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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के राष्ट्र के नाम संबोधन को प्रेरणादायी और विचारोत्तेजक बताया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि राष्ट्रपति के विचार देश की शक्ति और प्रत्येक भारतीय की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का संदेश सभी देशवासियों को विकसित भारत के निर्माण के लिए नए संकल्प और दृढ़ता के साथ काम करने की प्रेरणा देता है।
स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को किया नमनराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को नमन किया। उन्होंने राष्ट्र-निर्माण में नागरिकों की भूमिका, विभाजन की त्रासदी, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और पिछले एक दशक से अधिक समय में देश में हुए विकास का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1947 को भारत पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त हुआ और इसके बाद स्वतंत्र भारत की नियति के निर्माता देशवासी बने।राष्ट्र-निर्माण में नागरिकों की भूमिका अहमराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, श्रमिकों और किसानों समेत राष्ट्र-निर्माण में योगदान दे रहे सभी नागरिकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत अपनी समृद्ध विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों को अपनाते हुए आधुनिक विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।‘वयं राष्ट्रे जागृयाम’ का दिया संदेशद्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में वैदिक संदेश ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम’ का उल्लेख किया। उन्होंने नागरिकों से राष्ट्र के प्रति सदैव जागरूक रहने और देश के विकास में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की प्रगति केवल सरकार के प्रयासों से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी से संभव है।विभाजन की त्रासदी और पटेल के योगदान को किया यादराष्ट्रपति ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा के कारण लाखों लोगों को विस्थापन और पीड़ा झेलनी पड़ी। उन्होंने स्वतंत्रता के समय 550 से अधिक रियासतों के भारत में एकीकरण की चुनौती और सरदार वल्लभभाई पटेल के महत्वपूर्ण योगदान को भी याद किया।साधारण पृष्ठभूमि से असाधारण उपलब्धियों तकद्रौपदी मुर्मु ने कहा कि आज साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले लोग विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान दे रहे हैं। यह इस विश्वास को मजबूत करता है कि आज के भारत में हर व्यक्ति बड़े सपने देख सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है। उन्होंने इसे देश में अवसरों के विस्तार और लोकतांत्रिक व्यवस्था की ताकत का प्रतीक बताया।समावेशी विकास पर राष्ट्रपति ने दिया जोरराष्ट्रपति मुर्मु ने पिछले एक दशक से अधिक समय में हुए समावेशी विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने विरासत और विकास के समन्वय को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि विकास में बाधक रहे कई पुराने अवरोधों को दूर किया गया है और विभिन्न वर्गों तक विकास का लाभ पहुंचाने के प्रयास किए गए हैं।25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहरद्रौपदी मुर्मु ने बताया कि देश में 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता मिली है। प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत करीब 59 करोड़ खाताधारक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े हैं, जिनमें 32 करोड़ से अधिक महिलाएं हैं। वहीं, करीब 80 करोड़ लोगों के लिए मुफ्त राशन की व्यवस्था के जरिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।विकसित भारत के संकल्प को नई ऊर्जाप्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति के संबोधन को ऐसे समय में महत्वपूर्ण बताया, जब देश 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्र-निर्माण और विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के विचार देश की सामूहिक शक्ति, उपलब्धियों और नागरिकों की आकांक्षाओं को सामने रखते हैं तथा विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रत्येक देशवासी को नए संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। ( -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक की भागीदारी पर जोर दिया। राष्ट्र के नाम अपने संदेश में उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को नमन किया और कहा कि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने युवाओं, महिलाओं, किसानों, वैज्ञानिकों, श्रमिकों, खिलाड़ियों, सुरक्षाबलों और समाज के विभिन्न वर्गों के योगदान की सराहना करते हुए देशवासियों से संविधान के मूल्यों और मूल कर्तव्यों का पालन करने की अपील की।
स्वतंत्रता सेनानियों को किया नमनराष्ट्रपति ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को भारत पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त हुआ और देशवासियों को अपने सपनों को साकार करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता की सार्थकता इसी में है कि भारत के लोग अपने सपनों को साकार करने के अवसरों का उपयोग करें और देश को सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाने की भावना से कार्य करें।राष्ट्र निर्माण में हर नागरिक की भूमिकाद्रौपदी मुर्मु ने विद्यार्थियों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, श्रमिकों, किसानों, खिलाड़ियों, शिल्पकारों, कलाकारों, जनप्रतिनिधियों, न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों, सिविल सेवकों, निवेशकों, समाजसेवियों और सफाई-मित्रों समेत राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे सभी नागरिकों की सराहना की। उन्होंने तीनों सेनाओं के जवानों, सशस्त्र पुलिस बलों और पुलिसकर्मियों की कर्तव्यनिष्ठा की विशेष रूप से प्रशंसा की।2047 तक विकसित भारत का संकल्पराष्ट्रपति ने कहा कि भारत स्वाधीनता की शताब्दी वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए आगे बढ़ रहा है। अंत्योदय की भावना के साथ विकास का लाभ प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाना लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि समृद्ध विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों को अपनाते हुए देश आधुनिक विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने वेद वाक्य ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम’ का उल्लेख करते हुए राष्ट्र के प्रति सदैव जागरूक रहने का संदेश दिया।विभाजन विभीषिका के पीड़ितों को किया यादराष्ट्रपति मुर्मु ने 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाए जाने का उल्लेख करते हुए विभाजन के दौरान मारे गए और विस्थापन की त्रासदी झेलने वाले लाखों लोगों को याद किया। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा के कारण लाखों लोगों को शरणार्थी बनना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान नहीं छोड़ी।सरदार पटेल को श्रद्धांजलिउन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के समय देश के सामने विभाजन के गंभीर परिणामों के साथ 550 से अधिक रियासतों को नवस्वाधीन भारत से जोड़ने की चुनौती भी थी। सरदार वल्लभभाई पटेल ने इन रियासतों का भारतीय लोकतंत्र में विलय कराया। राष्ट्रपति ने आधुनिक भारत की एकता के शिल्पकार और लौहपुरुष सरदार पटेल की स्मृति को नमन किया।लोकतंत्र में जनभागीदारी महत्वपूर्णद्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारत का संविधान ‘भारत के लोगों’ द्वारा निर्मित है और लोकतंत्र की जननी भारतभूमि में जनभागीदारी की भावना सदैव रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अभियानों को जनभागीदारी से आगे बढ़ाया जाना लोकतंत्र की प्रेरक उपलब्धि है।समानता और गरिमा संविधान के प्रमुख आदर्शराष्ट्रपति ने कहा कि प्रतिष्ठा और अवसर की समानता तथा व्यक्ति की गरिमा संविधान के प्रमुख आदर्श हैं। आज साधारण पृष्ठभूमि के लोग विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान दे रहे हैं। इससे यह विश्वास मजबूत होता है कि आज के भारत में हर व्यक्ति बड़े सपने देख सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है।न्याय समय पर और समान रूप से मिलेउन्होंने कहा कि विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के अपने-अपने उत्तरदायित्व हैं। जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे जन-आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करें, जबकि कार्यपालिका जनहित और राष्ट्रहित की नीतियों को लागू करे। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि अभाव के कारण कोई व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे और विशेषकर वंचित वर्गों को समानता तथा सम्मान के साथ समय पर न्याय मिले।समावेशी विकास को मिली गतिराष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि पिछले एक दशक से कुछ अधिक समय में भारत ने तेज गति से समावेशी विकास किया है। विरासत और विकास के समन्वय को प्राथमिकता दी गई है तथा विकास में बाधक दशकों पुराने कई अवरोधों को दूर किया गया है।गरीबों और वंचितों के लिए योजनाओं का उल्लेखउन्होंने महात्मा ज्योतिबा फुले और क्रांति-ज्योति सावित्रीबाई फुले के सामाजिक न्याय, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और समानता के क्षेत्र में योगदान को याद किया। राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में वंचित वर्गों को आगे बढ़ाना राष्ट्रीय प्राथमिकता बना है। उन्होंने बताया कि 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता मिली है। प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत करीब 59 करोड़ खाताधारक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े हैं, जिनमें 32 करोड़ से अधिक महिलाएं हैं।स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा पर जोरराष्ट्रपति ने कहा कि करीब 80 करोड़ लोगों के लिए निशुल्क राशन की व्यवस्था से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 60 करोड़ लोगों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपए तक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है। किसान सम्मान निधि और किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से खेती, डेयरी, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन से जुड़े किसानों को भी समर्थन मिला है।