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नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को बिहार के नालंदा के शीतला माता मंदिर में भगदड़ पर शोक व्यक्त किया। राष्ट्रपति मुर्मु के आधिकारिक कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”बिहार के नालंदा में एक मंदिर में हुई भगदड़ में अनेक श्रद्धालुओं की मृत्यु का समाचार अत्यंत दुखद है। मैं सभी शोकाकुल परिवारजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं। घायल हुए सभी लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की मैं कामना करती हूं।”
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के कार्यालय ने नालंदा हादसे पर दुख जताते हुए एक्स पर पोस्ट किया, ” बिहार के नालंदा में भगदड़ के कारण हुई जानमाल की दुखद हानि से मैं अत्यंत आहत हूं। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की मैं प्रार्थना करता हूं।”इससे पहले पीएम मोदी ने नालंदा के शीतला माता मंदिर हादसे पर दुख जताया। उन्होंने भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता की घोषणा भी की। वही, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मृतकों के परिजनों के लिए छह लाख रुपए मुआवजे की घोषणा की।नालंदा जिले के दीपनगर थाना क्षेत्र में मां शीतला मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान अत्यधिक भीड़ होने के कारण अचानक स्थिति अनियंत्रित हो गई, जिससे भगदड़ मच गई। इस भगदड़ में 8 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि आठ से दस लोग घायल हो गए।इस बीच इस घटना के बाद कर्तव्यहीनता के आरोप में दीपनगर थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया गया है। इस घटना की सूचना मिलने के बाद नालंदा जिला पुलिस प्रशासन घटनास्थल पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य में जुट गया। घायलों को तत्काल बेहतर इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मंगलवार को बिहार के नालंदा के शीतला माता मंदिर हादसे पर दुख जताया है। उन्होंने इसमें जान गंवाने वाले पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने इस भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता की घोषणा भी की।
प्रधानमंत्री कार्यालय (सेवा तीर्थ) ने पीएम मोदी के हवाले से लिखा, ”बिहार के नालंदा जिले में हुई दुर्घटना अत्यंत दुखद है। मैं उन लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं जिन्होंने इस हादसे में अपने प्रियजनों को खो दिया। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष की ओर से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी और घायलों को 50,000 रुपए दिए जाएंगे।”रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हादसे पर दुख जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ” नालंदा (बिहार) के माता शीतला मंदिर में हुई भगदड़ की घटना अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। इस हादसे में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मैं अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। साथ ही मैं सभी घायल व्यक्तियों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।”केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पोस्ट में लिखा, ”बिहार के नालंदा के शीतला माता मंदिर में हुई भगदड़ की दुखद घटना में श्रद्धालुओं के निधन और घायल होने का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है। मैं दिवंगत श्रद्धालुओं के परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की ईश्वर से प्रार्थना करता हूं।”लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी हादसे पर दुख जताते हुए लिखा, ” नालंदा (बिहार) के माता शीतला मंदिर में हुई भगदड़ की घटना अत्यंत दुःखद और पीड़ादायक है। इस हादसे में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मैं अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। साथ ही मैं सभी घायल व्यक्तियों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।”नालंदा के मघड़ा मेले में मंगलवार को एक बड़ा हादसा हो गया। जहां प्रसिद्ध माता शीतला के मंदिर में अचानक भगदड़ मचने की घटना में सात लोगों की मौत हो गई। मृतकों में महिलाओं की संख्या अधिक बताई जा रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए मृतक के परिजनों के लिए छह लाख रुपए मुआवजे की घोषणा की है। -
नई दिल्ली। बिहार के नालंदा जिले के प्राचीन शीतला माता मंदिर में मंगलवार सुबह भगदड़ मचने से कम से कम आठ महिलाओं की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि भारी भीड़ के कारण यह हादसा हुआ। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार सुबह मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। इसी दौरान अचानक भगदड़ मच गई।घटना के बाद मंदिर परिसर और आसपास अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में जुट गए।
अधिकारियों ने बताया कि घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। कुछ लोगों की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो गई, जबकि कुछ ने इलाज के दौरान दम तोड़ा।बिहारशरीफ के सहायक पुलिस अधीक्षक नूरुल हक ने कहा, “मंगलवार सुबह शीतला माता मंदिर में भगदड़ के दौरान कम से कम आठ श्रद्धालुओं की मौत हुई है, जिनमें अधिकांश महिलाएं हैं। कई लोग घायल भी हुए हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है।” उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान की जा रही है।नालंदा के उप विकास आयुक्त (डीडीसी) शुभम कुमार ने कहा कि मंदिर में अत्यधिक भीड़ के कारण यह हादसा हुआ होगा। आठ लोगों की मौत हुई है और पांच से अधिक घायल हैं।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मृतकों के परिजनों को 6-6 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। साथ ही अधिकारियों को घायलों के बेहतर इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि सरकार प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता दे रही है और घायलों के इलाज की व्यवस्था की गई है।उन्होंने ‘एक्स’पोस्ट कर कहा, “नालंदा के शीतला माता मंदिर में हुई घटना अत्यंत हृदयविदारक है। इस हादसे में जान गंवाने वाले और घायल हुए सभी श्रद्धालुओं के परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। सरकार प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता और राहत उपलब्ध करा रही है। घायलों के समुचित उपचार की व्यवस्था की गई है। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति और शोकाकुल परिवारों को संबल प्रदान करें। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।”नेता प्रतिपक्ष ने लगाया प्रशासनिक कुप्रबंधन का आरोपवहीं, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसे “प्रशासनिक कुप्रबंधन” का परिणाम बताते हुए सरकार की आलोचना की। उन्होंने घटना की उच्चस्तरीय जांच और पीड़ितों के लिए तत्काल सहायता की मांग की। उन्होंने कहा, “प्रशासनिक कुप्रबंधन के कारण हुई इस घटना में श्रद्धालुओं की मौत बेहद दुखद है। दिवंगत आत्माओं की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की मैं प्रार्थना करता हूं। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।” उन्होंने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से घायलों के समुचित इलाज की व्यवस्था करने, मृतकों के परिजनों को तत्काल सहायता देने तथा घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। -
नयी दिल्ली. महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने सोमवार को लोगों से जनगणना करने वालों को सही जानकारी देने की अपील करते हुए आश्वस्त किया कि व्यक्तिगत डेटा गोपनीय रहेगा तथा इसे किसी साक्ष्य या किसी योजना का लाभ लेने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। दिल्ली समेत देश के कुछ राज्यों में अप्रैल में 16वीं जनगणना का पहला चरण शुरू होने से पहले नारायण ने यहां संवादाता सम्मेलन में कहा कि जनगणना अधिनियम की धारा 15 के तहत सभी व्यक्तिगत जानकारी गोपनीय रहती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जनगणना का पहला चरण 16 अप्रैल से 15 मई तक होगा।
उन्होंने कहा, "जनगणना के दौरान एकत्र किया गया सभी व्यक्तिगत डेटा गोपनीय रहता है। इसे सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत किसी भी सरकारी या गैर सरकारी संगठन के साथ साझा नहीं किया सकता है। इसे अदालत में साक्ष्य के रूप में उपयोग भी नहीं किया जा सकता है ।" उन्होंने कहा कि सांख्यिकीय डेटा का उपयोग केवल सारणीबद्ध करने के लिए किया जाएगा।जाति को जनगणना में शामिल करने और लोगों द्वारा सही जानकारी नहीं दिए जाने की आशंका के बारे में पूछे जाने पर महापंजीयक और जनगणना आयुक्त ने कहा कि जाति से संबंधित डेटा दूसरे चरण में एकत्र किया जाएगा और इसके प्रश्न व्यापक चर्चा के बाद तय किए जाएंगे। उन्होंने कहा, "जाति से संबंधित सूचना कैसे एकत्र किये जाएं, इस बारे में कई सुझाव आए हैं। उन सभी पर विचार किया जाएगा और प्रश्नों को अंतिम रूप देने से पहले सबसे अच्छे सुझाव को सामने रखा जाएगा।" महापंजीयक ने कहा, "व्यक्तिगत जानकारी का किसी भी उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता है। केवल समग्र सांख्यिकीय जानकारी ही सार्वजनिक की जाती है।" उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत डेटा का उपयोग किसी सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं है, इसलिए इसके दुरुपयोग की आशंका निराधार है। जाति आधारित अंतिम व्यापक गणना 1881 और 1931 के बीच की गई थी। स्वतंत्रता के बाद से सभी जनगणनाओं से जाति को बाहर रखा गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की राजनीतिक मामलों की समिति ने पिछले साल 30 अप्रैल को आगामी जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने का निर्णय लिया था। नारायण ने कहा कि भारतीय एजेंसियों द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुरूप डिजिटल सुरक्षा के लिए कड़े उपाय किए गए हैं । उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान कोई भी दस्तावेज नहीं लिया जायेगा।उन्होंने कहा, "इसमें किसी भी तरह की हेराफेरी की कोई गुंजाइश नहीं है। लोगों के पास स्व गणना करने का विकल्प है; स्व गणना पूरी होने के बाद भी उसकी पुष्टि करने के वास्ते एक गणक घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेगा। हर छह गणक पर एक पर्यवेक्षक होता है, जिससे किसी भी तरह की हेराफेरी को रोकने के लिये यह दोहरी सुरक्षा प्रक्रिया बन जाती है।'' नारायण ने बताया कि जनगणना में पहली बार स्व-गणना की व्यवस्था शुरू की गई है, जिससे लोगों को आवास सूचीकरण और आवास गणना के पहले चरण से पहले, संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अधिसूचित 15 दिनों की अवधि के दौरान डिजिटल रूप से अपनी जानकारी जमा करने की अनुमति मिलेगी। आवास सूचीकरण अभियान (एचएलओ) इस वर्ष एक अप्रैल एवं 30 सितंबर के बीच हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश द्वारा निर्दिष्ट 30 दिनों की अवधि के दौरान होगा। आवास सूचीकरण अभियान शुरू होने से ठीक पहले 15 दिनों की अवधि में स्व-गणना करने का विकल्प भी उपलब्ध होगा। दिल्ली में, एचएलओ का चरण 30-30 दिनों के दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) और दिल्ली छावनी क्षेत्रों में यह प्रक्रिया 16 अप्रैल से 15 मई तक चलेगी, जबकि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) क्षेत्र में यह 16 मई से 15 जून तक चलेगी। एनडीएमसी और दिल्ली छावनी क्षेत्रों के लिए स्व-गणना एक अप्रैल से शुरू होगी, जबकि एमसीडी के लिए यह एक मई से 15 मई तक चलेगी। दस राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अप्रैल में जनगणना का पहला चरण शुरू करने के लिए अधिसूचना जारी की है, 15 राज्य मई में शुरू करेंगे और 10 राज्य जून या उसके बाद शुरू करेंगे। नारायण ने कहा, "एक बार डेटा का मिलान और प्रमाणीकरण हो जाने पर, प्रक्रिया पूर्ण मानी जाएगी।"