- Home
- देश
-
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईंधन से चलने वाले वाहनों के उपयोग में कमी लाने और मितव्ययिता उपाय अपनाने की अपील करने के कुछ दिन बाद अपने काफिले में शामिल वाहनों की संख्या काफी कम कर दी है। प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद कई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी इसी तरह का कदम उठाया है और अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या कम कर दी है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री की हालिया घरेलू यात्राओं के दौरान उनके काफिले में शामिल वाहनों की संख्या कम की गई है। हालांकि, विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) के प्रोटोकॉल के अनुसार आवश्यक सुरक्षा प्रबंधों को बरकरार रखा गया है। सूत्रों के अनुसार, हैदराबाद में रविवार को मितव्ययिता उपायों के संबंध में दिए गए प्रधानमंत्री के भाषण के तुरंत बाद गुजरात और असम में उनके काफिले में कारों की संख्या को कम कर दिया गया। सूत्रों ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री ने जहां संभव हो, बिना नए वाहन खरीदे अपने काफिले में इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करने के निर्देश दिए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने और राज्य के मंत्रियों के काफिले में चलने वाले वाहनों की संख्या तत्काल आधी करने का निर्देश दिया है। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया है कि ईंधन की खपत कम करें और वैश्विक हालात को देखते हुए सोने की अनावश्यक खरीद से बचें। उन्होंने मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक तथा विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिवों के साथ बैठक में निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिले में तत्काल 50 प्रतिशत तक कमी की जाए। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटा दी।
सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री यादव ने मंत्रिपरिषद के सदस्यों से राष्ट्रीय हित में पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की अपील की और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री के काफिले में अब पहले के 13 वाहनों की तुलना में केवल आठ वाहन शामिल होंगे।
अधिकारी ने बताया कि उनके दौरों के दौरान वाहन रैलियां भी आयोजित नहीं की जाएंगी। सभी मंत्री अपनी यात्राओं के दौरान न्यूनतम वाहनों का उपयोग करेंगे। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी मंत्रियों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सरकारी वाहनों की संख्या में कमी लाने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा, ''मैं सभी दिल्लीवासियों से आग्रह करती हूं कि वे भी प्रधानमंत्री जी के इस आह्वान का पालन करते हुए ऊर्जा संरक्षण के इस राष्ट्रीय प्रयास में सहभागी बनें।'' राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उनके काफिले में वाहनों की संख्या कम से कम रखने का निर्देश दिया है, जिसके बाद बुधवार को उनके काफिले में सिर्फ पांच वाहन दिखाई दिए। आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार शर्मा ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या न्यूनतम रखने का निर्देश दिया है और अधिकारियों को अनावश्यक वाहनों का उपयोग न करने को कहा गया है। महाराष्ट्र सरकार ने सभी मंत्रियों को निर्देश दिया है कि आधिकारिक यात्रा के लिए विमान का उपयोग करने से पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अनुमति ली जाए। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने घोषणा की कि वह गुजरात में हेलीकॉप्टर और विमानों से यात्रा करने के बजाय ट्रेनों, राज्य परिवहन की बसों और सार्वजनिक परिवहन के संसाधनों से यात्रा करेंगे और ईंधन की बचत के लिए उनके सरकारी वाहनों के काफिले को भी छोटा किया जाएगा। गुजरात के उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने प्रधानमंत्री की अपील के बाद अपनी अमेरिका की प्रस्तावित यात्रा रद्द कर दी है। बिहार के उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने ऐलान किया कि उन्होंने अपने काफिले के वाहनों की संख्या स्वयं कम करके आधी कर दी है और जरूरी होने पर ही आधिकारिक यात्रा करेंगे। बिहार की दो अन्य मंत्रियों- लेशी सिंह और शीला मंडल ने भी घोषणा की है कि वे व्यक्तिगत रूप से मितव्ययिता के कदम उठाएंगी। पश्चिम एशिया संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को हैदराबाद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तेलंगाना इकाई द्वारा आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए मितव्ययिता अपनाने पर जोर दिया था। प्रधानमंत्री ने पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने, शहरों में मेट्रो रेल सेवाओं का उपयोग करने, कार पूलिंग अपनाने, इलेक्ट्रिक वाहनों के अधिक इस्तेमाल, पार्सल ढुलाई के लिए रेलवे सेवाओं का उपयोग करने और 'वर्क फ्रॉम होम' (घर से काम करने) को बढ़ावा देने का सुझाव दिया था।
- -
नयी दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शीर्ष पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि आरएसएस हिंदू राष्ट्र का निर्माण नहीं कर रहा है क्योंकि भारत हमेशा से ही एक हिंदू राष्ट्र रहा है। उन्होंने कहा कि गैर-हिंदू अलग नहीं हैं, क्योंकि सभी के पूर्वज और डीएनए एक ही है। आरएसएस के सरकार्यवाह (महासचिव) होसबाले ने कहा, ''यहां ब्रिटिश राज था, है ना? ब्रिटिश राज था... तब भी, यह एक हिंदू राष्ट्र था। यह ब्रिटिश राष्ट्र नहीं था।'' उन्होंने कहा कि देश में कई धार्मिक समूह हैं, जिन्हें अक्सर अल्पसंख्यक के रूप में वर्णित किया जाता है और उनमें से कोई भी द्वितीय श्रेणी का नागरिक नहीं है। होसबाले ने कहा, ''आरएसएस के भीतर भी ऐसे कई लोग हैं जो इन धार्मिक समूहों से आते हैं और संघ स्वयंसेवक हैं। वे हमारे लिए दिखावे की वस्तु नहीं हैं।'' उनसे पूछा गया कि जब आरएसएस हिंदुत्व या हिंदू राष्ट्र की बात करता है तो संघ अल्पसंख्यकों को कैसे आश्वस्त करेगा कि वे भारत में सुरक्षित हैं। होसबाले ने कहा कि आरएसएस की स्थापना के 100 साल बाद से ये सवाल अनगिनत बार पूछे जा चुके हैं। उन्होंने कहा, ''जब लोग कहते हैं कि डर है, तो मैं पूछता हूं कि क्या हुआ है? क्या मुसलमानों की संख्या कम हो गई है?'' उन्होंने कहा, ''क्या उन्हें भागना पड़ा? क्या उनके साथ द्वितीय श्रेणी के नागरिकों जैसा व्यवहार किया जाता है?'' होसबाले ने अपनी बात को पुष्ट करने के लिए महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे भाजपा शासित राज्यों का उदाहरण दिया। उन्होंने पूछा कि क्या सरकारी योजनाएं अन्य धर्मों के लोगों तक नहीं पहुंच रही हैं?
