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- कोलकाता । पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया, जब पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्ता में आई और सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। कोलकाता में आयोजित भव्य समारोह में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने सुवेंदु अधिकारी और उनके साथ पांच अन्य मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।=सुवेंदु अधिकारी के साथ जिन नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली, उनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, क्षुदिराम टुडू और निसिथ प्रमाणिक शामिल हैं। भाजपा की इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही राज्य में पहली बार किसी दक्षिणपंथी दल की सरकार बनी है। 8 मई को भाजपा विधायक दल ने सुवेंदु अधिकारी को सर्वसम्मति से अपना नेता चुना था। इसके बाद उनका मुख्यमंत्री बनना तय हो गया था। भाजपा ने विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत दर्ज करते हुए राज्य की सत्ता पर कब्जा जमाया।सुवेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर तीन दशक से अधिक लंबा रहा है। उन्होंने 1995 में कांथी नगरपालिका से पार्षद के रूप में राजनीति की शुरुआत की थी। इसके बाद वे तीन बार पार्षद रहे और कांथी नगरपालिका के चेयरमैन भी बने। उन्हें 20 साल से अधिक का विधायी अनुभव है। वे दो बार लोकसभा सांसद, तीन बार विधायक और पांच साल तक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे।राज्य सरकार में रहते हुए उन्होंने परिवहन और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले। इसके अलावा वे हुगली रिवर ब्रिज कमीशन के चेयरमैन भी रहे। हल्दिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने औद्योगिक शहर हल्दिया के विकास में अहम भूमिका निभाई। सहकारिता आंदोलन में भी उनका बड़ा योगदान रहा है। वे एग्रीकल्चर रूरल बैंक, कांथी अर्बन कोऑपरेटिव और विद्यासागर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन रह चुके हैं।सुवेंदु अधिकारी का परिवार भी स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा रहा है। कांथी के प्रसिद्ध अधिकारी परिवार के बिपिन अधिकारी और केनाराम अधिकारी बंगाल के कई स्वतंत्रता सेनानियों के करीबी सहयोगी थे। बिपिन अधिकारी को अंग्रेजों ने जेल भेजा था और ब्रिटिश शासन के दौरान अधिकारी परिवार का घर दो बार जला दिया गया था।15 दिसंबर 1970 को पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के करकुली गांव में जन्मे सुवेंदु अधिकारी ने रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से एम.ए. की पढ़ाई की है। वे पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री शिशिर अधिकारी के पुत्र हैं और फिलहाल अविवाहित हैं।सुवेंदु अधिकारी 2007 के नंदीग्राम आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे, जिसने 34 साल पुराने वाम मोर्चा शासन को समाप्त करने में अहम भूमिका निभाई थी। वे लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस में रहे और 2020 तक ममता बनर्जी सरकार में मंत्री भी थे। दिसंबर 2020 में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा का दामन थाम लिया था। उन्हें ‘जायंट किलर’ भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने 2021 में नंदीग्राम और 2026 में भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को हराकर बड़ी राजनीतिक जीत हासिल की।
- कोलकाता । पश्चिम बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में सुवेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता माखनलाल सरकार का आशीर्वाद लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए कोलकाता पहुंचे थे। ब्रिगेड परेड ग्राउंड पहुंचने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद के लिए नामित सुवेंदु अधिकारी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य के साथ खुली जीप में सवार होकर वहां मौजूद हजारों भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों का अभिवादन किया। पूरा ब्रिगेड परेड ग्राउंड भगवा रंग में सजा हुआ नजर आया। समारोह में बड़ी संख्या में कलाकार पारंपरिक ढोल की थाप पर प्रस्तुति दे रहे थे।जीप यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी मंच पर पहुंचे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्रियों, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और अन्य नेताओं से मुलाकात की। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने माखनलाल सरकार का सम्मान करते हुए उन्हें शॉल भेंट की और उनका आशीर्वाद लिया। 98 वर्ष की आयु में भी, माखनलाल सरकार आज़ादी के बाद के भारत में राष्ट्रवादी आंदोलन से जुड़े शुरुआती ज़मीनी स्तर के नेताओं में से एक हैं। 1952 में, उन्हें कश्मीर में भारतीय तिरंगा फहराने के आंदोलन के दौरान श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ होने पर गिरफ्तार किया गया था।साल 1980 में भाजपा की स्थापना के बाद उन्हें पश्चिम दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों का संगठन समन्वयक बनाया गया। उन्होंने सिर्फ एक साल में करीब 10 हजार लोगों को पार्टी से जोड़ने का काम किया। साल 1981 से लगातार सात वर्षों तक उन्होंने जिला अध्यक्ष के रूप में काम किया। उस समय यह बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी, क्योंकि आमतौर पर भाजपा नेता एक ही संगठनात्मक पद पर दो साल से ज्यादा नहीं रह पाते थे। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भाजपा संसदीय दल की बैठक में सुवेंदु अधिकारी के नाम का ऐलान भाजपा विधायक दल के नेता के रूप में किया था। इसके बाद सुवेंदु अधिकारी ने नियमों के अनुसार लोक भवन जाकर राज्यपाल आरएन रवि के सामने नई सरकार बनाने का दावा पेश किया।
- कोलकाता । पश्चिम बंगाल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है और शनिवार सुबह होने वाला शपथ ग्रहण समारोह राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ने वाला माना जा रहा है। भाजपा विधायक दल के नेता और राज्य के अगले मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में होने वाला यह समारोह बंगाल के लिए ‘ऐतिहासिक सवेरा’ साबित होगा।सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यह शपथ ग्रहण समारोह तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन के अंत और विकास, शांति व समृद्धि के नए दौर की शुरुआत का प्रतीक बनेगा। उन्होंने कहा कि अब केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार होने से बंगाल में ‘डबल इंजन’ विकास का रास्ता खुलेगा और ‘सोनार बांग्ला’ का सपना साकार होगा।सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में सुवेंदु अधिकारी ने लिखा कि पश्चिम बंगाल के लिए यह गर्व और उत्साह का ऐतिहासिक क्षण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘सिटी ऑफ जॉय’ (खुशियों के शहर) में स्वागत करना हमारे लिए अत्यंत गर्व और उल्लास का क्षण है। आजादी के बाद पहली बार बंगाल में भाजपा सरकार का गठन हो रहा है, जो संस्थापक नेताओं के सपनों को पूरा करने जैसा है। उन्होंने कहा कि आज दशकों के कथित कुशासन का अंत हो रहा है और विकास, शांति और समृद्धि के नए युग की शुरुआत हो रही है।कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल सीवी आनन्द बोस नए मंत्रिमंडल को शपथ दिलाएंगे। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद हो रहे हैं। इस समारोह के दौरान यह भी साफ हो जाएगा कि सुवेंदु अधिकारी के साथ नए मंत्रिमंडल में कौन-कौन शामिल होंगे। नई सरकार कोलकाता स्थित पुराने सचिवालय राइटर्स बिल्डिंग से काम करेगी जबकि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हावड़ा जिले के नबान्ना सचिवालय से काम करती थीं।सुवेंदु अधिकारी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार ‘सामूहिक नेतृत्व’ के आधार पर चलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य को केवल ‘मैं’ नहीं, बल्कि ‘हम’ मिलकर चलाएंगे। साथ ही केंद्र और राज्य के बीच बेहतर तालमेल के जरिए बंगाल के विकास को नई गति दी जाएगी।
