मौसम को देखते हुए किसानों के लिए विशेष सलाह जारी
-सुकमा में बारिश की संभावना, किसानों से ‘मौसम सीजी’ और ‘मेघदूत’ ऐप से जुड़ने की अपील
रायपुर । किसानों की फसलों को बदलते मौसम से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए सुकमा जिला प्रशासन ने विशेष कृषि सलाह जारी की है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और ग्रामीण कृषि मौसम सेवा, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, जगदलपुर से प्राप्त मौसम पूर्वानुमान के आधार पर किसानों को आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की गई है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 19 जुलाई तक जिले में हल्की बारिश, घने बादल और 3 से 6 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवा चलने की संभावना है। इसे देखते हुए किसानों को खरीफ फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय करने की सलाह दी गई है।
किसानों को उन्नत किस्म के बीजों का उपयोग करने और बीजोपचार के बाद ही बुआई करने की सलाह दी गई है। धान की सीधी बुआई का कार्य शीघ्र पूरा करने तथा अधिक जलभराव वाले क्षेत्रों में लेही पद्धति अपनाने को कहा गया है। मक्का की फसल को इल्लियों और अन्य कीटों से बचाने के लिए खेतों में ‘टी’ आकार के बांस लगाने की सलाह दी गई है। इन पर पक्षी बैठकर खेतों में मौजूद कीटों को खाते हैं, जिससे प्राकृतिक रूप से कीट नियंत्रण में मदद मिलती है।
अरहर, मूंगफली और अन्य दलहनी-तिलहनी फसलों के बीजों को फफूंदनाशक और जैव उर्वरक से उपचारित कर बुआई करने की सलाह दी गई है। इससे फसलों की बेहतर वृद्धि और उत्पादन में मदद मिलती है।
जिला प्रशासन ने किसानों को सलाह दी है कि बारिश के दौरान खेतों में किसी भी प्रकार के कीटनाशक या खरपतवारनाशक का छिड़काव न करें। बारिश के कारण दवाओं का प्रभाव कम हो सकता है और फसल को नुकसान भी हो सकता है।
मौसम की स्थिति को देखते हुए पशुपालकों को अपने पशुओं को गीले और पानी भरे स्थानों पर चराने से बचने की सलाह दी गई है। पशुओं को सुरक्षित और सूखे बाड़े में रखने, समय-समय पर कृमिनाशक दवा देने और खुरपका-मुंहपका जैसे रोगों से बचाव के लिए टीकाकरण कराने की अपील की गई है।
दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुओं को संतुलित आहार, हरा चारा और खनिज मिश्रण देने की भी सलाह दी गई है।
जिला प्रशासन ने किसानों और आम नागरिकों से ‘मौसम सीजी’ और ‘मेघदूत’ ऐप पर पंजीकरण कराने की अपील की है। इन ऐप के माध्यम से मौसम का पूर्वानुमान और कृषि संबंधी महत्वपूर्ण सलाह सीधे मोबाइल फोन पर प्राप्त की जा सकती है। बदलते मौसम के बीच जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे मौसम संबंधी जानकारी पर लगातार नजर रखें और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही खेती से जुड़े कार्य करें। समय पर सही जानकारी और सावधानी बरतकर फसलों को मौसम से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है।











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