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दस साल में चिकित्सकीय प्रमाणित मृत्यु के मामलों की संख्या बढ़ी

नयी दिल्ली.  देश में पिछले एक दशक में मौत के कुल पंजीकृत मामलों में से चिकित्सकों द्वारा प्रमाणित मृत्यु के मामलों की संख्या 2.5 प्रतिशत बढ़ी है लेकिन बिहार, गुजरात, दिल्ली, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, त्रिपुरा और केरल जैसे राज्यों में ऐसे मामले घटे हैं। भारत के महापंजीयक कार्यालय की ‘मृत्यु के कारणों की चिकित्सकीय प्रमाणीकरण रिपोर्ट-2020' से यह जानकारी मिली है। इसमें कहा गया है कि वर्ष 2011 से 2020 तक पिछले 10 वर्षों की अवधि में चिकित्सकों द्वारा प्रमाणित मौत के आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि गोवा ने इस पैमाने पर लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है और इसके बाद लक्षद्वीप का स्थान रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘यह पाया गया है कि चिकित्सकों द्वारा प्रमाणित मृत्यु के मामलों को लेकर अंडमान निकोबार द्वीप समूह, छत्तीसगढ़ और पुडुचेरी ने सतत रूप से अपनी स्थिति बेहतर की है।'' इसमें कहा गया है कि वर्ष 2011 में राष्ट्रीय स्तर पर मौत के कुल पंजीकृत मामलों में से 20 प्रतिशत चिकित्सकों द्वारा प्रमाणित थे जो वर्ष 2020 में बढ़कर 22.5 प्रतिशत दर्ज किये गये। इस प्रकार से पिछले दस वर्षों में इसमें 2.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 के तहत देश में अनिवार्य रूप से जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण कराने का प्रावधान किया गया है और यह 1 अप्रैल 1970 से लागू है। यह एक केंद्रीय कानून है, लेकिन इसे लागू करने का विषय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधीन होता है। अभी तक 32 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों ने चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित मृत्यु (एमसीसीडी) योजना को शुरू करने के लिये अधिसूचना जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में चिकित्सकों द्वारा प्रमाणित मृत्यु के मामलों में तमिलनाडु में 11.5 प्रतिशत, सिक्किम में करीब 5 प्रतिशत, पंजाब में 6.6 प्रतिशत, पुडुचेरी में करीब 16 प्रतिशत, ओडिशा में 4.1 प्रतिशत, मणिपुर में करीब 48 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 8 प्रतिशत, झारखंड में 5.7 प्रतिशत, हिमाचल प्रदेश में 2.7 प्रतिशत, असम में 5 प्रतिशत, राजस्थान में 4.5 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, इस अवधि में प्रमाणित मामलों की संख्या में ओडिशा में 3.9 प्रतिशत, केरल में 0.8 प्रतिशत, कर्नाटक में 3.3 प्रतिशत, गुजरात में 1.1 प्रतिशत, दिल्ली में 0.1 प्रतिशत, चंडीगढ़ में 33.6 प्रतिशत और बिहार में 1.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, चिकित्सकों द्वारा प्रमाणित मौत के कारणों संबंधी राज्यों की रैंकिंग-2020 में गोवा को पहला, मणिपुर को दूसरा और लक्षद्वीप को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है। इसमें बिहार को 34वां, झारखंड को 33वां, मध्य प्रदेश को 32वां, हरियाणा को 27वां, गुजरात को 20वां, असम को 21वां, पश्चिम बंगाल को 23वां, राजस्थान को 25वां, केरल को 30वां, उत्तर प्रदेश को 28वां, उत्तराखंड को 29वां और पश्चिम बंगाल को 23वां स्थान मिला। रैंकिंग में पुडुचेरी को चौथा, दादरा नगर हेवली-दमन दीव को पांचवां, छत्तीसगढ़ को छठा, अंडमान निकोबार को सातवां, दिल्ली को आठवां, मिजोरम को नौवां तथा सिक्किम को दसवां स्थान मिला।

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