विरासत और विकास का समन्वयराष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि सांस्कृतिक आत्मबल पर आधारित विकास गतिमान और स्थायी होता है। भारत की ज्ञान-विज्ञान, कला-संस्कृति, अध्यात्म और सदाचार की समृद्ध विरासत देश को आत्मिक शक्ति प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि भारत विरासत और विकास के समन्वय के साथ आगे बढ़ रहा है।डिजिटल क्रांति से बदली तस्वीरद्रौपदी मुर्मु ने डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि गांवों की छोटी दुकानों और रेहड़ी-पटरी तक डिजिटल भुगतान पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि विश्व में होने वाले रियल टाइम डिजिटल लेनदेन में भारत की हिस्सेदारी आधे से अधिक है। तकनीक के जरिए जनकल्याणकारी सुविधाओं को पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचाने में भी मदद मिली है।आधुनिक बुनियादी ढांचे का विस्तारराष्ट्रपति ने कहा कि देश में हाईवे, वाटरवे, रेलवे और एयरवे के रूप में आधुनिक बुनियादी ढांचे का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। इससे नए उद्यमों के अवसर बढ़े हैं, रोजगार का सृजन हुआ है और निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।वैश्विक अस्थिरता के बीच अर्थव्यवस्था मजबूतदुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और अस्थिरता के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि आर्थिक अनुमानों के अनुसार भारत की विकास दर विश्व की औसत विकास दर की तुलना में दोगुने से अधिक रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान से आर्थिक प्रगति और राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार मजबूत हुआ है।पर्यावरण संरक्षण में भारत अग्रणीद्रौपदी मुर्मु ने कहा कि आधुनिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी भारत विश्वस्तर पर योगदान दे रहा है। सतत विकास लक्ष्यों से जुड़े कुछ लक्ष्यों को देश ने समय से पहले हासिल किया है और नवीकरणीय ऊर्जा के विकास को भी पिछले वर्षों में अभूतपूर्व गति मिली है।शांति और सहयोग विदेश नीति के आधारउन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति देशहित पर आधारित है। शांति, सहयोग, संवाद और वसुधैव कुटुंबकम् के आदर्श विदेश नीति के प्रमुख स्तंभ हैं। आर्थिक सहयोग बढ़ाने और संबंध मजबूत करने के लिए कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए गए हैं। भारत ग्लोबल साउथ में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में विश्वास रखता है।प्रकृति और भावी पीढ़ियों की जिम्मेदारीराष्ट्रपति ने कहा कि प्राकृतिक संपदाओं पर भावी पीढ़ियों का भी उतना ही अधिकार है जितना वर्तमान पीढ़ी का है। इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आज के कार्यों से आने वाली पीढ़ियों के अधिकार प्रभावित न हों। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ और ‘लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’ (LiFE) जैसे अभियानों की भावना के अनुरूप व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण का आह्वान किया।बेटियां हर क्षेत्र में बढ़ा रही हैं देश का मानराष्ट्रपति मुर्मु ने शिक्षा के क्षेत्र में बेटियों के शानदार प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादकता में योगदान देने वाली ड्रोन दीदी से लेकर वायु सेना में फाइटर कॉम्बैट लीडर बनने तक महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने ग्लासगो में हुए राष्ट्रमंडल खेलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के 13 स्वर्ण पदकों में 8 स्वर्ण पदक बेटियों ने जीते हैं।महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ीराष्ट्रपति ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों में 10 करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा चुका है और अब देश नई 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुद्रा योजना के तहत सहायता पाने वाले उद्यमियों में करीब दो-तिहाई महिलाएं हैं।लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ीद्रौपदी मुर्मु ने कहा कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ विभिन्न क्षेत्रों में उनका नेतृत्व भी बढ़ रहा है। मतदान में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को उन्होंने गणतंत्र की विशेष सफलता बताया। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% प्रतिनिधित्व आरक्षित करने के लिए 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया गया है। इसके लक्ष्य को हासिल करने से लोकतंत्र और अधिक समावेशी बनेगा।युवा शक्ति भारत की सबसे बड़ी ताकतराष्ट्रपति ने कहा कि देश की कुल आबादी में 65% लोग 35 वर्ष से कम आयु के हैं। युवा आबादी भारत की सबसे मूल्यवान संपदा है। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा प्रतिभाशाली, प्रतिबद्ध और कुशल हैं। उन्होंने हाल में केवल 28 वर्ष की औसत आयु वाली युवा टीम द्वारा रॉकेट के सफल प्रक्षेपण का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे अंतरिक्ष अन्वेषण के नए चरण का शुभारंभ हुआ है।स्टार्टअप और स्वरोजगार से बढ़ रहे अवसरउन्होंने कहा कि अनेक युवा स्वरोजगार के रास्ते पर चलते हुए रोजगार देने की संस्कृति को अपना रहे हैं। युवा उद्यमियों की भागीदारी से मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित हुआ है। विश्व की बड़ी कंपनियां भारतीय युवाओं की प्रतिभा और लगन से प्रभावित हैं और उन्हें नेतृत्व की भूमिकाएं दे रही हैं।विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा पर जोरराष्ट्रपति मुर्मु ने विद्यार्थियों को भारत का भविष्य निर्माता बताते हुए सार्वजनिक परीक्षाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परीक्षाएं विद्यार्थियों के लिए अवसरों के द्वार खोलती हैं। इसलिए सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए व्यापक कदम उठा रही है, ताकि अनुचित साधनों पर अंकुश लगे और परीक्षाएं पारदर्शी, सुरक्षित तथा भरोसेमंद बनें।खेलों से राष्ट्र निर्माण को मिल रहा बलराष्ट्रपति ने युवाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को देश के भविष्य का आधार बताया। उन्होंने कहा कि खेलों को युवाओं के विकास और राष्ट्र निर्माण के माध्यम के रूप में अपनाया जा रहा है। खेलो इंडिया के जरिए स्थानीय स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक खेल इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है और सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए निवेश कर रही है।वरिष्ठ नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता जरूरीराष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत में युवा आबादी के साथ वरिष्ठ नागरिकों की संख्या भी बढ़ रही है। सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के करीब 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रतिवर्ष 5 लाख रुपए तक की निशुल्क स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध है। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के आत्मसम्मान और गरिमा को बनाए रखने के लिए पूरे समाज से संवेदनशील रहने की अपील की।आतंकवाद के खिलाफ भारत का दृढ़ संकल्पद्रौपदी मुर्मु ने कारगिल विजय दिवस और ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए भारतीय सेनाओं के पराक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेनाओं की क्षमता का प्रमाण है और आतंकियों तथा उनके समर्थकों को कड़ा संदेश दिया गया है। उन्होंने आतंकवाद को संरक्षण देने वाले देश के साथ सिंधु जल संधि के निलंबन को किसानों के हित में निर्णायक कदम बताया।नक्सलवाद के खिलाफ मिली बड़ी सफलताराष्ट्रपति ने कहा कि दशकों से नक्सलवाद देश के लिए गंभीर चुनौती रहा, लेकिन भारत को नक्सल मुक्त बनाना एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब उत्साह का वातावरण है और विकास की धारा पहुंच रही है। बस्तर ओलिंपिक्स और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों में लोगों की बड़ी भागीदारी इसका प्रमाण है।भारतीय विरासत को वैश्विक पहचानराष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि राष्ट्र-गौरव और मराठा सैन्य परंपरा से जुड़े 12 दुर्गों को पिछले वर्ष यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिला। उन्होंने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि देश की विरासत में आध्यात्मिक स्मारकों के साथ आत्मसम्मान तथा गौरवशाली परंपराओं की रक्षा की सैन्य क्षमता के प्रतीक भी मौजूद हैं।विकसित भारत का लक्ष्य सभी का कल्याणद्रौपदी मुर्मु ने कहा कि सभी भारतवासियों का विकास और कल्याण ही विकसित भारत के निर्माण का वास्तविक लक्ष्य है। उन्होंने तेलुगू साहित्यकार गुरजाडा अप्पाराव की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश केवल मिट्टी नहीं, बल्कि समस्त जनसमुदाय है।स्वस्थ, सुखी और समृद्ध भारत का आह्वानराष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि समाज की भागीदारी और सरकार के प्रयासों से गांव-गांव, नगर-नगर और भारत के घर-घर में रहने वाले सभी लोग स्वस्थ, सुखी और समृद्ध बनेंगे। उन्होंने देशवासियों से देश प्रेम की सर्वसमावेशी भावना के साथ स्वतंत्र भारत को विकसित भारत बनाने की राष्ट्रीय साधना में स्वयं को समर्पित करने का आह्वान किया। -
नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देश की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा में असाधारण वीरता, साहस और सर्वोच्च बलिदान का परिचय देने वाले वीरों के सम्मान में 78 वीरता पुरस्कारों को मंजूरी दी है। इनमें 13 पुरस्कार मरणोपरांत दिए गए हैं। इसके साथ ही राष्ट्रपति ने 89 ‘मेंशन-इन-डिस्पैचेस’ यानी विशेष उल्लेख को भी मंजूरी दी है। इनमें भारतीय सेना के 75, भारतीय नौसेना के 4 और भारतीय वायुसेना के 10 जवान शामिल हैं।
