- Home
- विदेश
-
वाशिंगटन. अमेरिका ने कहा है कि बांग्लादेश में लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और बांग्लादेशी लोगों की इच्छा का सम्मान करते हुए अंतरिम सरकार का गठन किया जाना चाहिए। विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने सोमवार को वाशिंगटन में अपने दैनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “हम बांग्लादेश के लोगों को बांग्लादेश की सरकार का भविष्य निर्धारित करते हुए देखना चाहते हैं।” बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री शेख हसीना के अचानक इस्तीफा देने और देश छोड़कर जाने से अराजकता की स्थिति पैदा हो गई है। ढाका में बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमां ने कहा है कि एक अंतरिम सरकार कार्यभार संभालने जा रही है और सेना देश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने का जिम्मा उठाएगी। हसीना के देश छोड़ने की खबर आते ही हजारों प्रदर्शनकारी उनके आवास में घुस गए और तोड़फोड़ व लूटपाट की। बाद में हसीना लंदन जाने की अपनी योजना के तहत भारत में गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर उतरीं। मिलर ने संवाददाताओं से कहा कि अमेरिका बांग्लादेश के हालात पर करीबी नजर रख रहा है और वह देश में हिंसा समाप्त करने तथा पिछले कुछ हफ्तों में हुई मौतों के लिए जवाबदेही तय करने का आह्वान करता है। उन्होंने कहा, “अंतरिम सरकार के संबंध में सभी फैसले लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और बांग्लादेशी लोगों की इच्छा का सम्मान करते हुए किए जाने चाहिए।” मिलर ने कहा, “अब, जवाबदेही कैसी होनी चाहिए, यह बांग्लादेशी कानून के तहत तय किया जाना चाहिए। जाहिर है, हिंसा के कृत्यों, कानून का उल्लंघन करने वाले कृत्यों के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।” एक सवाल के जवाब में मिलर ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि पूर्व प्रधानमंत्री हसीना ने अमेरिका से शरण मांगी है या नहीं। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ हफ्तों में हुई हिंसा और मौतों के मद्देनजर यह जरूरी है कि हम इन मौतों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पूर्ण एवं पारदर्शी जांच कराएं। जहां तक अंतरिम सरकार का सवाल है, हमारा मानना है कि यह महत्वपूर्ण है कि हम बांग्लादेशी लोगों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं पर ध्यान केंद्रित करें और लोकतांत्रिक शासन की संभावनाएं तलाशें।” मिलर ने जोर देकर कहा कि अमेरिका बांग्लादेश के लोगों के साथ अपने रिश्ते को काफी महत्व देता है। उन्होंने कहा, “हम इसे जारी रखना चाहते हैं। भविष्य में क्या हो सकता है, इसके बारे में जानने का अनुरोध करने वालों और सवाल पूछने वालों से मैं यह आग्रह करूंगा कि प्रधानमंत्री हसीना के इस्तीफे को अभी 12 घंटे भी नहीं बीते हैं।” मिलर ने कहा कि अमेरिका बांग्लादेश की स्थिति पर सावधानीपूर्वक नजर रख रहा है। उन्होंने कहा, “अमेरिका बांग्लादेश के लोगों के साथ खड़ा है। हम सभी पक्षों से और हिंसा से बचने का आग्रह करते हैं। पिछले कई हफ्तों के दौरान बहुत सारी जानें गई हैं और हम आने वाले दिनों में शांति एवं संयम बरतने का आग्रह करते हैं।” मिलर ने कहा, “हम अंतरिम सरकार के गठन संबंधी घोषणा का स्वागत करते हैं और आग्रह करते हैं कि कोई भी सत्ता परिवर्तन बांग्लादेश के कानूनों के अनुसार किया जाए। हम पिछले कुछ हफ्तों में देश में मानवाधिकारों के हनन, लोगों की जान जाने और उनके घायल होने की खबरों से बहुत दुखी हैं। हम उन लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है और जो हिंसा का दंश झेल रहे हैं।” पिछले दो दिनों में, हसीना सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों में 100 से अधिक लोग मारे गए हैं।
बांग्लादेश में छात्रों का विरोध-प्रदर्शन पिछले महीने विवादास्पद नौकरी आरक्षण योजना के खिलाफ शुरू हुआ था। यह प्रदर्शन बाद में सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गया। वर्ष 1971 के मुक्ति संग्राम में हिस्सा लेने वाले लोगों के परिवारों के लिए सरकारी नौकरियों में 30 फीसदी आरक्षण का प्रावधान इस विवादास्पद आरक्षण व्यवस्था के तहत किया गया था। -
नई दिल्ली। आज से 50 वर्ष पहले यानी 1975 की तारीख 15 अगस्त को शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान, उनकी माता और उनके तीन भाइयों समेत 18 सदस्यों की सैन्य अधिकारियों ने उनके घर में ही हत्या कर दी थी। बांग्लादेश को 1971 में पाकिस्तान से स्वतंत्रता मिलने के बाद उनके पिता मुजीबुर रहमान देश के राष्ट्रपति और फिर प्रधानमंत्री बने थे।
शेख हसीना की जान इसलिए बच पाई क्योंकि, वह अपनी छोटी बहन शेख रेहाना के साथ विदेश में थीं। शेख हसीना के पति न्यूक्लियर साइंटिस्ट थे और वे जर्मनी में थे। पिता की हत्या के 15 दिन पहले ही शेख हसीना बांग्लादेश से जर्मनी गईं थीं। यानी 30 जुलाई 1975 को शेख हसीना और शेख रेहाना ने अपने पिता-माता और 3 भाइयों को अंतिम बार देखा था। जब वे जर्मनी जा रही थीं तो शायद इतना भी नहीं भांप पाईं होंगी कि महज 15 दिन के भीतर पूरा परिवार नष्ट होने वाला है।कैसे इंदिरा गांधी ने शेख हसीना को जर्मनी से बुलाया था भारतउस समय भारत की आयरन लेडी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को मुजीबुर रहमान की बेटी और आयरन लेडी कही जाने वाली शेख हसीना और उनकी बहन की चिंता हुई और उन्होंने हसीना को भारत में शरण देने का फैसला लिया। उन्होंने जर्मनी में अपने राजदूत हुमायूं राशिद चौधरी को हसीना के पास भेजा और दोनों बहनों को भारत बुला लिया। वह ऐसा दौर था, जब हसीना के ऊपर असुरक्षा की तलवार लटक रही थी। हालांकि, प्लान बनाया गया और 24 अगस्त 1975 को दोपहर में शेख हसीना अपने पति के साथ जर्मनी के फ्रैंकफर्ट से एयर इंडिया के विमान से उड़ान भरीं और 25 अगस्त, 1975 की सुबह भारत में कदम रखा। हसीना को उस समय 56 रिंग रोड स्थित एक सेफ हाउस में रखा गया। इंदिरा गांधी को उनकी सुरक्षा की काफी चिंता थी और इसलिए यहां तक कि उनकी असली पहचान भी छिपाई गई। उन्हें मिस्टर और मिसेज मजूमदार के नाम से बुलाया जाता था। कुछ दिनों बाद शेख हसीना को रहने के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच पंडारा पार्क के सी ब्लॉक स्थित तीन कमरों के एक मकान दिया गया।1981 में अपने वतन लौंट गईं थी शेख हसीनाहसीना ने भारत में छह साल निर्वासन में बिताए, बाद में उन्हें उनके पिता द्वारा स्थापित पार्टी अवामी लीग का नेता चुना गया। हसीना 17 मई, 1981 में अपने देश बांग्लादेश लौट आईं और सेना द्वारा शासित देश में लोकतंत्र की मुखर आवाज बनीं, जिसके कारण उन्हें कई बार नजरबंद रखा गया। हसीना को एक समय सैन्य शासित बांग्लादेश को स्थिरता प्रदान करने के लिए जाना जाता है, लेकिन साथ ही उनके विरोधियों द्वारा उन्हें एक ‘निरंकुश’ नेता बताकर उनकी आलोचना भी की जाती है। 76 साल की शेख हसीना सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली दुनिया की कुछ चुनिंदा महिलाओं में से एक हैं।