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- नई दिल्ली। केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने घोषणा की है कि नौवीं और ग्यारहवीं कक्षा के जो छात्र इस साल परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो पाए, उन्हें कोविड-19 संकट के मद्देनजर स्कूल में होने वाली परीक्षा में शामिल होने का एक और मौका दिया जाएगा।सीबीएसई के नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा, स्कूल नौवीं और ग्यारहवीं कक्षा के अनुत्तीर्ण छात्रों के लिये ऑनलाइन या ऑफलाइन परीक्षाएं ले सकते हैं। कोविड-19 की अभूतपूर्व स्थिति को देखते हुए यह एक बार का मौका केवल इस वर्ष दिया जा रहा है।सभी सीबीएससी स्कूलों को निर्देशित किया जा रहा है कि 9वीं एवं 11वीं में जो बच्चे अनुत्तीर्ण हो गए हैं, ऐसे सभी बच्चों को ऑनलाइन/ऑफलाइन/इनोवेटिव तरीके से टेस्ट लेने का एक अवसर प्रदान करें। सीबीएसई द्वारा जारी किए गए नोटिस को खुद मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ने अपने ट्विटर हैंडर पर शेयर किया है. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, सभी सीबीएसई स्कूलों को निर्देशित किया जा रहा है कि 9वीं एवं 11वीं में जो बच्चे अनुत्तीर्ण हो गए हैं, ऐसे सभी बच्चों को ऑनलाइन/ऑफलाइन/इनोवेटिव तरीके से टेस्ट लेने का एक अवसर प्रदान करें।नोटिस में कहा गया है, इन अभूतपूर्व हालातों में छात्रों और अभिभावकों के निवेदन के मद्देनजर सीबीएसई ने फैसला किया है कि 9वीं और 11वीं कक्षाओं में फेल होने वाले छात्रों को एक बार फिर स्कूल आधारित टेस्ट में शामिल होने का मौका दिया जाएगा। यह सुविधा उन सभी छात्रों के लिए होंगी जिनकी परीक्षाएं हो चुकी हैं और रिजल्ट जारी हो गए हैं या उनकी परीक्षाएं पूरी नहीं हुईं है। यह सुविधा विषयों और प्रयासों के इतर दी जाएगी।परीक्षा किस तरह आयोजित की जाएगी इस बारे में बताते हुए नोटिस में कहा गया है, स्कूल ऐसे छात्रों के लिए ऑनलाइन/ऑफलाइन परीक्षा का आयोजन कर सकते हैं और इसके आधार पर उन्हें अगली कक्षा में प्रमोट कर सकते हैं। यह टेस्ट उन सभी विषयों के लिए आयोजित किया जाएगा जिसमें स्टूडेंट फेल हुए हैं। टेस्ट आयोजित करने से पहले स्कूल स्टूडेंट को तैयारी के लिए पर्याप्त समय देंगे।---
- नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा है कि भारत ने, पाकिस्तान सीमा के निकटर्ती कुछ इलाकों में फसलों पर टिड्डियों के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए ब्रिटेन से नयी मशीनों का आर्डर किया है।उन्होंने एक बयान में कहा कि कोविड-19 संकट के बावजूद राजस्थान, गुजरात और पंजाब सरकार के अधिकारी टिड्डियों के हमले को काबू करने में लगे हैं। इसके लिए ट्रैक्टर पर लगायी गयी दावा छिड़काव की मशीनें तथा दमकलें लगायी गयी हैं। इसके लिए अतिरिक्त उपकरणों की भी खरीद की जा रही है। खेतों में टिड्डियों के हमले को रोकने की रणनीति दुरुस्त करने के लिए कीटनाशक विनिर्माताओं के साथ हुए वीडियो कांफ्रेंस के बाद श्री तोमर ने कहा, केन्द्र और राज्य सरकारें टिड्डियों के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं और इसके प्रसार को रोकने में सफल भी हुए हैं। ब्रिटेन से नयी मशीनों के लिए आर्डर जारी किये जा रहे हैं और ये जल्द पहुंच जायेंगी।इस वीडियों कांफ्रेंस के दौरान कृषि राज्यमंत्री पुरुषोत्तम रूपाला और कैलाश चौधरी भी उपस्थित थे। कृषि मंत्री ने कहा कि सामान्यत: जून-जुलाई के दौरान प्रजनन के लिए पाकिस्तान के रास्ते टिड्डियों का दल भारत के रेगिस्तानी इलाकों में घुसता है लेकिन इस बार टिड्डियों के झुंड अप्रैल में ही राजस्थान और पंजाब के सीमावर्ती जिलों में घुस आये थे। एक बयान में मंत्रालय ने कहा, अभी तक (यानी 11 मई 2020 तक) राजस्थान के जैसलमेर, श्रीगंगानगर, जोधपुर, बाड़मेर और नागौर जिलों तथा पंजाब के फाजिल्का जिले में 14,299 हेक्टेयर क्षेत्र में हापर्स और पिंक स्वार्म को नियंत्रित किया गया है। राजस्थान के बाड़मेर, फलौदी (जोधपुर), नागौर, श्रीगंगानगर और अजमेर जिलों में टिड्डों (अपरिपक्व पिंक लोकस्ट्स) के दल सक्रिय हैं और उनके नियंत्रण काम शुरु हुआ है। उन्होंने कहा कि नुकसान उठाने वाले किसानों को केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) से मुआवजा दिया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक समुदाय ने भारत के प्रयासों के लिए उसकी सराहना की है।--
- नई दिल्ली। रेलवे ने एक मई से 642 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया है जिससे देश के विभिन्न हिस्सों में लॉकडाउन के चलते फंसे आठ लाख प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाया गया।यह जानकारी अधिकारियों ने बुधवार को दी। इनमें से सबसे अधिक ट्रेनें (301) उत्तर प्रदेश और उसके बाद बिहार (169) पहुंचीं। अन्य राज्यों में मध्य प्रदेश में 53, झारखंड में 40 ट्रेनें, ओडिशा में 38, राजस्थान में आठ, पश्चिम बंगाल में सात, छत्तीसगढ़ में छह और उत्तराखंड में चार ट्रेनें पहुंचीं। आंध्र प्रदेश, जम्मू कश्मीर और महाराष्ट्र में तीन-तीन ट्रेनें पहुंचीं, जबकि एक-एक ट्रेन हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मणिपुर, मिजोरम, तमिलनाडु, तेलंगाना और त्रिपुरा पहुंचीं।रेलवे ने कहा है कि ट्रेनों में सवार होने से पहले यात्रियों की उचित स्क्रीनिंग की जाती है। यात्रा के दौरान यात्रियों को मुफ्त भोजन और पानी दिया जाता है। सोमवार से, प्रत्येक श्रमिक स्पेशल ट्रेन में 1,700 यात्रियों को ले जाना शुरू कर दिया गया था, उससे पहले ऐसी ट्रेनों में 1,200 लोगों को ले जाया जा रहा था। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि अधिक से अधिक श्रमिकों को उनके घर ले जाया जा सके। शुरूआत में इन ट्रेनों का बीच में कोई ठहराव नहीं था लेकिन रेलवे ने सोमवार को घोषणा की कि गंतव्य राज्य के रास्ते में इन ट्रेनों को तीन स्थानों तक रुकने की इजाजत होगी। अधिकारियों ने कहा कि ये निर्णय कई राज्य सरकारों द्वारा इस बारे में अनुरोध करने के बाद किया गया। रेलवे ने इन विशेष सेवाओं पर हुए खर्च की घोषणा अभी नहीं की है लेकिन अधिकारियों ने संकेत दिया कि प्रति सेवा करीब 80 लाख रुपये खर्च कर रहा है। केंद्र ने पहले कहा था कि ट्रेन सेवा की लागत केंद्र और राज्यों के बीच 85:15 अनुपात में साझा किया गया। श्रमिक स्पेशल ट्रेन सेवा शुरू होने के बाद से सबसे अधिक ट्रेनें गुजरात से शुरू हुईं, इसके बाद केरल का नम्बर है। बिहार और उत्तर प्रदेश इन ट्रेनों के शीर्ष गंतव्य राज्य हैं। इससे पहले रेलवे इन सेवाओं के लिए शुल्क वसूलने को लेकर विपक्षी दलों के निशाने पर आया था। सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि रेलवे फंसे हुए मजदूरों को तेजी से पहुंचाने के लिए अब प्रतिदिन 100 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाएगा।
- नई दिल्ली। . खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्थानीय उत्पादों के लिए मुखर बनने और इसे वैश्विक बनाने के लिए किए गए आह्वान के प्रति कमर कस लिया है। स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा की गई अपील के एक दिन बाद, केवीआईसी ने प्रमुख कार्यक्रम पीएमईजीपी के अंतर्गत परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए दिशा-निर्देशों को जारी किया है।केवीआईसी के अध्यक्ष, विनय कुमार सक्सेना ने बुधवार को संबंधित एजेंसियों को पीएमईजीपी के अंतर्गत आने वाले आवेदनों की जांच करने और 26 दिनों के अंदर धन का वितरण करने के लिए उन्हें बैंकों को भेजने का निर्देश दिया है। उन्होंने इसकी समय-सीमा को घटाकर 15 दिन करने का भी निर्देश दिया है। एजेंसियों के लिए, प्रस्ताव तैयार करने में आवेदकों का मार्गदर्शन करना और ऋण की स्वीकृति होने तक उनकी सहायता करना अनिवार्य होगा। सभी एजेंसियां ऋण की जल्द से जल्द मंजूरी प्राप्ति के लिए बैंकों के साथ आगे की कार्यवाही करेंगी।संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, मुंबई में केवीआईसी का मॉनिटरिंग सेल दैनिक आधार पर आवेदन के प्रक्रिया की निगरानी करेगा जबकि वह प्रत्येक पखवाड़े में क्रियान्वयन एजेंसियों को फीडबैक प्रदान करेगा। इसके बाद, प्रगति रिपोर्ट को केवीआईसी के सीईओ और चेयरमैन के सामने अवलोकन के लिए रखा जाएगा।श्री सक्सेना ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा स्थानीय उत्पादनों को प्रोत्साहित करने की अपील के मद्देनजर संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा, जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा है, आत्म-निर्भरता ही मंत्र है। पीएमईजीपी के अंतर्गत प्रक्रियाओं को सुविधाजनक बनाने से स्थानीय विनिर्माण के विकास में और तेजी आएगी। इसके माध्यम से कम से कम समय-सीमा के अंदर, अधिक से अधिक रोजगार का सृजन सुनिश्चित किया जा सकेगा। श्री सक्सेना ने कहा कि खादी एवं ग्रामोद्योग का स्थानीय रूप से वैश्विक रूप में परिवर्तन, अन्य स्थानीय उद्योगों और उद्यमों के लिए एक गहन अध्यन का विषय होगा। उन्होंने कहा कि, केवीआईसी एक नोडल एजेंसी के रूप में, पीएमईजीपी के अंतर्गत आने वाली आगामी परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए, यह निर्णय लिया गया है कि प्रत्येक जिले में एन95 मास्क, वेंटिलेटर या उनका सामान, चिकित्सा कर्मचारियों के लिए पीपीई किट, सैनिटाइजर/ लिक्विड हैंड वॉश, थर्मल स्कैनर और अगरबत्ती और साबुन के निर्माण से संबंधित कम से एक इकाई स्थापित की जाएगी। यह देश में मौजूदा कोविड-19 के संकट के कारण बढ़ती हुई मांग को पूरा करने के लिए है।संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, जांच के दौरान कार्यान्वयन एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि आवेदक ने 100 अंकों की तालिका में कम से कम 60 अंक प्राप्त किया है। इसी प्रकार, कच्चे माल की उपलब्धता, जनशक्ति, परिवहन और बिजली तक पहुंच जैसी तकनीकी व्यवहार्यता की भी जांच की जानी चाहिए, जिससे कि बैंक के स्तर पर अस्वीकृति को कम किया जा सके।इसी प्रकार, कार्यान्वयन एजेंसियों को बाजार का अध्ययन, प्रस्तावित उत्पाद की मांग का आंकलन, आसपास के इलाकों में इसी प्रकार के उत्पादों से संबंधित परियोजनाएं और बाजार की रणनीति की भी जांच करनी होगी। एजेंसियां यह सुनिश्चित करेंगी कि यह प्रस्ताव चयनित बैंक के अधिकार क्षेत्र में आता है, जिससे कि क्षेत्राधिकार को आधार बनाकर इसकी अस्वीकृति नहीं की जा सके।----
- रेरा के तहत पंजीकृत रियल एस्टेट परियोजनाओं का पंजीकरण 6 महीने के लिए बढ़ाया जाएनई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों और उनके रियल स्टेट नियामक प्राधिकरणों को एक एडवाइजरी जारी की है जिसमें कहा गया है कि रेरा (आर ई आर ए) के तहत पंजीकृत सभी रियल एस्टेट परियोजनाओं का पंजीकरण स्वत: 6 महीने के लिए बढ़ा दिया जाए और कोविड-19 महामारी की वजह से यदि जरूरी हुआ तो इसे पुन: अगले 3 महीने तक के लिए बढ़ा दिया जाए।आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों और उनके संबंधित रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरणों को एडवाइजरी जारी करते हुए मौजूदा कोविड-19 महामारी को प्राकृतिक आपदा मानकर फोर्स मैजियुर के रूप में विचार करने को कहा है जो रियल एस्टेट परियोजनाओं के नियमित विकास को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। इसमें रेरा के तहत पंजीकृत सभी रियल एस्टेट परियोजनाओं का पंजीकरण अगले छह महीने बढ़ाने और कोविड-19 महामारी की वजह से बनने वाली नई परिस्थिति के अनुसार पंजीकरण को और 3 महीने आगे बढ़ाने को कहा गया है।