- कोलकाता । पश्चिम बंगाल में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के रूप में सुवेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह को लेकर कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड के बाहर बड़ी संख्या में लोग जुटे। समारोह में शामिल होने के लिए भाजपा समर्थकों, साधु-संतों और पार्टी कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला।ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित होने वाले इस शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्रियों और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की संभावना जताई गई है।समारोह में पहुंचे एक साधु ने बातचीत में कहा, “समारोह में आने की एक वजह यह है कि हम भी राज्य का हिस्सा हैं। काफी समय से यहां कम्युनिस्टों और कांग्रेस का राज रहा। तृणमूल कांग्रेस पूरी तरह से मुस्लिमों की पार्टी बन चुकी थी। टीएमसी की सरकार बनने पर मुस्लिम लोग आते थे, आज भाजपा की सरकार बन रही है तो साधु-संत आ रहे हैं।” इस दौरान साधु ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “पीएम मोदी हिंदुओं की पंसद हैं। वे जहां भी जाते हैं, वहां भगवा झंडा लहराता है। इसीलिए सभी के दिल में उनके लिए सम्मान है।”कार्यक्रम में पहुंचे साधु-संत ‘जयकारे’ लगाते नजर आए। साथ ही, कुछ संतों ने ‘शंख’ भी फूंका। एक अन्य साधु ने कहा, “अब राम राज्य शुरू हो गया है, इसीलिए साधु यहां आए हैं।” दिल्ली से कोलकाता पहुंचे एक भाजपा समर्थक ने कहा, “आज पश्चिम बंगाल में सनातनी सरकार बनने जा रही है। हम सनातनी के तौर पर अपना कर्तव्य निभाने आए हैं। यहां चारों तरफ आज खुशी का माहौल है। ऐसा लग रहा है, जैसे कोलकाता में कोई त्योहार मनाया जा रहा है। बड़ी संख्या में साधु-संत शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए आए हैं।”एक अन्य भाजपा समर्थक रवींद्रनाथ टैगोर की तस्वीर लेकर शपथ समारोह को देखने के लिए पहुंचा। कार्यकर्ता ने कहा, “आज गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की भी जयंती है। इसलिए मैं एक तस्वीर लेकर आया हूं। हमारे प्रधानमंत्री ‘भारत के शेर’ हैं।” एक महिला कार्यकर्ता ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सोनार बांग्ला’ का नारा दिया था और आज राज्य ‘सोनार बांग्ला’ बनने की ओर बढ़ रहा है। बंगाल में कमल खिल चुका है और हम मुख्यमंत्री के रूप में सुवेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह देखने को लेकर उत्साहित हैं।
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नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के ठीक एक साल बाद भारत ने ओडिशा में बंगाल की खाड़ी के तट पर ‘टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑग्मेंटेशन’ (तारा) हथियार प्रणाली के पहले सफल परीक्षण के साथ, अपनी स्वदेशी मारक क्षमता में एक और निर्णायक छलांग का प्रदर्शन किया। रक्षा अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। ऑपरेशन सिंदूर ने देश की सैन्य रणनीति में व्यापक बदलाव लाया था और दूर से सटीक हमला करने की क्षमता (स्टैंड-ऑफ प्रिसिजन वॉरफेयर) की दिशा में महत्त्वपूर्ण दक्षता दिखाई थी।
यह परीक्षण भारतीय वायु सेना के सहयोग से एयर-बॉर्न प्लेटफॉर्म से किया गया। एक रक्षा अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘इस पहले परीक्षण ने न केवल विंग्ड ग्लाइड कॉन्फिगरेशन के एरोडायनामिक को प्रदर्शित किया बल्कि हथियार के नेविगेशन, मार्गदर्शन और नियंत्रण आर्किटेक्चर को भी प्रमाणित किया।‘फाइबर-ऑप्टिक जाइरो आधारित इनर्टियल नेविगेशन मल्टी-जीएनएसएस गाइडेंस और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इमेजिंग इन्फ्रारेड टर्मिनल के साथ मॉड्यूलर रेंज एक्सटेंशन किट के तौर पर डिजाइन किया गया ‘तारा’ लड़ाकू विमानों को काफी सुरक्षित दूरी से दुश्मन की जमीन पर मौजूद अहम ठिकानों को सटीक निशाने के साथ नष्ट करने में सक्षम बनाता है।रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि तारा को हैदराबाद की रिसर्च सेंटर इमारत (आरसीआई) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की अन्य प्रयोगशालाओं द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है। यह भारत का पहला स्वदेशी मॉड्यूलर ग्लाइड हथियार है जो पारंपरिक बिना गाइड वाले वॉरहेड को लंबी दूरी के सटीक मारक क्षमता वाले हथियारों में बदल सकता है। इस सफल परीक्षण ने भारत की स्वदेशी रूप से किफायती लेकिन अत्यधिक प्रभावी सटीक मारक क्षमता वाले हाथियार विकसित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कीर्तिमान कायम किया है। यह कम लागत वाली प्रणाली मौजूदा हवाई हथियारों की परिचालन पहुंच, सटीकता और मारक क्षमता को बढ़ाएगी।एक रक्षा वैज्ञानिक ने कहा, ‘तारा अत्याधुनिक, कम लागत वाली प्रणालियों का उपयोग करने वाला पहला ग्लाइड हथियार है। यह वायु सेना को काफी उच्च सटीकता के साथ सामरिक लक्ष्यों को भेदने की क्षमता प्रदान करेगा। साथ ही पायलटों और विमानों को दुश्मन के रडार-निर्देशित मिसाइल प्रणालियों के संपर्क में आने के खतरे को भी कम करेगा।‘उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इमेजिंग इन्फ्रारेड टर्मिनल मार्गदर्शन का समावेश विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह ऐसे समय में भी काम कर सकता है जब सैटेलाइट नेविगेशन को खराब या जाम किया जा सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर यह सफल परीक्षण हाल के संघर्षों से सबक लेकर आंतरिक क्षमता विकसित करने के भारत के प्रयास को मजबूत करता है।भारतीय वायु सेना के पूर्व अधिकारी एन के सामल ने कहा, ‘आधुनिक युद्धक्षेत्रों में यह क्षमता जरूरी होती है कि दुश्मन के हमले के दायरे से बाहर रहते हुए भी उसके बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक केंद्रों, रडार स्टेशनों, कमांड सेंटरों और अलग-अलग सैन्य टुकड़ियों पर हमला किया जा सके। तारा भारतीय वायु सेना को स्वदेशी, कम लागत वाला ‘स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक’ विकल्प देकर इन जरूरतों को पूरा करता है। इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा सकता है।‘तारा पहले ही विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में प्रवेश कर चुका है, जिससे इसके जल्द ही परिचालन में शामिल होने की उम्मीद है। अब विकास-सह-उत्पादन भागीदारों और अन्य उद्योगों के सहयोग से उत्पादन गतिविधियों पर काम चल रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के चेयरमैन समीर वी कामत ने इस सफल परीक्षण से जुड़े वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, भारतीय वायु सेना और औद्योगिक भागीदारों को बधाई दी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस पहली उड़ान-परीक्षण को भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं में महत्त्वपूर्ण प्रगति बताया।तारा क्या है और यह कैसे काम करता है?तारा को एयर-लॉन्च, लंबी दूरी के हवा से जमीन पर मार करने वाले सटीक हथियार के तौर पर डिजाइन किया गया है, ताकि बिना गाइड वाले पारंपरिक हथियारों को कुशल ग्लाइड वाले हथियार में बदला जा सके। यह 650 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा की रफ्तार से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ सकता सकता है। इसके पीछे लगे पंख इस सिस्टम को आखिरी चरण में जटिल युद्धाभ्यास में मदद करते हैं।