर हथियार साबित हो सकता है। अमेरिका स्थित न्यूयॉर्क-प्रेस्बाइटेरियन कॉमनस्काई चिल्ड्रेन हॉस्पिटल की सेली पर्मर ने कहा, ‘‘ कम उम्र के बच्चों के लिए सुरक्षित और प्रभावी टीके से कोविड-19 के प्रसार को सीमित करने में मदद मिलेगी क्योंकि हम जानते हैं कि, भले ही बच्चे सार्स-कोव-2 के संक्रमण से बीमार हों या बिना लक्षण वाले हों, वे इसका प्रसार कर सकते हैं।'' पर्मर ने कहा, ‘‘ इससे भी बड़ी बात है कि कई बच्चे बीमार हुए और यहां तक कि संक्रमण की वजह से कई की मौत तक हो गई। संक्रमण को रोकने के लिए लगाई गई पाबंदियों से बच्चों पर कई और नकारात्मक असर पड़े। इसलिए बच्चे कोविड-19 से बचाए जाने के लिए टीके के हकदार हैं।'' शोधपत्र के मुताबिक, रीसस मैकाक प्रजाति के 16 नन्हें बंदरों में टीके की वजह से वायरस से लड़ने की क्षमता 22 हफ्तों तक बनी रही। अनुसंधानकर्ता इस साल टीके से लंबे समय तक संभावित सुरक्षा कवच उत्पन्न करने के लिए चुनौती पूर्ण अध्ययन कर रहे हैं। अमेरिका स्थित नॉर्थ कैरोलिना विश्वविद्यालय में प्रोफेसर क्रिस्टीना डी पेरिस ने कहा, ‘‘हम संभावित एंटीबॉडी का स्तर वयस्क मैकाक से तुलना कर देख रहे हैं, हालांकि, मैकाक के बच्चों को महज 30 माइक्रोग्राम टीके की खुराक दी गई जबकि वयस्कों के लिए यह मात्रा 100 माइक्रोग्राम थी।'' डी पेरिस ने कहा, ‘‘मॉडर्ना के टीके में हमने मजबूत ‘टी' कोशिका की प्रतिक्रिया देखी, जिसके बारे में हम जानते हैं कि बीमारी की गंभीरता को सीमित करने में यह अहम है।'' अनुसंधानकर्ताओं ने इस अध्ययन के तहत लगभग दो महीने की उम्र के, मैकाक के 16 बच्चों को आठ-आठ के दो समूहों में बांटकर उनका टीकाकरण किया और इसके चार हफ्ते बाद पुन: टीका लगाया। उन्होंने बताया कि प्रत्येक जानवर को मॉडर्ना एमआरएनए आधारित टीके का प्रीक्लीनिक प्रकार दिया गया या अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी ऐंड इन्फेक्शियस डीज़ीज़ (एनआईएआईएडी) द्वारा विकसित प्रोटीन आधारित टीका दिया गया। एमआरएनए आधारित टीका शरीर को वायरस की सतह का प्रोटीन पैदा करने का निर्देश देता है जिसे स्पाइक प्रोटीन भी कहते हैं। इससे मानव प्रतिरक्षण कोशिकाएं इन प्रोटीन की पहचान करती हैं और एंटीबॉडी पैदा करने के साथ प्रतिरक्षण के लिए अन्य उपाय करती है। एनआईएआईडी का टीका वास्तव में स्पाइक प्रोटीन है जिसकी पहचान प्रतिरक्षण प्रणाली उसी प्रकार करती है। अनुसंधानकर्ताओं का दावा है कि दोनों ही टीकों के बाद नन्हें बंदरों में एंटीबॉडी विकसित हुईं और स्पाइक प्रोटीन विशिष्ट टी कोशिकाओं की उल्लेखनीय प्रतिक्रिया सामने आई।
- नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को कोविड-19 के खिलाफ अग्रिम मोर्चे पर तैयार योद्धाओं के लिए विशेष रूप से तैयार एक क्रैश कोर्स की शुरुआत करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि इसके साथ ही 26 राज्यों में फैले 111 प्रशिक्षण केन्द्रों में इस कार्यक्रम की शुरूआत हो जाएगी। प्रधानमंत्री वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित भी करेंगे। इस अवसर पर केन्द्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री भी मौजूद रहेंगे। पीएमओ के मुताबिक इस कार्यक्रम का उद्देश्य देशभर में एक लाख से अधिक कोविड योद्धाओं को कौशल से लैस करना और उन्हें कुछ नया सिखाना है। पीएमओ ने कहा, ‘‘कोविड योद्धाओं को होम केयर सपोर्ट, बेसिक केयर सपोर्ट, एडवांस्ड केयर सपोर्ट, इमरजेंसी केयर सपोर्ट, सैंपल कलेक्शन सपोर्ट और मेडिकल इक्विपमेंट सपोर्ट जैसे छह कार्यों से जुड़ी विशिष्ट भूमिकाओं के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा।'' इस कार्यक्रम को 276 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय परिव्यय के साथ प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना तृतीय के केन्द्रीय घटक के तहत एक विशेष कार्यक्रम के रूप में तैयार किया गया है। इससे स्वास्थ्य के क्षेत्र में श्रमशक्ति की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए कुशल गैर-चिकित्सा स्वास्थ्यकर्मियों को तैयार किया जाएगा। किसी विषय विशेष की जानकारी देने और कौशल विकसित करने के मकसद से अल्प अवधि के लिए चलाये जाने वाले कार्यक्रम को क्रैश कोर्स कहते हैं।
