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- नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को सेवा क्षेत्र में महाशक्ति बनाने के लिए रविवार को राज्यों से विनिर्माण को बढ़ावा देने और सेवा क्षेत्र को मजबूत बनाने समेत विभिन्न आह्वान किए। प्रमुख सचिवों के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत के पास दुनिया का खाद्य भंडार बनने की क्षमता है और देश को उच्च मूल्य वाली कृषि, बागवानी, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन की दिशा में बढ़ना चाहिए ताकि यह एक प्रमुख खाद्य निर्यातक बन सके। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब भारत अगली पीढ़ी के सुधारों को देख रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत "रिफॉर्म एक्सप्रेस" पर सवार हो चुका है और इसका प्राथमिक इंजन देश के युवा और विभिन्न आयुवर्ग की जनसंख्या है। यही कारण है कि सरकार का यह प्रयास है कि इस जनसंख्या को सशक्त किया जाए। मोदी ने ‘एक्स' पर किए गए सिलसिलेवार पोस्ट में कहा, "राज्यों से विनिर्माण और व्यापार में सुगमता को बढ़ावा देने और सेवा क्षेत्र को मजबूत बनाने का आह्वान किया। आइए हम भारत को एक वैश्विक सेवा महाशक्ति बनाने का लक्ष्य रखें।” यह तीन दिवसीय सम्मेलन 26 दिसंबर को शुरू हुआ जिसका विषय ‘विकसित भारत के लिए मानव पूंजी' है।मोदी ने कहा कि उन्होंने इस बारे में अपने विचार साझा किए कि केंद्र और राज्य मिलकर भारत को ‘आत्मनिर्भर' बनाने, गरीबों को सशक्त करने और ‘विकसित भारत' का सपना साकार करने के लिए किस तरह से काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘शासन में गुणवत्ता के महत्व पर बात की। शासन में गुणवत्ता, सेवाओं की उपलब्धता में गुणवत्ता, और निर्माण में गुणवत्ता।'' मोदी ने कहा कि उन्होंने शासन और सेवा वितरण के मामलों में एक नयी कार्य संस्कृति स्थापित करने के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों पर प्रकाश डाला।
- नयी दिल्ली. भारत की स्वास्थ्य प्रणाली गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की महामारी के कारण चरमरा रही है, ऐसे में विशेषज्ञों ने ‘‘माइक्रो-हॉस्पिटल'' स्थापित करने की वकालत की है। उनका कहना है कि इससे बिखरी हुई तृतीयक उपचार प्रणाली की जगह विशेषज्ञों द्वारा संचालित समन्वित इलाज और कम प्रतीक्षा समय के माध्यम से ‘एनसीडी' से होने वाली मौतों को कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में होने वाली सभी मौतों में से अनुमानित 63 प्रतिशत मौतें गैर-संचारी रोगों के कारण होती हैं। अस्पताल के बिस्तरों का घनत्व 1,000 की जनसंख्या पर मात्र 0.55 है, जिसके कारण अस्पतालों में भीड़भाड़, लंबे समय तक प्रतीक्षा और देखभाल की गुणवत्ता में भिन्नता होती है। बिस्तरों का यह घनत्व विश्व स्वास्थ्य संगठन के 1,000 की आबादी पर तीन बिस्तर के मानक से काफी कम है। विशेषज्ञों ने कहा कि विश्वस्तरीय तकनीक और बुनियादी ढांचे के बावजूद भारत की स्वास्थ्य प्रणाली प्राथमिक क्लीनिक और अत्यधिक भीड़ वाले 500-बिस्तरों वाले अस्पतालों के बीच एक बड़े ‘‘मध्य-स्तरीय अंतर'' (माइक्रो-हॉस्पिटल) से ग्रस्त है। इसके कारण उपचार व्यवस्था खंडित हो रही है और चिकित्सकों एवं मरीजों के बीच विश्वास की कमी लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य और निवारक देखभाल की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए आयोजित एक स्वास्थ्य वार्ता 'हील वनहेल्थ कनेक्ट सीरीज' को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के पूर्व महानिदेशक स्वास्थ्य सेवा (डीजीएचएस) डॉ. जगदीश प्रसाद ने कहा, ‘‘भारत में चिकित्सक और तकनीक तो हैं, लेकिन वास्तव में निरंतर और समन्वित देखभाल की कमी है।'' पैसिफिक वनहेल्थ के सह-संस्थापक और अध्यक्ष डॉ. स्वदीप श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘स्वास्थ्य सेवा का भविष्य बड़े अस्पताल बनाने में नहीं है; यह बेहतर ढंग से समन्वित प्रणालियों के निर्माण में है। ‘माइक्रो-हॉस्पिटल' साधारण रूप से छोटे अस्पताल नहीं होते, बल्कि इन्हें मरीजों और समुदायों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विशेष रूप से तैयार किया जाता है, जिससे इलाज की बिखराव वाली व्यवस्था कम होती है और विशेषज्ञों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित होती है।''
- चेन्नई. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र पर तीसरा प्रक्षेपण पैड विकसित करने की प्रक्रिया में है और वर्तमान में इसके लिए उपयुक्त कंपनियों की तलाश की जा रही है। यह जानकारी एक शीर्ष वैज्ञानिक ने दी है। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से करीब 135 किलोमीटर पूर्व में स्थिति श्रीहरिकोटा परिसर 175 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष एजेंसी को विभिन्न प्रक्षेपण यानों के जरिये उपग्रहों को कक्षा में पहुंचाने की सेवा मुहैया कराता रहा है। श्री हरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक और प्रख्यात वैज्ञानिक पद्मकुमार ईएस ने कहा कि अंतरिक्ष में विभिन्न कक्षाओं में 12,000-14,000 किलोग्राम से अधिक वजन वाले बड़े उपग्रहों को स्थापित करने की योजना पर आगे बढ़ने के लिए इसरो को बड़े प्रक्षेपण यानों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए इसरो तीसरे प्रक्षेपण पैड की योजना बना रहा है।पद्मकुमार ने कहा, ‘‘हमारी योजना चार साल में तीसरा ‘लॉन्च पैड' स्थापित कर संचालित करने की है। इसके लिए प्रक्रिया चल रही हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘हम खरीद प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं और इस विशाल परियोजना के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए उपयुक्त कंपनियों की पहचान कर रहे हैं।'' इसरो के मुताबिक, एजेंसी के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर सतीश धवन की स्मृति में पांच सितंबर, 2002 को इस अंतरिक्ष प्रक्षेपण स्थल का नाम बदलकर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) कर दिया गया था। इस अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र का परिचालन अक्टूबर 1971 में ‘रोहिणी-125' रॉकेट के प्रक्षेपण के साथ शुरू हुआ। तब से, अंतरिक्ष एजेंसी की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए यहां की सुविधाओं का धीरे-धीरे विस्तार किया गया है।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली और प्रसिद्ध उद्योगपति रतन टाटा की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। शाह ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में जेटली को एक अद्वितीय संवैधानिक और कानूनी विशेषज्ञ एवं एक उत्कृष्ट वक्ता के रूप में याद किया, जिन्होंने एक सांसद के रूप में एक अमिट विरासत छोड़ी । शाह ने कहा कि जेटली को कई ऐतिहासिक कानूनी मुद्दों में उनके योगदान के लिए याद किया जाएगा। शाह ने कहा, ‘‘अपनी कुशाग्र कानूनी सूझबूझ से पार्टी को मजबूत करने में उनकी समर्पित भूमिका समय की हर कसौटी पर खरी उतरेगी।'' गृहमंत्री ने 'एक्स' पर एक अन्य पोस्ट में कहा कि टाटा ने ईमानदारी और करुणा के साथ भारतीय उद्यम को नया रूप दिया। टाटा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शाह ने कहा, ‘‘स्वदेशी उद्योग के निर्माण से लेकर निस्वार्थ परोपकार तक, उन्होंने यह साबित कर दिया कि सच्ची सफलता राष्ट्र की सेवा में निहित है। उनकी विरासत आत्मनिर्भर भारत को प्रेरित करेगी।''