सूत्रों ने बताया कि यह हथियार कई कॉन्फिफगरेशन में उपलब्ध होगा, जिसमें तारा-250 लगभग 308 किलोग्राम के वजन के साथ जबकि तारा-450/500 का वजन लगभग 546 किलोग्राम होगा। मॉड्यूलर ग्लाइड और गाइडेंस किट का वजन लगभग 98 किलोग्राम है, जिससे प्रमुख संरचनात्मक संशोधनों के बिना मौजूदा बम इन्वेंटरी के साथ एकीकरण सक्षम हो जाता है। - लखनऊ:। पुलिस ने शुक्रवार को नकली आईपीएल टिकट बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरोह चैटजीपीटी और ग्राफिक डिजाइन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके नकली टिकट बनाकर इकाना स्टेडियम के बाहर बेच रहा था।अपर पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) (दक्षिण लखनऊ) रल्लापल्ली वसंत कुमार ने बताया कि आरोपी सोशल मीडिया से असली टिकटों की तस्वीरें लेकर कोरलड्रॉ में एडिट करते थे। टिकट के साइज और पेपर क्वालिटी की जानकारी के लिए चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया गया, ताकि नकली टिकट असली से हूबहू मिलते-जुलते दिखें।पुलिस के मुताबिक, गिरोह 170-जीएसएम पेपर पर टिकट प्रिंट कर भोले-भाले दर्शकों को ऊंचे दामों पर बेचता था और यूपीआई से भुगतान लेता था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान श्रीकांत बोरकर (30), नूतन कुमार साहू (28), राजेंद्र चौधरी (29) और विश्वजीत साहू (22) के रूप में हुई है। विश्वजीत 2डी/3डी डिजाइनर है और टिकट एडिटिंग का काम करता था।मामला तब सामने आया जब जालौन निवासी प्रदीप सिंह ने शिकायत की कि उन्होंने एकाना स्टेडियम के बाहर 1,000 रुपये में दो टिकट खरीदे, जो प्रवेश के समय फर्जी निकले। इसके बाद साइबर सेल और सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस ने बृहस्पतिवार शाम चारों को गिरफ्तार कर लिया।पूछताछ में पता चला कि आरोपियों ने पहले रायपुर में ब्लैक से टिकट लेकर मैच देखा था। यहीं से नकली टिकट बनाने का विचार आया। चार मई को गिरोह दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम के बाहर भी नकली टिकट बेचने गया था, लेकिन बारकोड न मिलने से कामयाब नहीं हुआ। इसके बाद डिजाइन सुधारकर वे छह मई को लखनऊ पहुंचे और होटल में रुककर अगले दिन इकाना स्टेडियम के बाहर टिकट बेचे।पुलिस ने 15 नकली टिकट, 170-जीएसएम पेपर शीट पर प्रिंटेड 14 नकली टिकट, 4 मोबाइल, एक लैपटॉप, पेपर कटर, एटीएम कार्ड, बैंक दस्तावेज और एक रिट्ज कार बरामद की है। मामले में जांच की जा रही है।
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नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कोलकाता में भाजपा विधायक दल की बैठक को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं हाथ जोड़कर बंगाल की जनता का कोटि-कोटि धन्यवाद करना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि कम्युनिस्टों के समय से जिस प्रकार का माहौल बनाया जाता था, ममता बनर्जी ने इसे और गहरे तरीके से भय में परिवर्तित किया। वहां मत की अभिव्यक्ति लगभग असंभव थी। हिंसा और क्रूरता के सैकड़ों उदाहरण उसके प्रमाण हैं। उसके बीच भाजपा और हमारे नेता नरेंद्र मोदी पर भरोसा कर बंगाल की जनता ने जो प्रचंड विजय हमें दी है, उसके लिए मैं बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कम्युनिस्ट शासन के दौरान बंगाल में जो माहौल था, ममता के शासनकाल में वह और भी बदतर हो गया है, और अब डर का माहौल छा गया है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लगभग नामुमकिन हो गई है। हिंसा और बर्बरता की कई घटनाओं के बावजूद, जनता ने भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी को भारी जनादेश दिया है, जिसके लिए मैं अत्यंत आभारी हूं।उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने हमसे जो अपेक्षा रखी और जिन आशाओं के साथ हमें बहुमत दिया है, हम पूरा प्रयास करेंगे कि आपके विश्वास को तनिक भी ठेस न पहुंचे, इसमें कोई कमी न हो। हम सभी भाजपा कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है कि सोनार बंगला के लक्ष्य को लेकर हम चलें और बंगाल की जनता की अपेक्षाओं को हम पूर्ण करें।अमित शाह ने कहा कि आज बंगाल की विजय अनेक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है। 100 साल की वैचारिक यात्रा के बाद आज गंगोत्री से गंगासागर तक हर जगह भाजपा की सरकार बनी है, यह हम सभी के लिए बहुत आनंद का विषय है। 1950 से जिस विचार की यात्रा लेकर हम निकले और जिनके नेतृत्व में हम चले, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भूमि पर 1950 के बाद आज 2026 में उन्हीं की पार्टी की सरकार बन रही है।उन्होंने कहा कि जब अनुच्छेद 370 हटा तो देशभर के भाजपा कार्यकर्ताओं के मन में खुशी की लहर दौड़ी, लेकिन मुझे कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने कहा था कि अभी भी कसर बाकी है। तब मैंने आश्चर्य से पूछा था, “अब क्या बचा?” तब उन्होंने कहा था, “बंगाल में भाजपा का झंडा फहराना बाकी है।” मैं मानता हूं कि आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जहां भी होंगे, पीएम मोदी के नेतृत्व को आशीर्वाद दे रहे होंगे कि आज पीएम मोदी के नेतृत्व ने भाजपा को गंगोत्री से गंगासागर तक पहुंचाया। आज त्रिपुरा में हमारी सरकार है, असम में हमारी सरकार है और अब बंगाल में भी हमारी सरकार बनी है। घसपैठ और गौ तस्करी असंभव होने वाली है। दृढ़ता के साथ बंगाल सरकार और भारत सरकार इस सीमा को राष्ट्र की सुरक्षा के अभेद किले की तरह परिवर्तित कर देगी।उन्होंने कहा कि 23 प्रशासनिक जिलों में से 9 जिले ऐसे हैं, जहां दीदी का खाता भी नहीं खुला है। सूपड़ा साफ हो चुका है। मैंने ऐसा प्रचंड जनादेश कभी देखा नहीं क्योंकि सरकार काम करती है तो जनादेश मिलता है, लेकिन जहां विरोधी दल के नेता को बोलने का मौका नहीं दिया जाता है, वहां पर सत्ताधारी दल का 9 जिलों में शून्य वोट ये केवल जनता और ईश्वर की कृपा है। आज बंगाल की जीत अनेक दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। सौ वर्षों की वैचारिक यात्रा के बाद, भाजपा ने गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक पूरे देश में सरकारें स्थापित की हैं। यह उपलब्धि हम सभी के लिए अपार प्रसन्नता का स्रोत है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्मभूमि पर, जिनके दूरदर्शी मार्ग का अनुसरण हमने 1950 में शुरू किया था और जिनका नेतृत्व हमें निरंतर प्रेरित करता रहा है, वही पार्टी 2026 में सरकार बनाने जा रही है।उन्होंने कहा कि भवानीपुर की जनता का मैं बहुत-बहुत धन्यवाद करना चाहता हूं। सुवेंदु दा ने गत चुनाव में दीदी को नंदीग्राम में हराया था। मैंने दीदी का एक इंटरव्यू देखा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि मैं उनके गढ़ में लड़ने चली गई। दीदी, इस बार सुवेंदु दा ने आपको आपके घर में हराया है। ( -
नई दिल्ली। अभिनेता-राजनेता और ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (टीवीके) के प्रमुख सी जोसेफ विजय ने शुक्रवार को कई विपक्षी दलों का समर्थन हासिल करने के बाद तमिलनाडु में सरकार बनाने का औपचारिक रूप से दावा पेश किया। 234 सदस्यों वाली विधानसभा में उनके गठबंधन की ताकत बहुमत के आंकड़े से ऊपर पहुंच गई है। विजय ने चेन्नई के राजभवन में तमिलनाडु के गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सहयोगी पार्टियों और निर्दलीय समर्थकों के समर्थन पत्र सौंपे।