इस उपाय से घर खरीदारों को उनके फ्लैट / घरों की डिलीवरी पाने के अधिकारों का बचाव होगा। हालांकि इसमें कुछ महीनों की देरी होगी लेकिन, इससे परियोजनाओं का निर्माण कार्य सुनिश्चित हो सकेगा।पहले भी विभिन्न कारणों से कई परियोजनाओं का निर्माण कार्य अवरुद्ध हो गया था जिससे लाखों खरीदार अपने बुक किए हुए घरों के लिए बड़ी मुश्किल स्थिति में पड़ गए। इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोविड-19 रियल एस्टेट सेक्टर के कामकाज को पूरी तरह बर्बाद ना कर दे, कुछ सुधारात्मक उपाय करना अति आवश्यक हो गया है। इसलिए मौजूदा स्थिति में प्रमुख उद्देश्य परियोजनाओं को पूरा करने के लिए डेवलपर्स को जरूरी नियामक राहत देते हुए घर खरीदारों की चिंता दूर करना है ताकि सभी हितधारकों का भला हो सके।आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने घर खरीदारों, डेवलपर्स, वित्तीय संस्थानों इत्यादि समेत सभी हितधारकों के साथ विस्तृत विचार विमर्श किया और इस अचानक आई महामारी से उत्पन्न हालात में सर्वोत्कृष्ट समाधान ढूंढने के लिए सभी संबंधित मुद्दों पर बातचीत की।रियल एस्टेट (नियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) के तहत अति आवश्यक सुधारात्मक उपायों के अभाव में कई रियल एस्टेट परियोजनाओं के अवरुद्ध हो जाने से मुकदमेबाजी इत्यादि के बढऩे की भी आशंका है। इससे अंतत: नतीजा यह होगा कि उन घर खरीदारों को फ्लैट की डिलीवरी नहीं हो पाएगी जिन्होंने अपने सपनों के घर के लिए जीवन भर की कमाई का निवेश कर दिया है।
- नई दिल्ली। केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज फिर शाम चार प्रेस वार्ता करेंगी। खबरों के अनुसार वे 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज के दूसरे चरण के बारे में जानकारी देंगी। बुधवार को उसकी पहली किस्त का ब्योरा वित्त मंत्री ने दिया था।आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान किया था। बुधवार को उसकी पहली किस्त का ब्योरा केन्द्रीय वित्त मंत्री ने देते हुए छोटे उद्योगों में काम करने वालों के लिए कई घोषणााएं की थी।पहले चरण में नौकरी पेशा से लेकर छोटे उद्योगों तक राहत देने की कोशिश की गई। आज सबकी नजरें 130 करोड़ भारतीयों के भविष्य को संवारने वाले पैकेज के दूसरे चरण की जानकारी पर टिकी हैं। चर्चा है कि एमएसमई सेक्टर के बाद वित्त मंत्री आज कृषि सेक्टर और उससे जुड़ी गतिविधियों को लेकर बड़ा ऐलान कर सकती हैं।
- नई दिल्ली। मेल, एक्सप्रेस और कुर्सी यान सेवा जल्द फिर से शुरू करने की संभावना का संकेत देते हुए रेलवे बोर्ड ने बुधवार को न केवल अपनी वर्तमान विशेष ट्रेनों, बल्कि आगामी सभी ट्रेनों में यात्रा के लिए 22 मई से प्रतीक्षा सूची का प्रावधान शुरू करने संबंधी आदेश जारी किया।वर्तमान विशेष ट्रेनों में केवल पक्के टिकट बुक किये जा रहे हैं, वहीं 22 मई से शुरू हो रही यात्राओं के वास्ते 15 मई से टिकटों की बुकिंग में प्रतीक्षा सूची में टिकट बुक कराने का प्रावधान होगा। हालांकि रेलवे ने इन ट्रेनों में प्रतीक्षा सूची की सीमा एसी थ्री टायर के लिए 100, एसी टू टायर के लिए 50, स्लीपर क्लास के लिए 200, चेयर कार के लिए 100 और फस्र्ट एसी तथा एग्जीक्यूटिव क्लास के लिए 20-20 तय की है। रेलवे के विभिन्न जोन को भेजे गये बोर्ड के इस आदेश से संकेत मिलता है कि रेलवे वर्तमान वातानुकूलित ट्रेनों की बजाय मिली-जुली सेवाएं शुरू करने की योजना बना रहा है। इसका यह भी मतलब है कि बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों के लिए भी सेवाएं शुरू की जा सकती हैं। इन ट्रेनों में तत्काल या प्रीमियम तत्काल कोटा और वरिष्ठ नागरिक कोटा उपलब्ध नहीं होगा। आरएसी टिकट भी नहीं होंगे। अधिकारियों ने बताया कि प्रतीक्षा सूची वाले टिकट धारक को यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्हें उनके टिकट की पूरी कीमत वापस की जाएगी। अब तक रेलवे की ओर से और सेवाएं शुरू करने का कोई आदेश नहीं है।
- नई दिल्ली। नकदी की भारी तंगी से जूझ रही बिजली वितरण कंपनियों को सहारा देते हुये सरकार ने बुधवार को कहा कि उनके बकाया के भुगतान के लिये 90 हजारहजार करोड़ रुपये तक की नकदी दो किस्तों में उपलब्ध कराई जायेगी।केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अर्थव्यवस्था का चक्र घुमाने के लिये बिजली वितरण कंपनियों का संकट दूर किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बिजली वितरण कंपनियों को उनकी होने वाली लेनदारी के एवज में दो समान किस्तों में नकदी उपलब्ध कराई जायेगी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों पावर फाइनेंस कारपोर्रेशन (पीएफसी) और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी) के जरिये यह राशि उपलब्ध कराई जायेगी। इससे वितरण कंपनियां, बिजली उत्पादन और पारेषण कंपनियों को उनके बकाये का भुगतान कर सकेंगी। विद्युत उत्पादन और पारेषण कंपनियां वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को कुछ छूट भी देंगी जिसका लाभ उन्हें ग्राहकों को भी देना होगा। बिजली वितरण कंपनियों का कई राज्यों पर काफी बकाया है। बिजली आपूर्ति का उन्हें समय पर पूरा भुगतान नहीं मिल पाता है। कोविड- 19 के दौरान लॉकडाउन से स्थिति और बिगड़ी है। ऐसे में उनपर बिजली उत्पादन कंपनियों की ओर से भुगतान का दबाव बढ़ता जा रहा है। इसी समस्या के निदान के लिये आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत जारी पैकेज में उन्हें 90 हजार करोड़ रुपये तक की नकदी उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है। यह नकदी दो किस्तों में दी जायेगी।पैकेज में यह भी कहा गया है कि केन्द्रीय सार्वजनिक उपक्रम और विद्युत उत्पादन कंपनियां बिजली वितरण कंपनियों को कुछ छूट भी देंगी लेकिन यह छूट इस शर्त पर दी जायेगी कि इसका लाभ कंपनियां अपने अंतिम ग्राहकों को उनके फिक्स्ड शुल्क में राहत के तौर पर उपवलब्ध करायेंगी।----