- नयी दिल्ली। सरकार ने बुधवार को जारी अपने दिशा-निर्देशों में कहा कि कोविड-19 के वयस्क रोगियों के उपचार में काम आने वाली आइवरमेक्टिन, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, फैविपिराविर जैसी दवाएं और डॉक्सीसाइक्लिन तथा एजिथ्रोमाइसिन जैसी एंटीबायोटिक औषधियां बच्चों के उपचार के लिए अनुशंसित नहीं हैं। इन आशंकाओं के बीच कि महामारी के मामलों में एक अंतराल के बाद फिर से वृद्धि हो सकती है, सरकार ने बच्चों के लिए कोविड देखरेख केंद्रों के संचालन के वास्ते दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि गंभीर कोरोना वायरस संक्रमण से पीड़ित बच्चों को चिकित्सा देखभाल उपलब्ध कराने के लिए मौजूदा कोविड देखरेख प्रतिष्ठानों की क्षमता में वृद्धि की जानी चाहिए। इनमें कहा गया है कि बच्चों के लिए कोविड रोधी टीके को स्वीकृति मिलने की स्थिति में टीकाकरण में ऐसे बच्चों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जो अन्य रोगों से पीड़ित हैं और जिन्हें कोविड-19 का गंभीर जोखिम हो। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा बच्चों के उपचार के बारे में जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि वयस्क कोविड रोगियों के उपचार में काम आने वाली अधिकतर दवाएं जैसे कि आइवरमेक्टिन, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, फैविपिराविर जैसी औषधियां और डॉक्सीसाइक्लिन तथा एजिथ्रोमाइसिन जैसी एंटीबायोटिक दवाओं का कोविड-19 से पीड़ित बच्चों पर परीक्षण नहीं किया गया है तथा इसलिए ये बच्चों के उपचार के लिए अनुशंसित नहीं हैं। इसने कहा, ‘‘लॉकडाउन हटने या स्कूलों के फिर से खुलने के बाद या अगले तीन-चार महीनों में संभावित तीसरी लहर के दौरान संक्रमण के मामलों में किसी भी वृद्धि से निपटने के लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्र को संयुक्त रूप से प्रयास करने की आवश्यकता है। देखभाल के मूल सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए।'' दिशा-निर्देशों में यह भी कहा गया है कि बच्चों की देखरेख के लिए अतिरिक्त बिस्तरों का अनुमान महामारी की दूसरी लहर के दौरान विभिन्न जिलों में संक्रमण के दैनिक मामलों के चरम के आधार पर लगाया जा सकता है। मंत्रालय ने कहा कि इससे, बच्चों में संक्रमण के मामलों के बारे में और साथ में यह भी अनुमान लगाया जा सकता है कि उनमें से कितने मरीजों को भर्ती करने की आवश्यकता पड़ेगी। दिशा-निर्देशों में कहा गया है, ‘‘कोविड से गंभीर रूप से बीमार बच्चों को देखभाल (चिकित्सा) उपलब्ध कराने के लिए मौजूदा कोविड देखरेख केंद्रों की क्षमता को बढ़ाना वांछनीय है। इस क्रम में बच्चों के उपचार से जुड़े अतिरिक्त विशिष्ट उपकरणों और संबंधित बुनियादी ढांचे की जरूरत होगी।'' केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिशा-निर्देशों में कहा, ‘‘इसके अतिरिक्त, पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित कर्मी-डॉक्टर और नर्स दोनों, उपलब्ध कराए जाने चाहिए। स्वास्थ्य अधिकारियों को बच्चों (महामारी से पीड़ित) की उचित देखरेख के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू करने चाहिए। बच्चों के अस्पतालों में अलग इंतजाम किए जाने चाहिए, उदाहरण के लिए कोविड-19 से पीड़ित बच्चों की देखरेख के लिए अलग से बिस्तर तैयार किए जाने चाहिए।'' दिशा-निर्देशों में कहा गया कि वांछनीय है कि बच्चों की देखरेख के लिए कोविड उपचार प्रतिष्ठानों में विशिष्ट क्षेत्र निर्धारित किए जाएं और वहां बच्चों के साथ माता-पिता को ठहरने की अनुमति दी जानी चाहिए। मंत्रालय ने कहा, ‘‘मल्टीसिस्टम इनफ्लेमेटरी सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों, जिनकी जांच रिपोर्ट गंभीर कोविड के संदर्भ में निगेटिव हो, को मौजूदा बाल रोग उपचार प्रतिष्ठानों द्वारा देखरेख उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इन प्रतिष्ठानों को भी अपनी क्षमता में, खासकर उच्च निर्भरता इकाई (एचडीयू) गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) सेवाओं संबंधी क्षमता को मजबूत करना चाहिए।'' दस्तावेज अवसंरचना, उपकरण और श्रमशक्ति की अतिरिक्त आवश्यकता के बारे में मार्गदर्शन उपलब्ध कराता है।यह उल्लेख करते हुए कि कोविड-19 से पीड़ित बच्चों में से ज्यादातर को कोई लक्षण नहीं होते या फिर लक्षण हल्के होते हैं, और उनकी देखभाल माता-पिता द्वारा घर पर ही की जा सकती है, मंत्रालय ने कहा कि लक्षणयुक्त बाल रोगियों के उपचार में बुखार की स्थिति में पैरासीटामोल दवा दी जा सकती है और उनकी श्वसन दर, मुंह से खाना खाने, सांस लेने में कठिनाई और ऑक्सीजन सांद्रता जैसी स्थितियों पर नजर रखी जानी चाहिए। दिशा-निर्देशों में कहा गया है, ‘‘सामुदायिक स्तर पर, घर में बच्चों के रोग प्रबंधन तथा यह पता लगाने के लिए आशा कर्मियों और बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्यकर्मियों की मदद ली जा सकती है कि कहीं पीड़ित बच्चों को अस्पताल में भर्ती