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नई दिल्ली। उत्तराखंड के बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों में जल्द ही गैर-हिंदुओं को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीएस) के अनुसार, सदियों पुराने मंदिरों में सिर्फ हिंदुओं की एंट्री होगी। यह प्रस्तावित पाबंदी समिति द्वारा चलाए जा रहे सभी मंदिरों पर लागू होगी, जिसमें बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम भी शामिल हैं।
इस बात की पुष्टि करते हुए बीकेटीएस के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि समिति के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि इस फैसले को लागू करने के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव मंदिर समिति बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा।बद्रीनाथ मंदिर सर्दियों के मौसम में छह महीने बंद रहने के बाद 23 अप्रैल को फिर से खुलेगा। केदारनाथ मंदिर के फिर से खुलने की तारीख महाशिवरात्रि के मौके पर घोषित की जाएगी। चार धाम में केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिरों के अलावा गंगोत्री और यमुनोत्री भी शामिल हैं। इन दोनों तीर्थस्थलों के कपाट 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के त्योहार के साथ फिर से खुलने वाले हैं।यह घोषणा उत्तराखंड में प्रमुख धार्मिक स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने को लेकर चल रही एक बड़ी बहस के बीच आई है।इस महीने की शुरुआत में हरिद्वार के हर की पौड़ी को ‘गैर-हिंदुओं के लिए वर्जित’ घोषित करने वाले पोस्टर विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पर दिखाई दिए, जिससे विवाद खड़ा हो गया। इन पोस्टरों में हर की पौड़ी क्षेत्र को पूरी तरह से ‘हिंदू क्षेत्र’ बताया गया था, जिससे सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक पहुंच को लेकर बहस और तेज हो गई।श्री गंगा सभा द्वारा लगाए गए पोस्टरों पर लिखा था, “गैर-हिंदुओं के लिए प्रवेश वर्जित क्षेत्र”। हालांकि, संगठन ने दावा किया कि इस कदम का मकसद सिर्फ लोगों को जानकारी देना है और इसका कोई गलत इरादा नहीं है।श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने इस घटनाक्रम के बारे में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “हर नागरिक के लिए कानून की बुनियादी जानकारी जरूरी है। हाल ही में सामने आई कुछ घटनाओं के बाद गंगा सभा को लगा कि लोगों को नियमों और विनियमों के बारे में जागरूक करना बहुत जरूरी है। इसी मकसद से हरिद्वार के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता बोर्ड लगाए गए हैं ताकि आम जनता, श्रद्धालु और पर्यटक कानून के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें और संबंधित अधिकारियों से भी जानकारी ले सकें।”नितिन गौतम ने आगे कहा कि हाल के दिनों में दो-तीन घटनाएं हुई हैं, जिनसे पता चलता है कि सही जानकारी की कमी ही विवाद और झगड़े की असली वजह थी।उन्होंने बताया था कि इन बैनरों का मकसद लोगों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जागरूक करना है ताकि कानून-व्यवस्था मजबूत हो और समाज में शांति और सद्भाव बना रहे। -
नई दिल्ली। 77वें गणतंत्र दिवस की भव्य परेड के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्तव्य पथ से जुड़े कई खूबसूरत और गौरवपूर्ण पल साझा किए। उन्होंने कहा कि इस शानदार आयोजन ने भारत की लोकतांत्रिक शक्ति, राष्ट्रीय गर्व और एकता को पूरे विश्व के सामने मजबूती से प्रदर्शित किया। इस साल का गणतंत्र दिवस उत्साह, आत्मविश्वास और नए भारत की झलक से भरा रहा।
भारत ने अपना 77वां गणतंत्र दिवस नई सैन्य ताकत और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं के प्रभावशाली प्रदर्शन के साथ मनाया। परेड में भारतीय सेना की ओर से ‘बैटल एरे’ फॉर्मेट में आधुनिक युद्ध तैयारियों को दिखाया गया, जिसमें युद्ध के समय अपनाई जाने वाली रणनीतियों और ऑपरेशन्स की पूरी झलक देखने को मिली। यह प्रदर्शन न केवल तकनीकी रूप से उन्नत था, बल्कि यह भी दिखाता है कि देश अपनी सुरक्षा को लेकर कितना सतर्क और सक्षम है।कर्तव्य पथ पर आयोजित इस ऐतिहासिक परेड में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और राज्यों की झांकियों ने भी सभी का मन मोह लिया। अलग-अलग राज्यों की झांकियों में भारत की विविध संस्कृति, परंपराएं और लोककलाएं जीवंत रूप में नजर आईं। नृत्य, संगीत और रंग-बिरंगे परिधानों ने यह साबित कर दिया कि विविधता में एकता ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है।प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि भारत ने गणतंत्र दिवस को बड़े जोश और गर्व के साथ मनाया। कर्तव्य पथ पर हुई परेड ने हमारी लोकतांत्रिक मजबूती, समृद्ध विरासत और राष्ट्रीय एकता को खूबसूरती से दर्शाया। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय गौरव का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि इस अवसर पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की मौजूदगी भारत के लिए सम्मान की बात है। उनकी उपस्थिति भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ती साझेदारी और साझा मूल्यों को दर्शाती है। यह दौरा भारत और यूरोप के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने में मदद करेगा।प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन देश की तैयारियों, तकनीकी क्षमता और नागरिकों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हमारी सेनाएं वास्तव में देश का गौरव हैं। उन्होंने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की तारीफ करते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस परेड ने भारत की सांस्कृतिक विविधता को बेहद जीवंत और रंगीन तरीके से सामने रखा। ( -
नई दिल्ली। 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पगड़ी एक बार फिर चर्चा का मुख्य विषय बन गई, जिसने पूरे देश में खूब तारीफें बटोरीं, मीडिया का ध्यान खींचा और सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब चर्चा हुई। दिन की शुरुआत में नेशनल वॉर मेमोरियल में शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देते समय पीएम मोदी ने गहरे मैरून रंग की राजस्थानी स्टाइल की पगड़ी पहनी थी, जिसने लोगों और मीडिया का ध्यान खींचा।
पगड़ी में बारीक सुनहरे जरी के डिजाइन, चमकीले पीले रंग के शेड्स और क्लासिक बांधनी (टाई-डाई) पैटर्न के हल्के एलिमेंट्स थे, जो अक्सर राजस्थान की समृद्ध टेक्सटाइल विरासत और पारंपरिक कारीगरी से जुड़े होते हैं।गहरा मैरून रंग, जो बहादुरी, बलिदान और वीरता का प्रतीक है, उस मौके के गंभीर और देशभक्ति वाले माहौल के साथ पूरी तरह मेल खा रहा था, जबकि सुनहरे मोर पंख के डिजाइन और सरसों-पीले रंग की हाइलाइट्स ने शाही अंदाज और सांस्कृतिक गहराई का एहसास कराया। हल्के नीले बंद गला कोट, नेवी ब्लू कुर्ते और सफेद ट्राउजर के साथ, यह पगड़ी परंपरा, प्रतीकवाद और समकालीन स्टाइल का एक अनोखा मिश्रण लग रही थी।कई लोगों ने इसे राजस्थान की योद्धा विरासत और भारत की सेना को सम्मान देने के तौर पर देखा। कुछ रिपोर्ट्स में ऐतिहासिक वीरता, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय गौरव को श्रद्धांजलि देने की बात कही गई, जो इस साल के गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य विषय थे। यह पगड़ी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो गई। यूजर्स ने इसकी कारीगरी, रंग संयोजन और सुंदरता की तारीफ की। कई पोस्ट में पगड़ी को भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं के प्रतिबिंब के रूप में दिखाया गया।न्यूज आउटलेट्स ने भी इसे दिन के कार्यक्रमों के सबसे खास एलिमेंट्स में से एक बताया। हेडलाइंस में बताया गया कि कैसे गहरे मैरून, सुनहरे डिजाइन वाली पगड़ी ने समारोह के दौरान सबका ध्यान खींच लिया।पीएम मोदी के पिछले गणतंत्र दिवस के लुक्स- चमकीले लाल बांधनी स्टाइल से लेकर कई रंगों की पगड़ियों तक- से तुलना ने राष्ट्रीय अवसरों पर भारतीय क्षेत्रीय कारीगरी को शामिल करने की उनकी पुरानी परंपरा को दिखाया।फैशन विश्लेषक ने क्लासिक राजस्थानी स्टाइल में पगड़ी के बेदाग तरीके से बांधने पर ध्यान दिया, कर्तव्य पथ पर सैन्य परेड की भव्यता के बीच सांस्कृतिक गौरव को दिखाने में इसकी भूमिका पर जोर दिया।जैसे ही तस्वीरें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बड़े पैमाने पर फैलीं, पगड़ी इस बात का प्रतीक बन गई कि कैसे व्यक्तिगत स्टाइल राष्ट्रीय विरासत, एकता और सामूहिक पहचान का सम्मान कर सकता है। -
नई दिल्ली। देश 26 जनवरी को 77वां गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाने जा रहा है। इस मौके पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर शानदार परेड होगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु गणतंत्र दिवस समारोह का नेतृत्व करेंगी और इस बार यूरोपीय यूनियन के दो बड़े नेता एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डर लेयेन मुख्य अतिथि होंगे।