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नरसापुरम. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा विकास की सबसे मजबूत नींव है और उन्होंने विद्यार्थियों से सीखने, आत्म-सुधार व रचनात्मक सोच पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने पश्चिम गोदावरी जिले के पेडा मैनवानी लंका गांव स्थित जिला परिषद हाई स्कूल में आयोजित एक कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा ही व्यक्तियों और समाजों को सशक्त बनाती है। केंद्रीय मंत्री ने यूनियन बैंक के सहयोग से उपलब्ध कराए गए 18 लाख रुपये के कंप्यूटर, विज्ञान प्रयोगशाला और अन्य अवसंरचना सुविधाओं का उद्घाटन किया। सीतारमण ने तटीय क्षेत्र के युवाओं को आत्मविश्वास के साथ उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया और उन्हें शिक्षा व क्षेत्रीय विकास के लिए सरकारी सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को लगन से पढ़ाई करने की सलाह देते हुए उनसे राष्ट्र और राज्य की सेवा के लिए स्वयं को तैयार करने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री के ग्राम विकास संबंधी विजन का उल्लेख करते हुए सीतारमण ने कहा कि गांव में जारी पीएम विश्वकर्मा योजना प्रशिक्षण केंद्र के माध्यम से रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने पेड़ा मैनवानी लंका और अन्य गांवों के साथ लंबे समय से जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि स्थानीय महिलाओं के सशक्त सहयोग से विकास गतिविधियां निरंतर प्रगति कर रही हैं। उन्होंने कौशल विकास योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत युवाओं को 13 व्यवसायों में प्रशिक्षण दिया गया, जिससे कई युवाओं को हैदराबाद और श्री सिटी में रोजगार प्राप्त करने में मदद मिली है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना विभिन्न व्यवसायों में कौशल विकास और प्रशिक्षण प्रदान करती है, जिससे युवाओं को रोजगार के अवसर मिलते हैं तथा देश भर में उद्यमिता को बढ़ावा मिलता है।
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नयी दिल्ली. ऑस्ट्रिया और यूक्रेन ने भारत में एक सांस्कृतिक सहयोग की शुरुआत की है जो कलात्मक स्वतंत्रता, लचीलेपन और अंतर-सांस्कृतिक आदान-प्रदान की साझा अभिव्यक्ति में संगीत, साहित्य एवं संवाद को एक साथ लाता है। शुक्रवार को यहां ऑस्ट्रियाई दूतावास में ऑस्ट्रियाई-यूक्रेनी सांस्कृतिक परियोजना का उद्घाटन किया गया। भारत में यूक्रेन के दूतावास के सहयोग से यूक्रेनी संस्थान और ऑस्ट्रियाई सांस्कृतिक मंच इस परियोजना को अमलीजामा पहना रहा है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत में यूक्रेन के राजदूत ओलेक्सांद्र पोलिशचुक ने इस पहल के राजनयिक और सांस्कृतिक महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘आज शाम भारत में एक विशेष ऑस्ट्रियाई-यूक्रेनी सांस्कृतिक परियोजना आधिकारिक रूप से आरंभ हो रही है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह परियोजना यूक्रेन और ऑस्ट्रिया के विदेश मंत्रियों के बीच हुए समझौतों का परिणाम है। हम ऑस्ट्रियाई सरकार के मजबूत समर्थन और साझेदारी के लिए उनके प्रति अत्यंत आभारी हैं।'' इस कार्यक्रम में ऑस्ट्रियाई जैज़ और यूक्रेनी शास्त्रीय संगीत परंपराओं का मिश्रण प्रस्तुत किया गया। वियना स्थित जैज़ जोड़ी मिकेला रैबिट्श और रॉबर्ट पावलिक ने यूक्रेनी संगीतकार तारास फ़िलेन्को के साथ मिलकर जैज़, विश्व संगीत और शास्त्रीय संगीत का मिश्रण पेश किया।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को पश्चिमी तट पर भारतीय नौसेना की अग्रिम पंक्ति की पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर पर सवार होकर समुद्री यात्रा कीं। मुर्मू पनडुब्बी पर सवार होकर यात्रा करने वाली देश की दूसरी राष्ट्रपति हैं। इससे पहले फरवरी 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने भारतीय नौसेना की पनडुब्बी से समुद्री यात्रा की थी। अधिकारियों ने बताया कि कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे से कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी पर राष्ट्रपति मुर्मू के सवार होने के दौरान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी भी उनके साथ मौजूद थे। राष्ट्रपति सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर भी हैं।
राष्ट्रपति सचिवालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर पोस्ट कर कहा, ‘‘राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कारवार नौसेना अड्डे पर भारतीय नौसेना की स्वदेशी कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर में सवार हुईं।'' पोस्ट के साथ तस्वीरें भी साझा की गई हैं जिनमें राष्ट्रपति नौसेना की वर्दी पहनकर पनडुब्बी में प्रवेश करती और उससे पहले पहले नौसेनाकर्मियों का हाथ हिलाकर अभिवादन स्वीकार करती नजर आ रही हैं। पी75 स्कॉर्पीन परियोजना की छठी और अंतिम पनडुब्बी, आईएनएस वाघशीर को इस साल जनवरी में नौसेना में शामिल किया गया था। नौसेना अधिकारियों के मुताबिक यह दुनिया की सबसे शांत और बहु उद्देशीय डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों में से एक है। इसे कई तरह के मिशन को अंजाम देने के लिए तैयार किया गया है, जिनमें सतह पर मौजूद दुश्मन से लड़ाई, पनडुब्बी रोधी अभियान, खुफिया जानकारी जुटाना, क्षेत्र की निगरानी और विशेष अभियान शामिल हैं। यह ‘वायर-गाइडेड टॉरपीडो', पोत रोधी मिसाइलों और उन्नत सोनार प्रणालियों से लैस है। यह पनडुब्बी मॉड्यूलर निर्माण तकनीक पर आधारित है जिससे भविष्य में इसे एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) तकनीक जैसी प्रौद्योगकियों से एकीकृत करने की सहूलियत मिलती है। भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के दीर्घकालिक सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए कारवार नौसेना अड्डे को विकसित कर रही है। - पणजी । गोवा के समुद्री तटों तथा अन्य प्रमुख स्थानों पर नए साल का जश्न मनाने के लिए कम से कम पांच लाख पर्यटकों के आने की उम्मीद है। एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। राज्य पर्यटन विभाग ने दावा किया कि उत्तर गोवा के अरपोरा गांव में छह दिसंबर को एक नाइट क्लब में लगी आग की घटना का पर्यटन गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ा है। उस अग्निकांड में 25 लोगों की मौत हो गई थी। राज्य पर्यटन निदेशक केदार नाईक ने कहा कि गोवा एक सुरक्षित पर्यटन स्थल है और लोग यहां नये साल का भरपूर आनंद उठाएंगे। उन्होंने कहा, ‘‘गोवा नये साल की पूर्व संध्या के जश्न के लिए पर्यटकों का स्वागत करने को तैयार है। हमने पूरे साल राज्य में बड़ी संख्या में पर्यटकों को आते देखा है।'' नाईक ने बताया कि दिसंबर के पहले सप्ताह में उड़ानों के रद्द होने के कारण राज्य आने वाले पर्यटकों की संख्या में कमी देखी गई थी, लेकिन अब स्थिति सुधर गई है। उन्होंने कहा, ‘‘रूस और ब्रिटेन से लगातार विशेष उड़ानें संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा कुछ नये गंतव्यों के लिए भी विशेष सेवाएं शुरू की गई हैं, जो मार्च तक जारी रहेंगी।'' उत्तर गोवा के कलंगुट और बागा जैसे लोकप्रिय समुद्र तटों के साथ-साथ दक्षिण गोवा के बेनौली, माजोर्डा, कोलवा और पालोलेम में भी भारी भीड़ देखी जा रही है। घरेलू पर्यटकों के लिए भी नए साल पर गोवा पहली पसंद रहता है। कोल्हापुर से आए एक पर्यटक वैभव ने कहा, ‘‘हम क्रिसमस की छुट्टियों में यहां आए हैं। समुद्र तट पर काफी भीड़ है और यहां का माहौल बहुत अच्छा है।'' अधिकारियों ने बताया कि 31 दिसंबर की आधी रात को तटों पर आतिशबाजी की तैयारी है, जबकि क्रूज जहाजों पर विशेष आयोजन और क्लब में संगीत समारोह सुबह तक चलेंगे।