दरअसल, यह घटनाक्रम 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों के खंडित जनादेश के बाद पैदा हुई गहन राजनीतिक अनिश्चितता के कई दिनों के बीच सामने आया है। चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए गए थे। सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल से उम्मीद है कि वे शुक्रवार देर शाम या शनिवार सुबह विजय को सरकार बनाने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित करेंगे। वहीं, शपथ ग्रहण समारोह शनिवार को सुबह 11 बजे चेन्नई में होने की संभावना है। विजय की मां शोभा चंद्रशेखर, चेन्नई स्थित अपने आवास पहुंची हैं। अभिनेता और पार्टी प्रमुख विजय कल शनिवार को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।आपको बता दें, विधानसभा चुनावों में टीवीके 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। हालांकि, शुरुआत में पार्टी 234 सदस्यों वाले सदन में सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 सीटों के बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गई थी। कांग्रेस पहली पार्टी थी जिसने विजय को समर्थन दिया और उसके पांच नवनिर्वाचित विधायकों ने टीवीके प्रमुख का समर्थन किया।शुक्रवार शाम भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने भी टीवीके के नेतृत्व में सरकार बनाने की कोशिश को औपचारिक रूप से अपना समर्थन देने की घोषणा की। नई विधानसभा में इन चारों पार्टियों के दो-दो विधायक हैं, जिससे विजय खेमे की कुल ताकत 120 विधायकों तक पहुंच गई है, जो साधारण बहुमत से ऊपर है।राज्यपाल से मुलाकात के बाद, विजय चेन्नई में सीपीआई के राज्य मुख्यालय गए और सरकार बनाने की उनकी कोशिशों को समर्थन देने के लिए वामपंथी पार्टी के नेताओं को व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद दिया। समर्थक पार्टियों के नेताओं ने संकेत दिया कि उनका समर्थन राज्य में राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने और लंबे समय तक चलने वाली अनिश्चितता को रोकने के उद्देश्य से था।इस बीच, विजय को उन दो विधानसभा क्षेत्रों में से एक से इस्तीफा देना होगा जहां से वे चुने गए थे। यह चुनाव आयोग के उन नियमों के अनुसार है जो किसी भी व्यक्ति को एक ही समय में दो सीटें रखने से रोकते हैं। ये नाटकीय राजनीतिक घटनाक्रम तमिलनाडु की राजनीति में एक ऐतिहासिक क्षण हैं, जिसमें विजय अब अपनी पार्टी को चुनावी राजनीति में औपचारिक रूप से उतारने के एक साल से भी कम समय में राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनने की कगार पर हैं। -
नई दिल्ली। भारतीय जनता दल (भाजपा) के नेता सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कोलकाता स्थित राजभवन में राज्यपाल आरएन रवि से मुलाकात की। अधिकारी ने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। सुवेंदु अधिकारी के साथ दिलीप घोष, लॉकेट चटर्जी और तापस रॉय समेत कई बड़े नेता मौजूद थे।
सुवेंदु अधिकारी के विधायक दल का नेता चुने जाने के साथ ही पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरे को लेकर लग रही अटकलों पर विराम लग गया। मुख्यमंत्री पद के लिए सुवेंदु अधिकारी का नाम तय हो गया है। सुवेंदु भारतीय जनता पार्टी विधायक दल के नेता चुने गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुई विधायक दल की बैठक में सुवेंदु अधिकारी के नाम पर मुहर लगी है।भवानीपुर विधानसभा जैसी हॉट सीट से तृणमूल चीफ ममता बनर्जी को 15 हजार वोटों से हराने के बाद सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे प्रबल उम्मीदवार माना जा रहा था। भाजपा के मुताबिक, सुवेंदु 9 मई, यानी रवींद्र जयंती के मौके पर ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री के पद की शपथ लेंगे।इस बीच, ममता बनर्जी अब आधिकारिक तौर पर पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री बन गई हैं। यह स्थिति तब बनी जब राज्यपाल आर.एन. रवि ने राज्य विधानसभा को भंग करने की घोषणा की। इसका यह भी अर्थ है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली राज्य कैबिनेट भी स्वतः ही समाप्त हो गई है।चुनावी नतीजे के बाद 5 मई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तत्कालीन सीएम ममता बनर्जी ने कहा था कि वह राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपने की परंपरा का पालन नहीं करेंगी, क्योंकि उन्हें लगता था कि आधिकारिक नतीजे असल जनमत को नहीं दर्शाते हैं। इस तरह उन्होंने यह साफ कर दिया कि वह न तो पूरे पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार स्वीकार कर रही हैं और न ही भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से अपनी निजी हार। -
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में स्वतंत्रता के बाद पहली भाजपा शासित सरकार बनने जा रही है। विधायक दल की बैठक में सुवेंदु अधिकारी को नेता चुना गया है। विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने ‘सामूहिक नेतृत्व’ के आधार पर नए राज्य प्रशासन को चलाने पर जोर दिया। सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि मैं नई सरकार नहीं चलाऊंगा। हम सब मिलकर नई सरकार चलाएंगे।
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की और इसमें नव निर्वाचित 2027 भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने भाग लिया, जिसके दौरान पश्चिम बंगाल विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल के नए नेता और इस प्रकार अगले मुख्यमंत्री के रूप में उनका नाम सर्वसम्मति से चुना गया।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘सामूहिक नेतृत्व’ के इस संदेश के माध्यम से अधिकारी ने यह अप्रत्यक्ष संदेश भी दिया है कि उनके नेतृत्व वाली नई राज्य कैबिनेट पिछली कैबिनेट की तरह काम नहीं करेगी, जिसका नेतृत्व उनकी पूर्ववर्ती ममता बनर्जी ने किया था, क्योंकि ममता की कैबिनेट में प्रशासनिक निर्णय, चाहे छोटा हो या बड़ा, उनकी सहमति के बिना पारित नहीं किया जा सकता था। अपने संक्षिप्त भाषण में अधिकारी ने नई राज्य कैबिनेट की प्राथमिकताओं को भी रेखांकित किया।अधिकारी ने कहा कि भ्रष्टाचार और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग में शामिल लोगों का पता लगाना और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना, पिछले 15 वर्षों में गंभीर अन्याय और अत्याचारों का शिकार हुए लोगों को न्याय दिलाना और बेहतर एवं भ्रष्टाचार मुक्त सार्वजनिक सेवा सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता होगी।इससे पहले, सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने पार्टी के सभी 207 निर्वाचित विधायकों को याद दिलाया कि उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पश्चिम बंगाल की जनता ने हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को जिस अटूट विश्वास के साथ भारी जीत दिलाई, वह टूटे नहीं।शाह ने कहा कि ममता बनर्जी के शासनकाल में यहां भय का माहौल था। लेकिन इसके बावजूद, मैं पश्चिम बंगाल की जनता का आभारी हूं कि उन्होंने हमारे नेताओं पर भरोसा करके हमें यह जीत दिलाई। उन्होंने कहा कि वह पार्टी नेताओं से कहना चाहते हैं कि वे उन लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास करें जिन्होंने उन्हें सत्ता में पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि विश्वास को टूटने मत दीजिए। यह आप सभी का कर्तव्य है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम पश्चिम बंगाल की जनता को अपना सर्वश्रेष्ठ दें। -
नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह आगामी रविवार को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें देश में संभावित बाढ़ और हीट वेव से निपटने की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की जाएगी।
गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है। अमित शाह के मार्गदर्शन में, गृह मंत्रालय ने हाल के वर्षों में देश में आपदा प्रबंधन ढांचे को काफी मजबूत किया है। इसमें केन्द्र और राज्य सरकार की एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, NDRF को सुदृढ़ बनाना और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान शून्य जनहानि के दृष्टिकोण पर निरंतर ध्यान केंद्रित करना शामिल है।यह उच्च-स्तरीय समीक्षा सरकार की प्रोएक्टिव गवर्नेंस, नागरिक-केंद्रित आपदा प्रबंधन और एक आपदा-रोधी भारत के निर्माण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है। बैठक के दौरान, गृह मंत्री केंद्र सरकार की एजेंसियों की तैयारियों का आकलन करेंगे; साथ ही, किसी भी प्रकार की जनहानि न हो और संपत्ति को कम से कम नुकसान पहुंचे, यह सुनिश्चित करने के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, संसाधनों की तैनाती और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की समीक्षा करेंगे।केंद्रीय गृह मंत्री शाह पूरे देश में बाढ़ के प्रभाव को कम करने के लिए किए जा रहे दीर्घकालिक उपायों की प्रगति की भी समीक्षा करेंगे। इन उपायों में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की सुरक्षा, नदी प्रबंधन की पहल और मौसम के पूर्वानुमान में वैज्ञानिक प्रगति शामिल हैं।इसके साथ ही, केन्द्रीय गृह मंत्री पिछले वर्ष आयोजित की गई समीक्षा बैठक में लिए गए निर्णयों के कार्यान्वयन की भी जानकारी लेंगे, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके और विभिन्न गतिविधियों का त्वरित एवं समन्वित निष्पादन हो सके। -