इस साल का गणतंत्र दिवस समारोह इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल, देश की तरक्की, स्वदेशी सैन्य उपकरण, सेना की ताकत, भारत की संस्कृति और आम लोगों की भागीदारी सब कुछ एक साथ देखने को मिलेगा। गणतंत्र दिवस कार्यक्रम की शुरुआत 26 जनवरी सुबह 10.30 बजे से होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे। उसके बाद वे कर्तव्य पथ पर परेड देखेंगे। राष्ट्रपति और विदेशी मेहमान पारंपरिक बग्घी में आएंगे। फिर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा और 21 तोपों की सलामी के साथ राष्ट्रगान होगा।समारोह की शुरुआत 100 कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुति से होगी, जिसमें अलग-अलग राज्यों की झलक दिखेगी। वहीं, आसमान से चार एमआई-17 हेलीकॉप्टर फूल बरसाएंगे। इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने वाली झांकियों की व्यापक थीम ‘स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम्’ तथा ‘समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत’ है। इस बार परेड में भारतीय सेना का युद्ध वाला रूप खास तौर पर दिखाया जाएगा। टैंक, बख्तरबंद गाड़ियां, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन, और रोबोटिक डॉग्स यह सब कुछ परेड में नजर आएगा। इसके अलावा टी-90 भीष्म और अर्जुन टैंक, ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, ध्रुव और प्रचंड हेलीकॉप्टर, और स्पेशल फोर्सेज की मौजूदगी भी लोगों को रोमांचित करेगी।वहीं, एक खास झांकी में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ दिखाया जाएगा, जिसमें बताया जाएगा कि कैसे सेना, नौसेना और वायुसेना मिलकर दुश्मन को जवाब देती हैं। इस बार सेना परेड में ‘बैटल ऐरे’ यानी रणभूमि व्यूह रचना प्रदर्शित करेगी। इसका अर्थ है कि जंग के वक्त सेना कैसे आगे बढ़ती है, कैसे हमला करती है और कैसे दुश्मन को जवाब देती है, सब कुछ एक ही जगह देखने को मिलेगा। यहां ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की झलक दिखाई देगी। यह पूरा प्रदर्शन ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की सफलता को भी एक सलाम होगा।भारतीय नौसेना की झांकी में पुराने जहाजों से लेकर आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत तक की कहानी दिखाई जाएगी। वायुसेना के लड़ाकू विमान आसमान में शानदार फ्लाई-पास्ट करेंगे। तटरक्षक बल की महिला टुकड़ी भी परेड का हिस्सा होगी। देश के 17 विभिन्न राज्यों और 13 मंत्रालयों की कुल 30 झांकियां होंगी। इनमें कहीं संस्कृति दिखेगी, कहीं आत्मनिर्भर भारत, कहीं खेती, कहीं तकनीक, और कहीं आजादी की कहानी दर्शायी जाएगी। अनेक झांकियों के माध्यम से राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया जाएगा।साथ ही आत्मनिर्भरता के आधार पर देश की प्रगति, सांस्कृतिक विविधता, विरासत, नवाचार और विकास यात्रा को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। गणतंत्र दिवस समारोह में इस साल करीब 10,000 खास मेहमान बुलाए गए हैं। ये मेहमान किसान, वैज्ञानिक, स्टार्ट-अप करने वाले युवा, खिलाड़ी, महिला समूह, आदिवासी प्रतिनिधि और समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग हैं। समारोह के अंत में राष्ट्रगान होगा, आसमान में गुब्बारे छोड़े जाएंगे और ‘वंदे मातरम्’ का संदेश पूरे कर्तव्य पथ पर गूंजेगा। - नरसिंहपुर । मध्य प्रदेश की जीवन रेखा कही जाने वाली मां नर्मदा की रविवार को जयंती पर अद्भुत नजारा देखने को मिला। नरसिंहपुर जिले से होकर बहती यह नदी न सिर्फ इलाके की उर्वरा भूमि को समृद्ध बनाती है, बल्कि पूरे प्रदेश की सुंदरता और जीवन धारा भी इसी से जुड़ी हुई है। अवतरण दिवस के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पदयात्राओं और शोभायात्राओं के साथ नर्मदा की ओर उमड़ पड़े।नरसिंहपुर के सतधारा समेत सभी घाटों पर भक्तों का सैलाब देखने को मिला। इस मौके पर गणतंत्र दिवस की झलक भी देखने को मिली, जहां स्कूली छात्र-छात्राएं तिरंगे की चूनर मां नर्मदा को अर्पित कर रहे थे। मां नर्मदा का यह पर्व केवल आस्था का ही नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भी संदेश देता है। उनके जल से ही प्रदेश के लोगों की प्यास बुझती है और जमीन उर्वरा बनती है। इसलिए उनकी निर्मलता और पवित्रता बनाए रखना हर भक्त के लिए जरूरी है। आज के दिन भक्त केवल पूजा ही नहीं करते, बल्कि यह संकल्प भी लेते हैं कि वे मां नर्मदा के जल और घाटों को साफ और स्वच्छ रखेंगे।इस अवसर पर सैकड़ों किलोमीटर दूर से भी श्रद्धालु पैदल चलकर घाटों पर पहुंचे। सिवनी जिले की लखनादौन तहसील के आदेगांव से आए गोलू कुशवाहा ने बताया कि वह 2017 से हर साल पैदल नर्मदा जयंती में शामिल हो रहे हैं। उनका कहना है कि मां नर्मदा की कृपा इतनी बड़ी है कि मांगने से पहले ही मां अपने भक्तों के भंडार भर देती हैं। इस साल घाटों पर इतनी बड़ी भीड़ थी कि गांवों के रास्ते खाली हो गए।गोलू ने आशीर्वाद की कामना करते हुए कहा कि मां नर्मदा की कृपा हमेशा सबके ऊपर बनी रहे और वे भविष्य में भी इसी भक्ति के साथ आते रहेंगे। कार्यक्रम में स्वच्छता का संदेश भी दिया गया। स्वच्छता अभियान की मेंटर शिवानी विश्वकर्मा ने बताया कि घाटों पर आने वाले लोग अक्सर पाउच, पानी की बोतल या पॉलिथीन छोड़ जाते हैं। जन-जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को बताया जा रहा है कि श्रद्धा के साथ स्वच्छता भी जरूरी है।उन्होंने कहा कि अगर हम मां के जल और घाटों में कचरा डालते हैं, तो वह आस्था और श्रद्धा के विपरीत है। श्रद्धा अच्छी है, लेकिन स्वच्छता उससे भी ज्यादा जरूरी है।स्वच्छता अभियान के अन्य मेंटर, भगवान उपाध्याय ने कहा, “त्वदीय पाद पंकजम, नमामि देवी नर्मदा।” उनका कहना था कि नर्मदा जयंती पर नारियल फोड़ना या स्नान करना केवल दिखावे का पुण्य नहीं है। असली पुण्य तब मिलता है, जब हम मां के आंचल को पवित्र बनाए रखें और वहां गंदगी न फैलाएं।उन्होंने लोगों से कहा कि हर व्यक्ति आज संकल्प ले कि घाट पर आने के बाद भी कचरा अपने साथ ले जाएगा और कोई भी पॉलीथिन या गंदगी न छोड़ेंगे। ऐसा करने से न केवल घाट और नदी का वातावरण स्वच्छ रहेगा, बल्कि हमारी आस्था भी और मजबूत होगी।
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नई दिल्ली। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने 77 वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सशस्त्र बल कर्मियों को 98 प्रशस्ति पत्र स्वीकृत किए हैं। जिनमें पांच मरणोपरांत प्रशस्ति पत्र शामिल हैं। इनमें से 81 भारतीय सैन्य कर्मियों को दिए गए हैं - 17 ऑपरेशन रक्षक के लिए, 11 ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के लिए, 11 ऑपरेशन हिफाज़त के लिए, पांच ऑपरेशन ऑर्किड के लिए, दो ऑपरेशन मेघदूत के लिए, एक ऑपरेशन राइनो के लिए, दो ऑपरेशन सिंदूर के लिए, तीन बचाव अभियान के लिए, चार ऑपरेशन कैजुअल्टी इवैक्यूएशन के लिए, एक ऑपरेशन सोफैन के लिए, 24 विभिन्न अभियानों के लिए, जिनमें तीन मरणोपरांत प्रशस्ति पत्र शामिल हैं, 15 भारतीय नौसेना कर्मियों के लिए; और दो सीमा सड़क विकास बोर्ड के कर्मियों के लिए (मरणोपरांत प्रशस्ति पत्र)। प्रशस्ति पत्र प्राप्तकर्ताओं की पूरी सूची इस प्रकार है:
भारतीय सेनाऑपरेशन रक्षकIC-72845P लेफ्टिनेंट कर्नल गुरइकबाल सिंह, तोपखाना रेजिमेंट, 662 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (आर एंड ओ)IC-75641N लेफ्टिनेंट कर्नल आदित्य जसरोटिया, 666 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (आर एंड ओ)IC-76028N लेफ्टिनेंट कर्नल अभिजीत सिंह, 662 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (आर एंड ओ)JC-432776P सूबेदार रंजीत सिंह, पंजाब रेजिमेंट, 53 राष्ट्रीय राइफल्सजेसी-492296पी सूबेदार प्रवीण कुमार, 7 जाटजेसी-595709एन सूबेदार मोहम्मद यूनिस, जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैंट्री, 20 राष्ट्रीय राइफल्सJC-523993Y नायब सूबेदार राकेश कुमार, 18 डोगराJC-596382M नायब सूबेदार बशारत हुसैन, 6 जम्मू कश्मीर लाइट इन्फैंट्री3205810Y हवलदार जितेंद्र, 7 जाट4487338L हवलदार दर्शन सिंह, 4 पैरा (विशेष बल)20006014L लांस नायक सूरज सिंह, पैराशूट रेजिमेंट, विशेष समूह7787355एम लांस नायक यतीश एच, 4 पैरा (विशेष बल)14950345K सिपाही मुकेश कुमार, मशीनीकृत पैदल सेना, 42 राष्ट्रीय राइफल्स3021054X सिपाही विकास सिंह, 6 राजपूत6502060F सिपाही नीतीश कुमार, 898 पशु परिवहन बटालियन, सेना सेवा कोर16130019एल सैपर श्याम सेतुमाधवन, कोर ऑफ इंजीनियर्स, 44 राष्ट्रीय राइफल्सए1600052के अग्निवीर अनमोल चौधरी, 18 डोगराऑपरेशन स्नो लेपर्डIC-74706K लेफ्टिनेंट कर्नल गगनदीप सिंह, 16 पंजाबजेसी-414773वाई सूबेदार सुरेश