कीर्ति चक्र के लिए 9 वीरों का चयनराष्ट्रपति भवन से जारी सूची के अनुसार इस वर्ष 9 कीर्ति चक्र, 1 बार टू शौर्य चक्र, 19 शौर्य चक्र, 5 बार टू सेना मेडल (गैलेंट्री), 36 सेना मेडल (गैलेंट्री), 3 नौसेना मेडल (गैलेंट्री) और 5 वायु सेना मेडल (गैलेंट्री) को मंजूरी दी गई है। कीर्ति चक्र पाने वालों में 7 पुरस्कार मरणोपरांत हैं।कीर्ति चक्र पाने वाले वीरों में लेफ्टिनेंट कर्नल मैनियो फ्रांसिस, मेजर जितेंद्र राठी, हवलदार गजेंद्र सिंह (मरणोपरांत), हेड कांस्टेबल जगबीर सिंह (मरणोपरांत), एसजी कांस्टेबल जसवंत सिंह (मरणोपरांत), एसजी कांस्टेबल बलविंदर सिंह (मरणोपरांत), एसजी कांस्टेबल तारिक हुसैन (मरणोपरांत), हेड कांस्टेबल बशीर अहमद (मरणोपरांत) और इंस्पेक्टर एसटीएफ सुनील कुमार (मरणोपरांत) शामिल हैं।मेजर आदित्य प्रताप सिंह को बार टू शौर्य चक्रदेश की सेवा में अदम्य साहस और वीरता का प्रदर्शन करने वाले मेजर आदित्य प्रताप सिंह को बार टू शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है। वह द राजपूताना राइफल्स और 44 असम राइफल्स से संबद्ध हैं।19 वीरों को शौर्य चक्रइस वर्ष कुल 19 वीरों को शौर्य चक्र प्रदान किया गया है। इनमें भारतीय सेना के 11, नौसेना और वायुसेना के एक-एक तथा गृह मंत्रालय के 6 वीर शामिल हैं।सेना के शौर्य चक्र पाने वालों में मेजर परमवीर, मेजर तरुण वासुदेवन, मेजर केशव कुमार, मेजर गौरव सिंह ब्रिजवाल, मेजर विपीन कुमार, नायब सूबेदार शंकर राम, नायब सूबेदार डब्बल सिंह बिष्ट, हवलदार जगतार सिंह, लांस नायक नरेंद्र सिंधु (मरणोपरांत), लांस नायक कपिल देव और सिपाही जसविंदर सिंह शामिल हैं।नौसेना से लेफ्टिनेंट कमांडर शिवम कुमार और वायुसेना से स्क्वाड्रन लीडर सुधीर कुमार को शौर्य चक्र दिया गया है। गृह मंत्रालय के धीरज सिंह कटोच, अजय सिंह चिब, सुखवीर सिंह, नियाज अहमद, अंजनी कुमार और दीपक साह को भी इस सम्मान के लिए चुना गया है।5 जवानों को बार टू सेना मेडलदेश की सेवा में असाधारण वीरता और साहस का परिचय देने वाले सेना के 5 जवानों को बार टू सेना मेडल (गैलेंट्री) प्रदान किया गया है। इनमें मेजर डी.एस. पाओशो, मेजर अनुज महाजन, मेजर कृष्ण कांत, सूबेदार रमेश कुमार और नायब सूबेदार राजेंद्र सिंह शामिल हैं।36 सैन्यकर्मियों को सेना मेडलसेना के 36 अधिकारियों और जवानों को सेना मेडल (गैलेंट्री) से सम्मानित किया गया है। इनमें लेफ्टिनेंट कर्नल पुष्कर विजय चौधरी, लेफ्टिनेंट कर्नल सोनम टोपडेन भूटिया, मेजर सुधांशु शेखर पानी, मेजर मोहित पोडिया, मेजर आर. साहिल, मेजर बलेंदु कुमार झा, मेजर रवि शंकर जोशी, मेजर रूपम दास, मेजर अर्णव बाली, मेजर अंशुमान रंजन और मेजर अरविंद कुमार समेत कई अधिकारी शामिल हैं।सम्मान पाने वालों में कैप्टन करण सिंह चीमा, कैप्टन हरीश सिंह डेवली, कैप्टन मोहित रावत, कैप्टन अंशुमान सिंह, कैप्टन बाणे स्वराज सुधीर, कैप्टन पृथ्वीराज जयसिंग निघोट, कैप्टन साविक, लेफ्टिनेंट भानु प्रताप सिंह और लेफ्टिनेंट अमन पांडे भी शामिल हैं।वीरता के लिए नौसेना और वायुसेना के जवान भी सम्मानितनौसेना के कमांडर विनीत शर्मा, कमांडर युवराज कुमार और एसी अविनाश अन्नासो को वीरता के लिए नौसेना मेडल प्रदान किया गया है। वायुसेना में ग्रुप कैप्टन राहुल जगोटा, ग्रुप कैप्टन राहुल रावत, विंग कमांडर आशीष राजपूत, फ्लाइट लेफ्टिनेंट यश और मास्टर वारंट ऑफिसर रविंदरजीत सिंह को वायु सेना मेडल (गैलेंट्री) से सम्मानित किया गया है।89 ‘मेंशन-इन-डिस्पैचेस’ भी मंजूरराष्ट्रपति मुर्मु ने 89 ‘मेंशन-इन-डिस्पैचेस’ यानी विशेष उल्लेख को भी मंजूरी दी है। इनमें भारतीय सेना के 75, भारतीय नौसेना के 4 और भारतीय वायुसेना के 10 जवान शामिल हैं। यह सम्मान सैन्य अभियानों और कर्तव्य के दौरान उल्लेखनीय सेवा एवं योगदान को मान्यता देने के लिए दिया जाता है।वीरता और बलिदान को राष्ट्र का सम्मानस्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित ये वीरता पुरस्कार देश की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा में योगदान देने वाले सैन्यकर्मियों और सुरक्षा बलों के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान को राष्ट्र की ओर से सम्मानित करते हैं। मरणोपरांत दिए गए पुरस्कार उन वीरों के सर्वोच्च बलिदान की स्मृति को भी सम्मान देते हैं, जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने PM Vishwakarma योजना से जुड़े दिल्ली-NCR के 100 लाभार्थियों को 15 अगस्त 2026 को लाल किले पर होने वाले 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया है। लाभार्थी अपने जीवनसाथी या साथी के साथ समारोह में शामिल होंगे।इन विशेष अतिथियों में अलग-अलग पारंपरिक काम करने वाली महिला कारीगर भी शामिल हैं। इससे महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने, रोजगार से जोड़ने और भारत की पारंपरिक कला एवं संस्कृति को बचाने में उनकी भूमिका को बढ़ावा मिलता है।
PM Vishwakarma योजना के लाभार्थियों को उनकी मेहनत और पारंपरिक हुनर के लिए सम्मानित भी किया जाएगा। 14 अगस्त को दिल्ली स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में उन्हें स्मृति चिह्न दिए जाएंगे।इसके बाद MSME मंत्रालय के अधिकारियों के साथ लाभार्थियों की बातचीत भी होगी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के योगदान को पहचान देना है।क्या है PM Vishwakarma योजना?PM Vishwakarma योजना केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है। इसका उद्देश्य पारंपरिक काम करने वाले कारीगरों और शिल्पकारों को आगे बढ़ने में मदद करना है।योजना के तहत कारीगरों को:कौशल प्रशिक्षणआधुनिक औजार और टूलकिटआर्थिक सहायताडिजिटल सुविधाएंबाजार से जुड़ने में मददजैसी सुविधाएं दी जाती हैं।सरकार के अनुसार, अब तक 30 लाख पारंपरिक कारीगर और शिल्पकार इस योजना में रजिस्टर्ड हो चुके हैं।18 पारंपरिक कामों से जुड़े हैं लाभार्थीलाल किले पर आमंत्रित लाभार्थी PM Vishwakarma योजना के तहत आने वाले 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े हैं। इनमें दर्जी, बढ़ई, सुनार, लोहार, ताला बनाने वाले कारीगर सहित कई अन्य पेशे शामिल हैं।आमंत्रित कारीगरों ने योजना के तहत रजिस्ट्रेशन, बेसिक स्किल ट्रेनिंग और टूलकिट जैसी सुविधाओं का लाभ लिया है।पारंपरिक कारीगरों के योगदान को सम्मानस्वतंत्रता दिवस समारोह में PM Vishwakarma लाभार्थियों को विशेष अतिथि के तौर पर बुलाना भारत के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के योगदान को सम्मान देने का एक अवसर है।लाल किले से होने वाले 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होकर ये कारीगर देश के इस ऐतिहासिक राष्ट्रीय उत्सव का हिस्सा बनेंगे और भारत की समृद्ध कला एवं सांस्कृतिक विरासत में अपने योगदान को सम्मानित होते देखेंगे। -
नई दिल्ली। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में पुनर्गठित ‘इंडिया कोड पोर्टल’ का शुभारंभ किया। सरकार ने कानूनों तक नागरिकों की पहुंच को अधिक सरल, तेज, व्यापक और नागरिक-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से पोर्टल को आधुनिक डिजिटल तकनीकों से नया रूप दिया है। इसमें एआई-सहायता प्राप्त सर्च, सेमांटिक एवं स्पीच सर्च, बेहतर नेविगेशन और बहुभाषी एक्सेस जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं।
पुनर्गठित पोर्टल का शुभारंभ कर्तव्य भवन-2, नई दिल्ली में भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी, विधायी विभाग एवं कानूनी कार्य विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि, अपर सचिव डॉ. मनोज कुमार और विधायी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) की महानिदेशक प्रियंका भारती, इंडिया-एआई मिशन के सीओओ सुदीप श्रीवास्तव और एनआईसी के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान के महत्व और कानूनों को सभी हितधारकों के लिए आसानी से उपलब्ध एवं समझने योग्य बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इंडिया कोड पोर्टल संविधान, केंद्रीय अधिनियमों, नियमों और अन्य विधायी जानकारियों तक नागरिकों की आसान पहुंच के लिए एक विश्वसनीय और व्यापक मंच के रूप में काम करता है।मेघवाल ने कानून तक पहुंच को मजबूत करने में तकनीक की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने पोर्टल के पुनर्गठन की परिकल्पना, समन्वय और निगरानी के लिए विधायी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। साथ ही तकनीकी विशेषज्ञता और विकास सहायता के लिए एनआईसी की टीम को भी श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि साझा प्रयासों से विधायी जानकारी की सुलभता, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित वितरण में सुधार होगा। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कानूनों तक भौतिक माध्यम से डिजिटल पहुंच की ओर हुए बदलाव को रेखांकित किया। उन्होंने नई और यूजर-फ्रेंडली सुविधाओं के साथ विकसित किए गए पुनर्गठित इंडिया कोड पोर्टल की सराहना की। उन्होंने पोर्टल को तकनीकी रूप से अपडेटेड रखने और बदलती जरूरतों के अनुरूप लगातार विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।वेंकटरमणी ने स्पष्ट, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण कानून बनाने में विधायी अधिकारियों की जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया। उन्होंने कानूनों तक व्यापक और सुविधाजनक पहुंच सुनिश्चित करने को जरूरी बताया। अटॉर्नी जनरल ने पोर्टल के विकास में विधायी विभाग और तकनीकी टीम के समन्वित प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इससे विधायी जानकारी में पारदर्शिता और सार्वजनिक पहुंच और मजबूत होगी।विधायी विभाग एवं कानूनी कार्य विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि ने इंडिया कोड पोर्टल के विकासक्रम की जानकारी दी। उन्होंने नागरिकों, कानूनी पेशेवरों, सरकारी विभागों और अन्य हितधारकों के लिए प्रामाणिक एवं अपडेटेड विधायी जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने के प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पोर्टल में यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस के साथ सर्च, नेविगेशन और एक्सेसिबिलिटी को बेहतर बनाया गया है।विधायी विभाग के अपर सचिव डॉ. मनोज कुमार ने पुनर्गठित इंडिया कोड पोर्टल की प्रमुख विशेषताओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कानून तक पहुंच न्याय तक पहुंच की दिशा में पहला कदम है। कानून केवल उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे खोजना, नेविगेट करना, समझना और इस्तेमाल करना भी आसान होना चाहिए।पुनर्गठित पोर्टल में एआई-असिस्टेड और सेमांटिक सर्च के साथ स्पीच-सक्षम खोज की सुविधा दी गई है। इससे उपयोगकर्ता सामान्य शब्दों या अपनी आवाज के जरिए भी आवश्यक कानूनी जानकारी खोज सकेंगे। बेहतर सर्च और नेविगेशन के अलावा अधिनियमों और अधीनस्थ विधानों के बीच लिंक उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे संबंधित कानूनी प्रावधानों तक पहुंच आसान होगी।इंडिया कोड केंद्रीय अधिनियमों और उनके अधीनस्थ विधानों, राज्य अधिनियमों और उनके अधीनस्थ विधानों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के विधानों और विनियमों का यूनिफाइड डिजिटल संग्रह उपलब्ध कराता है। पुनर्गठित पोर्टल का उद्देश्य संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में एआई-सहायता प्राप्त बहुभाषी पहुंच उपलब्ध कराना भी है।