मुस्लिम और विपक्षी नेताओं का हालांकि कहना है कि आरएसएस समर्थित भाजपा के 2014 में सत्ता में आने के बाद से अल्पसंख्यक समुदाय खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। वे इसके लिए कथित गो-तस्करी के मामलों में भीड़ द्वारा पीट-पीट कर की गई हत्या के मामलों, धर्मांतरण, 'लव जिहाद' और रोजमर्रा के भेदभाव के आरोपों का हवाला देते हैं। होसबाले ने कहा कि इन सवालों को बार-बार उठाने से अल्पसंख्यक समुदायों में अनावश्यक रूप से भय पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा, ''जब राष्ट्रीयता एक है और हमारे पूर्वज एक हैं, तो हम उन्हें अलग नहीं मानते। जो लोग मानते हैं कि दुनिया एक परिवार है, वे दूसरे धर्म के लोगों से कैसे भेदभाव कर सकते हैं? बिल्कुल नहीं। वह भी सिर्फ इसलिए कि कोई दूसरे धर्म का पालन करता है।'' होसबाले ने कहा कि आरएसएस अल्पसंख्यक समुदायों के नेताओं के साथ निरंतर संवाद करता रहता है। उन्होंने कहा, ''आरएसएस में हम कहते हैं कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यक की यह अवधारणा ही ठोस आधार पर टिकी नहीं है। जब हम कहते हैं कि हम सब एक हैं, एक ही लोग हैं, एक ही वंश के हैं, एक ही डीएनए के हैं, तो अल्पसंख्यक होने का सवाल ही नहीं उठता।'' उन्होंने कहा, ''पूजा का तरीका बदलने मात्र से आपकी राष्ट्रीयता नहीं बदल जाती। हमारा यही मानना है।'' आरएसएस नेता ने कहा कि राष्ट्र-राज्य की अवधारणा पर भारत के शिक्षाविदों और बौद्धिक जगत के बीच व्यापक बहस और समझ होनी चाहिए। - गुवाहाटी । कांग्रेस नेता पवन खेड़ा असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा द्वारा दायर मामलों के संबंध में पूछताछ के लिए बुधवार को राज्य पुलिस की अपराध शाखा के समक्ष पेश हुए। यह मामले ऐसे समय में दर्ज किए गए हैं जब खेड़ा ने आरोप लगाया था कि शर्मा के पास कई पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं।खेड़ा ने अपराध शाखा कार्यालय में प्रवेश करने से पहले पत्रकारों से कहा कि वह जांच में सहयोग कर रहे हैं।उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पुलिस ने तलब किया था, जिसके बाद मैं यहां आया हूं। हम कानून और न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, इसलिए मैं कानूनी प्रक्रिया के अनुसार यहां उपस्थित हूं।’’खेड़ा ने कहा कि पूछताछ पूरी होने के बाद वह मीडिया से विस्तार से बात करेंगे।शर्मा ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के विभिन्न प्रावधानों के तहत गुवाहाटी अपराध शाखा पुलिस थाने में खेड़ा और अन्य के खिलाफ आपराधिक शिकायतें दर्ज कराई थीं।कांग्रेस नेता के खिलाफ लगाए गए आरोपों में चुनाव के संबंध में झूठे बयान देना, धोखाधड़ी, जालसाजी, शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना और मानहानि शामिल हैं।खेड़ा ने पहले तेलंगाना उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसने उन्हें सात दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी। हालांकि, असम पुलिस ने इस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।उच्चतम न्यायालय ने ट्रांजिट अग्रिम जमानत आदेश पर रोक लगा दी थी और खेड़ा को गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अपील करने का निर्देश दिया।इसके बाद गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद खेड़ा ने फिर से उच्चतम न्यायालय का रुख किया।बाद में उच्चतम न्यायालय ने उन्हें अग्रिम जमानत दी। इस बीच, गुवाहाटी की एक स्थानीय अदालत ने इससे पहले कांग्रेस नेता के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने की असम पुलिस की याचिका को खारिज कर दिया था।
-
नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक यादव का बुधवार को यहां निधन हो गया। सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों के मुताबिक, 38 वर्षीय प्रतीक यादव की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें सुबह तड़के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
प्रमुख राजनीतिक परिवार से होने के बावजूद फिटनेस प्रेमी प्रतीक यादव सक्रिय राजनीति से दूर रहे। हालांकि उनकी पत्नी अपर्णा बिष्ट यादव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो चुकी हैं और वर्तमान में राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं।समाजवादी पार्टी ने X पर एक संक्षिप्त पोस्ट में कहा, “श्री प्रतीक यादव जी का निधन अत्यंत हृदयविदारक है! ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें। भावभीनी श्रद्धांजलि!” प्रतीक यादव, मुलायम सिंह यादव और उनकी दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे थे। प्रतीक के साले अमन बिष्ट ने फोन पर PTI से कहा, “मैं अभी अस्पताल में हूं। यह समय बात करने का नहीं है।”उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतीक यादव के “अचानक निधन” को “अत्यंत दुखद” बताया और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।योगी आदित्यनाथ ने X पर लिखा, “उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, ‘पद्म विभूषण’ स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव जी के पुत्र एवं उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष श्रीमती अपर्णा यादव जी के पति श्री प्रतीक यादव जी का आकस्मिक निधन अत्यंत दुखद है। भावपूर्ण श्रद्धांजलि।”उन्होंने आगे लिखा, “शोक संतप्त परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा परिजनों को यह असीम दुख सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति!”प्रतीक यादव के निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया। सपा नेता और प्रतीक यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव ने इस निधन को “अत्यंत दुखद” बताया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।भाजपा नेताओं में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और उन्हें इस दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की। वहीं, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस खबर को “बेहद दुखद” बताया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी शोकग्रस्त परिवार के साथ एकजुटता व्यक्त की। पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने इस घटना को हृदयविदारक और दुखद बताया। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने यादव परिवार के सदस्य के ‘अचानक निधन’ पर शोक जताया।उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान, जो अपर्णा यादव से मिलने उनके आवास पहुंचीं, ने इस असमय मृत्यु को ‘बहुत दुखद’ बताया। मौत की परिस्थितियों को लेकर मीडिया के सवालों पर चौहान ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “आजकल कम उम्र में हार्ट अटैक से मौत की खबरें लगातार सुनने को मिल रही हैं।”सिविल अस्पताल में मौजूद कुछ युवकों, जो शव के साथ दिखाई दिए, ने बताया कि वे सुबह करीब 5:10 बजे प्रतीक यादव को अस्पताल लेकर पहुंचे थे और करीब 6 बजे उन्हें आधिकारिक रूप से मृत घोषित कर दिया गया।प्रतीक यादव पशु प्रेमी के तौर पर भी जाने जाते थे और कई पशु आश्रयों का समर्थन करते थे। इस साल 19 जनवरी को प्रतीक यादव ने खुलकर अपनी पत्नी अपर्णा बिष्ट यादव पर परिवारिक रिश्ते खराब करने का आरोप लगाया था और कहा था कि वह जल्द से जल्द उनसे तलाक लेंगे।अपने इंस्टाग्राम अकाउंट (iamprateekyadav) पर लंबी पोस्ट में उन्होंने अपर्णा यादव को “परिवार तोड़ने वाली” बताया था और उन पर “स्वार्थी” तथा “प्रसिद्धि और प्रभाव की भूखी” होने का आरोप लगाया था। हालांकि 28 जनवरी को उन्होंने पत्नी के साथ सुलह की घोषणा की।इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में प्रतीक यादव ने कहा, “19 जनवरी को मेरी पत्नी अपर्णा के साथ गंभीर विवाद हुआ था, जिसके बाद मैंने सोशल मीडिया पर दो पोस्ट किए थे। लेकिन अब बातचीत के बाद मामला आपसी सहमति से सुलझ गया है और हमारे बीच अब कोई विवाद नहीं है।” उन्होंने वीडियो के कैप्शन में लिखा था, “Haters, go to hell.” एक अन्य पोस्ट में उन्होंने अपर्णा यादव के साथ अपना वीडियो भी साझा किया था। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डीजल-पेट्रोल की बचत के लिए की गई अपील का बिहार में असर दिखने लगा है। बिहार में मुख्यमंत्री फ्लीट में वाहनों की संख्या कम अथवा न्यूनतम करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंत्रियों, निगम और बोर्ड के अध्यक्षों से भी वाहनों की संख्या कम करने की अपील की है। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद सोशल मीडिया के जरिए दी है।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा करते हुए लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीजल-पेट्रोल की बचत के लिए वाहनों के कम से कम उपयोग करने की अपील की है। इसे लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। मुख्यमंत्री कारकेड में वाहनों की संख्या कम अथवा न्यूनतम करने का निर्णय लिया है।”उन्होंने बताया है कि मंत्री गण, निगम बोर्ड के अध्यक्ष गण व सदस्य गण, सभी पदाधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों से बिना अतिरिक्त वाहन के सार्वजनिक कार्यक्रमों में आने की अपील की गई है। राज्य की जनता से मेट्रो, बस, ऑटो अथवा अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट के प्रयोग पर जोर देने का भी आग्रह किया गया है।