- नयी दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी के विस्तार के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों ने दुनिया भर के देशों को बहुत प्रभावित किया है और ‘‘युवा शक्ति'' के कारण पूरी दुनिया देश की ओर बड़ी उम्मीदों से देख रही है। मोदी ने अपने मासिक ‘मन की बात' संबोधन में कहा, ‘‘आज दुनिया भारत को बहुत आशा के साथ देख रही है। भारत से उम्मीद की सबसे बड़ी वजह है, हमारी युवा शक्ति। विज्ञान के क्षेत्र में हमारी उपलब्धियां, नए-नए नवोन्मेष, प्रौद्योगिकी का विस्तार इनसे दुनियाभर के देश बहुत प्रभावित हैं।'' मोदी ने कहा, ‘‘भारत के युवाओं में हमेशा कुछ नया करने का जुनून है और वो उतने ही जागरूक भी हैं। मेरे युवा साथी कई बार मुझसे यह पूछते हैं कि राष्ट्र निर्माण में वो अपना योगदान और कैसे बढ़ाएं? वो कैसे अपने विचार साझा कर सकते हैं। कई साथी पूछते हैं कि मेरे सामने वो अपने विचार को कैसे प्रस्तुत कर सकते हैं?'' उन्होंने कहा कि ‘‘हमारे युवा साथियों की इस जिज्ञासा का समाधान है ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग'।'' उन्होंने कहा कि पिछले साल इसका पहला संस्करण आयोजित हुआ था और अब कुछ दिन बाद उसका दूसरा संस्करण आयोजित होने वाला है। उन्होंने कहा, ‘‘अगले महीने की 12 तारीख को स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के अवसर पर ‘राष्ट्रीय युवा दिवस' मनाया जाएगा। इसी दिन ‘यंग लीडर्स डायलॉग' का भी आयोजन होगा और मैं भी इसमें जरूर शामिल होऊंगा। इसमें हमारे युवा नवोन्मेष, फिटनेस, स्टार्टअप और कृषि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा करेंगे। मैं इस कार्यक्रम को लेकर बहुत ही उत्सुक हूं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश के भीतर युवाओं को प्रतिभा दिखाने के नए- नए अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे बहुत से मंच विकसित हो रहे हैं, जहां युवा अपनी योग्यता और रुचि के अनुसार अपनी प्रतिभा दिखा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा ही एक मंच है- ‘स्मार्ट इंडिया हैकथॉन', जो एक और ऐसा माध्यम है जहां ‘आईडिया, एक्शन' में बदलते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘‘स्मार्ट इंडिया हैकथॉन 2025' का समापन इसी महीने हुआ है। इस हैकथॉन के दौरान 80 से अधिक सरकारी विभागों की 270 से ज्यादा समस्याओं पर छात्रों ने काम किया। छात्रों ने ऐसे समाधान दिए, जो वास्तविक जीवन की चुनौतियों से जुड़े थे। जैसे यातायात की समस्या।'' मोदी ने कहा कि पिछले सात से आठ साल में ‘स्मार्ट इंडिया हैकथॉन' में 13 लाख से ज्यादा छात्र और छह हजार से ज्यादा संस्थान हिस्सा ले चुके हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं ने सैंकड़ों समस्याओं के सटीक समाधान भी दिए हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे समय समय पर इस तरह के हैकथॉन का हिस्सा जरूर बनें। प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं ने वित्तीय धोखाधड़ी और ‘डिजिटल अरेस्ट' जैसी चुनौतियों के समाधान पर भी अपने विचार सामने रखे। उन्होंने कहा कि युवाओं ने गांवों में डिजिटल बैंकिंग के लिए साइबर सुरक्षा की रूपरेखा पर सुझाव दिये। उन्होंने कहा कि कई युवा कृषि क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान में जुटे रहे।
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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर शहर में रविवार को न्यूनतम तापमान जीरो से ऊपर चला गया। इसी बीच, मौसम विभाग ने 30 दिसंबर से 1 जनवरी तक हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई है। श्रीनगर शहर में न्यूनतम तापमान 0.8 डिग्री सेल्सियस, गुलमर्ग में माइनस 2.2 और पहलगाम में माइनस 1.8 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं, जम्मू शहर में न्यूनतम तापमान 8.1 डिग्री सेल्सियस, कटरा में 8.2, बटोटे में 6.9, बनिहाल में 4.5 और भद्रवाह में 1.6 डिग्री सेल्सियस रहा।
मौसम विभाग ने सोमवार तक बादल छाए रहने का अनुमान लगाया है। विभाग के अनुसार, 30 दिसंबर से 1 जनवरी तक हल्की बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है। 31 दिसंबर और 1 जनवरी को कई जगहों पर हल्की बारिश/बर्फबारी और कश्मीर घाटी के मध्य और उत्तरी हिस्सों में मध्यम बर्फबारी होने की उम्मीद है।स्थानीय रूप से ‘चिल्लई कलां’ के नाम से जाना जाने वाला 40 दिनों के कड़ाके की ठंड का दौर 21 दिसंबर को शुरू हुआ है, यह 30 जनवरी को खत्म होगा। चिल्लई कलां में होने वाली भारी बर्फबारी ही पहाड़ों में जम्मू-कश्मीर के बारहमासी पानी के जलाशयों को भरती है। ये बारहमासी जलाशय गर्मियों के महीनों में कई नदियों, झरनों और झीलों को पानी देते हैं। चिल्लई कलां के दौरान बर्फबारी न होना एक आपदा है, क्योंकि यह गर्मियों के महीनों में सूखे का संकेत देता है।इसलिए, लोग बर्फबारी का बेसब्री से इंतजार करते हैं। चूंकि इन दिनों नए साल की शाम मनाने वाले लोग घाटी में आ रहे हैं, इसलिए श्रीनगर, गुलमर्ग और पहलगाम के सभी होटल पूरी तरह से बुक हो चुके हैं। लोग अपनी छुट्टियों को यादगार बनाने के लिए नए साल की शाम को अच्छी बर्फबारी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।कश्मीर के बड़े-बुजुर्गों को आज भी चिल्लई कलां की वो लंबी रातें याद हैं, जब वे सुबह उठकर बाहर भारी बर्फबारी देखते थे। छत के किनारों से लटकती बर्फ की बूंदें एक इंद्रधनुषी नजारा बनाती थीं, क्योंकि उन बूंदों से गुजरने वाली सूरज की रोशनी अलग-अलग रंगों में बंट जाती थी। उन दिनों भारी बर्फबारी से सड़कें कई दिनों तक बंद रहती थीं, और स्थानीय लोग अपने घरों में उगाई गई सब्जियों, हर घर में मौजूद छोटी मुर्गियों के अंडों और खुद पाली हुई गाय के दूध पर निर्भर रहते थे -
नई दिल्ली। धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) की ओर से रांची से नई दिल्ली तक ‘वीर बिरसा मुंडा साइक्लोथॉन’ का आयोजन किया जा रहा है। झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने रविवार को रांची में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद संयुक्त रूप से फ्लैग दिखाकर साइक्लोथॉन को रवाना किया।
इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारी, एनसीसी के वरिष्ठ अधिकारी, कैडेट्स और बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। इस साइक्लोथॉन में शामिल एनसीसी कैडेट्स साइकिल पर झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा होते हुए लगभग 20 दिनों में देश की राजधानी नई दिल्ली पहुंचेंगे। साइक्लोथॉन में बालिका कैडेट्स की भी सक्रिय भागीदारी है। इस पहल का उद्देश्य भगवान बिरसा मुंडा के विचारों, संघर्ष और आदिवासी समाज के अधिकारों से जुड़े संदेशों को देशभर में प्रसारित करना है।राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने इस मौके पर अपने संबोधन में कहा कि भगवान बिरसा मुंडा झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनकी 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित यह साइक्लोथॉन युवाओं में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और सामाजिक चेतना को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि एनसीसी कैडेट्स द्वारा किया जा रहा यह प्रयास सराहनीय है और इससे राष्ट्रीय एकता का संदेश जाएगा।केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने इस अवसर पर कहा कि ‘वीर बिरसा मुंडा साइक्लोथॉन’ केवल एक साइकिल यात्रा नहीं है, बल्कि यह उन मूल्यों और विचारों की यात्रा है जो धरती आबा ने पूरे राष्ट्र को दिए। भगवान बिरसा मुंडा का जीवन राष्ट्रप्रेम, सामाजिक न्याय और जनजातीय समाज के उत्थान का प्रतीक है। इस साइक्लोथॉन के माध्यम से युवा पीढ़ी को उनके संघर्ष और बलिदान की स्मृतियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की ओर से जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास और उत्थान के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी इस यात्रा के जरिए प्रसार होगा।मंत्री संजय सेठ ने टीम के सदस्यों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया और इस ऐतिहासिक यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के दौरान एनसीसी अधिकारियों ने साइक्लोथॉन के मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था और दैनिक कार्यक्रम की जानकारी दी। बताया गया कि नई दिल्ली पहुंचने पर साइक्लोथॉन दल का भव्य स्वागत किया जाएगा - नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली की जयंती पर देशभर के प्रमुख नेताओं ने उन्हें याद कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इन नेताओं ने अरुण जेटली को एक कुशल वक्ता, कानूनी विशेषज्ञ और आर्थिक सुधारों के वास्तुकार के रूप में याद किया है।