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- 0- एक माह में बैंकों ने स्वीकृत किए लगभग 49 करोड़ रुपए के ऋण, स्वरोजगार और उद्यमिता को मिला बढ़ावामोहला। सुशासन तिहार 2026 के उपलक्ष्य में जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में जिले के सभी बैंकों द्वारा शुक्रवार को आरसेटी भवन मानपुर में जिला स्तरीय मेगा क्रेडिट कैंप का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिला कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति, सीईओ जिला पंचायत श्रीमती भारती चंद्राकर, एसडीएम मानपुर श्री अमित योगी, सीईओ जनपद पंचायत मानपुर श्री मोहम्मद हनीस, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक श्री आर.के. गुप्ता, विभिन्न बैंकों के शाखा प्रबंधक, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में लाभार्थी एवं आम नागरिक उपस्थित रहे।कार्यक्रम के प्रारंभ में बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ मैनेजर एवं लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर श्री के.एम. सिंह ने मेगा क्रेडिट कैंप के आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सुशासन तिहार के दौरान इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोगों को बैंक ऋण योजनाओं के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें स्वरोजगार एवं उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए जिला कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ के मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त किया।उन्होंने जानकारी दी कि सुशासन तिहार 2026 के दौरान 1 मई से 28 मई 2026 तक जिले के विभिन्न बैंकों द्वारा कुल 48 करोड़ 99 लाख रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए हैं। इनमें किसान क्रेडिट कार्ड के अंतर्गत लगभग 39 करोड़ रुपये, स्वयं सहायता समूहों को सवा करोड़ रुपये, पीएमईजीपी योजना में 25 लाख रुपये, व्यक्तिगत ऋण के रूप में 5 करोड़ रुपये, मुद्रा योजना के तहत 3 करोड़ रुपये तथा एंटरप्राइज फाइनेंस के अंतर्गत 15 लाख रुपये के ऋण शामिल हैं।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति ने जिले के स्थानीय उत्पादों एवं संसाधनों पर आधारित व्यवसायों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं, महिलाओं और उद्यमियों को स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ श्रीमती भारती चंद्राकर ने अपने सहज एवं छत्तीसगढ़िया अंदाज में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए स्वरोजगार एवं व्यवसाय के लिए बैंक ऋण का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि शासकीय योजनाओं और बैंकिंग सुविधाओं का समुचित उपयोग कर लोग आर्थिक रूप से सशक्त बन सकते हैं।कार्यक्रम के समापन पर कलेक्टर ने मेगा क्रेडिट कैंप के सफल आयोजन के लिए जिले के सभी बैंकरों एवं संबंधित अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। मेगा क्रेडिट कैंप के माध्यम से जिले में वित्तीय समावेशन, स्वरोजगार और उद्यमिता को नई गति मिलने की उम्मीद जताई गई।
- महासमुंद. जिले में खाद भंडारण और वितरण की प्रक्रिया सुचारू रूप से जारी है। अब किसान खरीफ फसल की तैयारी में जुट चुके है। सहकारी समिति से किसान खाद का उठाव कर रहें हैं। उप संचालक कृषि, से प्राप्त जानकारी अनुसार सहकारी समिति में यूरिया 9589 टन, डीएपी 4128 टन, एमओपी 1887 टन, एसएसपी 5616 टन, एनपीके 3005 टन कुल 24225 टन उर्वरको का भण्डारण किया जा चुका है इसके अतिरिक्त जिला विपणन अधिकारी महासमुन्द के भण्डारण गृह में यूरिया 5931 टन, डीएपी 572 टन, एमओपी 795 टन, एसएसपी 1328 टन, एनपीके 90 टन कुल 8716 टन उर्वरकों का भण्डारण किया गया है।पूरे प्रदेश में कृषकों को खरीफ सीजन भर खाद की आपूर्ति कि जा सकें इस हेतु कृषि भूमि के रकबे वार अलग से व्यवस्था कि गई है जिसमें कृषक (2.5 एकड़ से कम) को एक मुश्त खाद वितरण, सीमांत कृषकों (2.5 एकड़ से 5 एकड़ तक) को दो किस्तो में (20 दिवस के अंतराल पर) खाद वितरण एवं दीर्घ कृषक (2.5 एकड़ से अधिक) को तीन किस्तो में (20 दिवस के अंतराल पर) उर्वरको का वितरण निजी एवं सहकारी दोनो क्षेत्रो में किया जावेगा। साथ ही कालाबाजारी, जमाखोरी व अधिक मूल्य पर उर्वरको के विक्रय पर अंकुश लगाने हेतु जिले भर में कृषि एवं राजस्व विभाग के संयुक्त दल द्वारा सतत् निगरानी का कार्य किया जा रहा है। जिले में अनियमित रूप से यूरिया वितरण करने पर 26 निजी उर्वरक विक्रेताओं के उर्वरक प्राधिकार पत्र 15 दिवस के लिये निलंबित किया जा चुका है एवं 4 फर्मों पर एफ.आई.आर. करने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। इसके अलावा तीन फर्मों के यहां पॉस एवं भौतिक स्टॉक में अंतर के कारण उर्वरक जप्ती की कार्यवाही की गई है।--
- बालोद. उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव आज जिला मुख्यालय बालोद स्थित राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य श्री यशवंत जैन के निवास स्थल पहुंचे। वहाँ उन्होंने श्री जैन की भाभी स्वर्गीय लक्ष्मी देवी जैन के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किया एवं शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त की।
- 0- 31 मई को मतदान दलों को किया जाएगा रवाना, सभी 15 मतदान केंद्रों पर महिला अधिकारी निभाएंगी दायित्व0- नगर पंचायत पलारी में पहली बार होगा निर्वाचन, सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक होगा मतदानबालोद. बालोद जिले के नगर पंचायत पलारी में नगर पालिका आम निर्वाचन 2026 के तहत अध्यक्ष और 15 पार्षदों के चुनाव के लिए प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस बार का निर्वाचन बेहद खास होने जा रहा है, क्योंकि पूरे नगर पंचायत में मतदान संपन्न कराने की कमान पूरी तरह से महिला मतदान कर्मियों के हाथों में सौंपी गई है।निर्वाचन को निष्पक्ष और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए नगर पंचायत के सभी 15 वार्डों में 15 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। खास बात यह है कि सभी केंद्रों के लिए पीठासीन अधिकारी से लेकर मतदान अधिकारी क्रमांक 1, 2 और 3 के पदों पर केवल महिला अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। चुनाव कार्य के लिए कुल 15 मुख्य मतदान दल गठित किए गए हैं, जबकि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 3 अतिरिक्त (रिजर्व) मतदान दलों को भी तैयार रखा गया है।नगर पंचायत पलारी में 01 जून को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान सम्पन्न होगा। पलारी नगर पंचायत में इस बार कुल 3,766 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। जिसमें 1,912 महिला मतदाता और 1854 पुरुष मतदाता शामिल हैं। सुरक्षा और सुव्यवस्थित मॉनिटरिंग के लिए पूरे 15 मतदान केंद्रों को 2 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। दोनों ही सेक्टरों में कानून व्यवस्था और सुचारू मतदान सुनिश्चित करने के लिए दो सेक्टर ऑफिसर तैनात किए गए हैं।निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार 31 मई 2026 को प्रातः 8:00 बजे से स्थानीय शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से मतदान सामग्री का वितरण शुरू किया जाएगा। सामग्री प्राप्त करने के बाद, प्रशासन द्वारा तैयार किए गए विशेष रूट चार्ट के अनुसार सभी मतदान दल अपने-अपने निर्धारित मतदान केंद्रों के लिए बसों और वाहनों के माध्यम से रवाना होंगे। प्रशासन ने सभी नागरिकों से शांतिपूर्ण और भारी संख्या में मतदान करने की अपील की है।
