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 केंद्र सरकार ने 'भव्य' योजना के तहत 50 औद्योगिक पार्क के लिए राज्यों से मांगे आवेदन

 नयी दिल्ली।. केंद्र सरकार ने 33,660 करोड़ रुपये की 'भारत औद्योगिक विकास योजना' (भव्य) के तहत 50 औद्योगिक पार्कों की स्थापना के लिए राज्यों से आवेदन मांगे हैं और इसके लिए चार महीने की समयसीमा तय की है। सरकार ने शनिवार को यह जानकारी दी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 18 मार्च को देशभर में 100 'प्लग-एंड-प्ले' औद्योगिक पार्क विकसित करने की योजना को मंजूरी दी थी। ये ऐसे औद्योगिक पार्क होंगे जहां सारी जरूरी सुविधाएं पहले से तैयार हों और कंपनी अपना काम फौरन शुरू कर सके। 'भव्य' योजना का उद्देश्य विश्व स्तरीय औद्योगिक अवसंरचना विकसित करना, विनिर्माण क्षमता को बढ़ाना और देश की आर्थिक वृद्धि को गति प्रदान करना है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संवाददाताओं से कहा कि पहले दो महीनों में 20 औद्योगिक पार्क के लिए और उसके बाद के दो महीनों में 30 अन्य पार्क के लिए राज्यों से आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं। पहले चरण में इन 50 पार्क को मंजूरी दी जाएगी और शेष 50 पार्क को अगले चरण में स्वीकृति प्रदान करने की योजना है। यह योजना राज्यों और निजी क्षेत्र के भागीदारों के साथ साझेदारी में लागू की जाएगी।
गोयल ने कहा कि इस योजना के तहत 100 से 1000 एकड़ तक के औद्योगिक पार्कों का विकास किया जाएगा और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए प्रति एकड़ एक करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। पहाड़ी राज्यों के लिए 25 एकड़ भूमि पर भी औद्योगिक पार्क के विकास को मंजूरी दी जा सकती है।
 गोयल ने कहा कि चयन 'प्रतिस्पर्धा आधारित प्रक्रिया' के तहत किया जाएगा और जमीन, पानी एवं बिजली जैसी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले राज्यों में निवेशकों को आकर्षित करने की अधिक संभावना होगी। उन्होंने कहा कि राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और हरियाणा जैसे राज्य इस योजना को लेकर गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा, "मैं सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इस प्रक्रिया में भाग लेने के लिए आमंत्रित करता हूं। हम आज से अगले चार महीनों तक राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से आवेदन आमंत्रित कर रहे हैं। हम 50 औद्योगिक पार्क के लिए आवेदन मांग रहे हैं ताकि हम इस योजना को पूरे देश में शीघ्रता से लागू कर सकें।'' गोयल ने उम्मीद जताई कि तीन साल के भीतर 50 औद्योगिक पार्क चालू हो जाएंगे। यह योजना विनिर्माण इकाइयों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), स्टार्टअप तथा तैयार औद्योगिक बुनियादी ढांचा तलाश रहे वैश्विक निवेशकों के लिए लाभकारी होगी।

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