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में नए मुख्यमंत्री पद के लिए सुवेंदु अधिकारी का नाम का ऐलान हो गया है। सुवेंदु भारतीय जनता पार्टी विधायक दल के नेता चुने गए हैं। विधायक दल का नेता चुने जाने का बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अगले सीएम के लिए उनके नाम की घोषणा की। सुवेंदु को बंगाल के विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद उनको बधाई देने के वालों का सिलसिला भी शुरू हो गया है।
इस बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष नितिन नबीन ने सुवेंदु अधिकारी को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि पश्चिम बंगाल भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने पर सुवेंदु अधिकारी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं आपके सशक्त नेतृत्व में पश्चिम बंगाल ‘सोनार बांग्ला’ के संकल्प की दिशा में तीव्र गति से अग्रसर होगा तथा सुशासन एवं विकास की नई पहचान स्थापित करेगा। आपके सफल एवं यशस्वी कार्यकाल हेतु पुनः हार्दिक शुभकामनाएं।वहीं, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सुवेंदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल में भाजपा विधायक दल के नेता चुने जाने पर हार्दिक बधाई। मुझे पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में यह हमारे संकल्प को और मजबूत करेगा और एक विकसित, समृद्ध और प्रगतिशील बंगाल की ओर हमारी यात्रा को गति प्रदान करेगा।भवानीपुर विधानसभा जैसी हॉट सीट से तृणमूल चीफ ममता बनर्जी को 15 हजार वोटों से हराने के बाद सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे प्रबल उम्मीदवार माना जा रहा था। भाजपा के मुताबिक, सुवेंदु 9 मई, यानी रवींद्र जयंती के मौके पर ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री के पद की शपथ लेंगे।इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अभी कुछ समय पहले ही चुनाव की प्रक्रिया पूरी हुई। 8 प्रस्ताव और समर्थन मिले हैं, सभी में एक ही नाम मिला है। मैं सुवेंदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल विधानमंडल दल के नेता के रूप में निर्वाचित घोषित करता हूं। -
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में अगर किसी नेता ने बीते कुछ वर्षों में तेजी से अपना कद बढ़ाया है, तो वह नाम है सुवेंदु अधिकारी। आज वे न सिर्फ राज्य में भाजपा का सबसे प्रमुख चेहरा हैं, बल्कि प्रदेश के नए मुख्यमंत्री भी बनने वाले हैं। कोलकाता में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज शुक्रवार को राज्य के अगले मुख्यमंत्री के रूप में सुवेंदु अधिकारी के नाम की घोषणा की। सुवेंदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल विधानमंडल दल का नेता चुने जाने की घोषणा के बाद, गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें बधाई दी। वह कल शनिवार को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण करेंगे।
सुवेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी के सबसे मुखर आलोचक के तौर पर भी जाना जाता है। लेकिन, एक समय था जब सुवेंदु अधिकारी, ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते थे। नंदीग्राम और सिंगूर जैसे आंदोलनों में उनकी अहम भूमिका ने ही ममता बनर्जी को राज्य की राजनीति में मजबूत पहचान दिलाई। समय के साथ दोनों नेताओं के रास्ते अलग हो गए। 2021 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव राज्य की सबसे चर्चित लड़ाइयों में शामिल हो गया।सुवेंदु अधिकारी वैसे नेता हैं, जिन्होंने ममता बनर्जी को उनके ही गढ़ में न सिर्फ कड़ी चुनौती दी, लगातार दो विधानसभा चुनाव में करारी मात भी दी। 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर चुनाव लड़ते हुए अधिकारी ने सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को टक्कर दी और जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित की। इसके बाद इस बार के चुनाव में अधिकारी ने नंदीग्राम के साथ ही भवानीपुर से उम्मीदवारी पक्की कर ली। भवानीपुर को ममता बनर्जी की सुरक्षित सीट माना जा रहा था। लेकिन, चुनावी नतीजे में सुवेंदु अधिकारी की भवानीपुर से प्रचंड जीत ने ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर पर सवालिया निशान लगा दिया।पूर्वी मेदिनीपुर जिले में अधिकारी की मजबूत पकड़ और संगठन क्षमता सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। वे उन गिने-चुने नेताओं में हैं, जो जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को संगठित करने और चुनावी समीकरण साधने में माहिर हैं। सुवेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर छात्र जीवन से ही शुरू हो गया। कांथी पीके कॉलेज से स्नातक सुवेंदु अधिकारी ने 1989 में छात्र परिषद के प्रतिनिधि के रूप में अपनी राजनीतिक शुरुआत की।वर्ष 2006 में वे कांथी दक्षिण सीट से पहली बार विधायक चुने गए। इसके बाद 2009 और 2014 में उन्होंने तमलुक लोकसभा सीट से सांसद के रूप में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2016 में नंदीग्राम से विधायक बनने के साथ ही वे ममता बनर्जी सरकार में मंत्री बने और परिवहन, सिंचाई और जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभाला।2007 का नंदीग्राम आंदोलन सुवेंदु अधिकारी के राजनीतिक करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। भूमि अधिग्रहण के खिलाफ ‘भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी’ के बैनर तले उन्होंने बड़ा जन आंदोलन खड़ा किया। इस आंदोलन ने न सिर्फ वाम मोर्चा सरकार को झुकने पर मजबूर किया, बल्कि टीएमसी के सत्ता तक पहुंचने का रास्ता भी तैयार किया।सुवेंदु अधिकारी एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी कांग्रेस और बाद में टीएमसी के वरिष्ठ नेता रहे हैं। उनके भाई भी सक्रिय राजनीति में हैं, जिससे पूर्वी मिदनापुर में इस परिवार का व्यापक प्रभाव बना हुआ है। -
तिरुवनंतपुरम. निर्वाचन आयोग ने बृहस्पतिवार को कहा कि विधानसभा चुनावों से पहले 15 मार्च से लागू आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) चार राज्यों और कई विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद समाप्त हो गई है। हालांकि, पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर मतदान लंबित होने के कारण वहां आदर्श आचार संहिता लागू रहेगी। निर्वाचन आयोग ने कहा कि चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव तथा पांच राज्यों की कुछ विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के परिणाम घोषित होने के बाद आदर्श आचार संहिता प्रभावहीन हो गई है। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा, ''असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में 2026 के विधानसभा चुनाव तथा गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नगालैंड और त्रिपुरा की विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के परिणाम संबंधित निर्वाचन अधिकारियों द्वारा घोषित किए जा चुके हैं।'' पत्र में कहा गया है कि ''इसके साथ ही आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से समाप्त हो गई है।''