- -ग्रामीण और शहरी अंचलों में सुचारू उत्पाद आवाजाही के लिए मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क तैनातरायपुर ।देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs)—जिसमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) शामिल हैं—ने छत्तीसगढ़ राज्य में ईंधन की मांग में आए भारी उछाल के बीच अपने परिचालन और लॉजिस्टिक्स तालमेल को मजबूत किया है। इंडियन ऑयल के रायपुर मंडल कार्यालय के डिविजनल रिटेल सेल्स हेड (DRSH) एवं छत्तीसगढ़ के राज्य स्तरीय समन्वयक श्री नितिन चव्हाण द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 मई से 28 मई 2026 की अवधि के दौरान राज्य में हाई-स्पीड डीजल (HSD) की खुदरा बिक्री में व्यापक विकास देखा गया है, जिसमें विशेष रूप से 4 प्रमुख जिलों—बालोद (40.6%), बस्तर (35.2%), कोरिया (34.0%) और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (30.3%)—ने पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 30 प्रतिशत से अधिक की शानदार विकास दर हासिल की है। इसके साथ ही, 7 अन्य जिलों, जिनमें सक्ती (29%), राजनांदगांव (26.9%), सूरजपुर (23.5%), दुर्ग (23.5%), रायपुर (22.6%), कोंडागांव (20.9%) और कांकेर (20.3%) शामिल हैं, ने डीजल की बिक्री में 20 से 30 प्रतिशत के बीच जोरदार वृद्धि दर्ज की है, जबकि महासमुंद, बलौदाबाजार, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सारंगढ़-बिलाईगढ़, बीजापुर, सुकमा, सरगुजा, रायगढ़, बिलासपुर, जांजगीर और धमतरी सहित 11 जिलों में यह वृद्धि 10 से 20 प्रतिशत के दायरे में रही है; वहीं जांजगीर (13.1%), कांकेर (12.8%) और रायपुर (12.1%) जैसे जिलों में पेट्रोल की खुदरा बिक्री में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।ईंधन की मांग में इस निरंतर वृद्धि के पीछे कई महत्वपूर्ण स्थानीय और आर्थिक कारक जिम्मेदार हैं, जिनमें मुख्य रूप से ग्रामीण कृषि क्षेत्रों में चल रही सीजन की चरम जुताई, बुवाई और कटाई से जुड़ी गतिविधियां शामिल हैं। इसके साथ ही, क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र के रिटेल आउटलेट्स (पेट्रोल पंपों) और अन्य निजी तेल आपूर्तिकर्ताओं के बीच कीमतों में मौजूद स्पष्ट अंतर की वजह से भारी वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ताओं का रुझान बड़े पैमाने पर पीएसयू (PSU) आउटलेट्स की तरफ हुआ है, जिसने खुदरा मांग को नई ऊंचाई दी है। पेट्रोलियम उत्पादों के इस उच्च उठाव के बावजूद, बिक्री के ये मजबूत आंकड़े प्रमाणित करते हैं कि बिना किसी बड़े व्यवधान या स्थानीय किल्लत के पूरे छत्तीसगढ़ संभाग में ऑटोमोटिव ईंधन की निरंतर और निर्बाध आपूर्ति सफलतापूर्वक कायम रखी गई है।इस भारी लॉजिस्टिक्स आवश्यकता को पूरा करने के लिए, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां टर्मिनलों, डिपो, पाइपलाइनों, एलपीजी बॉटलिंग प्लांटों और खुदरा काउंटरों के अपने व्यापक देशव्यापी नेटवर्क के माध्यम से निरंतर आपूर्ति चक्र चला रही हैं। बाजारों में उत्पादों की सुचारू आवाजाही और समय पर पुनः आपूर्ति (रेपलीनिशमेंट) सुनिश्चित करने के लिए तेल कंपनियों की समर्पित आपूर्ति टीमें, परिवहन नेटवर्क और terminal संचालन इकाइयां चुनिंदा रिटेल आउटलेट्स के साथ मिलकर चौबीसों घंटे (24x7) काम कर रही हैं। तेल उद्योग इस संबंध में राज्य प्रशासन के साथ निरंतर सीधा और कड़ा समन्वय बनाए हुए है। तेल उद्योग के नेतृत्व ने समस्त उपभोक्ताओं को पुनः आश्वस्त किया है कि देश और राज्य में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध है और आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देते हुए अपना सामान्य खरीदारी व्यवहार बनाए रखें, घबराहट में आकर अनावश्यक भंडारण (पैनिक बाइंग) से बचें और सटीक जानकारी के लिए केवल अधिकृत एजेंसियों व तेल कंपनियों के आधिकारिक बयानों पर ही भरोसा करें।
- -ग्राम बेलदगी के जीत नारायण को मिला आयुष्मान कार्ड, अब 5 लाख रुपये तक के निःशुल्क उपचार की सुविधा-मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल से योजनाओं का लाभ पहुंच रहा सीधे ग्रामीणों के द्वाररायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ प्रदेश में सुशासन और जनकल्याण की नई मिसाल बन रहा है। इस अभियान के माध्यम से शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य को प्रभावी रूप से साकार किया जा रहा है। प्रशासन अब गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याओं का त्वरित निराकरण कर रहा है, जिससे आम नागरिकों को शासकीय सेवाओं और योजनाओं के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं।इसी क्रम में सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलदगी के निवासी श्री जीत नारायण सिंह को ‘सुशासन तिहार’ के तहत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में आयुष्मान कार्ड का लाभ प्राप्त हुआ। लंबे समय से आयुष्मान कार्ड नहीं बनने के कारण वे प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत मिलने वाली स्वास्थ्य सुरक्षा से वंचित थे। शिविर में आवेदन प्रस्तुत करने के बाद विभागीय अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर ही उनका आयुष्मान कार्ड बनाकर प्रदान किया।आयुष्मान कार्ड प्राप्त होने पर श्री जीत नारायण सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अब उनके परिवार को 5 लाख रुपये तक के निःशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होंने बताया कि पहले कार्ड नहीं बनने के कारण उन्हें भविष्य की स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन अब यह चिंता समाप्त हो गई है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी राहत यह रही कि उन्हें किसी कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़े और गांव में ही उनकी समस्या का समाधान हो गया।श्री सिंह ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘सुशासन तिहार’ आम नागरिकों के लिए अत्यंत उपयोगी पहल साबित हो रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ आसानी से मिल रहा है और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित हो रहा है।उल्लेखनीय है कि ‘सुशासन तिहार’ के माध्यम से प्रदेशभर में जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित कर पात्र हितग्राहियों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित किया जा रहा है। यह अभियान शासन और जनता के बीच संवाद को मजबूत करने के साथ-साथ सेवा, संवेदनशीलता और सुशासन की भावना को भी सशक्त बना रहा है।
- -ग्राम बेलदगी की हितग्राही को मिला राशन कार्ड, खाद्य सुरक्षा की चिंता हुई दूर-तीन बच्चों के परिवार को मिला राहत का संबल, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति जताया आभाररायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ प्रदेश के जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। जनसमस्या निवारण शिविरों के माध्यम से शासन की योजनाओं का लाभ अब सीधे ग्रामीणों तक पहुंच रहा है, जिससे वर्षों से लंबित समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित हो रहा है। सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलदगी की निवासी श्रीमती सीतारानी इसकी एक प्रेरक उदाहरण हैं, जिनकी खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंता ‘सुशासन तिहार’ के माध्यम से दूर हुई।श्रीमती सीतारानी लंबे समय से राशन कार्ड नहीं होने के कारण शासन की खाद्य सुरक्षा योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रही थीं। तीन छोटे बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी के बीच परिवार को राशन जुटाने में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार के लिए नियमित खाद्यान्न की व्यवस्था करना भी चुनौती बन गया था।गांव में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ के जनसमस्या निवारण शिविर में सीतारानी ने अपनी समस्या प्रशासन के समक्ष रखी। आवेदन प्राप्त होते ही संबंधित अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पात्रता का परीक्षण किया और बिना किसी विलंब के उनका नया राशन कार्ड जारी कर दिया। राशन कार्ड प्राप्त होने के साथ ही उनके परिवार की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हो गई।राशन कार्ड मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए श्रीमती सीतारानी ने कहा कि अब उनके परिवार को नियमित रूप से राशन प्राप्त होगा, जिससे बच्चों के पालन-पोषण और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि पहले राशन कार्ड नहीं होने के कारण परिवार को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब उनकी चिंता समाप्त हो गई है।श्रीमती सीतारानी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘सुशासन तिहार’ जैसी पहल से ग्रामीण क्षेत्रों के जरूरतमंद परिवारों को समय पर सहायता मिल रही है और लोगों की समस्याओं का समाधान उनके गांव में ही हो रहा है।उल्लेखनीय है कि ‘सुशासन तिहार’ के माध्यम से प्रदेशभर में शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया जा रहा है। यह अभियान सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जनसेवा की भावना को मजबूत करते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने का कार्य कर रहा है।