1996 में पहली बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनी शेख हसीनाबांग्लादेश में 1991 के आम चुनाव में हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग बहुमत हासिल करने में विफल रही। उनकी प्रतिद्वंद्वी बीएनपी की खालिदा जिया प्रधानमंत्री बनीं। पांच साल बाद, 1996 के आम चुनाव में हसीना प्रधानमंत्री चुनी गईं। हसीना को 2001 के चुनाव में सत्ता से बाहर कर दिया गया था, लेकिन 2008 के चुनाव में वह भारी जीत के साथ सत्ता में लौट आईं। तब से खालिदा जिया के नेतृत्व वाली BNP मुश्किल में फंसी हुई है।2004 में हुई थी शेख हसीना की हत्या की कोशिशवर्ष 2004 में हसीना की हत्या की कोशिश की गई थी, जब उनकी रैली में एक ग्रेनेड विस्फोट हुआ था। हसीना ने 2009 में सत्ता में आने के तुरंत बाद 1971 के युद्ध अपराधों के मामलों की सुनवाई के लिए एक न्यायाधिकरण की स्थापना की। न्यायाधिकरण ने विपक्ष के कुछ वरिष्ठ नेताओं को दोषी ठहराया, जिसके कारण हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए।इस्लामिस्ट पार्टी और BNP की प्रमुख सहयोगी जमात-ए-इस्लामी को 2013 में चुनाव में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया था। BNP प्रमुख खालिदा जिया को भ्रष्टाचार के आरोप में 17 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। BNP ने 2014 के चुनाव का बहिष्कार किया था, लेकिन 2018 में इसमें शामिल हुई।उस चुनाव के बारे में बाद में पार्टी नेताओं ने कहा कि यह एक गलती थी, और आरोप लगाया कि मतदान में व्यापक धांधली और धमकी दी गई थी। हसीना ने पिछले 15 सालों में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक का नेतृत्व किया और दक्षिण एशियाई राष्ट्र के जीवन स्तर में सुधार किया।शेख हसीना 2009 से सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस दक्षिण एशियाई देश की बागडोर संभाल रही थीं। उन्हें जनवरी में हुए 12वें आम चुनाव में लगातार चौथी बार प्रधानमंत्री चुना गया। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की मुख्य विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और उसके सहयोगियों ने चुनाव का बहिष्कार किया था।1960 में हुआ था शेख हसीना का पूर्वी पाकिस्तान में जन्मसितंबर 1947 में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में जन्मीं हसीना 1960 के दशक के अंत में ढाका विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान राजनीति में सक्रिय हो गईं। पाकिस्तानी सरकार द्वारा अपने पिता की कैद के दौरान उन्होंने उनके राजनीतिक संपर्क सूत्र के रूप में कार्य किया।आयरन लेडी कही जाती हैं शेख हसीनाएक समाचार वेबसाइट ने कई साल पहले उन्हें ‘‘आयरन लेडी’’ का टाइटल दिया था और तब से पश्चिमी मीडिया द्वारा उन्हें संदर्भित करने के लिए इस शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। हसीना ने दुनिया के सबसे बड़े शरणार्थी संकट से निपटने के लिए तारीफ बटोरी। यह वह दौर था जब 2017 में अपने देश में सेना की कार्रवाई के बाद उत्पीड़न से बचने के लिए पड़ोसी देश म्यांमा से भागकर आए दस लाख से अधिक रोहिंग्याओं ने बांग्लादेश में शरण ली थी।हसीना को भारत और चीन के प्रतिद्वंद्वी हितों के बीच कुशलतापूर्वक बातचीत करने का श्रेय भी दिया जाता है। चुनावों से पहले उन्हें दोनों प्रमुख पड़ोसियों और रूस का समर्थन प्राप्त हुआ। उनके करीबी लोग कहते थे कि प्रधानमंत्री एक “काम में डूबी रहने वाली” महिला हैं और वह रोजाना इस्लाम के नियमों का पालन करती हैं। राजनीतिक विरोधियों ने हसीना की सरकार को एक “निरंकुश” और भ्रष्ट शासन बताया, जबकि नागरिक संस्थाओं से जुड़े लोगों और अधिकार समूहों ने उस पर मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाया। -
ढाका। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने उनकी सरकार के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन के बीच आज इस्तीफा दे दिया और देश से बाहर चली गईं। राजनयिक सूत्रों के अनुसार हसीना को भारत से लंदन जाना है। इस बीच बांग्लादेश के सेना प्रमुख वकार उज जमां ने अंतरिम तौर पर शासन की बागडोर संभाल ली है। बांग्लादेश के सेना प्रमुख ने कहा है कि उन्होंने राजनीतिक दलों के नेताओं से बात की है और उन्हें बताया कि सेना कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेगी।सूत्रों के अनुसार विदेश मंत्री एस जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पड़ोसी देश में बदलते हालात से अवगत कराया है और मंगलवार को सदन को इसकी जानकारी दी जा सकती है। बांग्लादेश में उथल-पुथल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा पर मंत्रिमंडल समिति की बैठक में हालात पर चर्चा की गई।इस बीच खबर है कि लंदन जाने के क्रम में हसीना का विमान दिल्ली के पास हिंडन एयरबेस पर उतरा है। सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने उनसे मुलाकात की है। हसीना के अपनी बेटी साइमा वाजिद से मिलने की संभावना है, जो दिल्ली में रहती हैं। साइमा विश्व स्वास्थ्य संगठन की दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए क्षेत्रीय निदेशक हैं। हसीना के हिंडन में रुकने के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है और न ही इसकी पुष्टि हुई है। भारत सरकार के सूत्रों ने कहा कि ढाका में तेजी से बदल रहे घटनाक्रम पर भारत करीबी नजर रखे हुए है।सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने भारत-बांग्लादेश सीमा के 4,096 किलोमीटर क्षेत्र में सभी यूनिट को ‘हाई अलर्ट’ कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि बीएसएफ के महानिदेशक (कार्यवाहक) दलजीत सिंह चौधरी और वरिष्ठ अधिकारी भारत-बांग्लादेश सीमा सुरक्षा की समीक्षा के लिए कोलकाता पहुंचे हैं। बांग्लादेश में उथल-पुथल के बीच मेघालय ने अपनी सीमा पर रात्रि कर्फ्यू लगा दिया है। भारत और बांग्लादेश के बीच सभी रेल सेवाएं अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई हैं। दिल्ली में भी बांग्लादेश के दूतावास की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। एयर इंडिया और इंडिगो ने भी सोमवार को तत्काल प्रभाव से ढाका के लिए अपनी निर्धारित उड़ानें रद्द कर दी हैं। भारत-बांग्लादेश व्यापार सोमवार दोपहर से रोक दिया गया।
क्यों शेख हसीना को छोड़ना पड़ा बांग्लादेश1971 में बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम में लड़ने वाले दिग्गजों के रिश्तेदारों के लिए 30 प्रतिशत सरकारी नौकरियों को आरक्षित करने वाली विवादास्पद कोटा प्रणाली पर उनकी सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ जिसके बाद हसीना को प्रधान मंत्री पद छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। बांग्लादेश में छात्रों का यह प्रदर्शन जुलाई से ही चल रहा था। छात्रों का कहना था कि सिविल सेवा नौकरी कोटा खत्म किया जाए।बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट द्वारा 21 जुलाई को ज्यादातर कोटा रद्द कर दिया गया। जिसके बाद विरोध प्रदर्शन रुक गए। हालांकि, पिछले हफ्ते फिर से दंगे शुरू हो गए क्योंकि जनता ने हिंसा के लिए शेख हसीना से माफी की मांग की।300 लोगों की हो चुकी है मौतरिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेशी प्रदर्शनकारियों के इस विरोध में रविवार यानी कल कम से कम 90 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, कुल मृत लोगों की संख्या 300 पहुंच गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जतराबारी और ढाका मेडिकल कॉलेज इलाकों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प के कारण आज ताजा हिंसा में कम से कम छह लोग मारे गए। -
