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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान ‘ओली दराजली दोस्तलिक’ से सम्मानित किए जाने पर राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव और उज्बेकिस्तान की जनता के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के दूरदर्शी नेतृत्व और भारत के प्रति उनकी मित्रता की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं और नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान मिलने पर खुशी जताते हुए इसे भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सदियों पुरानी दोस्ती और साझा विरासत को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि ‘दोस्तलिक’ का अर्थ दोस्ती है और यही शब्द भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों की वास्तविक भावना को सबसे बेहतर तरीके से व्यक्त करता है। पीएम मोदी ने कहा कि यह सम्मान किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान है। उन्होंने भारत के लोगों की ओर से उज्बेकिस्तान की जनता, सरकार और राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव का आभार व्यक्त किया।पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के दूरदर्शी नेतृत्व और भारत के प्रति उनकी मित्रता की भावना से दोनों देशों के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत उज्बेकिस्तान के साथ अपनी मित्रता को और मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और दोनों देश भविष्य में भी आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी सम्मान से खुशी और गर्व की अनुभूति होती है, लेकिन उसके साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है। उन्होंने उज्बेकिस्तान की ऐतिहासिक धरती से वहां के लोगों को भरोसा दिलाया कि भारत अपनी जिम्मेदारियों से कभी पीछे नहीं हटेगा और दोनों देशों की दोस्ती को हमेशा मजबूती से निभाएगा।पीएम मोदी ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ ग्लोबल साउथ की एकजुट आवाज बनेंगे। दोनों देश ग्लोबल साउथ के लोगों के कल्याण के लिए हर संभव प्रयास करेंगे और पूरी मानवता के बेहतर भविष्य के लिए मिलकर काम करेंगे। भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया जाना दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह साझेदारी आपसी विश्वास, मित्रता और साझा विरासत की मजबूत नींव पर आगे बढ़ेगी। उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान के दो दिवसीय दौरे के दौरान ताशकंद में हुए प्रमुख कार्यक्रमों की झलकियां साझा करते हुए कहा कि यात्रा का हर पड़ाव भारत और उज्बेकिस्तान के बीच मजबूत होते संबंधों और गहरी मित्रता को दर्शाता है। उन्होंने भारतीय समुदाय से मुलाकात, ‘यांगी उज्बेकिस्तान स्मारक’ पर पुष्पांजलि और विशेष योग सत्र का उल्लेख करते हुए दोनों देशों के बीच बढ़ते सांस्कृतिक जुड़ाव को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ताशकंद में बिताए समय का एक वीडियो साझा किया। उन्होंने लिखा कि विशेष स्वागत, ‘यांगी उज्बेकिस्तान स्मारक’ पर पुष्पांजलि अर्पित करने, भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात और अन्य प्रमुख कार्यक्रमों की खास झलकियां वीडियो में शामिल हैं।
ताशकंद में भारतीय समुदाय ने प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान ‘मोदी-मोदी’, ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए गए। भारतीय समुदाय की कुछ महिलाओं ने प्रधानमंत्री को राखी भी बांधी। बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिसे प्रधानमंत्री ने ध्यान से देखा और कार्यक्रम के बाद बच्चों से मुलाकात भी की। प्रधानमंत्री ने भारतीय समुदाय के स्नेह के लिए आभार जताते हुए कहा कि प्रवासी भारतीय भारत और उज्बेकिस्तान के बीच एक जीवंत सेतु की तरह काम कर रहे हैं और दोनों देशों की दोस्ती को मजबूत बना रहे हैं।स्वागत समारोह में भारतीय और उज्बेक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। प्रधानमंत्री ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों की संगीत परंपराओं का मेल उनके गहरे सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है। उन्होंने तबला प्रस्तुति की एक झलक भी साझा की। इसमें तबले के साथ उज्बेकिस्तान के पारंपरिक वाद्ययंत्र डोइरा और चांग का इस्तेमाल किया गया। प्रधानमंत्री ने इसे भारतीय और उज्बेक संगीत परंपराओं का मनमोहक संगम बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव के साथ ‘यांगी उज्बेकिस्तान स्मारक’ का दौरा किया और वहां पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि यह स्मारक उज्बेक लोगों की आकांक्षाओं और प्रगति का प्रतीक है। इसके बाद दोनों नेताओं ने यांगी उज्बेकिस्तान पार्क में उज्बेक संस्कृति और इतिहास को दर्शाने वाली कलाकृतियों का भी अवलोकन किया।प्रधानमंत्री मोदी रविवार को ताशकंद में आयोजित विशेष योग सत्र में भी शामिल हुए। उन्होंने उज्बेकिस्तान के 52 योग साधकों की प्रस्तुति देखी और सभी उम्र के लोगों की भागीदारी की सराहना की। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने उज्बेकिस्तान को योग से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विशेष योग सत्र में उज्बेकिस्तान योग फेडरेशन के छह सदस्य भी शामिल हुए। इन साधकों ने जून 2026 में अहमदाबाद में आयोजित पहले विश्व योगासन चैंपियनशिप में उज्बेकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने विभिन्न स्पर्धाओं में कुल 18 पदक जीते, जिनमें एक स्वर्ण, 14 रजत और तीन कांस्य पदक शामिल हैं। अहमदाबाद में उज्बेकिस्तान की पूरी टीम ने विभिन्न श्रेणियों में कुल 25 पदक हासिल किए थे। इसके बाद ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में इन खिलाड़ियों का योग प्रदर्शन भारत और उज्बेकिस्तान के बीच खेल, योग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की मजबूत होती कड़ी के रूप में सामने आया।उज्बेकिस्तान में योग के प्रति बढ़ती रुचि भारत और वहां के लोगों के बीच विकसित हो रहे सांस्कृतिक संबंधों को भी दर्शाती है। अहमदाबाद में 4 से 8 जून 2026 तक आयोजित पहले विश्व योगासन चैंपियनशिप में विभिन्न देशों की भागीदारी ने योगासन को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में नई पहचान दी। उज्बेकिस्तान के खिलाड़ियों का चैंपियनशिप में प्रदर्शन और इसके बाद ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी के सामने उनका योग सत्र में शामिल होना दोनों देशों के बीच खेल और सांस्कृतिक सहयोग की निरंतरता को रेखांकित करता है।प्रधानमंत्री मोदी अपनी दो दिवसीय राजकीय यात्रा के तहत ताशकंद पहुंचे थे। राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव स्वयं हवाई अड्डे पर उनका स्वागत करने पहुंचे। प्रधानमंत्री ने इस विशेष सम्मान के लिए राष्ट्रपति का आभार जताते हुए कहा कि यह उज्बेकिस्तान की उनकी चौथी यात्रा है और दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की गहराई तथा बढ़ती गति को दर्शाती है। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच राजनीतिक एवं आर्थिक संबंधों के साथ-साथ लोगों के बीच संपर्क और सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी लगातार मजबूत हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान भारतीय समुदाय की भागीदारी और योग तथा संगीत से जुड़े कार्यक्रमों ने इस रिश्ते के मानवीय और सांस्कृतिक पक्ष को प्रमुखता से सामने रखा। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शनिवार को ताशकंद में भारतीय समुदाय ने गर्मजोशी और उत्साह के साथ स्वागत किया। उनके आगमन पर लोगों ने ‘मोदी-मोदी’, ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। प्रधानमंत्री जब भारतीय समुदाय के लोगों का अभिवादन कर रहे थे, तभी कुछ महिलाओं ने उनके हाथ पर राखी बांधी। इस दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को और खास बना दिया। पीएम मोदी ने बच्चों के नृत्य प्रदर्शन को भी ध्यान से देखा और प्रस्तुति के बाद बच्चों से हाथ मिलाकर उनका उत्साह बढ़ाया।