कुमार डांगी, 7 पैरा (विशेष बल)जेसी-472530वाई सूबेदार पूना राम, 14 राजपुताना राइफल्सJC-415197M नायब सूबेदार विजय कुमार, 9 पैरा (विशेष बल)16021168H Havildar Harlal Kaler, 14 Rajputana Rifles9427929X नायक बुद्धि राज राय, 11 वीं गोरखा राइफल्स, 1 सिक्किम स्काउट्स9427963X नायक झानु प्रसाद छेत्री, 11 वीं गोरखा राइफल्स, 1 सिक्किम स्काउट्स9428019W नायक पुकार कट्टल, 11th गोरखा राइफलस, 1 सिक्किम स्काउट्स4383276K लांस नायक लोबजंग वांगचू नामसा, 9 पैरा (विशेष बल)2626473A सिपाही लक्ष्मीकांत गोदी, मद्रास रेजिमेंट, 38 राष्ट्रीय राइफल्स16125221P सैपर बिलिंग मोहना राव, 11 इंजीनियर रेजिमेंटऑपरेशन हिफाज़तIC-77663L लेफ्टिनेंट कर्नल नितिन शर्मा, सेना वायु रक्षा, 5 असम राइफल्सIC-82093K मेजर भावेश पुरी, तोपखाना रेजिमेंट, 8 असम राइफल्सआईसी-84418एल मेजर मृदुल त्रिपाठी, तोपखाना रेजिमेंट, 3 असम राइफल्सIC-85171F मेजर आदित्य जैन, द्वितीय महारएसएस-48583एल मेजर अनुपम वशिष्ठ, सेना वायु रक्षा, 21 असम राइफल्सएमएस-22035डब्ल्यू कैप्टन अभिषेक धाकड़, आर्मी मेडिकल कोर, 1 असम राइफल्सएआर-496ए सहायक कमांडेंट रमेश चंद, 37 असम राइफल्सJC-562404N सूबेदार जितेंद्र सिंह, 8 बिहार5852956एफ हवलदार सुभाष पौडेल, 5/9 गोरखा राइफल्सजी/0111068डब्ल्यू हवलदार सोम दत्त तिवारी, 1 असम राइफल्सजी/5003287एच राइफलमैन लालमहारुइया, 3 असम राइफल्सऑपरेशन आर्किडIC-76617K लेफ्टिनेंट कर्नल विशाल कुमार यादव, 11 पैरा (विशेष बल)IC-82626F मेजर देवेश कुमार तुशीर, 11 पैरा (विशेष बल)13630582X नायक सुमित सिन्हा, 21 पैरा (विशेष बल)16128372वाई लांस नायक सुनीला ईश्वर मारनुरा, 21 पैरा (विशेष बल)4103678एम पैराट्रूपर मनदीप सिंह, 21 पैरा (विशेष बल)ऑपरेशन मेघदूतएसएस-50393एक्स कप्तान आदित्य श्रीनिवास प्रसाद, 20 मद्रास4373812एन नाइक लुनमिनलेन चोंगलोई, 10 असमऑपरेशन राइनो15213868P हवलदार नेत्र पाल, 1831 मीडियम रेजिमेंटऑपरेशन सिंदूरआईसी-66870एक्स कर्नल अमित कुमार यादव, 615 खुफिया एवं फील्ड सुरक्षा इकाईआईसी-69553एफ कर्नल विनय कुमार पांडे, 357 खुफिया एवं फील्ड सुरक्षा इकाईबचाव अभियानIC-77598W लेफ्टिनेंट कर्नल प्रभप्रीत सिंह मारवाहा, 670 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन। (आर एंड ओ)IC-82235W मेजर अर्जुन नायर, 205 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (UH)16134143के सैपर बुद्धे लोकेश, 201 इंजीनियर रेजिमेंटहताहत निकासी अभियानIC-70425W लेफ्टिनेंट कर्नल बापनपल्ली श्रीनिवास, 669 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (आर एंड ओ)IC-71382Y लेफ्टिनेंट कर्नल वरुण पाराशर, 669 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (आर एंड ओ)IC-72084P लेफ्टिनेंट कर्नल अमन दीप शर्मा, 671 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (आर एंड ओ)एसएस-50607एच कैप्टन नीरज चौधरी, 661 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (आर एंड ओ)ऑपरेशन सोफेन19004504W नायक गुरजंत सिंह, 1 पैरा (विशेष बल)अन्य अभियानआईसी-79075डब्ल्यू मेजर नागेंद्र सिंह, इंजीनियर कोर, 93 आरसीसी (जीआरईएफ)एमएस-21757डब्ल्यू कैप्टन देवम त्रिवेदी, सेना चिकित्सा कोर, 55 इंजीनियर रेजिमेंट00065904N कंपनी लीडर त्सेरिंग न्येधोन, मुख्यालय विशेष सीमा बलIC-67565X कर्नल शौर्य सिंह, 662 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (आर एंड ओ)IC-68548K कर्नल शिंदे संजोग ए, 670 आर्मी एवीएन स्क्वाड्रन (आर एंड ओ)IC-62499W लेफ्टिनेंट कर्नल राजेश मलकाय, जैक एलआई, मुख्यालय 112 माउंटेन ब्रिगेडIC-71442H लेफ्टिनेंट कर्नल अनुराग, 659 आर्मी एवीएन स्क्वाड्रन (आर एंड ओ)IC-72080Y लेफ्टिनेंट कर्नल आशीष झा, 21 पैरा (एसएफ)आईसी-72290वाई लेफ्टिनेंट कर्नल राकेश सिंह, 6 राजपूतIC-77063H लेफ्टिनेंट कर्नल आदर्श टी, 14 राज राइफलIC-81420X मेजर सिमरनजीत सिंह रैना, 2 MAHARIC-83377A मेजर गुरजंत सिंह, ग्रेनेडियर्स, मुख्यालय एसएफएफआईसी-83583के मेजर दीपक फोगाट, इंजीनियर, 37 असम राइफलIC-84372N मेजर गौरव तिवारी, जम्मू कश्मीर राइफल्स, 4 असम राइफल्सआईसी-85191पी मेजर आकाश जोशी, 7 जाटSS-50795P मेजर भारत शंकर गांठी , 14 गढ़वाल राइफल्सIC-86176M कैप्टन परमिंदर सिंह , 20 मद्रास15194504L आर एच एम टीकराम, 136 फील्ड रेजिमेंट15815675एल हवलदार याकूब मसीह, 8 एमटीएन डिवी ऑर्ड यूनिट (मरणोपरांत)2504441H हवलदार संदीप कुमार, 27 पंजाब4378341पी नायक रोहित बस्नेत, 9 पैरा (एसएफ)5459271X नायक नवीन पौडेल, 5/5 जीआर (मरणोपरांत)13632145डब्ल्यू सिपाही बिपुल बोरो, 10 असमए1102443एल अग्निवीर अजीत सिंह राजपूत, 14 राज आरआईएफ (मरणोपरांत)भारतीय नौसेना06043-एच कमांडर रोशन जॉर्ज06365-आर कमांडर ज्ञानेश्वर खानेकर06669-एफ कमांडर अमित तिवारी07966-बी लेफ्टिनेंट कमांडर विकास गांगस08071-टी लेफ्टिनेंट कमांडर जोस बाबू05567-A Captain Sahil Makkar08358-W लेफ्टिनेंट कमांडर संदीप सिंह09527- लेफ्टिनेंट कमांडर उत्कर्ष कटियार222608-बी राजपाल सी पी ओ (जी डब्लू )06030-बी कमांडर राहुल पटनायक246626-आर अंकित कुमार, एलए (एफडी)04763-जेड कप्तान अमिताभ रॉय04914-टी कमोडोर एमसी मौदगिल256297-डब्ल्यू सैंट्राम एलएस (सीडी)506880-ए ज्ञानेंद्र सिंह सिंगर ईआरए -4सीमा सड़क विकास बोर्डपी-2496 सीपी स्किल्ड गणेश सिंह ( मरणोपरांत )पी-2623 सीपी एमएजेड धुन्ना टुडू ( मरणोपरांत ) -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारतीय तटरक्षक बल के उत्कृष्ट कर्मियों को विशिष्ट पुरस्कार प्रदान करने की स्वीकृति दी। पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं के नाम इस प्रकार हैं:
अति विशिष्ट सेवा पदक• एडीजी डॉनी माइकल, पीटीएम, टीएमविशिष्ट सेवा पदकडीआईजी के.एस. सीतारामराष्ट्रपति तटरक्षक पदक (विशिष्ट सेवा)आईजी इक़बाल सिंह चौहान, टीएमआईजी दतविन्दर सिंह सैनी, टीएमउत्तम जीवन रक्षा पदकपी/एनवीके/(एमई) सौम्यरंजन बेहेरातटरक्षक पदक (वीरता) – मरणोपरांतस्व. कमांडेंट राकेश कुमार राणास्व. कमांडेंट (जेजी) विपिन बाबूस्व. पी/एनवीके(आरपी) करण सिंहतटरक्षक पदक (वीरता)कमांडेंट (जेजी) शैलेन्द्र सिंह बिष्टपी/एनवीके(आरपी) गौतम यादवपी/एनवीके(आरपी) बांती कुमारतटरक्षक पदक (उत्कृष्ट सेवा)डीआईजी विनोद कुमार परमारडीआईजी अरुण कुमार भारद्वाजडीआईजी सुधाकर पाटिलकमांडेंट इंदु पीपी/एडीएच(आरओ) तपस कुमार बनर्जी - नयी दिल्ली ।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को कहा कि राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में उत्सव मनाये जा रहे हैं और इसे ''राष्ट्र-वंदना'' का एक स्वर बताया जो हर भारतीय में देशभक्ति की भावना पैदा करता है। मुर्मू ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि इन कार्यक्रमों का आयोजन पिछले साल सात नवंबर से किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ''भारत माता के दैवी स्वरूप की वंदना का यह गीत, जन-मन में राष्ट्र-प्रेम का संचार करता है।'' राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीयता के महाकवि सुब्रमण्य भारती ने तमिल भाषा में 'वन्दे मातरम् येन्बोम्' अर्थात 'हम वन्दे मातरम् बोलें' इस गीत की रचना करके वन्दे मातरम् की भावना को और भी व्यापक स्तर पर जनमानस के साथ जोड़ा। उन्होंने बताया कि समय के साथ-साथ वंदे मातरम् के अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद भी लोकप्रिय हो गए, जिससे इसका संदेश पूरे देश में और अधिक फैल गया। मुर्मू ने दार्शनिक एवं स्वतंत्रता सेनानी श्री अरबिंदो की भूमिका पर भी प्रकाश डाला, जिन्होंने गीत का अंग्रेजी में अनुवाद किया, जिससे इसके सार का व्यापक स्तर पर प्रसार करने में मदद मिली। राष्ट्रपति ने कहा, ''बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् भारत के स्वतंत्रता संग्राम और सांस्कृतिक चेतना में एक अद्वितीय स्थान रखता है और यह हमारी राष्ट्र-वंदना का स्वर है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2026 के पहले ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। यह कार्यक्रम का 130वां एपिसोड था। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने समाज, खेती, सेहत और तकनीक जैसे अहम विषयों पर बात की और लोगों के प्रयासों की खुलकर सराहना की। उन्होंने मिलेट्स यानी श्रीअन्न को लेकर देश में बढ़ते उत्साह को प्रेरणादायक बताया और इसे भारत की सांस्कृतिक और पोषण परंपरा से जोड़ा।
‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”मैं आप सभी की मिलेट्स के लिए सराहना करना चाहता हूं। 2023 को हमने ‘मिलेट वर्ष’ घोषित किया था, लेकिन आज तीन साल बाद भी इसे लेकर देश और दुनिया में जो पैशन है, वो उत्साहित करने वाला है। आज सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में श्रीअन्न के प्रति लगाव लगातार बढ़ रहा है और यह सेहत के साथ-साथ किसानों की आमदनी के लिए भी फायदेमंद साबित हो रहा है।”अपने संबोधन में पीएम मोदी ने तमिलनाडु के कल्ल-कुरिची जिले का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, ”यहां महिला किसानों का एक समूह पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गया है। ‘पेरियापलायम मिलेट’ एफपीसी से करीब 800 महिला किसान जुड़ी हुई हैं। मिलेट की बढ़ती मांग को देखते हुए इन महिलाओं ने मिलेट प्रोसेसिंग यूनिट शुरू की। अब ये महिलाएं मिलेट से बने उत्पादों को खुद तैयार कर सीधे बाजार तक पहुंचा रही हैं। इससे न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ी है, बल्कि वे आत्मनिर्भर भी बनी हैं।”पीएम मोदी ने राजस्थान के रामसर क्षेत्र में हो रहे नवाचारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ”यहां एक कंपनी से 900 से ज्यादा किसान जुड़े हुए हैं, जो बाजरे की खेती करते हैं। ये किसान बाजरे से लड्डू तैयार करते हैं, जिनकी बाजार में काफी मांग है।”प्रधानमंत्री ने बताया, ”कई मंदिर ऐसे भी हैं, जहां प्रसाद के रूप में केवल मिलेट से बने उत्पादों का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। श्रीअन्न परंपरा, सेहत और रोजगार को एक साथ जोड़ रहा है।” प्रधानमंत्री ने कहा, ”मिलेट्स से जहां किसानों की आय बढ़ रही है, वहीं आम लोगों के स्वास्थ्य में भी सुधार देखने को मिल रहा है। सर्दियों के दिनों में हमें श्रीअन्न का सेवन जरूर करना चाहिए।”अपने संबोधन में पीएम मोदी ने आने वाले कार्यक्रमों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि फरवरी महीने में ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ का आयोजन होने जा रहा है, जिसमें दुनिया भर से विशेषज्ञ भारत आएंगे। पीएम मोदी ने इस समिट में शामिल होने वाले सभी लोगों का स्वागत किया और कहा कि अगले ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। आखिर में उन्होंने देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं और एकजुट होकर आगे बढ़ने का संदेश दिया। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 130वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि भजन और कीर्तन हमारी संस्कृति की आत्मा हैं। हम सभी ने बचपन में मंदिरों में भजन सुने हैं, कथाएं सुनी हैं और हर पीढ़ी ने भक्ति को अपने अंदाज में अपनाया है। अब नई पीढ़ी ने इसे और भी खास अंदाज में अपने जीवन और अनुभवों के साथ जोड़ दिया है।
उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी ने भक्ति को एक नई शैली दी है और इसके चलते एक नया चलन सामने आया है जिसे ‘भजन क्लबिंग’ कहा जा रहा है। यह जेन जी के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। उन्होंने कहा कि आप सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो जरूर देखते होंगे। बड़े शहरों में युवा इकट्ठा होते हैं, मंच सजता है, रोशनी होती है, संगीत बजता है और माहौल किसी बड़े कॉन्सर्ट से कम नहीं लगता। लेकिन यहां जो गाया जाता है, वो भजन होता है और वो भी पूरे मन से, पूरी लगन से और पूरी तन्मयता के साथ।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस नए चलन में भजन की गरिमा और शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाता है। भक्ति को हल्के में नहीं लिया जाता, शब्दों और भाव दोनों की मर्यादा बनी रहती है। मंच चाहे आधुनिक हो, संगीत की प्रस्तुति अलग हो, लेकिन भावना वही रहती है। वहां एक तरह का आध्यात्मिक प्रवाह महसूस होता है, जो हर किसी को भीतर तक छू जाता है।प्रधानमंत्री ने कहा कि यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि भजन क्लबिंग सिर्फ मनोरंजन नहीं है, बल्कि संस्कृति और भक्ति का एक नया रूप पेश कर रहा है। युवाओं की इस कोशिश से साफ लगता है कि हमारी परंपराएं अब भी जीवित हैं और उन्हें नई पीढ़ी अपनी समझ और रचनात्मकता के साथ आगे बढ़ा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भजन क्लबिंग जेन जी के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह न केवल संगीत और भक्ति का संगम है, बल्कि युवा संस्कृति का भी हिस्सा बनता जा रहा है। - नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2026 के पहले ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देश के युवाओं की प्रशंसा की है। ‘स्टार्टअप इंडिया’ के 10 साल की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ‘स्टार्टअप इकोसिस्टम’ बन चुका है।‘मन की बात’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “दस साल पहले जनवरी 2016 में हमने एक महत्वपूर्ण सफर शुरू किया। तब हमें इस बात का एहसास था कि भले ही ये एक छोटा क्यों ना हो, लेकिन ये युवा पीढ़ी और देश के भविष्य के लिए काफी अहम है। यह ‘स्टार्टअप इंडिया’ की यात्रा है और इस अद्भुत यात्रा के ‘हीरो’ हमारे युवा साथी हैं।”उन्होंने कहा कि भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित हो चुका है। यह इकोसिस्टम पारंपरिक सोच से अलग है और ऐसे क्षेत्रों में काम कर रहा है, जिनकी दस वर्ष पहले तक कल्पना भी कठिन थी। आज भारतीय स्टार्टअप्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन और बायोटेक्नोलॉजी जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “मैं अपने उन सभी युवा-साथियों को सेल्यूट करता हूं, जो किसी-न-किसी स्टार्टअप से जुड़े हैं या फिर अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं।पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ के माध्यम से देशवासियों, खासकर इंडस्ट्री और स्टार्टअप से जुड़े युवाओं से आग्रह करते हुए कहा, “भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। भारत पर दुनिया की नजरें हैं। ऐसे समय में हम सब पर एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी है। वह जिम्मेदारी है गुणवत्ता पर जोर देने की। इस वर्ष हम पूरी ताकत से गुणवत्ता को प्राथमिकता दें।”उन्होंने आगे कहा, “हम सबका एक ही मंत्र हो, ‘गुणवत्ता, गुणवत्ता और सिर्फ गुणवत्ता।’ हम जो भी उत्पादन कर रहे हैं, उसकी गुणवत्ता को बेहतर बनाने का संकल्प लें। हमारे टेक्सटाइल, टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक्स, यहां तक कि पैकेजिंग भी, भारतीय उत्पाद का मतलब ‘उच्च गुणवत्ता’ होना चाहिए।”
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2026 के पहले ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देश के युवाओं की प्रशंसा की है। ‘स्टार्टअप इंडिया’ के 10 साल की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ‘स्टार्टअप इकोसिस्टम’ बन चुका है।
‘मन की बात’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “दस साल पहले जनवरी 2016 में हमने एक महत्वपूर्ण सफर शुरू किया। तब हमें इस बात का एहसास था कि भले ही ये एक छोटा क्यों ना हो, लेकिन ये युवा पीढ़ी और देश के भविष्य के लिए काफी अहम है। यह ‘स्टार्टअप इंडिया’ की यात्रा है और इस अद्भुत यात्रा के ‘हीरो’ हमारे युवा साथी हैं।”उन्होंने कहा कि भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित हो चुका है। यह इकोसिस्टम पारंपरिक सोच से अलग है और ऐसे क्षेत्रों में काम कर रहा है, जिनकी दस वर्ष पहले तक कल्पना भी कठिन थी। आज भारतीय स्टार्टअप्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन और बायोटेक्नोलॉजी जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “मैं अपने उन सभी युवा-साथियों को सेल्यूट करता हूं, जो किसी-न-किसी स्टार्टअप से जुड़े हैं या फिर अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं।पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ के माध्यम से देशवासियों, खासकर इंडस्ट्री और स्टार्टअप से जुड़े युवाओं से आग्रह करते हुए कहा, “भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। भारत पर दुनिया की नजरें हैं। ऐसे समय में हम सब पर एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी है। वह जिम्मेदारी है गुणवत्ता पर जोर देने की। इस वर्ष हम पूरी ताकत से गुणवत्ता को प्राथमिकता दें।”उन्होंने आगे कहा, “हम सबका एक ही मंत्र हो, ‘गुणवत्ता, गुणवत्ता और सिर्फ गुणवत्ता।’ हम जो भी उत्पादन कर रहे हैं, उसकी गुणवत्ता को बेहतर बनाने का संकल्प लें। हमारे टेक्सटाइल, टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक्स, यहां तक कि पैकेजिंग भी, भारतीय उत्पाद का मतलब ‘उच्च गुणवत्ता’ होना चाहिए। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी ने सभी पद्म पुरस्कार विजेताओं को देश के प्रति उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए बधाई दी।\