उन्होंने कहा कि स्व गणना करने वाले व्यक्ति को गणकों के दौरे के दौरान किसी भी गलत डेटा को सुधारने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा, "पहले डेटा कागज पर एकत्र किया जाता था, जिससे डिजिटलीकरण में काफी समय लगता था। हम अब शुरु से ही डिजिटल डेटा एकत्र करेंगे, इसलिए हम बहुत जल्दी डेटा जारी कर सकेंगे। कई डेटा सेट 2027 में ही प्रकाशित किए जाएंगे।" नारायण ने कहा कि यह सुविधा केवल देश में रहने वाले लोगों के लिए उपलब्ध होगी, विदेश में रहने वालों के लिए नहीं। महापंजीयक और जनगणना आयुक्त ने यह भी बताया कि डेटा मोबाइल ऐप के माध्यम से एकत्र किया जाएगा, और एक वेब पोर्टल जनगणना और आवास सूचीकरण की विभिन्न गतिविधियों की निगरानी व प्रबंधन करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी को अद्यतन किये जाने के संबंध में अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है और इसका निर्वाचन आयोग द्वारा किए जा रहे मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से कोई संबंध नहीं है। नारायण ने कहा कि जनगणना के पहले चरण में आवास की स्थिति से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे और इस चरण में जाति या धर्म सहित कोई भी व्यक्तिगत जानकारी एकत्र नहीं की जाएगी। एक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, पहले चरण के दौरान अधिकारी परिवार के मुखिया का नाम और लिंग, सर्वेक्षण किए जा रहे मकान के स्वामित्व की स्थिति, परिवार के पास विशेष रूप से मौजूद रहने के कमरों की संख्या, और घर में रहने वाले विवाहित जोड़ों की संख्या सहित अन्य कई सवालों के बारे में जानकारी एकत्र करेंगे। वर्ष 2021 में होने वाली दशकीय जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित कर दी गई थी।महापंजीयक ने 33 प्रश्नों की सूची जारी की है, जो जनगणना के पहले चरण - परिवार सूचीकरण और आवास गणना - के दौरान नागरिकों से पूछे जाएंगे। -
नयी दिल्ली. नौसेना को सोमवार को सरकारी स्वामित्व वाली गार्डन रीच शिपबिल्डिंग एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) द्वारा निर्मित तीन नये जहाज प्राप्त हुए। दूनागिरि, संशोधक और अग्रय नाम के इन जहाजों से नौसेना की समग्र युद्धक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। दूनागिरि, प्रोजेक्ट 17ए के तहत नीलगिरी श्रेणी का पांचवां जहाज है और इस श्रेणी का दूसरा पोत भी है। प्रोजेक्ट 17ए के अंतर्गत बनाए गए ये जहाज बहुउद्देश्यीय प्लेटफॉर्म हैं, जिन्हें समुद्री क्षेत्र में वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस जहाज का नाम पुराने आईएनएस दूनागिरि से लिया गया है, जो एक लीएंडर श्रेणी का फ्रिगेट था और 1977 से 2010 तक भारतीय नौसेना के बेड़े का हिस्सा रहा। नौसेना के अनुसार, इस पोत में ब्रह्मोस मिसाइल, रॉकेट और टॉरपीडो जैसे शक्तिशाली हथियारों का समावेश किया गया है। जहाज "संशोधक" एक सर्वेक्षण पोत। यह बंदरगाहों के तटीय और गहरे समुद्री क्षेत्रों का पूर्ण स्तर पर हाइड्रोग्राफिक सर्वे करने में सक्षम है। 110 मीटर लंबाई वाले संशोधक में अत्याधुनिक हाइड्रोग्राफिक उपकरण लगे हैं। इसी श्रेणी के अन्य जहाज़—आईएनएस संधायक, आईएनएस निर्देशक और आईएनएस इक्षाक—को क्रमशः फरवरी 2024, दिसंबर 2024 और नवंबर 2025 में सेवा में शामिल किया गया था। अग्रय आठ अर्नाला श्रेणी के पनडुब्बी रोधी उथले जल पोतों में से चौथा है। इस पोत का नाम पूर्ववर्ती आईएनएस अग्रय से लिया गया है, जो एक गश्ती पोत था और जिसे 2017 में सेवामुक्त कर दिया गया था। नौसेना ने एक बयान में कहा कि यह पोत घरेलू रक्षा विनिर्माण प्रणाली की बढ़ती मजबूती और आयात पर निर्भरता कम करने के निरंतर प्रयासों का प्रमाण है। तीनों पोतों को कोलकाता में नौसेना को सौंप दिया गया।
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इंदौर (मध्यप्रदेश). चिकित्सा जगत के दुर्लभ मामले में इंदौर के एक सरकारी अस्पताल में 27 वर्षीय महिला ने तीन बच्चों को जन्म दिया है और उच्च जोखिम वाले इस प्रसव के बाद जच्चा व तीनों नवजात शिशु स्वस्थ हैं। अस्पताल के एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के चिकित्सा महाविद्यालय से जुड़े अस्पताल में 27 वर्षीय महिला ने दो लड़कियों और एक लड़के को रविवार (29 मार्च) को सामान्य तरीके से जन्म दिया। महाविद्यालय की सहायक प्रोफेसर डॉ. रुचि जोशी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, " प्रसव से पहले महिला की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में उसके गर्भ में केवल दो बच्चे दिखाई दे रहे थे। उसने पहले दो लड़कियों को जन्म दिया। तभी हमें लगा कि उसके गर्भ में एक बच्चा और है। बाद में उसने एक लड़के को जन्म दिया।" उन्होंने बताया कि प्रसव के तय समय से पहले पैदा हुए तीनों बच्चों का वजन 1.70 किलोग्राम से 1.90 किलोग्राम के बीच है और जन्म के तुरंत बाद से उन्हें विशेष देखभाल प्रदान की जा रही है। डॉ. जोशी ने बताया, "जच्चा और तीनों बच्चे फिलहाल स्वस्थ हैं। उनकी सेहत पर लगातार नजर रखी जा रही है।" उन्होंने बताया कि इंदौर के पास स्थित पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र की रहने वाली महिला दूसरी बार मां बनी है और उसकी एक बेटी पहले से है।
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नई दिल्ली। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जंयती पर आज मंगलवार को देश भर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को महावीर जयंती की शुभकामनाएं दी हैं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री आज को गुजरात में महावीर जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। पीएम मोदी समेत केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, सीएम योगी आदित्यनाथ तथा अन्य कई मुख्यमंत्रियों ने भी महावीर जयंती की शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है, “भगवान महावीर जन्म कल्याणक के पवित्र अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान महावीर का जीवन और शिक्षाएं सत्य, अहिंसा और करुणा के मार्ग को प्रकाशित करती रहती हैं। उनके आदर्श आध्यात्मिक रूप से उत्थानकारी हैं और आज के समय में भी अत्यंत प्रासंगिक हैं। समानता और दयालुता पर उनका जोर हमें समाज के प्रति हमारी साझा जिम्मेदारी की याद दिलाता है।”एक अन्य पोस्ट में लिखा है, “सत्य, सद्भाव, सद्व्यवहार और समानता पर आधारित भगवान महावीर के संदेशों में अद्भुत प्रेरणा है। उनके महान विचार सदैव मानवता के पथ-प्रदर्शक बने रहेंगे। श्रूयतां धर्मसर्वस्वं श्रुत्वा चैवावधार्यताम्। आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्॥”केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “समस्त देशवासियों को महावीर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं। त्याग, सत्य, अहिंसा के प्रतीक भगवान महावीर ने अपनी तपस्या से संपूर्ण मानव जाति के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। उनके विचार पीढ़ियों को मार्ग दिखाते रहेंगे।”उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की पावन जयंती की सभी श्रद्धालुओं एवं प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह और करुणा के शाश्वत सिद्धांतों से संपूर्ण विश्व को आलोकित करने वाली भगवान महावीर की शिक्षाएं मानवता के लिए अमर पाथेय हैं।”राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “शांति, त्याग और संयम के प्रतीक भगवान महावीर की जयंती पर समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं! आइए, हम सब मिलकर उनके ‘अहिंसा परमो धर्म’ और ‘जियो और जीने दो’ के संदेश को आत्मसात करें और एक बेहतर समाज का निर्माण करें।”मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “भगवान महावीर की जयंती की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, अस्तेय और ब्रह्मचर्य के सिद्धांत के माध्यम से उन्होंने लोककल्याण की पावन प्रेरणा प्रदान की। उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन करता हूं।”दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “आप सभी को महावीर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ। अहिंसा, सत्य और “जियो और जीने दो” का मार्ग दिखाने वाले भगवान महावीर स्वामी का जीवन शांति और करुणा की प्रेरणा देता है। प्रभु के सिद्धांत मानवता का मार्ग सदैव प्रशस्त करते रहें।”उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “अहिंसा परमो धर्म: अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और करुणा के दिव्य संदेश को जन-जन तक पहुंचाने वाले जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जयंती पर समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।”उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “अहिंसा, करुणा और सत्य के प्रतीक, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की पावन जयंती पर समस्त देश एवं प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं! भगवान महावीर के दिव्य उपदेश मानवता को अहिंसा, आत्मसंयम, सदाचार और सामाजिक समरसता के मार्ग पर अग्रसर करते हुए जीवन को श्रेष्ठ, अनुशासित एवं सार्थक बनाने की प्रेरणा देते हैं।”उन्होंने आगे लिखा कि उनका तप, त्याग और करुणा से ओत-प्रोत जीवन मानव-कल्याण की आधारशिला है। उनकी अमूल्य शिक्षाएं सदैव मानवता को नैतिकता और संयम का मार्ग दिखाती रहेंगी। -
नई दिल्ली। नीलगिरी श्रेणी (प्रोजेक्ट 17ए) के पांचवें और इस श्रेणी के दूसरे युद्धपोत, दूनागिरी (यार्ड 3023), को 30 मार्च 2026 को कोलकाता स्थित जीआरएसई में भारतीय नौसेना को सौंपा गया। इसका निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डिंग एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) में किया गया है। यह युद्धपोत डिजाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रोजेक्ट 17ए फ्रिगेट बहुमुखी बहु-मिशन प्लेटफॉर्म हैं, जिन्हें समुद्री क्षेत्र में वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है।
दूनागिरी, पूर्व में भारतीय नौसेना के बेड़े का हिस्सा रहे लिएंडर श्रेणी के फ्रिगेट आईएनएस दूनागिरी का नवीनतम स्वरूप है, जिसने 5 मई 1977 से 10 अक्टूबर 2010 तक 33 वर्षों तक राष्ट्र को गौरवशाली सेवा प्रदान की। यह अत्याधुनिक फ्रिगेट नौसेना डिजाइन, स्टील्थ, मारक क्षमता, स्वचालन और उत्तरजीविता में अभूतपूर्व प्रगति का प्रतीक है और युद्धपोत निर्माण मेंआत्मनिर्भरता का एक प्रशंसनीय उदाहरण है।युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो (डब्ल्यूडीबी) द्वारा डिजाइन किए गए और युद्धपोत निरीक्षण दल (कोलकाता) द्वारा पर्यवेक्षित पी17ए फ्रिगेट स्वदेशी जहाज डिजाइन, स्टील्थ, उत्तरजीविता और युद्ध क्षमता में एक पीढ़ीगत उपलब्धि का प्रतीक हैं। एकीकृत निर्माण के सिद्धांत से प्रेरित इस युद्धपोत का निर्माण और वितरण निर्धारित समय सीमा के भीतर किया गया है।पी17ए युद्धपोतों में पी17 (शिवालिक) श्रेणी के युद्धपोतों की तुलना में उन्नत हथियार और सेंसर लगे हैं । ये युद्धपोत संयुक्त डीजल या गैस (सीओडीओजी) प्रणोदन संयंत्रों से लैस हैं, जिनमें एक डीजल इंजन और एक गैस टरबाइन शामिल हैं जो प्रत्येक शाफ्ट पर एक नियंत्रणीय पिच प्रणोदक (सीपीपी) को संचालित करते हैं और अत्याधुनिक एकीकृत प्लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणाली (आईपीएमएस) से सुसज्जित हैं। शक्तिशाली हथियार और सेंसर में ब्रह्मोस एसएसएम, एमएफस्टार और एमआरएसएएम कॉम्प्लेक्स, 76 मिमी एसआरजीएम, और 30 मिमी और 12.7 मिमी क्लोज-इन हथियार प्रणाली का संयोजन, साथ ही पनडुब्बी रोधी युद्ध के लिए रॉकेट और टॉरपीडो शामिल हैं।दूनागिरी पिछले 16 महीनों में भारतीय नौसेना को सौंपे जाने वाला पांचवां पी17ए युद्धपोत है। पहले चार पी17ए युद्धपोतों के निर्माण से प्राप्त अनुभवों के आधार पर दूनागिरी के निर्माण की अवधि को 80 महीनों तक कम किया गया है, जबकि इसी श्रेणी के पहले युद्धपोत (नीलगिरी) के निर्माण में 93 महीने लगे थे।दूनागिरी की सुपुर्दगी देश की डिजाइन, जहाज निर्माण और इंजीनियरिंग क्षमता को प्रदर्शित करती है, और जहाज डिजाइन और जहाज निर्माण दोनों में आत्मनिर्भरता पर नौसेना के अटूट समर्पण को दर्शाती है।75 प्रतिशत स्वदेशीकरण के साथ, इस परियोजना में 200 से अधिक लघु एवं मध्यम उद्यम शामिल हैं और इसने प्रत्यक्ष रूप से लगभग 4,000 कर्मियों और अप्रत्यक्ष रूप से 10,000 से अधिक कर्मियों के लिए रोजगार सृजन को सक्षम बनाया है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भगवान महावीर की जयंती पर गांधीनगर के कोबा तीर्थ में स्थित सम्राट संप्रति संग्रहालय का उद्घाटन किया। इससे पहले अहमदाबाद एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने स्वागत किया।
