एसआईआर पर चुनाव आयोग का बड़ा स्पष्टीकरण, पुराने मतदाता बिना कानूनी कार्रवाई के डर के जमा कर सकेंगे फॉर्म-6
नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग ने कहा है कि जिन पुराने मतदाताओं के नाम प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं, वे अपना नाम अंतिम मतदाता सूची में जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं। ऐसा करने पर उन्हें केवल पहले से मतदाता सूची में पंजीकृत होने के आधार पर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कानूनी कार्रवाई या अभियोजन का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, इसके लिए निर्धारित कानूनी शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।
आयोग ने मंगलवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे पत्र में बताया कि पहले से मतदाता सूची में पंजीकृत कुछ मतदाता फॉर्म-6 जमा करने में हिचकिचा रहे हैं। दरअसल, इस फॉर्म में आवेदक को यह घोषणा करनी होती है कि उसका नाम पहली बार मतदाता सूची में शामिल किया जा रहा है। ऐसे में पहले से पंजीकृत मतदाताओं को आशंका थी कि फॉर्म-6 जमा करने पर उनकी घोषणा गलत मानी जा सकती है और उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में निर्धारित घोषणा 1 अगस्त 2022 से लागू है। प्रारूप मतदाता सूची में नाम नहीं होने की स्थिति में कोई भी पात्र मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म-6 जमा कर अंतिम मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने का आवेदन कर सकता है। आयोग के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया के दौरान या उसके बाद जिन मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची में नहीं हैं, उन्हें नाम दोबारा शामिल कराने के लिए नए सिरे से आवेदन करना होगा। यह प्रक्रिया उन लोगों पर भी लागू होगी, जो पहले मतदाता सूची में पंजीकृत रह चुके हैं।
आयोग ने जोर देकर कहा कि ऐसी परिस्थितियों में फॉर्म-6 जमा करने का उद्देश्य केवल एसआईआर प्रक्रिया के दौरान या उसके बाद मतदाता सूची में नाम शामिल कराना है। केवल इस आधार पर कि आवेदक पहले भी मतदाता के रूप में पंजीकृत था, फॉर्म जमा करने को गलत घोषणा नहीं माना जाएगा।
चुनाव आयोग ने अपने स्पष्टीकरण को 14 अक्टूबर 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट के ‘निलोत्पल दत्ता एवं अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग एवं अन्य’ मामले में दिए गए आदेश के अनुरूप बताया। इस मामले में एक आवेदक, जो पहले से मतदाता के रूप में पंजीकृत था, ने आशंका जताई थी कि फॉर्म-6 जमा करने से उसे पहली बार मतदाता बनने संबंधी गलत घोषणा करनी पड़ेगी। इस पर हाईकोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं की यह आशंका निराधार है। अदालत ने रिट याचिका का निपटारा करते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता चाहें तो फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं, जिस पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
हाईकोर्ट के आदेश और अपने स्पष्टीकरण के आधार पर चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि कोई भी निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) केवल इस आधार पर किसी मतदाता के खिलाफ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई शुरू नहीं करेगा कि वह पहले मतदाता सूची में शामिल था और उसने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान या उसके बाद फॉर्म-6 जमा किया है। हालांकि, यह संरक्षण तभी मिलेगा, जब संबंधित मतदाता पहले से किसी अन्य संसदीय या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पंजीकृत न हो और उसके द्वारा दिया गया घोषणा-पत्र कानून के अनुरूप हो।
चुनाव आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से कहा है कि इस स्पष्टीकरण की जानकारी सभी संबंधित लोगों तक पहुंचाई जाए। इसके लिए स्थानीय भाषाओं और उपलब्ध मीडिया माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं।
चुनाव आयोग का यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है, जब देश में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर बहस जारी है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और दोबारा पंजीकरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में आयोग के इस कदम से उन पुराने मतदाताओं की आशंकाएं दूर होने की उम्मीद है, जिनके नाम प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं।









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