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय समुदाय के इस गर्मजोशी भरे स्वागत पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि ताशकंद में भारतीय समुदाय का प्यार और स्नेह उन्हें बहुत खुशी देता है। उन्होंने प्रवासी भारतीयों को भारत और उज्बेकिस्तान के बीच एक पुल बताते हुए कहा कि वे दोनों देशों के बीच दोस्ती के संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।विदेश मंत्रालय ने भी ताशकंद में भारतीय समुदाय के साथ प्रधानमंत्री की मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं। मंत्रालय ने कहा कि उज्बेकिस्तान में 16,000 से ज्यादा भारतीय छात्रों सहित जीवंत भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच दोस्ती का एक पुल है। समुदाय की मौजूदगी ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ते मानवीय और सांस्कृतिक संबंधों को भी रेखांकित किया।स्वागत कार्यक्रम में कलाकारों ने भारतीय और उज्बेक संस्कृति की झलक पेश करने वाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। प्रधानमंत्री मोदी बच्चों के नृत्य प्रदर्शन को ध्यान से देखते नजर आए। प्रस्तुति समाप्त होने के बाद उन्होंने बच्चों से हाथ मिलाया और उनका उत्साह बढ़ाया। इस दौरान भारतीय समुदाय के लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।पीएम नरेंद्र मोदी के स्वागत के दौरान भारतीय समुदाय की कुछ महिलाओं ने उनके हाथ पर राखी बांधी। इस आत्मीय पल ने कार्यक्रम को भावनात्मक और पारिवारिक रंग दे दिया। महिलाओं ने प्रधानमंत्री के प्रति स्नेह और सम्मान व्यक्त किया, वहीं पीएम मोदी ने भी उनका अभिवादन स्वीकार किया। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव के साथ यांगी उज्बेकिस्तान स्मारक का दौरा किया और पुष्पांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह स्मारक उज्बेक लोगों की आकांक्षाओं और प्रगति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अपनी यात्रा की शुरुआत इस स्मारक से करना उनके लिए खुशी की बात है।यांगी उज्बेकिस्तान पार्क में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव ने उज्बेक संस्कृति और इतिहास को दर्शाने वाली कलाकृतियों का अवलोकन किया। दोनों नेताओं की मौजूदगी में हुए इस कार्यक्रम ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक जुड़ाव को भी सामने रखा। दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर ताशकंद पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी का हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव ने गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रधानमंत्री ने इस विशेष स्वागत के लिए उज्बेक राष्ट्रपति का आभार जताया। उन्होंने कहा कि उज्बेकिस्तान की यह उनकी चौथी यात्रा है, जो दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की गहराई और बढ़ती गति को दर्शाती है। - लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं और उनके सहयात्रियों को दी गई निशुल्क बस यात्रा सुविधा का प्रदेशभर में बड़ी संख्या में लोगों ने लाभ उठाया। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, 28 अगस्त को ही 49.96 लाख से अधिक महिलाओं और उनके सहयात्रियों ने बिना किराया दिए यात्रा की। बयान के मुताबिक, वहीं, 29 अगस्त की शाम पांच बजे तक यह संख्या बढ़कर करीब 80 लाख पहुंच गई।निशुल्क यात्रा सुविधा शनिवार रात 12 बजे तक जारी रहेगी।उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के अनुसार, 27 अगस्त को 9.26 लाख से अधिक महिलाओं और सहयात्रियों ने इस योजना का लाभ उठाया, इनमें 6.03 लाख से अधिक महिलाएं और 3.22 लाख से अधिक सहयात्री शामिल थे। रक्षाबंधन के दिन 28 अगस्त को निशुल्क यात्रा करने वालों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई।बयान के मुताबिक, इस दिन 49.96 लाख से अधिक निशुल्क टिकट जारी किए गए, जिनमें 32.47 लाख से अधिक महिलाएं और 17.48 लाख से अधिक सहयात्री शामिल रहे। परिवहन निगम के आंकड़ों के मुताबिक, 27 और 28 अगस्त को मिलाकर कुल 59.23 लाख से अधिक टिकट जारी किए गए, जिनमें 38.51 लाख से अधिक महिलाएं और 20.71 लाख से अधिक सहयात्री शामिल हैं। सरकार के अनुसार, निशुल्क बस यात्रा योजना से बड़ी संख्या में परिवारों को त्योहार पर आर्थिक राहत मिली और महिलाओं को अपने भाइयों तक पहुंचने में सुविधा हुई। शुक्रवार से 'लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति योजना' के तहत 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं के लिए भी परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा सुविधा शुरू की गई है। बयान के मुताबिक, 28 अगस्त को यात्रा करने वाली महिलाओं में बुजुर्ग महिलाएं भी शामिल थीं। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) के प्रधान प्रबंधक (संचालन) अनिल कुमार ने बताया कि रक्षाबंधन पर संभावित भीड़ को देखते हुए पहले से व्यापक तैयारियां की गई थीं। उन्होंने बताया कि अधिक बसों का संचालन, प्रमुख बस अड्डों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती और यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष निगरानी की गई। अधिकारी ने बताया कि अधिकारियों और कर्मचारियों ने भीड़ प्रबंधन, बसों के संचालन और यात्रियों को समय पर जानकारी उपलब्ध कराने में सक्रिय भूमिका निभाई।
- भुवनेश्वर. ओडिशा मेडिकल सर्विसेज (डेंटल) कैडर के तहत कार्यरत स्नातकोत्तर डिग्रीधारी दंत चिकित्सकों के लिए राज्य सरकार ने शनिवार को 20,000 रुपये मासिक प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। एक आधिकारिक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई। यह प्रोत्साहन राशि 29 अगस्त से प्रभावी होगी। इसका लाभ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के तहत कार्यरत उन दंत चिकित्सकों को मिलेगा, जिनके पास राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) से मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेज की स्नातकोत्तर डिग्री होगी। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग ने कहा कि यह प्रोत्साहन राशि स्नातकोत्तर दंत चिकित्सकों को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में अपनी सेवाएं जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
- नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष नितिन नवीन ने शनिवार को पार्टी नेताओं के साथ एक अहम बैठक की, जिसमें युवाओं तक पहुंच बनाने संबंधी पार्टी की योजना पर चर्चा हुई। सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात समेत सात राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की तैयारी भी इस बैठक का एक मुख्य एजेंडा था। बैठक में भाजपा युवा मोर्चा के नवनियुक्त अध्यक्ष हेमांग जोशी शामिल हुए। पार्टी युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्षों अनुराग ठाकुर, पूनम महाजन और तेजस्वी सूर्या भी बैठक में मौजूद थे। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव, युवा मामलों एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया बैठक में शामिल हुए। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा की नवनियुक्त राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी, गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी बैठक में शामिल नेताओं में शामिल थे। सूत्रों के अनुसार भाजपा ने देशभर से पार्टी के 40 से अधिक नेताओं को बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। बैठक में क्या हुआ, इस पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।यह बैठक उस वक्त हुई जब भाजपा 17 सितंबर से देशभर में एक महीने तक चलने वाला 'सेवा संकल्प अभियान' शुरू करेगी। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने और सरकार के प्रमुख के रूप में उनके योगदान को रेखांकित करने के लिए शुरू किया जाएगा। यह निर्णय 22 अगस्त को पार्टी के सभी 67 नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ हुई पहली बैठक में लिया गया था। इस बैठक में भाजपा की राज्य इकाइयों के अध्यक्षों और संगठन महामंत्रियों के साथ-साथ पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए थे। इस देशव्यापी अभियान के दौरान, भाजपा विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक पहुंचेगी।