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- श्री बलदेवज्यू मंदिर जिसे तुलसी क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है, ओडिशा के केंद्रपड़ा ज़िले के इच्छापुर में स्थित है। यह मंदिर भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई, भगवान बलदेव (बलराम) को समर्पित है और यह राज्य के सबसे पवित्र वैष्णव तीर्थस्थलों में से एक है। पुरी के जगन्नाथ मंदिर के बाद, इसे ओडिशा के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है।बलदेवज्यू मंदिर में दर्शन का समयमंदिर पूरे सप्ताह खुला रहता है और दर्शन का समय सुबह 05:00 बजे से दोपहर 03:00 बजे तक और शाम 06:00 बजे से रात 11:00 बजे तक है।बलदेवज्यू मंदिर के मुख्य त्योहारइस मंदिर में साल भर कई त्योहार मनाए जाते हैं, जिनमें रथ यात्रा, झूलन यात्रा, जन्माष्टमी, होली, मकर संक्रांति और कार्तिक पूर्णिमा शामिल हैं। यहाँ की रोज़ाना की पूजा-पद्धति पुरी के जगन्नाथ मंदिर जैसी ही है। देवी-देवताओं की पूजा 'षोडश उपचार' की परंपरा के अनुसार की जाती है।यह मंदिर अपनी स्वादिष्ट 'रसाबली' प्रसाद के लिए खास तौर पर मशहूर है। यह ओड़िशा की एक पारंपरिक मिठाई है जो भगवान बलदेव को भोग के रूप में चढ़ाई जाती है।बलदेवज्यू मंदिर कैसे पहुँचेंयह मंदिर ओड़िशा के केंद्रपड़ा में इच्छापुर में स्थित है। केंद्रपाड़ा भुवनेश्वर, कटक और आस-पास के शहरों से बसों और टैक्सियों के ज़रिए अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। केंद्रपड़ा रेलवे स्टेशन मंदिर के सबसे पास का मुख्य रेलवे स्टेशन है, जो यहाँ से लगभग 4.1 किलोमीटर दूर है। बीजू पटनायक इंटरनेशनल एयरपोर्ट सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा है।
- कई बार अच्छे इरादे के बावजूद भी अनजाने में दी गई कुछ चीजें रिश्तों में दरार डाल देती हैं और किस्मत पर बुरा असर डालती हैं। फेंगशुई विशेषज्ञों के अनुसार कुछ वस्तुओं को गिफ्ट करने से पूरी तरह बचना चाहिए। आइए जानते हैं इनके बारे में विस्तार से।नुकीली चीजें गिफ्ट में देने से बचेंचाकू, कैंची, तलवार या कोई भी नुकीली वस्तु गिफ्ट में कभी ना दें। फेंगशुई में इन चीजों को रिश्तों को काटने वाला प्रतीक माना जाता है। ऐसा गिफ्ट देने से दोनों पक्षों के बीच अनजाने में दूरियां बढ़ने लगती हैं और विवाद की संभावना बढ़ जाती है। भले ही ये चीजें महंगी और उपयोगी हों, लेकिन इनका ऊर्जात्मक प्रभाव बहुत नकारात्मक होता है।रूमाल गिफ्ट में ना देंरूमाल को फेंगशुई में आंसू, विदाई और उदासी का प्रतीक माना जाता है। किसी को रूमाल गिफ्ट करना अनजाने में यह संदेश देता है कि रिश्ते में अलगाव या दुख आने वाला है। इससे देने वाले और गिफ्ट पाने वाले दोनों के जीवन में भावनात्मक अस्थिरता आ सकती है। अगर किसी खास अवसर पर रूमाल देना ही पड़े तो उसके साथ कोई सकारात्मक वस्तु जैसे फूल या मिठाई जरूर दें।वाटर फाउंटेन या एक्वेरियम गिफ्ट ना देंइनडोर वाटर फाउंटेन या एक्वेरियम धन और सौभाग्य का प्रतीक होते हैं, लेकिन इन्हें किसी को गिफ्ट करना अपने घर का सौभाग्य दूसरे को सौंपने जैसा माना जाता है। फेंगशुई में ऐसा गिफ्ट देने से पाने वाले के घर से धन और सकारात्मक ऊर्जा कम होने लगती है। अगर किसी को पानी से संबंधित वस्तु देनी ही है, तो छोटा और साधारण आइटम चुनें।प्लास्टिक या आर्टिफिशियल गिफ्ट्स से परहेज करेंआजकल प्लास्टिक के महंगे गिफ्ट्स और आर्टिफिशियल शो-पीस बहुत चलन में हैं। लेकिन फेंगशुई के अनुसार ये चीजें मृत ऊर्जा लेकर आती हैं। ये घर की सकारात्मकता को कम करती हैं और तरक्की में बाधा डालती हैं। इनकी जगह हमेशा जीवित पौधे, प्राकृतिक वस्तुएं या उपयोगी चीजें गिफ्ट में दें, जो ऊर्जा को बढ़ाती हों।घड़ी गिफ्ट में ना देंफेंगशुई और चीनी संस्कृति में घड़ी गिफ्ट में देना अशुभ माना जाता है। घड़ी समय का प्रतीक है और इसे गिफ्ट करना 'समय समाप्त' का संदेश दे सकता है। इससे देने वाले और पाने वाले दोनों के जीवन में अनचाही जल्दबाजी या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां आ सकती हैं। अगर घड़ी देनी ही हो, तो इसके साथ कोई सिक्का या पैसे जरूर दें, ताकि नकारात्मक प्रभाव कम हो जाए।नकली फूल गिफ्ट ना करेंनकली फूलों को स्थिरता और जीवनहीनता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए भूलकर भी किसी को नकली फूल गिफ्ट में ना दें। ऐसा करने से भाग्य भी प्रभावित होता है। असली फूल ही गिफ्ट में देना सबसे अच्छा है, क्योंकि वे जीवन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होते हैं।गलत पौधे गिफ्ट करने से बचेंवैसे तो पौधा गिफ्ट करना शुभ माना जाता है, लेकिन पौधा पूरी तरह स्वस्थ, हरा-भरा और जीवंत होना चाहिए। पौधे की पत्तियां कहीं से भी सूखी, कटी-फटी या पीली नहीं होनी चाहिए। सूखा या बीमार पौधा गिफ्ट करना नकारात्मक ऊर्जा देता है।सही गिफ्ट चुनने का फेंगशुई तरीकाफेंगशुई कहता है कि गिफ्ट चुनते समय उसकी ऊर्जा पर ध्यान दें। हमेशा ऐसी चीज चुनें जो सकारात्मक हो, उपयोगी हो और गिफ्ट पाने वाले को खुशी दे। फूल, मिठाई, अच्छी किताब, क्रिस्टल या हरे पौधे गिफ्ट में देना बहुत शुभ माना जाता है। गिफ्ट देते समय शुभ भावना रखें और दिल से आशीर्वाद दें।सही गिफ्ट से मजबूत होंगे रिश्तेफेंगशुई हमें याद दिलाता है कि गिफ्ट केवल वस्तु नहीं, बल्कि ऊर्जा का आदान-प्रदान है। गलत चीज गिफ्ट करने से अनजाने में नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए अगली बार कोई गिफ्ट चुनते समय इन 7 चीजों से सावधानी बरतें। सही गिफ्ट से रिश्ते मजबूत होते हैं और जीवन में खुशहाली आती है। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
- पन्ना रत्न: बुद्धि और स्पष्टता का प्रतीकपन्ना बुध ग्रह का रत्न है। यह सोचने-समझने की क्षमता बढ़ाता है और मानसिक धुंधलापन दूर करता है। जो लोग काम में मन नहीं लगा पाते या बार-बार भटक जाते हैं, उनके लिए पन्ना बेहद उपयोगी है। यह रत्न व्यापार और नौकरी दोनों में नई स्पष्टता लाता है। पन्ना पहनने से निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है और छोटी-छोटी गलतियां कम हो जाती हैं।मूंगा रत्न: साहस और ऊर्जा बढ़ाने वालामूंगा मंगल ग्रह से जुड़ा रत्न है। यह व्यक्ति में साहस, आत्मविश्वास और नेतृत्व गुण जगाता है। जो लोग अपनी क्षमता के बावजूद आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं, उनके लिए मूंगा बहुत कारगर साबित होता है। यह रत्न करियर में रुकावटें दूर करता है और नई चुनौतियों का सामना करने की शक्ति देता है। मूंगा पहनने से व्यक्ति में सक्रियता बढ़ती है और आलस्य कम होता है।गोमेद रत्न: राहु की उलझनों से मुक्तिगोमेद राहु का रत्न है। यह उन लोगों के लिए खास है जिनका मन बार-बार भटकता है या अनावश्यक चिंताएं सताती हैं। गोमेद मानसिक तनाव कम करता है और एकाग्रता बढ़ाता है। यह रत्न करियर में अचानक आने वाली बाधाओं को दूर करने में मदद करता है। गोमेद पहनने से व्यक्ति की सोच स्पष्ट होती है और गलत फैसलों से बचाव होता है।नीलम रत्न: अनुशासन और लंबी सफलतानीलम शनि ग्रह का रत्न है। यह मेहनत का पूरा फल दिलाता है और अनुशासन बनाए रखने में सहायक होता है। जो लोग लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन परिणाम नहीं मिल रहे, उनके लिए नीलम बहुत प्रभावी है। यह रत्न करियर में स्थिरता लाता है और आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाता है। नीलम पहनने से व्यक्ति धैर्यवान और लक्ष्य केंद्रित होता है।जेड रत्न: संतुलन और सही निर्णयजेड रत्न करियर और जीवन में संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। यह सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाता है और बेचैनी को शांत करता है। जो लोग लगातार तनाव में रहते हैं या फैसले लेने में कन्फ्यूजन महसूस करते हैं, उनके लिए जेड बेहतर विकल्प है। यह रत्न मानसिक शांति के साथ-साथ व्यावसायिक बुद्धिमत्ता भी बढ़ाता है।रत्न धारण करने के नियमकोई भी रत्न धारण करने से पहले ज्योतिष विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। रत्न को शुद्ध धातु में जड़वाकर शुभ मुहूर्त में पहनना चाहिए। हर रत्न का अपना एक नियमित रखरखाव होता है। बिना सलाह के रत्न पहनने से उल्टा प्रभाव भी पड़ सकता है।इन रत्नों से मिलने वाले लाभये पांच रत्न ना सिर्फ मन को शांत करते हैं बल्कि करियर और कारोबार में नई दिशा भी देते हैं। नियमित उपयोग से फोकस बढ़ता है, निर्णय क्षमता मजबूत होती है और सफलता के नए रास्ते खुलते हैं। सही रत्न चुनकर और श्रद्धा के साथ धारण करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
