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ऐसे लक्षणों के नजर आने का मतलब आपके आहार में है पौष्टिकता की कमी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक हम जिस तरह के आहार का सेवन करते हैं सेहत पर उसका सीधा असर होता है। यदि आप दिनभर थकान, कमजोरी, ऊर्जा की कमी जैसी समस्याओं को महसूस करते रहते हैं, तो इसका मतलब है कि आपका आहार स्वस्थ नहीं है। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में आहार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यही कारण है कि सभी लोगों को भोजन में हरी सब्जियों-फलों आदि को अधिक से अधिक मात्रा में शामिल करने की सलाह दी जाती है।
पोषण विशेषज्ञ कहते हैं, शरीर जब अपनी आहार संबंधी आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाता है, तो वह धीरे-धीरे मुरझाने लगता है। इसका सीधा असर आपके स्वास्थ्य पर देखने को मिल सकता है। आहार में पौष्टिकता की कमी के कारण शरीर के कई अंग ठीक से काम नहीं करते हैं, जिससे गंभीर जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि किन लक्षणों के नजर आते ही समझ जाना चाहिए कि हमारा आहार स्वस्थ नहीं है और इसमें बदलाव की आवश्यकता है।
त्वचा और बालों से संबंधित समस्याएं
त्वचा और बालों को स्वस्थ रखने के लिए उन्हें अत्यधिक देखभाल और पोषण की आवश्यकता होती है। आहार में पौष्टिकता की कमी के कारण बालों और त्वचा पर असर देखा जा सकता है।  आहार में प्रोटीन और विटामिन की कमी के कारण त्वचा में सूखापन और फटी त्वचा, काले घेरे और महीन रेखाएँ, समय से पहले बुढ़ापे के लक्षण, बालों के झड़ने जैसी दिक्कतें हो सकती है। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी आहार विशेषज्ञ से मिलकर सलाह लें।
ध्यान केंद्रित न कर पाना
सभी कार्यों को करने के लिए मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का सिंक्रनाइज़ेशन जरूरी होता है, इसमें से एक में भी हुई समस्या के कारण दूसरे का कार्य प्रभावित हो जाता है। आहार में पौष्टिकता की कमी के कारण ध्यान केंद्रित करने या याददाश्त से संबंधित दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में सभी लोगों को ओमेगा-3 फैटी एसिड और तमाम तरह के विटामिन्स वाली चीजों को आहार में शामिल करना चाहिए।
पाचन संबंधी समस्याएं
शरीर को पर्याप्त मात्रा में आवश्यक पोषक तत्व तभी मिल पाते हैं जब आपका पाचन ठीक रहता है। पाचन में होने वाली समस्या भी आहार में पौष्टिकता की कमी का संकेत हो सकता है। आहार से फाइबर और पानी की कमी के कारण एसिड रिफ्लक्स, कब्ज, पेट में सूजन जैसी दिक्कतें बनी रहती हैं। इस तरह की समस्याओं के मामले में किसी पोषण विशेषज्ञ से मिलकर आहार में आवश्यक बदलाव कराने की जरूरत हो सकती है।


 

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