उद्घाटन के बाद, पीएम मोदी ने दीर्घाओं का भ्रमण किया और विभिन्न प्रकार की प्रदर्शनियों का अवलोकन किया, जिनमें जटिल रूप से गढ़ी गई पत्थर और धातु की मूर्तियां, विशाल तीर्थ पट्टा और यंत्र पट्टा, लघु चित्र, चांदी के रथ, सिक्के और प्राचीन पांडुलिपियां शामिल थीं।अधिकारियों ने बताया कि संग्रहालय में विशाल हॉल में 2,000 से अधिक दुर्लभ कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं, जो जैन दर्शन और प्रथाओं से जुड़ी सदियों पुरानी धरोहरों और पारंपरिक संग्रहों को संरक्षित करती हैं। गैलरियों में पारंपरिक प्रदर्शनों को आधुनिक डिजिटल और ऑडियो-विजुअल उपकरणों के साथ मिलाकर आगंतुकों, शोधकर्ताओं और विद्वानों के लिए एक गहन और आकर्षक अनुभव प्रदान किया गया है।अधिकारियों के अनुसार, संग्रहालय जैन धर्म की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को प्रदर्शित करता है और इसका उद्देश्य आगंतुकों को समय के साथ धर्म के विकास की गहरी समझ प्रदान करना है। अशोक के पौत्र और जैन परंपरा में अहिंसा के प्रति समर्पण तथा जैन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए प्रसिद्ध सम्राट संप्रति के नाम पर स्थापित यह संग्रहालय जैन धर्म की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को प्रदर्शित करता है।आपको बता दें, महावीर जैन आराधना केंद्र परिसर में स्थित इस संग्रहालय में सात अलग-अलग खंड हैं, जिनमें से प्रत्येक भारत की सभ्यतागत परंपराओं के अनूठे पहलुओं को समर्पित है। यह आगंतुकों को सदियों पुराने ज्ञान और विरासत की एक व्यापक यात्रा के दर्शन कराता है। संग्रहालय पारंपरिक प्रदर्शनों को आधुनिक डिजिटल और ऑडियो-विजुअल उपकरणों के साथ एकीकृत करता है, जिससे आगंतुकों, शोधकर्ताओं और विद्वानों के लिए एक गहन और आकर्षक अनुभव का निर्माण होता है।यह संग्रहालय सदियों पुराने दुर्लभ अवशेषों, जैन कलाकृतियों और पारंपरिक विरासत संग्रहों का संरक्षण और प्रदर्शन करता है। इनमें जटिल रूप से गढ़ी गई पत्थर और धातु की मूर्तियां, विशाल तीर्थ पट्टा और यंत्र पट्टा, लघु चित्रकारी, चांदी के रथ, सिक्के और प्राचीन पांडुलिपियां शामिल हैं, जिन्हें सात भव्य दीर्घाओं में प्रदर्शित किया गया है। विशाल कक्षों में व्यवस्थित दो हजार से अधिक दुर्लभ खजानों से युक्त यह संग्रहालय आगंतुकों को जैन धर्म के विकास और इसके गहन सांस्कृतिक प्रभाव की कालानुक्रमिक समझ प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सूरीनाम के पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी के निधन पर दुख जताया और उनके व्यक्तिगत संबंध और भारत और सूरीनाम के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने में संतोखी की भूमिका को याद किया। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “मेरे दोस्त और सूरीनाम के पूर्व राष्ट्रपति, चंद्रिका प्रसाद संतोखी जी के अचानक निधन से बहुत सदमा लगा है और दुखी हूं। यह न केवल सूरीनाम के लिए बल्कि दुनिया भर में फैले भारतीय समुदाय के लिए भी एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती।”
अपनी बातचीत के बारे में बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “मुझे उनके साथ हुई कई मुलाकातें अच्छी तरह याद हैं। सूरीनाम के लिए उनकी बिना थके सेवा और भारत-सूरीनाम के संबंधों को मजबूत करने की उनकी कोशिशें हमारी बातचीत में साफ दिखती थीं। उन्हें भारतीय संस्कृति से खास लगाव था। जब उन्होंने संस्कृत में शपथ ली तो उन्होंने कई लोगों का दिल जीत लिया।”पीएम मोदी ने आगे कहा, “इस दुख की घड़ी में मैं उनके परिवार और सूरीनाम के लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। ओम शांति।” प्रधानमंत्री ने दिवंगत नेता के साथ अपनी पिछली मुलाकातों की तस्वीरें भी शेयर कीं।सूरीनाम के पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिकाप्रसाद संतोखी का 67 साल की उम्र में निधन हो गया है। स्थानीय मीडिया की तरफ से मंगलवार (भारतीय समयानुसार) को इस घटना की जानकारी दी गई। हालांकि, उनकी मौत का कारण नहीं बताया गया। पूर्व राष्ट्रपति संतोखी का भारत के बिहार राज्य के साथ एक खास कनेक्शन भी रहा है।मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सूरीनाम के पूर्व राष्ट्रपति का सोमवार को अचानक निधन हो गया। देश की वर्तमान राष्ट्रपति जेनिफर सिमंस ने 67 वर्ष के संतोखी के निधन की पुष्टि की। संतोखी 2020 से 2025 तक राष्ट्रपति के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे। वह प्रोग्रेसिव रिफॉर्म पार्टी के नेता भी थे और इससे पहले देश में न्यायिक मंत्री का पद संभाल चुके थे।सूरीनाम के वानिका जिले के लेलीडॉर्प में जन्मे संतोखी एक इंडो-सूरीनाम हिंदू परिवार से थे और नौ भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। उनके दादा-दादी 19वीं सदी में बिहार से बंधुआ मजदूर के तौर पर आए थे। उनके पिता पारामारिबो में बंदरगाह पर काम करते थे, जबकि उनकी मां एक दुकान में सहायक के तौर पर काम करती थीं। कानून प्रवर्तन में अपने शुरुआती करियर की वजह से, उन्हें ‘शेरिफ’ निकनेम मिला।संतोखी ने सूरीनाम में व्यापार, ऊर्जा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ संबंध मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। सूरीनाम में लगभग 27 फीसदी आबादी की जड़ें भारतीय बंधुआ मजदूरों से जुड़ी हैं। उन्हें प्रवासी भारतीय सम्मान दिया गया था और वे प्रवासी भारतीय दिवस में मुख्य अतिथि के तौर पर भी शामिल हुए थे।इंडो-सूरीनाम विरासत के संदर्भ में, 2020 में संतोखी का शपथ ग्रहण भारत के साथ मजबूत सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है। दरअसल, संतोखी ने संस्कृत भाषा में राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। सूरीनाम के किसी राष्ट्रपति ने पहली बार संस्कृत भाषा में शपथ ली थी। इसके साथ ही यह देश में बड़ी संख्या में मौजूद भारतीय मूल की आबादी का सम्मान भी है, जो 19वीं सदी के बंधुआ मजदूरों के वंशज हैं।पीएम मोदी ने अपने मासिक महीने के रेडियो कार्यक्रम मन की बात में पूर्व राष्ट्रपति का जिक्र किया था और भारत की जनता को भारतीय भाषा और संस्कृति के साथ उनके जुड़ाव के बारे में बताया। file photo -
नई दिल्ली। भारत में नए वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत के साथ ही 1 अप्रैल 2026 से देश के डायरेक्ट टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नया आयकर अधिनियम, 2025 लागू होने जा रहा है, जो करीब 60 साल पुराने 1961 के कानून की जगह लेगा, और इसमें नियमों, शब्दावली और टैक्स व्यवस्था में कई बदलाव किए गए हैं। नए सिस्टम में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ‘फाइनेंशियल ईयर (एफवाई)’ और ‘असेसमेंट ईयर (एवाई)’ की जगह एक ही ‘टैक्स ईयर’ होगा। इससे टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया आसान होने और लोगों को ज्यादा स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा, इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने की समय सीमा में भी बदलाव किया गया है। वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए 31 जुलाई की डेडलाइन वही रहेगी, लेकिन जो लोग ऑडिट के दायरे में नहीं आते (जैसे सेल्फ-एम्प्लॉयड और प्रोफेशनल्स), उन्हें अब 31 अगस्त तक का समय मिलेगा।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित फैसले के तहत फ्यूचर्स और ऑप्शंस में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) बढ़ा दिया गया है, जिससे डेरिवेटिव ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी। हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) क्लेम करने के नियम सख्त किए गए हैं। अब कुछ मामलों में मकान मालिक की जानकारी जैसे पैन देना जरूरी होगा। साथ ही, ज्यादा एचआरए छूट वाले शहरों की सूची में बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी शामिल किया गया है।सरकार ने कर्मचारियों को कुछ राहत भी दी है। मील (भोजन) से जुड़े टैक्स बेनिफिट बढ़ाए गए हैं और टैक्स-फ्री गिफ्ट की सालाना सीमा भी बढ़ाई गई है। पुराने टैक्स सिस्टम में बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल खर्च पर मिलने वाली छूट भी बढ़ाई गई है।अब शेयर बायबैक पर टैक्स डिविडेंड की जगह कैपिटल गेन के रूप में लगेगा, जिससे निवेशकों पर असर पड़ेगा। वहीं, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर टैक्स छूट केवल उन्हीं बॉन्ड्स पर मिलेगी जो मूल इश्यू के दौरान खरीदे गए हों। नए नियमों के तहत अब डिविडेंड या म्यूचुअल फंड से होने वाली आय पर लिए गए कर्ज के ब्याज को टैक्स में छूट के रूप में क्लेम नहीं किया जा सकेगा।अब टैक्सपेयर्स एक ही घोषणा पत्र जमा करके कई इनकम स्रोतों पर टीडीएस से बच सकते हैं। एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदने पर टीडीएस काटने के लिए अब टीएएन की जरूरत नहीं होगी, सिर्फ पैन से काम हो जाएगा। विदेश यात्रा पर टीसीएस घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि शिक्षा और इलाज के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसे पर भी टीसीएस कम किया गया है।अब टैक्सपेयर्स को रिटर्न में सुधार (रिवाइज) करने के लिए 31 मार्च तक का समय मिलेगा, हालांकि दिसंबर के बाद देरी से करने पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा।इसके अलावा, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए मुआवजे पर प्राप्त ब्याज को पूरी तरह से कर-मुक्त कर दिया गया है।वहीं, सरकार ने आकलन वर्ष 2-26-27 के लिए आयकर रिटर्न फॉर्म (आईटीआर-1 से आईटीआर-7 तक) नोटिफाई कर दिए हैं, जिससे व्यक्तियों, पेंशनभोगियों और अन्य करदाताओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने रिटर्न दाखिल करना शुरू करने में मदद मिलेगी।विशेषज्ञों का कहना है कि अपडेट किए गए फॉर्म में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं। उन्होंने बताया कि आईटीआर-1 (सहज) फॉर्म में दो मकानों से होने वाली आय भी दिखाई जा सकती है, जबकि पहले यह सीमा एक मकान तक ही थी। इससे कई करदाताओं के लिए फाइलिंग प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। - जयपुर. राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के नोहर इलाके में सोमवार को एक कार और जीप की आमने-सामने की टक्कर में तीन महिलाओं की मौत हो गई और कई बच्चों समेत करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि यह हादसा भद्रकाली बाईपास रोड पर हुआ।पुलिस के अनुसार, जीप में सवार लोग हरियाणा में एक शोक सभा में शामिल होने के बाद अपने गांव बुधवालिया लौट रहे थे। पुलिस ने बताया कि मृतकों की पहचान राजबाला (40), रोशनी (48) और कलावती देवी (40) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, गंभीर रूप से घायल लोगों में तीन से छह साल की उम्र के चार बच्चे भी शामिल हैं।