- एक अच्छा इंसान हर रिश्ते दिल से निभाता है। वहीं अगर आप अपनी बेटी के लिए अच्छा रिश्ता ढूंढ रहे हैं तो चूजी होना लाजमी है। हर कोई चाहता है कि बेटी का घर अच्छे से बसे। तो चलिए न्यूमेरेलॉजी की मदद से जानते हैं कि आखिर किन तारीखों में जन्मे लड़के परफेक्ट दामाद बनते हैं? मूलांक 2 और मूलांक 7 वाले लड़के अच्छे दामाद वाली कैटेगरी में बिल्कुल फिट बैठते हैं। आइए जानते हैं कैसे?मूलांक 2 और मूलांक 7 हैं परफेक्टन्यूमेरेलॉजी के अनुसार जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 2, 11, 20 या फिर 29 तारीख को होता है उनका मूलांक 2 होगा। तो वहीं जिनका जन्म 7, 16 और 25 तारीख को होगा उनका मूलांक 7 होगा।फीलिंग्स की कद्र करते हैं मूलांक 2 वाले लड़केमूलांक 2 का स्वामी ग्रह चंदमा है तो ये काफी इमोशनल होते हैं। रिश्ते की गहराई को समझते हैं और बेहद भरोसेमंद होते हैं। समझदार होने के साथ-साथ सामने वाले के मन की बात आसानी से समझ लेते हैं और रिश्ते में प्यार-सम्मान बनाए रखते हैं।पत्नी को देते हैं प्रिंसेंस ट्रीटमेंटमूलांक 3 वाले लड़के पत्नी को प्रिंसेस ट्रीटमेंट देने में जरा भी पीछे नहीं हटते हैं। न्यूमेरेलॉजी के हिसाब से ये अपने पार्टनर की हर एक बात ध्यान से सुनते हैं और सही राय भी देते हैं। हर छोटी-छोटी बात का ख्याल रखना इन्हें पसंद है।मूलांक 7 वाले लड़के लेते हैं सही फैसलापार्टनर का सही फैसला लेना जिंदगी की कई मुश्किलों को कम कर सकता है। कन्फ्यूजन में पड़े लोग ना सिर्फ रिश्ता उलझाते हैं बल्कि जिंदगी को भी सही ट्रैक पर नहीं ले पाते हैं। स्वामी ग्रह केतु होने के नाते मूलांक 7 वाले लड़के फालतू की बहस करने से बचते हैं। रिश्तों में सही बैलेंस बनाकर चलते हैं।ससुराल वालों का जीतते हैं दिलन्यूमेरेलॉजी के अनुसार मूलांक 7 वाले लड़के ससुराल में हर किसी के चहेते बन जाते हैं। सॉफ्ट नेचर के होते हैं। बड़ों की बात सुनते हैं और परिवार के हर एक सदस्य के साथ इनका बॉन्ड बहुत ही अच्छा होता है।क्यों बनते हैं पसंदीदा दामाद?मूलांक 2 और मूलांक 7 वाले लड़के अपने खास गुणों की वजह से ही दामाद का रोल भी अच्छे से अदा करते हैं। इनमें समझदारी होती है। साथ ही ये समझदार बहुत होते हैं और इन्हें अच्छे से हर एक रिश्ता निभाना आता है। साथ ही ये ईमानदार भी बहुत होते हैं। यही सारे गुण इन्हें बाकियों से खास बनाते हैं।---डिस्क्लेमर- इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
- पंडित प्रकाश उपाध्यायपंचांग के अनुसार जुलाई महीने में दो प्रभावशाली ग्रहों शनिदेव और बृहस्पति की चाल में परिवर्तन आएगा। इसका असर कुछ राशियों नकारात्मक पड़ेगा। 14 जुलाई को गुरु अस्त होंगे फिर इसके बाद 27 जुलाई को शनि मीन राशि में रहते हुए वक्री होंगे। जिससे कुछ राशि वालों को सावधान रहने की जरूरत होगी।आइए जानते है कि किन-किन राशियों के ऊपर इसका असर पड़ेगा-कुंभ राशिकुंभ राशि वालों के लिए जुलाई का महीना बहुत ही चुनौतीपूर्ण रहेगा। इस राशि वाले जातकों के आत्मविश्वास में कमी आ सकती है। कार्यस्थल पर कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इस अवधि के दौरान कोई बड़ा निवेश करने से बचने और लेन-देन में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। स्वास्थ्य संबंधित दिक्कतें आ सकती हैं। खर्च बढ़ेंगे। इस दौरान आर्थिक स्थिति पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।सिंह राशिसिंह राशि वालों के लिए जुलाई महीना कई तरह की परेशानियां आ सकती हैं। कार्यक्षेत्र में कोई बड़ी उपलब्धि हासिल होते-होते रह सकती है। वैवाहिक जीवन में बेहतर तालमेल के साथ चलना होगा। नौकरीपेशा जातकों को कार्यक्षेत्र में कुछ दिक्कतें आ सकती हैं।धनु राशिधनु राशि वालों के लिए जुलाई महीना अच्छा नहीं कहा जा सकता है। कार्यों में कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में बेहतर संतुलन बनाकर रहना होगा। आर्थिक मामलों में जल्दबाजी करने से बचना होगा। धन के लेन-देन में अतिरिक्त सावधानी बरतनी की जरूरत होगी। इस राशि वाले जातकों को लंबी दूरी की यात्रा करने से बचना होगा।
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आषाढ़ मास या आदि हिंदू कैलेंडर का एक महीना है जो ग्रेगोरियन कैलेंडर में जून / जुलाई से मेल खाता है। भारत के कैलेंडर में, यह महीना वर्ष का चौथा महीना होता है। वैदिक ज्योतिष में आषाढ़ की शुरुआत सूर्य के मिथुन राशि में प्रवेश से होती है। यह दो महीनों में से पहला है जिसमें मनसून का मौसम शामिल है। बंगाली कैलेंडर में आषाढ़ तीसरा महीना होता है।
आषाढ़ मास में रथ यात्रा प्रमुख त्योहारों में से एक है जो भगवान जगन्नाथ को समर्पित है जो हर साल पुरी और अन्य स्थानों पर आयोजित किया जाता है। गुरु पूर्णिमा, गुरु को समर्पित एक त्योहार आषाढ़ मास में मनाया जाता है। इससे पहले शयनी एकादशी, शुक्ल पक्ष के ग्यारहवें चंद्र दिवस (एकादशी) को मनाई जाती है।आषाढ़ मास 2026इस साल मंगलवार 30 जून 2026 से बुधवार 29 जुलाई 2026 तक आषाढ़ मास की गणना है।आषाढ़ मास 2026 व्रत, त्यौहार, जयंती और उत्सव30 जून मंगलवार 2026: इष्टि03 जुलाई शुक्रवार 2026: कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी10 जुलाई शुक्रवार 2026: योगिनी एकादशी11 जुलाई शनिवार 2026: गौण योगिनी एकादशी, वैष्णव योगिनी एकादशी12 जुलाई रविवार 2026: रवि प्रदोष व्रत14 जुलाई मंगलवार 2026: दर्श अमावस्या, अन्वाधान, आषाढ़ अमावस्या15 जुलाई बुधवार 2026: आषाढ़ नवरात्रि, इष्टि16 जुलाई बृहस्पतिवार 2026: जगन्नाथ रथयात्रा, कर्क संक्रान्ति25 जुलाई शनिवार 2026: देवशयनी एकादशी26 जुलाई रविवार 2026: रवि प्रदोष व्रत27 जुलाई सोमवार 2026: जयापार्वती व्रत प्रारम्भ28 जुलाई मंगलवार 2026: कोकिला व्रत29 जुलाई बुधवार 2026: गुरु पूर्णिमा, व्यास पूजा, आषाढ़ पूर्णिमा, अन्वधन - वास्तु शास्त्र में घर की छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी वस्तु की सही दिशा और स्थान को महत्वपूर्ण माना गया है, ताकि जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे। घर, दुकान या किसी भी प्रतिष्ठान में लगाए जाने वाला एयर कंडीशनर (AC) वास्तु के अनुसार अग्नि तत्व से जुड़ा उपकरण माना जाता है। यदि इसे गलत दिशा में लगाया जाए, तो इसका असर मानसिक स्थिति, स्वास्थ्य और आर्थिक हालात पर नकारात्मक रूप से पड़ सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि AC को किस दिशा में लगाना शुभ माना जाता है और किन दिशाओं में लगाने से बचना चाहिए।