आयोग ने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर नए सिरे से मतदान कराने का आदेश दिया गया है, इसलिए वहां आदर्श आचार संहिता लागू रहेगी। चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश के विधानसभा चुनाव और अन्य पांच राज्यों की कुछ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव नौ, 23 और 29 अप्रैल को हुए थे तथा इनके परिणाम चार मई को घोषित किए गए। -
भुवनेश्वर. ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बृहस्पतिवार को कहा कि केंद्र सरकार ने 769 करोड़ रुपये से अधिक की 10 सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनसे राज्य में खासकर दूरदराज के क्षेत्रों में 'कनेक्टिविटी' में एक ''क्रांतिकारी बदलाव'' आएगा। केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए केंद्रीय सड़क एवं अवसंरचना कोष (सीआरआईएफ) के तहत ओडिशा में अवसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी दी है। माझी ने कहा, ''ये परियोजनाएं संपर्क व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगी, खासकर राज्य के दूरदराज के इलाकों में सड़क संपर्क बेहतर हो सकेगा। ओडिशा में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए केंद्र सरकार का निरंतर समर्थन वास्तव में सराहनीय है।" केंद्र सरकार से जिन परियोजनाओं को मंजूरी मिली है उनमें झारसुगुडा, ब्रह्मपुर, गंजाम, कोरापुट, नबरंगपुर और गजपति जिलों की परियोजनाएं शामिल हैं।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के एक साल पूरा होने पर बृहस्पतिवार को अपने सभी सोशल मीडिया हैंडल पर 'डिस्प्ले पिक्चर' (डीपी) बदल दी तथा उन्होंने सभी से सशस्त्र बलों और उनकी सफलता के प्रति सम्मान के रूप में ऐसा ही करने का आग्रह किया। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप पर मोदी के प्रोफाइल पिक्चर को बदलकर काली पृष्ठभूमि पर 'ऑपरेशन सिंदूर' लिखा हुआ चित्र लगाया गया है। इस चित्र में तिरंगा है और अंग्रेजी में लिखे 'सिंदूर' शब्द के एक 'ओ' अक्षर में सिंदूर भरा हुआ दिखाया गया है, जो विवाहित हिंदू महिलाओं का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि एक साल पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने अपने शौर्य का प्रदर्शन किया था और हमारे लोगों पर हमला करने वालों को करारा जवाब दिया था। उन्होंने कहा कि देश का हर नागरिक भारतीय सशस्त्र बलों पर गर्व करता है। उन्होंने कहा, "हमारी सेनाओं और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी सफलता के सम्मान में, आइए हम सभी अपने सोशल मीडिया मंचों एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप पर अपनी डिस्प्ले पिक्चर को बदलकर नीचे साझा की गई तस्वीर लगाएं।'' इसी के साथ ही उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर अपलोड की गई तस्वीर साझा की। ऑपरेशन सिंदूर को तीनों रक्षा बलों द्वारा सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के साथ पश्चिमी सीमा पर सात से 10 मई, 2025 तक पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए अंजाम दिया गया था। यह अभियान 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में चलाया गया था, जिसमें 25 पर्यटक और एक गाइड की मौत हो गयी थी। मारे गए सभी पर्यटक हिंदू पुरुष थे।
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चेन्नई. तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) ने सरकार गठन पर चर्चा करने के लिए बृहस्पतिवार को यहां पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक की। बृहस्पतिवार शाम पनायूर में हुई इस बैठक में बड़ी संख्या में नवनिर्वाचित विधायक और पदाधिकारी शामिल हुए। उन्होंने पार्टी के महासचिव 'बुस्सी' एन आनंद से जानना चाहा कि टीवीके सरकार कब बनाएगी। पार्टी के एक सूत्र ने बताया, "कई लोग आनंद से जानना चाहते थे कि टीवीके कब सरकार बनाएगी। नेता ने उनसे धैर्य रखने को कहा क्योंकि पार्टी प्रमुख विजय इसके लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।" टीवीके थेनी जिला अध्यक्ष पांडी ने कहा, "तमिलनाडु की जनता ने हमारे नेता विजय के नेतृत्व में सरकार बनाने का जनादेश दिया है। यह निश्चित रूप से होगा। हमारे नेता कदम उठा रहे हैं।" कई लोगों को उम्मीद थी कि विजय मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे, लेकिन आज यह समारोह नहीं होने से उन्हें निराशा हुई। तमिलगा वेत्री कषगम साधारण बहुमत से दूर है। हालांकि कांग्रेस ने पांच विधायकों के साथ टीवीके को समर्थन देने की पेशकश की है, लेकिन विजय की पार्टी को 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में साधारण बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है। विधानसभा चुनावों में टीवीके ने 108 सीटें जीतीं, जिनमें विजय की जीती दो सीटें भी शामिल हैं। उन्हें एक सीट खाली करनी होगी।
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लखनऊ. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के वर्ष 2024 के लिए जारी नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार हुआ है। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में देश में कुल 35,44,608 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। जहां राष्ट्रीय अपराध दर 252.3 थी, वहीं उत्तर प्रदेश में अपराध दर काफी कम 180.2 दर्ज की गई। कुल अपराधों में उत्तर प्रदेश का देश में 18वां स्थान है, जबकि देश की 17 फीसदी जनसंख्या उप्र में निवास करती है। किसी भी राज्य में अपराध की स्थिति को समझने के लिए अपराध दर सबसे बेहतर एवं विश्वसनीय माध्यम है। प्रति एक लाख जनसंख्या के सापेक्ष अपराधों की संख्या को अपराध दर के रूप में परिभाषित किया जाता है। बयान के मुताबिक हत्या के मामलों में देश में उत्तर प्रदेश का स्थान 29वां है, जबकि हत्या के प्रयास के मामलों में यह 26वें स्थान पर है। शीलभंग के मामलों में प्रदेश 20वें स्थान पर है, जबकि फिरौती के लिए अपहरण के मामलों में राज्य पूरे देश में सबसे नीचे 36वें नंबर पर है। बयान के अनुसार दुष्कर्म के मामलों में उत्तर प्रदेश देश में 24वें स्थान पर है, जो राज्य में बेहतर कानून-व्यस्था को इंगित करता है। इसी प्रकार डकैती के मामलों में उत्तर प्रदेश देश में सबसे निचले पायदान यानी 36वें स्थान पर है। बयान में कहा गया कि ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि देश के अन्य राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में उत्तर प्रदेश की स्थिति अपराध नियंत्रण के मामले में काफी बेहतर है।
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पुडुचेरी। एआईएनआरसी प्रमुख एन रंगासामी ने बृहस्पतिवार को पुडुचेरी के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और यहां लोक भवन में उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन को अपना त्यागपत्र सौंप दिया। रंगासामी ने बाद में संवाददाताओं से कहा कि वह जल्द ही उपराज्यपाल से मिलेंगे और नयी सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। रंगासामी अपनी पार्टी एआईएनआरसी के नेतृत्व वाले राजग के साथ पांचवीं बार पुडुचेरी का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। राजग ने केंद्र शासित प्रदेश में बहुमत हासिल किया है। ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस (एआईएनआरसी) ने 12 सीटों पर जीत हासिल की है और उसकी सहयोगी भाजपा ने चार सीटों पर जीत दर्ज की है। राजग के अन्य घटक दल - अन्नाद्रमुक और एलजेके ने एक-एक सीट जीती है। 30 सदस्यीय विधानसभा में गठबंधन के पास 18 सीटें हैं। चार मई को घोषित चुनाव परिणाम में विपक्षी द्रमुक ने पांच सीटें और कांग्रेस ने एक सीट जीती है। नवगठित पार्टी टीवीके ने दो सीटें जीती हैं। सूत्रों के अनुसार, रंगासामी नयी सरकार के गठन के लिए शुभ मुहुर्त पर विचार कर रहे हैं।
