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भारतीय महिला हॉकी टीम में एकता और अनुशासन वापस लाना चाहते हैं मारिन

 नयी दिल्ली. चार साल बाद भारतीय महिला हॉकी टीम के मुख्य कोच के तौर पर वापसी करने वाले शोर्ड मारिन का ध्यान टीम में एकता, अनुशासन और संस्कृति वापस लाने पर है तथा उनकी नजरें 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली टीम बनाने पर टिकी हैं। नीदरलैंड के 71 साल के कोच मारिन 2017 से 2021 तक भारतीय टीम के प्रभारी थे और उनके मार्गदर्शन में महिला टीम ने तोक्यो ओलंपिक में ऐतिहासिक चौथा स्थान हासिल किया था। उन्होंने हरेंद्र सिंह की जगह ली है जिनके मार्गदर्शन में भारत पिछली एफआईएच प्रो लीग में आखिरी स्थान पर रहा था और बाद में उसे एफआईएच नेशंस कप में खिसका दिया गया। मारिन ने बुधवार को वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ''मेरा मुख्य ध्यान एक इकाई बनाने पर है, जो बहुत जरूरी है, और संस्कृति वापस लाना है। एक टीम के तौर पर मिलकर काम करना, विश्व कप क्वालीफायर से पहले कम समय में अपना ज्ञान साझा करना, और यह एक बड़ी चुनौती होने वाली है।'' उन्होंने कहा, ''एक इकाई, अनुशासन और कार्य आधारित रवैया आपको पदक दिलाएगा। अच्छी बात यह है कि जो स्तर मैंने अब अभ्यास मुकाबलों में देखा है, वह बहुत बेहतर है। हालात बहुत बेहतर हैं, फिटनेस बेहतर है। 2017 में जब मैं जुड़ा था तो स्तर कम था लेकिन इन वर्षों में इसमें सुधार हुआ है।'' मारिन ने कहा, ''जब मैंने शुरू किया था उसकी तुलना में अब बहुत बेहतर स्तर है, उनमें गति है। जब मैं सवाल पूछता हूं तो मुझे अधिक जवाब मिलते हैं क्योंकि अब 80 प्रतिशत लड़कियां अंग्रेजी बोलती हैं, वे पढ़ाई कर रही हैं। सब कुछ बेहतर हुआ है।'' मारिन ने कहा कि वह एक-एक कदम करके आगे बढ़ेंगे क्योंकि टीम आने वाले महीनों में कुछ बड़े टूर्नामेंट के लिए तैयार हो रही है। उन्होंने कहा, ''यह मेरे लिए कदम दर कदम आगे बढ़ने का रवैया है। पहले वर्ल्ड कप क्वालीफायर और फिर नेशंस कप। मुझे पता है कि क्या करना है। मुझे पता है कि मैं 2028 में टीम को कैसा देखना चाहता हूं। टीम के सभी 29 खिलाड़ी मेरे लिए महत्वपूर्ण हैं। मैंने उनसे कहा कि जो अतीत में हुआ वह बीत चुका है।'' महिला टीम की नजरें आठ से 14 मार्च तक हैदराबाद में होने वाले एफआईएच महिला विश्व कप क्वालीफायर, 2026 एशियाई खेल और ओलंपिक चक्र में आने वाली बड़ी प्रतियोगिताओं पर टिकी हैं। मारिन ने कहा, ''लक्ष्य लॉस एंजिलिस के लिए क्वालीफाई करना है और मेरे लिए यह एक बहुत, बहुत अच्छी और बड़ी चुनौती है। इसे हासिल करना आसान नहीं होगा क्योंकि दूसरे देशों ने भी प्रगति की है। चुनौती यह है कि इतने सारे टूर्नामेंट आने वाले हैं और इसलिए मैंने 29 खिलाड़ियों की एक बड़ी टीम रखी है।'' उन्होंने कहा, ''हर टूर्नामेंट महत्वपूर्ण है, लेकिन आखिर में एशियाई खेल महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यह ओलंपिक क्वालीफायर है। विश्व कप भी महत्वपूर्ण हैं।'' मारिन ने कहा कि तोक्यो ओलंपिक के बाद मिले जरूरी ब्रेक से उन्हें नई ऊर्जा मिली। उन्होंने कहा, ''पिछले चार-पांच वर्षों में मैंने सिर्फ एक साल एक क्लब टीम के लिए काम किया और फिर मैंने पर्दे के पीछे काम किया। फिर हॉकी इंडिया ने मेरे से पूछा कि क्या मैं उनके लिए कुछ करने में दिलचस्पी रखता हूं। मुझे लगा ठीक है, मुझे लगा कि मेरी ऊर्जा वापस आ गई है। उसी पल से मुझे लगा कि यह एक अच्छा फैसला है और मैं इसके लिए तैयार हूं।'' मारिन ने कहा, ''मुझे परिवार के साथ समय चाहिए था जिससे मुझे ताजगी मिली। मेरे परिवार ने भी मेरे फैसले का साथ दिया।'' मारिन ने यह भी कहा कि यहां की व्यवस्था की पहले से जानकारी भी इस भूमिका को लेने की एक वजह थी।
 अपने से पहले के कोच के बारे में बात करते हुए मारिन ने कहा, ''मैं पिछले कोच के बारे में बोलने की स्थिति में नहीं हूं, यह मेरा तरीका नहीं है। मैं बाहर से जज नहीं कर सकता। बहुत सी चीजें अच्छी हुईं, बहुत सी नहीं हुईं।

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