काठमांडू. नेपाल के सरलाही जिले में रविवार को भारत से लौट रहे हिंदू तीर्थयात्रियों को ले जा रहा एक ट्रैक्टर नहर में गिर गया, जिससे एक महिला की मौत हो गई और उसकी 11 वर्षीय बेटी सहित चार अन्य घायल हो गए। दुर्घटना मलंगावा इलाके में हुई और इस दौरान ट्रैक्टर पर 25 तीर्थयात्री सवार थे।
पुलिस ने बताया कि दुर्घटना चालक के ट्रैक्टर से नियंत्रण खो देने के कारण हुई। तीर्थयात्री बिहार के मधिया में एक मंदिर में पवित्र जल चढ़ाने के बाद घर वापस आ रहे थे। बाकी तीर्थयात्री सुरक्षित बताए जाते हैं। ट्रैक्टर चालक फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। -
वाशिंगटन. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के मद्देनजर अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने वहां लड़ाकू विमानों का दस्ता और विमान वाहक पोत तैनात करने का फैसला किया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन ने यह जानकारी दी। पेंटागन ने बताया कि अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने ईरान और उसके सहयोगियों के संभावित हमलों से इजराइल की रक्षा करने और अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम एशिया में सैन्य उपस्थिति बढ़ाने का निर्णय लिया है। पेंटागन ने एक बयान में कहा कि रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने यूरोप और पश्चिम एशिया के क्षेत्रों में अतिरिक्त बैलिस्टिक मिसाइल से लैस जहाज और विध्वंसक पोत तैनात करने का भी आदेश दिया है। इसके अलावा, ऑस्टिन वहां जमीन से वार करने वाली अतिरिक्त बैलिस्टिक मिसाइल भेजने की दिशा में भी कदम उठा रहे हैं। अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने का फैसला ऐसे समय में किया है, जब अमेरिकी नेताओं ने यह चिंता जताई है कि इजराइल के हालिया हमलों में हमास और हिजबुल्लाह के शीर्ष कमांडरों के मारे जाने के कारण क्षेत्र में हिंसा बढ़ सकती है, क्योंकि दोनों उग्रवादी समूहों के अलावा ईरान ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है। व्हाइट हाउस के अनुसार, बाइडन ने बृहस्पतिवार दोपहर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन कर इजराइल को बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन के संभावित हमलों से बचाने के लिए क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य उपस्थिति बढ़ाने पर चर्चा की। अप्रैल में अमेरिकी बलों ने ईरान द्वारा इजराइल की तरफ दागी गई दर्जनों मिसाइल और ड्रोन का पता लगाकर उनके हमलों को नाकाम किया था। बुधवार को तेहरान में हमास नेता इस्माइल हनिया और मंगलवार को बेरूत में हिजबुल्लाह कमांडर फौद शुकुर की हत्या के बाद क्षेत्र में जारी तनाव के युद्ध में तब्दील होने का खतरा बढ़ गया है, क्योंकि ईरान ने अपने क्षेत्र में हुए हमले का करारा जवाब देने की धमकी दी है। इजराइल ने पिछले साल सात अक्टूबर को हमास द्वारा उसके क्षेत्र में किए गए अप्रत्याशित हमले के बाद समूह के नेताओं को मार गिराने का संकल्प लिया है। ऑस्टिन ने यूएसएस अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत को पश्चिम एशिया में तैनात करने का फैसला लिया है। यह पोत ओमान की खाड़ी में मौजूद यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट की जगह लेगा। पेंटागन ने यह नहीं बताया कि लड़ाकू विमानों का दस्ता कहां से आएगा और इसे पश्चिम एशिया के किस हिस्से में तैनात किया जाएगा।
-
बीजिंग. चीन में दो सप्ताह पहले उत्तर-पश्चिमी शांक्सी प्रांत में एक राजमार्ग पुल के आंशिक रूप से ढहने से मरने वालों की संख्या बढ़ 38 हो गई है और करीब दो दर्जन लोग अभी भी लापता हैं। सरकारी प्रसारक सीसीटीवी ने शुक्रवार शाम को यह जानकारी देते हुए बताया कि 19 जुलाई को हुई इस दुर्घटना में दो दर्जन वाहन तेज बहाव वाली नदी में गिर गए थे। सीसीटीवी की खबर के अनुसार, एक व्यक्ति को बचा लिया गया था। शांक्सी प्रांत में जिस क्षेत्र में डैनिंग राजमार्ग पर पुल ध्वस्त हुआ, वहां पिछले दिनों भारी बारिश हुई थी। सीसीटीवी की खबर के मुताबिक, पुल ध्वस्त होने पर कम से कम 25 कार नदी में गिर गईं। बचाव दलों ने पीड़ितों की तलाश में कई किलोमीटर नीचे तक खोज की है। घटना के तुरंत बाद सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ द्वारा जारी की गई एक तस्वीर में पुल का एक हिस्सा टूटा हुआ और लगभग 90 डिग्री के कोण पर नीचे बहते भूरे पानी में मुड़ा हुआ दिखाई दे रहा था। सीसीटीवी की खबर में कहा गया है कि नदी एक पहाड़ी घाटी से होकर गुजरती है और मई में गुआंगदोंग प्रांत में इसी तरह की एक घटना में 36 लोगों की मौत हो गई थी। जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के कारण हुई बारिश ने पूरे एशिया में भूस्खलन और बाढ़ की एक शृंखला को जन्म दिया है। इसी सप्ताह चीन में, गेमी चक्रवात के कारण 48 लोगों की मौत हो गई। हुनान में पहुंचने पर यह चक्रवात एक उष्णकटिबंधीय तूफान में तब्दील होकर कमजोर हो गया था।
-
वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने भारत को एक महान शक्ति बताते हुए सांसदों से कहा कि नयी दिल्ली विश्व स्तर पर एक जिम्मेदार भूमिका निभाना चाहती है। उप विदेश मंत्री कर्ट कैम्पबेल ने मंगलवार को हिंद-प्रशांत से परे अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा पर एक सुनवाई के दौरान ये टिप्पणियां कीं। उन्होंने उन खबरों के बीच ये टिप्पणियां की है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यूक्रेन पर रूस के युद्ध को खत्म करवाने के नवीन वैश्विक प्रयासों की पृष्ठभूमि में इस महीने कीव की यात्रा कर सकते हैं। कैम्पबेल ने सीनेट की विदेश संबंध समिति के सदस्यों से कहा, ‘‘यह ध्यान रखना होगा कि भारत भी एक महान शक्ति है। उसका अपना दृष्टिकोण तथा अपने हित हैं। वे कभी अमेरिका के औपचारिक सहयोगी या साझेदार नहीं होंगे। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वैश्विक मंच पर सहयोगी देशों के रूप में हमारे रिश्ते मजबूत नहीं हो सकते।'' वह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से एक द्विपक्षीय बैठक के लिए प्रधानमंत्री मोदी की हाल की मॉस्को यात्रा के बारे में सीनेटर जेम्स रिच के एक सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा, ‘‘आपने रूस के संबंध में जो भी प्रभावी ढंग से कहा है, मैं उसमें सीधे तौर पर कुछ और नहीं कहने जा रहा हूं। मुझे लगता है कि हम यूक्रेन से भारत के और प्रत्यक्ष तौर पर बातचीत करने की खबरें सुन सकते हैं। मैं उसके लिए आभारी हूं। मुझे लगता है कि भारत विश्व स्तर पर जिम्मेदार भूमिका निभाना चाहता है।