- -शहीदी दिवस पर गुरुद्वारा तेलीबांधा में आयोजित विशाल छबील एवं छायाचित्र प्रदर्शनी में हुए शामिलरायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज श्री गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के तेलीबांधा स्थित गुरुद्वारा परिसर में छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज द्वारा आयोजित विशाल छबील एवं छायाचित्र प्रदर्शनी में शामिल होकर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया और उनके महान बलिदान को मानवता, सत्य तथा सेवा की रक्षा का अमर संदेश बताया।इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने राहगीरों को शरबत एवं प्रसादी वितरित कर सेवा परंपरा में सहभागी बनते हुए समाज को परोपकार, संवेदना और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान सिक्ख समाज ने मुख्यमंत्री को पगड़ी पहनाकर आत्मीय स्वागत किया।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने गुरुद्वारा परिसर में आयोजित श्री गुरु अर्जुन देव जी के जीवन पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। प्रदर्शनी में उनके दिव्य जन्म से लेकर शहादत तक की प्रेरक और गौरवपूर्ण यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया था। इसमें गुरु गद्दी की प्राप्ति, हरमिंदर साहिब गुरुद्वारा के निर्माण, आदि ग्रंथ साहिब के संकलन, जहांगीर से वैचारिक संघर्ष, गिरफ्तारी, असहनीय यातनाओं के बीच अडिग आस्था का विस्तृत चित्रण शामिल था।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्री गुरु अर्जुन देव जी त्याग, तपस्या, सत्य, सेवा और मानवता की महान प्रतिमूर्ति थे। उनका संपूर्ण जीवन समाज को प्रेम, समानता, करुणा, समर्पण और मानव कल्याण का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कहा कि गुरु अर्जुन देव जी ने अन्याय, अत्याचार और दमन के सामने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। असहनीय यातनाओं के बावजूद उनका धैर्य, साहस, आत्मबल और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास आज भी संपूर्ण मानवता के लिए अमर प्रेरणा का स्रोत है।मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदी दिवस पर आयोजित ‘छबील सेवा’ केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि सेवा, करुणा, भाईचारे और मानवता की जीवंत अभिव्यक्ति है। भीषण गर्मी के बीच राहगीरों को ठंडा और मीठा शरबत पिलाना निस्वार्थ मानव सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सिक्ख परंपरा में छबील सेवा मानवता के प्रति समर्पण, सह-अस्तित्व और परोपकार की भावना को जीवंत बनाए रखने का माध्यम रही है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज द्वारा आयोजित छायाचित्र प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि यह नई पीढ़ी को श्री गुरु अर्जुन देव जी के जीवन, संघर्ष, आध्यात्मिक चेतना और महान बलिदान से परिचित कराने का अत्यंत सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि इतिहास तभी जीवंत रहता है, जब नई पीढ़ी अपने महापुरुषों के विचारों, मूल्यों और त्याग से जुड़ी रहती है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सभी लोगों से गुरु अर्जुन देव जी के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने तथा सत्य, सेवा, सद्भाव और मानव कल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने इस गरिमामय एवं पुनीत आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज को साधुवाद भी दिया।इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव सहित छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज के पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
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-मुख्यमंत्री के निर्देश पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने ली जानकारी, परिजनों को हर संभव सहायता का दिया भरोसा
रायपुर ।छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को देश-दुनिया में प्रतिष्ठित करने वाली सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका एवं पद्मविभूषण से सम्मानित श्रीमती तीजन बाई के अस्वस्थ होने की सूचना पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने तत्काल पहल की। उन्होंने अपने सहयोगी को एम्स रायपुर भेजकर पद्मविभूषण श्रीमती तीजन बाई के स्वास्थ्य की जानकारी ली।मंत्री श्री अग्रवाल ने दूरभाष पर तीजन बाई के परिजनों से चर्चा कर उनका हालचाल जाना और भरोसा दिलाया कि राज्य शासन उनकी चिकित्सा एवं आवश्यक सहायता के लिए पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ खड़ा है। उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि उपचार संबंधी हर संभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।श्री अग्रवाल ने कहा कि तीजन बाई केवल लोक कलाकार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना और लोक परंपराओं की जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने अपनी अद्भुत गायन शैली, प्रभावशाली प्रस्तुति और लोककला के प्रति समर्पण से पंडवानी को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है। उनके योगदान ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।एम्स रायपुर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में पद्मविभूषण श्रीमती तीजन बाई का उपचार जारी है। चिकित्सकों की सतत निगरानी और बेहतर चिकित्सा प्रबंधन के चलते उनके स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर रख रही है और आवश्यक उपचार दे रही है।मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा की पद्मविभूषण श्रीमती तीजन बाई ने अपनी अनुपम कला साधना से न केवल पंडवानी परंपरा को संरक्षित किया, बल्कि नई पीढ़ी को लोक संस्कृति से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण कार्य किया है। उनकी उपलब्धियां और कला यात्रा देशभर के कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने लोककला को जिस ऊंचाई तक पहुंचाया है, वह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है।मंत्री श्री अग्रवाल ने ईश्वर से उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और पूर्ण स्वस्थ होने की कामना की और कहा कि पूरा छत्तीसगढ़ आज उनकी कुशलता के लिए प्रार्थना कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि अपनी अदम्य इच्छाशक्ति और चिकित्सकों के प्रयासों से श्रीमती तीजन बाई जल्द स्वस्थ होकर पुनः अपनी कला के माध्यम से लोगों को प्रेरित करेंगी। -
-मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान