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “अरुण जेटली की जयंती पर उन्हें याद कर रहे हैं। एक बेजोड़ संवैधानिक और कानूनी विशेषज्ञ और बेहतरीन वक्ता ने एक सांसद के तौर पर एक अमिट विरासत छोड़ी है और कई अहम कानूनी मामलों में उनके योगदान के लिए उन्हें याद किया जाएगा। अपनी तेज़ कानूनी समझ से पार्टी को मजबूत बनाने में उनकी समर्पित भूमिका हमेशा ज़िंदा रहेगी, जो समय की हर कसौटी पर खरी उतरेगी।”केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पोस्ट में लिखा, “पूर्व केंद्रीय मंत्री पद्म विभूषण अरुण जेटली की जयंती पर उन्हें अभिवादन।” यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, “पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री ‘पद्म विभूषण’ अरुण जेटली की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी। राष्ट्र के आर्थिक सशक्तिकरण और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में उनके योगदान अविस्मरणीय और प्रेरणास्पद हैं।”बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक्स पोस्ट में लिखा, “पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरूण जेटली की जयंती पर उन्हें सादर नमन।” मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लिखा, “पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली की जयंती पर सादर नमन करता हूं। विधि, खेल, शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उनके अविस्मरणीय योगदान के लिए राष्ट्र सदैव कृतज्ञ रहेगा।”भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बेंगलुरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या ने एक्स पोस्ट में लिखा, “पूर्व केंद्रीय मंत्री और पद्म विभूषण स्वर्गीय अरुण जेटली को उनकी 73वीं जयंती पर याद कर रहे हैं। वह सबसे बेहतरीन सांसदों में से एक थे और बीजेपी के लिए एक मार्गदर्शक शक्ति थे, उन्होंने देश के लिए कई बड़े आर्थिक सुधारों की शुरुआत की, जिसमें जीएसटी सिस्टम को लागू करना भी शामिल है। उनके मूल्य आज भी हमारा मार्गदर्शन करते हैं।” भाजपा सांसद रवि किशन ने लिखा, “भारत की प्रगति व सर्वांगीण विकास के लिए आजीवन समर्पित रहने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता, लोकप्रिय अर्थशास्त्री, महान चिंतक, कुशल संगठनकर्ता, भाजपा परिवार के वरिष्ठ सदस्य, प्रखर वक्ता व प्रख्यात अधिवक्ता एवं देश के पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन। राष्ट्र निर्माण में आपके द्वारा दिए गए अमूल्य योगदान को सदैव याद किया जाएगा।”
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘गीतांजलि आईआईएससी’ ग्रुप की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि ‘गीतांजलि आईआईएससी’ यह अब सिर्फ एक क्लास नहीं, बल्कि कैंपस का सांस्कृतिक केंद्र है। यहां हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत, लोक परंपराएं व शास्त्रीय विधाएं हैं और छात्र यहां साथ बैठकर रियाज करते हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “आज का जीवन टेक संचालित होता जा रहा है। जो परिवर्तन सदियों में आते थे वो बदलाव हम कुछ बरसों में होते देख रहे हैं। कई बार तो कुछ लोग चिंता जताते हैं कि रोबोट्स कहीं मनुष्यों को ही न रिप्लेस कर दें। ऐसे बदलते समय में मानव विकास के लिए अपनी जड़ों से जुड़े रहना बहुत जरूरी है।”उन्होंने कहा, “मुझे ये देखकर बहुत खुशी होती है कि नई सोच के साथ और नए तरीकों के साथ हमारी अगली पीढ़ी अपनी संस्कृति की जड़ों को अच्छी तरह थाम रही है। भारतीय विज्ञान संस्थान की पहचान रिसर्च और इनोवेशन है। कुछ साल पहले वहां के कुछ छात्रों ने महसूस किया कि पढ़ाई और रिसर्च के बीच संगीत के लिए भी जगह होनी चाहिए। बस यहीं से एक छोटी-सी म्यूजिक क्लास शुरू हुई।”पीएम मोदी ने कहा कि ना बड़ा मंच और ना कोई बड़ा बजट, बस धीरे-धीरे ये पहल बढ़ती गई और आज इसे हम ‘गीतांजलि आईआईएससी’ के नाम से जानते हैं। उन्होंने कहा कि छात्र यहां साथ बैठकर रियाज करते हैं। प्रोफेसर साथ बैठते हैं और उनके परिवार भी जुड़ते हैं। पीएम मोदी ने बताया कि आज दो-सौ से ज्यादा लोग इससे जुड़े हैं। खास बात ये कि जो विदेश चले गए, वो भी ऑनलाइन जुड़कर इस ग्रुप की डोर थामे हुए हैं।इसी बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने देश के युवाओं से ‘हैकेथन्स’ से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि पिछले 7-8 साल में ‘स्मार्ट इंडिया हैकथॉन’ में 13 लाख से ज्यादा छात्र और 6 हजार से ज्यादा संस्थान हिस्सा ले चुके हैं । युवाओं ने सैंकड़ों समस्याओं के सटीक समाधान भी दिए हैं। इस तरह के ‘हैकेथन्स’का आयोजन समय-समय पर होता रहता है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में 2025 की कई तस्वीरें, कई चर्चाएं और कई उपलब्धियों के बारे में बात की, जिन्होंने पूरे देश को एक साथ जोड़ दिया। राष्ट्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मन में पूरे एक साल की यादें घूम रही हैं। 2025 ने हमें ऐसे कई पल दिए, जिस पर हर भारतीय को गर्व हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की सुरक्षा से लेकर खेल के मैदान तक, विज्ञान की प्रयोगशालाओं से लेकर दुनिया के बड़े मंचों तक भारत ने हर जगह अपनी मजबूत छाप छोड़ी। ‘मन की बात’ कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा, “इस साल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ हर भारतीय के लिए गर्व का प्रतीक बना। दुनिया ने साफ देखा कि आज का भारत अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करता। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान देश के कोने-कोने से मां भारती के प्रति प्रेम और समर्पण की तस्वीरें सामने आईं। लोगों ने अपने-अपने तरीके से अपने भाव व्यक्त किए।”उन्होंने आगे कहा कि यही जज्बा तब भी देखने को मिला जब ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे हुए। मैंने आग्रह किया था कि ‘हैशटैग वंदे मातरम 150’ के साथ अपने संदेश और सुझाव भेजें। देशवासियों ने इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2025 खेल के लिहाज से भी यादगार साल रहा। पुरुष क्रिकेट टीम ने आईसीसी चैंपियन्स ट्रॉफी जीती और महिला क्रिकेट टीम ने पहली बार विश्व कप अपने नाम किया। भारत की बेटियों ने ‘ब्लाइंड टी-20 वर्ल्ड कप’ जीतकर इतिहास रच दिया। एशिया कप में भी तिरंगा शान से लहराया। पैरा एथलीटों ने विश्व चैंपियनशिप में कई पदक जीतकर यह साबित किया कि कोई बाधा हौसलों को नहीं रोक सकती है।उन्होंने याद किया कि विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी भारत ने बड़ी छलांग लगाई। पीएम मोदी ने कहा कि शुभांशु शुक्ला पहले भारतीय बने, जो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सेंटर तक पहुंचे। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और वन्य जीवों की सुरक्षा से जुड़े कई प्रयास भी 2025 की पहचान बने। भारत में चीतों की संख्या भी 30 से ज्यादा हो चुकी है।आस्था, संस्कृति और भारत की विरासत की बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि साल की शुरुआत में प्रयागराज महाकुंभ ने पूरी दुनिया को चकित किया। साल के अंत में अयोध्या में राम मंदिर पर ध्वजारोहण के कार्यक्रम ने हर भारतीय को गर्व से भर दिया। स्वदेशी को लेकर भी लोगों का उत्साह खूब दिखाई दिया। लोग वही सामान खरीद रहे हैं, जिसमें किसी भारतीय का पसीना लगा हो और भारत की मिट्टी की सुगंध हो।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हम गर्व से कह सकते हैं कि 2025 ने भारत को और अधिक आत्मविश्वास दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि अब 2026 में नई उम्मीदों और नए संकल्पों के साथ देश आगे बढ़ने के लिए तैयार है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुबई में कन्नड़ भाषा सिखाने-पढ़ाने वाले परिवारों की सराहना की है। ‘मन की बात’ कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा है कि कन्नड़ परिवारों की पहल से एक हजार से ज्यादा बच्चे जुड़े हैं, जो गर्व की बात है।