पोर्टल में ई-गजट इकोसिस्टम के साथ इंटीग्रेशन की सुविधा भी जोड़ी गई है। इसके अलावा संशोधनों और विधायी इतिहास तक पहुंच, अधिनियमों को संबंधित अधीनस्थ विधानों से जोड़ने, बेहतर डॉक्यूमेंट व्यूइंग और क्यूआर-इनेबल्ड एक्सेस जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। नागरिकों की प्रतिक्रिया के लिए व्यवस्थित फीडबैक सिस्टम भी विकसित किया गया है।सरकार का उद्देश्य इंडिया कोड को केवल कानूनों के ऑनलाइन संग्रह तक सीमित रखने के बजाय एक परस्पर जुड़े, खोजने योग्य और नागरिक-अनुकूल कानूनी सूचना ढांचे के रूप में विकसित करना है। नए पोर्टल के जरिए कानून और नागरिकों के बीच तकनीकी दूरी कम करने तथा विधायी जानकारी को अधिक उपयोगी और इंटरऑपरेबल बनाने की कोशिश की गई है।पुनर्गठित इंडिया कोड पोर्टल कानून तक पहुंच की सुगमता, पारदर्शिता, व्यापक नागरिक भागीदारी और कानूनी व सार्वजनिक सेवाओं के बेहतर वितरण के लिए तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। सरकार के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म भारत में एक विश्वसनीय और तकनीक-सक्षम कानूनी सूचना इकोसिस्टम विकसित करने में मदद करेगा, जहां कानून नागरिकों को उनकी सुविधा के अनुसार भाषा और डिजिटल माध्यम में अधिक आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शुक्रवार को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर कहा कि उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन करता हूं, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया।पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ में कहा, “आज हम ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ मना रहे हैं। हम उन सभी लोगों के साहस को याद करते हैं जो विभाजन से प्रभावित हुए थे। यह इतिहास का वह दौर था जिसने कई जिंदगियां तहस-नहस कर दीं, परिवार उजड़ गए, लोगों ने अपनों को खो दिया और भारी पीड़ा सही।”पीएम मोदी ने आगे कहा, “इन मुश्किलों से उबरते हुए लोगों ने शून्य से अपनी जिंदगी फिर से बनाई, चुनौतियों को कामयाबी में बदला और देश की प्रगति में बड़ा योगदान दिया। उनकी जीवन-यात्राएं हमें इंसानी जब्जे की ताकत की याद दिलाती हैं।” उन्होंने प्रार्थना की कि यह दिन हमारे देश में आपसी सद्भाव और भाईचारे को बनाए रखने के हमारे संकल्प को अधिक मजबूत करे और हम सब मिलकर ‘विकसित भारत’ के निर्माण की दिशा में काम करें।
एक अन्य पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा, “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने अपने साहस और सामर्थ्य से दिखाया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को सिद्ध किया जाता है। आइए, सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करें।”इस अवसर पर उन्होंने ‘संस्कृत सुभाषितम्’ भी शेयर किया। उन्होंने लिखा, “उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः। कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति।”‘संस्कृत सुभाषितम्’ में कहा गया है, “परिश्रम, उद्यम और पुरुषार्थ से ही विविध कलाएं, विज्ञान, तकनीकी कौशल, शिल्प और नवाचार विकसित होते हैं व सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इसलिए, मनुष्य को भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए बल्कि साहस, कर्मठता और निरंतर प्रयास के साथ अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहना चाहिए क्योंकि पुरुषार्थ ही भाग्य का निर्माता है।” -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आज (शुक्रवार, 14 अगस्त 2026) राष्ट्र को संबोधित करेंगी। राष्ट्रपति का संबोधन शाम 7 बजे से आकाशवाणी के पूरे राष्ट्रीय नेटवर्क पर प्रसारित किया जाएगा। दूरदर्शन के सभी चैनलों पर राष्ट्रपति का संबोधन पहले हिंदी और उसके बाद अंग्रेजी में प्रसारित होगा।
दूरदर्शन पर हिंदी और अंग्रेजी में संबोधन के प्रसारण के बाद उसके क्षेत्रीय चैनलों के माध्यम से राष्ट्रपति के संबोधन को क्षेत्रीय भाषाओं में भी प्रसारित किया जाएगा। इसके जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोग अपनी-अपनी भाषाओं में राष्ट्रपति का संदेश सुन सकेंगे।आकाशवाणी भी अपने संबंधित क्षेत्रीय नेटवर्क पर रात 9:30 बजे राष्ट्रपति के संबोधन के क्षेत्रीय भाषा वाले संस्करण प्रसारित करेगा। इस तरह राष्ट्रपति का स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या का संदेश राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दोनों स्तरों पर व्यापक रूप से लोगों तक पहुंचाया जाएगा।स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम संबोधन देश के लिए महत्वपूर्ण संदेश माना जाता है। इस संबोधन में राष्ट्रपति देश की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की दिशा से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार रख सकती हैं -
नई दिल्ली। इस साल 15 अगस्त को जब देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ मनाएगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराएंगे और देश को संबोधित करेंगे तो एक नया रिकॉर्ड बनेगा। दरअसल पीएम मोदी लगातार 13वीं बार लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहरायेंगे। इसके साथ ही वह सबसे अधिक बार ऐसा करने वाले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री होंगे।
दरअसल केंद्र में बीजेपी की सरकार आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार 2014 में लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया था, लेकिन 2019 में अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल में छठवीं बार तिरंगा फहराकर बीजेपी सरकार के पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की बराबरी कर ली थी। गौरतलब हो कि बीजेपी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के मुखिया रहे अटल बिहारी वाजपेयी 19 मार्च 1998 से 22 मई 2004 के बीच छह बार लाल किला से तिरंगा फहराया था। हालांकि वाजपेयी 1996 में पहली बार प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन उनकी सरकार ज्यादा दिन नहीं चल पाई थी और उन्हें राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अवसर नहीं मिल पाया था।देश में गैर कांग्रेसी पार्टी के शासन पर नजर डाले तो यह बदलाव 1977 में आया। दरअसल उन दिनों देश में आपातकाल को लेकर आम जनता में आक्रोश की लहर ने 1977 के आम चुनाव में तत्कालीन कांग्रेस सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया और केंद्र में जनता पार्टी की सरकार बनी। आजादी के बाद यह पहली गैर-कांग्रेसी सरकार थी। मोरारजी देसाई इस सरकार के मुखिया बने। उन्होंने दो बार 1977 और 1978 में लाल किले की प्राचीर पर तिरंगा फहराया।इसके बाद 28 जुलाई 1979 को चौधरी चरण सिंह समाजवादी दलों और कांग्रेस (यू) के सहयोग से प्रधानमंत्री बने तथा उसी साल पहली और आखिरी बार तिरंगा फहराया। चरण सिंह के अलावा विश्वनाथ प्रताप सिंह, एच डी देवेगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल भी ऐसे गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री रहे, जिन्हें एक-एक बार तिरंगा फहराने का सौभाग्य हासिल हुआ।देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने आजाद भारत में 15 अगस्त 1947 को लाल किले से झंडा फहराया। वह 27 मार्च 1964 तक देश के प्रधानमंत्री रहे और इस दौरान उन्होंने रिकॉर्ड 17 बार 15 अगस्त को झंडा फहराया। इसके बाद इंदिरा गांधी 11 और मनमोहन सिंह (10) का स्थान है। -
नयी दिल्ली. लोकसभा के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद बृहस्पतिवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा आयोजित पारंपरिक चाय पार्टी का कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) समेत 'इंडिया' गठबंधन के सभी घटक दलों ने बहिष्कार किया, जबकि विपक्ष की एक अन्य प्रमुख पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेताओं ने इसमें हिस्सा लिया। सूत्रों के अनुसार, बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सरकार के कई अन्य वरिष्ठ मंत्री मौजूद थे। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि उनके साथ ही सपा, तृणमूल कांग्रेस और अन्य कई दलों के नेताओं ने इस कार्यक्रम में भाग नहीं लिया। लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के बाद परंपरागत रूप से लोकसभा अध्यक्ष की ओर से यह चाय पार्टी आयोजित की जाती है जिसमें प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और सत्तापक्ष के नेताओं के साथ विपक्ष के प्रमुख नेता शामिल होते हैं।
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नागरिकों से 'हर घर तिरंगा' अभियान में शामिल होने की अपील की
नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को यहां अपने आवास पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और नागरिकों से 'हर घर तिरंगा' अभियान में शामिल होने की अपील की। शाह ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि तिरंगा देश के प्रति नागरिकों के पवित्र गर्व और उनकी एकता की ताकत का प्रतीक है। मंत्री ने हिंदी में कहा, ''आज नयी दिल्ली में अपने आवास पर मैंने 'हर घर तिरंगा अभियान' के तहत तिरंगा फहराया। मोदी जी के नेतृत्व में शुरू किया गया यह अभियान आज हर भारतीय के दिल में देशभक्ति और गर्व की भावना को और मजबूत कर रहा है।'' उन्होंने कहा कि करोड़ों नागरिक तिरंगे से जुड़ रहे हैं और 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को सशक्त बना रहे हैं। शाह ने एक अन्य पोस्ट में कहा,''तिरंगा हमारे देश के प्रति हमारे पवित्र गर्व और हमारी एकता की ताकत का प्रतीक है... मैं हर नागरिक से आग्रह करता हूं कि वे इस आंदोलन में लाखों लोगों के साथ जुड़ें और अपने घरों पर तिरंगा फहराकर तथा हर घर तिरंगा से संबंधित वेबसाइट पर सेल्फी अपलोड करके देशभक्ति का जश्न मनाएं।'' -