- नयी दिल्ली. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को तेहरान में ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के शपथग्रहण समारोह में हिस्सा लिया, जो देनों देशों के करीबी संबंधों को प्रतिबिंबित करता है। सुधारवादी पेजेश्कियन ने कट्टरपंथी सईद जलीली को दूसरे दौर के चुनाव में हराने के करीब तीन सप्ताह के भीतर ईरान के नौवें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। कट्टरपंथी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की मई में एक हेलीकॉप्टर हादसे में मृत्यु के बाद राष्ट्रपति चुनाव आवश्यक हो गया था। विदेश मंत्रालय ने कहा कि गडकरी ने राष्ट्रपति पेजेश्कियन को पदभार ग्रहण करने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं। मंत्रालय ने कहा, ‘‘ईरान में मंत्री नितिन गडकरी की वार्ताओं के दौरान, दोनों पक्षों ने चाबहार बंदरगाह के विकास पर सहयोग समेत द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति पर विचार-विमर्श किया।'' गडकरी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर जारी पोस्ट में कहा, ‘‘माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, भारत सरकार और भारत की जनता की ओर से महामहिम डॉ. पेजेश्कियन को हार्दिक बधाई।'' उन्होंने कहा, ‘‘हम निरंतर सहयोग और पारस्परिक विकास की आशा करते हैं तथा दोनों देशों की समृद्धि और विकास के लिए विभिन्न क्षेत्रों में भारत-ईरान संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं।'' विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि चाबहार बंदरगाह द्विपक्षीय और क्षेत्रीय व्यापार को मजबूत करने में योगदान देगा। बयान के मुताबिक, ‘‘यह भूमि से घिरे अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों को क्षेत्रीय और वैश्विक बाजारों तक पहुंच प्रदान करेगा।'' ऊर्जा संपन्न ईरान के दक्षिणी तट के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित चाबहार बंदरगाह का विकास भारत और ईरान द्वारा संपर्क और व्यापार संबंधों को बढ़ावा देने के लिए मिलकर किया जा रहा है।
- फ्रैंकफर्ट (जर्मनी),। यूरो क्षेत्र के 20 देशों की आर्थिक वृद्धि दर चालू वर्ष की दूसरी तिमाही में बढ़कर 0.3 प्रतिशत रही। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यूरो क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी में 0.1 प्रतिशत की गिरावट आई। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) एक निश्चित अवधि में देश की भौगोलिक सीमा में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को बताता है। यूरोपीय संघ की सांख्यिकी एजेंसी यूरोस्टेट ने मंगलवार को बयान में कहा कि यूरो क्षेत्र के 20 देशों की आर्थिक वृद्धि दर इस साल की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में 0.3 प्रतिशत रही। ये वे देश हैं, जो यूरो मुद्रा का उपयोग करते हैं। उल्लेखनीय है कि यूरोपीय देशों की वृद्धि दर जनवरी-मार्च तिमाही में भी 0.3 प्रतिशत रही थी। इससे पहले एक साल से अधिक समय तक वृद्धि दर या तो स्थिर रही थी या फिर उसमें गिरावट आई थी। इसके विपरीत, अमेरिका की वृद्धि दर तिमाही आधार पर दूसरी तिमाही में 0.7 प्रतिशत रही। वहीं सालाना आधार पर यह 2.8 प्रतिशत बढ़ी। अमेरिका में जहां उपभोक्ता खर्च कर रहे हैं, वहीं बुनियादी ढांचे समेत अन्य क्षेत्रों में सरकारी व्यय में वृद्धि हुई है। दूसरी तरफ, यूरोप में उपभोक्ता रिकॉर्ड स्तर पर बचत कर रहे हैं और सरकारों ने भी बजट घाटे को कम करने के लिए खर्च को सीमित करना शुरू कर दिया है। इसका असर आर्थिक वृद्धि पर पड़ रहा है।
-
वाशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप पर करीब दो सप्ताह पहले हुए हमले को लेकर लगाई जा रही तमाम तरह की अटकलों को विराम देते हुए संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) ने इस बात की पुष्टि की कि पेनसिल्वेनिया में रैली के दौरान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति के कान में वास्तव में गोली लगी थी। एफबीआई ने एक बयान में कहा, ‘‘हमलावर की रायफल से चली पूरी गोली या छर्रा पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के कान में लगा था।'' एफबीआई के निदेशक क्रिस्टोफर रे ने इस सप्ताह की शुरुआत में हमले को लेकर कुछ अस्पष्ट टिप्पणियां की थीं, जिससे इस बात को लेकर अटकलें लगने लगी थीं कि क्या ट्रंप को वास्तव में गोली लगी थी। इस टिप्पणी को लेकर ट्रंप और उनके सहयोगियों ने नाराजगी जताई थी। एफबीआई और ‘सीक्रेट सर्विस' समेत जांच में शामिल कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया था कि ट्रंप किस वजह से घायल हुए थे। ट्रंप के प्रचार अभियान दल ने भी उस अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड जारी करने से इनकार कर दिया था, जहां पूर्व राष्ट्रपति का घायल होने के बाद इलाज किया गया था। ट्रंप के स्वास्थ्य के संबंध में हर जानकारी या तो खुद ट्रंप से या फिर ‘व्हाइट हाउस' में उनके पूर्व चिकित्सक रॉनी जैक्सन से मिली। एफबीआई ने बाद में एक बयान जारी कर इस बात की पुष्टि की कि गोलीबारी ‘‘पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप की हत्या का प्रयास थी, जिसके परिणामस्वरूप वह घायल हुए और एक वीर पिता की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए।''
- वाशिंगटन. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के दो अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से वापस आने में एक महीने से अधिक की पहले ही देरी हो चुकी है और उनके बोइंग ‘कैप्सूल' में आई दिक्कतों को इंजीनियर के दूर करने तक वे आईएसएस पर ही रहेंगे। यह जानकारी अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को दी। टेस्ट पायलट बुच विल्मोर और सुनीता विलियम्स को अंतरिक्ष प्रयोगशाला में लगभग एक सप्ताह रहना था और जून के मध्य में वापस लौटना था, लेकिन बोइंग के नये स्टारलाइनर कैप्सूल में ‘थ्रस्टर' में गड़बड़ी आने और हीलियम के रिसाव के कारण नासा और बोइंग को उन्हें अधिक समय तक वहां रोकना पड़ा। नासा के वाणिज्यिक चालक दल कार्यक्रम प्रबंधक स्टीव स्टिच ने कहा कि मिशन प्रबंधक वापसी की तारीख की घोषणा करने के लिए तैयार नहीं हैं। इंजीनियरों ने पिछले सप्ताह न्यू मैक्सिको के रेगिस्तान में एक स्पेयर थ्रस्टर पर परीक्षण पूरा किया ताकि यह पता लगाया जा सके कि ‘डॉकिंग' के दौरान क्या गलत हुआ और पृथ्वी पर वापसी की यात्रा की तैयारी की जा सके। रवानगी के एक दिन बाद छह जून को ‘कैप्सूल' के अंतरिक्ष स्टेशन के पास पहुंचने पर पांच थ्रस्टर में गड़बड़ी आ गई। तब से चार को फिर से चालू किया जा चुका है। स्पेस शटल के सेवा से हटने के बाद, नासा ने अंतरिक्ष यात्रियों की अंतरिक्ष स्टेशन पर आवाजाही के लिए निजी कंपनियों को काम पर रखा है, जिसके लिए बोइंग और स्पेसएक्स को अरबों डॉलर का भुगतान किया गया है। यह बोइंग की पहली परीक्षण उड़ान थी जिसमें चालक दल सवार था। स्पेसएक्स 2020 से मानव को अंतरिक्ष में ले जा रहा है।
-
बीजिंग. चांग ई-5 मिशन द्वारा चंद्रमा से लाए गए मिट्टी के नमूनों का अध्ययन कर रहे चीनी वैज्ञानिकों को चंद्रमा की मिट्टी में पानी के अणु मिले हैं। यह जानकारी चाइनीज एकेडमी आफ साइंसेज (सीएएस) ने दी। हांगकांग स्थित ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' की खबर के अनुसार, यह अनुसंधान बीजिंग नेशनल लेबोरेटरी फॉर कंडेंस्ड मैटर फिजिक्स और सीएएस के भौतिकी संस्थान तथा अन्य घरेलू अनुसंधान संस्थानों के अनुसंधानकर्ताओं द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। अनुसंधान रिपोर्ट 16 जुलाई को पत्रिका ‘नेचर एस्ट्रोनॉमी' में प्रकाशित हुई।