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तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नीत यूडीएफ की जीत के बाद राज्य के अगले मुख्यमंत्री के चयन पर विचार जानने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के पर्यवेक्षकों मुकुल वासनिक और अजय माकन ने बृहस्पतिवार को पार्टी विधायकों और गठबंधन सहयोगियों के साथ बैठक की, जिसके बाद फैसला अब आलाकमान करेगा। पार्टी सूत्रों ने यहां बताया कि कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) ने एक प्रस्ताव पारित कर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को मुख्यमंत्री के चयन का अधिकार दे दिया। प्रस्ताव पारित होने के बाद, एआईसीसी पर्यवेक्षकों ने केपीसीसी मुख्यालय में विधायकों के साथ व्यक्तिगत बैठकें कीं ताकि नेतृत्व के मुद्दे पर उनके विचार जाने जा सकें। पार्टी की प्रदेश प्रभारी दीपा दासमुंशी, राज्य के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और नवनिर्वाचित विधायक बंद कमरे में हुई इस बैठक में शामिल हुए। बाद में, पर्यवेक्षकों ने कांग्रेस नीत गठबंधन के घटक दलों के नेताओं से मुलाकात कर अगले मुख्यमंत्री के बारे में उनके विचार जाने। फिलहाल, मुख्यमंत्री पद के लिए वी डी सतीशन, रमेश चेन्निथला और एआईसीसी महासचिव के सी वेणुगोपाल प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। वासनिक ने सीएलपी की बैठक के बाद पत्रकारों से कहा कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत ''उल्लेखनीय'' और ''ऐतिहासिक'' है, इसलिए उत्सव का माहौल था। उन्होंने कहा, ''यह अत्यंत खुशी की बात है और इसी माहौल में बैठक हुई।
यह पूछे जाने पर कि एआईसीसी पर्यवेक्षकों के लिए केरल के अगले मुख्यमंत्री का चयन करना कठिन है या आसान, वासनिक ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा, '' बैठक बहुत अच्छी रही। कांग्रेस विधायकों ने सबसे पहले सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित करने का निर्णय लिया, जिसे केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ ने पेश किया और मौजूदा सीएलपी नेता वी डी सतीशन ने इसका समर्थन किया। इस प्रस्ताव में कांग्रेस अध्यक्ष को अगले सीएलपी नेता का चयन करने का अधिकार दिया गया है।'' वहीं, माकन ने कहा, ''देखते हैं कि आगे क्या होता है।
उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व सभी विधायकों के साथ व्यक्तिगत रूप से चर्चा चाहता था। माकन ने कहा, ''हमने सभी विधायकों से बातचीत की। आज शाम हम दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं। हम अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। हमें उम्मीद है कि जल्द ही कोई निर्णय लिया जाएगा। सभी ने फैसला नेतृत्व पर छोड़ दिया है।'' बैठक के बाद, केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ ने पत्रकारों को बताया कि प्रस्ताव की जानकारी एआईसीसी को दे दी गई है। उन्होंने कहा, ''पर्यवेक्षक नयी दिल्ली लौटकर आलाकमान को जानकारी देंगे, जिसके बाद उचित निर्णय लिया जाएगा।'' नयी दिल्ली रवाना होने से पहले, पर्यवेक्षकों ने यूडीएफ के अन्य घटक दलों, जिनमें आईयूएमएल और केईसी शामिल हैं, के नेताओं से भी मुलाकात की। बैठक के बाद इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के नेता पी के कुन्हालीकुट्टी ने यहां पत्रकारों को बताया कि इस मुद्दे पर पार्टी का रुख कांग्रेस नेताओं को बता दिया गया है। मलप्पुरम विधानसभा सीट से भारी अंतर से जीत हासिल करने वाले कुन्हालीकुट्टी ने कहा, ''उन्होंने धैर्यपूर्वक हमारी बात सुनी और कहा कि वे इसकी सूचना दिल्ली में अपने आलाकमान को देंगे। हम दिल्ली से अगली सूचना का इंतजार करेंगे और जब वह आएगी, तो हम अपनी पार्टी में इस पर चर्चा करेंगे और निर्णय लेंगे।'' आईयूएमएल के अलावा, केरल कांग्रेस (केईसी), केरल कांग्रेस (जैकब) और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के नेताओं ने भी पर्यवेक्षकों से मुलाकात की। यूडीएफ ने 9 अप्रैल को हुए राज्य विधानसभा चुनाव में 140 सीट में से 102 सीट हासिल कीं। गठबंधन की प्रमुख पार्टी कांग्रेस ने 63 सीट पर जीत दर्ज की है। -
नई दिल्ली। ‘ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की वर्षगांठ पर भारतीय सशस्त्र बलों के शौर्य को याद किया है। उन्होंने कहा कि सेना के साहस और समर्पण ने देश की सुरक्षा को मजबूत बनाए रखा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ राष्ट्रीय संकल्प और तत्परता का एक सशक्त प्रतीक है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा,”ऑपरेशन सिंदूर’ की वर्षगांठ पर हम अपने सशस्त्र बलों की वीरता को सलाम करते हैं, जिनका साहस और समर्पण राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करता आ रहा है। इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेनाओं ने अद्वितीय सटीकता, बेहतरीन समन्वय और तीनों सेनाओं के बीच गहरी तालमेल का प्रदर्शन किया, जिसने आधुनिक सैन्य अभियानों के लिए एक नया मानक स्थापित किया।”उन्होंने आगे लिखा, “ऑपरेशन सिंदूर’ राष्ट्रीय संकल्प और तत्परता का एक सशक्त प्रतीक है। यह दर्शाता है कि जब भी देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण घड़ी आती है, तो हमारे सशस्त्र बल निर्णायक कार्रवाई करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।” रक्षा मंत्री ने कहा कि यह अभियान भारत के ‘आत्मनिर्भरता’ की दिशा में लगातार बढ़ते कदमों का भी प्रमाण है, जिसके माध्यम से हम अपनी क्षमताओं को बढ़ाते हुए अपनी सहनशक्ति और दृढ़ता को भी सुदृढ़ कर रहे हैं।इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक वीडियो भी शेयर किया है। इस वीडियो में रक्षा मंत्री की वह कड़ी चेतावनी भी शामिल है, जिसमें उन्होंने कहा था, “भारत आतंकवाद के खिलाफ जब भी कोई कार्रवाई करेगा, तो आतंकवादियों और उनके आकाओं के लिए सरहद पार की जमीन भी सुरक्षित नहीं रहेगी।”वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘एक्स’ पर लिखा, “145 करोड़ भारतवासियों की एकजुटता, अदम्य इच्छाशक्ति, सशस्त्र सेनाओं के असाधारण पराक्रम और भारत की स्पष्ट नीति की गौरवशाली अभिव्यक्ति ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक वर्ष पूर्ण होने पर देशवासियों को हार्दिक बधाई और भारतीय सेना के रणबांकुरों का हृदयतल से अभिनंदन।”सीएम पोस्ट में पोस्ट किया, ‘यह ऑपरेशन ‘नए भारत’ के आत्मविश्वास, साहस और निर्णायक नेतृत्व का सशक्त प्रतीक है। इसने विश्व को स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत अपनी सुरक्षा, संप्रभुता और सम्मान से कोई समझौता नहीं करता है। हमारे वीर जवानों का शौर्य, त्याग और तप ही भारत की अजेय शक्ति है। राष्ट्र सदैव उनका ऋणी रहेगा। यह विजय गाथा केवल इतिहास नहीं, भविष्य की प्रेरणा है।” -
नई दिल्ली। भारत पहली बार विश्व योगासन चैंपियनशिप की मेजबानी करने जा रहा है। यह प्रतियोगिता 4 जून से 8 जून तक अहमदाबाद के ट्रांसस्टेडिया में आयोजित होगी, जिसमें 40 से अधिक देशों के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। विश्व योगासन के तत्वावधान में आयोजित इस चैंपियनशिप की मेजबानी योगासन भारत करेगा। प्रतियोगिता में दुनिया भर के शीर्ष योगासन खिलाड़ी भाग लेंगे।