अयोध्या (उप्र) / श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति के लिए चयन समिति ने छांटे गए 18 उम्मीदवारों की साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी कर ली है और समिति द्वारा इस पद के लिए नामों की सिफारिश किए जाने की संभावना है। सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। इससे पूर्व, न्यास के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरि ने कहा था कि न्यास, चयन समिति द्वारा तीन नामों की सिफारिश से अंतिम नियुक्ति करेगा। उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश प्रमोद कोहली की अध्यक्षता में गठित इस समिति में लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हवारे भी शामिल हैं। सूत्रों ने कहा कि चयन प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर गई है। पिछले कुछ दिनों में समिति द्वारा 18 उम्मीदवारों का साक्षात्कार किया गया। उम्मीदवारों में सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी और पूर्व आईएएस एवं आईपीएस अधिकारी शामिल हैं। बुधवार को साक्षात्कार के दूसरे दिन भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी राजेश पांडेय का दूसरी बार साक्षात्कार लिया गया। साथ ही बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक परेश सक्सेना भी साक्षात्कार में शामिल हुए थे। सूत्रों ने बताया कि ये साक्षात्कार राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में लिए जा रहे हैं क्योंकि न्यास राम मंदिर का प्रशासन और कामकाज देखने के लिए पूर्णकालिक सीईओ का चयन करना चाहता है। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व, मंगलवार को आठ उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया गया था और बुधवार को चार आवेदक साक्षात्कार के लिए पेश हुए। सूत्रों ने कहा कि समिति ने उम्मीदवारों से साक्षात्कार में अलग-अलग प्रश्न पूछे, जिनमें बुधवार को पूछे गए प्रश्न मंदिर व्यवस्था के कामकाज और प्रबंधन पर केंद्रित थे। सूत्रों ने कहा कि उम्मीदवारों से प्रमुख आयोजनों पर भारी भीड़ संभालने के संबंध में भी प्रश्न पूछे गये। इसके अलावा, उम्मीदवारों की पारिवारिक पृष्ठभूमि और हिंदू धर्म और भगवान में उनकी आस्था से जुड़े प्रश्न भी पूछे गए। सूत्रों ने स्पष्ट किया कि उम्मीदवारों से उनके कार्य के अनुभव, राम मंदिर के लिए दूरदृष्टि और कार्ययोजना के बारे में सवाल पूछे गए और कोई व्यक्तिगत प्रश्न नहीं पूछे गए जैसे कि क्या वे जनेऊ पहनते हैं, शाकाहारी हैं आदि। मंगलवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के तीन पूर्व अधिकारी, एक पूर्व आईपीएस अधिकारी और सेना के चार पूर्व अधिकारी साक्षात्कार के लिए पेश हुए थे। इन उम्मीदवारों से उनकी धार्मिक आस्था, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक एवं धार्मिक सक्रियता और राम मंदिर के लिए उनकी दूरदृष्टि एवं कार्य योजना के बारे में प्रश्न पूछे गए। न्यास ने इस पद के लिए आए करीब 5,200 आवेदनों में से 18 उम्मीदवारों को छांटा है। इनमें दक्षिण भारत के मंदिरों से जुड़े पूर्व वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। इस बीच, सीईओ की नियुक्त के निर्णय को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया आई है जिसमें अयोध्या के कुछ संत इस योजना के खिलाफ हैं। न्यास ने जगदीश आफले को अपना पहला सचिव नियुक्त करने का भी प्रस्ताव किया है जिस पर दो सितंबर को न्यास की अगली बैठक में इसकी पुष्टि होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि राम मंदिर में चढ़ावे के गबन के आरोपों के बाद पूर्णकालिक सीईओ की नियुक्ति करने का निर्णय लिया गया।
- नयी दिल्ली. भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की वरिष्ठ अधिकारी अर्चना वर्मा ने बुधवार को जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग में सचिव का पदभार ग्रहण किया। उन्होंने वी एल कंथा राव का स्थान लिया है। असम-मेघालय कैडर की 1995 बैच की आईएएस अधिकारी वर्मा सचिव का पदभार ग्रहण करने से पहले राष्ट्रीय जल मिशन की मिशन निदेशक के रूप में कार्यरत थीं। कार्मिक मंत्रालय ने 23 जुलाई के अपने आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए सोमवार देर रात उनकी नियुक्ति की घोषणा की। इससे पहले, वर्मा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) में कार्यरत थीं और केंद्र में कई वरिष्ठ पदों पर रहीं। उन्होंने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) में अतिरिक्त सचिव के रूप में भी कार्य किया, जहां उन्होंने आयोग की नीतियों और दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार (जीएनसीटीडी) से संबंधित सतर्कता मुद्दों से जुड़े मामलों को संभाला। वर्मा ने सितंबर 2022 में राष्ट्रीय जल मिशन (एनडब्ल्यूएम) के मिशन निदेशक के रूप में जल शक्ति मंत्रालय में कार्यभार संभाला। उन्होंने एनडब्ल्यूएम को जल शक्ति अभियान-कैच द रेन (जेएसए-सीटीआर) पहल से आगे ले जाने पर काम किया। वर्मा ने लेडी श्री राम कॉलेज से इतिहास में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की है।
- गांधीनगर. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि बचपन से वयस्क होने तक व्यक्ति के जीवन के परिवर्तनकारी सफर में पुस्तकालय देश के लिए एक मूल्यवान नागरिक तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। 'ग्रामीण ज्ञान सेतु' ऐप जारी करने के बाद शाह ने 'डिजिटल माध्यम' से संबोधित करते हुए अपने जीवन को बदलने में पुस्तकालयों की भूमिका को याद किया। यह ऐप उनके गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में पुस्तकालयों को आपस में जोड़ता है, जिससे ग्रामीण बच्चों को लाखों किताबें उपलब्ध हो सकेंगी। गृहमंत्री ने माता-पिता से बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करने की अपील की। उन्होंने खासकर गृहणियों से कहा कि वे अपने खाली समय का सदुपयोग विभिन्न विषयों के बारे में जानने और अपने बच्चों को पढ़ने की ओर प्रेरित करने में करें। इस मौके पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी मौजूद थे।शाह ने कहा, ''बिना पढ़े किसी भी विषय में महारत हासिल करना या उसकी बुनियादी जानकारी पाना भी मुमकिन नहीं है। बचपन से किशोरावस्था, युवावस्था और अंत में बड़े होने तक के बदलावकारी सफर में, अगर किसी को पढ़ने की सामग्री और ज्ञान के अलग-अलग पहलुओं के बारे में सही मार्गदर्शन मिले, तो पुस्तकालय सचमुच देश को एक बहुमूल्य नागरिक दे सकते हैं तथा फिर किसी और चीज की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।'' शाह ने कहा कि पुस्तकाल; ने उन्हें 16 सालों तक कई विषयों की बुनियादी जानकारी और अनगिनत अन्य विषयों की गहरी समझ हासिल करने में मदद की। उन्होंने कहा, ''अलग-अलग विषयों के बारे में जानकारी खोजने की जो आदत बचपन में शुरू हुई और आगे चलकर एक समर्पित अभ्यास में बदल गई, उसी ने मुझे आज अलग-अलग क्षेत्रों में योगदान देने के काबिल बनाया है।'' शाह ने कहा कि 'राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस' के मौके पर 'ग्रामीण ज्ञान सेतु' ऐप जारी किया गया है और गांधीनगर संसदीय क्षेत्र के गांवों में छोटे पुस्तकालय खोलने का काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि ये पुस्तकालय स्कूलों के पास बनाये जा रहे हैं और ऐसे 63 पुस्तकालय बनाने का काम पहले से ही चल रहा है, जिनमें से हर एक में 400 से 600 किताबें होंगी। शाह ने कहा कि उन्होंने इन 'बहु-आयामी पुस्तकालयों' के लिए किताबें खुद चुनी हैं, ताकि बच्चों में पढ़ने की रुचि पैदा हो सके। उन्होंने कहा, ''हमने यह भी पक्का किया है कि गांवों में ही उनके भविष्य के करियर के लिए उपयोगी किताबें उपलब्ध हों, जैसे कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अध्ययन सामग्री, गुजरात और भारत का इतिहास, और आज़ादी की लड़ाई एवं 1857 की क्रांति से जुड़ी किताबें।'' केंद्रीय मंत्री ने कहा कि माता-पिता के प्रोत्साहन के बिना बच्चे में पढ़ने की आदत विकसित नहीं हो सकती।
- रांची. झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने बुधवार को आरोप लगाया कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ताजा रिपोर्ट से राज्य सरकार की विफलता, प्रशासनिक अक्षमता, योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और वित्तीय अनियमितताएं उजागर हुई हैं। मरांडी ने सरकार पर केंद्रीय निधियों का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जल जीवन मिशन (जेजेएम), प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) और मनरेगा जैसी योजनाओं में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कैग की ताजा रिपोर्ट मंगलवार को संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने झारखंड विधानसभा में पेश की थी। मरांडी ने यहां संवाददाताओं से कहा, ''कैग की रिपोर्ट ने हेमंत सोरेन सरकार की प्रशासनिक अक्षमता, योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं की गंभीर तस्वीर पेश की है। सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। उसके अपने आंकड़े ही उसकी विफलता उजागर करते हैं।'' उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के गरीब परिवारों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि कुल 22.34 लाख पात्र परिवारों में से 6.32 लाख परिवार लाभार्थियों के चयन को अंतिम रूप देने में हुई देरी के कारण पीएमएवाई-जी योजना से वंचित रह गए।
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भुवनेश्वर. ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बुधवार को अधिकारियों को पुरी के समुद्र तट को ''आध्यात्मिक समुद्र तट'' के रूप में विकसित करने और प्रतिदिन ''महोदधि आरती'' का भव्य आयोजन करने का निर्देश दिया। माझी ने यह निर्देश पुरी के समग्र विकास, संरक्षण और श्री जगन्नाथ संस्कृति तथा आठवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित गोवर्धन पीठ के संवर्धन को लेकर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिया। अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने गोवर्धन पीठ के महत्व को गौरवपूर्ण ढंग से पेश करने तथा उसकी विरासत और संपत्तियों की रक्षा के लिए कदम उठाने पर जोर दिया। उन्होंने 'स्वर्गद्वार' के सामने समुद्र तट पर होने वाली पवित्र 'संध्या महोदधि आरती' पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि समुद्र तट के सौंदर्यीकरण के साथ शाम की 'आरती' का आयोजन और भी भव्य तरीके से किया जाएगा। एक अधिकारी ने कहा, ''माझी ने प्रशासन को पूरे पुरी समुद्र तट को एक भव्य आध्यात्मिक समुद्र तट के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया है।'' बैठक में पीठ के आसपास के क्षेत्र के विकास के साथ-साथ मठ परिसर में स्थित 'श्री गोवर्धन गोशाला' के उचित प्रबंधन के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई।