शुभ दिशाघर में एसी लगवाते समय दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार एसी को हमेशा अग्नि कोण यानी दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना सबसे शुभ माना जाता हैष यह दिशा अग्नि तत्व से जुड़ी होती है और बिजली से चलने वाले उपकरणों के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और परिवार के सदस्यों के जीवन में सुख-समृद्धि आती है। वहीं एसी इस तरह लगाना चाहिए कि उसकी ठंडी हवा सीधे सिर पर न आए। यह न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, बल्कि वास्तु के अनुसार भी इसे उचित नहीं माना जाता।पश्चिम और उत्तर दिशाइसके अलावा पश्चिम और उत्तर दिशा को AC लगाने के लिए सबसे बढ़िया माना गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, पश्चिम दिशा के जलदेव स्वामी वरुण देव हैं, यह दिशा शुक्र को समर्पित है। वहीं, उत्तर कुबेर की दिशा मानी गई हैं, जो देव खजांची हैं। इन दिशाओं में AC लगाने से घर में धन का प्रवाह अच्छा बना रहता है, वहीं AC की लाइफ भी अच्छी होती है। ये दिशाएं आपके बिजली बिल को भी कम करने में भी मददगार साबित हो सकती हैं।गलत दिशाएसी लगाने के लिए दक्षिण-पूर्व और उत्तर-पश्चिम दिशा का चयन करना उचित नहीं माना जाता, क्योंकि इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है।घर की दक्षिण दिशा की दीवार पर भूलकर भी AC या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं लगाने चाहिए। ऐसा करने से धन हानि, अनावश्यक खर्च और व्यापार में नुकसान की संभावना बढ़ जाती है।इसके अलावा, दक्षिण-पश्चिम दिशा में भी AC लगाना वास्तु के अनुसार सही नहीं है। इस दिशा में लगाए गए इलेक्ट्रिक उपकरण जल्दी खराब हो सकते हैं।पूर्व दिशा में भी AC लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे बिजली खर्च बढ़ने की आशंका रहती है।अगर आप भी इस गर्मी में अपने घर में नया एसी लगवाने जा रहे हैं, तो वास्तु के इन आसान नियमों का ध्यान जरूर रखें। इससे न केवल घर ठंडा रहेगा बल्कि जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता भी बनी रहेगी।--
- भारत सहित दुनिया के कई देश सालों से “बुरी नजर” को लेकर विश्वास करते हैं. उनका मानना है कि यह बुरी ऊर्जा ईर्ष्या या बुरे इरादों से आती है. हालांकि इसको लेकर विज्ञान को कोई सबूत नहीं मिला है कि ऐसी कोई निगेटिव एनर्जी मौजूद है, फिर भी बहुत से लोग अपने घरों को इससे बचाने के लिए पुराने उपाय और आध्यात्मिक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं. वे न सिर्फ घर के दरवाजे में बुरी नजर से बचने के लिए नजरबट्टू टांगते हैं बल्कि वास्तु के मुताबिक कई तरह के उपाय करते हैं. आइए जानते हैं कि वे किस तरह के उपाय करते हैं.घर में नमक रखना और उसका पोंछा लगानाबहुत से लोगों का मानना है कि नमक निगेटिव एनर्जी से छुटकारा पाने का एक शक्तिशाली माध्यम है. लोग अक्सर अपने कमरों के कोनों में या दरवाजों के पास सेंधा नमक से भरे कटोरे रखते हैं. यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे अपना काम करते रहें, उन्हें हर हफ्ते बदला जाता है. कमरे की ऊर्जा को शुद्ध करने का एक और आम तरीका है, फर्श पर पोंछा लगाने के लिए नमक वाले पानी का इस्तेमाल करना.कपूर और अगरबत्ती जलानालोगों का माननाहै कि अगरबत्ती या कपूर जलाने से हवा शुद्ध होती है. इसकी महक से उन्हें ईश्वर के करीब होने का एहसास होता है और उन्हें मन की शांति मिलती है. कुछ परिवार हर रोज पूजा करते हैं और घर में सुख-शांति बनाए रखने के लिए कपूर जलाते हैं.
- घर का मुख्य द्वार ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। मुख्य द्वार को हमेशा साफ-सुथरा, रौशन भरा रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की हर एक चीज में ऊर्जा मौजूद होती है। घर में गलत जगह पर गलत चीजें रखने या बनवाने से वास्तु दोष लगता है। घर के मुख्य दरवाजे पर कुछ चीजें रखने से मां लक्ष्मी का वास होता है और धन-धान्य में भी वृद्धि होती है। आइए जानते हैं घर की एन्ट्रेंस पर कौन सी लकी वस्तुएं रखनी चाहिए-स्वास्तिक का चिन्ह- हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य या पूजा-पाठ में स्वास्तिक का चिन्ह बनाया जाता है। इसलिए अपने घर में पॉजिटिव एनर्जी बढ़ाने के लिए मुख्य द्वार के दोनों तरफ स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं।घोड़े की नाल- घर के लिए घोड़े की नाल बेहद लकी मानी जाती है। घोड़े की नाल को हमेशा मुख्य द्वार के ऊपरी भाग में लगाया जाता है। इससे गुड लक बना रहता है।तोरण लगाएं- आम के पत्तों का तोरण बनाकर मुख द्वार पर लगाएं। ध्यान रखें की तोरण में इस्तेमाल किए गए पत्ते हरे-भरे होने चाहिए न की कटे-फटे। इससे घर में पॉजिटिविटी बनी रहेगी।शुभ-लाभ- घर के मुख द्वार के ऊपर या दाएं-बाएं भाग में लाल चंदन से शुभ-लाभ लिखें। शुभ-लाभ शुभट का प्रतीक है। इसे लिखने से घर की सुख-समृद्धि बढ़ती है।दीपक जलाएं- घर के मुख्य द्वार पर शाम के वक्त रोज दीपक जलाएं, जिससे पॉजिटिव एनर्जी घर में प्रवेश कर सके। मान्यता है शाम के समय मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से घर में मां लक्ष्मी का वास होता है।तुलसी पौधा- तुलसी का पौधा मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है। घर के मुख द्वार के पास तुलसी का पौधा भी रख सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें की ये पौधा सूखने या सड़ने न पाए। सुबह-शाम तुलसी जी के समक्ष दीपक भी जलाएं।सूर्य यंत्र: घर के मेन दरवाजे पर सूर्य यंत्र लगाना बहुत शुभ माना जाता है। इससे घर को बुरी नजर या नेगेटिव एनर्जी से बचाया जा सकता है।--
- हस्त रेखा शास्त्र में हाथ की रेखाओं के अलावा नाखूनों का भी खास महत्व है। हाथ के नाखूनों की बनावट भी व्यक्ति के व्यक्तित्व व स्वभाव से जुड़े कई राज खोलते हैं। हर व्यक्ति के हाथ के नाखूनों की बनावट अलग-अलग होती है। कुछ लोगों के नाखून छोटे, किसी के लंबे या चौड़े होते हैं। जानें हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हाथ के नाखूनों की बनावट से क्या संकेत मिलते हैं।चौड़े नाखूनकहते हैं कि जिन लोगों के हाथ के नाखून चौड़े होते हैं वे बुद्धि के धनी होते हैं। ऐसे लोगों में सोचने व फैसला लेने की क्षमता अधिक होती है। ये अपने सभी कार्यों में सफलता पाते हैं।गोलाकार नाखूनहस्त रेखा शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों के नाखून गोलाकार होते हैं, वे व्यक्ति सशक्त विचारों वाले एवं तुरंत फैसला लेने वाले होते हैं। ऐसे व्यक्ति जो भी फैसला लेते हैं उन पर अमल करना भी जानते हैं।चौकोर नाखूनहस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, चौकोर नाखून वाले व्यक्ति स्वभाव से गंभीर माने जाते हैं। इन लोगों में लीड करने की क्षमता होती है। कहते हैं कि लोग राजनीति में सफल होते हैं।लंबे नाखूनहस्त रेखा शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों के लंबे नाखून होते हैं, वे रोमांस से भरपूर होते हैं। यह स्वभाव से भोले और विनम्र होते हैं। यह लोग आसानी से दूसरों पर भरोसा कर लेते हैं।पूर्ण नाखूनहस्त रेखा शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों के हाथ के नाखूनों चौड़ाई की अपेक्षा मामूली लंबे होते हैं और अपनी प्राकृतिक चमक लिए हुए होते हैं। ऐसे व्यक्ति उत्तम विचारों वाले और निरंतर आगे की ओर बढ़ते रहने की भावना रखने वाले होते हैं। ऐसे लोग सामाजिक मान-प्रतिष्ठा पाते हैं।