किए जाने की आवश्यकता तो नहीं।'' दस्तावेज में सामुदायिक स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है और कहा गया है कि समुदाय सहित सभी हितधारकों को सूचना शिक्षा संचार के जरिए शिक्षित किया जाना चाहिए। मंत्रालय ने कहा, ‘‘कुछ केंद्रों को कोविड देखरेख एवं अनुसंधान के लिए क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में निर्दिष्ट किया जा सकता है। ये केंद्र चिकित्सीय प्रबंधन एवं प्रशिक्षण में नेतृत्व प्रदान कर सकते हैं। बड़ी संख्या में प्रतिष्ठानों तक पहुंच के लिए टेलीमेडिसिन सेवा का सहारा लिया जा सकता है।'' बच्चों में कोविड बीमारी को लेकर दस्तावेज में सभी स्तरों पर आंकड़े एकत्र करने आदि पर राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकरण व्यवस्था शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। दिशा-निर्देशों में कहा गया है, ‘‘बच्चों में कोविड रोग के क्षेत्र में अनुसंधान को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है जिसमें प्रबंधन के विभिन्न पहलू शमिल होने चाहिए।'' इनमें कहा गया है कि सीरो सर्वेक्षण संबंधी रिपोर्ट से पता चलता है कि 10 साल से अधिक उम्र के बच्चों में कोरोना वायरस संक्रमण की आवृत्ति वयस्कों जैसी ही होती है, हालांकि महामारी के पुष्ट मामलों में 20 साल से कम आयु के लोगों में 12 प्रतिशत से कम मामले हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, ‘‘बच्चों में वयस्कों के मुकाबले बीमारी (कोरोना वायरस संक्रमण) की गंभीरता कम होती है। अधिकतर बच्चों में संक्रमण लक्षण विहीन या हल्के लक्षणों वाला होता है। स्वस्थ बच्चों में मध्यम से गंभीर स्तर का संक्रमण असामान्य है।
- नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को भारत को सबसे बड़े स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्रों में एक बताया और वैश्विक निवेशकें भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया। प्रधानमंत्री ने यह भी कि कहा कि देश में कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न बाधाओं के बाद अब स्वास्थ्य सुविधाओं और अर्थव्यवस्था को दुरूस्त और तैयार करने की जरूरत है। स्टार्ट-अप क्षेत्र पर केंद्रित विवाटेक सम्मेलन के पांचवें संस्करण को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और फ्रांस व्यापक विषयों पर साथ मिलकर काम कर रहे हैं और यह समय की जरूरत है कि दोनों कि देश इस साझेदारी को आगे जारी रखें। उन्होंने कहा कि कोविड के दो टीके भारत में बनाए गए हैं तथा कुछ और टीको के विकास एवं परीक्षण का काम चल रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले एक साल से हमने विभिन्न क्षेत्रों में बाधाओं का अनुभव किया है। अभी भी इसका काफी प्रभाव है। लेकिन हमें इससे निराश नहीं होना है।'' महामारी के कारण स्वास्थ्य सुविधाओं और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में आई बाधाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘इसकी बजाय हमें इन्हें दुरूस्त और तैयार करने की जरूरत है।'' उल्लेखनीय है कि कोविड महामारी के चलते देश में लगाए गए लॉकडाउन की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने खान से लेकर अंतरिक्ष तक और बैंकिंग से लेकर परमाणु ऊर्जा तक सभी क्षेत्रों में व्यापक सुधार किए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह दर्शाता है कि महामारी के दौर में भी भारत अनुकूलनशील और कुशलता से आगे बढ़ा है।''उन्होंने कहा कि भारत नवाचारों और निवेशकों को उनके अनुरूप सुविधाएं मुहैया कराता हैंउन्होंने कहा, ‘‘मैं प्रतिभा, बाजार, पूंजी, परिवेश और खुलेपन की संस्कृति ए इन पांच स्तंभों के आधार पर दुनिया को भारत में निवेश करने के लिए आमंत्रित करता हूं।'' फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ओर विभिन्न यूरोपीय देशों के मंत्री और सांसद भी इस कार्यक्रम के प्रमुख वक्ताओं में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में एप्पल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिम कुक, फेसबुक के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग और माइक्रोसॉफ्ट के अध्यक्ष ब्रेड स्मिथ सहित कॉर्पोरेट जगत की अन्य जान-मानी हस्तियों को भी आमंत्रित किया गया है। विवाटेक यूरोप का सबसे बड़ा डिजिटल और स्टार्टअप कार्यक्रम है और 2016 से हर साल पेरिस में इसका आयोजन किया जाता रहा है। विज्ञापन और मार्केटिंग जगत की प्रमुख कंपनी पब्लिसीज ग्रुप और फ्रांस के अग्रणी मीडिया समूह लेस इकोज की ओर से संयुक्त रूप से इसका आयोजन किया जाता है। यह आयोजन प्रौद्योगिकी नवाचार और स्टार्टअप इको सिस्टम के हितधारकों को एक साथ लाता है। इस आयोजन में प्रदर्शनियां, पुरस्कार, पैनल चर्चा और स्टार्टअप प्रतियोगिताएं शामिल की जाती हैं। इसके पांचवें संस्करण का आयोजन 19 जून तक चलेगा
