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- रायपुर ।छत्तीसगढ़ में हाथी-मानव द्वंद्व को रोकने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए वन विभाग द्वारा हाथी मित्र दल (हाथी मितान) के सदस्यों को मोटरसाइकिल और सुरक्षा किट (सुरक्षा उपकरण) प्रदान किए जा रहे हैं। राज्य में वन्यजीवों के संरक्षण और जंगल से लगे इलाकों में जनसुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वन विभाग लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कोरबा प्रवास के दौरान पुतका पहाड़ का निरीक्षण किया और कॉफी प्वाइंट में हाथी मित्र दल के सदस्यों को सुरक्षा उपकरण (किट) वितरित किए।वन मंत्री श्री कश्यप ने मैदान में तैनात हाथी मित्र दल के सदस्यों को काम के दौरान सुरक्षा संसाधन मुहैया कराने हेतु सुरक्षा उपकरण सौंपे। मंत्री कश्यप ने कहा कि हाथियों की गतिविधियों की सतत निगरानी, ग्रामीणों को समय पर अलर्ट करने और मानव-हाथी टकराव रोकने में दल की भूमिका बेहद अहम है। हाथियों को वन पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर जागरूकता और वन विभाग के मैदानी अमले के साथ समन्वय से द्वंद्व की घटनाओं को न्यूनतम किया जा सकता है।मंत्री ने सदस्यों से उनकी सुरक्षा आवश्यकताओं और मैदानी चुनौतियों की जानकारी ली तथा उन्हें सुरक्षित रहकर कर्तव्यों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर श्री गोपाल मोदी, श्री जोगेश लांबा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
- -पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने लखनपुर में मछली बीज वितरण कार्यक्रम में की सहभागिता, महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर दिया जोररायपुर ।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ एवं आकांक्षी विकासखण्ड कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद पंचायत लखनपुर के तत्वावधान में ग्राम पंचायत स्तरीय मछली बीज वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने सहभागिता करते हुए ग्रामीण परिवारों को आजीविका के नए अवसरों से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और गांव के लोगों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के माध्यम से ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का कार्य निरंतर किया जा रहा है। मछली पालन जैसे स्थानीय संसाधन आधारित व्यवसाय ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय कौशल का बेहतर उपयोग करते हुए अधिक से अधिक परिवारों को स्थायी आजीविका से जोड़ा जाए। मछली बीज वितरण जैसी पहल से ग्रामीणों को मछली पालन के लिए आवश्यक आधार मिलेगा और वे इसे आर्थिक गतिविधि के रूप में विकसित कर अपनी आय में वृद्धि कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने से न केवल परिवार मजबूत होता है, बल्कि पूरे गांव की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलती है।श्री अग्रवाल ने कहा कि महिला स्व-सहायता समूह ‘बिहान’ अभियान की सबसे बड़ी ताकत हैं। समूहों के माध्यम से महिलाएं बचत, ऋण, स्वरोजगार और विभिन्न आयमूलक गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। शासन की योजनाओं का लाभ इन समूहों तक पहुंचाकर उन्हें कृषि, पशुपालन, मछली पालन, लघु उद्यम तथा अन्य स्थानीय आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।उन्होंने कहा कि आकांक्षी विकासखण्ड कार्यक्रम के माध्यम से विकास की दृष्टि से प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कृषि, कौशल विकास और आजीविका के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार की मंशा है कि विकास की मुख्यधारा से गांव का प्रत्येक परिवार जुड़े और स्थानीय स्तर पर ही आय के पर्याप्त साधन विकसित हों।मंत्री श्री अग्रवाल ने ग्रामीणों से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब उनका लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचे और वह अपने पैरों पर खड़ा हो सके। उन्होंने मछली पालन से जुड़े हितग्राहियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पहल आने वाले समय में ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगी।कार्यक्रम के दौरान मछली पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्रामीण हितग्राहियों को मछली बीज का वितरण किया गया। ग्रामीणों ने इस पहल के लिए राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की योजनाओं से उन्हें अपने गांव में ही आय का नया साधन प्राप्त हो रहा है। कार्यक्रम में लुंड्रा विधायक श्री प्रबोध मिंज सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्याएं तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
- -‘रक्षा सूत्र’ अभियान के तहत पुलिस जवानों के लिए भेंट की गई राखियां-परिवार से दूर कर्तव्य निभा रहे जवानों को मिलेगा अपनत्व और सम्मान का एहसासरायपुर ।सुरक्षा व्यवस्था और सरहद पर तैनात वीर जवानों के प्रति सम्मान, स्नेह और कृतज्ञता प्रकट करने के लिए रक्षाबंधन के अवसर पर 'राखी से रक्षा' जैसे विशेष अभियान चलाए जाते हैं। इस अनूठी पहल के तहत देश के आम नागरिक, महिलाएं, स्कूली छात्र और सामाजिक संगठन मिलकर सैनिकों के लिए राखियां भेजते हैं।रक्षाबंधन के पावन पर्व पर सुकमा जिला प्रशासन ने सुरक्षा में तैनात जवानों के प्रति सम्मान और अपनत्व की अनूठी पहल की है। जिला महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिले में ‘रक्षा सूत्र’ अभियान चलाया गया। अभियान के तहत शुक्रवार को पुलिस जवानों के लिए राखियां भेंट की गईं, जिन्हें जिले के सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों में तैनात जवानों तक पहुंचाया जाएगा।परिवार से दूर रहकर दिन-रात कर्तव्य निभा रहे जवानों के लिए यह पहल विशेष महत्व रखती है। रक्षाबंधन के अवसर पर उनके हाथों तक राखी पहुंचाकर उन्हें बहनों के स्नेह, शुभकामनाओं और आशीर्वाद का एहसास कराया जाएगा। यह पहल जवानों के त्याग, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा के प्रति सम्मान की भावपूर्ण अभिव्यक्ति है।‘रक्षा सूत्र’ अभियान के माध्यम से जिला प्रशासन ने जवानों के साथ सामाजिक जुड़ाव और अपनत्व का संदेश दिया है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था में तैनात जवान समाज की रक्षा के लिए कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। ऐसे में रक्षाबंधन के पर्व पर उनके प्रति स्नेह और सम्मान व्यक्त करना समाज की जिम्मेदारी है। सुकमा जैसे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में कई जवान लंबे समय तक अपने परिवार से दूर रहकर ड्यूटी करते हैं। ऐसे जवानों तक राखी पहुंचाने से उन्हें रक्षाबंधन की खुशियों और अपनेपन का एहसास होगा। ‘रक्षा सूत्र’ केवल एक राखी नहीं, बल्कि समाज की ओर से जवानों के प्रति विश्वास, सम्मान और आत्मीयता का संदेश है। जिला प्रशासन की यह संवेदनशील पहल सुरक्षा में तैनात जवानों के मनोबल को बढ़ाने के साथ समाज और सुरक्षा बलों के बीच विश्वास एवं जुड़ाव को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
- -30 किस्तों में 19,444.33 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में अंतरित-महतारी वंदन की राशि से बहनें मनाएंगी रक्षाबंधन का पर्व, घर-परिवार की खुशियों में बढ़ेगा आर्थिक संबलरायपुर ।रक्षाबंधन के पावन पर्व से पहले छत्तीसगढ़ की बहनों को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त के रूप में विशेष उपहार दिया है। 7 अगस्त 2026 को जारी 30वीं किस्त के साथ प्रदेश की पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 19,444 करोड़ 33 लाख रुपये से अधिक की राशि अंतरित की जा चुकी है। रक्षाबंधन से पहले खाते में पहुंची यह राशि महिलाओं के लिए आर्थिक संबल के साथ पर्व की खुशियों को और बढ़ाने वाली सौगात बन गई है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित महतारी वंदन योजना अब महिलाओं के सम्मान, स्वाभिमान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन चुकी है। योजना के तहत प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता सीधे डीबीटी के माध्यम से महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचाई जा रही है।रायगढ़- राशी कँवरमनेन्द्रगढ़- गायत्री श्रीवास्तवमनेन्द्रगढ़- गायत्री श्रीवास्तवरक्षाबंधन से पहले खाते में पहुंची राशि, बहनों के चेहरे पर खुशीरक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का पर्व है। इस बार पर्व से पहले महतारी वंदन की राशि मिलने से महिलाओं में विशेष उत्साह है। महिलाएं इस राशि से भाई के लिए राखी, मिठाई और उपहार खरीदने के साथ-साथ घर-परिवार की जरूरतों को पूरा करते हुए रक्षाबंधन का पर्व धूमधाम से मनाने की तैयारी कर रही हैं।महिलाओं का कहना है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रक्षाबंधन से पहले महतारी वंदन की राशि देकर बहनों की खुशियों को दोगुना कर दिया है। उनके लिए यह केवल एक हजार रुपये की मासिक सहायता नहीं, बल्कि अपने छोटे-बड़े फैसले स्वयं लेने का भरोसा और सम्मान का अहसास है।जांजगीर-चांपा- शबीना बेगमकोरबा- श्रीमती शकुंतला कुर्रेमुंगेली- श्रीमती अनीता गंधर्वहर महीने की सहायता बनी परिवारों का सहारासूरजपुर जिले की श्रीमती तेज कुमारी, श्रीमती मंजू रजवाड़े, श्रीमती पुनिया प्रजापति, श्रीमती शहनाज बेगम, श्रीमती गणेश्वरी प्रजापति, श्रीमती मेनका रजवाड़े और श्रीमती लता केंवट जैसी महिलाओं ने बताया कि महतारी वंदन की राशि से वे बच्चों की पढ़ाई, कॉपी-किताब, पौष्टिक भोजन और दैनिक जरूरतों को पूरा कर पा रही हैं। रक्षाबंधन के अवसर पर भी यह राशि उनके लिए उपयोगी साबित हो रही है।बचत से स्वरोजगार तक की नई राहमहतारी वंदन योजना का सकारात्मक प्रभाव केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है। अनेक महिलाओं ने नियमित मिलने वाली राशि को बचाकर स्वरोजगार की नींव रखी है।मुंगेली विकासखंड के ग्राम घुठेरा की श्रीमती अनीता गंधर्व ने महतारी वंदन से मिली राशि को बचाकर मुंगेली के पुराना बस स्टैंड क्षेत्र में मनिहारी एवं सिलाई दुकान शुरू की। आज वे प्रतिदिन 500 से 1,000 रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं और बच्चों की पढ़ाई तथा घरेलू खर्च में सहयोग कर रही हैं।जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम सरखों की श्रीमती शबीना बेगम ने योजना की राशि से अपनी चूड़ी दुकान में नया सामान और चूडि़यों की विविधता बढ़ाई। इससे ग्राहकों की संख्या और आमदनी दोनों में वृद्धि हुई है।मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की श्रीमती गायत्री श्रीवास्तव ने राशि बचाकर सेकेंड हैंड सिलाई-पिको मशीन खरीदी। अब वे सिलाई के साथ पिको का काम भी कर आय बढ़ा रही हैं। रायगढ़ की श्रीमती राशी कँवर ने भी महतारी वंदन की किस्तों से सिलाई मशीन खरीदी, जो उनके लिए आजीविका और आत्मनिर्भरता का साधन बन गई है।कोरबा की श्रीमती शकुंतला कुर्रे महतारी वंदन की राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य के साथ अपनी बेटी ध्रीयांशी के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में बचत करने में कर रही हैं। सक्ती जिले की श्रीमती हेमंत बंजारे, मोहला जिले की श्रीमती देवकी निषाद और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर की श्रीमती अनीता गुप्ता भी योजना की राशि से घरेलू जरूरतों और छोटे व्यवसाय को मजबूती दे रही हैं।1 मार्च 2024 से शुरू हुई महतारी वंदन योजना की 30 किस्तों की निरंतरता ने महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल दिया है। इस भरोसे के कारण महिलाएं अपनी जरूरतों के अनुसार खर्च, बचत और निवेश की योजना बना पा रही हैं। कई महिलाएं सिलाई, मनिहारी, चूड़ी व्यवसाय और अन्य छोटे स्वरोजगार से जुड़कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रही हैं।महतारी वंदन योजना ने महिलाओं की घरेलू निर्णयों में भागीदारी को मजबूत करने के साथ बच्चों की शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य पर खर्च को बढ़ावा दिया है। महिलाओं के हाथ में नियमित आर्थिक सहायता पहुंचने से परिवारों में आर्थिक स्थिरता और आत्मविश्वास बढ़ा है।रक्षाबंधन से पहले मिली महतारी वंदन की 30वीं किस्त इस बदलाव की एक सुखद तस्वीर पेश कर रही है। प्रदेश की बहनें इस राशि से राखी और मिठाई खरीदने के साथ अपने परिवार की जरूरतें पूरी करते हुए भाई-बहन के स्नेह का पर्व पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाएंगी।महतारी वंदन योजना की यह कहानी केवल आर्थिक सहायता की कहानी नहीं है। यह उस विश्वास की कहानी है, जिसमें मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति को सम्मान, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की नई ताकत मिल रही है। रक्षाबंधन से पहले बहनों के खातों में पहुंची राशि उनके लिए ’‘विष्णु भैया का उपहार’’ बनकर पर्व की खुशियों को और खास बना रही है।