- हिंदू धर्म में हस्तरेखा शास्त्र को हमेशा से खास महत्व दिया गया है। माना जाता है कि इंसान की हथेली में मौजूद रेखाएं उसके स्वभाव, भाग्य, करियर और धन योग तक का संकेत देती हैं। यही वजह है कि वर्षों से लोग अपनी हथेली की रेखाओं को देखकर भविष्य का आकलन करते आए हैं। खासकर वे रेखाएं, जो धन और भाग्य से जुड़ी होती हैं, उन्हें बेहद शुभ माना जाता है। आज हम समझेंगे कि किस प्रकार की रेखाएं यह बताती हैं कि व्यक्ति जीवन में कब और कैसे धनवान बन सकता है।भाग्य रेखा क्या होती है?हर व्यक्ति की भाग्य रेखा अलग होती है। किसी की सीधी, किसी की टूटी हुई, किसी की कटी-फटी तो किसी की पूरी तरह टेढ़ी-मेढ़ी। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, वह रेखा जो कलाई के पास से शुरू होकर सीधे मध्यमा उंगली (सबसे लंबी उंगली) की तरफ जाती है, वही भाग्य रेखा कहलाती है। इस रेखा की मजबूती और गहराई यह बताती है कि व्यक्ति की किस्मत उसे कितनी दूर तक ले जाएगी और जीवन में कब अवसर मिलेंगे। अगर आपकी भाग्य रेगा सीधी और गहरी है तो यह अच्छे करियर और स्थिर सफलता का संकेत है। अगर टूटी या कटी हुई रेखा है तो ये जीवन में उतार-चढ़ाव और संघर्ष का संकेत है और अगर टेढ़ी-मेढ़ी रेखा है तो ये जीवन में अस्थिरता, लेकिन अचानक मिलने वाले अवसर का संकेत देती है।धन रेखा कहाँ होती है?हथेली में एक विशेष रेखा होती है जिसे धन रेखा कहा जाता है। जब आप अपनी हथेली को देखें, तो अनामिका ऊंगली यानी रिंग फिंगर के नीचे सूर्य पर्वत से निकलकर जो रेखा हृदय रेखा को पार करते हुए मस्तिष्क रेखा की ओर बढ़ती है, उसे धन रेखा माना जाता है।ऐसी रेखा वाले लोग माने जाते हैं बेहद भाग्यशालीहस्तरेखा शास्त्र में एक विशेष संयोजन को अत्यंत शुभ कहा गया है। अगर किसी व्यक्ति की रेखा कलाई के पास से शुरू होकर सीधे शनि पर्वत (मध्यमा उंगली के नीचे) तक जाती हो और फिर हल्का-सा मुड़कर गुरु पर्वत (तर्जनी उंगली के नीचे) की ओर पहुंच जाए, तो यह बहुत ही दुर्लभ और शुभ योग माना जाता है। ऐसे लोग बेहद भाग्यशाली होते हैं।
- दिनभर की थकान और दफ्तर की भागदौड़ के बाद जब हम घर की दहलीज पर कदम रखते हैं, तो उम्मीद होती है कि वहां सुकून मिलेगा. लेकिन क्या कभी आपने ये महसूस किया है कि घर पहुंचते ही बिना वजह भारीपन, उदासी या चिड़चिड़ापन महसूस होने लगे? अगर हां, तो यह आपके घर का वास्तु या फेंगशुई दोष हो सकता है. अक्सर लोग फेंगशुई के नाम पर महंगे शो-पीस खरीदने लगते हैं, लेकिन असल में फेंगशुई ऊर्जा के सही संतुलन का नाम है. आइए जानते हैं कि कैसे आप अपनी जेब से एक चवन्नी खर्च किए बिना अपने आशियाने को खुशियों से भर सकते हैं.1. कबाड़ को हटाएंफेंगशुई का सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण नियम है सफाई. रुकी हुई ऊर्जा अक्सर पुराने कबाड़, टूटे हुए सामान या लंबे समय से बंद पड़ी अलमारियों में जमा हो जाती है. यदि आपके घर में ऐसी चीजें हैं जिनका आप इस्तेमाल नहीं करते, तो उन्हें हटा दें. खाली जगह का मतलब है नई ऊर्जा के लिए रास्ता बनाना. जैसे ही आप घर का कोना-कोना साफ करते हैं, आप खुद को हल्का और मानसिक रूप से शांत महसूस करेंगे.2. ताजी हवा और प्राकृतिक रोशनीसूरज की रोशनी और ताजी हवा प्राकृतिक रूप से नकारात्मकता को नष्ट करती है. रोज सुबह कम से कम 20 मिनट के लिए अपने घर की खिड़कियां और दरवाजे जरूर खोलें. फेंगशुई में माना जाता है कि चलती हुई हवा ऊर्जा के प्रवाह को सुचारू बनाती है. अगर आपके घर के किसी कोने में हमेशा अंधेरा रहता है, तो वहां रोशनी की व्यवस्था करें ताकि ऊर्जा सही हो जाए.3. मुख्य द्वारफेंगशुई के अनुसार, 'ची' यानी ऊर्जा मुख्य द्वार से ही घर में प्रवेश करती है. बिना खर्च किए इसे बेहतर बनाने के लिए बस अपने मुख्य द्वार को साफ रखें. वहां रखे पुराने जूते-चप्पल हटा दें. ये सुनिश्चित करें कि दरवाजा खुलते समय आवाज न करे. एक साफ और सुंदर प्रवेश द्वार न केवल मेहमानों को, बल्कि सुख-समृद्धि को भी आकर्षित करता है.4. शीशों का सही इस्तेमालआपके घर में मौजूद पुराने शीशे भी फेंगशुई का बड़ा टूल बन सकते हैं. बस उनकी दिशा बदलें. यदि आपके घर के किसी खिड़की के बाहर हरियाली या सुंदर दृश्य है, तो उसके सामने शीशा लगाएं. इससे बाहर की सकारात्मक ऊर्जा परावर्तित होकर घर के अंदर आएगी. ध्यान रहे, शीशा कभी भी मुख्य द्वार या बिस्तर के ठीक सामने न रखें, वरना यह ऊर्जा को वापस बाहर भेज सकता है या नींद में खलल डाल सकता है.5. पानी और नमकघर की निगेटिविटी सोखने के लिए नमक सबसे सस्ता और असरदार तरीका है. पोंछे के पानी में थोड़ा सा समुद्री नमक या सेंधा नमक मिलाकर घर की सफाई करें. इसके अलावा, बाथरूम या घर के अंधेरे कोनों में एक कटोरी में नमक भरकर रखें. यह वातावरण की दूषित ऊर्जा को सोख लेता है. हर हफ्ते इस नमक को बदल दें. यह छोटा सा बदलाव घर के माहौल को काफी सकारात्मक बना देता है.--
- 0- शादी के बाद चमक जाती है किस्मत!अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो आपका मूलांक 1 होगा। न्यूमेरेलॉजी के अनुसार मूलांक 1 वालों पर सूर्य का प्रभाव सबसे ज्यादा होता है क्योंकि यही इनका स्वामी ग्रह होता है। ऐसे में मूलांक 1 वालों में लीडरशिप क्वालिटी कूट-कूटकर भरी होती है। ये लोग जहां भी जाते हैं, वहां पर अपनी अलग छाप जरूर छोड़ते हैं। वहीं दूसरी ओर इनकी यही हाई एनर्जी कई बार रिश्ते पर हावी हो जाती है। ऐसे में मूलांक 1 वालों को ऐसे पार्टनर का चुनाव करना चाहिए जो ना सिर्फ इन्हें समझे बल्कि सपोर्ट भी करें।मूलांक 1 को किससे करनी चाहिए शादी?मूलांक 1 तो क्या हर किसी के मन में ये सवाल आता है कि आखिर शादी कैसे इंसान से की जाए? अब ऐसे में अगर न्यूमेरेलॉजी यानी अंक ज्योतिष की मदद ली जाए तो काम थोड़ा सा आसान हो जाता है। मूलांक 1 वालों के लिए सेम मूलांक का पार्टनर सबसे परफेक्ट होता है। जब दो मूलांक 1 साथ आते हैं तो ये जोड़ी पावरफुल बनती है। दोनों एंबिशियस होते हैं और ये मिलकर हर वो बड़ी चीज हासिल कर सकते हैं जिसका सपना सभी देखते हैं। हालांकि दिक्कत तब आएगी जब दोनों का ईगो क्लैश होगा। ऐसे में एक-दूसरे की फीलिंग्स का सम्मान किया जाए तो इस जोड़ी के टक्कर का कोई नहीं है।मूलांक 1 और मूलांक 3 की जोड़ीन्यूमेरेलॉजी के अनुसार मूलांक 1 वाले अगर अपने लिए शांत और समझदार पार्टनर की तलाश करें तो चीजें आसान हो सकती हैं। ऐसे में मूलांक 3 वाले लोग इनके लिए परफेक्ट साबित हो सकते हैं। दरअसल इस मूलांक के लोग मूलांक 1 वालों के गुस्से और डॉमिनेटिंग नेचर को अच्छे से बैलेंस कर ले जाते हैं। इन दोनों का मैच इसलिए भी अच्छा साबित हो सकता है क्योंकि इनके रिश्ते में समझदारी तो होगी ही साथ ही एक-दूसरे का अच्छा सपोर्ट भी होगा।मूलांक 1 और मूलांक 5 की जोड़ीन्यूमेरेलॉजी के हिसाब से ये कॉम्बिनेशन भी अच्छा साबित होता है। अगर मूलांक 1 वाले लोग मूलांक 5 वालों से शादी करते हैं तो इनकी जिंदगी में एक्साइटमेंट खूब आएगा। मूलांक 1 वाले जहां थोड़ा सा सीरियस होते हैं वहीं मूलांक 5 वाले चीजों को खुशनुमा बना देते हैं। ऐसे में इनकी जोड़ी फन और बैलेंस का अच्छा कॉम्बिनेशन बन जाती है।मूलांक 8 से रहें थोड़ा सावधानमूलांक 1 वाले अगर अपने लिए परफेक्ट मैच देख रहे हैं तो उन्हें कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए। न्यूमेरेलॉजी के हिसाब से इन लोगों को मूलांक 8 वालों से बचना चाहिए। दरअसल मूलांक 8 का स्वामी ग्रह शनि होता है। सूर्य और शनि एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन माने जाते हैं। ऐसे में मूलांक 1 वाले अगर मूलांक 8 वाले लाइफ पार्टनर को चुनते हैं तो मनमुटाव की स्थिति हमेशा बनी रहेगी। ऐसे में रिश्ते में तनाव बढ़ता जाएगा। अगर मूलांक 1 वाले इस मूलांक के साथी को चुनते हैं को समझदारी से काम लेके चीजों को बैलेंस किया जा सकता है लेकिन इसमें धैर्य की बहुत जरूर होगी।न्यूमेरोलॉजी के हिसाब से चुनें सही लाइफ पार्टनरन्यूमेरोलॉजी के अनुसार हर एक मूलांक की अपनी एनर्जी और नेचर होता है। मूलांक 1 वालों के लिए 1, 3 और 5 सबसे बेहतर माने जाते हैं क्योंकि इनकी एनर्जी एक-दूसरे के साथ मैच करती है। सही पार्टनर मिलने से रिश्ते में टकराव कम होता है और ऐसे में लाइफ ज्यादा स्मूद चलती है। ऐसे में न्यूमेरेलॉजी की मदद लेकर सही पार्टनर का चुनाव करना बेहतर है। डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं।--