- नयी दिल्ली। मॉनसून के राजस्थान, गुजरात के शेष हिस्से, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली तक पहुंचने के लिए वायुमंडल संबंधी स्थितियां अब भी अनुकूल नहीं हैं। यह जानकारी बुधवार को भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने दी। इसने कहा कि च्रकवातीय सर्कुलेशन पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के इलाकों में बना हुआ है और वहां पश्चिमी विक्षोभ की भी स्थिति है। आईएमडी के महानिदेशक एम. महापात्र ने कहा कि ये स्थितियां मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल नहीं हैं। आईएमडी ने कहा, ‘‘मॉनसून के राजस्थान, गुजरात के शेष हिस्से, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली पहुंचने के लिए वायुमंडलीय स्थिति अनुकूल नहीं है।'' बहरहाल, आईएमडी ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में वर्तमान चक्रवातीय स्थिति के कारण मॉनसून उत्तर प्रदेश के कुछ और हिस्सों में अगले पांच दिनों में धीरे-धीरे पहुंच सकता है। मॉनसून पश्चिम उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पहुंच गया है। मॉनसून की उत्तरी सीमा दीव, सूरत, नंदरबार, भोपाल, नौगोंग, हमीरपुर, बाराबंकी, बरेली, सहारनपुर, अंबाला और अमृतसर से गुजर रही है। केरल में समय से दो दिन के विलंब के बाद तीन जून को पहुंचे दक्षिण पश्चिम मॉनसून ने तेजी से बड़े हिस्से को कवर किया।
- महोबा (उप्र) । महोबा जिले के कबरई कस्बे में बुधवार सुबह दो ट्रकों के बीच टक्कर के बाद आग लग गयी। इस हादसे में, आग से जलकर दोनों ट्रकों के चालकों की मौत हो गयी। कबरई थाना प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) दिनेश सिंह ने बताया कि कबरई कस्बे में कानपुर सड़क मार्ग पर बुधवार तड़के करीब चार बजे दो ट्रकों में आमने-सामने हुई टक्कर के बाद आग लग गयी। इस हादसे में दोनों ट्रकों के चालकों प्रिंशु पाल (22) और शिवकुमार (35) की जलने से मौत हो गयी। उन्होंने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त ट्रकों को कब्जे में ले लिया गया है और दोनों ट्रकों के चालकों के शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर हादसे की जांच शुरू कर दी गयी है। पुलिस ने बताया कि एक ट्रक कबरई से गिट्टी लादकर कानपुर जा रहा था, जबकि दूसरा ट्रक कानपुर से गिट्टी लेने कबरई आ रहा था, तभी यह हादसा हो गया।
- नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छह साल के बच्चे की मां की उनके साहस और सकारात्मक सोच के लिए प्रशंसा की है। उन्होंने कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद खुद को अपने बेटे से अलग कर लिया था। गाजियाबाद के सेक्टर छह में रहने वाली पूजा वर्मा और उनके पति गगन कौशिक कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे। वर्मा, उनके पति और छह वर्षीय बेटा तीन कमरों के एक फ्लैट में रहते हैं और अप्रैल में कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद दंपति ने एक कड़ा फैसला किया और तय किया कि तीनों अलग अलग कमरों में रहेंगे। वर्मा ने कहा कि यह छह साल के बच्चे के लिए आसान नहीं था, जो अपने माता-पिता के प्यार के लिए तरस रहा था और वह यह समझने में असमर्थ था कि कोरोना वायरस क्या है या कोविड से संबंधित नियमों का क्या मतलब है और इस पृथक-वास की क्या जरूरत है। उन्होंने कहा कि बच्चा इस दुविधा में रहा कि उसने ऐसा क्या गलत कर दिया कि उसे अपने माता-पिता से अलग एक पृथक कमरे में रहना पड़ा है। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में वर्मा ने एक कविता के जरिए मां के तौर पर अपनी आज़माइश बताई जिन्हें अपने बच्चे से अलग रहना पड़ा। प्रधानमंत्री ने उन्हें पत्र लिखा और परिवार की खैरियत पूछते हुए कहा, “ मुझे खुशी है कि इन परिस्थितियों में भी, आप और आपके परिवार ने साहस के साथ कोविड के अनुरूप व्यवहार अपनाकर इस बीमारी से लड़ाई लड़ी है।” प्रधानमंत्री ने कहा, “ शास्त्रों ने हमें सिखाया है कि विपरीत परिस्थितियों में संयम नहीं खोना है और हिम्मत बनाए रखनी है।” महिला की कविता की तारीफ करते हुए मोदी ने कहा कि यह उस मां की चिंता को व्यक्त करती है जब वह अपने बच्चे से दूर होती है। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि हिम्मत और सकारात्मक सोच से, वर्मा आगे बढ़ाना जारी रखेंगी और जीवन में आने वाली किसी भी चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करेंगी। कौशिक ने कहा कि दंपति द्वारा अलग रहने का कड़ाई से पालन करने की वजह से उनका बेटा कोविड-19 की चपेट में नहीं आया। उन्होंने कहा कि वह और उनकी पत्नी पूरी तरह से ठीक हो गए हैं।