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य सरकार के सभी विभागों को सभी प्रकार के कॉन्फ्रेंस अथवा सरकारी बैठकों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है। इसके अलावा प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में संचालित होने वाले कैंटीन में पाम ऑयल के कम से कम प्रयोग का निर्देश दिया गया है।उन्होंने सरकारी और निजी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम की संस्कृति को बढ़ावा देने की सलाह दी है। इसके अलावा सप्ताह में एक दिन सभी लोगों से ‘नो व्हीकल डे’ के आयोजन का आग्रह किया गया है।बता दें कि पीएम मोदी ने हैदराबाद में जनसभा को संबोधित करते हुए देशवासियों से अपील की था कि वे पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल जितना हो सके कम करें और मेट्रो का इस्तेमाल करें। इलेक्ट्रिक बसों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें और कार पूलिंग को बढ़ावा दें। ( -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) द्वारा एमआईएल (मिहान इंडिया लिमिटेड) को पट्टे पर दी गई भूमि की लीज अवधि को 06.08.2039 से आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है, ताकि एमआईएल वाणिज्यिक संचालन तिथि (सीओडी) से 30 वर्षों के लिए नागपुर हवाई अड्डे का लाइसेंस रियायतग्राही, अर्थात् जीएमआर नागपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (जीएनआईएएल) को दे सके।
यह नागपुर हवाई अड्डे के लिए नागपुर में मल्टी-मोडल इंटरनेशनल कार्गो हब और एयरपोर्ट (मिहान) परियोजना के तहत क्षेत्रीय विमानन केंद्र बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।वर्ष 2009 में एएआई और महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (एमएडीसी) द्वारा 49:51 के इक्विटी अनुपात में एक संयुक्त उद्यम कंपनी (जेवीसी) - एमआईएल का गठन किया गया था। हालांकि एएआई की हवाई अड्डे की संपत्तियां वर्ष 2009 में हवाई अड्डे के संचालन के लिए एमआईएल को हस्तांतरित कर दी गई थीं, लेकिन भूमि सीमांकन संबंधी मुद्दों के कारण लीज डीड में देरी हुई। बाद में, एएआई की भूमि 06.08.2039 तक एमआईएल को लीज पर दी गई है।वर्ष 2016 में एमआईएल ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत हवाई अड्डे के संचालन के लिए एक भागीदार की पहचान हेतु वैश्विक निविदा जारी की। जीएमआर एयरपोर्ट्स लिमिटेड (जीएएल) 5.76 प्रतिशत के राजस्व हिस्से के साथ उच्चतम बोलीदाता के रूप में उभरी। बाद में इसे संशोधित करके सकल राजस्व का 14.49 प्रतिशत कर दिया गया। इसके बाद, एमआईएल ने मार्च 2020 में बोली प्रक्रिया रद्द कर दी। जीएएल ने बॉम्बे उच्च न्यायालय में इस रद्द करने को चुनौती दी। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने भी जीएएल के पक्ष में फैसला सुनाया। 27 सितंबर, 2024 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार, एमआईएल ने 8 अक्टूबर, 2024 को अन्य संयुक्त उद्यम, जीएमआर नागपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (जीएनआईएएल) के साथ रियायत समझौते पर हस्ताक्षर किए।नागपुर हवाई अड्डे के एक नए युग की शुरुआत:एएआई द्वारा एमआईएल को लीज पर दी गई भूमि की अवधि 06.08.2039 के बाद बढ़ाए जाने से, यह जीएनआईएएल की 30 वर्षीय रियायत अवधि के साथ समाप्त हो जाएगी, जिससे हवाई अड्डे को दूसरे संयुक्त उद्यम-जीएनआईएएल को सौंपने का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे नागपुर हवाई अड्डे के विकास और अवसंरचना उन्नति के एक नए युग की शुरुआत होने की उम्मीद है। निजी क्षेत्र की दक्षता और सरकारी निगरानी के साथ, हवाई अड्डे में महत्वपूर्ण निवेश, आधुनिकीकरण और बेहतर यात्री एवं माल ढुलाई सेवाओं की संभावना है - जो सरकार की विमानन क्षेत्र में मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास की परिकल्पना का हिस्सा है।जीएनआईएएल नागपुर के डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को विश्व स्तरीय सुविधा में बदलने का कार्य शुरू करेगा। चरणबद्ध विकास के तहत इसकी अंतिम क्षमता 30 मिलियन यात्रियों को प्रतिवर्ष संभालने की होगी, जिससे यह मध्य भारत के प्रमुख हवाई अड्डों में से एक बन जाएगा। यह परिवर्तन न केवल विदर्भ क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा, बल्कि इसके आर्थिक बुनियादी ढांचे को भी मजबूत करेगा। इससे माल ढुलाई क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। -
नई दिल्ली। बिहार सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के डीए में वृद्धि की है। बुधवार को बिहार कैबिनेट की बैठक में इसकी मंजूरी दी गई है। बिहार में अब सप्तम केंद्रीय पुनरीक्षित वेतन संरचना के तहत कर्मियों को 58 प्रतिशत के बजाय 60 प्रतिशत डीए मिलेगा।
वहीं, छठे वेतनमान वालों का भत्ता 257 प्रतिशत से बढ़ाकर 262 प्रतिशत और पांचवे वेतनमान वालों का 474 प्रतिशत से बढ़ाकर 483 प्रतिशत कर दिया गया है। यह वृद्धि 1 जनवरी 2026 के प्रभाव से लागू होगी। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में कुल 19 प्रस्तावों की मंजूरी दी गई। बैठक के बाद एक अधिकारी ने बताया कि बैठक में अपराध एवं साम्प्रदायिक रूप से अत्यंत संवेदनशील राज्य के पांच जिलों पूर्वी चम्पारण, समस्तीपुर, मधुबनी, वैशाली एवं सिवान जिले में पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण के कुल पाँच पदों के सृजन की भी स्वीकृति दी गई है।बैठक में औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार के लिए वैशाली जिले में 1243.45 एकड़ रैयती भूमि का आधारभूत संरचना विकास प्राधिकार, पटना के माध्यम से अधिग्रहण के लिए प्रक्रियाधीन भूमि में से 100 एकड़ भूमि पर राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान की स्थापना के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार को निःशुल्क हस्तांतरण की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई। भूमि चयन पर अंतिम निर्णय के लिए निदेशक परिषद, आधारभूत संरचना विकास प्राधिकार, बिहार, पटना को प्राधिकृत किया गया है। सरकार ने मुख्यमंत्री बिहार पर्यावरण अनुकूल परिवहन रोजगार योजना को भी मंजूरी दे दी है। योजना का मुख्य उद्देश्य वाहनजनित प्रदूषण कम करना और वर्ष 2030 तक नए वाहनों की कुल बिक्री में कम-से-कम 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है।यह वैश्विक “ईवी 30एट30” अभियान को भी सहयोग देगा। सरकार का मानना है कि योजना से लोगों में इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति स्वीकार्यता बढ़ेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों की सुविधा उपलब्ध होगी और वाणिज्यिक इलेक्ट्रिक वाहनों के जरिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। राज्य सरकार ने बिहार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए “बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन” के तहत सिंगापुर की संस्था “ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क” का चयन किया गया है।सरकार के अनुसार, इस संस्था की मदद से राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पारिस्थितिकी तंत्र, कौशल विकास और नवाचार को मजबूत किया जाएगा। राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पारिस्थितिकी तंत्र, कौशल विकास एवं नवाचार को सुदृढ़ करने के लिए ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क, सिंगापुर को नामांकन के आधार पर चयन किया गया है तथा आर्यभट्ट दृष्टि परियोजना के क्रियान्वयन के लिए कुल 209 करोड़ की राशि की प्रशासनिक स्वीकृति भी बैठक में दी गई है। -
नई दिल्ली। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने पश्चिम बंगाल में ‘विधानसभा चुनाव- 2021’ के बाद हुई हिंसा से संबंधित मामलों को फिर से खोलने का आदेश जारी किया है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बुधवार को बताया कि पशु तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है, “चुनाव के बाद हुई हिंसा की जांच को लेकर गंभीर शिकायतें हैं। विधानसभा चुनाव 2021 में हुई राजनीतिक हिंसा के पुराने मामलों की समीक्षा करके उचित कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।” आदेश में आगे कहा गया है, “2021 के चुनाव के बाद हुई हिंसा से संबंधित मामलों में प्रस्तुत अंतिम रिपोर्टों (एफआरटी) की सावधानीपूर्वक समीक्षा की जानी चाहिए और जहां आवश्यक हो, कार्रवाई की जानी चाहिए। जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही होने पर मामलों को फिर से खोलकर गहन जांच की जानी चाहिए।”सरकार ने कहा कि जहां विशिष्ट मामले दर्ज नहीं किए गए हैं, वहां नए मामले दर्ज किए जा सकते हैं। इसके साथ ही उन मामलों में भी जहां प्रारंभिक जांच में संज्ञेय अपराध का पता चलता है। आदेश में कहा गया है, “एसपी, सीपी को इस प्रक्रिया की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करनी होगी। आरोप पत्र दाखिल करने के बाद इन मामलों की जांच और मुकदमे की नियमित रूप से निगरानी की जानी चाहिए।”2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद कई जगहों पर हिंसा हुई थी। तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल में भाजपा को हराकर सत्ता बरकरार रखी थी। भाजपा 2021 के विधानसभा चुनाव में 77 सीटें जीतकर बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी बनी थी। भाजपा ने 2016 में 3 सीटों से पांच वर्षों में 77 सीटों तक का सफर तय किया था।सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं पर भाजपा से जुड़े कार्यकर्ताओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा करने का आरोप लगा था। हत्या, दुष्कर्म, तोड़फोड़ और भाजपा कार्यकर्ताओं और उनके परिवार के सदस्यों पर हमले की घटनाएं हुईं। मामला कलकत्ता उच्च न्यायालय तक पहुंचा, जिसने हत्या और दुष्कर्म की गंभीर घटनाओं में सीबीआई जांच के आदेश दिए। हालांकि, कई मामले अभी भी चल रहे हैं और पीड़ित न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल में सरकार परिवर्तन के बाद ऐसे मामलों को फिर से खोलने की पहल की गई है। -