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को उज्बेकिस्तान और एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए किर्गिस्तान की यात्रा पर रवाना हुए। उन्होंने कहा कि वह इस संगठन के लिए भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने और आतंकवाद के अभिशाप से मुक्त क्षेत्र के लिए साथी सदस्यों के साथ काम करने को लेकर उत्सुक हैं। मोदी पहले 29 से 30 अगस्त तक उज्बेकिस्तान की यात्रा पर रहेंगे। इसके बाद वह किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 30 अगस्त से एक सितंबर तक होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि उनकी यह यात्रा मध्य एशिया के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने तथा इस क्षेत्र के साथ भारत के सभ्यतागत संबंधों को और गहरा करने में मदद करेगी। अपनी यात्रा से पहले जारी बयान में मोदी ने कहा कि यह यात्रा शांति, स्थिरता और समृद्धि के साझा प्रयासों को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि यही वे मूल्य हैं, जो दुनिया के साथ भारत के संबंधों के केंद्र में रहे हैं। मोदी ने कहा, "भारत 2017 से एससीओ का सक्रिय और रचनात्मक सदस्य रहा है। मैं सुरक्षा, संपर्क और अवसर पर आधारित क्षेत्र के लिए भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने तथा सदस्य देशों के साथ मिलकर ऐसे क्षेत्र के निर्माण के लिए काम करने को उत्सुक हूं, जो आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के अभिशाप से मुक्त हो। ये चुनौतियां हमारे पड़ोस के साथ-साथ दुनिया के अन्य हिस्सों में भी शांति और स्थिरता के लिए लगातार खतरा बनी हुई हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर वह 29 से 30 अगस्त तक ताशकंद यात्रा पर रहेंगे। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में भारत-उज्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
मोदी ने कहा, "मैं राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ व्यापार और निवेश, डिजिटल संपर्क, रक्षा तथा ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने तथा 'विकसित भारत' तथा 'नए उज्बेकिस्तान' के हमारे साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के उपायों पर चर्चा के लिए उत्सुक हूं।" प्रधानमंत्री ने कहा कि वह ताशकंद में शास्त्री स्मारक और 'ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ऑरियंटल स्टडी' स्थित महात्मा गांधी केंद्र का भी दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि ये दोनों देशों के बीच कायम घनिष्ठ सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के संबंधों के प्रति सम्मान के प्रतीक हैं। ताशकंद से प्रधानमंत्री किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव के निमंत्रण पर बिश्केक जाएंगे, जहां वह 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन इस महत्वपूर्ण संगठन की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हो रहा है। मोदी ने कहा, "मैं राष्ट्रपति जापारोव और एससीओ के अन्य नेताओं से मिलने तथा छठे 'वर्ल्ड नोमैड गेम्स' के उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए भी उत्सुक हूं। यह समारोह मध्य एशिया की समृद्ध जीवंत विरासत का उत्सव है, जिसका भारत बेहद सम्मान करता है।" अधिकारियों ने बताया कि मोदी एससीओ शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे, और सुरक्षा, संपर्क तथा अवसर से जुड़ी भारत की प्राथमिकताओं को रेखांकित करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शिखर सम्मेलन से इतर एससीओ के सदस्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। -
नयी दिल्ली. अभिनेता अमिताभ बच्चन ने नेपाल में आई भीषण बाढ़ पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ''तबाही का यह मंजर देखना असहनीय है।'' बुधवार को तिब्बत सीमा से लगे रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई अचानक और भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। इस आपदा में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई और मानव बस्तियों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत बुनियादी ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचा है। बच्चन ने शनिवार को अपने ब्लॉग पर एक पोस्ट साझा करते हुए इस प्राकृतिक आपदा पर बात की। उन्होंने लिखा, ''एक गंभीर विषय पर बात करूं तो नेपाल में बाढ़ से हुई तबाही का मंजर देखना असहनीय है।'' बच्चन ने लिखा, ''प्रकृति के प्रकोप से कभी मुकाबला नहीं किया जा सकता... उसके आगे नतमस्तक होने के लिए ईश्वरीय शक्ति की उपस्थिति जरूरी है।...हम प्रार्थना करते हैं, क्योंकि अंततः उससे बढ़कर कुछ नहीं है।'' मध्य नेपाल में शनिवार को अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 626 हो गई। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने बताया कि नेपाल के विभिन्न जिलों से शव बरामद किए गए हैं।
- नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) नेपाल में आई बाढ़ को लेकर अपनी मदद का दायरा बढ़ा रहा है, जिसके तहत तत्काल 150,000 अमेरिकी डॉलर की धनराशि जारी की गई है। आवश्यकता आकलन जारी रहने के साथ-साथ अतिरिक्त संसाधन जारी किए जाने की उम्मीद है।विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ने टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि आपदा शुरू होने के कुछ ही घंटों के भीतर, डब्ल्यूएचओ ने आपातकालीन आपूर्ति भेजी, जिसमें अंतर-एजेंसी आपातकालीन स्वास्थ्य आपूर्ति भी शामिल थी, जो लगभग 10,000 लोगों को 3 महीने तक आवश्यक सामग्री प्रदान कर सकती है। इसके अलावा, इसमें टेंट, 10,000 मास्क, दस्ताने और हैंड सैनिटाइजर भी शामिल थे।उन्होंने कहा कि हमारी तत्काल प्राथमिकता प्रभावित समुदायों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का समर्थन करना और बाधित स्वास्थ्य सेवाओं को बहाल करना है। इसके अतिरिक्त, डब्ल्यूएचओ नेपाली सरकार के नेतृत्व में जन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए साझेदारों के बीच महत्वपूर्ण समन्वय, निगरानी और तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है।उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित समुदायों के सामने भारी चुनौतियां हैं, ऐसे में सभी साझेदारों का निरंतर समर्थन अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। डब्ल्यूएचओ इस कठिन समय में नेपाल सरकार और जनता के साथ खड़ा है और देश की बदलती जरूरतों के आधार पर सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है।इससे पहले भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि 10 टन से अधिक मानवीय सहायता सामग्री और डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों की टीम लेकर तीसरी विशेष उड़ान नई दिल्ली से काठमांडू के लिए रवाना हुई है। भारत बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद पड़ोसी हिमालयी देश नेपाल की मदद के लिए अपने प्रयास तेज कर रहा है।विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि 10 टन मानवीय सहायता सामग्री लेकर तीसरी उड़ान काठमांडू के लिए रवाना हो गई है। इस सहायता सामग्री में पोर्टेबल जनरेटर सेट, डिग्निटी किट, खाद्य पैकेट और जल शोधन की गोलियां शामिल हैं। 11 सदस्यीय डॉक्टरों, पैरामेडिकल कर्मियों की टीम और सुरंग बचाव अभियान के लिए एक रेकी टीम भी उड़ान में सवार है। भारत नेपाल के चल रहे राहत एवं बचाव प्रयासों में अपना सहयोग जारी रखेगा।
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नई दिल्ली। नेपाल प्रशासन ने संक्रमण के खतरे और शवों की खराब होती हालत को देखते हुए, दक्षिणी चितवन जिले में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद मिले 229 अज्ञात और लावारिस शवों को दफनाने का फैसला किया है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, शनिवार सुबह 10 बजे तक बाढ़ से कुल 626 शव बरामद किए गए थे। इनमें से सबसे ज्यादा 233 शव चितवन में मिले थे।