- रायपुर । उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव आज पावन श्रावण मास में महासमुंद के विशाल मेगा मार्ट परिसर में एक माह तक आयोजित महारुद्राभिषेक एवं हवन-पूजन कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव का रुद्राभिषेक कर हवन-पूजन किया। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने भगवान शिव की पूजा-अर्चना और अभिषेक कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की मंगलकामना की। उन्होंने भगवान शिव से प्रदेश में निरंतर विकास और जनकल्याण की प्रार्थना की। कार्यक्रम में महासमुंद विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा सहित परिवारजन, पूर्व राज्य मंत्री श्री पूनम चंद्राकर, पूर्व सांसद श्री चुन्नी लाल साहू, पूर्व विधायक डॉ. विमल चोपड़ा, श्री येतराम साहू और नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री देवी चंद राठी सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में मौजूद थे।
- उप मुख्यमंत्री साव ने निधि का सदुपयोग कर शहरी आबादी को समुचित लाभ पहुंचाने के दिए निर्देशबिलासपुर/ राज्य शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने नगरीय निकायों हेतु कुल 9 करोड़ 44 लाख 25 हजार रुपए की एल्डरमैन निधि जारी की है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत एल्डरमैन निधि की प्रथम किस्त की 50 प्रतिशत राशि विभाग द्वारा जारी की गई है। इस मद से मनोनीत पार्षदों (एल्डरमैन) की अनुशंसा पर विकास कार्य किए जाते हैं । उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने नगरीय निकायों को ये राशि जारी कर दी है। श्री साव ने नगरीय निकायों को इस निधि का सदुपयोग करते हुए राज्य की शहरी आबादी तक योजनाओं का समुचित लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा राज्य के 10 नगर निगमों में एल्डरमैन निधि के कुल 2 करोड़ 7 लाख रुपए जारी किए गए हैं। 53 नगर पालिकाओं में कुल 3 करोड़ 93 लाख रुपए और 102 नगर पंचायतों में कुल 3 करोड़ 44 लाख 25 हजार रुपए की एल्डरमैन निधि विभाग द्वारा जारी की गई है।
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‘दृश्य संवाद 2026’ में फोटोजर्नलिस्टों को हेलमेट वितरण
रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित फोटो जर्नलिस्ट फेस्ट ‘दृश्य संवाद 2026’
रायपुर। विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित तीन दिवसीय फोटो जर्नलिस्ट फेस्ट ‘दृश्य संवाद 2026’ के तीसरे दिन तस्वीरों के साथ-साथ फोटोजर्नलिस्टों की सुरक्षा का संदेश भी प्रमुखता से सामने आया। फोटो प्रदर्शनी में शहरवासियों, विद्यार्थियों और यातायात पुलिस की सहभागिता रही। इस दौरान रायपुर पुलिस कमिश्नरेट की यातायात पुलिस की ओर से फोटोजर्नलिस्टों को हेलमेट वितरित कर सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।रायपुर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से पुलिस कमिश्नरेट द्वारा ‘ट्रैफिक हैकाथॉन’ अभियान चलाया जा रहा है। 17 अगस्त से 17 सितंबर तक चलने वाले इस अभियान के तहत जाम और पार्किंग जैसी समस्याओं के समाधान के लिए नागरिकों एवं विद्यार्थियों से स्मार्ट सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं। इसी अभियान के तहत यातायात प्रोटोकॉल डीएसपी डॉ. अर्चना झा , और एसीपी यातायात सतीश ठाकुर अपनी टीम के साथ ‘दृश्य संवाद 2026’ में शामिल हुईं और फोटोजर्नलिस्टों के लिए विशेष सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया।,डीएसपी डॉ. अर्चना झा ने कहा कि फोटोजर्नलिस्ट खबरों की कवरेज के लिए लगातार सड़क पर रहते हैं और कई बार चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में घटनास्थल तक पहुंचते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा बेहद जरूरी है। उन्होंने दोपहिया वाहन चलाते समय अनिवार्य रूप से हेलमेट पहनने, यातायात नियमों का पालन करने और कवरेज के दौरान सड़क सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सुरक्षित पत्रकार ही लंबे समय तक समाज की आवाज को मजबूती से सामने ला सकता है।तस्वीरों के पीछे की कहानी जानने उमड़े दर्शकप्रदर्शनी के तीसरे दिन भी विद्यार्थियों और दर्शकों ने फोटोजर्नलिस्टों से तस्वीरों के पीछे की कहानी, घटनास्थल के अनुभव और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में की गई कवरेज के बारे में जानकारी ली। प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के जनजीवन, संस्कृति, प्रकृति और बदलते सामाजिक परिवेश की विविध तस्वीरें एक ही मंच पर देखने को मिलीं।हेलमेट वितरण को फोटोजर्नलिस्टों ने भी सराहनीय पहल बताया। उनका कहना था कि खबरों की तलाश में शहर के अलग-अलग हिस्सों में लगातार आवाजाही करनी पड़ती है। ऐसे में पत्रकारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया यह प्रयास बेहद उपयोगी है।मोहन तिवारी बोले—फोटोजर्नलिस्ट की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरीरायपुर प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी ने कहा कि ‘दृश्य संवाद’ केवल फोटो प्रदर्शनी नहीं, बल्कि फोटोजर्नलिस्टों की मेहनत, संघर्ष और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी को सामने लाने का मंच है। एक फोटोजर्नलिस्ट कई बार ऐसी जगहों पर पहुंचकर तस्वीरें कैद करता है, जहां सामान्य व्यक्ति के लिए पहुंचना आसान नहीं होता। उनकी एक तस्वीर किसी घटना, समाज या पूरे दौर की कहानी को शब्दों से कहीं ज्यादा प्रभावी ढंग से सामने रख सकती है।उन्होंने कहा कि फोटोजर्नलिस्टों की सुरक्षा प्रेस क्लब की प्राथमिकताओं में शामिल है। डीएसपी डॉ. अर्चना झा द्वारा हेलमेट वितरण की पहल इसी सोच को मजबूत करती है। पत्रकार खबरों को समाज तक पहुंचाने का काम करते हैं, लेकिन खबरों की कवरेज के दौरान उनकी अपनी सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।मोहन तिवारी ने ‘दृश्य संवाद 2026’ को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी फोटोजर्नलिस्टों, विद्यार्थियों, नागरिकों और आयोजन से जुड़े लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में इस आयोजन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा, ताकि छत्तीसगढ़ की तस्वीरों और यहां के फोटोजर्नलिस्टों की प्रतिभा को देशभर में पहचान मिल सके।विधायक सुनील सोनी ने किया फोटो प्रदर्शनी का अवलोकनतीसरे दिन रायपुर दक्षिण विधायक सुनील सोनी भी फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन करने पहुंचे। उन्होंने फोटोजर्नलिस्टों से मुलाकात कर उनके साथ संवाद किया और अपने संघर्ष के दिनों में फोटोजर्नलिस्ट साथियों द्वारा किए गए सहयोग को याद करते हुए उनका आभार व्यक्त किया।सुनील सोनी ने कहा कि फोटोजर्नलिस्ट अपनी तस्वीरों के जरिए किसी नेता के संघर्ष, भाव-भंगिमा और व्यक्तित्व को जनता तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण काम करते हैं। उन्होंने ओपन कैटेगरी के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा भी की।इस अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब के महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, संयुक्त सचिव निवेदिता साहू एवं भूपेश जांगड़े उपस्थित रहे।फोटो जर्नलिस्टों की ओर से फेस्ट के संयोजक दीपक पांडे, वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट गोकुल सोनी, प्रदीप डडसेना, राजकुमार चतुर्वेदी, रुपेश यादव, नरेंद्र बंगाले, विनय घाडगे, सुधीर सागर, रमन हलवाई, किशन लोखंडे, मनोज देवांगन, विजय देवांगन, पंकज चौहान, हीरा मानिकपुरी, त्रिलोचन मानिकपुरी,, सागर फरीकार,हेमंत गोस्वामी, जय गोस्वामी, पंकज सिंह, राजेश सोनकर सहित बड़ी संख्या में फोटोजर्नलिस्ट मौजूद रहे।‘दृश्य संवाद 2026’ फोटो प्रदर्शनी आम दर्शकों के लिए आर्ट गैलरी में खुली रहेगी। दर्शक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक प्रदर्शनी का अवलोकन कर सकते हैं।तीसरे दिन ‘दृश्य संवाद 2026’ ने तस्वीरों के जरिए जहां छत्तीसगढ़ की सामाजिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधता को सामने रखा, वहीं हेलमेट वितरण ने यह संदेश भी दिया कि समाज की तस्वीर दिखाने वाले फोटोजर्नलिस्टों की सुरक्षा भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। - सभी जोन कमिश्नर एवं कार्यपालन अभियंता राजधानी शहर में समस्त मुख्य मार्गो में व्यवसायिक परिसरो की भवन अनुज्ञा की समय-समय पर औचक जांच कर सभी परिसरो में नियमानुसार पार्किंग व्यवस्था दिलवाना सुनिश्चित करें आयुक्त संबित मिश्रा ने दिये निर्देशरायपुर/ रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त श्री संबित मिश्रा ने राजधानी शहर रायपुर नगर निगम क्षेत्र में सभी जोन कमिश्नरो एवं कार्यपालन अभियंताओं को नगर निगम क्षेत्र के समस्त मुख्य मार्गो में समय समय पर व्यवसायिक परिसरो की औचक जांच कर भवन अनुज्ञा स्वीकृति का परीक्षण कर सभी व्यवसायिक परिसरो मे नियमानुसार नागरिको की सुविधा हेतु पार्किंग व्यवस्था दिलवाना सुनिश्चित करने निर्देशित किया है।आज नगर निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा ने नगर निगम जोन 10 क्षेत्र अंतर्गत लालपुर ब्रिज के पास पोस्ट ऑफिस के समीप निर्माणाधीन व्यवसायिक परिसर का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। इस दौरान नगर निगम के नगर निवेशक श्री आभास मिश्रा, जोन 10 जोन कमिश्नर श्री मोनेश्वर शर्मा, कार्यपालन अभियंता श्री गजाराम कवर, सहायक अभियंता नगर निवेश श्री नितीश झा, जोन 10 सहायक अभियंता श्री सुशील अहीर एवं अन्य जोन 10 संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति रही।