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के नए और नौवें मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार दोपहर दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधानसभा में शपथ ली। भवानीपुर से विधायक के रूप में शपथ लेकर अधिकारी ने स्पष्ट कर दिया कि वे पूर्वी मिदनापुर जिले के नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र से विधायक पद छोड़ देंगे। हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भवानीपुर के साथ ही नंदीग्राम से भी वे विधायक चुने गए थे।
भवानीपुर में इस बार सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार और तत्कालीन मुख्यमंत्री को 15,000 से अधिक वोटों के अंतर से हराया। नंदीग्राम में अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस के पबित्रा कर को 9,000 से अधिक वोटों से हराया। यह दूसरी बार था जब अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराया। 2021 में अधिकारी नंदीग्राम से ममता बनर्जी को लगभग 2,000 वोटों के अंतर से हराकर निर्वाचित हुए।इसके बाद 2021 में ममता बनर्जी भवानीपुर से उपचुनाव जीतकर लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनीं। 2026 में न केवल उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा बल्कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी हार का सामना करना पड़ा। सुवेंदु अधिकारी की तरह आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के संस्थापक हुमायूं कबीर भी इस बार एक साथ दो विधानसभा क्षेत्रों नाओदा और रेजिनगर से निर्वाचित हुए, ये दोनों ही मुर्शिदाबाद जिले के अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वे कौन सी सीट बरकरार रखेंगे और कौन सी सीट छोड़ेंगे।बुधवार को सुवेंदु अधिकारी विधानसभा परिसर पहुंचे और फिर सदन की सीढ़ियों को सिर झुकाकर और छूकर सदन में प्रवेश किया। उनका स्वागत कार्यवाहक अध्यक्ष और उत्तरी कोलकाता के मानिकतला विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक तापस रॉय ने किया। इस दौरान नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को विधानसभा परिसर में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा परिसर के भीतर बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और पुष्प अर्पित किए। इसके बाद, वे विधानसभा परिसर के भीतर सदन के नेता और मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें आवंटित कक्ष में गए और वहां देवी-देवताओं की मूर्तियों के समक्ष पूजा-अर्चना की। बाद में वे सदन के भीतर गए और भवानीपुर से विधायक के रूप में शपथ ली। निर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण समारोह बुधवार को शुरू हुआ और गुरुवार को भी जारी रहेगा। -
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। पश्चिम बंगाल विधानसभा सत्र का आज बुधवार को पहला दिन है। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले सीएम सुवेंदु अधिकारी के वीडियो ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। सुवेंदु अधिकारी जब बंगाल विधानसभा में मुख्यमंत्री के रूप में एंट्री कर रहे थे, तो पहले वह घुटनों के बल बैठे और सीढ़ियों पर दंडवत होकर विधानसभा को प्रणाम किया। इस दौरान वहां कई नेता और अधिकारी भी मौजूद रहे।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अब सीएम सुवेंदु अधिकारी का यह वीडियो वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो पर अलग-अलग प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं। इतना ही नहीं कई लोग सीएम सुवेंदु अधिकारी के इस वीडियो को देख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस पल का जिक्र कर रहे है कि जब 2014 में प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार लोकसभा में एंट्री करने से पहले सीढ़ियों पर मत्था टेका था।पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के तौर पर पहली बार विधानसभा पहुंचने पर सुवेंदु अधिकारी को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ भी दिया गया। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार को विधानसभा में विधायक के तौर पर शपथ ली। उनके अलावा राज्य मंत्री दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल ने भी विधायक के तौर पर शपथ ली।हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत हासिल की थी। कोलकाता में आयोजित भव्य समारोह में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने सुवेंदु अधिकारी और उनके साथ पांच अन्य मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई थी। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई केंद्रीय मंत्री और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी शामिल हुए थे। 2026 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बड़ी जीत हासिल की। भाजपा ने 293 में से 207 सीट हासिल की, जबकि तृणमूल 80 सीटों तक ही सिमट कर रह गई। बंगाल में बहुमत का जादुई आंकड़ा छूने के लिए 148 सीट चाहिए थीं, लेकिन भाजपा ने 207 सीटों के साथ यह आंकड़ा भी पार कर लिया। ( -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने गुजरात में अहमदाबाद (सरखेज) से धोलेरा तक सेमी हाई-स्पीड डबल रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दे दी है। करीब 20,667 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह भारतीय रेलवे की पहली सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना होगी, जिसे स्वदेशी तकनीक के आधार पर विकसित किया जाएगा। परियोजना के तहत लगभग 134 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बिछाई जाएगी, जिससे अहमदाबाद, धोलेरा SIR, आगामी धोलेरा एयरपोर्ट और लोथल राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (Lothal National Maritime Heritage Complex) के बीच तेज और बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।सरकार के अनुसार अहमदाबाद और धोलेरा के बीच यात्रा समय में काफी कमी आएगी, जिससे लोगों के लिए रोजाना आना-जाना और एक ही दिन में यात्रा पूरी करना आसान होगा। यह परियोजना देश में भविष्य में बनने वाली सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं के लिए मॉडल का काम करेगी।रेल मंत्रालय का कहना है कि यह परियोजना PM गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई है, ताकि मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाया जा सके। इससे लोगों, सामान और सेवाओं की आवाजाही अधिक सुगम होगी।इस परियोजना से गुजरात के अहमदाबाद जिले के लगभग 284 गांवों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी, जिनकी कुल आबादी करीब 5 लाख है। सरकार का मानना है कि इससे क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और धोलेरा क्षेत्र के औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी।पर्यावरणीय दृष्टि से भी इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रेलवे के मुताबिक इससे लगभग 0.48 करोड़ लीटर तेल की बचत होगी और करीब 2 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन कम होगा, जो लगभग 10 लाख पेड़ लगाने के बराबर प्रभाव माना गया है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य भारत के कोल गैसीफिकेशन कार्यक्रम को तेज करना और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।
यह योजना वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगी। साथ ही LNG, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल जैसे उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य भी रखा गया है।सरकार ने “प्रोडक्शन ऑफ सिंगैस लीडिंग टू कोल गैसीफिकेशन” श्रेणी के तहत कोल लिंकज की अवधि बढ़ाकर 30 वर्ष कर दी है। इससे निवेशकों को लंबी अवधि की नीति स्थिरता मिलेगी और निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।योजना की मुख्य विशेषताएंकुल 37,500 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पैकेजलगभग 75 मिलियन टन कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण का लक्ष्यप्लांट और मशीनरी लागत का अधिकतम 20 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहनप्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए परियोजनाओं का चयनप्रोत्साहन राशि चार चरणों में जारी होगीएक परियोजना के लिए अधिकतम 5,000 करोड़ रुपये की सहायताएक कंपनी समूह के लिए कुल सहायता सीमा 12,000 करोड़ रुपयेसरकार के अनुसार इस योजना से 2.5 लाख करोड़ से 3 लाख करोड़ रुपये तक निवेश आने की संभावना है। साथ ही कोयला उत्पादक क्षेत्रों में लगभग 50 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे।सरकार का अनुमान है कि 75 मिलियन टन कोयले के उपयोग से हर साल करीब 6,300 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है। इसके अलावा GST और अन्य करों से भी अतिरिक्त आय होगी।भारत के पास लगभग 401 अरब टन कोयले और 47 अरब टन लिग्नाइट का भंडार है। देश की ऊर्जा जरूरतों का 55 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अभी भी कोयले से पूरा होता है।कोल गैसीफिकेशन तकनीक के जरिए कोयले को “सिंथेसिस गैस” यानी सिंगैस में बदला जाता है, जिसका उपयोग ईंधन और रसायनों के निर्माण में किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि इससे वैश्विक आपूर्ति संकट और कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कम होगा।सरकारी आंकड़ों के मुताबिक FY2025 में LNG, यूरिया, अमोनिया, मेथनॉल और कोकिंग कोल जैसे उत्पादों के आयात पर भारत का खर्च लगभग 2.77 लाख करोड़ रुपये रहा। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) ने मार्केटिंग सीजन 2026-27 की 14 खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का ऐलान किया है। सरकार ने मार्केटिंग सीजन 2026-27 में सबसे अधिक सूरजमुखी के बीज के लिए एमएसपी को 622 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाकर 8,343 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है, यह 2025-26 में 7,721 रुपए प्रति क्विंटल थी।