26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के बाद शवों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही थी, और चितवन जिले के अस्पतालों में पर्याप्त जगह और सुविधाओं की कमी के कारण शवों को बचाने में मुश्किल हो रही थी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि अस्थायी व्यवस्था के तहत रखे गए शवों से आने वाली दुर्गंध से संक्रमण और महामारी फैलने का खतरा बढ़ सकता है। इसके बाद, चितवन की जिला सुरक्षा समिति ने शनिवार को सभी अज्ञात और लावारिस शवों को दफनाने का फैसला किया।चितवन जिला प्रशासन कार्यालय ने एक नोटिस में कहा कि लावारिस शवों को शनिवार से भरतपुर मेट्रोपॉलिटन सिटी के वार्ड नंबर 1 में देवघाट के एक खुले इलाके में दफनाया जाएगा। नेपाली अधिकारियों ने कहा कि दफनाने से पहले सभी शवों से डीएनए सैंपल लिए जाएंगे और भविष्य में पहचान आसान बनाने के लिए पहचान या रेफरेंस नंबर का इस्तेमाल करके रिकॉर्ड रखा जाएगा।डीएओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चितवन के अस्पतालों में एक बार में लगभग 30 शवों को ही लंबे समय तक रखने की पर्याप्त सुविधा है। अधिकारी ने कहा, “जैसे-जैसे शवों की संख्या बढ़ती गई, हमने एक घर का इस्तेमाल कूलिंग सेंटर के तौर पर किया, जहां शव रखे गए थे। जब उस घर में भी जगह खत्म हो गई, तो हमारे पास उन्हें दफनाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा।” अधिकारी ने कहा कि दफनाने की प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार होगी और ‘अज्ञात और लावारिस शव प्रबंधन (पहला संशोधन) निर्देश, 2083’ के तहत जरूरी प्रावधानों का पालन किया जाएगा। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा आयोजित होने वाली परीक्षाओं सहित सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन, इन्हें सुरक्षित रूप से कराने तथा प्रशासनिक उपायों की समीक्षा और व्यापक सिफारिश के लिए श्री नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कार्य बल (एचपीटीएफ) का गठन किया है।
यह कार्य बल संस्थागत प्रणालियों और प्रक्रियाओं को सुदृढ़ बनाने, परीक्षाओं की सत्यनिष्ठा और इन्हें सुरक्षित रूप से संचालित करने के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल, परीक्षा आधारिक संरचना बढ़ाने, सुलभता और समावेशिता को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों के हित संबंधी उपायों की गहन विवेचना कर रहा है। इसका उद्देश्य एक सुदृढ़, सुरक्षित, पारदर्शी, न्यायसंगत और भविष्योन्मुखी सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली विकसित करना है।इसी के सिलसिले में उच्च स्तरीय कार्य बल ने सभी हितधारकों के अनुभव, ज्ञान और दृष्टिकोण को अत्यंत उपयोगी मानते हुए निम्नलिखित पक्षों से सुझाव मांगें हैं:विद्यार्थी और उम्मीदवार;अभिभावक;शिक्षक और शैक्षणिक संस्थान;परीक्षा आयोजित करने और परीक्षा सामग्री जारी करने वाली संस्थाएं;विषय विशेषज्ञ और प्रौद्योगिकी पेशेवर;उद्योग संगठन;नागरिक समाज संगठन; औरअन्य संबंधित हितधारकसुझाव निम्नलिखित क्षेत्रों से संबंधित हो सकते हैं:सार्वजनिक परीक्षाओं को सुरक्षित रूप से संचालित करनापरीक्षा की संरचना और मूल्यांकन पद्धतिशासन, दायित्व और संस्थागत व्यवस्थापरीक्षाओं में कदाचार की रोकथाम, पता लगाना और उनका निवारणसुरक्षित कंप्यूटर-आधारित परीक्षा सहित प्रौद्योगिकी का इस्तेमालपरीक्षा अवसंरचना निर्माण और उन्नयनसामाजिक, आर्थिक, क्षेत्रीय और भाषाई समूहों में बेहतर पहुंच के लिए समावेशी परीक्षा ढांचापारदर्शिता, शिकायत निवारण और हितधारकों के साथ संचारसमूची परीक्षा प्रक्रिया के दौरान विद्यार्थियों के हित को बढ़ावा देने के उपायपरीक्षा प्रणाली बेहतर बनाने संबंधी अन्य उपायसभी हितधारकों से अनुरोध है कि वे 13 सितंबर, 2026 तक अपने सुझाव निम्नलिखित माध्यम से प्रस्तुत करें :वेबसाइट : https://examreforms-taskforce.dopt.gov.inफ़ोन: 1800-180-4747 WhatsApp: “hptf” +917827042830 पर भेजें या https://wa.me/917827042830?text=hptf पर क्लिक करेंईमेल: [email protected]सुझाव अंग्रेजी, हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में भेजे जा सकते हैं।सार्वजनिक परामर्शों से प्राप्त सुझाव उच्च स्तरीय कार्य बल- एचपीटीएफ को सरकार को भेजने वाली सिफारिशें तैयार करने में सहायक होंगे।एचपीटीएफ सभी हितधारकों से सक्रिय, रचनात्मक और व्यापक भागीदारी की उम्मीद करता है।अधिक जानकारी और सुझाव के लिए, कृपया नीचे दिए लिंक पर जाएं: https://examreforms-taskforce.dopt.gov.inसुझाव भेजने की अंतिम तिथि: 13 सितंबर, 2026 है।
- अस्पतालों के लिए इमरजेंसी एडवाइजरी जारीनई दिल्ली। गौतमबुद्ध नगर में मौसम में बदलाव के साथ मौसमी बीमारियों का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। जिले में स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक जिले में अब तक स्वाइन फ्लू के कुल 192 मरीज सामने आ चुके हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के लिए इमरजेंसी एडवाइजरी जारी की है। वहीं, जिले में डेंगू के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और अब तक 48 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है।स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को निर्देश दिया है कि स्वाइन फ्लू और डेंगू के संदिग्ध मरीजों की पहचान को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाए। अस्पतालों में आने वाले ऐसे मरीज, जिनमें तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, सांस लेने में परेशानी, बदन दर्द या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो उनकी चिकित्सकीय जांच प्राथमिकता के आधार पर की जाए। गंभीर लक्षण वाले मरीजों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर उन्हें उच्च चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन को संक्रमण से बचाव के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कहा गया है। चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ को भी संदिग्ध मरीजों के उपचार के दौरान आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। अस्पतालों में दवाओं, जांच सुविधाओं और आवश्यक चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।दूसरी ओर, डेंगू के 48 मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरों की रोकथाम और लार्वा नियंत्रण अभियान को भी तेज करने की तैयारी की है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें ऐसे स्थानों का निरीक्षण कर रही हैं, जहां पानी जमा होने के कारण डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के पनपने की आशंका रहती है। साथ ही लोगों से घरों और आसपास पानी जमा न होने देने की अपील की जा रही है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बदलते मौसम में वायरल संक्रमण तेजी से फैल सकता है। ऐसे में लोगों को भीड़भाड़ वाले स्थानों पर विशेष सावधानी बरतने, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकने तथा हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखने की सलाह दी जा रही है। बुखार या फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श करने को कहा गया है।स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्वाइन फ्लू और डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए निगरानी लगातार बढ़ाई जा रही है। अस्पतालों से मरीजों की जानकारी जुटाई जा रही है और स्थिति के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। विभाग ने लोगों से अपील की है कि घबराने के बजाय सावधानी बरतें और लक्षण दिखाई देने पर समय रहते चिकित्सकीय सलाह लें।
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नई दिल्ली। सावन पूर्णिमा के पावन अवसर पर अयोध्या में आस्था का सैलाब देखने को मिला। गुरुवार सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु सरयू नदी के घाटों पर पहुंचने लगे। लोगों ने सरयू में आस्था की डुबकी लगाई और भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और निरोगी जीवन की कामना की।सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। पूरे महीने शिव भक्त मंदिरों में पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। सावन पूर्णिमा इस धार्मिक माह का महत्वपूर्ण पड़ाव है। अयोध्या में भी इस दिन श्रद्धालुओं ने सरयू स्नान के बाद मंदिरों में जाकर पूजा-पाठ किया और शिवलिंग पर जल अर्पित किया।