- आणंद ।गुजरात के आणंद जिले के इंद्रनाज गांव के निकट एक कार की विपरित दिशा से आ रहे एक ट्रक से बुधवार सुबह हुई भीषण भिड़ंत में दो बच्चों सहित नौ लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि हादसे में तीन और पांच साल के दो बच्चों के अलावा, दो महिलाओं की भी मौत हो गई। पुलिस ने पहले हादसे में 10 लोगों के मारे जाने की जानकारी दी थी। हादसा आणंद जिले के तारापुर को अहमदाबाद जिले के वतमान से जोड़ने वाले राजमार्ग पर हुआ। दुर्घटनाग्रस्त कार से सभी शव निकाल लिए गए हैं। पुलिस उपाधीक्षक भारती बेन पंड्या ने कहा, ‘‘ कार की आगे की सीट पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और शुरू में आगे की सीट पर कितने शव थे उनका पता नहीं था। जब पत्रकारों ने पूछा तो किसी ने कह दिया कि 10 लोग मारे गए हैं। हालांकि बाद में नौ लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई।'' उन्होंने बताया कि जिन मृतकों की पहचान हुई है, वह गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के भावनगर के निवासी थे। उन्होंने कहा, ‘‘ वे भावनगर जिले के वारतेज के निवासी थे और वे महाराष्ट्र से लौट रहे थे। हमने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। बच्चों की उम्र तीन से पांच साल के बीच थी।'' आणंद जिले के पुलिस अधीक्षक अजित राजियन ने बताया कि हादसा राज्य के राजमार्ग पर हुआ, जब एक कार को ट्रक ने टक्कर मार दी। उन्होंने कहा, ‘‘ हादसे में नौ लोगों की मौत हुई। हमने मृतकों और आरोपी ट्रक चालक की पहचान कर ली है। मृतक भावनगर के रहने वाले थे और सौराष्ट्र जा रहे थे। ट्रक दक्षिण गुजरात के सौराष्ट्र के मोरबी से आ रहा था।'' गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घटना पर दुख व्यक्त किया है।मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने एक बयान में कहा कि रूपाणी ने मृतकों के परिवार को उचित सहायता मुहैया कराने का आश्वासन दिया है। वहीं, शाह ने एक ट्वीट में मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
- जयपुर। राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित, देश के सबसे युवा पेटेंट धारक ह्रदयेश्वर सिंह भाटी का बुधवार को यहां ह्रदय गति रुकने से निधन हो गया। जयपुर के रहने वाले 19 वर्षीय भाटी ने शतरंज के क्षेत्र में सात नयी खोज और तीन पेटेंट अपने नाम कर इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्डस और इंडिया रिकॉर्डस में नाम दर्ज करवाया था। पारिवारिक सूत्रों ने बताया, ‘‘देर रात करीब एक बजे ह्रदयेश्वर को ह्रदयाघात हुआ और उनका निधन हो गया।'' उल्लेखनीय है कि भाटी मांसपेशियों की लाइलाज बीमारी ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित थे जिसकी वजह से उनका जीवन व्हील चेयर पर सिमट गया था। हृदयेश्वर सिंह भाटी ने सात आविष्कार के साथ तीन पेटेंट अपने नाम किए और कई पुरस्कार जीते। मात्र नौ साल की उम्र में गोलाकार शतरंज की खोज कर, पेटेंट हासिल करने वाले भाटी को ‘‘मिनी स्टीफन हॉकिंग'' कहा जाता था। केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने हृदयेश्वर को बाल श्रेणी के अंतर्गत- उत्कृष्ट रचनात्मक बाल (पुरुष) -2019 सशक्त दिव्यांगता के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया था।
- आगरा। आगरा में मंगलवार को बारिश के दौरान एक निर्माणाधीन मकान के ढह जाने से तीन बच्चों की मौत हो गई और छह अन्य लोग घायल हो गए। आगरा के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) सत्य नारायण गुप्ता ने बताया कि जब मकान ढहा, उस समय वहां एक परिवार के सदस्य बैठे हुए थे। मकान के ढह जाने से रोशनी (आठ) ,प्राची (तीन) और मयंक (पांच) की मौत हो गयी। हादसे में डॉली (30), जीतू (18), खुशी (आठ), दिव्यांशी (पांच) और अनुष्का (दो) घायल हो गए। घायलों को जिला अस्पताल और एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।