- आकांक्षीय शौचालयो का कार्य तत्काल गतिमान कर गुणवत्ता सहित मॉनिटरिंग कर पूर्ण करवाने दिये निर्देशस्वच्छ भारत मिशन के लबित प्रस्तावो को शीघ्र राज्य शासन को भेजने कार्रवाई करने कहारायपुर/ रायपुर नगर पालिक निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने नगर निगम मुख्यालय स्वच्छ भारत मिशन शाखा के कार्यों की प्रगति की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश संबंधितों को दिये।महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने कार्यपालन अभियंता नोडल अधिकारी स्वच्छ भारत मिशन शाखा श्री योगेश कडु को आकांक्षीय शौचालयो के कार्यों को तत्काल गतिमान कर सतत मॉनिटरिंग कर गुणवत्तापूर्ण तरीके से प्राथमिकता के आधार पर जनहित में जनसुविधा हेतु पूर्ण करना सुनिश्चित करवाने के निर्देश दिये।महापौर ने स्वच्छ भारत मिशन से संबंधित कार्यों के लंबित प्रस्तावो को शीघ्र तैयार कर शासन को स्वीकृति हेतु भेजने आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिये है।महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने रामकी कंपनी के कार्यों की सतत मॉनिटरिंग कर नगर निगम क्षेत्र में शत -प्रतिशत एरिया कव्हर कर डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का कार्य प्राथमिकता से स्वच्छता व्यवस्था सुधार हेतु करवाना सुनिश्चित करने निर्देशित किया है। उन्होंने इसके तहत घर-घर कचरा पृथकीकरण का कार्य सघन जनजागरण जोनो के माध्यम से वार्ड पार्षदो से समन्वय बनाकर करना सुनिश्चित करने निर्देशित किया है।बैठक में स्वच्छ भारत मिशन शाखा उप अभियंता श्रीमती कृष्णा राठी, श्री संस्कार शर्मा, विषय विशेषज्ञ श्री प्रणीत चोपडा श्री सूरज चंद्राकर की उपस्थिति महापौर कक्ष में रही।
- प्रोजेक्ट पुनर्जीवनरायपुर/प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर रायपुर जिला प्रशासन के जनप्रिय पर्यावरण हितकारी प्रोजेक्ट पुनर्जीवन की अभिनव योजना के अंतर्गत रायपुर जिला कलेक्टर डॉ गौरव कुमार सिह के मार्गनिर्देशन में पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका द्वारा पर्यावरण संरक्षण कार्य को लेकर व्यक्त की गई गहन चिता के तत्काल पश्चात से रायपुर जिला क्षेत्र अतर्गत रायपुर नगर पालिक निगम क्षेत्र में आयुक्त श्री संबित मिश्रा के मार्गनिर्देशन में सभी 10 जोन कमिश्नरों द्वारा सतत मॉनिटरिंग कर प्रतिदिन नियमित अपने- अपने जोन क्षेत्र के सभी वार्डो में ऐसे सभी पौधों को चिन्हित करने का कार्य किया गया , जो पूर्व में चारों ओर से ट्री गार्ड एवं कांक्रीट के घेरों पेवर में घिरे हुए होने के कारण प्राकृतिक रूप से विकसित नहीं हो पा रहे थे ।ऐसे समस्त पौधों को चिन्हित करके प्राकृतिक रूप से स्वतः विकसित होने एवं स्वयं मिट्टी, पानी प्राप्त करने पर्यावरण हितैषी वातावरण देने इन सभी पौधों को चारों ओर से घेरकर लगाये गये ट्री गार्ड और कांक्रीट के घेरों पेवर को हटाने का कार्य रायपुर नगर पालिक निगम क्षेत्र के अंतर्गत सभी 10 जोनों में तेज गति से निरन्तर समाजहित में पर्यावरण सुरक्षा की दृष्टि से करवाया गया।विभिन्न जोनों के भिन्न क्षेत्रों के स्थानों में इन सभी चिन्हित पौधों को समाज हित में पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से चारों ओर कॉंक्रीट के घेरे पेवर लगाकर लगाए गए अब तक लगभग 2239 ट्री गार्ड और लगभग 549 कांकीट के घेरों पेवर को समस्त जोन कमिश्नरों द्वारा वहां पहुंचकर हटवाये जाने का कार्य तेजी के साथ करवाया है और यह अभियान रायपुर नगर निगम क्षेत्र में निरन्तर प्रगति पर है एवं सभी जोन कमिश्नरों की सतत निगरानी में सभी 10 जोन क्षेत्रों में ऐसे सभी पौधों को स्वतः विकसित होने पानी प्राप्त कर सकने आवश्यक पर्यावरण हितैषी वातावरण कायम करने का कार्य प्राथमिकता के साथ किया गया है ।रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त श्री संबित मिश्रा ने उक्त कार्य को पहली प्राथमिकता में रखकर करवाने सभी जोन कमिश्नरो समाजहित में पर्यावरण संरक्षण कार्य हेतु स्पष्ट निर्देशित किया।रायपुर जिला कलेक्टर डॉ गौरव कुमार सिंह ने राजधानी रायपुर शहर क्षेत्र के समस्त रहवासी नागरिको से रायपुर जिला प्रशासन की ओर से विनम्र अपील की कि वे ऐसे सभी पौधों को आवश्यक पानी खाद आदि देकर विकसित करने में सहभागी बनकर अपनी सक्रिय सहभागिता को दर्ज करवाने का कष्ट करें।ऐसा करने वाले सभी पर्यावरण प्रेमी नगरवासियों को पर्यावरण मित्र के रूप में रायपुर जिला प्रशासन के तत्त्ववधान में पर्यावरण हितैषी प्रोजेक्ट पुनर्जीवन योजना के अंतर्गत समाज में उनके द्वारा पर्यावरण हितकारी योगदान देने हेतु सम्मानित किया जायेगा।रायपुर नगर पालिक निगम के सभी 10 जोनों के 10 जोन कमिश्नरों द्वारा करवाये जा रहे उक्त पर्यावरण हितैषी कार्यों की रायपुर नगर पालिक निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा द्वारा प्रतिदिन स्वतः नियमित मॉनिटरिंग और कार्य की प्रगति की सतत निरंतर समीक्षा रायपुर जिला कलेक्टर डॉ गौरव कुमार सिंह के निर्देश पर की जा रही है ।
- रायपुर/ नगर पालिक निगम रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे के निर्देश पर नगर निगम स्वास्थ्य विभाग अध्यक्ष श्रीमती गायत्री चंद्राकर ने नगर निगम में सभी जोन स्वास्थ्य अधिकारियों की बैठक लेकर उन्हें रायपुर पश्चिम विधायक श्री राजेश मूणत के नेतृत्व में रायपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत रविवार 23 अगस्त को प्रातः 8 बजे से श्री हनुमान मंदिर मारूती मंगलम भवन गुढियारी से गुढियारी पडाव, पहाडी चौक गुढियारी, खालबाडा, तेलघानीनाका ओव्हर ब्रिज, आमापारा चौक, अग्रसेन चौक, आमापारा चौक, लाखे नगर, सुन्दरनगर, रायपुरा चौक होकर श्री हटकेश्वर महादेव मंदिर परिसर महादेवघाट तक निकलने वाली पवित्र श्रावण मास कांवड यात्रा के निर्धारित रूट के 12 पड़ावो एव पूरे मार्ग रूट मे लगातार मॉनिटरिंग कर सुचारू सफाई व्यवस्था प्राथमिकता से शिव भक्त कावडियों की सुविधा हेतु सुनिश्चित करने के निर्देश दिये है। पवित्र श्रावण मास कावड यात्रा के शुभारंभ पूजन अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह, प्रदेश के सभी केबिनेट मंत्रीगण, रायपुर लोकसभा सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर पश्चिम विधायक श्री राजेश मूणत, रायपुर दक्षिण विधायक श्री सुनील सोनी, रायपुर उत्तर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, रायपुर ग्रामीण विधायक श्री मोतीलाल साहू, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, सभापति श्री सूर्यकांत राठौड, सभी एमआईसी सदस्यगण, जोन अध्यक्षगण, पार्षद एल्डरमेनगण, निगम मंडलअध्यक्षगण एवं पदाधिकारी उपस्थित रहेगे। नगर निगम स्वास्थ्य विभाग अध्यक्ष श्रीमती गायत्री चंद्राकर ने जोन स्वास्थ्य अधिकारियों सहित पवित्र श्रावण मास कावड यात्रा 23 अगस्त के पूर्व निर्धारित रूट में पहुंचकर सफाई व्यवस्था का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया एवं आवश्यक निर्देश सभी जोन स्वास्थ्य अधिकारियो को दिये ।
- रायपुर। रायपुर नगर पालिक निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे पर्यावरण एवं उद्यानिकी विभाग अध्यक्ष श्री भोलाराम साहू एवं नगर निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा के आदेशानुसार नगर निगम पर्यावरण एवं उद्यानिकी विभाग द्वारा सभी 10 जोनो के माध्यम से जोनो के वार्डो के विभिन्न स्थानो में समाज हित में पर्यावरण संरक्षण हेतु सघन पौधरोपण अभियान निरंतर प्रगति पर है। महापौर श्रीमती मीनल चौबे एवं पर्यावरण व उद्यानिकी विभाग अध्यक्ष श्री भोलाराम साहू एवं नगर निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा ने नगर निगम पर्यावरण एवं उद्यानिकी विभाग की ओर से सभी नागरिको से शहर में सुरक्षित स्थानो पर अधिक से अधिक पौधे रोपित कर रायपुर शहर को हरित राजधानी स्मार्ट सिटी बनाने में सक्रिय सहभागिता दर्ज करवाने की विनम्र अपील की है।
- नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव श्री सत्येन्द्र सिंह से नई दिल्ली में की मुलाकातनगरीय निकायों में केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी दी, मिशन अमृत को सभी निकायों में लागू करने का किया आग्रहरायपुर/नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव श्री सोनमणि बोरा ने आज नई दिल्ली में केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव श्री सत्येन्द्र सिंह से मुलाकात की। उन्होंने इस दौरान केन्द्रीय सचिव को राज्य के नगरीय निकायों में भारत सरकार की योजनाओं के क्रियान्यवन की जानकारी दी। श्री बोरा द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी 2.0) की प्रगति से अवगत कराए जाने पर आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राज्य में इसके प्रभावी क्रियान्वयन की सराहना की। श्री बोरा ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के कार्यों को विस्तायरित कार्यावधि के भीतर पूर्ण कराने के लिए राज्य शासन द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना की जानकारी दी। राज्यू शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमीत अग्रवाल भी इस दौरान मौजूद थे।प्रमुख सचिव श्री बोरा ने श्री सिंह से नई दिल्ली के ‘संकल्प भवन’ में हुई मुलाकात के दौरान छत्तीसगढ़ में विभिन्नि केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं अरबन चैलेंज फण्डक, मिशन अमृत और स्व च्छन भारत मिशन (शहरी) की प्रगति की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने राज्यर की ओर से समयबध्द् तरीके से इन योजनाओं के क्रियान्व यन के प्रति प्रतिबध्द ता जताई। श्री बोरा ने केन्द्र सरकार के सचिव को बताया कि अरबन चैलेंज फण्ड के अंतर्गत छत्ती सगढ़ को 6000 करोड़ रुपए के केन्द्रीनय एलोकेशन में से 1500 करोड़ रुपए की राशि आबंटन के लिए प्रावधानित की गई है। अरबन चैलेंज फण्ड् के तहत रायपुर में गंज मण्डी , टर्शरी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांगट, नवीन मार्केट रिडेव्हडल्पहमेंट, पुरानी म्यूतनिसिपल बिल्डिंग के पुनर्विकास एवं भिलाई-दुर्ग क्लहस्ट,र में हाइब्रिड मॉडल में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लां ट का चिन्हांंकन किया गया है। इसके लिए राज्य स्तसर पर हुडको से वित्ती य सहायता एवं क्षमता विकास के लिए कार्ययोजना पर द्रुतगति से कार्य किया जा रहा है। प्रमुख सचिव ने अरबन चैलेंज फण्डप अंतर्गत समय-सीमा के भीतर भारत सरकार को प्रस्तामव प्रेषित करने की प्रतिबध्दडता व्यपक्तय की।श्री बोरा ने मिशन अमृत 2.0 के कार्यों के अद्यतन प्रगति की जानकारी देते हुए इसके तहत लिए गए कार्यों को चरणबध्दृ रूप से अगले डेढ़ वर्षों में पूर्ण किए जाने की विस्तृत कार्ययोजना साझा की। उन्होंने भारत सरकार द्वारा चालू वित्तींय वर्ष 2026-27 में प्राप्तग 100 करोड़ रुपए के संपूर्ण व्यसय से अवगत कराते हुए इसकी अग्रिम किस्त की राशि जारी करने का अनुरोध किया। उनके अनुरोध पर भारत सरकार ने त्व्रित कार्यवाही करते हुए 100 करोड़ रुपए राज्यण को जारी किए। श्री बोरा ने राज्य के ऐसे नगरीय निकायों जहां अभी अमृत मिशन के अंतर्गत कार्ययोजना स्वीकृत नहीं है, वहां मिशन अमृत लागू करने एवं अतिरिक्तम राशि उपलब्ध कराने का भी आग्रह भारत सरकार से किया।नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव श्री बोरा ने केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव श्री सत्येन्द्र सिंह को राज्य में स्व च्छल भारत मिशन (शहरी) 2.0 की घटकवार प्रगति से अवगत कराते हुए मिशन की अवधि समाप्त होने में बचे कम समय को देखते हुए प्रगतिरत सभी कार्यों को विशेष कार्ययोजना बनाकर निर्धारित समयावधि में पूर्ण करने का प्रयास करने की बात कही। श्री बोरा ने छत्तीयसगढ़ के नगरीय निकायों के छोटे आकार एवं कम घनत्वक के कारण योजनाओं के क्रियान्व यन में आ रही जमीनी दिक्क तों से भी केन्द्रीय सचिव को अवगत कराया। इस पर श्री सिंह ने केंद्र सरकार से हरसंभव सहयोग का आश्वा्सन दिया।