भारतीय राष्ट्रीय योगासन टीम के चयन के लिए आधिकारिक ट्रायल 1 और 2 मई को हरियाणा के सोनीपत स्थित Sports Authority of India (SAI) सेंटर में आयोजित किए गए।इन ट्रायल्स में खिलाड़ियों ने पारंपरिक, कलात्मक, रिदमिक और एथलेटिक योगासन जैसी विभिन्न श्रेणियों में हिस्सा लिया। चयनित खिलाड़ी अब 10 मई से 2 जून तक अहमदाबाद के नरनपुरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स (SAI NCOE) में आयोजित राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में भाग लेंगे।योगासन भारत के अध्यक्ष उदित शेठ ने कहा कि पहली विश्व योगासन स्पोर्ट्स चैंपियनशिप की मेजबानी करना इस खेल के लिए ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का लक्ष्य योगासन को युवाओं के बीच वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाना है, ताकि भविष्य में इसे ओलंपिक खेलों में भी शामिल किया जा सके। उन्होंने कहा कि भारत ने योगासन के लिए एक मजबूत प्रतिस्पर्धी ढांचा तैयार किया है और अब यह खेल वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार है।विश्व योगासन और योगासन भारत के महासचिव जयदीप आर्य ने कहा कि सोनीपत में हुए राष्ट्रीय ट्रायल्स में खिलाड़ियों की प्रतिभा और भागीदारी ने देश में योगासन के तेजी से बढ़ते प्रभाव को दिखाया है। उनके अनुसार यह चैंपियनशिप खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करेगी और खेल को वैश्विक पहचान दिलाने में मदद करेगी।विश्व स्तर पर विश्व योगासन द्वारा मान्यता प्राप्त यह खेल योग की परंपरा और प्रतिस्पर्धात्मक खेल भावना का अनूठा संगम है। इसमें खिलाड़ियों का प्रदर्शन सटीकता, संतुलन, लचीलापन, नियंत्रण, स्थिरता और कठिनाई स्तर के आधार पर तय मानकों के अनुसार आंका जाता है। अहमदाबाद में होने वाली यह चैंपियनशिप भारत की योग परंपरा और खेल उत्कृष्टता का बड़ा उत्सव मानी जा रही है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ पर वीर सैनिकों के अद्भुत पराक्रम और देशभक्ति को सलाम किया है। उन्होंने कहा कि एक साल बाद भी आतंकवाद को हराने और उसे पनपने में मदद करने वाले पूरे तंत्र को नेस्तनाबूद करने के अपने संकल्प पर हम पहले की तरह ही अडिग हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “एक साल पहले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान हमारी सेनाओं ने अद्वितीय साहस, सटीकता और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया था। उन्होंने पहलगाम में निर्दोष भारतीयों पर हमला करने का दुस्साहस करने वालों को करारा जवाब दिया। पूरा राष्ट्र हमारे वीर जवानों के शौर्य को सलाम करता है।”उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ प्रतिक्रिया और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के प्रति उसके अटूट संकल्प को दर्शाया। इसने हमारी सेनाओं की पेशेवर क्षमता, तत्परता और समन्वित शक्ति को भी उजागर किया। साथ ही, इसने हमारी सेनाओं के बीच बढ़ते आपसी तालमेल को भी प्रदर्शित किया और यह भी रेखांकित किया कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की भारत की मुहिम ने हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को कितनी मजबूती प्रदान की है।अपने ‘एक्स’ पोस्ट में पीएम मोदी ने आगे लिखा…अपने ‘एक्स’ पोस्ट में पीएम मोदी ने आगे लिखा, “आज, एक साल बाद भी, आतंकवाद को हराने और उसे पनपने में मदद करने वाले पूरे तंत्र को नेस्तनाबूद करने के अपने संकल्प पर हम पहले की तरह ही अडिग हैं।”प्रधानमंत्री मोदी ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “ऑपरेशन सिंदूर में भारत को मिली असाधारण विजय हमारे वीर सैनिकों के अद्भुत पराक्रम और देशभक्ति की प्रेरक मिसाल है। उनके अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प और कर्तव्यनिष्ठा पर हर देशवासी को गर्व है।”पीएम मोदी ने ‘संस्कृत सुभाषितम्’ भी किया शेयरइस अवसर पर पीएम मोदी ने ‘संस्कृत सुभाषितम्’ भी शेयर किया। उन्होंने लिखा, “उदीर्णमनसो योधा वाहनानि च भारत। यस्यां भवन्ति सेनायां ध्रुवं तस्यां जयं वदेत्।।”‘संस्कृत सुभाषितम्’ में कहा गया है, “जिस सेना में योद्धा उत्साही और उच्च मनोबल वाले हों तथा जिनके पास युद्ध के उत्तम साधन हों, निश्चय ही विजय उन्हीं की होती है।”ज्ञात हो कि भारतीय सेना ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब अद्भुत सैन्य कार्रवाई के जरिए दिया था। पहलगाम हमला 22 अप्रैल 2025 को हुआ था, जिसमें 26 नागरिक मारे गए। इसके बाद भारतीय सेना ने 6 और 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान के अंदर छिपे कई आतंकवादियों को मार गिराया गया था। -
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने बताया कि ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत के चलते अब तक 11 भारतीय जहाज होर्मुज की खाड़ी से निकल चुके हैं। नई दिल्ली में गुरुवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एमईए के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत में आगे प्रगति हो रही है और मंत्रालय लगातार ईरानी अधिकारियों के संपर्क में है।
उन्होंने कहा, “हमें प्रगति दिख रही है और इसी प्रगति, कूटनीतिक बातचीत और ईरान के साथ संवाद के चलते अब तक 11 भारतीय जहाज होर्मुज की खाड़ी से बाहर निकल चुके हैं। अभी 13 जहाज फारस की खाड़ी में मौजूद हैं। हम ईरानी अधिकारियों के संपर्क में हैं, ताकि बाकी जहाज भी सुरक्षित रूप से होर्मुज की खाड़ी पार करके भारत आ सकें, जो उनका अंतिम गंतव्य है।”खबरों के मुताबिक, होर्मुज की खाड़ी अब फिर से खुलने की ओर बढ़ रही है। बुधवार को अमेरिका और ईरान की ओर से ऐसे संकेत मिले कि इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर लगी रोक हटाई जा सकती है।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार की शाम को कहा था कि वह कुछ समय के लिए रोक हटाकर देखना चाहते हैं कि ईरान के साथ कोई समझौता हो सकता है या नहीं। इसके बाद ईरान के सैन्य संगठन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बुधवार को कहा कि वह अब जहाजों को इस रास्ते से गुजरने देगा।उसने दावा किया कि अमेरिका की धमकियों को ‘बेअसर’ कर दिया गया है।वहीं ट्रंप ने बुधवार की सुबह चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने इस समुद्री रास्ते पर रोक नहीं हटाई तो वह फिर से और भी ज्यादा ताकत के साथ बमबारी शुरू कर सकते हैं। ईरान ने यह रास्ता उस समय बंद कर दिया था जब 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने उसके खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था। यह वही रास्ता है जिससे दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है। इसके बाद अमेरिका ने 13 अप्रैल को ईरानी बंदरगाहों पर अपनी ओर से भी रोक लगा दी थी, जब दोनों देशों के बीच बातचीत अचानक टूट गई थी। -
नई दिल्ली। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक वर्ष पूरे होने पर आज गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सशस्त्र बलों के अद्वितीय शौर्य को नमन किया और कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत का एक ऐतिहासिक मिशन है, जो हमारे दुश्मनों को हमेशा हमारे सशस्त्र बलों की अचूक प्रहार क्षमता की याद दिलाता रहेगा।
सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में अमित शाह ने कहा ऑपरेशन सिंदूर भारत का एक युगांतरकारी मिशन है, जो हमारे दुश्मनों को हमारी सशस्त्र सेनाओं की अचूक प्रहार क्षमता की याद हमेशा दिलाता रहेगा। इतिहास इसे एक ऐसे दिन के तौर पर याद रखेगा जब हमारे सशस्त्र बलों की सटीक मारक क्षमता, हमारी एजेंसियों की पैनी खुफिया जानकारी और दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति—ये तीनों एक होकर सीमा पार मौजूद आतंकवाद के हर उस ठिकाने को नेस्तनाबूद करने के लिए उठ खड़े हुए, जिसने पहलगाम में हमारे नागरिकों पर अपना बुरा साया डालने की हिमाकत की थी।उन्होंने कहा, “यह दिन हमारे दुश्मनों के लिए यह खौफनाक संदेश लेकर आता रहेगा कि वे कहीं भी छिप जाएं, वे बच नहीं सकते। वे हर पल हमारी नज़रों में और हमारी मारक क्षमता के प्रचंड कोप की जद में हैं। इस अवसर पर, मैं हमारी सेनाओं के अद्वितीय शौर्य को नमन करता हूँ।”ज्ञात हो, पहलगाम आतंकी हमले के बाद 7 मई, 2025 को शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर ने एक संतुलित, तीनों सेनाओं की प्रतिक्रिया को प्रदर्शित किया, जिसमें सटीकता, व्यावसायिकता और उद्देश्य का समावेश था। ऑपरेशन सिंदूर की परिकल्पना नियंत्रण रेखा के पार और पाकिस्तान के अंदर तक आतंकी ढांचे को नष्ट करने के लिए एक दंडात्मक कदमों और लक्षित अभियान के रूप में की गई थी।





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