प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर में विज्ञान और प्रौद्योगिकी अवसंरचना का अभूतपूर्व विस्तार : डॉ. जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर क्षेत्र में विज्ञान और प्रौद्योगिकी अवसंरचना का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक संस्थानों को मजबूत करने और तकनीक को आम लोगों तक पहुंचाने के प्रयासों से पूर्वोत्तर अब वैज्ञानिक नवाचार और प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। डॉ. सिंह ने शिलांग स्थित उत्तर पूर्व प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग एवं पहुंच केंद्र (NECTAR) में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थानों की समीक्षा बैठक की और नई भू-सूचना विज्ञान प्रयोगशाला का उद्घाटन किया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले पूरे पूर्वोत्तर में केवल दो मौसम रडार थे, जिनमें मेघालय में सिर्फ एक रडार था, जबकि चेरापुंजी दुनिया में सबसे अधिक वर्षा वाला क्षेत्र है। अब पूरे क्षेत्र में 13 मौसम रडार कार्यरत हैं। इसी तरह भूकंपीय वेधशालाओं की संख्या 84 से बढ़कर 171 हो गई है। उन्होंने बताया कि मेघालय और त्रिपुरा में पहली बार बिजली गिरने का पता लगाने वाले विशेष स्टेशन भी स्थापित किए गए हैं, जिससे आपदा प्रबंधन और वैज्ञानिक तैयारी मजबूत हुई है।
शिलांग में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान डॉ. सिंह ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के विभिन्न संस्थानों के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि NECTAR प्रयोगशाला में विकसित तकनीकों को किसानों, युवाओं, उद्यमियों और ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विज्ञान का लाभ सीधे आम नागरिकों के जीवन में दिखाई देना चाहिए।
जितेंद्र सिंह ने NECTAR और CSIR-CFTRI द्वारा विकसित मोबाइल फूड प्रोसेसिंग यूनिट का अवलोकन किया। उन्होंने इसे “चलती-फिरती प्रसंस्करण इकाई” बताते हुए कहा कि यह तकनीक सीधे किसानों तक पहुंचकर कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन, खाद्य गुणवत्ता, कौशल विकास और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा दे रही है। इससे छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने पीएम-डिवाइन कार्यक्रम के तहत स्थापित वसुंधरा मृदा कार्बनिक कार्बन पहचान प्रयोगशाला की सराहना करते हुए कहा कि यह सुविधा किसानों को वैज्ञानिक मृदा परीक्षण और सटीक कृषि सलाह उपलब्ध करा रही है। अब तक लगभग 2,500 किसानों को मृदा परीक्षण किट उपलब्ध कराई जा चुकी हैं, जिससे क्षेत्र का व्यापक मृदा स्वास्थ्य डेटाबेस तैयार करने में मदद मिलेगी।
डॉ. सिंह ने NECTAR की STEM शिक्षा प्रयोगशाला का दौरा किया, जहां रोबोटिक्स, कोडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और 3D प्रिंटिंग के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आईआईटी कानपुर के सहयोग से पूर्वोत्तर में 50 STEM प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, जिनसे लगभग 25,000 विद्यार्थियों को लाभ मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान ने अब तक 569 ड्रोन तकनीशियन, 247 GIS एवं रिमोट सेंसिंग विशेषज्ञ, 107 प्रमाणित ड्रोन पायलट और 4,500 से अधिक छात्रों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण दिया है।
केंद्रीय मंत्री ने NECTAR की अत्याधुनिक भू-सूचना विज्ञान प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि 17 उन्नत ड्रोन, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम और आधुनिक भू-स्थानिक तकनीक से लैस यह प्रयोगशाला वन कार्बन आकलन, जैव विविधता संरक्षण, आपदा प्रबंधन और खनन बहाली जैसी परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ड्रोन आधारित मैपिंग से स्वामित्व योजना के तहत 700 से अधिक गांवों और लगभग 25,000 किसानों से जुड़ी वैज्ञानिक जैविक कृषि परियोजनाओं को भी सहायता मिली है।
डॉ. सिंह ने कहा कि NECTAR वैज्ञानिक जैविक कृषि, सामुदायिक बीज बैंक, केले के रेशे का मूल्य संवर्धन, खाद्य प्रसंस्करण, बांस और प्राकृतिक रेशा तकनीक, उद्यमिता और तकनीक आधारित ग्रामीण विकास के क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि इन पहलों से किसान संगठनों को मजबूती मिल रही है, बाजार तक पहुंच बेहतर हो रही है और युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने न्यू शिलांग में NECTAR के स्थायी परिसर के निर्माण कार्य पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इसके पूरा होने पर अनुसंधान, नवाचार, इन्क्यूबेशन, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि NECTAR भविष्य में भू-स्थानिक विज्ञान, ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक आधारित ग्रामीण विकास का राष्ट्रीय केंद्र बनकर विकसित भारत @2047 के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगा।




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