- रायपुर/ रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त श्री संबित मिश्रा के निर्देश पर नगर निगम जोन 7 नगर निवेश विभाग द्वारा जोन कमिश्नर डॉ तृप्ति पाणीग्रही के मार्गनिर्देशन में नगर निगम जोन 7 क्षेत्र अंतर्गत तात्यापारा वार्ड क्रमांक 36 के अंतर्गत मुख्य मार्ग में जोन 7 कार्यालय के पास निर्माणकर्ता राजेन्द्र सिंह परिहार द्वारा नक्शा स्वीकृति के विपरीत किये गए अतिरिक्त अवैध निर्माण को नियमानुसार प्रक्रिया के अंतर्गत सम्बंधित निर्माणकर्ता को नोटिस देने के उपरांत आज अभियान चलाकर तोड़ने की कड़ी कार्रवाई की.
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-कम्प्रेस्ड बायोगैस, ग्रीन हाइड्रोजन और जैव ईंधन से खुलेंगे निवेश और हरित रोजगार के नए अवसर
-छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति-2026 से स्वच्छ ऊर्जा और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति-बायोमास को कृषि अवशेष नहीं, ऊर्जा और आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में विकसित करने पर जोर-क्लस्टर आधारित मॉडल से किसानों, स्व-सहायता समूहों और स्थानीय समुदायों की बढ़ेगी आयफीडस्टॉक प्रबंधन, बायोमास वैल्यू चेन और निजी निवेश के लिए मजबूत इकोसिस्टम विकसित करने पर विशेषज्ञों ने किया मंथनरायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध कृषि अवशेष, वन संसाधन, पशुधन अपशिष्ट और नगरीय जैव अपशिष्ट को स्वच्छ ऊर्जा में परिवर्तित कर प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोजगार और आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। कम्प्रेस्ड बायोगैस, ग्रीन हाइड्रोजन, बायोएथेनॉल और अन्य जैव ईंधनों के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं का योजनाबद्ध उपयोग छत्तीसगढ़ को देश की उभरती जैव ऊर्जा अर्थव्यवस्था में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित कर सकता है।इन्हीं संभावनाओं और भावी कार्ययोजना पर व्यापक विचार-विमर्श के लिए छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र, इसके टेक्निकल पार्टनर सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) तथा छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में अरण्य भवन, नवा रायपुर अटल नगर के सभागार में ऊर्जा सुरक्षा एवं आर्थिक विकास में जैव ऊर्जा की भूमिका पर केंद्रित कार्यशाला आयोजित की गई।कार्यशाला में शासन के विभिन्न विभागों, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के उद्योगों, वित्तीय एवं तकनीकी संस्थानों, शिक्षाविदों और नागरिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने जैव ऊर्जा क्षेत्र की संभावनाओं, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति पर मंथन किया। विशेषज्ञों ने कहा कि राज्य में उपलब्ध बायोमास संसाधनों की मजबूत वैल्यू चेन विकसित कर उन्हें स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने पर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होने के साथ उद्योगों के डीकार्बोनाइजेशन, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन को गति मिलेगी।कार्यशाला में बताया गया कि राज्य शासन ने जैव ऊर्जा क्षेत्र की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए दूरदर्शी पहल के रूप में छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति-2026 लागू की है। यह नीति प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, हरित औद्योगिकीकरण, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।इसके साथ ही छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में बायोएनर्जी परियोजनाओं के लिए विभिन्न प्रोत्साहनों और सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। इन नीतिगत पहलों के माध्यम से प्रदेश में जैव ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अनुकूल निवेश वातावरण तैयार करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जैव ऊर्जा का विस्तार केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है। इससे कृषि अवशेषों और अपशिष्ट का आर्थिक उपयोग संभव होगा, किसानों को अतिरिक्त आय मिलेगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार होंगे और सर्कुलर इकोनॉमी को भी मजबूती मिलेगी।छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमित सरकार ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि ऊर्जा सुरक्षा तथा सामाजिक और पर्यावरणीय विकास के लक्ष्यों को एक साथ हासिल किया जा सकता है। इसके लिए बायोमास को केवल कृषि अवशेष अथवा अपशिष्ट के रूप में देखने के बजाय ऊर्जा आधारित आर्थिक विकास और हरित रोजगार के महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में विकसित करना होगा।उन्होंने कहा कि कम्प्रेस्ड बायोगैस, बायोएथेनॉल और अन्य बायोफ्यूल जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इनके उपयोग से उद्योगों के कार्बन उत्सर्जन को कम करने के साथ संसाधनों के पुनः उपयोग पर आधारित सर्कुलर इकोनॉमी को भी मजबूत किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की कृषि और वन आधारित अर्थव्यवस्था जैव ऊर्जा के विकास के लिए अनुकूल आधारउपलब्ध कराती है। उपलब्ध संसाधनों को तकनीक, निवेश और प्रभावी बाजार व्यवस्था से जोड़कर प्रदेश में जैव ऊर्जा आधारित नए आर्थिक अवसर तैयार किए जा सकते हैं।वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सीसीएफ, एचआरडी-आईटी श्री आलोक तिवारी (आईएफएस) ने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रमुख कृषि फसलों, वन एवं पशुधन संसाधनों तथा नगरीय निकायों से निकलने वाले अपशिष्ट की उपलब्धता को देखते हुए जैव ऊर्जा के लिए क्लस्टर आधारित मॉडल प्रभावी सिद्ध हो सकता है।उन्होंने कहा कि क्लस्टर आधारित व्यवस्था से बायोमास के परिवहन की लागत कम की जा सकती है और जैव ऊर्जा संयंत्रों के लिए फीडस्टॉक की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है। इस व्यवस्था से किसान उत्पादक संगठनों, स्व-सहायता समूहों और स्थानीय समुदायों को भी सीधे आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि की जा सकती है।सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री रमापति कुमार ने कहा कि छत्तीसगढ़ की बायोएनर्जी क्षमता को वास्तविक धरातल पर उतारने के लिए कृषि, ग्रामीण विकास, ऊर्जा, उद्योग, पर्यावरण और वित्त विभाग के साथ छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर कन्वर्जेन्स आवश्यक है।उन्होंने कहा कि उद्योगों, वित्तीय संस्थानों, किसानों और नागरिक संगठनों को भी इस प्रक्रिया से जोड़ना होगा। प्राकृतिक संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता और दीर्घकालिक नीतिगत पहलों के माध्यम से छत्तीसगढ़ को बायोएनर्जी के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि सीड राज्य के प्रयासों में सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है और फीडस्टॉक प्रबंधन, बायोमास वैल्यू चेन तथा अभिनव समाधानों की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।कार्यक्रम में श्री अमिताभ वाजपेयी (आईएफएस), सदस्य-सचिव, छत्तीसगढ़ स्टेट बायोडायवर्सिटी बोर्ड ने भी भाग लिया।कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में जैव ऊर्जा उत्पादन के लिए कच्चे माल की उपलब्धता, फीडस्टॉक प्रबंधन, परिवहन, संग्रहण, तकनीक, बाजार, वित्तपोषण और उद्योगों में जैव ईंधन के उपयोग सहित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।तकनीकी सत्र में श्री संतोष वार्ष्णेय, जनरल मैनेजर-बायोफ्यूल, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड; डॉ. प्रवीण डी. चेंडगे, सीनियर मैनेजर-कृषि, बरगढ़, ओडिशा, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड; श्री योगेश कुमार काडू, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एवं नोडल ऑफिसर, स्वच्छ भारत मिशन, रायपुर नगर निगम; डॉ. अनिल श्रीवास्तव, प्रोजेक्ट साइंटिस्ट, छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र; श्री विशाल प्रसाद गुप्ता, डायरेक्टर, एनर्जी कोर इंडिया एंड पावर लिमिटेड; श्री चंद्रमौली सिंह, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड; श्री विशाल जाधव, जिंदल पावर लिमिटेड, तमनार; श्री पुलकित श्रोत्रय, सेक्टर एक्सपर्ट; श्री अश्वनी अशोक, डायरेक्टर-जस्ट ट्रांजिशन, सीड; डॉ. देवयानी शर्मा, एसोसिएट डायरेक्टर-क्लाइमेट, सीड तथा श्री तुषार शर्मा, सीड सहित विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।कार्यशाला में कृषि, वन एवं जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, स्टेट अर्बन डेवलपमेंट एजेंसी तथा रायपुर नगर निगम के अधिकारियों ने भाग लिया। इसके साथ ही महिन्द्रा पावर, जायसवाल नेको, नाकोडा इस्पात, गोदावरी तथा बायो-एनर्जी और सीएनजी आधारित विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधि भी चर्चा में शामिल हुए।आईआईएम रायपुर और कलिंगा यूनिवर्सिटी के शिक्षाविदों तथा विभिन्न सिविल सोसाइटी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी जैव ऊर्जा के विकास से जुड़े तकनीकी, आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक पहलुओं पर सुझाव दिए।कार्यशाला और तकनीकी सत्रों से जैव ऊर्जा क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। विशेषज्ञों ने राज्य में उपलब्ध बायोमास संसाधनों का मानकीकृत आकलन और विश्वसनीय डेटा बेस तैयार करने की आवश्यकता बताई। इसके साथ ही एकीकृत बायोमास कॉरिडोर विकसित करने, संग्रहण एवं एकत्रीकरण की मजबूत व्यवस्था बनाने और उत्पादों की बाजार तक सुगम पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।निजी निवेश आकर्षित करने के लिए अनुकूल वित्तीय और नियामकीय व्यवस्था विकसित करने तथा फीडस्टॉक के संग्रहण और प्रबंधन में किसान उत्पादक संगठनों, स्व-सहायता समूहों और सहकारी समितियों की भूमिका बढ़ाने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।कार्यशाला में इस बात पर सहमति रही कि नीति, तकनीक, निवेश और स्थानीय समुदायों को एक साझा मंच पर लाकर छत्तीसगढ़ में बायो-रिसोर्स आधारित अर्थव्यवस्था का मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया जा सकता है। इससे कृषि और वन आधारित संसाधनों का बेहतर मूल्य संवर्धन होने के साथ किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अतिरिक्त आय, स्थानीय स्तर पर हरित रोजगार और उद्योगों के लिए स्वच्छ ऊर्जा के नए विकल्प उपलब्ध होंगे।राज्य में उपलब्ध प्राकृतिक और जैव संसाधनों के वैज्ञानिक एवं सतत उपयोग के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास को एक साथ आगे बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी बायोएनर्जी राज्यों में स्थापित करने की दिशा में यह कार्यशाला एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी। -
-विशेषज्ञों ने कहा—तथ्य, तर्क और विज्ञान के आधार पर हो इतिहास एवं विरासत का संरक्षण और प्रस्तुतीकरण