सीएएस ने मंगलवार को कहा कि 2020 में ‘चांग ई-5' मिशन द्वारा लाए गए चंद्रमा की मिट्टी के नमूनों के आधार पर चीनी वैज्ञानिकों ने आणविक जल से “युक्त” एक जलयोजित खनिज पाया है। वर्ष 2009 में, भारत के चंद्रयान-1 अंतरिक्ष यान ने चंद्रमा के सूर्य के प्रकाश वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन और हाइड्रोजन अणुओं के रूप में जलयोजित खनिजों के संकेतों का पता लगाया था। इसके उपकरणों में नासा का मून मिनरलॉजी मैपर (एम3) भी शामिल था जो एक इमेजिंग स्पेक्ट्रोमीटर है, जिसने चंद्रमा पर खनिजों में पानी की खोज की पुष्टि करने में मदद की। - काठमांडू। काठमांडू में त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ान भरने के दौरान 19 लोगों को लेकर पोखरा जा रहा एक निजी एयरलाइन का विमान बुधवार सुबह दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें 18 यात्रियों की मौत हो गयी।अधिकारियों ने बताया कि सौर्य एयरलाइंस के विमान का पायलट हादसे में घायल हो गया और उसे अस्पताल ले जाया गया है। यह दुर्घटना तब हुई जब विमान रनवे पर फिसला और उसमें आग लग गयी। घटनास्थल के फुटेज में विमान आग लगने से पहले तेजी से रनवे पर दौड़ता दिखायी दे रहा है। आग लगने के बाद उसके मलबे से काला धुआं उठता दिखायी दे रहा है।सूत्रों ने बताया कि पोखरा जाने वाले सौर्य एयरलाइंस के इस विमान में चालक दल के सदस्य समेत कम से कम 19 लोग सवार थे। यह हादसा पूर्वाह्न करीब 11 बजे हुआ।काठमांडू पोस्ट’ अखबार ने बताया कि दुर्घटनास्थल से 18 शव बरामद किए गए हैं। त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (टीआईए) के प्रवक्ता सुभाष झा ने कहा, ‘‘यह हादसा पोखरा जा रहे विमान के उड़ान भरने के दौरान रनवे पर गड़बड़ी के कारण हुआ।’’हिमालयन टाइम्स’ अखबार ने बताया कि विमान में केवल एयरलाइन के तकनीकी कर्मी सवार थे। टीआईए के सूचना अधिकारी ज्ञानेंद्र भुल ने बताया, ‘‘विमान में कोई यात्री सवार नहीं था बल्कि कुछ तकनीकी कर्मी थे।’’हवाई अड्डे पर तैनात एक सुरक्षा अधिकारी ने ‘ बताया कि विमान के पायलट को अस्पताल ले जाया गया है। उन्होंने बताया कि विमान में लगी आग बुझा दी गयी है। पुलिस और दमकलकर्मी दुर्घटनास्थल पर बचाव अभियान संचालित कर रहे हैं। विमान में सवार लोगों की स्थिति के बारे में अभी जानकारी नहीं मिली है। मायरिपब्लिका’ समाचार पोर्टल ने बताया कि प्राधिकारियों ने विमान दुर्घटना के बाद टीआईए बंद कर दिया है। हवाई अड्डा बंद होने के कारण कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों पर असर पड़ा है।
-
वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने रविवार को घोषणा की है कि वह राष्ट्रपति पद का आगामी चुनाव नहीं लड़ेंगे। बाइडन ने राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की दौड़ से हटने का एलान करते हुए कहा कि ‘‘यह मेरी पार्टी और देश के सर्वोत्तम हित में है।'' बाइडन (81) का यह निर्णय अमेरिका में पांच नवंबर को होने वाले मतदान से चार महीने पहले आया है।
जून के अंत में अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी एवं देश के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बहस में खराब प्रदर्शन के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता पिछले कई हफ्तों से बाइडन पर मुकाबले से हटने का दबाव बना रहे थे जिसके बाद उन्होंने यह फैसला किया है। बाइडन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किए गए एक पत्र में कहा कि राष्ट्रपति के रूप में सेवा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा इरादा फिर से चुनाव लड़ने का रहा है, लेकिन मेरा मानना है कि यह मेरी पार्टी और देश के सर्वोत्तम हित में है कि मैं दौड़ से बाहर होकर अपने शेष कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति के रूप में कर्तव्यों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करूं। -
वाशिंगटन. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रतिनिधि सभा की पूर्व ‘स्पीकर' नैंसी पेलोसी ने राष्ट्रपति पद की दौड़ से पीछे हटने के राष्ट्रपति जो बाइडन के फैसले की रविवार को प्रशंसा की। हालांकि, दोनों नेताओं ने पांच नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनावों के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार के रूप में उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के नाम का तत्काल समर्थन करने से परहेज किया। बाइडन ने रविवार को घोषणा की कि वह राष्ट्रपति पद का आगामी चुनाव नहीं लड़ेंगे। इसके साथ ही, उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार के तौर पर उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के नाम का अनुमोदन किया। बाइडन ने भारतीय-अफ्रीकी मूल की कमला हैरिस (59) के नाम की सिफारिश ऐसे वक्त की, जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति एवं इस साल नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति पद के चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के साथ पहली बहस में खराब प्रदर्शन और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण उन (बाइडन) पर चुनावी दौड़ से पीछे हटने का दबाव बढ़ रहा था। बाइडन की सिफारिश के बाद कमला का डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार बनना लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन उनके लिए शिकागो में अगले महीने प्रस्तावित ‘डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन' के दौरान डेलीगेट (पार्टी मतदाताओं के प्रतिनिधि) का समर्थन हासिल करना जरूरी है। बाइडन के पास 3,896 ‘डेलीगेट' हैं, जबकि उम्मीदवार बनने के लिए 1,976 ‘डेलीगेट' की आवश्यकता होती है। पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने भी हैरिस को समर्थन दिया है, जिससे उनके लिए 19 अगस्त से शिकागो में शुरू होने वाले ‘डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन' के दौरान उम्मीदवार चुना जाना और आसान हो गया है, लेकिन हैरिस के गुरु माने जाने वाले ओबामा ने उनका तुरंत समर्थन नहीं किया। पूर्व राष्ट्रपति ओबामा ने एक बयान में कहा, ‘‘आने वाले दिनों में हम अज्ञात रास्तों से गुजरेंगे, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि हमारी पार्टी के नेता एक ऐसी प्रक्रिया बनाने में सक्षम होंगे, जिससे एक उत्कृष्ट उम्मीदवार उभरकर सामने आएगा।'' ओबामा ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि बाइडन का सभी को अवसर प्रदान करने वाले उदार, समृद्ध और एकजुट अमेरिका का दृष्टिकोण अगस्त में ‘डेमोक्रेटिक कन्वेंशन' में पूरी तरह प्रदर्शित होगा। मुझे उम्मीद है कि हममें से हर कोई नवंबर और उसके बाद भी आशा और प्रगति के इस संदेश को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।'' पेलोसी ने भी हैरिस का तुरंत समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रपति जो बाइडन एक देशभक्त अमेरिकी हैं, जिन्होंने हमेशा हमारे देश को प्राथमिकता दी है। दूरदर्शिता, मूल्यों और नेतृत्व की उनकी विरासत उन्हें अमेरिकी इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रपतियों में से एक बनाती है।''
