अनजाने शहर में महाराष्ट्र मंडल से मिला अपनापनः हेमा
- मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन चयन समिति की सदस्य ग्वालियर से पहुंचीं रायपुर
- तबीयब खराब होने पर महाराष्ट्र मंडल परिवार से हुआ संपर्क और मिली आत्मीयता
रायपुर। कभी किसी अकेले अनजाने शहर में हमारी तबीयत खराब हो जाए, तो आप सबसे पहले डॉक्टर की बजाय किसी ऐसे भरोसेमंद साथी को तलाश करेंगे, जिससे आपको आत्मीयता के साथ सहारा भी मिले। यही कुछ मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन चयन समिति की सदस्य हेमा रंजनगांवकर के साथ हुआ।
रायपुर पहुंचीं हेमा की अचानक तबीयत खराब हो गई। ऐसे समय महाराष्ट्र मंडल की उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल को हेमा की अस्वस्थता की जानकारी अध्यक्ष अजय मधुकर काले से मिली, तो वे सबसे पहले शहर के आउटर क्षेत्र के होटल तक गईं और उन्हें अस्पताल तो ले ही गईं, साथ ही महाराष्ट्र मंडल में ठहराया भी। पूरे मामले की जानकारी देते हुए हेमा ने बताया कि रायपुर में चल रहे छत्तीसगढ़ कप टी-20 में शामिल होने के लिए मध्य प्रदेश की टीम के साथ मैं रायपुर पहुंचीं थी। इस दौरान मेरी अचानक तबीयत खराब हुई। ऐसे समय में ग्वालियर के मेरे एक परिचित ने रायपुर महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले का नंबर दिया और उन्होंने उपाध्यक्ष गीता दलाल के माध्यम से मेरी व्यथा उनसे कहीं। ऐसे में अजय काले के लाइनअप कराने पर मंडल उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल ने मुझसे संपर्क किया। इस अनजाने शहर में उन्होंने मेरे लिए घर की बनीं शुद्ध खिचड़ी लेकर आई। ऐसे में मुझे यह बिल्कुल नहीं लगा कि मैं अपने शहर से 850 किमी दूर किसी अन्य शहर में बैठी हूं।
हेमा के अनुसार इसके बाद गीता मुझे लेकर रामकृष्ण अस्पताल पहुंचीं। मुझे डॉक्टर को दिखाया। फिर अपने साथ मुझे महाराष्ट्र मंडल रायपुर ले गईं। वहां मेरे रुकने और भोजन की व्यवस्था की। घर जैसा शुद्ध खाना और आत्मीय लोग। मेरी सेहत ठीक होने के बाद मैं ग्वालियर के लिए निकल आई। वहां महाराष्ट्र मंडल में गुजारे मेरे वक्त मेरे जीवन के अनमोल पल हैं। हेमा ने कहा कि यहां आकर मैंने महाराष्ट्र मंडल के सेवाभावी कार्यों को नजदीक से जाना। वहां के पदाधिकारियों व सभासदों का लोगों के प्रति अपनापन और प्रेम आत्मसात करने लायक है। मैं यहां ग्वालियर में अपने महाराष्ट्र मंडल के सदस्यों से इस बात का जिक्र करूंगी और उन्हें अपने अनुभव भी बताऊंगी।









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