रायपुर। संस्कृति विभाग, पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय के तत्वावधान में “विरासत का प्रवाह: नैतिकता, संरक्षण और समुदाय” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए विषय-विशेषज्ञों, विद्वानों, शोधकर्ताओं एवं प्रतिभागियों ने विरासत संरक्षण के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया। इस दौरान विरासत संरक्षण में नैतिकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्रामाणिकता तथा स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी के महत्व पर विशेष रूप से चर्चा हुई।कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन एवं परिचय पुरातत्त्ववेत्ता श्री प्रभात कुमार सिंह ने दिया। उन्होंने संगोष्ठी की विषय-वस्तु पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विरासत केवल अतीत की स्मृतियों और पुरावशेषों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज की सामूहिक पहचान, ज्ञान और सांस्कृतिक निरंतरता का आधार है। विरासत के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की सहभागिता तथा भावी पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संरक्षण की प्रक्रिया में विरासत के मूल स्वरूप, ऐतिहासिक संदर्भ और सामाजिक महत्व को समझना आवश्यक है।मुख्य अतिथि प्रो. ऋचा कम्बोज, नई दिल्ली ने अपने उद्बोधन में विरासत संरक्षण के व्यापक आयामों पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने विरासत संरक्षण के लिए शोध, ज्ञान और व्यवहारिक प्रयासों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। विशिष्ट अतिथि श्री ओजस हिरानी, गुजरात एवं श्री टोप लाल शर्मा, छत्तीसगढ़ ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि विरासत संरक्षण को प्रभावी और स्थायी बनाने के लिए अकादमिक संस्थाओं, शासन तथा स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा ने भारतीय इतिहास के विभिन्न प्रसंगों की चर्चा करते हुए इतिहास और विरासत से जुड़े विषयों को तथ्यपरक एवं प्रमाणिक दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास से संबंधित विषयों में भ्रामक या तथ्यहीन कथनों और गढ़े गए आख्यानों के दुष्परिणाम व्यापक हो सकते हैं। इसलिए इतिहास के अध्ययन, लेखन और प्रस्तुतीकरण में तर्क, तथ्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का पालन किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि इतिहास केवल घटनाओं का संकलन नहीं है, बल्कि यह समाज की स्मृति और उसकी पहचान को निर्मित करने वाला महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में इतिहास लेखन में शुचिता, निष्पक्षता और नैतिकता का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि विरासत और इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक सही संदर्भ और प्रमाणिकता के साथ पहुंचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।कार्यक्रम की अध्यक्षता संचालक, संस्कृति एवं पुरातत्त्व डॉ. संजय कन्नौजे ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने विरासत संरक्षण को वर्तमान और भावी पीढ़ियों के प्रति सामूहिक दायित्व बताते हुए कहा कि संरक्षण की प्रक्रिया में नैतिकता, प्रामाणिकता, वैज्ञानिक पद्धति और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को समान महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समुदायों की सक्रिय सहभागिता से विरासत संरक्षण के प्रयास अधिक प्रभावी, संवेदनशील और स्थायी बनाए जा सकते हैं। शुभारंभ सत्र के अंत में अतिथि वक्ताओं को स्मृति चिह्न एवं राजकीय गमछा भेंट कर सम्मानित किया गया।यह राष्ट्रीय संगोष्ठी विरासत संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं एवं प्रतिभागियों के लिए अनुभवों और विचारों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच है। संगोष्ठी सह प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से विरासत संरक्षण के विभिन्न पक्षों पर विशेषज्ञों के अनुभव साझा किए जा रहे हैं तथा प्रतिभागियों को संरक्षण की आधुनिक एवं वैज्ञानिक पद्धतियों से परिचित कराया जा रहा है। कार्यक्रम के माध्यम से विरासत संरक्षण को केवल शासकीय दायित्व न मानकर समाज और समुदाय की साझा जिम्मेदारी के रूप में विकसित करने की दिशा में सार्थक विमर्श को आगे बढ़ाया जा रहा है। -
-रामगढ़ से कैलाश गुफा जा रहे कांवड़ यात्रियों का मंत्री राजेश अग्रवाल ने किया आत्मीय स्वागत, सुखद एवं सफल यात्रा की कामना
रायपुर । पावन श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ की भक्ति में श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है। इसी क्रम में रामगढ़ से कैलाश गुफा की ओर कांवड़ यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं का छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने आत्मीय स्वागत एवं सत्कार किया। उन्होंने कांवड़ यात्रियों से मुलाकात कर उनकी यात्रा के संबंध में जानकारी ली और सभी श्रद्धालुओं को सुखद, सुरक्षित एवं सफल यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं। मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि श्रावण मास में निकलने वाली कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति, तपस्या और समर्पण की यात्रा है। भगवान शिव के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और विश्वास इस यात्रा में दिखाई देता है। कांवड़ यात्री कठिन परिस्थितियों और लंबी दूरी की चुनौतियों के बावजूद पूरे उत्साह एवं श्रद्धाभाव के साथ अपनी यात्रा पूरी करते हैं। यह यात्रा श्रद्धालुओं की आध्यात्मिक ऊर्जा और भगवान भोलेनाथ के प्रति उनकी गहरी आस्था का प्रतीक है।उन्होंने कांवड़ यात्रियों का स्वागत करते हुए भगवान भोलेनाथ से सभी श्रद्धालुओं की यात्रा सुखद, सुरक्षित एवं सफल होने की कामना की। उन्होंने कहा कि बाबा भोलेनाथ सभी कांवड़ यात्रियों पर अपनी कृपा बनाए रखें और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करें।रामगढ़ से कैलाश गुफा की ओर बढ़ रहे कांवड़ यात्रियों में भगवान शिव के प्रति गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिला। श्रद्धालु पूरे भक्तिभाव के साथ कांवड़ लेकर अपनी यात्रा पर आगे बढ़ रहे हैं। यात्रा मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं का स्वागत, सेवा और सत्कार भी किया जा रहा है। इससे यात्रा मार्ग पर भक्ति और सेवा का वातावरण बना हुआ है।मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि धार्मिक यात्राएं समाज में भाईचारे, सेवा, सद्भाव और एकजुटता की भावना को मजबूत करती हैं। कांवड़ यात्रियों की सेवा करना, उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना और उनका उत्साह बढ़ाना भी भगवान शिव की भक्ति का ही एक रूप है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में श्रद्धा, सेवा और सामुदायिक सहभागिता का विशेष महत्व रहा है।उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से यात्रा के दौरान सावधानी बरतने, अनुशासन बनाए रखने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की। साथ ही उन्होंने कांवड़ यात्रा के दौरान स्वच्छता बनाए रखने और यात्रा मार्ग पर दूसरों की सुविधा का भी ध्यान रखने का आग्रह किया। इस अवसर पर पूरा वातावरण भक्तिमय रहा और ‘हर हर महादेव’ के जयकारों से गूंजता रहा। कांवड़ यात्रियों ने आत्मीय स्वागत एवं शुभकामनाओं के लिए मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के प्रति आभार व्यक्त किया। -
-वन मंत्री ने ली सार्वजनिक व निजी उपक्रमों तथा वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक
-वैज्ञानिक पुनरुद्धार, स्थानीय प्रजातियों के रोपण और वन्यजीव संरक्षण पर दिए सख्त निर्देशरायपुर। खनिज संसाधनों के उपयोग के बाद वन भूमि को उसकी प्राकृतिक पहचान लौटाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। खनन समाप्त होने के बाद केवल पौधे लगा देना ही वन भूमि का पुनरुद्धार नहीं है, बल्कि उसे वैज्ञानिक तरीके से पुनर्स्थापित कर पुनः एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन के वन व जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप ने शुक्रवार को अपने कोरबा प्रवास के दौरान एनटीपीसी के प्रशासनिक भवन में सार्वजनिक एवं निजी उपक्रमों के प्रतिनिधियों तथा वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली।बैठक में वन संरक्षण एवं संवर्धन अधिनियम के प्रावधानों और स्वीकृत शर्तों के अनुरूप खनन एवं परियोजनाओं से प्रभावित वन भूमि के पुनरुद्धार के सम्बंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए। इस अवसर पर विधायक कटघोरा श्री प्रेमचंद पटेल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण कुमार पांडे, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (लैंड मैनेजमेंट) श्री सुनील मिश्रा, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन, हिंडालको, एसईसीएल, एनटीपीसी, बालको, अडानी सहित प्रमुख सार्वजनिक व निजी औद्योगिक एवं खनन उपक्रमों के वरिष्ठ अधिकारी तथा वन विभाग के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का दोहन और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलना चाहिए। विकास के लिए संसाधनों का उपयोग आवश्यक है, लेकिन इसके साथ प्रकृति को हुई क्षति की भरपाई और वन भूमि को पुनः स्वस्थ स्वरूप प्रदान करना भी उतनी ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रधान मुख्य वन संरक्षक द्वारा जारी तकनीकी एवं व्यावहारिक दिशा-निर्देशों को सभी संबंधित कंपनियों एवं अधिकारियों को इनका शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।श्री कश्यप ने कहा कि वन भूमि केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि जैव विविधता, वन्यजीवों, जल स्रोतों और स्थानीय समुदायों के जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। इसलिए खनन एवं औद्योगिक गतिविधियों के बाद इसके पुनरुद्धार में दीर्घकालिक पर्यावरणीय दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। वन मंत्री ने सभी औद्योगिक एवं खनन कंपनियों को अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी मद का प्रभावी और संवेदनशील उपयोग करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों एवं स्थानीय समुदायों के आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक उन्नयन के लिए सीएसआर गतिविधियों को प्राथमिकता दी जाए। स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में ठोस और सकारात्मक बदलाव लाने वाले कार्यों को प्रोत्साहित किया जाए, ताकि विकास का लाभ प्रभावित क्षेत्रों के समुदायों तक भी प्रभावी रूप से पहुंचे।बैठक में स्पष्ट किया गया कि वन भूमि के उपयोग के बाद उसका पुनरुद्धार किसी औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहना चाहिए। रेस्टोरेशन एवं रिक्लेमेशन के प्रत्येक कार्य में वैज्ञानिक वानिकी सिद्धांतों, स्थानीय पारिस्थितिकी और स्थल की प्राकृतिक विशेषताओं को केंद्र में रखा जाए। संबंधित कंपनियों को निर्देशित किया गया कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में केवल तेजी से बढ़ने वाली प्रजातियों का एकरूप पौधरोपण करने के बजाय स्थानीय एवं देशज प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाए। प्रजातियों का चयन क्षेत्र की जलवायु, मृदा, स्थल-गुण, जल उपलब्धता और स्थानीय वन संरचना के अनुरूप किया जाए, जिससे लगाए गए पौधे दीर्घकाल में स्थायी वन के रूप में विकसित हो सकें और प्राकृतिक पुनरुत्पादन को भी बढ़ावा मिले।