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि सरकार द्वारा कोरोना वायरस से प्रभावित अर्थव्यवस्था को ताकत देने के लिए बुधवार को घोषित आर्थिक पैकेज से नकदी का प्रवाह बढ़ेगा, उद्यमियों को सशक्त किया जा सकेगा और उनकी प्रतिस्पर्धी क्षमता को मजबूत किया जा सकेगा।उन्होंने ट्वीट किया कि इस पैकेज से कारोबार करने वालों विशेषरूप से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को मदद मिलेगी। मोदी ने बुधवार को ट्विटर पर लिखा, सरकार द्वारा घोषित कदमों से नकदी बढ़ेगी, उद्यमियों को सशक्त किया जा सकेगा और उनकी प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाई जा सकेगी। कोविड-19 संकट से प्रभावित अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एमएसएमई सहित कंपनियों को बिना गारंटी के तीन लाख करोड़ रुपये की ऋण सहायता देने की घोषणा की है। 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का ब्योरा देते हुए सीतारमण ने कहा कि इससे 45 लाख छोटी इकाइयों को लाभ होगा। मोदी ने कहा वित्त मंत्री सीतारमण ने बुधवार को जो घोषणा की है उससे कंपनियों विशेषरूप से एमएसएमई क्षेत्र के समक्ष आ रही दिक्कतों को दूर करने में मदद मिलेगी। इससे एक दिन पहले प्रधानमंत्री ने मंगलवार को कहा था कि कोविड-19 से प्रभावित अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए सरकार एक बड़े आर्थिक पैकेज की घोषणा करेगी।
- - लॉकडाउन के दौरान पीएम-किसान के अंतर्गत लगभग 9.25 करोड़ किसान परिवारों को साढ़े 18 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा राशि जारी की गईनई दिल्ली। भारत सरकार का कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में लॉकडाउन अवधि के दौरान क्षेत्र यानी फील्ड स्तर पर किसानों की सहूलियत और कृषि गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के लिए कई उपाय कर रहा है। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर नियमित रूप से स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।1.लॉकडाउन की अवधि के दौरान नेफेड द्वारा फसलों की खरीद की स्थिति-आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे 9 राज्यों से 3.17 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) चने की खरीद की गई है।राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और हरियाणा जैसे 5 राज्यों से 3.67 लाख मीट्रिक टन सरसों की खरीद की गई है।तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, गुजरात और ओडिशा जैसे 8 राज्यों से 1.86 लाख मीट्रिक टन तूर की खरीद की गई है।रबी विपणन सीजन (आरएमएस) 2020-21 में कुल 277.38 लाख मीट्रिक टन गेहूं की एफसीआई में आवक हुई, जिसमें से 268.90 लाख मीट्रिक टन की खरीद की गई है।रबी सीजन 2020-21 में ग्यारह (11) राज्यों में रबी दलहन और तिलहन के लिए कुल 3208 निर्दिष्ट खरीद केंद्र उपलब्ध हैं।पीएम-किसान-लॉकडाउन की अवधि के दौरान 24 मार्च 2020 से आज तक, लगभग 9.25 करोड़ किसान परिवार लाभांवित हुए हैं और 18,517 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है।
- - सीएफसीएल ने उर्वरक की शुद्धता की जांच का बताया आसान तरीकारायपुर। किसान अब सहजता से रसायनिक उर्वरकों की गुणवत्ता का परीक्षण खुद कर सकते हैं। भारत सरकार के सेन्ट्रल फॅर्टिलाईजर क्वालिटी कन्ट्रोल एण्ड टेस्टिंग इंस्टीट्यूट फरीदाबाद द्वारा रसायनिक उर्वरकों में मिलावट की जांच के लिए बहुत ही आसान तरीका बताया गया है। जिसके जरिए कृषक रसायिनक उर्वरकों की गुणवत्ता की जांच त्वरित रूप से कर सकते हैं।रसायनिक उर्वरक यूरिया में साधारण नमक, प्यरेट ऑफ पोटाश, एसएसपी, रॉक फास्फेट, चिकनी मिट्टी आदि की मिलावट का अंदेशा रहता है। इसी तरह डीएपी में क्ले मिट्टी जिप्सम की गोलियां, एसएसपी, एमओपी उर्वरकों में बालू एवं साधारण नमक, उर्वरक एनपीके में एसएसपी, रॉक फॉस्फेट, एनपीके मिश्रण, जिंक सल्फेट में मैगनिश्यिम सल्फेट तथा कॉपर सल्फेट एवं फेरस सल्फेट उर्वरक में बालू व साधारण नमक की मिलावट का अंदेशा रहता है। इसकी जांच किसान सीएफसीएल द्वारा विकसित विधि से स्वयं कर सकते है।उप संचालक कृषि रायपुर ने बताया कि शुद्ध यूरिया चमकदार, लगभग समान आकार के दाने वाला, पानी में पूर्णत: घुलनशील होता है। शुद्ध यूरिया को पानी घोलकर छूने पर ठंडेपन का एहसास होता है। गर्म तवे पर रखने पर शुद्ध यूरिया पूरी तरह पिघल जाता है और ऑच तेज करने पर कोई अवशेष नहीं बचता। इसकी शुद्धता के परीक्षण का सबसे आसान तरीका यह है कि थोड़ा सा पानी हथेली पर ले, दो मिनट बाद जब हथेली और पानी का तापमान एक समान हो जाए तो उसमें 10-15 दाने यूरिया के डाले। शुद्ध यूरिया पानी में पूरी तरह घुलकर हथेली को ठण्डक प्रदान करेगा। यदि ठण्डक महसूस न हो तो यूरिया मिलावटी है। यूरिया के परीक्षण का दूसरा तरीका यह है कि एक चम्मच यूरिया घोल में आधा मिलीलीटर बेरियम क्लोराईड मिलाने पर शुद्ध यूरिया का घोल स्वच्छ होगा। यदि सफेद अवक्षेप मिलता है तो यूरिया मिलावटी है।इसी तरह शुद्ध डी.ए.पी. के दानों का आकार एकदम गोल नहीं होता, डी.ए.पी. के दानों को गर्म करने या जलाने पर दाने खुलकर साबुनदाने की भांति लगभग दोगुने आकार के हो जाए तो वह शुद्ध होगा। डी.ए.पी. के दानों को लेकर फर्श पर रखें फिर जूते से ताकत से रगड़े शुद्ध डी.ए.पी. के दाने आसानी से नहीं फूटेंगे। यदि दाने आसानी से टूट जाए तो डी.ए.पी. में मिलावट है। डी.ए.पी. में नाइट्रोजन की जांच के लिए एक ग्राम पीसे हुए डी.ए.पी. चूर्ण में चूना मिलाकर सूंघने पर अमोनिया की गंध आए तो उसमें नाइट्रोजन विद्यमान है। यदि अमोनिया की गंध महसूस न हो तो डी.ए.पी. मिलावटी है। इसी तरह सिंगल सुपर फास्फेट के शुद्धता की जांच के लिए उसके एक दाने को हथेली पर रगडऩे से टूट जाए तो वह शुद्ध है। शुद्ध जिंक सल्फेट पानी में घुलनशील होता है, लेकिन इसका घोल यूरिया, पोटाश के घोल की तरह ठण्डा नहीं होता तो वह शुद्ध है। डी.ए.पी. के घोल में जिंक सल्फेट के घोल को मिलाने पर थक्केदार घना अवक्षेप बन जाता है।--