कॉटन के लिए एमएसपी को 557 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाकर 8,267 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है, जो कि पिछले साल 7,710 रुपए थी। केंद्र ने धान के लिए एमएसपी को 2,369 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 2,441 रुपए प्रति क्विंटल, बाजरा के लिए 2,775 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 2,900 रुपए प्रति क्विंटल, और रागी के लिए एमएसपी को 4,886 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 5,205 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है।सरकार ने अनाजों के साथ दालों के लिए भी एमएसपी में बढ़ोतरी की है। अरहर के लिए एमएसपी को 450 रुपए बढ़ाकर 8,450 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो कि पिछले साल 8,000 रुपए प्रति क्विंटल थी। उड़द के लिए एमएसपी को 400 रुपए बढ़ाकर 8,200 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो कि पिछले साल 7,800 रुपए प्रति क्विंटल थी। वहीं, मूंगफली के लिए एमएसपी को 7263 प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 7517 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है । मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए खरीफ फसलों के एमएसपी में वृद्धि केंद्रीय बजट 2018-19 में एमएसपी को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना पर निर्धारित करने की घोषणा के अनुरूप है। इससे किसानों को उत्पादन लागत पर मिलने वाला अपेक्षित लाभ मूंग (61 प्रतिशत) में सबसे अधिक, इसके बाद बाजरा (56 प्रतिशत), मक्का (56 प्रतिशत) और अरहर (54 प्रतिशत) में होगा। शेष फसलों के लिए, किसानों को उत्पादन लागत पर मिलने वाला लाभ 50 प्रतिशत रहने का अनुमान है। -
नई दिल्ली। सीबीएसई 12वीं की बोर्ड परीक्षा में उपस्थित हुए छात्रों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने बुधवार को इंटरमीडिएट (12वीं) बोर्ड की परीक्षाओं के परिणाम घोषित कर दिए हैं। ऐसे में जो छात्र-छात्राएं बोर्ड परिणाम जारी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, वे अब बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट के अलावा डिजीलॉकर पोर्टल और उमंग ऐप पर भी जाकर अपना रिजल्ट चेक करने के साथ स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।
सीबीएसई की ओर से जारी नतीजों के मुताबिक, इस वर्ष परीक्षा में कुल 85.20 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए हैं, जिसमें लड़कियों ने एक बार फिर बाजी मारते हुए लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया है। सीबीएसई 12वीं बोर्ड की परीक्षा में लड़कियों का कुल पास प्रतिशत 88.86 फीसदी और लड़कों का 82.13 फीसदी दर्ज किया गया है। सीबीएसई 12वीं रिजल्ट में 94,028 छात्रों ने 90 प्रतिशत और उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं जबकि 17,113 छात्रों ने 95 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त किए हैं।सीबीएसई 12वीं बोर्ड का परिणाम चेक करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। होमपेज पर जाने के बाद ‘सीनियर स्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा (कक्षा XII) परिणाम 2026’ लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद एक नया पेज खुलेगा; वहां अपना रोल नंबर, स्कूल नंबर, और एडमिट कार्ड आईडी दर्ज करें। फिर परिणाम आपके स्क्रीन पर खुल जाएगा। रिजल्ट को चेक करने के बाद मार्कशीट डाउनलोड कर लें। भविष्य के लिए मार्कशीट का प्रिंट आउट सुरक्षित निकाल कर रख लें। बता दें कि इस वर्ष सीबीएसई की ओर से 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं 17 फरवरी से 9 अप्रैल के बीच आयोजित की गई थीं। वहीं, कंपार्टमेंट वाले छात्रों के लिए सप्लीमेंट्री परीक्षा 15 जुलाई को केवल एक दिन आयोजित की जाएगी। इसके लिए एलओसी (उम्मीदवारों की सूची) जमा करने की प्रक्रिया 2 जून से ऑनलाइन माध्यम से शुरू हो जाएगी। -
नई दिल्ली। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देशों के आधार पर महाराष्ट्र के मंत्रियों और अधिकारियों के पहले से मंजूर विदेश दौरों को स्थगित कर दिया गया है। अब अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े काम वर्चुअल प्लेटफॉर्म के जरिए किए जाएंगे, ताकि सरकारी खर्च कम हो सके और देश के ईंधन बचाने के अभियान को भी बढ़ावा मिले।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को राज्य के मंत्रियों और उच्च-रैंकिंग वाले सरकारी अधिकारियों के लिए पहले से तय विदेश दौरों को तुरंत रद्द करने का आदेश दिया। सरकारी सूत्रों ने बताया कि राज्य प्रशासन ने प्रशासनिक कामों या स्टडी टूर के लिए तय सभी आगामी अंतरराष्ट्रीय दौरों को रोकने के निर्देश जारी किए हैं। इस अचानक और सख्त कदम का मुख्य मकसद राज्य के खजाने पर पड़ने वाले बोझ को कम करना और जनता को वित्तीय अनुशासन व खर्चों में कटौती का एक मजबूत संदेश देना है।यह सुनिश्चित करने के लिए कि शासन-प्रशासन का काम बिना किसी रुकावट के चलता रहे, सरकार ने निर्देश दिया है कि सभी जरूरी अंतरराष्ट्रीय समझौते, बैठकें और विचार-विमर्श वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही किए जाएं। मुख्यमंत्री के आदेश का तुरंत प्रभाव से असर भी हुआ है। पर्यटन, खनन और महिला व बाल विकास मंत्री शंभूराज देसाई ने लंदन और पेरिस के अपने तय दौरे को रद्द कर दिया। बताया जा रहा है कि यह यात्रा तीन महीने पहले से ही एक निजी पारिवारिक छुट्टी के तौर पर तय की गई थी, लेकिन मंत्री देसाई ने इसे रद्द करने का फैसला किया, ताकि वे ईंधन बचाने और विदेशी मुद्रा बचाने की देशव्यापी भावना के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें।वहीं, महाराष्ट्र विधानसभा में भी विधायकों के जापान के लिए तय स्टडी टूर को रद्द कर दिया गया। इस बात की पुष्टि विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने की।सरकार का यह कदम तब आया है, जब प्रधानमंत्री मोदी ने नेताओं और अधिकारियों से अपील की थी कि वे अनावश्यक विदेश यात्राओं और खर्चों से बचें, ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो सके। यह अपील ऐसे समय में की गई है, जब वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं और पश्चिम एशिया में चल रहा संकट ईंधन की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता पर असर डाल रहा है। - नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) 2026 पेपर लीक मामले की जांच अब आधिकारिक रूप से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई है। सीबीआई की एक टीम मंगलवार देर शाम जयपुर में स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप मुख्यालय पहुंची। इसके बाद राजस्थान एसओजी ने मामले से जुड़े सभी दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अब तक गिरफ्तार आरोपियों की जानकारी सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है और अब जांच पूरी तरह उसके हाथ में है।एजेंसी ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी और सबूत नष्ट करने जैसे आरोप शामिल हैं। इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स प्रिवेंशन) एक्ट 2024 की धाराएं भी जोड़ी गई हैं।शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की शिकायत के अनुसार, नीट परीक्षा 3 मई को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद एनटीए को कई शिकायतें और खुफिया जानकारी मिली कि परीक्षा से पहले ही कुछ गोपनीय दस्तावेज अवैध रूप से प्रसारित किए गए थे।पिछले कुछ दिनों में एसओजी ने जयपुर, जमवारामगढ़, सीकर और अन्य जिलों में लगातार छापेमारी की और करीब 15 लोगों को गिरफ्तार किया। सूत्रों के अनुसार, आरोपियों को पूरे नेटवर्क की जांच के लिए दिल्ली ले जाया जा सकता है, जहां उनसे ‘गेस पेपर’ तैयार करने, उसके वितरण और छात्रों तक पहुंचने के पूरे नेटवर्क के बारे में पूछताछ की जाएगी।जांच में सामने आया है कि सीकर और झुंझुनूं के कई छात्रों को परीक्षा से दो दिन पहले ही ‘गेस पेपर’ मिल गया था। दावा किया जा रहा है कि इसमें से 120 से अधिक प्रश्न असली परीक्षा में आए। एसओजी जांच मई 8 को शुरू हुई थी, जब सीकर और झुंझुनूं से शिकायतें सामने आई थीं।अधिकारियों के अनुसार, पेपर लीक नेटवर्क ने टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर प्रश्न पत्र फैलाया था। जांच में यह भी पता चला कि ‘गेस पेपर’ 1 मई को सीकर के छात्रों में पहली बार वितरित किया गया था। यह भी सामने आया है कि कुल 720 अंकों में से लगभग 600 अंकों के सवाल उस गेस पेपर में शामिल थे और 120–140 प्रश्न सीधे परीक्षा में पूछे गए।जांच में यह भी पता चला कि यह ‘गेस पेपर’ केरल में पढ़ाई कर रहे चुरू जिले के एक एमबीबीएस छात्र ने सीकर के एक दोस्त को भेजा था। वहां से यह पीजी आवास संचालक के जरिए छात्रों तक पहुंचा। जांच एजेंसियों ने बताया कि एक ही पीजी संचालक ने पहले खुद यह प्रश्न बैंक प्राप्त किया और बाद में उसे छात्रों व कोचिंग सलाहकारों को भेज दिया। पुलिस का मानना है कि गिरफ्तारी के डर से उसने बाद में खुद ही शिकायत दर्ज करा दी। कई छात्रों ने भी एनटीए को ईमेल के जरिए पेपर लीक की शिकायत भेजी है। जांच में कई कोचिंग सेंटर भी रडार पर हैं और उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