- नयी दिल्ली. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को संसद को बताया कि जून 2026 तक साढ़े तीन साल की अवधि में 65 रेल कर्मचारियों और 13,580 दलालों को गिरफ्तार किया गया। वैष्णव ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में तत्काल टिकट की कथित अनधिकृत बिक्री के संबंध में यह जानकारी दी। निर्दलीय सांसद उमेशभाई बाबूभाई पटेल ने तत्काल टिकट की बिक्री में रेलवे कर्मचारियों और दलालों के बीच कथित मिलीभगत का मुद्दा उठाते हुए पूछा था कि क्या सरकार ने पिछले तीन वर्ष में रेलवे कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की है क्योंकि पश्चिम रेलवे जोन में तत्काल टिकट बेचने वाले दलालों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं। रेल मंत्री ने कहा, ''रेल अधिनियम, 1989 की धारा 143 के तहत दोषियों (जिनमें रेलवे कर्मचारी भी शामिल हैं) के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है। पिछले 3 वर्षों, यानी 2023 से 2025 और जून 2026 तक, भारतीय रेल के 65 कर्मियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से नौ को कानून के संबंधित प्रावधान के तहत पश्चिम रेलवे जोन में गिरफ्तार किया गया।'' उन्होंने कहा, ''इसके अलावा, 13,580 दलालों को गिरफ्तार किया गया और रेल अधिनियम, 1989 की धारा 143 के तहत दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।'' वैष्णव ने टिकट आरक्षण प्रणाली के दुरूपयोग को रोकने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) द्वारा नियमित जांच और अभियानों समेत कई उपायों का भी जिक्र किया। बाबूभाई ने पश्चिम रेलवे जोन के रेलवे स्टेशनों पर लिफ्ट, एस्केलेटर और फुट ओवरब्रिज के बंद पड़े होने के संबंध में भी सवाल पूछे थे। रेल मंत्री ने बताया कि वर्तमान में पश्चिम रेलवे में 46 स्टेशनों पर 191 एस्केलेटर और 86 रेलवे स्टेशनों पर 240 लिफ्ट लगाई गई हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम रेलवे के किसी भी स्टेशन पर कोई लिफ्ट, एस्केलेटर या 'फुट ओवर ब्रिज' (एफओबी) स्थायी रूप से बंद नहीं है। उन्होंने कहा, ''अगर रखरखाव, मरम्मत या संचालन से जुड़े अन्य कारणों से लिफ्ट, एस्केलेटर और एफओबी कुछ समय के लिए बंद रहते हैं, तो भी स्टेशन पर यात्रियों के लिए प्लेटफॉर्म के बीच आने-जाने के अन्य रास्ते खुले रहते हैं। वैष्णव ने एक और प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि रेलवे स्टेशनों पर मुफ़्त एसी (वातानुकूलित) और गैर-एसी प्रतीक्षा कक्ष के अलावा, भारतीय रेल ने आधुनिक 'एयर-कंडीशंड वेटिंग हॉल' भी बनाए हैं, जिनके लिए यात्रियों को बहुत कम शुल्क अदा करना पड़ता है।
- नयी दिल्ली. सरकार ने बुधवार को संसद को बताया कि 2025 में राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर सबसे अधिक शिकायतें जिन शीर्ष 10 'ई-कॉमर्स' कंपनियों के खिलाफ दायर की गईं, उनमें फ्लिपकार्ट, एमेजॉन और मीशो शामिल हैं। उपभोक्ता मामलों के राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि इस सूची में शामिल अन्य प्लेटफॉर्म मिंत्रा, नेटमेड्स, जेप्टो, ब्लिंकिट, नापतोल, वीएलई बाजार और नायका हैं। सदन में साझा किये गए आंकड़ों के अनुसार, फ्लिपकार्ट के खिलाफ सबसे अधिक 1.33 लाख शिकायतें प्राप्त हुईं। इसके बाद एमेजॉन (91,248), मीशो (29,284), मिंत्रा (25,384), नेटमेड्स (19,895), जेप्टो (5,774), ब्लिंकिट (5,102), नापतोल (4,079), वीएलई बाजार (3,907) और नायका (3,405) का स्थान है। मंत्री ने कहा कि केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने 47 ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लगभग 1,12,01,500 रुपये का जुर्माना लगाया है। वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन ने 25 अप्रैल 2025 से 30 जून 2026 के बीच उपभोक्ताओं को 91 करोड़ रुपये से अधिक का रिफंड दिलाने में मदद की, जिसमें से 63 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ई-कॉमर्स सेक्टर से जुड़ी शिकायतों से संबंधित थी। उन्होंने कहा कि यह रिफंड दावे से जुड़ी 1,47,000 से अधिक उपभोक्ता शिकायतों को कानूनी कार्रवाई से पूर्व के चरण में ही सुलझाकर हासिल किया गया। मंत्री ने बताया कि 2025 में हेल्पलाइन पर 'क्विक कॉमर्स' से जुड़ी कुल 5.11 लाख शिकायतें मिलीं, और उन सभी का निपटारा कर दिया गया। वर्ष 2025 में शिकायतों की सबसे बड़ी श्रेणी उत्पादों की डिलीवरी न होनी थी, जिसके तहत 79,818 मामले दायर किये गए। अन्य आम शिकायतों में गलत उत्पाद की डिलीवरी, नियम के अनुसार 'रिप्लेसमेंट' या रिफंड देने से इनकार, खराब या क्षतिग्रस्त सामान की डिलीवरी, भुगतान की गई रकम का रिफंड न मिलना, सेवा की खराब गुणवत्ता, नकली उत्पाद की बिक्री और उपभोक्ता की सहमति के बिना रकम अनधिकृत रूप से ले लेना शामिल था। यह हेल्पलाइन उपभोक्ता मामले विभाग के तहत संचालित होता है।
- नयी दिल्ली. सरकार ने बुधवार को राज्यसभा को बताया कि केंद्र ने जनगणना कर्मियों के प्रशिक्षण, तकनीकी बुनियादी ढांचे और मानदेय के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 4,102 करोड़ रुपये जारी किए हैं। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जनगणना 2027 का पहला चरण – मकान सूचीकरण और घरों की गणना – 31 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में पहले ही पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि शेष राज्यों में जनगणना का पहला चरण सितंबर 2026 तक पूरा हो जाने की संभावना है।राय ने कहा कि जनगणना का दूसरा चरण यानी आबादी की गणना केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के अलावा हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के बर्फीले क्षेत्रों में एक सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। उसके बाद एक से पांच अक्टूबर 2026 तक संशोधन दौर चलाया जाएगा। उन्होंने कहा, ''अब तक, जनगणना कर्मियों के प्रशिक्षण, मानव संसाधन सहायता, तकनीकी बुनियादी ढांचे, जनगणना कर्मियों को मानदेय के भुगतान आदि के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को कुल 4,102 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है।'' मंत्री ने कहा कि जनगणना में पहली बार उत्तरदाताओं को एक पोर्टल के माध्यम से स्वयं-गणना की सुविधा दी गई है। जनगणना के दूसरे चरण के लिए भी डिजिटल उपकरण विकसित कर लिए गए हैं।
- नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार को कहा कि 'हर घर तिरंगा' अभियान एक सशक्त जन अभियान में बदल गया है, जिसमें समाज के हर वर्ग के लोग देश के प्रति गर्व व्यक्त करने के लिए शामिल हो रहे हैं। नवीन ने यहां कर्तव्य पथ पर 'तिरंगा यात्रा' को संबोधित करते हुए कहा कि तिरंगा भारत के शौर्य, बलिदान, एकता और आत्मसम्मान का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने लोगों से 13, 14 और 15 अगस्त को 'हर घर तिरंगा' अभियान में भाग लेने का आग्रह किया। उन्होंने लोगों से अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और उसके साथ 'सेल्फी' लेने की अपील की। उन्होंने कहा, ''13, 14 और 15 अगस्त—इन तीन दिनों तक हर घर में तिरंगे के सम्मान को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। हमारे घरों पर तिरंगा फहराया जाना चाहिए, उसके साथ 'सेल्फी' ली जानी चाहिए और यह संकल्प लिया जाना चाहिए कि हम अपना भविष्य स्वयं बनाएंगे तथा भारत के भविष्य को बनाने और उसे विकसित करने का संकल्प अपनाएंगे।'' नवीन ने कहा कि भारत का 80वां स्वतंत्रता दिवस 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर के साथ होगा। उन्होंने कहा, ''इस वर्ष लाल किले की प्राचीर से 'वंदे मातरम्' की वह गूंज सुनाई देगी।'' भाजपा प्रमुख ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद से कश्मीर में तिरंगा गर्व के साथ लहरा रहा है। उन्होंने कहा, ''2011 में जब कश्मीर के लाल चौक पर भारत का तिरंगा फहराने को लेकर सवाल उठाए गए थे, तब भारत के करोड़ों युवाओं के दिलों को ठेस पहुंची थी।'' उन्होंने कहा, ''हमें खुशी है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटा दिया और आज वहां तिरंगा सम्मान, गर्व और गरिमा के साथ लहराता हुआ दिखाई देता है।'' उन्होंने इस महीने की शुरुआत में घोषित केंद्र सरकार की 'सूर्यपथ तिरंगा' पहल का भी उल्लेख किया। इस पहल के तहत, भारतीय दूतावास और मिशन पूर्व से पश्चिम की ओर राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे।नवीन ने कहा, ''यह भारत के बढ़ते प्रभाव और भारत के संकल्प का प्रतीक होगा।''कर्तव्य पथ के निकट स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का उल्लेख करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि यह स्थल लोगों को स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हमारे नेताओं द्वारा दिए गए बलिदानों की याद दिलाता है। इस मौके पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी मौजूद थीं।
- नयी दिल्ली. भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल छात्र प्रदर्शनों को लेकर संसद में चर्चा से भाग रहे हैं क्योंकि वे गृह मंत्री अमित शाह का सामना करने से 'डरते हैं। नवीन ने कहा कि गृह मंत्री ने सड़कों से लेकर सदन तक एक लंबी राजनीतिक यात्रा तय की है और पूरा देश जानता है कि जब वह तथ्यों के साथ सदन में बोलते हैं, तो विपक्ष की ''बोलती बंद हो जाती है।'' भाजपा अध्यक्ष ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''इसी डर के कारण विपक्ष पूरे सत्र के दौरान गोलपोस्ट बदलता रहा और चर्चा से बचता रहा।'' उन्होंने कहा, ''इस पूरे सत्र में राहुल गांधी और समूचे विपक्ष का रवैया उनकी अराजक मानसिकता और लोकतंत्र-विरोधी सोच को उजागर करता है। पूरा सत्र बीतने को है, पर वे एक भी मुद्दे पर गंभीर चर्चा के लिए तैयार नहीं हुए।'' भाजपा अध्यक्ष ने कहा, '' पहले उन्होंने युवाओं के विषय पर चर्चा करने की मांग की, और जब सरकार इसके लिए पूरी तरह तैयार हो गई, तो कांग्रेस और 'इंडी' गठबंधन यह कहकर भाग खड़ा हुआ कि उन्हें कोई चर्चा ही नहीं करनी है।'' उन्होंने कहा, ''यह साफ तौर पर दिखाता है कि विपक्ष मुद्दों को लेकर न तो संजीदा है और न ही गंभीर।''नवीन ने कहा, ''सच्चाई यह है कि राहुल गांधी, कांग्रेस और 'इंडी' गठबंधन चर्चा से इसलिए भाग रहा था क्योंकि उन्हें पता था कि जब गृह मंत्री संसद में बोलेंगे तो विपक्ष के सारे झूठ धराशायी हो जायेंगे। पूरा देश जानता है कि जब गृह मंत्री सदन में तथ्यों के साथ बोलते हैं, तो उनके तर्कों के सामने विपक्ष की बोलती बंद हो जाती है। इसी डर से विपक्ष पूरे सत्र में केवल विषयों को बदलता रहा और चर्चा से भागता रहा।'' उन्होंने कहा, ''संसद लोकतंत्र का वह पवित्र मंदिर है जहां जनता के मुद्दों पर सार्थक चर्चा से देश की दिशा तय होती है, लेकिन इस बार के मानसून सत्र में गैरजिम्मेदार कांग्रेस ने चर्चा से भाग कर और बार–बार अपना गोलपोस्ट बदलकर देश की लोकतांत्रिक मर्यादा और गरिमा को ही तार–तार कर दिया। वास्तव में कांग्रेस ने देश की जनता को धोखा दिया है।