- काठमांडू। नेपाल में श्रावण मास के पहले सोमवार को पशुपति नाथ मंदिर में लाखों शिव भक्तों ने पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने पवित्र नदियों में स्नान किया और उपवास रखा। मानसून के आगमन पर महिलाएं सुन्दर हरे वस्त्रों से सजी हुई थी। सैकड़ों शिव भक्तों ने नदियों से कलश में जल लिया और पशुपति नाथ मंदिर में शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। विक्रम संवत नेपाली पंचांग के अनुसार श्रावण संक्रांति आरम्भ हो गई है और इस महीने में नेपाल का हिन्दू समुदाय चातुर्मास के अनेक उत्सवों का आयोजन करता है। श्रद्धालुओं को लंबा इंतजार न करने पड़े, इसके लिए सोमवार सुबह चार बजे मंगल आरती के साथ ही पशुपतिनाथ मंदिर के चारों द्वार खोल दिए गए ।पशुपति क्षेत्र विकास कोष के सचिव डॉ. मिलन थापा ने कहा है कि सावन मास में सोमवार को सुबह से लेकर मध्य रात्रि तक मंदिर के चारों कपाट खुले रहेंगे. सावन के महीने में पशुपतिनाथ मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या अन्य दिनों में 5-6 लाख तक रहती है पर सोमवार को दर्शनार्थियों की संख्या 9-10 लाख तक पहुंच जाती है. ।
- वाशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि पेनसिल्वेनिया में एक रैली में उन पर किए गए जानलेवा हमले के बाद चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने उन्हें एक प्यारा सा पत्र लिखा था। पेनसिल्वेनिया में एक चुनावी रैली के दौरान पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप पर एक बंदूकधारी ने कई गोलियां चलाई थीं। इस हमले में एक गोली ट्रंप के दाहिने कान को छूकर निकल गई थी, जबकि रैली में शामिल एक व्यक्ति मारा गया था और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस हमले के एक सप्ताह बाद ट्रंप ने मिशिगन के ‘ग्रैंड रैपिड्स' में शनिवार को एक चुनावी रैली में कहा, ‘‘मेरा राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ बहुत अच्छा रिश्ता रहा और वह एक बढ़िया इंसान हैं।'' अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ने बताया कि उन पर हुए हमले के बाद शी ने ‘‘मुझे अगले दिन एक प्यारा सा पत्र लिखा।'' ट्रंप (78) ने कहा कि उन्हें अन्य नेताओं से भी इसी प्रकार के पत्र मिले हैं।पूर्व राष्ट्रपति ने यह नहीं बताया कि और किन नेताओं ने हमले के बाद उनसे संपर्क किया।उन्होंने हमले के बाद अपनी पहली चुनावी रैली में कहा, ‘‘इनमें से बहुतों को वह पसंद नहीं था जो मैं उनके साथ कर रहा था, लेकिन वे यह भी जानते थे कि यह समय की मांग थी। अब खेल खत्म हो चुका था, है न? यह समय की मांग थी। लगभग सभी ने मुझे पत्र लिखे।... मेरे अब उन सभी के साथ अच्छे संबंध हैं। यह अच्छी बात है।'' ट्रंप, शी के साथ मधुर संबंध होने का लंबे समय से दावा करते रहे हैं।उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ भी उनके अच्छे संबंध हैं।उन्होंने कहा, ‘‘मीडिया संस्थान कई बार कहते थे कि उनके किम जोंग उन के साथ अच्छे संबंध हैं, उत्तर कोरिया के पास बहुत सारे परमाणु हथियार हैं। मेरे उनके साथ अच्छे संबंध थे। यह अच्छी बात है। मेरे राष्ट्रपति होने के कारण आपको कभी कोई खतरा नहीं था। किसी के साथ अच्छे संबंध होना अच्छी बात है, बुरी बात नहीं।'' ट्रंप ने कहा कि वह व्यापार में चीन के प्रति सख्ती बरतेंगे।
- वाशिंगटन। अमेरिका में नवंबर में प्रस्तावित राष्ट्रपति चुनाव के लिए रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप 13 जुलाई को पेनसिल्वेनिया में हत्या के प्रयास के दौरान उन्हें लगी गोली के जख्म से उम्मीद के मुताबिक उबर रहे हैं। ट्रंप के एक पूर्व चिकित्सक ने एक ज्ञापन में यह जानकारी दी। पेनसिल्वेनिया में एक चुनावी रैली के दौरान पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप (78) पर एक बंदूकधारी ने कई गोलियां चलाई थीं। इस हमले में एक गोली ट्रंप के दाहिने कान को छूकर निकल गई थी, जबकि रैली में शामिल एक व्यक्ति मारा गया था और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। खुफिया सेवा के एक सदस्य ने संदिग्ध हमलावर को घटनास्थल पर ही मार गिराया था।शनिवार को साथी अमेरिकियों को जारी एक ज्ञापन में डॉ. रॉनी एल जैक्सन ने कहा कि ट्रंप पर हुए जानलेवा हमले के बाद पूरी दुनिया की तरह वह भी उनकी सेहत को लेकर बहुत चिंतित था। डॉ. जैक्सन ने कहा, ‘‘लिहाजा मैं उस दिन देर शाम बेडमिंस्टर, न्यू जर्सी में उनसे व्यक्तिगत रूप से मिला और हर संभव मदद देने की पेशकश की। मैं उस समय से ही राष्ट्रपति ट्रंप के साथ हूं और रोजाना उनके जख्म को देख रहा और उसका इलाज कर रहा है।'' उन्होंने कहा, "वह ठीक हो रहे हैं। जैसा कि पूरी दुनिया ने देखा कि हमलावर द्वारा राइफल से चलाई गई एक गोली ट्रंप के दाहिने कान में लगी थी।" डॉ. जैक्सन ने बताया कि गोली महज एक-चौथाई इंच की दूरी से ट्रंप के सिर में लगने से बच गई और उनके दाहिने कान को छूते हुए गुजरी, जिससे कान की ‘कार्टिलेजिनस' सतह तक दो सेंटीमीटर गहरा जख्म घाव हो गया। उन्होंने बताया कि गोली के जख्म से शुरुआत में ट्रंप का काफी खून बहा और फिर उनके कान के ऊपरी हिस्से में सूजन आ गई। डॉ. जैक्सन ने कहा कि पेनसिल्वेनिया के बटलर मेमोरियल अस्पताल के चिकित्सा स्टाफ ने ट्रंप का प्रारंभिक इलाज किया, "जिन्होंने बेहतर तरीके से उनकी स्थिति आंकी और जख्म का बहुत अच्छे से इलाज किया।"
-
काठमांडू. नेपाल के नये प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली ने रविवार को पहली बार नेपाली कांग्रेस के साथ अपनी पार्टी के गुप्त सात सूत्री समझौते के ब्योरे का खुलासा किया जिसके तहत वह दो साल तक सरकार का नेतृत्व करने के बाद सत्ता अपने गठबंधन सहयोगी दल के नेता शेर बहादुर देउबा को सौंप देंगे। संसद में विश्वास मत हासिल करने के लिए अपना प्रस्ताव पेश करते हुए ओली ने पुष्प कमल दाहाल ‘प्रचंड' के नेतृत्व वाले गठबंधन की सरकार को गिराने के लिए दो सप्ताह पहले उनके नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी- एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी (सीपीएन-यूएमएल) और प्रतिनिधि सभा में सबसे बड़ी पार्टी नेपाली कांग्रेस के साथ हुए समझौते का खुलासा किया। ओली ने प्रतिनिधि सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘सात सूत्री समझौते के अनुसार, अगले दो वर्ष के लिए मैं सरकार का नेतृत्व करूंगा और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष देउबा शेष (डेढ़ वर्ष की) अवधि के लिए सरकार का नेतृत्व करेंगे।'' अब तक 78 वर्षीय देउबा और 72 वर्षीय ओली के बीच हुआ सात सूत्री समझौता गुप्त रहा, जिससे सत्तारूढ़ पार्टी के कई नेताओं के मन में भी संदेह पैदा हो गया था। इससे पहले नेपाली कांग्रेस के महासचिव गगन थापा ने भी ओली से संसद में इस समझौते को सार्वजनिक करने की मांग की थी।
-
कुआलालंपुर. मलेशिया के नये अरबपति सम्राट सुल्तान इब्राहिम इस्कंदर की शनिवार को परंपरा के अनुरूप तोपों की सलामी समेत पूरे धूमधाम के साथ ताजपोशी की गई। उन्होंने पांच साल के कार्यकाल के दौरान निष्पक्ष रूप से शासन करने का संकल्प लिया। वह एक अद्वितीय ‘परिवर्तनशील राजशाही' प्रणाली के तहत काम करेंगे। सुल्तान इब्राहिम (65) ने 31 जनवरी को शपथ ली थी। यहां के ‘नेशनल पैलेस' में आयोजित एक भव्य समारोह में 20 जुलाई को सुल्तान इब्राहिम इस्कंदर का औपचारिक रूप से मलेशिया के 17वें सम्राट के रूप में राज्याभिषेक किया गया। नौ जातीय मलय राज्य के शासक देश की ‘परिवर्तनशील राजशाही' के तहत पांच साल के लिए मलेशिया के सम्राट बनते हैं, जिसकी शुरुआत 1957 में मलेशिया को ब्रिटेन से आजादी मिलने के बाद हुई थी। मलेशिया में 13 राज्य हैं लेकिन केवल नौ में शाही परिवार हैं, कुछ राज्यों की जड़ें सदियों पुराने मलय साम्राज्य से जुड़ी हैं जो अंग्रेजों द्वारा एक साथ लाए जाने तक स्वतंत्र राज्य थे। काले और सुनहरे रंग की पारंपरिक औपचारिक पोशाक और टोपी पहने सुल्तान इब्राहिम और रानी रजा जरीथ सोफिया को सिंहासन पर आसीन होने से पहले सैन्य सलामी दी गई। अन्य शाही परिवारों के प्रमुख, ब्रुनेई के सुल्तान हसनल बोलकिया और बहरीन के सुल्तान हमद ईसा अल खलीफा सिंहासन के बगल में एक मंच पर बैठे थे। ताजपोशी की रस्म की शुरुआत में सुल्तान को कुरान की एक प्रति भेंट की गई जिसको उन्होंने चूम लिया।