- नई दिल्ली। भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील, पश्चिम बंगाल के नगर निगम भर्ती घोटाले में ईडी की कार्रवाई समेत विभिन्न मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन कक्षाओं और कारपूलिंग को बढ़ावा देने की अपील पर गौरव वल्लभ ने कहा, “भारत हर साल लगभग 12.5 लाख करोड़ रुपये का कच्चा तेल खरीदता है, जबकि करीब 6.5 लाख करोड़ रुपये का सोना आयात करता है। यानी इन दोनों पर ही कुल मिलाकर लगभग 18.5 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यदि हम इसमें सिर्फ 10 प्रतिशत की कमी कर लें, तो करीब 2 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाई जा सकती है।”पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस की ईडी द्वारा गिरफ्तारी पर गौरव वल्लभ ने कहा, “टीएमसी के 15 वर्षों के शासनकाल में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। घुसपैठियों को संरक्षण देने और उन्हें बढ़ावा देने का मॉडल ध्वस्त हो चुका है। अब बंगाल में बंगाल की जनता के लिए विकास का मॉडल लागू किया जाएगा।”असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के शपथ ग्रहण समारोह पर भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने कहा, “हमने असम में लगातार तीसरी बार सरकार बनाई है और हर बार पिछली बार की तुलना में हमारे विधायकों की संख्या बढ़ी है।” इसके पहले गौरव वल्लभ ने कहा था, “असदुद्दीन ओवैसी को अब ‘वंदे मातरम’ से भी दिक्कत होने लगी है, जो उनकी ‘बांटने वाली मानसिकता’ को दर्शाता है। भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति में विश्वास करती है और देश की एकता तथा राष्ट्रभावना को सर्वोपरि मानती है। ‘वंदे मातरम’ महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित राष्ट्रीय गीत है और इसे लेकर किसी प्रकार की आपत्ति देश की भावनाओं के खिलाफ है। ‘भारत माता की जय‘ भी बोला जाएगा, ‘वंदे मातरम’ का गान भी होगा और ‘जन-गण-मन’ भी पूरे सम्मान के साथ गाया जाएगा।--
- सोनभद्र (उप्र) ।: रामपुर बरकोनिया थाना क्षेत्र में मंगलवार रात को हुए दर्दनाक सड़क हादसे से शादी की खुशिया मातम में बदल गईं.। बारातियों से भरी पिकअप अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गई.। हादसे में तीन युवकों की मौत हो गई और नौ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।. तीन घायलों को गंभीर हालत में वाराणसी ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया है. । वहीं दुर्घटना की सूचना मिलने पर डीएम समेत कई अधिकारी अस्पताल पहुंचे और घायलों का हाल चाल जाना.।थानाध्यक्ष रामपुर बरकोनिया विनोद यादव ने बताया कि मिर्जापुर जिले के मड़िहान तहसील क्षेत्र के सेमरीबांध से बारात रामपुर बरकोनिया जा रही थी।. रामपुर बरकोनिया थाना क्षेत्र के कठार गांव के पास बारातियों से भरी पिकअप अचानक अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे पलट गई.। हादसा इतना भीषण था कि पिकअप में सवार लोग दूर जा गिरे और मौके पर अफरा-तफरी मच गई.। स्थानीय लोगों ने किसी तरह घायलों को बाहर निकाला और मेडिकल काॅलेज हॉस्पिटल सोनभद्र एम्बुलेंस की मदद से पहुंचाया.हादसे में तीन युवकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई है और नौ लोग घायल हैं.। इनमें तीन की हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने वाराणसी ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया. । बाकी छह घायलों का इलाज मेडिकल हॉस्पिटल लोढ़ी सोनभद्र में जारी है।. दुर्घटना की सूचना मिलने डीएम चर्चित गौड़ समेत कई अधिकारी अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों को बेहतर इलाज के निर्देश दिए।.थानाध्यक्ष रामपुर बरकोनिया विनोद यादव के अनुसार दुर्घटना में कुल 12 लोग घायल थे. जिन्हें इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज सोनभद्र भेजा गया. जहां तीन युवकों राजन गोंड़ (20), अजय गोंड़ (18) और विनोद गोंड़ (35) को मृत घोषित कर दिया गया. ।ये सभी मड़िहान मिर्जापुर के निवासी हैं।. तीन लोगों को गंभीर अवस्था में वाराणसी रेफर किया गया है.। 6 लोगों का इलाज मेडिकल कॉलेज सोनभद्र में चल रहा है।. पिकअप में कुल 16 लोग सवार थे. अन्य को हल्की फुल्की चोटें आई हैं.।
-
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नागरिकों से ईंधन की खपत कम करने की अपील के बाद देश भर के राजनीतिक नेताओं और सरकारों ने ईंधन बचाने के उपाय अपनाने शुरू कर दिए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद कई नेताओं ने ईंधन बचाने और ऊर्जा बचत प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए मेट्रो यात्रा, इलेक्ट्रिक वाहनों और काफिले का आकार घटाने जैसे विकल्पों को चुना। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बुधवार को प्रधानमंत्री के ईंधन उपयोग कम करने के आह्वान के अनुरूप अपने-अपने आवासों से काफी छोटे काफिले के साथ रवाना हुए।उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिकों से ईंधन बचाने और ऊर्जा कुशल प्रथाओं को अपनाकर प्रधानमंत्री के संदेश का पालन करने का आग्रह किया। यूपी सरकार ने आधिकारिक काफिलों में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की संख्या में 50 प्रतिशत की कमी करने का निर्देश दिया और अधिकारियों को जहां भी संभव हो, घर से काम करने और वर्चुअल बैठकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। मुख्यमंत्री योगी ने लोगों से सार्वजनिक परिवहन, साइकिल और इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक उपयोग करने की अपील की और साप्ताहिक “वाहन निषेध दिवस” मनाने के विचार को बढ़ावा दिया।इस बीच, पीएम मोदी की अपील के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने आधिकारिक काफिले में वाहनों की संख्या 13 से घटाकर 8 कर दी। मध्य प्रदेश सरकार ने वाहन रैलियों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है और मंत्रियों और अधिकारियों को वाहनों का कम से कम उपयोग करने और बड़े औपचारिक जुलूसों से बचने का निर्देश दिया है।दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी घोषणा की कि सरकार द्वारा आधिकारिक कार्यों के लिए कम से कम वाहनों का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह कैबिनेट मंत्रियों, भाजपा विधायकों, जन प्रतिनिधियों, दिल्ली सरकार के अधिकारियों और सभी विभागों के साथ मिलकर कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देंगी और आधिकारिक कार्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले वाहनों की संख्या कम करेंगी। इस घोषणा के बाद, दिल्ली के मंत्री आशीष सूद और कपिल मिश्रा दिल्ली मेट्रो का इस्तेमाल करते हुए अपने कार्यालयों तक गए।राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों को काफिले के वाहनों का कम से कम उपयोग करने और अनावश्यक वाहनों की तैनाती से बचने का निर्देश दिया, विशेषकर सुरक्षा व्यवस्था के लिए। उन्होंने मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को सभी विभागों में इसी तरह की प्रक्रियाओं को लागू करने का निर्देश दिया।महाराष्ट्र में, सरकार ने गैर-जरूरी हवाई यात्रा पर अंकुश लगाने के लिए सरकारी विमानों के उपयोग हेतु मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कार्यालय से पूर्व अनुमति अनिवार्य कर दी है। भाजपा विधायक संजय उपाध्याय अपने साथियों के साथ मुंबई से चिपलुन तक ट्रेन से यात्रा की। भाजपा विधायक ने कहा कि राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए, वे पेट्रोल की खपत कम करने के लिए भविष्य में भी मुंबई में लोकल ट्रेनों से ही यात्रा करेंगे।गुजरात में, राज्यपाल ने घोषणा की कि ईंधन संरक्षण पहल के तहत वे राज्य के भीतर यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर और हवाई जहाज के बजाय ट्रेनों, राज्य परिवहन बसों और सार्वजनिक परिवहन के अन्य साधनों का उपयोग करेंगे। राज्यपाल ने यह भी कहा कि सरकारी काफिलों का आकार कम किया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के काफिले में गाड़ियों की संख्या कम की गई और अब काफिले में सिर्फ़ 3 गाड़ियां रहेंगी। वहीं, गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने भी प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा कम करने और ईंधन बचाने की अपील के बाद अपनी अमेरिका यात्रा रद्द कर दी।बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री की अपील का समर्थन करते हुए इलेक्ट्रिक वाहन का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। बिहार के कई मंत्रियों और सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं ने भी ईंधन बचाने की इस पहल का समर्थन किया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने घोषणा की कि उन्होंने अपने वाहनों की संख्या आधी कर दी है और वे केवल आवश्यकता पड़ने पर ही आधिकारिक यात्रा करेंगे। बिहार के भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह ने भी इस पहल का समर्थन किया और विश्वास जताया कि बिहार भर के लोग प्रधानमंत्री की अपील का समर्थन करेंगे।राजनीतिक नेताओं की यह राष्ट्रव्यापी प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक ईंधन आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है। -
