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 किसान असिंचित क्षेत्रों में धान के बदले अन्य वैकल्पिक फसलों को दें बढ़ावा

 - शासन द्वारा दी जा रही 15000 रूपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन सहायता राशि
- कृषि विभाग द्वारा किसानों को दी गई समसामयिक सलाह

राजनांदगांव  । जिले में वर्तमान खरीफ मौसम के दौरान अब तक लगभग 1700 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो गत वर्ष की इसी अवधि में हुई लगभग 1500 मिमी वर्षा की तुलना में 200 मिमी अधिक है। कृषि विभाग द्वारा केवल वर्षा की मात्रा को देखकर असिंचित एवं ऊँचाई वाली भूमि में धान की खेती का निर्णय न लेने, बल्कि अपनी भूमि की प्रकृति एवं वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुरूप फसल का चयन करने की अपील की है।
उप संचालक कृषि श्री टीकम सिंह ठाकुर ने बताया कि राजनांदगांव जिले की कृषि जलवायु तथा मृदा संरचना काली दोमट, मटासी एवं भर्री भूमि से युक्त है। जिले में बड़ी मात्रा में ऐसी भर्री एवं ऊँचाई वाली भूमि उपलब्ध है, जहां वर्षा का पानी अधिक समय तक नहीं ठहरता। ऐसी भूमि अरहर, उड़द, मूंग, सोयाबीन, कपास एवं मक्का जैसी फसलों के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है। कृषि विभाग द्वारा विगत वर्षों में किए गए फसल कटाई प्रयोगों एवं उत्पादकता विश्लेषण से यह पाया गया है कि असिंचित एवं ऊँचाई वाली भूमि में धान की औसत उत्पादकता केवल 8 से 10 क्विंटल प्रति एकड़ ही प्राप्त होती है, जिससे किसानों को लगभग 19528 रूपए से 24410 रूपए प्रति एकड़ सकल आय प्राप्त होती है। इसके विपरीत वैकल्पिक फसलों में बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की संभावना रहती है। औसतन अरहर से 4-5 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन एवं लगभग 32 हजार रूपए से 40 हजार रूपए प्रति एकड़ सकल आय, मूंग से 3-4 क्विंटल उत्पादन एवं 26304 रूपए से 35072 रूपए तक आय, उड़द से 3-4 क्विंटल उत्पादन एवं 23400 रूपए से 31200 रूपए तक आय तथा सोयाबीन से 5-7 क्विंटल उत्पादन एवं 26640 रूपए से 37296 रूपए तक संभावित सकल आय प्राप्त हो सकती है।
उप संचालक कृषि श्री टीकम सिंह ठाकुर ने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अनुसार अरहर 8000 रूपए प्रति क्विंटल, मूंग 8768 रूपए प्रति क्विंटल, उड़द 7800 रूपए प्रति क्विंटल तथा सोयाबीन 5328 रूपए प्रति क्विंटल निर्धारित है। इन फसलों का समर्थन मूल्य पर उपार्जन प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा)  अंतर्गत किया जाता है। जिससे किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित होता है। उन्होंने बताया कि कम पानी में भी दलहन एवं तिलहन फसले बेहतर उत्पादन देती है, धान की तुलना में अधिक लाभकारी होती हैं, मृदा स्वास्थ्य में सुधार करती हैं तथा खेती का जोखिम कम करती हैं। वहीं असिंचित क्षेत्रों में धान की खेती करने पर पानी की कमी होने की स्थिति में उत्पादन में भारी गिरावट आने और किसानों की आय प्रभावित होने की संभावना रहती है। शासन द्वारा किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पीएम-आशा कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत असिंचित क्षेत्रों में धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, कपास एवं मक्का जैसी वैकल्पिक फसले लेने पर 15000 रूपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन सहायता प्रदान की जा रही है। कृषि विभाग द्वारा किसानों से पीएम आशा योजना का लाभ लेकर अपनी आय में वृद्धि करेने तथा जलवायु अनुकूल एवं टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने की अपील की गई है। साथ ही खरीफ मौसम में किसान अपनी भूमि की प्रकृति के अनुसार फसल चयन करने तथा आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन के लिए क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी अथवा निकटतम कृषि कार्यालय से संपर्क कर सकते है।

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