-227 ग्रामीणों की हुई स्वास्थ्य जांचदंतेवाड़ा । मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत दंतेवाड़ा जिले के दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार सक्रिय है। कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव के निर्देशानुसार स्वास्थ्य विभाग की टीम बैलाडीला के पहाड़ी क्षेत्र में स्थित सुदूर ग्राम बड़ेपल्ली पहुंची, जहां पहुंचने के लिए टीम को लगभग 13 किलोमीटर का कठिन पहाड़ी मार्ग पैदल तय करना पड़ा। घने जंगलों, ऊबड़-खाबड़ रास्तों और दुर्गम पहाड़ियों को पार करते हुए स्वास्थ्य कर्मियों ने गांव तक पहुंचकर ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराईं। अभियान का उद्देश्य ऐसे पहुंचविहीन क्षेत्रों में निवासरत लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाओं और शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाना है, जहां सामान्य परिस्थितियों में चिकित्सा सेवाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती हैं।स्वास्थ्य शिविर के दौरान ग्राम बड़ेपल्ली में कुल 227 ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की गई। शिविर में लोगों की विभिन्न प्रकार की आवश्यक जांचें की गईं, जिनमें मलेरिया, सिकल सेल, हीमोग्लोबिन, मधुमेह (शुगर), रक्तचाप सहित अन्य आवश्यक लैब परीक्षण शामिल रहे। जांच के माध्यम से कई मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन कर उन्हें आवश्यक उपचार एवं परामर्श प्रदान किया गया। शिविर में गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया गया। गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच के साथ बच्चों का टीकाकरण भी किया गया। जांच के दौरान एक उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला की पहचान की गई, जिसे बेहतर उपचार एवं सुरक्षित प्रसव के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया। वहीं हाइपरटेंशन और डायबिटीज से पीडि़त 12 मरीजों को आगे के उपचार हेतु उच्च स्वास्थ्य केंद्रों में भेजा गया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी जरूरतमंद ग्रामीणों को निशुल्क दवाइयों का वितरण किया गया। साथ ही ग्रामीणों को स्वास्थ्य शिक्षा, पोषण, स्वच्छता और विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों के बारे में जानकारी दी गई। शिविर के दौरान आयुष्मान भारत योजना के तहत मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं एवं आयुष्मान कार्ड के लाभों की जानकारी भी ग्रामीणों को दी गई। स्वास्थ्य कर्मियों ने ग्रामीणों को शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करते हुए सुरक्षित मातृत्व के महत्व को समझाया।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अजय रामटेके ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के माध्यम से जिले के सुदूर एवं दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल रहा है। अभियान के तहत गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों की समय पर पहचान कर उन्हें जिला अस्पताल तथा आवश्यकता पड़ने पर रायपुर स्थित उच्च चिकित्सा संस्थानों तक उपचार के लिए भेजा जा रहा है।उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार ऐसे गांवों तक पहुंच रही हैं, जहां पहले स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सीमित थी। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान न केवल ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अभियान से दूरस्थ अंचलों के लोगों में विश्वास बढ़ा है और उन्हें घर के समीप स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल रहा है। - -1 जून तक जमा किए जा सकते है आवेदनदंतेवाड़ा । छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेश 2016 के प्रावधानों के तहत विकासखंड कुआकोण्डा एवं नगरपालिका बड़े बचेली क्षेत्र में शासकीय उचित मूल्य दुकानों के आबंटन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इसके लिए पात्र महिला स्व सहायता समूहों, ग्राम पंचायतों, सेवा सहकारी समितियों एवं अन्य पात्र संस्थाओं से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। जारी सूचना के अनुसार विकासखण्ड कुआकोण्डा अंतर्गत नवीन ग्राम पंचायत मुलेर, मड़कामीरास एवं बड़ेहड़मामुण्डा में शासकीय उचित मूल्य दुकानों का आबंटन किया जाना है। वहीं नगरपालिका बड़े बचेली क्षेत्र में शासकीय उचित मूल्य दुकान आईडी क्रमांक 611002002 के संचालन हेतु भी पात्र संस्थाओं का चयन किया जाएगा। इच्छुक संस्थाओं को निर्धारित प्रारूप में आवेदन पत्र के साथ संस्था का पंजीयन प्रमाण पत्र, विगत एक वर्ष का बैंक खाता विवरण, संस्था का प्रस्ताव, अध्यक्ष, प्रबंधक एवं सचिव के आधार कार्ड की छायाप्रति तथा उपविधि की प्रति संलग्न कर प्रस्तुत करना होगा। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 1 जून 2026 निर्धारित की गई है। सभी आवेदन संबंधित कार्यालय में शाम 5 बजे तक जमा किए जा सकेंगे। निर्धारित समय सीमा के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने संबंधित क्षेत्रों के सभी पात्र महिला स्व सहायता समूहों एवं संस्थाओं से समय अवधि के भीतर आवेदन प्रस्तुत कर इस अवसर का लाभ उठाने की अपील की है।
- -मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा - हर जरूरतमंद परिवार को सम्मानजनक पक्का आवास उपलब्ध कराना हमारी सरकार की प्राथमिकता-प्रतिदिन 1600 से अधिक पक्के आवास निर्माण, ढाई वर्षों में 10.60 लाख से अधिक घर पूर्ण-महिला स्व-सहायता समूहों की दीदियां बनीं आत्मनिर्भर, 10 हजार से अधिक समूह निर्माण कार्य से जुड़ेरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के प्रभावी क्रियान्वयन को नई गति मिली है। राज्य शासन द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत आवास निर्माण कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से राज्य के सभी जिलों को 2677.15 करोड़ रुपए की केंद्रीय एवं राज्यांश राशि जारी की गई है। यह राशि एसएनए स्पर्श (SNA SPARSH) मॉड्यूल के माध्यम से जिलों को आवंटित की गई है, ताकि पात्र हितग्राहियों के आवास निर्माण कार्य समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरे किए जा सकें।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में “हर गरीब को पक्का घर” का संकल्प छत्तीसगढ़ में तेजी से साकार हो रहा है। हमारी सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि प्रदेश का कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित न रहे। पक्का घर केवल चार दीवारें नहीं, बल्कि एक परिवार के सम्मान, सुरक्षा, स्थायित्व और बेहतर भविष्य की मजबूत नींव है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत आवास निर्माण का कार्य तेजी से संचालित किया जा रहा है। राज्य में प्रतिदिन 1600 से अधिक पक्के आवासों का निर्माण किया जा रहा है तथा विगत ढाई वर्षों में 10.60 लाख से अधिक आवास पूर्ण कराए जा चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में ही 6 लाख से अधिक आवासों का निर्माण कर छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों गरीब परिवारों के सपनों, आत्मसम्मान और सुरक्षित जीवन की कहानी है।मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जारी राशि का उपयोग प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के दिशा-निर्देशों के अनुरूप करते हुए पात्र हितग्राहियों के आवास शीघ्र पूर्ण कराए जाएं, ताकि प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को समय पर सुरक्षित एवं सम्मानजनक पक्का आवास उपलब्ध कराया जा सके।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि योजना के क्रियान्वयन में महिला स्व-सहायता समूहों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। प्रदेश में 10 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों की दीदियां निर्माण सामग्री आपूर्ति कार्य से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं और “लखपति दीदी” बनने की दिशा में आगे बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला सशक्तीकरण, आजीविका संवर्धन और सामाजिक परिवर्तन का भी माध्यम बन रही है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल प्रभावित परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए भी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। ऐसे परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराकर उनके जीवन में सुरक्षा, स्थायित्व और विश्वास का नया वातावरण तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नवाचार के तहत 1.5 लाख से अधिक आवासों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित किया गया है, जिससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है। साथ ही हितग्राहियों की शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-233-1290 संचालित की जा रही है तथा योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायतों में क्यूआर कोड भी प्रदर्शित किए गए हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार सुशासन, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