- -केरल में एक जून को मानसून के पहुंचने की संभावनानई दिल्ली। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बुधवार को कहा कि मानसून के, बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती परिसंचरण के कारण सामान्य तिथि से करीब छह दिन पहले 16 मई के आस-पास अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह पहुंचने की संभावना है। मानसून आमतौर पर 20 मई के आस-पास अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह पहुंचता है। पिछले महीने इसके वहां पहुंचने की संभावना संबंधी तिथि संशोधित करके 22 मई बताई गई थी। इसके बाद मानसून को केरल पहुंचने में 10 से 11 दिन लगते हैं और फिर भारत में बारिश की शुरुआत होती है।आईएमडी केरल में मानसून के पहुंचने की संभावित तिथि की जानकारी इस सप्ताह के आखिर में जारी कर सकता है। साथ ही आईएमडी ने कहा कि चक्रवात बनने की दिशा में पहले कदम के तहत निम्न दबाव वाला क्षेत्र दक्षिणपूर्वी बंगाल की खाड़ी और निकटवर्ती दक्षिण अंडमान सागर में बुधवार की सुबह बन गया। दक्षिणी बंगाल की खाड़ी के मध्य हिस्सों में 15 मई को दबाव के और गहरा होने की संभावना है और यह बाद में 16 मई को बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान बनकर आएगा। आईएमडी ने कहा, चक्रवात के साथ स्थितियां दक्षिण पश्चिम मानसून को बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के आस-पास 16 मई तक ले जाने के अनुकूल बनेंगी।चक्रवात चेतावनी प्रभाग ने कहा कि वह चक्रवाती प्रणाली पर लगातार नजर रख रहा है और संबंधित राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों को नियमित जानकारी दे रहा है। आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि चक्रवात मानसून को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। मानसून के इस साल सामान्य रहने की संभावना है।केरल में एक जून को मानसून के पहुंचने की संभावना है, जिसके बाद देश में चार महीने चलने वाले बारिश के मौसम की शुरुआत होगी। आईएमडी के 1960 से 2019 के आंकड़ों के आधार पर देश के कई हिस्सों में मानसून आने और वहां से इसके जाने की तारीखों में संशोधन किया गया है। पहले की तारीखें 1901 से 1940 के आंकड़ों पर आधारित थीं। हालांकि पहले पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम राजीवन ने बताया था कि केरल में मानसून के पहुंचने की तारीख में कोई बदलाव नहीं किया गया है। महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में मानसून के आने की तारीख तीन से सात दिन तक आगे खिसक गयी है। दिल्ली में मॉनसून 23 जून के बजाए 27 जून और मुंबई एवं कोलकाता में 10 जून के बजाय 11 जून तक दस्तक देगा। चेन्नई में यह एक जून के बजाए चार जून को पहुंचेगा। हालांकि पश्चिमोत्तर भारत में मानसून 15 जुलाई के बजाए आठ जुलाई को पहुंचेगा। दक्षिण भारत से मानसून की वापसी की नई तारीख 15 अक्टूबर है।
- नई दिल्ली। लॉकडाउन में स्थगित रेलसेवा चरणबद्ध रूप से फिर शुरू करने की घोषणा के बाद आज दूसरे दिन नौ विशेष रेलगाडिय़ां चलाई जा रही हैं। इनमें से 8 रेलगाड़ी नई दिल्ली से विभिन्न स्थानों के लिए और नौवीं भुवनेश्वर से नई दिल्ली के लिए चल रही है।ये रेलगाडियां नई दिल्ली से हावड़ा, पटना, जम्मू तवी, तिरूवनंतपुरम, चैन्नई, रांची, मुंबई और अहमदाबाद तथा भुवनेश्वर से नई दिल्ली के लिए हैं। कल आठ रेलगाडिय़ों का परिचालन किया गया था। इनमें से तीन नई दिल्ली से अन्य स्थानों के लिए और पांच अन्य शहरों से नई दिल्ली के लिए थीं।
- नई दिल्ली। केंद्र ने नौकरशाही में बड़ा फेरबदल करते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनोज आहूजा को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) का नया अध्यक्ष और अनुराग जैन को दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) का उपाध्यक्ष नियुक्त किया।कार्मिक मंत्रालय के आदेश के अनुसार, इसके अलावा गुजरात संवर्ग के आईएएस अधिकारी (1989 बैच) कातिकिथला श्रीनिवास को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग में अवर सचिव एवं अवस्थापना अधिकारी नियुक्त किया गया है। वह फिलहाल उसी विभाग में कार्यरत हैं। तेलंगाना संवर्ग की 1987 बैच की आईएएस अधिकारी वसुधा मिश्रा संघ लोक सेवा आयोग की सचिव होंगी। वह फिलहाल कृषि, सहकारिता एवं कृषि कल्याण विभाग में विशेष सचिव हैं। उन्नीस अधिकारियों को सचिवों, अवर सचिवों और संयुक्त सचिवों के पदों पर नियुक्त पर किया गया है।सीबीएसई के अध्यक्ष बनने जा रहे आहूजा फिलहाल मसूरी में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में विशेष निदेशक हैं। वह 1990 बैच के ओडिशा संवर्ग के आईएएस अधिकारी हैं और सीबीएसई में अनीता करवाल की जगह लेंगे। करवाल को पहले स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग में सचिव नियुक्त किया गया था। डीडीए के नये उपाध्यक्ष बनने जा रहे जैन फिलहाल अपने संवर्ग मध्यप्रदेश में कार्यरत हैं। आवास एवं शहरी मामले मंत्रालय में अवर सचिव शिवदास मीणा को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है। वरिष्ठ नौकरशाहों-- वी विद्यार्थी और राजेंद्र कुमार को क्रमश: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्थान का महानिदेशक और कर्मचारी राज्य बीमा निगम का महानिदेशक नियुक्त किया गया है। विद्यार्थी फिलहाल अपने संवर्ग कर्नाटक में कार्यरत हैं और कुमार तमिलनाडु में तैनात हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में विशेष सचिव संजीव कुमार को गृह मंत्रालय में सीमा प्रबंधन विभाग का सचिव बनाया गया है।---