एक पुजारी ने बात करते हुए बताया कि सावन पूर्णिमा का दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने से श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ को जल चढ़ा रहे हैं, जलाभिषेक कर रहे हैं और शिव की आराधना में जुटे हैं। मान्यता है कि सावन में श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।उन्होंने कहा कि सावन पूर्णिमा के दिन धार्मिक आस्था के साथ रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाता है। भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का यह पर्व देशभर में उत्साह के साथ मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं में राजा बलि और माता लक्ष्मी से जुड़ी कथा भी इस दिन से जोड़ी जाती है। इस दिन माता लक्ष्मी ने गरीब स्त्री का वेश धारण कर राजा बलि को राखी बांधी थी। उधर, बिहार के बांका में भी सावन पूर्णिमा के मौके पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। प्रसिद्ध मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त भगवान शिव को जल चढ़ाने पहुंचे। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा। भक्तों ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।( -
नई दिल्ली। पूरे भारत में शुक्रवार को राखी का त्योहार मनाया गया। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बच्चों के साथ रक्षाबंधन का त्योहार मनाया, जबकि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अपने संसदीय क्षेत्र कोटा-बूंदी में ‘लाड़ली’ बहनों के साथ रक्षाबंधन मनाया। वहीं, इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने राखी बांधी।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति भवन में स्कूली बच्चों के साथ रक्षाबंधन मनाया। बच्चों ने उपराष्ट्रपति को राखी बांधी, जो प्यार, भरोसे और सुरक्षा के खूबसूरत बंधन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ संवाद करने से उपराष्ट्रपति भवन में गर्मजोशी और खुशी का माहौल रहा, जिससे यह त्योहार का मौका वाकई खास बन गया। वहीं, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने संसदीय क्षेत्र कोटा-बूंदी की ‘लाड़ली बहनों’ के साथ रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया। इस अवसर पर बहन वीरांगना मधुबाला ने भी रक्षा-सूत्र बांधा।ओम बिरला ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “कलाई पर बंधी यह राखी केवल स्नेह और विश्वास की डोर नहीं, बल्कि नारी सम्मान, स्वाभिमान और सुरक्षित भविष्य के प्रति संकल्प का पवित्र प्रतीक है। बहनों का स्नेह मेरे लिए आशीर्वाद है और उनके सुख-दुख में सदैव सहभागी बनना मेरा दायित्व।” उन्होंने कहा कि हमारी बहनें परिवार की आत्मीय धुरी होने के साथ-साथ समाज और राष्ट्र निर्माण की सशक्त आधारशिला भी हैं। ईश्वर से कामना है कि मेरी हर बहन का जीवन सम्मान, प्रसन्नता और आत्मनिर्भरता से परिपूर्ण हो तथा उनके सपनों को निरंतर नई ऊंचाइयां मिलें। स्नेह, विश्वास और अटूट अपनत्व के इस पावन पर्व रक्षाबंधन की सभी बहनों को हार्दिक शुभकामनाएं। उधर, भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने नितिन नवीन से मुलाकात की और उन्हें राखी बांधी। नितिन नवीन ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “भरोसे और स्नेह का एक पवित्र धागा। मैं उन भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं का आभारी हूं, जिन्होंने आज मेरे नई दिल्ली स्थित आवास पर मुझे राखी बांधी।” -
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद 320 भारतीय नागरिक लापता हैं, जबकि चीन की सीमा पर फंसे 400 भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि त्रिशुली-वन जलविद्युत परियोजना में कार्यरत 63 भारतीय नागरिकों सहित 84 भारतीय नागरिकों को अब तक बचाया जा चुका है। उन्होंने आगे बताया कि चीन की सीमा पर फंसे 96 भारतीय नागरिक सड़क मार्ग से सुरक्षित रूप से नेपाल पहुंच गए हैं।
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की स्थिति के बारे में जायसवाल ने कहा कि पहली अच्छी खबर! बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से कल काठमांडू पहुंचे 21 भारतीय नागरिक आज दिल्ली पहुंच गए हैं। कल हमारे राजदूत ने काठमांडू में उनसे मुलाकात की और उनका हालचाल पूछा। उन्होंने आगे कहा कि इन 21 और 63 के अलावा, हमें पता चला है कि चीन की सीमा में फंसे 96 भारतीय नागरिक सड़क मार्ग से सुरक्षित रूप से नेपाल पहुंच गए हैं और उन्हें निकालने के प्रयास जारी हैं। जैसे ही हमें उनके बारे में और जानकारी मिलेगी, हम आपको सूचित करेंगे।जायसवाल ने बताया कि भारतीय मूल के लगभग 100 लोग अभी भी संपर्क से बाहर हैं। जिन लोगों से हम संपर्क नहीं कर पा रहे हैं या जो लापता हैं, उनकी संख्या इस समय 320 है। लेकिन कृपया ध्यान रखें कि स्थिति लगातार बदल रही है, इसलिए संख्याएं घटती-बढ़ती रहती हैं। साथ ही, हमें कई सूचियों का मिलान करना है। भारतीय मूल के लगभग 100 लोग अभी भी संपर्क से बाहर हैं। ये वे लोग हैं जो भारतीय मूल के हैं और कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हो सकते हैं, लेकिन उनके पास अन्य राष्ट्रीयताएं हैं। विदेश मंत्रालय का हमारा नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे काम कर रहा है, जैसा कि काठमांडू और बीजिंग स्थित हमारे दूतावासों के नियंत्रण कक्ष भी कर रहे हैं।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि चीन की सीमा पर मौजूद 400 भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं और अपने परिवारों से संपर्क करने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि चीन में भारतीय दूतावास स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर चीनी सीमा पर फंसे 400 लोगों को निकालने के लिए काम कर रहा है।उन्होंने आगे कहा कि चीनी सीमा पर हमारे 400 भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं। वे सुरक्षित हैं। वे अपने परिवार के संपर्क में हैं क्योंकि मुझे बताया गया है कि वहां फोन आदि सेवाएं काम कर रही हैं। हमारा दूतावास उनमें से कई लोगों के संपर्क में है, वास्तव में उनके टीम लीडर और उनके ट्रैवल एजेंट से भी। उनके कई परिवार के सदस्यों ने भी बीजिंग में हमारे दूतावास द्वारा संचालित हेल्पलाइन नंबरों के माध्यम से हमसे संपर्क किया है… जैसा कि मैंने पहले कहा था कि स्थिति लगातार बदल रही है, इसलिए हम आपको बाद में अपडेट आंकड़े देंगे, लेकिन फिलहाल हम लगभग 400 लोगों की बात कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि हमारा दूतावास चीन के स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है और वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि वहां फंसे लोगों को कैसे निकाला जाए। आपको बता दें कि ये सभी 400 से अधिक लोग सुरक्षित हैं। -
जबलपुर (मप्र) . रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को यहां स्थित 'व्हीकल फैक्टरी जबलपुर' (वीएफजे) में टी-सीरीज के युद्धक टैंक की मरम्मत के लिए 472 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना की आधारशिला रखी। अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित सुविधा में हर साल 'टी-72' और 'टी-90' के 80 टैंक की मरम्मत व रखरखाव किया जाएगा। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना को हर साल ऐसे करीब 230 टैंक की मरम्मत की आवश्यकता होती है।
अधिकारियों ने बताया कि चेन्नई के अवाडी स्थित हेवी व्हीकल्स फैक्टरी में फिलहाल हर साल करीब 150 टैंक की मरम्मत की जाती है। उन्होंने कहा कि जबलपुर की 57 साल पुरानी वीएफजे में बनने वाली नई सुविधा इस कमी को पूरा करेगी। वीएफजे, आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड और रक्षा मंत्रालय के अधीन संचालित एक प्रमुख सैन्य वाहन विनिर्माण इकाई है। अधिकारियों ने बताया कि 1969 में स्थापित इस फैक्टरी में शुरुआत में जर्मनी की एम.ए.एन. के सहयोग से 'शक्तिमान 3टी' वाहन तथा जापान की निसान मोटर्स कंपनी के सहयोग से 'निसान 1टी' और जोंगा वाहनों का उत्पादन किया जाता था। उन्होंने बताया कि फैक्टरी परिसर 330 एकड़ में फैला है, जबकि इससे लगा एस्टेट 600 एकड़ में है। -