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने बुधवार को मेट्रो से यात्रा की और कहा कि यह कदम वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच ईंधन की खपत कम करने और ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की अपील को लागू करने के सरकारी प्रयासों का हिस्सा है।
दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी मेट्रो यात्रा का वीडियो साझा करते हुए उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और सभी मंत्रियों ने दृढ़ संकल्प के साथ इसका कार्यान्वयन शुरू कर दिया है। मैं सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करुंगा या केवल आवश्यकता पड़ने पर एक सरकारी वाहन का उपयोग करुंगा। आज सुबह दिल्ली मेट्रो की यात्रा।”मंत्री का यह बयान दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा ईंधन के उपयोग को कम करने और मंत्रियों, विधायकों व सरकारी अधिकारियों के बीच सार्वजनिक परिवहन और कारपूलिंग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक व्यापक पहल की घोषणा के एक दिन बाद आया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार रात को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट में कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्तमान वैश्विक स्थिति को देखते हुए देश के नागरिकों से पेट्रोल-डीजल बचाने और ऊर्जा संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया है।”उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री की इस महत्वपूर्ण अपील को ध्यान में रखते हुए, विभागीय कार्यों के लिए वाहनों की संख्या सीमित करने का निर्णय लिया गया है। मैं, मेरे सभी मंत्रिमंडल सहयोगी, भारतीय जनता पार्टी के सभी विधायक, जन प्रतिनिधि, दिल्ली सरकार के अधिकारी और सभी विभाग आवश्यकतानुसार न्यूनतम वाहनों का उपयोग करेंगे और कार पूलिंग तथा सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देंगे।”ऊर्जा संरक्षण को राष्ट्रीय हित से जुड़ा मुद्दा बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार ईंधन संरक्षण और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए “पूरी प्रतिबद्धता” के साथ काम कर रही है।रेखा गुप्ता ने कहा, “मैं दिल्ली के सभी निवासियों से आग्रह करता हूं कि वे प्रधानमंत्री के इस आह्वान का पालन करते हुए ऊर्जा संरक्षण के इस राष्ट्रीय प्रयास में शामिल हों।” ये अपीलें प्रधानमंत्री मोदी द्वारा रविवार को तेलंगाना के सिकंदराबाद के परेड ग्राउंड में भाजपा द्वारा आयोजित एक सार्वजनिक बैठक में दिए गए भाषण के बाद की गई हैं, जिसमें उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव को देखते हुए नागरिकों से ईंधन बचाने के उपाय अपनाने का आग्रह किया था। - नई दिल्ली।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 1998 में इसी दिन भारत ने जो परमाणु परीक्षण किए थे, उनसे दुनिया को पता चला कि हमारे देश की इच्छाशक्ति कितनी अटल है! 11 मई के टेस्ट के बाद पूरी दुनिया का दबाव भारत पर था, लेकिन हमने दिखाया कि कोई भी ताकत भारत को झुका नहीं सकती।सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर अपने संदेश में पीएम मोदी ने एक संस्कृत श्लोक भी साझा किया, “एवं परस्परापेक्षा शक्तिशक्तिमतोः स्थिता । न शिवेन विना शक्तिर्न शक्त्या विना शिवः।।”इसका अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि शक्ति और सामर्थ्य एक-दूसरे के पूरक होते हैं। केवल क्षमता होना पर्याप्त नहीं, उसे कार्यरूप देने वाली शक्ति भी आवश्यक है; और शक्ति भी तभी सार्थक होती है जब उसके पीछे समर्थ आधार हो। जैसे शिव और शक्ति का अस्तित्व परस्पर अविभाज्य माना गया है, वैसे ही सामर्थ्य और ऊर्जा के समन्वय से ही सृजन, प्रगति और सफलता संभव होती है।गौरतलब है कि 13 मई 1998 का दिन भारत के इतिहास में बहुत अहम माना जाता है। इस दिन राजस्थान के पोखरण में ‘ऑपरेशन शक्ति’ के तहत भारत ने दो और सफल परमाणु परीक्षण किए, जिन्हें शक्ति-IV और शक्ति-V नाम दिया गया। ये परीक्षण 11 मई 1998 को हुए पहले तीन परीक्षणों की शृंखला का ही आगे का हिस्सा थे।इन परीक्षणों का उद्देश्य भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता को और मजबूत करना था। यह भी बताया गया कि ये सभी परीक्षण भूमिगत तरीके से किए गए और पूरी तरह नियंत्रित थे, जिससे किसी तरह की रेडियोएक्टिविटी बाहर नहीं फैली। इन परीक्षणों से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल कंप्यूटर सिमुलेशन और भविष्य की परमाणु तकनीक को बेहतर बनाने में किया गया।इस पूरे अभियान का नेतृत्व तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने किया था। इन सफल परीक्षणों के बाद भारत को दुनिया में एक परमाणु शक्ति संपन्न देश के रूप में पहचान मिली।
-
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए शक्ति और सामर्थ्य के सामंजस्य का महत्व बताया। उन्होंने वर्ष 1998 में पोखरण में किए गए परमाणु परीक्षणों को भारत के अटूट संकल्प का प्रतीक भी बताया।
पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा यह संदेशइस संबंध में प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा कि 11 मई 1998 को हुए परमाणु परीक्षणों ने दुनिया को भारत की इच्छाशक्ति का परिचय कराया था। परीक्षणों के बाद पूरी दुनिया ने भारत पर दबाव बनाया, लेकिन भारत ने दिखा दिया कि कोई भी ताकत उसे झुका नहीं सकती।पीएम मोदी ने संस्कृत सुभाषित किया साझाप्रधानमंत्री ने पोस्ट में संस्कृत सुभाषित भी साझा किया। इसमें कहा गया है कि शक्ति और शक्तिमान एक-दूसरे पर आश्रित हैं तथा शिव के बिना शक्ति और शक्ति के बिना शिव अधूरे हैं।प्रधानमंत्री ने लिखा:“एवं परस्परापेक्षा शक्तिशक्तिमतोः स्थिता ।न शिवेन विना शक्तिर्न शक्त्या विना शिवः।।”सुभाषित का अर्थइस सुभाषित का अर्थ है कि शक्ति और सामर्थ्य एक-दूसरे के पूरक हैं। जिस प्रकार शिव के बिना शक्ति अधूरी है और शक्ति के बिना शिव अधूरे हैं, उसी प्रकार किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए शक्ति और उसके सही उपयोग का संतुलन आवश्यक है। ( -
नयी दिल्ली. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने तीन मई को आयोजित मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट-यूजी-2026' को इसका प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के मद्देनजर मंगलवार को रद्द करने की घोषणा की तथा सरकार ने सीबीआई को इन 'अनियमितताओं' की विस्तृत जांच करने का आदेश दिया। चिकित्सा महाविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए यह परीक्षा अब नए सिरे से आयोजित की जाएगी, जिसकी तिथियां अलग से अधिसूचित की जाएंगी। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर जारी एक बयान में कहा कि यह निर्णय पारदर्शिता बनाए रखने और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में विश्वास को बरकरार रखने के लिए लिया गया है। उसने कहा, ''केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर एनटीए द्वारा तथ्यों को परखे जाने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा साझा की गई जानकारी के आधार पर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने तीन मई 2026 को आयोजित नीट (यूजी) 2026 परीक्षा को भारत सरकार की मंजूरी से रद्द करने और अलग से अधिसूचित तिथियों पर परीक्षा पुनः आयोजित करने का निर्णय लिया है।'' नीट यूजी 2026 परीक्षा तीन मई को भारत के 551 शहरों और अन्य देशों के 14 शहरों में आयोजित की गई थी। यह परीक्षा लगभग 23 लाख पंजीकृत परीक्षार्थियों के लिए आयोजित की गयी थी।