- -अनियमितता पर 29 को नोटिस और 06 केंद्रों पर विक्रय प्रतिबंधमुंगेली। कलेक्टर कुन्दन कुमार के निर्देशानुसार किसानों को उचित दर पर खाद उपलब्ध कराने तथा खाद की कालाबाजारी व अनियमितता रोकने के लिए निजी एवं सहकारी उर्वरक विक्रय केंद्रों का लगातार औचक निरीक्षण किया जा रहा है। इसी तारतम्य में कृषि विभाग के उर्वरक निरीक्षकों द्वारा अब तक जिले के 90 से अधिक उर्वरक विक्रय प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया जा चुका है। निरीक्षण के दौरान अनियमितता पाए जाने पर 29 कृषि केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, वहीं गंभीर लापरवाही पाए जाने पर 06 विक्रय केंद्रों पर तत्काल प्रभाव से विक्रय प्रतिबंध की कार्रवाई की गई है।उपसंचालक वीणा ठाकुर ने बताया कि निरीक्षण के दौरान खाद के भंडारण, वितरण, रेट सूची, पॉश मशीन के उपयोग तथा किसानों को निर्धारित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने की स्थिति का जायजा लिया गया। इस दौरान सभी विक्रय केंद्रों को निर्देशित किया गया कि किसानों को संतुलित मात्रा में और शासन द्वारा निर्धारित दर पर ही खाद वितरित किया जाए। साथ ही किसानों को खाद की कमी संबंधी किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान नहीं देने तथा रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ नील हरित शैवाल, हरी खाद एवं नैनो उर्वरकों के उपयोग करने समझाइश दी गई। इन वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और फसल उत्पादन में भी वृद्धि होगी।
- -सेमी पत्ते के रस से उभरते हैं सदियों पुराने अक्षर, रायगढ़ में सुरक्षित है नाड़ी विज्ञान और आयुर्वेद का अद्भुत ज्ञान भंडाररायपुर। आधुनिक तकनीक और डिजिटल युग के बीच भारत की हजारों वर्ष पुरानी ज्ञान परंपरा आज भी ताड़ पत्रों में जीवंत है। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में संरक्षित दुर्लभ ताड़ पत्र पांडुलिपियां न केवल आयुर्वेद और नाड़ी विज्ञान की विलक्षण विरासत को संजोए हुए हैं, बल्कि भारतीय चिकित्सा परंपरा के उस अद्भुत अध्याय को भी सामने लाती हैं, जिसने सदियों तक मानव जीवन को दिशा दी। इन पांडुलिपियों की सबसे अनोखी विशेषता यह है कि इनमें लिखे अक्षर सामान्य आंखों से दिखाई नहीं देते। सेमी के पत्तों के रस के प्रयोग से प्राचीन अक्षर उभरकर स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं। भारत सरकार द्वारा संचालित ‘ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ के अंतर्गत रायगढ़ जिला प्रशासन इन अमूल्य धरोहरों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। प्रशासन की टीम जिले में विभिन्न स्थानों पर संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उन्हें संरक्षित करने में जुटी है। इसी क्रम में टीम रायगढ़ के कोतरा रोड स्थित उस स्थान तक पहुंची, जहां प्रख्यात नाड़ी वैद्याचार्य स्वर्गीय पंडित विश्वनाथ मिश्रा से जुड़ी दुर्लभ ताड़ पत्र पांडुलिपियां आज भी सुरक्षित रखी गई हैं। स्वर्गीय पंडित विश्वनाथ मिश्रा अपने समय के प्रसिद्ध नाड़ी वैद्याचार्य थे। वे रायगढ़ रियासत के राजा चक्रधर सिंह के नवरत्नों में शामिल थे तथा राजकीय वैद्य के रूप में अपनी सेवाएं देते थे। कहा जाता है कि वे इन्हीं ताड़ पत्र पांडुलिपियों के आधार पर लोगों की नाड़ी जांच कर रोगों का उपचार करते थे। इन पांडुलिपियों को आज भी उनके परिवार द्वारा अत्यंत सावधानी और श्रद्धा के साथ सुरक्षित रखा गया है। पंडित विश्वनाथ मिश्रा के सुपुत्र श्री पीतांबर मिश्रा ने बताया कि ये पांडुलिपियां पूर्णतः आयुर्वेद और नाड़ी विज्ञान से संबंधित हैं तथा उडि़या भाषा में लिखी गई हैं। उन्होंने कहा कि इन ताड़ पत्रों पर अंकित अक्षर सामान्य रूप से दिखाई नहीं देते। इन्हें पढ़ने की एक विशिष्ट पारंपरिक पद्धति है, जिसमें ताड़ पत्रों पर सेमी के पत्ते का रस लगाया जाता है। इसके बाद सदियों पुराने अक्षर स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आते हैं। लगभग दो सौ ताड़ पत्रों को इसी विधि से तैयार किया गया है।श्री पीतांबर मिश्रा ने बताया कि उनके पूर्वजों द्वारा तैयार किया गया यह ज्ञान भंडार केवल परिवार की धरोहर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और चिकित्सा विज्ञान की अमूल्य संपत्ति है। परिवार के सदस्य श्री सत्येंद्र मिश्रा एवं श्री राजेंद्र कुमार मिश्रा वर्षों से इन पांडुलिपियों को संरक्षित करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ताड़ पत्रों में संरक्षित यह ज्ञान भारतीय आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान, सांस्कृतिक इतिहास और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति का जीवंत दस्तावेज है। इनका संरक्षण केवल अतीत को सहेजने का प्रयास नहीं, बल्कि आने वाली पीढि़यों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।उल्लेखनीय है कि ‘ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ का उद्देश्य देशभर में बिखरी प्राचीन पांडुलिपियों की खोज, संरक्षण, डिजिटलीकरण और अध्ययन को बढ़ावा देना है। यह अभियान भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, चिकित्सा विज्ञान, दर्शन, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।रायगढ़ जिला प्रशासन द्वारा इस अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि जिले में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों को सुरक्षित रखा जा सके तथा उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके। प्रशासन की यह पहल न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि आने वाली पीढि़यों के लिए ज्ञान और इतिहास का अमूल्य खजाना भी सिद्ध होगी।
- -कम लागत, बेहतर उत्पादन और मिट्टी की सुरक्षा का नया विकल्प : नैनो उर्वरक-वैज्ञानिक खेती की ओर बढ़ते कदम, नैनो उर्वरकों से किसानों को मिल रहा फायदा-नैनो यूरिया और नैनो डीएपी से खेती में बचत, उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावारायपुर /खेती में बढ़ती लागत, मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से पैदा हो रही चुनौतियों के बीच अब नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए एक उपयोगी और लोकप्रिय विकल्प बन गई है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि किसान संतुलित और वैज्ञानिक तरीके से इनका उपयोग करें तो इससे खेती की लागत कम करने, उत्पादन बेहतर बनाने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाए रखने के लिए उर्वरकों के उपयोग के तौर-तरीकों में बदलाव जरूरी होगा। यही कारण है कि अब किसानों के बीच नैनो उर्वरकों को लेकर रुचि बढ़ रही है।छत्तीसगढ़ सहित देश के अधिकांश धान उत्पादक क्षेत्रों में सामान्यतः प्रति एकड़ 2 से 3 बोरी यूरिया और 1 बोरी डीएपी का उपयोग किया जाता है।मौजूदा कीमतों के अनुसार एक बोरी यूरिया की कीमत लगभग 270 रुपये और एक बोरी डीएपी की कीमत लगभग 1350 रुपये है। इस प्रकार केवल यूरिया और डीएपी पर प्रति एकड़ करीब 1900 से 2200 रुपये तक खर्च हो जाता है।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया की एक बोतल का प्रभाव लगभग एक बोरी पारंपरिक यूरिया के बराबर माना जाता है। फसल में दो चरणों में छिड़काव के जरिए पारंपरिक यूरिया की जरूरत को काफी हद तक कम किया जा सकता है।यदि किसान 2 बोरी ठोस यूरिया की जगह 2 बोतल नैनो यूरिया का उपयोग करते हैं तो अनुमानित खर्च 100 रुपये प्रति एकड़ बचत होती है। दो बोरी पारंपरिक यूरिया का मूल्य लगभग 540 रुपये है। इसके स्थान पर 2 बोतल नैनो यूरिया| लगभग 450-500 में आता है। यानि सीधे खाद लागत में बचत के साथ-साथ परिवहन, भंडारण और मजदूरी खर्च में भी कमी आती है।