नयी दिल्ली. नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के बाद कम से कम 288 भारतीय अब भी लापता हैं, जबकि लगभग 200 अन्य चीन की ओर फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि भारत दोनों देशों के अधिकारियों के लगातार संपर्क में है, ताकि बचाव अभियान में समन्वय किया जा सके। इसने कहा कि बचाव अभियान में तेजी आने के साथ भारत नेपाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और संकट से निपटने में उसकी मदद कर रहा है। नेपाल में बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने तीन जिलों में भारी तबाही मचाई है। बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 270 हो गई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शीर्ष अधिकारियों तथा काठमांडू और बीजिंग में भारत के राजदूतों के साथ उच्चस्तरीय बैठक के बाद कहा कि भारत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीयों की स्थिति का पता लगाने के लिए "पुरजोर प्रयास" कर रहा है। भारत ने बुधवार रात से दो सैन्य परिवहन विमानों के जरिए कुल 47.5 टन आपातकालीन राहत सामग्री नेपाल भेजी है और अधिक राहत सामग्री भेजने की प्रक्रिया जारी है। एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि भारत की तत्काल प्राथमिकता लापता भारतीयों का पता लगाना और उन्हें बचाना तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि नेपाल में लापता भारतीयों में जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले लोग और तमिलनाडु तथा पश्चिम बंगाल समेत विभिन्न राज्यों के पर्यटक समूह शामिल हैं। उन्होंने कहा, ''288 भारतीय नागरिकों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। इनमें वे 73 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जो त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम कर रहे थे। काठमांडू स्थित हमारा दूतावास इन लोगों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए परियोजना प्रमुख के संपर्क में है।'' उन्होंने कहा, ''इसके अलावा, तमिलनाडु के 37 और 49 भारतीय नागरिकों के दो अलग-अलग समूह हैं, जो सम्राट और फ्लाई एवरेस्ट ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए थे।'' जायसवाल ने कहा कि पश्चिम बंगाल के 32 भारतीय नागरिकों का एक अलग समूह भी था, जो सम्राट ट्रैवल्स की मदद से रसुवा जिले के तिमुरे गया था। उन्होंने कहा कि वहीं, कुछ अन्य राज्यों के 61 भारतीय नागरिकों का एक और समूह भी था। उन्होंने कहा कि केरल के 33 भारतीय नागरिकों का एक और समूह भी था।
उन्होंने कहा, ''हमने तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को बचा लिया है... हमें जानकारी मिली है कि मानसरोवर यात्रा पर गए कई भारतीय नागरिक चीन के क्षेत्र में फंसे हुए हैं।'' जायसवाल ने कहा कि तिब्बत की ओर फंसे लगभग 200 भारतीय नागरिकों ने सुरक्षित निकाले जाने के लिए सहायता मांगी है। उन्होंने कहा कि इनमें से 95 लोग गारचेन में हैं और नेपाल में प्रवेश करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं, जबकि चार लोग जिलॉन्ग शहर में और 13 लोग जुतुलपुक में हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि बाढ़ से तबाह हुए क्षेत्रों में स्थिति लगातार बदल रही है और भारत भारतीय नागरिकों को बचाने के लिए संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है। उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद जयशंकर ने कहा, ''बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सभी भारतीयों की स्थिति का पता लगाने के लिए तत्काल प्रयास किए जा रहे हैं।" जयशंकर ने कहा कि उनका मंत्रालय विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटर और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। उन्होंने कहा, ''हम इस मामले के साथ-साथ राहत प्रयासों को लेकर भी नेपाली पक्ष के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।'' भारत ने बृहस्पतिवार को सैन्य परिवहन विमान से 37.5 टन राहत सामग्री की दूसरी खेप नेपाल भेजी।
भारत ने बुधवार को 10 टन एचएडीआर (मानवीय सहायता और आपदा राहत) सामग्री भेजी थी।
उन्होंने कहा, ''भारत नेपाली अधिकारियों के साथ लगातार और करीबी संपर्क में है। हम जारी राहत प्रयासों को मजबूती से समर्थन देते रहेंगे।'' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को नेपाल के अपने समकक्ष बालेंद्र शाह से बात की थी और वहां बाढ़ से हुई जान-माल की क्षति पर संवेदना व्यक्त की थी। साथ ही, उन्होंने कहा था कि भारत पड़ोसी देश को हरसंभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। मोदी ने कहा था कि भारत के लोग इस कठिन समय में नेपाल के अपने भाइयों और बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। -
नयी दिल्ली. सरकार की प्रमुख वित्तीय समावेशन योजना प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के 12 साल पूरे हो गए हैं और इसके तहत खोले गए बैंक खातों की संख्या 59 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है। वित्त मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार, इन खातों में कुल जमा राशि 3.17 लाख करोड़ रुपये हो गई है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 28 अगस्त, 2014 को पीएमजेडीवाई की शुरुआत की थी। योजना का उद्देश्य बैंक सुविधाओं से वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक बैंकिंग तथा वित्तीय सेवाएं पहुंचाना है। मंत्रालय के अनुसार, पीएमजेडीवाई के 78 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में खोले गए हैं, जबकि करीब 56 प्रतिशत खाते महिलाओं के नाम हैं। वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा कि 19 अगस्त, 2026 तक प्रति खाता औसत जमा राशि 5,356 रुपये थी। पिछले 12 वर्षों में प्रति खाता औसत जमा राशि 3.4 गुना बढ़ी है। मंत्रालय ने कहा कि औसत जमा राशि में वृद्धि खातों के बढ़ते इस्तेमाल और खाताधारकों में बचत की आदत विकसित होने का एक और संकेत है। योजना की वर्षगांठ पर वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि पीएमजेडीवाई की सफलता को केवल खोले गए खातों की संख्या के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि देश के बैंकिंग और वित्तीय परिदृश्य में आए बदलाव के संदर्भ में भी इसका आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएमजेडीवाई ने लाखों लोगों, विशेषकर समाज के वंचित वर्गों को बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराकर उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद की है। चौधरी ने कहा, ''खाते के स्वामित्व ने आम आदमी के लिए बीमा और पेंशन कवरेज हासिल करना संभव बनाया है। प्रत्येक राज्य और जिले में लगातार चलाए गए 'संतृप्ति' अभियान के माध्यम से हम बैंक खातों की लगभग सार्वभौमिक पहुंच की दिशा में आगे बढ़े हैं और जरूरतमंद लोगों तक बीमा तथा पेंशन योजनाओं की पहुंच लगातार बढ़ाई गई है।'' उन्होंने पीएमजेडीवाई को आम लोगों तक पहुंचाने और इसकी सफलता में योगदान देने के लिए देशभर में तैनात बैंकरों तथा बैंकिंग प्रतिनिधियों के प्रयासों की भी सराहना की। मंत्रालय ने कहा कि पीएमजेडीवाई को केंद्र में रखकर बनाई गई जन-धन, आधार और मोबाइल (जेएएम) त्रिमूर्ति वित्तीय सहायता के प्रत्यक्ष अंतरण के लिए एक ऐसा तंत्र साबित हुई है, जिसमें धन के दुरुपयोग की गुंजाइश बेहद कम है। मंत्रालय के अनुसार, जेएएम के जरिये सरकार ने वंचित वर्गों के बैंक खातों में कल्याणकारी योजनाओं के लाभ सीधे अंतरित किए हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका और भुगतान में होने वाली देरी को खत्म करने में मदद मिली है। पीएमजेडीवाई के तहत पात्र खाताधारकों को बिना न्यूनतम शेष राशि की अनिवार्यता और रखरखाव शुल्क के मूल बैंक खाता उपलब्ध कराया जाता है। इन खातों के साथ मुफ्त रुपे डेबिट कार्ड भी दिए जाते हैं, जिन पर दो लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा कवर मिलता है। मंत्रालय ने कहा कि पीएमजेडीवाई खाताधारकों को 41.29 करोड़ रुपे कार्ड जारी किए जा चुके हैं और समय के साथ इन कार्ड की संख्या तथा उनका इस्तेमाल बढ़ा है। खाताधारक 10,000 रुपये तक की 'ओवरड्रॉफ्ट' सुविधा के भी पात्र हैं, जिससे आपात स्थिति में उन्हें वित्तीय सहायता मिलती है। मंत्रालय ने कहा कि खातों में दिखाई देने वाले बचत के रुझान के आधार पर खाताधारक अब ऋण, जिसमें मुद्रा ऋण भी शामिल है, हासिल करने के पात्र हैं। इससे लोगों को अपनी आय बढ़ाने और वित्तीय मजबूती हासिल करने में मदद मिल रही है। मंत्रालय के अनुसार, पीएमजेडीवाई खातों ने लाखों लोगों, विशेषकर असंगठित क्षेत्र के कामगारों तक बीमा और पेंशन की पहुंच बढ़ाने में भी मदद की है। -