- नयी दिल्ली. केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे. पी. नड्डा ने सोमवार को कहा कि भारत में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त उर्वरक भंडार मौजूद है और पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। नड्डा ने उर्वरक कंपनियों और हरित अमोनिया बनाने वालों के बीच हरित अमोनिया की आपूर्ति से जुड़े एक समझौते पर हस्ताक्षर के अवसर पर कहा, '' यह ही नहीं, भारत ने कई संकट देखे हैं। हम उर्वरक आपूर्ति के मामले में पूरी तरह सक्षम हैं। डरने की कोई जरूरत नहीं है।'' इस समझौते को '' ऐतिहासिक और आगे की दिशा में कदम'' करार देते हुए मंत्री ने हिंदी कहावत '' आपदा में अवसर ढूंढना है'' का उल्लेख किया और कहा कि हरित अमोनिया के साथ यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।उन्होंने कहा कि सरकार उर्वरक क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में काम कर रही है। भारत ने 2024-25 में 306.67 लाख टन यूरिया का उत्पादन किया और घरेलू मांग पूरी करने के लिए 56.47 लाख टन यूरिया का आयात किया। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 11 महीनों में देश ने 98 लाख टन यूरिया का आयात किया है।सरकार ने सोमवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों के कारण यूरिया का घरेलू उत्पादन प्रभावित हुआ है और उर्वरक विभाग इसके प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठा रहा है। बयान में कहा गया, '' आगामी खरीफ 2026 मौसम के लिए कुल आवश्यकता लगभग 390 लाख टन आंकी गई है, जबकि खरीफ 2025 के दौरान वास्तविक बिक्री 361 लाख टन रही।'' सरकार ने कहा कि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में वर्तमान में पर्याप्त भंडार उपलब्ध है..'' इस समय देश में सभी प्रकार के उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। आगामी ढाई महीनों में किसी उर्वरक की बड़ी आवश्यकता नहीं है।'' खाड़ी क्षेत्र उर्वरक आयात का प्रमुख स्रोत बना हुआ है। यहां से 20-30 प्रतिशत यूरिया और 30 प्रतिशत डीएपी का आयात होता है। साथ ही भारत के लगभग 50 प्रतिशत तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आयात भी इसी क्षेत्र से होते हैं, जो यूरिया उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल है। इसके अलावा घरेलू उत्पादन में उपयोग होने वाले प्रमुख कच्चे पदार्थ और मध्यवर्ती उत्पाद जैसे अमोनिया, सल्फर और सल्फ्यूरिक अम्ल, जो फॉस्फेट एवं पोटाश (पी एंड के) उर्वरकों के उत्पादन में काम आते हैं... वे भी प्रभावित हुए हैं।--
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस पर घुसपैठियों को जमीन कब्जाने की "अनुमति" देने का आरोप लगाते हुए सोमवार को कहा कि असम में घुसपैठ केवल चुनावी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह राज्य की अस्मिता की रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय है। नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले असम में भाजपा के बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि राज्य ने लंबे समय तक अस्थिरता का दौर देखा, लेकिन पिछले एक दशक में स्थिति बदली है क्योंकि भाजपा की डबल-इंजन सरकार ने राज्य में शांति सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पहली बार वोट देने वाले और युवा मतदाताओं को असम में पिछली कांग्रेस सरकारों के "कुशासन" के बारे में याद दिलाने की जरूरत है और उन्हें आगाह करना चाहिए कि सबसे छोटी गलती भी राज्य को पीछे धकेल सकती है। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता राज्य में पार्टी की जीत की हैट्रिक सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। मोदी ने कहा, "घुसपैठ सिर्फ चुनावी मुद्दा नहीं है। यह असम की पहचान और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा का विषय है। कांग्रेस ने घुसपैठियों को अवैध तरीके से भूमि कब्जाने की अनुमति दी।" उन्होंने आरोप लगाया कि जहां-जहां घुसपैठिए बसते हैं, वे छोटे व्यवसायों और स्थानीय निवासियों की आजीविका पर कब्जा कर लेते हैं। 'मेरा बूथ, सबसे मजबूत संवाद' कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं को अवैध भूमि कब्जाने के मामलों और स्थानीय निवासियों की समस्याओं के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "लोगों को पता होना चाहिए कि कांग्रेस ने अतिक्रमण होने दिया, जबकि भाजपा अधिकारों की रक्षा कर रही है।" प्रधानमंत्री ने बताया कि पूर्वोत्तर में विभिन्न संगठनों के साथ 12 शांति समझौते किए गए हैं और कार्यकर्ताओं को यह याद दिलाना चाहिए कि कांग्रेस "सिर्फ कागजों पर समझौते करती थी।" उन्होंने कहा, "हमने वह दौर देखा है जब असम हिंसा में जल रहा था। लेकिन पिछले दशक में स्थिति बदली है और आज राज्य में नया आत्मविश्वास दिख रहा है।" मोदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासन में शांति समझौतों को नजरअंदाज किया गया और युवाओं को अशांति की ओर धकेला गया। उन्होंने कहा, "कांग्रेस शासन के दौरान उग्रवादी और छात्र संगठनों के साथ कोई समझौता सफल नहीं हुआ। कांग्रेस ने बोडो मुद्दे के साथ विश्वासघात किया।" उन्होंने कहा कि भाजपा ने शांति स्थापित करने और युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने के लिए काम किया है और समझौतों को ईमानदारी से लागू किया जा रहा है। उन्होंने बोडो क्षेत्रों की संस्कृति को समृद्ध बताते हुए कहा कि दशकों तक कांग्रेस ने इस क्षेत्र की अनदेखी की। उन्होंने कहा, "बोडोलैंड कभी कर्फ्यू और बम धमाकों से जूझता था, लेकिन आज वहां शांति व स्थिरता है। यह देश के लिए एक बड़ा मॉडल है।" उन्होंने कहा कि राज्य के विकास के लिए शांति सबसे जरूरी है। प्रधानमंत्री ने भाजपा कार्यकर्ताओं को एआई से बने वीडियो से लोगों को सावधान करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता ऐसे कार्यक्रम आयोजित करें जहां हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हुए लोगों के अनुभव साझा किए जा सकें। मोदी ने कहा कि सभी कार्यकर्ताओं के पास नमो ऐप होना चाहिए, जिससे उन्हें 'नारी शक्ति' के सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं की जानकारी मिलेगी। उन्होंने कहा, "भाजपा की डबल-इंजन सरकार देशभर में महिलाओं की पहली पसंद है।"
प्रधानमंत्री ने 'अरुणोदय' योजना और 'लखपति दीदी' कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनकी सफलता की कहानियां डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को चाय बागानों के बूथों पर जाकर 'चाय पर चर्चा' जैसे कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए और लोगों की समस्याएं सुननी चाहिए। मोदी ने कहा कि चाय बागान के श्रमिकों को दिए गए भूमि अधिकार उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित करेंगे और उनकी गरिमा सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार चाय बागान श्रमिकों तक केंद्र की योजनाएं नहीं पहुंचने दे रही है। असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव के लिए नौ अप्रैल को मतदान होगा। राज्य में 2016 से भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार है। -
नयी दिल्ली. कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की सेहत में "शानदार सुधार" हुआ है और अब वह "पूरी तरह से सामान्य" हैं तथा उन्हें अस्पताल से छुट्टी देने पर जल्द फैसला होने की उम्मीद है। चिकित्सकों ने सोमवार को यह जानकारी दी। बुखार आने के बाद उन्हें 24 मार्च को रात करीब 10.22 बजे सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
अस्पताल के अध्यक्ष डॉ. अजय स्वरूप के अनुसार, गांधी को अब भी नसों के माध्यम से एंटीबायोटिक दवा दी जा रही हैं, जो कुछ और दिनों तक जारी रहेंगी, हालांकि उनके स्वास्थ्य संबंधी सभी संकेतक सामान्य सीमा के भीतर हैं। उन्होंने कहा, "मरीज और इलाज करने वाले चिकित्सक से चर्चा के बाद ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी देने का फैसला लिया जाएगा। अन्यथा, वह पूरी तरह स्वस्थ हैं।" चिकित्सकों ने बताया कि उनका 'सिस्टमेटिक इंफेक्शन' का इलाज किया रहा है और एंटीबायोटिक दवाओं का उन पर अच्छा असर हो रहा है। वह वरिष्ठ चिकित्सकों की एक टीम की निगरानी में हैं और उनकी हालत स्थिर है। एहतियात के तौर पर सोनिया गांधी को कुछ समय के लिए निगरानी में रखा जा सकता है। -
नई दिल्ली। लोकसभा में सोमवार को जानकारी दी गई कि एशियाटिक सोसायटी, कोलकाता ने 23 मार्च तक कुल 2,033 पांडुलिपियों को स्कैन किया है। इन पांडुलिपियों में कुल 1,46,099 पेज शामिल हैं। यह कार्य ज्ञान भारतम मिशन के तहत संस्था को क्लस्टर सेंटर बनाए जाने के बाद किया गया।
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लिखित जवाब में बताया कि एशियाटिक सोसायटी अब तक 11,528 पांडुलिपियों को डिजिटाइज कर चुकी है, जिनमें कुल 5,72,890 पेज शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस पहल से देश की प्राचीन ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने में मदद मिल रही है।मंत्री ने बताया कि संस्था में आग से बचाव और आपदा प्रबंधन के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। सोसायटी का संपर्क राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, पश्चिम बंगाल सरकार के फायर एवं इमरजेंसी विभाग और स्थानीय पुलिस से लगातार बना रहता है।उन्होंने बताया कि सोसायटी की ऐतिहासिक इमारत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीन है और इसके संरक्षण व मरम्मत का काम एएसआई द्वारा किया जाता है।शेखावत ने कहा कि म्यूजियम में रखी पांडुलिपियों, दुर्लभ पुस्तकों और वस्तुओं के लिए उचित तापमान और नमी बनाए रखने की व्यवस्था की गई है। संस्था समय-समय पर इनकी स्थिति की जांच भी करती है, जो क्यूरेटर की निगरानी में कैटलॉगिंग स्टाफ द्वारा की जाती है।उन्होंने बताया कि सोसायटी के पास अपना संरक्षण और बाइंडिंग सेक्शन भी है। वर्ष 2022 में पांडुलिपि संरक्षण केंद्र बनने के बाद से अब तक 35,624 पन्नों का संरक्षण और 4,596 दुर्लभ पन्नों की मरम्मत की जा चुकी है। म्यूजियम और आर्काइव सेक्शन में कैटलॉग तैयार करना एक नियमित प्रक्रिया के रूप में जारी है। -
-केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोक सभा में वामपंथी उग्रवाद से देश को मुक्त कराने के प्रयास पर चर्चा का जवाब दिया
-गरीबी के कारण नक्सलवाद नहीं फैला, नक्सलवाद के कारण गरीबी फैली
-कम्युनिस्ट पार्टी अन्याय का विरोध करने के लिए नहीं, बल्कि हमारी संसदीय प्रणाली का विरोध करने के लिए बनी
-नक्सली हिंसा करने वालों के दिन अब लद गए हैं
-नक्सलवाद का मूल कारण विकास की कमी नहीं बल्कि वामपंथी विचारधारा है, जिसे 1969 में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए तत्कालीन सत्तारूढ़ दल की नेता ने इसे स्वीकार कर लिया था
-नक्सल-मुक्त भारत मोदी सरकार की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक
--जिस कम्युनिस्ट पार्टी की नींव ही दूसरे देश की विचारधारा से प्रेरित हो, वो भारत का भला कैसे करेगी?
-माओवादियों ने रेड कॉरिडोर भेदभाव का विरोध करने कल इए नहीं बल्कि सरकार की पहुँच कम होने के कारण चुना था
-वामपंथी विचारधारा के समर्थकों ने भगवान बिरसा मुंडा, शहीद भगत सिंह या सुभाष चंद्र बोस को नहीं बल्कि “MAO” को अपना आदर्श माना
-ये मोदी सरकार है जो हथियार उठायेगा उसको हिसाब देना पड़ेगा
-लाल आतंक की परछाई थी इसलिए बस्तर विकास से पिछड़ गया था, लाल आतंक की परछाई हट गई, अब बस्तर विकसित हो रहा है
-नक्सलमुक्त भारत मोदी सरकार के सबसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण सफलता
नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज लोक सभा में नियम 193 के अंतर्गत वामपंथी उग्रवाद (LWE) से देश को मुक्त कराने के प्रयास पर चर्चा का जवाब दिया।चर्चा का जवाब देते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि वामपंथी उग्रवादियों और उनके समर्थकों ने भोले भाले आदिवासियों के सामने एक गलत प्रकार का नेरेटिव रखा गया था कि वे उनके अधिकारों और उन्हे न्याय दिलाने के लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज बस्तर से नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है और वहां हर गांव में स्कूल बनाने और राशन की दुकान खोलने की मुहिम शुरू हो चुकी है। गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद की वकाल करने वाले बताएं कि 1970 से अब तक यह सब क्यों नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि 2014 में श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार आने के बाद पूरे देश के हर गरीब को घर, गैस, पीने का पानी, 5 लाख तक का बीमा, 5 किलो मुफ्त अनाज मिला, लेकिन बस्तर वाले छूट गए क्योंकि सत्य को झुठलाया गया और लाल आतंक की परछाई के कारण वहां विकास नहीं पहुंचा था। श्री शाह ने कहा कि लाल आतंक इसीलिए नहीं था कि वहां विकास नहीं था, बल्कि लाल आतंक के कारण वहां विकास नहीं हुआ था, लेकिन आज लाल आतंक की परछाई हट गई है और बस्तर विकसित हो रहा है।श्री अमित शाह ने कहा कि यह नरेन्द्र मोदी जी की सरकार है और जो भी हथियार उठाएगा उसे हिसाब चुकता करना पड़ेगा। गृह मंत्री ने कहा कि सरकार संवेदनशील है और सभी समस्याओं को सुनना और उनका निराकरण करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने योजनाएं बनाई हैं लेकिन उन पर अमल नहीं करने देंगे क्योंकि वामपंथी उग्रवादी और उनके समर्थकों की आइडियोलॉजी यानी उनका अवैध शासन वहां चलता रहे। श्री शाह ने कहा कि आजादी के बाद 75 साल में से 60 साल तक देश में मुख्य़ विपक्षी पार्टी का शासन रहा तब भी आदिवासी विकास से महरूम कैसे रहे। उन्होंने कहा कि विकास तो अब नरेन्द्र मोदी जी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टी को अपने अंदर झांककर देखना चाहिए कि दोषी कौन है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार, बंगाल, केरल, कर्नाटक के कुछ हिस्से और उत्तर प्रदेश के 3 ज़िलों सहित 12 राज्यों में पूरा रेड कॉरिडोर बनाकर रखा था। इन क्षेत्रों में 12 करोड़ लोग सालों तक गरीबी में जीते रहे और 20,000 युवा मारे गए इसके लिए कौन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद का मूल कारण विकास की मांग नहीं बल्कि एक आइडियोलॉजी है। नक्सलवाद का मूल कारण विकास की कमी नहीं बल्कि वामपंथी विचारधारा है, जिसे 1969 में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए तत्कालीन सत्तारूढ़ दल की नेता ने स्वीकार कर लिया था।
श्री अमित शाह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने पूरे देश के सामने स्वीकारा किया था कि कश्मीर और नॉर्थईस्ट की तुलना में देश की आंतरिक सुरक्षा के सामने सबसे बड़ी समस्या हथियारबंद माओवादी हैं। उन्होंने कहा कि 2014 में परिवर्तन हुआ और प्रधानमंत्री मोदी जी के शासन में कई वर्षों पुरानी समस्याओं का निराकरण हुआ, धारा 370 और 35A हट गई, राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बन चुका है, GST आज वास्तविकता बन चुका है, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) बन चुका है, विधायी मंडलों में मातृशक्ति को 33% आरक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा कि आजादी के वक्त से इस देश की जनता जो कई सारे बड़े काम चाहती थी वे सभी काम नरेन्द्र मोदी जी के शासन के 12 साल में हुए और अब नक्सलवाद से मुक्त भारत की रचना भी नरेन्द्र मोदी जी के शासन के अंदर ही होगी। श्री शाह ने कहा कि पिछले 12 साल देश के लिए बहुत शुभ साबित हुए हैं। देश को गरीबी से मुक्ति दिलाने, युवाओं के लिए नई शिक्षा पद्धति लाने, आंतरिक और बाह्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने, देश के मूलों से न जुड़ी नीतियों को दरकिनार करने के लिए गत 12 साल में बहुत कुछ हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर सबसे अधिक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसले को देखा जाए तो निसंकोच नक्सलमुक्त भारत सबसे ऊपर होगा।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलमुक्त भारत जो बड़ी घटना देश में आकार लेने जा रही है, उसका पूरा श्रेय हमारे केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, विशेषकर कोबरा और सीआरपीएफ के जवानों, राज्य पुलिस, विशेषकर छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस और डीआरजी के जवानों और स्थानीय आदिवासियों को जाता है। उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवाद के समाप्त होने में जनता का भी बड़ा योगदान है।
श्री अमित शाह ने कहा कि इस विचारधारा का विकास और विकास की मांग से भी कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि यह कौन सी विचारधारा है? क्या है माओवादी विचारधारा? इसका ध्रुव वाक्य क्या है? इनका ध्रुव वाक्य है कि सत्ता बंदूक की नली से निकलती है। ये विकास के लिए नहीं बल्कि अपनी आइडियोलॉजी के अस्तित्व, उसकी विजय और आइडियोलॉजी को भोले-भाले आदिवासियों में फैलाकर कर सत्ता हासिल करने के लिए है। इनका लोकतंत्र पर कोई विश्वास नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने इनकी तुलना भगत सिंह जी और बिरसा मुंडा से कर दी। शहीद भगत सिंह और भगवान बिरसा मुंडा, जो अंग्रेजों के सामने लड़े, उनकी तुलना आप संविधान तोड़कर हाथ में हथियार लेकर निर्दोषों की हत्या करने वालों लोगों के साथ कर रहे हैं? यह विचारधारा कहती है कि दीर्घकालीन युद्ध ही उनकी विचारधारा को फैला सकता है। उनको अपने लोगों का खून बहाने से भी कोई परहेज़ नहीं है। इस विचारधारा के समर्थकों ने भगवान बिरसा मुंडा, शहीद भगत सिंह या सुभाष चंद्र बोस को नहीं बल्कि माओं को अपना आदर्श माना है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि सच्चाई यह है कि इन्होंने पूरे रेड कॉरिडोर को इसीलिए चुना था क्योंकि वहां राज्य की पहुंच कम थी। भोले भाले आदिवासियों को बरगलाकर उनके हाथों में हथियार पकड़ा दिए गए। उन्होंने कहा कि जो आदिवासी 15 अगस्त 1947 से पहले भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, रानी दुर्गावती, मुर्मू बंधुओं को हीरो मानकर चलता था, वह आदिवासी 1970 आते-आते माओ को अपना हीरो कैसे मानने लगा? श्री शाह ने कहा कि विकास और अन्याय के कारण नहीं बल्कि कठिन भूगोल और राज्य की अनुपस्थिति के कारण अपनी विचारधारा को फैलाने के लिए वामपंथियों ने इस क्षेत्र को चुना और भोले-भाले आदिवासियों को बरगलाना शुरू किया। उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवादियों ने सालों तक उस क्षेत्र में विकास को पहुंचने नहीं दिया, लेकिन अब नरेन्द्र मोदी जी के शासन में वहां घर-घर विकास पहुंच रहा है। गृह मंत्री ने कहा कि गरीबी के कारण नक्सलवाद नहीं फैला, बल्कि नक्सलवाद के कारण इस पूरे क्षेत्र में वर्षों तक गरीबी रही। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की जड़ें गरीबी और विकास से नहीं जुड़ी बल्कि वैचारिक हैं।श्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलबाड़ी में साक्षरता का दर 32%, बस्तर में 23%, सहरसा, बिहार में 33% और बलिया, उत्तर प्रदेश में 31% था। इसी प्रकार, नक्सलबाड़ी में प्रति व्यक्ति आय ₹500, बस्तर में ₹190, सहरसा में ₹299 और बलिया में ₹374 थी। उन्होंने कहा कि चारों क्षेत्र में प्रति व्यक्ति आय भी एक समान थी, लेकिन नक्सलबाड़ी और बस्तर में वामपंथी उग्रवाद पनपा और सहरसा और बलिया में नहीं। ऐसा इसीलिए हुआ क्योंकि सहरसा और बलिया का भूगोल उनके अनुकूल नहीं था, वहां घने जंगल, नदी नाले, छुपने की पहाड़ियां नहीं थी, हथियार लेकर अपनी मूवमेंट करने, आदिवासियों को दबाने और उनको जबरदस्ती अपनी आइडियोलॉजी के साथ जोड़ने की अनुकूलता नहीं थी। उन्होंने कहा कि अगर विकास ही पैमाना होता, अगर प्रति व्यक्ति आय ही पैमाना होता, तो देश के बहुत सारे हिस्से ऐसे थे जहां 1970 में विकास नहीं पहुंचा था, लेकिन वहाँ नक्सलवाद क्यों नहीं फैला?
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि ये डरने वाली नहीं बल्कि सबके साथ न्याय करने वाली सरकार है। उन्होंने कहा कि 1970 के दशक में नक्सलवाद की शुरुआत नक्सलबाड़ी और बंगाल से हुई। 1971 के एक ही वर्ष में वहां 3620 हिंसा की घटनाएं हुई थीं,1980 का दशक आते-आते पीपल्स वॉर ग्रुप बन गया और फिर यह महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा राज्यों में फैला। 1990 के दशक में वामपंथी विचारधारा सिकुड़ती गई और यहां पर भी उग्रवादी गुटों और वामपंथी पार्टियों में विलय शुरू हुआ। 2004 में दो प्रमुख गुट मिल गए और सीपीआई माओवादी का गठन किया। 1970 से 2004 के कालखंड में चार साल छोड़कर पूरा समय मुख्य विपक्षी पार्टी का शासन रहा है।
अमित शाह ने कहा कि यही समय है जब नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ ये आंदोलन 12 राज्यों, देश के 17% भूभाग और 10% से ज्यादा आबादी में पहुंच गया। उन्होंने कहा कि सत्ता के समर्थन के बगैर देश के बीचो-बीच, तिरुपति से लेकर पशुपतिनाथ तक, रेड कॉरिडोर संभव ही नहीं था। उन्होंने कहा कि जो हथियार पकड़े गए हैं, उसमें से 92% हथियार पुलिस से लूटे हुए थे। थाने लूट लिए गए, गोलियां लूट ली गई और उनका उपयोग निर्दोष जवानों, बच्चों, कृषकों को मारने के लिए किया गया। वामपंथी विचारधारा ने इसे एक भ्रांति की तरह प्रोपेगेंडा के माध्यम से अपनी विचारधारा को टिकाने के लिए फैलाया कि अन्याय से बचने के लिए हथियार हाथ में उठाए।केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है कि किसी भी समस्या का समाधान बहस से निकल सकता है, हथियारों से नहीं। उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने इस देश में वैक्यूम खड़ा करने का प्रयास किया, स्टेट का वैक्यूम, सारी व्यवस्थाएं नष्ट कर गवर्नेंस का वैक्यूम, संविधान से श्रद्धा खत्म कर संविधान का वैक्यूम और पुलिस थानों को जलाकर सिक्योरिटी वैक्यूम खड़ा करने का प्रयास किया है। गृह मंत्री ने कहा कि माओवादी और नक्सली हिंसा करने वालों के दिन अब लद गए हैं और मोदी सरकार में ये लंबे समय नहीं चलेगा।श्री अमित शाह ने कहा कि माओवादी उग्रवादियों को अन्याय के खिलाफ हथियारों की लड़ाई लडने वालों की तरह मानने की गलती नहीं करनी चाहिए क्योंकि वामपंथी विचारधारा अपना आधार खो बैठी है इसलिए सारे वामपंथी अलग-अलग थ्योरी रच-रच कर अपने अस्तित्व को बचाने में लगे हैं। इनका एकमात्र एजेंडा है, देश में वैक्यूम खड़ा करना है। स्टेट, गवर्नेंस, संविधान और सिक्योरिटी का वैक्यूम खड़ा कर रक्तपात करना ही उनका उद्देश्य है जो अब सफल नहीं होगा। श्री शाह ने कहा कि नक्सलियों ने कई सारे भोले-भाले ग्रामीणों को एनिमी इन्फॉर्मर बताकर फांसी पर चढ़ा दिया। इन्होंने जनता अदालत के नाम से एक दिखावा किया जहां न कोई वकील है, न जज है, वे स्वयं बैठे हैं, स्वयं फैसले करते हैं और फांसी देते हैं।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलियों ने ना जनता ना सरकार के नाम से एक भ्रांति खड़ी की और विकास योजनाओं को रोकने का काम किया। इन्हें संविधान और न्याय व्यवस्था को निशाना बनाकर संविधान का वैक्यूम खड़ा करना था। जो लोग अब कह रहे हैं बातचीत करो, उनको पता होना ताहिए कि मैं 50 बार सार्वजनिक मंचों पर बस्तर में जाकर कह चुका हूं कि हथियार डाल दीजिए, सरकार आपके पूरे पुनर्वास की व्यवस्था करेगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की पॉलिसी है, चर्चा उसी से होती है जो हथियार डालता है, लेकिन जो गोली चलाता है, उसको जवाब गोली से ही दिया जाता है।श्री अमित शाह ने कहा कि जैसे ही रूस में साम्यवादियों की सरकार का गठन हुआ, यहां पर 1925 में सीपीआई की स्थापना हुई। जब रूस में कम्युनिस्टों की सरकार बनी, उसी वक्त यहां सीपीआई की स्थापना हुई। इसके बीच में कोई रिलेशनशिप है क्या? रूस की सरकार ने स्पॉन्सर कर दुनियाभर में कम्युनिस्ट पार्टी की रचना की। अब जिस पार्टी की नींव ही किसी दूसरे देश की प्रेरणा से की गई है, वो हमारे देश का भला कैसे सोचेगी? इन्होंने तो अंग्रेजों का भी समर्थन किया था। 1964 में कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सिस्ट बनी, ये भी समझने की बात है कि सीपीआईएम क्यों बना? यह भी समझना पड़ेगा कि जब सीपीआई थी, तो फिर सीपीआईएम क्यों बनी? 1964 में सोवियत रूस और चीन के बीच झगड़ा हुआ तो दोनों साम्यवादी राष्ट्र के अंदर अलग-अलग विचारधारा की साम्यवादी सरकारें आई। जैसे ही अलग-अलग विचारधारा की सरकारें आई, तो यहां पर चीन की एक समर्थित पार्टी सीपीआई मार्क्सिस्ट बना दी। इसके बाद 1969 में संसदीय राजनीति का विरोध करने के लिए सीपीआई एमएल मार्क्सिस्ट की स्थापना हुई। इसका उद्देश्य विकास का वैक्यूम बनाना या अधिकारों की रक्षा नहीं था बल्कि उसके संविधान में उद्देश्य था संसदीय राजनीति का विरोध कर सशस्त्र क्रांति करना।केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इन्होंने सशस्त्र क्रांति और संसदीय राजनीति का विरोध करने के दो उद्देश्यों के साथ सीपीआई मार्क्सिस्ट बनाई और यही आज के माओइस्ट हैं। उसके बाद 1975 में जैसे ही कांग्रेस का समर्थन मिला, एमसीसी माओइस्ट बनी और बिहार झारखंड केंद्रीय पार्टी बनी। फिर पीडब्ल्यूजी 1980 में बना। वह आंध्र केंद्रित बना। 1982 में दलित किसान केंद्रीय सशस्त्र संघर्ष सीपीआई एमएल पार्टी यूनिटी बिहार में बनी। दलित किसान केंद्रीय संघर्ष उनका उद्देश्य था। 1998 में पीपल्स वॉर ग्रुप बना और उसमें माओवादियों का एकत्रीकरण हुआ। इतना सब करने के बाद भी वह सफल नहीं हुए और 2000 में पीएलजीए बना, गुरिल्ला फोर्स बनाई और 2004 में ये पीडब्ल्यूजी एमसीसी का विलय हो गया। 2014 में मोदी जी आए और 2026 में सब की समाप्ति हो गई। ये 1925 से लेकर 2026 तक 101 साल का उनका इतिहास है। इसे अन्याय के खिलाफ संघर्ष का स्वरूप मानकर महिमामंडित मत करो। ये लोग वोट की जगह बुलेट से शासन प्राप्त करना चाहते हैं। कुछ लोग चर्चा से मानते नहीं है, वहां बल प्रयोग कर उनके अत्याचार से निर्दोष नागरिकों को बचाना पड़ता है। ये हमारी पार्टी की सरकार है और हर नागरिक की सुरक्षा नरेन्द्र मोदी जी ने सुनिश्चित की है। जो भी नागरिकों के साथ अन्याय करेगा, समझा तो ठीक है वरना ये फोर्स इसी के लिए बनाई गई है। इसका उपयोग भी होगा, परिणाम भी आएगा और आज आ भी गया हैश्री अमित शाह ने कहा कि अर्बन नक्सली कहते हैं कि हथियार उठाकर घूमने वाले माओवादियों के साथ चर्चा करो क्योंकि वो अन्याय के लिए लड़ रहे हैं, उन्हें मारना नहीं चाहिए और इनके प्रति सिंपैथी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक भी बुद्धिजीवी दिव्यांग बनने वाले किसान, 5000 से ज्यादा सिक्योरिटी फोर्सेज के जवानों, उनकी विधवाओं के लिए नहीं है, इनके अनाथ बच्चों के लिए नहीं लिखता। उन्होंने कहा कि इनकी मानवता संविधान तोड़कर हथियार लेकर घूमने वालों के लिए ही है। इनके हथियारों से जो नागरिक मारे जा रहे हैं, इनके लिए आपकी मानवता नहीं है। मानवता के दोहरे चरित्र को स्वीकार नहीं कर सकते, यह मानवतावादी नहीं हैं, बल्कि नक्सलियों के समर्थक हैं। ये लोग गरीबों के हाथ में हथियार देकर अपनी विचारधारा को फैलाना चाहते हैं, मगर उनके भी दिन लद गए हैं।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सलवा जुडूम की शुरुआत 2005 में सरकार समर्थित जनआंदोलन के रूप में हुई। आदिवासी युवाओं को एसपीओ बनाया गया और उनको आतंक फैलाने वालों के सामने लड़ने के लिए ट्रेनिंग दी गई। सलवा जुडूम की शुरुआत श्रीमान कर्मा ने की थी जिन्हें नक्सलियों ने मौत के घाट उतार दिया था। 5 जुलाई 2011 को सर्वोच्च अदालत ने नंदिनी सुंदर और अन्य लोगों ने एक विवाद दायर किया और सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस सुदर्शन रेड्डी के नेतृत्व में तय किया कि नक्सलियों के खिलाफ राज्य की ये लड़ाई गैरकानूनी है और तुरंत ही इनको हथियार वापस देने का ऑर्डर कर दिया। इसका परिणाम हुआ उनके हथियार वापस दिए गए और इन्होंने चुन-चुन कर सलवा जुडूम से जुड़े हुए लोगों को मार दिया और वही सुदर्शन रेड्डी विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के प्रत्याशी बने। जो देश की कानून और व्यवस्था को मानते हैं, वो सुदर्शन रेड्डी को कभी अपना प्रत्याशी नहीं बनाते। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति जज बनकर अपनी व्यक्तिगत आइडियोलॉजी का उपयोग कर, संवैधानिक कपड़े पहनकर, अपनी आइडियोलॉजी को ऑर्डर में कन्वर्ट कर, हजारों बेगुनाह आदिवासियों की जान जाए ऐसा फैसला देता है, तो इस जजमेंट की घोर निंदा करते हैं। आइडियोलॉजी जनता के कल्याण से ऊपर नहीं है।
श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में 2014 के बाद नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्र में 17,589 किलोमीटर सड़कें बनाने की मंजूरी दी है, जिसमें 12,000 किलोमीटर सड़कें बन चुकी हैं। विकास इसीलिए हो रहा है कि धीरे-धीरे-धीरे नक्सलवाद समाप्त हो रहा है। लगभग-लगभग 5,000 मोबाइल टावर, ₹6,000 करोड़ के खर्चे से हम लगा चुके हैं। दो अन्य योजनाओं में और 8,000 4G टावर बनाने का फैसला नरेन्द्र मोदी जी ने किया है। 1804 बैंक शाखाएं 12 साल में खुली हैं, 1321 एटीएम खुले हैं, 37,850 बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंस बनाए गए और 6025 डाकघर खुले। यह सब सिर्फ 12 साल में हुआ है। हमने माओवादियों के साथ चर्चा नहीं की, उन्हें समाप्त किया और विकास को आगे बढ़ाया। 259 एकलव्य आदर्श विद्यालय बनाए, इसके साथ-साथ 46 आईटीआई, 49 स्किल डेवलपमेंट सेंटर बनाए, 16 कौशल विकास केंद्र बनाए और लगभग इस सबके लिए 800 करोड़ रुपए का खर्च 12 साल में हमने किया है। सिविक प्रोग्राम में 212 करोड़ के कार्य किए जो स्वास्थ्य शिविर और दवाओं से जुड़े हुए हैं और जनजाति युवा एक्सचेंज के कार्यक्रम भी हमने बनाए। सिक्योरिटी के लिए राज्यों की सहायता के लिए एसआरई लेकर आए जिसमें 10 साल में 3000 करोड़ दिया। स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम लेकर आए और इसमें 5000 करोड़ दिया। उन्होंने पूछा कि ये सब 1970 से अब तक क्यों नहीं हुआ था? पिछली सरकारें करने जाती थीं तो वो धमाके कर मार देते थे। हमने धमाके करने वालों को समाप्त किया, तो अब विकास हो रहा है।केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि 2014 के बाद क्लियर पॉलिसी और स्ट्रॉन्ग पॉलिटिकल विल इस काम में जुड़ी है। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी जी ने ये स्पष्ट कर दिया इस देश के किसी भी कोने में चाहे कश्मीर हो, उत्तर पूर्व हो, या वामपंथी उग्रवादी प्रभावित क्षेत्र हो, गैरकानूनी प्रवृत्ति नहीं चलेगी और इस पर कठोर हाथों से काम होगा। केन्द्र और राज्यों के बीच में अलाइनमेंट हुआ। स्टेट की कैपेसिटी में गवर्नमेंट, गवर्नेंस और पुलिसिंग में हमने सुधार किया। सीएपीएफ और स्टेट पुलिस का समन्वय बढ़ाया। एक्शनेबल इंटेलिजेंस को नीचे तक परकोलेट करने की व्यवस्था की और जिम्मेदारियां भी स्पष्ट कर दी। ऑल एजेंसी अप्रोच शुरू किया और सिर्फ हथियार ही नहीं, बल्कि एनआईए, ईडी, इंटेलिजेंस एजेंसी, जैसे सभी नेटवर्क, फंडिंग और सपोर्ट सिस्टम, पर हमने प्रहार किया। इफेक्टिव सरेंडर पॉलिसी लेकर आए। डेवलपमेंट और गवर्नेंस में हमने कोई वैक्यूम नहीं छोड़ा और अब पहले जहां राज्य की उपस्थिति नहीं थी, वहां आज राज्य की उपस्थिति है और नक्सलवाद की हार का सबसे बड़ा कारण यह है कि राज्य अब हर गांव में पहुंच चुका है, वहां पंचायत बन चुकी है। विकास के लिए हमने Whole of Government अप्रोच लिया और सुरक्षा नकेल कसने के लिए Whole of Agency अप्रोच लिया।श्री अमित शाह ने कहा कि 20 अगस्त, 2019, 24 अगस्त 2024 और कल 31 मार्च 2026 की तीन महत्वपूर्ण तारीखों के बारे में बताना चाहूंगा। 20 अगस्त 2019 को गृह मंत्रालय में एक मीटिंग हुई और पूरा पुलिस कोऑर्डिनेशन, मॉडर्नाइजेशन, रिटायर्ड नक्सलियों को पुलिस फोर्स में लेना, इनका कोऑर्डिनेशन खुफिया एजेंसी के साथ, ये सब 20 अगस्त को डिजाइन किया। छत्तीसगढ़ में विपक्षी पार्टी की सरकार थी जिसने सहयोग नहीं दिया। बिहार 2024 के पहले नक्सलमुक्त हो चुका था, महाराष्ट्र एक तहसील छोड़कर 2024 के पहले नक्सल मुक्त हो चुका था। ओडिशा 2024 के पहले नक्सलमुक्त हो चुका था। झारखंड एक जिला छोड़कर 2024 के पहले नक्सलमुक्त हो चुका था। सिर्फ छत्तीसगढ़ बचा हुआ था क्योंकि छत्तीसगढ़ की विपक्षा पार्टी की सरकार ने नक्सलवादियों को बचा कर रखा था। जनवरी 2024 में छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार बनी और दूसरे ही दिन, वहां पूरे समर्थन का भरोसा मिल गया। साझा रणनीति बनी और 24 अगस्त 2024 को हमने घोषित किया था कि 31 मार्च 2026 को नक्सलवाद पूरे देश से समाप्त कर देंगे।केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इसके बाद हमने सुरक्षा घेरे में बढ़ोतरी की। प्रधानमंत्री मोदी जी के 11 साल में 596 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बने। नक्सल प्रभावित जिले जो 2014 में 126 थे, आज सिर्फ दो बचे हैं। मोस्ट इफेक्टेड जिले 2014 में 35 थे, आज शून्य है। नक्सल घटनाएं दर्ज करने वाले पुलिस स्टेशन जो 350 थे, आज 60 हैं। पिछले 6 साल में 406 नए सीएपीएफ के कैंप बनाए, 68 नाइट लैंडिंग हेलीपैड बनाए, 400 बुलेट प्रूफ, ब्लास्ट प्रूफ गाड़ियां हमारे जवानों को दी गई, पांच अस्पताल हमारे जवानों के लिए बनाए गए और कम्युनिकेशन की सारी व्यवस्था दुरुस्त कर दी गई।श्री अमित शाह ने कहा कि 2024, 2025 और 2026 का संयुक्त आंकड़ा देखें तो तीन सालों में मारे गए नक्सली, 2026 के मार्च तक 706 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए। 2218 गिरफ्तार हुए, उनको पकड़कर हमने जेलों में डाला है, अदालतों की शरण में ले गए और 4839 लोगों ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष संवाद की बात करता है। शासन का यही अप्रोच होना चाहिए जो वार्ता करना चाहता है, उसके साथ वार्ता करनी चाहिए और जो हमारे जवानों, किसानों, आदिवासियों, बच्चों पर गोली चलाता है, उसका जवाब गोली से देना चाहिए। हमने संवाद, सुरक्षा और समन्वय तीनों का उपयोग किया है। नवीनतम टेक्नोलॉजी का उपयोग कर सटीक निगरानी और ढेर सारे टेलीफोन बिलों का विश्लेषण किया है। लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम, मोबाइल फोन की गतिविधियां, साइंटिफिक कॉल लॉग्स, सोशल मीडिया एनालिसिस, फॉरेंसिक और तकनीकी संस्थानों की सहायता लेकर इस पूरे अभियान का गृह मंत्रालय ने नेतृत्व किया है। ड्रोन सर्वेलेंस, सैटेलाइट उपयोग, इमेजिंग टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डेटा एनालिसिस से ये सफलता प्राप्त हुई है।
बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र में बिहार में 2022 में ऑपरेशन ऑक्टोपस चला। ऑपरेशन डबल बुल गुमला, लोहरदगा और लातेहार जिलों में चला 8 से 25 फरवरी, 2022 में, तीनों जिले नक्सलवाद से मुक्त हो गए। ऑपरेशन थंडरस्टॉर्म झारखंड के सरायकेला, पश्चिमी सिंहभूम और खूंटी जिले में 1 से 3 सितंबर 2022 में चला। ऑपरेशन भीमबर्ग मुंगेर जिले के जून व जुलाई 2022 में चला। ऑपरेशन चक्रबांधा बिहार के गया और औरंगाबाद जिलों में 2022 में चला और ये सारे एरिया इससे मुक्त हो गए। ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की सीमा में 50 किलोमीटर लंबी और 37 किलोमीटर चौड़ी एक पहाड़ी पर चला। वहां पर नक्सलियों ने अपना एक परमानेंट कैंप बनाया था और वहां 5 साल लड़ सकने के लिए हथियार, सोलर लाइट की व्यवस्थाएं, ढेर सारी आईडी बनाने की फैक्ट्रियां और 5 साल का अनाज था। इसके अलावा 400 से 500 कैडर वहां पर एकत्रित थे। गृह मंत्री ने कहा कि 45 डिग्री टेंपरेचर पहाड़ पर पत्थर गर्म हो जाता था। शरीर में से 2 लीटर, 3 लीटर पसीना बह जाता था लेकिन जवानों ने उफ तक नहीं की और 21 दिन तक ऑपरेशन चला। 30 से ज्यादा माओवादी मारे गए, बाकी नीचे उतरते ही पुलिस के साथ मुठभेड़ों में मारे गए या सरेंडर कर दिया और यह पूरा असला हमने जब्त कर लिया। इसी ने महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मतलब बस्तर और तेलंगाना में माओवादी आंदोलन का अंत कर दिया। श्री शाह ने कहा कि कोबरा, सीआरपीएफ, डीआरजी और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों ने अमानवीय धैर्य के साथ इनके किले को तोड़ा है।केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सेंट्रल कमिटी मेंबर और पोलित ब्यूरो मेंबर 2024 की शुरुआत में कुल 21 थे, जो इनकी पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व है। एक पकड़ा गया है, सात सरेंडर हुए हैं, 12 मारे गए हैं और एक फरार है, उसके साथ भी वार्ता चल रही है। 21 के 21 सेंट्रल कमिटी मेंबर और पोलित ब्यूरो मेंबर समाप्त हो चुके हैं और उनकी केंद्रीय व्यवस्था टूट चुकी है। दंडकारण्य में 27 की स्टेट कमेटी थी, तीन अरेस्ट हुए, 20 सरेंडर हुए, 11 मारे गए और दो से बातचीत जारी है। दंडकारण्य की उनकी मुख्य स्टेट कमेटी थी, वो समाप्त हो चुकी है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, एमएमसी स्टेट कमेटी, तीन सरेंडर कर गए, तीन की ही बची थी। ओडिशा, चार बचे थे, एक सरेंडर हुआ, तीन मारे गए। ओएससी, ओडिशा, पांच ने सरेंडर किया, पांच मारे गए, 10 ही थे। डिस्टर्ब रीजन ब्यूरो, अरेस्ट एक हुआ, तीन मारे गए, एक फरार है। तेलंगाना में छह सरेंडर हो गए, तीन मारे गए, एक भी नहीं बचा है तो उनकी पोलित ब्यूरो मेंबर और सीएमसी पूरा समाप्त हो चुका है। हमने लक्ष्य रखा था कि 31 मार्च को देश को नक्सलवाद मुक्त करेंगे और हम नक्सलमुक्त हो गए हैं, ऐसा कहने में अब कोई संकोच नहीं है। बसव राजू उनके महासचिव न्यूट्रलाइज हुए, हिड़मा जिन्होंने 27 लोगों को मारा था, गजुरल्ला रवि 11 वर्ष से एक्टिव थे, न्यूट्रलाइज हुए।कदारी सत्यनारायण रेड्डी 46 वर्ष से एक्टिव थे, न्यूट्रलाइज हुए। गणेश उइके 44 वर्ष से एक्टिव थे, न्यूट्रलाइज हुए। वेणुगोपाल आत्मसमर्पण किया। 46 वर्ष से एक्टिव थे। वासुदेव आत्मसमर्पण किया, 36 वर्ष से एक्टिव थे। पल्लूरी प्रसाद राव चंदना 46 वर्ष से एक्टिव थे, आत्मसमर्पण किया। रामदेव मांझी देबू 36 वर्ष से एक्टिव थे, समर्पण किया। टिपरी तिरुपति 44 वर्ष से एक्टिव थे, उन्होंने भी सरेंडर कर दिया है। सभी मुख्य हथियारी माओवादी समाप्त हो चुके हैं। हमने ल्यूक्रेटिव पुनर्वास पॉलिसी को अपनाया है, जिसमें आत्मसमर्पण की प्रोत्साहन राशि 50,000 घोषित की गई है, जो सामूहिक सरेंडर पर दोगुना कर देते हैं। मोबाइल सबको सरकार की ओर से देते हैं। हथियार जमा कराने पर और मुआवजा देते हैं। पुनर्वासन केंद्र पर कौशल प्रशिक्षण व टूल किट का वितरण करते हैं। ₹10,000 प्रति माह 36 माह तक हम उनको देते हैं। सभी को मोदी जी ने प्रधानमंत्री आवास योजना की गिफ्ट दी है। नक्सल मुक्त पंचायत होते ही गांव के विकास के लिए ₹1 करोड़ दिया जाता है।