इसी प्रकार कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि 50 किलो डीएपी की पूरी मात्रा उपयोग करने के बजाय यदि किसान 25 किलो डीएपी के साथ 500 मिली नैनो डीएपी का उपयोग करें तो प्रति एकड़ लगभग 75 से 150 रुपये तक की बचत होती है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार पारंपरिक यूरिया का बड़ा हिस्सा मिट्टी, पानी और वातावरण में नष्ट हो जाता है। इसके विपरीत नैनो यूरिया के सूक्ष्म कण सीधे पौधों द्वारा तेजी से अवशोषित किए जाते हैं। इससे पौधों को संतुलित पोषण मिलता है।विशेषज्ञों के मुताबिक संतुलित उपयोग की स्थिति में इसके कई सकारात्मक परिणाम सामने आए है।फसल की बढ़वार बेहतर होती है। पौधों की हरियाली लंबे समय तक बनी रहती है। दानों का भराव मजबूत होता है।उत्पादन की गुणवत्ता सुधरती है। उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ती है। कई कृषि परीक्षणों में 5 से 8 प्रतिशत तक उत्पादन वृद्धि के संकेत भी मिले हैं।कृषि क्षेत्र के जानकार बताते हैं कि लगातार अधिक मात्रा में रासायनिक खाद के उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। नैनो उर्वरकों का संतुलित उपयोग मिट्टी में पोषक तत्वों के संतुलन को बनाए रखने में मदद कर सकता है। इसके अलावा रासायनिक अवशेष कम होते हैं।भूजल प्रदूषण घटता है।मिट्टी की जैविक सक्रियता बेहतर बनी रहती है।पर्यावरणीय प्रभाव कम होता है।इसी कारण वैज्ञानिक खेती में अब संतुलित उर्वरक उपयोग पर अधिक जोर दिया जा रहा है ।वैज्ञानिक सलाह के अनुसार संतुलित रूप से नैनो उर्वरकों का उपयोग बढ़ाते हैं तोआयातित उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी है।विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी। देश में उर्वरक उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। उत्पादन इकाइयों में रोजगार बढ़ेगा। कृषि क्षेत्र आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ेगा।कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश में पारंपरिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है और किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। रायपुर जिले की समितियों में वर्तमान मे यूरिया की उपलब्धता 9,102 मीट्रिक टन और कुल भंडारित यूरिया की मात्रा 10,732 मीट्रिक टन है, जब कि डीएपी की उपलब्धता 3,092 मीट्रिक टन और कुल भंडारित डीएपी की मात्रा 3,927 मीट्रिक टन है। इसके साथ ही कृषि सेवा केंद्रों और समितियों के माध्यम से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की उपलब्धता भी बढ़ाई जा रही है ताकि किसान आवश्यकता और उपयोगिता के आधार पर इन विकल्पों का इस्तेमाल कर सकें।कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वैज्ञानिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग और आधुनिक तकनीकों का समन्वय ही खेती को अधिक लाभकारी बनाएगा। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी विकल्प माना जा रहा है, जो कम लागत, बेहतर उत्पादन और मिट्टी की सुरक्षा तीनों मोर्चों पर किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
- - राजनांदगाँव जिले में कुल 41509 मीट्रिक टन खाद उपलब्ध, विगत वर्ष की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक- जिले में 6036 क्विंटल बीज उपलब्ध- उर्वरकों के कालाबाजारी, जमाखोरी एवं अनियमिताओं को रोकने के लिए लगातार की जा रही कार्रवाईरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर कलेक्टर राजनांदगाँव श्री जितेन्द्र यादव के मार्गदर्शन में खरीफ सीजन में खेती-किसानी को ध्यान में रखते हुए किसानों को समय पर खाद-बीज का वितरण किया जा रहा है ।कलेक्टर ने कृषि अधिकारियों को कहा है कि किसानों को खाद-बीज के लिए किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष खरीफ में धान सहित दलहन-तिलहन फसलों में परम्परागत खाद के साथ वैकल्पिक खाद एवं नैनो यूरिया व डीएपी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए समितियों एवं निजी क्षेत्रों में खरीफ पूर्व तैयारी के दृष्टि से वर्ष हेतु 68690 मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा गया है। जिले में सहकारी एवं निजी क्षेत्र को मिलाकर जिले में कुल 41509 मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है। जिसमें 17153 मीट्रिक टन यूरिया, 4088 मीट्रिक टन डीएपी, 10129 मीट्रिक टन एनपीके, 3382 मीट्रिक टन एमओपी एवं 6757 मीट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट खाद उपलब्ध है, जो गत वर्ष इसी अवधि की तुलना से 34 प्रतिशत अधिक है।उप संचालक कृषि श्री टीकम सिंह ठाकुर ने बताया कि सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को लगातार खाद वितरण किया जा रहा है। जिले में 14972 किसानों को खाद प्रदाय किया जा चुका हैं। जिसमें 7193 मीट्रिक टन यूरिया, 1807 मीट्रिक टन डीएपी, 4669 मीट्रिक टन एनपीके, 1322 मीट्रिक टन एमओपी एवं 2214 मीट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट खाद किसानों को आगामी खरीफ फसलों हेतु वितरण किया जा चुका है तथा समितियों में 4568 मीट्रिक टन यूरिया, 1032 मीट्रिक टन डीएपी, 3082 मीट्रिक टन एनपीके, 1364 मीट्रिक टन एमओपी एवं 1350 मीट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट उर्वरक उपलब्ध है।किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त बीज प्राप्त हो सके इस हेतु 13980 क्विंटल का लक्ष्य रखा गया है। लक्ष्य के विरूद्ध जिले में 6036 क्विंटल बीज, बीज निगम में उपलब्ध है। जिसमें से 3201 क्विंंटल का समितियों में भंडारण कराकर 1085 क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया जा चुका है। निरंतर समितियों के मांग अनुरूप जिला विपणन अधिकारी एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित से समन्वय स्थापित कर भंडारण किया जा रहा है। साथ ही किसानों को शासन द्वारा प्रदाय दिशा-निर्देशानुसार 80 प्रतिशत यूरिया एवं 60 प्रतिशत डीएपी के आधार पर वितरण समितियों के माध्यम से कराया जा रहा है। उर्वरकों के कालाबाजारी, तस्करी, डायवर्सन, जमाखोरी आदि अनियमिताओं को रोकने के लिए जिला एवं विकासखंड स्तरीय उडऩदस्ता टीम का गठन किया गया हैं। टीम द्वारा निरंतर उर्वरक विक्रय केन्द्रों का निरीक्षण किया जा रहा हैं। निरीक्षण के दौरान अनियमितता पाये जाने पर अब तक 28 विक्रय केन्द्रों को नोटिस, 7 विक्रय केन्द्रों में भंडारित उर्वरक मात्रा को जप्ती करते हुए सील बंद की कार्रवाई की गई है। साथ ही 5 निजी विक्रय केन्द्रों के लाईसेंस का निलंबन भी किया गया है। कृषि विभाग द्वारा जिले में निरंतर विक्रय केन्द्रों का निरीक्षण किया जा रहा है और आगे भी नियमों का उल्लंघन पाये जाने पर केन्द्रों के विरूद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
- -किसान चोवाराम एवं बेनीराम ने खाद, बीज के वितरण की व्यवस्था की सराहना कीरायपुर। केन्द्र व राज्य सरकार के द्वारा खरीफ वर्ष 2026 के लिए किसानों को समुचित मात्रा में खाद, बीज की उपलब्धता सुनिश्चित कराने हेतु की गई व्यवस्था के तहत बालोद जिले के सहकारी समितियों में नियमित रूप से जिले के कृषकों को नियमित रूप से खाद, बीज का वितरण किया जा रहा है। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार जिले के सभी सहकारी समितियों में शासन द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों के आधार पर किसानों को समुचित मात्रा में खाद, बीज की भण्डारण के साथ-साथ वितरण हेतु भी पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए गए हैं। बालोद जिले में खाद, बीज की समुचित वितरण हेतु की गई व्यवस्था की सराहना जिले के कृषकों ने भी की है। आगामी खरीफ सीजन हेतु समुचित मात्रा में खाद, बीज उपलब्ध होने पर गुरूर विकासखण्ड के ग्राम फागुनदाह निवासी कृषक श्री चोवाराम एवं ग्राम पेण्डरवानी निवासी श्री बेनीराम साहू ने व्यवस्था की सराहना करते हुए इसे किसानों के लिए हितकर बताया है।समय पर खाद, बीज मिलने से बहुत ही प्रसन्नचित नजर आ रहे किसान श्री चोवाराम ने बताया कि कुल 02 एकड़ भूमि वाले एक लघु कृषक है। श्री चोवाराम ने कहा कि उन्होंने एक सप्ताह पहले अपने ग्राम फागुनदाह के सहकारी समिति में पहुँचकर दो बाॅटल नैनो डीएपी, एक बाॅटल युरिया के साथ-साथ दो बोरी युरिया एवं एक बोरी सुपरफास्फेट खाद प्राप्त किया है। उन्होंने बताया कि सहकारी समितियों में की गई बेहतर व्यवस्था के फलस्वरूप उन्हें खाद, बीज प्राप्त करने में किसी भी प्रकार की असुविधा नही हुई। इसी तरह जिले में खाद, बीज की वितरण की व्यवस्था की सराहना गुरूर विकासखण्ड के ग्राम पेण्डरवानी के कृषक श्री बेनीराम ने भी किया है। किसान श्री बेनीराम ने बताया कि वे कुल 20 एकड़ जमीन वाले बड़े कृषक है। किसान बेनीराम ने बताया कि सहकारी समिति ग्राम पेण्डरवानी में पहुँचकर उन्होंने 05 बोरी स्वर्णा और स्वर्णा सब 1 तथा मांग के अनुरूप अन्य धान, बीज उन्होंने प्राप्त किया है। सहकारी समिति में धान, बीज के प्राप्त करने में उन्हें एवं अन्य कृषकों को किसी भी प्रकार की असुविधा नही हुई। जिससे हम सभी कृषक प्रसन्नचित होने के साथ-साथ भविष्य में भी समय पर खाद, बीज प्राप्त करने के लिए पूरी तरह आशान्वित है।