प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री पांडे ने निर्देशित किया कि वैज्ञानिक पुनरुद्धार का दायरा केवल ओवरबर्डन डंप तक सीमित न रखा जाए। खनन के दौरान खोदे गए एवं प्रभावित संपूर्ण क्षेत्र में भूमि सुधार, मृदा संरक्षण और पौधरोपण का कार्य वैज्ञानिक सिल्वीकल्चरल तकनीकों के अनुसार किया जाए। उन्होंने मृदा की स्थिरता बनाए रखने, भू-क्षरण रोकने तथा खनन के बाद भूमि को पुनः वन विकास के लिए सक्षम बनाने के लिए स्थल-विशिष्ट तकनीकों के उपयोग पर विशेष जोर दिया।बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम की रोपण योजनाओं की भी समीक्षा की गई। निगम को निर्देशित किया गया कि वह केवल फास्ट-ग्रोइंग प्रजातियों पर निर्भर रहने के बजाय क्षेत्र की पारिस्थितिकीय आवश्यकताओं के अनुरूप स्थानीय एवं देशज प्रजातियों को प्राथमिकता दे। वन विकास का उद्देश्य केवल पौधों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि स्वस्थ, विविधतापूर्ण और दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ वन तैयार करना होना चाहिए। वन एवं वन्यजीव संरक्षण को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ विषय बताते हुए बैठक में वन्यजीवों के आवास और उनके संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया। खनन प्रभावित क्षेत्रों में वन्यजीवों के आवास संरक्षण, सुरक्षित आवागमन तथा प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां विकसित करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने कहा गया कि पुनरुद्धार की योजनाएं क्षेत्र की जैव विविधता और स्थानीय वन्यजीवों की आवश्यकताओं के अनुरूप हों।वन विभाग के मैदानी अमले को भी रेस्टोरेशन कार्यों की निगरानी के लिए जवाबदेह बनाया गया। संबंधित वन मंडलाधिकारी एवं उनके अधीनस्थ अधिकारियों को नियमित क्षेत्र भ्रमण कर कार्यों की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करने तथा इसकी जानकारी विभागीय अभिलेखों में दर्ज करने के निर्देश दिए गए। पुनरुद्धार कार्यों की गुणवत्ता, पौधों की उत्तरजीविता, भूमि की स्थिति और निर्धारित वैज्ञानिक मानकों के पालन की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने कहा गया।बैठक में वन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि खनन के बाद वन भूमि की बहाली केवल कागजी अनुपालन नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाला वैज्ञानिक और गुणवत्तापूर्ण परिणाम होना चाहिए। स्थानीय प्रजातियों की स्थापना, मृदा संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों को साथ लेकर चलने वाली समग्र रेस्टोरेशन व्यवस्था के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों को पुनः स्वस्थ एवं टिकाऊ पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। -
-स्वतंत्रता संग्राम, ‘वंदे मातरम्’ की गौरवगाथा और छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा रही मुख्य आकर्षण का केंद्र
-एआई तकनीक, पर्यटन अनुभव और ज्ञानवर्धक क्विज ने बच्चों और युवाओं को किया खूब आकर्षितरायपुर। राजधानी रायपुर के कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी का शुक्रवार को समापन हुआ। 15 से 21 अगस्त तक आयोजित इस प्रदर्शनी को नागरिकों, विद्यार्थियों और शिक्षकों का अच्छा प्रतिसाद मिला। प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम, वीर सेनानियों के संघर्ष और बलिदान से लेकर ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा तथा राज्य की विकास और सुशासन यात्रा को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया।इस प्रदर्शनी में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े दुर्लभ छायाचित्र, ऐतिहासिक दस्तावेज और महत्वपूर्ण प्रसंग प्रदर्शित किए गए। महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ प्रवास, स्वतंत्रता आंदोलन में प्रदेश के योगदान और वीर सेनानियों के संघर्ष को तस्वीरों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों ने इन छायाचित्रों को उत्सुकता से देखा और कहा कि पुस्तकों में पढ़े इतिहास को तस्वीरों के माध्यम से देखना उनके लिए प्रेरणादायी अनुभव रहा।प्रदर्शनी में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की यात्रा पर विशेष खंड बनाया गया था। इसमें इसके ऐतिहासिक महत्व और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रभावना जागृत करने में इसकी भूमिका को प्रदर्शित किया गया। इस खंड को विद्यार्थियों और युवाओं ने विशेष रुचि के साथ देखा।प्रदर्शनी में एआई तकनीक के माध्यम से छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों की पृष्ठभूमि के साथ डिजिटल तस्वीर तैयार करने की सुविधा ने बच्चों और युवाओं को खासा आकर्षित किया। आधुनिक तकनीक के माध्यम से राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक और पर्यटन विरासत से जुड़ने का यह अनुभव आगंतुकों के लिए नया और रोचक रहा।इस प्रदर्शनी परिसर में छत्तीसगढ़ के इतिहास, संस्कृति, परंपरा, पर्यटन और महत्वपूर्ण उपलब्धियों पर आधारित क्विज भी आयोजित की गई। विद्यार्थियों और युवाओं ने उत्साह के साथ इसमें भाग लिया। क्विज के माध्यम से मनोरंजन के साथ लोगों को अपने राज्य के बारे में अधिक जानने और अपने ज्ञान को परखने का अवसर मिला।इस प्रदर्शनी में राज्य की विकास यात्रा को भी प्रमुखता से स्थान दिया गया। महतारी वंदन योजना, कृषक उन्नति योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से लोगों के जीवन में आए बदलावों को तस्वीरों और सूचनात्मक सामग्री के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।महिलाओं, किसानों, युवाओं, श्रमिकों और जरूरतमंद परिवारों के सशक्तिकरण से जुड़ी उपलब्धियों के साथ सुशासन तिहार, हरित छत्तीसगढ़, सड़क एवं रेल संपर्क, अधोसंरचना विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसरों की झलक भी प्रदर्शनी में देखने को मिली।प्रदर्शनी परिसर में छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा, उपलब्धियों और जनकल्याणकारी योजनाओं पर आधारित वृत्तचित्र का प्रदर्शन भी किया गया। इससे आगंतुकों को राज्य में हुए विकास कार्यों और योजनाओं के प्रभाव को दृश्यों के माध्यम से समझने का अवसर मिला।सेजस शहीद स्मारक स्कूल फाफाडीह 54 छात्र-छात्राओं ने अवलोकन किया। ऐश्वर्य यादव, दिव्यांशु आदिल,अवंतिका सिंह नैंसी साहू और टीना जंघेल ने प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके लिए यह बड़ा ही रोचक और अनोखा अनुभव रहा है जो हमेशा अविस्मरणीय रहेगा।इस सात दिवसीय प्रदर्शनी को देखने पहुंचे विद्यार्थियों और शिक्षकों ने इसे ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी के माध्यम से उन्हें स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के संघर्ष और बलिदान को समझने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन और वर्तमान विकास यात्रा को जानने का अवसर मिला। शिक्षकों ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी में इतिहास, देशभक्ति और अपनी विरासत के प्रति गौरव की भावना विकसित करने में उपयोगी हैं। इस सात दिवसीय प्रदर्शनी ने एक ही मंच पर छत्तीसगढ़ के गौरवशाली अतीत, राष्ट्रभावना, समृद्ध विरासत और वर्तमान विकास की तस्वीर प्रस्तुत की। ऐतिहासिक टाउन हॉल में आयोजित यह आयोजन नागरिकों और विद्यार्थियों के लिए जानकारी, प्रेरणा और नए अनुभवों से भरपूर रहा। -
-शास्त्रीय गायन, भरतनाट्यम और कथक की मनोहारी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
डॉ. आरती सिंह ने 10 विद्यार्थियों के साथ प्रस्तुत किया कथक, ‘शिव पंचाक्षर स्तोत्र’ और वर्षा ऋतु की भावाभिव्यक्ति ने बांधा समांरायपुर। संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विभागीय आयोजन-2026 के अंतर्गत राजधानी रायपुर में ‘पावस प्रसंग’ का आयोजन किया गया। महंत घासीदास संग्रहालय परिसर स्थित मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में वर्षा ऋतु की भावभूमि को शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य की प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत किया गया। कार्यक्रम में शास्त्रीय गायन, भरतनाट्यम और कथक समूह की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय कला की समृद्ध परंपरा से रूबरू कराया।‘पावस प्रसंग’ के प्रथम दिवस की पहली प्रस्तुति सुश्री अलका कुर्रे ने शास्त्रीय गायन के माध्यम से दी। कक्षा आठवीं की विद्यार्थी सुश्री अलका कुर्रे ने अपनी प्रस्तुति से कार्यक्रम की सांगीतिक शुरुआत की। उनकी प्रस्तुति में शास्त्रीय संगीत की सुरमयी एवं भावपूर्ण अभिव्यक्ति देखने को मिली।इसके बाद श्री होरित गौर ने भरतनाट्यम की प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में शास्त्रीय नृत्य की लय, भाव और सौंदर्य को प्रभावी ढंग से सामने रखा। भरतनाट्यम की मुद्राओं और भावाभिव्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।कार्यक्रम का विशेष आकर्षण डॉ. आरती सिंह एवं उनके 10 विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत कथक रहा। प्रस्तुति में ‘शिव पंचाक्षर स्तोत्र’ सहित वर्षा ऋतु की भावभूमि को कथक की लय, ताल, मुद्राओं और भावाभिव्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। सामूहिक प्रस्तुति में विद्यार्थियों ने अनुशासित एवं प्रभावशाली नृत्य संयोजन के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।डॉ. आरती सिंह लखनऊ एवं रायगढ़ घराने से प्रशिक्षित कथक कलाकार हैं और उन्हें तीन दशकों से अधिक समय से कथक साधना एवं प्रशिक्षण का अनुभव है। वे दूरदर्शन की मान्यता प्राप्त कलाकार हैं तथा आईसीसी से भी चयनित रही हैं। उन्होंने अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां दी हैं। आगामी माह तिरुपति में भी उनकी प्रस्तुति प्रस्तावित है, जहां वे ‘सियाराम’ की प्रस्तुति लेकर जाएंगी।डॉ. आरती सिंह ने कथक में विभिन्न विषयों पर रचनात्मक प्रस्तुतियां एवं नृत्य संयोजन तैयार किए हैं। इनमें ‘सियाराम’, ‘फर्स्ट नायिका’ तथा ‘दिव्य ज्योति’ प्रमुख हैं। ‘दिव्य ज्योति’ स्वामी विवेकानंद जी के जीवन पर आधारित नृत्य नाटिका है, जो उनके जीवन, विचारों और प्रेरणादायी व्यक्तित्व को नृत्य के माध्यम से अभिव्यक्त करती है।कार्यक्रम में युवा प्रतिभाओं की सहभागिता भी विशेष आकर्षण रही। निधि टंडन, जो वर्तमान में भिलाई में कक्षा दसवीं की विद्यार्थी हैं, ने भी कथक की प्रस्तुति में सहभागिता की। वे गुरु श्रीमती अमृता सान्याल के सानिध्य में पिछले लगभग पांच वर्षों से कथक का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने कक्षा पांचवीं से ही कथक सीखना प्रारंभ किया और निरंतर अभ्यास के माध्यम से इस शास्त्रीय नृत्य विधा में अपनी प्रतिभा विकसित की है।‘पावस प्रसंग’ की प्रस्तुतियों में वरिष्ठ कलाकारों के अनुभव और युवा प्रतिभाओं के उत्साह का सुंदर समन्वय देखने को मिला। कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि भारतीय शास्त्रीय कलाओं की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने में नियमित प्रशिक्षण, साधना और नई पीढ़ी की भागीदारी महत्वपूर्ण है।‘पावस प्रसंग’ में वर्षा ऋतु को केवल प्राकृतिक परिवर्तन के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय संगीत और नृत्य परंपरा में निहित भावनाओं के रूप में प्रस्तुत किया गया। शास्त्रीय गायन और नृत्य की प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रकृति, भक्ति, उल्लास और संवेदना जैसे विविध भावों को मंच पर अभिव्यक्ति मिली।मुक्ताकाशी मंच पर उपस्थित कला एवं संस्कृति प्रेमियों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों का उत्साहपूर्वक आनंद लिया और उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम की प्रस्तुतियों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य की समृद्ध परंपरा, उसकी विविधता और भावप्रधानता को प्रभावी ढंग से सामने रखा।संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम कलाकारों को मंच प्रदान करने के साथ-साथ शास्त्रीय कलाओं को आमजन तक पहुंचाने और नई पीढ़ी को इन समृद्ध परंपराओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। ‘पावस प्रसंग’ की यह सांस्कृतिक संध्या वर्षा ऋतु की संवेदनाओं और भारतीय शास्त्रीय कलाओं के सुंदर संगम के रूप में यादगार रही। -
-लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत कार्य समय-सीमा में पूरा करें, लापरवाही पर होगी कार्रवाई – संभागायुक्त श्री दुग्गा
-सरगुजा संभागायुक्त नरेन्द्र दुग्गा ने ली योजनाओं की समीक्षा बैठकरायपुर। सरगुजा संभागायुक्त श्री नरेन्द्र कुमार दुग्गा ने शुक्रवार को संभागायुक्त कार्यालय के सभाकक्ष में विकसित भारत-जी राम जी एवं प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण सहित ग्रामीण विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की संभागस्तरीय समीक्षा की। बैठक में योजनाओं की प्रगति, निर्धारित लक्ष्यों के विरुद्ध उपलब्धियां, लंबित प्रकरणों के निराकरण तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।छत्तीसगढ़ शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर सचिव एवं विकसित भारत-जी राम जी के अपर आयुक्त श्री एस. आलोक ने जिलेवार आबंटित लक्ष्यों एवं प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने विभिन्न कार्यों की विस्तारपूर्वक समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।संभागायुक्त श्री दुग्गा ने कहा कि सरगुजा संभाग अनुसूचित जनजाति क्षेत्र है और यहां शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना सभी अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी जनपद पंचायतों के सीईओ को निर्देशित किया कि शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या कोताही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को जनपद स्तर एवं मैदानी अमले के कार्यों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिए।बैठक में विकसित भारत-जी राम जी के अंतर्गत जुलाई एवं अगस्त माह में सृजित मानव दिवस तथा पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में मानव दिवस सृजन की स्थिति की समीक्षा की गई। संभागायुक्त ने जिन क्षेत्रों में मानव दिवस सृजन अपेक्षाकृत कम है, वहां विशेष प्रयास कर निर्धारित लक्ष्य की शत-प्रतिशत पूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी विद्यालयों में आवश्यकतानुसार शौचालय निर्माण, मुक्तिधामों में प्रतीक्षालय एवं शेड निर्माण तथा जल संरक्षण एवं जल संचयन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने कहा। वर्षा जल के संरक्षण, भूजल स्तर बढ़ाने और पानी की बर्बादी रोकने के लिए आवश्यक कार्य समय-सीमा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए।ग्राम पंचायतों में स्वीकृत कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्होंने शेष कार्यों को शीघ्र स्वीकृत कर समय पर पूर्ण कराने कहा। बैठक में विभिन्न बोरवेल रिचार्ज कार्यों की स्वीकृति, महात्मा गांधी नरेगा के अपूर्ण कार्यों को पूर्ण कराने तथा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के हितग्राहियों को 90 मानव दिवस का रोजगार उपलब्ध कराने की प्रगति की भी समीक्षा की गई।अपर आयुक्त श्री एस. आलोक ने विकसित भारत-जी राम जी के अंतर्गत अपूर्ण आवासों को शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने युक्तधारा में प्लान किए गए कार्यों की स्थिति की जानकारी लेते हुए कार्यों की नियमित निगरानी पर जोर दिया।संभागायुक्त ने सिक्योर पोर्टल के माध्यम से कार्यों की स्वीकृति, प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्वीकृत कार्यों की स्थिति, एसएनए-स्पर्श के माध्यम से भुगतान, इस वर्ष स्वीकृत एवं रोपित पौधों की संख्या तथा एनएमएमएस के माध्यम से श्रमिकों की उपस्थिति की समीक्षा की। लंबित ई-केवाईसी तथा शून्य प्रविष्टि वाले मस्टर रोल के मामलों का शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मैदानी स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने कहा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों की सराहना करते हुए उन्होंने अपेक्षाकृत कम प्रगति वाले जिलों को कार्यों में तेजी लाकर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, विशेष परियोजना एवं पीएम जनमन योजना के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध स्वीकृत एवं पूर्ण आवासों की जिलेवार प्रगति की समीक्षा की गई। संभागायुक्त ने शेष आवासों की स्वीकृति सात दिवस के भीतर पूर्ण करने तथा अपूर्ण आवासों को शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए।स्वीकृत आवासों के विरुद्ध प्रथम किस्त के लंबित प्रकरणों और भुगतान की स्थिति की जानकारी लेते हुए लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण करने कहा गया। आवास सॉफ्ट में अपात्र किए गए हितग्राहियों, जॉब कार्ड तथा विभिन्न योजनाओं के अभिसरण की प्रगति की भी समीक्षा की गई। ए, बी एवं सी श्रेणी के प्रकरणों को आवास सॉफ्ट में चिन्हांकित कर उनके निराकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।संभागायुक्त श्री दुग्गा ने आर-सेटी एवं आरएमटी के अंतर्गत प्रशिक्षण की स्थिति, प्रगति एवं लंबित प्रकरणों की जानकारी ली। उन्होंने पात्र हितग्राहियों को समय पर प्रशिक्षण एवं योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास से जुड़ी सभी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। इसलिए योजनाओं के क्रियान्वयन में गति, गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ मैदानी स्तर पर नियमित निगरानी जरूरी है। उन्होंने सभी जिला एवं जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को विकसित भारत-जी राम जी एवं आवास योजनाओं के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए टीम भावना के साथ समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।बैठक में उपायुक्त श्री आर.के. खूंटे, सरगुजा जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री रोमा श्रीवास्तव, जशपुर सीईओ श्री अभिषेक कुमार, बलरामपुर सीईओ श्री आशुतोष चतुर्वेदी, एमसीबी सीईओ श्रीमती अंकिता सोम, कोरिया सीईओ श्री योगेंद्र श्रीवास सहित सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी उपस्थित रहे। -
-छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण को लेकर हुई चर्चा
-दूरस्थ और जनजातीय अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोररायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा से उनके निवास पर सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय मंत्री श्री नड्डा से उनके स्वास्थ्य एवं कुशलक्षेम की जानकारी ली और उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाओं के विस्तार तथा केंद्र सरकार के सहयोग से संचालित स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति को लेकर सार्थक चर्चा हुई।मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का विशेष फोकस इस बात पर है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को उसके निकट ही गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो। इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं तक स्वास्थ्य तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है।मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा सहित प्रदेश के दूरस्थ, वनांचल एवं जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भौगोलिक परिस्थितियों के कारण दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण चुनौती रही है। राज्य सरकार इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार, चिकित्सकीय सेवाओं की उपलब्धता और आधुनिक उपचार सुविधाओं तक लोगों की पहुंच आसान बनाने की दिशा में प्राथमिकता से कार्य कर रही है।मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय मंत्री श्री नड्डा को प्रदेश में केंद्र सरकार के सहयोग से संचालित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा निरंतर बढ़ रहा है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संस्थागत प्रसव, गंभीर बीमारियों के उपचार, स्वास्थ्य बीमा और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में व्यापक बदलाव आया है। आयुष्मान भारत सहित केंद्र सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं से जरूरतमंद परिवारों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने में बड़ी मदद मिली है। छत्तीसगढ़ सरकार भी केंद्र की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए अंतिम व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली। उन्होंने प्रदेश में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए केंद्र सरकार की ओर से आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग से छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी तथा विशेष रूप से दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों के नागरिकों को बेहतर और आधुनिक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य तेजी से पूरा होगा। - -स्कूल शिक्षा विभाग की उपलब्धियों पर मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस, दो वर्षों के कार्यों का रखा लेखा-जोखारायपुर / स्कूल शिक्षा विभाग की विगत दो वर्षों की विभागीय गतिविधियों एवं उपलब्धियों को लेकर शुक्रवार को छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम, अटल नगर, नवा रायपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस को स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव एवं स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने संयुक्त रूप से संबोधित किया। इस दौरान विभाग द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, शिक्षकों की उपलब्धता एवं पदोन्नति, भर्ती प्रक्रिया, विद्यार्थियों को दी जा रही सुविधाओं, विद्यालय अधोसंरचना, बहुभाषी शिक्षा तथा तकनीक आधारित मॉनिटरिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यों एवं उपलब्धियों की जानकारी दी गई।स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने बताया कि विगत दो वर्षों में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, समावेशी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के प्रावधानों के अनुरूप 10,538 विद्यालयों का समायोजन किया गया। युक्तियुक्तकरण के माध्यम से 15,165 शिक्षकों एवं प्राचार्यों का समायोजन किया गया। 453 शिक्षकविहीन विद्यालयों में शिक्षकों की पूर्ति तथा 4,729 एकल शिक्षकीय विद्यालयों में शिक्षकों की व्यवस्था की गई है। शिक्षकों की पदोन्नति के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। टी संवर्ग में 1,335 तथा ई संवर्ग में 1,478, कुल 2,813 पदों पर प्राचार्यों की पदोन्नति की गई। टी संवर्ग में 1,798 व्याख्याताओं की पदोन्नति तथा विगत दो वर्षों में विभिन्न पदों पर 7,000 से अधिक पदोन्नतियां की गई हैं।