एजेंसी ने कहा कि प्राप्त सूचनाओं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा साझा किए गए निष्कर्षों के आधार पर यह स्पष्ट हो गया है कि 'वर्तमान परीक्षा प्रक्रिया को जारी रखना उचित नहीं है।' उसने कहा, ''पुनः होने वाली परीक्षा की तिथियां और उनके लिए जारी किये जाने वाले प्रवेश पत्र की समय-सारणी अगले कुछ दिनों में एजेंसी के आधिकारिक माध्यमों से सूचित की जाएगी।'' एनटीए ने कहा कि सरकार ने परीक्षा से जुड़े आरोपों की व्यापक जांच के लिए मामले को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का फैसला किया है। उसने कहा, ''एनटीए सीबीआई को पूरा सहयोग देगी और जांच के लिए आवश्यक सभी सामग्री, रिकॉर्ड और सहायता प्रदान करेगी।'' एनटीए ने कहा, ''यह निर्णय विद्यार्थियों के हित में और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में भरोसे को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।'' एजेंसी ने स्वीकार किया कि परीक्षा को दोबारा आयोजित करने से परीक्षार्थियों और उनके परिवारों को 'वाकई बड़ी असुविधा' होगी। उसने कहा कि लेकिन परीक्षा प्रणाली में विश्वास को 'बड़ी और स्थायी क्षति' से बचाने के लिए यह निर्णय आवश्यक था। एनटीए के अनुसार, मई 2026 के सत्र में पंजीकृत उम्मीदवारों की जानकारी और चुने गए परीक्षा केंद्रों को पुनः आयोजित होने वाली परीक्षा में शामिल किया जाएगा। बयान में कहा गया है, ''नए पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होगी और कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क नहीं लिया जाएगा।'' बयान के अनुसार विद्यार्थियों द्वारा भुगतान की गई फीस वापस कर दी जाएगी और परीक्षा एनटीए के आंतरिक संसाधनों का उपयोग कर पुनः आयोजित की जाएगी। एजेंसी ने कहा कि परीक्षा की नयी तारीखें और संशोधित प्रवेश पत्र की समय सारणी की सूचना आने वाले दिनों में आधिकारिक चैनलों के माध्यम से दी जायेगी तथा परीक्षार्थियों एवं अभिभावकों को सलाह है कि वे केवल एजेंसी द्वारा जारी की गई सत्यापित जानकारी पर ही भरोसा करें। एनटीए ने रविवार को 'एक्स' पर पोस्ट किया था कि प्रश्न पत्रों को 'जीपीएस-ट्रैकिंग' वाले वाहनों में ले जाया गया था, जिन पर विशिष्ट, 'ट्रेस' करने योग्य 'वॉटरमार्क' लगे थे तथा परीक्षा केंद्रों की निगरानी एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से एआई-सहायता प्राप्त सीसीटीवी निगरानी के माध्यम से की गई थी। उसने कहा था, ''राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को नीट (यूजी) 2026 से संबंधित कथित अनियमितताओं के संबंध में राजस्थान विशेष अभियान समूह द्वारा शुरू की गई कार्रवाई की जानकारी है। तीन मई, 2026 को परीक्षा निर्धारित समय पर और पूर्ण सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत आयोजित की गई थी।'' एजेंसी के अनुसार, कथित कदाचार से संबंधित सूचनाएं परीक्षा के चार दिन बाद सात मई की शाम को प्राप्त हुईं जिसे आठ मई की सुबह 'स्वतंत्र सत्यापन और आवश्यक कार्रवाई' के लिए केंद्रीय एजेंसियों को भेज दिया गया। राजस्थान पुलिस के 'एसओजी' के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) विशाल बंसल ने सोमवार को कहा था कि जांच फिलहाल उस 'अनुमानित प्रश्नपत्र' पर केंद्रित है, जिसे परीक्षा से पहले विद्यार्थियों के बीच कथित तौर पर वितरित किया गया था। बंसल ने कहा था, ''नीट परीक्षा को लेकर फैली विभिन्न गलतफहमियों के संबंध में, मैं एक बात स्पष्ट करना चाहता हूं: लगभग 410 प्रश्नों वाला एक अनुमानित प्रश्नपत्र (गेस पेपर) है। आरोप है कि इनमें से लगभग 120 प्रश्न रसायन विज्ञान के प्रश्नपत्र में शामिल थे।'' हालांकि परीक्षा में रसायन विज्ञान के प्रश्नपत्र में 45 प्रश्न थे एवं परीक्षा में प्रश्नपत्रों के चार सेट का उपयोग किया गया। उन्होंने कहा था, ''खबर है कि यह गेस पेपर विद्यार्थियों के बीच काफी पहले पहुंच गया था; यह वास्तविक परीक्षा से 15 दिन से लेकर एक महीने पहले तक उन तक पहुंचने लगा था। हम अनुमानित प्रश्नपत्र के आधार पर जांच कर रहे हैं और यह सार्वजनिक रूप से भी उपलब्ध है।''
-
गुवाहाटी। पूर्वोत्तर में भाजपा के तेजी से बढ़ने का व्यापक श्रेय पाने वाले हिमंत विश्व शर्मा का लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेना, न केवल नेतृत्व की निरंतरता को दर्शाता है, बल्कि इस क्षेत्र में पार्टी की बढ़ती राजनीतिक पैठ का भी संकेत देता है। कांग्रेस की ओर से तीखी आलोचना होने और अपनी पत्नी के खिलाफ आरोपों की झड़ी लगने के बावजूद, शर्मा पूरे चुनाव में दृढ़ता से प्रचार करते रहे और असम में भाजपा को प्रभुत्व पाने में मदद की, जिससे क्षेत्र में सत्ताधारी राजग के पक्ष में राजनीतिक परिदृश्य को एक नया आकार मिला। राज्य की विकास यात्रा जारी रखने का संकल्प जताते हुए 57 वर्षीय नेता ने कहा है कि मुख्यमंत्री के रूप में उनका पहला कार्यकाल केवल 'ट्रेलर' था और दूसरे कार्यकाल में 'फिल्म' आएगी। हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव में शर्मा ने जालुकबारी सीट पर 89,434 मतों के बड़े अंतर से जीत हासिल कर एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ साबित की। वर्ष 2015 में कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के बाद वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री बनने तक का शर्मा का सफर लंबे समय से उपयोग में लाई जा रही राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक कौशल का परिणाम माना जाता है। मुख्यमंत्री बनने के बाद 57 वर्षीय हिमंत शर्मा ने विकास कार्यों को गति देने, कल्याणकारी योजनाएं लागू करने और स्वदेशी समुदायों के भूमि अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया है। उनका कार्यकाल हालांकि कई विवादों से भी घिरा रहा है। विशेष रूप से बांग्लादेश मूल के बांग्ला भाषी मुसलमानों, जिन्हें राज्य में 'मियां' कहा जाता है, को लेकर शर्मा के बयानों और नीतियों ने व्यापक बहस को जन्म दिया है। अतिक्रमण हटाने के अभियान, बाल विवाह के खिलाफ सख्ती, बहुविवाह पर कार्रवाई, मवेशी संरक्षण कानून का पालन, सरकारी मदरसों को बंद या परिवर्तित करने जैसे उनके कदमों को विपक्ष ने सामाजिक ध्रुवीकरण बढ़ाने वाला बताया। विवादों के बावजूद शर्मा अपने रुख पर कायम रहे। इस बीच, उनकी पत्नी से जुड़े आरोपों को लेकर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के साथ विवाद भी सुर्खियों में रहा, जिसका जिक्र उच्चतम न्यायालय के एक आदेश में भी हुआ। विपक्षी दलों विशेषकर कांग्रेस ने उनके कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए और उनकी पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा के कारोबारी लेन-देन पर सवाल उठाए, हालांकि मुख्यमंत्री ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया। कभी पूर्वोत्तर के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने वाले शर्मा अब भाजपा के प्रमुख चुनावी रणनीतिकारों में शामिल हैं और विभिन्न राज्यों में पार्टी के एजेंडे को आक्रामक रूप से आगे बढ़ा रहे हैं। हालांकि, कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी भाषा और शैली एक संवैधानिक पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। वर्ष 1996 में अपने पहले चुनाव में हार के बाद शर्मा 2001 से लगातार जालुकबारी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और कांग्रेस तथा भाजपा दोनों के टिकट पर जीत दर्ज कर चुके हैं। वह 2001 से ही विभिन्न सरकारों में मंत्री रहे हैं और प्रशासनिक दक्षता के साथ-साथ राजनीतिक रणनीति के लिए जाने जाते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया और तरुण गोगोई के मार्गदर्शन में उन्होंने कांग्रेस में तेजी से उभरते हुए महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया। लेकिन बाद में तरुण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई के साथ मतभेद बढ़ने के कारण 2015 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने सर्बानंद सोनोवाल के साथ मिलकर 2016 में असम में पार्टी की पहली सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा और लोक निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभालते हुए उन्होंने 2021 में मुख्यमंत्री पद संभाला। जोरहाट में जन्मे हिमंत विश्व शर्मा प्रसिद्ध कवि और उपन्यासकार कैलाश नाथ शर्मा तथा साहित्यकार मृणालिनी देवी के पुत्र हैं। हिमंत ने 1992 में राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की और इस विषय में पीएचडी की उपाधि भी प्राप्त की। उन्होंने 1995 में कानून की डिग्री प्राप्त की। गुवाहाटी उच्च न्यायालय में पांच वर्ष तक वकालत करने के बाद उन्होंने 2001 में राजनीति में प्रवेश किया। राजनीतिक दृढ़ता, संगठनात्मक कौशल और विवादों के बीच अपनी पकड़ बनाए रखने की क्षमता ने हिमंत विश्व शर्मा को न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर की राजनीति में एक केंद्रीय चेहरा बना दिया है।
-
गुवाहाटी। हिमंत विश्व शर्मा ने मंगलवार को लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए असम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने गुवाहाटी के खानापारा क्षेत्र के वेटरनरी मैदान में आयोजित भव्य समारोह में शर्मा को पद की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, सर्वानंद सोनोवाल, पबित्रा मारगेरिटा ने, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों तथा उप मुख्यमंत्रियों और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने भाग लिया। शर्मा की मां मृणालिनी देवी, पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा, पुत्र नंदिल विश्व शर्मा और पुत्री सुकन्या शर्मा भी इस दौरान मौजूद थे। शर्मा (57) असम में लगातार दूसरी बार शपथ लेने वाले पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बन गए हैं। शर्मा के साथ शपथ लेने वाले चार विधायकों में भाजपा के अजंता नियोग और रामेश्वर तेली, जबकि उनके सहयोगी दल असम गण परिषद (अगप) के अतुल बोरा और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के चरण बोरो शामिल हैं।



.jpg)















.jpg)