- नई दिल्ली। भारत में 2000 से 2017 के बीच शिशु मृत्युदर और बच्चों के विकास अवरुद्ध होने के संकेतकों में महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिला है लेकिन कई राज्यों में जिलों के बीच असमानता बढ़ गयी है। इंडिया स्टेट-लेवल डिसीज बर्डन इनीशियेटिव की मंगलवार को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।द लांसेट एंड एक्लीनिकल मेडिसिन में प्रकाशित यह रिपोर्ट भारत में शिशुओं की मृत्युदर और उनके विकास अवरोध की जिला स्तरीय प्रवृत्तियों का पहला समग्र आकलन है। इसमें कहा गया है कि अगर 2017 तक के आंकड़ों की प्रवृत्ति ऐसी ही रही तो भारत पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्युदर (यू5एमआर) के 2030 के टिकाऊ विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त कर लेगा लेकिन नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) के लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकेगा। इसमें कहा गया है, भारत में 34 प्रतिशत जिलों में यू5एमआर में अधिक कमी लाने की जरूरत है वहीं 60 प्रतिशत जिलों में एनएमआर में अधिक कमी लाना जरूरी है ताकि एसडीजी के अलग-अलग दोनों लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके। भारत में पांच साल से कम आयु के बच्चों की मौत के 68 प्रतिशत कारणों में जच्चा-बच्चा का कुपोषित होना प्रमुख वजह है, वहीं नवजात बच्चों की मृत्यु के 83 प्रतिशत मामलों में शिशुओं का जन्म के समय कम वजन होना और समय पूर्व जन्म होना मुख्य कारण हैं। अध्ययन के अनुसार उत्तर प्रदेश में 2017 में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत के सर्वाधिक मामले आए और इनकी संख्या 3 लाख 12 हजार 800 थी जिनमें 1 लाख 65 हजार 800 नवजात शामिल थे। इसके बाद दूसरे सर्वाधिक मामले बिहार में आए जहां उस साल पांच साल से कम उम्र के 1 लाख 41 हजार 500 बच्चों की मौत हो गयी जिनमें 75 हजार 300 नवजात शामिल थे।
- नई दिल्ली। केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इंटरपोल की सूचना के बाद कोविड-19 के व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) में छिपाकर मादक पदार्थों की तस्करी के बारे में राज्य पुलिस और केन्द्रीय एजेंसियों को सतर्क किया।अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि इस संबंध में इंटरपोल से सूचना मिली है। उन्होंने बताया कि केन्द्रीय एजेंसी को इंटरपोल से सूचना मिली है कि अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्कर अपने मादक पदार्थों को सुरक्षा उपकरण में छिपाकर महामारी की स्थिति का फायदा उठा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि इंटरपोल ने मादक पदार्थ तस्करों की संभावित गतिविधियों के बारे में विशेष नोटिस के जरिये 194 सदस्य देशों को सतर्क किया है।---
- नई दिल्ली। कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में मंगलवार को दिल्ली में 47 मामले दर्ज किए गए और 2,300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया।पुलिस द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार शाम तक भारतीय दंड संहिता की धारा-188 (सरकारी अधिकारी के आदेश की अवहेलना) के तहत 47 मामले दर्ज किए गए। पुलिस ने बताया कि दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा-65 (पुलिस अधिकारी के आदेश का उल्लंघन) के तहत 2,307 लोगों को हिरासत में लिया गया जबकि इसी अधिनियम की धारा-66 के तहत 114 वाहनों को जब्त किया गया। इस अवधि में पुलिस ने कुल 502 आवाजाही पास जारी किए।आंकड़ों के मुताबिक, घर से बिना मास्क पहने, निकलने के कारण 23 मामले दर्ज किए गए हैं। दिल्ली पुलिस ने 24 मार्च से लागू लॉकडाउन का उल्लंघन करने के आरोप में दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा-65 के तहत अब तक कुल 1 लाख 59 हजार 625 लोगों को हिरासत में लिया है।---
- नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को डॉक्टरी सलाह पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से डिस्चार्ज कर दिया गया है। वे तीन दिन से एम्स में भर्ती थे।रविवार की शाम सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें दिल्ली एम्स में दाखिल कराया गया था। यहां उन्हें कार्डियक इन्टेसिव केयर यूनिट में रखा गया था। हालत सुधरने के बाद, उन्हें प्राइवेट रूम में शिफ्ट किया गया। डॉक्टर नितिश नायक की देखरेख में तबीयत सुधरने के बाद उन्हें डिस्चार्ज करने का फैसला लिया गया।----
- मुम्बईं। कोरोना वायरस से संक्रमित पाये गये एअर इंडिया के पांच पायलटों की दूसरी जांच में संक्रमण सामने नहीं आया है। एअर इंडिया के सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी।दूसरे परीक्षण की रिपोर्ट सोमवार शाम को आई। हमारे सभी पायलटों का रविवार को दूसरा परीक्षण किया गया जिसमें उनमें कोरोना वायरस संक्रमण नजर नहीं आया। ये पांचों पायलट बोइंग 787 विमान उड़ाते हैं। एअर इंडिया की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आयी है। सूत्र ने कहा, (रविवार को) एअर इंडिया के इन पांचों पायलटों में जांच में कोरोना वायरस संक्रमण पाया गया था। एक के बाद एक कर उनका परीक्षण किया गया था। हमें संदेह है कि यह परीक्षण किट के त्रुटिपूर्ण होने का मामला हो सकता है।---