- घर का मुख्य द्वार ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। मुख्य द्वार को हमेशा साफ-सुथरा, रौशन भरा रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की हर एक चीज में ऊर्जा मौजूद होती है। घर में गलत जगह पर गलत चीजें रखने या बनवाने से वास्तु दोष लगता है। घर के मुख्य दरवाजे पर कुछ चीजें रखने से मां लक्ष्मी का वास होता है और धन-धान्य में भी वृद्धि होती है। आइए जानते हैं घर की एन्ट्रेंस पर कौन सी लकी वस्तुएं रखनी चाहिए-स्वास्तिक का चिन्ह- हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य या पूजा-पाठ में स्वास्तिक का चिन्ह बनाया जाता है। इसलिए अपने घर में पॉजिटिव एनर्जी बढ़ाने के लिए मुख्य द्वार के दोनों तरफ स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं।घोड़े की नाल- घर के लिए घोड़े की नाल बेहद लकी मानी जाती है। घोड़े की नाल को हमेशा मुख्य द्वार के ऊपरी भाग में लगाया जाता है। इससे गुड लक बना रहता है।तोरण लगाएं- आम के पत्तों का तोरण बनाकर मुख द्वार पर लगाएं। ध्यान रखें की तोरण में इस्तेमाल किए गए पत्ते हरे-भरे होने चाहिए न की कटे-फटे। इससे घर में पॉजिटिविटी बनी रहेगी।शुभ-लाभ- घर के मुख द्वार के ऊपर या दाएं-बाएं भाग में लाल चंदन से शुभ-लाभ लिखें। शुभ-लाभ शुभट का प्रतीक है। इसे लिखने से घर की सुख-समृद्धि बढ़ती है।दीपक जलाएं- घर के मुख्य द्वार पर शाम के वक्त रोज दीपक जलाएं, जिससे पॉजिटिव एनर्जी घर में प्रवेश कर सके। मान्यता है शाम के समय मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से घर में मां लक्ष्मी का वास होता है।तुलसी पौधा- तुलसी का पौधा मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है। घर के मुख द्वार के पास तुलसी का पौधा भी रख सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें की ये पौधा सूखने या सड़ने न पाए। सुबह-शाम तुलसी जी के समक्ष दीपक भी जलाएं। सूर्य यंत्र: घर के मेन दरवाजे पर सूर्य यंत्र लगाना बहुत शुभ माना जाता है। इससे घर को बुरी नजर या नेगेटिव एनर्जी से बचाया जा सकता है।
- अक्षय तृतीया का पावन पर्व इस साल 19 अप्रैल को मनाया जाएगा. हिंदू धर्म में वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व बताया गया है. ‘अक्षय’ शब्द का अर्थ है जिसका कभी क्षय न हो, यानी जो कभी समाप्त न हो. माना जाता है कि इस दिन किए गए दान, जप और तप का फल अनंत काल तक बना रहता है. यह दिन नई शुरुआत करने और जीवन में सुख-शांति लाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है.शास्त्रों के अनुसार इसी दिन सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था, जो इस तिथि को और भी पावन बनाता है. इस विशेष अवसर पर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करने से घर में खुशहाली आती है और मानसिक शांति मिलती है.अक्षय तृतीया का आध्यात्मिक अर्थ और मान्यताएंअक्षय तृतीया का दिन इतिहास और पुराणों की कई महत्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी है. हिंदू मान्यता के अनुसार, इसी पावन तिथि पर भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था. इसे ‘युगादि तिथि’ भी कहा जाता है क्योंकि माना जाता है कि इसी दिन से त्रेता युग की शुरुआत हुई थी.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन महर्षि वेदव्यास ने महाभारत सुनानी शुरू की थी और भगवान गणेश ने उसे लिखना आरंभ किया था. इस तिथि का संबंध श्रीकृष्ण से भी है उन्होंने इसी दिन पांडवों को ‘अक्षय पात्र’ भेंट किया था और सुदामा की निर्धनता भी इसी दिन दूर की थी. ये सभी कथाएं हमें सिखाती हैं कि सच्ची भक्ति और अच्छे कर्मों से जीवन में कभी न समाप्त होने वाले सुख की प्राप्ति होती है.अनंत फल पाने के लिए इस दिन क्या करें?इस पावन दिन पर किए गए कुछ विशेष कार्य जीवन को सुखद बनाने में मदद करते हैं. अक्षय तृतीया पर दान का सबसे अधिक महत्व है. गर्मी के समय में जल, गुड़, सत्तू या पंखे का दान करना बहुत अच्छा माना जाता है. भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा में पीले फूलों और तुलसी दल का उपयोग करना चाहिए, जिससे घर में सकारात्मकता बढ़ती है. सोने या चांदी की वस्तु खरीदना भी शुभ माना जाता है, लेकिन अगर यह संभव न हो, तो केवल मिट्टी का एक घड़ा खरीदना भी सौभाग्य लाने वाला होता है. अपनी मधुर वाणी से दूसरों का सम्मान करें और कड़वी बातों से पूरी तरह दूर रहें. यह सादगी भरा व्यवहार ही हमें असल में मानसिक सुकून की ओर ले जाता है.सात्विक जीवन और सुखद भविष्य के लिए नेक संकल्पअक्षय तृतीया का पर्व हमें यह समझाता है कि असली संपत्ति हमारे अच्छे विचार और पुण्य कर्म हैं. इस दिन किसी की बुराई करने या मन में गलत ख्याल लाने से बचना चाहिए ताकि हमारे पुण्य का नाश न हो. सात्विक भोजन ग्रहण करने और भगवान के नाम का जाप करने से मानसिक तनाव दूर होता है और काम करने की नई शक्ति मिलती है. अपनी मेहनत पर भरोसा रखना और जरूरतमंदों की सेवा करना ही हमें एक बेहतर इंसान बनाता है. जब हम पवित्र भाव से इस दिन का स्वागत करते हैं, तो हमारे सभी काम बनने लगते हैं और घर में सुख का वास होता है. यह दिन आत्म-चिंतन करने और अपने जीवन को सही दिशा देने के लिए सबसे शुभ है.
- अक्षय तृतीया को 19 अप्रैल को मनाया जाएगा. इस साल की अक्षय तृतीया एक दुर्लभ खगोलीय संयोग के कारण विशेष महत्व रखती है. ज्योतिष के अनुसार, इस दिन सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में और चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में विराजमान रहेंगे. यह विशेष स्थिति एक शक्तिशाली ‘अक्षय योग’ का निर्माण कर रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय योग में शुरू किए गए किसी भी कार्य का फल कभी समाप्त नहीं होता. 2026 के इस विशेष दिन पर ग्रहों की वापसी चार राशियों के जातकों के जीवन में आमूलचूल परिवर्तन लाएगी. राजसी सुख के साथ-साथ आपकी जेबें धन से भरी रहेंगी.आइए जानते हैं कि मेष, वृषभ, सिंह और वृश्चिक राशि के लोगों क्या फायदा पहुंचने वाला है.मेष राशिअक्षय योग के प्रभाव से मेष राशि के जातकों का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ेगा. आपके साहस और कार्यक्षेत्र में निपुणता से उच्च अधिकारियों का ध्यान आकर्षित होगा, जिससे पदोन्नति की प्रबल संभावना है. इतना ही नहीं, इस दौरान आपकी आय में भी वृद्धि होगी. ज्योतिष के अनुसार, व्यापारियों को नए निवेशों से बड़ा लाभ प्राप्त हो सकता है.वृषभ राशिचूंकि इस राशि का स्वामी चंद्रमा है इसलिए अक्षय तृतीया आपके लिए शुभ है. जमीन या घर खरीदने जैसे आपके लंबे समय से संजोए सपने पूरे हो सकते हैं. पारिवारिक विवाद सुलझेंगे और मन को शांति मिलेगी. भाग्य का पहिया इतना अनुकूल रहेगा कि आप किसी भी नए उद्यम में अद्भुत सफलता प्राप्त करेंगे.सिंह राशिसिंह राशि के जातकों के लिए आज का दिन शुभ रहने वाला है. सरकारी कामकाज या लंबित कानूनी मामलों का तुरंत समाधान हो जाएगा. बड़े व्यापारिक सौदे करने का यह सबसे अच्छा समय है. समाज में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ने की प्रबल संभावना है.वृश्चिक राशिवृश्चिक राशि के जातकों को आर्थिक उन्नति के मामले में सबसे अधिक लाभ हो सकता है. पैतृक संपत्ति से बड़ी धनराशि प्राप्त होने की संभावना है. नौकरी की तलाश करने वालों के लिए उत्कृष्ट अवसर मिलेंगे. इस योग के प्रभाव से विदेश यात्रा की आपकी इच्छा भी पूरी हो सकती है.-----