श्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलियों ने 15000 बच्चों का जीवन बर्बाद कर दिया इसका जिम्मेदार कौन है? उन्होंने कहा कि आप तो एसी चेंबर में बैठकर कोर्ट के प्रोटेक्शन के तहत आर्टिकल लिखते हैं और वहां जीवन के जीवन उजड़ गए हैं और किसी को परवाह नहीं है। उन्होंने कहा कि जो अपने आप को ह्यूमन राइट का चैंपियन मानते हैं उनसे पूछा जाए कि 32 साल की आयु तक मेहंदी ना लगाने वाली बच्ची के ह्यूमन राइट की कौन चिंता करेगा? उन्होंने कहा कि उसकी चिंता नरेन्द्र मोदी जी करेंगे और कोई नहीं। उन्होंने कहा कि इन लोगों का अधिकार छीन लिया है, इसका हिसाब कभी न कभी देना पड़ेगा। श्री शाह ने कहा कि जिन्होंने भी शब्द या प्रच्छन्न रूप से नक्सलियों का समर्थन किया है, वह सब इस पाप के उतने ही भागीदार हैं जितना बंदूक लेकर घूमने वाले हैं।केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इनकी नौकरी और रोजगार के लिए हमने ढेर सारे प्रयास किए हैं, कौशल केंद्र बनाए हैं। बारहवीं तक इनके बच्चों के लिए बारहवीं तक की मुक्त मुफ्त शिक्षा करी है। महिलाओं को 2 लाख और पुरुषों को 5 लाख के ऋण की व्यवस्था की है। वहां बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम के माध्यम से संस्कृति और खेल को बढ़ावा दे रहे हैं। वहां अब 1 लाख 20 हजार कलाकारों ने बस्तर पंडुम में भागीदारी की और 5 लाख 50 हजार आदिवासी खेले हैं। जो इसको न्याय की लड़ाई कहते हैं, वो बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक में जाएं। श्री शाह ने कहा कि पीड़ितों पर जुल्म ढाने वालों के लिए भाषण करने के लिए आपके पास बहुत समय है। श्री अमित शाह ने कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी की सरकार बनी, तब एक नेशनल एडवाइजरी काउंसिलबनी थी। एक नई नेशनल एडवाइजरी काउंसिल एक्स्ट्रा कॉन्स्टिट्यूशनल फोरम खड़ा किया गया जो देश के कानून बनाता था। उन्होंने कहा कि हर्ष मंदर इसके सदस्य थे, जिनके एनजीओ अमन वेदिका में शीर्ष नक्सली नेता की पत्नी को जिम्मेदारी दी गई थी और रिकॉर्ड है कि वह उन नक्सलियों में शामिल थी जिन्होंने अपहरण के केस अर्बन एरिया में किए थे। उन्होंने कहा कि ये एनएससी देश का नीति निर्धारण करती थी। उन्होंने कहा कि रामदयाल मुंडा कहते थे कि नक्सल ऑपरेशन जरूरत से ज्यादा कठोर है। उन्होंने कहा कि इस प्रच्छन्न समर्थन ने ही नक्सलियों की हिम्मत बढ़ाई। उन्होंने कहा कि नंदिनी सुंदर, रामचंद्र गुहा, ई ए एस शर्मा, ये सारे लोग सलवा जुडूम के केस के साथ भी जुड़े थे। जब सरकार की एक एक्स्ट्रा कॉन्स्टिट्यूशनल अथॉरिटी, जो पीएम से भी ऊपर थी, उसके सदस्य अगर नक्सलवाद के समर्थक हों तो किस तरह से नक्सलियों का हौसला टूटेगा? कैसे टूटेगा? उन्होंने कहा कि यह मुख्य विपक्षी पार्टी ने किया था। ये तो इतिहास है और जो लोग इस बात का विरोध करते हैं, आने वाले दिनों में सैकड़ों पुस्तकें लिखी जाएगी जो आपके कारनामों से भरी हुई होगी। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष अपने लंबे राजनीतिक करियर में कई बार नक्सलियों और उनके हमदर्दों के साथ देखे गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा में कई नक्सल फ्रंटल संगठनों ने हिस्सा लिया, इसका रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि वे 2010 में ओडिशा में लाडो सिकोका के साथ मंच पर दिखे। सिकोका ने उसी मंच से भड़काऊ भाषण दिया और उन्हें माला भी पहनाई। उन्होंने कहा कि 2018 में हैदराबाद में गुम्मांडी विट्ठल राव उर्फ गद्दार से नेता प्रतिपक्ष ने मुलाकात की जो विचारधारा के करीब रहे। मई 2025 में कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ पीस के साथ मुलाकात की। आज जब 172 जवानों को मारने वाला हिडमा मारा गया तब इंडिया गेट पर नारे लगे, कितने हिडमा मारोगे? हर घर से निकलेंगे हिड़मा और इस वीडियो को नेता प्रतिपक्ष ने स्वयं शेयर किया है।श्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलियों के समर्थकों ने 1970 से लेकर मार्च 2026 तक नक्सलवाद का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि ये नरसंहार का समर्थन है और 20 हजार लोग जो मारे गए, इसका दोषी अगर कोई एक है तो मुख्य विपक्षी पार्टी की वामपंथी विचारधारा है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के साथ रहते-रहते, ये पार्टी और उसके नेता खुद नक्सलवादी बन गए हैं। उन्होंने कहा कि इसका जवाब इस देश की जनता को चुनाव में देना पड़ेगा क्योंकि ये बात यहां रुकेगी नहीं, बल्कि जनता की अदालत में जाएगी।
- नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने रविवार को फैसला लिया है कि अब राशन की दुकानों के साथ-साथ पेट्रोल पंप पर भी केरोसिन मिल सकेगा। अब सरकारी तेल कंपनियां तय किए गए पेट्रोल पंपों से भी केरोसिन रख और बांट सकेंगी। हर जिले में राज्य सरकार या केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन अधिकतम 2 पेट्रोल पंप चुनेंगे, जहां यह सुविधा दी जाएगी। इन पेट्रोल पंपों पर अधिकतम 5 हजार लीटर तक केरोसिन रखा जा सकेगा।सरकार ने सप्लाई आसान बनाने के लिए 60 दिनों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के नियमों में ढील दी है, ताकि जरूरतमंद परिवारों तक तेल समय पर पहुंच सके।नियमों में क्या छूट दी गई-- केरोसिन बांटने वाले एजेंट और डीलरों को लाइसेंस लेने से छूट दी गई- टैंकरों से केरोसिन उतारने (सप्लाई) के नियम भी आसान किए गए- पेट्रोल पंपों पर केरोसिन स्टोर और वितरण की अस्थायी अनुमति दी गई
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नई दिल्ली। भारत सरकार ने कहा कि पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति के बीच, वह प्रमुख क्षेत्रों में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर निगरानी बनाए हुए है और उचित तैयारी एवं प्रतिक्रियात्मक उपाय कर रही है। प्रयासों का मुख्य उद्देश्य निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखना, समुद्री गतिविधियों की सुरक्षा करना और क्षेत्र में भारतीय नागरिकों को जरूरी सहायता प्रदान करना है।
कल रविवार को जारी एक बयान में केंद्र सरकार ने देश में पेट्रोल और डीजल की स्थिति स्पष्ट की। सरकार ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के लगातार बंद रहने के मद्देनजर, देश भर में पेट्रोलियम उत्पादों की बिना रूके उपलब्धता बनाए रखने के लिए सक्रिय उपाय किए जा रहे हैं। वर्तमान स्थिति इस प्रकार है-सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। देश में पेट्रोल और डीजल का भी पर्याप्त स्टॉक बना हुआ है।घरेलू खपत को पूरा करने के लिए रिफाइनरियों से एलपीजी का घरेलू उत्पादन बढ़ा दिया गया है।रिटेल आउटलेटदेश भर में सभी खुदरा दुकानें सामान्य रूप से चल रही हैं।भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कमी की है।इसके अलावा, भारत सरकार ने घरेलू बाजार में इन उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डीजल पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया है।वहीं दूसरी ओर कुछ क्षेत्रों में अफरा – तफरी मचने से खरीदारी की खबरें सामने आई हैं। कुछ अफवाहों के चलते कुछ राज्यों के कुछ खुदरा दुकानों पर अफरा-तफरी मच गई, जिसके परिणामस्वरूप दुकानों पर असामान्य रूप से अधिक बिक्री और भारी भीड़ देखने को मिली। हालांकि, यह सूचित किया जाता है कि देश के सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।सरकार ने जनता इस तरह की अफवाहों पर विश्वास न करने की सलाह दी है। सरकार ने कहा,” पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। कृपया पेट्रोल और डीजल की जल्दबाजी में खरीदारी से बचें। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे अफवाहों से सावधान रहें और सही जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें।” इसके अलावा, सरकार ने सभी नागरिकों से वर्तमान स्थिति देखते हुए अपने दैनिक उपयोग में ऊर्जा संरक्षण के लिए आवश्यक प्रयास करने का अनुरोध किया है। -
नई दिल्ली। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के बाद सोमवार को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। जदयू के नेता और बिहार के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित हो चुके हैं, और यह संवैधानिक रूप से अनिवार्य था। मुख्यमंत्री भी आज विधान परिषद की सदस्यता का त्याग करेंगे। उन्हीं के इस्तीफा का पत्र लेकर एमएलसी संजय कुमार उर्फ गांधी और हमलोग विधान परिषद आए हैं। सभापति आएंगे और आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
नीतीश कुमार के इस कदम के साथ ही बिहार में नेतृत्व परिवर्तन होने की संभावना है। हालांकि उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने को लेकर अब तक स्थिति साफ नहीं है। नीतीश कुमार 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य हैं। नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो गए। इसके बाद विधान परिषद की सदस्यता से उनके इस्तीफे की चर्चा शुरू हो गयी थी। नीतीश कुमार उन नेताओं में शामिल हैं जो चारों सदनों के सदस्य बने हैं। नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव लड़ने के दौरान कहा था कि उनकी इच्छा राज्यसभा की सदस्यता के रूप में निर्वाचित होने की थी , इस कारण उन्होंने यह निर्णय लिया। नीतीश कुमार 1985 में हरनौत विधानसभा सीट से विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद 1989 में वे नौवीं लोकसभा के सदस्य चुने गए। वे 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। अब पहली बार राज्यसभा सदस्य के रूप में वे अपनी नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि 10 अप्रैल को वे राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। नीतीश कुमार ने केंद्र में रेल मंत्री, कृषि मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे, जहां उन्होंने रेलवे में व्यापक सुधार किए। साल 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभाल रहे हैं। नीतीश कुमार ने ‘सुशासन बाबू’ के रूप में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री रहते कई ऐसी योजनाएं बनाई, जिनकी चर्चा पूरे देश में हुई। शराबबंदी, साइकिल योजना और पंचायती राज में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण जैसे फैसले नीतीश कुमार ने लिए। ( -