- नई दिल्ली। केन्द्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने आज अखबारों में आई उस खबर को लेकर स्पष्टीकरण दिया है, जिसमें कहा गया है कि जिन लोगों ने आधार नंबर उपलब्ध नहीं करवाया है, उन लोगों के राशन कार्ड रद्द कर दिए जाएंगे।खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने स्पष्ट किया है कि दिनांक 7 फरवरी 2017 को जारी आधार अधिसूचना के अंतर्गत सभी राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को दी गई समय-सीमा (समय-समय पर संशोधित), जिसके अंतर्गत सभी राशन कार्डों/ लाभार्थियों को आधार नंबर के साथ लिंक करना है, को विभाग द्वारा 30 सितंबर 2020 तक बढ़ा दिया गया है।तब तक, विभाग ने सभी राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को 24 अक्टूबर 2017 और 8 नवंबर 2018 को जारी किए गए पत्रों के माध्यम से स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी वास्तविक लाभार्थी/ परिवार को खाद्यान्न के कोटे की प्राप्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। आधार नंबर नहीं रखने की स्थिति में उनके नाम/ राशन कार्ड नष्ट/ रद्द नहीं किए जाएंगे।इसके अलावा, यह भी निर्देश जारी किया गया है कि एनएफएसए के अंतर्गत लाभार्थियों की बायोमेट्रिक/ आधार प्रमाणीकरण की विफलता के कारण उन्हें खाद्यान्न देने से इनकार नहीं किया जाएगा, क्योंकि लाभार्थियों की खराब बायोमेट्रिक्स, नेटवर्क/ कनेक्टिविटी/ लिंकिंग या किसी अन्य तकनीकी कारणों से समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने कहा कि वर्तमान संकट की घड़ी में, एक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है जिससे किसी गरीब या पात्र व्यक्ति या परिवार को खाद्यान्न की प्राप्ति से वंचित न किया जा सके। आधार को राशन कार्ड और लाभार्थियों के साथ जोडऩे से यह सुनिश्चित हो सकेगा कि इस प्रकार के राशन की प्राप्ति के कोई भी पात्र व्यक्ति ऐसा लाभ उठाने से वंचित नहीं हो सकें।केंद्र और राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों के अथक प्रयासों के द्वारा, वर्तमान समय में सभी 23.5 करोड़ राशन कार्डों का लगभग 90 प्रतिशत पहले से ही राशन कार्ड धारकों के आधार नंबर (यानी परिवार के कम से कम एक सदस्य) से जुड़े हुए हैं; जबकि, सभी 80 करोड़ लाभार्थियों में से लगभग 85 प्रतिशत ने अपने संबंधित राशन कार्ड के साथ अपना आधार नंबर भी दर्ज करवाया हुआ है। इसके अलावा, सभी संबंधित राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश एनएफएसए के अंतर्गत शेष राशन कार्डों/ लाभार्थियों के आधार लिंक का काम पूरा करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं।
- नई दिल्ली। संस्कृति मंत्रालय ने गांधी शांति पुरस्कार 2020 के लिए नामांकन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 15 जून तक बढ़ा दी है।वर्ष 2020 के लिए नामांकन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल, 2020 थी। देश भर में लॉकडाउन के कारण गांधी शांति पुरस्कार 2020 के लिए नामांकन प्राप्त करने की अंतिम तिथि अब 15 जून तक बढ़ा दी गई है।गांधी शांति पुरस्कार के लिए नामांकन संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की वेबसाइट: www.indiaculture.nic.in पर उपलब्ध प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अनुरूप होने चाहिए। निर्धारित प्रपत्र में नामांकन/ अनुशंसाएं मेल/ई-मेल के माध्यम से निम्नलिखित को भेजी जानी चाहिए-सुश्री निरुपमा कोटरू, संयुक्त सचिव,संस्कृति मंत्रालय,कमरा संख्या 334-सी, शास्त्री भवन, नई दिल्लीटेलीफैक्स नम्बर- 011-23381198ई-मेल- [email protected]
- नई दिल्ली। मंत्रिमंडल सचिव ने बसों और श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से जाने वाले श्रमिकों को सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों द्वारा प्रदान की गई सहायता की समीक्षा करने के लिए 10 मई को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये एक बैठक की अध्यक्षता की।इस बैठक के परिणामस्वरूप, गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों /संघ शासित प्रदेशों को पत्र लिखकर कहा कि वे पलायन करके आए श्रमिकों को उनके मूल स्थानों तक पहुंचने के लिए सड़क और रेलवे पटरियों पर चलने से रोकें। इस बात पर जोर दिया गया कि श्रमिक स्पेशल ट्रेनों और बसों को चलने की अनुमति दी जा चुकी है। इसलिए, उन्हें अपने घर जाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनों या बसों की सुविधा दी जा सकती है और तब तक पलायन करके आए श्रमिकों को परामर्श दिया जा सकता है और उन्हें पास के आश्रयों में ले जाया जा सकता है।इस बात पर भी जोर दिया गया कि सभी राज्य / संघ शासित प्रदेशों की सरकारों को बिना किसी बाधा के और श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाने में रेलवे के साथ सहयोग करना चाहिए ताकि फंसे हुए श्रमिक तेजी से अपने घर तक पहुंच सकें।
- नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने आपदा प्रबंधन कानून, 2005 के अंतर्गत लॉकडाउन अवधि के बाद विनिर्माण उद्योगों को दोबारा शुरू करने के बारे में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।कोविड-19 की शुरूआत में 25 मार्च से देश भर में लॉकडाउन का आदेश जारी कर दिया गया था। चूंकि लॉकडाउन में धीरे-धीरे कुछ क्षेत्रों में ढील दी जा रही है, इसलिए एनडीएमए की आदेश संख्या 1-29/2020-पीपी दिनांक 1 मई 2020 और एमएचए क्रम संख्या 40-3/2020-डीएम-आई(ए) दिनांक 1 मई 2020 के अनुसार कुछ आर्थिक गतिविधियों की अनुमति दी जा रही है।कई हफ्तों के लॉकडाउन और लॉकडाउन के दौरान औद्योगिक इकाइयों को बंद करने के कारण, संभव है कि कुछ संचालकों ने स्थापित एसओपी का पालन न किया हो। इसके परिणामस्वरूप, कुछ विनिर्माण सुविधाओं, पाइपलाइनों, वाल्वों आदि में बचे हुए रसायन हो सकते हैं, जो जोखिम पैदा कर सकते हैं। खतरनाक रसायनों और ज्वलनशील पदार्थों के साथ भंडारण सुविधाओं की भी यही सच्चाई है।राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने जारी किया है -1. रासायनिक आपदाओं पर दिशानिर्देश, 20072. रासायनिक (आतंकवाद) आपदाओं के प्रबंधन पर दिशा-निर्देश, 2009 और3. पीओएल टैंकरों, 2010 को ले जाने के लिए रक्षा और सुरक्षा को मजबूत करना, जो रासायनिक उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण है। पर्यावरण संरक्षण कानून,1086के अंतर्गत खतरनाक रासायनों के निर्माण, भंडारण और आयात संबंधी नियम,1989 इन उद्योगों के लिए वैधानिक आवश्यकताएं प्रदान करते हैं।जब लॉकआउट / टैगआउट प्रक्रियाएं नहीं होती हैं, तो अनेक ऊर्जा स्रोत उन संचालकों / पर्यवेक्षकों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं जो विद्युत, यांत्रिक या रासायनिक उपकरणों की सेवा या रखरखाव कर रहे हैं। जब समय-समय पर भारी मशीनरी और उपकरणों का रख-रखाव नहीं किया जाता है, तो वे संचालकों/ इंजीनियरों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।ज्वलनशील तरल पदार्थ, निहित गैसीय पदार्थ, खुले तार, कन्वेयर बेल्ट और स्वचालित वाहन विनिर्माण सुविधाओं में उच्च जोखिम वाला माहौल बनाते हैं। सुरक्षा कोडों को अनुचित तरीके से लागू करने और अनुचित रूप से लेबल किए गए रसायन स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरों को और बढ़ा सकते हैं। जब कोई अप्रत्याशित घटना होती है, तो प्रतिक्रिया को तेजी सेसंभालना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। जोखिम को कम करने और औद्योगिक इकाइयों को सफलतापूर्वक दोबारा शुरू करने को प्रोत्साहित करने के लिए, निम्नलिखित दिशानिर्देश जारी किए जा रहे हैं।राज्य सरकारें यह भी सुनिश्चित करेंगी कि संबंधित बड़ी दुर्घटनाओं की जोखिम (एमएएच) वाली इकाइयों की घटनास्थल से दूर आपदा प्रबंधन योजना आधुनिक है और उनके कार्यान्वयन की तैयारी अधिक है। यह भी सलाह दी गई है कि जिले के सभी जिम्मेदार अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि औद्योगिक घटना-स्थल परआपदा प्रबंधन योजनाएं अपने मूल स्थान पर होंऔर कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान और उसके बाद उद्योगों को दोबारा सुरक्षित शुरु करने के लिए मानक परिचालन प्रक्रियाओं को सम्मिलित किया गया हो।
- नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) और रेल मंत्रालय ने श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के जरिए प्रवासी श्रमिकों की आवाजाही पर आज सुबह एक वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की। राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के प्रमुख (नोडल) अधिकारियों ने इसमें भाग लिया।इसकी सराहना की गई कि कल की 101 ट्रेनों सहित 450 से भी अधिक ट्रेनें कई लाख प्रवासी श्रमिकों को लेकर बाकायदा प्रस्थान कर चुकी हैं।वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान कई मुद्दों पर चर्चा की गई एवं उनका निवारण किया गया और इसके साथ ही इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि प्रवासी श्रमिकों को यह आश्वासन दिया जाए कि घर जाने के इच्छुक सभी लोगों की यात्रा के लिए पर्याप्त संख्या में ट्रेनें चलाई जाएंगी। अगले कुछ हफ्तों तक प्रति दिन सौ से भी अधिक ट्रेनों के चलने की उम्मीद है, ताकि फंसे हुए श्रमिकों को उनके मूल निवास स्थानों तक जल्द-से-जल्द पहुंचाया जा सके।----
- - केवल कन्फर्म ई-टिकट पर ही यात्रियों की आवाजाही और रेलवे स्टेशन में उनके प्रवेश की अनुमति होगी- केवल ऐसे व्यक्तियों को ही ट्रेन में चढऩे की अनुमति होगी जिनमें कोरोना बीमारी का कोई भी लक्षण नहीं होगा- यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी यात्री प्रवेश करने और सफर के दौरान फेस कवर/मास्क अवश्य ही पहनेंनई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने ट्रेन से लोगों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए मानक परिचालन प्रोटोकॉल (एसओपी) जारी किया है।केवल कन्फर्म ई-टिकट पर ही यात्रियों की आवाजाही और रेलवे स्टेशन में उनके प्रवेश की अनुमति होगी। सभी यात्रियों की अनिवार्य चिकित्सा जांच (स्क्रीनिंग) होगी। केवल ऐसे व्यक्तियों को ही ट्रेन में चढऩे की अनुमति होगी जिनमें इस रोग का कोई भी लक्षण नहीं होगा। यात्रा के दौरान और रेलवे स्टेशनों पर स्वास्थ्य/स्वच्छता संबंधी प्रोटोकॉल एवं सामाजिक दूरी बनाए रखने के दिशा-निर्देश का सख्ती से पालन करना होगा।सभी यात्रियों को स्टेशन पर एवं कोचों में प्रवेश और निकासी के स्थानों पर हैंड सैनिटाइजर दिया जाएगा। इसके अलावा, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी यात्री प्रवेश करने और यात्रा के दौरान फेस कवर/मास्क अवश्य ही पहनें। अपने गंतव्य पर पहुंचने पर संबंधित यात्रियों को उन स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पालन करना होगा जो गंतव्य स्थान वाले राज्य/केंद्र शासित प्रदेश द्वारा निर्दिष्ट किए गए हैं।स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और गृह मंत्रालय के परामर्श से रेल मंत्रालय द्वारा ट्रेनों के आवागमन की अनुमति एक क्रमबद्ध तरीके से दी जाएगी।गौरतलब है कि लंबे समय के बाद भारतीय रेलवे मंगलवार से यानी 12 मई से राजधानी दिल्ली से 15 स्पेशल ट्रेन चलेंगी। हालांकि श्रम दिवस से शुरू की गईं श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन जारी रहेगा। 15 शहरों के लिए कल से शुरू होने वाली स्पेशल ट्रेनों के लिए आज शाम से बुकिंग चालू हो गई है।----




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