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 129वें एपिसोड में कहा, “अपनी जड़ों से जुड़े रहने के ये प्रयास सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया के अलग-अलग कोनों और वहां बसे भारतीय भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “दुबई में रहने वाले कन्नड़ परिवारों ने खुद से एक जरूरी सवाल पूछा कि हमारे बच्चे ‘टेक-वर्ल्ड’ में आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन कहीं यह अपनी भाषा से दूर तो नहीं हो रहे हैं? यहीं से ‘कन्नड़ा पाठशाले’ का जन्म हुआ। यह एक ऐसा प्रयास है, जहां बच्चों को ‘कन्नड़’ पढ़ाना, सीखना, लिखना और बोलना सिखाया जाता है।” पीएम मोदी ने फिजी में भी भारतीय भाषा और संस्कृति के प्रसार के लिए एक पहल को सराहा। उन्होंने बताया कि फिजी में नई पीढ़ी को तमिल भाषा से जोड़ने के लिए कई स्तरों पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले महीने फिजी के राकी-राकी इलाके में वहां के एक स्कूल में पहली बार तमिल दिवस मनाया गया। उस दिन बच्चों को एक ऐसा मंच मिला, जहां उन्होंने अपनी भाषा पर खुले दिल से गौरव व्यक्त किया। बच्चों ने तमिल में कविताएं सुनाई, भाषण दिए और अपनी संस्कृति को पूरे आत्मविश्वास के साथ मंच पर उतारा। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के भीतर भी तमिल भाषा के प्रचार के लिए लगातार काम हो रहा है। कुछ दिन पहले ही वाराणसी में चौथा ‘काशी तमिल संगमम’ हुआ। इस साल वाराणसी में ‘काशी तमिल संगमम’ के दौरान तमिल सीखने पर खास जोर दिया गया था। ‘तमिल कराकलम’ इस थीम के तहत वाराणसी के 50 से ज्यादा स्कूलों में विशेष अभियान भी चलाए गए। दो बच्चियों के ऑडियो क्लिप सुनाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि तमिल भाषा में इतनी सहजता से अपनी बात रखने वाली बच्चियां काशी की हैं। इनकी मातृभाषा हिंदी है, लेकिन तमिल भाषा के प्रति लगाव ने इन्हें तमिल सीखने के लिए प्रेरित किया है।( - नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु रविवार को भारतीय नौसेना की स्वदेशी रूप से निर्मित कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर पर सवार हुईं। भारत की सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु रविवार को कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे पर पहुंची थीं। राष्ट्रपति मुर्मु की यह यात्रा भारतीय नौसेना की क्षमता और आत्मनिर्भर भारत के रक्षा निर्माण कार्यक्रम का सशक्त प्रतीक मानी जा रही है।इस विशेष अभियान में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी भी मौजूद रहे। पनडुब्बी पर उच्च नौसैनिक अधिकारियों और पनडुब्बी के कमांडिंग ऑफिसर ने राष्ट्रपति मुर्मु का स्वागत किया। इस दौरान राष्ट्रपति मुर्मु को नौसेना की इस पनडुब्बी की परिचालन क्षमता, स्टील्थ फीचर्स व हथियार प्रणालियों से अवगत कराया गया। साथ ही, उन्हें भारतीय नौसेना के अंडरवॉटर वॉरफेयर नेटवर्क के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। यह सॉर्टी कई मायनों में ऐतिहासिक है।यह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का कलवरी क्लास की पनडुब्बी पर यह पहला दौरा था। भारतीय इतिहास में ऐसा करने वाली वह दूसरी राष्ट्रपति हैं। उनसे पहले पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने एक पनडुब्बी पर सॉर्टी की थी। भारतीय नौसेना के इतिहास में वह एक विशेष क्षण माना जाता है।रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक कारवार स्थित आईएनएस वाघशीर और अन्य नौसैनिक प्रतिष्ठानों पर राष्ट्रपति की यह यात्रा न केवल नौसेना के मनोबल को बढ़ाने वाली है, बल्कि यह दर्शाती है कि देश की सर्वोच्च नेतृत्व व्यवस्था सैन्य तैयारियों का प्रत्यक्ष अनुभव और मूल्यांकन करने में कितना सक्रिय है। राष्ट्रपति मुर्मु को समुद्र में तैनाती के दौरान पनडुब्बी कर्मियों की चुनौतियों, उनके प्रशिक्षण और मिशन प्रोफाइल के बारे में भी जानकारी दी गई। स्वदेशी डिजाइन और निर्माण वाली कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियां भारतीय नौसेना की अंडरवॉटर क्षमता का मजबूत स्तंभ हैं।आईएनएस वाघशीर, प्रोजेक्ट 75 के तहत निर्मित, अत्याधुनिक सेंसर, हथियारों और ध्वनि-रहित संचालन क्षमता से लैस है, जो इसे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री शक्ति का एक महत्वपूर्ण साधन बनाता है। राष्ट्रपति मुर्मु की यह यात्रा पश्चिमी समुद्री तट पर नौसेना के परिचालन क्षेत्रों के व्यापक मूल्यांकन का हिस्सा मानी जा रही है। रक्षा विशेषज्ञों ने इसे नौसेना के लिए प्रेरणादायक क्षण बताया, जो सैन्य बलों के प्रति राष्ट्रीय नेतृत्व के समर्थन और संवेदनशीलता को दर्शाता है।गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बीते दिनों भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान ‘राफेल’ में उड़ान भरी थी। लड़ाकू विमान में उड़ान भरने के बाद अब उन्होंने पनडुब्बी की यात्रा की है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान ‘राफेल’ में उड़ान भरी थी। अपनी इस उड़ान के साथ ही उन्होंने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया था। राष्ट्रपति मुर्मु 29 अक्टूबर को हरियाणा के अंबाला स्थित वायु सेना स्टेशन पर पहुंची थी। यहां उन्होंने वायुसेना के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान ‘राफेल’ में सॉर्टी यानी उड़ान भरी।
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अयोध्या. उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर पूजा अनुष्ठान शनिवार को शुरू हो गए। प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ का मुख्य कार्यक्रम 31 दिसंबर को होगा, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि होंगे। ये अनुष्ठान श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के सदस्य स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ के नेतृत्व में बेंगलुरु विद्यापीठ से आए 15 वैदिक विद्वानों की उपस्थिति में किए जा रहे हैं। शनिवार को एक कवच की स्थापना की गई और हवन किया गया। साथ ही भगवान की पालकी यात्रा भी इस परिसर में निकाली गई।
स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ ने बताया कि अनुष्ठान के तहत तत्व हवन, एक तत्व कलश की पूजा, गणपति की पूजा और अन्य हवन किए गए। उन्होंने बताया कि प्रतिष्ठा द्वादशी (31 दिसंबर) को राम लला का पंच रस से अभिषेक किया जाएगा, 56 भोग लगाया जाएगा और भजन एवं आरती की जाएगी। स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ ने बताया कि एक ढोल उत्सव भी होगा और रत्न जड़ित प्रतिमा स्थापित करने के लिए बैठकें की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि पिछली बार जो धार्मिक अनुष्ठान किए गए थे, वे सभी इस बार भी किए जाएंगे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में 22 जनवरी, 2024 को राम लला की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी।
न्यास के एक अन्य सदस्य अनिल मिश्रा ने बताया कि राम मंदिर के लिए सभी वीआईपी पास एक जनवरी, 2026 तक जारी हो चुके हैं और पिछले एक महीने से अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि इसके बावजूद दर्शन की व्यवस्था पूरी तरह से सुगम है और आम दर्शन मार्ग से आ रहे श्रद्धालुओं को करीब आधे घंटे में दर्शन का अवसर मिल रहा है। मिश्रा ने बताया कि प्रतिदिन सीमित संख्या में पास जारी किए जाते हैं और दो घंटे के एक स्लॉट में कुल 400 पास निर्धारित हैं जो एक जनवरी तक जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि आरती के लिए भी सभी पास जारी हो चुके हैं। -