- अक्षय तृतीया पर बद्रीनाथ, काशी विश्वनाथ, जगन्नाथ पुरी, केदारनाथ और महालक्ष्मी मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है।अक्षय तृतीया हिंदू धर्म का एक बेहद शुभ पर्व माना जाता है, जिसे सुख-समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य कभी खत्म नहीं होता और उसका फल जीवनभर मिलता रहता है। यही कारण है कि लोग इस दिन सोना खरीदने, दान करने और खासतौर पर मंदिरों में पूजा करने को बेहद शुभ मानते हैं।भारत में ऐसे कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जहां अक्षय तृतीया के दिन विशेष पूजा और दर्शन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन इन धार्मिक स्थलों पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है।अगर आप भी इस अक्षय तृतीया को खास बनाना चाहते हैं, तो इस लेख में हम आपको भारत के कुछ प्रमुख मंदिरों के बारे में बताएंगे, जहां पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति मानी जाती है। साथ ही यह एक शानदार ट्रैवल एक्सपीरियंस भी बन सकता है। अक्षय तृतीया पर इन मंदिरों की यात्रा न सिर्फ धार्मिक आस्था को मजबूत करती है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक अनुभव भी देती है। यह यात्रा मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है।श्री बद्रीनाथ मंदिरअक्षय तृतीया के दिन बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खुलते हैं, जो इसे बेहद खास बना देता है। इस दिन यहां दर्शन करना अत्यंत शुभ माना जाता है और हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।काशी विश्वनाथ मंदिरवाराणसी में स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। अक्षय तृतीया पर यहां पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।श्री जगन्नाथ मंदिरपुरी का जगन्नाथ मंदिर इस दिन विशेष अनुष्ठानों के लिए प्रसिद्ध है। यहां दर्शन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।केदारनाथ मंदिरहालांकि केदारनाथ के कपाट अलग तिथि पर खुलते हैं, लेकिन अक्षय तृतीया के आसपास इसकी यात्रा की शुरुआत करना बेहद शुभ माना जाता है--
- फेंगशुई को चीनी वास्तु शास्त्र भी कहा जाता है। इसमें भी वास्तु शास्त्र की तरह जीवन को सुखमय बनाने के नियम बताए गए हैं। अगर घर में पारिवारिक विवाद खत्म नहीं हो रहा है, तो आप इससे छुटकारा पाने के लिए कुछ फेंगशुई टिप्स अपना सकते हैं। मान्यता है कि अगर आप अपने घर में फेंगशुई के नियमों का ध्यान रखते हैं, तो इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। आज हम आपको घर से नेगेटिविटी दूर करने के कुछ फेंगशुई टिप्स बताने जा रहे हैं।मुख्य द्वार का ख्यालफेंगशुई में घर के मुख्य द्वार को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि मुख्य द्वार से ही घर में ऊर्जाएं प्रवेश होती है। अगर आप चाहते हैं कि घर में पॉजिटिव एनर्जी जाए, तो दरवाजे को हमेशा साफ रखें।इन बातों का रखें ध्यानइस बात का भी ध्यान रखें कि आपका मुख्य द्वार जर्जर हालात में नहीं होना चाहिए और न ही मेन गेट पर नेम प्लेट टूटी हुई होनी चाहिए। मुख्य द्वार पर फालतू का सामान रखने से भी बचना चाहिए। इससे आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है, जिससे लड़ाई-झगड़े की स्थिति में आपको लाभ देखने को मिल सकता है।कछुए की मूर्तिघर में बिना वजह के लड़ाई-झगड़ा होता है, तो आप फेंगशुई में बताए गए ये उपाय कर सकते हैं। आपको घर में कछुए की मूर्ति रखने से फायदा मिल सकता है। फेंगशुई के अनुसार, कछुए को सही स्थान और सही प्रकार रखना सबसे महत्वपूर्ण होता है। पौराणिक ग्रंथों और हिंदू धर्म में कछुए को सुख-समृद्धि देने वाला माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, विष्णुजी ने स्वयं कच्छप अवतार लिया था। साथ ही, कछुए को शांत जीव माना जाता है।फेंगशुई कछुआ रखने के नियममान्यता है कि उत्तर दिशा माता लक्ष्मी की होती है। ऐसे में कछुए को अपने घर में उत्तर दिशा में ही रखना चाहिए। मान्यता है कि उत्तर दिशा में कछुआ रखने से शत्रुओं का भी नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।कपूर के उपायों से लाभफेंगशुई के मुताबिक घर में कपूर जलाने से भी सकारात्मकता बढ़ती है। साथ ही घर में खुशबूदार चीजें जैसे मोमबत्तियां, फूलदान व क्रिस्टल बॉल आद भी रख सकते हैं, जिससे माहौल में शांति बनी रहती है।कौन सा प्लांट लगाएंइसके साथ ही फेंगशुई में माना गया है कि मनी प्लांट, जेड प्लांट और बैम्बू ट्री को घर में रखने से नकारात्मकता दूर होती है। फेंगशुई में माना गया है कि आपके घर में यदि घर में टपकता हुआ पानी, टूटी घड़ी, बर्तन, आइना, खराब पड़े जूते या फिर इलेक्ट्रॉनिक सामान आदि रखा हुआ है, तो इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। ऐसे में इन चीजों को या तो तुरंत ठीक करवा लेना चाहिए या फिर हटा देना चाहिए।
- वास्तु शास्त्र की ही तरह फेंगशुई चीन की प्राचीन विद्या है, जो घर में ऊर्जा (Chi) के संतुलन को बनाए रखने पर जोर देती है.कहा जाता है कि हमारे घर में रखी हर एक चीज घर के माहौल और परिवार के मनोबल पर गहरा असर डालती है. अगर घर में अशांति, लड़ाई-झगड़ा या नकारात्मक ऊर्जा बढ़ रही है, तो इसका एक कारण गलत या खराब चीजें घर में रखना भी हो सकता है. इसलिए, फेंगशुई के अनुसार कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें घर से हटाकर शांति, सकारात्मकता और सुख-समृद्धि लाई जा सकती है.1. टूटी हुई घड़ीटूटी हुई या बंद पड़ी घड़ी को घर में रखना शुभ नहीं माना जाता. फेंगशुई के अनुसार घड़ी समय और ऊर्जा का प्रतीक होती है. अगर यह बंद होती है, तो यह रुकावट, धीमी चाल और नकारात्मक ऊर्जा का संकेत देती है. इसलिए टूटी घड़ी को तुरंत घर से बाहर निकाल देना चाहिए.2. टूटे हुए बर्तनघर में फालतू या टूटा हुआ बर्तन रखना न केवल बेकार सामान जमा करने जैसा लगता है, बल्कि इससे परिवार के रिश्तों में तनाव और नकारात्मक सोच भी बढ़ सकती है. फेंगशुई में कहा गया है कि जैसे घर की व्यवस्था साफ और व्यवस्थित होती है, वैसे ही जीवन में सुख-शांति बनी रहती है.इसलिए पुराने बर्तन को घर से हटा दें.3. टूटा हुआ शीशा / कांचटूटा हुआ शीशा या कांच सबसे अशुभ माना जाता है. इसकी ऊर्जा में नेगेटिव वाइब्स और तनाव भी होता है. फेंगशुई के हिसाब से ऐसे टूटे शीशे या ग्लास को घर से बाहर निकाल देना चाहिए ताकि सकारात्मक ऊर्जा का मार्ग खुल सके.4. टूटी हुई चप्पल / जूतेकई लोग टूटे हुए जूते या स्लीपर को घर में रख देते हैं, सोचते हैं कि शायद बाद में काम आ जाएं. लेकिन फेंगशुई के अनुसार ऐसे टूटे चप्पल घर की ऊर्जा को भारी बनाते हैं और मनमुटाव, चिंता और रिश्तों में खटास को बढ़ा सकते हैं.इन्हें तुरंत हटाना चाहिए.क्यों यह काम करता है?फेंगशुई विद्या के अनुसार, घर में अव्यवस्थित, टूटी-फूटी और पुरानी चीजें जमा होने से ऊर्जा का प्रवाह बाधित होता है. यह ऊर्जा घर के सदस्यों के मनोबल, रिश्तों और मानसिक स्थिति पर असर डालती है.जब आप इन चीजों को बाहर निकालते हैं, तो घर में पॉजिटिव एनर्जी का मार्ग खुलता है, जिससे तनाव, झगड़े और नकारात्मकता कम होती है और सुख-शांति बनी रहती है.