प्रधानमंत्री ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में पुरस्कार विजेताओं की उत्कृष्टता, समर्पण और सेवा समाज की संरचना को समृद्ध बनाती है। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि यह सम्मान उस वचनबद्धता और उत्कृष्टता की भावना को दर्शाता है जो आने वाली पीढ़ियों को निरन्तर प्रेरित करती रहती है।पद्म पुरस्कार 2026 की घोषणा करने वाली एक एक्स पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री मोदी ने कहा;“हमारे देश के प्रति उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सभी पद्म पुरस्कार विजेताओं को बधाई। विभिन्न क्षेत्रों में उनकी उत्कृष्टता, समर्पण और सेवा हमारे समाज की संरचना को समृद्ध बनाती है। यह सम्मान उस वचनबद्धता और उत्कृष्टता की भावना को दर्शाता है जो आने वाली पीढ़ियों को निरन्तर प्रेरित करती रहती है।” -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उद्योग जगत एवं स्टार्टअप से गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करने तथा विनिर्माण में उत्कृष्टता को एक मानदंड बनाने का संकल्प लेने का रविवार को आग्रह किया। मोदी ने रेडियो पर प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' में कहा कि भारतीय उत्पाद उच्च गुणवत्ता के पर्याय होने चाहिए। उन्होंने उद्योग जगत से ऐसे उत्पादों का निर्माण करने का आग्रह किया जिनमें किसी प्रकार की कमी नहीं हो। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने 130वें 'मन की बात' संबोधन में कहा, ''हम जो कुछ भी निर्मित करते हैं, आइए, उसकी गुणवत्ता में सुधार करने का संकल्प लें। चाहे वह हमारे वस्त्र हों, प्रौद्योगिकी हो, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हों या पैकेजिंग, हर भारतीय उत्पाद 'सर्वोत्तम गुणवत्ता' का पर्याय होना चाहिए।'' उन्होंने उन युवाओं के प्रयासों की भी सराहना की, जिन्होंने 10 साल पहले 2016 में शुरू हुई भारत की स्टार्टअप यात्रा में उत्साहपूर्वक भाग लिया। मोदी ने कहा, ''आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप परिवेशी तंत्र बन गया है। ये स्टार्टअप ढर्रे से हटकर काम कर रहे हैं; ये उन क्षेत्रों में काम कर रहे हैं जिनकी कल्पना भी 10 साल पहले तक नहीं की जा सकती थी।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय स्टार्टअप कंपनियां एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता), अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, परिवहन एवं आवागमन, हरित हाइड्रोजन और जैव प्रौद्योगिकी जैसे विविध क्षेत्रों में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, ''आप किसी भी क्षेत्र का नाम लीजिए और आपको उस क्षेत्र में काम करने वाला कोई न कोई भारतीय स्टार्टअप मिल जाएगा। मैं अपने उन सभी युवा मित्रों को सलाम करता हूं जो किसी न किसी स्टार्टअप से जुड़े हैं या अपना खुद का स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं।'' प्रधानमंत्री ने देशवासियों को राष्ट्रीय मतदाता दिवस और गणतंत्र दिवस की भी शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने कहा कि ''भारत पर दुनिया की नजरें हैं और ऐसे समय में हम सब पर एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी है। वो जिम्मेदारी है गुणवत्ता पर जोर देने की। होती है, चलती है, चल जाएगा, वो युग चला गया। आइए इस वर्ष हम पूरी ताकत से गुणवत्ता को प्राथमिकता दें। हम सबका एक ही मंत्र हो गुणवत्ता, गुणवत्ता और सिर्फ गुणवत्ता! कल से आज बेहतर गुणवत्ता! हम जो भी उत्पादन कर रहे हैं, उसकी गुणवत्ता को बेहतर बनाने का संकल्प लें।'' उन्होंने कहा, ''मैंने तो लालकिले से कहा था 'जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट'। ऐसा करके ही हम विकसित भारत की यात्रा को तेजी से आगे ले जा पाएंगे।'' 'जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट' पहल का उद्देश्य उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना और विनिर्माण प्रक्रिया को टिकाऊ बनाना है। -
नयी दिल्ली. वरिष्ठ पत्रकार और प्रसिद्ध लेखक मार्क टली का रविवार को यहां एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके एक करीबी दोस्त ने यह जानकारी दी। वह 90 वर्ष के थे। कई पुरस्कारों से सम्मानित मार्क टली कुछ समय से बीमार थे और पिछले एक सप्ताह से साकेत के मैक्स अस्पताल में भर्ती थे। अस्पताल के एक सूत्र ने बताया, ''टली को 21 जनवरी को साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था और आज उनका निधन हो गया। वह अस्पताल में नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख की निगरानी में थे।'' वरिष्ठ पत्रकार और टली के करीबी दोस्त सतीश जैकब ने बताया, ''मार्क का दोपहर में मैक्स अस्पताल, साकेत में निधन हो गया।'' उनका जन्म 24 अक्टूबर 1935 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में हुआ था। टली 22 वर्षों तक 'बीबीसी' के नयी दिल्ली ब्यूरो के प्रमुख रहे। भारत पर उन्होंने कई किताबें लिखी थीं। प्रख्यात लेखक होने के साथ-साथ, टली बीबीसी रेडियो-4 के कार्यक्रम 'समथिंग अंडरस्टूड' के प्रस्तोता भी थे। वह भारत और ब्रिटिश राज से लेकर भारतीय रेलवे तक के विषयों पर बनी कई वृत्तचित्रों का हिस्सा थे।
टली को 2002 में 'नाइट' की उपाधि से सम्मानित किया गया और 2005 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से नवाजा गया। टली ने भारत पर कई किताबें लिखी हैं, जिनमें 'नो फुल स्टॉप्स इन इंडिया', 'इंडिया इन स्लो मोशन' और 'द हार्ट ऑफ इंडिया' शामिल हैं। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारतीय लोग अपने विवेक के आधार पर और प्रलोभन, पूर्वाग्रह तथा गलत सूचनाओं से दूर रहकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे, जिससे देश की चुनावी प्रणाली मजबूत होगी। उन्होंने चुनाव में बड़ी संख्या में मतदान करने के लिए आगे आने वाली महिलाओं की भी सराहना की।
दिल्ली में आयोजित 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुर्मू ने कहा कि मतदान का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भी अनिवार्य है कि सभी नागरिक अपने संवैधानिक कर्तव्यों को ध्यान में रखते हुए इसका इस्तेमाल करें। निर्वाचन आयोग के स्थापना दिवस को पिछले 16 वर्षों से राष्ट्रीय मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है। संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को जब भारतीय संविधान को अपनाया तो इसके 16 अनुच्छेद तुरंत प्रभाव से लागू हो गए। इनमें से एक अनुच्छेद निर्वाचन आयोग के गठन से संबंधित था। भारत के गणतंत्र बनने से एक दिन पहले 25 जनवरी 1950 को निर्वाचन आयोग अस्तित्व में आया। संविधान का शेष भाग 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। -
नयी दिल्ली. पश्चिम बंगाल के टॉलीगंज में 1930 के दशक के अंत में अमीर ब्रिटिश माता-पिता के बच्चे के रूप में मार्क टली को स्थानीय लोगों के साथ घुलने-मिलने की अनुमति नहीं थी। अपने माता-पिता की प्राथमिकताओं के विपरीत टली ने जीवन भर भारत में पत्रकार और पर्यवेक्षक के रूप में काम किया, लोगों के बीच घुलमिल कर उनकी कहानियां सुनाईं और देश के घटनापूर्ण अतीत के कुछ सबसे उल्लेखनीय अध्यायों को भी उजागर किया। प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक और भारत से गहरा जुड़ाव रखने वाले टली का रविवार को यहां एक निजी अस्पताल में 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह कुछ समय से बीमार थे और पिछले एक सप्ताह से साकेत के मैक्स अस्पताल में भर्ती थे। टॉलीगंज में 1935 में जन्मे टली ने अपने जीवन का पहला दशक भारत में बिताया, जहां उन्होंने दार्जिलिंग के एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई की, जिसके बाद उन्हें आगे की शिक्षा के लिए इंग्लैंड भेज दिया गया। वर्ष 2001 में 'नाइटहुड' सम्मान के लिए चुने जाने के बाद 'बीबीसी' के साथ एक साक्षात्कार में टली ने इंग्लैंड को याद करते हुए कहा कि वह "बहुत ही नीरस, अंधेरी जगह थी… जहां भारत का उज्ज्वल आसमान नहीं था।'' कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज में धर्मशास्त्र का पाठ्यक्रम करने के बाद, इस युवा ब्रिटिश नागरिक का झुकाव पादरी बनने की ओर था और उन्होंने लिंकन थियोलॉजिकल कॉलेज में दाखिला लिया। लेकिन नियति के पास उनके लिए कुछ और ही योजना थी। वर्ष 2020 में यूनेस्को कूरियर को दिए एक साक्षात्कार में टली ने अपने "विद्रोही स्वभाव" को याद करते हुए बताया कि वह सेमिनरी में केवल दो सत्र ही टिक पाए थे। उन्होंने कहा, "मुझे लगता था कि शायद मुझे पादरी बनने की प्रेरणा मिली है। मैं हमेशा से थोड़ा विद्रोही स्वभाव का था, और मुझे सेमिनरी का अनुशासन पसंद नहीं था। साथ ही, मैं बीयर का भी शौकीन था।'' बीबीसी ने अपने लेख में लिखा, "वह काफी शराब पीते थे: अपने 21वें जन्मदिन पर, उन्होंने एक पब में 21 पाइंट बियर खरीदने के लिए 21 शिलिंग का भुगतान किया, और उन्होंने वह सारी बियर पी डाली।" टली का भारत से पुनः परिचय तब हुआ जब बीबीसी ने उन्हें 1964 में नयी दिल्ली में अपना संवाददाता बनाकर भेजा जो अगले 30 वर्षों तक अंग्रेजी प्रसारक के साथ उनके करियर की शुरुआत थी। 