नये सम्राट को शक्ति का प्रतीक एक ‘सोने का खंजर' प्राप्त हुआ। प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने अपनी सरकार की निष्ठा का संकल्प व्यक्त करते हुए कहा कि शाही संस्था राष्ट्र की ताकत का एक स्तंभ है। इसके बाद उन्होंने सुल्तान इब्राहिम को मलेशिया का नया सम्राट घोषित किया।
सुल्तान इब्राहिम ने अपने राज्याभिषेक भाषण में कहा, ‘‘ईश्वर की इच्छा से, मैं अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक और ईमानदारी से पालन करूंगा और निष्पक्ष शासन करूंगा।'' उन्होंने अनवर की सरकार से लोगों की आजीविका में सुधार और देश के विकास को बढ़ावा देने के प्रयास तेज करने का भी आग्रह किया। सुल्तान के शपथ लेने के बाद हॉल में मौजूद मेहमानों ने तीन बार ‘सम्राट अमर रहें' के नारे लगाए। सिंगापुर की सीमा से लगे दक्षिणी जोहोर राज्य के सुल्तान इब्राहिम देश के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक हैं, जिनका व्यापार टेलीकॉम से लेकर रियल एस्टेट तक फैला हुआ है। नये सम्राट शानदार कारों और मोटरबाइक के अपने संग्रह के लिए जाने जाते हैं और उनके पास खुद की एक छोटी सी निजी सेना (आधुनिक मलेशिया में शामिल होने पर उनके राज्य को यह रियायत दी गई थी) है। सुल्तान मलेशियाई राजनीति के बारे में मुखर रहे हैं और उन्होंने भ्रष्टाचार और नस्ली भेदभाव के बारे में भी बात की है। मलेशिया में सम्राट की केवल रस्मी भूमिका है, जबकि प्रशासनिक शक्तियां प्रधानमंत्री और संसद में निहित हैं। सम्राट सरकार और सशस्त्र बलों के नाममात्र के प्रमुख होते हैं और उन्हें इस्लाम और मलय परंपराओं का संरक्षक माना जाता है। सभी कानूनों, कैबिनेट नियुक्तियों और आम चुनाव के लिए संसद सत्र को भंग करने के लिए उनकी औपचारिक मंजूरी की आवश्यकता होती है। - 0 प्रधानमंत्री श्री लक्सन ने प्रधानमंत्री को उनके पुनः निर्वाचन पर हार्दिक बधाई दी0 दोनों नेताओं ने साझे लोकतांत्रिक मूल्यों और लोगों के बीच परस्पर संबंधों पर आधारित द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई
नई दिल्ली/वेलिंगटन। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री श्री क्रिस्टोफर लक्सन ने शनिवार को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से फोन पर बातचीत की। प्रधानमंत्री श्री लक्सन ने भारत में आम चुनावों के बाद प्रधानमंत्री श्री मोदी को उनके पुनः निर्वाचन पर हार्दिक बधाई दी। यह देखते हुए कि भारत-न्यूजीलैंड के संबंध साझे लोकतांत्रिक मूल्यों और लोगों के बीच घनिष्ठ संबंधों पर आधारित हैं, दोनों नेताओं ने आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई।दोनों पक्षों के बीच हाल ही में हुए उच्च-स्तरीय संपर्कों से सृजित उत्साह को रेखांकित करते हुए, उन्होंने व्यापार और आर्थिक सहयोग, पशुपालन, फार्मास्यूटिकल्स, शिक्षा, अंतरिक्ष सहित अन्य क्षेत्रों में पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।प्रधानमंत्री श्री मोदी ने प्रवासी भारतीयों के हितों पर ध्यान देने के लिए प्रधानमंत्री श्री लक्सन को धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री श्री लक्सन ने उनकी सुरक्षा और कल्याण के लिए निरंतर प्रयास करने का आश्वासन दिया।õ दोनों नेताओं ने एक दूसरे के संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई। - बीजिंग। चीन के शांक्शी प्रांत में अचानक आई बाढ़ के कारण राजमार्ग पर बना पुल आंशिक रूप से ढह गया और कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ' की खबर में प्रांतीय प्रचार विभाग के हवाले से बताया गया है कि शेंगलू शहर की झाशुई काउंटी में स्थित पुल शुक्रवार शाम अचानक बारिश और बाढ़ आने के बाद ढह गया। खबर में कहा गया है कि शनिवार सुबह तक 11 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।खबर के अनुसार, बचाव दलों ने नदी में गिरे पांच वाहन बरामद कर लिए हैं और बचाव कार्य जारी है। खबर में कहा गया है कि चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पुल गिरने के बाद लोगों की जान और संपत्ति को बचाने के लिए हर संभव बचाव व राहत प्रयास करने का निर्देश दिया है।
- नाथन (ऑस्ट्रेलिया)। इस सप्ताह के अंत में एक सॉफ्टवेयर अपडेट के गलत होने के कारण वैश्विक आईटी आउटेज ने आधुनिक आईटी बुनियादी ढांचे की परस्पर जुड़ी और अक्सर नाजुक प्रकृति को उजागर कर दिया। यह दर्शाता है कि विफलता के एक बिंदु के दूरगामी परिणाम कैसे हो सकते हैं।यह आउटेज क्राउडस्ट्राइक फाल्कन के लिए स्वचालित रूप से शुरू किए गए एकल अपडेट से जुड़ा था, जो एक सर्वव्यापी साइबर सुरक्षा उपकरण है जिसका उपयोग मुख्य रूप से बड़े संगठनों द्वारा किया जाता है। इससे दुनिया भर के माइक्रोसॉफ्ट विंडोज कंप्यूटर क्रैश हो गए।कई संगठन समान क्लाउड प्रदाताओं और साइबर सुरक्षा समाधानों पर भरोसा करते हैं। परिणाम डिजिटल मोनोकल्चर का एक रूप है। जबकि इस मानकीकरण का मतलब है कि कंप्यूटर सिस्टम कुशलतापूर्वक चल सकते हैं और व्यापक रूप से संगत हैं, इसका मतलब यह भी है कि एक समस्या कई उद्योगों और भौगोलिक क्षेत्रों में फैल सकती है। जैसा कि हमने अब क्राउडस्ट्राइक के मामले में देखा है, यह पूरी दुनिया में भी फैल सकता है।आधुनिक आईटी बुनियादी ढांचा अत्यधिक परस्पर जुड़ा हुआ है। यदि एक घटक विफल हो जाता है, तो यह ऐसी स्थिति पैदा कर सकता है जहां विफल घटक एक श्रृंखला प्रतिक्रिया को ट्रिगर करता है जो सिस्टम के अन्य हिस्सों को प्रभावित करता है।जैसे-जैसे सॉफ़्टवेयर और उनके द्वारा संचालित नेटवर्क अधिक जटिल होते जाते हैं, अप्रत्याशित इंटरैक्शन और बग की संभावना बढ़ती जाती है। एक छोटे से अपडेट के अनपेक्षित परिणाम हो सकते हैं और यह पूरे नेटवर्क में तेजी से फैल सकता है।जैसा कि हमने अब देखा है, पर्यवेक्षकों द्वारा इसे रोकने के लिए प्रतिक्रिया करने से पहले संपूर्ण सिस्टम को ठप किया जा सकता है।माइक्रोसॉफ्ट कैसे शामिल था?जब हर जगह विंडोज़ कंप्यूटर ‘मौत की नीली स्क्रीन’ संदेश के साथ क्रैश होने लगे, तो शुरुआती रिपोर्टों में कहा गया कि आईटी आउटेज माइक्रोसॉफ्ट के कारण हुआ था।वास्तव में, माइक्रोसॉफ्ट ने पुष्टि की कि उसने मध्य अमेरिका क्षेत्र में क्लाउड सेवाओं में रुकावट का अनुभव किया है, जो गुरुवार, 18 जुलाई 2024 को पूर्वी समयानुसार शाम 6 बजे के आसपास शुरू हुआ।इस आउटेज ने विभिन्न एज़्योर सेवाओं का उपयोग करने वाले ग्राहकों के एक उपसमूह को प्रभावित किया। एज़्योर माइक्रोसाफ्ट का स्वामित्व वाला क्लाउड सेवा प्लेटफ़ॉर्म है।एज़्योर आउटेज के दूरगामी परिणाम हुए, जिससे एयरलाइंस, खुदरा, बैंकिंग और मीडिया सहित कई क्षेत्रों में सेवाएं बाधित हुईं। न केवल अमेरिका में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों में भी। इसने पॉवरबीआई, माइक्रोसाफ्ट फ़ैब्रिक और टीम्स सहित विभिन्न माइक्रोसाफ्ट 365 सेवाओं को भी प्रभावित किया।