- हस्त रेखा शास्त्र में हाथ की रेखाओं के अलावा नाखूनों का भी खास महत्व है। हाथ के नाखूनों की बनावट भी व्यक्ति के व्यक्तित्व व स्वभाव से जुड़े कई राज खोलते हैं। हर व्यक्ति के हाथ के नाखूनों की बनावट अलग-अलग होती है। कुछ लोगों के नाखून छोटे, किसी के लंबे या चौड़े होते हैं। जानें हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हाथ के नाखूनों की बनावट से क्या संकेत मिलते हैं।चौड़े नाखूनकहते हैं कि जिन लोगों के हाथ के नाखून चौड़े होते हैं वे बुद्धि के धनी होते हैं। ऐसे लोगों में सोचने व फैसला लेने की क्षमता अधिक होती है। ये अपने सभी कार्यों में सफलता पाते हैं।गोलाकार नाखूनहस्त रेखा शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों के नाखून गोलाकार होते हैं, वे व्यक्ति सशक्त विचारों वाले एवं तुरंत फैसला लेने वाले होते हैं। ऐसे व्यक्ति जो भी फैसला लेते हैं उन पर अमल करना भी जानते हैं।चौकोर नाखूनहस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, चौकोर नाखून वाले व्यक्ति स्वभाव से गंभीर माने जाते हैं। इन लोगों में लीड करने की क्षमता होती है। कहते हैं कि लोग राजनीति में सफल होते हैं।लंबे नाखूनहस्त रेखा शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों के लंबे नाखून होते हैं, वे रोमांस से भरपूर होते हैं। यह स्वभाव से भोले और विनम्र होते हैं। यह लोग आसानी से दूसरों पर भरोसा कर लेते हैं।पूर्ण नाखूनहस्त रेखा शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों के हाथ के नाखूनों चौड़ाई की अपेक्षा मामूली लंबे होते हैं और अपनी प्राकृतिक चमक लिए हुए होते हैं। ऐसे व्यक्ति उत्तम विचारों वाले और निरंतर आगे की ओर बढ़ते रहने की भावना रखने वाले होते हैं। ऐसे लोग सामाजिक मान-प्रतिष्ठा पाते हैं।--
- हिंदू धर्म में हस्तरेखा शास्त्र को हमेशा से खास महत्व दिया गया है। माना जाता है कि इंसान की हथेली में मौजूद रेखाएं उसके स्वभाव, भाग्य, करियर और धन योग तक का संकेत देती हैं। यही वजह है कि वर्षों से लोग अपनी हथेली की रेखाओं को देखकर भविष्य का आकलन करते आए हैं। खासकर वे रेखाएं, जो धन और भाग्य से जुड़ी होती हैं, उन्हें बेहद शुभ माना जाता है। आज हम समझेंगे कि किस प्रकार की रेखाएं यह बताती हैं कि व्यक्ति जीवन में कब और कैसे धनवान बन सकता है।भाग्य रेखा क्या होती है?हर व्यक्ति की भाग्य रेखा अलग होती है। किसी की सीधी, किसी की टूटी हुई, किसी की कटी-फटी तो किसी की पूरी तरह टेढ़ी-मेढ़ी। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, वह रेखा जो कलाई के पास से शुरू होकर सीधे मध्यमा उंगली (सबसे लंबी उंगली) की तरफ जाती है, वही भाग्य रेखा कहलाती है। इस रेखा की मजबूती और गहराई यह बताती है कि व्यक्ति की किस्मत उसे कितनी दूर तक ले जाएगी और जीवन में कब अवसर मिलेंगे। अगर आपकी भाग्य रेगा सीधी और गहरी है तो यह अच्छे करियर और स्थिर सफलता का संकेत है। अगर टूटी या कटी हुई रेखा है तो ये जीवन में उतार-चढ़ाव और संघर्ष का संकेत है और अगर टेढ़ी-मेढ़ी रेखा है तो ये जीवन में अस्थिरता, लेकिन अचानक मिलने वाले अवसर का संकेत देती है।धन रेखा कहाँ होती है?हथेली में एक विशेष रेखा होती है जिसे धन रेखा कहा जाता है। जब आप अपनी हथेली को देखें, तो अनामिका ऊंगली यानी रिंग फिंगर के नीचे सूर्य पर्वत से निकलकर जो रेखा हृदय रेखा को पार करते हुए मस्तिष्क रेखा की ओर बढ़ती है, उसे धन रेखा माना जाता है।ऐसी रेखा वाले लोग माने जाते हैं बेहद भाग्यशालीहस्तरेखा शास्त्र में एक विशेष संयोजन को अत्यंत शुभ कहा गया है। अगर किसी व्यक्ति की रेखा कलाई के पास से शुरू होकर सीधे शनि पर्वत (मध्यमा उंगली के नीचे) तक जाती हो और फिर हल्का-सा मुड़कर गुरु पर्वत (तर्जनी उंगली के नीचे) की ओर पहुंच जाए, तो यह बहुत ही दुर्लभ और शुभ योग माना जाता है। ऐसे लोग बेहद भाग्यशाली होते हैं।
- 3 मार्च 2026 का दिन ज्योतिष दृष्टि से बेहद खास है। इस तिथि पर साल का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है। यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। बड़ी बात यह है कि, यह भारत में नजर आएगा और इसका प्रभाव भी मान्य होगा। ज्योतिषियों के मुताबिक, यह चन्द्र ग्रहण सूर्य की राशि सिंह में लग रहा है। सिंह राशि में पहले से केतु हैं और इसलिए यहां चंद्रमा से उनकी युति हो रही है, जिससे ग्रहण योग भी बन रहा है। ऐसे में यह समय 12 राशियों के जीवन पर असर डाल सकता है। इस दौरान कुछ राशियों को शुभ परिणाम, तो कुछ जातकों के तनाव में वृद्धि हो सकती हैं। ऐसे में आइए चंद्र ग्रहण का सभी राशियों पर प्रभाव जानते हैं।मेष राशिमेष राशि वालों के लिए समय थोड़ा सतर्क रहने वाला रहेगा।आपको निवेश से लेकर यात्रा पर जाने तक विशेष सावधानियां रखनी होगी।किसी भी कार्य में जल्दबाजी करना आपके तनाव को बढ़ा सकता है।वृषभ राशिआपको धन लाभ और नए घर की प्राप्ति के योग बन सकते हैं, क्योंकि समय लाभदायक साबित हो सकता है।रुके हुए कार्य पूरे होंगे और आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है।विवाह के योग है और परिवार का सहयोग भी मिलेगा।मिथुन राशिमिथुन राशि वालों को नई नौकरी की प्राप्ति होगी।कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।किसी पर अधिक भरोसा करना आपके दुखों को बढ़ा सकता है।व्यापार करने वालों के कार्यों का विस्तार संभव है।कर्क राशिकर्क राशि वालों को अलर्ट रहने की जरूरत रहेगी।खासकर धन से जुड़े मामलों में सतर्क रहें।इस समय भूलकर भी आप भावनाओं में आकर कोई बड़ा निर्णय लेने से बचें।सिंह राशिसिंह राशि वालों की परेशानियां बढ़ सकती हैं और उनके विरोधी सक्रिय रह सकते हैं।सेहत का भी ध्यान रखना आवश्यक रहेगा।आर्थिक लाभ भी संभव है परंतु खर्च भी अधिक रहेगा।कन्या राशिकन्या राशि के लिए समय खास रहेगा और मेहनत का मनचाहा फल प्राप्त होगा।करियर में तरक्की के योग बन सकते हैं।पारिवारिक समस्याओं के चलते परेशान होना पड़ सकता है।तुला राशितुला राशि वालों को सफलता मिलने के संकेत हैं।सेहत पहले से बेहतर होगी और लंबे समय से चल रही परेशानियां दूर हो सकती हैं।समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा और स्वयं को भाग्यशाली महसूस करेंगे।वृश्चिक राशिवृश्चिक राशि वालों के लिए समय सामान्य रहेगा।नियमित कार्यों पर ध्यान दें और विवादों से दूर रहें।धन लाभ हो सकता है पर लेनदेन सावधानी से करें।धनु राशिधनु राशि वालों के जीवन में कुछ बदलाव आ सकते हैं।शुरुआत में थोड़ा दबाव महसूस हो सकता है।कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने का समय होगा।मकर राशिमकर राशि वालों को लाभ मिलने की संभावना है।व्यापार और नौकरी दोनों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।समय आपके लिए कई नई परेशानियां लेकर आ सकता है।कुंभ राशिकुंभ राशि वालों को भी लाभ के संकेत हैं।नए अवसर मिल सकते हैं और आय के नए स्रोत बन सकते हैं।लेकिन लव पार्टनर के साथ गलतफहमियां पनप सकती हैं।मीन राशिमीन राशि वालों को सावधानी रखने की आवश्यकता है।सेहत और खर्चों पर विशेष ध्यान दें।अचानक से कुछ एक बड़े खर्च आपके सामने आएंगे।