कानपुर (उप्र) .कानपुर में बृहस्पतिवार को एक विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से उस पर सवार एक प्रशिक्षु पायलट समेत दो लोगों की मौत हो गयी। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने 'पीटीआई—भाषा' को बताया कि गंगा के किनारे नाथपुरवा गांव के पास इटली में बने 'टेक्नम' प्रशिक्षण विमान के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से उस पर सवार गुजरात के निवासी प्रशिक्षक सचिन भाटिया और कर्नाटक के प्रशिक्षु पायलट अभिषेक पुजारी की मौत हो गय। लाल ने बताया कि 'गर्ग एविएशन' द्वारा संचालित इस विमान ने पूर्वाह्न करीब 11 बजकर 30 मिनट पर उड़ान भरी थी और लगभग 20 मिनट के बाद वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उन्होंने बताया कि भाटिया को करीब तीन हजार घंटे उड़ान भरने का अनुभव था।
लाल ने बताया कि इस घटना के बाद पुलिस और दमकल विभाग के कर्मचारी तुरंत मौके पर पहुंचे और इलाके की घेराबंदी कर जांच के लिए सुबूत सुरक्षित रखने के मकसद से मलबे को कब्जे में ले लिया। पुलिस आयुक्त ने बताया कि विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारणों का तुरंत पता नहीं चल सका है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि नागर उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) दुर्घटना का शिकार हुए विमान की उड़ने की क्षमता, रखरखाव के रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच करेगा। दुर्घटनास्थल के एक कथित वायरल वीडियो में विमान का मलबा आसपास बिखरा नजर आ रहा है और मलबे के बाहर एक सीट भी देखी गयी। सूत्रों के मुताबिक, यह विमान वर्ष 2023 से 'गर्ग एविएशन' के पास था और कंपनी का दावा है कि उसका सही तरीके से रखरखाव किया गया था। -
अमरेली (गुजरात) . केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि 2001 में नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्री बनने के बाद से गुजरात में जल प्रबंधन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया तथा पिछले 25 वर्षों में राज्य में कभी भी सूखे जैसे हालात नहीं बने। शाह गुजरात के अमरेली जिले के दुधला गांव में डायमंड कारोबारी और पद्मश्री से सम्मानित सावजीभाई ढोलकिया के ट्रस्ट द्वारा विकसित 21 एकड़ की झील का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे। सन 1985, 1986 और 1987 के भीषण सूखे को याद करते हुए केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री ने आरोप लगाया कि उस समय की कांग्रेस सरकार के दौरान भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर फैला हुआ था, जिसमें सूखे के समय सरकारी राफलेश्वर मवेशी शिविर में हुआ भ्रष्टाचार भी शामिल था। शाह ने कहा, ''अगर हम बारिश की हर एक बूंद को बचाने और उसे जमीन में अवशोषित कर लिये जाने का तंत्र बना लें, तो हमारे देश और राज्य पर कभी भी सूखे का खतरा नहीं मंडराएगा। उस सूखे के दौरान कांग्रेस सरकार सत्ता में थी और राफलेश्वर घोटाले जैसे बड़े घोटाले हुए थे।
शाह ने कहा, ''तब हम छोटे थे। लोग सूखा राहत कार्यों में लगे थे, वे गड्ढे खोदते और उन्हें वापस भरते थे ताकि रोजाना मजदूरी कमा सकें। हमने सूखे से परेशान लोगों को 250 ग्राम सुखड़ी (एक मिठाई) और घरों से इकट्ठा की गई पुरानी चप्पलें बांटीं।'' उन्होंने राजकोट में एक बस अड्डे के पास लगे सार्वजनिक नल को जमीन में बने एक गड्ढे में नीचे किए जाने की घटना को याद किया, क्योंकि पानी का दबाव इतना कम था कि वह सतह तक भी नहीं पहुंच पा रहा था। शाह ने कहा, ''2001 में नरेन्द्रभाई के मुख्यमंत्री बनने से पहले ऐसी स्थिति थी।'' उन्होंने दावा किया कि मोदी की नीतियों ने सौराष्ट्र और उत्तरी गुजरात को सूखा-ग्रस्त इलाकों से पानी की बेहतर उपलब्धता वाले क्षेत्रों में बदल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में मोदी सरकार ने 2003 में एक ही साल में 1.5 लाख 'चेक डैम' बनाए और बाद में नर्मदा नहर नेटवर्क, सौनी योजना एवं सुजलाम-सुफलाम योजना जैसी परियोजनाओं के जरिए जल संरक्षण के प्रयासों को बढ़ाया। शाह ने कहा कि नर्मदा परियोजना की आधारशिला 1964 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी, लेकिन इसके गेट मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद खोले गए। केंद्रीय गृहमंत्री के अनुसार, मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी सरकार ने 'जल शक्ति मंत्रालय' बनाकर जल प्रबंधन को संस्थागत महत्व दिया। उन्होंने कहा कि नर्मदा का पानी सौराष्ट्र, कच्छ और खावड़ा तक पहुंच चुका है, जबकि अतिरिक्त पानी को 'सौनी योजना' के तहत जलाशयों और नदियों में भेजा गया है। शाह ने कहा, ''जब मोदी मुख्यमंत्री बने , तब से 2026 तक गुजरात में एक बार भी सूखा नहीं पड़ा है। इस बार सब कह रहे थे कि अल-नीनो की वजह से सूखा पड़ सकता है। हालांकि कुछ गांवों में बारिश कम हुई, लेकिन मवेशियों को लेकर दक्षिण गुजरात की ओर पलायन करने की गंभीर स्थिति कभी नहीं बनी।'' उन्होंने कहा, ''आज गुजरात सचमुच सूखा-मुक्त है। झीलों की संख्या बढ़ी है, चेक डैम की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, कृषि क्षेत्र ने तरक्की की है, हरियाली बढ़ी है और इंद्र देवता की कृपा रही है। 2001 से 2026 तक, यानी 25 सालों में कहीं भी सूखा न पड़ना मोदी की योजना का ही सीधा परिणाम है। -
नयी दिल्ली. निर्वाचन आयोग ने 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले 'जेन अल्फा' और 'जेनरेशन जी' तक पहुंच बनाने के लिए नए सिरे से प्रयास शुरू किया है ताकि उन्हें जागरूक मतदाता बनाने के साथ भविष्य में लोगों को चुनावी प्रक्रिया के बारे में शिक्षित करने वाले अभियानों का नेतृत्व करने के लिए सक्षम बनाया जा सके। वर्ष 1997 से 2012 के बीच जन्मे लोगों को 'जेन जी' और वर्ष 2013-2025 के बीच जन्मे बच्चों को 'जेन अल्फा' कहा जाता है। आयोग अपने नए अभियान के तहत देश की 4,123 विधानसभा सीटों में कक्षा 9 से 12 तक के स्कूली विद्यार्थियों तथा कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को लक्षित करेगा। निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के अनुसार, 18 से 26 वर्ष आयु वर्ग में कुल 14.78 करोड़ लोग हैं, जिनमें 7.98 करोड़ पुरुष, 6.79 करोड़ महिलाएं और 9,000 तृतीय लिंग के लोग हैं। अधिकारियों ने बताया कि आयोग की योजना प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 10 के हिसाब से कुल 50,000 निर्वाचन साक्षरता क्लब (ईएलसी) स्थापित करने की है। इसके लिए 15 लाख स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों से संपर्क किया जाएगा। इसके अलावा 70,000 कॉलेजों और 1,400 विश्वविद्यालयों तक पहुंच बनाई जाएगी। व्यवस्थित मतदाता शिक्षा एवं चुनावी भागीदारी (एसवीईईपी) कार्यक्रम के तहत 2018 में ईएलसी की स्थापना की गई थी। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक मूल्यों, चुनावी प्रक्रिया तथा निर्वाचन आयोग की भूमिका और कार्यप्रणाली से परिचित कराना है। हालांकि, तेजी से बदलते संचार तंत्र, डिजिटल मंचों पर बढ़ती निर्भरता तथा युवा मतदाताओं और जमीनी स्तर के हितधारकों के साथ निरंतर, व्यवस्थित और प्रत्यक्ष संवाद की जरूरत को देखते हुए ईएलसी 2.0 में इन क्लबों को डिजिटल रूप से सक्षम और लगातार सक्रिय रहने वाले मंच के रूप में नए सिरे से तैयार किया गया है।