- -जनभागीदारी से जल संरचनाओं के निर्माण पर प्रशिक्षण सह कार्यशाला आयोजितरायपुर। प्रदेश में जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित मोर गांव मोर पानी अभियान के तहत विभिन्न जिलों में प्रशिक्षण एवं जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में बलरामपुर जिले के जनपद पंचायत वाड्रफनगर में जनभागीदारी आधारित जल संरचनाओं के निर्माण को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया।कार्यशाला में ग्राम स्तर पर जल संरक्षण गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जनसहभागिता से 5 प्रतिशत मॉडल संरचना एवं अन्य जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण संबंधी विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में सरपंचों, पंचायत सचिवों एवं तकनीकी सहायकों को स्वीकृत किए जाने वाले कार्यों, संरचनाओं के चयन, तकनीकी मापदंडों तथा कार्यान्वयन प्रक्रिया की जानकारी प्रदान की गई।अधिकारियों ने बताया कि मोर गांव मोर पानी अभियान का उद्देश्य गांवों को जल समृद्ध बनाना तथा जल संकट की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है। इसके लिए वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण एवं प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष बल दिया जा रहा है। समुदाय की सक्रिय भागीदारी से जल संरक्षण कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।बलरामपुर जिले में आयोजित प्रशिक्षण सह कार्यशाला में जनपद पंचायत वाड्रफनगर के सभी सरपंच, पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक एवं संबंधित अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए। प्रतिभागियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा अधिक से अधिक ग्रामीणों को इससे जोड़ने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 2026 की भी जानकारी दी गई। प्रदेश सरकार द्वारा जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में जल संसाधनों का संरक्षण एवं संवर्धन सुनिश्चित किया जा सके।
- रायपुर । छत्तीसगढ़ का बस्तर अंचल अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए देशभर में विशेष पहचान रखता है। घने जंगलों, जलप्रपातों और प्राचीन मंदिरों से समृद्ध यह क्षेत्र हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करता है। इन्हीं धरोहरों में एक महत्वपूर्ण स्थल है नारायणपाल विष्णु मंदिर, जो बस्तर जिले के नारायणपाल गांव में इंद्रावती और नारंगी नदियों के संगम के समीप स्थित है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय स्थापत्य कला, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का भी अनूठा उदाहरण है।यह मंदिर लगभग 11वीं शताब्दी में निर्मित हुआ माना जाता हैस बस्तर क्षेत्र का यह एकमात्र प्राचीन विष्णु मंदिर है, जिसकी वास्तुकला में चालुक्य और नागर शैली का अद्भुत संगम दिखाई देता है। मंदिर की ऊंची शिखर शैली, अष्टकोणीय मंडप, सुंदर स्तंभ और पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी आज भी लोगों को आकर्षित करती है। मंदिर की दीवारों और प्रवेश द्वार पर उकेरी गई कलाकृतियां उस समय के शिल्पकारों की उत्कृष्ट कला-कौशल को दर्शाती हैं। इतिहासकार इस मंदिर को खजुराहो कालीन स्थापत्य परंपरा का समकालीन उदाहरण भी मानते हैं।मंदिर का वातावरण शांत और आध्यात्मिक अनुभूति से भरपूर है। इंद्रावती और नारंगी नदियों का संगम इस स्थल की सुंदरता को और मनमोहक बना देता है। सुबह और शाम के समय मंदिर परिसर और नदी किनारे का दृश्य पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करता है। यहां प्रकृति, आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यही कारण है कि धार्मिक श्रद्धालुओं के साथ-साथ इतिहासकार, वास्तुकला प्रेमी और फोटोग्राफी के शौकीन पर्यटक भी बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं।चित्रकोट जलप्रपात के निकट स्थित होने के कारण नारायणपाल मंदिर का पर्यटन महत्व और बढ़ जाता है। चित्रकोट जलप्रपात घूमने आने वाले अधिकांश पर्यटक इस ऐतिहासिक मंदिर का भी भ्रमण करते हैं। बरसात और सर्दियों के मौसम में यहां का प्राकृतिक सौंदर्य चरम पर होता है। चारों ओर फैली हरियाली, बहती इंद्रावती नदी और प्राचीन मंदिर की भव्यता इस स्थान को अत्यंत आकर्षक बना देती है।यहां आने वाले पर्यटक प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला को करीब से देख सकते हैं और बस्तर की सांस्कृतिक विरासत व प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव भी कर सकते हैं। मंदिर परिसर फोटोग्राफी के लिए भी उपयुक्त स्थान माना जाता है।अक्टूबर से फरवरी तक का समय यहां घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और आसपास के प्राकृतिक स्थल भी बेहद आकर्षक दिखाई देते हैं। बरसात के मौसम में इंद्रावती नदी और आसपास की हरियाली का दृश्य मनमोहक होता है।नारायणपाल का प्राचीन विष्णु मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बस्तर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है। सदियों पुरानी यह धरोहर आज भी भारतीय कला, संस्कृति और स्थापत्य परंपरा की गौरवशाली कहानी को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है।नारायणपाल मंदिर तक पहुंचना आसान है। यह स्थल जगदलपुर से लगभग 35 से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। जगदलपुर से टैक्सी, निजी वाहन अथवा स्थानीय परिवहन के माध्यम से यहां पहुंचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन जगदलपुर रेलवे स्टेशन है, जबकि निकटतम हवाई अड्डा जगदलपुर एयरपोर्ट है, जहां से सड़क मार्ग द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
- महासमुंद / खरीफ सीजन को देखते हुए महासमुंद जिले में किसानों के लिए खाद एवं उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया गया है। कृषि विभाग द्वारा जिले की सभी सहकारी समितियों एवं विक्रय केंद्रों में खाद उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि किसानों को समय पर खेती कार्य के लिए आवश्यक उर्वरक मिल सके।उपसंचालक कृषि श्री एफ.आर. कश्यप ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले में वर्तमान में यूरिया 16,409 मीट्रिक टन, सुपर फास्फेट 8,881 मीट्रिक टन, पोटाश 2,207 मीट्रिक टन तथा डीएपी 6,476 मीट्रिक टन भंडारण किया गया है। वहीं अब तक किसानों को यूरिया 6,908 मीट्रिक टन, सुपर फास्फेट 2,939 मीट्रिक टन, पोटाश 343 मीट्रिक टन तथा डीएपी 1,823 मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है।उन्होंने बताया कि जिले में खाद की कमी नहीं है तथा आवश्यकतानुसार भंडारण किया गया है।किसानों की आवश्यकता के अनुसार निरंतर खाद उपलब्ध कराया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा सभी विकासखंडों में खाद भंडारण एवं वितरण की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।