वलसाड (गुजरात) . रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि महिलाओं ने साबित कर दिया है कि जब भी उन्हें समान अवसर मिलते हैं, तो वे पुरुषों के बराबर या उनसे भी बेहतर प्रदर्शन करती हैं। गुजरात के वलसाड जिले के धरमपुर में श्रीमद राजचंद्र सर्वमंगल महिला उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन करने के बाद सिंह ने कहा कि जैन आध्यात्मिक गुरु श्रीमद् राजचंद्रजी ने अपने छोटे से जीवन में जो विरासत छोड़ी है वह सदियों तक लोगों का मार्गदर्शन करती रहेगी। वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘वर्चुअल' तरीके से केंद्र की आधारशिला रखी थी, जो 11 एकड़ में फैला है और महिलाओं को कौशल विकास और आजीविका में सुधार में सहायता करता है। श्रीमद राजचंद्र एक जैन मुनि, कवि, रहस्यवादी, दार्शनिक और 19वीं सदी के अंत के एक प्रमुख सुधारक थे। उनके भक्त गुरुदेव श्री राकेशजी ने एक आध्यात्मिक संगठन श्रीमद राजचंद्र मिशन धरमपुर की स्थापना की। सिंह ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि जो महिलाएं यहां काम करेंगी, वे न केवल सशक्त होंगी बल्कि आत्मनिर्भर भी बनेंगी और उन्हें अपने तरीके से आध्यात्मिक चिंतन में शामिल होने का अवसर और समय मिलेगा।'' सिंह ने ‘स्वरोजगार महिला संघ' (सेवा) की इला भट्ट और श्री महिला गृह उद्योग की संस्थापक जसवंतीबेन पोपट का उदाहरण देते हुए कहा, ‘‘महिलाओं ने साबित कर दिया है कि जब भी उन्हें समान अवसर दिए गए हैं, उन्होंने पुरुषों के बराबर या उससे भी बेहतर प्रदर्शन किया है।'' सिंह ने कहा कि उत्कृष्टता केंद्र, जिसका प्रबंधन पूरी तरह से ग्रामीण महिलाओं द्वारा किया जाएगा, महिला उद्यमिता को और मजबूत करेगा और महिला सशक्तिकरण और महिला नेतृत्व वाले विकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण स्थापित करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘यह परिसर महिला सशक्तिकरण के आर्थिक और सामाजिक दोनों पहलुओं को बढ़ावा दे रहा है। एक बार जब यहां के उत्पाद वैश्विक बाजार में पहुंच जाएंगे, तो यह हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत पहल को प्रोत्साहित करेगा।'' सिंह ने कहा कि लगभग 150 साल पहले श्रीमद राजचंद्रजी द्वारा फिर से दिखाए गए ‘मुक्ति मार्ग' ने एक नए युग के लिए आध्यात्मिकता की नींव रखी है। लगभग 2,500 साल पहले भगवान महावीर द्वारा पहली बार यह मार्ग दिखाया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘श्रीमद राजचंद्रजी ने अपने छोटे से जीवनकाल में जो विरासत छोड़ी है, वह सदियों तक हमारा मार्गदर्शन करती रहेगी। समय के साथ उनकी प्रासंगिकता कम नहीं हुई है, बल्कि मैं कहूंगा कि उनकी प्रासंगिकता लगातार बढ़ रही है।'' सिंह ने इसे एक सुखद संयोग बताया कि इस वर्ष धर्मपुर में जैन आध्यात्मिक गुरु के आगमन के 125 वर्ष पूरे हुए। उन्होंने कहा, इस साल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) भी अपनी स्थापना के 100 साल पूरे कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘दोनों परंपराएं भारत की शाश्वत संस्कृति का प्रतीक हैं। दोनों परंपराएं आध्यात्मिकता, अनुशासन और परोपकार जैसे मूल्यों को बढ़ावा देती हैं। और यह संयोग हमें याद दिलाता है कि सांस्कृतिक जागृति, सेवा और चरित्र विकास के संगम से ही सच्चा राष्ट्र-निर्माण संभव है।'' केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने जैन परंपरा और विरासत को संरक्षित करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले कुछ वर्षों में चोरी हुई 20 से अधिक प्रतिष्ठित तीर्थंकर की प्रतिमाओं को विदेश से भारत वापस लाया गया है। पिछले साल, हमने ‘प्राकृत' भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया था।'' उन्होंने कहा कि जैन धर्म का ‘अनेकांतवाद' (गैर-निरपेक्षता) का दर्शन आपसी सह-अस्तित्व और सद्भाव का मार्ग है। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को मुख्य सचिवों के एक राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता की, जिसमें उन्होंने शासन और सुधारों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने कहा कि यह सम्मेलन राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श और सतत संवाद के माध्यम से केंद्र-राज्य साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। मोदी ने ‘एक्स' पर लिखा, “दिल्ली में आयोजित मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान शासन और सुधारों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।” इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा और शक्तिकांत दास, कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन, नीति आयोग के सदस्य और सभी राज्यों व केंद्र-शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों ने हिस्सा लिया। केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों, नीति आयोग, राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों तथा संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों के बीच व्यापक विचार-विमर्श के आधार पर इस सम्मेलन में सप्ताहांत में ‘विकसित भारत के लिए मानव पूंजी' विषय पर चर्चा की जाएगी, जिसमें राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों की ओर से अपनाई जाने वाली सर्वोत्तम प्रथाओं तथा रणनीतियों को शामिल किया जाएगा। पांच प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिनमें बच्चों की शुरुआती शिक्षा, स्कूली शिक्षा, कौशल विकास, उच्च शिक्षा, खेल और पाठ्येतर गतिविधियां शामिल हैं। सम्मेलन के कार्यक्रम के अनुसार, सप्ताहांत में छह विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें राज्यों में विनियमन में ढील; शासन में प्रौद्योगिकी : अवसर, जोखिम और उनका निवारण; स्मार्ट आपूर्ति शृंखला और बाजार संबंधों के लिए कृषि व्यवस्था; एक राज्य, एक विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल; आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी तथा वामपंथी उग्रवाद से निपटने को लेकर योजनाएं शामिल हैं। मुख्य सचिवों का राष्ट्रीय सम्मेलन पिछले चार वर्षों से प्रतिवर्ष आयोजित किया जा रहा है। पहला सम्मेलन जून 2022 में हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में आयोजित किया गया था, जिसके बाद जनवरी 2023, दिसंबर 2023 और दिसंबर 2024 में नयी दिल्ली में सम्मेलन आयोजित किए गए।
- नई दिल्ली। भारत रेलवे अगले पांच वर्षों में देश में दिल्ली, मुंबई और चेन्नई समेत 48 रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों को संभालने की क्षमता को दोगुना करने की योजना पर काम कर रहा है। यह जानकारी सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी किए गए एक आधिकारिक बयान में दी गई।सरकार ने जिन शहरों में रेलवे स्टेशनों की ट्रेनों को संभालने की क्षमता को दोगुना करने की योजना बनाई है। उनमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद और बेंगलुरु, पटना, लखनऊ, चंडीगढ़, जयपुर, भोपाल, गुवाहाटी, वाराणसी, आगरा, पुरी, कोचीन, कोयंबटूर, वडोदरा, सूरत, अमृतसर, लुधियाना, विशाखापट्टनम, तिरूपति, कोयंबटूर, विजयवाड़ा और मैसूर आदि का नाम शामिल है।स्टेशनों की ट्रेनों की संभालने के लिए कई प्रकार के बदलाव किए जाएंगे, जिनमें मौजूदा टर्मिनल्स में नए प्लेटफॉर्म को जोड़ना, स्टेब्लिंग लाइनें, पिट लाइनें, और पर्याप्त शंटिंग सुविधाएं, साथ ही शहरी इलाके में और उसके आसपास नए टर्मिनल पहचानना और बनाना शामिल हैं।बयान में कहा गया है कि स्टेशनों पर रखरखाव की सुविधाओं का विकास का काम भी किया जाएगा, जिसमें मेगा कोचिंग कॉम्प्लेक्स और ट्रैफिक सुविधा कार्यों के साथ सेक्शनल क्षमता बढ़ाना, सिग्नलिंग अपग्रेडेशन, और अलग-अलग पॉइंट्स पर बढ़ी हुई ट्रेनों को संभालने के लिए जरूरी मल्टी ट्रैकिंग भी शामिल है।