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद बिहार विधानसभा के बांकीपुर निर्वाचन क्षेत्र की जनता के नाम भावुक संदेश लिखा है। उन्होंने कहा कि मेरे कार्यकर्ताओं और बिहार की जनता के साथ मेरा जो अटूट संबंध है, वह सदैव बना रहेगा और मुझे हमेशा नई ऊर्जा, प्रेरणा और मार्गदर्शन देता रहेगा।
भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन राज्यसभा के सदस्य चुने गए हैं। इसके कारण उन्होंने अपने विधायक पद से इस्तीफा दिया है। उन्होंने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भावुक पोस्ट करते हुए लिखा, “कार्यकर्ताओं ने मुझे भाई के रूप में, परिवार के सदस्य के रूप में और अभिभावक के रूप में अंगुली पकड़कर आज इस मुकाम तक पहुंचाया है। मैं पटना और बिहार की जनता को आश्वस्त करता हूं कि जो परिवार का भाव उन्होंने मुझे दिया है, उसका मैं सदैव सम्मान करता रहूंगा।”उन्होंने पोस्ट में लिखा, “बांकीपुर और बिहार के मेरे सभी परिवारजन और कार्यकर्ता साथी, जनवरी 2006 में पिताजी के आकस्मिक निधन के बाद पार्टी ने मुझे पटना पश्चिम से उपचुनाव लड़ने का अवसर दिया और दिनांक 27 अप्रैल 2006 को मैं पहली बार पटना पश्चिम क्षेत्र से निर्वाचित होकर सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। पिछले 20 सालों में पिताजी स्वर्गीय नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा की ओर से बनाए गए इस क्षेत्र को पारिवारिक भाव से सींचने, संवारने और विकास के पटल पर आगे ले जाने का निरंतर प्रयास किया है।”नितिन नवीन ने लिखा, “मैंने सदैव अपने क्षेत्र और बिहार के विकास के लिए समर्पित भाव से कार्य किया। इसी का प्रतिफल है कि यहां की देवतुल्य जनता ने मुझे लगातार 5 बार सदन में अपना प्रतिनिधि चुनकर सेवा का सौभाग्य प्रदान किया। सदन के अंदर हो या सदन के बाहर, दोनों ही स्थानों का उपयोग मैंने अपने क्षेत्र और बिहार की जनता की आवाज उठाने और उनकी समस्याओं के समाधान का मार्ग निकालने के लिए किया।”उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा कि बिहार विधानसभा के सदस्य के रूप में मुझे सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई वरिष्ठ विधायकों से बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। मैंने अपने क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण विषयों का समाधान जनता और कार्यकर्ताओं के सुझावों से ही निकाला है। नितिन नवीन ने आगे लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में पार्टी ने जब मुझे बिहार सरकार के मंत्री के रूप में काम करने का अवसर दिया, तब मुझे कई अहम फैसलों, नीतियों और योजनाओं का क्रियान्वयन करने में सफलता मिली। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद व्यक्त करता हूं।”अपने पोस्ट में नितिन नवीन ने लिखा, “मैंने यह हमेशा कहा है कि जनता ने मुझे समस्याएं भी बताई और उन समस्याओं के समाधान का रास्ता भी मुझे जनता ने ही दिखाया। कार्यकर्ताओं ने मुझे भाई के रूप में, परिवार के सदस्य के रूप में और अभिभावक के रूप में अंगुली पकड़कर आज इस मुकाम तक पहुंचाया है। मैं पटना और बिहार की जनता को आश्वस्त करता हूं कि जो परिवार का भाव उन्होंने मुझे दिया है, उसका मैं सदैव सम्मान करता रहूंगा।”‘एक्स’ पोस्ट में बांकीपुर के निर्वाचित सदस्य पद से इस्तीफे का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा, “पार्टी ने मुझे जो नई भूमिका दी है, उसके माध्यम से भी मैं अपने क्षेत्र और बिहार के विकास के लिए सदैव तत्पर और संकल्पित रहूंगा। मेरे कार्यकर्ताओं और बिहार की जनता के साथ मेरा जो अटूट संबंध है, वह सदैव बना रहेगा और मुझे हमेशा नई ऊर्जा, प्रेरणा और मार्गदर्शन देता रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2047 के ‘विकसित भारत’ और ‘विकसित बिहार’ बनाने के सपने को साकार करने की दिशा में मैं निरंतर प्रयासरत रहूंगा।”( -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी ''भीषण युद्ध'' के कारण पैदा हो रही चुनौतियों का सभी नागरिकों से एकजुट होकर सामना करने की अपील करते हुए रविवार को कहा कि सभी को सतर्क रहना चाहिए तथा अफवाहों के झांसे में नहीं आना चाहिए। मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में कहा कि खाड़ी देशों में रह रहे और वहां काम कर रहे एक करोड़ भारतीयों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए वह उन देशों के अत्यंत आभारी हैं। उन्होंने कहा कि ''हमारे पड़ोस'' में एक महीने से अधिक समय से ''भीषण युद्ध'' जारी है। प्रधानमंत्री ने कहा, ''यह निस्संदेह चुनौतीपूर्ण समय है। मैं आज 'मन की बात' कार्यक्रम के माध्यम से 140 करोड़ देशवासियों से एक बार फिर आग्रह करता हूं कि हमें इस चुनौती से पार पाने के लिए एकजुट होकर आगे आना होगा। मैं अपने सभी देशवासियों से अपील करता हूं कि वे सतर्क रहें और अफवाहों के झांसे में न आएं।'' पश्चिम एशिया संघर्ष 28 फरवरी को उस समय शुरू हुआ था जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अपने पड़ोस में अमेरिका के सहयोगियों और इजराइल को निशाना बनाया। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नौवहन को बाधित कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य एक प्रमुख समुद्री मार्ग है और इसके जरिये दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा की ढुलाई होती है। संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान ने बहुत कम पोतों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है। पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से मोदी ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, ईरान, फ्रांस, इजराइल और मलेशिया सहित विश्व के कई नेताओं से बात की है। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी बात की है। मोदी ने दोनों नेताओं के बीच 24 मार्च को टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद कहा था कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर ''विचारों का सार्थक आदान-प्रदान'' हुआ।
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त्रिशूर (केरल) . प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केरल विधानसभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रचार अभियान के तहत रविवार को यहां एक रोड शो किया। रोड शो के दौरान बड़ी संख्या में लोग उनकी एक झलक पाने के लिए सड़कों पर कतार में खड़े थे। रोड शो की शुरुआत जिला अस्पताल के निकट हुई। भीषण गर्मी की परवाह किये बिना, लोग कई घंटे पहले सड़क के किनारे एकत्र हो गए थे और नारे लगा रहे थे और अपने मोबाइल फोन से उन पलों की फोटो खींच रहे थे जब प्रधानमंत्री ने एक खुले वाहन से उनका अभिवादन किया। त्रिशूर जिले में राजग के प्रमुख उम्मीदवारों पद्मजा वेणुगोपाल और लोकसभा में त्रिशूर का प्रतिनिधित्व करने वाले केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने रोड शो में हिस्सा लिया। इससे पहले, मोदी कुट्टानेल्लूर हेलीपैड पर पहुंचे, जहां भाजपा-राजग के नेताओं ने उनका स्वागत किया।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को नगालैंड की पारंपरिक मोरूंग शिक्षा प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रथा के माध्यम से बच्चों में गणित और विज्ञान जैसे विषयों में रुचि पैदा की जा सकती है। नगालैंड की मोरूंग प्रणाली एक पारंपरिक सामुदायिक शिक्षा मॉडल है, जो सामाजिक, सांस्कृतिक और जीवन कौशल सीखने के केंद्र के रूप में कार्य करता है। मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में कहा कि नगा समुदाय शिक्षा के माध्यम से अतीत को संरक्षित करने और भविष्य को तैयार करने का एक प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस समुदाय के लोग अपनी आदिवासी परंपराओं का बहुत सम्मान करते हैं तथा वे इस पर गर्व तो करते ही हैं, साथ ही अपने रुख को आधुनिक भी रखते हैं। उन्होंने कहा कि नगा जनजाति में मोरूंग शिक्षा की एक पारंपरिक व्यवस्था थी, इसमें, बुजुर्ग लोग अपने अनुभवों से युवाओं को पारंपरिक ज्ञान, इतिहास और जीवन के कौशल के बारे में बताते थे। उन्होंने कहा, ''समय के साथ यह प्रणाली अब मोरूंग की शिक्षा की अवधारणा में बदल गया है। इसके माध्यम से बच्चों में गणित और विज्ञान जैसे विषयों में रुचि पैदा की जाती है। मोदी ने कहा, इसमें समुदाय के बुजुर्ग उन्हें कहानियां, लोकगीत और पारंपरिक खेलों के साथ जीवन के कौशल सिखाते हैं। इस तरह हमारा नगालैंड अपनी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए, बच्चों की शिक्षा को आगे ले जा रहा है। आपको भी अपने क्षेत्र में ऐसे प्रयासो के बारे में पता चले, तो मुझे जरूर साझा कीजिएगा।'' प्रधानमंत्री ने नगालैंड के चिजामी गांव से सामने आए एक बेहद प्रेरणादायक प्रयास के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि चिजामी गांव की महिलाएं मिलकर 150 से अधिक तरह के पारंपरिक बीजों को सुरक्षित रख रही हैं। उन्होंने कहा कि इन बीजों को एक सामुदायिक बीज बैंक में संरक्षित किया जा रहा है, जिसे गांव की महिलाएं ही चलाती हैं। उन्होंने कहा कि ''इनमें चावल, बाजरा, मक्का, दालें, सब्जियां और कई तरह की जड़ी-बूटियां शामिल हैं। यह एक ऐसा प्रयास है, जिसमें ज्ञान भी सुरक्षित है, परंपरा भी जीवित है और आने वाली पीढ़ियों के लिये एक मजबूत आधार भी तैयार हो रहा है।'' उन्होंने कहा, ''आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब ऐसे प्रयास हमें यह बताते हैं कि समाधान हमेशा कहीं दूर नहीं होता। कई बार हमारे अपने पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक प्रयास ही हमें सबसे मजबूत रास्ता दिखाते हैं।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के लाभों पर प्रकाश डाला और कहा कि इसका प्रभाव देश के हर कोने में देखा जा रहा है। घरेलू छतों पर सौर ऊर्जा लगाने की यह योजना, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी ऐसी पहल कहा जाता है, का लक्ष्य मार्च 2027 तक एक करोड़ घरों को सौर ऊर्जा की आपूर्ति करना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर कोई आज किसी भी शहर, चाहे वह बड़ा हो या छोटा, का दौरा करे तो उसे निश्चित रूप से एक बदलाव नजर आएगा कि बड़ी संख्या में घरों की छतों पर सौलर पैनल लगाए गए हैं। मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में कहा, ''कुछ साल पहले तक, यह सोलर पैनल चंद ही घरों की छतों पर देखने को मिलते थे। लेकिन आज 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' का असर देश के हर कोने में नजर आ रहा है।'' उन्होंने कहा कि इस योजना ने गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले की पायल मुंजपारा के जीवन में गहरा बदलाव लाया है, जिन्होंने इस पहल के माध्यम से सौर ऊर्जा प्रौद्योगिकी में प्रशिक्षण प्राप्त किया और चार महीने का 'सोलर पीवी तकनीशियन पाठ्यक्रम' पूरा किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मेरठ के अरुण कुमार अब अपने क्षेत्र में ऊर्जा प्रदाता बन गए हैं, और हाल ही में उन्होंने दिल्ली में एक कार्यक्रम में भाग लिया, जहां उन्होंने अपने अनुभव साझा किए। मोदी ने कहा कि कुमार ने बताया था कि वह न केवल अपने बिजली बिल में बचत कर रहे हैं बल्कि अपनी अतिरिक्त बिजली बेच भी रहे हैं। मोदी ने जयपुर के मुरलीधर का भी किस्सा साझा किया, जिन्होंने खेती के लिए डीजल पंप पर निर्भरता से मुक्ति पाई और सौर पंप को अपनाया, जिससे उन्हें हजारों रुपये की बचत हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि सौर ऊर्जा पहल के लाभ पूर्वोत्तर के क्षेत्रों में भी मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में, जहां रियांग जनजाति के कई गांव बिजली की समस्या से जूझ रहे थे, वहां सौर मिनी-ग्रिड ने उनके घरों को रोशन किया है। मोदी ने बताया कि अब वहां बच्चे शाम ढलने के बाद भी पढ़ाई कर पाते हैं, लोग अपने मोबाइल फोन चार्ज कर पाते हैं और गांवों का सामाजिक जीवन भी बदल गया है। प्रधानमंत्री ने कहा, ''देश में सौर ऊर्जा क्रांति के अनगिनत उदाहरण हैं। आप भी इस क्रांति में शामिल हों और दूसरों को भी इससे जोड़ें।''



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