35 वर्षीय टली को 1969 में लंदन वापस भेज दिया गया, क्योंकि भारत सरकार ने बीबीसी को भारत में प्रसारण करने से रोक दिया था। यह तब हुआ जब बीबीसी ने ''फैंटम इंडिया'' नामक एक फ्रेंच वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया था जिसमें देश की आलोचना की गई थी। वर्ष 1971 में दिल्ली लौटने के बाद अगले ही वर्ष उन्हें ब्यूरो प्रमुख बना दिया गया और उन्हें दक्षिण एशिया क्षेत्र को कवर करने की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिससे भारत में उनके पत्रकारिता करियर का एक और चरण शुरू हुआ। बीबीसी के साथ उनके काम में स्वतंत्रता के बाद के भारतीय इतिहास की ऐतिहासिक घटनाओं का कवरेज प्रमुखता से शामिल है। वर्ष 1971 के बांग्लादेश युद्ध से लेकर 1975-77 के आपातकाल, 1979 में पूर्व पाकिस्तानी राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो की फांसी, ऑपरेशन ब्लू स्टार, इंदिरा गांधी की हत्या, 1984 के सिख विरोधी दंगे, 1991 में राजीव गांधी की हत्या और 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस तक की घटनाएं इनमें शामिल हैं। ऑपरेशन ब्लू स्टार और पंजाब की समस्या, पत्रकार सतीश जैकब के साथ लिखी गई टली की पहली पुस्तक, "अमृतसर: मिसेज गांधीज लास्ट बैटल" (1985) के विषय थे। भारत में बिताए अपने वर्षों पर टली की पहली प्रमुख पुस्तक 1988 में "नो फुल स्टॉप्स इन इंडिया" के रूप में सामने आई, जिसमें देश में उनके दो दशकों से अधिक के काम को 10 निबंधों के संग्रह में समेटा गया था। इसमें ऑपरेशन ब्लू स्टार, रूप कंवर सती मामला, रामानंद सागर की "रामायण" और 1977 के कुंभ मेले सहित कुछ प्रमुख समाचार घटनाओं को शामिल किया गया था। उन्होंने पुस्तक की प्रस्तावना में लिखा, ''इस किताब में बताई गई कहानियां यह दिखाने में मदद करेंगी कि पश्चिमी सोच ने भारतीय जीवन को कैसे प्रभावित किया है और आज भी कर रही है। वे कहानियां भारत की गरीबी का हल नहीं देतीं, लेकिन यह सुझाव देती हैं कि समाधान खोजने की शुरुआत हमें भारत के भीतर करनी चाहिए।" टली को 1992 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया, ब्रिटिश सरकार ने न्यू ईयर ऑनर्स 2002 में उन्हें 'नाइट' की उपाधि से नवाजा और 2005 में उन्हें पद्म भूषण प्राप्त हुआ। वर्ष 1994 में एक ऐसी घटना के बाद बीबीसी के साथ उनका जुड़ाव आंशिक रूप से समाप्त हो गया, जिसे उनकी पत्रकारिता की ईमानदारी का प्रतिबिंब माना जा सकता है। बर्मिंघम में रेडियो अकादमी को दिए गए एक व्याख्यान में टली ने कहा कि जॉन बर्ट के नेतृत्व में बीबीसी के कर्मचारियों में "वास्तविक रूप से भय का माहौल" है। इसके जवाब में, बर्ट ने मार्क टली के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह "पुराने सैनिक हैं जो अपने मस्कट बंदूकों से हम पर निशाना साध रहे हैं।" टली ने जुलाई 1994 में बीबीसी से इस्तीफा दे दिया, लेकिन अप्रैल 2019 में बंद होने तक, बीबीसी के रेडियो 4 पर आध्यात्मिकता पर आधारित कार्यक्रम "समथिंग अंडरस्टुड" को प्रस्तुत करते रहे। किसी भी समाचार मीडिया में प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत न होते हुए भी टली दिल्ली में एक स्वतंत्र पत्रकार के रूप में सक्रिय रहे और भारत की सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों के गहन पर्यवेक्षक बने रहे। वर्ष 2002 में प्रकाशित उनकी एक और उल्लेखनीय कृति "इंडिया इन स्लो मोशन" में टली ने हिंदू अतिवाद से लेकर बाल श्रम, सूफी रहस्यवाद से लेकर कृषि संकट, राजनीतिक भ्रष्टाचार की निरंतरता और कश्मीर की समस्या तक, विविध विषयों को शामिल किया है। इस किताब को उन्होंने अपनी साथी जिलियन राइट के साथ मिलकर लिखा था। कुल 10 किताबों में, गल्प और कथेतर दोनों में, टली का भारत लगातार पसंदीदा विषय बना रहा। "इंडियाज अनएंडिंग जर्नी" (2008) में टली भारत की विविधता का विश्लेषण करते हैं, जबकि "इंडिया: द रोड अहेड" भारत के भविष्य का एक चिंतनशील और जमीनी आकलन है। उनकी दो गल्प रचनाएं, "द हार्ट ऑफ इंडिया" (1995) और "अपकंट्री टेल्स: वन्स अपॉन अ टाइम इन द हार्ट ऑफ इंडिया" (2017), भारतीयता से परिपूर्ण कहानियों का संग्रह हैं। चौबीस अक्टूबर को टली के 90वें जन्मदिन पर, उनके बेटे सैम टली ने 'लिंक्डइन' पर पत्रकारिता में अपने पिता के लंबे योगदान को याद किया। सैम ने लिखा, ''मुझे लगता है कि मेरे पिता की उपलब्धियां ब्रिटेन-भारत संबंधों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि दोनों देशों के प्रति उनका अटूट लगाव और स्नेह है। हालांकि वह भारत में रहते हैं, लेकिन ब्रिटेन से भी उनके गहरे संबंध हैं। 'दिल है हिंदुस्तानी, मगर थोड़ा अंग्रेज़ी भी!' पोस्ट पर प्रतिक्रिया में कई लोगों ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस पर टली को सुनने की अपनी यादों को ताजा किया और बताया कि कैसे उन्हें किसी खबर की सत्यता पर भरोसा हुआ और उन्हें "सत्य की आवाज" कहा गया। संजय दिघे ने लिखा, ''1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान, मेरा परिवार पाकिस्तान सीमा के पास रहता था। हम दोनों तरफ से प्रसारण सुनते थे। लेकिन जब तक हम मार्क टली को वर्ल्ड सर्विस पर सुन नहीं लेते, तब तक हमें किसी बात पर यकीन नहीं होता था! न सिर्फ युद्धकाल में, बल्कि जब भी वह प्रसारण करते थे, हम उन पर सरकारी प्रसारक से भी ज़्यादा भरोसा करते थे। वह सत्य की आवाज़ थे।" बीबीसी के पूर्व पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी ने टली के साथ काम करने के अपने दिनों को याद किया, खासकर अयोध्या विवाद के दौरान। उन्होंने लिखा, ''मुझे अयोध्या विवाद और चुनावों सहित कई खबरों पर उनके साथ काम करने का सौभाग्य मिला। मुझे लगता है कि वही एकमात्र व्यक्ति हैं जिन्हें मेरे घर में रोजाना अपनी बीयर पीने की छूट है, क्योंकि मैं शराब नहीं पीता। हनुमान जी से प्रार्थना करें कि वह उन्हें अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु प्रदान करें।"
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मथुरा (उप्र). भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने न केवल देश को आगे बढ़ाया है, बल्कि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की भी चिंता की है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद पहली बार भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा पहुंचे नितिन नवीन ने कहा, "आज जब मैं यहां आ रहा था तो देखकर लगा कि पहले विदेशों में जैसी सड़कें होती थीं, उससे बेहतर सड़कें अब उत्तर प्रदेश में हैं।" उन्होंने कहा, "यह इस बात का प्रमाण है कि देश कैसे बदल रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने न केवल इस देश को आगे बढ़ाया है, बल्कि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की भी चिंता की है।" नवीन ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि आज यह कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को केंद्र में रखकर विकास की चिंता करते हैं। नितिन नवीन रविवार को यमुना एक्सप्रेसवे के रास्ते दिल्ली से मथुरा पहुंचे, जहां मांट क्षेत्र के बाजना कट पर कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका जोरदार स्वागत किया। उन्होंने कहा, "आज हम यहां आए हैं। मैं मांट विधानसभा के लोगों से मिलने आया हूं। ऊपर वाले का आशीर्वाद है कि मेरा पहला कार्यक्रम भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा में लगा है।" भाजपा अध्यक्ष ने कहा, "मैं सभी से आग्रह करूंगा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज भारत को विकास के पथ पर आगे बढ़ा रहे हैं। आइए, इस राज्य और देश के विकास में अपना योगदान दें।" उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री जी हमेशा कहते हैं कि यदि मैं एक कदम आगे बढ़ता हूं और मेरे साथ देश की 140 करोड़ जनता चलती है, तो देश को विकास के पथ पर आगे बढ़ने से कोई ताकत नहीं रोक सकती।" नवीन ने कहा, "लोगों ने देखा है कि पहले जब विश्व की राजनीतिक हस्तियों के सामने देश का प्रधानमंत्री खड़ा होता था, तो वह आंख मिलाकर बात नहीं कर पाता था, लेकिन अब वह दौर खत्म हो चुका है। आज नरेन्द्र मोदी पूरे विश्व में भारत का नेतृत्व कर रहे हैं और देश का सम्मान वैश्विक स्तर पर बढ़ा है।" तय कार्यक्रम के अनुसार, भाजपा अध्यक्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ वृन्दावन मार्ग पर स्थित बेंगलुरु इस्कॉन के श्री वृन्दावन चंद्रोदय के दर्शन करेंगे। इसके बाद वह वहीं सुबह 11 बजे से एक घंटे तक प्रधानमंत्री के 'मन की बात' कार्यक्रम का प्रसारण सुनेंगे। तत्पश्चात, मुख्यमंत्री के साथ ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन भी करेंगे।
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नयी दिल्ली. गणतंत्र दिवस 2026 के उपलक्ष्य में पुलिस, अग्निशमन, होमगार्ड एवं सिविल डिफेंस (एचजीएंडसीडी) तथा 'करेक्शनल सर्विसेज' (सुधारात्मक सेवा) के कुल 982 कर्मियों को वीरता और सेवा पदकों से सम्मानित किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के बयान के अनुसार, इन सम्मानों में 125 वीरता पदक शामिल हैं।