- अष्टधातु के छल्ले और अंगूठी का ज्योतिषशास्त्र में खास महत्व बताया गया है। यह आठ धातुओं सोना, तांबा, पीतल, चांदी, सीसा, लोहा, कांसा और जस्ता से मिलकर बना होता है। इन आठों धातुओं अलग-अलग महत्व होता है जो किसी न किसी ग्रह से संबंधित होता है। ऐसे में अष्टधातु के छल्ले को विधिपूर्वक और नियमों का ख्याल रखते हुए धारण करने से कुंडली में ग्रहों की स्थिति बेहतर होती है और उनके प्रतिकूल प्रभाव से भी राहत पाई जा सकती है। यह छल्ला जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इसे धारण करने से धन संबंधी समस्याओं से भी मुक्ति मिल सकती है और फिजूलखर्ची दूर होने लगती है।ऐसे में आइए विस्तार से जानें की इसे कैसे, कब, किसे और किस दिन पहनना चाहिए। साथ ही, अष्टधातु का छल्ला धारण करने के फायदे भी जानें...अष्टधातु का छल्ला पहनने के नियमशास्त्रों के अनुसार अष्टधातु से निर्मित छल्ला या अंगूठी शनिवार और मंगलवार के दिन धारण करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, इसे पूर्णिमा और शुक्ल पक्ष में शुभ मुहूर्त में धारण करना अत्यंत लाभदायक माना गया है। इससे जातक के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं।अष्टधातु के छल्ले को अनामिका उंगली में पहनना सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा, आप यह छल्ला तर्जनी उंगली में भी धारण कर सकते हैं, इसे गुरु की उंगली माना जाता है। इससे ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव से बचाव होता है।अष्टधातु का छल्ला धारण करने से पहले स्नानादि करने के बाद साफ वस्त्र धारण करने चाहिए। फिर, पूजा-पाठ करके अपने कुल देवी-देवता, भाग्येश अथवा लग्नेश के मंत्रों का जाप करके छल्ला धारण करना चाहिए। इसे पूर्व दिशा की ओर मुख करके पहनना उत्तम माना जाता है।शनिवार या मंगलवार के दिन छल्ले को धारण करने से पहले इसे गंगाजल से शुद्ध भी अवश्य करना चाहिए और धूप अगरबत्ती दिखाकर अष्टधातु का छल्ला या अंगूठी धारण करें। इसे धारण करने वालों को तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए।मेष, वृश्चिक, धनु, मकर और कुंभ आदि राशि वालों को अष्टधातु का छल्ला अवश्य धारण करना चाहिए। ऐसा करने से बेहद शुभ फल की प्राप्ति होती है। वहीं, जिनकी कुंडली में राहु की स्थिति अशुभ हो वे भी इस छल्ले को पहन सकते हैं।अष्टधातु का छल्ला धारण करने से पहले ज्योतिषी को अपनी कुंडली जरूर दिखानी चाहिए। उनकी सलाह लेकर सही धातु धारण करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।अष्टधातु का छल्ला पहनने के फायदेज्योतिषशास्त्र में अष्टधातु के छल्ले को धारण करना बहुत शुभ माना जाता है। इससे कुंडली में ग्रहों के अशुभ प्रभावों को कम किया जा सकता है और उनकी स्थिति भी सही की जा सकती है। अगर आप करियर, नौकरी या कारोबार में समस्याओं और बाधाओं का सामना कर रहे हैं तो उससे भी यह निजात दिला सकता है। इससे जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और आर्थिक तंगी से छुटकारा मिल सकता है। साथ ही, फिजूलखर्ची कम होने लगती है। लेकिन अष्टधातु का छल्ला धारण करने से पहले नियमों का ध्यान जरूर रखना चाहिए। इससे जातक को जीवन में सुखों की प्राप्ति हो सकती है और सफलता के मार्ग खुलते हैं।
- -जानिये अपने मंदिरों कोनौलखा मंदिर' भारत में कई स्थानों पर हैं, जिनमें मुख्य रूप से बेगूसराय (बिहार) और देवघर (झारखंड) के मंदिर प्रसिद्ध हैं, जो अपनी अद्भुत वास्तुकला और धार्मिक महत्व के लिए जाने जाते हैं। बाबा वैद्यनाथ की नगरी में अपनी सुंदरता एवं वास्तुकला का अनूठा संगम नौलखा मंदिर देवघर शहर के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों में से एक है।सभी ने नौलखा हार के बारे में सुना होगा, परंतु मंदिर का यह नाम कैसे पड़ा इसके पीछे एक रोचक इतिहास है। भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप को समर्पित यह मंदिर नौ-लाख रुपये की लागत से बना अतः यह जनमानस के बीच नौलखा मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। दक्षिण भारतीय मंदिरों जैसी शैली, ग्रेनाइट और संगमरमर से निर्मित इस मंदिर में विग्रह स्वरूप भगवान श्री कृष्ण बाल रूप में विराजमान हैं, साथ ही साथ संत बालानंद ब्रह्मचारी जी की एक मूर्ति भी स्थापित है। अतः मंदिर का वास्तविक नाम गुरु और गोविंद के स्वरूप को समर्पित जुगल मंदिर है।नौलखा मंदिर की ऊंचाई 146 फीट है। मंदिर झारखंड के देवघर शहर से सिर्फ 2 किमी दूर स्थित है तथा अपनी स्थापत्य कला की सुंदरता के लिए भक्तों एवं पर्यटकों दोनों के ही बीच अत्यधिक प्रसिद्ध है। मंदिर की वास्तुकला कोलकाता में बेलूर मठ अर्थात रामकृष्ण मिशन के मुख्यालय से प्रेरित जान पड़ती है।प्रचलित नाम: जुगल मंदिर, नौलखा मंदिर देवघर, नौलक्खा मंदिरदर्शन समय7.00 AM - 12.00 PM, 2.00 PM - 7:30 PMनौलखा मंदिर देवघर का इतिहासपथूरिया घाट की रानी श्रीमती चरुशिला ने अपने पति अक्षय घोष और बेटे जतिंद्र घोष को कम उम्र में ही खो दिया था। मौत की इन घटनाओं ने रानी को अत्यधिक दुखी कर दिया। शांति की तलाश में रानी ने अपना घर छोड़ दिया और संत श्री बालानंद ब्रह्मचारी से मुलाकात के लिए देवघर पहुँची और बालानंद ब्रह्मचारी के आश्रम में रहीं। उनकी शिक्षा और उपदेशों से प्रभावित होकर चरुशिला जी महाराज जी की शिष्या बन गईं। श्री बालानंद ब्रह्मचारी जी ने उन्हें भगवान श्री कृष्ण का एक मंदिर बनाने की प्रेरणा दी। मंदिर के निर्माण के लिए रानी चरुशिला ने 9 लाख रुपये का अभूतपूर्व दान दिया। 1941 के लगभग 9 लाख रुपये अपने में ही एक बहुत बड़ी राशि हुआ करती थी।1. बेगूसराय का नौलखा मंदिर (बिहार)स्थान: बिशनपुर, बेगूसराय.निर्माण: 1953 में संत महावीर दास द्वारा.खासियत: राजस्थानी वास्तुकला का प्रभाव, सफेद संगमरमर की मूर्तियां, सुंदर नक्काशी, और शहर का विहंगम दृश्य.2. अन्य नौलखा मंदिरबक्सर (बिहार): दक्षिण भारतीय शैली और सुंदर मूर्तियों वाला एक और धार्मिक स्थल.गुजरात (घुमली): 12वीं सदी का सूर्य मंदिर.
- मूलांक 1 – सूर्य का वर्षमूलांक 1 वाले 2026 में लीडरशिप और तरक्की के राजा बनेंगे। लकी नंबर 1, 3, 5 आपके लिए धन और सम्मान लाएंगे। शादी या रिलेशनशिप में मूलांक 2, 4 और 7 सबसे परफेक्ट हैं। ये जोड़ी आपको सपोर्ट करेगी और जीवन में बैलेंस लाएगी। मूलांक 1 की जोड़ी में हमेशा रोमांस और तरक्की बनी रहती है।मूलांक 2 – चंद्रमा की कृपामूलांक 2 वाले 2026 में भावनात्मक स्थिरता और पारिवारिक सुख पाएंगे। लकी नंबर 2, 4, 6 आपके लिए शांति और धन लाएंगे। शादी के लिए मूलांक 1, 4 और 6 सबसे अच्छे हैं। ये जोड़ी आपको समझेगी और जीवन में मिठास घोलेगी। मूलांक 2 की जोड़ी में प्यार गहरा और लंबा चलता है।मूलांक 3 – गुरु की कृपामूलांक 3 वाले 2026 में क्रिएटिविटी और प्रसिद्धि पाएंगे। लकी नंबर 3, 6, 9 आपके लिए धन और ज्ञान लाएंगे। शादी के लिए मूलांक 3, 6 और 9 सबसे परफेक्ट हैं। ये जोड़ी आपको सपोर्ट करेगी और जीवन में रंग भरेगी। मूलांक 3 की जोड़ी में हमेशा खुशी और उत्साह रहता है।मूलांक 4 – राहु का प्रभावमूलांक 4 वाले 2026 में मेहनत का फल पाएंगे। लकी नंबर 4, 5, 8 आपके लिए स्थिरता और धन लाएंगे। शादी के लिए मूलांक 1, 2 और 7 सबसे अच्छे हैं। ये जोड़ी आपको सपोर्ट करेगी और जीवन में बैलेंस लाएगी। मूलांक 4 की जोड़ी में विश्वास और मजबूती रहती है।मूलांक 5 – बुध की कृपामूलांक 5 वाले 2026 में ट्रैवल और एडवेंचर पाएंगे। लकी नंबर 5, 1, 6 आपके लिए मौके और धन लाएंगे। शादी के लिए मूलांक 3, 5, 6 और 8 सबसे परफेक्ट हैं। ये जोड़ी आपको एक्साइटमेंट और सपोर्ट देगी। मूलांक 5 की जोड़ी में कभी बोरियत नहीं आती है।मूलांक 6 – शुक्र का प्रभावमूलांक 6 वाले 2026 में लव और लग्जरी पाएंगे। लकी नंबर 6, 3, 9 आपके लिए सुख और धन लाएंगे। शादी के लिए मूलांक 3, 6 और 8 सबसे अच्छे हैं। ये जोड़ी आपको प्यार और लग्जरी देगी। मूलांक 6 की जोड़ी में हमेशा रोमांस और सुख रहता है।मूलांक 7 – केतु का प्रभावमूलांक 7 वाले 2026 में आध्यात्म और ज्ञान पाएंगे। लकी नंबर 7, 2, 5 आपके लिए शांति और धन लाएंगे। शादी के लिए मूलांक 1 और 4 सबसे परफेक्ट हैं। ये जोड़ी आपको गहराई और समझ देगी। मूलांक 7 की जोड़ी में आत्मिक जुड़ाव रहता है।मूलांक 8 – शनि की कृपामूलांक 8 वाले 2026 में मेहनत का बड़ा फल पाएंगे। लकी नंबर 8, 4, 5 आपके लिए शक्ति और धन लाएंगे। शादी के लिए मूलांक 1, 3, 5 और 6 सबसे अच्छे हैं। ये जोड़ी आपको सपोर्ट और ताकत देगी। मूलांक 8 की जोड़ी में मजबूती और समृद्धि रहती है।मूलांक 9मूलांक 9 वाले 2026 में दान और सेवा से प्रसिद्धि पाएंगे। लकी नंबर 9, 3, 6 आपके लिए सम्मान और धन लाएंगे। शादी के लिए मूलांक 3 (क्रिएटिव), 6 (रोमांटिक) और 9 (धार्मिक) सबसे परफेक्ट हैं। ये जोड़ी आपको ऊर्जा और प्रेम देगी। मूलांक 9 की जोड़ी में हमेशा सेवा और सुख रहता है। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।--


















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