टर्मिनल की क्षमता बढ़ाने की योजना बनाते समय, टर्मिनल के आस-पास के स्टेशनों पर भी विचार किया जाएगा ताकि क्षमता समान रूप से संतुलित रहे। उदाहरण के लिए, पुणे के लिए, पुणे स्टेशन पर प्लेटफार्म और स्टेबलिंग लाइनों को बढ़ाने के साथ-साथ हडपसर, खडकी और आलंदी पर भी क्षमता बढ़ाने पर विचार किया गया है।बयान में कहा गया है, “हालांकि क्षमता को दोगुना करने का प्लान 2030 तक का है, लेकिन उम्मीद है कि अगले 5 सालों में क्षमता को धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा ताकि क्षमता बढ़ने का फायदा तुरंत मिल सके। इससे आने वाले सालों में ट्रैफिक की जरूरत को पूरा करने में मदद मिलेगी। इस प्लान में कामों को तीन कैटेगरी- तत्काल, शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म में बांटा जाएगा।”सभी जोनल रेलवे के जनरल मैनेजरों को लिखे एक लेटर में, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और सीईओ सतीश कुमार ने कहा कि प्रस्तावित प्लान स्पेसिफिक होना चाहिए, जिसमें साफ टाइमलाइन और तय नतीजे हों। हालांकि यह काम खास स्टेशनों पर फोकस करता है, लेकिन हर जोनल रेलवे को अपने डिवीजनों में ट्रेन हैंडलिंग क्षमता बढ़ाने का प्लान बनाना चाहिए, यह पक्का करते हुए कि न सिर्फ टर्मिनल क्षमता बढ़े, बल्कि स्टेशनों और यार्ड में सेक्शनल क्षमता और ऑपरेशनल दिक्कतों को भी प्रभावी ढंग से हल किया जाए। (
- नयी दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों (पुत्रों) का सर्वोच्च बलिदान क्रूर मुगल सल्तनत के खिलाफ भारत के अदम्य साहस, शौर्य और वीरता की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है। वीर बाल दिवस के मौके पर साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की शहादत की याद में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि देश उन वीर सपूतों को याद कर रहा है जो भारत के अदम्य साहस, वीरता और शौर्य के शिखर का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘आज हम अपने राष्ट्र के गौरव, वीर साहिबजादों को याद करते हैं। वे भारत के अदम्य साहस और शौर्य के सर्वोच्च आदर्शों के प्रतीक हैं। उन वीर साहिबजादों ने उम्र और अवस्था की सीमाओं को तोड़ दिया। वे क्रूर मुगल सल्तनत के खिलाफ चट्टान की तरह ऐसे खड़े रहे कि मजहबी कट्टरता और आतंक का वजूद ही हिल गया। जिस राष्ट्र के पास ऐसा गौरवशाली अतीत हो, जिसकी युवा पीढ़ी को ऐसी प्रेरणाएं विरासत में मिली हों, वह राष्ट्र क्या कुछ नहीं कर सकता है।’’प्रधानमंत्री ने कहा कि साहिबजादे उस समय काफी युवा थे, लेकिन मुगल सम्राट औरंगजेब की क्रूरता पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।उन्होंने कहा, ‘‘औरंगजेब जानता था कि यदि वह भारत की जनता में भय उत्पन्न करना चाहता है और उन्हें धर्मांतरण के लिए मजबूर करना चाहता है, तो उसे सबसे पहले भारतीयों का मनोबल तोड़ना होगा। इसीलिए उसने साहिबजादों को अपना निशाना बनाया। लेकिन औरंगजेब और उसके सिपहसालार यह भूल गए थे कि हमारे गुरु साधारण मनुष्य नहीं थे। वे तपस्या और त्याग के साक्षात अवतार थे।’’मोदी ने कहा कि माता गुजरी जी, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और चारों साहिबजादों का साहस और आदर्श प्रत्येक भारतीय को शक्ति प्रदान करते रहते हैं।उन्होंने कहा, ‘‘साहिबजादा अजीत सिंह जी, साहिबजादा जुझार सिंह जी, साहिबजादा जोरावर सिंह जी और साहिबजादा फतेह सिंह जी को बहुत कम उम्र में ही उस समय की सबसे बड़ी सत्ता से टकराना पड़ा था। यह संघर्ष महज सत्ता के लिए नहीं था, बल्कि भारत के मूल विचारों और मजहबी कट्टरता के बीच टकराव था। यह सत्य और असत्य की लड़ाई थी।’’प्रधानमंत्री ने श्री गुरु गोबिंद सिंह की जयंती के अवसर पर नौ जनवरी 2022 को घोषणा की थी कि उनके पुत्रों साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की शहादत की याद में 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा, जिनका अद्वितीय बलिदान आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करता है।वीर बाल दिवस के मौके पर भारत सरकार देशभर में सहभागितापूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है, जिनका उद्देश्य नागरिकों को साहिबजादों के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान से रूबरू कराना तथा भारत के इतिहास के इन युवा नायकों के अदम्य साहस, त्याग और वीरता का सम्मान करना तथा उन्हें स्मरण करना है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत लाभ पाने वाले लोगों की संख्या 2025 में बढ़कर 10.25 करोड़ हो गई है। यह जानकारी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को दी गई।पीएमयूवाई के तहत सरकार गरीब परिवारों को 14.2 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर पर 300 रुपए की सब्सिडी देती है और एक साल में एक परिवार अधिकतम नौ सिलेंडर्स पर यह सब्सिडी ले सकता है।एलपीजी की खपत बढ़ी है; प्रति परिवार औसत सिलेंडर 2019-20 में 3 से बढ़कर 2024-25 में 4.47 हो गया है और 2025-26 में इसके 4.85 तक पहुंचने का अनुमान है
इससे देश में एलपीजी की खपत बढ़ाने में मदद मिली है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश में प्रति परिवार औसत खपत बढ़कर 4.47 सिलेंडर हो गई है, जो कि पहले वित्त वर्ष 2019-20 में 3 थी। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में इसके 4.85 प्रति परिवार तक पहुंचने की उम्मीद है।सरकार ने बयान में कहा कि बकाया आवेदन को निपटाने और ज्यादा परिवारों तक एलपीजी गैस को पहुंचाने के लिए, सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 25 लाख अतिरिक्त एलपीजी कनेक्शन जारी करने को मंजूरी दी है। आधार ऑथेंटिकेशन में तेजी लाकर सब्सिडी टारगेटिंग और पारदर्शिता में सुधार किया गया।1 दिसंबर, 2025 तक, बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन ने पीएमयूवाई के 71 प्रतिशत और नॉन-पीएमयूवाई के 62 प्रतिशत उपभोक्ताओं को कवर किया। सरकार ने बताया कि देश भर में चलाए गए ‘बेसिक सेफ्टी चेक’ अभियान ने ग्राहक सुरक्षा को मजबूत किया है। ग्राहकों के घरों पर 12.12 करोड़ से अधिक फ्री सेफ्टी इंस्पेक्शन किए गए और 4.65 करोड़ से अधिक एलपीजी होज रियायती दरों पर बदले गए, जिससे घरेलू एलपीजी इस्तेमाल में जागरूकता और सेफ्टी स्टैंडर्ड में काफी सुधार हुआ।मंत्रालय ने पेट्रोलियम मार्केटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया। 90,000 से अधिक रिटेल आउटलेट्स को डिजिटल पेमेंट की सुविधा दी गई, जिन्हें 2.71 लाख से ज्यादा पीओएस टर्मिनलों का सपोर्ट मिला। मंत्रालय ने आगे कहा कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कवरेज बढ़कर 307 ज्योग्राफिकल इलाकों तक पहुंच गई है। सितंबर 2025 तक पीएमजी घरेलू कनेक्शन की संख्या बढ़कर 1.57 करोड़ और सीएनजी स्टेशन की संख्या बढ़कर 8,400 से अधिक हो गई है।( -