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हैदराबाद. तेलंगाना के सूर्यापेट जिले में बुधवार सुबह एक निजी बस के ट्रक से टकराने से बस में सवार पांच महिलाओं समेत छह लोगों की मौत हो गई और कम से कम 12 अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, हादसा सुबह करीब सवा पांच बजे हैदराबाद-विजयवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोडाड मंडल के पास हुआ। प्रारंभिक जांच के अनुसार, निजी बस में 42 यात्री सवार थे और यह बस हैदराबाद से आंध्र प्रदेश के एलुरु जा रही थी। इसी दौरान बस ने आगे चल रहे ट्रक को टक्कर मार दी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ''हादसे में पांच महिलाओं समेत छह लोगों की मौत हो गई। कम से कम 12 अन्य घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।'' सूर्यापेट जिले के पुलिस अधीक्षक के. नरसिम्हा ने पत्रकारों को बताया कि ट्रक में औद्योगिक कार्यों में इस्तेमाल होने वाले भारी-भरकम पिलर लदे हुए थे। उन्होंने बताया कि जैसे ही बस ने ट्रक को टक्कर मारी तो पिलर को सुरक्षित रखने के लिए बांधी गई चेन टूट गई और पिलर बस के दाहिने हिस्से से जा टकराए। इसके कारण बस के आगे की सीटों पर बैठे यात्रियों की जान चली गई। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि घायलों में से दो की हालत गंभीर है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा के एक अस्पताल में ले जाया गया है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने हादसे में लोगों की मौत पर शोक व्यक्त किया।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना जताई और मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने बताया कि हादसे की वजह बस की तेज रफ्तार होने की आशंका है। पुलिस ने बताया कि बस की टक्कर से पहले ही ट्रक के सड़क के डिवाइडर से टकराने की आशंका है। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है। -
नई दिल्ली। नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद केंद्र सरकार स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आपदा के संभावित प्रभाव को देखते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से बात की है। केंद्र ने सीमावर्ती इलाकों में स्थानीय प्रशासन और राहत-बचाव दलों के साथ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) को भी हाई अलर्ट पर रखा है। सरकार का कहना है कि नेपाल की ओर जलस्तर में कमी आ रही है और फिलहाल घबराने की कोई स्थिति नहीं है।
अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट कर नेपाल में आई बाढ़ की विभीषिका पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने इस आपदा में अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति उनकी संवेदनाएं हैं। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत सरकार नेपाल के साथ खड़ी है। गृह मंत्री ने नेपाल में आई आपदा के संभावित प्रभाव को लेकर बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से बात की। उन्होंने कहा कि जिन सीमावर्ती क्षेत्रों पर बाढ़ का असर पड़ सकता है, वहां स्थानीय प्रशासन और राहत-बचाव टीमों के साथ NDRF को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।केंद्रीय जल आयोग (CWC) की सलाह और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल-चीन सीमा के पास अचानक आई बाढ़ या ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के कारण नेपाल में भारतीय सीमा से करीब 160 किलोमीटर दूर फुरके खोला में त्रिशूली नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। इसका असर भारत में गंडक नदी के निचले इलाकों पर पड़ने की आशंका को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है।बिहार और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों ने भारत-नेपाल सीमा के पास रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और उन्हें जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के कदम उठाए हैं। दोनों राज्यों को सतर्क रहने और स्थिति पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है।गृह मंत्रालय के अधिकारी विदेश मंत्रालय (MEA), जल शक्ति मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं। CWC के अनुसार, नेपाल की ओर जलाशयों में जलस्तर कम हो रहा है और स्थिति नियंत्रण में है। सरकार ने कहा है कि फिलहाल घबराहट जैसी कोई स्थिति नहीं है।नेपाल के प्रभावित इलाकों में भारतीय पर्यटकों के लापता होने की खबरें भी सामने आई हैं। विदेश मंत्रालय और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने बाढ़ प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। मदद के लिए दूतावास के हेल्पलाइन नंबर +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 पर संपर्क किया जा सकता है। -
नई दिल्ली। नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद भारत ने राहत और बचाव अभियान में मदद के लिए बुधवार को 10 टन मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) सामग्री और जरूरी दवाएं भेजीं। प्राकृतिक आपदाओं में फर्स्ट रिस्पॉन्डर की अपनी भूमिका को आगे बढ़ाते हुए भारत ने राहत सामग्री के साथ मेडिकल सप्लाई भी भेजी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि इस त्रासदी में जान गंवाने वालों के परिजनों के प्रति भारत की संवेदनाएं हैं और इस कठिन समय में भारत नेपाल और उसके लोगों के साथ खड़ा है।
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारतीय वायुसेना का सी-130जे विमान राहत सामग्री लेकर नेपाल के लिए रवाना हुआ। इसमें अस्थायी आश्रय सामग्री, कंबल, स्वच्छता किट, सोलर लैंप और जरूरी दवाएं शामिल हैं। इसका उद्देश्य बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल राहत उपलब्ध कराना है।भारतीय वायुसेना ने एक्स पर बताया कि नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद तत्काल एक सी-130जे विमान भेजा गया है, जिसमें 10 टन जरूरी राहत सामग्री और मेडिकल सप्लाई है। वायुसेना ने कहा कि सी-17 और सी-130 विमानों के जरिए आगे भी राहत सामग्री पहुंचाई जाएगी। इसके अलावा बचाव और लोगों को सुरक्षित निकालने के अभियानों के लिए हेलिकॉप्टर भी तैनात किए गए हैं।इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बात कर बाढ़ में हुई जनहानि पर शोक व्यक्त किया था। मोदी ने नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता देने का भरोसा दिया और कहा कि भारत के लोग इस कठिन घड़ी में नेपाल के अपने भाई-बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत राहत और बचाव कार्यों के लिए हर संभव सहायता देने को तैयार है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों की टीमें आपदा के बीच राहत और बचाव प्रयासों में समन्वय के साथ काम कर रही हैं।नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास ने कहा कि त्रासदी का दायरा बहुत बड़ा है और कई विदेशी नागरिकों सहित बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। दूतावास के मुताबिक, फिलहाल प्राथमिकता खोज एवं बचाव अभियान चलाकर लोगों की जान बचाने और प्रभावित लोगों तक जरूरी सहायता पहुंचाने की है।बुधवार को नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद कई लोगों के मारे जाने की आशंका है। सैकड़ों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान लगातार जारी है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बात की और नेपाल में बाढ़ के कारण हुई जानमाल की हानि पर संवेदना व्यक्त की। मोदी ने कहा कि इस कठिन समय में भारत के लोग नेपाल में अपने भाई-बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि भारत नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि भारतीय दल बचाव और राहत प्रयासों में नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।पीएम नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से बात की और नेपाल में बाढ़ के कारण हुई जानमाल की हानि पर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में भारत के लोग नेपाल में अपने भाई-बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के दल बचाव और राहत प्रयासों में निकटता से समन्वय कर रहे हैं।























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