कलेक्टर विनय लंगेह ने सभी सहकारी समितियों एवं खाद विक्रेताओं को पीओएस मशीन के माध्यम से पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि किसानों को शासन द्वारा निर्धारित मात्रा एवं दर पर ही खाद उपलब्ध कराया जाए। साथ ही किसी भी प्रकार की कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा अनियमितता पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।राज्य शासन एवं कृषि विभाग द्वारा किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है। किसानों को पारंपरिक यूरिया के साथ-साथ नैनो यूरिया के उपयोग के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार नैनो यूरिया के प्रयोग से कम मात्रा में अधिक प्रभावी परिणाम प्राप्त होते हैं, जिससे खेती की लागत कम होती है तथा मिट्टी की गुणवत्ता भी सुरक्षित रहती है।कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे आवश्यकता अनुसार ही खाद का उठाव करें तथा अनुशंसित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करें। डीएपी एवं यूरिया के अत्यधिक उपयोग न करते हुए जैविक खाद, सुपर फास्फेट, पोटाश एवं नैनो यूरिया का संतुलित उपयोग करें, ताकि भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहे और उत्पादन में वृद्धि हो सके।विभाग द्वारा किसानों को यह भी सलाह दी जा रही है कि वे केवल अधिकृत सहकारी समितियों एवं लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही खाद खरीदें तथा पीओएस मशीन से रसीद अवश्य प्राप्त करें।जिले में किसान खरीफ सीजन के लिए खाद का उठाव भी शुरू कर चुके हैं। ग्राम मोंगरा के किसान रामलाल साहू ने आज झालखम्हरिया सोसायटी से खाद प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि उन्हें नियमानुसार समय पर खाद उपलब्ध हो गया और किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। किसान अब खेती की तैयारियों में जुट गए हैं तथा समय पर खाद मिलने से वे संतुष्ट है।
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बिलासपुर. ड्रीम इम्पीरिया आवासीय सहकारी समिति जगदम्बा कॉलोनी सरकण्डा की अंतिम सदस्यता सूची का प्रकाशन प्राप्त दावा-आपत्तियों के निराकरण के पश्चात कर दिया गया है। जारी सूची सोसायटी कार्यालय के सूचना पटल पर चस्पा की गई है।
- 0- आधुनिक तकनीक से 334 स्थलों पर बन रहे इंजेक्शन वेल0- जल संवर्धन प्रशासन की सर्वाच्च प्राथमिकताबिलासपुर. जिले में जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन को लेकर जिला प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल के निर्देश पर आधुनिक तकनीक के माध्यम से भू-जल रिचार्ज अभियान को गति दी गई है। प्रशासन की इस महत्वाकांक्षी पहल का उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संचयन कर भू-जल स्तर को मजबूत करना है।जिले में पहली बार युक्तधारा पोर्टल एवं भूवन एप के संयुक्त उपयोग से फैक्चर जोन चिन्हांकित किए गए हैं, जहां इंजेक्शन वेल निर्माण कराया जा रहा है। इन इंजेक्शन वेल के माध्यम से वर्षा जल को सीधे जमीन के भीतर पहुंचाकर भू-जल रिचार्ज सुनिश्चित किया जाएगा। कलेक्टर श्री अग्रवाल द्वारा जिले के 12 उद्योगों से सहयोग की अपील करते हुए 334 चिन्हित स्थलों पर इंजेक्शन वेल निर्माण कराने का आग्रह किया गया है। इसके तहत बोर खनन का कार्य कई स्थानों पर युद्धस्तर पर दिन-रात जारी है। साथ ही महात्मा गांधी नरेगा योजना अंतर्गत मिनी परकुलेशन टैंक का निर्माण भी कराया जा रहा है, जिससे जल संचयन एवं जल रिचार्ज की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। प्रशासन का मानना है कि यह पहल भविष्य में जल संकट से निपटने के लिए मजबूत आधार तैयार करेगी। जिले में जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए इसे प्राथमिकता के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण दायित्व है। जिले में चल रहा यह अभियान पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और सतत विकास की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इंजेक्शन वेल भू-जल संवर्धन का प्रभावी माध्यम है। इससे वर्षा जल व्यर्थ बहने के बजाय जमीन के भीतर संग्रहित होता है, जिसका लाभ आने वाले वर्षों में पेयजल, सिंचाई और पर्यावरण संतुलन के रूप में मिलेगा। बिलासपुर जिले में चल रहा यह अभियान जल संरक्षण के प्रति प्रशासन की गंभीरता और दूरदृष्टि को दर्शाता है। यह पहल भविष्य में जल उपलब्धता बढ़ाने के साथ किसानों और आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
- बिलासपुर. शासकीय आईटीआई नेवरा (तखतपुर) में प्रवेश सत्र 2026-27 में संचालित एकवर्षीय व्यवसाय कोपा और शासकीय आईटीआई कोटा में संचालित द्विवर्षीय व्यवसाय फिटर व इलेक्ट्रीशियन के साथ-साथ एकवर्षीय व्यवसाय कोपा व स्टेनो (हिंदी) में प्रवेश हेतु ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इच्छुक और पात्र अभ्यर्थी 15 जून 2026 रात्रि 11.59 बजे तक आधिकारिक वेबसाइट https://cgiti.admissions.nic.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।अभ्यर्थी आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करने के साथ ही अपनी पसंद की संस्था और व्यवसाय का चयन कर सकते हैं।आईटीआई नेवरा के प्राचार्य श्री लोकेश्वर प्रसाद साहू द्वारा आवेदन करने से पूर्व सभी अभ्यर्थियों को वेबसाइट पर उपलब्ध "प्रवेश विवरणिका" का भली-भाँति अध्ययन करने की सलाह दी गई है। इसके अतिरिक्त, समय-सीमा समाप्त होने से पहले सभी आवेदक अपने आवेदन पत्र में किसी भी प्रकार की त्रुटि या संस्था व व्यवसाय की प्राथमिकता क्रम में आवश्यक सुधार सुनिश्चित कर लें। प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी किसी भी प्रकार की सहायता या विस्तृत जानकारी के लिए अभ्यर्थी संबंधित संस्था से अथवा वेबसाइट पर प्रदर्शित हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करके मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।
- 0- “प्रोजेक्ट आओ बाँटें खुशियाँ” के तहत शासकीय कर्मचारी बच्चों संग साझा कर रहे हैं खुशियाँरायपुर. जिले में शासकीय कर्मचारियों के जन्मदिन अब केवल व्यक्तिगत आयोजन नहीं रह गए हैं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम बनते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुसार प्रधानमंत्री पोषण शक्ति योजना और न्योता भोज के अंतर्गत संचालित “प्रोजेक्ट आओ बाँटें खुशियाँ” का उद्देश्य ही है - खुशियों को बाँटना, और इस पहल को शासकीय कर्मचारी पूरे उत्साह के साथ अपना रहे हैं।इसी क्रम में उप पंजीयक श्री देवराज साय ने आंगनबाड़ी केंद्र गोपिया पारा में विद्यार्थियों के साथ जन्मदिवस के अवसर पर बच्चों के साथ केक काटकर, फल और पौष्टिक आहार वितरित कर इस दिन को विशेष बनाया।
- 0- तीन दिवसीय जांच में 52 फर्मों का निरीक्षण, 105 किलो सड़े आम व केले नष्टरायपुर। नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन श्री दीपक कुमार अग्रवाल (आई.ए.एस) एवं कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर ग्रीष्म ऋतु में लोगों को सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण फल उपलब्ध कराने के लिए रायपुर में 27 मई से 29 मई 2026 तक तीन दिवसीय विशेष जांच अभियान चलाया गया।अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा शहर की 52 फल विक्रेता फर्मों का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान फल विक्रेताओं को सुरक्षित व स्वच्छ दशाओं में फलों का रख-रखाव, भण्डारण एवं विक्रय करने के कड़े निर्देश दिए गए।जांच में सड़ी-गली अवस्था में भण्डारित लगभग 105 किलो आम, 10 किलो अंगूर एवं 7 दर्जन लोकर लगे केले पाए गए। जिन्हें मौके पर ही तत्काल नष्ट कराया गया।अधिकारियों ने सभी विक्रेताओं को स्टीकर लगाकर फलों को पकाने, केमिकल एवं सिंथेटिक कलर युक्त फलों का विक्रय नहीं करने की सख्त हिदायत दी। ताकि उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित फल मिल सकें।खाद्य विभाग ने कहा कि मिलावटी व असुरक्षित खाद्य पदार्थों के विक्रय पर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।



