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नयी दिल्ली. उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीयों में देशभक्ति की भावना जगाने और अलग-अलग क्षेत्रों, भाषाओं, धर्मों और सामाजिक पृष्ठभूमियों के लोगों को एकजुट करने में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' ने अहम भूमिका निभाई। 'वंदे मातरम्' गीत की रचना के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित 'हर घर तिरंगा' बाइक रैली को यहां भारत मंडपम में संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि 'वंदे मातरम्' के दो शब्द ने ''उस समय हर भारतीय के मन में देशभक्ति की भावना को जगाया'' और यही वह मुख्य ताकत बनी जिसने भारत से ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन को उखाड़ फेंका। उन्होंने कहा, ''हमारी आजादी की लड़ाई भारतीय सोच, भारतीय भावना और भारतीय चेतना की जागृति थी। इसने अलग-अलग क्षेत्रों, भाषाओं, धर्मों और सामाजिक पृष्ठभूमियों के लोगों को आजादी के एक साझे सपने और 'एक भारत' के साझे सपने के जरिए एकजुट किया।'' राधाकृष्णन ने कहा कि जब बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इन अमर शब्दों को लिखा, तो उन्होंने ''आजाद माहौल में सांस लेने की चाह रखने वाले इस राष्ट्र की आत्मा को आवाज दी''। उप राष्ट्रपति ने कहा, ''हमारे अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के लिए यह गीत महज कुछ शब्द नहीं था, बल्कि हिम्मत, त्याग और उम्मीद का स्रोत था।'' उन्होंने कहा कि कई स्वतंत्रता सेनानी अपने दिलों में 'वंदे मातरम्' की भावना के साथ फांसी के फंदे पर चढ़ गए। राधाकृष्णन ने 'वंदे मातरम्' की 150वीं सालगिरह पर संसद में हुई विशेष चर्चा का जिक्र करते हुए कहा कि यह चर्चा 12 घंटे से अधिक समय तक चली और यह ''सत्र की सबसे दिलचस्प और सार्थक चर्चाओं में से एक'' थी। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह उनके लिए खास तौर पर अहम था क्योंकि इस विषय पर चर्चा राज्यसभा के सभापति के रूप में उनके ''पहले सत्र'' के दौरान हुई। उन्होंने कहा कि भारत अब हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। इस कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू और केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी भी मौजूद थे।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने और दूसरों के संघर्षों से सीखने की बुधवार को अपील करते हुए कहा कि 'रील के युग' में रह रहे युवाओं को याद रखना चाहिए कि ''शॉर्टकट आपको नुकसान पहुंचा सकता है।'' मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा 'ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स' के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कोविंद का जीवन दिखाता है कि दृढ़ संकल्प किसी व्यक्ति को मुश्किलों से उबरने और सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने में कैसे मदद कर सकता है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद भी कोविंद के लगातार सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने का जिक्र करते हुए कहा कि पद छोड़ने के बाद भी उन्होंने आराम नहीं किया, बल्कि 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पहल पर काम कर रहे हैं, जो ''भारतीय लोकतंत्र में एक नया अध्याय खोल सकती है।'' मोदी ने कहा कि इस मुद्दे पर पूर्व राष्ट्रपति के प्रयास भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने में उनके निरंतर योगदान का हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री ने युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने की अपील की, क्योंकि इनसे किसी खास दौर को उस व्यक्ति के जीवन के ज़रिए समझने का मौका मिलता है जिसने उसे खुद अनुभव किया हो। उन्होंने कहा, ''यह रील का ज़माना है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अक्सर आपको अपनी ओर खींचते हैं और कुछ खास रास्तों पर ले जाते हैं। शॉर्टकट के इस दौर में, आइए रेलवे स्टेशनों पर अक्सर दिखने वाले उस संदेश को याद करें, शॉर्टकट आपकी ज़िंदगी छोटी कर सकता है। यह इसलिए लिखा होता है क्योंकि कुछ लोगों को रेल पुल का इस्तेमाल करने के बजाय पटरियों पर कूदने की आदत होती है। हालांकि, अगर जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए कोई शॉर्टकट अपनाना ही है, तो वह है किसी ऐसे व्यक्ति की आत्मकथा पढ़ना जिसे आप पसंद करते हैं।'' मोदी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सरकार और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोशल मीडिया पर 'जेन जी' से जुड़ने की कोशिशें तेज कर दी हैं। चिकित्सा के स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) का प्रश्नपत्र लीक होने के खिलाफ पिछले महीने हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद मोदी ने अपने मंत्रियों से कहा था कि वे युवाओं से जुड़ने के लिए इंस्टाग्राम का सक्रिय रूप से इस्तेमाल करें और रील 'पोस्ट' करें। हाल के हफ्तों में मोदी ने स्वयं युवाओं को संबोधित करते हुए कई बार रील साझा की हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविंद की आत्मकथा ''भारतीय लोकतंत्र की धरोहर'' बनेगी और नयी पीढ़ी को इससे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। मोदी ने कहा, ''हमें भविष्य में और ऐसे कई युवाओं की जरूरत है जो कोविंद की तरह हों। ऐसे लोग जो हालात से हार न मानें, बल्कि हर चुनौती से पार पाने का पुख्ता इरादा रखें। वे आत्मनिर्भर भारत का रास्ता बनाएंगे और यह आत्मकथा युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।'' उन्होंने कहा कि आत्मकथा का शीर्षक बिल्कुल सही है क्योंकि कोविंद का जीवन और संघर्ष भले ही व्यक्तिगत थे, लेकिन ''उन संघर्षों की जीत भारतीय लोकतंत्र की है''। मोदी ने याद किया कि बचपन में घर का सामान बचाने की कोशिश के दौरान लगी आग में कोविंद ने अपनी मां को खो दिया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दुखद घटना कोविंद को तोड़ सकती थी लेकिन इसके बजाय इसने उन्हें और मजबूत बनाया। मोदी ने कहा कि कोविंद में अच्छे संस्कार डालने में उनके पिता की अहम भूमिका रही।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति भवन में कोविंद के साथ अपनी मुलाकातों को याद करते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति उनसे ऐसी बातें करते थे जिनकी प्रोटोकॉल के तहत आम तौर पर अनुमति नहीं होती थी और उनके मना करने के बावजूद वे उन्हें खुद कार तक छोड़ने आते थे। कोविंद ने इस अवसर पर अपने बचपन की मुश्किलों और अपने आस-पास के माहौल से मिली सीख को याद किया।
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, ''मैं उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के एक गांव से आता हूं। मैंने ग्रामीणों से एक-दूसरे के प्रति दया और प्रेम का भाव सीखा।'' उन्होंने याद किया कि कैसे उनके घर की छत से बारिश का पानी टपकता था और उनका परिवार बारिश रुकने का इंतजार करता था। कोविंद ने कहा कि सरकारी आवास योजनाओं के तहत करोड़ों गरीब परिवारों को सिर पर छत मिली है और उन्हें सम्मान के साथ जीने का मौका मिला है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के ''कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति'' के उत्थान के संकल्प को याद करते हुए कोविंद ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बातचीत, उनका दृष्टिकोण और आम कार्यकर्ताओं से जुड़ने की उनकी क्षमता ने भी उन्हें बहुत प्रभावित किया। कोविंद ने कहा कि वह भाजपा से इसलिए जुड़े क्योंकि उनकी नजर में यह पार्टी परिवार या समुदाय के हितों से ऊपर देश को रखती है। पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में मौजूद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कोविंद को दृढ़ संकल्प की 'जीवंत मिसाल' बताया और भारत के कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए उनकी सराहना की। कार्यक्रम में देश के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और कई केंद्रीय मंत्री भी मौजूद थे। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि यदि विपक्षी दल छात्रों से जुड़े विषय पर चर्चा के लिए तैयार हो जाएं तो वह हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं ताकि देश की जनता के सामने सब 'दूध का दूध, पानी का पानी' हो जाए, क्योंकि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। बीते 20 जुलाई को आरंभ हुए संसद के मानसून सत्र के दौरान दोनों सदनों में जारी गतिरोध के बीच शाह ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा और आरोप लगाया कि विपक्ष चर्चा होने ही नहीं देना चाहता। शाह ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा कि संसद का मानसून सत्र शुरू होने के बाद से वह नियमित रूप से संसद आ रहे हैं और अपने कक्ष में बैठते हैं, लेकिन विपक्ष दोनों सदनों की कार्यवाही नहीं चलने दे रहा है। उन्होंने कहा, '' "लापता, भाग गए, भगोड़े.." इस प्रकार की भाषा भारत के सार्वजनिक जीवन और संसदीय जीवन में अभी-अभी सुनाई पड़ी है। जब से संसद सत्र शुरू हुआ है, तब से लगातार मैं संसद में आता हूं, अपने कक्ष में बैठता हूं। चूंकि संसद भवन में विपक्ष दोनों सदनों में कार्यवाही चलने नहीं दे रहा है, तो कोई जाकर क्या करेगा?'' गृह मंत्री ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार नीट से जुड़े विरोध-प्रदर्शनों के मुद्दे पर सभी प्रकार से चर्चा के लिए तैयार है, समय तय किया जाए और विपक्ष भी चर्चा के लिए तैयार हो जाए। उन्होंने कहा, ''मैं सदन में ही बैठूंगा, सबको सुनूंगा और सभी प्रकार के जवाब दूंगा, सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। मैं इस बात पर भी चर्चा करूंगा कि आपने (विपक्ष) चर्चा क्यों नहीं चाही।'' शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष को संसद की कार्यवाही चलने देनी चाहिए। उनका कहना था, ''मैं हर चीज का जवाब दूंगा ताकि देश की जनता के सामने दूध का दूध, पानी का पानी हो जाए।'' गृह मंत्री ने कहा कि अब विपक्ष को तय करना है कि उन्हें चर्चा करनी है या हंगामा करना है।
बाद में, शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से नीट प्रश्नपत्र लीक मुद्दे को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर सदन में चर्चा के लिए विपक्ष से बातचीत करने करने का आग्रह किया और कहा कि वह सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। -
नई दिल्ली। दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई) के तहत योजना की शुरुआत से अब तक करीब 18.45 लाख ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है, जबकि करीब 12.35 लाख अभ्यर्थियों को रोजगार मिला है। दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के अंतर्गत संचालित इस योजना का उद्देश्य प्लेसमेंट से जुड़े कौशल कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को रोजगार योग्य बनाना और उनके लिए सतत आजीविका के अवसर बढ़ाना है। यह जानकारी केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