जैसा कि अब पता चला है, पूरे एज़्योर आउटेज का पता क्राउडस्ट्राइक अपडेट से भी लगाया जा सकता है। इस मामले में यह फाल्कन स्थापित के साथ विंडोज़ चलाने वाली माइक्रोसॉफ्ट की वर्चुअल मशीनों को प्रभावित कर रहा था।इस प्रकरण से हम क्या सीख सकते हैं?अपने सभी आईटी समाधान एक जगह पर न रखें। कंपनियों को मल्टी-क्लाउड रणनीति का उपयोग करना चाहिए: अपने आईटी बुनियादी ढांचे को कई क्लाउड सेवा प्रदाताओं में वितरित करें। इस तरह, यदि एक प्रदाता काम नहीं कर पाता है, तो अन्य महत्वपूर्ण कार्यों का समर्थन करना जारी रख सकते हैं।कंपनियां यह भी सुनिश्चित कर सकती हैं कि आईटी सिस्टम में अतिरेक का निर्माण करके उनका व्यवसाय संचालित होता रहे। यदि एक घटक नीचे जाता है, तो अन्य लोग आगे बढ़ सकते हैं। इसमें बैकअप सर्वर, वैकल्पिक डेटा केंद्र और ‘फ़ेलओवर’ तंत्र शामिल हैं जो आउटेज की स्थिति में तुरंत बैकअप सिस्टम पर स्विच कर सकते हैं।नियमित आईटी प्रक्रियाओं को स्वचालित करने से मानवीय त्रुटि का जोखिम कम हो सकता है, जो आउटेज का एक सामान्य कारण है। स्वचालित प्रणालियाँ संभावित समस्याओं की भी निगरानी कर सकती हैं और महत्वपूर्ण समस्याएं पैदा होने से पहले उनका समाधान कर सकती हैं।आउटेज होने पर कैसे प्रतिक्रिया देनी है, इसके बारे में प्रशिक्षण देने वाले कर्मचारी एक कठिन स्थिति को वापस सामान्य स्थिति में ला सकते हैं। इसमें यह जानना शामिल है कि किससे संपर्क करना है, क्या कदम उठाना है और वैकल्पिक वर्कफ़्लो का उपयोग कैसे करना है।आईटी आउटेज कितना बुरा हो सकता है?इंटरनेट के बुनियादी ढांचे की वितरित और विकेंद्रीकृत प्रकृति के कारण इसकी अत्यधिक संभावना नहीं है कि दुनिया का संपूर्ण इंटरनेट कभी भी बंद हो सकता है। इसमें कई अनावश्यक पथ और प्रणालियाँ हैं। यदि एक भाग विफल हो जाता है, तो ट्रैफ़िक को अन्य नेटवर्क के माध्यम से पुनः चलाया जा सकता है।हालाँकि, क्राउडस्ट्राइक आउटेज से भी बड़े और अधिक व्यापक व्यवधान की संभावना मौजूद है।संभावित कारणों की सूची किसी आपदा फिल्म की पटकथा की तरह लगती है। 1859 की कैरिंगटन घटना के समान तीव्र सौर ज्वालाएँ उपग्रहों, पावर ग्रिडों और समुद्र के नीचे केबलों को व्यापक नुकसान पहुंचा सकती हैं जो इंटरनेट की रीढ़ हैं। इस तरह की घटना से महाद्वीपों में कई महीनों तक इंटरनेट ठप हो सकता है।वैश्विक इंटरनेट समुद्र के नीचे फाइबर ऑप्टिक केबलों के नेटवर्क पर बहुत अधिक निर्भर करता है। कई प्रमुख केबलों को एक साथ क्षति – चाहे प्राकृतिक आपदाओं, भूकंपीय घटनाओं, दुर्घटनाओं, या जानबूझकर तोड़फोड़ के माध्यम से हो – अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट यातायात में बड़े व्यवधान का कारण बन सकती है।रूट डीएनएस सर्वर या प्रमुख इंटरनेट एक्सचेंज पॉइंट जैसे महत्वपूर्ण इंटरनेट बुनियादी ढांचे को लक्षित करने वाले परिष्कृत, समन्वित साइबर हमले भी बड़े पैमाने पर रुकावट का कारण बन सकते हैं।जबकि पूर्ण इंटरनेट सर्वनाश की अत्यधिक संभावना नहीं है, हमारी डिजिटल दुनिया की परस्पर जुड़ी प्रकृति का मतलब है कि किसी भी बड़े आउटेज का दूरगामी प्रभाव होगा, क्योंकि यह उन ऑनलाइन सेवाओं को बाधित करता है जिन पर हम निर्भर हैं। हमारे वैश्विक संचार बुनियादी ढांचे की झटकों को झेलने की क्षमता को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर अनुकूलन और तैयारी बेहद महत्वपूर्ण है।
- टोक्यो/नई दिल्ली। रोबोटिक्स विज्ञान में तरक्की के साथ-साथ वैज्ञानिक नई उपलब्धियां हासिल करते जा रहे हैं। जापान के कुछ वैज्ञानिकों ने रोबोट के चेहरे पर चमड़े का जीवित टिश्यू लगाकर उसे 'मुस्कान' देने में सफलता हासिल कर ली है। टोक्यो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक चेहरे के आकार में मानव चमड़े की कोशिकाओं को उगाया और उसे खींचकर एक मुस्कराहट दे दी.। ऐसा करने के लिए उन्होंने चमड़े में घुसाए लिगमेंट जैसे अटैचमेंट का इस्तेमाल किया.।मुख्य शोधकर्ता शोजी ताकेउचि ने बताया कि नतीजा थोड़ा डरावना जरूर है, लेकिन ज्यादा जीवंत रोबोट बनाने की राह में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा, "इन एक्टचुएटर्स और ऐंकर्स को लगाकर पहली बार जीवित चमड़े को मरोड़ना मुमकिन हो पाया। ."जीवित टिश्यू के कई फायदे हैंपिछले महीने सेल रिपोर्ट्स फिजिकल साइंस ने एक अध्ययन में इस मुस्कुराते हुए रोबोट के बारे में जानकारी दी। . इसके लिए ताकेउचि और उनकी टीम ने एक दशक तक शोध किया और यह समझने की कोशिश की कि जैविक और कृत्रिम मशीनों का मेल कैसे किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि धातुओं और प्लास्टिक के मुकाबले जीवित टिश्यू के अनगिनत फायदे हैं। इनमें दिमाग और मांसपेशियों की ऊर्जा कुशलता से लेकर अपनी मरम्मत करने की चमड़े की क्षमता शामिल है।अब इन शोधकर्ताओं का लक्ष्य है कि लैब में बने इस चमड़े को और भी विशेषताएं दें। जैसे एक सर्कुलेटरी सिस्टम और तंत्रिकाएं। इससे चमड़े के जरिए सोखे जाने वाले सौंदर्य प्रसाधनों के लिए ज्यादा सुरक्षित टेस्टिंग प्लेटफॉर्म बनाए जा सकते हैं.।कैसे जाएगा डरावनापनइससे रोबोटों के लिए ज्यादा सजीव और व्यावहारिक कवरिंग भी बनाए जा सकते हैं। इसके बाद भी लोगों को पूरी तरह से विश्वसनीय नहीं लगने वाली मशीनों को लेकर अजीब या दहला देने वाली भावनाओं से छुटकारा दिलाने की चुनौती बाकी है। रोबोट के बारे में ताकेउचि ने माना, "इसमें अभी भी थोड़ा सा डरावनापन बाकी है। मुझे ऐसा लगता है कि रोबोटों को उन्हीं चीजों से बनाना जिससे इंसान बने हैं और उन्हें इंसानों जैसे हावभाव दिखाने की क्षमता देना इस डरावनेपन पर विजय पाने का एक तरीका हो सकता है। "
- ढाका। बांग्लादेश में छात्रों का आंदोलन हिंसक हो गया है। इन हिंसक प्रदर्शनों में अभी तक 64 लोगों की मौत हो चुकी है। पड़ोसी देश में छात्र नौकरी में रिजर्वेशन खत्म करने की मांग कर रहे हैं। शुक्रवार को प्रदर्शनकारी छात्रों ने नरसिंगडी जिले की एक जेल की इमारत में आग लगा दी और सैकड़ों कैदियों को मुक्त करा दिया.। स्थानीय पुलिस ने बताया कि शुक्रवार को छात्र प्रदर्शनकारियों ने मध्य बांग्लादेश के नरसिंगडी जिले की एक जेल से 'सैकड़ों' कैदियों को छुड़ाया और फिर जेल की इमारत में आग लगा दी.।एएफपी ने एक पुलिस अधिकारी के हवाले से कहा, "कैदी जेल से भाग गए और प्रदर्शनकारियों ने जेल में आग लगा दी.।" उन्होंने कहा, "मुझे कैदियों की संख्या नहीं पता, लेकिन यह संख्या सैकड़ों में होगी."। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने जेलब्रेक की खबर की पुष्टि की, लेकिन आगे कोई विवरण नहीं दिया.।ढाका के पुलिस बल ने हिंसा के एक और दिन को रोकने के प्रयास में आज के लिए सभी सार्वजनिक समारोहों पर प्रतिबंध लगा दिया।. पुलिस प्रमुख हबीबुर रहमान ने कहा, "हमने आज ढाका में सभी रैलियों, जुलूसों और सार्वजनिक समारोहों पर प्रतिबंध लगा दिया है.। " उन्होंने कहा कि "सार्वजनिक सुरक्षा" सुनिश्चित करने के लिए यह कदम ज़रूरी था.।एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "हमारा विरोध जारी रहेगा.।" उन्होंने कहा कि वे 'शेख हसीना का तत्काल इस्तीफ़ा' चाहते हैं ये सरकार हत्याओं के लिए ज़िम्मेदार है.। " अस्पतालों द्वारा दी गई पीड़ितों की संख्या के हवाले से कुछ रिपोर्टों के अनुसार, अब तक इन प्रदर्शनों में कम से कम 64 लोगों की मौत हो चुकी है.।


.jpg)
.jpg)




.jpg)
.jpg)

.jpeg)











.jpg)

.jpg)

.jpg)