- जयपुर। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के प्रकोप के कम होने पर सरकार की ओर से बुधवार से लॉकडाउन में दी गई छूट में फिर से खुले टिकट वाले स्मारकों, संग्रहालयों में 772 पर्यटकों ने पहले दिन भ्रमण किया। राजस्थान में लॉकडाउन प्रतिबंधों के चलते स्मारक 17 अप्रैल से बंद थे। राजस्थान के पुरातत्व विभाग के अधीन 342 स्मारक ओर संग्रहालय हैं, जिनमें से 31 स्मारक और संग्रहालयों में टिकट के जरिये प्रवेश दिया जाता है। पुरातत्व और संग्रहालय विभाग के निदेशक प्रकाश चंद्र शर्मा ने बताया कि सभी स्मारकों को राज्य सरकार के दिशा-निर्देश के तहत बुधवार सुबह नौ बजे से अपराह्न तीन बजे तक पुन: खोल दिया गया है। सभी स्मारकों पर कोरोना संबंधी दिशा निर्देशों की पालना की जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले दिन स्मारकों, संग्रहालयों में आने वाले पर्यटकों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले कुछ कम थी। आने वाले दिनों में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि की संभावना हैं। राज्य के 31 स्मारकों और संग्रहालयों में 772 पर्यटकों ने भ्रमण किया जिसमें से सबसे ज्यादा राजधानी जयपुर के स्मारकों और संग्रहालयों में 518 पर्यटकों ने भ्रमण किया। राजधानी में स्मारकों और संग्रहालयों के फिर से खुलने के पहले दिन सबसे ज्यादा भीड प्रसिद्ध आमेर महल और आमेर किले में थी जहां 130 पर्यटकों ने भ्रमण किया। आमेर महल के अधीक्षक पंकज धरेन्द्र ने बताया कि बुधवार को पर्यटकों की संख्या कुछ कम थी लेकिन हमें उम्मीद है स्थिति में धीरे-धीरे अब सुधार आयेगा और पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी। गर्मियों के दिनो में आमेर महल में प्रतिदिन 1500 से 2000 पर्यटक भ्रमण करते है जबकि अक्टूबर से मार्च के पीक सीजन में पर्यटकों की संख्या 12 से 14 हजार तक पहुंच जाती है। राजधानी जयपुर के अन्य पर्यटक स्थलों नाहरगढ़ किले में 117 पर्यटक, अलबर्ट हॉल (संग्रहालय) में 110 पर्यटक, हवामहल में 96 पर्यटक, जंतर मंतर में 63 पर्यटक और सिसोदिया रानी के बाग में केवल दो पर्यटकों ने बुधवार को भ्रमण किया। वहीं, राजधानी जयपुर के बाहर चित्तौड़गढ़ में 103 पर्यटकों ने भ्रमण किया। वहीं बीकानेर, बांरा, डूंगरपुर, जैसलमेर, कोटा, भीलवाड़ा के स्मारकों और संग्रहालयों में कोई पर्यटक नहीं आया। इसी तरह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के तहत आने वाले स्मारकों को बुधवार से पुन: खोल दिया गया। एएसआई (जयपुर सर्किल) के एक अधिकारी ने बताया कि बुधवार को स्मारकों पर कोई पर्यटक नहीं आया। एएसआई जयपुर सर्किल के तहत 90 स्मारक आते हैं, जिनमें रणथम्भौंर किला (सवाईमाधोपुर) कुम्भलगढ़ किला (राजसमंद) और डीग महल (भरतपुर) में टिकट से भ्रमण किया जा सकता है।-file photo
- नयी दिल्ली। सरकार ने बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए टीकाकरण की प्रक्रिया को सुलभ बनाने के लिए ऐसे लोगों के ‘घर के पास' टीकाकरण केंद्र बनाने की अनुमति दी है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने एक बयान में महामारी के दौरान वरिष्ठ नागरिकों की सहायता के लिए सरकार द्वारा उठाये गये अनेक कदमों को रेखांकित किया। वह बुजुर्गों से दुर्व्यवहार के खिलाफ जागरुकता लाने के लिए मनाये जाने वाले अंतरराष्ट्रीय दिवस पर एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने बुजुर्ग लोगों को प्राथमिक श्रेणी में रखकर जल्द से जल्द टीका लगाकर उन्हें सुरक्षा प्रदान करने की पहल की है। इस नीति से बड़ी संख्या में बुजुर्गों ने टीके की पहली खुराक ले ली है।-file photo
- अमरावती/ मलकानगिरि। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम जिले में बुधवार तड़के राज्य पुलिस के 'एलीट ग्रेहाउंड्स' के साथ कथित मुठभेड़ में प्रतिबंधित माओवादी संगठन की तीन महिला सदस्य सहित कुल छह कथित माओवादी मारे गए। वहीं, पड़ोसी ओडिशा के मलकानगिरि जिले में भी सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच गोलीबारी की घटना हुई। अधिकारियों के मुताबिक मारे गए माओवादियों में जिला समिति कमांडर सांदे गंगिया शामिल है।विशाखापत्तनम के पुलिस अधीक्षक बी कृष्ण राव ने बताया कि अब तक मारे गए पांच माओवादियों की पहचान हो चुकी है जबकि एक महिला सदस्य की पहचान की जानी बाकी है। उन्होंने बताया कि माम्पा पुलिस थाने के तहत आने वाले तीगलमिट्टा जंगल क्षेत्र में प्रतिबंधित माओवादी संगठन और राज्य के नक्सल रोधी बल ग्रेहाउंड्स के बीच मुठभेड़ हुई। कृष्ण राव ने बताया, ''हमें सूचना मिली थी कि करीब 30 माओवादी गुप्त बैठक के लिए जंगल में एकत्रित हुए हैं। उनके बारे में जानकारी मिली थी कि वे स्थानीय आदिवासियों को परेशान कर रहे थे। हमने उनकी तलाश के लिए जंगल के इलाके में अपने जवानों को भेजा।'' पुलिस अधीक्षक ने बताया कि माओवादियों ने पहाड़ी पर से पुलिस कर्मियों पर गोलीबारी शुरू कर दी और '' बार-बार अनुरोध करने के बावजूद आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया।'' उन्होंने बताया, '' आत्मरक्षा में हमारे लोगों ने भी गोली चलाई और आगे बढ़े। हमें जंगल में छह माओवादियों के शव मिले हैं। घटनास्थल से एक एके-47, एक एसएलआर, एक कार्बाइन, तीन .303 राइफल और एक तमंचा बरामद हुआ है।'' कृष्ण राव ने कहा कि सूचना मिली है कि गोलीबारी में कुछ माओवादी घायल भी हुए हैं।