स्कूल शिक्षा मंत्री श्री यादव ने बताया कि दिव्यांग बच्चों के लिए स्पेशल एजुकेटर के 848 पद स्वीकृत किए गए। वर्ष 2025 में 62 पदों पर सीधी भर्ती से नियुक्ति की गई। विगत दो वर्षों में 2,104 शैक्षणिक पदों पर सीधी भर्ती की गई है। इसके अतिरिक्त 5,000 शिक्षकीय पदों पर सीधी भर्ती परीक्षा प्रक्रिया में है। स्वामी आत्मानंद एवं विवेकानंद विद्यालयों में 3,000 से अधिक पदों पर संविदा भर्ती प्रक्रिया भी जारी है।मंत्री श्री यादव ने बताया कि स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय एवं अन्य शासकीय संस्थाओं में शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक संविदा पदों की भर्ती के लिए राज्य स्तरीय ऑनलाइन कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) की शुरुआत की गई है। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय के 1,895 तथा स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय के 1,171, कुल 3,066 पदों पर संविदा भर्ती प्रक्रिया प्रचलित है। सीबीटी के माध्यम से भर्ती में पारदर्शिता और कम समय में परीक्षा परिणाम उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। 15 जुलाई 2024 से विद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू की गई। कक्षा 1 एवं 2 की हिंदी पुस्तकों में बारहखड़ी को शामिल किया गया। कक्षा 1 एवं 2 के लिए 16 स्थानीय तथा 4 अंतरराज्यीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों का निर्माण किया गया। कक्षा 1, 2, 3 एवं 6 के विषयों की एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों का अनुकूलन किया गया है। कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए सहायक वाचन सामग्री भी विकसित की गई है।श्री यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ भाषा-चित्रण (Language Mapping) करने वाला देश का पहला राज्य है। बस्तर संभाग में बच्चों की भाषा के कक्षा में उपयोग के लिए 2,700 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। सरगुजा संभाग में 2,368 शिक्षकों का प्रशिक्षण किया गया है। कक्षा 1 से 3 तक छत्तीसगढ़ी, गोंडी, हल्बी और सादरी को शिक्षा के माध्यम के अनुरूप पाठ्यपुस्तक निर्माण की प्रक्रिया जारी है।शिक्षामंत्री ने कहा कि शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और शैक्षणिक अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक एवं टीके एप्प के माध्यम से उपस्थिति व्यवस्था लागू की गई है। प्रतिदिन टीके एप्प के माध्यम से लगभग 85 प्रतिशत शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज हो रही है। अवकाश प्रबंधन पोर्टल, पेपरलेस कार्यप्रणाली एवं ऑनलाइन संपत्ति विवरण जैसी व्यवस्थाओं से प्रशासनिक कार्यों को अधिक सरल एवं पारदर्शी बनाया गया है। श्री यादव ने बताया कि कक्षा 1 से 10 तक के विद्यार्थियों को सत्र प्रारंभ होने से पूर्व पाठ्यपुस्तक उपलब्ध कराने की पहल से 45 लाख 33 हजार 261 विद्यार्थी लाभान्वित हुए। पाठ्यपुस्तकों के वितरण एवं सत्यापन के लिए स्कैनिंग व्यवस्था लागू की गई तथा हिंदी-अंग्रेजी के अतिरिक्त 16 बोलियों में पाठ्यपुस्तक प्रकाशन की पहल की गई। उन्होंने कहा कि निःशुल्क सरस्वती साइकिल योजना के अंतर्गत 1 लाख 62 हजार 827 बालिकाएं लाभान्वित हुईं। कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क गणवेश उपलब्ध कराया गया, जिससे 28 लाख 63 हजार 786 बच्चे लाभान्वित हुए।शिक्षामंत्री श्री यादव ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कक्षा 10वीं एवं 12वीं के परीक्षा परिणामों में लगभग 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। परीक्षा पूर्व समीक्षा, ब्लूप्रिंट निर्माण एवं अध्यापन, पालक-शिक्षक बैठकों तथा केंद्रीकृत परीक्षाओं के माध्यम से परीक्षा परिणाम सुधारने पर विशेष जोर दिया गया है।श्री यादव ने कहा कि प्रत्येक शनिवार विद्यार्थियों के लिए तनाव एवं भयमुक्त वातावरण में पठन-पाठन के साथ खेल, योग एवं व्यायाम, स्थानीय कला-संस्कृति, महापुरुषों की जयंती, तीज-त्योहार एवं ऐतिहासिक तिथियों से परिचित कराने वाली गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। भाषण, निबंध, गीत, कहानी एवं लोककथाओं के माध्यम से विद्यार्थियों के सतत विकास पर बल दिया जा रहा है।शिक्षामंत्री ने बताया कि विगत तीन वर्षों में 504 नवीन विद्यालयों की स्वीकृति दी गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 700 भवनविहीन विद्यालयों के लिए नवीन विद्यालयों का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2023 से 2026 के मध्य 2,583 नवीन अतिरिक्त कक्षों की स्वीकृति दी गई। विद्यालयों के शौचालय निर्माण एवं मरम्मत के लिए 52 करोड़ 39 लाख रूपए की राशि स्वीकृत की गई तथा 302 शौचालयों का निर्माण पूर्ण किया गया है।श्री यादव ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के भवन निर्माण एवं संचालन के लिए 100 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक विकासखंड में कम से कम एक स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इन विद्यालयों के माध्यम से विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।शिक्षामंत्री श्री यादव ने बताया कि नियत नेल्ला नार के अंतर्गत बस्तर संभाग के छह जिलों के 97 प्रतिशत ग्रामों में प्राथमिक शालाओं की स्थापना की गई है। द्विभाषीय पुस्तकों के माध्यम से बस्तर संभाग में 13,817 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। शिक्षकविहीन एवं एकल शिक्षकीय विद्यालयों में 573 शिक्षा दूतों के माध्यम से शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। 48 बंद विद्यालय पुनः खोले गए तथा 36 नवीन विद्यालय प्रारंभ किए गए हैं। श्री यादव ने बताया कि शिक्षा व्यवस्था की प्रभावी ऑनलाइन मॉनिटरिंग के लिए एआई आधारित विद्या समीक्षा केंद्र की स्थापना की गई है। इसके माध्यम से अधोसंरचना, भौतिक सुविधाओं, पीएम पोषण, भ्त्डप्ै एवं थ्स्छ सहित विभिन्न योजनाओं की निगरानी की जा रही है। कॉल सेंटर के माध्यम से शिक्षकों, पालकों, संकुल समन्वयकों एवं अधिकारियों से एक लाख से अधिक कॉल के जरिए फीडबैक लिया गया है। पाठ्यपुस्तक वितरण की बारकोड आधारित ट्रैकिंग से शासन को लगभग 40 करोड़ रूपए की बचत हुई है।शिक्षामंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों के लिए विद्यालयों के समीप आवासीय छात्रावास की सुविधा विकसित की जा रही है। प्रदेश में संचालित 156 आवासीय विद्यालय एवं छात्रावासों में 33,000 से अधिक बच्चे आवासीय सुविधा का लाभ ले रहे हैं। 13 जिलों में 40 पीवीटीजी छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 21 का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है।श्री यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत जनजातीय क्षेत्रों के समग्र एवं संतुलित विकास पर जोर दिया जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इन क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, विद्यालयीन अधोसंरचना एवं छात्रावास सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। 13 जिलों में 42 छात्रावासों की स्वीकृति दी गई है।प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए बताया गया कि स्कूल शिक्षा विभाग का निरंतर प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण एवं समान अवसर वाली शिक्षा उपलब्ध हो। इसके लिए शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता, पारदर्शी भर्ती एवं पदोन्नति, आधुनिक अधोसंरचना, बहुभाषी शिक्षा, डिजिटल तकनीक, विद्यार्थियों को आवश्यक शैक्षणिक सामग्री तथा जनजातीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच को प्राथमिकता दी जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग की इन पहलों का व्यापक उद्देश्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, समावेशी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाना है।
- -केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने सहयोग केंद्र में किया कार्यकर्ताओं से संवादरायपुर। भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में सहयोग केंद्र के माध्यम से कार्यकर्ता अपने आवेदनों को लेकर प्रदेश सरकार के मंत्रियों से संवाद कर उचित निराकरण पा रहे हैं। इसी कड़ी में आज सहयोग केंद्र में केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने कार्यकर्ताओं से संवाद किया एवं उनके आवेदनों, मांगो एवं समस्याओं को गंभीरता से सुना। इस दौरान सहयोग केंद्र में 55 से अधिक आवेदन आए एवं प्रदेश भर से 200 से अधिक कार्यकर्ता पहुंचे।केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने कहा कि सहयोग केंद्र के माध्यम से भाजपा कार्यकर्ता सरकार से अपनी मांगों एवं समस्याओं के निराकरण हेतु संपर्क कर रहे हैं और उन्हें उनके आवेदनों का निराकरण भी प्राप्त हो रहा है जिससे कार्यकर्ताओं में संगठन एवं सरकार के प्रति विश्वास नेता बढ़ी हुई है। इस दौरान सहयोग केंद्र में प्रदेश महामंत्री डॉ नवीन मार्कण्डेय एवं सहयोग केंद्र प्रभारी सच्चिदानंद उपासने मौजूद रहे।
- रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर के नेतृत्व में शुक्रवार को आदिवासी समाज के प्रमुख लोगों ने बालोद पुलिस अधीक्षक को पत्र सौंपकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सोशल मीडिया प्रमुख द्वारा लगातार जनजाति समाज को अपमानित और प्रताड़ित करने को लेकर एक शिकायत दर्ज कराई।भाजपा प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी और उसके नेता अब सोशल मीडिया के माध्यम से झूठ नैरेटिव फैलाकर जनता के बीच में सरकार की छवि को धूमिल करने एवं जनजाति समाज को अपमानित करने का काम कर रही है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने कांग्रेस एवं उसके नेताओं द्वारा फैलाए जा रहे झूठ एवं भ्रामक प्रचार के खिलाफ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।भाजपा प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को सोशल मीडिया पर बहुत ही अपमानजनक ढंग से पोस्ट किया है। देवलाल ठाकुर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सोशल मीडिया की राष्ट्रीय प्रमुख सुश्री सुप्रिया श्रीनेत की शह पर कांग्रेस की प्रदेश इकाई के प्रमुख ने यह पोस्ट कर प्रदेश के जनजाति समाज को अपमानित किया है। इससे हम समाज के लोग काफी आहत महसूस कर रहे हैं। भाजपा प्रतिनिधि मंडल ने इस कृत्य में दोषी कांग्रेस के सोशल मीडिया में राष्ट्रीय और प्रदेश मीडिया प्रमुख के विरुद्ध एससी-एसटी एक्ट समेत अन्य सुसंगत धारा के तहत अपराध पंजीबद्ध कर दोषियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की ताकि जनजाति समाज की अस्मिता अक्षुण्ण रहे। प्रतिनिधिमण्डल ने कांग्रेस पार्टी से इसके लिए माफी मांगने की मांग की, अन्यथा आदिवासी समाज कांग्रेस पार्टी के खिलाफ आंदोलन करेगा।इस दौरान सर्व आदिवासी समाज के अमाय नागवंशी, उपाध्यक्ष डोंडी हीरा ठाकुर, अध्यक्ष हल्बा आदिवासी समाज मोहन्तिन चोरका, अध्यक्ष हल्बा समाज निरंजन पटौदी , गॉड समाज तहसील उपाध्यक्ष डोमार नेताम, अध्यक्ष गोड़ समाज लोहारा जीवराखन भुआर्य, उपाध्यक्ष लोहारा हल्बा समाज मदन महला, सर्किल अध्यक्ष हल्बा समाज रूपेश नायक संजू मानकर, शिवराम सिन्द्रामे, साधना सोरी डोमेन्द्र टेकाम सहित बालोद जिला सर्व आदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे।



