उद्योग की बदलती जरूरतों और रोजगार के उभरते अवसरों को देखते हुए डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के संशोधित दिशा-निर्देश वित्तीय वर्ष 2025-26 से लागू किए गए हैं। इनमें उद्योग-संचालित प्रशिक्षण, सतत रोजगार, नियोजन पश्चात सहायता, कौशल उन्नयन और पुनर्कौशलन के अवसर तथा प्रशिक्षण वितरण में अधिक लचीलापन शामिल है। इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) रखरखाव, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य सेवा, देखभाल आधारित अर्थव्यवस्था, खुदरा, आतिथ्य और मीडिया एवं मनोरंजन जैसे उभरते क्षेत्रों को भी प्राथमिकता दी जा रही है।डीडीयू-जीकेवाई के तहत परिधान, ऑटोमोटिव, सौंदर्य एवं वेलनेस, निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य सेवा, आतिथ्य, आईटी-आईटीईएस, लॉजिस्टिक्स, खुदरा, दूरसंचार तथा कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षित युवाओं के नियोजन को उद्योग साझेदारियों, नियोक्ता समझौतों, रोजगार मेलों, कैंपस प्लेसमेंट अभियानों, उद्योग परामर्शों और सेक्टर स्किल काउंसिलों एवं नियोक्ताओं के साथ समन्वय के जरिए सुगम बनाया जाता है।योजना के तहत प्लेसमेंट से जुड़े परिणामों के साथ पाठ्यक्रम तैयार करने और प्रशिक्षण देने में उद्योग की निरंतर भागीदारी को अनिवार्य किया गया है। उद्योगों के साथ समन्वय सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक राज्य और संघ राज्य क्षेत्र में कैप्टिव नियोक्ताओं के लिए लक्ष्यों का 20% आवंटन किया गया है। इसके अलावा, परियोजना कार्यान्वयन अभिकरणों (पीआईए) को बैच मोड भुगतान छह महीने की सफल अनिवार्य नियोजन अवधि से जोड़ा गया है।डीडीयू-जीकेवाई 2.0 में रोजगार के स्थायित्व और टिकाऊपन को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत एक वर्ष की नियोजन पश्चात निगरानी एवं सहायता, परामर्श, प्रवासन सहायता, पूर्व छात्रों से जुड़ाव और शिकायत निवारण तंत्र जैसी व्यवस्थाएं शामिल की गई हैं। साथ ही, कौशल उन्नयन और पुनर्कौशलन के अवसर भी दिए जाएंगे। संशोधित ढांचे में न्यूनतम 70% प्लेसमेंट का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें अधिकतम 20% स्वरोजगार या गिग रोजगार को शामिल किया जा सकता है, बशर्ते रोजगार कम से कम छह महीने तक बना रहे।वित्तीय वर्ष 2026-27 में करीब 1.37 लाख ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए 750 करोड़ रुपए का बजट अनुमान रखा गया है। इसके अलावा, राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को 361.96 करोड़ रुपए की मूल स्वीकृति जारी की गई है। राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा अब तक 50.89 करोड़ रुपए का व्यय किया जा चुका है।मध्य प्रदेश में डीडीयू-जीकेवाई का कार्यान्वयन मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एमपीएसआरएलएम) के माध्यम से किया जा रहा है। योजना की शुरुआत से अब तक राज्य में करीब 93 हजार अभ्यर्थियों को प्रशिक्षित किया गया है, जबकि करीब 56 हजार अभ्यर्थियों को रोजगार मिला है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मध्य प्रदेश को 10 करोड़ रुपए की मूल स्वीकृति जारी की गई है।ग्वालियर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत योजना की शुरुआत से अब तक ग्वालियर जिले में 1,909 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षित किया गया, जिनमें से 701 को रोजगार मिला। वहीं, शिवपुरी जिले में 944 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण दिया गया और 579 अभ्यर्थियों को रोजगार मिला है। -
नई दिल्ली। अक्टूबर 2021 में शुरू किया गया पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (पीएमजीएस-एनएमपी) देश में एकीकृत और समन्वित अवसंरचना योजना को सक्षम बना रहा है। यह पहल विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को एक साझा मंच पर लाकर अवसंरचना परियोजनाओं की एकीकृत योजना और समन्वित क्रियान्वयन को बढ़ावा देती है। अब तक नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (एनपीजी) के माध्यम से करीब 18.66 लाख करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली 396 अवसंरचना परियोजनाओं का मूल्यांकन किया जा चुका है। यह जानकारी वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
पीएम गतिशक्ति एक एकीकृत योजना फ्रेमवर्क उपलब्ध कराता है, लेकिन इसके लिए अलग से कोई बजटीय प्रावधान नहीं किया गया है। परियोजनाओं की मंजूरी और उनका क्रियान्वयन संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों तथा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की अपनी योजनाओं, प्रक्रियाओं और बजटीय एवं वित्तीय प्रावधानों के तहत किया जाता है। इसलिए पीएम गतिशक्ति पहल के तहत कोई मात्रात्मक लक्ष्य या अलग व्यय आवश्यकता निर्धारित नहीं की गई है। पीएम गतिशक्ति एनएमपी का उद्देश्य मंत्रालयों और राज्यों को डेटा आधारित निर्णय लेने में सक्षम बनाना है। इसके लिए भू-स्थानिक डेटा, सैटेलाइट इमेजरी और एपीआई इंटीग्रेशन का उपयोग किया जा रहा है। इससे अवसंरचना विकास की निगरानी, योजना और उसे बेहतर बनाने में मदद मिल रही है। योजना के तहत परिवहन के विभिन्न साधनों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने के साथ सामाजिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं की भी एकीकृत और समन्वित योजना बनाने में सुविधा हो रही है।पीएम गतिशक्ति फ्रेमवर्क के तहत गठित नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप केंद्र सरकार की प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं का योजना स्तर पर मूल्यांकन करता है। इसका उद्देश्य एकीकृत नियोजन, मल्टी-मोडल और इंटर-मोडल कनेक्टिविटी, प्रयासों में तालमेल, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी और परियोजना स्थल एवं आसपास के क्षेत्र के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है। अब तक एनपीजी तंत्र के जरिए 18.66 लाख करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली 396 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया है। इनमें से 256 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 198 परियोजनाएं कार्यान्वयन के अधीन हैं।एनपीजी के माध्यम से मूल्यांकन की गई 396 परियोजनाओं में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की 171 परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें 108 को मंजूरी मिल चुकी है और 53 कार्यान्वयन के अधीन हैं। इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत 9,01,668 करोड़ रुपए है। रेल मंत्रालय की 162 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया है, जिनमें 102 को मंजूरी मिली है और सभी 102 परियोजनाएं कार्यान्वयन के अधीन हैं। इनकी अनुमानित लागत 5,43,315 करोड़ रुपए है। आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की 31 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया, जिनमें 17 को मंजूरी मिली है और 17 कार्यान्वयन के अधीन हैं। इनकी अनुमानित लागत 2,88,614 करोड़ रुपए है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की चार, पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय की तीन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय की छह परियोजनाओं का भी मूल्यांकन किया गया है। इसके अलावा एनआईसीडीसी और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग की 12, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की एक, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की एक तथा वस्त्र मंत्रालय की पांच परियोजनाएं एनपीजी मूल्यांकन के दायरे में आई हैं।सरकार के विभिन्न अध्ययनों और मूल्यांकनों के अनुसार पीएम गतिशक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, प्रगति, सागरमाला और एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, समर्पित रेल फ्रेट कॉरिडोर, औद्योगिक गलियारों जैसी कनेक्टिविटी अवसंरचना पहलों ने लॉजिस्टिक्स दक्षता, टर्न-अराउंड टाइम, कारोबार सुगमता और औद्योगिक विकास को बेहतर करने में योगदान दिया है। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग ने 2025 में नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) के सहयोग से लॉजिस्टिक्स लागत का मूल्यांकन किया। इसके अनुसार भारत में लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी के 7.9% रहने का अनुमान है, जो दुनिया की उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के स्तर के बराबर है।आर्थिक समीक्षा 2023-24 में भी इन पहलों से घरेलू विनिर्माण और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार की बात कही गई है। भारतीय प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरु के एक अध्ययन के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग विकास पर खर्च किए गए प्रत्येक एक रुपए से जीडीपी में 3.2 रुपए की वृद्धि होती है। अब तक 58 केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और सभी 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को पीएमजीएस-एनएमपी में शामिल किया जा चुका है। इसमें सड़क, रेल, बंदरगाह एवं जलमार्ग, बिजली, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, नागरिक उड्डयन, दूरसंचार और औद्योगिक गलियारों समेत प्रमुख अवसंरचना क्षेत्र शामिल हैं।सितंबर 2025 में पीएम गतिशक्ति पब्लिक प्लेटफॉर्म शुरू किया गया, जिसके जरिए निजी संस्थाओं और आम जनता को पीएम गतिशक्ति डेटा एनालिटिक्स तक पहुंच उपलब्ध कराई गई है। प्रश्न आधारित इस तंत्र के माध्यम से सार्वजनिक और निजी संस्थाएं सरल प्रक्रिया के जरिए पीएमजीएस-एनएमपी पोर्टल से डेटा एनालिटिक्स रिपोर्ट प्राप्त कर अपनी परियोजनाओं की योजना बना सकती हैं। राज्यों को जिला स्तरीय योजना में भी पीएम गतिशक्ति के उपयोग को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। हितधारकों के उपयोग के लिए करीब 1,800 डेटा लेयर्स एकीकृत किए गए हैं। इसके अलावा 65 से अधिक सॉफ्टवेयर मॉड्यूल/टूल और 100 से अधिक मोबाइल एवं वेब एप्लिकेशन विकसित कर प्लेटफॉर्म से जोड़े गए हैं।मंत्रालयों, विभागों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य हितधारकों की जरूरतों के अनुसार पीएम गतिशक्ति पहल का विस्तार लगातार जारी है। इसके तहत नए डेटा लेयर्स का मैपिंग और इंटीग्रेशन, अतिरिक्त सुविधाओं का विकास, योजना एवं विश्लेषण के लिए नए सॉफ्टवेयर मॉड्यूल और टूल तथा मोबाइल एवं वेब एप्लिकेशन विकसित करने का काम किया जा रहा है

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