उन्होंने कहा, ''अगर कोई माओवादी आत्मसमर्पण करता है तो हम उसके लिए बेहतर चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करेंगे। पहले भी इसी तरह की मुठभेड़ में घायल महिला माओवादी को हमने अस्पताल में भर्ती कराया था और पूरा इलाज कराया था। अत: वे बिना किसी आशंका के आकर आत्मसमर्पण कर सकते हैं।''वहीं, विशाखापत्तनम से करीब 200 किलोमीटर दूर ओडिशा के मलकानगिरि जिले के कुलाबेड़ा जंगल में माओवादियों के साथ उस समय भारी गोलीबारी हुई जब राज्य पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के जवान और जिला स्वयंसेवक बल के सदस्यों ने खुफिया सूचना के आधार पर इलाके में अभियान चलाया। मलकानगिरि के पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश खिलारी ने बताया, ''कुलाबेड़ा गांव के पास तलाश अभियान चल रहा था, तभी माओवादियों ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने पहले उनसे आत्मसमर्पण की अपील की और नहीं मानने पर जवाबी कार्रवाई की।'' उन्होंने बताया कि हालांकि, माओवादी इलाके की अच्छी जानकारी होने का फायदा उठाकर भाग निकले। अधिकारी ने बताया कि गोलीबारी के बाद इन्सास राइफल सहित बड़ी संख्या में हथियार और गोलाबारूद घटनास्थल से बरामद किया गया है ।
- गोरखपुर । जिले के बांसगांव क्षेत्र में बुधवार को एक पिकअप वाहन की टक्कर लगने से मोटरसाइकिल सवार दंपति की मौत हो गई। पुलिस सूत्रों ने यहां बताया कि कौड़ीराम तहसील के मिश्रौलिया गांव स्थित देयोरवीर टोला के रहने वाले संजय गुप्ता (30) अपनी पत्नी शोभा गुप्ता (28) के साथ मोटरसाइकिल से बांसगांव से लौट रहे थे, तभी रास्ते में एक पिकअप वाहन ने चारी गांव के नजदीक उनकी गाड़ी को पीछे से टक्कर मार दी। सूत्रों ने बताया कि इस हादसे में शोभा की मौके पर ही मौत हो गई जबकि संजय ने इलाज के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने टक्कर मारने वाले वाहन के चालक को हिरासत में ले लिया।
- नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने इस बात को रेखांकित किया कि योग ने कोविड-19 की वजह से सार्वजनिक गतिविधियों पर लगाई गई पाबंदियों के दौरान कैसे लोगों की मदद की है। उन्होंने कहा कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाने और तनाव प्रबंधन में योग के फायदे स्पष्ट हैं।मंगलवार को विश्व योग सम्मेलन 2021 के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए हर्षवर्धन ने कहा कि दुनिया भर में योग की स्वीकार्यता बढ़ रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने हर्षवर्धन के हवाले से एक बयान में कहा, "देखा जा रहा है कि पश्चिमी दुनिया में भी योग को एक दैनिक जीवन शैली के रूप में शामिल किया जा रहा है। महामारी के वर्तमान समय में भी, जब शारीरिक और मानसिक फिटनेस पर जोर दिया गया है, कई लोगों ने इसके लिए योग का रुख किया है।" उन्होंने इस साल योग दिवस पर केंद्रीय संदेश 'योग के साथ, घर पर रहें' के महत्व को लेकर कहा कि महामारी की वजह से इस साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर सामूहिक गतिविधियां नहीं होंगी। मंत्री ने कहा," यह संदेश कोविड-19 के समय में सबसे अधिक प्रासंगिक है, जब हम सभी के लिए यह आवश्यक है कि हम अपने समग्र स्वास्थ्य की देखभाल करते हुए सभी संभावित सावधानियां बरतें।" उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य है कि योग को हर नागरिक तक लेकर जाया जाए क्योंकि सामग्र सेहत के लिए योग के फायदे साबित हैं। यह कार्यक्रम मोक्षायतन योग संस्थान ने आयुष मंत्रालय एवं भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के साथ मिलकर सातवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया है। 21 जून को सातवां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है।