नई दिल्ली। जनवरी-फरवरी में आयोजित महाकुंभ से लेकर नवंबर में ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सालभर आयोजित होने वाले समारोहों की शुरुआत तक, साल 2025 में संस्कृति मंत्रालय बेहद व्यस्त रहा।साल जाते जाते दीपावली को रोशनी के पर्व के रूप में यूनेस्को की मान्यता मिली।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान ‘कलाग्राम’ के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया गया। 10.24 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला ‘कलाग्राम’ एक संवेदनात्मक यात्रा बताता था, जिसमें भारत की सांस्कृतिक विरासत के मूर्त और अमूर्त दोनों पहलुओं को एक साथ प्रस्तुत किया गया।अवसर को खास बनाने के लिए महाकुंभ का लोगो विभिन्न केंद्रीय संरक्षित स्मारकों पर दिखाया गया।संस्कृति मंत्रालय ने नवंबर में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सालभर चलने वाले समारोहों की शुरुआत की। इसी दौरान भोपाल में अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती का भव्य आयोजन किया गया और देशभर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती मनाई गई।वर्ष 2025 के दूसरे हिस्से में भारत को यूनेस्को से दो महत्वपूर्ण मान्यताएं मिलीं। पहली, ‘भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य’ को जुलाई में पेरिस में आयोजित विश्व धरोहर समिति के 47वें सत्र के दौरान विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य’ के 12 घटक महाराष्ट्र का साल्हेर किला, शिवनेरी किला, लोहगढ़ किला, खंडेरी किला, रायगढ़, राजगढ़, प्रतापगढ़, सुवर्णदुर्ग, पन्हाला किला, विजयदुर्ग और सिंधुदुर्ग; तथा तमिलनाडु का जिंजी किला हैं।दूसरी मान्यता 10 दिसंबर को दीपावली को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की यूनेस्को प्रतिनिधि सूची में शामिल किए जाने के रूप में मिली। यह भारत से इस सूची में शामिल होने वाला 16वां पर्व है। अन्य 15 पर्वों में कुंभ मेला, कोलकाता की दुर्गा पूजा, गुजरात का गरबा नृत्य, योग, वैदिक मंत्रोच्चार की परंपरा और रामलीला शामिल हैं।केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि इस अंकन के साथ “यूनेस्को नवीकरण, शांति और अच्छाई की विजय की शाश्वत मानवीय आकांक्षा का सम्मान करता है।”उन्होंने कहा कि कुम्हारों से लेकर कारीगरों तक, लाखों हाथ इस विरासत को जीवित रखते हैं। उन्होंने कहा कि यह यूनेस्को टैग एक जिम्मेदारी भी है और “हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि दीपावली जीवंत विरासत बनी रहे।’’दिसंबर में, अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए अंतर-सरकारी समिति का 20वां सत्र दिल्ली के लाल किले में आयोजित किया गया। यह पहली बार था जब भारत ने इस महत्वपूर्ण सत्र की मेजबानी की। लाल किला यूनेस्को का एक विश्व धरोहर स्थल है।यह बैठक 10 नवंबर को लाल किले में हुए विस्फोट के लगभग एक महीने बाद हुई। विस्फोट में 15 लोगों की मौत हो गई और दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए थे।आगामी वर्ष में सरकार श्रीलंका में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी आयोजित करने की योजना बना रही है। “योजना फरवरी में कोलंबो में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी आयोजित करने की है। ये देवनिमोरी अवशेष हैं।”जानकारी के अनुसार, ये पवित्र अवशेष गुजरात के देवनिमोरी से उत्खनन में प्राप्त हुए थे और वर्तमान में वडोदरा स्थित महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के संरक्षण में हैं।देश के विभिन्न स्थलों पर प्रतिष्ठित भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष पिछले कुछ वर्षों में विदेशों में आयोजित कई प्रदर्शनों का हिस्सा रहे हैं। नवंबर में, नयी दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में संरक्षित अवशेषों का एक हिस्सा 17 दिनों की सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए थिम्पू (भूटान) ले जाया गया था।2024 में, भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष उनके दो शिष्यों अरहंत सारिपुत्र और अरहंत मौद्गल्यायन के अवशेषों के साथ थाईलैंड ले जाए गए और फरवरी-मार्च में 26 दिनों की प्रदर्शनी के तहत विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शित किए गए। यह पहली बार था जब भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों के पवित्र अवशेष एक साथ प्रदर्शित किए गए।ये अवशेष चौथी-पांचवीं शताब्दी ईसा पूर्व के हैं और 1970 के दशक में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों की एक टीम को पिपरहवा में किए गए उत्खनन में मिले थे, जिसे प्राचीन कपिलवस्तु स्थल का हिस्सा माना जाता है।मंत्रालय के लिए 2025 एक और महत्वपूर्ण वर्ष रहा, क्योंकि सितंबर में भारत की पांडुलिपि विरासत के संरक्षण, डिजिटलीकरण और प्रसार के लिए ‘ज्ञान भारतम्’ नामक एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय पहल की शुरुआत की गई।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 12 सितंबर को ‘ज्ञान भारतम्’ पोर्टल का शुभारंभ किया। सम्मेलन का समापन ‘दिल्ली घोषणापत्र’ के साथ हुआ, जिसमें विकसित भारत 2047 की भावना के अनुरूप भारत की पांडुलिपि विरासत के संरक्षण और पुनरोद्धार के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई। -
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन ने शुक्रवार को वीर बाल दिवस पर गुरुद्वारा बंगला साहिब में मत्था टेका।पार्टी के एक बयान के अनुसार, नवीन के साथ भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक संजय मयूख भी मौजूद थे।
बयान में कहा गया है कि गुरु गोबिंद सिंह के दो साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह तथा उनकी दादी माता गुजरी के बलिदान को याद करते हुए नेताओं ने गुरुद्वारा बंगला साहिब में मत्था टेका। मुगल काल के दौरान गुरु गोबिंद सिंह के दो ‘छोटे साजिबजादों’ की शहादत की स्मृति में 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। - नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 और 28 दिसंबर को दिल्ली में आयोजित होने वाले मुख्य सचिवों के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे। यह सम्मेलन राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं पर केंद्रित है और सतत संवाद के माध्यम से केंद्र-राज्य साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अनुसार, सहकारी संघवाद के दृष्टिकोण पर आधारित यह सम्मेलन एक ऐसे मंच के रूप में कार्य करता है, जहां केंद्र और राज्य मिलकर भारत की मानव पूंजी क्षमता को अधिकतम करने और समावेशी, भविष्य के लिए तैयार विकास को गति देने के उद्देश्य से एकीकृत रणनीति तैयार करते हैं।26 से 28 दिसंबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन में साझा विकास एजेंडा को अंतिम रूप देने के लिए गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। सम्मेलन का उद्देश्य भारत की जनसंख्या को केवल जनसांख्यिकीय लाभांश के रूप में देखने के बजाय नागरिकों को मानव पूंजी के रूप में स्थापित करना है। इसके तहत शिक्षा प्रणालियों को मजबूत करने, कौशल विकास पहलों को आगे बढ़ाने और देशभर में भविष्य के रोजगार अवसरों के सृजन के लिए ठोस रणनीतियां तैयार की जाएंगी।पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य विषय ‘विकसित भारत के लिए मानव पूंजी’ रखा गया है। इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनाई जा रही सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और रणनीतियों को साझा किया जाएगा। इस व्यापक विषय के अंतर्गत पांच प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया जाएगा, जिनमें प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा, स्कूली शिक्षा, कौशल विकास, उच्च शिक्षा, खेल और पाठ्येतर गतिविधियां शामिल हैं।सम्मेलन के दौरान ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘स्वदेशी’ और ‘पोस्ट-एलडब्ल्यूई भविष्य’ से जुड़ी योजनाओं जैसे विषयों पर छह विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा, भोजन सत्रों के दौरान विरासत और पांडुलिपि संरक्षण व डिजिटलीकरण तथा सभी के लिए आयुष-आधारित प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा वितरण में ज्ञान के एकीकरण जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श होगा।मुख्य सचिवों का राष्ट्रीय सम्मेलन पिछले चार वर्षों से प्रतिवर्ष आयोजित किया जा रहा है। इसका पहला सम्मेलन जून 2022 में धर्मशाला में आयोजित हुआ था। इसके बाद जनवरी 2023, दिसंबर 2023 और दिसंबर 2024 में नई दिल्ली में सम्मेलन आयोजित किए गए। इस सम्मेलन में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के साथ वरिष्ठ अधिकारी, संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञ और अन्य गणमान्य व्यक्ति भाग लेंगे।

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