वीरता पुरस्कारों में से अधिकांश में 45 कर्मियों को जम्मू-कश्मीर क्षेत्र से, 35 कर्मियों को वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित क्षेत्रों से, पांच कर्मियों को पूर्वोत्तर से और 40 कर्मियों को अन्य क्षेत्रों से उनके वीरतापूर्ण कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। बयान के अनुसार, वीरता पदक प्राप्त करने वालों में चार अग्निशमन सेवा के बचावकर्मी भी शामिल हैं।
आधिकारिक विवरण के मुताबिक, राज्यों में जम्मू कश्मीर पुलिस को सर्वाधिक 33 वीरता पदक मिले हैं। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस को 31, उत्तर प्रदेश पुलिस को 18 और दिल्ली पुलिस को 14 वीरता पदक प्रदान किए गए हैं। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) एकमात्र ऐसा बल है, जिसे 12 वीरता पदक प्राप्त हुए हैं। बयान के अनुसार, विशिष्ट सेवा के लिए कुल 101 राष्ट्रपति पदक (पीएसएम) में से, 89 पुलिस सेवा को, पांच अग्निशमन सेवा को, तीन सिविल डिफेंस एवं होमगार्ड सेवा को और चार 'करेक्शनल सर्विसेज' को प्रदान किए गए हैं। इसमें कहा गया कि इसी प्रकार, सराहनीय सेवा के लिए कुल 756 पदक (एमएसएम) में से, 664 पुलिस सेवा को, 34 अग्निशमन सेवा को, 33 होमगार्ड एवं सिविल डिफेंस सेवा को और 25 'करेक्शनल सर्विसेज' को प्रदान किए गए हैं। परिभाषा के अनुसार, वीरता पदक असाधारण बहादुरी और विशिष्ट वीरतापूर्ण कार्य के आधार पर जीवन और संपत्ति बचाने या अपराध को रोकने या अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए प्रदान किए जाते हैं। इसमें उठाए गए जोखिम का आकलन संबंधित अधिकारी के दायित्वों और कर्तव्यों को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। बयान के अनुसार, विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक (पीएसएम), सेवा में विशेष रूप से विशिष्ट रिकॉर्ड के लिए प्रदान किया जाता है और सराहनीय सेवा के लिए पदक (एमएसएम) कर्तव्य के प्रति निष्ठा की विशेषता वाली मूल्यवान सेवा के लिए प्रदान किया जाता है। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भाग लेने का आग्रह करते हुए रविवार को कहा कि मतदाता होना केवल संवैधानिक विशेषाधिकार नहीं, बल्कि एक ऐसा महत्वपूर्ण कर्तव्य है जो प्रत्येक नागरिक को भारत के भविष्य को आकार देने में अपना मत रखने का अधिकार देता है। प्रधानमंत्री ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''राष्ट्रीय मतदाता दिवस की शुभकामनाएं। यह हमारे देश के लोकतांत्रिक मूल्यों में हमारे विश्वास को और गहरा करने का दिन है।'' उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने के प्रयासों के लिए भारत निर्वाचन आयोग से जुड़े सभी लोगों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा, ''मतदाता होना केवल संवैधानिक विशेषाधिकार नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण कर्तव्य है, जो प्रत्येक नागरिक को भारत के भविष्य को आकार देने में अपना मत रखने का अधिकार देता है।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''आइए, हमेशा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भाग लेकर अपने लोकतंत्र की भावना का सम्मान करें और इस तरह विकसित भारत की नींव को मजबूत करें।'' भारत में राष्ट्रीय मतदाता दिवस हर वर्ष 25 जनवरी को भारत निर्वाचन आयोग के स्थापना दिवस के अवसर पर मनाया जाता है।
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नई दिल्ली। 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देश की सेवा में उत्कृष्ट, साहसिक और अनुकरणीय योगदान के लिए सशस्त्र बलों एवं बॉर्डर रोड्स डेवलपमेंट बोर्ड (बीआरडीबी) के कुल 98 कर्मियों को ‘मेंशन-इन-डिस्पैचेस’ प्रदान करने की स्वीकृति दी है।
इनमें पांच सम्मान मरणोपरांत दिए गए हैं। इन 98 सम्मानों में भारतीय सेना के 81 कर्मी, भारतीय नौसेना के 15 कर्मी, और बॉर्डर रोड्स डेवलपमेंट बोर्ड के दो कर्मी (दोनों मरणोपरांत) शामिल हैं।गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर के लिए कर्नल अमित कुमार यादव और कर्नल विनय कुमार पांडेय को सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति ने इसके अलावा 301 सैन्य अलंकरणों को भी मंजूरी दी है। सशस्त्र बलों और अन्य कर्मियों को 301 सैन्य अलंकरण देने की भी स्वीकृति दी है। इनमें 30 परम विशिष्ट सेवा मेडल, 4 उत्तम युद्ध सेवा मेडल, 56 अति विशिष्ट सेवा मेडल, 9 युद्ध सेवा मेडल, 2 बार टू सेना मेडल, 43 सेना मेडल, 8 नौसेना मेडल, 14 वायु सेना मेडल व 135 विशिष्ट सेवा मेडल शामिल हैं।भारतीय सेना के कर्मियों को विभिन्न ऑपरेशनों और विशेष कार्यों में अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता, पेशेवर दक्षता और राष्ट्र के प्रति समर्पण के लिए सम्मानित किया गया है। मरणोपरांत सम्मानित किए जाने वाले वीरों में हवलदार याकूब मसीह, नायक नवीन पौडेल, अग्निवीर अजीत सिंह राजपूत, बॉर्डर रोड्स डेवलपमेंट बोर्ड के सीपी स्किल्ड गणेश सिंह और सीपी मेट ढुन्ना टुडू शामिल हैं।‘मेंशन-इन-डिस्पैचेस’ सम्मान प्राप्त करने वाले सेना कर्मियों में से 2 सैन्य कर्मी ऑपरेशन सिंदूर से, 17 कर्मी ऑपरेशन रक्षक, 11 कर्मी ऑपरेशन स्नो लेपर्ड, 11 कर्मी ऑपरेशन हिफाजज, 5 कर्मी ऑपरेशन ऑर्किड, 2 कर्मी ऑपरेशन मेघदूत, 1 कर्मी ऑपरेशन राइनो, 3 रेस्क्यू ऑपरेशन, 4 ऑपरेशन कैजुअल्टी एवैकुएशन, 1 ऑपरेशन सॉफेन, और 24 विविध ऑपरेशनों (3 मरणोपरांत) से हैं।इन विभिन्न अभियानों में आतंकवाद-रोधी कार्रवाई, सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा संचालन, उच्च ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में तैनाती, विशेष बलों के ऑपरेशन, आपदा राहत, चिकित्सा एवं हवाई निकासी जैसे चुनौतीपूर्ण कार्य शामिल रहे।भारतीय नौसेना के 15 अधिकारियों एवं नाविकों को समुद्री सुरक्षा, परिचालन तत्परता, तकनीकी दक्षता तथा राष्ट्रहित में किए गए विशिष्ट योगदान के लिए ‘मेंशन-इन-डिस्पैचेस’ से सम्मानित किया गया है। बीआरडीबी के दो कर्मियों को मरणोपरांत यह सम्मान प्रदान किया गया है। इन कर्मियों ने दुर्गम और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में राष्ट्र के सामरिक बुनियादी ढांचे के निर्माण एवं रखरखाव में सर्वोच्च बलिदान दिया।‘मेंशन-इन-डिस्पैचेस’ उन कर्मियों को दिया जाता है जिन्होंने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए असाधारण साहस, निष्ठा औ -
लखनऊ. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश को देश की "आत्मा" बताते हुए शनिवार को कहा कि 2047 में देश की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक यह राज्य विकसित भारत के इंजन के रूप में उभरेगा। शाह ने उत्तर प्रदेश दिवस समारोह में राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर आयोजित सभा में गैर-भाजपा सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश को दशकों तक पिछड़ा रखा और इसे 'बीमारू' राज्य के रूप में प्रचारित किया, जबकि भाजपा सरकार ने इसे "सफल राज्य" में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि लोग जातिवाद से ऊपर उठकर भाजपा को वंशवादी पार्टियों पर प्राथमिकता दें।
शाह ने कहा, परिवारवादी (वंशवादी) पार्टियां, चाहे वह कांग्रेस हो, समाजवादी पार्टी (सपा) हो या बहुजन समाज पार्टी (बसपा) हो, उत्तर प्रदेश की भलाई और विकास नहीं कर सकतीं; केवल भाजपा ही यह कर सकती ह। उन्होंने कहा, "केंद्र में नरेन्द्र मोदी और राज्य में योगी आदित्यनाथ होने से उत्तर प्रदेश के विकास की हर संभावना खुल गई है। राज्य की भलाई के लिए ईमानदारी से प्रयास किए गए हैं।" भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा, "उत्तर प्रदेश को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने 'बीमारू' राज्य बना दिया था, लेकिन भाजपा सरकार ने इसे 'सफल राज्य' में बदल दिया और हर गांव और घर में विकास हुआ।" उन्होंने यह भी कहा कि बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को 1980 के दशक में 'बीमारू' माना जाता था, क्योंकि इन राज्यों के आर्थिक व जनसांख्यिकीय संकेतक बहुत खराब थे। शाह ने यह भी कहा कि राज्य देश की प्रगति में एक केंद्रीय स्थान रखता है और 2047 तक इसे पूरी तरह से विकसित कर दिया जाएगा। उन्होंने राज्य के स्थापना दिवस पर कहा, "उत्तर प्रदेश भारत की धड़कन है, और दूसरे शब्दों में कहें तो उत्तर प्रदेश भारत की आत्मा भी है। मुझे पूरी तरह से विश्वास है कि उत्तर प्रदेश भारत के विकास का इंजन बनेगा, एक विकसित भारत का इंजन।" प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण का हवाला देते हुए शाह ने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार संयुक्त रूप से विकसित राष्ट्र और विकसित राज्य के लक्ष्य को हासिल करने के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने एक विकसित भारत बनाने का संकल्प लिया है, और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हमारी डबल-इंजन सरकार ने उत्तर प्रदेश को भी एक विकसित राज्य बनाने का संकल्प लिया है।" केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, "हम सभी आज इस संकल्प को दोहराते हैं कि जब 15 अगस्त 2047 को स्वतंत्रता की शताब्दी मनाई जाएगी, तब उत्तर प्रदेश एक पूरी तरह से विकसित राज्य होगा और एक विकसित भारत का महत्वपूर्ण राज्य बनेगा।" शाह के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे।