- नयी दिल्ली। ट्विटर ने मंगलवार को कहा कि उसने भारत के लिए अंतरिम मुख्य अनुपालन अधिकारी नियुक्त कर लिया है और जल्द ही अधिकारी का ब्यौरा सीधे सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ साझा किया जाएगा। सरकार ने ट्विटर को कुछ दिन पूर्व दिए एक नोटिस में कहा था कि उसे सूचना प्रौद्योगिकी कानून संबंधी नए नियमों के अनुपालन का आखिरी मौका दिया जाता है। उसे तत्काल नियमों का अनुपालन करना है। यदि वह इसमें विफल रहती है, तो उसे आईटी कानून के तहत मध्यस्थ मंच के नाते दायित्व से जो छूट मिली है, वह वापस ले ली जाएगी। इसके साथ ही उसे आईटी कानून और अन्य दंडात्मक प्रावधानों के तहत कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा। नये दिशानिर्देश 26 मई से प्रभाव में आए हैं।इसके बाद ट्विटर ने पिछले हफ्ते सरकार को पत्र लिखकर आश्वासन दिया था कि वह नये सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों के अनुरूप मुख्य अनुपालन अधिकारी की नियुक्ति करने के अंतिम चरण में है और सरकार को एक हफ्ते के भीतर अतिरिक्त ब्यौरा दे दिया जाएगा। एक आधिकारिक सूत्र ने यह जानकारी दी। मंगलवार को ट्विटर के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी नये दिशानिर्देशों का पालन करने की हर कोशिश कर रही है और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को प्रक्रिया के हर कदम पर प्रगति की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि एक अंतरिम मुख्य अनुपालन अधिकारी नियुक्त किया गया है और इससे जुड़ा ब्यौरा जल्द ही मंत्रालय के साथ साझा किया जाएगा। पिछले कुछ महीनों में ट्विटर और भारत सरकार के बीच कई बार टकराव हुए जिनमें किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुआ टकराव शामिल है। दोनों के बीच तब भी टकराव की स्थिति बनी जब अमेरिकी कंपनी ने सत्तारुढ़ दल भाजपा के कई नेताओं के राजनीतिक पोस्ट को "मैनिपुलेटेड मीडिया" के तौर पर टैग कर दिया जिसपर केंद्र ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। अंतिम टकराव आईटी नियमों के पालन करने को लेकर हुआ जिसमें ट्विटर देरी कर रही थी। ऐसे में ट्विटर का यह कदम महत्वपूर्ण है क्योंकि माइक्रोब्लॉगिंग साइट को आईटी नियमों का पालन करने में देरी के चलते सरकार के कड़े रुख का सामना करना पड़ रहा था। नये नियमों के तहत बड़े डिजिटल मंचों को अपने मंच पर चलने वाली सामग्री को लेकर अधिक जवाबदेह बनना होगा। नये नियमों के तहत ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे बड़े सोशल मीडिया मंचों को अतिरिक्त उपाय करने की जरूरत होगी। इसमें भारत में मुख्य अनुपालन अधिकारी, नोडल अधिकारी और शिकायत अधिकारी की नियुक्ति आदि शामिल हैं।
- नयी दिल्ली। सेवानिवृति कोष का संचालन करने वाली संस्था ईपीएफओ ने मंगलवार को कर्मचारियों के भविष्य निधि कोष के सार्वभौमिक खाता नंबर (यूएएन) को आधार नंबर के साथ सत्यापित करते हुये भविष्य निधि (पीएफ) रिटर्न दाखिल करने के आदेश पर अमल को एक सितंबर 2021 तक के लिये टाल दिया है। इससे नियोक्ताओं को उनके कर्मचारियों के आधार नंबर को उनके पीएफ खातों अथवा यूएएन नंबर के साथ जोड़ने के लिये अधिक समय मिल जायेगा। इससे पहले ईपीएफओ ने इस काम के लिये एक जून 2021 की समयसीमा रखी थी। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा जारी कार्यालय आदेश के मुताबिक आधार सत्यापित यूएएन के साथ इलेक्ट्रानिक चालान यानी पीएफ रिटर्न की रिसीट (ईसीआर) दाखिल करने पर अमल की समयसीमा को बढ़ाकर एक सितंबर 2021 कर दिया गया है। ईपीएफओ ने इस संबंध में श्रम मंत्रालय की एक अधिसूचना जारी होने के बाद आधार नंबर को जोड़ने अनिवार्य करने का फैसला किया। श्रम मंत्रालय ने इस संबंध में 3 मई को अधिसूचना जारी की जिसमें मंत्रालय और उसके तहत काम करने वाले निकायों से सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत लाभार्थियों से आधार नंबर लिये जाने को कहा गया।
- नयी दिल्ली। पेंशन कोष नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने पेंशन कोष की राशि पांच लाख रुपये से कम होने की स्थिति में अंशधारकों को बिना कोई पेंशन प्लान खरीदे समूची राशि निकालने की अनुमति दे दी है। वर्तमान में राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) के ग्राहकों को सेवानिवृति के समय अथवा 60 साल की आयु पूरी होने पर दो लाख रुपये का पेंशन कोष होने की स्थिति में बीमा कंपनियों द्वारा पेश की जाने वाली पेंशन योजना को खरीदना होता है। वह शेष 60 प्रतिशत राशि की निकासी कर सकते हैं। पेंशन नियामक ने एक गेजेट अधिसूचना में कहा है एनपीएस के तहत समय पूर्व निकासी सीमा को एक लाख रुपये से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये कर दिया गया है। नियामक ने एनपीएस में प्रवेश करने की अधिकतम आयु को भी 65 साल से बढ़ाकर 70 साल कर दिया है जबकि बाहर निकलने की आयु सीमा को 75 साल कर दिया गया है।























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