केंद्रीय गृह मंत्री ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार के तहत कानून-व्यवस्था की स्थिति में ऐतिहासिक सुधार हुआ है, जिससे निवेश आकर्षित हुआ और विकास में तेजी आई। शाह ने मतदाताओं से अपील करते हुए लोगों से जातिगत विचारों से ऊपर उठकर 2027 के विधानसभा चुनावों में भाजपा का समर्थन करने की अपील की। गृह मंत्री ने कहा, "आगामी साल चुनावी साल है। आज मैं उत्तर प्रदेश के लोगों से यह अपील करने आया हूं कि वे राज्य के विकास, युवाओं के भविष्य और देश की सुरक्षा के लिए भारतीय जनता पार्टी को बहुमत से विजय दिलाएं।" उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय राजमार्गों और हवाई अड्डों का एक व्यापक नेटवर्क प्रदान किया है और ब्रह्मोस मिसाइल भी अब उत्तर प्रदेश में बन रही है। शाह ने कहा कि यह बदलाव इसलिए संभव हो सका क्योंकि योगी आदित्यनाथ सरकार ने संकल्प के साथ भ्रष्टाचार को खत्म किया, गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाएं लागू कीं, और यह सुनिश्चित किया कि हर गांव में कम से कम 20 घंटे बिजली आपूर्ति हो। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, "आगामी चुनावों में, मैं उत्तर प्रदेश के हर मतदाता से अपील करता हूं कि वे जातिवाद से ऊपर उठें, इन वंशवादी पार्टियों को नकारें, और एक बार फिर भाजपा का कमल (पार्टी चुनाव चिन्ह) खिलाएं।" शाह ने भाजपा सरकार के तहत हुए शहरी परिवर्तन को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 65 एकड़ का कूड़ाघर अब राष्ट्र प्रेरणा स्थल के रूप में एक स्वच्छ और उपयोगी सार्वजनिक स्थान में परिवर्तित हो चुका है। उन्होंने कहा कि सफाई पहलों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले जिलों को इस कार्यक्रम के दौरान सम्मानित किया गया, जिससे राज्य भर में नागरिक बुनियादी ढांचे में सुधार को प्रदर्शित किया गया। केंद्रीय गृह मंत्री ने रोजगार और आजीविका पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं को पांच लाख रुपये तक के ब्याज-मुक्त और कुछ गिरवी रखकर मिलने वाले ऋणों का लाभ मिला है, जिसके लिए अब तक 5,322 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि 'एक जिला, एक उत्पाद' योजना युवाओं और महिलाओं के लिए आजीविका का एक प्रमुख स्रोत बन चुकी है, साथ ही यह उत्तर प्रदेश के पारंपरिक खाद्य पदार्थों व उत्पादों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने में मदद कर रही है। शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब देश की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, यह भारत का खाद्य कटोरा बन गया है, एथेनॉल उत्पादन में पहले स्थान पर है, और कृषि, विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी निर्यात में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है, साथ ही 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को लागू किया जा रहा है। शाह ने शासन और सुरक्षा पर बात करते हुए कहा कि भाजपा सरकार के तहत कानून-व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार हुआ है, और डकैती और चोरी के मामलों में भारी गिरावट आई है, सीमा सुरक्षा में सुधार हुआ है और परिवहन बेहतर हुआ है। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और प्रयागराज में महाकुंभ के आयोजन का भी उल्लेख किया और कहा कि ये आयोजन भारत की सांस्कृतिक स्थिति को वैश्विक स्तर पर मजबूती दे रहे हैं। शाह ने राज्य की धरोहर की सराहना करते हुए कहा, "यह वही भूमि है जहां कई ऐतिहासिक व्यक्तित्व जैसे भगवान राम, भगवान कृष्ण, बाबा विश्वनाथ, भगवान महावीर और भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था।" लखनऊ के राष्ट्र प्रेरणा स्थल में तीन महान व्यक्तियों श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह आने वाले दिनों में राष्ट्रीय जागरण का केंद्र बनेंगी और देश को एक नयी दिशा देंगी। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी में 77वीं गणतंत्र दिवस परेड के दौरान कर्तव्य पथ पर प्रस्तुति देने वाले लगभग 2,500 कलाकारों ने शनिवार को 'फुल ड्रेस रिहर्सल' किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। औपचारिक परेड का पूर्वाभ्यास शुक्रवार को आयोजित किया गया था, लेकिन खराब मौसम के कारण फ्लाईपास्ट और सांस्कृतिक प्रदर्शन के कुछ हिस्से आयोजित नहीं किए जा सके। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ''कलाकारों का एक समूह परेड की अगुवाई करेगा, जिसका पूर्वाभ्यास शुक्रवार को हुआ था। हालांकि, भारत के विभिन्न नृत्य रूपों का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 2,500 कलाकारों के साथ भव्य कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा सका। इसलिए, उस भाग का 'फुल ड्रेस रिहर्सल' शनिवार को किया गया, क्योंकि यह 26 जनवरी को एक प्रमुख आकर्षण होगा।'' शुक्रवार को सशस्त्र बलों के जवानों और कलाकारों ने 'फुल ड्रेस रिहर्सल' किया और सुबह की बारिश के बीच कर्तव्य पथ पर परेड निकाली। बारिश के कारण समारोह स्थल पर कार्यक्रम में थोड़ी देर के लिए रुकावट आई। परेड का मुख्य विषय 'वंदे मातरम् के 150 वर्ष' होगा।
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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और अन्य से 78 वर्षीय उस सेवानिवृत्त बैंकर द्वारा दायर याचिका पर जवाब मांगा है जिसे कथित तौर पर लगभग एक महीने तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर करीब 23 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने नरेश मल्होत्रा द्वारा दायर याचिका पर भारत सरकार, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और अन्य को नोटिस जारी किया है। याचिका में संबंधित बैंकों को याचिकाकर्ता के खातों में ठगी गई 22.92 करोड़ रुपये की राशि जमा करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। मल्होत्रा ने कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, इंडसइंड बैंक, सिटी यूनियन बैंक और येस बैंक को मामले में पक्षकार बनाया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई के अधिकारियों के रूप में खुद को पेश करने वाले साइबर अपराधियों ने दक्षिण दिल्ली के गुलमोहर पार्क इलाके के एक सेवानिवृत्त बैंकर को लगभग एक महीने तक कथित तौर पर 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर 23 करोड़ रुपये की ठगी की। इस संबंध में एक अधिकारी ने बताया कि आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़ित को बताया कि उसके आधार कार्ड का संबंध नशीले पदार्थों की तस्करी, आतंकवाद के वित्तपोषण और पुलवामा आतंकी हमले से है। इसके बाद आरोपियों ने जांच के बहाने उसे उसके फ्लैट में ही 'डिजिटल अरेस्ट' की स्थिति में रखा। पुलिस ने कहा, ''धोखाधड़ी करने वालों ने उसे घर से बाहर न निकलने का निर्देश दिया और एक महीने की अवधि में उसकी बचत को विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया।'' अपने साथ हुई धोखाधड़ी का एहसास होने पर मल्होत्रा ने पिछले साल 19 सितंबर को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामला 'इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशंस' (आईएफएसओ) इकाई को सौंप दिया गया। पुलिस ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और धोखाधड़ी से प्राप्त 12.11 करोड़ रुपये की राशि से जुड़े विभिन्न बैंक खातों से लेन-देन पर रोक लगा दी गई है।
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नयी दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को राष्ट्र को संबोधित करेंगी। राष्ट्रपति कार्यालय ने एक बयान जारी करके यह जानकारी दी। शनिवार को जारी बयान में कहा गया है कि यह संबोधन शाम सात बजे से आकाशवाणी के सभी राष्ट्रीय चैनलों पर प्रसारित होगा और दूरदर्शन के सभी चैनलों पर पहले हिंदी में और फिर अंग्रेजी में प्रसारित किया जाएगा। संबोधन के दूरदर्शन पर हिंदी और अंग्रेजी में प्रसारण के बाद, दूरदर्शन के क्षेत्रीय चैनलों पर क्षेत्रीय भाषाओं में भी इसका प्रसारण होगा। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि आकाशवाणी अपने संबंधित क्षेत्रीय चैनलों पर सुबह 9:30 बजे से क्षेत्रीय भाषाओं में संबोधन प्रसारित करेगा।






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